Showing posts with label islamic terrorists. Show all posts
Showing posts with label islamic terrorists. Show all posts

26 जनवरी को मोदी और तिरंगा को ब्लॉक करें; ‘कश्मीर छोड़ो-दिल्ली पहुँचो’: आतंकियों से गुरुपतवंत सिंह पन्नू, सिख फॉर जस्टिस

खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ के प्रमुख गुरुपतवंत सिंह पन्नू (Gurupwant Singh Pannu) ने 20 जनवरी 2022 को एक वीडियो जारी किया। इसमें उसने कथित ‘कश्मीरी स्वतंत्रता सेनानियों’ से गणतंत्र दिवस के मौके पर घाटी छोड़कर दिल्ली पहुँचने की अपील की। वीडियो में पन्नू ने देश को तोड़ने की कोशिश करने वाले अलगाववादियों और आतंकियों को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ करार दिया है। उसका यह बयान खालिस्तान के लिए ‘अभी या कभी नहीं’ की तर्ज पर था।

यदि इस वर्ष भी पिछली 26 जनवरी 2021 की तरह की हरकत को अंजाम दिया जाए, उससे पूर्व ही सिख समुदाय और समस्त किसान संगठनों को राकेश टिकैत और आन्दोलनजीवियों और खालिस्तानियों के विरुद्ध खड़े होकर विरोध करना चाहिए। क्योकि इन्हीं लोगों के संरक्षण में खालिस्तानी अपना जाल बिछाने में सफल हुए थे। दोबारा गणतंत्र दिवस को कलंकित करने वालों के विरुद्ध अभी से संघर्ष का बिगुल बजाने के साथ-साथ कठोरतम कार्यवाही की मांग करनी चाहिए। क्या देश अपना तीसरा प्रधानमंत्री आतंकवाद की भेंट चढ़ाना चाहेगा?

जब प्रदर्शन में खालिस्तान के शामिल होने पर राकेश टिकैत ही बड़े-बड़े शब्दों में बोलता था कि आंदोलन करते किसानों को खालिस्तानी बताकर कर आंदोलन को बदनाम करने की सरकार द्वारा कोशिश हो रही है। अब धमकियाँ मिलने पर राकेश को खुलकर सामने आकर उनके नाम और ठिकानों का पर्दाफाश करना चाहिए। शायद यही कारण था कि मोदी सरकार ने किसान हितों में बने कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया था। 

प्रोपेगैंडा वीडियो की शुरुआत में बुर्का पहने हुए एक महिला दिखती है। इसमें वो कहती है, “26 जनवरी को हम कश्मीर और खालिस्तान का झंडा उठाकर मोदी और तिरंगे का रास्ता रोक देंगे। 26 जनवरी को दिल्ली पहुँचें। कश्मीर और खालिस्तान को आजाद करें।”

                                                            SFJ के वीडियो का स्क्रीनशॉट

महिला के इस स्पीच के बाद पन्नू नजर आता है। वो कहता है, “यह संदेश इंडियन आर्मी का सामना कर रहे कश्मीरी लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों (इस्लामी आतंकियों) के लिए है। ये संदेश कश्मीर के उन लोगों के लिए है, जिन्हें भारतीय संविधान और इंडियन आर्मी फेक एनकाउंटर के जरिए मार रही है। ये फ्रीडम फाइटर्स का वक्त है। ये वक्त है कश्मीर के लोगों का। आप सब 26 जनवरी को दिल्ली पहुँचकर मोदी और तिरंगा को ब्लॉक करें। जहाँ सिख समुदाय खालिस्तान के झंडे लहरा रहा है, वहाँ आपको कश्मीर का झंडा उठाना चाहिए।”

अपने प्रोपेगैंडा वीडियो में पन्नू कहता है, “दुनिया में किसी को कोई खबर नहीं है कि आप हर दिन बारामुला, अनंतनाग और शोपियाँ में फर्जी मुठभेड़ों में मारे जा रहे हैं। लेकिन 26 जनवरी को जब आप दिल्ली पहुँचोगे तो दुनिया ये देखेगी कि कश्मीर को आजादी चाहिए। 26 जनवरी को दिल्ली पहुँचना है। सिख आजादी चाहते हैं। अभी नहीं तो कभी नहीं।” उसकी स्पीच के दौरान वीडियो में इस्लामी आतंकियों को भी दिखाया गया है।

SFJ के पन्नू के बयान के बाद बुर्के वाली महिला एक बार फिर से वीडियो में दिखती है। वो कहती है, “मेरे कश्मीरी भाइयों और बहनों। सिख फॉर जस्टिस ने सही कहा है कि 26 जनवरी को कश्मीर और खालिस्तान का झंडा फहराकर हमें मोदी और तिरंगे को रोकना चाहिए। कश्मीर को आजाद कराने के लिए हमने अपना खून दिया है। अब समय आ गया है कि जब हम सिख भाई-बहनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पंजाब और कश्मीर को आजाद कराने के लिए कश्मीर और खालिस्तान का झंडा उठा लें और तिरंगे को उखाड़ फेंकें। ये संदेश कश्मीर के मेरे भाइयों और बहनों के लिए है। 26 जनवरी को दिल्ली पहुँचें। मुक्त कश्मीर और खालिस्तान। मोदी और तिरंगा को रोको।”

पन्नू ने ये भी कहा कि पहले भारत के संविधान के तहत सिखों की हत्याएँ की जाती थीं, लेकिन उसी संविधान की आड़ लेकर अब कश्मीर के लोगों की हत्या की जा रही है। खास बात ये कि वीडियो में पन्नू के बाईं ओर के फ्रेम में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का पूर्व कमांडर आतंकी बुरहान वानी भी दिखाई देता है। बता दें कि हिजबुल के पोस्टरब्वॉय को 8 जुलाई 2016 को इंडियन आर्मी ने ढेर कर दिया था।

पीएम मोदी और सेना को कोसा

खालिस्तानी आतंकी ने देश में अपराधों के लिए भारतीय सेना, संविधान और पीएम मोदी को कोसा। उसने कहा, “दिन-रात छोटे बच्चों और लड़कियों के साथ रेप किया जा रहा है। इसके लिए इंडियन आर्मी, भारतीय संविधान और मोदी जिम्मेदार हैं। अनुच्छेद 370 हटाकर आपको भारत का हिस्सा बना दिया गया। अभी आपके पास वक्त है, विश्व को संदेश देना चाहते हैं तो बारामूला, अनंतनाग और शोपियाँ में मुठभेड़ों में मत मरो। हथियार उठाकर अपनी जान मत दो। दिल्ली पहुँचो, ताकि दुनिया की हर ताकत, वर्ल्ड मीडिया और वर्ल्ड लीडर ये देखे कि कश्मीर आजादी चाहता है। अभी नहीं तो कभी नहीं। खालिस्तान के झंडे के साथ कश्मीर का झंडा उठाएँ।”

इसके साथ ही एसएफजे ने एक पत्र भी रिलीज किया है, जिसमें उसने आतंकियों और अलगाववादियों से दिल्ली पहुँचने की अपील की है। इसमें बुर्के में नजर आने वाली महिला को पीओके के मुजफ्फराबाद की एक महिला कार्यकर्ता बताया गया है। लेटर में लिखा गया है, “मुजफ्फराबाद स्थित एक महिला कार्यकर्ता के साथ अलगाववादी समूह सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने #खालिस्तान2कश्मीर स्वतंत्रता आंदोलन का अंतरराष्ट्रीयकरण करने के लिए कश्मीर के स्वतंत्रता सेनानियों को भारत के गणतंत्र दिवस पर 26 जनवरी को ‘घाटी छोड़ो, दिल्ली पहुँचो’ अभियान के तहत ‘मोदी-तिरंगा को ब्लॉक’ करने का आह्वान किया।”

                                                                      SFJ के द्वारा जारी पत्र

पत्र में एसएफजे के काउंसल जनरल पन्नू ने बुर्के वाली महिला के साथ मिलकर कश्मीर में स्वतंत्रता संग्राम छेड़ने का आह्वान किया और कहा कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और खालिस्तान जनमत संग्रह में मतदान के साथ #खालिस्तान2कश्मीर आंदोलन ‘अभी या कभी नहीं’ के चरण में प्रवेश कर गया है। इसके लिए उसने 26 जनवरी को इंडिया गेट और लाल किले पर कश्मीर-खालिस्तान के झंडे लगाने का आह्वान किया है।

‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ पाकिस्तान की ISI का खालिस्तान के लिए प्रोपेगैंडा

गौरतलब है कि पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हाल ही में खुफिया विभाग ने चौकन्ना किया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) पंजाब में अशांति फैलाकर चुनाव प्रक्रिया को बाधित करना चाहती है। इसके लिए उसने अपने आतंकी संगठनों को सक्रिय कर दिया है। दरअसल, आईएसआई सोचती है कि मौजूदा पंजाब का विधानसभा चुनाव खालिस्तान चरमपंथ के उभार के लिए ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ के जैसा है। ISI ने न केवल पंजाब, बल्कि उत्तर प्रदेश में भी अपने आतंकी मॉड्यूल के जरिए पंजाब में खालिस्तानी फुटप्रिंट्स को आगे बढ़ा रहा है।

अवलोकन करें:-

‘नहीं करने देंगे PM मोदी सुरक्षा चूक की जाँच’: जस्टिस इंदु मल्होत्रा को SFJ की धमकी, वकीलों से कहा –
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
‘नहीं करने देंगे PM मोदी सुरक्षा चूक की जाँच’: जस्टिस इंदु मल्होत्रा को SFJ की धमकी, वकीलों से कहा –

यहीं नहीं, 17 जनवरी 2022 को तो खालिस्तानी आतंकी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में उसके खिलाफ मामला दर्ज कराने की कोशिश करने वाले वकीलों को भी परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। टेरर ऑर्गनाइजेशन के धमकी दी थी कि वो गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तिरंगा नहीं फहराने देगा। इससे पहले पंजाब में पीएम मोदी के काफिले को रोकने की जिम्मेदारी भी एसएफजे ने ही ली थी। इसी तरह से पिछले साल 13 जनवरी 2021 को एसएफजे ने लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को 1.8 करोड़ रुपए का ईनाम देने का ऐलान किया था। इसके बाद 26 जनवरी 2021 को कथित किसान प्रदर्शनकारियों ने सिखों के पवित्र चिन्ह के साथ दो झंडे फहराए।

गुपकार गैंग ने मांगी चीन से मदद ; नगरौटा में मारे गए आतंकियों से मिले हथियारों पर लिखा है मेड इन चाइना

मारे गए आतंकवादियों से बरामद चाइना निर्मित हथियारों का जखीरा 
जम्मू-कश्मीर में हाल ही में एक नया गठबंधन बना है- गुपकार गठबंधन। इस गठबंधन में फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती की पार्टी समेत कश्मीर के कई दल शामिल हैं। गुपकार का मुख्य एजेंडा जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 और 35-A बहाली है। गठबंधन के नेताओं का कहना है कि वो इस बहाली के लिए चीन से भी मदद लेने को तैयार हैं। हैरानी की बात यह है कि गुपकार गैंग ने पिछले हफ्ते ही चीन से मदद मांगी और आज, 19 नवंबर को नगरौटा में मारे गए आतंकियों के पास से जो हथियार मिले हैं उन पर ‘मेड इन चाइना’ लिखा है।
जब से गुपकार गैंग नज़रबंदी से मुक्त हुआ है, जम्मू-कश्मीर में अराजकता का माहौल बनाने का पुनः प्रयास किया जा रहा है। केंद्र सरकार को इनकी और इनके समर्थकों की भी हर गतिविधि पर गिद्द की नज़र रखनी होगी। ये लोग अपनी तिजोरी की खातिर कुछ भी कर सकते हैं। इन्हें देश से अधिक अपनी तिजोरी और रोटी की चिंता है। ये लोग अनुच्छेद 370 की आड़ में अपनी तिजोरियां भर रहे थे। 

चीन में बने हथियारों से भारत में तबाही की थी साजिश

जम्मू कश्मीर के नगरौटा में गुरुवार सुबह सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में चार आतंकवादी मारे गए। मारे गए चारों आतंकी पाकिस्तानी थे। चारों आतंकी जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक ट्रक में जा रहे थे। नगरोटा के पास एक टोल प्लाजा पर रोकने पर आतंकवादियों ने पुलिस पार्टी पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। जिसके बाद मुठभेड़ में चारों आतंकी मारे गए। मारे गए आतंकवादियों के पास से आरडीएक्स, एके-56 राइफल, पिस्टल, ग्रेनेड, मोबाइल सेल, मैगजीन और अन्य हथियार भी बरामद हुए हैं। इन हथियारों पर ‘मेड इन चाइना’ लिखा हुआ है। चीन के इतने हथियार मिलने पर संविधान की दुहाई देने वाले समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष क्यों चुप्पी साधे हुए हैं, इसी से सम्बंधित लोग ट्विटर पर प्रश्न भी कर रहे हैं। ये देश भक्ति का चोला ओढ़े बहुरूपियों पर सख्ती से निपटने की मांग भी हो रही है :-

मुठभेड़ के बाद एक पुलिस अधिकारी का कहना था कि ऐसा पहली बार सामने आया है कि एक-एक आतंकवादी के पास चार-चार एके-47 हथियार थे। इसके अलावा उनके पास से तीन पिस्टल, सैटेलाइट फोन, कम्पास और अन्य उपकरण बरामद हुए हैं। अधिकारी ने आशंका जताई कि राज्य में डीडीसी के चुनाव होने हैं, ऐसे में आतंकवादी चुनाव में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन आतंकवादियों के मंसूबों को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षाबल पूरी तरह से मुस्तैद हैं।

जम्मू जोन के आईजी मुकेश सिंह ने कहा है कि ट्रक चालक फरार है, हम उसकी तलाश कर रहे हैं। यह संभव है कि वे एक बड़े हमले की योजना बना रहे थे। इस तरह की जब्ती अभूतपूर्व है। यह संभव है कि वे डीडीसी चुनाव को निशाना बना रहे थे। हालांकि, हम जांच कर रहे हैं।


केरल और कर्नाटक में सक्रिय हैं ISIS के 200 आतंकी, भारत में हमले की साजिश रच रहा अलकायदा: UN की रिपोर्ट में खुलासा

केरल, कर्नाटक, ISIS, आतंकीआतंकवाद पर आई संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में चेताया गया है कि भारतीय राज्य केरल और कर्नाटक में अच्छी-खासी संख्या में खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन ISIS के आतंकवादी मौजूद हैं। साथ ही खुलासा किया गया है कि ISIL की भारतीय यूनिट ‘हिन्दू विलायाह’ के भी कम से कम 180 से लेकर 200 तक आतंकी सक्रिय हैं। बता दें कि इस आतंकी संगठन के गठन की घोषणा मई 2019 में हुई थी।
ISIS सहित अन्य आतंकी संगठनों पर नजर रखने के लिए गठित की गई यूएन की ‘Analytical Support and Sanctions Monitoring Team’ की 26वीं रिपोर्ट के अनुसार केरल और कर्नाटक में ISIS के कई आतंकी सक्रिय हैं। साथ ही इस रिपोर्ट में चेताया गया है कि अलकायदा की भारतीय उपमहाद्वीपीय यूनिट AQIS भी इस क्षेत्र में हमले की साजिश रच रहा है। ये संगठन तालिबान के बैनर तले सक्रिय है।
इसके सरगना निमरूज़, हेलमंद और कंधार प्रांतों से अपनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार में इस आतंकी संगठन के 150-200 आतंकी सक्रिय हैं। ये संगठन अपने पूर्व-सरगना की मौत का बदला लेना चाहता है। फिलहाल ओसामा महमूद AQIS का सबसे बड़ा सरगना है। इससे पहले असीम उमर था, जिसे मार गिराया गया था। उसकी ही मौत का बदला लेने को ये आतंकी संगठन बेचैन है।

पिछले साल 2019 में ISIS ने अपने ‘अमाक न्यूज एजेंसी’ के माध्यम से दावा किया था कि उसने भारत में एक नया प्रांत बनाया है, जिस पर उसका कब्जा है। उसने जम्मू-कश्मीर के भीतर के ही एक क्षेत्र को ‘वालियाह-ए-हिन्द’ या ‘हिन्द प्रांत’ नाम दिया था। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के बाद ये दावा किया गया था। हालाँकि, ये अपने-आप में इस किस्म का पहला दावा था। सुरक्षा बलों ने इसे नकार दिया था।
इससे पहले जम्मू-कश्मीर में सक्रिय ISIS आतंकियों में से कइयों के नाम खोरासन प्रांत में सक्रिय आतंकी संगठन के ब्रांच से जुड़ा था। इसकी स्थापना 2015 में की गई थी, ताकि ‘अफगानिस्तान और पाकिस्तान के इलाकों को कवर किया जा सके।’ हालाँकि, भारत में भी केरल व कर्नाटक में सक्रिय ISIS आतंकियों के बारे में तब पता चला था, जब NIA ने स्पेशल सब-इन्स्पेक्टर विल्सन की हत्या मामले में फाइल की गई चार्जशीट में इसका खुलासा किया था।
इसमें बताया गया था कि केरल और कर्नाटक में न सिर्फ़ ISIS के आतंकी सक्रिय हैं, बल्कि उनकी संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। तमिलनाडु पुलिस ने ISIS के आतंकियों मोहम्मद हनीफ़ खान, इमरान खान और मोहम्मद जैद को जनवरी 2020 में मार गिराया था। इसके जवाब में खुद को जिहादी कहने वाले आतंकियों ने विल्सन की हत्या कर दी थी। इस मामले में ISIS (इराक व सीरिया) के आतंकी खाजा मोहिदीन का नाम सामने आया था।
जाँच में पता चला था कि उसने ही मई 2019 में अब्दुल शमीम और मोहम्मद तौफीक को आतंक की ‘तालीम’ दी थी। उसने इन दोनों को हथियार मुहैया कराया था। साथ ही हमला करने के लिए प्रशिक्षित किया था।
अफगानिस्तान और इराक सहित अन्य देशों में ISIS ने केरल के आतंकियों को लगाया हुआ है। सबसे ज्यादा कन्नूर के युवक इस आतंकी संगठन में शामिल हुए हैं। पिछले सप्ताह के आँकड़ों के अनुसार, केरल के कुल 98 लोगों ने ISIS की सदस्यता ली थी। इनमें से 38 मारे जा चुके हैं जबकि 60 आतंकी अब भी सक्रिय हैं। जून 2019 तक कन्नूर की 8 महिलाओं के आतंकी संगठन में शामिल होने की ख़बर आई थी।
कन्नूर के अलावा कासरगोड, मल्लपुरम, कोझिकोड, एर्नाकुलम और थिसुर के कई लोगों ने भाग कर आतंकी संगठन ज्वाइन किया था। ये सभी मिडिल-ईस्ट में जाकर ‘जिहाद’ कर रहे हैं। इन सभी को वहाँ विभिन्न इलाक़ों में तैनात किया गया है। कहा गया है कि वैश्विक आतंकी संगठन वहाँ के मुस्लिम युवकों को निशाना बनाता है और उन्हें आतंक के लिए प्रशिक्षित करता है।