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पाकिस्तान की तरह खालिस्तान आतंकवाद पर विश्व में अकेला पड़ा कनाडा

कनाडा प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो भूल रहे हैं कि आज 2014 से पहले वाला भारत नहीं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाने के कारण आज विश्व में जिस तरह पाकिस्तान अकेला पड़ा होने के कारण कंगाली के कगार पर पहुँच गया है, अब उसी राह पर कनाडा भी चल पड़ा है। जिस तरह पाकिस्तान इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने किसी भी आतंकी घटना पर भारत को ही दोषी ठहराया करता था, लेकिन मोदी ने जिस तरह आतंकवाद के मुद्दे को विश्व पटल पर उठा, उसको समर्थन देने वाले देशों के भी विरुद्ध खड़ा होने का आग्रह किया, उसी दिन से पाकिस्तान विश्व में अकेला पड़ना शुरू हो गया था, ठीक उसी मार्ग पर कनाडा खड़ा हो गया है। यदि अभी भी अगर कनाडा ने अपने देश में खालिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्यवाही शुरू नहीं की फिर वह दिन भी दूर नहीं जब पाकिस्तान से बुरी हालत कनाडा की होने वाली है। पाकिस्तान को तो कुछ मुस्लिम देश भीख के रूप में अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक मदद कर रहे हैं, लेकिन कनाडा को कौन मदद देगा?   

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर भारत को घेरने के लिए कनाडा ने कई देशों का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन अमेरिका सहित सभी मित्र देशों ने उसके अनुरोध को खारिज कर दिया। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट से यह बात सामने आई है।

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार कनाडाई पीएम ट्रूडो ने कई देशों से समर्थन माँगा था। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया से इस मुद्दे को उठाने और समर्थन का आग्रह किया था। लेकिन भारत के साथ कूटनीतिक गतिरोध पैदा होने की आशंका से सभी देशों ने साथ देने से इनकार कर दिया।

लेख में पीएम मोदी के नेतृत्व में नई दिल्ली की बढ़ती ताकत और प्रभाव के बारे में बताया गया है। बताया गया है कि कैसे उन्होंने भारत को दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्था में लाने का वादा किया है। उनके इस वादे को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध चल रहा है और चीन की रफ्तार भी धीमी हो रही है।

भारत ने हाल ही में मध्य पूर्व-यूरोप को जोड़ने वाले एक प्रोजेक्ट का भी ऐलान किया है। इस आर्थिक गलियारे को चीन के बीआरआई (BRI) के रणनीतिक जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें गलियारे से जुड़ने वाले देश बगैर किसी लोन के चंगुल में फंसकर इसका फायदा पाएँगे, जबकि बीजिंग अपनी वैश्विक बुनियादी ढाँचा विकास योजना के तहत इससे जुड़ने वाले देशों को कर्ज के जाल में फँसाता रहा है।

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि फाइव आईज देशों (ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका का खुफिया गठबंधन) के कई अधिकारियों ने निजी तौर पर निज्जर की हत्या के बारे में चर्चा की थी। लेकिन भारत में जी-20 शिखर सम्मेलन में इसका जिक्र करना सही नहीं समझा।

अवलोकन करें:- 

कभी जस्टिन ट्रूडो के पिता ने खालिस्तानी आतंकियों को दी थी पनाह, अब बेटा दोहरा रहा वही गलतियाँ

भारत और कनाडा के बीच राजनयिक संकट जस्टिन ट्रूडो के 18 सितंबर को कनाडाई संसद में किए गए विचित्र दावों से पैदा हुआ है। इसमें उन्होंने कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए भारत को दोषी ठहराने की कोशिश की थी। इसके अलावा, कनाडाई विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा था कि आरोपों देखते हुए कनाडाई सरकार ने एक शीर्ष भारतीय राजनयिक को निष्कासित कर दिया है। ट्रूडो ने कनाडाई संसद में बिना कोई सबूत दिए भारत पर निज्जर की हत्या का आरोप लगाया था।