जम्मू कश्मीर में हो रही इस्लामिक आतंकवाद से निपटने के लिए हिन्दू सम्राट पोरस और सिकन्दर युद्ध को स्मरण करना होगा। सिकन्दर के जैसे ही भारत की पावन धरती पर कदम रखते ही हिन्दू सम्राट पोरस ने ऐसी मार लगाई कि अपने जीवन में दुबारा भारत की तरफ सोंचना तो दूर निगाह करने की हिम्मत नहीं हुई।
दूसरे, 1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान मोहम्मद रफ़ी का बहुचर्चित गीत "कहनी है एक बात हमें, इस देश के पहरेदारों से, संभलकर रहना अपना देश में छिपे हुए गद्दारों से..." आज भी प्रासांसिग है। जब तक सरकार इन पाकिस्तान समर्थकों और आतंकियों को संरक्षण देने वालों पर प्रहार नहीं करेगी, भारत से आतंकवाद और नक्सलवाद समाप्त नहीं होगा। और जिस दिन इन लोगों पर प्रहार करना शुरू कर दिया किसी आतंकवादी की भारत में कदम रखने की हिम्मत नहीं होगी।
कांग्रेस और फारूक अब्दुल्ला आतंकी हमलों पर जश्न मना रहे हैं लेकिन मोदी को दोष दे रहे हैं कि वह जीत का जश्न मना रहे हैं और बधाई संदेशों का जवाब देने में व्यस्त हैं।
सच्चाई तो यह है कि कांग्रेस सरकार बनाने की उम्मीद लगाए बैठी थी और पाकिस्तान भी कांग्रेस की तरफ मुंह उठा कर देख रहा था कि कांग्रेस की सरकार बने और उसे करोड़ों की भिक्षा मिल सके क्योंकि कांग्रेस ने तो “पाकिस्तान” गोद ले लेना था।
लेकिन सरकार बना ली मोदी ने और इसी से जल भुन कर कांग्रेस ने पाकिस्तान में बैठे अपने चेले चपाटों को इशारा किया कि अभी हम देश को आग लगाने में असमर्थ हैं, इसलिए तुम लोग जम्मू कश्मीर आतिशबाजी कर दो। फारूक अब्दुल्ला जैसे निर्लज्ज पाकिस्तानी दलाल हर आतंकी हमले पर पाकिस्तान के आगे नाक रगड़ने की वकालत करने लगते हैं कि पाकिस्तान से बातचीत बिना शांति नहीं हो सकती।
लेखक चर्चित YouTuber
फारूक को दर्द है उसका पुत्र कश्मीर से चुनाव हार गया और महबूबा खुद हार गई, इसलिए फारूक, महबूबा और कांग्रेस की तिकड़ी के गुलाम पाकिस्तान में बैठे हैं जो आतंकियों का हैंडल घुमाते हैं मैदान में उतार दिए। एक के बाद एक 4 दिन में 4 हमले करा दिए। पहला तो मोदी की शपथ से एक घंटे पहले किया जिससे कांग्रेस के जलते हुए दिल पर ठंडक पड़ गई।
नवाज़ शरीफ ने कहा था कि अटलबिहारी वाजपेयी की लाहौर यात्रा के बाद पाकिस्तान ने करगिल युद्ध छेड़कर गलती की थी। क्यों मज़ाक करते हो नवाज़ शरीफ, तुम्हारी मोदी को बधाई देने से पहले ही तुम्हारे कायर शागिर्दों ने रियासी में हमला कर 10 निर्दोषों की हत्या कर दी। उसके बाद 3 हमले और किये। नवाज़ मियां गलती यह है जो तुमने फिर से दोहराई। बधाई तुमनें उसी वक्त दी जब रियासी में हमला करना था, वरना तो मोदी की सरकार बनने का फैसला 3 पहले होते ही अनेक देशों ने बधाई दे दी थी।
पाकिस्तान और उसके आतंकियों ने जोर लगा दिया मोदी सत्ता में वापस न आए, भारत के मुसलमानों को भड़काते रहे (जो पहले से मोदी से नफरत करते हैं सब सुविधाएं लेकर) और अपनी गुलाम कांग्रेस और फारूक से मोदी को अपने एटम बम की धमकी दिलवा कर दोस्ती करने की सलाह दिलवाते रहे लेकिन सारे मंसूबे धरे रह गए जो मोदी फिर से आ गया।
कांग्रेस और उसके संगी साथी होश की पी लें और surgical strike/Balakot याद रख लें, मोदी की चुप्पी तूफ़ान से आने के पहले की शांति है - अपने “सबूत मांगने वाले गैंग” को तैयार कर लो क्योंकि पाकिस्तान को अबकी बार तबियत से ठोका जाएगा मोदी के इटली से वापस आने के बाद। अब यह मैं क्यों कह रहा हूं वह बताने वाली बात नहीं है।
पाकिस्तान इतना समझ ले, उसने एक बार फिर बहुत बड़ी गलती कर दी है। उसके आतंकियों को फारूक और महबूबा के लोग जो मदद कर रहे है, उन्हें भी ठोका जाएगा। अबकी बार नेतन्याहू की तरह ठोकेगा मोदी।
जवानों के बलिदान पर बेशर्मी के बयान देने के लिए विपक्षी नेता खासकर कांग्रेसी तैयार रहते हैं कि बस मौका मिले और मुंह फाड़ दें। पूंछ में वायुसेना के जवानो पर हुए आतंकी हमले को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बीजेपी का ‘चुनावी स्टंट’ करार दे दिया। बता दें कि इस आतंकी हमले में एयरफोर्स के एक जवान को वीरगति प्राप्त हुई है।
उन्होंने कहा कि पहले से तैयारी करके हमले करवाए जाते हैं। यह भाजपा को चुनाव में जिताने का स्टंट होता है और इसमें कोई सच्चाई नहीं होती।
कितनी गंदगी भरी है इन लोगों के दिमाग में, पुलवामा हमले में इन लोगों ने सारी हदें पार कर दी जो बालाकोट एयर स्ट्राइक के सबूत मांगते फिर थे। इन लोगों के घरों में यदि कोई आतंकी हमले में मौत हो तो उसे यदि स्टंट कहा जाए तो उन्हें कैसा लगेगा।
दूसरी तरफ 87 वर्षीय फारूक अब्दुल्ला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को चुनौती दे रहे हैं कि -
लेखक चर्चित यूटूबर
“दम है तो राजनाथ सिंह POK वापस लेकर दिखाएं; अगर रक्षा मंत्री कहते हैं कि POK को वापस लाएंगे, तो जाएं, उन्हें रोकने वाले हम कौन हैं, लेकिन याद रहे, पाकिस्तान ने भी चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं, उनके पास परमाणु बम हैं और दुर्भाग्य से वो परमाणु बम हमारे ऊपर गिरेंगे”। दूसरे, फ़ारूक़ भूल रहे हैं कि भारत भी atomic देश है। कहते हैं, मोदी को प्रधानमंत्री बने लगभग डेढ़ वर्ष हुआ था, जब CIA ने Pentagon को दी अपनी रिपोर्ट में कहा था : 'नरेंद्र मोदी विश्व का सबसे खतरनाक प्रधानमंत्री है। अभी तक पाकिस्तान ही भारत पर हमले करता रहा है, अब हमला होगा तो भारत की तरफ से होगा और पाकिस्तान को nuclear इस्तेमाल करने का मौका भी नहीं देगा'।
फारूक को पता नहीं उनके इस atomic मुल्क की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज़ बलूच ने क्या कहा है -
“हम टेंशन में हैं क्योंकि भारत पाकिस्तान में घुस कर उसके नागरिकों को मार रहा है”। वो जिन नागरिको की बात कर रही है वो आतंकी है और पिछले साल ऐसे 30 से ज्यादा आतंकियों को “unknown” लोगो ने 72 हूरो के पास भेज दिया। आगे कहती हैं कि “भारत का जासूसी नेटवर्क इतना फ़ैल गया है कि वह कई द्वीपों तक फ़ैल गया है। भारत लगातार operation कर रहा है और दुनिया का कोई देश उसे बचाने नहीं आ रहा”।
फारूक मियां तुम्हारे एटमी मुल्क का ये डर है और ये डर अच्छा है। इसकी ही तुम राजनाथ को धमकी दे रहे हो। पगला गए हो क्या?
मुमताज़ के बयान के बाद UN में पाकिस्तान के स्थाई प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने भी कहा है :
“PM मोदी घर में घुस कर मारने की बात कर रहे हैं। अब आप ही बताएं कि हम क्या करें”? जो पाकिस्तान कश्मीर राग अलापे बिना नहीं रहता था UN में वो आज कह रहा है - हमें बचा लो।
फारूक को यह भी नहीं पता कि पाकिस्तान के रहनुमा चीन POK में चलने वाले 969 करोड़ के नीलम-झेलम hydro power प्रोजेक्ट को बंद कर दिया। भारत तो इसका विरोध कर ही रहा था, POK के लोग भी इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं।
और फारूक मिया यह भी देखो पाकिस्तान के पिटे हुए नेता फवाद चौधरी राहुल गांधी का प्रचार करने आ गए।
जनाब फारूक अब्दुल्ला आपको पाकिस्तान की इतनी जी हुजूरी करनी है तो वहां चले क्यों नहीं जाते - 87 साल की उम्र में वही सब इच्छाएं पूरी कर लीजिए और याद रखिए कि आप जोर लगा कर चुनौती देते थे मोदी को कि- “किसी के बाप में दम नहीं है जो 370 को हटा दे”। मोदी ने हटा दी ।
अब चुनौती दे रहे हो POK ले कर दिखाओ। POK भी आएगा और बलूचिस्तान भी आएगा और वैसे ही भारत का हिस्सा बनेगा जैसे पाकिस्तान पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) पर हुकूमत करता था।
मजे की बात तो ये है कि एटम बम की धमकी देनी पाकिस्तान ने बंद कर दी मगर फारूक जैसे पाकिस्तान के जड़ खरीद गुलाम दे रहे है।
पाकिस्तान को पता चल गया कि हमारा बम तो भारत रास्ते में ही उड़ा देगा लेकिन भारत जो बम फेंकेगा वो पाकिस्तान को विश्व के नक़्शे से उड़ा देगा। ये बात फारूक को भी समझ आ जानी चाहिए।
कपिल सिब्बल और फारूक अब्दुल्ला ने राम पर की चर्चा, मोहम्मद ज़ुबैर (बीच में) कह रहा - मंदिर वहीं बन रहा है
हाल ही में कुछ लोगों ने अफवाह उड़ाई कि राम मंदिर वहाँ नहीं बन रहा है जहाँ बाबरी ढाँचे को ध्वस्त किया गया है। वैसे मौलाना रशीदी जैसों को टीवी परिचर्चा में ऐसा कहते सुना भी जा सकता है। जिसका परिचर्चा में उपस्थित साधु-संतों द्वारा जवाब भी दिया जाता है, लेकिन वह अपनी ही बात पर अडिग रहते हैं। इस पर फैक्ट-चेक कर के मोहम्मद ज़ुबैर ने ट्वीट किया कि मंदिर वहीं बन रहा है जहाँ ढाँचा गिरा था। सोचिए, ALTNews वाले मोहम्मद ज़ुबैर ने दिल पर कितना भारी पत्थर रख कर लिखा होगा – “मंदिर वहीं बन रहा है।” ठीक उसी तरह, अब जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी राम भजन गा रहे हैं। वहीं फारुख अब्दुल्ला, जो पाकिस्तान के हिमायती रहे हैं।
वैसे ही कपिल सिब्बल यूपीए काल में केंद्रीय मंत्री थे, जब अदालत में एफिडेविट डाल कर भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताया था। राम मंदिर का फैसला अटकाने के लिए कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचे थे। आज वही कपिल सिब्बल रामभक्त बने पड़े हैं। ‘The Wire’ जैसे वामपंथी मीडिया संस्थान जोशीमठ स्थित ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के इंटरव्यू ले रहे हैं, ताकि वो पीएम मोदी को गलत साबित कर सकें। क्या यही वो ‘अच्छे दिन’ हैं, जिनकी हिन्दू बात करते थे?
अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने राम भजन गाया है। उन्होंने राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के ‘दिल से विद कपिल सिब्बल’ एपिसोड में उनके कहने पर ये भजन सुनाया।
फारूक अब्दुल्ला के गाए भजन ‘किस गली गयो मेरो राम, आँगन मेरो सूना-सूना’ का वीडियो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है। इस दौरान कपिल सिब्बल के साथ फारूक अब्दुल्ला ने देश के कई मुद्दों पर अपनी राय रखी तो भगवान राम के बारे में भी बात की। ऐसा नहीं है कि फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने पहली बार राम धुन गयी है, पहले भी गा चुके हैं, देखिए उनका एक पुराना वीडियो:
‘राम बादशाह थे उसकी मेहरबानी से’
कपिल सिब्बल ने जब उनसे पूछा कि आप ये कहते रहे हैं कि भगवान राम हमारे भी भगवान है। इस पर फारूक अब्दुल्ला जवाब देते हैं, “मैं ये बात बार-बार कहता हूँ। मैं आपसे कहूँ अभी पाकिस्तान में मौलाना असरार गुजर गए हैं। उनकी किताबों के सात वॉल्यूम्स हैं कुरान के तर्जुमे (अनुवाद) के और उसमें उन्होंने 2 के बारे में लिखा है, एक भगवान राम के बारे में और एक गौतम बुद्ध। दोनों के लिए कहा कि ये बादशाह थे और उसकी (अल्लाह) मेहरबानी से।”
उन्होंने आगे कहा, “गौतम बुद्ध ने बादशाहत ठुकरा दी और कहा कि मैंने लोगों को सच्चाई का रास्ता दिखाना है वो उस रास्ते पर चले बादशाहत छोड़ दी। राम ने बादशाह होकर सबके साथ इंसाफ किया। याद है आपको महात्मा गाँधी क्या कहते थे। रामराज का मतलब क्या था। सबके लिए बराबरी, कोई फर्क नहीं होगा।”
जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम ने कहा, “भारत बहुत बड़ा है। कितने लोग रहते हैं, कितनी भाषाएँ कितने धर्म हैं ये ऐसा बाग है जैसे हमारे यहाँ शालीमार है, चश्मा शाही, ट्यूलिप गार्डन हैं। लोग क्यों देखने आते हैं अलग किस्म के फूलों के रंग हैं।” इसके बाद कपिल सिब्बल कहते हैं कि इनको तो एक ही रंग दिखता है तो फारूक कहते हैं कि क्या करें।
वो आगे कहते हैं कि जब हम सड़क पर चलते हैं तो आप हमारे यहाँ सरदारों की पकड़ के रंग दिखते हैं। खुशी होती है उन्हें देखकर कि ये देखो, ये रंग हैं। यहीं हमारे धर्मों के रंग हैं। हमें धर्मों को पहचानने की कोशिश करनी चाहिए।”
‘ये था राम, हमारा कल्चर’
इस पर सिब्बल कहते हैं कि ये राम की बात करते हैं, लेकिन राम के जो आदर्श हैं उनका पालन नहीं करते हैं। इनकी (बीजेपी) राजनीति राम राज से बिल्कुल अलग है। खुद को रामभक्त कहते हैं। बकौल कपिल सिब्बल, असली रामभक्त तो आम आदमी हैं, जो सच्चाई के आधार पर अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाते हैं।
इस पर फारूक कहते हैं, “हुजूर कमाल देखिए, श्रीराम के बारे में आपसे कहता हूँ जो मैं जानता हूँ उनके बाप ने अपनी दूसरी बीवी को वचन दिया था जो भी तुम जो माँगोगी मैं देने को तैयार हूँ। उसने माँगा। उन्होंने अपना वचन निभाया। राम ने नहीं कहा था (14 साल के वनवास के लिए)।”
फिर सिब्बल बीजेपी पर तंज करते हुए कहते हैं कि यहाँ तो लोग कुर्सी छोड़ने के लिए भी तैयार नहीं हैं। इस पर फारूक जवाब देते हैं, “जैसे कुर्सी ही सब कुछ है. ये देखिए, जब वो (राम) उस दरिया (सरयू नदी) को पार करने के लिए गए तो वो कश्ती (नाव) वाला क्या कहता है? इन्होंने (राम) कहा कि मेरे पास कुछ नहीं है।”
फारूक आगे बताते हैं, “तब सीता मैया ने अपने हाथ का कंगन निकाला और कहा कि ये ले लीजिए और हमें पार करवा दीजिए। उसने (केवट) हाथ जोड़कर कहा कि भगवान, जब मेरा वक्त आएगा न, स्वर्ग जाने के लिए तब मेरा हाथ पकड़कर ले जाइए।” फारूक अब्दुल्ला और कपिल सिब्बल इसके बाद दोहराते हैं, “ये था राम, ये था हमारा कल्चर।”
‘भगवान हर जगह, हर दिल में हैं’
वो आगे कहते हैं, “कभी राम ने फर्क किया? कौन धर्म है, ये किस धर्म को मानता है। क्या इसकी पहचान है? नहीं। मैं तो यही कहता हूँ कि अल्लाह करे कि जहाँ हम लोग खुशी से रह सकें। इंसान मंदिर जाना चाहे तो जाए। मस्जिद जाना चाहे तो जाए। भगवान हर जगह, हर दिल में हैं। मगर हम उन्हें पहचानते नहीं हैं इसलिए मैं भारतवासियों से कहूँगा कि पहले अपने धर्म को समझने की कोशिश करो। जिस दिन तुम अपने धर्म को समझ जाओगे, उस दिन से किसी दूसरे धर्म से नफरत नहीं करोगे।”
अयोध्या में भव्य राम मंदिर को लेकर बीते महीने दिसंबर में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी मुबारकबाद दी थी। हालाँकि, वो इस शुभकामना के साथ पाकिस्तान का राग अलापना नहीं भूले थे।
‘मजहब से ज्यादा जरूरी वतन है’
इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी और बीजेपी पर भी निशाना साधा। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि हम हुकूमत गिरा नहीं सकते, लेकिन जहाँ वो गलत हो वहाँ कह तो सकते हैं। उन्होंने कहा, “जनाब जो ये रास्ता है थोड़ा बदला दीजिए। इसमें आपका फायदा है। किसान कानूनों को लेकर कहा तो एक नहीं सुनी, लेकिन यूपी में इलेक्शन आता देख वापस ले लिए कानून।”
उन्होंने आगे कहा, “बताइए हम इन्हें कहा गलत कहते हैं हम विपक्ष में रहते हुए भी भारत को मजबूत करना चाहते हैं। कमजोर नहीं करना चाहते हम इसके वासी है।अगर हम इसको डूबते देखेंगे क्या हम बच जाएँगे वतन रहेगा तो हम सब बचेंगे कोई पार्टी हो कोई जमात हो, कोई भी मजहब हो सबसे ज्यादा जरूरी वतन है।”
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार (26 दिसंबर 2023) को कश्मीर को लेकर आशंका जाहिर की है। उन्होंने कहा कि अगर भारत और पाकिस्तान बातचीत के जरिए अपने विवादों को खत्म नहीं करते हैं तो कश्मीर का भी हश्र गाजा एवं फिलिस्तीन जैसा होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर हम बातचीत के जरिए समाधान नहीं खोजते हैं तो हमारा भी गाजा और फिलिस्तीन जैसा ही हश्र होगा, जिस पर आजकल इजरायल बमबारी कर रहा है।” उन्होंने यह टिप्पणी पुंछ में आतंकवादी हमले में सेना के 5 जवानों के मारे जाने और अगले दिन तीन नागरिकों की मौत के बाद आई है।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “अटल बिहारी वाजपेई ने कहा था कि हम अपने दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन अपने पड़ोसी नहीं। यदि हम अपने पड़ोसियों के साथ मित्रवत रहेंगे तो दोनों प्रगति करेंगे। पीएम मोदी ने यह भी कहा है कि युद्ध अब कोई विकल्प नहीं है। इसलिए मामलों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।”
फारूक को नहीं भूलना चाहिए कि दोस्ती का हाथ बढ़ाने पर पलटे में पाकिस्तान ने भारत को दिया: (1) कारगिल और (2) पुलवामा। क्या फारूक दूसरा कारगिल या पुलवामा चाहते हैं? अब समय है, भारत में आतंकवादियों को भेज बेगुनाहों को मौत के मुंह में डालने वाले पाकिस्तान को सबक सिखाने की।
#WATCH | National Conference MP Farooq Abdullah says, "Atal Bihari Vajpayee had said that we can change our friends but not our neighbours. If we remain friendly with our neighbours, both will progress. PM Modi also said that war is not an option now and the matters should be… pic.twitter.com/EcPx9B70jJ
फारूक ने पूछा, “बातचीत कहाँ है? इमरान खान को छोड़ दीजिए, अब नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने वाले हैं और वे कह रहे हैं कि वे भारत के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं। लेकिन, हम बात करने के लिए तैयार क्यों नहीं हैं? अगर हम कोई समाधान नहीं निकालते हैं। तो हमारा भी वही हश्र होगा, जो गाजा और फिलिस्तीन का हो रहा है।”
उन्होंने कहा, “कुछ भी हो सकता है। अल्लाह ही जाने हमारा क्या हाल होगा। अल्लाह रहम करे।” उन्होंने कहा कि पड़ोसी होने के नाते दोनों देशों को बातचीत करके इस मुद्दे का समाधान खोजना चाहिए। इससे दोनों देश तरक्की करेंगे और दोनों देशों में खुशहाली आएगी।
वहीं, भाजपा नेता हिना शफी भट ने फारूक अब्दुल्ला के बयान की आलोचना की है। उन्होंने कहा, “यह अफसोसजनक है कि जम्मू-कश्मीर के एक वरिष्ठ नेता अभी भी पाकिस्तान से बातचीत करने की बात कह रहे हैं। फारूक अब्दुल्ला को अब सीख लेनी चाहिए। यह पाकिस्तान के सामने झुकने का समय नहीं है। हमने कई बार बातचीत करने की कोशिश की है, लेकिन उन्होंने हर बार हमारी पीठ में छुरा घोंपा है।”
फारूक अब्दुल्ला ने यह पिछले एक सप्ताह में जम्मू-कश्मीर में हुए कई आतंकी घटनाओं के बाद आई है। आतंकियों ने पुंछ में घात लगाकर सेना के जवानों पर हमला किया था, जिसमें पाँच जवान बलिदान हो गए। वहीं, बारामूला मस्जिद के अंदर एक रिटायर SSP शफी मीर की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
ग़ुलाम नबी आज़ाद द्वारा कांग्रेस छोड़ते ही जम्मू-कश्मीर में सियासत के सारे आंकड़े ही बदल गए। जिस जोश के साथ भाजपा विरोधियों ने गुपकार गठबंधन बनाया था, आज़ाद ने उस गुब्बारे की हवा निकाल दी। अब देखना यह है कि गठबंधन के टूटने से भाजपा कितना फायदा होगा, भविष्य के गर्भ में छिपा है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद इसे दोबारा से सक्रिय कराने के लिए बने गुपकार गठबंधन में ही फूट पड़ गई है। गुपकार के लिए जिन नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला के घर पर पहली रणनीति बनी थी, उन्होंने ही गुपकार से नाता तोड़कर जम्मू-कश्मीर में जब विधानसभा चुनाव होंगे, तो सभी 90 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इसको बीजेपी की रणनीतिक जीत माना जा रहा है, क्योंकि गुपकार के माध्यम से अनुच्छेद 370 दोबारा सक्रिय कराने के दावे जम्मू-कश्मीर के विभिन्न संगठनों द्वारा किये जा रहे थे। इसके साथ ही कश्मीर में इस अनुच्छेद के खत्म होने से आतंकी घटनाओं पर नियंत्रण और कश्मीर में फिर से पर्यटकों की वापसी के लिए शांति प्रयासों में तेजी आई है। दूसरी ओर गुलाम नबी आजाद के बाद छह और नेताओं के कांग्रेस से इस्तीफा देने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में उथल-पुथल और तेज हो गई है।
मोदी सरकार ने चाक-चौबंद तरीके से तीन साल पहले किया था अनुच्छेद 370 का खात्मा बीजेपी ने अपने सबसे बड़े मुद्दों में से एक जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म कर जता दिया कि वो अन्य दलों के तरह सिर्फ खोखले वादे नहीं करती, बल्कि मुश्किल से मुश्किल काम को देश हित में पूरा करके ही दम लेती है। इसी के तहत पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय किया गया। इस बड़े निर्णय के बाद लगा था कि कश्मीर में असमाजिक और आतंकी तत्व माहौल खराब कर सकते हैं। लेकिन केन्द्र सरकार की सुनियोजित प्लानिंग, कश्मीर के बड़े नेताओं की नजरबंदी, इंटेलिजेंस और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और इंटरनेट पर पाबंदी के चलते कोई बड़ी अनहोनी घटना नहीं हुई। बल्कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति के तीन साल बाद की अवधि के दौरान घाटी में अमन-चैन में तेजी और पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।
क्या है गुपकार गठबंधन…जिन अब्दुल्ला के घर गुपकार की नींव रखी, अब वही हुए अलग एक ओर मोदी सरकार अनुच्छेद 370 को खत्म करने जा रहे थे, दूसरी ओर कश्मीर के कुछ दल अलग ही खिचड़ी पका रहे थे। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला का आवास श्रीनगर में 01, गुपकार रोड पर है। यहीं पर 4 अगस्त 2019 को कश्मीर के 8 दलों ने एक साथ बैठक रखी गई। इसमें इन दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नया गठबंधन बनाने का फैसला लिया। इसी को गुपकार ग्रुप या गुपकार गठबंधन कहा गया। हालांकि तब तक केंद्र सरकार ने राज्य से अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35ए की वापसी पर कदम एक दिन बाद उठाया था, लेकिन राज्य में सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी गई। सभी पर्यटकों को तुरंत राज्य छोड़ने के लिए कहा गया। एक साल बाद ये दल फिर फारूक अब्दुल्ला के निवास पर मिले और विधिवत गुपकार गठबंधन बनाने की घोषणा की।
कश्मीर में अनुच्छेद 370 को फिर से सक्रिय करने की कोशिशों को बड़ा झटका जिन फारुख अब्दुल्ला के घर गुपकार गठबंधन की नींव रखी गई थी, अब वही इससे अलग हो गए हैं। इससे जम्मू- कश्मीर में अनुच्छेद को फिर से सक्रिय करने की कोशिशों को बहुत बड़ा झटका लगा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने घोषणा करके गुपकार समूह से खुद के अलग होने का स्पष्ट संकेत दे दिया। गौरतलब है कि इस गुपकार समूह ने जिला विकास परिषद के चुनाव एक साथ लड़े थे, जिसमें शुरुआत में सज्जाद गनी लोन की अध्यक्षता वाले पीपुल्स कॉन्फ्रेंस भी एक घटक थी। लेकिन गुपकार गठबंधन को ज्यादा सफलता नहीं मिल पाई थी।
नेशनल कांफ्रेंस का जम्मू-कश्मीर की सभी 90 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) ने एक साथ कई ट्वीट कर पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन (PAGD) के कुछ घटकों द्वारा पार्टी के खिलाफ दिए भाषणों पर निराशा जताई। पार्टी के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भी कहा कि PAGD के कुछ सदस्यों द्वारा बयानबाजी, ऑडियो और भाषण से उन्हें ठेस पहुंची है। नेशनल कांफ्रेंस के एक अन्य ट्वीट के अनुसार, ”प्रोविंसियल कमेटी के सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित किया कि JKNC को तैयारी करनी चाहिए और सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए। इसके सीधे से मायने हैं कि जम्मू-कश्मीर में जब भी विधानसभा चुनाव होंगे, नेशनल कांफ्रेंस गुपकार ग्रुप के साथ नहीं, बल्कि सारी सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ेगी।
उधर आजाद के इस्तीफे से कांग्रेस में भूचाल, कश्मीर के छह और नेताओं ने कांग्रेस छोड़ी इस बीच जम्मू-कश्मीर के राजनीति में कांग्रेस के कद्दावर नेता गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे से भी बड़ा भूचाल आया है। आजाद ने अपने इस्तीफे में राहुल गांधी को खूब खरी-खोटी सुनाई है। आजाद के इस्तीफे के चलते प्रदेश कांग्रेस से अब तक छह बड़े नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में आजाद के इस्तीफे को कांग्रेस के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस कमेटी से पूर्व विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री जीएम सरूरी, पूर्व विधायक हाजिद अब्दुल राशिद, पूर्व विधायक मोहम्मद अमीन भट, पूर्व विधायक गुलजार अहमद वानी, पूर्व विधायक चौधरी मोहम्मद अकरम और पूर्व कैबिनेट मंत्री आरएस चिब ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
पूर्व कैबिनेट मंत्री जुगल किशोर शर्मा भी सोनिया गांधी को देंगे इस्तीफा इसके अलावा रियासी विधानसभा के पूर्व विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री जुगल किशोर शर्मा ने भी इस्तीफा देने की घोषणा की है। वर्ष 2002 से 2008 के दौरान कांग्रेस-पीडीपी गठबंधन सरकार में मंत्री रहे जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि वह शनिवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा देंगे। जुगल किशोर शर्मा पीडीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार में जल शक्ति, लोक निर्माण विभाग, पर्यटन विभाग के कैबिनेट मंत्री रहे हैं। बताया जाता है कि रियासी को जिला का दर्जा दिलवाने में जुगल किशोर शर्मा की अहम भूमिका रही है।
आजाद के चिट्ठी बम से कांग्रेस में ही सियासत, गहलोत ने गुलाम को संजय का चापलूस बताया इधर गुलाम नबी आजाद के कांग्रेस छोड़ने के लेटर में राहुल गांधी पर चापलूसों से घिरे रहने के आरोप के बाद कांग्रेस में ही सियासत तेज हो गई है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुलाम नबी आजाद को ही राजीव गांधी के भाई संजय गांधी का चापलूस बता दिया है। गहलोत ने शुक्रवार को जयपुर में मीडिया से कहा-संजय गांधी के वक्त में ये सब चापलूस ही माने जाते थे। गुलाम नबी आजाद समेत जो लोग भी संजय गांधी के साथ थे। वे चापलूस ही माने जाते थे। साइकोफेंट माने जाते थे। संजय गांधी ने परवाह नहीं की। उस वक्त संजय गांधी अगर दबाव में आकर हटा देते तो आज गुलाम नबी आजाद का नाम देश के लोग नहीं जानते।
‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ फिल्म अगर देखी है तो जरा इसे बनाने के पीछे लगी मेहनत और की गई रिसर्च को भी समझ लीजिए। अगर नहीं देखी है, तो ये सब जानने के बाद आप खुद देख आएँगे। फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री, अभिनेता अनुपम खेर, अभिनेत्री पल्लवी जोशी, निर्माता अभिषेक अग्रवाल और ‘ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा’ के अध्यक्ष सुरिंदर कौल की मौजूदगी में नई दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म के पीछे की मेहनत और रिसर्च को एक डॉक्यूमेंट्री के रूप में पेश किया गया।
इसमें बताया गया है कि तमाम फतवों के बावजूद कैसे इस फिल्म के निर्माण को पूरा किया गया। निर्देशक विवेक अग्निहोत्री का कहना है कि जब कश्मीर में पंडितों के नरसंहार से जुड़ी मानवीय कहानियों से उनका परिचय हुआ, तब जाकर उन्होंने इस विषय पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया। वीडियो में विवेक अग्निहोत्री अपनी पत्नी पल्लवी जोशी से ये चर्चा भी करते दिख रहे हैं कि ऐसा क्या है, जो अभी तक लोगों तक नहीं पहुँचा है और रिपोर्ट नहीं किया गया है।
कश्मीरी पंडित राजेंद्र कौल ने बताया कि ‘कश्मीर’ नाम इतना प्राचीन है कि महाभारत के समय में भी इसका उल्लेख मिलता है। वहीं सुरिंदर कौल का कहना है कि 1100-1200 ईस्वी तक वहाँ केवल हिन्दू ही रहा करते थे। भारत के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक ललितादित्य का शासनकाल था, जब भारत के अधिकतर हिस्सा उनके अंतर्गत आता था – ये भी बताया गया है। वहीं डॉक्टर राकेश कौल ने बताया कि कैसे कश्मीर के शाही राजा लोग हिन्दू थे, जिन्होंने अफगानिस्तान में शासन किया।
इसके बाद आक्रांता लोग आने लगे, जिन्होंने पहले मदद का दिखावा किया और फिर वहाँ कब्ज़ा करने लगे। इसी तरह शम्सुद्दीन ऐराकी भी ईराक से आया और उसने न सिर्फ जबरन धर्मांतरण किया, बल्कि कई मंदिरों को भी तोड़ा। उसने अपने आत्मकथा में भी लिखा है कि कैसे उसने कश्मीर में लोगों को मुस्लिम बनाया। विशेषज्ञ कहते हैं कि ये एक निरंतर नरसंहार है, जो कई वर्षों से हो रहा है और लगातार होता रहा। नब्बे के दशक से पहले भी ये हो रहा था।
इसी तरह एक विशेषज्ञ ने बताया कि कैसे कश्मीरी नेता शेख अब्दुल्ला ने भाषण दिया था कि कश्मीरी पंडित स्वाभाविक रूप से ‘मुस्लिमों के दुश्मन’ हैं। उन्होंने कश्मीरी पंडितों की तुलना शैतान से कर दी। विशेषज्ञ के अनुसार, और जब कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मिलने पहुँचा, जब नेहरू ने कहा – ‘ये तो शेख अब्दुल्ला का साथ दो, या जहन्नुम में जाओ।’ कश्मीरी समस्या के लिए ब्रिटिश को भी जिम्मेदार ठहराया जाता है, क्योंकि वो जहाँ भी गए वहाँ दिक्कतें खड़ी हो गईं।
इसी तरह जीवन ज़ुत्शी ने बताया कि पुराने कश्मीर के निवासी अथवा कश्मीरी पंडितों ने 1947 से ही घाटी को छोड़ना शुरू कर दिया था। इसी तरह बंसी पंडित ने बताया कि 1967 में वो कॉलेज में थे और तब एक लड़की थी, जिसका नाम परमेश्वरी था। उस नाबालिग हिन्दू लड़की का अपहरण कर के इस्लामी धर्मांतरण करा दिया गया था और ‘परवीन अख्तर’ नाम दे दिया गया। इसके बाद उसकी शादी एक मुस्लिम से कर दी गई। राज्य और केंद्र सरकार शांत रही।
वीडियो में बताया गया कि कैसे 700 पीड़ितों से विवेक अग्निहोत्री ने बातचीत की। वो खुद कार ड्राइव कर-कर के वहाँ पहुँचे और उनसे बातचीत की। पीड़ितों ने बताया कि कैसे मस्जिद में नमाज के बाद मुस्लिम भीड़ उग्र हो जाती थी। मुस्लिम लड़कों के दिमाग में हिन्दू घृणा भरी जाती थी। वो दाढ़ी बढ़ाने लगे। एक महिला ने बताया कि ये कश्मीरी लड़के भगवान शिव की प्रतिमा पर पेशाब कर देते थे। मोहन लाल रैना ने बताया कि एक पुजारी की हत्या हुई और उसके बाद उनके होठ सिल कर उन्हें एक पेड़ पर लटका दिया गया था।
वहीं सुनंदा वशिष्ठ ने बताया कि मुस्लिम परिवारों के 16-25 उम्र के बच्चे कट्टरपंथी बनने लगे थे। कश्मीर के एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि उस समय ख़ुफ़िया सूचना मिली थी कि 100 कश्मीरी युवकों को पाकिस्तान ले जाकर ‘प्रशिक्षण’ दिया गया था। वहीं अंजलि रैना ने बताया कि रात के अँधेरे में बंदूक चलाने की प्रैक्टिस करते लोग दिखते थे। अनुपम खेर ने बताया कि कश्मीर में पंडितों से कहा जाता था कि अपनी कंट्री में जाओ, जबकि भारत के अंदर ही कश्मीर है।
इसी तरह एक पीड़िता मंजू काक कौल ने एक पुरानी घटना याद की, जब वो 7वीं-8वीं कक्षा में थीं। उन्होंने बताया कि तब एक कट्टरवादी ने उन्हें पकड़ के दीवार से टकरा दिया और अपने हाथ उनके शरीर पर फेरते हुए कहा – बहुत बकवास करती हो। इसी तरह सुनीता दरवेश कौल ने बताया कि कैसे एक लड़के ने उनसे कहा था कि हिन्दुओं को यहाँ मार डाला जाएगा। ये 1988 की घटना है। पाकिस्तान में कई आतंकी ट्रेनिंग कैम्प्स थे।
सुरिंदर कौल का कहना है कि 1988 आते-आते माहौल बदलने लगा था और JKLF की एक नोटिस में लिखा था कि हिन्दू इलाका छोड़ कर चले जाएँ। मधुसूदन कौल के एक हाथ की एक उँगली ही चली गई, आतंकियों की गोली से। ये भी याद दिलाया गया है कि कैसे जस्टिस गंजू की हत्या में यासीन मलिक ने अपना हाथ कबूल किया था। नवीन धार ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चे पेट्रोल बम मार रहे थे और पत्थरबाजी कर रहे थे।
मस्जिदों से घोषणा की जाती थी – मुस्लिम बन जाओ, इलाका छोड़ दो या मरो। एक महिला ने बताया कि जब कश्मीर में उनके परिवार को पता चला कि मारने आ रहे हैं तो उनके दादा ने कहा कि अगर वो लोग आते हैं तो वो सबसे पहले अपनी ही पोती को मार देंगे। कश्मीर में उस समय महिलाओं के लिए डर का ये आलम था। बिट्टा कराटे ने कबूला भी था कि वो अपनी सगी बहन या माँ को भी मार देता, इस मकसद के लिए।
एक पीड़ित ने बताया कि उनके पिता को मार कर उनके शरीर के साथ ईंटें बाँध कर नदी में फेंक दिया गया था। अनुराधा नाम की एक महिला ने बताया कि किसी ने अपने पिता को नंगा नहीं देखा होगा, उन्होंने देखा है। उनके पिता के शरीर में कई गोलियाँ मारी गई थीं और पोस्टमॉर्टम के बाद ठीक से सिला भी नहीं गया था। नीरज साधु नामक एक महिला ने बताया कि उनका घर कश्मीर में था और माँ इसे काफी साफ़-सुथरा रखती थीं, ऐसे में वो दोबारा उस घर को गलत हालत में देख कर रो पड़ेंगी।
रेणु रैना नाम की महिला ने बताया कि एक सरदार जी जब कुछ लोगों को जा रहे थे, जब उनके पिता ने कहा था कि मुझे नहीं जाना है लेकिन मैं चाहता हूँ कि मेरी बेटी यहाँ से निकल जाए। अभिनव रैना का कहना है कि अधिकतर टेंट में पड़े हुए थे। इसी तरह एक अन्य युवक ने बताया कि उनकी माँ ने अपने बचे-खुचे गहने बेच कर बच्चों को पढ़ाया। विशेषज्ञों की मानें तो 1 लाख घर वीरान हो गए, जो 35 बिलियन डॉलर (2.68 लाख करोड़) की संपत्ति होते हैं। इसी तरह, 3.3 लाख करोड़ रूपए की जमीनें वहाँ कश्मीरी पण्डितों से छीन ली गईं।
शिवानी नाम की एक लड़की का कहना है कि हमलोग अपने माता-पिता से पूछते हैं कि हमारा अपना शहर कहाँ है। उस समय आज़ादी के नारे लगते थे। पाकिस्तान से लेकर कश्मीर तक इन कट्टरवादियों के कई आका बैठे थे। इसी तरह जनवरी 1989 का एक वाकया विजय कुमार गंजू ने सुनाया। उन्होंने बताया कि तब तत्कालीन प्रधानमंत्री से किसी पत्रकार ने कश्मीर को लेकर पूछा तो उन्होंने कहा कि स्थिति अच्छी नहीं है और हम भी चिंतित हैं, लेकिन हम क्या कर सकते हैं क्योंकि वो (फारूक अब्दुल्लाह) मेरे दोस्त हैं।
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‘जब कोई जलता है तो मवाद निकलता है’ – The Kashmir Files यही पूछता है – सच को स्वीकार करोगे या पर्दा डालने की र
इस डॉक्यूमेंट्री में इस पर भी ध्यान दिलाया गया कि कैसे भारत की GDP कभी दुनिया का 40% हुआ करती थी, लेकिन आज़ादी आते-आते वो 2% पर आ गई। इसी तरह UN ने कश्मीर में हुई घटना को ‘Near Genocide (नरसंहार के करीब)’ बताया, जबकि ये नरसंहार की हर परिभाषा को पूरा करता है। कश्मीरी पंडितों को आशा है कि वो जल्द ही अपने घर जाएँगे। वो कहते हैं कि अनुच्छेद-370 को हटाने का मोदी सरकार का फैसला भारत की स्वतंत्रता के बाद सबसे बड़ा फैसला है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने जनवरी 17, 2021 को जम्मू में एक किताब विमोचन कार्यक्रम के दौरान बताया कि कोरोना महामारी के कारण वह अपनी पत्नी का चुम्मा भी नहीं ले सके। उनके इस हास्यास्पद बयान की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वीडियो में अन्य लोग उनकी बात सुन कर ठहाके लगाते भी नजर आ रहे हैं।
गुर्जर देश चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में फारूक अब्दुल्ला ने महामारी पर बात करते हुए अपनी यह बात रखी। उन्होंने कहा स्थिति यह है कि कोई भी हाथ मिलाने या गले लगने तक से डरता है। अब्दुल्ला ने कहा, “यहाँ तक कि मैं अपनी पत्नी का किस तक नहीं ले सकता। गले लगने का तो सवाल ही नहीं है जबकि दिल ऐसा करना चाहता है। मैं बिलकुल सही कह रहा हूँ।”
अपनी इच्छा जाहिर करते समय अब्दुल्ला कोरोना वैक्सीन व देश में फैली महामारी पर बात कर रहे थे। उन्होंने अपनी इस बात को कहने से पहले यह भी कहा कि कोरोना की वैक्सीन आ गई है। लेकिन ये वक्त ही बताएगा कि ये वैक्सीन कितनी असरदार है। अल्लाह करे ये बीमारी दफा हो जाए। उन्होंने बताया कि कैसे जब भी उनकी बेटी उन्हें बिना मास्क के देखती है तो वह उनसे घर लौटने को कहती है।
इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्र शासित प्रदेश में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल करने की बात कहने के बहाने निशाना साधा। वह बोले, “प्रधानमंत्री कहते हैं कि भारत में 5जी आ रहा है, जबकि हम 4जी (मोबाइल इंटरनेट सेवा) से भी वंचित हैं। वह कुर्सी छोड़ने के बाद यहाँ आएँ और रह कर देखें कि हम 2जी (सेवा) के साथ कैसे जी रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “छात्र अपने घर पर हैं और वे इंटरनेट के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं तथा व्यावसायी भी इंटरनेट सेवा पर निर्भर हैं। मेरा प्रधानमंत्री से अनुरोध है कि यदि आप कहते हैं कि यह स्थान विकास के पथ पर है तो हमें अल्लाह की खातिर 4जी दीजिए ताकि हम भी और हमारे बच्चे भी आगे बढ़ सकें।”