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इजरायली महिला की हत्या की, नग्न किया, थूका… वीडियो में दिखी ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाते इस्लामी आतंकियों की बर्बरता

                                हमास के आतंकियों ने इजरायली महिला को नग्न कर बनाया बंधक (बाएँ)
7 अक्टूबर को इजरायल में रहने वाले लोगों की सुबह सायरन, रॉकेट के धमाकों और गोलीबारी की आवाज के साथ हुई। इजरायल की सुरक्षा एजेंसियाँ जब तक एक्शन में आ पातीं तक तक फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास के लोग जमीन, पानी और आकाश तीनों ही रास्तों से घुसपैठ कर हमला करने और लोगों को बंधक बनाने, मारने-पीटने में जुटे हुए थे।

इसी दौरान हमास के आतंकी ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारों के बीच महिलाओं को प्रताड़ित करते नजर आए। वहीं कुछ आतंकियों ने महिलाओं को नग्न कर घिनौनी करतूत की। सामने आए वीडियो में नग्न महिला आतंकियों की गाड़ी में बंधक नजर आ रही हैं। वहीं आतंकी इस्लामी नारों के बीच जश्न मनाते दिखाई दे रहे हैं। थूक भी रहे हैं। एक अन्य वीडियो में खून से लथपथ एक महिला को बंधक बनाते देखा जा सकता है।

हमास के हमले के बाद बारी इजरायल की थी। एक ओर जहाँ हमास के हमले में इजरायल के 40 लोग मारे गए थे। वहीं इजरायल की जवाबी कार्रवाई में फिलिस्तीन के करीब 200 लोगों मारे गए हैं। वहीं 1600 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है।

इजरायल हमास पर लगातार हवाई हमले कर रहा है। मौजूदा हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि देश गाजा पट्टी में हमास के आतंकियों के साथ युद्धस्तर पर लड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलिस्तीन को ऐसा जवाब मिलेगा जिसके बारे में उसने सोचा भी नहीं होगा।

इसके अलावा, बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन से भी बात की है। इसमें अमेरिका ने इजरायल को साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया है। वहीं नेतन्याहू ने बायडेन से कहा कि उनका देश एक मजबूत और लंबी लड़ाई के लिए तैयार है। इसमें उन्हें जरूर जीत मिलेगी।

इजरायल-फिलिस्तीन के बीच जारी जंग को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “इजरायल पर आतंकी हमले से काफी आहत हूँ। हमारी प्रार्थनाएँ एवं संवेदनाएँ निर्दोष पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ हैं। इस कठिन परिस्थिति में हम इजरायल के साथ एकजुटता से खड़े हैं।”

उधर इजरायल की IDF (डिफेन्स फोर्सेज) ने गाजा में घुस कर कई ड्रोन स्ट्राइक को अंजाम दिया है। उधर यूक्रेन ने भी इजरायल का समर्थन किया है। यूके के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी इजरायल के समर्थन में बयान जारी किया है। गाजा पट्टी से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ओफ़ाकिम शहर में कई लोगों को बंधक बनाए जाने की खबर है। वहाँ कई आतंकियों को इजरायल की सेना ने भी मार गिराया है।

कीबुत्ज के लोगों ने सेना से गुहार लगाई है कि उन्हें बचाया जाए। हमास के बंदूकधारी आतंकी शहरों में सड़कों पर घूमते हुए और गोलीबारी करते हुए देखे जा सकते हैं। हमास ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें वो इजरायल की मिलिट्री एम्बुलेंस पर बमबारी करता हुआ दिखाई दे रहा है।

इजरायल में जमीन, जल और आकाश – तीनों मार्गों से घुसपैठ हुई है। हमास ने उन वीडियोज को भी जारी किया है, जिनमें उसे इजरायली सैनिकों को बंधक बना कर उन पर अत्याचार करते हुए देखा जा सकता है। इजरायल में लगभग 8 घंटे लगातार रॉकेट्स दागे गए हैं। गाजा पट्टी में हमास के 17 सैन्य परिसर और 4 मुख्यालय तबाह कर दिए गए हैं।

भगवान सूर्य से जुड़े मंदिर में 3000 साल पुरानी सुरंग: पेरू की चाविन संस्कृति उन्नत कला के लिए प्रसिद्ध, यूनेस्को की सूची में शामिल

                          पेरू के प्राचीन मंदिर में मिली 3000 साल पुरानी सुरंग (फोटो साभार: Reuters)
दक्षिण अमेरिकी देश पेरू के पुरातत्वविदों ने एक प्राचीन मंदिर में करीब 3000 साल पुरानी सुरंग की खोज की है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि यह सुरंग प्राचीन चाविन संस्कृति से जुड़े मंदिर के अन्य कमरों की ओर जाती है। इस सुरंग में 17 किलोग्राम का सिरेमिक का एक टुकड़ा मिला है। इस टुकड़े में कोंडोर पक्षी का सिर और पंख बना हुआ है। इसलिए इसे ‘कॉन्डर्स पैसेजवे’ कहा जा रहा है।

चाविन संस्कृति से जुड़ी सुरंग मंदिर के दक्षिणी हिस्से में मिली है। पुरातत्वविदों का कहना है कि यह सुरंग काफी कमजोर है। इसलिए इसे बंद कर दिया गया था। इस सुरंग में चाविन संस्कृति के शुरुआती दिनों की झलक दिखाई देती है।

यह सुरंग पेरू में हुआरी प्रांत के चाविन जिले में स्थित चाविन डी हुआनतार इलाके में मिली है। यह इलाका प्राचीन चाविन संस्कृति के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक है। यही कारण है कि चाविन डी हुआनतार को यूनेस्को ने साल 1985 में पुरातात्विक स्थलों की सूची में शामिल किया था।

पुरातत्वविदों का मानना है कि इस इलाके का निर्माण 1500 से 500 ईसा पूर्व में हुआ था। चाविन संस्कृति अपनी उन्नत कला के लिए जानी जाती है। इस संस्कृति से जुड़े प्राप्त अवशेषों में आम तौर पर पक्षियों और बिल्लों के चित्र बने होते हैं।

चाविन संस्कृति एक ऐसी संस्कृति थी, जिसके लोग एक स्थान पर रह कर खेती करते हुए जीवन-यापन करते थे। ऐसा माना जाता है कि पेरू में इंका साम्राज्य के सत्ता में आने से 2000 साल से कहीं अधिक पहले चाविन लोग यहाँ रहते थे।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के पुरातत्वविद जॉन रिक ने रॉयटर्स से हुई बातचीत में कहा है कि मई 2022 में इस सुरंग का दरवाजा खोला गया था। उस दौरान यहाँ करीब 17 किलोग्राम का सिरेमिक का बड़ा टुकड़ा मिला था। इस सिरेमिक टुकड़े पर कोंडोर पक्षी का सिर और पंख बना हुआ है। इस सुरंग में एक सिरामिल के कटोरे के साथ यह सब मिला था।

ऐसा माना जाता है कि कोंडोर दुनिया के सबसे बड़े पक्षियों में से एक है। प्राचीन एंडियन संस्कृतियों से जुड़े लोग इस पक्षी को शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानते थे। यही नहीं, कोंडोर को भगवान सूर्य से जुड़ा और ऊपरी दुनिया का राजा भी माना जाता था।

पुरातत्वविद जॉन रिक और उनकी टीम ने ही इस सुरंग की खोज की है। रिक ने यह भी कहा है कि इस मंदिर परिसर के अधिकांश भागों की खुदाई अब तक बाकी है। सुरंग मिलने के बाद यह पाया गया था कि यह बेहद जर्जर अवस्था में है। ऐसे में रोबोटिक कैमरों का इस्तेमाल कर इसकी जाँच की गई।

भारत विरोधी अरबपति जॉर्ज सोरोस की करीबी महिला के साथ राहुल गाँधी क्यों?

राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा एक बार फिर से विवादों में है। बीजेपी ने अमेरिका यात्रा के दौरान संसद से अयोग्‍य घोषित हो चुके राहुल गांधी की भारत विरोधी अमेरिकी अरबपति जार्ज सोरोस की करीबी सुनीता विश्वनाथ और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े तजीम अंसारी के साथ बैठक पर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि कई दस्तावेज प्रमाण दे रहे हैं कि भारत की लोकतांत्रिक सरकार को हटाने की बात डंके की चोट पर कहने वाले जार्ज सोरोस द्वारा वित्त पोषित महिला सुनीता विश्वनाथ और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े तजीम अंसारी के साथ अमेरिका में राहुल ने बैठक की। सोरोस के ही संस्थान ओपन सोसाइटी के ग्लोबल उपाध्यक्ष सलिल शेट्टी ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी हिस्सा लिया था। इससे साफ जाहिर है कि सत्ता के लिए कांग्रेस आज इतना नीचे गिर गई है कि वह देशविरोधी लोगों से भी हाथ मिलाने से गुरेज नहीं कर रही। सत्ता के लिए राहुल गांधी देश को कमजोर करने और देश को नीचा तक दिखाने के लिए तैयार हैं।

जार्ज सोरोस के सहयोगी से मिलने की राहुल की क्या है मजबूरी?

भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में स्मृति ईरानी ने कहा कि भाजपा ने इस विषय को पहले भी उठाया था कि कैसे जार्ज सोरोस भारत में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को हटाना चाहते हैं। सोरोस के इरादे हर भारतवासी को पता थे, तब भी ऐसी क्या मजबूरी थी कि राहुल गांधी ने जार्ज सोरोस के एक सहयोगी के साथ अमेरिका में बैठक की। ईरानी ने सवाल किया कि राहुल को जवाब देना चाहिए कि वे लोगों के साथ क्या बात कर रहे थे? स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गांधी अमेरिका दौरे पर 4 जून को जमाते इस्लामी से संबंधित एक इस्लामी संगठन से मिले थे। इस मुलाकात पर सवाल उठाते हुए स्मृति ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर चर्चा करते हुए कहा कि इस दौरान भी सोरोस के ओपन सोसायटी के मेंबर सलिल सेठी भी राहुल गांधी के साथ दिखाई दिए थे। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मुद्दे को उठाने पर बीजेपी नेता के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। यह सच को दबाने की कोशिश है। उन्होंने पूछा कि जो भारत की सरकार को गिराना चाहता है उसके साथ राहुल गांधी आखिर क्या कर रहे हैं। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में फोटो भी शेयर किए।

अमित मालवीय ने राहुल की सच्चाई दिखाई तो कांग्रेस को मिर्ची लगी

दरअसल, कर्नाटक में भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के सदस्य रमेश बाबू ने यह शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि मालवीय ने कांग्रेस और राहुल गांधी का मजाक उड़ाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर माहौल बिगाड़ने और लोगों को उकसाने का काम किया। जबकि इस वीडियो इसमें उन्हीं बातों को दिखाया गया है जो कि राहुल गांधी अपने ब्रिटेन और अमेरिकी दौरे पर कहते रहे हैं। इसमें दिखाया गया है कि वे भारत के विरोधी हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने के लिए विदेशों में भारत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।
सुनीता विश्वनाथ ने किया था पीएम मोदी के दौरे का विरोध
सुनीता विश्वनाथ हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (एचएफएचआर) की कोफाउंडर हैं। वह अमेरिका में इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल के साथ कई कार्यक्रमों में शिरकत करती हैं। यह एक कट्टर संगटन है। खबरों के अनुसार इस संगठन का पश्चिम में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के साथ सांठगांठ है। संदिग्ध संगठन ‘हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे का विरोध किया था। इसके खिलाफ प्रोपेगेंडा के लिए विशेष टूलकिट लेकर आया था। संगठन द्वारा जारी टूलकिट उसके मोदी विरोधी अभियान का हिस्सा था। “मोदी प्रोटेस्ट टूलकिट” शीर्षक वाला 24 पेज का दस्तावेज़ एचएफएचआर की वेबसाइट पर खुले तौर पर उपलब्ध था।
अमेरिका में राहुल का जमात, सुनीता विश्वनाथ कनेक्शन, फोटो ने खोल दी पोल
राहुल गांधी पीएम मोदी के अमेरिका दौरे से पहले 30 मई को अमेरिका पहुंचे थे। राहुल गांधी के विदेश दौरे का उद्देश्य भारत को नीचा दिखाना, पीएम मोदी और भाजपा को बदनाम करना और भारत में मुसलमान खतरे हैं, यही बताना रहता है। यह काम वह पिछले कई विदेश दौरे से करते आ रहे हैं। लेकिन जिस तरह सोशल मीडिया पर उनका एक फोटो वायरल हुआ उसने उनकी पोल खोलकर रख दी है। जिस अमेरिकी अरबपति कारोबारी जार्ज सोरोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जहर उगला था, जिसने पीएम मोदी को सत्ता से हटाने की बात कही थी, जिसने राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 अरब डॉलर का फंड देने की बात कही थी, अब राहुल गांधी उसी के करीबी सहयोगी सुनीता विश्वनाथ के साथ बैठते करते देखे गए। आखिर राहुल गांधी देश विरोधी लोगों से क्यों मिल रहे थे? क्या भारत को कमजोर करने की जार्ज सोरोस की साजिश में वे भी शामिल हैं? राहुल गांधी का जमात, ISI और जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोगों से मिलना यह साबित करता है कि वे भारत से प्रेम नहीं करते बल्कि सत्ता के लिए देश को कमजोर करने से लेकर किसी भी हथकंडे को अपना सकते हैं।
जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं सुनीता विश्वनाथ

सुनीता विश्वनाथ जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं, जिसने विपक्षी नेताओं, थिंक टैंक, पत्रकारों, वकीलों और कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क के माध्यम से भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए 1 अरब डॉलर देने का वादा किया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी सत्ता पाने के लिए इस हद तक समझौता कर रहे हैं। अमेरिकी एक्टिविस्ट सुनीता विश्वनाथ वही हैं जिन्हें तीन साल पहले अयोध्या में एंट्री से रोक दिया गया था।
कुछ समय पहले विवादित ‘काली’ वेब सीरीज पर उठे विवाद पर इस महिला ने आकर सीरीज की निर्माता के पक्ष में हिंदू देवताओं के लिए उल-जुलूल बातें की थीं। अपने लेख में सुनीता ने महादेव की चिलम फूँकती तस्वीर लगाकर कहा था कि हिंदुओं में शराब और सिगरेट कुछ भी निषेध नहीं है। देवताओं को ये सब चढ़ता है।
सुनीता ने अपने लेख में सेक्स और समलैंगिकता को घुसाकर ये तक लिखा था कि धर्मग्रंथों में अनगिनत ऐसी कहानियाँ भरी पड़ी हैं, जिन्हें पढ़कर समलैंगिकता से पैदा हुए बच्चों का पता चलता है। सुनीता ने यह भी लिखा था कि हिंदुओं के कुछ देवता तो समलैंगिक भी हैं। काली के आपत्तिजनक दृश्यों को सपोर्ट करने के लिए सुनीता ने साफ लिखा था कि हिंदू देवता धूम्रपान, मदिरापान करते हैं। इसके अलावा वो मांस भी खाते हैं।

कौन हैं जॉर्ज सोरोस

92 साल के जॉर्ज सोरोस एक अमेरिकी अरबपति हैं, जो स्टॉक मार्केट में निवेश करके लाभ कमाते हैं। उनका जन्म 1930 में पश्चिमी देश हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में एक यहूदी परिवार में हुआ था। कहा जाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब यहूदियों पर अत्याचार हो रहा था, तब उन्होंने झूठा पहचान पत्र बनाकर अपना और अपने परिवार की जान बचाई थी।
जब विश्वयुद्ध खत्म हुआ और हंगरी में कम्युनिस्ट सरकार बनी तो वे 1947 में इंग्लैंड की राजधानी लंदन चले गए। वहाँ उन्होंने रेलवे स्टेशन पर कुली और क्लबों में वेटर का भी काम किया। इस दौरान वे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई की। इसके बाद कुछ समय तक उन्होंने लंदन मर्चेंट बैंक में भी काम किया।
साल 1956 में वे लंदन छोड़कर अमेरिका आ गए और फाइनांस एवं इन्वेस्टमेंट में कदम रखा। उसके बाद उनकी किस्मत चमक उठी और रात दूनी दिन चौगुनी तरक्की करने लगे और खूब संपत्ति इकट्ठा की। वित्तीय पत्रिका फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार 17 फरवरी 2023 तक उनके पास 6.7 बिलियन डॉलर (लगभग 55,455 करोड़ रुपए) की संपत्ति है।
सन 1973 में उन्होंने सोरोस फंड मैनेजमेंट की स्थापना की और कथित अत्याचार पीड़ितों की मदद करने लगे। इस दौरान उन्होंने ब्लैक लोगों की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप देना शुरू किया। उनका दावा है कि उन्होंने अब 32 अरब डॉलर (2.62 लाख करोड़ रुपए) जरूरतमंदों को दे चुके हैं। सन 1984 में उन्होंने ओपन सोसायटी नामक संस्था की स्थापना की। आज यह संस्था 70 से अधिक देशों में कार्यरत है।
इन सब मानवीय सेवाओं और दानों के पीछे उनका एक विकृत चेहरा भी है। उन्होंने लाभ कमाने के लिए कई संस्थानों और देशों में वित्तीय संकट खड़ा कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने कई देशों की सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने और उन्हें गिराने के लिए फंडिंग करने का काम किया। ओपन सोसायटी का इसमें नाम आया है। इस तरह के आरोप उन पर लगते रहे हैं।
अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को हटाने के लिए अथाह पैसे खर्च किए थे। साल 2003 में उन्होंने कहा था कि जॉर्ज बुश को हटाना उनके लिए जिंदगी और मौत का सवाल है। उन्होंने कहा था कि अगर बुश को सत्ता से हटाने की अगर कोई गारंटी लेता है और वे अपनी पूरी संपत्ति उस पर लुटा देंगे। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ बुश की कार्रवाई का भी खूब विरोध किया था। बुश को हराने के लिए उन्होंने 250 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए थे।
सोरोस को चीन, भारत के नरेंद्र मोदी, ब्लादिमीर पुतिन, अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता पसंद नहीं हैं। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को ठग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह कहा था। और यही बोली भारत में मोदी विरोधी बोल रहे हैं। उन्होंने दुनिया में ‘राष्ट्रवाद’ के बयार से लड़ने के लिए लगभग 100 अरब डॉलर की फंड की स्थापना की है। इन फंड का इस्तेमाल इन लोगों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उन्होंने कहा था कि दुनिया में राष्ट्रवाद तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे खतरनाक नतीजा भारत में देखने को मिला है।

सोरोस ने वित्तीय संकट पैदा किया और लाभ कमाया

जॉर्ज सोरोस को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, जिसने बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद कर दिया। बैंक ऑफ इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम का केंद्रीय बैंक और यह भारत के RBI के समानांतर है। हेज फंड मैनेजर सोरोस ने अपनी साजिशों से ब्रिटिश मुद्रा पाउंड की वैल्यू को गिरा दिया था। इससे उन्होंने लगभग 1 बिलियन डॉलर (8277 करोड़ रुपए) का लाभ कमाया था। उन्हें वित्तीय युद्ध अपराधी तक कहा गया है।
यह कुछ हिंडनबर्ग रिसर्च की तरह ही है। हिंडनबर्ग भी अपनी रिपोर्ट में किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति को खराब बताया है। इससे उसके शेयर गिरने लगते हैं और उसे शॉर्ट सेल करके लाभ कमाता है। अडानी मामले में भी हिंडनबर्ग ने यही तरीका अपनाया। इसके पहले भी वह ऐसा ही करता है। जॉर्ज सोरोस ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के मामले में लगभग यही रणनीति अपनाई थी।
साल 1997 में थाईलैंड की मुद्रा बाहत पर सट्टेबाजी हमलों (Speculative Attack) के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया गया था। थाईलैंड की मुद्रा में आई गिरावट के कारण उस साल एशिया के अधिकांश देशों में वित्तीय संकट फैल गया था। मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने भी वहाँ की मुद्रा रिंगित की गिरावट के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया था। हालाँकि, सोरोस ने इसका खंडन किया था।
इसके अलावा, सोरोस पर अन्य अनैतिक तरीकों से संपत्ति कमाने का आरोप लगा है। वर्ष 2002 में फ्रांस की अदालत ने सोरोस को अनैतिक और अनधिकृत व्यापार का दोषी पाते हुए उन पर 23 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया था। सोरोस ने अदालत के इस फैसले को फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने सोरोस पर लगाए गए इस जुर्माने को बरकरार रखा।
अमेरिका में भी जॉर्ज सोरोस पर बेसबॉल खेलों में पैसा लगाकर अनैतिक तरीके से लाभ कमाने का आरोप लगा। इसी तरह इटली की फुटबॉल टीम एएस रोमा को लेकर भी सोरोस विवादों में आए था। इतना ही नहीं, सोरोस ने साल 1994 में खुलासा किया था कि उन्होंने आत्महत्या करने में अपनी माँ मदद की थी।

सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा और भारत

राफेल डील में जाँच के लिए फंडिंग: फ्रांस से भारत ने 36 राफेल विमानों को खरीदा था। इसको लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने हंगामा किया था और कहा था कि इसमें दलाली हुई है। हालाँकि, यहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। इसके बाद फ्रांस की एनजीओ शेरपा एसोसिएशन ने इसमें भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराकर जाँच की माँग की थी। इस एनजीओ को जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से फंड जारी किया जाता है।
भारत जोड़ो यात्रा और सोरोस: कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा से भी जॉर्ज सोरोस के नाम जुड़े हैं। 31 अक्टूबर 2022 को सलिल शेट्टी नाम का एक व्यक्ति राहुल गांधी की कर्नाटक के हरथिकोट में उनकी भारत जोड़ी यात्रा में शामिल हुआ। सलिल शेट्टी जॉर्ज सोरोस द्वारा स्थापित ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन के वैश्विक उपाध्यक्ष हैं। इसके पहले शेट्टी एमनेस्टी इंटरनेशनल से जुड़े थे।
CAA प्रोटेस्ट: सीएए प्रोटेस्ट में भी जॉर्ज सोरोस का नाम जुड़ा है। कहा जाता है कि नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर हुए विरोध को हवा देने के लिए जॉर्ज सोरो ने फंडिंग की थी। इसकी पुष्टि उनके बयानों से भी होती है। सोरोस ने भारत में लागू किए जा रहे NRC और CAA को मुस्लिम विरोधी बताया था।
कश्मीर से धारा 370 का खात्मा: इसी तरह कश्मीर से जब केंद्र की मोदी सरकार ने धारा 370 को खत्म कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किया था, तब भी सोरोस सामने आए थे। उन्होंने मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। सोरोस ने कहा था कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है। इसी तरह किसान आंदोलन और भारत द्वारा कोरोना का वैक्सीन बनाने के बाद उसके खिलाफ वैश्विक मुहिम चलाने में भी सोरोस का नाम आ चुका है।
दरअसल, जॉर्ज सोरोस की भूमिका उन हर बातों में लगभग सामने आई, जो केंद्र की भाजपा सरकार और नरेंद्र मोदी के खिलाफ रही। जॉर्ज सोरोस की नरेंद्र मोदी के खिलाफ कितनी नफरत है, इसका वे तानाशाह कहकर सबूत दे चुके हैं और समय-समय पर अन्य आरोपों के जरिए इसकी पुष्टि भई करते रहते हैं। वैसे तो सोरोस की कहानी सैकड़ों पन्नों में भी नहीं खत्म होगी, लेकिन फिलहाल संक्षिप्त में इतना ही।

LGBTQ प्राइड मार्च के नाम पर अमेरिका में अश्लीलता : बच्चों के सामने महिलाओं ने नंगी होकर किया डांस, किस भी किया

प्राइड परेड में बच्चों के सामने अर्धनग्न हो मस्ती करती नजर आई महिलाएँ (फोटो साभार: वायरल विडियो का स्क्रीनग्रैब)
एलजीबीटीक्यू यानी कि लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर और क्वीर (LQBTQ) कम्युनिटी प्राइड मंथ मना रही है। इस दौरान ये लोग दुनियाभर के अलग-अलग हिस्सों में ‘प्राइड परेड’ निकालते और पार्टी करते हैं। अमेरिका के न्यूयॉर्क में प्राइड पार्टी के दौरान महिलाएँ अर्द्धनग्न अवस्था में नाचते-गाते दिखाई दीं। बड़ी बात यह रही कि यह सब बच्चों के सामने हो रहा था।

न्यूयॉर्क के वाशिंगटन स्क्वायर पार्क में प्राइड परेड आयोजित की गई थी। इस परेड के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियोज में पुरुष और महिलाएँ मस्ती करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं, कुछ वीडियो में महिलाएँ टॉपलेस दिखाई दे रहीं हैं। इससे उनके ब्रेस्ट खुले तौर पर नजर आ रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अर्धनग्न महिलाओं के बीच छोटे-छोटे बच्चे भी नजर आ रहे हैं।

इसको लेकर नेटिजन्स कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि बच्चों के सामने ऐसी हरकतें करने से उनकी मानसिक स्थिति पर प्रभाव पड़ सकता है। एक पत्रकार ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “यह न्यूयॉर्क शहर है। यहाँ के वाशिंगटन स्क्वायर पार्क में कई लोग नग्न होकर पार्टी कर रहे हैं। यह सब बच्चों के सामने हो रहा है। व्हाट द फ़*”

एक अन्य व्यक्ति ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन पर निशाना साधते हुए लिखा, “LGBTQ कम्युनिटी के लोग वाशिंगटन स्क्वायर पार्क में बच्चों के सामने किस और डांस कर रहे हैं। आधिकारी खुले तौर पर ऐसा क्यों होने दे रहे हैं? इसके बाद भी बायडेन कहते हैं कि ये लोग अमेरिका में ‘प्रताड़ित’ हैं।”

 


अमेरिका : 150 पादरियों द्वारा कैथोलिक चर्च में 600 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण

                                                                                                   प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार: erlegal
चर्च में बच्चों के यौन शोषण का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इसके मुताबिक अमेरिकी राज्य मैरीलैंड के कैथोलिक चर्च में 600 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण किया गया। इसमें शामिल लोगों में करीब 150 पादरी थे। यौन शोषण की ये घटनाएँ 80 साल में अंजाम दिए गए हैं। 463 पन्नों की एक रिपोर्ट से ये खुलासे हुए हैं।

चार साल की जाँच के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है। मैरीलैंड अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने 5 अप्रैल 2023 को यह रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में उन कैथोलिक पादरियों की पहचान की गई है, जो 1940 के बाद से यौन शोषण में संलिप्त थे। ब्रायन फ्रॉश के अटॉर्नी जनरल रहते इस मामले की जाँच 2019 में शुरू की थी। सैकड़ों पीड़ितों और गवाहों से बातचीत तथा एक लाख पन्नों के अध्ययन के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है।

यह रिपोर्ट पिछले साल नवंबर में ही तैयार हो गई थी। लेकिन अदालती अनुमति मिलने के बाद अब जारी की गई है। जिन बच्चों का शोषण हुआ उनमें ज्यादातर कमजोर परिवारों से थे और चर्च से जुड़े थे। इस दौरान इन्हें चुप रहने के लिए धमकी भी दी गई थी। यह बात भी सामने आई है कि 80 साल तक चले इस यौन शोषण को चर्च की तरफ से दशकों तक छुपाने की कोशिश भी की गई।

इस रिपोर्ट को लेकर बाल्टीमोर के आर्कबिशप विलियम लोरी ने जीवित बचे पीड़ितों से माफी माँगी है। उन्होंने कहा, “कैथोलिक चर्च के इतिहास में हुई यह अब तक की सबसे दुखद घटना है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता और न ही भुलाया जा सकता है। चर्च के उच्च पदों पर बैठे लोगों द्वारा बच्चों को नुकसान पहुँचाया गया और हम पीड़ितों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में विफल रहे। साथ ही दुर्व्यवहार करने वालों को उनके किए की सजा भी नहीं दिलवा पाए। इसका हमें खेद है।”

इससे पहले अमेरिका के इलिनोइस प्रांत में करीब 700 पादरियों पर बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगा था। इलिनोइस के अटॉर्नी जनरल ने भी अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया था कि चर्च इन मामलों से निपटने में अक्षम रहा थे। चर्च ने यौन शोषण के आरोपित पादरियों की संख्या 185 बताई थी, लेकिन अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि ऐसे पादरियों की संख्या इससे कहीं बहुत ज्यादा है।

मुस्लिम कैदियों के हिजाब के नाम पर मांगे डोनेशन से मोदी घृणा, कश्मीर पर दुष्प्रचार और भी बहुत कुछ

आईसीएनए एक यूएस-आधारित संगठन है जो सोशल मीडिया पर भारत विरोधी संदेश फैलाता है (फोटो क्रेडिट-: आईसीएनए/ट्विटर/फेसबुक)
इसे संयोग कहे या नियोग या परमपिता परमेश्वर की कृपा कि 2002 से जितना अधिक नरेंद्र मोदी विरोधियों द्वारा विरोध किया जा रहा है, उतनी ही तेजी से विरोधी भंवर में फंस रहे हैं। कुछ समय के लिए तो जनता इनके मकड़जाल में फंस जाती है, लेकिन अगले ही पल उनका षड़यंत्र बेनकाब हो रहा है। अभी रामलीला मैदान, नई दिल्ली में भी नमूना देखा कि किस तरह सनातन को अपमानित करने में इस्लाम की ही नई परिभाषा लिख दी, मदनी की ॐ ही अल्लाह वाली बात पर, कुछ को छोड़कर, किसी भी मुस्लिम विद्वान, मौलवी, इमाम आदि ने गंभीरता से नहीं लिया। अगर यही बात किसी हिन्दू ने बोल दी होती, आग लग लगाई, थी, 'सर तन से जुदा' गैंग सडकों पर आ गया होता। जिन्होंने गंभीरता से लिया वह मुस्लिम ज्ञानी चीख-चीखकर बोल रहे हैं, लेकिन मदनी के समर्थक बात की गहराई को नहीं समझ रहे, जो भविष्य में इस्लाम के विरुद्ध जा सकती है। भारत ही नहीं, विश्व में मोदी और हिन्दू विरोधी सक्रिय हैं। 
क्या आपने फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (instagram) या किसी अन्य सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म पर एक विज्ञापन देखा है, जहाँ एक संगठन अमेरिका में मुस्लिम कैदियों के लिए डोनेशन माँग रहा है? हमारी टीम के एक सदस्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह विज्ञापन देखा और हमने यह जाँच करने का फैसला किया कि इसके पीछे आखिर है कौन।

टीम के सदस्य भारतीय अदालतों में लंबित मामलों पर जानकारी सर्च कर रहे थे, जिसके बाद उनके सामने इस तरह का विज्ञापन आने लगे। टीम के सदस्य द्वारा सर्च की गई और हाल के कंटेंट का अमेरिका में जेल में बंद अपराधियों या अमेरिका में या भारत के बाहर कहीं भी जेल में बंद मुस्लिमों से कोई लेना-देना नहीं था।

 ‘इस्लामिक सर्कल ऑफ नॉर्थ अमेरिका (ICNA) काउंसिल फॉर सोशल जस्टिस’ खुद को संयुक्त राज्य अमेरिका से बाहर स्थित एक सामाजिक न्याय/मानवाधिकार संगठन के रूप में पेश करता है। विज्ञापन ने हमारा ध्यान आकर्षित किया, जहाँ उसने अमेरिकी जेलों में बंद मुस्लिम कैदियों के लिए हिजाब खरीदने के लिए पैसे माँगे। यह वह विज्ञापन है जो हमारे सामने आया था।

                                                                           साभार: फेसबुक

ग्राफिक्स में लिखा था, “सलाखों के पीछे मुस्लिम महिलाएँ अपने बालों को ढकने के लिए हिजाब माँग रही हैं। इसमें आगे लिखा था, “यह एक मुस्लिम महिला के रूप में अपनी पहचान को मजबूत करने का एक तरीका है। हमारी मदद करें, उनकी मदद करें।”

जब हमने विज्ञापन पर क्लिक किया, तो यह हमें संगठन के डोनेशन पेज पर ले गया, जिसमें दावा किया गया है कि अमेरिका में जेल की 10 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। संगठन अमेरिका में सलाखों के पीछे मुस्लिमों को ‘मुफ्त धार्मिक सामग्री वितरित करने’ के लिए एक मुस्लिम कैदी सहायता परियोजना (MPSP) चलाता है। वे ‘कुरान, इस्लामी साहित्य, हिजाब, प्रार्थना मैट को जेलों में वितरित करते हैं।’ दिलचस्प बात यह है कि डोनेशन पेज पर वीडियो में एक कैदी ने खुद को ‘नया मुस्लिम’ बताया।

यह संभव है कि संगठन अमेरिकी जेलों में एक धर्मांतरण कार्यक्रम चला रहा हो और दान के माध्यम से एकत्रित धन का इस्तेमाल करके कैदियों को इस्लाम में परिवर्तित कर रहा हो।

डोनेशन कैदियों को इस्लाम-केंद्रित सामग्री देने का आह्वान करता है

फेसबुक एड लाइब्रेरी के अनुसार, डोनेशन एकत्र करने के लिए संगठन के पास भारत में 39 अलग-अलग सेटों में 200 से अधिक सक्रिय विज्ञापन चल रहे हैं। भारत के लिए हालिया जन अभियान 10 फरवरी, 2023 को शुरू हुआ है। विज्ञापनों में धार्मिक पुस्तकें, स्वच्छ जेल प्रार्थना कक्ष, हिजाब, प्रार्थना के लिए कालीन और ईद के भोजन के लिए दान की माँग की गई है। हमें एक भी ऐसा विज्ञापन नहीं मिला जो भारत में चलता हो और उनकी शिक्षा या पुनर्वास के बारे में बात करता हो।
इसका उद्देश्य मुस्लिम कैदियों को और धार्मिक बनाने पर है। कुल मिलाकर अकेले Facebook विज्ञापन लाइब्रेरी में संगठन के 800+ विज्ञापन थे। संगठन ने बिना ज्यादा स्पष्टीकरण के मुसलमानों के जन्मदिन मनाने के लिए धन इकट्ठा करने वाले कार्यक्रम भी चलाए हैं।
                               कई फंडरेजर इसके फेसबुक पेज पर जन्मदिन मनाने के लिए थे (साभार: फेसबुक)

संगठन का मोदी विरोधी अभियान

संगठन का एक और खतरनाक पहलू है। वह अब भारत के आंतरिक मामलों में धीरे-धीरे हस्तक्षेप कर रहा है, जो चिंता पैदा करता है। संगठन अमेरिका में मुस्लिम कैदियों के लिए धन दान करने के लिए भारत के मुसलमानों को आकर्षित करने के लिए विज्ञापन चला रहा है। वे व्यूअर से सहानुभूति हासिल करने के लिए मोदी विरोधी नैरेटिव का इस्तेमाल कर रहे हैं।
हमें ट्विटर पर ‘मोदी’ के नाम की चर्चा वाली नौ पोस्ट मिलीं। सबसे हालिया एक बीबीसी डॉक्यूमेंट्री के बारे में था। इसमें भारत सरकार द्वारा डॉक्यूमेंट्री पर लगाए गए प्रतिबंध के बारे में बात की गई है। पोस्ट में, संगठन ने दावा किया कि गुजरात 2002 के दंगों में मुसलमान का नरसंहार किया गया था। बेशक, वे गोधरा में एक ट्रेन को जलाने का कभी जिक्र नहीं करेंगे, जिसके परिणामस्वरूप 59 निर्दोष हिन्दुओं की मौत हो गई, जिसने दंगों को भड़का दिया था।
पुरानी पोस्टों ने इस नैरेटिव को प्रचारित किया था कि अमेरिका में हिंदुत्व फैल रहा है। एक अन्य पोस्ट में, संगठन ने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को निरस्त करने की बात की और इसे ‘कश्मीर का काला दिवस‘ ​​बताया। संगठन ने अक्टूबर 2022 के एक पोस्ट में कश्मीर को आजाद करने की बात कही थी।
संगठन वर्षों से कश्मीर के बारे में दुष्प्रचार कैसे कर रहा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अपने सोशल मीडिया पोस्ट के लिए स्टॉक इमेज का उपयोग कर रहा है, जिसका कश्मीर या भारत से कोई लेना-देना नहीं है। इस पोस्ट पर एक नज़र डालें। इस पोस्ट में एक इमेज है जिसे istockphoto.com से लिया गया है। यह फोटोग्राफर एड्रियन हिलमैन द्वारा क्लिक किया गया 2011 का शॉट है।
आईसीएनए ने भारत के खिलाफ प्रचार करने के लिए स्टॉक इमेज का इस्तेमाल किया (स्रोत: आईसीएनए का ट्विटर/आईस्टॉकफोटोज)
इसकी वेबसाइटों पर पोस्ट भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी बयानों से भरे हुए हैं। उदाहरण के लिए एक पोस्ट में, उन्होंने दंगाइयों के घरों के विध्वंस के बारे में बात की और दावा किया कि यह एक मुस्लिम विरोधी अभियान था। इसने मुस्लिम विरोधी नैरेटिव बनाने के लिए हिंदुओं और हिंदुत्व को दोषी ठहराया।
              आईसीएनए ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पीएम मोदी के खिलाफ दुष्प्रचार किया (स्रोत: ट्विटर)

संगठन कौन चलाता है?

डॉ ज़ाहिद बुखारी ICNA CSJ के संस्थापक और कार्यकारी निदेशक है। वह पाकिस्तान में पैदा हुआ था और अक्सर सोशल मीडिया पर भारत विरोधी बयान साझा करता है। उसने कुख्यात हिंदू-विरोधी प्रोफेसर ऑड्रे ट्रस्चके (Audrey Truschke) की रिपोर्ट भी साझा की है।
राजस्थान में हिंदू दर्जी कन्हैया लाल की जघन्य हत्या के बारे में बात हो या भाजपा के पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ बयान या फिर कथित ‘निर्दोष मुसलमानों’ पर हमला करने के लिए हिन्दुओं को दोषी ठहराने तक, पाकिस्तान में जन्मे बुखारी ने सोशल मीडिया पर हिन्दुओं के खिलाफ सुनियोजित प्रोपेगेंडा फ़ैलाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है।

क़तर : पत्रकार को भारी पड़ा समलैंगिकों के समर्थन वाली शर्ट पहनना

                                             पत्रकार ग्रांट वहल (फोटो साभार: ABC7 शिकागो)
इस्लामी मुल्क कतर (Islamic Country Qatar) में हो रहे FIFA विश्व कप 2022 शुरू से ही विवादों में रहा है। आतंकियों से संबंधों वाला भगोड़ा कट्टरपंथी जाकिर नाइक को इस्लाम पर तकरीर देने के लिए बुलाने से लेकर मानवाधिकारों के दमन तक के कारण यह खेल आयोजन सुर्खियों में रहा। वहीं, खेल के दौरान समलैंगिक समुदाय का समर्थन करने पर जिस अंतरराष्ट्रीय पत्रकार को हिरासत में लिया गया था, उनकी अचानक मौत हो गई है।

कतर इस्लामी शरिया कानून पर आधारित है और यहाँ समलैंगिकता को लेकर सख्त कानून है। कतर में आयोजित FIFA वर्ल्ड विश्व कप के दौरान अमेरिकी पत्रकार ग्रांट वहल ने समलैंगिक समुदाय का समर्थन करने वाली शर्ट पहनी थी। इसके बाद कतर की पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। लगभग 30 मिनट तक हिरासत में रखने के बाद पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया था। इस घटना के कुछ दिन बाद उनकी मौत हो गई है।

ग्रांट शनिवार (10 दिसंबर 2022) को तड़के अर्जेंटीना और नीदरलैंड के बीच विश्व कप मैच को कवर कर रहे थे। वे लुसैल आइकॉनिक स्टेडियम में मीडिया ट्रिब्यून में अपनी सीट पर बैठे थे। अचानक वहाँ गिर गए। इसके बाद आपातकालीन सेवा को फोन किया गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यूएस शॉकर फेडरेशन ने उनकी मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

सोमवार को ग्रांट को कुछ तकलीफ हुई थी, जिसका जिक्र उन्होंने अपने आर्टिकल में किया था और कहा था कि काम, नींद की कमी और तनाव के कारण उनका शरीर टूट रहा है। उन्होंने बताया कि यूएस-नीदरलैंड मैच दौरान उनकी छाती में दबाव और एक अलग तरह की बेचैनी महसूस हो रही थी। इसके बाद वे मेन मीडिया सेंटर की क्लिनिक में दिखाने गए। वहाँ उनकी कोविड रिपोर्ट निगेटिव मिली। उन्होंने कहा कि संभवत: उन्हें ब्रोनकाइटिस है। इसलिए कुछ ऐंटीबयोटिक और हेवी ड्रग दिए गए। अब वे थोड़ा बेहतर महसूस कर रहे हैं।

अमेरिका के फुटबॉल पत्रकार ग्रांट की मौत पर कई तरह की आशंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं। स्नैपबैक स्पोर्ट्स के सीईओ जैक सेटलमैन ने ट्वीट किया, “भयावह! फ़ुटबॉल पत्रकार ग्रांट वहल, जिन्हें इस शर्ट के लिए क़तर के एक स्टेडियम से बाहर निकाल दिया गया था, आज अर्जेंटीना के खेल के दौरान वे कथित तौर पर गिर गए और उनका निधन हो गया। उनके भाई ने इंस्टाग्राम पर कहा कि ग्रांट पूरी तरह से स्वस्थ थे और उनका मानना है कि इसमें कुछ गड़बड़ है।”

ग्रांट की पत्नी का कहना है कि इस घटना से उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा है और अभी तक यह खुलासा नहीं हुआ है कि ग्रांट की मौत कैसे हुई है। बता दें कि इंग्लैंड के स्टार खिलाड़ी डेविड बेकहम के अमेरिका में स्टार बनने पर ग्रांट ने एक किताब लिखी थी। ‘द बेकहम एक्सपेरिमेंट’ नाम की यह किताब काफी लोकप्रिय हुई थी। 

‘बच्चों वाले तेल लगा कर सबके सामने सेक्स करते थे Playboy के मालिक, लड़कियाँ बुलाती थी डैडी’

        'Playboy' मैगजीन के संस्थापक ह्यूग हेफनर को लेकर उनकी दो गर्लफ्रेंड्स का बड़ा खुलासा (फाइल फोटो)
मैगजीन ‘Playboy’ के संस्थापक ह्यूग हेफ़नर अमेरिकी मनोरंजन इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम रहे हैं, खासकर फैशन और मॉडलिंग की दुनिया में। उनकी ‘हवेली’ (Mansion) की कहानियाँ 2017 में 91 वर्ष की आयु में उनकी मौत के बाद भी चर्चा का विषय बनी रहती है। उम्र ढलने के बाद भी कई लड़कियों के साथ उनके अफेयर और विलासिता के चर्चा कम नहीं हुए। अपनी मृत्यु से 5 साल पहले उन्होंने तीसरी शादी की थी। अब उनके बारे में नया खुलासा हुआ है।

ह्यूग हेफ़नर के साथ समय व्यतीत करने वाली दो महिलाओं ने बताया है कि वो सेक्स करने के लिए ‘Baby Oil (बच्चों वाले तेल)’ का इस्तेमाल करते थे। 44 वर्षीय होली मैडिसन और 48 वर्षीय ब्रिजेट मरकार्डत ने ये आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इसे Lubricants के रूप में प्रयोग में लाने से संक्रमण का खतरा बना रहता है। 2000 के दशक की शुरुआत में ह्यूग हेफनर की तीन प्रमुख गर्लफ्रेंड्स में ये दोनों शामिल थीं।

उनकी पूर्व गर्लफ्रेंड्स ने कहा कि सेक्स के लिए बच्चों वाले तेल का गुप्तांग पर इस्तेमाल करने को लेकर ह्यूग हेफ़नर की क्या सनक थी, ये समझ से परे है। उन्होंने कहा कि ये काफी घिनौना था। उन्होंने कहा कि उन्हें लुब्रीकेंट के रूप में ये पसंद नहीं था, क्योंकि इससे महिलाओं को इन्फेक्शन हो जाता था। इसके लिए उन्हें डॉक्टर की सलाह भी लेनी पड़ी थी। मैडिसन ने कहा, “मैं उनसे कहती थीं। सिर्फ स्किन तक ही रखो। इसे वहाँ मत डालो।” एक अन्य महिला ने बताया था कि युवतियाँ बेडरूम में ह्यूग हेफ़नर को ‘डैडी’ कहती थीं और कई लोगों के सामने उनसे सेक्स करना पड़ता था।

उन्होंने बताया कि अन्य महिलाओं ने उन्हें बताया था कि ह्यूग हेफ़नर उन्हें पीठ के बल लिटा देते थे और फिर इस तेल का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने कहा कि इसे सोच कर वो आज भी गुस्सा होती हैं और ये उनकी मर्जी के बिना किया जाता था। उन्होंने कहा कि ‘Playboy Mansion’ में रहने वाली लड़कियाँ जल्द से जल्द ह्यूग हेफ़नर के साथ सेक्स की प्रक्रिया को निपटना चाहती थी, जो उनके लिए रूटीन बन गया था। ह्यूग हेफ़नर एक ‘ब्लैक बुक’ में अपने साथ सोई लड़कियों की सूची रखते थे।

जुमे के दिन 32 साल बाद ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के लेखक सलमान रुश्दी पर चाकू से गर्दन पर हमला

'द सैटेनिक वर्सेज' के लेखक सलमान रुश्दी पर जुमे के दिन चाकू से हमला (तस्वीर-AP)
‘द सैटेनिक वर्सेज’ के लेखक उपन्यासकार सलमान रुश्दी को न्यूयॉर्क में भाषण देने से पहले पर चाकू से हमला किया गया है। सलमान रुश्दी को 1980 के दशक में ही ईरान से जान से मारने की धमकी मिली थी, वहीं आज शुक्रवार (12 अगस्त, 2022) को उन पर उस समय हमला किया गया जब वह पश्चिमी न्यूयॉर्क में एक व्याख्यान देने वाले थे।

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति ने न्यूयॉर्क के चौटाउका (Chautauqua) संस्थान में मंच पर उस समय धावा बोल दिया और जब सलमान रुश्दी स्पीच देने वाले थे। रुश्दी पर चाकू से गर्दन पर हमला किया गया जिससे वह वहीं जमीन पर गिर गए। हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया है। रुश्दी को हेलीकॉप्टर से अस्पताल ले जाया गया है। स्टेट पुलिस ने बताया कि उन्हें हेड इंजरी भी आई है।

न्यूयॉर्क राज्य पुलिस के मेजर यूजीन स्टैनिज़ेव्स्की के अनुसार, हमलावर की पहचान न्यूजर्सी स्थित फेयरव्यू के 24 वर्षीय हादी मतार के रूप में की गई है। हालाँकि, वह किस देश से ताल्लुक रखता है, इसका अभी पता नहीं चला है।

रीटा लैंडमैन नाम की एंडोक्रिनोलॉजिस्ट ने कहा कि रुश्दी के दाहिने गले सहित कई घाव थे और वे खून से लथपथ होकर नीचे गिरे हुए थे। उस महिला डॉक्टर ने कहा कि वे अभी जीवित लग रहे हैं। इसके बाद कुछ लोगो ने उनकी नब्ज देखी और चिल्लाने लगे के यह चल रही है।

घटना के कुछ ही पल में पुलिस पहुँच गई और कुछ देर बाद उन्हें हेलिकॉप्टर से अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उनके कई ऑपरेशन किए गए। पुलिस FBI और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर हमलावर के उद्देश्य को जानने की कोशिश कर रही है। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि हमलावर अकेला था या और भी लोग थे उसके साथ।

रुश्दी के एजेंट एंड्रयू वायली के अनुसार, मुंबई में जन्मे लेखक रुश्दी वेंटिलेटर पर हैं और वे बोल नहीं सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक बयान में उन्होंने कहा, “खबर अच्छी नहीं है। सलमान की एक आँख खोने की संभावना है। उनकी बाँह की नसें कट गई हैं और उनका लीवर खराब हो गया है।”

रुश्दी की किताब “द सैटेनिक वर्सेज” को ईरान में 1988 से प्रतिबंधित कर दिया गया था, क्योंकि कई मुस्लिम इसे ईशनिंदा मानते हैं। वहीं इस किताब के पब्लिश होने के एक साल बाद, ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने एक फ़तवा जारी किया था, जिसमें रुश्दी की मौत की अपील की गई थी। ईरान ने रुश्दी को मारने वाले को 30 लाख डॉलर से अधिक का इनाम देने की भी घोषणा की थी।

ईरान की सरकार ने लंबे समय से चले आ रहे खुमैनी के फरमान से खुद को अलग कर लिया है, लेकिन रुश्दी विरोधी भावना बनी रही। वहीं 2012 में, एक अर्ध-आधिकारिक ईरानी मजहबी फाउंडेशन ने रुश्दी के लिए इनाम को 2.8 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 3.3 मिलियन डॉलर कर दिया था।

हालाँकि रिपोर्ट के अनुसार, यह कहा जाता है कि रुश्दी ने उस समय उस धमकी को खारिज करते हुए कहा था कि इनाम में लोगों की बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं है। बता दें कि उस वर्ष, रुश्दी ने फतवे के बारे में एक संस्मरण, ‘जोसेफ एंटोन’ प्रकाशित किया।

मुस्लिमों पर मढ़ा जा सकता है दोष: अमेरिकी इस्लामी संस्था

अमेरिका के सबसे बड़े मुस्लिम नागरिक अधिकार समूह ‘काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस’ के प्रवक्ता इब्राहिम हूपर ने विक्टिम कार्ड खेलना अभी से शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की चिंता है कि हमलावर की पहचान सामने आने से पहले ही लोग मुस्लिमों या इस्लाम को छुरा घोंपने के लिए दोषी ठहरा सकते हैं।

उन्होंने कहा, “सभी अमेरिकियों की तरह अमेरिकी मुस्लिम भी समाज में किसी को भी निशाना बनाने वाली हिंसा की निंदा करते हैं।” 14 उपन्यासों के लेखक और 2007 में नाइट की उपाधि से सम्मानित रुश्दी पर हमले को लेकर दुनिया भर में रोष है।

कट्टरपंथियों के निशाने पर थे रुश्दी

मुंबई के एक सफल मुस्लिम व्यवसायी के घर जन्मे रुश्दी ने एक किताब लिखकर दुनिया में सनसनी मचा दी थी। साल 1988 में लिखी गई उनकी पुस्तक ‘द सैटेनिक वर्सेज’ (The Satanic Verses) को लेकर ईरानी क्रांति के नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने उनकी हत्या के लिए फतवा जारी करते हुए लगभग 28 करोड़ रुपए घोषणा की थी।

इस्लामवादियों का कहना था कि इस पुस्तक में इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया गया है। इसके बाद उन्हें दुनिया भर में कई जगहों से हत्या की धमकी मिली। उनकी किताब को भी कई देशों ने प्रतिबंधित कर दिया। इनमें से एक देश भारत भी है।

केवल एक ही किताब लिखने पर सलमान रुश्दी और तस्लीमा नसरीन पर फतवे आ गए, उनकी पुस्तकें प्रतिबंधित हो गयी, लेकिन एक ऐसा भी चमत्कारी लेखक अनवर शेख है जिसने इस्लाम के खिलाफ एक नहीं बल्कि 7/8 पुस्तकें लिखी, जिसके विरुद्ध फतवा देने एवं उनकी एक भी पुस्तक को प्रतिबंधित करने का साहस कोई नहीं कर पाया। मुस्लिम स्कॉलर्स आदि तक उनके विरुद्ध एक भी लब्ज बोलने की हिम्मत कर पाया। क्यों?

खतरे के देखते हुए अल्लाह में विश्वास नहीं करने वाले रुश्दी इसके बाद भूमिगत हो गए। भारत से वे ब्रिटेन चले गए। वहाँ उन्हें किस प्रकार से सुरक्षा दी गई। रुश्दी सार्वजनिक जीवन साल 1990 के अंत में आए, जब ईरान ने घोषणा की कि वह रुश्दी की हत्या का समर्थन नहीं करता। हालाँकि, उन पर खतरा बरकरार रहा और विवाद के 34 साल बाद उन पर जानलेवा हमला कर दिया गया।

इमरान खान की पुतिन से मुलाकात पड़ी भारी: US फेडरल रिजर्व ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक पर लगाया 55 मिलियन डॉलर का जुर्माना

पूर्वी यूक्रेन में रूसी सैनिकों द्वारा चल रहे ‘स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ के बीच रूस में मेहमानवाजी का लुत्फ उठा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अमेरिका ने बड़ा झटका दिया है। अमेरिका ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक (NBP) और इसकी न्यूयॉर्क ब्रांच पर $55 मिलियन का जुर्माना लगाया है। इस संबंध में जारी रिपोर्ट के अनुसार, यूएस फेडरल रिजर्व और न्यूयॉर्क स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज द्वारा यह जुर्माना एंटी मनी लॉन्ड्रिंग नियमों का उल्लंघन करने पर लगाया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक फेडरल रिजर्व ने 20.4 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया है तो वहीं न्यूयॉर्क स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक ने $35 मिलियन का भुगतान करने के लिए कहा है। 4 मार्च, 2021 को की गई जाँच के आधार पर जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि NBP ने 16 मार्च, 2016 को ‘कमियों’ को ठीक करने के लिए अधिकारियों के साथ एक लिखित समझौता किया था। हालाँकि, हाल की जाँच में पाया गया है कि NBP ‘लिखित समझौते के प्रत्येक प्रावधान का पूर्ण अनुपालन करने’ में विफल रहा है।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि चूँकि पाकिस्तान का नेशनल बैंक अमेरिकी कानूनों का पालन करने में विफल रहा है। यूएस फेडरल रिजर्व ने एनबीपी को कॉरपोरेट गवर्नेंस और मैनेजमेंट ओवरसाइट में सुधार करने का आदेश दिया है। रिजर्व बैंक ने एनबीपी से आदेश के 60 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों को लागू करने की माँग की है। इसमें NBP को दस दिनों के भीतर एक अधिकारी को नामित करने के लिए भी कहा है जो रिजर्व बैंक की लिखित योजनाओं को ‘कोऑर्डिनेट और सबमिट करने के लिए जिम्मेदार’ होगा। इस बीच, NYDFS के अधीक्षक एड्रिएन ए हैरिस ने घोषणा की कि NBP और उसकी न्यूयॉर्क शाखा द्वारा लगाए गए दंड का भुगतान करने के लिए सहमत हो गई है। 

इमरान खान बुधवार (24 फरवरी 2022) को दो दिवसीय यात्रा पर रूस पहुँचे। हालाँकि, मॉस्को पहुँचने के कुछ ही घंटों बाद, रूसी राष्ट्रपति ने पूर्वी यूक्रेन में ‘स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ का आदेश दिया। वर्तमान हालात में व्लादिमीर पुतिन और इमरान खान की मुलाकात के सामरिक मायने निकाले जा रहे हैं। बाद में व्लादिमीर पुतिन ने क्रेमलिन में प्रधानमंत्री खान के साथ आमने-सामने बैठक की। 

जुआ खेलने के लिए 6 करोड़ रूपए की चोरी, लग्जरी ट्रिप पर उड़ाए स्कूल के पैसे

अमेरिका के कैलिफोर्निया में 80 साल की एक नन को जेल की सजा सुनाई गई है। एक कैथोलिक स्कूल का प्रिंसिपल रहते हुए सिस्टर मैरी मार्गरेट ने 835,000 डॉलर (करीब 6.23 करोड़ रुपए) की चोरी की। इस पैसे को जुआ खेलने और लग्जरी छुट्टियॉं बिताने पर खर्च किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, मैरी मार्गरेट क्रेपर को 10 वर्षों के दौरान धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी ठहराया गया। वह सेंट जेम्स कैथोलिक स्कूल में प्रिंसिपल थी। चोरी किए गए पैसे का इस्तेमाल नन ने आलीशान रिसॉर्ट्स लेक ताहो में लग्जरी ट्रिप लेने के लिए किया था। कोर्ट में मैरी मार्गरेट ने अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा, “मैंने पाप किया है। मैंने कानून तोड़ा है और मेरे पास कोई बहाना नहीं है।” क्रैपर ने आगे कहा, “मेरे कार्य मेरी कसमों, मेरी आज्ञाओं, कानून और सबसे बढ़कर उस विश्वास का उल्लंघन था, जो इतने सारे लोगों ने मुझ पर कर रखा था। मैं गलत हूँ इतने सारे लोगों को दुख देने के लिए माफी चाहती हूँ।”

संघीय अदालत में सुनवाई के दौरान दोषी नन के वकील मार्क ब्रायन ने दलील दी कि उसे ‘जुए की लत’ थी और ये कोई बहाना नहीं, बल्कि एक स्पष्टीकरण है। जज ओटिस डी राइट ने कहा कि मार्गरेट कई दशकों तक एक अच्छी शिक्षिका रही। लेकिन, समय के साथ वो अपने कर्तव्यों से भटक गईं। अदालत ने क्रेपर को एक साल और एक दिन की सजा सुनाई है। इसके अलावा उसे स्कूल को $800,000 (करीब 59,764,816 रुपए) का भुगतान भी करना होगा। जज ने क्रेपर के 28 साल के करियर पर टिपप्णी करते हुए कहा कि हो सकता है कि इस दौरान उन्होंने हजारों छात्रों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला हो, लेकिन सच ये भी है कि ये भयानक उदाहरण भी छात्रों को प्रभावित करेगा।

MI5 ने किया अलर्ट : कहीं कैश तो कहीं सेक्स, औरतों को हथियार बना विदेशी नेताओं को फाँस रहा चीन: ब्रिटिश संसद में भी ‘चीनी घुसपैठ’

                                       अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन में भी चीनी जासूस का खुलासा
दुनिया भर में ‘औरतों’ को हथियार बना कर जासूसी करने वाला चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। कुछ समय पहले अमेरिका की मीडिया रिपोर्ट्स ने खुलासा किया था कि वहाँ ‘चीनी जासूस’ नेताओं से रिश्ते बनाकर गोपनीय सूचनाएँ निकलवा रही है। अब ऐसी ही खबर ब्रिटेन से आई है। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI5 ने हाल में चीन की घटिया करतूत से पर्दा उठाते हुए बताया कि कैसे लेबर पार्टी को करोड़ों का चंदा देने वाली चीनी महिला पर जासूसी के शक हैं।

 MI5 ने अलर्ट जारी कर कहा है कि चीन सरकार की एजेंट ब्रिटेन की संसद में एक्टिव है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस चीनी महिला का नाम क्रिस्टीन ली है। एजेंसी के दावे के मुताबिक कई ब्रिटिश सांसद इस चीनी जासूस के जाल में फँसे हैं और एक पूर्व सांसद से उसके नजदीकी संबंध भी रहे हैं। अलर्ट में कहा गया है,  “ली ने सीसीपी के यूनाइटिड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट के साथ समन्वय में गुप्त रूप से काम किया और उसके ब्रिटेन में राजनीतिक हस्तक्षेप गतिविधियों में शामिल होने का अनुमान लगाया गया है।”

ली ने कथिततौर पर कई बार में लेबर पार्टी को सैकड़ों हजारों पाउंड का दान दिया है। इसके अलावा उसके कंजर्वेटिव पार्टी से भी संबंध रहे हैं। वह डेविड कैमरन के पीएम रहते हुए उनसे मिली थी। मालूम हो कि ब्रिटिश खुफिया एजेंसी ने इस बात को भी साफ किया कि इस चीनी जासूस को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है और न ही उसे देश से निकाला गया है। लेकिन इस संबंध में ब्रिटिश संसद के स्पीकर की सुरक्षा टीम ने सभी सांसदों को संदेश भेज दिया है। ली के बारे में जानकारी है कि वो पेश से एक वकील है और लंदन में चीनी दूतावास की पूर्व मुख्य कानूनी सलाहकार भी। इसके अतिरिक्त वह इंटर पार्टी चाइना ग्रुप सचिव भी है।

अमेरिका और नेपाल में चीन का हनीट्रैप

उल्लेखनीय है कि साल 2020 में खबर आई थी कि चीनी जासूस क्रिस्टीन फेंग उर्फ फेंग फेंग (Fang Fang) ने अमेरिकी नेताओं से जिस्मानी रिश्ते बनाकर उनसे गोपनीय सूचनाएँ निकालने की कोशिश की। Axios डॉटकॉम ने खुलासा किया था कि चीन की जासूस मानी जाने वाली क्रिस्टीन फेंग ने कैलिर्फोनिया के नेताओं को निशाना बनाया था।

इनमें प्रतिष्ठित डेमोक्रेटिक सांसद और संसद की इंटेलीजेंस कमिटी के सदस्य एरिक स्वैलवेल (Eric Swalwell) भी थे। कथिततौर पर फेंग के 2015 में अमेरिका छोड़ने से पहले स्वैलवेल के साथ अंतरंग संबंध थे। हालाँकि स्वैलवेल लगातार इस सवाल से बचते रहे थे कि उन्होंने सेक्स के बदले उन्होंने फेंग के साथ ‘गोपनीय जानकारी’ साझा की थी या नहीं।

ब्रिटेन अमेरिका के अलावा चीन ने महिला के बूते नेपाल पर भी अपना दबदबा कायम करने का प्रयास किया था। नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांगी को लेकर खबरें आईं थी कि उन्होंने वहाँ की सरकार में जबर्दस्त प्रभाव बनाया था। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा उनकी कठपुतली थे।

सिंपल गणित से आहत हुए अमेरिकी 'Woke', वुमेन्स मार्च को माँगनी पड़ी माफी, योगेंद्र यादव को भी लगा था ऐसा ही झटका

अमेरिकी वोक आहत हैं तो दूसरे वोक्स ने बाकी बचे वोक को ठेस पहुँचाने के लिए माफी माँगी है, वजह है चंदे का एक बहुत ही साधारण सा गणित।

नहीं समझ आया तो आइए बताते हैं कि मामला क्या है?

कहने को वुमेन्स मार्च एक विरोध प्रदर्शन है, जिसकी शुरुआत 21 जनवरी 2017 को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह के बाद शुरू हुआ था। अब बुधवार (24 नवंबर, 2021) को वुमेन्स मार्च ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर अपने एक मेल के लिए माफी माँगी है, जिसे उन्होंने सब्सक्राइबर को भेजा था।

दरअसल, वुमेन्स मार्च ने भेजे गए उस ईमेल के लिए माफ़ी माँगी है जिसमें उल्लेख किया गया था कि इस सप्ताह का औसत डोनेशन मात्र 14.92 अमेरीकी डालर था। उन्होंने कहा कि यह सब तब हुआ जब यह वर्ष नेटिव इंडिजिनस लोगों के लिए उपनिवेशवाद, विजय और नरसंहार को याद करने का है। यह विशेष रूप से थैंक्सगिविंग से पहले’ से लोगों से कनेक्शन नहीं बनाने की हमारी एक भूल थी।

जैसे ही ये बात औरों को पता चली, अमेरिका में लोग इस बात से परेशान हो गए कि विमेंस मार्च को औसतन 14.92 अमेरीकी डालर का डोनेशन मिला। क्योंकि 1492 वह वर्ष है जब इतालवी खोजकर्ता क्रिस्टोफर कोलंबस ने अमेरिका की खोज की थी जबकि वह भारत की तलाश में निकला था। वह पहली बार 12 अक्टूबर, 1492 को अमेरिका पहुँचा और बाद में उपनिवेशों की स्थापना की।

मामला यह है कि चूँकि वुमेन्स मार्च के वोक प्राप्त डोनेशन राशि को कोलंबस के अमेरिका पहुँचने के वर्ष से कनेक्ट नहीं कर पाए, इस बात ने दूसरे वोक को इतना आहत कर दिया कि बाकि वोक को माफी माँगनी पड़ी।

चीजों को ठीक ढंग से समझने के लिए, ऐसे समझते है कि अगर इच्छाधारी प्रदर्शनकारी से वर्तमान में ‘किसान’ बने योगेंद्र यादव अपने दम पर एक फण्डरेजर का आयोजन करते हैं और मान लेते हैं कि 125 लोग इसमें 2,480 रुपए का योगदान करते हैं, तो यह औसतन 19.84 रुपए प्रति व्यक्ति की डोनेशन राशि होगी। अगर योगेंद्र यादव को वूमेन मार्च से जोड़ते हुए देखें, तो वह इसे वर्ष 1984 से जोड़ते जब इंदिरा गाँधी सरकार द्वारा खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले को स्वर्ण मंदिर, अमृतसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत मारा गया, विरोध में इंदिरा गाँधी की हत्या हुई और उसके बाद पूरे भारत में सिख विरोधी दंगे भड़के।

मौसम के अनुसार विभिन्न कारणों से तमाम तरह से विरोध-प्रदर्शन करने के बावजूद, आज भी योगेंद्र यादव की स्थिति यह है कि अपने दम पर 100 रुपए भी नहीं जुटा पाएँगे। यह तथ्य इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि कैसे उनका फण्डरेजर कैम्पेन, उनके विरोध-प्रदर्शनों की तरह ही एक बड़ा मजाक साबित हुआ है।

बात दरअसल, 2019 की है जब हरियाणा विधानसभा चुनावों से पहले, योगेंद्र यादव ने ‘पर्यावरणविद्’ तेजपाल यादव को अपनी पार्टी के उम्मीदवारों में से एक के रूप में समर्थन देते हुए खड़ा किया था। ट्विटर पर एक कैम्पेन को आगे बढ़ाते हुए हुए, उन्होंने अपने तमाम चहेते फॉलोवर्स से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। लेकिन, जब उन्हें अपनी कथित ‘ग्रीन राजनीति’ के लिए केवल ₹50 रुपया ही मिला तो उन्हें गहरा सदमा लगा था। जिसका जिक्र उन्होंने बड़े ही निराश मन से अपने एक ट्वीट में भी किया था।


‘भारत में सुबह नारी को पूजते हैं, रात में करते हैं गैंगरेप’ : कॉमेडी के नाम पर वीर दास ने अमेरिका में फैलाया नारी विरोधी प्रोपगेंडा

भारत के विरुद्ध बोलकर लिबरल गिरोह में पैठ बनाना किसी भी कॉमेडियन के लिए सबसे सरल काम है। वीर दास ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 16 नवंबर 2021 को यही किया। उसने जॉन एफ केनेडी सेंटर में 7 मिनट तक भारत विरोधी प्रोपगेंडा को जमकर हवा दी। अपने वन लाइनर्स की मदद से उसने भारत को, भारत की राजनीति को, स्थानीय मुद्दों को, पीएम मोदी को खूब कोसा और हर प्रोपगेंडाबाज की तरह उसने भारत में नारी को पूजने की जो परंपरा है उसे रेप से जोड़कर समस्त नारी जाति का गैंग रेप से कहीं अधिक घिनौना पाप कर दिया। 

लिबरल गैंग बार-बार सिद्ध कर रहा है कि ये लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं। देश के साथ-साथ अब नारी का अपमान करने से नहीं चुके। कॉमेडी के नाम पर भारतीय संस्कृति का अपमान करना बंद करें, कॉमेडियन को नहीं मालूम की जिस नारी का विदेशी मंच पर अपमान किया है, वही भारतीय नारी इनकी माँ, बहन एवं पत्नी भी है। जो व्यक्ति नारी का आदर नहीं कर सकता, अपनी माँ, बहन अथवा पत्नी का क्या आदर करता होगा? 

मंच पर खड़ा होकर वीर दास ने कहा, “मैं उस भारत से आता हूँ जहाँ महिला को सुबह पूजा जाता है और रात में गैंगरेप होता।” अजीब बात ये है कि उसने अमेरिका में खड़े होकर भारत में हो रहे रेपों के बारे में बात की, लेकिन ये भूल गया कि अमेरिका रेप मामलों में बहुत आगे है।

क्रिएटिव ढंग से कॉमेडी करते हुए वीर ने बरखा दत्त को अपना समर्थन दिया और कहा, “मैं ऐसे भारत से आता हूँ जहाँ पत्रकारिता मर गई है क्योंकि आदमी स्टूडियो में खड़े होकर एक दूसरे के हस्तमैथुन करते हैं और औरत सड़कों पर लैपटॉप लेकर सच बता रही होती है।”

उसने हिंदुओं को असहिष्णु दिखाते हुए भगवा रंग का भी मखौल उड़ाया। साथ ही साथ भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर क्रिकेट पर भी तंज कसा। इसके बाद वैश्विक स्तर पर पीएम केयर फंड पर वीर दास ने सवाल उठाए।

ऐसे ही स्थानीय मुद्दों को भी उठाने से वीर दास ने गुरेज नहीं किया। उसने अमेरिका में लखीमुपर खीरी हिंसा का मामाला उठाया और कहा, “मैं उस भारत से आता हूँ जहाँ हमें शाकाहारी होने पर गर्व होता है लेकिन फिर भी किसानों को कुचलते हैं जो हमारे लिए सब्जी उगाते हैं।”

अपनी बात को वो ये कहते हुए खत्म करता है, “लेकिन जब मैं आपके सामने खड़ा हूँ। मुझे याद आया कि मैं एक महान देश का प्रतिनिधित्व करता हूँ। महान लोग, जिन्होंने महान चीजें बनवाई लेकिन अब वो यादों में बदल रही हैं।” 

केनेडी सेंटर में भारत विरोधी बयानों के लिए वीर दास के ख़िलाफ़ भारत में शिकायतें दर्ज करवाई जा रही हैं। हिंदू आईटी सेल के संस्थापक अक्षित सिंह ने वीर दास के विरुद्ध ऑनलाइन एफआईआर करवाई है। वहीं वकील आशुतोष जे दुबे ने भी मुंबई पुलिस में कॉमेडियन के विरुद्ध शिकायत करवाई है। कॉमेडियन के ऊपर भारत की छवि धूमिल करने के आरोप में वकील आशुतोष जे दुबे ने शिकायत दी है।