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बेल्जियम में NATO के मिलिट्री हेडक्वार्टर से चीनी मूल की कनाडाई नागरिक महिला इंटर्न जासूसी के आरोप में गिरफ्तार: रिपोर्ट


बेल्जियम में नाटो (NATO) के सैन्य मुख्यालय में काम कर रही एक कनाडाई महिला को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह महिला वहाँ इंटर्न के तौर पर काम कर रही थी और उस पर किसी ‘तीसरे देश’ के लिए जासूसी करने और एक आपराधिक संगठन का सदस्य होने का शक है।

बेल्जियम के संघीय अभियोजक कार्यालय ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को जारी अपने बयान में बताया कि आरोपित महिला चीनी मूल की कनाडाई नागरिक है। हालाँकि अभियोजकों ने न तो उसकी पहचान उजागर की और न ही यह बताया कि वह किस देश या संगठन के लिए जासूसी कर रही थी।

यह महिला नाटो के सुप्रीम हेडक्वार्टर्स अलाइड पावर्स यूरोप (SHAPE) में इंटर्न के रूप में तैनात थी, जो बेल्जियम के मोंस शहर में स्थित है। SHAPE दरअसल नाटो का सबसे बड़ा सैन्य मुख्यालय है और यह एलाइड कमांड ऑपरेशंस का आधार है, जो 32 देशों के इस सैन्य गठबंधन के सभी अभियानों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने का काम देखता है।

जाँच की शुरुआत तब हुई जब SHAPE की सुरक्षा टीम को इस महिला की गतिविधियों पर शक हुआ। सुरक्षा टीम ने अपना शक बेल्जियम की सैन्य खुफिया एजेंसी तक पहुँचाया, जिसके बाद यह मामला संघीय अभियोजक कार्यालय को सौंपा गया और वहाँ जाँच शुरू हुई। गुरुवार को अधिकारियों ने महिला के घर और नाटो मुख्यालय स्थित उसके कार्यस्थल की तलाशी ली। इस तलाशी में कंप्यूटर अपराध से जुड़ी विशेष टीम और फोरेंसिक विशेषज्ञों की भी मदद ली गई। इसके अगले दिन, यानी शुक्रवार(जुलाई 24) को महिला को गिरफ्तार कर लिया गया।

कनाडा सरकार के लोक सुरक्षा विभाग (Public Safety Canada) ने पुष्टि की है कि उसे नाटो में कार्यरत एक कनाडाई नागरिक की गिरफ्तारी की जानकारी है। विभाग ने कहा कि चूंकि मामला अभी जाँच के दायरे में है, इसलिए वह इस पर विस्तार से कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। साथ ही विभाग ने कनाडाई नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सरकार की कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियाँ अपने साझेदार देशों की एजेंसियों के साथ मजबूत संबंध बनाए हुए हैं, जो ऐसे खतरों से निपटने में मदद करती हैं।

न्यूज एजेंसी AP से बात करते हुए SHAPE के एक प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि इस घटना का नाटो या SHAPE के परिचालन कार्यों, कमांड और कंट्रोल व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है और मुख्यालय अपनी सामान्य जिम्मेदारियाँ पहले की तरह निभा रहा है।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिमी देश लगातार चीन और अन्य विदेशी ताकतों की ओर से जासूसी की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंता जता रहे हैं। इससे पहले भी नाटो और उससे जुड़ी एजेंसियों के अधिकारियों पर जासूसी के आरोप लग चुके हैं, जिससे गठबंधन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। फिलहाल जाँच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

बेटा UP पुलिस में SI, बाप लोगों को बनाता है ईसाई: मीडिया रिपोर्ट, शिकायत के बाद प्रेमपाल गिरफ्तार, बरेली SP ने क्या बताया, मजहबी किताबें हुई बरामद

उत्तर प्रदेश के बरेली में ईसाई धर्मांतरण का मामला सामने आया है। पुलिस ने ईसाई मिशनरी के एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 09 जुलाई 2026 को गाँव में एक प्रार्थना सभा के दौरान लोगों को ईसाई बनने के लिए लालच दिया जा रहा था। इसी शिकायत के आधार पर थाना मीरगंज में मुकदमा दर्ज किया गया और अगले ही दिन आरोपित प्रेमपाल को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित प्रेमपाल शीशगढ़ थाना क्षेत्र के भुडासी गाँव का रहने वाला है। उसके पास से बाइबल समेत 6 ईसाइयत की किताबें, एक हाथ से लिखी नोटबुक और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है। यह भी सामने आया कि प्रेमपाल यादव वर्षों पहले खुद धर्मांतरण कर चुका है और अब हिंदुओं को धर्मांतरण करवाने वाले नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।

सैजना गाँव में प्रार्थना सभा से FIR तक, जानिए कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

बरेली के मीरगंज थाना क्षेत्र के सैजना गाँव में धर्मांतरण का मामला 09 जुलाई 2026 को सामने आया। थाना मीरगंज में दर्ज FIR के मुताबिक, गाँव के रहने वाले अंकित पुत्र खूबकरन ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि शीशगढ़ थाना क्षेत्र के भुडासी गाँव निवासी 51 वर्षीय प्रेमपाल ने गाँव में गजेंद्र पुत्र छेदालाल के घर पर एक प्रार्थना सभा आयोजित की थी।

शिकायत में कहा गया कि इस प्रार्थना सभा के दौरान हिंदुओं को ईसाई बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। बताया गया कि वहाँ मौजूद लोगों को ईसाइयत से जुड़ी प्रचार सामग्री दी गई, नौकरी और पैसों का लालच दिया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सभा के दौरान हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ भी की गईं।

इसी शिकायत के आधार पर थाना मीरगंज पुलिस ने प्रेमपाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 62 और 299 के साथ-साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध संपरिवर्तन अधिनियम की धारा 3/5(1) के तहत मुकदमा दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी।

भागने की फिराक में प्रेमपाल को पुलिस ने धरा, ईसाइयत की किताबें बरामद

प्रेमपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद थाना मीरगंज पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की। पुलिस के मुताबिक, 10 जुलाई 2026 को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपित प्रेमपाल इलाके से निकलने की फिराक में है। इसके बाद पुलिस टीम ने नगरिया सादात फाटक के सामने अंडरपास के नीचे घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित की पहचान प्रेमपाल पुत्र पातीराम, निवासी ग्राम भुडासी, थाना शीशगढ़, जनपद बरेली के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उसके पास से एक बाइबल, ‘शास्त्र भजनसंहिता और नीतिवचन’, ‘नया नियम’, ‘मुक्तिदाता कौन’, ‘बेदारी के गीत’ नाम से 6 ईसाइयत की किताबें, एक हस्तलिखित नोटबुक और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। पुलिस ने इन सभी सामानों को कब्जे में लेकर उन्हें जाँच का हिस्सा बनाया है।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तारी की कार्रवाई उपनिरीक्षक नितिन शिरीष, उपनिरीक्षक राजवीर सिंह, हेड कांस्टेबल मोहम्मद उमर और कॉन्स्टेबल अमित कुमार की टीम ने की। पुलिस का कहना है कि आरोपित के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।

पुलिस हिरासत में माफी माँगने लगा आरोपित प्रेमपाल

मामले में पुलिस की ओर से जारी किए गए प्रेस नोट के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित प्रेमपाल ने खुद को ईसाई धर्म का प्रचारक बताया है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि 09 जुलाई 2026 को सैजना गाँव में गजेंद्र पुत्र छेदालाल के घर पर ईसाइयत के प्रचार और धर्म परिवर्तन के संबंध में एक सभा आयोजित की गई थी।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित ने पूछताछ में बताया कि उस सभा में अमित, रोहित, धर्मेंद्र और तीरथराम समेत कई लोग मौजूद थे। उसका यह भी कहना था कि काफी प्रयास करने के बावजूद वहाँ मौजूद ये लोग ईसाई नहीं बने। पुलिस को आरोपित ने यह भी बताया कि उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद वह वहाँ से भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपित ने अपने किए पर पछतावा जताते हुए कहा कि उससे गलती हो गई।

ईसाई धर्मांतरण करवाने वाले प्रेमपाल का बेटा सब-इंस्पेक्टर: रिपोर्ट्स

धर्मांतरण का मामले सामने आने के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में कई दावे भी किए गए हैं, जिनका उल्लेख पुलिस की FIR या आधिकारिक प्रेस नोट में नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार प्रेमपाल वर्षों पहले ईसाई में परिवर्तित हुआ था। रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि उसका बेटा उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात है।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि प्रेमपाल लंबे समय से ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार से जुड़ा हुआ था और गाँवों में प्रार्थना सभाएँ आयोजित करता था। कुछ रिपोर्ट्स में इसे धर्म परिवर्तन के नेटवर्क पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई बताया गया है। हालाँकि, पुलिस ने इसको लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल पुलिस केवल आरोपों और जाँच के आधार पर आगे बढ़ रही है।

पाकिस्तान के दलालों कहां हो? दिल्ली को फिर दहलाने की साजिश को पुलिस ने किया नाकाम, ISI के 4 आतंकी गिरफ्तार: पाकिस्तान भेजे थानों-मंदिरों के Video, भीड़भाड़ वाले इलाके में अंधाधुंध फायरिंग का था प्लान

                          दिल्ली पुलिस ने ISI के चार आतंकी गिरफ्तार किए (फोटो साभार : News18)
एक तरफ भारत में पल रहे पाकिस्तानी दलाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख अपने आका पाकिस्तान से बातचीत और व्यापार शुरू करने की वकालत कर रहे हैं ताकि उनके गुर्गे फिर से भारत में खून-खराबा कर अशांति फ़ैलाने में कामयाब हो सके और पकडे जाने पर victim card खेल आतंकिस्तान यानि पाकिस्तान को बेकसूर बताने की कहानियां गढ़ने लगे। पाकिस्तान के दलालों देखो दिल्ली पुलिस ने तुम्हारे आका के मंसूबों पर पानी फेर दिया। अब मुस्लिम की बजाए हिन्दुओं को फंसा खुनी खेल खेलने की तैयारी चल रही है।    

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े ऑपरेशन में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI समर्थित आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने दिल्ली और पंजाब से चार खतरनाक आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम साजन उर्फ हनी, गगनप्रीत, रिषी, शुभदीप है।

ये चारों आतंकी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर शाहजाद भट्टी के इशारे पर राजधानी को दहलाने की साजिश रह रहे थे। पुलिस ने इनके पास से तुर्की की मशहूर जिगाना पिस्टल समेत विदेशी हथियार और कारतूस बरामद किए हैं।

जाँच में सामने आया है कि पकड़े गए आतंकियों में से गगनप्रीत को बेहद खतरनाक काम सौंपा गया था। वह दिल्ली के पुलिस थानों, चौकियों और प्रमुख धार्मिक स्थलों की रेकी कर रहा था। उसने इन जगहों के Video बनाकर पाकिस्तान भी भेजे थे।

उसे दिल्ली में किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दहशत फैलाने का टास्क मिला था। इस नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने पंजाब के अमृतसर और दिल्ली में ताबड़तोड़ छापेमारी की थी।

अवलोकन करें:-

117 भारतीय और पाकिस्तानी हस्तियों ने मोदी-शहबाज को पत्र लिखने वाले गद्दारों को बीजेपी का जवाब - आत

सबसे पहले शुभदीप सिंह को पकड़ा गया, जो ड्रोन से आने वाले हथियारों की खेप लेता था। उसकी निशानदेही पर गुरजंत सिंह, और गगनप्रीत को दबोचा गया। पुलिस अब इनके बाकी मददगारों की तलाश कर रही है।

जर्मनी में भी UK जैसे ग्रूमिंग गैंग: नाबालिग लड़कियों को ड्रग्स के बहाने फँसाकर किया यौन शोषण, कई सीरियाई-पाकिस्तानी गिरफ्तार

                                            जर्मनी में ग्रूमिंग गैंग एक्टिव (फोटो साभार-alamy)
जर्मनी के नूर्नबर्ग में महिलाओं और लड़कियों का यौन शोषण करने और उन्हें ड्रग्स के धँधे में फँसाने के आरोप में दो पाकिस्तानी नागरिकों को जर्मनी की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मिडिल फ्रैंकोनिया पुलिस मुख्यालय के अनुसार, अब तक कुल छह लोगों को इस मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ की गई फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इनमें दो पाकिस्तानी और 4 सीरियाई शामिल हैं।

ये लोग नूर्नबर्ग रेलवे स्टेशन के आस-पास के इलाकों में लड़कियों और महिलाओं का भरोसा जीतते थे और फिर उन्हें ड्रग्स की धंधे में धकेल देते थे। ये लोग उनका यौन शोषण भी करते थे और फिर ड्रग्स की आदत लगा कर उनसे ड्रग्स की सप्लाई करवाते थे।

इससे पहले तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, इनलोगों ने नूर्नबर्ग सेंट्रल स्टेशन के आस-पास लड़कियों और युवतियों का भरोसा जीता और फिर उन्हें नशे की लत में धकेल दिया।

जर्मनी में फलता-फूलता ग्रूमिंग रिंग’ और नशे की चपेट में लड़कियाँ

मई 2026 में गोस्टेनहोफ जिले के एक अपार्टमेंट में पुलिस ने ऐसे ही ग्रूमिंग गैंग के 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया। ये दोनों सीरिया के नागरिक हैं। इनकी उम्र मात्र 26 साल और 24 साल है। 26 साल का ग्रूमिंग गैंग का व्यक्ति नाबालिगों को नशीले पदार्थ सप्लाई करता था। उसके अपार्टमेंट की तलाशी के दौरान अधिकारियों को क्रिस्टल मेथ और कोकीन जैसी चीजें मिलीं। साथ ही करीब 2000 यूरो नकद भी बरामद हुए।

पुलिस रिपोर्ट से पता चलता है कि दूसरा सीरिया का 24 वर्षीय नागरिक बच्चों के खिलाफ यौन शोषण का दोषी पाया गया है। उसे शक के आधार पर हिरासत में लिया गया था। मामले की जाँच करने वाले जज ने दोनों लोगों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया। नूर्नबर्ग सेंट्रल स्टेशन के आस-पास ‘ग्रूमिंग गैंग’ से निपटने के लिए उसका बही खाता निकालने में पुलिस जुट गई है। इसके लिए मई महीने में जाँच आयोग का गठन किया था।

पाकिस्तान, सीरिया, गाजा, सर्बिया के नागरिकों पर पैनी नजर

यह जाँच उन शरणार्थियों पर केन्द्रित है जो पिछले कुछ सालों में सीरिया, पाकिस्तान, सर्बिया और गाजा पट्टी से आए हैं। संदिग्धों की उम्र 18 से 35 साल के बीच है। ये लोग नाबालिगों को गैर-कानूनी तरीके से नशीले पदार्थ सप्लाई करते हैं। इस मामले में कम से कम एक साल जेल की सजा हो सकती है।
जाँच में यौन अपराध भी शामिल हैं, खासकर 14 साल से कम उम्र के बच्चों और किशोरों का यौन शोषण और बलात्कार का मामला, जो तेजी से देश में बढ़ा है। जाँचकर्ताओं का मानना है कि पीड़ितों की संख्या शुरुआती अनुमान से अधिक हो सकती है। फिलहाल अधिकारियों ने कितनी लड़कियाँ या महिलाएँ इस गैंग का शिकार बनीं, इसका अंतिम आधिकारिक आँकड़ा जारी नहीं किया है। यूरोप के कई देशों खासकर जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और बेल्जियम में पिछले कुछ सालों से संगठित ग्रूमिंग नेटवर्क सामने आया है। इन मामलों में सामान्य पैटर्न यह पाया गया है कि ये लोग कमजोर, गरीब, असुरक्षित नाबालिगों को पहले विश्वास में लेते हैं, उन्हें प्रेमजाल में फँसाते हैं, फिर नशे, धमकी या भावनात्मक दबाव के जरिए उनका शोषण किया जाता है।

TMC नेता मछली फ्राई के बहाने बुलाकर गरीब महिलाओं की लूटता था इज्जत: बांग्लादेश भागते समय रबीउल इस्लाम गिरफ्तार

           TMC नेता रबीउल इस्लाम का करोड़ों का घर, जहाँ लूटता था महिलाओं की इज्जत (साभार : News18)
जैसे-जैसे TMC के सत्ता से बाहर होने के दिन बीत रहे हैं वैसे-वैसे ममता बनर्जी के समय हुई काली करतूतें सामने आने लगी हैं। जिसे देख शंका होती है कि ये जो नेता ममता का साथ छोड़ रहे हैं इसके पीछे बहुत गहरा षड़यंत्र दिखाई पड़ता है। क्योकि जो आज पार्टी को छोड़ अपने आपको दूध का धुला साबित करने की कोशिश कर रहे हैं इन काली करतूतों में इनके भी शामिल होने पर शक होना स्वाभाविक है। इनको मालूम है कि पहले तो ममता की छत्रसाया में चाहे कुछ भी कर लो कोई पूछने वाला नहीं। जिस हिसाब से नेता पार्टी छोड़ रहे हैं उस हिसाब से तो इतनी काली करतूतें नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन हुई, क्यों? क्यों नहीं जिस तरह हिन्दू महिलाओं का बलात्कार हो रहा था, हिन्दू त्यौहारों पर हमले हो रहे थे और हिन्दुओं पर जानलेवा हमले हो रहे थे तब क्यों नहीं पार्टी छोड़ी? तब कहाँ मर गया था इनका जमीर?           

बंगाल में संदेशखाली के विलेन शेख शाहजहाँ के बाद एक और दरिंदा सामने आया है। TMC नेता रबीउल इस्लाम पर महिलाओं को बंधक बनाकर उनका जिस्म लूटने और करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करने का आरोप है। पुलिस ने इस हैवान को बांग्लादेश भागते समय बॉर्डर पर दबोचा।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर 24 परगना के देगंगा से इस TMC नेता की काली करतूत बाहर आई है। आरोप है कि रबीउल इस्लाम ने 100 बीघे की जमीन पर अपना एक आलीशान गार्डन हाउस बना रखा था।

वह गरीब महिलाओं को रात के अँधेरे में वहाँ मछली तलने और खाना बनाने के बहाने बुलाता था। वहाँ पहुँचने के बाद महिलाओं को बंधक बना लिया जाता था। फिर रबीउल और उसके गुर्गे उनके साथ अमानवीय अत्याचार करते थे। इलाके में इसका इतना खौफ था कि पीड़ित परिवार डर के मारे मुँह नहीं खोलते थे।

मजदूर से करोड़पति बनने का खूनी सफर

रबीउल इस्लाम के अपराध और रसूख की कहानी बेहद चौंकाने वाली है। साल 2011 से पहले रबीउल एक साधारण दिहाड़ी मजदूर था। वह दो वक्त की रोटी के लिए तरसता था। लेकिन सत्ता का हाथ मिलते ही वह देगंगा पंचायत समिति में वन एवं भूमि विभाग का बड़ा अफसर बन बैठा। इसके बाद उसने सरकारी पैसों और पेड़ों को लूटकर अपना 10 करोड़ का अय्याशी का अड्डा तैयार किया।

पुलिस को ठेंगा, फिर भागते हुए दबोचा गया

रबीउल ने अपने राजनीतिक रसूख के दम पर लंबे समय तक कानून की धज्जियाँ उड़ाईं। उसके खिलाफ जबरन वसूली और महिला उत्पीड़न के कई केस थाने पहुँचे, लेकिन पुलिस हाथ डालने से डरती थी।

अब जब बीजेपी की सरकार आई, तब जाकर इस हवस के शिकारी पर शिकंजा कसा, और ये डरपोक अंडरग्राउंड हो गया। जान बचाकर सीमा पार बांग्लादेश भागने की फिराक में था। लेकिन बसिरहाट बॉर्डर पर मुस्तैद पुलिस ने उसकी चालाकी फेल कर दी और उसे सलाखों के पीछे भेज दिया।

उत्तर प्रदेश से सऊदी कमाने गए मोहम्मद जफर-राहिब ईरान को मदद भेजने के अपराध में सऊदी पुलिस ने किया गिरफ्तार: अब अब्बू-अम्मी भारत सरकार से लगा रहे गुहार; खेल दिया बीमारी का Victim card

         ईरान को पैसे भेजने के चक्कर में फँसे 2 मुस्लिम भाई, सऊदी अरब पुलिस ने पकड़ा (फोटो साभार : NDTV)
उत्तर प्रदेश के अमरोहा के रहने वाले दो सगे मुस्लिम भाइयों, मोहम्मद जफर और मोहम्मद राहिब को सऊदी अरब की पुलिस ने दम्माम से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों भाइयों पर सऊदी अरब से ईरान फंड ट्रांसफर करने का आरोप है।

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च महीने में हुई इस गिरफ्तारी के बाद से दोनों का कुछ पता नहीं चल रहा है। इस बीच रियाद में भारतीय दूतावास ने परिवार को ईमेल कर बताया है कि दोनों को सुरक्षा से जुड़े एक मामले में हिरासत में लिया गया है। अब मुस्लिम पीड़ित परिवार ने विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर से दोनों बेटों को सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई है।

वैसे तो मुसलमान दुनिया भर की खबर रखता है लेकिन षड़यंत्र करने से बाज नहीं आता। जब मालूम है कि सऊदी अरब और ईरान के जंग का माहौल है फिर क्यों सऊदी अरब से ईरान मदद भेजी? अब जब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया तो अब्बू अपनी बीमारी का victim card खेल कर मासूमियत दिखा रहे हैं। आखिर ये victim card खेल कर कब तक दुनिया को पागल बनाओगे? भारत में रहकर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा सकते हो लेकिन सऊदी अरब में रहकर उसके दुश्मन मुल्क ईरान की मदद करने पर गिरफ़्तारी ही होगी। सऊदी अरब में कोई विपक्ष इनकी हिमायत में नहीं बोल रहा। वो भारत नहीं सऊदी अरब है।   

अम्मी के कहने पर भेजे थे पैसे

अमरोहा के नौगावां के रहने वाले जफर पिछले 5 साल से दम्माम के एक स्टोर में काम कर रहे थे। बाद में उन्होंने अपने छोटे भाई राहिब को भी वहीं नौकरी पर लगवा दिया था। फरवरी में इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ।

इसके बाद दोनों भाइयों की अम्मी ने ईरान के पीड़ित लोगों की मदद करने की इच्छा जताई। अम्मी के कहने पर जफर ने छोटे भाई राहिब के मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया और भारत में मौजूद ईरानी दूतावास के बैंक खाते में 200 रियाल ट्रांसफर कर दिए।

फोन के चक्कर में छोटा भाई भी फँसा

सऊदी अरब और ईरान के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। जैसे ही राहिब के फोन से ईरान से जुड़े खाते में ट्रांजैक्शन हुआ, सऊदी की सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट हो गईं। 27 मार्च को सऊदी पुलिस ने राहिब को उसके घर से हिरासत में ले लिया, क्योंकि फोन उसी का था। इसके तीन दिन बाद यानी 30 मार्च को पुलिस ने बड़े भाई जफर को भी गिरफ्तार कर लिया। तब से परिवार का अपने दोनों बेटों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है।

भारतीय दूतावास ने क्या कहा?

रियाद में भारतीय दूतावास के कम्युनिटी वेलफेयर विंग के अधिकारी सुमित कुमार ने पीड़ित परिवार को एक ईमेल भेजा है। इस ईमेल में लिखा है, “उपलब्ध जानकारी के अनुसार मोहम्मद राहिब हसन और मोहम्मद जफर हसन को सुरक्षा से जुड़े एक मामले में हिरासत में लिया गया है। भारतीय दूतावास ने इस संबंध में और अधिक जानकारी जुटाने के लिए सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है। अभी और विवरण मिलना बाकी है।”

अब्बू ने जयशंकर से माँगी मदद

दोनों भाइयों के अब्बू हसन अब्बास पूरी तरह से पैरालिसिस (लकवा) के शिकार हैं। उनका पूरा खर्च उनके ये दोनों बेटे ही उठा रहे थे। हसन अब्बास ने एक Video जारी कर विदेश मंत्री एस जयशंकर से अपील की है। उन्होंने कहा, “मेरे दोनों बच्चे सऊदी अरब में लापता हैं। मेरे घर का पूरा खर्च बच्चे ही उठाते थे। मैं आपसे अपील करता हूँ कि कृपया मेरे बच्चों का पता लगाएँ और उन्हें वापस लाएँ।”

राजनाथ सिंह तक पहुँचा मामला

इस बीच ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। उन्होंने रक्षा मंत्री के सामने इस गंभीर मुद्दे को उठाया है। उन्होंने बताया कि मोहम्मद शबी नाम के एक अन्य भारतीय नागरिक को भी दुबई एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया है। मौलाना यासूब अब्बास ने भी विदेश मंत्रालय से अपील की है कि मिडिल ईस्ट में फँसे शिया भारतीयों की तुरंत मदद की जाए।

बंगाल : करोड़ों की वसूली में TMC नेता सब्यसाची दत्ता को देर रात घर में घुसकर पुलिस ने किया गिरफ्तार

                    करोड़ों की वसूली में TMC नेता सब्यसाची दत्ता गिरफ्तार (फोटो साभार : ETVbharat)
पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने TMC को एक और बड़ा झटका दिया है। पुलिस ने बिधाननगर नगर निगम के पूर्व चेयरमैन और दिग्गज TMC नेता सब्यसाची दत्ता को गिरफ्तार कर लिया है। सब्यसाची दत्ता पर करोड़ों रुपए की रंगदारी और उगाही करने का गंभीर आरोप है।

बिधाननगर नॉर्थ पुलिस ने सोमवार (8 जून) को उन्हें राजारहाट स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया। राज्य में सरकार बदलने के बाद से TMC नेताओं पर कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सब्यसाची दत्ता बिधाननगर-राजारहाट इलाके के बेहद प्रभावशाली नेता माने जाते हैं।

जानकारी के अनुसार, सब्यसाची दत्ता पर दंगा करने का आरोप है एक व्यापारी ने सब्यसाची के खिलाफ पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी इसी एफआईआर के आधार पर पुलिस ने तृणमूल के पूर्व विधायक को गिरफ्तार किया सब्यसाची ने 26वें चुनाव में तृणमूल के टिकट पर बारासात से चुनाव लड़ा था इससे पहले वे राजारहाट-न्यूटाउन निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल के विधायक रह चुके हैं सब्यसाची बिधाननगर नगरपालिका के महापौर भी रह चुके हैं

पुलिस काफी समय से इन आरोपों की जाँच कर रही थी। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब TMC में बड़ी बगावत के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी के करीब 20 विधायक दिल्ली में एनडीए (NDA) के बड़े नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। ये सभी विधायक जल्द ही एनडीए में शामिल होना चाहते हैं।

देर रात हुए गिरफ्तार

उस शिकायत के आधार पर, सब्यसाची को सोमवार रात को उनके न्यूटाउन स्थित फ्लैट से गिरफ्तार कर पुलिस स्टेशन ले जाया गया लंबी पूछताछ के बाद, जब उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो पुलिस ने उन्हें देर रात गिरफ्तार कर लिया उन्हें मंगलवार(9 जून) को बिधाननगर अदालत में पेश किया जाएगा हालांकि, बिधाननगर उत्तर पुलिस स्टेशन ने इस संबंध में अब तक कोई घोषणा नहीं की है सब्यसाची के खिलाफ जबरन वसूली या मानसिक उत्पीड़न के आरोप नए नहीं हैं न सिर्फ व्यापारी और आम लोग, बल्कि पार्टी के भीतर भी उनके खिलाफ कई आरोप लग चुके हैं पार्टी कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न और मानसिक उत्पीड़न के आरोप भी समय-समय पर लगते रहे हैं

पहले भी होती रही है शिकायत

मधुसूदन चक्रवर्ती ने पहले भी कई बार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी हालांकि, तृणमूल सरकार के दौरान पुलिस की निष्क्रियता के आरोप लगे थे आरोप है कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की लेकिन सरकार बदलने के बाद वही पुलिस अब सक्रिय हो गई है राज्य में सत्ता में आने के बाद से भाजपा सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को किसी भी तरह से बख्शा नहीं जाएगा तब से पुलिस लगातार सक्रिय है तृणमूल नेताओं और पार्षदों को एक के बाद एक गिरफ्तार किया जा रहा है इस बार सब्यसाची का नाम भी इस सूची में जुड़ गया है

क्या वाकई बंगाल में बदलाव हुआ है? फाल्टा से रहे ममता की पार्टी का उम्मीदवार जहाँगीर खान गिरफ्तार, नेपाल बॉर्डर से पकड़ाया अभिषेक बनर्जी का करीबी

बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने पर जिस रफ़्तार से TMC नेताओं पर कानूनी डंडा चल रहा है यह हकीकत है या कोई सपना? उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ द्वारा गुंडों और माफिया गैंग पर होती कार्यवाही पर तो सारा INDI गठबंधन चिल्ला रहा है लेकिन बंगाल में सब खामोश। जबकि दोनों जगह बीजेपी। इतना ही नहीं मुसलमान तक वर्तमान सरकार की कार्यवाहियों से खुश हैं। वही पुलिस वही मुस्लिम! अब कोई हिन्दू-मुस्लिम नहीं हो रहा। इतना ही नहीं जनता TMC नेताओं को जूतों का हार पहना रही है, अंडे और टमाटर फेंक रही है। क्या वाकई वामपंथियों से लेकर ममता राज तक जनता इतनी दुखी थी? सारा विपक्ष खामोश? जिसको देखो अपनी पार्टी को बचाए रखने की कोशिश में लगा है।अपने-अपने नेताओं तक की फ़िक्र नहीं। अजीब तमाशा चल रहा है बंगाल में।          

पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने TMC नेता जहाँगीर खान को नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया है। जहाँगीर खान फाल्टा विधानसभा सीट से TMC के उम्मीदवार थे लेकिन चुनाव के दौरान हुईं गड़बड़ियों के बाद फिर से मतदान हुआ था। इसके बाद यहाँ दोबारा मतदान हुआ और जहाँगीर खान ने मैदान छोड़ दिया था।

जहाँगीर खान को ममता बनर्जी के भतीजी और TMC के सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। जहाँगीर खान का यूपी के चर्चित IPS ऑफिसर अजयपाल शर्मा की चुनाव के दौरान तनातनी खूब चर्चा में रही थी। जहाँगीर खाने ने अजयपाल शर्मा को चुनौती देते हुए कहा था कि वो सिंघम हैं तो मैं पुष्पा हूँ झुकूँगा नहीं।

जहाँगीर के खिलाफ हत्या के प्रयास, जबरन वसूली और दंगा भड़काने समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज हैं। जहाँगीर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी दर्ज है और ED उस मामले की जाँच कर रही है।

FBI ने ISIS के 3 आतंकियों को पकड़ा, गफूर ने बताया- महिला सैनिक का सिर कलम करने और 30 करोड़ अमेरिकियों की हत्या की थी ख्वाहिश

              FBI ने ISIS के 3 अमेरिकी आतंकियों को गिरफ्तार किया (फोटो साभार : cbs8 & nbcnews)
अमेरिका में FBI ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 3 अमेरिकी आतंकियों को गिरफ्तार किया है। ये तीनों आतंकी संगठन ISIS की मदद करने और अमेरिका में बड़े हमलों की साजिश रच रहे थे। इनमें से एक आरोपित का इरादा 30 करोड़ अमेरिकियों को जान से मारने और एक महिला सैनिक का सिर काटने का था।

FBI ने कंसास और कैलिफोर्निया में एक साथ मिलकर काम किया। उन्होंने शुक्रवार (5 जून) की सुबह तीन जगहों पर छापे मारे। इसके बाद बिसाम गफूर, इलियास शमसाल्दीन और बेरीन जाये नाम के तीन आतंकियों को धर दबोचा। इनकी उम्र 21 से 25 साल के बीच है।

क्या थी इनकी खतरनाक प्लानिंग?

ये तीनों आपस में बातचीत करने के लिए ‘डिस्कॉर्ड’ और दूसरे मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते थे। यह बातचीत फरवरी 2025 से जून 2026 तक चली। इन्होंने ISIS के लिए वफादारी की कसम खाई थी। ये आतंकी अमेरिका के सैनिकों पर हमला करना चाहते थे।

इन आतंकियों ने ISIS के एक सदस्य को 2000 डॉलर (1,90,571 रूपए) से ज्यादा भेजे थे। वे क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसा जुटा रहे थे। इस पैसे से वे रॉकेट और ड्रोन खरीदना चाहते थे। आरोपित बिसाम चाहता था कि अमेरिकी लोगों पर हमला करने वाले ड्रोन पर उसका नाम लिखा जाए। वहीं बेरीन अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज को निशाना बनाना चाहता था।

महिला सैनिक का सिर काटने की थी चाहत

आरोपित बिसाम गफूर ने चैट में कहा था कि वह हमेशा से एक महिला सैनिक का सिट काटना चाहता था। बिसाम गफूर ने यह भी लिखा कि वह 30 करोड़ अमेरिकियों को मारना चाहता है। वहीं इलियास शमसाल्दीन नाम का आरोपित अमेरिकी सैनिकों को चाकू घोंपना चाहता था। ये तीनों विदेश जाकर ISIS के लिए मरने को भी तैयार थे।

इस कामयाबी पर अमेरिकी अधिकारियों ने बड़ी बात कही है। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा कि सरकार ने आतंकवादियों और गैंगस्टरों को साफ चेतावनी दे दी है। वहीं FBI डायरेक्टर काश पटेल ने कहा कि इन लोगों ने हमले की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन FBI ने समय रहते इन्हें दबोच लिया।

पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी, केजरीवाल-मान-सिसोदिया के साथ तस्वीरें: कौन है AAP नेता अशोक ओझा, जो अपनी ही पार्टी के नेताओं को IB के नाम पर धमकाने के आरोप में हुआ गिरफ्तार

                            अरविंद केजरीवाल के साथ अशोक ओझा (फोटो साभार: ऑपइंडिया गुजराती)
गुजरात में आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) के नाम पर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं को धमकियाँ दिए जाने का मुद्दा उठाकर अरविंद केजरीवाल, गोपाल इटालिया और दुर्गेश पाठक ने भारी हंगामा खड़ा किया था। सोशल मीडिया पर पोस्ट की गईं, सवाल उठाए गए और पूरी घटना को राजनीतिक रंग दिया गया। लेकिन जाँच आगे बढ़ते ही पूरा खेल पलट गया। जिस ‘आईबी कॉल’ को लेकर परोक्ष रूप से सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा जा रहा था, उसमें अब आप (AAP) का वडोदरा शहर अध्यक्ष अशोक ओझा ही आरोपित के रूप में सामने आया है।

खास बात यह है कि अशोक ओझा कोई ऐसा चेहरा नहीं है जिसे पार्टी में कोई न जानता हो। गुजरात में आप का संगठन खड़ा करने की प्रक्रिया के दौरान अशोक ओझा लगातार पार्टी के शीर्ष नेताओं के आसपास देखा जाता रहा है। वह लंबे समय से गुजरात आप में सक्रिय है और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक उसकी सीधी पहुँच है।

अरविंद केजरीवाल से लेकर इसुदान गढ़वी, गोपाल इटालिया और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा मनीष सिसोदिया तक, अशोक ओझा कई मौकों पर पार्टी के बड़े चेहरों के साथ नजर आया है। गुजरात में पार्टी संगठन के विस्तार के काम के दौरान भी वह सक्रिय रहा और कई बार दिल्ली जाकर भी पार्टी का काम संभाला।

                                                गोपाल राय और भगवंत मान के साथ अशोक ओझा

गुजरात आप के संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उसकी उपस्थिति देखी गई है। पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के साथ उसके संपर्कों और नजदीकी के प्रमाण के रूप में कई तस्वीरें और कार्यक्रमों के रिकॉर्ड मौजूद हैं। गुजरात में आप के प्रभारी के रूप में काम कर चुके गोपाल राय के साथ भी वह कई बार देखा गया था। संक्षेप में कहें तो अशोक ओझा केवल शहर स्तर का पदाधिकारी नहीं था, बल्कि पार्टी के बड़े नेताओं के साथ सीधा संपर्क रखने वाला और संगठन में पहचान रखने वाला चेहरा था।

                                     मनीष सिसोदिया और मनोज सोरठिया के साथ अशोक ओझा

इसके अलावा गुजरात के आम आदमी पार्टी के कई नेताओं के साथ भी उसके अच्छे संबंध हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी के साथ भी उसके संबंध करीबी हैं। इसके अलावा गोपाल इटालिया और मनोज सोरठिया के साथ भी वह कई बार दिखाई देता है। इन सभी नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें भी इस समय उपलब्ध हैं।

मामला, जिस पर राजनीतिक रोटियाँ सेंक रही थी केजरीवाल एंड कंपनी

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं ने दावा करना शुरू किया कि गुजरात में उनके कार्यकर्ताओं और नेताओं को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के नाम पर फोन करके धमकाया जा रहा है। मामला तब और ज्यादा चर्चा में आया जब दिल्ली के पूर्व विधायक और आप नेता दुर्गेश पाठक ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि गुजरात में काम कर रहे आप कार्यकर्ताओं को एक विशेष नंबर से फोन आ रहे हैं और फोन करने वाला खुद को आईबी का अधिकारी बता रहा है।

कुछ ही समय में आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इस मुद्दे को हाथ में ले लिया। केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके दावा किया था कि उनके एक कार्यकर्ता को इस प्रकार का फोन आया था। उन्होंने आगे यह भी दावा किया था कि उन्होंने खुद उस नंबर पर फोन करके पूछा था कि क्या वे आईबी से बोल रहे हैं? और सामने से सकारात्मक जवाब मिलने के बाद जैसे ही उन्होंने बताया कि वे अरविंद केजरीवाल बोल रहे हैं, तो फोन काट दिया गया। इसके बाद केजरीवाल ने सार्वजनिक रूप से सवाल किया था कि एक राज्य से दूसरे राज्य में राजनीतिक काम करने जाने वाले नागरिकों का आईबी द्वारा वेरिफिकेशन किस कानून के तहत किया जाता है।

आप के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे को आगे बढ़ाया। सोशल मीडिया पर पोस्ट की गईं, बयान दिए गए और पूरे मामले को ऐसा रंग दिया गया जैसे कोई सरकारी एजेंसी राजनीतिक कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही हो। परिणामस्वरूप यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

हालाँकि इस बीच आणंद के आप कार्यकर्ता केशव चौहान को भी इसी तरह का फोन आने की बात कहे जाने पर मामला पुलिस तक पहुँच गया। केशव चौहान ने आणंद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस ने मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल्स और तकनीकी डेटा की जाँच शुरू की।

जांच के दौरान सबसे पहला चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब जिस नंबर को लेकर हंगामा मचाया जा रहा था, वह नंबर आणंद के नितिन डोबरिया के नाम पर होने की बात सामने आई। पुलिस ने जब नितिन डोबरिया से पूछताछ शुरू की तो पूरी कहानी ने एक अलग ही मोड़ ले लिया। पूछताछ के दौरान नितिन डोबरिया ने बताया कि उसने वडोदरा शहर आप अध्यक्ष अशोक ओझा के कहने पर फोन किए थे और कुछ मामलों में खुद को आईबी अधिकारी के रूप में पेश किया था।

इस खुलासे के बाद पुलिस ने अशोक ओझा से भी पूछताछ शुरू की। जिसके बाद जाँच में सामने आया कि यह पूरा मामला किसी बाहरी एजेंसी या राजनीतिक विरोधियों से जुड़ा नहीं था, बल्कि आप की आंतरिक गुटबाजी और संगठन के भीतर की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से जुड़ा हुआ था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के नेता दुर्गेश पाठक को वडोदरा और गुजरात में अधिक सक्रिय भूमिका दिए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर असंतोष पैदा हुआ था। जाँच में यह दावा किया गया कि अशोक ओझा को डर था कि केंद्रीय नेतृत्व के बढ़ते हस्तक्षेप से स्थानीय संगठन में उसका वर्चस्व कम हो सकता है। इसी वजह से फर्जी आईबी अधिकारी का खेल रचा गया था, ताकि कुछ नेताओं पर दबाव बनाया जा सके।

अंततः जिस मुद्दे पर आप के शीर्ष नेताओं ने सार्वजनिक रूप से हंगामा मचाया था, जिस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार और प्रशासन के खिलाफ सवाल उठाए गए थे, उसी मामले में अब आप के अपने ही एक शहर अध्यक्ष और उसके साथी की गिरफ्तारी होने की बात सामने आई है।

TMC के पूर्व विधायक तपन चटर्जी के घर मिला सरकारी राहत सामग्री तिरपाल-कंबल-फुटबॉल का जखीरा, पुलिस ने किया गिरफ्तार: लोगों ने लगाए ‘चोर-चोर’ के नारे

                                                           पूर्व MLA तपन चटर्जी गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल पुलिस ने रविवार (31 मई 2026) को को पूर्व बर्धमान जिले के पूर्वस्थली उत्तर से पूर्व TMC विधायक तपन चटर्जी के घर पर छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को सरकारी राहत सामग्री जमा करके रखने की सूचना मिली थी। तलाशी के दौरान घर से बड़ी संख्या में तिरपाल, कंबल, फुटबॉल, वॉलीबॉल और अन्य सामान बरामद हुआ जो आमतौर पर आपदा प्रभावित लोगों, युवा क्लबों और शैक्षणिक संस्थानों में बाँटने के लिए होता है।

राहत सामग्री के साथ-साथ घर से भारी मात्रा में खेल सामग्री भी बरामद हुई जिनमें फुटबॉल और वॉलीबॉल शामिल हैं। आमतौर पर ये सामान युवा क्लबों और शैक्षणिक संस्थानों में बाँटने के लिए होते हैं। बताया जा रहा है कि ये सामान घर के किचन से जुड़े एक कमरे में जमा करके रखा गया था। पुलिस की छापेमारी के दौरान TMC नेता के घर के बाहर केंद्रीय बलों की भी तैनाती की गई थी।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने तपन चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया है। सरकारी राहत सामग्री के कथित दुरुपयोग और हेराफेरी के मामले में उनसे पूछताछ की जा रही है। जब पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर जा रही थी। तब स्थानीय लोगों ने पूर्व विधायक के खिलाफ ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए। घर पर छापेमारी के बाद अब पुलिस तपन चटर्जी से जुड़े कई गोदामों की भी तलाशी ले रही है।

यह कार्रवाई राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद TMC नेताओं द्वारा सरकारी राहत सामग्री की कथित जमाखोरी और हेराफेरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। इस बरामदगी के बाद ममता बनर्जी सरकार के दौरान सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और वितरण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

बीते कुछ दिनों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में TMC नेताओं से जुड़े ऐसे कई मामले सामने आए हैं। उत्तर 24 परगना जिले में बदुरिया नगर पालिका के चेयरमैन दीपंकर भट्टाचार्य को पुलिस ने उस समय गिरफ्तार किया था, जब उनके ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी और हजारों सरकारी तिरपाल बरामद हुए थे। वहीं, पूर्व मेदिनीपुर में पूर्व TMC विधायक तरुण कुमार मैती से जुड़े इलाकों से भी राहत तिरपाल बरामद किए गए थे। इसके अलावा कई अन्य TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ वसूली, हथियार बरामदगी और राहत सामग्री जमा करके रखने के मामलों में भी कार्रवाई हुई है।

फर्जीवाड़ा करने वाले ही ‘IB फोन कर धमका रही है’ कहकर केजरीवाल ने मचाया हंगामा, जाँच में निकली AAP की ही साजिश: वडोदरा पार्टी अध्यक्ष गिरफ्तार

वडोदरा शहर AAP अध्यक्ष अशोक ओझा और उनके सहयोगी नितिन डोबरिया को किया गिरफ्तार 
गुजरात में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के नाम पर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर धमकी भरे फोन किए जाने का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। जिस मुद्दे को लेकर AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने सवाल उठाए थे, उसी मामले में पार्टी के एक स्थानीय नेता का नाम सामने आया है।

जाँच के बाद पुलिस ने वडोदरा शहर AAP अध्यक्ष अशोक ओझा और उनके सहयोगी नितिन डोबरिया को गिरफ्तार किया है।

फर्जी IB अधिकारी बनकर किए गए फोन

आणंद साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, नितिन डोबरिया खुद को IB अधिकारी बताकर AAP के केंद्रीय नेता दुर्गेश पाठक और अन्य कार्यकर्ताओं को फोन करता था। इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई थी, जब दुर्गेश पाठक ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि गुजरात में पार्टी कार्यकर्ताओं को एक नंबर से लगातार कॉल आ रही है।

उन्होंने बताया कि कॉल करने वाला व्यक्ति खुद को IB का अधिकारी बताकर सत्यापन के लिए बुला रहा है। इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने भी इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाते हुए सवाल किया था कि आखिर किस कानून के तहत दूसरे राज्यों से आए लोगों का IB द्वारा सत्यापन किया जा रहा है।

जाँच में सामने आई आंतरिक राजनीति की कहानी

पुलिस की तकनीकी जाँच में संबंधित मोबाइल नंबर नितिन डोबरिया के नाम पर दर्ज पाया गया। पूछताछ के दौरान सामने आया कि कथित साजिश के पीछे वडोदरा AAP अध्यक्ष अशोक ओझा की भूमिका थी। पुलिस के मुताबिक, केंद्रीय नेता दुर्गेश पाठक को वडोदरा की जिम्मेदारी मिलने के बाद स्थानीय संगठन में असंतोष पैदा हो गया था।

जाँच में यह भी सामने आया कि पार्टी के भीतर बढ़ते शक्ति संतुलन को लेकर चिंता के चलते यह पूरा घटनाक्रम रचा गया। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपितों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।

बीवी को ‘कैसे करें प्यार’ पर किताब लिखने वाले पादरी के खुद की कई बीवी: अमेरिका के फ्लोरिडा में गिरफ्तार

                                           एक से अधिक पत्नी होने के आरोप में पादरी गिरफ्तार
अमेरिका के फ्लोरिडा से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। वहाँ लोगों को शादी पर और अपनी पत्नी को कैसे प्यार करें- इसका ज्ञान देने वाले एक 62 साल के पादरी को एक से ज्यादा  शादी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पादरी का नाम 62 वर्षीय लेस्ली विलियम्स है। पिछले हफ्ते उनके घर के पास स्थित द विलेजेस रिटायरमेंट कम्युनिटी में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।

स्थानीय पुलिस के अनुसार, विलियम्स के खिलाफ जॉर्जिया राज्य में एक साथ एक से अधिक विवाह करने के आरोप में केस दर्ज है। वहाँ की पुलिस ने 3 अप्रैल को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। फिलहाल उन्हें डिटेंशन सेंटर में बिना जमानत के रखा गया है और जॉर्जिया को प्रत्यर्पित करने की प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

मामले को लेकर दिलचस्प बात यह है कि विलियम्स ने 2017 में एक किताब लिखी थी, जिसमें पति-पत्नी के बीच प्रेम और वैवाहिक संबंधों को मजबूत बनाने के तरीके बताए थे। लोग विलियम्स की लिखी किताब और उनकी एक से ज्यादा हुई शादियों की बात सुनकर खूब मजे ले रहे हैं।

विलियम्स के सोशल मीडिया पोस्ट जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘सिंडी’ उनकी नई पत्नी है-इस पर लोगों ने उन्हें बधाइयाँ भी दी और तंज भी कसा। लोगों ने कहा कि उन्हें तो लगता था कि पादरी पहले से शादीशुदा है।

अभी विलियम्स की पहली शादी के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। विलियम्स खुद को एक ईसाई धर्म के प्रचारक बताते हैं। क्षेत्र में उनके कई अनुयायी भी हैं। इस घटना के बाद ने उनके अनुयायियों और स्थानीय समुदाय में हैरानी पैदा कर दी है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

ट्रंप की बेटी इवांका को मारना चाहता था मोहम्मद बाकेर, ईरानी सेना से मिली थी ट्रेनिंग: सुलेमानी की मौत का बदला लेना था मकसद

    ट्रंप और बेटी इवांका (बाएँ), हत्या की साजिश रचने वाला आतंकी मोहम्मद बाकेर (दाएँ), (साभार : CNN & Newyorkpost)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप पर एक बड़ा खतरा टल गया है। अमेरिकी अखबार ‘न्यू यॉर्क पोस्ट’ के अनुसार, इवांका की हत्या की साजिश रचने वाले एक ट्रेंड आतंकी मोहम्मद बाकेर को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस आतंकी के पास से इवांका के फ्लोरिडा वाले घर का पूरा नक्शा मिला है। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ पूरी तरह मुस्तैद हो गई हैं।

पकड़े गए आतंकी का पूरा नाम मोहम्मद बाकेर साद दाऊद अल-सादी है। उसकी उम्र 32 साल है। छह साल पहले बगदाद में एक अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी सैन्य प्रमुख कासिम सुलेमानी मारा गया था। अल-सादी उसे अपना अब्बू जैसा मानता था। वह सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था। उसने लोगों से कहा था कि वह इवांका को मारकर ट्रंप से अपना बदला पूरा करेगा।

इंटरनेट पर दी थी खुली धमकी

आरोपित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर काफी एक्टिव था। उसने वहाँ इवांका और उनके पति के 24 मिलियन डॉलर (225 करोड़ रुपए) के घर का नक्शा डाला था। उसने अरबी भाषा में लिखा था कि अमेरिकी महल या सीक्रेट सर्विस भी उन्हें नहीं बचा पाएगी। उसने लिखा कि हमारा बदला बस कुछ ही समय की बात है। वह लोगों को डराने के लिए साइलेंसर लगी पिस्तौल की तस्वीरें भी भेजता था।

तुर्की में पकड़ा गया आरोपित

इस बड़े आतंकी को 15 मई को तुर्की में पकड़ा गया। वह वहाँ से रूस भागने की तैयारी में था। गिरफ्तारी के बाद उसे तुरंत अमेरिका भेज दिया गया। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, उस पर यूरोप और अमेरिका में 18 हमलों का आरोप है। अभी उसे ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। वहाँ उसे सबसे अलग एक कड़े पहरे वाली कोठरी में बंद किया गया है।

कई देशों में फैलाया था खौफ

यह आतंकी सिर्फ ट्रंप की बेटी इवांका के पीछे नहीं था। वह ‘कथैब हिजबुल्लाह’ और ईरान के ‘IRGC’ जैसे खतरनाक संगठनों से जुड़ा है। उसने एम्स्टर्डम में एक बैंक पर पेट्रोल बम फेंका था। उसने लंदन में दो लोगों पर चाकू से हमला किया था। उसने टोरंटो में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर गोलीबारी भी की थी। इसके अलावा बेल्जियम और रोटरडैम में भी उसने हमले किए थे।

सरकारी पासपोर्ट का उठाया फायदा

रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित के पास इराक का खास ‘सर्विस पासपोर्ट’ था। यह पासपोर्ट सिर्फ वहाँ के प्रधानमंत्री की इजाजत से मिलता है। इस VIP पासपोर्ट के कारण एयरपोर्ट पर उसकी जाँच नहीं होती थी। उसे हर जगह VIP लाउंज की सुविधा मिलती थी। इसी का फायदा उठाकर वह आसानी से दूसरे देशों में जाता था। वहां वह बड़े आराम से अपने आतंकी नेटवर्क को चला रहा था।

ट्रैवल एजेंसी के नाम पर धोखा

अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए उसने एक तरकीब निकाली थी। उसने मजहबी यात्राएँ कराने वाली एक ट्रैवल एजेंसी खोली थी। इसी एजेंसी की आड़ में वह पूरी दुनिया में घूमता था। वह अलग-अलग देशों में जाकर अपने साथियों से मिलता था। वह सोशल मीडिया पर एफिल टावर जैसी मशहूर जगहों के साथ फोटो डालता था। कई बार वह मिसाइलों और हथियारों के साथ भी अपनी फोटो पोस्ट करता था।

इस मामले पर अभी सब शांत

इवांका ट्रंप ने साल 2009 में अपनी शादी से पहले यहूदी धर्म अपना लिया था। इस बड़ी साजिश के सामने आने के बाद भी अभी सब शांत हैं। न्यू यॉर्क पोस्ट ने इस मामले पर बात करने के लिए व्हाइट हाउस से संपर्क किया था। उन्होंने आरोपित के वकील से भी बात करने की कोशिश की। हालाँकि, अभी तक किसी की भी तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

बंगाल : पाकिस्तानी औरत से निकाह कर कोलकाता का जफर रियाज बना ISI का जासूस, 20 साल तक भारत के इनपुट आतंकी मुल्क को बेचे: सरकार बदलने के बाद NIA ने दबोचा


जिस तरह बंगाल में सत्ता बदलने के बाद मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी काम कर रहे हैं उनसे दिल्ली की महिला मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को सीखने की जरुरत है। मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान केन्द्रीय मंत्री "मामाजी" शिवराज सिंह के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा अपने काम के बलबूते पर मोदी के हाथ मजबूत कर मुख्यमंत्री बनते रहे हैं। जिस तरह बंगाल में वामपंथी सरकारों से लेकर ममता बनर्जी के राज में हुए अनधिकृत निर्माण और सरकारी जमीनों पर कब्ज़ा हुआ, उसी तरह दिल्ली में भी शीला दीक्षित से लेकर अरविन्द केजरीवाल तक जो अनधिकृत निर्माण और सरकारी जमीनों पर कब्जे हुए हैं लेकिन रेखा गुप्ता द्वारा मुख्यमंत्री बनने के इतने दिनों राज करने पर भी कोई कार्रवाही नज़र नहीं आ रही। यमुना नदी वही गन्दी।  

क्या हुआ CAG रिपोर्ट्स का? कहाँ गए बांग्लादेशी, रोहिंग्या और पाकिस्तानी घुसपैठिये? चुनावों में बहुत शोर मचाया था। कुर्सी मिल गयी जाए जनता भाड़ में। लगभग हर मेट्रो और लाल बत्ती(चौक)पर रिक्शाओं और थ्री-व्हीलर का जमावड़ा। चावड़ी बाजार, लाल कुआँ, नई सड़क, जामा मस्जिद और अन्य क्षेत्रों में पटरियों पर कब्जे। जनता पटरी पर चलने की बजाए सड़क पर चलने को मजबूर। पुराने समय में निकले छज्जों के नीचे सरकारी जमीन पर कब्ज़ा कर दुकानों, ढाबे और होटलों में शामिल आदि आदि।   

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले जफर रियाज उर्फ रिजवी को गिरफ्तार किया है। वह कोलकाता का रहने वाला है और उसने पाकिस्तानी से निकाह किया है। फिलहाल जफर की बीवी और बच्चे पाकिस्तान में ही रहते हैं।

मंगलवार (20 मई 2026) देर रात NIA ने जानकारी दी कि जफर रियाज के खिलाफ पहले से ही लुक आउट सर्कुलर जारी था। साथ ही उसे अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया भी चल रही थी। इसी दौरान एजेंसी ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपित पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) , आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत केस दर्ज किया गया है।

पाकिस्तानी एजेंसियों से कैसे बिठाए संपर्क?

जाँच एजेंसी के अनुसार जफर रियाज का निकाह एक पाकिस्तानी औरत से हुआ था और उसके बच्चे भी पाकिस्तान के नागरिक हैं। NIA की जाँच में सामने आया कि वह साल 2005 से लगातार भारत और पाकिस्तान के बीच यात्रा करता रहा। इसी दौरान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने उसे अपने संपर्क में लिया और जासूसी की ट्रेनिंग दी।

पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने जफर को पैसों का लालच दिया था। इसके अलावा उसे पाकिस्तान की नागरिकता दिलाने का भी वादा किया गया था। इसके बदले आरोपित भारत से जुड़ी संवेदनशील और गोपनीय सुरक्षा जानकारियाँ पाकिस्तान तक पहुँचाने का काम कर रहा था।

जासूसी के आरोप में पहले भी गिरफ्तार हो चुका जफर

NIA ने बताया कि जफर रियाज पहले भी जासूसी के एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। उस समय उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत कार्रवाई हुई थी। इसके बावजूद वह लगातार पाकिस्तान के संपर्क में बना रहा।

NIA अब इस पूरे जासूसी नेटवर्क की गहराई से जाँच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और भारत-विरोधी साजिश कितनी बड़ी थी। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

NEET लीक केस : 30 लाख रूपए लाओ, मेडिकल में सीट पाओ: RJD का नेशनल सेक्रेट्री संतोष जायसवाल गिरफ्तार, फ्लैट पर मिले ‘Question Paper’

दिल्ली पुलिस ने NEET UG एग्जाम के पेपर लीक मामले में RJD के नेशनल सेक्रेटरी संतोष कुमार जायसवाल को किया गिरफ्तार (फोटो साभार: एक्स @PNRai1)
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 में फर्जीवाड़े और पेपर लीक नेटवर्क को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में RJD के नेशनल सेक्रेटरी संतोष कुमार जायसवाल को गिरफ्तार किया गया है, जिसे जाँच एजेंसियाँ पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड मान रही हैं।

पुलिस ने उसकी निशानदेही पर गाजियाबाद के एक होटल और फ्लैट से कई छात्रों को रेस्क्यू किया है। इनमें कुछ नाबालिग भी बताए जा रहे हैं। जाँच के दौरान पुलिस को 149 पन्नों का एक कथित ‘स्पेशल क्वेश्चन सेट’, खाली साइन किए हुए चेक, छात्रों के मूल दस्तावेज और कई संदिग्ध रिकॉर्ड मिले हैं।

दिल्ली पुलिस के अनुसार यह गिरोह मेडिकल सीट दिलाने और परीक्षा में सफलता का झाँसा देकर छात्रों और अभिभावकों से 20 से 30 लाख रुपए तक वसूलता था। आरोप है कि छात्रों को परीक्षा से पहले अलग-अलग होटल और फ्लैटों में रखा जाता था, जहाँ उन्हें महत्वपूर्ण प्रश्न याद कराए जाते थे।

सूरत से मिला इनपुट और दिल्ली में शुरू हुई बड़ी कार्रवाई

दिल्ली पुलिस की जाँच के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का पहला बड़ा सुराग 2 मई 2026 को मिला, जब गुजरात के सूरत से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी साझा की गई। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने महिपालपुर इलाके के कई होटल्स में छापेमारी की। जाँच के दौरान पुलिस को ऐसे समूह मिले जिनमें छात्र परीक्षा से पहले एक साथ ठहराए गए थे।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया। उनसे पूछताछ के बाद संतोष जायसवाल का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने दिल्ली में उसे गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर गाजियाबाद के एक फ्लैट और होटल से 18 से अधिक छात्रों को मुक्त कराया गया। इनमें कई छात्र नाबालिग बताए जा रहे हैं।

मोतिहारी से दिल्ली तक संतोष जायसवाल कैसे बना परीक्षा नेटवर्क का बड़ा चेहरा

संतोष जायसवाल बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी स्थित बसवरिया गाँव का रहने वाला है। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद संतोष आगे की शिक्षा के लिए पटना गया। वहीं उसकी मुलाकात कथित तौर पर पुराने परीक्षा माफिया नेटवर्क से हुई।

धीरे-धीरे वह उस गिरोह का हिस्सा बना और फिर खुद सेटिंग नेटवर्क खड़ा करने लगा। उसने पटना से अपना नेटवर्क बढ़ाया और बाद में दिल्ली को ऑपरेशन का मुख्य केंद्र बना लिया। आज उसके पास दिल्ली के पॉश इलाके ईस्ट ऑफ कैलाश में आलीशान बंगला होने की बात कही जा रही है।

इसके अलावा कई अन्य संपत्तियों की भी जाँच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि उसने दिल्ली में मेडिसिन कारोबार की आड़ में अपना नेटवर्क खड़ा किया और उसी के जरिए मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं से जुड़ा अवैध कारोबार फैलाया।

परिवार, राजनीति और RJD कनेक्शन की भी जाँच

संतोष जायसवाल RJD में राष्ट्रीय सचिव के पद पर था। पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि क्या उसके राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल नेटवर्क को बचाने या विस्तार देने में हुआ।जानकारी के मुताबिक, संतोष ने पहले अपने भाई को बिहार विधानसभा चुनाव लड़वाने की कोशिश की थी। बाद में उसने खुद भी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

वह लगातार राजनीतिक संपर्क मजबूत करने में जुटा हुआ था और दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में भी उसकी सक्रिय मौजूदगी रहती थी। उसके परिवार में दो भाई डॉक्टर हैं जबकि एक बैंक अधिकारी है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में संतोष जायसवाल के अलावा डॉ अखलाक आलम, संत प्रताप सिंह और विनोद पटेल को गिरफ्तार किया है।

सीरिया में ISIS से जुड़ने गई थीं 3 जिहादने, ऑस्ट्रेलिया लौटते ही पुलिस ने लिया गिरफ्तार: 8.5 लाख रूपए में औरतें खरीदकर गुलाम बनाने का आरोप, 25 साल सड़ेंगी जेल में

                                                                                              प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: दैनिक जागरण)
सीरिया से लौटते ही ऑस्ट्रेलिया में तीन महिलाओं को आतंकवाद और गुलामी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है। मेलबर्न एयरपोर्ट पर 53 वर्षीय महिला और उसकी 31 वर्षीय बेटी को हिरासत में लिया गया। दोनों पर आरोप है कि वे 2014 में इस्लामिक स्टेट (ISIS) का समर्थन करने के लिए सीरिया गई थीं।

शुरू में तो पैसे के लालच में लड़कियां ISIS में शामिल होने अपना मुल्क छोड़ देती है, लेकिन दुर्गति होने पर ISIS के चुंगल से भाग जाती है। 2019 में भी एक हसीना ब्रिटेन से भाग ISIS में शामिल हो गयी और ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई।      

ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस के मुताबिक, 53 वर्षीय महिला ने करीब 10 हजार अमेरिकी डॉलर (साढ़े 8 लाख से 9 लाख तक) देकर एक महिला को गुलाम के तौर पर खरीदा था, जबकि उसकी बेटी ने उसे अपने घर में गुलाम बनाकर रखा। दोनों पर मानवता के खिलाफ अपराध और गुलामी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, जिनमें 25 साल तक की सजा हो सकती है।

पुलिस के अनुसार, ISIS के पतन के बाद 2019 में कुर्द बलों ने इन महिलाओं को पकड़ लिया था। तब से वे सीरिया के अल-रोज कैंप में रह रही थीं। गुरुवार (7 मई 2026) की रात कतर एयरवेज की फ्लाइट से मेलबर्न पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

वहीं 32 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई महिला जनई सफर को सिडनी एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। उस पर प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने और ISIS में शामिल होने का आरोप है। जाँच एजेंसियों का कहना है कि वह 2015 में अपने शौहर के पास सीरिया गई थी, जो पहले से ISIS का लड़ाका था।

ISIS की ‘जिहादी दुल्हन’ के नवजात बच्चे की मौत, सीरिया से आना चाहती है वापस

2019 में ब्रिटेन ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई शमीमा बेगम के नवजात बेटे की मौत हो गई है। यह जिहाद का जुनून ही था कि आईएसआईएस  में शामिल होने के लिए बेगम महज 15 साल की उम्र में लंदन से भागकर सीरिया पहुँच गई थी। आज उसके उसी जुनून ने उसकी ज़िन्दगी ज़हन्नुम बना दी है।

दुनिया भर में उस समय सुर्खियों में छा गई, जब इस ‘ज़िहादी दुल्हन’ ने उसने सार्वजनिक रूप से ब्रिटिश सरकार से उसे वापस आने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

बांग्लादेशी मूल की ब्रिटिश युवती ने 2015 में सीरिया जाकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल होने का फैसला लिया था। ब्रिटेन से भागकर आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हुई शमीमा बेगम को पिछले दिनों बांग्लादेश और नीदरलैंड्स ने भी झटका दिया था। दोनों ही देशों ने उसे अपने यहाँ शरण देने से मना कर दिया था।

इससे पहले ब्रिटेन ने जिहादी दुल्हन के नाम से पहचान बना चुकी शमीमा की नागरिकता रद्द कर दी थी। तब बांग्लादेश ने अपनी सफाई में कहा था कि शमीमा के पास अब दोहरी नागरिकता नहीं है, इसलिए उसका फिलहाल उनके देश से कोई लेना-देना नहीं है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीरियन डेमोक्रेट के प्रवक्ता ने बताया कि बेगम के नवजात बेटे की मौत खराब स्वास्थ्य के कारण हुई है। दो सप्ताह पहले ही जन्मे बच्चे का नाम जर्राह था और जन्म के समय से ही न्यूमोनिया पीड़ित था।