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“सिर तन से जुदा” नारा लगाने वालों के खिलाफ सबूत नहीं, लेकिन नूपुर शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के पास सबूत थे कि उदयपुर कन्हैया हत्या के लिए वह दोषी है

सुभाष चन्द्र 

अजमेर कोर्ट की अतिरिक्त जिला जज (ADJ) रितू मीणा ने अजमेर दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती सहित 6 आरोपियों को दरगाह के बाहर “सिर तन से जुदा” के नारे लगाने के आरोप पर्याप्त सबूत न होने पर 16 जुलाई को बरी कर दिया जबकि एक आरोपी अहसानुल्लाह फरार है जिसने गौहर चिश्ती को हैदराबाद में अजमेर से भाग कर अपने पास शरण दी थी। नारे लगाने पर केस दर्ज होने के बाद गौहर चिश्ती का फरार होना ही गुनाह का सबूत था। लेकिन जज रितु ने इस पर ध्यान नहीं दिया।  

ADJ रितु मीणा ने दरअसल गौहर चिश्ती और अन्य को उनके नारों पर अमल करने के लिए बरी कर दिया कि जाओ और जिस नूपुर शर्मा के लिए नारा लगाया था उसका “सिर तन से जुदा” कर दो। जज ने कहा कि कथित वीडियो जिसमें नारे लगाए गए, उनका सत्यापन अदालत में नहीं हुआ फिर आपने क्यों नहीं कहा पुलिस से कि videos की forensic जांच रिपोर्ट पेश करो या आपने स्वयं Forensic जांच की आदेश क्यों नहीं दिए और आपने यह कैसे मान लिया कि वे वीडियो झूठे थे जज ने कहा पुलिस ने मौके का नक्शा नहीं बनाया और जो पुलिस वाले मौके पर मौजूद थे वे अपनी मौजूदगी के दस्तावेज पेश नहीं कर सके

लेखक 
चर्चित YouTuber 
अक्टूबर 2019 में इस्लामी कट्टरपंथियों ने कमलेश तिवारी के दफ्तर में घुस कर उन्हें मार डाला था। उन पर गोली चलाई गई थी, साथ ही चाकू से भी वार किया गया था। मोहम्मद मुफ़्ती नईम काज़मी और इमाम मौलाना अनवारुल हक़ ने 2016 में ही उनकी हत्या का फरमान जारी करते हुए इनाम देने की घोषणा की थी। मुस्लिम कट्टरपंथियों का मानना था कि कमलेश तिवारी ने पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया है। इसके पीछे गहरी साजिश का पता चला, 13 आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

ये criminal case में हर कोई जानता है कि सबूतों का Interpretation हर किसी व्यक्ति के विवेक पर निर्भर करता है, एक व्यक्ति की नज़र में सबूत और गवाह का बयान सही होता है तो दूसरे की नज़र में गलत, और प्रभावशाली आरोपियों को बरी करने के लिए तो सही सबूत को कैसे गलत माना जा सकता है, उसके लिए चढ़ावा  और भय भी प्रभाव डालता है और जज ही सबूत से छेड़छाड़ कर देता है उसकी विवेचना करते हुए। अजमेर में रहने वाली जज को भी भय हुआ हो सकता है

ऐसे ही सबूत के अभाव में 100 करोड़ हिंदुओं के क़त्ल की धमकी देने वाले अकबरुद्दीन ओवैसी को बरी कर दिया गया था। इसी तरह आतंक फ़ैलाने वालों को हिम्मत मिलती है।   

नूपुर शर्मा के खिलाफ आग उगलते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पारदीवाला ने सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की जो सबसे भयंकर “Hate Speech” दी थी उसे सुनकर लगा था कि उनके पास नूपुर शर्मा के खिलाफ कन्हैया हत्या के लिए जिम्मेदार होने के पुख्ता सबूत थे। दोनों जजों ने कहा :- 

she had a 'loose tongue' and that 'it set the entire country on fire’. They also said, "this lady is single-handedly responsible for what is happening in the country." They also made remarks like "She has a threat or she has become a security threat? The way she has ignited emotions across the country." They even blamed her for the killing in Udaipur. The justices asked her to apologize  to the whole nation” लेकिन आग किसने लगाई जस्टिस चंद्रचूड़ ने उसे छोड़ दिया

ये सूर्यकांत और पारदीवाला ही नहीं सुप्रीम कोर्ट के सभी जज हिंदुओं को कुचलने में लगता है किसी Tool Kit का हिस्सा बने हुए हैं। ये चाहते थे कि नूपुर शर्मा देश से माफ़ी मांगे लेकिन इन्हे नहीं पता कि 15 रिटायर्ड जजों, 77 रिटायर्ड वरिष्ठ नौकरशाहों और आर्मी के 25 रिटायर्ड अधिकारियों ने तत्कालीन CJI रमना को पत्र लिख कर दोनों के बयानों की घोर निंदा कर उनसे अपने बयान वापस लेने को कहा था लेकिन जजों की गर्दन तो अकड़ी हुई होती है कैसे अपना कसूर मान सकते हैं

न्यायपालिका को आत्मनिरीक्षण कर अपना आचरण सही करना जरूरी है वरना जो नहीं सुधरते, उन्हें वक्त सुधार देता है। 

एक बार फिर कहता हूं कि न्याय उस दिन होना शुरू होगा जिस दिन जज और उनके परिवार अपराध का शिकार होंगे। अजमेर कोर्ट के गौहर चिश्ती को बरी कर नूपुर शर्मा के लिए खतरा पैदा कर दिया है और अगर उसे कुछ होता है तो यह जज रितु मीणा समेत जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पारदीवाला भी जिम्मेदार होंगे क्योंकि उनकी “Hate Speech” ने नूपुर शर्मा पर अपराध की कॉल उसी दिन दे दी थी

जिस नूपुर को खामोश करना चाहता था ‘सर तन से जुदा’ गिरोह, हो गयी सक्रीय

बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने 2 साल बाद सोशल मीडिया पर वापसी की है। उन्होंने ‘सर तन से जुदा’ गिरोह के पीछे पड़ने के बाद से पिछले 2 साल से सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट नहीं की थी, लेकिन अब मोदी 3.0 की वापसी के साथ ही उन्होंने भी सोशल मीडिया पर वापसी की। नूपुर शर्मा ने अपनी पोस्ट में पीएम मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी है। नूपुर शर्मा ने शपथ लेते हुए पीएम मोदी की तस्वीर भी पोस्ट की।

नूपुर शर्मा ने एक्स पर वापसी करते हुए लिखा, ‘आज तीसरी बारी आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी को भारत के प्रधान मंत्री के रूप में शपथ लेते देख अत्यंत प्रसन्नता हुई। फिर एक बार मोदी सरकार सुरक्षित व विकसित भारत की ओर।’

नूपुर शर्मा ने एक टीवी डिबेट शो के दौरान पैगंबर मोहम्मद को लेकर एक टिप्पणी की थी। उनकी टिप्पणी को ‘सर तन से जुदा’ गिरोह ने एडिट करके सोशल मीडिया पर वायरल किया था, जिसके बाद काफी बवाल मचा था। इस विवाद की वजह से भाजपा ने नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया था। विवाद के बाद से ही नूपुर शर्मा को धमकियां दी जाने लगीं। खतरे को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने उन्हें सुरक्षा प्रदान की थी, तब से वो भारी सुरक्षा के बीच ही रहती हैं।

हालाँकि इसी लोकसभा चुनाव में 25 मई 2024 को दिल्ली में लोकसभा चुनाव के दौरान नूपुर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए बूथ पर पहुँचीं थीं। भारी सुरक्षा इंतजाम के बीच उन्होंने अपना वोट डाला था। दिल्ली में वोटिंग से पहले वह फिल्म डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री के एक कार्यक्रम में दिखी थीं।

नुपूर शर्मा ने लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी को किया बेनकाब : कहा- लल्लनटॉप से किसी ने नहीं किया संपर्क

लगभग 2 सालों बाद मई 25 को वोट डालने जाते हुए नूपुर शर्मा को देखा। हकीकत में मुस्लिम कट्टरपंथियों और सेकुलरिज्म का फटा ढोल पीटने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों के अलावा कोई नहीं जानता कि असली मुद्दा है क्या? टीवी चैनलों पर नपुंसक पत्रकार चर्चा तो कर नूपुर को ही कसूरवार बताते रहे। इसमें कसूरवार बीजेपी भी है। बीजेपी को प्रेस कांफ्रेंस कर दोनों वीडियो दिखानी चाहिए थीं और साथ में 'सिर तन से जुदा' मुस्लिम कट्टरपंथियों के गैंग पर प्रहार करना था। अगर बीजेपी ने हर चैनल को प्रेस कांफ्रेंस को live न दिखाने पर एक या दो महीने के लिए बैन कर दिया जाएगा, किसी कन्हैया लाल का क़त्ल नहीं होता। TimesNow के 'नवभारत' के एंकर सुशांत सिन्हा के अलावा किसी भी डरपोक चैनल ने सच्चाई दिखाने की हिम्मत नहीं की। सिन्हा ने अपने शो में सारे मुल्ला, मौलवी,इमाम और मुस्लिम बुद्धिजीवियों को खुली चुनौती देते हुए कहा था कि 'बताएं नूपुर शर्मा गलत है या हदीस?' नूपुर ने कोई अपने मन से नहीं कहा, उसने वही कहा जो उनकी हदीस में लिखा है।  
लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने हाल ही में एक शो में दावा किया है कि उन्होंने पूर्व भाजपा नेता नुपूर शर्मा को उनके बयान पर सफाई देने का मौका अपने चैनल पर दिया था। नुपूर शर्मा ने सौरभ द्विवेदी की इस बात को झूठ बताया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें ऐसा कोई मौका नहीं दिया गया।

यूट्यूब चैनल द लल्लनटॉप पर नेता नगरी नाम के शो में एक दर्शक ने नुपूर शर्मा को लेकर द्विवेदी से प्रश्न पूछा। पंकज शर्मा ने एक शख्स ने प्रश्न उठाया कि लल्लनटॉप पर नुपूर शर्मा को बुलाकर उनसे बातचीत क्यों नहीं की गई।

इसका द्विवेदी ने जवाब दिया कि उन्होंने नुपूर शर्मा की टिप्पणियों और उससे उपजे विवाद को लेकर उन्हें अपने चैनल पर आकर चीजें साफ करने के लिए आने का मौक़ा दिया था। सौरभ ने इस मामले में अपनी बात नीचे लगे वीडियो में 2 घंटे 11 मिनट से 2 घंटे 19 मिनट के रखी।

 द्विवेदी ने दावा किया कि उन्होंने एक बार भाजपा के एक कार्यक्रम और एक बार एक IAS के घर आयोजित निजी कार्यक्रम में नुपूर शर्मा को अपने चैनल पर आकर इस पूरे मुद्दे को रखने का मौका दिया था। सौरभ द्विवेदी ने बताया कि नुपूर शर्मा ने इस पर इनकार कर दिया था। द्विवेदी ने यह भी दावा किया कि उनकी टीम ने फिर से नुपूर शर्मा तक पहुँचने की कोशिश की है ताकि वह अपना पक्ष रख सकें। यह पूरा प्रकरण आनंद रंगनाथन के इस मुद्दे को उठाने के बाद चालू हुआ था।

सौरभ द्विवेदी का दावा नंबर 1 और नुपूर शर्मा का पक्ष

टाइम्स नाउ पर डिबेट के दौरान नुपूर शर्मा ने ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग का अपमान करने पर तस्लीम रहमानी को जवाब दिया था। सौरभ द्विवेदी का दावा है कि इसके बाद वे बीजेपी के एक कार्यक्रम में नुपूर से मिले और लल्लनटॉप पर आकर उनसे अपना पक्ष रखने को कहा।
इस दावे की पुष्टि के लिए ऑपइंडिया ने नुपूर शर्मा से बात की। द्विवेदी बीजेपी के जिस कार्यक्रम की बात कर रहे हैं वह मोदी सरकार के आठ साल पूरे होने पर पार्टी की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता थी। यह प्रेस वार्ता 31 मई 2022 को हुई थी। मोहम्मद जुबैर द्वारा नुपूर को टारगेट करने के लिए कांटछांट कर वीडियो ट्वीट करने के करीब एक सप्ताह बाद। जुबैर के इसी ट्वीट के बाद नुपूर को दुनिया भर से हत्या और बलात्कार की धमकी मिली थी।
ऑपइंडिया से बातचीत में नुपूर शर्मा ने माना है कि 31 मई की प्रेस वार्ता में उनकी सौरभ द्विवेदी से से भेंट हुइ थी। कई अन्य पत्रकारों से भी वे मिली थीं जो उस कार्यक्रम में मौजूद थे। लेकिन सौरभ द्विवेदी ने उन्हें कोई प्रस्ताव दिया था ऐसा उन्हें स्मरण नहीं है।
सौरभ के दावे को लेकर इसलिए भी संदेह होता है क्योंकि 31 मई को मीडिया से नुपूर के बात करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था। उन्होंने मीडिया को बाइट दिया था। 31 मई को ही करीब एक घंटे का साक्षात्कार ऑपइंडिया को दिया था। ऐसे में कोई तुक समझ नहीं आता कि सौरभ द्विवेदी प्रस्ताव दें और नुपूर इनकार कर दें।
थोड़ी देर के लिए यह मान भी लें कि सौरभ ने प्रस्ताव दिया था तो भी वह एक ऐसा कार्यक्रम था जिसमें ढेर सारे पत्रकार मौजूद थे। ऐसी मेल मुलाकात के दौरान अनौपचारिक बातचीतों को औपचारिक न्योता नहीं माना जाता है। यदि सौरभ द्विवेदी वास्तव में नुपूर को अपना पक्ष रखने के लिए लल्लनटॉप का प्लेटफॉर्म मुहैया कराना चाहते थे तो उन्हें औपचारिक तरीके से उनसे संपर्क करना चाहिए था। उनसे बातचीत करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने ऐसा कभी किया ही नहीं।

सौरभ द्विवेदी का दावा नंबर 2 और नुपूर शर्मा का पक्ष

सौरभ द्विवेदी ने एक आईएएस अधिकारी की पार्टी में नुपूर शर्मा से मुलाकात और दोबारा प्रस्ताव देने की बात कही है। यह पार्टी अप्रैल 2023 की है। यह एक निजी पार्टी थी और इसके आयोजक IAS दंपती नुपूर शर्मा के पारिवारिक दोस्त हैं।
नुपूर शर्मा ने ऑपइंडिया को बताया कि इस पार्टी में सौरभ द्विवेदी और उनकी पत्नी को देख वे हैरान रह गईं थी। उन्होंने ही सौरभ और उनकी पत्नी से मिलने की पहल की थी। इस दौरान नुपूर ने जुबैर के कारण उनकी जिंदगी पर आए खतरों को लेकर बात की थी लेकिन सौरभ द्विवेदी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
उन्हें यह भी याद नहीं कि उन्हें लल्लनटॉप पर आकर अपना पक्ष रखने का कोई प्रस्ताव मिला था, जैसा कि सौरभ द्विवेदी दावा कर रहे हैं। फिर से थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं कि सौरभ द्विवेदी ने नुपूर को लल्लनटॉप पर आने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन वह एक निजी पार्टी थी और संवाद की पहल भी नुपूर की ओर से हुई थी।
ऐसे में द्विवेदी का यह दावा सफेद झूठ है कि उन्होंने पहल कर नुपूर को प्रस्ताव दिया था। जाहिर है कि सौरभ द्विवेदी की नुपूर का पक्ष जानने में कोई दिलचस्पी ही नहीं थी। यदि ऐसा होता तो वे सीधे नुपूर से संपर्क करते जैसा अमूमन पत्रकार करते हैं।

सौरभ द्विवेदी का दावा नंबर 3 और नुपूर शर्मा का पक्ष

यह दावा सरासर झूठ है। नुपुर शर्मा ने ऑपइंडिया को बातचीत में बताया है कि पिछले महीने आनद रंगनाथन की वीडियो वायरल होने के बाद, सौरभ द्विवेदी या उनकी लल्लनटॉप टीम में से किसी ने भी उनसे संपर्क नहीं साधा है।
एक माह पहले डॉ आनंद रंगनाथन आरजे रौनक के पॉडकास्ट में गए थे। यहाँ उन्होंने नुपूर शर्मा के मामले में द लल्लनटॉप के रवैये पर प्रश्न उठाए थे। डॉ रंगनाथन ने प्रश्न उठाया था कि सौरभ द्विवेदी और लल्लनटॉप ने दृष्टि कोचिंग के मुखिया डॉ विकास दिव्यकीर्ति को हाथों हाथ अपने प्लेटफार्म पर बुलाकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया था जब डॉ दिव्यकीर्ति की रामायण का अपमान करने के कारण आलोचना हो रही थी। लेकिन लल्लनटॉप ने यही नुपूर शर्मा के मामले में नहीं किया।
डॉ रंगनाथन ने कहा कि लल्लनटॉप को विकास दिव्यकीर्ति के दावों का फैक्ट चेक करने में कोई खतरा नहीं नजर आया था क्योंकि उन्हें हिन्दू समुदाय से कोई धमकियाँ नहीं मिलती। हालाँकि, वह नुपूर शर्मा की बातों का फैक्ट चेक करने में डरे हुए थे क्योंकि अगर वह कह देते कि नुपूर शर्मा की बातें इस्लामिक सिद्धांतों के अनुसार सही हैं तो उन्हें कट्टरपंथियों से धमकियाँ मिलती।
डॉ रंगनाथन ने सौरभ द्विवेदी के झूठों पर भी जवाब दिया है। उन्होंने कहा, “वाह, नुपूर शर्मा से माफ़ी माँगने के बजाय द लल्लनटॉप के कायर यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने फैक्ट चेक इसलिए नहीं किया क्योंकि वह उनके प्लेटफॉर्म पर नहीं आईं। उनके प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री मोदी भी नहीं आते, तो क्या वह लोग उनका फैक्ट चेक नहीं करते?”

झूठ से परे – लल्लनटॉप के सौरभ द्विवेदी की धूर्तता

सौरभ द्विवेदी ने अपनी कायरता को सही ठहराने के लिए उसके ऊपर झूठ की चादर डाल दी है। उन्होंने नुपूर शर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए पिछले 2 साल में एक बार भी व्यक्तिगत रूप से संपर्क नहीं किया। उन्होंने गाहे-बगाहे होने वाली बातचीत को साक्षात्कार के लिए अनुरोध का ढोंग रचा। यही कारण है कि नुपूर शर्मा को यह वाकया याद भी नहीं है।
सौरभ द्विवेदी की पत्रकारिता को देखेंगे तो पाएँगे कि यह झूठ से भी दो कदम आगे जाती है, धूर्तता की सीमा तक। सौरभ द्विवेदी और लल्लनटॉप को किसी खबर के फैक्ट चेक के लिए उससे संबंधित लोगों को अपने शो में बुलाने की जरूरत नहीं। उदाहरण देखिए। क्या लल्लनटॉप ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने शो में बुलाया था? अगर नहीं तो, “भारत के संसाधनों पर मुसलमानों का पहला अधिकार” वाली खबर का फैक्ट चेक कैसे किया?
लल्लनटॉप ने कई ऐसे ‘फैक्ट-चेक’ भी किए हैं, जहाँ वे पीएम मोदी या बीजेपी द्वारा कई बयानों और भाषणों में कही गई बातों के बारे में सच्चाई पेश करने का दावा करते हैं। क्या इन सब फैक्ट चेक के लिए सौरभ द्विवेदी के शो में पीएम मोदी आए?
आखिर सौरभ द्विवेदी इस बात पर क्यों जोर दे रहे हैं कि नुपूर शर्मा को उनके बयान के दावों की फैक्ट चेक के लिए उनके शो में आना चाहिए? नुपूर शर्मा ने जो कहा, वह इस्लामी किताबों के अनुसार तथ्यात्मक रूप से सही है या नहीं, इस पर चर्चा करते हुए इसका फैक्ट चेक किया जा सकता है। क्यों नहीं किया? लल्लनटॉप के शो में हदीस को क्यों नहीं खोल कर पढ़ा गया? क्यों नहीं मोहम्मद जुबैर जैसे इस्लामी ट्रोल्स का फैक्ट चेक किया, जिसने दावा किया था कि नुपूर शर्मा ने ‘इस्लाम का अपमान’ किया? सौरभ द्विवेदी बिना नुपूर शर्मा के एक शो क्यों नहीं कर सके, यह दिखाते हुए कि नुपूर शर्मा का बयान झूठ नहीं था, बल्कि जाकिर नाइक ने भी वही बात कही थी?
यह वीडियो कुछ और नहीं बल्कि सौरभ द्विवेदी की कायरता का प्रतीक है। कट्टर ढंग से फैल चुके वैश्विक इस्लामी तंत्र के डर से सौरभ द्विवेदी एक पीड़ित महिला के पक्ष में खड़ा होने से डर गया।
भाजपा प्रवक्ता की हैसियत से नुपूर शर्मा ने एक टीवी चैनल पर बहस में हिस्सा लिया था। यह बहस ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने को लेकर रखी गई थी। इसमें एक मुस्लिम वक्ता के शिवलिंग के विषय में अभद्र भाषा बोलने पर नुपूर शर्मा ने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर एक टिप्पणी की थी। इसके बाद उनके खिलाफ देश भर में इस्लामी कट्टरपंथियों ने प्रदर्शन किए थे। उनको ‘सर तन से जुदा’ की धमकियाँ दी गई थीं। भाजपा ने उन्हें निलम्बित कर दिया था।
नुपूर शर्मा ने इस विवाद के बाद उनको मिली धमकियों और उनके जीवन में आई कठिनाइयों पर ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नुपुर जे शर्मा से बात की थी। उन्होंने इस दौरान बताया था कि ऑल्टन्यूज के फाउंडर और प्रोपेगेंडा फैलाने वाले मुहम्मद जुबैर उनके जीवन पर आए खतरे के लिए जिम्मेदार है।

नूपुर शर्मा, टी राजा सिंह, सुरेश चव्हाणके समेत 4 की गर्दन काट दो: मौलवी अबू बकर को मिला पाकिस्तान-नेपाल से हुक्म, पैगंबर के अपमान की पिलाई घुट्टी; 'सर तन से जुदा' गैंग के विरुद्ध तैयार हो रही हिन्दू-मुस्लिम महिला फ़ौज

           हिन्दूवादी नेताओं की हत्या की साजिश रचता हमास समर्थक मौलवी अबू बकर (दाएँ) गुजरात में गिरफ्तार
गुजरात पुलिस ने शनिवार (4 मई 2024) को सूरत से एक मौलवी को गिरफ्तार किया है। मौलवी का नाम सोहेल अबू बकर तिमोल है। 27 वर्षीय मौलवी पर भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा, हैदराबाद के गोशमहल से भाजपा विधायक टी राजा सिंह, सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान सम्पादक सुरेश चव्हाणके और सोशल मीडिया पर सक्रिय उपदेश राणा की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। मौलवी इन सभी को ‘गुस्ताख़’ मानता था। इन साजिशों को अंजाम देने के लिए सोहेल नेपाल और पाकिस्तान में बैठे आकाओं के सम्पर्क में था। सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए वह विदेशी सिम भी प्रयोग कर रहा था। फिलहाल उससे पूछताछ में और खुलासे होने की उम्मीद है।
दंगाग्रस्त क्षेत्रों में पुलिस को ढोल पीटने के लिए डंडे लेकर नहीं भेजे, बल्कि blind firing order देकर भेजे। जिन घरों, मस्जिदों पर पत्थरों का जमावड़ा मिले, उन्हें कम से कम 3 सालों के लिए सील कर दिया जाए। जब तक इन लोगों को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा बंद नहीं करेगी, ये कुकुरमुत्ते की तरह निकलते ही जाएंगे। बच्चे से लेकर वृद्ध तक जो पत्थरबाज़ी करते पकड़ा जाए, उन्हें हमेशा के लिए ब्लैकलिस्टेड किया जाये।  

 

मुस्लिम कट्टरपंथी चाहे भारत में हो या भारत से बाहर किसी भी देश में, अगर 'सर तन से जुदा' कर डर बैठाने की जो कोशिश हो रही है, भूल रहे हैं कि सनातन धर्म 4+अरबों साल पुराना धर्म है, जिस दिन इसकी ज्वालामुखी फट गयी, दुनियां की कोई ताकत इन शैतानों को बचा नहीं पाएगी। संयम की भी एक सीमा होती है। विदेशी भीख पर पलने वाले इन भिखारियों को सबक सीखने हिन्दू और मुस्लिम महिलाएं कमर कस रही है। याद रखो जब नारी शक्ति जाग्रत होती है, ब्रह्माण्ड हिल जाता है। सनातन धर्म साक्षी है, कोई इंकार नहीं कर सकता। नवरात्रे इस कारण पूजनीय हैं। महिलाओं में क्रांति की ज्वाला भड़कने लगी है। देखिए वीडियो: 


 

गुजरात पुलिस के मुताबिक लोकसभा चुनाव 2024 के तहत पुलिस टीमें पूरी तरह से सतर्क थीं। इसी बीच सूरत की क्राइम ब्रांच ने एक मौलवी की संदिग्ध हरकतों पर नजर गड़ाई। मौलवी का नाम मोहम्मद सोहेल है, जिसे कुछ लोग अबू बकर तीमोल भी कहते हैं। वह मूल रूप से महाराष्ट्र के नंदुरबार का रहने वाला है। फिलहाल वह सूरत के एक मदरसे में हाफ़िज़ है और करजा-अम्बोली गाँव में मुस्लिम छात्रों को ट्यूशन के माध्यम से मज़हबी तालीम देता है। इन सभी के अलावा अबू बकर सूरत के डायमंड नगर की एक धागा फैक्ट्री में मैनेजर के तौर पर भी ड्यूटी करता है।

पुलिस ने मौलवी की जाँच की तो पाया कि वह पिछले डेढ़ साल से पाकिस्तान और नेपाल के हैंडलरों के सम्पर्क में था। नेपाल के हैंडलर का नाम शहजाद बताया जा रहा है। इन सभी से बात करने के लिए मौलवी अबू बकर लाओस देश के एक नंबर का इस्तेमाल करता था। बातचीत के लिए वह व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया हैंडलों का प्रयोग करता था।

आरोप है कि दोनों विदेशी आकाओं ने मौलवी को भारत में हिन्दू संगठनों द्वारा इस्लाम के पैगंबर के अपमान की पट्टी पढ़ाई। मौलवी को उसके आकाओं ने फरमान सुनाया कि वह नबी की शान में गुस्ताखी कर रहे लोगों को ‘सीधा करे’। यहाँ सीधा करने के कोड का अर्थ ‘हत्या करना’ माना जा रहा है।

व्हाट्सएप ग्रुप में इंडोनेशिया से कजाकिस्तान के मेंबर

टारगेट के तौर पर विदेशी आकाओं ने मौलवी अबू बकर को सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान सम्पादक सुरेश चव्हाणके, भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा, सनातन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपदेश राणा और हैदराबाद के गोशमहल से भाजपा विधायक टी राजा सिंह के नाम गिनाए। इन लोगों की हत्या कमलेश तिवारी की तरह गर्दन काट कर करने को कहा गया था। इन हत्याओं की एवज में मौलवी को 1 करोड़ रुपए देने का वादा भी किया गया था। बताया यह भी जा रहा है कि विदेशी आकाओं के कहने पर मौलवी ने अपना एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और उसमें अपनी सोच के लोगों को एड किया।
इस ग्रुप में मौलवी ने हिन्दू धर्म के खिलाफ अभद्र बातें लिखीं और उपदेश राणा की फोटो शेयर करके उनका काम तमाम करने की अपील की। अबू बकर पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज के चित्रों से छेड़छाड़ करने का भी आरोप है। वह 6 दिसंबर को काला दिवस कहता था। अपने ग्रुप में वह हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें को आपत्तिजनक तरीके से एडिट करके शेयर कर रहा था। माना यह भी जा रहा है कि उसका सम्पर्क पाकिस्तान और नेपाल के अलावा वियतनाम, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान आदि के नंबरों से भी सामने आया है।
मौलवी अबू बकर विदेशी हैंडलरों के माध्यम से हथियार मँगवाने की भी फिराक में था। हालाँकि आरोपित अपनी साजिश को अंजाम दे पाता, उससे पहले वह सूरत क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया। अबू बकर के खिलाफ सूरत के डी.सी.बी. पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 153(ए), 467, 468, 471, 120(बी) के साथ आईटी एक्ट की धारा धारा 66(डी), 67, 67(ए) के तहत कार्रवाई की गई है। सूरत क्राइम ब्राँच मामले की जाँच कर रही है। माना जा रहा है कि आगे की पूछताछ में अबू बकर कुछ और खुलासे कर सकता है।

ओवैसी का फॉलोवर, सलमान का फैन और हमास का प्रेमी

ऑपइंडिया ने मौलवी अबू बकर और उसके हैंडलरों की पड़ताल की। गिरफ्तार मौलवी ने अपने व्हाट्सएप पर हमास के आतंकियों की प्रोफ़ाइल फोटो लगा रखी है। इन तस्वीरों में कई नकाबपोश आतंकी घातक हथियारों के आगे खड़े होकर सजदा कर रहे हैं। टूटी-फूटी अंग्रेजी में मौलवी अबू बकर ने अपने ट्रू कॉलर पर परिचय के तौर पर ओवैसी का फॉलोवर लिख रखा है।
                                    मौलवी की ट्रू कॉलर और व्हाट्सएप प्रोफ़ाइल फोटो
वहीं नेपाल में बैठा मौलवी का हैंडलर शहजाद बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान का फैन है। उसने अपने व्हाट्सएप DP पर सलमान खान और ऐश्वर्या राय की प्रोफ़ाइल लगा रखी है।
                                          मौलवी के नेपाली आका के व्हाट्सएप का प्रोफ़ाइल फोटो

साजिश रचने में ऐप का इस्तेमाल

मौलवी द्वारा अपडेट किए जा रहे व्हाट्सएप ग्रुप की पड़ताल में भी पुलिस जुटी है। सूरत के पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने बताया कि 27 वर्षीय मौलवी को सूरत के चौक बाजार इलाके से पकड़ा गया है। उन्होंने बताया कि मौलवी का मोबाइल चेक करके प्रथम दृष्टया ही पता चल गया था कि वह चरमपंथी विचारधारा से प्रेरित है।
सूरत में ही रहने वाले उपदेश राणा को पिछले महीने मिली जान से मारने की धमकी में भी मौलवी अबू बकर का ही हाथ बताया जा रहा है। आरोपित कुछ ऐसे ऐप भी प्रयोग कर रहे थे, जिनको आसानी से ट्रेस नहीं किया जा सकता है। ये सभी अपने टारगेट की तस्वीरें और वीडियो अपने ग्रुप में डालते थे और उसकी हत्या की सामूहिक साजिश रचने में जुट जाते थे।

मुस्लिम कट्टरपंथियों का दोगलापन ! जिस बात पर नुपूर शर्मा को मिली ‘सर तन से जुदा’ की धमकी, उसी बात पर मुस्लिम महिला पत्रकार को कट्टरपंथी दे रहे ताली

                                                           नुपूर शर्मा और इरेना अकबर
इंडियन एक्सप्रेस की पूर्व पत्रकार इरेना अकबर ने 1 दिसंबर 2023 को पैगंबर मोहम्मद से जुड़े कुछ पोस्ट किए। एक ट्वीट में उसने एक मीम के जरिए ये दिखाने की कोशिश की कि एक तिलक लगाया साँवला शख्स पैगंबर मोहम्मद के निकाह पर सवाल उठाता है जिसका जवाब ‘गोरा’ मुस्लिम शांति से देता है और कहता है-

“हाँ, पैगंबर मोहम्मद ने निकाह किया था, लेकिन इससे न तो आयशा के अब्बा को दिक्कत थी, न आयशा के परिवार को, न उनके समुदाय को… यहाँ तक जो लोग हमेशा पैगंबर मोहम्मद पर हमले की फिराक में रहते थे, उन्हें भी इससे कोई दिक्कत नहीं थी।” इसके बाद तिलक लगाया शख्स और दो और लोग रोते हुए कहते दिखाए जाते हैं- “हमें परेशानी है।”

इस मीम को शेयर करते हुए इरेना ने लिखा- हाँ! अलहमदुलिल्लाह।

इरेना के पैगंबर मोहम्मद और आयशा के निकाह पर किए गए पोस्ट

इरेना अकबर को ट्विटर पर कुछ मुस्लिम लोगों को भी गलत ठहराते देखा गया जो दावा कर रहे थे कि निकाह के वक्त आयशा की उम्र 18 की थी। इरेना के अर्काइव ट्वीट में देख सकते हैं कि वो जोर देकर कहती हैं,
“नहीं, सीराह के प्रामाणिक स्रोतों के अनुसार, जब निकाह हुआ तब वह (आयशा) 9 वर्ष की थीं। कुछ ‘विद्वानों’ ने इस्लाम को त्रुटिपूर्ण पश्चिमी-उदारवादी-धर्मनिरपेक्ष-नारीवादी ढाँचे में ‘फिट’ करने के लिए उनकी उम्र को 18 वर्ष तक बढ़ाने का प्रयास किया। हमें इस्लाम से घृणा करने वालों को खुश करने के लिए तथ्यों को नहीं बदलना चाहिए। आयशा और उनके परिवार को निकाह से कोई समस्या नहीं थी। पैगंबर मोहम्मद के दुश्मन भी इस निकाह का इस्तेमाल करके उन्हें आसानी से निशाना बना सकते थे लेकिन उन लोगों ने भी ऐसा नहीं किया। यह केवल आजकल के इस्लाम से घृणा करने वाले वो लोग हैं जो इस बारे में बकवास करते रहते हैं। हमें इन सबपर शर्मिंदा होना बंद करना पड़ेगा।”

आगे इरेना ने अर्काइव ट्वीट में ‘द सील्ड नेक्टर’ जैसे सीराह स्रोतों का जिक्र किया। इसके बाद अपील की कि इस संबंध में मदीना की इस्लामिक यूनिवर्सिटी के स्कॉलरों की बातें सुनीं और पढ़ी जानी चाहिए।

इसके अलावा इरेना अकबर ने आयशा (आरए) की जीवनी संबंधी स्रोत भी पढ़ने को कहा और बताया कि उन्हें कैसे कम उम्र में बुद्धिमत्ता का तोहफा मिला था और वह बहुत प्रतिभाशाली थीं। इरेना ने मुस्लिम यूजर (जिसने उम्र 18 बताई थी) को जवाब देते हुए ये भी कहा, “हो सकता है कि आप किसी को खुश करने के लिए ऐसा नहीं कर रहे हो, लेकिन पूरे अदब के साथ बता रही हूँ आपका थ्रेड शादी को लेकर पश्चिमी-आधुनिक विचारों से उपजा है।”

नुपूर शर्मा के बात रखने पर हुआ था बवाल

इरेना अकबर ने आज जिस मुद्दे पर बात की है, उसी मुद्दे को कभी नुपूर शर्मा ने ऑन टीवी अपनी बात रखी थी, लेकिन ऑल्ट न्यूज वाले मोहम्मद जुबैर ने उनकी आधी वीडियो को शेयर किया और इस्लामी कट्टरपंथी इसे पैगंबर मोहम्मद का अपमान बताकर नुपूर शर्मा की जान लेने पर तुल गए।
उन्हें देश के कट्टरपंथियों से ही नहीं बल्कि दूसरे इस्लामी देशों तक से धमकियाँ आईं। विवाद इतना बढ़ा कि जिन लोगों ने नुपूर शर्मा का समर्थन किया उन्हें भी धमकियाँ दी गईं और कन्हैया लाल जैसों को तो मौत के घाट उतार दिया गया।

उस समय यही इरेना अकबर ने इस मुद्दे की आग को भड़काया था। उन लोगों के बारे में कट्टरपंथियों को बताया था जो इस मुद्दे पर बोल रहे थे। आज इरेना ने भी इसी मुद्दे पर अपनी बात रखी। लेकिन इस बार इस्लामी कट्टरपंथियों ने न कोई धमकी दी और न दी ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए।
अवलोकन करें:-

कट्टरपंथियों ने की इरेना की वाहवाही

उलटा इरेना के पोस्ट को समर्थन देते हुए कहा गया – हाँ बिलकुल सही बात हैं। ये सब पैगंबर मोहम्मद की इच्छा से थोड़ी था, वो तो वही कर रहे थे जो अल्लाह उनसे करवाना चाहता था।
एक यूजर ने कहा, “तुम्हें सलाम। ये एक महिला से सुनना वाकई काबिल-ए-तारीफ है। लिबरलिज्म और फेमिनिज्म वाली दुनिया में जब मुस्लिम पुरूष और महिलाओं को भटकाया जा रहा है तब आप इस बात को बिन शर्मिंदगीं के कह रहीं हैं।

नीदरलैंड : नुपूर शर्मा के ‘हमदर्द’ गीर्ट वाइल्डर्स के प्रधानमंत्री बनने की प्रबल संभावनाएं

नुपुर शर्मा का समर्थन कर चुके गीर्ट वाइल्डर्स के नीदरलैंड के पीएम बनने के आसार (फोटो साभार: Britannica/ABP)
यूरोपीय देश नीदरलैंड के चुनाव नतीजों ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा (Nupur Sharma) को चर्चा में ला दिया है। वजह हैं गीर्ट वाइल्डर्स (Geert Wilders)। वाइल्डर्स की पहचान एक ऐसे नेता के तौर पर है जो इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ मुखर हैं।

बीते साल जब ‘ऑल्ट न्यूज’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने नूपुर शर्मा को टारगेट किया था, तब वाइल्डर्स ने बीजेपी की इस पूर्व नेता का समर्थन किया था। जुबैर के उकसावे के बाद से नुपुर शर्मा को जिहादी हत्या की धमकी दे रहे हैं। वे सार्वजनिक जीवन से दूर रहने को मजबूर हैं।

हालिया चुनावों के बाद गीर्ट वाइल्डर्स के नीदरलैंड के प्रधानमंत्री बनने के आसार हैं। दक्षिणपंथी वाइल्डर्स की पार्टी को एग्जिट पोल में सर्वाधिक सीट मिलती दिख रही है। 22 नवम्बर 2023 को नीदरलैंड के आम चुनावों के लिए सामने आए एग्जिट पोल में यह स्पष्ट हो गया है कि वाइल्डर्स की कंजर्वेटिव पार्टी फॉर फ्रीडम (PVV) सर्वाधिक 35 सीटें जीतने की ओर है। उनकी पार्टी नीदरलैंड में इस्लाम के प्रसार के विरुद्ध रही है। ऐसे में इन नतीजों का पूरे यूरोप पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।

PVV नीदरलैंड में मस्जिदों, कुरान और हिजाब पर प्रतिबंध लगाने की माँग करती रही है। अब 150 सीटों वाली नीदरलैंड की संसद में यह सबसे अधिक सीटों वाला दल बनने की और अग्रसर है। उनकी पार्टी को यूरोप के अन्य दक्षिणपंथी नेताओं और पार्टियों की तरफ से बधाई मिल रही है।

PVV सरकार बनाने में सबसे आगे होगी। सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। उसे 35 सीटें मिल सकती हैं। यह 2021 के मुकाबले दोगुनी है। हालाँकि, स्पष्ट बहुमत ना होने के कारण उसे अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन करना होगा। लेकिन इस बात की पूरी संभावना है कि गठबंधन का नेतृत्व करते हुए गीर्ट वाइल्डर्स प्रधानमंत्री बनेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में अभी 8-10 महीने का समय लगने की संभावना है।

कौन हैं गीर्ट वाइल्डर्स?

गीर्ट वाइल्डर्स एक दक्षिणपंथी डच नेता हैं। वह अपने इस्लाम विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं। वह वर्ष 2004 के बाद से लगातार पुलिस सुरक्षा में रहते हैं। उनके एक बार मोरक्को के लोगों को कूड़ा बोलने पर काफी विवाद हुआ था।
वाइल्डर्स पिछले ढाई दशकों से नीदरलैंड की राजनीति में सक्रिय हैं, वह 1998 के बाद से डच संसद में हैं। उनका ताल्लुक एक सामान्य माध्यम वर्गीय परिवार से है। वह 1981 से 1983 के बीच इजरायल में भी रहे हैं। इस दौरान उन्होंने मध्य एशियाई देशों की यात्रा की, जिस दौरान उनके इस्लाम विरोधी विचार बने।
वाइल्डर्स को अवैध प्रवासियों के प्रति उनके कठोर रवैए और डच हितों को सबसे आगे रखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने जुलाई 2022 में भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा और बांग्लादेशियों का मुद्दा भी डच संसद में उठाया था। उन्होंने अक्टूबर 2022 में भी नुपुर शर्मा के समर्थन में ट्वीट किया था।
गीर्ट वाइल्डर्स ने हिन्दुओं से सहिष्णुता छोड़ने का अपील भी की थी।
डच सांसद ने भारत में हिंदुओं पर हमले की घटनाओं का भी जिक्र किया था। उन्होंने नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा एक हिंदू दर्जी (कन्हैया लाल) का सिर कलम करने की घटना पर भी प्रकाश डाला था।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर भी वे सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय से बांग्लादेश में हिंदू घरों, पूजा स्थलों और दुकानों में आग लगानी वाली घटना पर विचार करने को कहा था। मालूम हो कि 15 जुलाई 2022 को बांग्लादेश में लोहागारा के सहपारा इलाके में कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हिन्दुओं के एक मंदिर, किराने की दुकान और कई घरों को तोड़ दिया था।

नूपुर शर्मा के बाद अब अमृतांशु गुप्ता! मोहम्मद ज़ुबैर ने एक और निर्दोष को इस्लामी कट्टरपंथियों के सामने झोंका; मीडिया खामोश क्यों?

फेक न्यूज की फैक्ट्री चलाने वाले मोहम्मद जुबैर और इसका समर्थन कर देश में उपद्रव मचाने वालों पर केंद्रीय गृह मंत्री कब लगाएंगे? आखिर ये उपद्रवी कितनी नूपुर शर्मा की जान के लिए खतरे बनाता रहेगा? इस गंभीर मुद्दे पर मीडिया भी खामोश है, क्यों? अब इस ज़ुबैर ने पीआर मैनेजर अमृतांशु गुप्ता को निशाना बनाने की ठानी है। जुबैर ने अमृतांशु की डिटेल्स सोशल मीडिया पर शेयर कर दी, ताकि उसकी ट्रोल आर्मी अमृतांशु को अपना शिकार बना सके। ये ठीक उसी तरह का पैटर्न है, जिसकी शिकार बीजेपी नेता नुपूर शर्मा बनी थी। इसके लिए मोहम्मद जुबैर ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद के ट्विटर हैंडल को मैनेज करने वाले डिजिटल स्ट्रेटजिस्ट और सलाहकार अमृतांशु गुप्ता पर अपनी ट्रोल सेना उतार दी।

मोहम्मद जुबैर ने अपने ट्वीट में कहा कि वेंकटेश प्रसाद के हैंडल से जो ट्वीट उसे एक्सपोज करने के लिए किए गए थे, वो अमृतांशु ने किए थे, क्योंकि वही वेंकटेश प्रसाद का सोशल मीडिया मैनेज करते हैं। चूँकि वेंकटेश प्रसाद के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में ट्वीट किए गए थे, जो जुबैर को नागवार गुजरे थे। जुबैर ने अमृतांशु की डिटेल्स शेयर करते हुए लिखा, “यही व्यक्ति वेंकटेश प्रसाद से लेकर वीरेंद्र सहवाग के ट्विटर/इंस्टा हैंडल मैनेज करता है। स्मृति ईरानी का ऑपइंडिया वेबसाइट के लिए इंटरव्यू करता है।”

जुबैर ने आशीष नेहरा के साथ गौरव कपूर के 2017 के साक्षात्कार का एक वीडियो भी साझा करते हुए लिखा कि अमृतांशु गुप्ता ने भुगतान किए गए ट्वीट के लिए पूर्व क्रिकेटर से संपर्क किया होगा। हालाँकि, वीडियो में आशीष नेहरा ने कहीं भी अमृतांशु का नाम नहीं लिया है।

जुबैर ने ‘आउटलुक’ मैगजीन का एक आर्टिकल भी शेयर किया और कहा, “सेलेब्स अपने सोशल मीडिया अकाउंट को मैनेज करने के लिए ‘प्रोफेशनल्स’ को हायर करते हैं जो उनके नाम से लिखते हैं।”

नुपूर शर्मा जैसा कांड दोहराने की कोशिश!

भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा तब इस्लामी कट्टरपंथियों का निशाना बनी थीं, जब मोहम्मद जुबैर जैसे इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पैगंबर मुहम्मद और इस्लाम पर अपने विचार रखने के लिए उन्हें धमकियाँ दिलवाई थी। इस मामले में काफी विवाद हुआ था। दरअसल, शर्मा ‘टाइम्स नाउ’ पर एक बहस पैनल का हिस्सा थी, जिसमें ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने और इस खोज के बाद हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने पर चर्चा हो रही थी।
इस कार्यक्रम के दौरान इस्लामवादियों ने दावा किया था कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के वुज़ुखाने के अंदर जो शिवलिंग मिला है, वह कोई शिवलिंग नहीं बल्कि एक फव्वारा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आलोचकों ने बार-बार कहा था कि ज्ञानवापी परिसर के अंदर पाया गया शिवलिंग एक फव्वारा था, न कि हिंदू भगवान की मूर्ति
हिंदू देवी-देवताओं पर की गई अवमानना ​​और तिरस्कार के जवाब में, भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने उनसे हिंदू देवताओं का अपमान बंद करने को कहा और पैगंबर मुहम्मद और इस्लाम पर अपनी टिप्पणियों की पुष्टि के लिए इस्लामी धर्मग्रंथों और पवित्र कुरान का हवाला दिया। लेकिन, इसके बाद उनके वीडियो का एडिटेड हिस्सा जुबैर एंड कंपनी की तरफ से वायरल कर दिया गया था। उसी डिबेट में तस्लीम रहमानी ने क्या कहा, इसे छिपा लिया गया। इसके बाद कन्हैया लाल और उमेश कोल्हे हत्याकांड सामने आया था। नूपुर शर्मा के समर्थन के कारण दोनों को मार डाला गया था।

वेंकटेश प्रसाद ने लगाई थी जमकर लताड़

हाल ही में वेंकटेश प्रसाद को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कॉन्ग्रेस नेताओं, वामपंथियों और इस्लामवादियों के घनिष्ठ और शातिर लेफ्ट लॉबी ने निशाना बनाया था। लेकिन, जब जुबैर ने वेंकटेश प्रसाद को घेरने की कोशिश की, तो उन्होंने जुबैर को एक्सपोज कर दिया था।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने के लिए मोहम्मद जुबैर को जमकर लताड़ लगाई थी। इसके बस कॉन्ग्रेसी, वामपंथी और इस्लामवादी एकजुट होकर फर्जी फैक्ट-चेकर जुबैर के बचाव में उतर आए। दरअसल, वेंकटेश प्रसाद ने ‘भ्रष्ट और अहंकारी व्यक्ति द्वारा पूरे संस्थान को खराब करने’ को लेकर एक पोस्ट किया था। बाद में उन्होंने यह पोस्ट डिलीट कर दिया था। इसको लेकर फेक खबर फैलाने के लिए कुख्यात ऑल्टन्यूज के सह-संस्थापक जुबैर ने उन पर निशाना साधा था।
हालाँकि, जब वेंकटेश प्रसाद ने हटाए गए ट्वीट को दोबारा पोस्ट किया, तो संदिग्ध ‘फैक्ट चेकर’ को भी शर्मिंदा होना पड़ा, जिसका इस्तेमाल उन्होंने भारतीय क्रिकेटर को निशाना बनाने के लिए किया था। वेंकटेश प्रसाद के ट्वीट को गलत अर्थ में पेश करने में मोहम्मद ज़ुबैर सबसे आगे था, इसीलिए वेंटकेश प्रसाद ने उसे लताड़ लगाई थी।
अवलोकन करें:-
जब वापसी का कोई रास्ता नहीं बचा तो जुबैर ने वेंकटेश प्रसाद के मीडिया मैनेजर अमृतांशु गुप्ता को ढूँढ लिया और अमृतांशु गुप्ता पर अपनी ट्रोल आर्मी उतार दी। यह उसकी पिछली हरकतों की तरह ही है, जिसमें वो ऑनलाइन लिंचिंग करता है।

भारत विरोधी और मोदी विरोधी NYT का प्रोपेगेंडा, अमेरिका और चीन को रास नहीं आ रहा मजबूत भारत

भारत में जितने भी मोदी और योगी विरोधी है, बात संविधान, धर्म-निरपेक्षता और गंगा-जमुनी तहजीब करके किस तरह जनता को गुमराह कर भारत विरोधियों के दानों पर पल रहे हैं, और जनता इन्हें अपना हितैषी समझने की भूल कर रही है। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर शोर मचाते हैं, लेकिन दंगों में पेट्रोल बम बनाने में वही पेट्रोल सस्ता हो जाता है। यह तो केवल उदाहरण है। 
पश्चिमी मीडिया भारत की छवि खराब करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ता है, फिर चाहे वह कोविड काल हो, किसान आंदोलन हो, चीन के साथ सीमा विवाद हो या फिर भारत में होने वाले कोई दंगे हों। अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स (NYT) भारत की छवि करने वाले मीडिया संगठनों में सबसे आगे है। इसका सबसे बड़ा सबूत 1 जुलाई 2021 को तब देखने को मिला जब NYT ने जॉब रिक्रूटमेंट पोस्ट निकाली। दिल्ली में साउथ एशिया बिजनेस संवाददाता के लिए नौकरी निकाली गई थी। इसमें नौकरी के लिए शर्तें बेहद आपत्तिजनक थी। पत्रकारों के लिए आवेदन में ‘एंटी इंडिया’ सोच होना, ‘हिंदू विरोधी’ सोच होना और ‘एंटी मोदी’ होना भी जरूरी था।

अब इससे साफ हो जाता है कि NYT का भारत के प्रति नजरिया क्या है और किस एजेंडे को वह आगे बढ़ा रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स का भारत विरोध कोई नई बात नहीं है। वह पहले भी अपने लेख में कह चुका है कि पीएम नरेंद्र मोदी से भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को खतरा है। न्यूयॉर्क टाइम्स NRC के विरोध में रिपोर्ट छापता है, न्यूयॉर्क टाइम्स लेख लिखकर कहता है कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने के करीब पहुंच रहा है? अनुच्छेद 370 की समाप्ति को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स में रिपोर्ट छपती है कि कश्मीर में हजारों मुस्लिम हिरासत में हैं। ये वही न्यूयॉर्क टाइम्स है, जो भारत के मिशन मंगलयान का पहले मजाक उड़ाता है और फिर मिशन सफल होने पर माफी मांग चुका है। सोचिए ऐसा क्यों था कि 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले को न्यूयॉर्क टाइम्स ने आतंकवादी हमले की बजाए सिर्फ विस्फोट बताया था? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि पुलवामा में आतंकवादी हमला नहीं, ब्लास्ट हुआ। न्यूयार्क टाइम्स के इस प्रोपेगेंडा के पीछे जहां एक अमेरिका के हित हैं वहीं दूसरी तरफ चीन के भी हित हैं। पिछले 4 सालों में न्यूयॉर्क टाइम्स को चीन की ओर से 50 हजार डॉलर से ज्यादा के विज्ञापन मिले हैं।

इसी कड़ी में टि्वटर यूजर Smita Barooah ने कहा है कि कुछ समय से NYT की भारत को लेकर की जा रही रिपोर्टिंग पर नजर रख रही हूं। इसे देखकर लगता है कि उनकी रिपोर्टिंग किसी एक पक्ष की ओर झुकी हुई है। वे जो कर रहे हैं वह पत्रकारिता नहीं, प्रोपेगेंडा है। उन्होंने NYT की कुछ रिपोर्टों को लेकर ट्वीट की श्रृंखला पोस्ट की है। यहां पेश है उनके ट्वीट्स पर आधारित उनका विश्लेषण-

आइए रूस-यूक्रेन युद्ध पर NYT रिपोर्टिंग के साथ शुरुआत करें। वे कुछ चुने हुए डेटा, जो उनके हित साधते हैं, उसका उपयोग कर यह दावा करते है कि भारत संघर्ष का वित्तपोषण कर रहा है, जबकि वास्तव में यूरोप रूस से ऊर्जा का प्रमुख खरीदार है। भारत के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित यह तर्क क्यों? यह NYT की खबर नहीं, एक प्रचार है।

पश्चिम प्रतिबंधों के माध्यम से रूस को नियंत्रित करने में विफल रहा है और अब ऊर्जा की उच्च कीमतों के कारण आहत हो रहा है। यह लेख भारत को एक ‘भाग्यशाली’ लाभार्थी के साथ ही सह-साजिशकर्ता के रूप में चित्रित करने का प्रयास करता है। बिना किसी कारण के दोष मढ़ने का क्या कारण? जबकि दोष तो पश्चिम का है।

कोविड रिपोर्टिंग को याद कीजिए? “यह एक तबाही है” इस तरह का शीर्षक दिया गया था। इस असंवेदनशील लेख ने भारत में मौतों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया और अवैज्ञानिक विवरण दिया। जबकि कई पश्चिमी देशों में भारत से अधिक लोगों की मौत हुई जिसकी अनदेखी की गई। यह असंतुलन क्यों?

अब “विदेशों में प्रभाव का विस्तार, घर पर लोकतंत्र का तनाव” लेख को पढ़ें। यह रिपोर्टर द्वारा इधर-उधर से जुटाए गए तथा बिना तथ्य के दावों का एक संग्रह है। इसमें किसी भी व्यक्ति से बात नहीं की गई है, केवल ‘विशेषज्ञों का कहना है’ वाक्यांश का अवसरवादी उपयोग किया गया है। इस तरह की कहानी क्यों बनाते हैं?

यह खबर भारत में एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बारे में है। हड़ताल एक बकवास थी! कुछ कम ज्ञात संगठनों ने हंगामा मचाने की कोशिश की। लेकिन भारत के सभी हिस्सों में जीवन सामान्य रूप से चलता रहा। जबकि NYT के पाठकों को यह विश्वास दिलाया गया कि भारत में ठहराव आ गया है। इस तरह का झूठ क्यों फैलाना है?

यहां NYT तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी के खिलाफ है। रिपोर्ट में उसे पीड़ितों का मसीहा के रूप में चित्रित किया जाता है, उसके संस्था विरोधी स्टैंड को सही ठहराया जाता है और उसके खिलाफ आरोपों का उल्लेख किया जाता है और सबूतों झूठा होने की बात कही जाती है। एक आरोपी के लिए शर्मिंदगी क्यों?

“ईशनिंदा” विरोध पर यह लेख इस तथ्य पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है कि नूपुर शर्मा भाजपा की प्रवक्ता थीं। इसके साथ ही यह बताया जाता है कि उन्होंने क्या कहा। लेकिन उन्होंने यह क्यों कहा इसका संदर्भ नहीं दिया जाता। घटनाओं के संदर्भ और क्रम को छिपा दिया गया और केवल एकतरफा, संदिग्ध कथा प्रस्तुत किया गया। क्यों?

भारत में हेट स्पीच NYT को बहुत रुचिकर खबर लगती है लेकिन उनकी रिपोर्ट में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए लागू न्यायिक प्रक्रियाओं को छोड़ देती है। निष्पक्षता का इतना अभाव क्यों?

ये कुछ उदाहरण हैं कि कैसे NYT भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाता है। घरेलू मुद्दों या भू-राजनीति का कवरेज हो, इसमें अस्पष्टता, चूक और गलत रिपोर्टिंग का एक पैटर्न है। NYT में भारत से समाचार हमेशा नकारात्मक होते हैं और उसकी विकास कहानी अगर, मगर और किंतु-परंतु के साथ होती है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के भारत विरोधी एजेंडे में अमेरिका और चीन का हित

न्यूयॉर्क टाइम्स अमेरिका का अखबार है तो उसमें अमेरिका का हित तो निहित ही है। अमेरिका की हाथियार बनाने की कंपनियों की बिक्री हाल-फिलहाल में काफी गिर गई है, इसीलिए अमेरिका कई देशों को युद्ध की आग में झोंकना चाहता है जिससे उसके हथियार बिक सके। जब अमेरिकी कंपनियां लाभ में होंगी तभी न्यूयार्क टाइम्स को भी विज्ञापन मिलेगा। यानी न्यूयॉर्क टाइम्स के भारत विरोधी एजेंडे में अमेरिका का हित सबसे पहले है। वहीं इसमें चीन का हित भी जुड़ा हुआ है। इसके लिए हमें भारत से चीन के तनावपूर्ण रिश्ते और चीन से न्यूयॉर्क टाइम्स के मधुर रिश्तों की तह में जाना होगा। दरअसल, गलवान विवाद के बाद भारत चीन के व्यापार में कमी आई है। भारत ने चीन के कई Apps पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे उन Apps कंपनियों को अरबों का नुकसान हुआ। 2020 में भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार में 5.64% की कमी आई। चीन की कई कंपनियों को भारत में टेंडर छिन गया। गलवान विवाद के बाद नुकसान चीन का हुआ, और दर्द शायद न्यूयॉर्क टाइम्स को हुआ। इस दर्द की पीछे की कहानी यह है कि पिछले 4 सालों में न्यूयॉर्क टाइम्स को चीन की ओर से 50 हजार डॉलर से ज्यादा के विज्ञापन मिले हैं।

एजेंडाधारी पत्रकारों को भारत विरोध का मौका चाहिए

कोरोना की दूसरी लहर का संकट देश के एजेंडा पत्रकारों और भारत विरोधी विदेशी मीडिया के लिए अवसर लेकर आया था। एजेंडा पत्रकारों का उद्देश है कि चाहे देश की दुनियाभर में बदनामी हो, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नीचा दिखाने का यह अवसर हाथ से नहीं निकलना चाहिए। इसके लिए श्मशानों से लाइव रिपोर्टिंग के साथ जलती चिताओं की तस्वीरें छापकर यह बताने की कोशिश की गई कि हालात काफी खराब है और सरकार इसको नियंत्रित करने में नाकाम रही है। उधर देश के बाहर भी मोदी और भारत विरोधी काफी सक्रिय हैं। अमेरिकी मीडिया में भारत के श्मशान घाटों की फोटो पहले पन्ने पर छपी। हालात को ऐसे पेश किया गया मानो कोरोना से संक्रमित होने वाला हर मरीज मर रहा है। जबकि कोरोना से ठीक होकर घर जाने वालों के आंकड़े और सरकार के प्रयास को किसी ने कवर नहीं किया।