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नई दिल्ली में अफगानिस्तान का दूतावास बंद : तालिबानी शासन के बाद से था निष्प्रभावी

दिल्ली स्थित अफगान दूतावास (साभार: इंडिया टाइम्स)
राष्ट्रपति अशरफ घनी के नेतृत्व वाली अफगानिस्तान की पूर्ववर्ती सरकार से संबंधित दूतावास ने दिल्ली में स्थित अपने राजनयिक मिशन को स्थायी तौर पर बंद करने की घोषणा कर दी है। ‘इस्लामी रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान’ के दूतावास के नाम से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि भारत और तालिबान सरकार की ओर से लगातार मिल रही चुनौतियों के कारण यह निर्णय लिया गया है।

अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद तालिबान ने 15 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अशरफ घनी ने अफगानिस्तान छोड़ दिया था। वहीं, घनी सरकार में उपराष्ट्रपति रहे अमरुल्लाह सालेह ने कहा था कि तालिबान के साथ उनका संघर्ष अंतिम साँस तक जारी रहेगा।

भारत में अफगानिस्तान का दूतावास पूर्ववत जारी रहा। कब्जे के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान नाम ‘इस्लामी रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान’ से बदलकर ‘इस्लामिक एमिरेट्स ऑफ अफगानिस्तान’ कर दिया था। हालाँकि, भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ राजनयिक संबंध रखने की घोषणा अब तक नहीं की है।

दरअसल, पूर्ववर्ती सरकार से संबंधित अफगान दूतावास ने 30 सितंबर 2023 को दिल्ली में अपने दूतावास का संचालन बंद कर दिया था और अब इसे स्थायी तौर पर बंद कर दिया है। दूतावास ने अपने बयान में कहा कि उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। पिछले 2 वर्षों 3 महीनों में भारत में अफगान समुदाय की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है।

दूतावास ने कहा कि इस अवधि में अफगानिस्तान छोड़ने की कोशिश करने वाले लोगों को बहुत ही सीमित नए वीजा जारी किए गए। इस कारण से अफगान शरणार्थियों, छात्रों और व्यापारियों के देश छोड़ने के कारण अगस्त 2021 के बाद से यह संख्या लगभग आधी रह गई है।

अफगान दूतावास ने आगे कहा कि मिशन बंद करने के निर्णय को कुछ लोग आंतरिक संघर्ष के रूप में लेबल करने का प्रयास कर सकते हैं। दूतावास ने यह भी कहा कि कुछ लोग यह भी कह सकते हैं कि राजनयिकों ने तालिबान के प्रति अपनी निष्ठा बदल ली है, लेकिन यह निर्णय नीति और हितों में व्यापक बदलाव का परिणाम है।

दूतावास ने आगे कहा, “नई दिल्ली में हमारे मिशन के दौरान अफगान नागरिकों के समर्थन के लिए हम भारत के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। काबुल में वैध सरकार की अनुपस्थिति और सीमित संसाधनों एवं शक्तियों के बावजूद हमने भारत में मौजूद अपने नागरिकों की बेहतरी के लिए अथक प्रयास किए।”

इससे पहले 30 सितंबर 2023 को दूतावास ने कहा था, “हम मेजबान सरकार (भारत) से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने, संसाधनों एवं कार्मिकों की कमी के कारण अफगानिस्तान के सर्वोत्तम हितों की सेवा करने की अपेक्षाओं को पूरा करने में सफल नहीं हो रहे हैं। इसलिए हम 1 अक्टूबर 2023 से अपना परिचालन बंद कर रहे हैं।”

तालिबान की वर्तमान सरकार को लेकर नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास ने कहा, “जो लोग किसी अन्य समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे तालिबान का समर्थन करते हैं तो यह भारत सरकार का निर्णय होगा। हालाँकि, हमने भारत सरकार से कहा है कि जब तक अफगानिस्तान में कोई वैध सरकार नहीं आती है, तब तक हमारे गौरवशाली झंडे को फहराते रहने का सम्मान दिया जाए।”

दूतावास ने यह भी कहा, “हमने भारत सरकार से यह भी कहा कि राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन 1961 के मानदंडों के आधार पर दूतावास को तब तक बंद रखा जाए, जब तक अफगानिस्तान में कोई वैध सरकार काबिज नहीं होती। आज से भारत में ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान’ का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई राजनयिक नहीं होगा। अगर कोई ऐसा दावा करता है तो उसे ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान’ का प्रतिनिधि नहीं माना जाए।”

दूतावास ने यह भी कहा कि भारत साल 2001 से अफगानिस्तान की पूर्ववर्ती सरकार का रणनीतिक साझेदार रहा है। हालाँकि, बदली हुई भू-राजनीतिक स्थितियों में शक्तियों के संतुलन के लिए की आवश्यकता को वह समझता है। इसलिए वह अपने मिशन को बंद करते हुए इसकी संपत्तियों को भारत को सौंपने का निर्णय लिया है। उसने भारत से इन संपत्तियों और भारत में रह रहे लोगों की सुरक्षा की अपील की।

दूतावास ने कहा कि अगर कोई उसके मिशन में अब वहीं लोग बचे हो सकते हैं, जो तालिबान के संबद्ध या उसके प्रतिनिधि होंगे। दूतावास ने यह भी कहा कि अपनी संपत्तियों को भारत सरकार के हवाले कर दिया है और यह भारत पर निर्भर है कि इसे वह अपने पास रखता है या उसे तालिबान से संबद्ध राजनयिकों के हवाले करता है।


खात्रा हाशमी को तालिबान ने बनाया ‘जिंदा लाश’

अफगानिस्तान की खात्रा हाशमी को तालिबानियों ने अँधा कर दिया,
अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने के बाद महिलाओं की स्थिति खासी दयनीय हो गई है। तालिबान से पीड़ित रहीं एक महिला अधिकारी ने अपना दर्द बयाँ किया है। वो फ़िलहाल दिल्ली में रह रही हैं। पैसों के लालच में उसके अब्बू ने मात्र 7 साल की उम्र में बड़े उम्र के व्यक्ति के साथ उसकी शादी तय कर दी थी और 12 साला की उम्र में निकाह करा दिया था। अब्बू द्वारा न पढ़ाने-लिखाने के बावजूद वो अपनी मेहनत से अफगानिस्तान में पुलिस अधिकारी बनीं।

हालाँकि, अफगानिस्तान में एक महिला का इस तरह से तरक्की करना तालिबानियों को रास नहीं आया और वो फोन कॉल कर-कर के धमकियाँ देने लगे। 2020 के शुरुआत में पुलिस थाने से घर जाते समय उन पर गोलीबारी की गई। 9 गोलियाँ उनके शरीर पर लगीं। ये वो समय था, जब तालिबान मुल्क पर कब्जे की तरफ तेजी से बढ़ रहा था। उनके शरीर में 10 बार चाकू से वार किया गया। बेहोशी की हालत में उनकी दोनों आँखें निकाल ली गईं। महिला ने कहा कि अब वो ‘ज़िंदा लाश’ बन कर रह गई हैं।

उक्त महिला का नाम खात्रा हाशमी है, जो फ़िलहाल ‘नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड (NAB)’ के लिए काम करती हैं। ‘दैनिक भास्कर’ से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब उनके साथ ये दरिंदगी हुई थी, तब वो गर्भवती थीं। जब उन्हें होश आया, तो वो पूरी तरह अंधी हो चुकी थीं। वो अपना पहला वेतन भी अपने आँखों से नहीं देख पाई थीं। मात्र 3 महीने की नौकरी के बाद उनके साथ ये वीभत्स्ता हुई थी। उनके शरीर में अब भी बुलेट के टुकड़ों की वजह से दर्द रहता है, जिसका इलाज भी चल रहा है।

 उनकी 2 साल की बेटी भी है, जो उनके साथ ही रहती है। उनका कहना है कि महिलाओं-बच्चों की तालिबान से हिफाजत के लिए ही पुलिस फ़ोर्स जॉइन किया था, लेकिन हुआ कुछ और ही। उनका कहना है कि तालिबानी ये नहीं चाहते कि महिलाएँ नौकरी करें, वो चाहते हैं कि लड़कियाँ घर में कैद रहें। 3 नकाबपोश तालिबानियों ने उन पर हमला किया था। उनके पहले पति, दो बेटे और एक बेटी अफगानिस्तान में ही रहती है।

तालिबानी उनसे पूछने आते हैं कि उनकी अम्मी लौटी या नहीं। दिल्ली में खात्रा हासमी ने दूसरी शादी भी की है। पहले पति की उम्र 80 साल से अधिक हो गई है और वो उन्हें तलाक भी दे चुके हैं। फिर भी वो और बच्चे पैदा करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि उन बच्चों से मिलने का उनका दिल करता है, लेकिन ये सम्भव नहीं हो पाता। खात्रा हाशमी को तालिबानी अब भी खोज रहे हैं। जब उन पर हमला हुआ था, तब उन्होंने अपनी साँसें रोक ली थीं और तालिबानी उन्हें मरा हुआ समझ कर चले गए थे।


तालिबानी नेता हक्कानी की अयोध्या के बाद मुंबई को उड़ाने की धमकी

‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)’ को धमकी भरा मेल मिला है। इस मेल में, मुंबई में आतंकी हमला करने की बात कही गई है। ईमेल करने वाले ने खुद को तालिबानी बताया है। साथ ही दावा किया है कि यह हमला तालिबानी नेता सिराजुद्दीन हक्कानी के आदेश पर होगा। इससे पहले, अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को लेकर भी धमकी सामने आई थी।

इस धमकी भरे मेल की जानकारी सामने आने के बाद जाँच व इंटेलिजेंस एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं। साथ ही मुंबई पुलिस को भी सूचित किया गया है। यही नहीं, इस मामले में मुंबई के अलावा अन्य शहरों को भी अलर्ट पर रखा गया है। फिलहाल मुंबई पुलिस समेत तमाम जाँच एजेंसियाँ मामले की जाँच कर ईमेल भेजने वाले का पता तलाशने में जुटी हुईं हैं।

सिराजुद्दीन हक्कानी तालिबान के हक्कानी गुट का प्रमुख है। उसे सबसे खतरनाक तालिबानी नेताओं में से एक माना जाता है। फिलहाल वह अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार में गृह मंत्री है। अमेरिकी जाँच एजेंसी FBI ने उसकी लोकेशन बताने वाले को 1 करोड़ डॉलर (82.25 करोड़ रुपए) का इनाम रखा है। इससे पहले गुरुवार (2 फरवरी, 2023) को एक अज्ञात व्यक्ति ने अयोध्या में बन रहे भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर को उड़ाने की धमकी दी थी। यह धमकी अयोध्या के रामकोट में रहने वालेमनोज नामक व्यक्ति को फोन पर मिली थी। उसने पुलिस को बताया था कि धमकी देने वाले शख्स ने सुबह 10 बजे तक मंदिर को उड़ाने की धमकी दी है।

7 जनवरी को भी मुंबई में आतंकी हमला करने की धमकी सामने आई थी। इस धमकी मुंबई पुलिस के कंट्रोल रूम में फोन करके दी गई थी। धमकी देने वाले व्यक्ति ने कहा था कि दो महीने के अंदर मुंबई में 1993 बम धमाके जैसे सीरियल ब्लास्ट होंगे। धमकी के साथ कहा गया था कि ये धमाके मुंबई के माहिम, भिंडी बाजार, नागपाड़ा और मदनपुरा इलाके में होंगें।

इसके अलावा, आरोपित ने दावा किया था कि मुंबई में निर्भया गैंगरेप जैसे कांड व भीषण दंगे होने वाले हैं। इन सभी कामों के लिए दूसरे राज्य से लोगों को बुलाया जा चुका है। फोन कर धमकी देने वाले आरोपित ने यह भी दावा किया था कि इस पूरी घटना में कॉन्ग्रेस का एक विधायक भी शामिल है। हालाँकि, बाद में जाँच एजेंसी ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपित की पहचान नबी याहया खान उर्फ ​​केजीएन उर्फ ​​लाला के रूप में हुई। उस पर लूट और छेड़खानी समेत कुल 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

‘चाचा… शरीयत में मत दे दखल’: जावेद अख्तर को इस्लामी कट्टरपंथियों ने घेरा

                                              जावेद अख्तर और तालिबान (साभार: कोईमोई/डक्कन हेराल्ड)
अफगानिस्तान में कट्टरपंथी तालिबान (Afghanistan, Taliban) शासन द्वारा वहाँ की लड़कियों की शिक्षा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इसको लेकर बॉलीवुड के गीतकार जावेद अख्तर ने सवाल उठाया है। जावेद अख्तर के इस ट्वीट पर कट्टरपंथियों ने उन्हें घेर लिया।

जावेद अख्तर को कट्टरपंथी ही नहीं, अन्य भी घेर रहे हैं। अब इसे इनका दोगलापन कहा जाए तो कोई अतिशियोक्ति नहीं। ये वही जावेद है जो हिजाब और सर तन से जुदा आदि मुद्दों पर खामोश रहने वाले तालिबान के विरुद्ध किस आधार पर बोल रहे हैं? क्या सर तन से जुदा की मुहीम और तालिबान में कोई अंतर है?

जावेद अख्तर ने ट्वीट किया, “तालिबानियों ने इस्लाम के नाम पर सभी महिलाओं और लड़कियों के स्कूल-कॉलेजों और नौकरियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारतीय मुस्लिम पर्सनल बोर्ड और अन्य इस्लामिक विद्वानों ने इसकी निंदा क्यों नहीं की। क्यों। क्या वे तालिबानियों से सहमत हैं?”

इसको लेकर अल हिंद नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “श्याम बिहारी की चौथी पीड़ी तू ज़्यादा दख़ल ना दे शरीयत में।”

आदिल साइन नाम के यूजर ने लिखा, “जावेद भाई, अपने मुल्क की चुनौतियों को पहले समझ लें, फिर पड़ोसी मुल्क की बातों पर सोचा जाए। पर नहीं आप तो आप हैं… ऐसी उम्र में लोग थोड़े चिंतित हो ही जाते हैं.. उम्र का कसूर है आप तो मासूम हैं।”

सलमान नाम के यूजर ने लिखा, “भाई सब क्यों अपनी दुर्गति करवाने पर तुले हैं? आपका इस्लाम से कोई लेना देना है क्या?AIMPLB का तालिबान से कोई कनेक्शन बता रहे हो क्या? बेकार क्यों अपनी टाँग फैला रहे हो..जब किसी ने सपोर्ट नहीं किया है तो जरूरी है कि निंदा करें।”

नीलिमा पवार नाम की एक यूजर ने लिखा, “हाँ, भारत के 99% मुस्लिम सहमत हैं और वही शरिया यहाँ लाना चाहते हैं। इसलिए श्रद्धा के कितने भी टुकड़े हो चुप रहते हैं। गजवा-ए-हिंद के सपने देखते है। चाचा आप भी जाग जाओ, क्यूँकी शरिया में गैर मुस्लिम ही नहीं, जो शरिया ना माने वह भी काफिर है। पाकिस्तान में शिया, अहमदिया सभी काफिर हैं।”

संकेत एस जोशी ने लिखा, “मुझे हमेशा आश्चर्य होता है कि इन इस्लामिक देशों का किसी भी क्षेत्र के विकास में क्या योगदान है, जिससे मानव को लाभ होता है। वैज्ञानिक अनुसंधान, उत्पाद विकास, कला, खेल, शिक्षा में कोई बड़ी भूमिका नहीं… लेकिन गोला-बारूद के संबंध में उन्नत तकनीक का उपयोग करने में अग्रणी।”

T. Burhagohain नाम की एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा, “इस्लाम में ईसाई और हिंदू धर्म की तरह एक मजबूत सुधार आंदोलन होना चाहिए। इस धर्म की शुरुआत से इस्लाम में कोई सुधार नहीं हुआ है।”

अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने 21 दिसंबर 2022 को एक फरमान जारी करते हुए कहा कि अब तालिबानी महिलाएँ नौकरी और पढ़ाई नहीं करेंगी। तालिबान ने तर्क दिया था, ”विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जा रहे कुछ विषय इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।” इसके साथ ही उसने यह भी कहा था कि लड़कियों पर पश्चिमी देशों का रिवाज हावी हो रहा है।

‘पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने महिला से हाथ मिलाया, अल्लाह देगा गुनाह की सज़ा’: देवबंदी मौलाना ने हिना रब्बानी खार को भी हिजाब न पहनने पर बताया ‘अय्याश’

       मौलाना अब्दुल अजीज गाजी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और विदेश राज्यमंत्री हिना रब्बानी खार
अपनी विदेश यात्रा के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ का एक महिला से हाथ मिलाना उनके लिए मुसीबत का सबब बन गया है। पाकिस्तान के कट्टरपंथियों ने इसे हराम बताते हुए उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाई है। पाकिस्तान के देवबंदी मौलाना अब्दुल अजीज गाजी ने शाहबाज़ शरीफ को अल्लाह का डर दिखाया है। तालिबानियों को बेशर्म इंसान कहने के साथ मौलाना ने हिना रब्बानी खार को भी अय्याश शब्द से सम्बोधित किया है।

जानकारी के मुताबिक पिछले माह नवम्बर में शाहबाज़ शरीफ तुर्की के दौरे पर गए थे। शाहबाज़ तुर्की को चीन-पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) में शामिल होने का न्योता देने गए थे। इस दौरान इस्ताम्बुल शहर में उन्होंने एक महिला से हाथ मिला लिया था। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की इस हरकत पर आग बबूला हुए देवबंदी मौलाना ने इसे इस्लाम के खिलाफ बताते हुए शाहबाज़ को अल्लाह से डरने की नसीहत दी है। मौलाना के मुताबिक, शरीफ को खुदा महिला से हाथ मिलाने के गुनाह की सज़ा जरूर देगा। मौलाना का यह बयान वीडियो के साथ वायरल भी हो रहा है।

अभी तक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से हाथ मिलाने वाली उस महिला की पहचान नहीं हो पाई है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौलाना अब्दुल अजीज गाजी ने लोकतंत्र को भी एक बुरा तंत्र बताया। उन्होंने इसे नास्तिकों का तंत्र कहते हुए गलत लोगों द्वारा चलाया जाने वाला सिस्टम बताया। मौलाना ने शाहबाज़ सरकार में विदेश मंत्रालय संभाल रहीं राज्यमंत्री मंत्री हिना रब्बानी खार को भी उल्टा-सीधा कहा। मौलाना के मुताबिक, तालिबान के दौरे पर गई हिना रब्बानी ने हिजाब नहीं पहना था।

हिना के हिजाब न पहनने को देवबंदी मौलाना ने ‘अय्याशी’ बताया। इसी के साथ मौलाना अजीज गाजी ने तालिबान को भी बिना हिजाब पहने महिला की आवभगत करने के लिए ‘बेशर्म’ शब्द से सम्बोधित किया। मौलाना ने तालिबान और उसके समर्थकों से बिना हिजाब वाली हिना के स्वागत के लिए माफ़ी माँगने को भी कहा है। गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने कुछ समय पहले ही मौलाना अब्दुल अजीज से इस्लामाबाद की लाल मस्जिद को खाली करवाया था। तब से वो शाहबाज़ सरकार के खिलाफ खुल कर बयानबाजी कर रहे हैं।

अविवाहित रिपोर्टर गई अफगानिस्तान में हो गई गर्भवती: महिला पत्रकार को एंट्री देने से न्यूजीलैंड का इनकार

रिपोर्टिंग के दौरान गर्भवती हुई पत्रकार अफगानिस्तान में शरण लेने को हुई मजबूर (फोटो साभार: शार्लोट बेलिस का ट्विटर हैंडल )
न्यूजीलैंड (New Zealand) की पत्रकार शार्लोट बेलिस (Charlotte Bellis) अफगानिस्तान में फँस गई हैं। वह गर्भवती हैं, इसके बावजूद न्यूजीलैंड सरकार ने कोरोनो महामारी प्रतिबंधों का हवाला देते हुए उनकी वापसी का आपातकालीन आवेदन खारिज कर दिया है।

गर्भवती पत्रकार ने बताया कि उसके देश ने वापसी का आवेदन ठुकरा दिया है। इसकी वजह से उन्हें तालिबान (Taliban) से मदद माँगने को मजबूर होना पड़ा। बेलिस ने ‘द न्यूजीलैंड हेराल्ड’ (The New Zealand Herald) में एक कॉलम लिखकर सबको अपनी आपबी​ती बताई। शनिवार (29 जनवरी 2022) को प्रकाशित कॉलम में उन्होंने लिखा, “अजीब विडंबना है कि पहले मैंने महिलाओं के प्रति बर्बरता दिखाने को लेकर तालिबान से सवाल पूछा था, लेकिन अब मैं यही सवाल अपनी सरकार से पूछ रही हूँ।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेलिस अल-जज़ीरा में बतौर संवाददाता काम करती थीं, जो कतर में स्थित है। बेलिस पिछले साल अल जजीरा के लिए काम करते हुए उन्हें अफगानिस्तान से तालिबान और अमेरिकी सैनिकों की वापसी से जुड़ी खबरों को दे रही थीं। अपने कॉलम में बेलिस ने कहा कि वह सितंबर में कतर लौटीं तो उन्हें पता चला कि वह अपने साथी और फ्रीलांस फोटोग्राफर जिम ह्यूलेब्रोक के साथ रहते हुए गर्भवती हो गई थीं।

जिम ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के लिए काम कर रहे थे। बेलिस मई में एक बच्ची को जन्म देने वाली हैं। चूँकि, कतर में विवाहेतर यौन संबंध अवैध हैं, इससे बेलिस को लगा कि कतर छोड़ने में ही उनकी भलाई है। इसके बाद उन्होंने नागरिकों की वापसी से जुड़ी लॉटरी-शैली प्रणाली के जरिए बार-बार न्यूजीलैंड वापस जाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

इसके बाद बेलिस ने नवंबर 2021 में अल जजीरा से इस्तीफा दे दिया और युगल ह्यूलेब्रोक के मूल देश बेल्जियम चली गईं, लेकिन वह वहाँ ज्यादा समय तक नहीं रह सकीं, क्योंकि वह वहाँ की निवासी नहीं थी। इस जोड़े के पास रहने के लिए सिर्फ अफगानिस्तान का वीजा था। इसके बाद बेलिस ने तालिबान के वरिष्ठ लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि अगर वह अफगानिस्तान लौटती हैं, तो वह ठीक रहेंगी।

सीमा पर बाड़ लगा रही पाकिस्तानी आर्मी को तालिबान ने खदेड़ा तो सामान छोड़कर भाग गयी

                                                             साभार: ट्विटर
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की सीमा रेखा को डूरंड लाइन (Doorand line) माना जाता है, लेकिन तालिबान (Taliban) इसे स्वीकार नहीं करता। तालिबान ने पाकिस्तान द्वारा सीमा पर कंटीले तारों से की जा रही बाड़बंदी का विरोध किया है। बाड़बंदी कर रहे पाकिस्तानी सैनिकों को तालिबानी लड़ाकों ने खदेड़ दिया। इसका एक वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सैनिक अफगानिस्तान के निमरोज प्रांत के चार बोरजाक जिले से लगती सीमा पर बाड़ लगा रहे थे। इसकी खबर लगते ही बड़ी संख्या में तालिबानी लड़ाके वहाँ पहुँच गए और पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ दिया। अफगानिस्तान के पत्रकार बिलाल सरवरी ने इस घटना को लेकर ट्वीट किया, “तालिबान के अधिकारियों ने मुझे बताया कि पाकिस्तानी सेना पश्चिमी अफगानिस्तान के निमरोज प्रांत के चार बोरजाक जिले में बाड़ लगाना चाहती थी। तालिबान वहाँ पहुँचे और पाकिस्तानी सेना अपने सारे उपकरण छोड़कर वहाँ से भाग गई।”

बिलाल ने अगले ट्वीट में कहा, “बड़ी संख्या में तालिबान लड़ाके वहाँ पहुँचे। वे हाई अलर्ट पर हैं।” उल्लेखनीय है कि बिलाल द्वारा शेयर किए गए वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि वहाँ पर कारों में लदकर बड़ी संख्या में तालिबानी लड़ाके पहुँचे। वहीं एक अन्य इमेज से पता चलता है कि घटनास्थल पर बड़ी संख्या में बाड़ लगाने के लिए लोहे के खंबे और तार पड़े हुए हैं।

इससे पहले 25 दिसंबर 2021 को तालिबान और पाकिस्तानी सेना के बीच डूरंड लाइन पर बाड़बंदी को लेकर झड़प भी हुई थी। इसमें तालिबान के स्नाइपर ने पाकिस्तान के दो जवानों को मार गिराया था। हालाँकि, बाद में दावा किया गया कि दोनों देशों के बीच विवाद सुलझ गया है। दोनों में यह तय हुआ था कि बाड़ लगाने का काम अब आपसी सहमति से किया जाएगा।

2021 की चर्चित खबरें : लाल किला से बंगाल हिंसा और तालिबान से बांग्लादेश तक

साल 2022 दस्तक दे रहा है। हर कोई उम्मीद कर रहा है ये साल नई खुशियों, नई उम्मीदों वाला हो। हर जगह सिर्फ सकारात्मक खबरें सुनाई दें, 2021 की तरह नहीं… जहाँ साल की शुरुआत हुई खालिस्तानी तत्वों से और फिर मई आते-आते ऑक्सीनजन के कारण त्राहि-त्राहि मच गई। 2021 के इस साल में कभी तालिबान ने चिंता बढ़ाई तो कभी बांग्लादेश में हिंदुओं पर होते अत्याचार ने सबको हैरान कर दिया।

इससे पहले 2022 की शुरुआत हो और नई खबरों से अखबार, मीडिया चैनल भर जाएँ, हम एक सरसरी निगाह 2021 की बड़ी खबरों पर डाल लेते हैं जो बड़े-बड़े राजनेताओं से लेकर कॉमन मैन तक के लिए चर्चा का विषय थीं।

जनवरी 2021

26 जनवरी हिंसा: नवंबर 2020 में शुरू हुआ कथित किसान आंदोलन जनवरी 2021 तक दिल्ली की हर सीमा को घेर चुका था। राकेश टिकैत जैसे किसान नेता जगह-जगह ऐलान कर रहे थे कि 26 जनवरी को लोग ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे और गणतंत्र दिवस पर अपनी एकजुटता दिखाएँगे। सरकार और प्रशासन की मनाही के बावजूद ये लोग नहीं माने और ‘बक्कल उतारने वाली धमकियाँ’ देकर 26 जनवरी 2021 को सैंकड़ों ट्रकों के साथ दिल्ली में घुसे।
नतीजन दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर हिंसा शुरू हुई। दिल्ली की सड़कों पर जहाँ-तहाँ उत्पात मचाया गया। भीड़ जब लाल किले पहुँची तो वहाँ जमके तोड़फोड़ की गई। रास्ते में तिरंगे का अपमान किया गया। उसे रौंदा गया। प्रधानमंत्री को गालियाँ दी गईं। पुलिस वाहनों पर हमला हुआ। इन सबके अलावा निहंग सिखों को खुली सड़क पर तलवार लेकर दौड़ते देखा गया। जब मामला शांत हुआ तो उपद्रव करने वालों में दीप सिद्धू जैसे बड़े नामों का खुलासा हुआ। वहीं रिपोर्ट्स से पता चला कि इस दिन की झड़प में 300 के करीब पुलिस वाले घायल हुए थे।

फरवरी 2021

वीएचपी कार्यकर्ताओं पर हमला: राम मंदिर निर्माण के लिए धन जमा करने हेतु देश भर में चलाया गया निधि समर्पण अभियान मकर संक्रांति के बाद से चर्चा में था। अभियान में जुटे करीब 9 लाख कार्यकर्ताओं की मदद से 44 दिनों (15 जनवरी से 27 फरवरी 2021) में 2500 करोड़ रुपए जुटाने का काम किया गया। हालाँकि इस दौरान वीएचपी कार्यकर्ताओं की कोशिशों के साथ जो एक और खबर चर्चा में थी वो खबर उन पर हुए हमलों की थी। जगह-जगह कट्टरपंथी तत्वों ने उन्हें अपना निशाना बनाया और उन्हें धमकियाँ दी।
टूलकिट मामला: किसान आंदोलन की आड़ में भारत के खिलाफ़ रचे गए षड्यंत्र को साबित करने वाले दस्तावेज़ ‘टूलकिट’ का खुलासा फरवरी माह में हुआ था। ग्रेटा थनबर्ग के एक ट्वीट से इस टूलकिट के बारे में सबको पता चला था। इस टूलकिट के बारे में कहा गया था कि 18 जनवरी से पहले किसान समर्थन में और मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए तैयार कर दिया गया था। इस खुलासे के बाद लंबे समय तक टूलकिट का विवाद गरमाया रहा और आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे।

मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक: एक खबर जिसने फरवरी माह में तहलका मचाया वो खबर मुकेश अंबानी से जुड़ी थी। इस माह में ही देश के सबसे बड़े उद्योगपति रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी के घर से कुछ दूरी पर खड़ी सिल्वर कलर की स्कॉर्पियो कार से 20 जिलेटिन छड़ें बरामद हुई थी। महीना खत्म होते-होते पता चला कि इस हरकत के पीछे जैश उल हिंद का हाथ है। हालाँकि बाद के महीनों में इस संबंध में कई खुलासे होते रहे और पता चला कि षड्यंत्र सचिन वाजे जैसे पुलिस अधिकारी द्वारा रचा गया था।

मार्च 2021

तेलंगाना में दंगे: तेलंगाना के निर्मल जिले के भैंसा नगर में 7-8 मार्च के आसपास दंगों की खबर ने सबको हैरान कर दिया था। इस हिंसा में मीडियाकर्मी, पुलिसकर्मी व आम नागरिकों को मिला कर लगभग 10 लोग घायल हुए। इनके अतिरिक्त दो घरों व एक ऑटोरिक्शा में आग लगाई गई। तीन घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। बाद में इस संबंध में कुल 15 मामले दर्ज हुए और 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई। इस घटना से पहले साल 2020 में तेलंगाना का यगी इलाका सांप्रदायिक हिंसा का गवाह बना था। उस समय भी 11 लोग घायल हुए थे और 18 घरों को जला दिया गया था।
डासना देवी मंदिर वीडियो वायरल और यति नरसिंहानंद सरस्वती : मार्च में एक मामला डासना मंदिर का भी काफी चर्चा में था। उस समय खबर आई थी कि डासना में एक आसिफ नाम के मुस्लिम युवक को पानी पीने के बेरहमी से पीटा गया। हालाँकि बाद में मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने सामने आकर बताया कि कैसे मंदिर के बाहर कई नल लगे हैं अगर सिर्फ प्यास बुझानी थी तो उन नलों में पानी आता है। उन्होंने यह बी बताया था कि कैसे मंदिर में दूसरे समुदाय के लड़के प्रवेश करके लड़कियों को छेड़ते थे और उनपर अभद्र टिप्पणी करते थे इसलिए उन्होंने सबको मंदिर में घुसने से मना किया।

मनसुख हिरेन हत्या मामला: फरवरी माह में जिस स्कॉर्पियों को विस्फोटक सामग्री से भरके मुकेश अंबानी के घर के बाहर खड़ा किया गया, वो गाड़ी मनसुख हिरेन की थी। मनसुख की लाश 4-5 मार्च 2021 को मिली थी। शुरू में कहा गया कि हिरेन ने आत्महत्या की। लेकिन बाद में पता चला कि उसे मारा गया था। इसी हत्या की एंगल के जाँच के दौरान सचिन वाजे का नाम मीडिया में चर्चा में आया और पता चला कि वो हिरेन से लगातार संपर्क में था।

अप्रैल 2021

अनिल देशमुख का इस्तीफा: एंटीलिया केस और मनसुख हिरेन हत्या मामले की जाँच के क्रम में महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपए की वसूली के आरोप मढ़े गए, जिसके बाद उनका जगह-जगह विरोध हुआ और अंतत: उन्हें 5 अप्रैल 2021 को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

कोरोना की दस्तक: कोरोना की दूसरी लहर ने अप्रैल 2021 में भारत में दोबारा दस्तक दी थी। इस बीच महाराष्ट्र में कोरोना की आड़ में चल रहे कई धंधे उजागर हुए थे जिसमें फर्जी सर्टिफिकेट बनाना, प्रवासी कामगारों से वसूली करने का धंधा शामिल था। ऐसे ही कोरोना के बीच मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए की जाने वाली माँग भी इसी माह की खबर है। वहीं कोरोना के नाम पर कुंभ को बदनाम करने के प्रयास भी अप्रैल में शुरू हुए थे। इसी महीने में ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचना शुरू हुआ था। माह के शुरू में ही खबर आई थी कि मुम्बई में ऑक्सीजन की कमी के कारण कई मरीजों की मौत हो गई। इसके बाद ऐसी खबरों का जमावड़ा लग गया।

मई 2021

कोरोना और प्रोपगेंडा: मई आते-आते कोरोना के कारण जहाँ जगह-जगह मातम पसरता जा रहा था। कई राज्य ऑक्सीजन की किल्लत से गुज़र रहे थे। वहीं कुछ प्रोपगेंडाबाज सोशल मीडिया पर श्मशान घाट पे जल रहे शवों की तस्वीरें शेयर कर करके अलग ही प्रोपगेंडा फैला रहे थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये दिखाने का प्रयास हो रहा था कि कैसे मोदी सरकार भारत में कोरोना को कंट्रोल करने में बुरी तरह विफल हुई है।
टीकरी बॉर्डर रेप: एक सबसे बड़ी खबर जो मीडिया में इस माह आई वो टीकरी बॉर्डर पर हुए रेप की थी। इसी माह किसान प्रदर्शन स्थल की हकीकत का पर्दाफाश हुआ था और पता था चला कि कैसे बंगाल से लड़की को लाकर उसका रेप किया गया और हालत इतनी बदतर कर दी गई कि अंत मे उसने कोरोना से पीड़ित होकर तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया था।
बंगाल हिंसा: 2 मई 2021 को बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में टीएमसी की जीत के बाद राज्य में जगह-जगह हिंदू विरोधी, भाजपा विरोधी हिंसा रिपोर्ट की गई। इस दौरान सैंकड़ों हिंदुओं पर वार हुए, महिलाओं से जबरदस्ती हुई, बच्चों से बर्बरता हुई और कई घरों को आग के हवाले किया गया। पुलिस की कार्रवाई की पोल भी बाद में खुली जब अलग-अलग संगठन जमीन पर उतरे और पीड़ितों की आपबीती लाए। इसी बीच कंगना रनौत का ट्विटर अकॉउंट सस्पेंड होना भी सोशल मीडिया पर अच्छी खासी चर्चा का कारण था।
जून 2021
मई के माह में बंगाल में इतनी क्रूरता की गई कि इसका असर जून तक मीडिया खबरों में नजर आया। पूरे माह इस बात की चर्चा रही कि आखिर ममता सरकार ने कैसे हिंदुओं पर हुए हमलों को नजरअंदाज किया। बंगाल हिंसा पर हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस की एक रिपोर्ट से पता चला की बंगाल में हिंसा की 15000 घटनाएँ हुईं, 25 मौत हुईं और 7000 महिलाओं से बदसलूकी की गई।
गाजियाबाद में बुजुर्ग को पीटने का मामला: जून के महीने में गाजियाबाद की एक घटना सोशल मीडिया पर बवाल खड़ा कर दिया। एडिट की गई वीडियो के साथ बताया गया कि एक मुस्लिम को जय श्रीराम पीट-पीटकर बुलवाया जा रहा था और जब उसने ऐसा नहीं किया तो उसकी दाढ़ी काट दी गई। हालाँकि जाँच-पड़ताल के बाद खबर आई कि सपा नेता ने अब्दुल समद नाम के व्यक्ति के साथ हुई मारपीट को साम्प्रदायिक रंग देने का प्रयास किया था। हकीकत में ये विवाद ताबीज को लेकर था जिसे अब्दुल ने आरोपित के घर में दिया था।
सिख लड़कियों के धर्मांतरण का केस: जम्मू कश्मीर में सिख लड़कियों के धर्मांतरण का मामला भी जून 2021 में सामने आया था। वहाँ 28 जून को इस बाबत प्रदर्शन हुए थे। खबरें थी कि वहाँ समुदाय विशेष के लड़के सिख लड़कियों को अपना निशाना बना रहे थे और उन्हें बहला कर उनसे शादी कर रहे थे।

जुलाई 2021:

राज कुंद्रा पोर्नोग्राफी केस: जुलाई 2021 का महीना बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा से जुड़ी खबरों के नाम था। इस खबर ने न केवल मेनस्ट्रीम मीडिया में बल्कि सोशल मीडिया पर भी कई दिनों तक जगह बनाए रखी। 19 जुलाई को राज कुंद्रा को जब पोर्नोग्राफी केस में अरेस्ट किया गया तो पूरे बॉलीवुड में तहलका मच गया। पुलिस की जाँच और पूछताछ से इतर कई अभिनेत्रियों ने सामने आकर कुंद्रा पर आरोप मढ़े। मामला इतना गंभीर था कि कुंद्रा को जमानत पूरे 2 माह बाद मिली और वो 21 सितंबर को जाकर अपने घर लौटे।

अगस्त 2021:

अफगानिस्तान-तालिबान विवाद: अगस्त 2021 का पूरा महीना अफगानिस्तान और तालिबान से जुड़ी खबरों से भरा था। लंबे समय से चल रहे तनाव के बाद 15 अगस्त को तालिबान ने काबुल पर अपना कब्जा किया था। खबर आई थी कि देश के राष्ट्रपति गनी मुल्क छोड़ भाग गए और देश पर अब तालिबानी हुकूमत है। कट्टरपंथियों ने जगह-जगह फैलाया कि नया तालिबान है जो पहले से अलग है। हालाँकि, तालिबान के देश में आते ही वहाँ की सूरत बदल गई। लड़कियों को बुर्के में रहने के फरमान जारी हो गए और जगह-जगह खुले में पत्रकारों पर हमले होने लगे। सोशल मीडिया पर इसी बीच हमने कई ऐसी वीडियोज देखी थीं जिससे पता चला था कि लोग तालिबान शासित अफगानिस्तान से भागने के लिए कितनी मिन्नतें कर रहे हैं और कुछ उनके नियमों के हिसाब से कुछ को ढालने लगे हैं।

सितंबर 2021

असम हिंसा: 2021 का सितंबर महीना आधा तो तालिबान की खबरों के साथ बीता और आधार असम के दरांग में हुई हिंसा की खबरों के साथ। दरअसल, असम हिंसा 23 सितंबर की है दरांग जिले में पुलिस अतिक्रमणकारियों से जमीन खाली कराने गई तो जवानों पर हमला बोल दिया गया और 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके बाद वामपंथियों ने राज्य में हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। सरकार ने इस दौरान जवाब दिया कि 10,000 मुस्लिमों की भीड़ ने पुलिस को घेर कर लाठी-डंडों व ईंट-पत्थर से हमला बोल दिया था, तभी पुलिस ने कार्रवाई की। इस घटना की कई वीडियोज भी सोशल मीडिया पर सामने आई थी।

अक्टूबर 2021

आर्यन खान केस: इस माह मीडिया में जो सबसे अधिक खबर कवर की गई वो शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से जुड़ी हुई है। 2अक्टूबर को आर्यन को मुंबई के क्रूज ड्रग केस में उनके साथियों के साथ एनसीबी ने पकड़ा और 3 हफ्ते से ज्यादा का समय उन्हें जेल में गुजारना पड़ा। इस दौरान जब उन्होंने ड्रग सेवन की बात को स्वीकारा तो सोशल मीडिया पर शाहरुख खान की खूब बदनामी हुई। जगह-जगह उनके पुराने इंटरव्यू दिखाए गए और उनकी परवरिश पर सवाल खड़ा किया गया।
बांग्लादेश हिंदू विरोधी हिंसा: यही महीना दुर्गा पूजा का भी था और इसी महीने में बांग्लादेश में हिंदुओं पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर उनके पंडालों पर हमला हुआ और कई हिंदुओं की जान ले ली गई।

नवंबर 2021

दिवाली पटाखा बैन: साल 2021 में नवंबर का महीना वैसे तो त्योहारों के कारण चर्चा में था। लेकिन, इस माह दिवाली थी और हिंदुओं के पावन त्योहार पर एक बार फिर पटाखे बैन करने का काम राज्य सरकारें कर रही थीं। ऐसे में सोशल मीडिया पर बस सवाल किए जा रहे थे कि अगर सवाल प्रदूषण का है तो केवल दिवाली पर पटाखे क्यों बैन हुए। इन्हें क्रिसमस और न्यू ईयर पर भी बैन किया जाना चाहिए। 
इस विषय के अलावा एक टॉपिक जो विवादों में रहा वो गुरुग्राम नमाज से जुड़ा है। दरअसल वहाँ, समुदाय विशेष लोगों के खुले में नमाज पढ़ने पर कई स्थानीयों ने आपत्ति जताई थी। लेकिन प्रशासन के ढीले रवैये के कारण सुनवाई नहीं हुई। बाद में कई हिंदुओं ने विरोध जताने के लिए सड़कों पर उतर हनुमान चालीसा आदि का पाठ शुरू कर दिया और इस तरह प्रशासन को मामले पर संज्ञान लेना पड़ा। हालाँकि ये मामला अब भी शांत नहीं है। हर जुमे  की नमाज पर कई जगह मुस्लिम इकट्ठा होते हैं और खुले में नमाज पढ़ने की जुगत में रहते हैं।

दिसंबर 2021

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर: साल 2021 का दिसंबर महीना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा। 13 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस कॉरिडोर के उद्घाटन को देश भर में कवरेज मिली और आज भी इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं।
स्वर्ण मंदिर में लिंचिंग: हाल में पंजाब के अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हुई एक व्यक्ति की लिंचिंग भी सुर्खियों में है। वहाँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने के आरोप में व्यक्ति की हत्या करके उसे गुरुद्वारा परिसर के बाहर फेंक दिया गया, लेकिन हैरत की बात यह है कि इस मामले में पुलिस या राजनीतिक पार्टियों ने एक भी शब्द नहीं बोला।

लड़के-लड़कियों के साथ पढ़ने से तालिबान खफा, पैसे की कमी बता बंद की यूनिवर्सिटी

                                                  पाकिस्तान ने तालिबान को रूढ़िवादी बताया
सत्ताधारी तालिबान ने अफगानिस्तान में विश्वविद्यालयों को बंद करने की घोषणा की है। इसके पीछे तालिबान ने लड़के और लड़कियों के एक साथ पढ़ने वाली सह-शिक्षा व्यवस्था और आर्थिक तंगी को प्रमुख कारण बताया है। तालिबान ने महिलाओं को बिना किसी नजदीकी रिश्तेदार को साथ लिए लंबी दूरी की यात्रा करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन फैसलों को लेकर पाकिस्तान ने तालिबान को रूढ़ीवादी और अपने मुल्क के लिए खतरा बता दिया है।

अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्री अब्दुल बाकी हक्कानी ने रविवार (26 दिसंबर) को कहा कि विश्वविद्यालयों के बंद होने का कारण सह-शिक्षा और आर्थिक संकट है। उन्होंने कहा कि लड़कियों के लिए अलग कक्षाएँ बनानी होंगी और उनके लिए शिक्षकों को नियुक्त करना होगा। इसमें समय और पैसा दोनों की जरूरत है।

इसी साल 15 अगस्त को तालिबान ने अफगानिस्तान पर दोबारा कब्जा कर लिया था। मुल्क में सत्ता में आते ही तालिबान ने सह-शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया था और कहा था कि लड़कियों को यूनिवर्सिटी में लड़कों के साथ क्लास में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 

इसके साथ ही तालिबान ने अफगानिस्तान की महिलाओं पर प्रतिबंधों को और कठोर करते हुए उन्हें अकेले बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। अपने आदेश में तालिबान ने कहा कि महिलाएँ अपने घर से अकेले बाहर भी नहीं निकल सकती। अगर उन्हें बाहर जाना है तो वे अपने किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ बाहर जा सकेंगी। वहीं, गाड़ी मालिकों को सिर्फ हिजाब पहनने वाली महिलाओं को गाड़ी में बैठाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, महिला पत्रकारों को भी हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया है।

महिलाओं के लिए इस तरह के आदेश जारी करने पर पाकिस्तान बिफर गया है। पाकिस्तान ने अब तालिबान को रूढ़िवादी सोच वाला और अपने लिए खतरा बताया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा, “हम अफगानिस्तान की आवाम की पूरी मदद करना चाहते हैं, लेकिन वो कह रहे हैं कि औरतें वहाँ अकेले सफर नहीं कर सकतीं, स्कूल नहीं जा सकतीं, कॉलेज नहीं जा सकतीं। तालिबान की इस तरह की पुरानी सोच पाकिस्तान के लिए खतरा है।”

चौधरी ने तालिबान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान अतिवादी विचारों के खिलाफ है। भारत के बँटवारे के लिए जिम्मेदार मोहम्मद अली जिन्ना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिन्ना ने पाकिस्तान को इस्लामिक मुल्क बनाया, मजहबी मुल्क नहीं।

इतना ही नहीं, पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच सीमा विवाद उभर कर भी सामने आया है। पाकिस्तान द्वारा सीमा पर लगाए जा रहे कँटीले तारों की बाड़ को तालिबान लड़कों ने रोक दिया और तार को उठा कर लेते गए। इस दौरान तालिबान लड़ाकों ने पाकिस्तान के दो सैनिकों को गोली भी मार दी।

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अकेले बाहर नहीं जा सकेंगी महिलाएँ, महिला पत्रकारों को भी पहनना पड़ेगा हिजाब, गाड़ी में गाना नहीं ब
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अकेले बाहर नहीं जा सकेंगी महिलाएँ, महिला पत्रकारों को भी पहनना पड़ेगा हिजाब, गाड़ी में गाना नहीं ब

तालिबान को सत्ता में लाने के लिए हर तरह की मदद करने वाला पाकिस्तान अब तालिबान को रूढ़िवादी बताते हुए उसे पाकिस्तान के लिए खतरा बता रहा है। वर्तमान हालातों को देखकर ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

अकेले बाहर नहीं जा सकेंगी महिलाएँ, महिला पत्रकारों को भी पहनना पड़ेगा हिजाब, गाड़ी में गाना नहीं बजेगा : तालिबान का फरमान

अफगानिस्तान में तालिबान का शासन शुरू होने के बाद से ही वहाँ पर जन सामान्य के अधिकारों को कुचला जा रहा है। महिलाओं के अधिकारों पर पहरे बिठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में तालिबान एक और क्रूर आदेश आ गया है। इसके तहत तालिबान ने रविवार (26 दिसंबर 2021) को अफगानिस्तान की महिलाओं पर कड़ाइयाँ बढ़ाते हुए आदेश जारी किया कि अब महिलाएँ अपने घर से अकेले बाहर भी नहीं निकल सकती। अगर उन्हें बाहर जाना है तो वे अपने किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ ही जा सकेंगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के शिष्टाचार मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आदेश में इस्लामिक अमीरात के सभी गाड़ी मालिकों को केवल हिजाब पहनने वाली महिलाओं को ही गाड़ी में बैठाने का आदेश दिया गया है। इस बात की जानकारी तालिबान के शिष्टाचार मंत्रालय के प्रवक्ता सादिक अकिफ मुहाजिर ने दी। उन्होंने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, “45 मील (72 किलोमीटर) से अधिक की यात्रा करने वाली महिलाओं को सवारी की पेशकश नहीं की जानी चाहिए, अगर उनके साथ परिवार का कोई सदस्य नहीं है।”

इसके साथ ही पत्रकारों के अधिकारों पर भी कैंची चलाई गई है। तालिबानी मंत्रालय ने सख्त आदेश में कहा है कि महिला टीवी पत्रकारों को हिजाब पहनकर रिपोर्टिंग करनी होगी। इसके अलावा मुहाजिर के मुताबिक, अब से गाड़ी मालिक अपनी गाड़ियों में गाने नहीं बजाएँगे। बता दें कि तालिबान की नजर में हिजाब का मतलब बालों को ढँकने से लेकर चेहरे के घूंघट या पूरे शरीर को ढंकने तक वाले कपड़े हैं। हालाँकि, अधिकांश अफगान महिलाएँ पहले से ही हेडस्कार्फ़ पहनती हैं।

तालिबान ने इसी साल अगस्त में अफगानिस्तान पर कब्जा किया था। इसके बाद उसने वादा किया था कि वो 90 के दशक वाले तालिबानी शासन से अलग इस बार महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा। हालाँकि, हो इसका उल्टा रहा है।

तालिबान एक-एक करके अफगान नागरिकों के अधिकारों को खत्म कर रहा है। महिलाओं पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही उसने अफगान नागरिकों से उनका मतदान का अधिकार छीन लिया है। तालिबान सरकार ने देश के कुछ मंत्रालयों और चुनाव निकाय को खत्म कर दिया है। तालिबान का कहना है कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है।

अफ़ग़ानिस्तान : शरिया लागू ; छोटे पर्दे पर नहीं दिखेंगी औरतें, कॉमेडी और विदेशी फिल्में भी बैन

अफगानिस्तान में, तालिबान सरकार ने टीवी सीरियल में औरतों पर प्रतिबंध लगाने के लिए नए नियम जारी किए हैं। वहीं महिला पत्रकारों और एंकरों को भी स्क्रीन पर हेडस्कार्फ पहनने का आदेश दिया गया है। हालाँकि रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि किस तरह के स्कार्फ पहनने हैं।

तालिबान द्वारा अफगान टेलीविजन चैनलों को जारी किए गए नए दिशानिर्देशों में खासतौर से 8 महत्वपूर्ण बिंदू हैं।

इनमें शरिया के सिद्धांतों या इस्लामी कानून और अफगान मूल्यों के खिलाफ मानी जाने वाली फिल्मों पर प्रतिबंध लगाना भी शामिल है।

कॉमेडी और मनोरंजन जिनसे इस्लाम का अपमान हो, या जो अफगानियों के लिए ऑफेन्सिव या भावनाएँ आहत करने वाला हो, उस पर भी प्रतिबन्ध लगाया गया है।

साथ ही तालिबान ने विदेशी सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाली विदेशी फिल्मों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

अफगानिस्तान में पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन के एक सदस्य हुज्जतुल्लाह मुजद्देदी ने कहा कि नए प्रतिबंधों की घोषणा अप्रत्याशित थी। बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कई नियम व्यावहारिक नहीं हैं और अगर इसे लागू किया जाता है, तो प्रसारकों को सीधे प्रोग्राम बंद करने के लिए मजबूर करना होगा।

अगस्त के मध्य में तालिबान ने अफगानिस्तान में अपनी सत्ता स्थापित कर ली थी और अब कई लोगों को डर है कि वे धीरे-धीरे कठोर प्रतिबंध लगा रहे हैं। लोगों में यह डर इसलिए भी है कि तालिबान ने अमेरिका और संबद्ध बलों के जाने के तुरंत बाद ही लड़कियों और युवतियों को घर में रहने का निर्देश दिया था। बता दें कि 1990 के दशक में तालिबान के पिछले शासन के दौरान, महिलाओं को स्कूल-कॉलेजों और कार्यस्थलों पर जाने से रोक दिया गया था।

मौत, रेप या फिर सेक्स स्लेव बनकर बच्चे पैदा करो; अफगानिस्तान में यौन दासता

पूरी दुनिया की नजर अफगानिस्तान में चल रहे संघर्ष की तरफ है। तालिबानियों ने 20 साल बाद फिर से अफगानिस्तान के बड़े हिस्से पर अपना कब्जा जमा लिया। काबुल में पूरी तरह से तालिबानी आतंकियों की पैठ मजबूत हो गई है। राष्ट्रपति भवन से लेकर हर सरकारी दफ्तर में बस तालिबानियों का कब्जा है। तालिबान के आतंकियों के खौफ खाए लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे है। वहीं इस बीच वहां कुछ ऐसा हो रहा है, जो बेहद डरा देने वाला है। 
ऐसे में प्रश्न होता है कि जब भारत में मोदी सरकार द्वारा मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से मुक्ति दिलाने के कानून बनाए जाने पर टीवी चर्चाओं में इस्लाम में महिलाओं के सम्मान की बात कहकर लोगों को भ्रमित करने वाले इस्लाम के जानकर क्यों खामोश हैं? क्या भारत और भारत से बाहर इस्लाम में फर्क है?  

अफगानिस्तान में यौन दासता

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो तालिबान लड़ाकों ने कथित तौर पर फिर से कब्जा किए गए शहरों से 12 साल की लड़कियों को ‘सेक्स गुलाम’ (Sex Slaves) बनाने के लिए घरों से उठाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक कमांडरों ने इमामों को आदेश दिया है कि वे अपने सैनिकों की शादी के लिए 12 साल से ज्यादा उम्र की लड़कियां और 45 वर्ष तक विधवा महिलाओं को लाएं, क्योंकि उन्हें ‘कहानीमत’ या ‘युद्ध की लूट’ के तौर पर देखा जा रहा है। वहां के धार्मिक नेता तालिबान आतंकियों की शादी के लिए 15 से ज्यादा उम्र की लड़कियों और 45 वर्ष से कम उम्र की विधवा महिलाओं की लिस्ट बनाने के काम में जुटने का आदेश जारी कर दिया है। हालांकि इस काम को शुरू किया गया है या नहीं इस बारे में किसी तरह की कोई खबर सामने नहीं आई है। 

खौफजदा महिलाएं 

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी की शबिया मंटू ने बताया कि मई से अब तक 250,000 से अधिक लोग अपने घरों से भागने के लिए मजबूर हो गए हैं और उनमें से 80 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे है। वहीं बताया जा रहा है कि ऐसे जबरन विवाह या सेक्स स्लेव के रूप में महिलाओं और लड़कियों को वजीरिस्तान (पाकिस्तान) ले जाया जाएगा और फिर से तामील देकर इस्लाम में कन्वर्ट किया जाएगा। दूसरी तरफ इस आदेश के बाद लड़कियों-महिलाओं सहित परिवारों में भयानक खौफ है। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भाग रहे है। 

अफगानी महिला के आंसुओं ने खोल दी ऑंखें 

एक्टिविस्ट मासिह अलीनेजाद (Masih Alinejad) के ट्विटर अकाउंट से शेयर किए गए वीडियो में एक अफगानी लड़की (Afghani Girl Crying) जिस तरह बेबसी के आंसू रोती हुई दिख रही है, उसे देखकर आपका कलेजा भी कांप उठेगा। 45 सेकेंड की क्लिप में लड़की के चेहरे पर हज़ार भाव आते-जाते दिख रहे है। मानो उसे अपना भी भविष्य उन्हीं नकाबपोश लड़कियों में दिख रहा है, जिन्हें तालिबानी जानवरों (Taliban Treat Girls like Animals) की तरह समझते हैं। लड़की रोते हुए बताती है कि उसका जुर्म सिर्फ इतना है कि वो अफगानिस्तान (Afghanistan Taliban) में पैदा हुई है। वो कहती है- ‘हमारी गिनती ही नहीं होती, क्योंकि हम अफगानी लड़किया है। मैं सिर्फ रो सकती हूं क्योंकि हम इतिहास में धीरे-धीरे मर रहे है।  किसी को भी हमारी परवाह नहीं।' 

तालिबानियों की नज़र में महिला मात्र सम्भोग की चीज़ 

इस लड़की ने तो नहीं, लेकिन इसकी मां या घर की बड़ी महिलाओं ने साल 1996-2001 तक का तालिबानी शासन ज़रूर देखा होगा। इसने भी वो दास्तान सुनी होगी, तभी डर के मारे उसकी रूह कांप रही है। स्कूल-कॉलेज, दोस्त तो छोड़िए, महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाता। तालिबानी राज में 12 साल के ऊपर की बच्चियां भी सेक्स स्लेव बना दी जाती हैं। अगर वो दहलीज़ से बाहर कुछ बेहतर करने का सोचती हैं तो तालिबानी उन्हें नेस्तनाबूत कर देते है। 

मौत, बलात्कार या सेक्स स्लेव बनकर बच्चे पैदा करो 

महिलाओं, लड़कियों और बच्चियों तक के नसीब में तालिबान सिर्फ तीन चीज़ें लिख देते हैं – मौत, रेप या फिर सेक्स स्लेव बनकर बच्चे पैदा करना। तालिबानी कब्ज़ा होने के बाद ही उन्होंने घर-घर जाकर 12 साल से ऊपर की बच्चियों को उठाना शुरू कर दिया है। उनका भविष्य निर्धारित किया जा चुका है- या तो उनकी शादी उम्र में दुगने या तिगुने शख्स के साथ कर दी जाएगी या फिर उन्हें सेक्स स्लेव के तौर पर बेच दिया जाएगा। इस खौफनाक सच्चाई को जानने के बाद अफगानी लड़कियों की आंखों में आंसू आना लाज़मी है। यूनाइटेड नेशंस तक ये हालात पहुंच रहे हैं, वे भी इसकी असलियत जानते हैं, लेकिन मानो इसका कोई हल किसी के पास बचा ही नहीं है। इन लड़कियों के आंसू बेमोल हैं और इनका भविष्य घने अंधकार है। 

अफगानिस्तान में मौत के डर से कई पूर्व महिला जज खुफिया जगहों पर छिपीं, उन्हें खोज रहे हैं जेल से छूटे तालिबानी कैदी

अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद से वहाँ के नागरिक डर के साये में जीने को मजबूर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 220 से अधिक अफगान महिला जज तालिबानियों की सजा के भय से अभी भी खुफिया जगहों पर छिपी हुई हैं। उनका कसूर केवल इतना है कि वह महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ी। ये उन लोगों की रक्षक रही हैं, जो देश में हाशिए पर थे और न्याय चाहते थे।

खुफिया जगहों से छह पूर्व महिला जजों ने बीबीसी से बात की है। मासूमा (बदला हुआ नाम) ने अपने जज के करियर के दौरान सैकड़ों पुरुषों को महिलाओं के खिलाफ हिंसा, रेप, हत्या और प्रताड़ना के लिए सजा दी है, लेकिन जब से अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबानी आए हैं, उन्होंने जेल में बंद सभी कैदियों को रिहा कर दिया है। इसके बाद से उन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिलने लगीं। उन्होंने बताया कि कई नंबरों से उनके फोन पर टैक्स्ट मैसेज, वॉयस नोट्स आए हैं। मासूमा ने बताया कि जब हमने यह सब सुना तब हम वहाँ से तुरंत भाग खड़े हुए। हमने अपना घर और सब कुछ वहीं छोड़ दिया।

बताया जा रहा है कि कई महीनों पहले एक दोषी को मासूमा ने 20 साल जेल की सजा सुनाई थी। वह तालिबान का सदस्य था, जिसने अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या की थी। वो कहती हैं, “मैं उस नौजवान महिला की सूरत अभी भी याद कर सकती हूँ। वो बहुत वीभत्स अपराध था।”

रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में बीते 20 सालों में 270 महिलाएँ जजों के रूप में काम कर चुकी हैं। इनमें से कई देश की प्रसिद्ध और ताकतवर महिलाएँ हैं, जिन्हें लोग जानते हैं। बीबीसी के मुताबिक, कम से कम 220 पूर्व महिला जज अफगानिस्तान के विभिन्न प्रांतों में ही छिपी हुई हैं। उन्होंने जिन छह पूर्व जजों से बात की है, उन सभी ने लगभग एक जैसी बातें बताई हैं।

इन सभी को तालिबानी जान से मारने की धमकी दे रहे थे। ये वही तालिबानी हैं, जिन्हें महिला जजों ने पहले सजा दी थी। इनमें से चार वो पुरुष थे, जिनको अपनी पत्नी की हत्या के मामले में जेल में बंद किया गया था। धमकी मिलने के बाद सभी पूर्व जज अपने नंबर बदल चुकी हैं। वे अलग-अलग जगहों पर छिपी हुई हैं और कुछ दिनों में अपनी जगह बदलती रहती हैं।

गौरतलब है कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान के हालात अब तेजी से बदल रहे हैं। तालिबान ने शरिया कानूनों के तहत लोगों को बर्बर सजा देना भी शुरू कर दिया है। हाल ही में पश्चिमी अफगानिस्तान के हेरात शहर के मुख्य चौक में एक शख्स को तालिबान ने मारकर सार्वजनिक तौर पर क्रेन से लटका दिया था। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। इसे टोलो न्यूज की पत्रकार जहरा रहीमी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “अत्याचार वापस आ गया है। तालिबान ने अफगानिस्तान के पश्चिम में हेरात शहर में एक व्यापारी के अपहरण के आरोप में चार लोगों को लटका दिया है।”

क्या तालिबान ने पाकिस्तान में दस्तक दे दी है? एंकर ने पहना हिजाब

                                               पाकिस्तानी एंकर ने लाइव शो में पहना हिजाब 
अफगानिस्तान की जनता तो तालिबान के खिलाफ सड़कों पर है, लेकिन पाकिस्तान के लोगों में धीरे-धीरे तालिबान का रंग चढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान की सरकार तालिबान के गले में फूलों का हार पहना रही है तो पाकिस्तान के अलग अलग इलाकों में तालिबान के समर्थन में रैलियाँ निकाली जा रही हैं और अब तालिबान के समर्थन में पाकिस्तान की एक मशहूर टीवी एंकर ने लाइव शो के दौरान हिजाब पहन लिया।

पाकिस्तानी एंकर ने पहना हिजाब 

पाकिस्तान में अलग अलग तरीकों से तालिबान के समर्थन में कसीदे पढ़े जा रहे हैं और खुद प्रधानमंत्री इमरान खान तालिबान के समर्थन में निकलने वाली रैलियों के मुख्य नेता हैं। पाकिस्तान की मशहूर टीवी एंकर किरन नाज़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वो लाइव शो में हिजाब पहनती नजर आ रही हैं।

 

वीडियो में दिख रहा है कि किरण नाज न्यूज पढ़ते हुए तालिबान की तारीफ कर रही हैं और उनके बगल में हिजाब रखा हुआ है। कुछ देर तक तालिबान की शान में कसीदे पढ़ने के बाद किरण नाज बगल में रखा हुआ हिजाब उठाती हैं और उसे टीवी पर पहन लेती हैं। किरण नाज ने हिजाब पहनकर उन लोगों के नाम गिनाने शुरू किए, जिन्होंने शोहरत हासिल की है और जो हिजाब पहनती हैं।

एंकर ने हिजाब पहनकर क्या कहा 

तालिबान के समर्थन में बोलते हुए लाइव टीवी पर किरण नाज़ ने कहा, “मैं आज के शो में हिजाब पहनकर बैठूँगीं और आज का शो मैं हिजाब के साथ करूँगी।” फिर किरण नाज़ ने लाइव टीवी के दौरान हिजाब पहन लिया और फिर उन्होंने कहा, ”हिबाज पहनने वाली औरतें भी इसी तरह से नॉर्मल होती हैं, जैसा की हिजाब नहीं पहनने वालीं। इसे पहनने के बाद ना मेरे लफ्जों में कोई कमी आएगी, ना ही मरी सोच में तब्दीली आएगी।” इसके बाद पाकिस्तान की एंकर ने मिसालें देनी शुरू कर दी।

दरअसल लाइव शो में पाकिस्तान के प्रोफेसर परवेज हूडभोय बता रहे थे कि अब यूनिवर्सिटी में भी सब कुछ नॉर्मल नहीं है, लड़कियों को हिजाब पहनने को कहा जा रहा है। इसके जवाब में एंकर ही हिजाब के बचाव में उतर गई। वीडियो के मुताबिक कायदे आजम यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे परवेज हुडभोय ने कहा था, “मैंने साल 1973 से पढ़ाना शुरू किया, तब 47 साल पहले एक लड़की भी आपको बमुश्किल बुर्के में दिखाई देती थी। अब तो हिजाब बुर्का आम हो गया है। अब तो नॉर्मल लड़की तो दिखाई ही नहीं देती है और जब वो क्लास में बैठती हैं हिजाब में बुर्के में लिपटी हुईं तो उनकी एक्टिविटी क्लास में बहुत घट जाती है। यहाँ तक कि पता ही नहीं चलता कि वो क्लास में है या नहीं”

तालिबान के रंग में रंगा पाकिस्तान 

किरण नाज़ पाकिस्तान की कोई पहली जर्नलिस्ट नहीं हैं, जिन्होंने तालिबान का समर्थन किया है। पाकिस्तानी मीडिया का एक बड़ा हिस्सा लगातार तालिबान को समर्थन दे रहा है और तालिबान का आना पाकिस्तान के लिए अच्छा बता रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान खुद तालिबान की काफी समर्थन कर चुके हैं और उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया था कि ‘तालिबान ने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ा है’। 

वहीं, इसी हफ्ते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हक्कानी नेटवर्क का भी बचाव किया है और उन्होंने हक्कानी नेटवर्क को ‘सीधी-साधी जनजाति’ का हिस्सा बता दिया। जिसके बाद पूरी दुनिया में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की आलोचना हो रही है और उनका मजाक उड़ाया जा रहा है।

तालिबान को मदद करना पाकिस्तान को महंगा पड़ा, लग सकता है प्रतिबन्ध

पहले से ही आर्थिक संकट से झूझ रहे पाकिस्तान पर एक पहाड़ और टूटने वाला है। इसीलिए कहते हैं कि 'तुम किसी के लिए गड्डा खोदोगे, भगवान तुम्हारे लिए खाई', जो पाकिस्तान पर चरितार्थ होने जा रही है। पहले ही आतंकियों को पालने के कारण विश्व में अपना वर्चस्व खोने के बाद रही सही कसर अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा करने में तालिबान का मार्गदर्शन पाकिस्तान पर बहुत भारी पड़ने जा रहा है।  
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे में मदद करने वाले पाकिस्तान को अमेरिका ने कड़ी फटकार लगाई है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के आतंकवादियों को पनाह दे रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अफगानिस्तान को लेकर वैश्विक समुदाय की नीतियों का पालन करना चाहिए। अन्यथा प्रतिबन्ध भी लग सकता है, अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की मांग तेज हो गई है।

तालिबान के काबुल पर कब्जा करने को लेकर एंटनी ब्लिंकन ने पाकिस्तान पर निशाना साधा। अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर, अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान के कई हित हैं, जिनमें से कुछ सीधे अमेरिकी हितों के साथ संघर्ष करते हैं। ब्लिंकेन ने तालिबान की जीत पर अपने बयान में यह भी कहा कि अफगानिस्तान में भारत की बढ़ती भूमिका के बाद पाकिस्तान ने कई “हानिकारक” कदम उठाए।

अमेरिकी विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब तालिबान के साथ उसके संबंधों पर दुनिया भर में सवाल उठ रहे हैं। इतना ही नहीं जब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया काबुल पहुंचे तो अफगान लोगों ने उनका कड़ा विरोध किया। आईएसआई प्रमुख के दौरे के दौरान पंजशीर में तालिबान का भीषण हमला हुआ और उन्होंने काफी इलाके पर कब्जा कर लिया।

पाकिस्तान पर तालिबान को पंजशीर पर कब्जा करने में मदद करने का आरोप है। पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है. पाकिस्तान उन दो देशों में शामिल है, जिनका तालिबान पर सबसे अधिक प्रभाव है। इसके अलावा दूसरा देश कतर है। पाकिस्तान के गृह मंत्री ने खुद स्वीकार किया है कि तालिबान आतंकवादी और उनके परिवार यहां रहते हैं।