Showing posts with label #Australia. Show all posts
Showing posts with label #Australia. Show all posts

सीरिया में ISIS से जुड़ने गई थीं 3 जिहादने, ऑस्ट्रेलिया लौटते ही पुलिस ने लिया गिरफ्तार: 8.5 लाख रूपए में औरतें खरीदकर गुलाम बनाने का आरोप, 25 साल सड़ेंगी जेल में

                                                                                              प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: दैनिक जागरण)
सीरिया से लौटते ही ऑस्ट्रेलिया में तीन महिलाओं को आतंकवाद और गुलामी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है। मेलबर्न एयरपोर्ट पर 53 वर्षीय महिला और उसकी 31 वर्षीय बेटी को हिरासत में लिया गया। दोनों पर आरोप है कि वे 2014 में इस्लामिक स्टेट (ISIS) का समर्थन करने के लिए सीरिया गई थीं।

शुरू में तो पैसे के लालच में लड़कियां ISIS में शामिल होने अपना मुल्क छोड़ देती है, लेकिन दुर्गति होने पर ISIS के चुंगल से भाग जाती है। 2019 में भी एक हसीना ब्रिटेन से भाग ISIS में शामिल हो गयी और ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई।      

ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस के मुताबिक, 53 वर्षीय महिला ने करीब 10 हजार अमेरिकी डॉलर (साढ़े 8 लाख से 9 लाख तक) देकर एक महिला को गुलाम के तौर पर खरीदा था, जबकि उसकी बेटी ने उसे अपने घर में गुलाम बनाकर रखा। दोनों पर मानवता के खिलाफ अपराध और गुलामी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, जिनमें 25 साल तक की सजा हो सकती है।

पुलिस के अनुसार, ISIS के पतन के बाद 2019 में कुर्द बलों ने इन महिलाओं को पकड़ लिया था। तब से वे सीरिया के अल-रोज कैंप में रह रही थीं। गुरुवार (7 मई 2026) की रात कतर एयरवेज की फ्लाइट से मेलबर्न पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

वहीं 32 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई महिला जनई सफर को सिडनी एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। उस पर प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने और ISIS में शामिल होने का आरोप है। जाँच एजेंसियों का कहना है कि वह 2015 में अपने शौहर के पास सीरिया गई थी, जो पहले से ISIS का लड़ाका था।

ISIS की ‘जिहादी दुल्हन’ के नवजात बच्चे की मौत, सीरिया से आना चाहती है वापस

2019 में ब्रिटेन ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई शमीमा बेगम के नवजात बेटे की मौत हो गई है। यह जिहाद का जुनून ही था कि आईएसआईएस  में शामिल होने के लिए बेगम महज 15 साल की उम्र में लंदन से भागकर सीरिया पहुँच गई थी। आज उसके उसी जुनून ने उसकी ज़िन्दगी ज़हन्नुम बना दी है।

दुनिया भर में उस समय सुर्खियों में छा गई, जब इस ‘ज़िहादी दुल्हन’ ने उसने सार्वजनिक रूप से ब्रिटिश सरकार से उसे वापस आने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

बांग्लादेशी मूल की ब्रिटिश युवती ने 2015 में सीरिया जाकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल होने का फैसला लिया था। ब्रिटेन से भागकर आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हुई शमीमा बेगम को पिछले दिनों बांग्लादेश और नीदरलैंड्स ने भी झटका दिया था। दोनों ही देशों ने उसे अपने यहाँ शरण देने से मना कर दिया था।

इससे पहले ब्रिटेन ने जिहादी दुल्हन के नाम से पहचान बना चुकी शमीमा की नागरिकता रद्द कर दी थी। तब बांग्लादेश ने अपनी सफाई में कहा था कि शमीमा के पास अब दोहरी नागरिकता नहीं है, इसलिए उसका फिलहाल उनके देश से कोई लेना-देना नहीं है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीरियन डेमोक्रेट के प्रवक्ता ने बताया कि बेगम के नवजात बेटे की मौत खराब स्वास्थ्य के कारण हुई है। दो सप्ताह पहले ही जन्मे बच्चे का नाम जर्राह था और जन्म के समय से ही न्यूमोनिया पीड़ित था।

क्या बांग्लादेशी अंपायर ने ऑस्ट्रेलिया को जितवा दिया मेलबर्न टेस्ट? बैट पर नहीं लगी बॉल, स्निको मीटर में हरकत नहीं… यशस्वी जायसवाल को दिया आउट

                            यशस्वी जायसवाल को आउट देने पर विवाद (फोटो साभार: X_7Cricket)
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम ने मेलबर्न में खेले गए चौथे टेस्ट मैच में भारत को 184 रनों से हराकर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 2-1 की बढ़त बना ली। हालाँकि, इस हार के केंद्र में एक बड़ा विवाद रहा-यशस्वी जायसवाल का विवादास्पद तरीके से आउट होना। पाँचवें दिन शानदार तरीके से भारतीय बल्लेबाजी को संभाल रहे जायसवाल को तीसरे अंपायर ने एक संदिग्ध कैच के बाद आउट करार दिया। इस फैसले को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों और फैन्स के बीच बहस लंबी चलने वाली है।
BCCI को तीसरे अंपायर के विरुद्ध कार्यवाही की मांग करनी चाहिए 
क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि इस मसले को सख्ती के साथ BCCI को ICC में उठाकर तीसरे अंपायर पर कार्यवाही करने की मांग करनी चाहिए। ऐसे विवादित अंपायर कभी भी किसी भी मैच का रुख बदल सकते हैं। हालाँकि ऑस्ट्रेलिया जायसवाल के आउट होने से खुश जरूर है लेकिन तीसरे अंपायर के फैसले पर संदेह कर रहे हैं।  

क्या हुआ था यशस्वी जायसवाल के आउट होने पर?

मेलबर्न टेस्ट के पाँचवें दिन 84 रन बनाकर क्रीज पर जमे हुए यशस्वी जायसवाल ने पैट कमिंस की एक गेंद पर हुक शॉट लगाने की कोशिश की। गेंद यशस्वी जायसवाल के बल्ले और ग्लव्स के पास से निकली, लेकिन कोई स्पष्ट सबूत नहीं था कि गेंद ने बल्ले या ग्लव्स को छुआ हो। ऑन-फील्ड अंपायर ने उन्हें नॉट-आउट करार दिया था, लेकिन कमिंस ने तुरंत डीआरएस का सहारा लिया और ऑन फील्ड अंपायर के फैसले को चुनौती दी।
तीसरे अंपायर बांग्लादेश के शरफुद्दौला सैकत ने वीडियो रीप्ले की कई बार जाँच की। स्निको मीटर ने कोई स्पष्ट आवाज रिकॉर्ड नहीं की थी, जिससे यह पता चलता कि गेंद बल्ले या ग्लव्स से टकराई थी। इसके बावजूद बांग्लादेशी अंपायर शरफुद्दौला सैकत ने पैट कमिंस और ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में फैसला सुना दिया।
जायसवाल इस फैसले से हैरान रह गए। उन्होंने ऑन-फील्ड अंपायरों से बातचीत की, लेकिन फैसले को पलट नहीं सके। निराश जायसवाल को मजबूरी में पवेलियन लौटना पड़ा। भारत उस समय 140 पर सात विकेट गँवा चुका था और जायसवाल के आउट होने से टीम की बची-खुची उम्मीदें भी टूट गईं।

क्यों हो रहा है विवाद?

इस मामले में तकनीकी विफलता और तीसरे अंपायर द्वारा बल्लेबाज को संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) न देने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में जब कोई ठोस सबूत नहीं होता, तो बल्लेबाज के पक्ष में फैसला दिया जाता है। ऐसे में स्निको मीटर और हॉटस्पॉट जैसे उपकरणों की मदद के बावजूद अगर अंपायर पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो सकते, तो उन्हें नॉट-आउट का फैसला देना चाहिए था।
हालाँकि पूर्व इंटरनेशनल अंपायर साइमन टफेल ने तीसरे अंपायर के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने इसके पक्ष में तर्क भी रखा। ये अलग बात है कि अगर जायसवाल को इस मामले में संदेह का लाभ दिया जाता, तो मैच के नतीजे पर भी फर्क पड़ सकता था।

यशस्वी जायसवाल के आउट होते ही बुरी तरह सिमटी भारतीय टीम

जायसवाल ने पहली पारी में भी 82 रनों की शानदार पारी खेली थी और दूसरी पारी में उनके 84 रनों ने भारत को हार से बचाने की उम्मीदें जिंदा रखी थीं। उनकी और ऋषभ पंत की 88 रनों की साझेदारी भारत को जीत की तरफ ले जा रही थी। लेकिन पंत के जल्दी आउट होने के बाद, भारत के बल्लेबाजों ने निराश किया। भारत ने अपने आखिरी सात विकेट केवल 34 रन के भीतर खो दिए। ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क, नाथन लायन और स्कॉट बोलैंड ने घातक प्रदर्शन किया और भारत की पारी को 155 रन पर समेट दिया।
मेलबर्न टेस्ट में भारत की हार ने श्रृंखला में वापसी के उनके प्रयासों को बड़ा झटका दिया है। अब भारत को सिडनी में अंतिम टेस्ट जीतने के अलावा ट्रॉफी बचाने का कोई विकल्प नहीं बचा।

मोदी को बदनाम करने के लिए अवनी डायस ने डॉक्यूमेंट्री में भारत के संविधान को लेकर बोला झूठ, अपनी ‘पत्रकार’ की करतूत ABC News ने कबूली; बीजेपी क्यों नहीं ABC News और इसकी पत्रकार पर कार्यवाही करती?

कहते हैं आदमी के मरने के बाद लकीर पीटने से कुछ नहीं होता, यह बात भारत की जनता पर शत-प्रतिशत लागू होती है। जो शिक्षित होते हुए भी अनपढ़ों की तरह व्यवहार करती है। 2024 लोक सभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को हराने संविधान को लेकर कितनी भ्रांतियों फैलाई गयी। लेकिन शिक्षित भी अनपढ़ बन उन दुष्प्रचार का शिकार हो गया। क्या मेरी आयु(+) वालों को नहीं मालूम कि कांग्रेस ने संविधान में इतने अधिक संशोधन किये कि प्रस्तावना तक बदल दी। क्या संविधान निर्माताओं ने ऐसी प्रस्तावना लिखी थी? यूपीए काल में सोनिया गाँधी को प्रधानमंत्री से अधिक अधिकार क्यों दिए? सोनिया की इजाजत के बिना मनमोहन सिंह में किसी फाइल पर साइन करने की हिम्मत नहीं थी? सोनिया एक सांसद थी किस अधिकार से किसी भी कार्यक्रम में प्रथम पंक्ति में मंत्रिमंडल के साथ बैठती थी? मोदी सरकार ने संविधान से इन असंवैधानिक बातों को निकालकर क्या गलत किया था? और जो नेता ऐसी तर्कहीन बातों को संविधान से निकाले जाने पर देश में आग लगने की बात कहे, क्या ऐसा कोई नेता एक भी वोट का हक़दार है? 

I.N.D.I.गठबंधन को समर्थन करने वालों, अपनी भावी पीढ़ी की चिंता करो और इस I.N.D.I.गठबंधन से जितनी अधिक दूरी बना सकते हो बनाओ, जरा सोंचों: देश का संविधान तब खतरे में नहीं था, जब बहुमत के नशे में कांग्रेस और इसकी समर्थक पार्टियों ने Muslim Waqf Board बनाया था, जब बहुमत के नशे में Minority Commission बना था, तब खतरे में नहीं था जब Muslim Personal Law Board बना दिया था, तब खतरे में नहीं था जब Places of Worship Act बनाया था, तब संविधान खतरे में नहीं था जब Anti-Communal Violence Act बनाया था, ये तो बीजेपी की मेहरबानी से पास नहीं हुआ और 2014 चुनाव हो गया। इस Act के अनुसार दंगा चाहे मुसलमान ने किया हो कसूरवार हिन्दू ही, सजा हिन्दू को, हिन्दू की संपत्ति कुर्क कर मुसलमान को दे दी जाएगी, यानि कांग्रेस और इसके समर्थक पार्टियां जिसे I.N.D.I.गठबंधन कहते हैं भारत को इस्लामिक देश नहीं मुल्क बनाने की तैयारी कर दी थी।   

इमरजेंसी में जनता ने क्या-क्या अत्याचार नहीं हुए, आज की युवा पीढ़ी को नहीं मालूम। अपनी वार्षिक वेतन वृद्धि, पदोन्नति या transfer करवाने या रुकवाने के लिए कर्मचारी को नसबंदी के 2 केस देने होते थे, जो कर्मचारी को झूठे फर्जी केस का प्रमाण लेने के लिए 50-50 रूपए यानि दो केस के 100 रूपए देकर प्राप्त करने होते थे। 

फिल्म "आंधी" को बैन कर दिया था, अभिनेता-निर्माता और निर्देशक मनोज कुमार की बहुचर्चित फिल्म "रोटी कपडा और मकान" का बहुचर्चित गीत " हाय महंगाई तू कहाँ से आयी..." को बैन कर दिया था। इतना ही नहीं, किसी कार्यक्रम में गायक किशोर कुमार ने गाने से मना करने पर रेडियो पर किशोर के गानों को बैन कर दिया था। फिल्म "किस्सा कुर्सी का" सेंसर से पास नहीं होने दिया। मारधार दिखाई जाने वाली फिल्मों को सेंसर पास नहीं करता था, लेकिन गाँधी परिवार के करीबी अमिताभ बच्चन अभिनीत मारधार वाली फिल्म "शोले" पास हो गयी।      


बाप(राजीव गाँधी) कह रहा है कि अगर संविधान बदलने की जरूरत होगी तो हम बार बार संविधान बदलेंगे, हमारे पूर्वजों ने भी कई बार संविधान बदला है और  बेटा(राहुल गाँधी) कह रहा है कि अगर संविधान बदला तो देश में आग लगा देंगे समझ नहीं आता कहां लोचा हो गया है। 

एबीसी की ‘पत्रकार’ अवनी दास के फैलाए फेक न्यूज पर ऑपइंडिया की रिपोर्ट के 2 सप्ताह बाद आखिरकार एबीसी न्यूज ने मान लिया कि उसकी कथित ‘पत्रकार’ अवनी डायस ने भारत के संविधान के बारे में दर्शकों को गुमराह किया है। अब एबीसी न्यूज ने अपनी सफाई दी है।

27 जून 2024 को एबीसी न्यूज ने स्वीकार किया कि अवनी डायस ने ‘भारत की आजादी के साथ ही ‘सेकुलर’ शब्द संविधान का हिस्सा है’ का जो दावा किया है, वो झूठा है। एबीसी न्यूज ने अवनी दास के फेक न्यूज पर सफाई देते हुए कहा कि ‘नरेंद्र मोदी पर बने डॉक्यूमेंट्री, जिसे 5 जून को पब्लिश किया गया था, उसमें ‘भारत के मूल संविधान में सेकुलर’ होने का दावा गलत था।’

अपनी इज्जत बचाने के क्रम में एबीसी न्यूज ने लिखा, ‘भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 1960 के दशक के दौरान पुष्टि की थी कि धर्मनिरपेक्षता भारत के 1950 के संविधान की एक बुनियादी विशेषता है, इस शब्द को 1976 में एक संवैधानिक संशोधन में जोड़ा गया, जिससे भारत का वर्णन “संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य” से बदलकर “संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य” हो गया।’

मामला कैसे शुरू हुआ?

इस विवाद की शुरुआत 5 जून को हुई थी, जब एक तरफ पीएम मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे थे, तो दूसरी तरफ भारत विरोधी शक्तियाँ भारत सरकार और खासकर मोदी सरकार को बदनाम करने के प्रयास में लगातार जुटे हुए थे। इन्हीं प्रयासों में एक है ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) की कथित ‘पत्रकार’ अवनी डायस द्वारा झूठ फैलाने का प्रयास, जिसमें अवनि ने 5 जून 2024 को भारत के संविधान के बारे में फर्जी बातें प्रसारित की।
अवनी डायस ने कुछ समय पहले ही ये फर्जी खबर फैलाई थी कि ‘निगेटिव रिपोर्टिंग’ की वजह से भारत सरकार ने उनका वीजा रद्द कर दिया है, जबकि वो दावा फर्जी निकला था। इस बार अवनि ने दावा किया है कि ‘धर्मनिरपेक्षता’ भारतीय संविधान का अहम हिस्सा है, वो भी अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद यानी 1947 से। अवनी ने ‘नरेंद्र मोदी से पहले के भारत की कहानी’ हेडलाइन के साथ एक वीडियो बनाकर ये बताने की कोशिश की कि भारत में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की धर्मनिरपेक्षता किस तरह के खतरे में है।
अपने वीडियो के 9.19 मिनट पर अवनी डायस ने कहा, “आपको बता दें कि जब 1947 में अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद भारत की स्थापना हुई थी, तो इसके संविधान में लिखा गया था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जिसका मतलब है कि धर्म के आधार पर देश में सभी को आजादी होनी चाहिए।” अवनी ने दावा किया कि भारत के संविधान में सेक्युलर शब्द पेज नंबर 33 पर बड़े अक्षरों में लिखा है।
हालाँकि अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही ‘पत्रकार’ अवनी ये भूल गई कि भारत का संविधान 1947 में लागू नहीं हुआ और जब भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, तब सेक्युलर शब्द उस संविधान का हिस्सा ही नहीं था। बता दें कि भारत का संविधान 1947 में नहीं, बल्कि तीन साल बाद 1950 में लागू हुआ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द को संविधान की प्रस्तावना का हिस्सा 1976 में (आपातकाल के काले दिनों के दौरान) बनाया गया।
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने संसद को दरकिनार कर संविधान में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द शामिल करने के लिए 42वाँ संविधान संशोधन पारित किया था। अवनी डायस के दावों के विपरीत, संविधान यह बताने के लिए नहीं लिखा गया था कि भारत एक ‘धर्मनिरपेक्ष देश’ है। पूरे वीडियो में एबीसी न्यूज के ‘पत्रकार’ ने वैश्विक स्तर पर देश की छवि को धूमिल करने के लिए अटकलों, अनुमानों और मान्यताओं पर भरोसा किया।

पहले भी विवादों में रही हैं अवनी डायस

इसी साल अप्रैल में अवनी डायस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर दावा किया था कि मोदी सरकार ने उनका वीजा नहीं बढ़ाया, जिसकी वजह से उन्हें भारत छोड़ना पड़ा। अवनी ने दावा किया कि ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि उनकी रिपोर्टिंग सरकार को पसंद नहीं आ रही थी। हालाँकि ये पूरी तरह से झूठ था, क्योंकि उन्होंने जैसे ही वीजा के लिए अप्लाई किया, उनका वीजा 2 माह के लिए बढ़ा दिया गया। इसके बावजूद एबीसी न्यूज ने एक आर्टिकल प्रकाशित किया और दावा किया कि भारत के विदेश मंत्रालय ने फोन करके अवनी को सूचित किया था कि उनका वीजा नहीं बढ़ाया जा रहा।
खैर, इस प्रोपेगेंडा से इतर अवनी डायस से जुड़ा एक और मामला भी है। उसने कनाडा में हरदीप निज्जर की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिश करते हुए एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिस पर भारत सरकार रोक लगा चुकी है और यू-ट्यूब पर पर भी उसके मामले में नोटिस दिख रहा है। दरअसल, यो डॉक्यूमेंट्री न सिर्फ तथ्यात्मक रूप से गलत थी, बल्कि भारत के संवेदनशील सीमाई इलाकों में गलत तरीके से फिल्माई गई थी। उन लोकेशन पर शूट करने के लिए गलत तरीके से अनुमति हासिल की गई थी, जिसका बीएसएफ ने भी विरोध किया था।

पहले भी भारत को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाती रही हैं अवनि डायस

अवनी डायस भारत विरोधी, सनातन विरोधी लेखों के लिए जानी जाती है। उसने कई बार प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की, लेकिन हर बार एक्सपोज होती रही। इसी साल मार्च में अवनी डायस ने ब्रिसबेस में स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर पर खालिस्तानी कट्टरपंथियों के हमले को नकारते हुए कट्टरपंथियों को क्लीनचिट देने की कोशिश की थी। उन्हें इसे हिंदू समूहों का ही हमला करार दे दिया था। उनके दावों को खुद ऑस्ट्रेलियन हिंदू मीडिया ने एक्सपोज कर दिया था। एक फेसबुक पोस्ट में ऑस्ट्रेलियन हिंदू मीडिया ने अवनी डायस और उनकी साथी नाओमी सेल्वारत्नम को ‘ब्राउन सिपाही’ की संज्ञा दी थी।

ABC पत्रकार अवनी डायस की रिपोर्ट भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नुकसान पहुँचाने वाला: पूर्व ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त बैरी ओ’फैरेल ने की निंदा

                                                  बैरी ओ'फैरेल (फोटो साभार: Tribune)
ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (ABC) न्यूज़ ने रविवार (16 जून) को भारत पर एक और हमला किया। इसमें मीडिया हाउस ने मोदी सरकार पर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले खालिस्तानियों की हत्या की योजना बनाने का आरोप लगाया है। इस तरह का दुष्प्रचार अभियान चलाने वाले लोगों में एक अवनी डायस हैं। अवनी पहले भारत सरकार द्वारा अपना वीज़ा रद्द किए जाने को लेकर झूठ बोला था।

एबीसी की उस रिपोर्ट को भारत में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व उच्चायुक्त बैरी ओ’फैरेल ने दोनों देशों के संबंधों को कमजोर करने वाला प्रयास बताया है। इंडियनलिंक से बात करते हुए ओ’फैरेल ने कहा, “एबीसी का चार्टर है कि उसे निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ होना चाहिए और उसके पत्रकारों को उन मानकों को बनाए रखना चाहिए।” मुझे चिंता है कि इस तरह के कार्यक्रम के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया-भारत संबंधों को संभावित नुकसान हो सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “रिपोर्ट निराशाजनक थी, क्योंकि ऐसा लग रहा था कि यह आलोचनाओं का एक समूह है, जिसमें दर्शकों को प्रस्तुत मुद्दों पर निर्णय लेने में सक्षम बनाने का प्रयास नहीं किया गया है। चाहे वह सांप्रदायिकता हो, खालिस्तान हो या कनाडा और अमेरिका के आरोप हों।” उन्होंने आगे कहा, “ऑस्ट्रेलिया का कनाडा से स्पष्ट रूप से अलग दृष्टिकोण है, जो भारत के साथ संवाद पसंद करता है। ऑस्ट्रेलिया भारत के साथ अपने संबंधों में अपने मूल्यों को लाना जारी रखता है।”

ओ’फैरेल ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री ट्रूडो द्वारा पहली बार लगाए गए आरोपों (खालिस्तानी आतंकवादी निज्जर की मौत के संबंध में) के लगभग एक साल बाद हमने कनाडा में कोई अदालती कार्रवाई नहीं देखी है। जहाँ तक ​​मेरी जानकारी है, हमने संयुक्त राज्य अमेरिका में भी कोई अदालती कार्रवाई नहीं देखी है।”

पूर्व उच्चायुक्त ने कहा कि यह सुझाव देना कि भारतीयों का ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में शामिल होना, उनकी अपनी उन्नति के लिए है या फिर ऑस्ट्रेलियाई सरकार के भारत के साथ संबंधों को प्रभावित करने के लिए है, उन नागरिकों के खिलाफ पूरी तरह से कलंक है जो उद्यमी और शांतिपूर्ण हैं।

बैरी ओ’फैरेल की टिप्पणी ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) में छपे लेख के जवाब में आई है, जिसका शीर्षक है – नरेंद्र मोदी की भारत सरकार और उसके सहयोगियों पर जासूसी करने, सिख आलोचकों को चुप कराने और ऑस्ट्रेलिया में अपनी दूर-दराज़ की विचारधारा को आगे बढ़ाने का आरोप।


महिला न्यायाधीश को कहा ‘साली’, ‘ये अदालत में क्या चु$# चल रहा है?’: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुरू किया अवमानना का केस, महिला को थमाया नोटिस


ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली एक भारतीय महिला को वीडियो क्रॉन्फ्रेसिंग (VC) के दौरान जज और कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना भारी पड़ गया। आनन-फानन में दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत की आपराधिक अवमानना का केस शुरू कर दिया है।

ऑस्ट्रेलिया से अनिता कुमारी गुप्ता ने 10 जनवरी को VC के जरिए कोर्ट की सुनवाई के लिए लॉगइन किया था। जब जस्टिस नीना बंसल कृष्णा अनिता के केस के लिए अगली तारीख देते हुए सुनवाई के लिए अगला केस उठाया तो उसने कोर्ट जस्टिस कृष्णा के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

जस्टिस नीना के कोर्ट के आदेश को लेकर अनीता तुरंत बोली, “आइटम नंबर 11 को आइटम नंबर 10 से पहले कैसे लिया जा सकता है ये साली क्या कर रही है? कोर्ट में ये क्या चु$# चल रहा है।”

इस पर जस्टिस कृष्णा की कोर्ट ने अनीता गुप्ता को ‘कारण बताओ नोटिस‘ जारी कर दिया। अदालत ने यह कहते हुए ये आदेश दिया है कि वादी अनीता ने ये अभद्र टिप्पणी तब की थी, जब दोनों पक्षों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील अंतिम बहस के लिए दी गई तारीख पर राजी हो गए थे।

                                                     फोटो साभार: बार एंड बेंच

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “न्यायालय की गरिमा को कम करने वाली ऐसी अपमानजनक टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना का केस किया गया है। तदनुसार वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रहने वाली वादी/अनीता कुमारी गुप्ता को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया जाता है कि क्यों न उन्हें अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत दंडित किया जाए।”

इसके साथ ही अनीता को 16 अप्रैल, 2024 को अदालत के सामने खुद खुद उपस्थित होने का आदेश दे डाला। इसके साथ ही कोर्ट ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को ये आदेश भी दिया कि अगर गुप्ता सुनवाई के लिए तय तारीख से पहले भारत आती हैं तो उनके पहुँचते ही उनका पासपोर्ट/वीजा जब्त कर लिया जाए। कोर्ट ने आगे कहा कि गुप्ता को इस कोर्ट के निर्देश के बगैर देश छोड़ने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में भारतीय उच्चायोग को भारत के महावाणिज्य दूतावास, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया के जरिए अपने आदेश के बारे में वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रह रही है अनीता कुमारी गुप्ता को सूचित करने का भी निर्देश दिया। अनीता गुप्ता की तरफ से वकील सुनील मेहता और इशान रॉय चौधरी पेश हुए। कोर्ट उत्तरदाताओं का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता संजीव महाजन ने किया था।

वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पर रखी लात, जूते में भर के शराब: ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के जश्न के तौर-तरीके

जश्न मनाते ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी (चित्र साभार: Mufaddal Vohra/X & DNA)
हर देश के अपने संस्कार और संस्कृति होती है। वर्ल्ड कप जीतने के बाद ट्रॉफी को सम्मान देने ऑस्ट्रेलिया की शायद यही संस्कृति होगी, जैसाकि सोशल मीडिया पर दिख रहा है। दूसरे, जूतों में दाल बांटेगी, यह तो सुना था, लेकिन जूतों में शराब पीने का तरीका ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम ने दिखा दिया। अहमदाबाद में भारत के खिलाफ वर्ल्ड कप 2023 जीतने के बाद अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों के जश्न तस्वीरें वायरल हो रही हैं। ऑस्ट्रेलिया के बैटिंग आलराउंडर मिचेल मार्श की एक ऐसी ही तस्वीर वायरल हुई है जिसमें वह वर्ल्ड कप ट्रॉफी पर पैर रखे हुए दिख रहे हैं।

मिचेल के इस ट्रॉफी पर पैर रखने को कुछ लोग उनका आत्मविश्वास बता रहे हैं तो कुछ इसे ट्रॉफी का अपमान कह रहे हैं। कुछ लोग इसे मिचेल मार्श का खराब रवैया बता रहे हैं तो कुछ लोग सलाह दे रहे हैं कि उन्हें ट्रॉफी का सम्मान करना चाहिए।

माधव शर्मा नाम के एक शख्स से मिचेल मार्श के इस फोटो पर लिखा, “मुझे मिचेल की यह फोटो काफी अपमानजनक लगी है। यह एक ऐसी ट्रॉफी है जिसके लिए क्रिकेटर पूरी जिन्दगी लगा देते हैं और मिचेल ने कूल दिखने के लिए इसके ऊपर पैर रख दिए। यह चौंकाने वाला और भद्दा है।”

एक अन्य व्यक्ति रुद्रा शर्मा ने लिखा, “मिचेल मार्श यह एक पेशेवर खिलाड़ियों का रवैया नहीं है। क्या एक पेशेवर खिलाड़ी एक बड़े पुरस्कार के साथ ऐसे पेश आएगा?”

एक व्यक्ति ने लिखा, “किसी को इतना मत दो कि वह उसका सम्मान ना करे।”

एक अन्य व्यक्ति अमित थाडानी ने लिखा, “सांस्कृतिक अंतर है। इन लोगों को किताबों पर पैर रखने में भी कोई समस्या नहीं है जिसके बारे में हम सपने में नहीं सोच सकते।”

हालाँकि, यह कोई नई बात नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया ने अपनी जीत का जश्न अलग तरीके से मनाया हो। इससे पहले भी उनके अजीब जश्न सामने आए हैं। वर्ष 2021 में टी20 विश्व कप जीतने के बाद भी ऑस्ट्रेलिया ने कुछ ऐसा ही किया था जो कि चर्चा का विषय बना था।

2021 में टी20 वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड को हराने के बाद ऑस्ट्रलिया के खिलाड़ियों ने जूते में भर बियर पी था। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी मार्कस स्टोनिस और मैथ्यू वेड ने जूते से बियर पी था। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था और कुछ लोगों ने इसे गन्दा बताया था।


‘फ# इजरायल, फ# यहूदी’: सिडनी के ओपेरा हाउस पर हमास समर्थकों का उपद्रव, ‘अल्लाहू अकबर’ के नारों के साथ पुलिस पर फेंकी आग

      इस्लामी कट्टरपंथियों ने सिडनी के मशहूर ओपेरा हाउस पर किया उपद्रव (फोटो साभार: X/_jeremyleibler)
इस्लामी आतंकी संगठन हमास की बर्बरता देखने के बाद दुनिया के अधिकतर देश इजरायल के साथ एकजुटता प्रदर्शित कर रहे हैं। दूसरी ओर दुनिया भर के इस्लामी कट्टरपंथी हमास का समर्थन करते हुए यहूदियों और इजरायल को लेकर अपनी नफरत का प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में ‘अल्लाहू अकबर’ के नारों के साथ ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में ओपेरा हाउस पर कट्टरंपथियों ने कब्जे की कोशिश की।

इजरायल के साथ एकजुटता दिखाने के लिए ओपेरा हाउस को 9 अक्टूबर 2023 की शाम इजरायल के झंडे के रंग में रोशन किया गया। इसके विरोध में कट्टरपंथी वहाँ इकट्ठा हो गए और मार्च किया। ओपेरा हाउस पर कब्जे की कोशिश करते हुए आपत्तिजनक नारे लगाए। हमास के हमलों का आतिशबाजी कर जश्न मनाया।

ऑस्ट्रेलियाई यहूदी एसोसिएशन द्वारा एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक वीडियो में कट्टरपंथी भीड़ मार्च करने के बाद सिडनी ओपेरा हाउस पर आग से हमला करती हुई दिखाई दे रही है। इनके उपद्रव के कारण ओपेरा हाउस को इजरायली झंडे के रंग में रोशन करने में एक घंटे की देरी हुई।

डेली मेल ऑस्ट्रेलिया की एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ उपद्रवी नकाबपोश थे और उन्होंने ओपेरा हाउस में एंट्री करने से रोकने के लिए खड़े 100 से अधिक पुलिसकर्मियों पर जलती हुई आग फेंकी।

आतंकवादियों से सहानुभूति रखने वालों को अपमानजनक, अभद्र और यहूदी-विरोधी भाषा बोलते हुए सुना जा सकता है। भीड़ ने इजरायली झंडे को रौंदने और फाड़ने के बाद उसमें आग लगाने की कोशिश की। ‘F*** इजरायल’, ‘F*** यहूदी’, ‘F*** अल्बानीज़’ के साथ ही ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे लगाए।

इस दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने ‘फ्री फिलिस्तीन’ जैसे संदेश वाले बैनर लहराए। न्यू साउथ वेल्स से ग्रीन पार्टी की चीनी मूल की सांसद ने हमास समर्थकों का समर्थन करते हुए और ट्वीट किया है।

हमास समर्थकों के उपद्रव के दौरान पुलिस ने कम से कम तीन लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने हिंसक विरोध प्रदर्शन को देखते हुए यहूदी लोगों को सिडनी ओपेरा हाउस के आसपास के इलाकों में न जाने की चेतावनी दी थी।

जानकारी के मुताबिक, फिलिस्तीन एक्शन ग्रुप, सिडनी ने ‘मुस्लिम उत्पीड़न के खिलाफ रैली’ का आयोजन किया था, जो ओपेरा हाउस तक मार्च करने से पहले टाउन हॉल में एकत्रित हुई। इस दौरान कथित तौर पर उनमें से कई लोगों ने ‘मुसलमानों पर अत्याचार करना बंद करो’ जैसे नारों वाले बैनर और पोस्टर ले रखे थे।

वहीं, ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री एंथनी अल्बानीज ने हमास और आतंकी समर्थकों से तुरंत रैली को रद्द करने के लिए कहा। अल्बानीज ने हिंसा के समर्थकों की तीखी निंदा की। लेकिन उनकी निंदा और अपील से हमास समर्थकों पर कोई फर्क नहीं पड़ा, बल्कि उन्होंने अल्बानीज के लिए जमकर अपशब्द कहे।

ऑस्ट्रेलिया : मगरमच्छ एक्सपर्ट द्वारा 42 कुत्तों से रेप, सेक्स के दौरान 39 मर गए: टॉर्चर करने के लिए बना रखा था रूम

ऑस्ट्रेलिया में एडम ब्रिटन नाम के एक मगरमच्छ विशेषज्ञ को कुत्तों से रेप करने सहित 60 से अधिक आरोपों में दोषी पाया गया है। वह कुत्तों का तब तक रेप करता था, जब तक उनकी मौत नहीं हो जाती थी। इसके अलावा, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो शेयर का भी दोषी पाया गया है। एडम ने खुद पर लगे आरोपों को स्वीकार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एडम ने 42 कुत्तों को टॉर्चर कर उनके साथ रेप किया था। इसमें से 39 कुत्तों की मौत हो गई थी। कुत्तों के साथ रेप करने के दौरान वह उन्हें बुरी तरह से यातनाएँ देता था। इस दौरान वह उनका वीडियो भी बनाता था। एडम ने जिन कुत्तों को अपनी हवस का शिकार बनाया था, उनमें उसके पालतू कुत्ते भी शामिल थे।

आसपास के इलाकों से कुत्तों को पकड़ने के लिए एडम सोशल साइट्स की मदद लेता था। वह ऐसे लोगों की तलाश करता था, जो किसी कारण से अपने पालतू जानवरों को हटाना चाहते थे। एडम कुत्तों के मालिकों से कहता था कि वह उनका अच्छी तरह से खयाल रखेगा। यही नहीं, वह आसपास के अन्य लोगों से संपर्क कर उनके कुत्तों को ले लेता था। इसके बाद उनका रेप करता और वीडियो बनाता था।

यह सब करने के लिए एडम ब्रिटन ने अपने घर पर एक शिपिंग कंटेनर रखा हुआ था। इस कंटेनर में उसने चारों तरफ कैमरे लगा रखे थे। इसे वह ‘टॉर्चर रूम’ कहता था। यहाँ से बनाए हुए वीडियोज को वह अलग-अलग नामों से इंटरनेट पर शेयर करता था। इसके अलावा, कुत्तों से रेप के वीडियो टेलीग्राम के जरिए वह अपने जैसी सोच वालों को भी शेयर करता था।

अप्रैल 2022 में ब्रिटन के एक घर में छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसके लैपटॉप से कुत्तों के रेप के वीडियो समेत बच्चों के यौन शोषण से संबंधित वीडियो भी जब्त किए थे। इसके बाद पुलिस ने 51 वर्षीय एडम को गिरफ्तार कर लिया था। अब कोर्ट ने उसे कुत्तों से रेप, हत्या और उनके वीडियो बनाने तथा बच्चों के यौन शोषण के वीडियो शेयर करने के अपराध में दोषी ठहराया है।

इस मामले में कोर्ट दिसंबर 2023 में एडम ब्रिटन की सजा का ऐलान करेगा। बता दें कि एडम ब्रिटन मशहूर जूलॉजिस्ट और मगरमच्छ विशेषज्ञ है। वह बीबीसी और प्रतिष्ठित नेशनल ज्योग्राफिक चैनल के लिए कई शो कर चुका है। वह 2014 से इस घटना को अंजाम दे रहा था और अप्रैल 2022 में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह हिरासत में था।

जानवरों के साथ सेक्स एक मनोरोग है, जिसे जूफिलिया या बेस्टिएलिटी (Zoophilia or Bestiality) कहते हैं। यह यौन विकृति (पैराफ़िलिया) का एक रूप है, जिसमें जानवरों के साथ यौन कल्पनाएँ की जाती हैं। यह एक तरह की यौन कुंठा होती है या फिर सेक्शुअल फ़ैंटिसी के लिए ऐसा किया जाता है। एनसीबीआई के मुताबिक, कुछ समुदायों में बेस्टिएलिटी को यौन संक्रमित बीमारियों के इलाज के तौर पर देखा जाता है।


पाकिस्तान की तरह खालिस्तान आतंकवाद पर विश्व में अकेला पड़ा कनाडा

कनाडा प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो भूल रहे हैं कि आज 2014 से पहले वाला भारत नहीं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाने के कारण आज विश्व में जिस तरह पाकिस्तान अकेला पड़ा होने के कारण कंगाली के कगार पर पहुँच गया है, अब उसी राह पर कनाडा भी चल पड़ा है। जिस तरह पाकिस्तान इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने किसी भी आतंकी घटना पर भारत को ही दोषी ठहराया करता था, लेकिन मोदी ने जिस तरह आतंकवाद के मुद्दे को विश्व पटल पर उठा, उसको समर्थन देने वाले देशों के भी विरुद्ध खड़ा होने का आग्रह किया, उसी दिन से पाकिस्तान विश्व में अकेला पड़ना शुरू हो गया था, ठीक उसी मार्ग पर कनाडा खड़ा हो गया है। यदि अभी भी अगर कनाडा ने अपने देश में खालिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्यवाही शुरू नहीं की फिर वह दिन भी दूर नहीं जब पाकिस्तान से बुरी हालत कनाडा की होने वाली है। पाकिस्तान को तो कुछ मुस्लिम देश भीख के रूप में अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक मदद कर रहे हैं, लेकिन कनाडा को कौन मदद देगा?   

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर भारत को घेरने के लिए कनाडा ने कई देशों का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन अमेरिका सहित सभी मित्र देशों ने उसके अनुरोध को खारिज कर दिया। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट से यह बात सामने आई है।

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार कनाडाई पीएम ट्रूडो ने कई देशों से समर्थन माँगा था। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया से इस मुद्दे को उठाने और समर्थन का आग्रह किया था। लेकिन भारत के साथ कूटनीतिक गतिरोध पैदा होने की आशंका से सभी देशों ने साथ देने से इनकार कर दिया।

लेख में पीएम मोदी के नेतृत्व में नई दिल्ली की बढ़ती ताकत और प्रभाव के बारे में बताया गया है। बताया गया है कि कैसे उन्होंने भारत को दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्था में लाने का वादा किया है। उनके इस वादे को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध चल रहा है और चीन की रफ्तार भी धीमी हो रही है।

भारत ने हाल ही में मध्य पूर्व-यूरोप को जोड़ने वाले एक प्रोजेक्ट का भी ऐलान किया है। इस आर्थिक गलियारे को चीन के बीआरआई (BRI) के रणनीतिक जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें गलियारे से जुड़ने वाले देश बगैर किसी लोन के चंगुल में फंसकर इसका फायदा पाएँगे, जबकि बीजिंग अपनी वैश्विक बुनियादी ढाँचा विकास योजना के तहत इससे जुड़ने वाले देशों को कर्ज के जाल में फँसाता रहा है।

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि फाइव आईज देशों (ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका का खुफिया गठबंधन) के कई अधिकारियों ने निजी तौर पर निज्जर की हत्या के बारे में चर्चा की थी। लेकिन भारत में जी-20 शिखर सम्मेलन में इसका जिक्र करना सही नहीं समझा।

अवलोकन करें:- 

कभी जस्टिन ट्रूडो के पिता ने खालिस्तानी आतंकियों को दी थी पनाह, अब बेटा दोहरा रहा वही गलतियाँ

भारत और कनाडा के बीच राजनयिक संकट जस्टिन ट्रूडो के 18 सितंबर को कनाडाई संसद में किए गए विचित्र दावों से पैदा हुआ है। इसमें उन्होंने कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए भारत को दोषी ठहराने की कोशिश की थी। इसके अलावा, कनाडाई विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा था कि आरोपों देखते हुए कनाडाई सरकार ने एक शीर्ष भारतीय राजनयिक को निष्कासित कर दिया है। ट्रूडो ने कनाडाई संसद में बिना कोई सबूत दिए भारत पर निज्जर की हत्या का आरोप लगाया था।

नॉन स्टिक पैन में खाना पकाना खतरनाक, 1 दरार आने से निकलते हैं 9000 ‘जहरीले’ पार्टिकल्स: रिसर्च में खुलासा

नॉन स्टिक पैन में बनाया गया खाना खाने से आपकी सेहत को नुकसान पहुँच सकता है। ऑस्ट्रेलिया में फ्लिंडर्स और न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में इसका खुलासा किया है। उन्होंने रिसर्च में दावा किया है कि नॉन स्टिक पैन में खाना बनाते समय इसके लाखों प्लास्टिक पार्टिकल निकलकर खाने में मिल जाते हैं, जो हमें नुकसान पहुँचा सकते हैं। उनके मुताबिक, पैन के तले में बनी एक छोटी से दरार से 9000 से अधिक प्लास्टिक पार्टिकल्स निकलते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि नॉन स्टिक बर्तन धीरे-धीरे कोटिंग खो देते हैं। इसके बाद पैन से लाखों का पार्टिकल निकलकर आपके खाने में मिल जाते हैं। पैन पर तेज आँच पर खाना बनाने से उसमें माइक्रोप्लास्टिक के मिलने की ज्यादा आशंका रहती है।

विगत वर्षों में इसके कारण लोगों को कैंसर, ऑटिज्म और प्रजनन क्षमता पर प्रभाव सहित कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इसकी नॉन स्टिक कोटिंग में पॉलीटेट्राफ्लुओरोएथिलीन (PFTE) नामक एक रसायन का उपयोग किया जाता है, जो कि पेरफ्लूरूओक्टोनोइक एसिड (PFAS) का एक प्रकार है। ऐसा कोई डेटा नहीं है जो यह बताता हो कि यह अन्य प्रकार के पीएफएएस से कम खतरनाक है या ज्यादा।

शोधकर्ताओं ने रमन इमेजिंग तकनीक से फोटॉन स्कैटरिंग के माध्यम से मॉलिक्यूलर लेवल पर टेफ्लॉन कोटिंग पर माइक्रो-प्लास्टिक्स और नॉन-प्लास्टिक की जाँच की है। उन्होंने टेफ्लॉन पैन (Teflon pans) पर एक चम्मच से 5 सेंटीमीटर तक एक स्क्रैच किया। इसके बाद पैन से 2.3 मिलियन यानी 23 लाख माइक्रोप्लास्टिक निकले। कुल मिलाकर पैन के अंदर से 9,000 से अधिक प्लास्टिक पार्टिकल मिले।

ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और शोधकर्ता यूहोंग टैंग (Youhong Tang) का कहना है कि यह शोध हमें सर्तक करता है कि हम लोगों को अपनी हेल्थ से समझौता नहीं करना चाहिए। खाना बनाने के लिए सही बर्तनों के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए।

ऑस्ट्रेलिया T20 : बलात्कार मामले में श्रीलंकाई बल्लेबाज़ धनुष्का गुनातिलका गिरफ्तार

क्रिकेटर गुणतिलका (फाइल फोटो
ऑस्ट्रेलिया में T20 विश्वकप खेलने गए श्रीलंकाई बल्लेबाज धनुष्का गुनातिलका गिरफ्तार हो गए हैं। बताया जा रहा है कि यह गिरफ्तारी सिडनी पुलिस ने 6 नवम्बर 2022 को एक होटल से की है। उन पर रेप का आरोप लगा है।

डेटिंग ऐप पर मिली लड़की ने लगाया रेप का आरोप

कथिततौर पर श्रीलंकाई क्रिकेटर पर बलात्कार का आरोप डेटिंग ऐप पर मिली एक 29 साल की महिला ने लगाया है। श्रीलंका की टीम उनके बिना ही अपने देश लौट आई है। इंग्लैंड से हार कर श्रीलंका की टीम विश्वकप से बाहर हो चुकी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित महिला श्रीलंकाई क्रिकेटर से ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए काफी समय से बात कर रही थी। बताया जा रहा है कि वह इसी 2 नवम्बर 2022 को श्रीलंका के क्रिकेटर से सिडनी के रोज़ बे नाम की जगह पर मिली थी। महिला का आरोप है कि मुलाकात के बाद 31 वर्षीय क्रिकेटर धनुष्का ने उनके सहमति के बिना यौन संबंध बनाए। पुलिस ने महिला की शिकायत पर धनुष्का की तलाश शुरू कर दी थी।
ऑस्ट्रलिया की न्यू साउथ वेल्स की वेबसाइट पर भी यौन शोषण मामले में श्रीलंका के एक नागरिक की गिरफ्तारी का जिक्र है। पुलिस के मुताबिक 6 नवम्बर आरोपित को गिरफ्तार कर के सिडनी सिटी पुलिस स्टेशन लाया गया है। बताया जा रहा है कि श्रीलंकाई क्रिकेटर की जमानत ख़ारिज हो गई है। धनुष्का द्वारा इस फैसले को 7 नवम्बर 2022 को ऊपरी अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

धनुष्का पर पहले भी लगे हैं आरोप

धनुष्का गुनातिलका पर इस तरह का ये पहला आरोप नहीं है। इसी से मिलते-जुलते एक अन्य आरोप में जुलाई 2018 में एक नार्वे की महिला ने उनके दोस्त पर कोलम्बो के एक होटल में अपने साथ रेप किए जाने का आरोप लगाया था। महिला का कहना था कि उसका रेप क्रिकेटर धनुष्का के आगे ही हुआ था। इन आरोपों के बाद गुनातिलका को टीम से कुछ समय के लिए सस्पेंड कर दिया गया था। हालाँकि बाद में उनकी बहाली हो गई थी।
नवम्बर 2015 में अपना क्रिकेट करियर शुरू करने वाले धनुष्का ने श्रीलंका के लिए अब तक 8 टेस्ट, 47 एक दिवसीय और 46 T- 20 मैच खेले हैं।