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तालिबान के लिए महबूबा मुफ्ती की राय पर लोगों ने कहा- ‘इन्हें भेज दो अफगानिस्तान’

सितम्बर 8 को News18 पर तालिबान पर चर्चा के दौरान एक मुस्लिम नेता ने तालिबान का बचाव करते महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर जैसे ही कहा कि "मुझे नहीं मालूम" वहां मौजूद अफगानी महिलाओं ने उन्हें इतना जलील किया किया अगर शर्म होगी तो शायद ज़िंदगी में कभी ये मुस्लिम नेता और शोएब जामई तालिबान का बचाव करने किसी टीवी चैनल पर नहीं आएंगे। वैसे यह कुछ दिन पूर्व हुई चर्चा को पुनः चलाया गया था। इसी चर्चा में शहज़ाद पुणेवाला, मुस्लिम विश्लेषक ने तालिबान का समर्थन करने वालों अफ़ग़ानिस्तान जाने की सलाह दे डाली। 

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार की घोषण के बाद कुछ कश्मीरी नेता अब तालिबान का गुणगान कर रहे हैं। फारूक अब्दुल्ला के बाद महबूबा मुफ्ती ने इस विषय पर बयान दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कुलगाम में कहा कि तालिबान हकीकत बन कर सामने आ रहा है। ऐसे में अगर वो अपनी छवि को बदलेगा तो दुनिया के लिए मिसाल बन सकता है।

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती कहती हैं, “तालिबान हकीकत बनकर उभरा है। अगर वे इस बार शासन करना चाहते हैं तो शरिया जो कहता है जिसमें, औरतों, बूढे, बच्चों के अधिकारी है और किस तरह शासन करना चाहिए। अगर वे इसपर अमल करना चाहते हैं तो मुझे लगता है वे(तालिबान) दुनिया के लिए मिसाल बन सकते हैं। अगर वो उस पर अमल करेंगे तभी दुनिया के देश हैं उनके साथ कारोबार कर सकते हैं।”

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक मुफ्ती कहती हैं, “खुदा ना खास्ता अगर जो बीते सालों का वह अपना एक तरीका अपनाएँगे तो फिर सारी दुनिया के लिए ही नहीं अफगानिस्तान के लोगों के लिए भी मुश्किल हो जाएगी।”

इससे पहले तालिबान के पक्ष में फारूक अब्दुल्ला ने बयान दिया था। उन्होंने तालिबान का राग अलापते हुए कहा था, “मुझे उम्मीद है कि वे (तालिबान) इस्लामी सिद्धांतों का पालन करते हुए उस देश (अफगानिस्तान) में सुशासन देंगे और मानवाधिकारों का सम्मान भी करेंगे। उन्हें हर देश के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करने का प्रयास भी करना चाहिए।”

महबूबा मुफ्ती और अब्दुल्ला जैसे नेताओं के मुँह से तालिबान के पक्ष में बयानबाजी सुनने के बाद सोशल मीडिया यूजर गुस्साए हुए हैं। एक यूजर लिखता है, “मैं भारत सरकार से अनुरोध करता हूँ कि इन्हें अफगानिस्तान भेजे ताकि तालिबानी शासन में ये चैन से जिएँ। 8 माह की गर्भवती औरत की हत्या देखने के बाद भी ये ऐसे बोल रही हैं। भगवान ऐसे लोगों से जम्मू-कश्मीर को बचाए।”

बीबी तक को नहीं चूम सकता -- फ़ारूक़ अब्दुल्ला

हाय रे कोरोना ! बीबी तक को चूमने से डर रहे हैं 

नेशनल कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने जनवरी 17, 2021 को जम्मू में एक किताब विमोचन कार्यक्रम के दौरान बताया कि कोरोना महामारी के कारण वह अपनी पत्नी का चुम्मा भी नहीं ले सके। उनके इस हास्यास्पद बयान की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वीडियो में अन्य लोग उनकी बात सुन कर ठहाके लगाते भी नजर आ रहे हैं।

गुर्जर देश चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में फारूक अब्दुल्ला ने महामारी पर बात करते हुए अपनी यह बात रखी। उन्होंने कहा स्थिति यह है कि कोई भी हाथ मिलाने या गले लगने तक से डरता है। अब्दुल्ला ने कहा, “यहाँ तक कि मैं अपनी पत्नी का किस तक नहीं ले सकता। गले लगने का तो सवाल ही नहीं है जबकि दिल ऐसा करना चाहता है। मैं बिलकुल सही कह रहा हूँ।”

अपनी इच्छा जाहिर करते समय अब्दुल्ला कोरोना वैक्सीन व देश में फैली महामारी पर बात कर रहे थे। उन्होंने अपनी इस बात को कहने से पहले यह भी कहा कि कोरोना की वैक्सीन आ गई है। लेकिन ये वक्त ही बताएगा कि ये वैक्सीन कितनी असरदार है। अल्लाह करे ये बीमारी दफा हो जाए। उन्होंने बताया कि कैसे जब भी उनकी बेटी उन्हें बिना मास्क के देखती है तो वह उनसे घर लौटने को कहती है।

इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्र शासित प्रदेश में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल करने की बात कहने के बहाने निशाना साधा। वह बोले, “प्रधानमंत्री कहते हैं कि भारत में 5जी आ रहा है, जबकि हम 4जी (मोबाइल इंटरनेट सेवा) से भी वंचित हैं। वह कुर्सी छोड़ने के बाद यहाँ आएँ और रह कर देखें कि हम 2जी (सेवा) के साथ कैसे जी रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “छात्र अपने घर पर हैं और वे इंटरनेट के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं तथा व्यावसायी भी इंटरनेट सेवा पर निर्भर हैं। मेरा प्रधानमंत्री से अनुरोध है कि यदि आप कहते हैं कि यह स्थान विकास के पथ पर है तो हमें अल्लाह की खातिर 4जी दीजिए ताकि हम भी और हमारे बच्चे भी आगे बढ़ सकें।” 

अब्बू ने खोली शेहला रशीद की पोल, देश विरोधी गतिविधि में शामिल होने का किया दावा

भारतीय सेना पर आरोप लगाने वाली और टुकड़े-टुकड़े गैंग की सदस्य शेहला रशीद के अब्बू ने उनकी पोल खोल दी है। शेहला रशीद के खिलाफ उनके पिता अब्दुल शोरा ने शिकायत दर्ज कराई है। अब्दुल शोरा का कहना है कि बेटी शेहला उन्हें जान से मारने की धमकी दे रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘शेहला कुख्यात गतिविधियों में शामिल है।’

ऐसे में चर्चा यह भी है कि इतने समय बाद एक बाप अपनी ही बेटी के विरुद्ध पुलिस को सूचित कर रहा है? क्या शेहला के बाप को बेटी पर जाँच एजेंसीज के हाथ पहुँचने की खबर लग गयी थी, जिससे घबरा कर बाप अपना दामन बचाकर अपनी बेटी शेहला पर सारा दोष डाल अपने आपको बचा रहा है? देश की इतनी चिंता थी, तो जब घर में चांदी के सिक्कों की बारिश हो रही थी, तब क्यों नहीं बेटी से पूछा और पुलिस को सूचना दी?चलो देर आए, दुरुस्त आए। 

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी को दी अपनी शिकायत में उन्होंने शेहला की कुख्यात गतिविधियों को उजागर किया है। साथ ही शेहला की बैंक अकाउंट की जांच की मांग की है।

अब इस पर प्रश्न उठने लाजमी हैं, देखो इन प्रश्नों का जवाब देने कौन आगे आता है:-  शिकायत पत्र में अब्दुल रशीद शोरा ने दावा किया कि शेहला ने कश्मीर की राजनीति में शामिल होने के लिए कुख्यात लोगों से तीन करोड़ रुपये लिए हैं। उन्होंने मांग की है कि फिरोज पीरजादा, जहूर वटाली (एनआईए द्वारा गिरफ्तार) और रशीद इंजीनियर के बीच वित्तीय डील की जांच की जाए।

जाहिर है कि पिछले दिनों शेहला रशीद के खिलाफ दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल ने देशद्रोह के साथ कई अन्‍य धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। शेहला रशीद पर जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाए जाने के बाद मौजूदा हालात को लेकर भारतीय सेना के खिलाफ झूठी खबरें फैलाने का आरोप था। शेहला ने भारतीय सेना पर कश्मीर के लोगों को प्रताड़ित करने और दहशत फैलाने जैसे कई आरोप लगाए थे।

रोशनी एक्ट : जिसका गुनाह छिपाने के लिए हंगामा कर रहा है घोटालेबाज गुपकार गैंग

                                            घोटालेबाज़ गुपकार गैंग 
1947 में जब से भारत स्वतंत्र हुआ है, तब से लेकर आज तक देश में घोटाले थमने का नाम ही नहीं ले रहे। जबकि देश में इतनी अधिक भ्रष्टाचार विरोधी एनजीओ बन चुके हैं, उसके बावजूद घोटाले होना सिद्ध करता है कि जिस तरह जनसेवा के नाम पर नेता और पार्टियां घोटालों में लिप्त हैं, इस स्थिति में इन भ्रष्टाचार विरोधी एनजीओ का क्या है औचित्य, यह ज्वलंत प्रश्न है। 

भ्रष्टाचार करने वाले भ्रष्टाचार दूर करने के नाम पर जनता से वोट मांगते हैं और जनता किसी भी मौसम--सर्दी, गर्मी अथवा बारिश-- में वोट देने लम्बी-लम्बी कतारों में खड़े होकर अपना वोट देने जाती हैं। लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात। विश्व में भारत ही ऐसा अनूठा देश है, जहाँ सबसे अधिक पार्टियां है। कोई धर्म के नाम पर तो कोई जाति के नाम पर अपनी-अपनी दुकानें खोलकर बैठ अपनी ही तिजोरियां भर रहे हैं, समस्याएं जस की तस बनी हुई है।  

जम्मू-कश्मीर इतना बड़ा राज्य नहीं, लेकिन वह भी इस भ्रष्टाचार से अछूता नहीं। कभी जनता को अनुच्छेद 370 के नाम पर, कभी अलगाववाद के नाम पर, कभी हिन्दू राष्ट्र ने नाम से तो कभी धर्म एवं जाति के नाम पर उकसाया जाता है। जम्मू-कश्मीर के अनुच्छेद 370 की आड़ में किस तरह देश में अराजकता फ़ैला भ्रष्टाचार किया जा रहा था, सुनकर एवं देखकर आंखें फटी रह जाती हैं।

इस घोटाले की जाँच CBI ने अपने हाथों में ली हुई है। अभी तक के जाँच में कई खुलासे हुए हैं और इन सब के तार जम्मू कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों से जुड़ रहे हैं, जिनमें से एक फारूक अब्दुल्लाह का नाम पहले ही सामने आ चुका है। ‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, अब पता चला है कि महबूबा मुफ्ती की पार्टी PDP ने जम्मू के संजवान क्षेत्र में तीन कनाल सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्ज़ा जमा लिया।
इसके बाद इस जमीन पर पार्टी के दफ्तर का निर्माण कराया गया। इसी ऑफिस के पहले फ्लोर पर विवादास्पद नेता राशिद खान ने डेरा जमा लिया। जिस समय ये सब हुआ, उस वक़्त राज्य में मुफ्ती मोहम्मद सईद की सरकार थी। 2 बार जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे सईद काफी विवादित नेता थे और उनके केंद्रीय गृह मंत्री रहते ही घाटी से कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ था। उनके निधन के बाद उनकी बेटी महबूबा सीएम बनी थीं।
‘न्यूज़ 18’ की खबर में एक CBI अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि गुजरे जमाने की फ़िल्मी हस्तियाँ फिरोज खान और संजय खान की बहन दिलशाद शेख ने भी राजधानी श्रीनगर में 7 कनाल सरकारी जमीन पर कब्ज़ा जमा लिया। दिलशाद ने जमीन को नियमित करने के लिए राशि भी नहीं जमा कराई लेकिन रोशनी एक्ट का इस्तेमाल किया। इसी तरह एक अन्य PDP नेता असलम मट्टू ने भी राजधानी में भूमि कब्जाई।
उन्होंने भी इसके तहत जमा कराई जाने वाली रकम नहीं दी। जम्मू-कश्मीर के एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री बख्शी गुलाम मोहम्मद के परिवार के एक सदस्य ने भी इस एक्ट का गलत तरीके से फायदा उठा कर सरकारी भूमि पर कब्ज़ा किया। फारूक अब्दुल्लाह ने दावा किया था कि अवैध रूप से कब्ज़ा की गई सरकारी जमीन के बदले चुकाई गई रकम से राज्य में बिजली आएगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

‘रोशनी एक्ट’ या ‘रोशनी स्कीम’ जैसा नाम सुनकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह बिजली से जुड़ी कोई योजना होगी। जी नहीं, यह जम्मू कश्मीर में ‘अंधेरगर्दी’ से जुड़े एक घोटाले का नाम है। बेशक, रियल एस्टेट सेक्टर में सरकारी स्तर पर अरबों रुपए के घपले को अंजाम देने के लिए यह एक्ट लाया गया था। इस भूमि घोटाले के तहत हुए तमाम आवंटन और प्रक्रियाएँ निरस्त कर दी गई और हाई कोर्ट ने इसे पूरी तरह ‘गैर कानूनी और असंवैधानिक’ करार दे दिया।

जम्मू-कश्मीर के ‘रोशनी एक्ट’ भूमि घोटाले की लिस्ट सार्वजनिक होने पर हड़कंप मच गया है। क्योंकि फेरिस्त में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला समेत कई दिग्गज नेताओं के नाम सामने आए हैं। अब्दुल्ला पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप है। हालाँकि, उन्होंने इसे एक बड़ी साजिश करार देते हुए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। फारुक अब्दुल्ला का कहना है कि इस इलाके में सिर्फ उनका ही घर नहीं है। उन्होंने कहा कि इन आरोपों से साफ पता चलता है कि सरकार की मंशा सिर्फ उन्हें फँसाने की है और कुछ नहीं।


अगर फ़ारूक़ की बात को सच भी माना जाए, तो एक भारतीय सांसद होते हुए क्यों जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 वापस लाने के लिए चीन से सहायता लेने की बात बोल रहे हैं? क्या ऐसे लोग नेता कहलवाने योग्य हैं? क्या ऐसे नेता वोट के अधिकारी हैं?

फ़ारूक़ पर जमीन हड़पने का आरोप 

फारुक अब्दुल्ला पर सरकारी जमीन कब्जा कर घर बनाने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि जम्मू के सजवान में उनका जो घर है, वो जंगल की जमीन पर है। ये घर 10 कनाल में बना हुआ है। इनमें से 7 कनाल जंगल की जमीन है जबकि 3 कनाल जमीन उनकी अपनी है। आरोप ये है कि जमीन रोशनी एक्ट के तहत गलत तरीके से ली गई। हालाँकि पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उन पर लगे सभी आरोप बेबुनियाद हैं।

PDP और NC  नेताओं के नाम 

वहीं इससे पहले पीडीपी, एनसी समेत कांग्रेस के कई नेताओं के नाम इस घोटाले में सामने आए थे। इनमें से एक नाम जम्मू कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू का भी था। दरअसल 25,000 करोड़ रुपए के कथित रोशनी भूमि घोटाले के मामले की जाँच हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी थी। जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने इस गड़बड़ी को ‘बेशर्म’ और ‘राष्ट्रहित को नुकसान पहुँचाने वाला’ बताते हुए सीबीआई जाँच के आदेश दिए। आरोप है कि कश्मीर में प्रदेश के दो बड़े राजनीतिक दलों को करोड़ों की जमीन तय मूल्य से 85 प्रतिशत तक के कम मूल्य पर दी गई। 

जम्मू कश्मीर के इतिहास में 25,000 करोड़ रुपए के सबसे बड़े घोटाले के तौर पर देखे जा रहे इस एक्ट को सिरे से खारिज कर दिया गया और हाई कोर्ट ने इसकी सीबीआई जाँच के आदेश दे दिए थे। सियासी कद्दावरों और ब्यूरोक्रेटों को सीधे तौर पर फायदा पहुँचाने के लिए बनाई गई इस खुराफाती स्कीम के बारे में सब कुछ जानिए।

क्या है ऐतिहासिक भूमि घोटाला?

इस स्कीम का आधिकारिक नाम जम्मू और कश्मीर राज्य भूमि एक्ट 2001 था, जिसे ‘रोशनी स्कीम’ के नाम से भी जाना गया। इसके तहत राज्य सरकार ने मामूली कीमतें तय कर उन लोगों को उन ज़मीनों पर स्थाई कब्जा देने की बात कही, जिन्होंने सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण कर रखा था। यानी सरकारी जमीनों पर गैर कानूनी कब्जों को कानूनी तौर पर मालिकाना हक देने की कवायद की गई।

तत्कालीन मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला सरकार द्वारा 2001 में लाई गई इस स्कीम के तहत 1990 से हुए अतिक्रमणों को इस एक्ट के दायरे में कट ऑफ सेट किया गया था। सरकार का कहना था कि इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा, जो सरकारी जमीन पर कई सालों से खेती कर रहे है। लेकिन नेताओं ने जमीनों पर कब्जे जमाने का काम शुरू कर दिया। वर्ष 2005 में तब की मुफ्ती सरकार ने 2004 के कट ऑफ में छूट दी। उसके बाद गुलाम नबी आजाद ने भी कट ऑफ ईयर को वर्ष 2007 तक के लिए सीमित कर दिया।

इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी से लग जाता है कि जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने सीबीआई डायरेक्टर को इसकी जाँच के लिए एसपी रैंक के पुलिस अफसरों से कम की टीम नहीं बनाने को कहा था और गहराई से जाँच के बाद मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। रोशनी ऐक्ट के तहत तत्कालीन राज्य सरकार का लक्ष्य 20 लाख कनाल सरकारी जमीन अवैध कब्जेदारों के हाथों में सौंपना था, जिसकी एवज में सरकार बाजार भाव से पैसे लेकर 25,000 करोड़ रुपए की कमाई करती।

रोशनी ऐक्ट सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को मालिकाना हक देने के लिए बनाया गया था। इसके बदले उनसे एक रकम ली जाती थी, जो सरकार तय करती थी। 2001 में फारूक अब्दुल्ला सरकार ने जब ये कानून लागू किया था, तब सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों को मालिकाना हक देने के लिए 1990 को कट ऑफ वर्ष निर्धारित किया गया था। लेकिन, उसके बाद की हर सरकारों ने इस कट ऑफ साल को बढ़ाना शुरू कर दिया, जिसकी आड़ में सरकारी जमीन की बंदरबाँट की आशंका जताई जा रही है। कोर्ट ने कहा था कि मुफ्ती मोहम्मद सईद (2004) और गुलाम नबी आजाद (2007) की सरकारों ने इस कानून में और संशोधन किए ताकि गैर-कानूनी रूप से जमीन हथियाने वालों को फायदा पहुँचाई जा सके।

जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट ने लगाई थी फटकार

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारियों और सतर्कता अधिकारियों को ‘लूट की’ इस नीति के प्रति आँखें मूँदकर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कोताही बरतने के लिए जमकर लताड़ लगाई। अदालत ने सरकारी जमीन पर गैर-कानूनी कब्जा करने वालों को लेकर कहा कि इन लुटेरों की सत्ता में इतनी गहरी पैठ रही है कि यह अपने फायदे के लिए कानून भी बनवा सकते थे। 

अदालत ने यह भी आशंका जताई कि जिस तरह से जमीन के ये लुटेरे प्रभावी रहे हैं, उससे लगता है कि उन्होंने नीति निर्धारण से लेकर उसके लागू करवाने तक में हर स्तर पर भूमिका निभाई है। अदालत की ऐसी टिप्पणी उन राजनेताओं के लिए भी सख्त संकेत हैं, जिनके कार्यकाल में ऐसे कानून बनाए गए हैं। अदालत ने यहाँ तक टिप्पणी की कि उन्होंने अब तक ऐसी आपराधिक गतिविधि नहीं देखी है, जिसमें सरकार ने राष्ट्रीय और जनता के हित को ताक पर रखकर कोई कानून बनाया हो और जनता के खजाने और पर्यावरण को होने वाले नुकसान का कोई आँकलन भी नहीं किया गया हो।

कितनी जमीन पर अवैध कब्जे?

जम्मू-कश्मीर में लाखों एकड़ सरकारी जमीन पर नेताओं, पुलिस, प्रशासन और रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अफसरों का कब्जा था। इस एक्ट के जरिए ही करीब ढाई लाख एकड़ जमीन पर कब्जे को कानूनी रूप दे दिया गया। करोड़ों रुपए की ये जमीनें नाम मात्र की कीमतों पर दी गई थीं। शुरुआती जाँच में पता चला है कि राज्य के कई पूर्व मंत्रियों ने खुद के साथ रिश्तेदारों के नाम पर भी कई एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा किया था।

क्यों मिला ‘रोशनी’ नाम और कैसे हुआ ‘अंधेर’?

अब्दुल्ला सरकार ने इस एक्ट को बनाते समय कहा कि जमीनों के कब्ज़ों को कानूनी किए जाने से जो फंड जुटेगा, उससे राज्य में पावर प्रोजेक्टों का काम किया जाएगा, इसलिए इस एक्ट का नाम ‘रोशनी’ रखा गया, जो मार्च 2002 से लागू हुआ। 1 एकड़ में 8 कनाल होते हैं और इस लिहाज़ से ढाई लाख एकड़ से ज्यादा अवैध कब्जे वाली जमीन को हस्तांतरित करने की योजना बनाई गई।

‘अंधेर’ ये था कि ज़मीन को मार्केट वैल्यू के सिर्फ 20 फीसदी दर पर सरकार ने कब्जेदारों को सौंपा। यानी कुल मिलाकर इससे 25 हज़ार करोड़ रुपए का घोटाला होने की बात सामने आई। अंधेर ये भी रहा कि अब्दुल्ला सरकार के बाद की सरकारों ने भी इसका फायदा उठाया। 2005 में सत्तारूढ़ मुफ्ती सरकार ने कट ऑफ को 2004 तक बढ़ा दिया था और फिर गुलाम नबी आजाद सरकार ने 2007 तक।

किसे मिलता रहा नाजायज़ फायदा?

इस विवादास्पद रोशनी एक्ट से किस किसको फायदा हुआ? इस बारे में आई रिपोर्ट्स में कहा गया कि ‘स्थानीय स्तरों पर जो भी प्रभावशाली था या प्रभावशालियों के संपर्क में था’, हर उस व्यक्ति को फायदा पहुँचा। मंत्रियों, कारोबारियों, नौकरशाहों और इन सबके रिश्तेदारों या करीबियों को ज़मीनें कौड़ियों के भाव मिलीं। हसीब द्रबू, मेहबूब बेग, मुश्ताक अहमद चाया, कृशन अमला, खुर्शीद अहमद गनी और तनवीर जहान जैसे प्रभावशाली नाम इस लिस्ट में सामने आ चुके हैं।

इस घोटाले की गहराई की अंदाजा इस बात से लगाइए कि श्रीनगर शहर के बीचों बीच ‘खिदमत ट्रस्ट’ के नाम से कॉन्ग्रेस के पास कीमती जमीन का मालिकाना हक पहुँचा, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस का भव्य मुख्यालय तक ऐसी ही ज़मीन पर बना हुआ है, जो इस भूमि घोटाले से तकरीबन मुफ्त के दाम ​हथियाई गई।

एक लाख हेक्टेयर जमीन बाँट दी

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के विवादित रोशनी एक्ट के तहत 20.55 लाख कनाल (1,02,750 हेक्टेयर) सरकारी जमीन लोगों को औने-पौने दाम में बाँट दी गई थी। इसमें से मात्र 15.58 प्रतिशत जमीन को ही मालिकाना हक के लिए मंजूरी दी गई। योजना का उद्देश्य था कि जमीन के आवंटन से प्राप्त होने वाली राशि का इस्तेमाल राज्य में बिजली ढाँचे को सुधारने में किया जाएगा। इस एक्ट के तहत रसूखदारों ने अपने तथा अपने रिश्तेदारों के नाम जमीन आवंटित करा ली।

एक्ट निरस्त होने का मतलब क्या है?

जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अगुवाई वाली राज्य प्रशासनिक परिषद यानी SAC ने 2018 में रोशनी एक्ट को निरस्त किया, तो इसका शुरुआती मतलब यही था कि इस स्कीम में जो आवेदन या प्रक्रियाएँ पेंडिंग थीं, उन्हीं को निरस्त माना जाए। लेकिन, बाद में इसे लेकर हलचल बढ़ी और हाई कोर्ट ने इसे गैरकानूनी, अन्यायपूर्ण, असंवैधानिक और असंगत करार दे दिया।

हाई कोर्ट ने जब इसे सिरे से खारिज किया तो इस एक्ट की शुरुआत से हुई तमाम प्रक्रियाएँ और आवंटन गैर कानूनी हो गए। हाल में, जस्टिस गीता मित्तल व राजेश बिंदल की हाई कोर्ट बेंच ने सीबीआई जाँच के आदेश देकर यह भी कहा कि हर आठ हफ्ते में केस की जाँच के स्टेटस की रिपोर्ट दी जाती रहे।

‘रोशनी’ करा सकती है जम्मू-कश्मीर के ‘राजघरानों’ में ‘अंधेरा’, गुपकार से नहीं होगा बचाव

सुरक्षा एवं राजनीतिक विश्लेषक ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) के मुताबिक महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और कॉन्ग्रेस पार्टी को आखिर ‘गुपकार’ समझौता करने के लिए साथ आना पड़ा। दरअसल, ये लोग खुद को रोशनी एक्ट के घोटाले से बचाने के लिए ‘गुपकार’ बैठकें कर रहे हैं। इनका मकसद है कि देश-दुनिया का ध्यान ‘रोशनी’ जैसे बड़े घोटाले से हट कर गुपकार पर आ जाए।

ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता बताते हैं कि कई जगह की जमीन तो अब दूसरे व तीसरे व्यक्ति को बेची जा चुकी है। पावर अटॉर्नी का जबरदस्त खेल चला है। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जम्मू और सांबा जिलों में जमीन हड़पने के मामलों की जाँच शुरू कर दी है। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही इन नेताओं के चेहरे उतरे हुए थे। अब रही सही कसर ‘रोशनी’ एक्ट की जाँच ने पूरी कर दी।

जिन लोगों ने रोशनी एक्ट की आड़ लेकर करोड़ों रुपए की जमीनों पर कब्जे कराए हैं, वही लोग अब ‘गुपकार’ समझौते के जरिए देश दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचना चाह रहे हैं। हालाँकि वे इसमें कामयाब नहीं होंगे, क्योंकि सीबीआई जब अपनी चार्जशीट दाखिल करेगी तो उस वक्त इन नेताओं के पास कोई जवाब नहीं होगा।

जम्मू-कश्मीर के राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव पहले ही कह चुके हैं कि एक जनवरी 2001 के आधार पर सरकारी जमीन का ब्योरा एकत्र कर उसे वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगे। कौन सी जमीन पर किसका कब्जा है, इस बाबत सभी अवैध कब्जा धारकों के नाम सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

अब नेताओं और उनके रिश्तेदारों के अलावा उन नौकरशाहों को भी पसीना आ रहा है, जिन्होंने जमीन पर कब्जा कराने में मदद की थी। सांबा जिले में राजस्व अधिकारियों ने रोशनी एक्ट के प्रावधानों का जान-बूझकर उल्लंघन कर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कराया है।

बता दें कि यही वो गुपकार गैंग है, जिन्होंने अपने शासनकाल के दौरान जम्मू की डोगरा संस्कृति को खत्म करने का भरसक प्रयास किया है। साठ साल के शासन में इन लोगों ने सिलसिलेवार तरीके से गौरवशाली संस्कृति पर प्रहार किए हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी भी इसके लिए बराबर की जिम्मेदार है। यही वजह है कि अब जम्मू-कश्मीर में उसका अपना कोई वजूद नहीं रहा। 

पिछले दिनों श्रीनगर में गुपकार समझौता हुआ है। यह समझौता केवल इसी बात को लेकर हुआ है कि अब रोशनी एक्ट घोटाले से खुद को कैसे बचाएँ। इन तीनों दलों के नेताओं ने थोक के भाव में रोशनी एक्ट का फायदा उठाया था। अनिल गुप्ता का कहना है कि अब उन्हें यह डर सताने लगा है कि जब अखबारों में उनके नाम सार्वजनिक होंगे तो जनता के बीच उनका नकाब उतर जाएगा।

इसी के चलते उन्होंने आपस में गुपकार समझौता कर लिया। इसमें उन्होंने अनुच्छेद 370 को दोबारा से लाने की माँग दोहराई है, जबकि हकीकत यह है कि वे रोशनी एक्ट से खुद को कैसे बचाएँ, लोगों तक किसी तरह इसकी सच्चाई न पहुँचे, इस बाबत रणनीति बना रहे हैं।

महबूबा मुफ्ती, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला और कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता यह बात अच्छे से जानते हैं कि बिना साथ आए वे रोशनी एक्ट पर लोगों को गुमराह नहीं कर सकेंगे। इसके लिए मिलकर रणनीति बनानी जरूरी है। हालाँकि अब इन तीनों दलों के नेताओं की पोल खुलनी तय है। जनता समझ चुकी है कि रोशनी एक्ट में क्या कुछ हुआ है। जल्द ही इनके चेहरे का नकाब उतरेगा और इनका असली चेहरा लोगों के सामने आएगा।                                                            (साभार एवं एजेंसीज इनपुट्स सहित)

गुपकार गैंग ने मांगी चीन से मदद ; नगरौटा में मारे गए आतंकियों से मिले हथियारों पर लिखा है मेड इन चाइना

मारे गए आतंकवादियों से बरामद चाइना निर्मित हथियारों का जखीरा 
जम्मू-कश्मीर में हाल ही में एक नया गठबंधन बना है- गुपकार गठबंधन। इस गठबंधन में फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती की पार्टी समेत कश्मीर के कई दल शामिल हैं। गुपकार का मुख्य एजेंडा जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 और 35-A बहाली है। गठबंधन के नेताओं का कहना है कि वो इस बहाली के लिए चीन से भी मदद लेने को तैयार हैं। हैरानी की बात यह है कि गुपकार गैंग ने पिछले हफ्ते ही चीन से मदद मांगी और आज, 19 नवंबर को नगरौटा में मारे गए आतंकियों के पास से जो हथियार मिले हैं उन पर ‘मेड इन चाइना’ लिखा है।
जब से गुपकार गैंग नज़रबंदी से मुक्त हुआ है, जम्मू-कश्मीर में अराजकता का माहौल बनाने का पुनः प्रयास किया जा रहा है। केंद्र सरकार को इनकी और इनके समर्थकों की भी हर गतिविधि पर गिद्द की नज़र रखनी होगी। ये लोग अपनी तिजोरी की खातिर कुछ भी कर सकते हैं। इन्हें देश से अधिक अपनी तिजोरी और रोटी की चिंता है। ये लोग अनुच्छेद 370 की आड़ में अपनी तिजोरियां भर रहे थे। 

चीन में बने हथियारों से भारत में तबाही की थी साजिश

जम्मू कश्मीर के नगरौटा में गुरुवार सुबह सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में चार आतंकवादी मारे गए। मारे गए चारों आतंकी पाकिस्तानी थे। चारों आतंकी जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक ट्रक में जा रहे थे। नगरोटा के पास एक टोल प्लाजा पर रोकने पर आतंकवादियों ने पुलिस पार्टी पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। जिसके बाद मुठभेड़ में चारों आतंकी मारे गए। मारे गए आतंकवादियों के पास से आरडीएक्स, एके-56 राइफल, पिस्टल, ग्रेनेड, मोबाइल सेल, मैगजीन और अन्य हथियार भी बरामद हुए हैं। इन हथियारों पर ‘मेड इन चाइना’ लिखा हुआ है। चीन के इतने हथियार मिलने पर संविधान की दुहाई देने वाले समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष क्यों चुप्पी साधे हुए हैं, इसी से सम्बंधित लोग ट्विटर पर प्रश्न भी कर रहे हैं। ये देश भक्ति का चोला ओढ़े बहुरूपियों पर सख्ती से निपटने की मांग भी हो रही है :-

मुठभेड़ के बाद एक पुलिस अधिकारी का कहना था कि ऐसा पहली बार सामने आया है कि एक-एक आतंकवादी के पास चार-चार एके-47 हथियार थे। इसके अलावा उनके पास से तीन पिस्टल, सैटेलाइट फोन, कम्पास और अन्य उपकरण बरामद हुए हैं। अधिकारी ने आशंका जताई कि राज्य में डीडीसी के चुनाव होने हैं, ऐसे में आतंकवादी चुनाव में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन आतंकवादियों के मंसूबों को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षाबल पूरी तरह से मुस्तैद हैं।

जम्मू जोन के आईजी मुकेश सिंह ने कहा है कि ट्रक चालक फरार है, हम उसकी तलाश कर रहे हैं। यह संभव है कि वे एक बड़े हमले की योजना बना रहे थे। इस तरह की जब्ती अभूतपूर्व है। यह संभव है कि वे डीडीसी चुनाव को निशाना बना रहे थे। हालांकि, हम जांच कर रहे हैं।


6.1 तीव्रता के जलजले से कांपी पाकिस्तानी धरती, दिल्ली-एनसीआर में महसूस किए गए झटके

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भूकंप  |  तस्वीर साभार: BCCL
मंगलवार(सितम्बर 24) को शाम में घड़ी की सुई टिकटिक करती हुई साढ़े चार बजा रही थी और ठीक उसी वक्त पाकिस्तान की जमीन के अंदर हलचल हुई और उसका असर जमीन पर दिखाई दिया। लाहौर से करीब 137 किमी दूर और रावलपिंडी से 81 किमी दूर जाटलान में 6.1 तीव्रता के भूकंप ने दस्तक दी और पूरी धरती हिल गई। पाकिस्तान में आए जलजले के बाद पाक अधिकृत कश्मीर का ज्यादातर हिस्सा तबाह हुआ है। इसके साथ ही दिल्ली एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। लेकिन उसका असर भारत में भी दिखाई दिया। भूकंप के तेज झटकों से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा हिल गया। लोग घरों से बाहर निकल गए।

जानकारों का कहना है कि जिस इलाके में जलजले ने दस्तक दी वो आमतौर पर भूगर्भीय हलचल से मुक्त रहा है। अभी यह नहीं पता चल सका है कि भूकंप, धरती की सतह से कितने किमी नीचे आया था। लेकिन जिस तरह से रिक्टर स्केल पर तीव्रता दर्ज की गई है उससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है जलजले ने पृथ्वी की सतह से कम दूरी पर दस्तक दिया होगा। 
जम्मू के राजौरी में जलजले के बाद लोग दहशत में आ गए। किसी को एक पल के लिए समझ में नहीं आया कि क्या हुआ है। फिलहाल किसी तरह के जानमाल की जानकारी नहीं है। लेकिन भूकंप की तीव्रता से इस बात की आशंका है कि पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर तबाही हो सकती है। 
यह तस्वीर पाकिस्तान के जाटलान इलाके की है जहां जलजले ने दस्तक दी थी। तस्वीरों से साफ है कि तबाही का आलम कितना रहा होगा। 

अगर ऐसा हुआ तो गांधी- नेहरू के समकक्ष खड़े होंगे मोदी: शब्बीर शाह

Narendra Modiप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं। बीते छह बरस में पीएम नरेंद्र मोदी ने कई ऐसे निर्णय लिए हैं, जिनमें उनकी दूरगामी सोच झलकती है। इसमें- नोटबंदी, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), आतंकवादियों के गढ़ में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और हाल में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करते हुए जेएंडके और लद्दाख को विभाजित करना प्रमुख रूप से शामिल है।
हालांकि, जब पांच अगस्त को संसद की पटल पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया, तो सभी मोदी सरकार के निर्णय से हैरान रह गए। सबको लगा कि केंद्र सरकार ने एक झटके में कैसे कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया। लेकिन एक नेता को इस बात का बहुत पहले से ही आभास था और वह हैं कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर शाह।
वैसे तो,पीएम मोदी द्वारा लिए गए निर्णय की तारीफ भारत के अलावा दुनिया के तमाम नेता भी करते रहे हैं, लेकिन इसमें नया नाम जुड़ गया है कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर शाह का। शब्बीर शाह ने कहा था कि अगर कोई कश्मीर को लेकर बड़ा निर्णय ले सकता है, तो वह केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।
'पीएम मोदी ही सक्षम हैं'
इस बात का जिक्र जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्य सचिव मूसा रजा ने अपने किताब 'कश्मीर: लैंड ऑफ रिग्रेटस' (Kashmir: Land of Regrets) में किया है। मूसा रजा ने कहा है कि शब्बीर शाह ने उनसे 2016 में ही कहा था, 'लोकसभा में अपनी पार्टी के बहुमत, आरएसएस की लोकप्रियता और समर्थन के साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू-कश्मीर पर 'साहसिक निर्णय' के लिए एकमात्र सक्षम व्यक्ति हैं।' बता दें कि मूसा रजा 1988 से 1990 तक जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव थे।

गांधी और नेहरू के समकक्ष होंगे पीएम मोदी'
रजा ने अपने किताब में लिखा है कि नोटबंदी के एक दिन बाद 9 नवंबर 2016 को वह छह दिवसीय यात्रा पर श्रीनगर गए थे। उन्होंने कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में घाटी की स्थिति का जमीनी आकलन करने गए थे। रजा ने कहा कि शाह ने उनसे कहा, 'अगर नरेंद्र मोदी ऐसा करने में सफल हुए तो वह महात्मा गांधी और देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के समकक्ष खड़े हो जाएंगे।

'मुश्किल से जन्म लेते हैं ऐसे नेता'
रजा ने कहा जब वह कश्मीर यात्रा पर गए थे तब उनकी मुलाकात शब्बीर शाह से हुई थी। शाह ने नोटबंदी को लेकर रजा से कहा, 'नोटबंदी के फैसले ने न केवल काले धन की कमर तोड़ी, बल्कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात में भी भाजपा की संभावनाओं को भी खतरे में डाल दिया। एक ऐसा नेता बहुत मुश्किल से ही जन्म लेता है जो इतने विशाल बहुमत मिलने के बाद जोखिम उठा सकता है।'

'खोई जमीन वापस पाना होगा'
रजा ने कहा कि सरकार ने किसी को बात करने के लिए नहीं छोड़ा है। कश्मीर की मुख्यधारा की पार्टियां जिसमें कांग्रेस,पीडीपी औऱ एनसी अपना चेहरा खो सकती है और निकट भविष्य में उन पर कोई विश्वास नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा के नेताओं को खोई जमीन वापस पाने की जरूरत है। मूसा ने कहा कि उन्हें इस बात का भय है कि जो मुख्यधारा के नेताओं द्वारा जगह खाली हुई है, उसे कहीं अलगाववादी और आतंकवादी न भरें।

'आग में तेल डालेगा पाकिस्तान'
मूसा ने कहा, 'वो (अलगाववादी और आतंकवादी) जाएंगे और कश्मीरियों से कहेंगे कि ये अब्दुल्ला, मुफ्ती .. सब धोखेबाज हैं, सिर्फ हम तुम्हारे साथ हैं।' उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ पाकिस्तान बहुत खुश होगा और आग में तेल डालने का काम करेगा।

जम्‍मू-कश्‍मीर : पुलिस ने हथियारों से भरा ट्रक पकड़ा

Major terror attack thwarted in Jammu and Kashmirजम्‍मू-कश्‍मीर में पुलिस को बड़ा आतंकी हमला टालने में मदद मिली है। पुलिस ने हथियारों से भरे एक ट्रक को जब्‍त किया है। ट्रक अमृतसर से कश्‍मीर घाटी की ओर जा रहा था, जब पुलिस ने उसे रोका और तलाशी ली तो हथियारों का जखीरा बरामद हुआ। माना जा रहा है कि इसे घाटी में अशांति फैलाने के मकसद से ले जाया जा रहा था। फिलहाल इसकी जांच की जा रही है कि हथियारों की इस खेप का सीमा पार से कोई कनेक्‍शन है या नहीं?
जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस ने लखनपुर में ट्रक को रोका। इससे पहले पुलिस को ऐसी खुफिया सूचना मिली थी कि एक ट्रक में हथियार भरकर कश्‍मीर घाटी ले जाया जा रहा है। पुलिस ने संदेह के आधार पर ट्रक को रोका और उसकी तलाशी ली। तलाशी के दौरान ट्रक में 6 एके-47 और अन्‍य हथियार मिले, जिसके बाद पुलिस ने इसे जब्‍त कर लिया। इस सिलसिले में तीन लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। फिलहाल इसकी जांच की जा रही है कि हथियार कहां से आया और ट्रक में भरकर इसे अमृतसर से कश्‍मीर घाटी ले जाने का क्या मकसद था?
जम्‍मू-कश्‍मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्‍छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्‍त किए जाने के बाद घाटी में पुलिस व सुरक्षा बल अतिरिक्‍त चौकसी बरत रहे हैं। नियंत्रण रेखा और अंतरराष्‍ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में भी पूरी चौकसी बरती जा रही है, जिसे देखते हुए इसकी संभावना कम ही लगती है कि इसका पाकिस्‍तान से कोई कनेक्‍शन हो। हालांकि पंजाब से पिछले कुछ दिनों में हथियारों से भरे कई वाहन जम्‍मू-कश्‍मीर में जब्‍त किए गए हैं, जिसे देखते हुए पुलिस इसका भी पता लगाने में जुटी हुई है कि कहीं पंजाब के खालिस्‍तान समर्थकों और कश्‍मीर घाटी के आतंकियों के बीच कोई साठगांठ तो नहीं हुई है।

इसका भी पता लगाया जा रहा है कि नियंत्रण रेखा और अंतरराष्‍ट्रीय सीमा पर चौकसी बढ़ाए जाने के बाद पाकिस्‍तान यहां किसी अन्‍य मार्ग से तो हथियार नहीं भेज रहा है। हथियारों से भरे इस ट्रक का जम्‍मू-कश्‍मीर में जब्‍त किया जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्‍योंकि भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इसे लेकर भी आगाह किया है कि यहां आतंकियों से संपर्क साधने के लिए पाकिस्‍तान कोड वर्ड्स का इस्‍तेमाल कर रहा है, ताकि घाटी में अशांति फैलाई जा सके।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, ये कोड वर्ड्स पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में नियंत्रण रेखा के पास लगाए गए एफएम ट्रांसमिशन के जरिये भेजे जा रहे हैं। जैश-ए-मोहम्मद (66/88), लश्कर-ए-तैयबा (A3) और अल बद्र (D9) के लिए अलग-अलग कोड बनाए गए हैं और पाकिस्तान के राष्ट्रगान 'कौमी तराना' के माध्यम से इनका इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

LoC में सुरंग बनाने की तैयारी में पकिस्तान, आतंकियों को दिए अत्याधुनिक हथियार




  • जम्मू-कश्मीर से 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट इतनी बढ़ गई है कि अब पाक एलओसी पर रोबोटिक हथियारों का इस्तेमाल कर आतंकी घुसपैठ कराने की फिराक में है। घुसपैठ की कोशिश में पाकिस्तान आतंकियों को हैवी मशीन गन मुहैया करा रहा है। 
  • गृह मंत्रालय को मिली रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान ने स्टील बुलेट के लिए चीन से मदद मांगी है। अब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान अपनी ताकत बढ़ा रहा है। इस सिलसिले में गृह मंत्रालय को सुरक्षा एजेंसियों ने रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की मदद पाकिस्तान पीओके के मानसेहरा में सामरिक टनल बनाने में जुटा है। इसके साथ ही लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के नजदीक पाकिस्तान प्रेशर सेंसर का इस्तेमाल कर रहा है। इसे उसने अमेरिका से खरीदा था।
    ज्ञात हो, जब कश्मीर में सेना पैलेट गन का इस्तेमाल कर रही थी, भारत में आतंकवादी समर्थक इस गन का विरोध कर रहे थे, परन्तु अब जब पाकिस्तान आतंकियों को स्टील बुलेट दे रहा है, आतंकवादी समर्थक क्यों चुप हैं? और जब सेना द्वारा स्टील बुलेट से ज्यादा खतरनाक बुलेट का इस्तेमाल किये जाने पर कोई आतंकवादी समर्थक अपना मुँह न खोले और यदि खोले तो सरकार उनके साथ भी सख्ती से पेश आए।
    एक तरफ मीडिया में पाकिस्तान में बढ़ती महँगाई से जनता को दुःखी दिखाया जा रहा है, लेकिन कोई इस बात को नहीं बता रहा कि भूखे पाकिस्तान के पास आतंकवादियों को अत्याधुनिक हथियारों के लिए कहाँ से धन आ रहा है?
    आतंकियों को पाकिस्तानी सेना 12.7 MM की हैवी मशीन गन भी दे रही है। इसके लिए खतरनाक स्टील बुलेट को पाकिस्तान ने चीन की एक कंपनी से गुपचुप तरीके से मंगाया है। साथ ही एलओसी पर पाकिस्तान रोबोटिक हथियारों का इस्तेमाल कर आतंकियो के घुसपैठ में मदद कर सकता है।
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    जम्मू-कश्मीर का विशेषाधिकार समाप्त कर दो केंद्र शासित राज्य बनाने के मद्देनजर हिरासत में लिए विभिन्न राजनीतिक दल...

    अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाए जाने के बाद से ही पाकिस्तान की नाराजगी साफ झलक रही है। पाकिस्तान सरकार और सेना के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकें भी हो चुकी हैं। भले ही कश्मीर भारत का आंतरिक मुद्दा हो, लेकिन संवैधानिक अनुच्छेदों में परिवर्तन किए जाने के बाद से ही पाकिस्तान पूरी दुनिया में मदद की गुहार लगा रहा है। इसी के मद्देनजर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी मदद की अपील की थी। लेकिन वहां भी उसकी नहीं सुनी गई। 

    कश्मीर में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती पर इमरान खान ने डोनाल्ड ट्रंप से लगाई गुहार

    कश्मीर में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बीच पाक पीएम इमरान खान ने डोनाल्ड ट्रंप से लगाई गुहार
    यह पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान अमेरिका की शरण में पहुँच मदद की गुहार करने पहुंचा है। लेकिन पाकिस्तान जब भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देकर धरती के स्वर्ग कश्मीर को नर्क बनाया जा रहा था, क्या इसके लिए भी अमेरिका से पूछा था?
    जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बीच पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। इमरान खान ने  ट्वीट करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कश्मीर मामले में मध्यस्थता करें पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने लिखा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने कश्मीर मामले में मध्यस्थता की पेशकश की अब ऐसा करने का समय आ गया है क्योंकि वहां हालात खराब हो रहे हैं और नियंत्रण रेखा पर भारतीय सेना नए आक्रामक कदम उठा रही है उन्होंने कहा कि यह क्षेत्रीय संकट को हवा देने वाले कदम हैं पाक पीएम ने भारत के साथ अचानक बढ़े तनाव के मद्देनजर देश के शीर्ष नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा के लिए एनएससी की बैठक भी बुलाई 
    इमरान खान ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की यह बैठक सेना के उन आरोपों के बाद बुलाई जिनमें भारत द्वारा ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आम लोगों को निशाना बनाकर क्लस्टर बमों का इस्तेमाल करने की बात कही गई है हालांकि, भारतीय सेना ने इन आरोपों को "झूठा और मनगढ़ंत" बताते हुए खारिज कर दिया था एनएससी की बैठक में रक्षा मंत्री परवेज खत्ताक, विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा और अन्य शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे खान ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार कश्मीर के लोगों को आत्मनिर्णय के उनके अधिकार का उपयोग करने दिया जाना चाहिए उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में शांति और सुरक्षा का एकमात्र रास्ता कश्मीर समस्या के शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण समाधान से होकर गुजरता है गौरतलब है कि इमारन खान ने कुछ समय पहले भी डोनाल्ड ट्रंप से इस मसले पर बात की थी 
    कश्मीर मुद्दे का हल निकालने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश से खुश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि दोनों पड़ोसियों के बीच के इस विवादित मुद्दे को द्विपक्षीय तरीके से नहीं सुलझाया जा सकता भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर ट्रंप द्वारा मध्यस्थ बनने की पेशकश किए जाने के कुछ ही घंटे बाद खान का यह बयान सामने आया है गौरतलब है कि दोनों नेताओं ने व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की थी वहीं, भारत सरकार ने ट्रंप (Donald Trump) के इस दावे को सिरे से खारिज किया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने का अनुरोध किया है अमेरिका की तीन दिन की यात्रा पर गए इमरान खान ने ट्रंप के इस कदम का स्वागत किया था अमेरिका के फॉक्स न्यूज से इमरान खान ने कहा था कि द्विपक्षीय तरीके से हम कभी (कश्मीर विवाद) नहीं सुलझा सकेंगे"
    ओवल ऑफिस में ट्रंप के साथ पहली मुलाकात के कुछ ही घंटे बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा था कि एक वक्त था जब जनरल (परवेज) मुशर्रफ और भारत के प्रधानमंत्री(अटल बिहारी) वाजपेयी थे, उस वक्त हम कश्मीर मुद्दा सुलझाने के बहुत करीब आ गए थे लेकिन उसके बाद से हम दो अलग-अलग ध्रुवों पर हैं और मुझे वाकई लगता है कि भारत को बातचीत करनी चाहिए अमेरिका इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है. राष्ट्रपति ट्रंप वाकई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं इसके बाद जब फॉक्स न्यूज के एंकर ने भारत का बयान पढ़ा था कि भारत का हमेशा से यही रुख रहा है कि पाकिस्तान के साथ लंबित सभी मुद्दों को द्विपक्षीय तरीके से सुलझाया जाएगा, खान ने कहा था कि हम इस धरती के 1.30 अरब लोगों की बात कर रहे हैं सोचिए अगर यह मुद्दा सुलझ जाता है तो अमन का आलम क्या होगा 
    इस बात से सिरे से इनकार करते हुए कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कभी भी कश्मीर पर अमेरिकी मध्यस्थता की बात कही है, भारत ने कहा था कि पाकिस्तान के साथ किसी प्रकार के संबंध के लिए सीमा पार से आतंकवाद का बंद होना अनिवार्य है शिमला समझौता और लाहौर उद्घोषणा भारत-पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों को द्विपक्षीय तरीके से सुलझाने का आधार प्रदान करता है इमरान खान ने ट्रंप की टिप्पणी का स्वागत करते हुए कहा था कि राष्ट्रपति, मैं आपको बता सकता हूं कि अभी अगर आप मध्यस्थता करके इस मुद्दे को सुलझा सकते हैं तो आपको अरबों लोगों की दुआएं मिलेंगी एक अन्य सवाल के जवाब में खान ने कहा कि अगर भारत अपने परमाणु हथियार नष्ट कर दे तो पाकिस्तान भी उन्हें खत्म कर देगा उन्होंने कहा कि हां, क्योंकि परमाणु युद्ध कोई विकल्प नहीं है 
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    जम्मू और कश्मीर में भारी मात्रा में सेना की मौजूदगी को लेकर ना सिर्फ कश्मीरी और राजनीतिक पार्टियां बल्कि पूरा देश ...

    पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध का विचार भी खुद को बर्बाद करने वाला है क्योंकि हमारी सीमाएं ढ़ाई हजार मील तक आपस में जुड़ी हुई हैं इमरान खान ने कहा था कि मुझे लगता है कि उपमहाद्वीप में लोगों में ऐसी भावना है कि फरवरी में कुछ घटनाएं हुई थीं और सीमा पर फिर से तनाव हुआ इसलिए लोगों में ऐसी भावना है और इसलिए मैंने राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा कि क्या वह इस भूमिका में आना चाहेंगे अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है, एकमात्र ऐसा देश है जो कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए पाकिस्तान और भारत के बीच मध्यस्थता कर सकता है इमरान खान ने कहा था कि हम पिछले 70 साल से सिर्फ और सिर्फ कश्मीर के कारण सभ्य पड़ोसियों की तरह नहीं रह सके हैं (एजेंसीज इनपुट्स सहित)