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मोदी और मुसद्दिक: ईरान 1951 और भारत 2024—क्या इनमें कोई समानता है? भारत को ईरान बनाने से बचाने के लिए Deep State और Toolkit की कठपुतली बने विपक्ष, आन्दोलनजीवियों और बिकाऊ मीडिया से सतर्क रहने की जरुरत है

भारत को विश्व गुरु बनाने
में व्यस्त मोदी 
ईरान के कुशल प्रशासक मुसद्दिक
1951 तक खुशहाल रहने वाला ईरान आज अपनी बर्बादी खुद देख रहा है। 
आज ईरान की जो हालत हो रही है, उसका जिम्मेदार इजराइल नहीं बल्कि ईरान के ही बिकाऊ नेता, मीडिया और जनता ही है। इतिहास सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं बल्कि उससे शिक्षा लेने के लिए होता है। अगर इतिहास से कुछ नहीं सीखा तो चाहे व्यक्ति जितना भी विद्वान क्यों न हो किसी अनपढ़ से कम नहीं।  

आज भारत को ऐसा यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिला है जो भारत को आत्मनिर्भर बना रहा है, लेकिन गुलामी मानसिकता वाले विरोध करने का कोई मौका नहीं झोड़ रहे। दुःख इस बात का है जिन मुद्दों पर विरोध करना चाहिए उन सभी पर आज तक किसी का मुंह नहीं खुलता। आज भारतवासी बताएं जिन लोगों के कारण गुलामी की बेड़ियाँ टूटी उनमे से कितनों इतिहास पढ़ाया जाता है। जो धार्मिक स्थलों को विवादित बना दे उससे उम्मीद की भी नहीं जा सकती।  

भारत जब भी गुलाम हुआ जयचन्दों और मीर ज़ाफरों द्वारा गद्दारी करने के कारण हुआ। भारत का अस्तित्व तो मिटाने में असफल रहे, लेकिन गुलाम बनाने में सफल हो गए। भारत में आज लगभग वही स्थिति Deep State और Toolkit के हाथों कठपुतली बना विपक्ष, मीडिया और आन्दोलनजीवियों द्वारा हो रही है। मुग़ल आक्रांताओं से पहले खुशहाल भारत को जयचन्दों लालच ने बदहाल कर दिया। लेकिन उनका आज कोई नामलेवा नहीं।

देखिए एक मित्र द्वारा भेजा गया लेख, मुझे नहीं मालूम कहाँ से इसे निकाला लेकिन इस लेख पर हर देशवासी को आत्ममंथन करना चाहिए:-

क्या आपने कभी सोचा है कि ईरानी लोग अमेरिका को "शैतानों की भूमि" क्यों कहते हैं?

कभी ईरान के तेल पर ब्रिटेन का वर्चस्व था। ईरान के तेल उत्पादन का 84% हिस्सा इंग्लैंड को जाता था, और केवल 16% ही ईरान को मिलता था।

1951 में, एक सच्चे देशभक्त मोहम्मद मुसद्दिक ईरान के प्रधानमंत्री बने। वे नहीं चाहते थे कि ईरान की तेल संपदा पर विदेशी कंपनियों का कब्जा रहे।

15 मार्च 1951 को मुसद्दिक ने ईरानी संसद में तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण का विधेयक पेश किया, जो भारी बहुमत से पारित हुआ। टाइम मैगज़ीन ने उन्हें 1951 का "मैन ऑफ द ईयर" घोषित किया!

लेकिन इस फैसले से ब्रिटेन को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने मुसद्दिक को हटाने के कई प्रयास किए — रिश्वत, हत्या की कोशिश, सैन्य तख्तापलट — पर मुसद्दिक की दूरदर्शिता और लोकप्रियता के कारण सब विफल रहे।

जब ब्रिटेन असफल हुआ, तो उसने अमेरिका से मदद मांगी। CIA ने मुसद्दिक को हटाने के लिए 1 मिलियन डॉलर (लगभग 4,250 मिलियन रियाल) स्वीकृत किए।

योजना थी: जनता में असंतोष फैलाना, मीडिया और धार्मिक नेताओं को खरीदना, और अंततः संसद के भ्रष्ट सांसदों के माध्यम से उनकी सरकार को गिराना।

631 मिलियन रियाल पत्रकारों, संपादकों और मौलवियों को दिए गए ताकि वे मुसद्दिक के खिलाफ माहौल बना सकें।

हजारों लोगों को फर्जी प्रदर्शन के लिए भुगतान किया गया। प्रमुख वैश्विक मीडिया भी अमेरिका का समर्थन करने लगा। व्यक्तिगत कार्टूनों से शुरू हुई आलोचना, बिल्कुल वैसी ही जैसे आज भारत में मोदी के निजी जीवन पर हमले होते हैं।

मुसद्दिक को तानाशाह कहा गया। जब उन्हें अहसास हुआ कि संसद के जरिए उनकी सरकार को गिराया जाएगा, तो उन्होंने संसद भंग कर दी। अमेरिका ने ईरान के शाह पर दबाव बनाया कि वे मुसद्दिक को प्रधानमंत्री पद से हटाएं।

210 मिलियन रियाल की रिश्वत से फर्जी दंगे करवाए गए, और शाह की वापसी के बाद मुसद्दिक ने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्हें जेल में डाला गया और फिर जीवन भर नजरबंद रखा गया।

इसके बाद ईरान के तेल का 40% अमेरिका और 40% इंग्लैंड को दे दिया गया, बाकी 20% अन्य यूरोपीय देशों को।

फिर कट्टरपंथी खुमैनी सत्ता में आए, और आम ईरानी की हालत और खराब हो गई।

मुसद्दिक का अपराध क्या था?

सिर्फ इतना कि वे चाहते थे कि विदेशी नहीं, बल्कि देश की अपनी कंपनियां तेल और अन्य संसाधनों पर नियंत्रण रखें। अगर मुसद्दिक का साथ दिया गया होता, तो 1955 से पहले ही ईरान एक संपूर्ण लोकतांत्रिक राष्ट्र बन सकता था। लेकिन पत्रकारों, संपादकों, सांसदों और प्रदर्शनकारियों ने चंद पैसों में देश का भविष्य बेच दिया।

उसी समय ईरान की जनता ने महसूस किया कि अमेरिका ने उनकी सरकार को गिराने में गहरी भूमिका निभाई थी — और तभी से अमेरिका को "शैतानों की भूमि" कहा जाने लगा।

अब सोचिए — ईरान के असली दुश्मन कौन थे?

वे थे — बिके हुए पत्रकार, संपादक, सांसद और आंदोलनकारी। अगर ये बिकते नहीं, और लोग मुसद्दिक के साथ खड़े रहते तो अमेरिका की चालें कभी सफल नहीं होतीं।

आज भारत भी एक ऐसे ही मोड़ पर खड़ा है।

यह दुर्भाग्य है कि आम जनता को षड्यंत्र तब तक समझ में नहीं आते जब तक उनके साथ अत्याचार नहीं होने लगते। नकली मुद्दे, फर्जी आंदोलन, गलत आंकड़े, जातियों को आपस में लड़वाना, अल्पसंख्यकों को भड़काना, और कम्युनिस्ट लॉबी का राष्ट्र विरोधी ताकतों को समर्थन देना ये सब एक गहरी साजिश का हिस्सा हैं, जिसका मकसद भारत को फिर से विदेशी नियंत्रण में लाना है।

अब समय है कि हम सजग बनें और बिकाऊ मीडिया के झूठे प्रचार का शिकार न बनें।

हर देशभक्त को वर्तमान नेतृत्व पर विश्वास करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। अन्यथा, ईरान जैसी तबाही भारत में भी हो सकती है।

आज दुनिया की कई खुफिया एजेंसियाँ भारतीय राजनेताओं को अपने एजेंट बनाने की कोशिश कर रही हैं, ताकि किसी भी तरह मोदी सरकार को हटाया जा सके।

हमारा भाग्य हमारे हाथ में है बस समय रहते समझना होगा।

"न्यूयॉर्क टाइम्स" ने मुसद्दिक को तानाशाह कहा था। आज वही "टाइम मैगज़ीन" मोदी को "डिवाइडर इन चीफ" कहती है।

क्या ये सब संयोग है? नहीं, ये एक रणनीति है। 

राणा सांगा डीप स्टेट का टूलकिट : Akhilesh Yadav के लंदन दौरे के बाद हिंदुओं को जातियों में बांटने के लिए लाया गया; क्या नेता विदेशों में भारत विरोधियों से भीख मांगने जाते हैं?

अप्रैल 2 को लोकसभा में वक़्फ़ बिल पर हो रही चर्चा में एक बात बिलकुल साफ हो गयी कि जितना संसद से बाहर मुसलमानों को भड़काने का काम हो रहा था लेकिन संसद में अगर उनकी बातों को सुन लगा कि अप्रत्यक्ष रूप से बिल का समर्थन कर रहे थे, क्योकि जो दूसरों के कहने पर चल जनहितैषी बन जनता को गुमराह करने का काम करते हैं। सनातन और भारतीय संस्कृति का विरोध कर मुस्लिमों को खुश कर उनके वोट लेकर मालपुए खा रहे हैं।  
यह तो शीशे की तरह साफ है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी अमेरिकी अरबपति जार्ज सोरोस और डीप स्टेट के साथ मिलकर भारत विरोधी षड्यंत्रों को अंजाम देने में लिप्त हैं! समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव के लंदन दौरे के बाद अब इस कड़ी में उनका नाम भी जुड़ गया है। यूं तो राहुल-मुलायम इंडी गठगंधन के भी सहयोगी हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव ने भाजपा और सीएम आदित्यनाथ योगी से पार पाने के लिए हिंदुओं को जातियों में बांटने वाली टूलकिट का खेल खेला है। राहुल गांधी इस काम को पहले ही जातिगत जनगणना का ढोल पीटकर अंजाम दे ही रहे हैं। दरअसल, इन दोनों युवराजों को पता है कि उनके पास पीएम मोदी और भाजपा के हिंदुत्व की कोई काट नहीं है। इसीलिए वे हिंदुओं को जातियों में बांटने का कुचक्र चल रहे हैं। इसीलिए जानबूझकर पहले औरंगजेब का और अब राणा सांगा का मुद्दा उछाला है। रामजी लाल सुमन के बहाने सुनियोजित तरीके के इसे राजपूत वर्सेज दलित मुद्दा बनाया हैं। लेकिन हिंदुओं को जातियों में बांटने की टूलकिट की साजिश खुलकर सामने आ गई है।

इंडी गठबंधन ने मुस्लिम तुष्टिकरण और जातिगत वैमनस्य फैलाने की सारी हदें पार कीं

दरअसल, इंडी गठबंधन में सहयोगी समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम तुष्टिकरण और जातिगत वैमनस्य फैलाने की सारी हदें पार कर दी हैं। पहले तो सपाई सिर्फ मुस्लिम हितैषी बनते थे। औरंगजेब जैसे क्रूर शासकों के हिमायती बनते थे। अब इंडी गठबंधन और सपा हिंदुओं का गौरवशाली इतिहास बिगाड़ने में जुटी हुई है। अब राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने मुगलों से लोहा लेने वाले मेवाड़ के वीर योद्धा महाराणा संग्राम सिंह सांगा के खिलाफ बेहद अपमानजनक टिप्पणी कर दी है। उन्होंने राणा सांगा के वंशजों और उन्हें मानने वाले हिंदुओं को गद्दार तक कह डाला है। सपा सांसद की इस अभद्र, अशोभनीय, असभ्य और अनर्गल टिप्पणी को लेकर राजस्थान समेत देशभर की सियासत में उबाल आ गया है। राजस्थान के सीएम भजनलाल ने कहा कि मेवाड़ के महान योद्धा राणा सांगा के बारे में समाजवादी पार्टी के सांसद का निम्नस्तरीय बयान, न केवल राजस्थान की 8 करोड़ जनता को, बल्कि सम्पूर्ण देशवासियों को आहत करने वाला है। समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के राणा सांगा को गद्दार कहने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में गूंजा। कांग्रेस ने आपत्ति की तो भाजपा ने कहा कि इससे साफ तय हो गया कि आप लोग भी रामजीलाल सुमन के साथ हो।
सपा सांसद सुमन ने महाराणा सांगा पर यह विवादित बयान दिया
समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने राज्यसभा में जो बयान दिया उससे पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। सपा सांसद सुमन ने मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते राणा सांगा को लेकर बयान में कहा था कि ‘बीजेपी के लोगों का ये तकियाकलाम बन गया है कि इनमें बाबर का DNA है। मैं जानना चाहूंगा कि बाबर को आखिर लाया कौन? सुमन ने अनर्गल दावा किया कि इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को राणा सांगा लाया था। मुसलमान अगर बाबर की औलाद हैं तो तुम लोग उस गद्दार राणा सांगा की औलाद हो, ये हिन्दुस्तान में तय हो जाना चाहिए कि बाबर की आलोचना करते हो, लेकिन राणा सांगा की आलोचना नहीं करते। बता दें कि देश में पहले से औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। इसके बाद राणा सांगा पर विवादित बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है।
हिंदुओं को बांटने की टूलकिट के पीछे है डीप स्टेट की ‘चौकड़ी’
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के लंदन दौर के बाद अब यह समझ में आने लगा है कि औरंगजेब की हिमायत और राणा सांगा की खिलाफत के बयान सपा नेताओं ने यूं ही नहीं दिए हैं। इसके पीछे डीट स्टेट की सुनियोजित साजिश है और वे मुस्लिमों को एकजुट करने और हिंदुओं को बांटने की अपनी टूलकिट को अंजाम देने में लगे हैं। कड़ी से कड़ी जोड़ने पर स्पष्ट होता है कि कैसे अखिलेश यादव और राहुल गांधी के परिवार के बीच मित्रता है। राजनीतिक गठबंधन है। अब राहुल गांधी से जुड़ा एनजीओ, कांग्रेस के युवराज के खास सलाहकार विदेशों से और जार्ज सोरेस से भारत विरोध के नाम पर करोड़ों की फंडिंग ले रहे हैं। डीप स्टेट के इस गोरखधंधे में राहुल गांधी ने अपने मित्र अखिलेश यादव को मिला लिया है। इसलिए भी समाजवादी पार्टी हिंदुओं को जातियों में बांटने की राजनीति में उतर आई है। इस ‘चौकड़ी’ को लगता है कि वे सिर्फ और सिर्फ हिंदूओं को बांटकर ही भाजपा को सत्ता से दूर कर पाएंगे। यही वजह है कि राहुल गांधी भी आए दिन हिंदुस्तान को जातियों में बांटने के लिए जातिगत जनगणना का राग अलापते रहते हैं।
राहुल एंड कंपनी को हजम नहीं हो रही पीएम मोदी की लगातार सफलता
डीप स्टेट, राहुल गांधी और अखिलेश यादव की करतूतों की कलई तो भाजपा नेताओं ने अपने एक्स अकाउंट पर खोलकर रख दी है। जहां तक सोरोस और राहुल गांधी के संबंधों का सवाल है तो सोशल मीडिया पर इनकी घनिष्ठता के कई प्रमाण बिखरे हैं। इनसे साफ पता चलता है कि लोकसभा से लेकर विधानसभाओं में हार-दर-हार झेल रहे कांग्रेस के ‘कर्ताधर्ता’ राहुल गांधी अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए कितने निचले स्तर तक गिर गए हैं! राहुल अभी तक तो विदेशों में जाकर भारत और मोदी सरकार की बुराई करके देश को नीचा दिखाने के कोशिश किया करते थे। लेकिन अब उनपर साफ-साफ देश के साथ ‘गद्दारी’ करने के आरोप लगे हैं। उधर उनके मित्र अखिलेश यादव के इशारे पर सपा नेता हिंदू राष्ट्र के गौरव राणा सांगा को ‘गद्दार’ बता रहे हैं। दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लगातार तीसरी बार सत्ता में आना राहुल एंड कंपनी को हजम नहीं हो रहा है। उनके यह भी गले नहीं उतर रहा है कि पिछले एक दशक में भारत लगातार दुनिया में तेजी से एक शक्ति के तौर पर स्थापित हो रहा है। देश ने हर क्षेत्र में अपने प्रदर्शन में गुणात्मक सुधार किया है।
सांसद के घर पर हमले को दलित विमर्श से जोड़ रही सपा
राजपूत राजा राणा सांगा पर समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजपूत समाज की नाराजगी, बयान देने वाले नेता का विरोध, सांसद के घर पर हमले के बाद अब इस मामले में सियासी तड़का लगने लगा है। चोरी और सीनाजोरी की तर्ज पर सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से मिलकर सुरक्षा की मांग की। सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा- मैंने कुछ गलत नहीं बोला है, मैं माफी नहीं मांगूंगा और अपने बयान पर कायम हूं। इधर रामजी लाल सुमन के घर पर हुए हमले के बाद सपा नेता राम गोपाल यादव उनके घर आगरा पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए इस मुद्दे को दलित राजनीति से जोड़ने की कोशिश की।  
दलित पर नहीं, राणा सांगा को विद्रोही बताने वाले पर हमलाः भाजपा
दूसरी ओर इस मामले में बीजेपी के नेताओं ने समाजवादी पार्टी को करारा जवाब दिया है। गोरखपुर सांसद भाजपा नेता रवि किशन ने कहा कि उकसाने वाले बयान से बचना चाहिए। आप कहेंगे तो जनता उग्र हो जाती है। भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेई ने कहा- दलित होने के कारण उनके घर पर हमला नहीं हुआ बल्कि राणा सांगा जैसे योद्दा के खिलाफ बोलने वालों के खिलाफ हमला हुआ। उत्तर प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेई ने कहा, “अखिलेश यादव को यह बात ध्यान रखनी चाहिए। उनका या उनके किसी कार्यकर्ता का कोई भी वाक्य भारत माता के विरुद्ध है तो उनको बोलने में संकोच करना चाहिए। राणा सांगा को गद्दार बताएंगे, देश का इतिहास झुठलायेंगे तो वह स्वाभाविक प्रक्रिया होगी। अगर उनके साथ कोई घटना घटती है तो दलित के साथ नहीं, बल्कि राणा सांगा को विद्रोही बताने वाले के साथ घटना घटी है।
अखिलेश यादव ने राजपूत वोटों की चिंता इसलिए छोड़ी 
राजपूत राजा राणा सांगा पर सपा सांसद रामजी लाल सुमन की विवादित टिप्पणी के बाद शुरू हुए सियासी घमासान को अखिलेश यादव 2027 के चुनावों की नजर से देख रहे हैं। इसीलिए समाजवादी पार्टी सपा सांसद रामजी लाल सुमन के घर पर करणी सेना के लोगों द्वारा किए गए घेराव को राजूपत बनाम दलित बनाने की कोशिश हो रही है। करणी सेना के पहुंचने के बाद उन्हें आपदा में अवसर दिखने लगा है। हालांकि हिंदुओं को बांटने की इस रणनीति में अखिलेश यादव कभी कामयाब नहीं हो पाएंगे और उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी। इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि आज समाजवादी पार्टी वोट बैंक के लिए राजपूत आधार नहीं हैं। केवल 2012 के विधानसभा चुनाव तक भी क्षत्रिय वोटों पर सपा की पकड़ थी। अखिलेश मंत्रिमंडल में 11 ठाकुर इस बात के सबूत थे। अखिलेश सरकार में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह, अरविंद सिंह गोप, राधे श्याम सिंह, राजा आनंद सिंह, योगेश प्रताप सिंह, राजा महेंद्र अरिदमन सिंह समेत कुल 11 ठाकुर मंत्री थे। मगर आज स्थितियां पूरी तरह से बदल चुकी हैं। अखिलेश यादव को भी मालूम है कि अब राजपूत समाजवादी पार्टी को वोट नहीं देने वाले हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह हैं उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ। राजपूत कुल से आने वाले योगी पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में असली ‘ठाकुर’  साबित हो रहे हैं। यूपी का अगला चुनाव योगी बनाम अखिलेश होता है तो उत्तर प्रदेश के राजपूत तन मन धन से योगी आदित्यनाथ के साथ होंगे। शायद यही कारण है कि अखिलेश यादव ने राजपूत वोटों की चिंता छोड़कर दलित वोटों पर फोकस करने में लगे हैं। 
दलित सपा के हथकंडे समझ चुके, बहकावे में नहीं आएंगे
उन्होंने दूसरी पोस्ट में कहा कि आगरा घटना की आड़ में अब सपा अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना बंद करे और आगरा की हुई घटना की तरह यहां दलितों का उत्पीड़न और ज्यादा न कराए। उन्होंने लिखा कि समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक लाभ के लिए अपने दलित नेताओं को आगे करके जो घिनौनी राजनीति कर रही है अर्थात उनको नुकसान पहुंचाने में लगी है, यह कतई उचित नहीं है। दलित ना सिर्फ समाजवादी के हथकंडे भलीभांति समझ चुके हैं, बल्कि इनके बहकावे में आने वाले नहीं है। समाजवादी पार्टी हमेशा से दलितों की विरोधी थी और आज भी दलित विरोधी ही है।
राजस्थान के राजपूत राजा राणा सांगा के बारे में सपा सांसद की अपमानजनक टिप्पणी पर राजस्थान के नेताओं ने क्या कहा…
राजस्थान विधानसभा में गूंजा राणा को गद्दार कहने का मुद्दा
समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के राणा सांगा को गद्दार कहने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में उठा। बीजेपी विधायक श्रीचंद कृपलानी ने पॉइंट ऑफ इंफॉर्मेशन के जरिए राणा सांगा को गद्दार कहने का मामला उठाते हुए पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की। इस पर कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने कहा- सदन में इस पर चर्चा नहीं हो सकती। हरिमोहन शर्मा के इतना कहते ही बीजेपी विधायकों ने कड़ी आपत्ति की। इस पर बीजेपी विधायकों ने कहा- राणा सांगा के अपमान पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? कई बीजेपी विधायक जोर-जोर से बोलने लगे, इससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। बीजेपी विधायकों ने कहा कि आप राणा सांगा पर टिप्पणी का समर्थन कर रहे हो क्या? श्रीचंद कृपलानी ने कहा- आपके खड़ा होने से यह तय हो गया कि आप रामजीलाल सुमन के साथ हो? कांग्रेस ने खुद अपनी पोल खोल ली। आप मुगलों का साथ दे रहे हो। सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा- कांग्रेस विधायक दल रामजीलाल सुमन के साथ खड़ा है, राणा सांगा का अपमान करने वाले के साथ खड़ा है, शर्म आनी चाहिए।
अपने सांसद के बयान के लिए अखिलेश देश से माफी मांगें-भजनलाल
सपा सांसद के बयान पर राजस्थान के सीएम भजनलाल ने सोशल मीडिया पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि ‘शूरवीरों की धरती राजस्थान के लाडले सपूतों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए सदा अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। मेवाड़ के महान योद्धा राणा सांगा के बारे में समाजवादी पार्टी के सांसद का निम्नस्तरीय बयान, न केवल राजस्थान की 8 करोड़ जनता को, बल्कि सम्पूर्ण देशवासियों को आहत करता है।’ उन्होंने आगे लिखा कि ‘जिस महान योद्धा ने मुगलों से युद्ध में अपने शरीर पर 80 घाव झेले, उनको गद्दार कहना विपक्षी नेताओं की घटिया मानसिकता को दर्शाता है। वोटो के तुष्टिकरण के लिए ये लोग इतिहास पुरुषों का अपमान करने से भी नहीं चूकते हैं। इसके लिए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को को तुरंत देश से माफी मांगनी चाहिए और अपने सांसद पर अविलम्ब कार्रवाई करनी चाहिए।’

भारत विरोधी अरबपति जॉर्ज सोरोस की करीबी महिला के साथ राहुल गाँधी क्यों?

राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा एक बार फिर से विवादों में है। बीजेपी ने अमेरिका यात्रा के दौरान संसद से अयोग्‍य घोषित हो चुके राहुल गांधी की भारत विरोधी अमेरिकी अरबपति जार्ज सोरोस की करीबी सुनीता विश्वनाथ और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े तजीम अंसारी के साथ बैठक पर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि कई दस्तावेज प्रमाण दे रहे हैं कि भारत की लोकतांत्रिक सरकार को हटाने की बात डंके की चोट पर कहने वाले जार्ज सोरोस द्वारा वित्त पोषित महिला सुनीता विश्वनाथ और जमात-ए-इस्लामी से जुड़े तजीम अंसारी के साथ अमेरिका में राहुल ने बैठक की। सोरोस के ही संस्थान ओपन सोसाइटी के ग्लोबल उपाध्यक्ष सलिल शेट्टी ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी हिस्सा लिया था। इससे साफ जाहिर है कि सत्ता के लिए कांग्रेस आज इतना नीचे गिर गई है कि वह देशविरोधी लोगों से भी हाथ मिलाने से गुरेज नहीं कर रही। सत्ता के लिए राहुल गांधी देश को कमजोर करने और देश को नीचा तक दिखाने के लिए तैयार हैं।

जार्ज सोरोस के सहयोगी से मिलने की राहुल की क्या है मजबूरी?

भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में स्मृति ईरानी ने कहा कि भाजपा ने इस विषय को पहले भी उठाया था कि कैसे जार्ज सोरोस भारत में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को हटाना चाहते हैं। सोरोस के इरादे हर भारतवासी को पता थे, तब भी ऐसी क्या मजबूरी थी कि राहुल गांधी ने जार्ज सोरोस के एक सहयोगी के साथ अमेरिका में बैठक की। ईरानी ने सवाल किया कि राहुल को जवाब देना चाहिए कि वे लोगों के साथ क्या बात कर रहे थे? स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गांधी अमेरिका दौरे पर 4 जून को जमाते इस्लामी से संबंधित एक इस्लामी संगठन से मिले थे। इस मुलाकात पर सवाल उठाते हुए स्मृति ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर चर्चा करते हुए कहा कि इस दौरान भी सोरोस के ओपन सोसायटी के मेंबर सलिल सेठी भी राहुल गांधी के साथ दिखाई दिए थे। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मुद्दे को उठाने पर बीजेपी नेता के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। यह सच को दबाने की कोशिश है। उन्होंने पूछा कि जो भारत की सरकार को गिराना चाहता है उसके साथ राहुल गांधी आखिर क्या कर रहे हैं। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में फोटो भी शेयर किए।

अमित मालवीय ने राहुल की सच्चाई दिखाई तो कांग्रेस को मिर्ची लगी

दरअसल, कर्नाटक में भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के सदस्य रमेश बाबू ने यह शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि मालवीय ने कांग्रेस और राहुल गांधी का मजाक उड़ाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर माहौल बिगाड़ने और लोगों को उकसाने का काम किया। जबकि इस वीडियो इसमें उन्हीं बातों को दिखाया गया है जो कि राहुल गांधी अपने ब्रिटेन और अमेरिकी दौरे पर कहते रहे हैं। इसमें दिखाया गया है कि वे भारत के विरोधी हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने के लिए विदेशों में भारत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।
सुनीता विश्वनाथ ने किया था पीएम मोदी के दौरे का विरोध
सुनीता विश्वनाथ हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (एचएफएचआर) की कोफाउंडर हैं। वह अमेरिका में इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल के साथ कई कार्यक्रमों में शिरकत करती हैं। यह एक कट्टर संगटन है। खबरों के अनुसार इस संगठन का पश्चिम में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के साथ सांठगांठ है। संदिग्ध संगठन ‘हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे का विरोध किया था। इसके खिलाफ प्रोपेगेंडा के लिए विशेष टूलकिट लेकर आया था। संगठन द्वारा जारी टूलकिट उसके मोदी विरोधी अभियान का हिस्सा था। “मोदी प्रोटेस्ट टूलकिट” शीर्षक वाला 24 पेज का दस्तावेज़ एचएफएचआर की वेबसाइट पर खुले तौर पर उपलब्ध था।
अमेरिका में राहुल का जमात, सुनीता विश्वनाथ कनेक्शन, फोटो ने खोल दी पोल
राहुल गांधी पीएम मोदी के अमेरिका दौरे से पहले 30 मई को अमेरिका पहुंचे थे। राहुल गांधी के विदेश दौरे का उद्देश्य भारत को नीचा दिखाना, पीएम मोदी और भाजपा को बदनाम करना और भारत में मुसलमान खतरे हैं, यही बताना रहता है। यह काम वह पिछले कई विदेश दौरे से करते आ रहे हैं। लेकिन जिस तरह सोशल मीडिया पर उनका एक फोटो वायरल हुआ उसने उनकी पोल खोलकर रख दी है। जिस अमेरिकी अरबपति कारोबारी जार्ज सोरोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जहर उगला था, जिसने पीएम मोदी को सत्ता से हटाने की बात कही थी, जिसने राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 अरब डॉलर का फंड देने की बात कही थी, अब राहुल गांधी उसी के करीबी सहयोगी सुनीता विश्वनाथ के साथ बैठते करते देखे गए। आखिर राहुल गांधी देश विरोधी लोगों से क्यों मिल रहे थे? क्या भारत को कमजोर करने की जार्ज सोरोस की साजिश में वे भी शामिल हैं? राहुल गांधी का जमात, ISI और जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोगों से मिलना यह साबित करता है कि वे भारत से प्रेम नहीं करते बल्कि सत्ता के लिए देश को कमजोर करने से लेकर किसी भी हथकंडे को अपना सकते हैं।
जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं सुनीता विश्वनाथ

सुनीता विश्वनाथ जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं, जिसने विपक्षी नेताओं, थिंक टैंक, पत्रकारों, वकीलों और कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क के माध्यम से भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए 1 अरब डॉलर देने का वादा किया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राहुल गांधी सत्ता पाने के लिए इस हद तक समझौता कर रहे हैं। अमेरिकी एक्टिविस्ट सुनीता विश्वनाथ वही हैं जिन्हें तीन साल पहले अयोध्या में एंट्री से रोक दिया गया था।
कुछ समय पहले विवादित ‘काली’ वेब सीरीज पर उठे विवाद पर इस महिला ने आकर सीरीज की निर्माता के पक्ष में हिंदू देवताओं के लिए उल-जुलूल बातें की थीं। अपने लेख में सुनीता ने महादेव की चिलम फूँकती तस्वीर लगाकर कहा था कि हिंदुओं में शराब और सिगरेट कुछ भी निषेध नहीं है। देवताओं को ये सब चढ़ता है।
सुनीता ने अपने लेख में सेक्स और समलैंगिकता को घुसाकर ये तक लिखा था कि धर्मग्रंथों में अनगिनत ऐसी कहानियाँ भरी पड़ी हैं, जिन्हें पढ़कर समलैंगिकता से पैदा हुए बच्चों का पता चलता है। सुनीता ने यह भी लिखा था कि हिंदुओं के कुछ देवता तो समलैंगिक भी हैं। काली के आपत्तिजनक दृश्यों को सपोर्ट करने के लिए सुनीता ने साफ लिखा था कि हिंदू देवता धूम्रपान, मदिरापान करते हैं। इसके अलावा वो मांस भी खाते हैं।

कौन हैं जॉर्ज सोरोस

92 साल के जॉर्ज सोरोस एक अमेरिकी अरबपति हैं, जो स्टॉक मार्केट में निवेश करके लाभ कमाते हैं। उनका जन्म 1930 में पश्चिमी देश हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में एक यहूदी परिवार में हुआ था। कहा जाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब यहूदियों पर अत्याचार हो रहा था, तब उन्होंने झूठा पहचान पत्र बनाकर अपना और अपने परिवार की जान बचाई थी।
जब विश्वयुद्ध खत्म हुआ और हंगरी में कम्युनिस्ट सरकार बनी तो वे 1947 में इंग्लैंड की राजधानी लंदन चले गए। वहाँ उन्होंने रेलवे स्टेशन पर कुली और क्लबों में वेटर का भी काम किया। इस दौरान वे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई की। इसके बाद कुछ समय तक उन्होंने लंदन मर्चेंट बैंक में भी काम किया।
साल 1956 में वे लंदन छोड़कर अमेरिका आ गए और फाइनांस एवं इन्वेस्टमेंट में कदम रखा। उसके बाद उनकी किस्मत चमक उठी और रात दूनी दिन चौगुनी तरक्की करने लगे और खूब संपत्ति इकट्ठा की। वित्तीय पत्रिका फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार 17 फरवरी 2023 तक उनके पास 6.7 बिलियन डॉलर (लगभग 55,455 करोड़ रुपए) की संपत्ति है।
सन 1973 में उन्होंने सोरोस फंड मैनेजमेंट की स्थापना की और कथित अत्याचार पीड़ितों की मदद करने लगे। इस दौरान उन्होंने ब्लैक लोगों की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप देना शुरू किया। उनका दावा है कि उन्होंने अब 32 अरब डॉलर (2.62 लाख करोड़ रुपए) जरूरतमंदों को दे चुके हैं। सन 1984 में उन्होंने ओपन सोसायटी नामक संस्था की स्थापना की। आज यह संस्था 70 से अधिक देशों में कार्यरत है।
इन सब मानवीय सेवाओं और दानों के पीछे उनका एक विकृत चेहरा भी है। उन्होंने लाभ कमाने के लिए कई संस्थानों और देशों में वित्तीय संकट खड़ा कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने कई देशों की सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने और उन्हें गिराने के लिए फंडिंग करने का काम किया। ओपन सोसायटी का इसमें नाम आया है। इस तरह के आरोप उन पर लगते रहे हैं।
अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को हटाने के लिए अथाह पैसे खर्च किए थे। साल 2003 में उन्होंने कहा था कि जॉर्ज बुश को हटाना उनके लिए जिंदगी और मौत का सवाल है। उन्होंने कहा था कि अगर बुश को सत्ता से हटाने की अगर कोई गारंटी लेता है और वे अपनी पूरी संपत्ति उस पर लुटा देंगे। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ बुश की कार्रवाई का भी खूब विरोध किया था। बुश को हराने के लिए उन्होंने 250 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए थे।
सोरोस को चीन, भारत के नरेंद्र मोदी, ब्लादिमीर पुतिन, अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता पसंद नहीं हैं। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को ठग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह कहा था। और यही बोली भारत में मोदी विरोधी बोल रहे हैं। उन्होंने दुनिया में ‘राष्ट्रवाद’ के बयार से लड़ने के लिए लगभग 100 अरब डॉलर की फंड की स्थापना की है। इन फंड का इस्तेमाल इन लोगों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उन्होंने कहा था कि दुनिया में राष्ट्रवाद तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे खतरनाक नतीजा भारत में देखने को मिला है।

सोरोस ने वित्तीय संकट पैदा किया और लाभ कमाया

जॉर्ज सोरोस को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, जिसने बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद कर दिया। बैंक ऑफ इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम का केंद्रीय बैंक और यह भारत के RBI के समानांतर है। हेज फंड मैनेजर सोरोस ने अपनी साजिशों से ब्रिटिश मुद्रा पाउंड की वैल्यू को गिरा दिया था। इससे उन्होंने लगभग 1 बिलियन डॉलर (8277 करोड़ रुपए) का लाभ कमाया था। उन्हें वित्तीय युद्ध अपराधी तक कहा गया है।
यह कुछ हिंडनबर्ग रिसर्च की तरह ही है। हिंडनबर्ग भी अपनी रिपोर्ट में किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति को खराब बताया है। इससे उसके शेयर गिरने लगते हैं और उसे शॉर्ट सेल करके लाभ कमाता है। अडानी मामले में भी हिंडनबर्ग ने यही तरीका अपनाया। इसके पहले भी वह ऐसा ही करता है। जॉर्ज सोरोस ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के मामले में लगभग यही रणनीति अपनाई थी।
साल 1997 में थाईलैंड की मुद्रा बाहत पर सट्टेबाजी हमलों (Speculative Attack) के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया गया था। थाईलैंड की मुद्रा में आई गिरावट के कारण उस साल एशिया के अधिकांश देशों में वित्तीय संकट फैल गया था। मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने भी वहाँ की मुद्रा रिंगित की गिरावट के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया था। हालाँकि, सोरोस ने इसका खंडन किया था।
इसके अलावा, सोरोस पर अन्य अनैतिक तरीकों से संपत्ति कमाने का आरोप लगा है। वर्ष 2002 में फ्रांस की अदालत ने सोरोस को अनैतिक और अनधिकृत व्यापार का दोषी पाते हुए उन पर 23 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया था। सोरोस ने अदालत के इस फैसले को फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने सोरोस पर लगाए गए इस जुर्माने को बरकरार रखा।
अमेरिका में भी जॉर्ज सोरोस पर बेसबॉल खेलों में पैसा लगाकर अनैतिक तरीके से लाभ कमाने का आरोप लगा। इसी तरह इटली की फुटबॉल टीम एएस रोमा को लेकर भी सोरोस विवादों में आए था। इतना ही नहीं, सोरोस ने साल 1994 में खुलासा किया था कि उन्होंने आत्महत्या करने में अपनी माँ मदद की थी।

सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा और भारत

राफेल डील में जाँच के लिए फंडिंग: फ्रांस से भारत ने 36 राफेल विमानों को खरीदा था। इसको लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने हंगामा किया था और कहा था कि इसमें दलाली हुई है। हालाँकि, यहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। इसके बाद फ्रांस की एनजीओ शेरपा एसोसिएशन ने इसमें भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराकर जाँच की माँग की थी। इस एनजीओ को जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से फंड जारी किया जाता है।
भारत जोड़ो यात्रा और सोरोस: कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा से भी जॉर्ज सोरोस के नाम जुड़े हैं। 31 अक्टूबर 2022 को सलिल शेट्टी नाम का एक व्यक्ति राहुल गांधी की कर्नाटक के हरथिकोट में उनकी भारत जोड़ी यात्रा में शामिल हुआ। सलिल शेट्टी जॉर्ज सोरोस द्वारा स्थापित ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन के वैश्विक उपाध्यक्ष हैं। इसके पहले शेट्टी एमनेस्टी इंटरनेशनल से जुड़े थे।
CAA प्रोटेस्ट: सीएए प्रोटेस्ट में भी जॉर्ज सोरोस का नाम जुड़ा है। कहा जाता है कि नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर हुए विरोध को हवा देने के लिए जॉर्ज सोरो ने फंडिंग की थी। इसकी पुष्टि उनके बयानों से भी होती है। सोरोस ने भारत में लागू किए जा रहे NRC और CAA को मुस्लिम विरोधी बताया था।
कश्मीर से धारा 370 का खात्मा: इसी तरह कश्मीर से जब केंद्र की मोदी सरकार ने धारा 370 को खत्म कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किया था, तब भी सोरोस सामने आए थे। उन्होंने मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। सोरोस ने कहा था कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है। इसी तरह किसान आंदोलन और भारत द्वारा कोरोना का वैक्सीन बनाने के बाद उसके खिलाफ वैश्विक मुहिम चलाने में भी सोरोस का नाम आ चुका है।
दरअसल, जॉर्ज सोरोस की भूमिका उन हर बातों में लगभग सामने आई, जो केंद्र की भाजपा सरकार और नरेंद्र मोदी के खिलाफ रही। जॉर्ज सोरोस की नरेंद्र मोदी के खिलाफ कितनी नफरत है, इसका वे तानाशाह कहकर सबूत दे चुके हैं और समय-समय पर अन्य आरोपों के जरिए इसकी पुष्टि भई करते रहते हैं। वैसे तो सोरोस की कहानी सैकड़ों पन्नों में भी नहीं खत्म होगी, लेकिन फिलहाल संक्षिप्त में इतना ही।

अगर नूपुर शर्मा गलत है, फिर उसी बात के लिए ज़ाकिर नाइक गलत क्यों नहीं? इस्लामी देशों को भड़काने की कोशिश में भी टूल किट

बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा प्रकरण के बाद इस्लामिक देशों ने जिस तरह से कई दिन बाद विरोध करना शुरू किया, उसको लेकर लोगों की शंका गहरा गई है। बताया जा रहा है कि इसके पीछे भी टूलकिट का हाथ है। किसान आंदोलन के समय जिस तरह से मियां खलीफा के साथ दुनिया भर के लोगों से ट्वीट करा कर सोशल मीडिया पर माहौल खराब करने की कोशिश की गई, उसी तरह से नूपुर शर्मा मामले में मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए मुस्लिम देशों का इस्तेमाल किया गया। नूपुर शर्मा की टिप्पणी के पांच दिनों बाद तक सब कुछ शांत रहा, लेकिन जैसे ही एक जून को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी को ईडी ने समन भेजा। टूटकिट गैंग हरकत में आ गई।

इसके साथ ही यूक्रेन-रूस संकट के बाद भारत जिस तरह से रूस से सस्ते तेल के लिए सौदा कर रहा था, उससे अमेरिका के साथ कतर नाराज था। साथ ही हाल में में भारत ने जिस तरह से अमेरिका और यूरोपीय देशों को मानवाधिकार और नस्लवादी हिंसा पर खुद के गिरेबान में झांकने को कहा, उससे इस मुद्दे ने उन्हें भारत के खिलाफ एक मौका दे दिया और उन्होंने इस्लामिक देशों को भड़काना शुरू कर दिया

आखिर क्या था मामला?

नूपुर शर्मा ने एक न्यूज चैनल पर चर्चा के दौरान शिवलिंग को फव्वारा बताए जाने पर सवाल किया कि जैसे लोग बार-बार उनके भगवान का मजाक उड़ा रहे हैं, वैसे ही वो भी दूसरे धर्मों का भी मजाक उड़ा सकती हैं। इसके बाद नूपुर ने जो कुछ भी कहा, उसे मुस्लिम मौलाना जाकिर नाइक भी कह चुका है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने जाकिर नाइक का वो वीडियो भी शेयर किया, जिसमें वो हदीस के हवाले से मुसलमानों के बीच कहता दिख रहा है कि पैगंबर ने 6 साल की बच्ची से शादी की थी और 9 साल की उम्र में उससे शारीरिक संबंध बनाए थे। लेकिन यही बात जब नूपुर शर्मा ने कही तो दुनिया भर में बवाल हो गया। यहां आप सुनिए कि जाकिर नाइक ने क्या कहा था। 

पाकिस्तान ने चलाया भारत विरोधी कैंपेन
इस मामले में सामने आए टूलकिट से यह भी पता चलता है कि पाकिस्तान ने सोशल मीडिया पर बढ़-चढ़कर भारत विरोधी अभियान चलाया। इसके लिए कई फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और पत्रकारों और कई राजनेताओं के अकाउंट का इस्तेमाल भारत के खिलाफ माहौल बनाने के लिए किया गया।

नूपुर शर्मा की टिप्पणी के बाद दुनिया भर के इस्लामी देशों ने विरोध करना शुरू कर दिया। इन मुस्लिम देशों में जहां ना तो सही मायने में लोकतंत्र है ना दूसरे धर्म को मानने की पूरी आजादी, दूसरों से धर्मनिरपेक्षता की बात करने लगे। इससे उन्होंने एक बात फिर साबित करने की कोशिश की कि कोई गैर-मुसलमान इस्लाम के बारे में कुछ नहीं बोल सकता, चाहे वो सही हो या गलत। जबकि हिंदू धर्म के बारे में चाहे कुछ भी बोल लो।

दूसरे, अब चर्चा यह भी हो रही है कि नूपुर के विरोध में कतर और अन्य मुस्लिम देशों के खड़े होने पर, भारत सरकार ने जिस दिन वहां काम कर रहे 40+ लाख लोगों को वापस बुला लिया, ये सभी घुटनों के बल बैठ माफ़ी मांगते नज़र आएंगे। कभी भारत के विरुद्ध बोलने या कोई षड़यंत्र करने का साहस नहीं कर पाएंगे। बस इंतज़ार है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साहसिक निर्णय का। 

सबसे बड़ी बात तो यह है कि जो नूपुर शर्मा को बयान को अपने धर्म का अपमान बता रहे थे वो खुद दूसरे की आस्था और धर्म का मजाक उड़ा रहे थे। एक तरह से इसने हिंदू धर्म के लोगों को एकजुट और जागृत करने का ही काम किया। लोग नूपुर शर्मा के पक्ष में खड़े हो गए।

नीदरलैंड के नेता ने लगाई लताड़
इतना ही नहीं नीदरलैंड्स के नेता गीर्ट विल्डर्स ने नूपुर शर्मा पक्ष लेते हुए कहा कि अलकायदा जैसे इस्लामिक आतंकियों के सामने ना झुकें क्योंकि ये संगठन बर्बरता का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन पाखंडियों की मत सुनें। इस्लामिक देशों में लोकतंत्र नहीं है। कोई नियम, कानून या स्वतंत्रता नहीं है। वे अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न करते हैं और मानवाधिकारों का अपमान करते हैं।

नूपुर शर्मा को मिला पाक पत्रकार का साथ
नूपुर के पक्ष में एक पाकिस्तानी पत्रकार तहा सिद्दीकी का एक बयान वायरल हो रहा है। तहा ने एक ट्वीट में कहा है कि आयशा के 9 साल की उम्र में मोहम्मद से शादी करने को लेकर ‘सत्यापित’ हदीसों का हवाला देने के लिए भारतीय जनता पार्टी और नूपुर शर्मा पर हमला करने के बजाए मुस्लिम नेताओं को एक साथ आना चाहिए और अगर गलत लिखा है तो उसे हटा देना चाहिए। लेकिन अगर यह सच नहीं है तो कोई भी मोहम्मद पर बाल विवाह करने का आरोप नहीं लगा सकता है।

भले ही कतर सहित मुस्लिम देशों ने नूपुर मामले में भारत के खिलाफ विरोध जताया और भारतीय वस्तुओं के बहिष्कार की बात करने लगे, लेकिन उन्हें जल्दी ही इस बात का एहसास हो गया कि उनके पास तो भारत को देने के लिए सिर्फ तेल है जो वो रूस या दूसरे देशों से मंगा सकता है, लेकिन अगर भारत ने उन्हें गेहूं, चावल, सब्जी, फल के साथ मांस भेजना बंद कर दिया तो उनके लिए एक हफ्ता भी गुजारा मुश्किल हो जाएगा। इस लिए अब ज्यादा चिंता करने की बात नहीं है। कतर जैसे दूसरे मुस्लिम देश भी जल्द रास्ते पर आ जाएंगे। बस अपने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भरोसा रखिए।

ABP ने कांग्रेस की शर्त क्यों मानी? फ्री स्पीच पर एक बार फिर सामने आया कांग्रेस का दोहरा रवैया, शहजाद को डिबेट में आने से रोका

क्या मीडिया अभी भी कांग्रेस के इशारे पर ही नाचती है? यदि नहीं, फिर किस कारण से ABP चैनल को कांग्रेस के दबाव के आगे झुकना पड़ा? क्या चैनल कांग्रेस स्पोंसर समाचार प्रसारित करता है? चैनल कांग्रेस के दबाव में आकर इस बात को इस बात को भी साबित कर दिया कि टीवी पर होने वाली चर्चाएं सिर्फ अपनी TRP के लिए की जाती हैं। अन्यथा वह क्या कारण थे कि चैनल को शहज़ाद पुणेवाला को चर्चा में आने से रोका? 
कहते हैं, इतिहास लिखा नहीं जाता दोहराया जाता है, जिसे कांग्रेस के आगे घुटने टेक कर ABP चैनल ने सिद्ध कर दिया। जितने भी वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विद्वान जानते होंगे कि जब राहुल के दादा फिरोज जहांगीर संसद में बोलने के लिए खड़े होते थे, जवाहर लाल नेहरू के पसीने छूटने लगते थे। लगभग वही स्थिति मई 21 को ABP चैनल पर कांग्रेस द्वारा शहज़ाद को रोक दोहरायी गयी है। अंतर केवल इतना उन दिनों फिरोज को रोकने वाला कोई नहीं था। जो काम जवाहर लाल नहीं कर पाए, नातियों ने कर दिया। काश! उनके पोता-पोती यानि राहुल और प्रियंका अपने दादा की मजार पर जाकर सजदा कर, उनका आशीर्वाद लेते।  
फ्री स्पीच पर एक बार फिर कांग्रेस का दोहरा रवैया सामने आया है। शहजाद पूनावाला को एबीपी न्यूज पर डिबेट में आने से रोक दिया गया है। शहजाद को एबीबी न्यूज चैनल पर टूलकिट विवाद पर होने वाली चर्चा में आमंत्रित किया गया था। लेकिन ऐन टाइम पर यह कहकर चर्चा में भाग लेने से रोक दिया गया कि कांग्रेस नेता नहीं चाहते कि आप डिबेट में हिस्सा लें। इसके बाद शहजाद पूनावाला ने ट्विटर पर एबीपी न्यूज चैनल के साथ हुई बातचीत के ऑडियो को शेयर कर दिया।

एबीपी चैनल द्वारा शहज़ाद को कांग्रेस के दबाव में चर्चा में भाग लेने से रोकने पर लोगों की प्रक्रियाएं तो सामने आ ही रही हैं, लेकिन यह भी सिद्ध हो रहा है कि सत्ता में न होते हुए भी कांग्रेस ने किस तरह मीडिया को अपनी मुट्ठी में कर रखा है। यह उन लोगों को करारा जवाब है, जो कहते हैं, "मोदी ने मीडिया को खरीद लिया है", दूसरे एबीपी चैनल ने भी सिद्ध कर दिया है कि सच्चाई के उजागर होने के डर से कांग्रेस ने चैनल को खरीद लिया है। मीडिया जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है, अन्य चैनलों की भांति ABP ने साबित कर दिया कि 'वही समाचार प्रसारित होंगे, जिसे कांग्रेस चाहेगी। देखिए ट्विटर पर लोगों की प्रक्रियाएं :

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शहजाद पूनावाला कांग्रेस के नेता रह चुके हैं। शहजाद पूनावाला कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के पति राबर्ट वाड्रा के बहनोई तहसीन पूनावाला के भाई हैं। साल 2017 में तत्कालीन कांग्रेस नेता शहजाद पूनावाला से ये कहकर तहलका मजा दिया था कि पार्टी में इलेक्शन नहीं सिलेक्शन होता है। उन्होंने कहा था कि अगर कांग्रेस में निष्पक्ष चुनाव होता है तो वह भी चुनाव लड़ेंगे। इसके बाद शहजाद और तहसीन के संबंधों में दरार आ गई।

टूलकिट विवाद में दिशा का समर्थन करने पर यूजर्स ने लगाई प्रियंका गांधी को लताड़, कहा- कांग्रेस का हाथ गद्दारों के साथ

मोदी भक्त अथवा मोदी विरोधी होना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन उसका आधार होना चाहिए आधारहीन नहीं। परन्तु मोदी विरोधी मोदी नाम से ही इतना भवभीत होने के कारण विरोध में मुख्य मुद्दे भूल गए हैं। विरोधी केवल उन्हीं मुद्दों को लेकर मोदी विरोध कर रहे हैं, जिनका इन विरोधियों ने अपने घोषणा-पत्रों में उल्लेख कर रखा है। 

आधारहीन विरोध केवल कुछ क्षणों के लिए मोदी विरोध के साथ जनता खड़ी हो सकती हैं, लेकिन चुनाव तक नहीं। यदि विरोध का यही हाल रहा है, आने वाले कुछ समय में देश में किसी सदन में विपक्ष अपना अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। यह आरोप नहीं कटु सत्य है। परन्तु मोदी विरोधियों को तुष्टिकरण और देश-विरोधियों की रहनुमायी करने से ही फुर्सत नहीं। 

कांग्रेस समर्थित यूपीए ने अपने 10 वर्षों में इस्लामिक आतंकवादियों को संरक्षण देने "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" का शोर मचाकर हिन्दू को कलंकित कर उस पाकिस्तान का हौवा बनाकर भारतीयों को डरा रखा था, आज दृढ़ इच्छाशक्ति ने उसी पाकिस्तान को विश्व में बेनकाब कर भीगी बिल्ली बना दिया। ज्ञात हो, जब इंदिरा गाँधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बांग्लादेश बनवाया था, तब तत्कालीन विपक्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने लोकसभा में इंदिरा को "दुर्गा" बोल सरकार का साथ दिया था, लेकिन आज वही कांग्रेस और अन्य मोदी विरोधी सर्जिकल और एयर स्ट्राइक पर सबूत मांगते वही बोली बोल रहे थे, जो पाकिस्तान बोल रहा था और अब किसान आंदोलन को भी असली मुद्दों से भटका दिया।

दिल्ली हिंसा और किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी ‘टूलकिट’ शेयर करने के आरोप में गिरफ्तार दिशा रवि को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दिशा रवि पर आरोप है कि उन्होंने टूलकिट में एडिट कर कुछ चीजें जोड़ी और फॉरवर्ड कर दिया। ग्रेटा थनबर्ग के इस टूलकिट के शेयर करने पर दिशा रवि ने ही उसे बताया था कि टूलकिट सार्वजनिक हो गया है। जिसे बाद में ग्रेटा ने डिलीट कर दिया और फिर इसका एडिटेड वर्जन शेयर किया था। अब प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने दिशा रवि की गिरफ्तारी का विरोध किया है। इसे लेकर यूजर्स ने सोशल मीडिया पर प्रियंका गांधी वाड्रा की क्लास लगा दी है। दिशा के बचाव में प्रियंका के ट्वीट करते ही यूजर्स ने उन्हें और कांग्रेस को निशाने पर ले लिया…