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क्रिकेट पर नासिर हुसैन की भारत से नफरत आई सामने, पाकिस्तान-बांग्लादेश के समर्थन में कर रही बैटिंग: ‘उम्माह’ के लिए BCCI-ICC को कोस रहा पूर्व ‘ब्रिटिश’ कैप्टन

                                            क्रिकेटर नासिर हुसैन (साभार-x@sarkarstix )
पूर्व क्रिकेटर नासिर हुसैन का बयान क्रिकेट को जोड़ने के बजाय उसे और बाँटता हुआ दिख रहा है। ICC और BCCI पर सवाल उठाना एक बात है, लेकिन बहिष्कार और अव्यवस्था को पसंद करना क्रिकेट की भावना के खिलाफ है। नासिर हुसैन ने पाकिस्तान के 15 फरवरी को भारत के खिलाफ T20 वर्ल्ड कप मैच का बॉयकॉट करने के फैसले को सही कहा है, उसे वर्ल्ड क्रिकेट में ‘फेयरनेस’ के तौर पर पेश किया जा रहा है।

स्काई स्पोर्ट्स पॉडकास्ट के दौरान हुसैन ने सवाल किया कि अगर भारत ने सरकारी पाबंदियों या सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर कहीं खेलने से मना कर दिया होता, तो क्या ICC इतना ही सख्त रवैया अपनाता। उन्होंने टॉप बॉडी पर असरदार बोर्ड के आगे झुकने का आरोप लगाया, साथ ही बांग्लादेश और पाकिस्तान की ‘अपनी बात पर अड़े रहने’ की तारीफ की।

यह सब बयान बीसीसीआई और भारत को कटघड़े में खड़े करने के लिए थे, जबकि विवाद की जड़ में बांग्लादेश और पाकिस्तान का फैसला था।

हुसैन ने बांग्लादेश की भारत में नहीं खेलने के फैसले की तुलना चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान भारत के पाकिस्तान जाने से मना करने से कर दी। इससे भी उनकी मंशा समझ में आती है।

सबसे पहले, बात करते हैं बहस की अहम वजह बांग्लादेश की। बांग्लादेश को BCCI की मर्जी से T20 वर्ल्ड कप से बाहर नहीं किया गया था। ICC ने अपने सदस्यों की मीटिंग बुलाई थी। चौदह बोर्ड ने बांग्लादेश को शामिल करने के खिलाफ वोट किया। सिर्फ बांग्लादेश और पाकिस्तान की क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने इसका समर्थन किया।

यह भारत का दबाव नहीं था, बल्कि यह दुनिया के ज़्यादातर क्रिकेट खेलने वाले देशों का बांग्लादेश को यह बताना था कि आप किसी ग्लोबल टूर्नामेंट से एक महीने पहले शेड्यूल और कॉन्ट्रैक्ट इस तरह नहीं तोड़ सकते। यह उम्मीद नहीं कर सकते कि बाकी सब इस गड़बड़ी को झेल लेंगे।

बांग्लादेश को अचानक भारत दौरे के दौरान सुरक्षा सताने लगी

जब KKR ने आम लोगों के विरोध को देखते हुए बांग्लादेशी बॉलर मुस्तफिजुर रहमान को अपनी टीम से बाहर निकाल दिया और उसका IPL कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया गया। इसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को अचानक भारत दौरे को लेकर ‘सिक्योरिटी की चिंता’ होने लगी। पहले ऐसा कोई डर नहीं था। टीम पहले भी भारत दौरे पर आ चुकी थी। कैलेंडर काफी पहले से पता था। घबराहट तभी सामने आई जब एक फ्रेंचाइजी का फैसला उन्हें पसंद नहीं आया।

नासिर हुसैन ने केकेआर के फैसले को बीसीसीआई का फैसला मान लिया। BCCI आईपीएल की KKR जैसी फ्रेंचाइजी नहीं चलाता। लीग ऑर्गनाइजर प्राइवेट मालिकों को खास खिलाड़ियों को साइन करने या बनाए रखने के लिए मजबूर नहीं करते हैं, और न ही कर सकते हैं। फ्रेंचाइजी क्रिकेट का पूरा कमर्शियल लॉजिक यही है। अगर इन्वेस्टर्स को बताया जाए कि उन्हें किसे खरीदना है, तो मॉडल खत्म हो जाएगा। कोई भी सीरियस भारतीय बोली लगाने वाला ऐसी लीग में पैसा नहीं लगाएगा जहाँ खिलाड़ियों की पसंद नेशनैलिटी कोटा या पॉलिटिकल प्रेशर से तय होती हो। इसकी जानकारी तो नासिर हुसैन को होगी ही।

अगर बांग्लादेश को लगता कि उसके साथ गलत बर्ताव हो रहा है, तो उसके पास कई ऑप्शन थे, IPL से बात करना, अपने खिलाड़ियों को हिस्सा लेने से रोकना, या बोर्ड के जरिए बातचीत करना। इसके बजाय उसने टूर्नामेंट से कुछ हफ़्ते पहले ही ‘सिक्योरिटी की चिंताएँ’ खड़ी कर दीं, जिससे बहुत ज़्यादा दिक्कतें पैदा हो गईं।

ICC ने उसी तरह जवाब दिया जैसा कोई भी रेगुलेटर देता, उन नियमों और टाइमलाइन को लागू करके जिन पर सब पहले ही राज़ी हो चुके थे और स्कॉर्टलैंड को बांग्लादेश की जगह मौका देकर ये बता दिया कि सबकुछ ठीक है।

हुसैन ने सबसे बड़ी गलती बांग्लादेश के आखिरी मिनट में हटने की तुलना भारत के 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान जाने से मना करने से करके की हैं। वह लोगों को यह नहीं बताते हैं कि भारत ने ICC और PCB दोनों को महीनों पहले ही बता दी थी। वह अपने पॉडकास्ट के दौरान ये नहीं कहते कि भारत में आतंकवाद फैलाने के पीछे पाकिस्तान का हाथ रहा है। भारत ने इसलिए पाकिस्तान में जाने से इनकार किया था।

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुआ आतंकी हमला इसका जीता जागता सबूत है। पाकिस्तानी आतंकवादियों ने भारतीय टूरिस्ट को गैर-मुस्लिम बताकर उन पर गोलियाँ चलाईं। ये घटना चैंपियंस ट्रॉफी खत्म होने के कुछ हफ़्ते बाद हुआ था। यह कोई पुराना इतिहास या एब्स्ट्रैक्ट जियोपॉलिटिक्स नहीं है।

इसके बावजूद, भारत ने एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ अपने मैच खेले। BCCI आसानी से टूर्नामेंट से हट सकता था, लेकिन उसने पूरी तरह से एसोसिएट देशों के कमर्शियल फायदे के लिए खेला। बदले में उसे क्या मिला? पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का एक सिरफिरा चीफ, जो ट्रॉफी लेकर भाग गया। भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया था और टीम ने पाकिस्तान के किसी सियासी व्यक्ति से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया। भारतीय खिलाड़ी चाहते थे कि उन्हें कोई दूसरा व्यक्ति ट्रॉफी दे, लेकिन पीसीबी चीफ अड़े रहे। नतीजा महीनों तक ट्रॉफी पाकिस्तान में पड़ा रहा।

बांग्लादेश को भारत से बॉर्डर पार से आतंक का सामना नहीं करना पड़ता। पाकिस्तान भारत में आतंकियों को भेजता है, हथियार भेजता है और अब नशे का अवैध कारोबार भी करता है। ऐसे में यह दिखाना कि ये एक जैसे हालात हैं, बेईमानी है।

क्या नासिर हुसैन को कई महीनों पहले सुरक्षा कारणों से भारत द्वारा पाकिस्तान में नहीं खेलने और आखिरी मिनट में पॉलिटिकल गुस्से की वजह से बांग्लादेश का टी20 से बाहर जाने के बीच का फर्क नहीं पता।

फिर भावनाओं और भावुकता के क्षण आते हैं। वे कहते हैं, “किसी समय, किसी को कहना चाहिए, बहुत हो गई यह पॉलिटिक्स, क्या हम वापस क्रिकेट खेलना शुरू कर सकते हैं?”

यह PCB नहीं था, जिसने सबके सामने ऐलान किया था कि पाकिस्तान 15 फरवरी को भारत के साथ नहीं खेलेगा। यह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ थे, जिन्होंने भारत के साथ मैच नहीं खेलने की बात कही। जब कोई सरकार का मुखिया खेल का बॉयकॉट करने का ऐलान करता है, तो राजनीति उन्हें नहीं दिखाई देती है।

बल्कि BCCI को ही खेल का राजनीतिकरण करने का आरोप लगा रहे नासिर हुसैन की सोच एकतरफा नजर आती है।

नासिर हुसैन ने खुलकर कहा, ‘मुझे अच्छा लगता है कि बांग्लादेश अपने खिलाड़ियों के लिए डटा रहा। मुझे यह भी पसंद है कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश का समर्थन किया।’ यह सोच क्रिकेट भावना के विरुद्ध है। कोई क्रिकेटर वैश्विक आयोजन के बहिष्कार की तारीफ कैसे कर सकता है?

पूर्व क्रिकेटर नासिर हुसैन ने कहा, ‘सबको बस एक ही चीज चाहिए, निरंतरता। बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए।’ उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘पावर के साथ जिम्मेदारी आती है।’ लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि अनुबंध तोड़ना, मैच न खेलना और अंतिम समय पर टूर्नामेंट में अमूक मैच नहीं खेलने का ऐलान करना किस तरह जिम्मेदारी है?

ICC पर यह आरोप लगाना कि यह BCCI का ही एक एक्सटेंशन है, पूरी सच्चाई से नजर फेरना है। फाइनेंशियल सच्चाई को नजरअंदाज करना है। दरअसल ICC के सबसे बड़े रेवेन्यू ड्राइवर इंडिया-सेंट्रिक ब्रॉडकास्ट डील हैं, खासकर इंडिया-पाकिस्तान मैच। उस पैसे का एक बड़ा हिस्सा एसोसिएट और छोटे बोर्ड को रीडिस्ट्रिब्यूट किया जाता है।

जब पाकिस्तान मैचों का बॉयकॉट करता है या बांग्लादेश शेड्यूल बिगाड़ देता है, तो यह ‘इंडिया को नुकसान’ नहीं पहुँचा रहा है, यह उसी पूल को छोटा कर रहा है जो ग्लोबल क्रिकेट के कमज़ोर सदस्यों को सपोर्ट करता है। ठीक इसीलिए यह आइडिया कि ICC को लगातार कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने में शामिल होना चाहिए, बेतुका है। नियम किसी वजह से होते हैं। अगर आप हारते हैं, तो आपको पैसे देने पड़ते हैं। अगर आप एग्रीमेंट तोड़ते हैं, तो आपको नतीजे भुगतने पड़ते हैं। यह ‘BCCI कंट्रोल’ नहीं है, यह बेसिक गवर्नेंस है।

अगर पाकिस्तान को लगता है कि उसके पास इस सिस्टम के बाहर जिंदा रहने के लिए आर्थिक ताकत है, तो वह कोशिश करने के लिए आज़ाद है। वह एक पैरेलल बॉडी बना सकता है और दूसरों को भी इसमें शामिल होने के लिए मना सकता है। इसे मौजूदा स्ट्रक्चर को नुकसान पहुँचाने और खुद को पीड़ित दिखाने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए।

वर्ल्ड कप 2023, जब हुसैन की इंग्लिश टीम ने नहीं खेला था मैच

पूर्व क्रिकेटर नासिर हुसैन यह भी भूल गए कि उनके नेतृत्व में इंग्लैंड टीम ने राजनीतिक वजहों से जिम्बाब्वे में खेलने से मना कर दिया था। हालाँकि इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात हुसैन का अपना इतिहास है। 2003 के वर्ल्ड कप में, हुसैन की लीडरशिप वाली इंग्लैंड टीम ने जिम्बाब्वे के साथ खेलने से मना कर दिया था, क्योंकि वहाँ रॉबर्ट मुगाबे के शासन का विरोध हो रहा था। वहाँ इंग्लैंड की टीम को कोई सुरक्षा खतरा नहीं था। हुसैन ने उस फैसले का सपोर्ट किया।

उन्होंने ECB पर एक छोटे बोर्ड को धमकाने का आरोप नहीं लगाया। उन्होंने ICC की निरंतरता पर कुछ नहीं कहा। उन्होंने यह शिकायत नहीं की कि क्रिकेट का राजनीतिकरण किया जा रहा है। इसके विपरीत उन्होंने बाद में कहा कि उन्हें अपने इस रवैये पर ‘गर्व’ है।

2009: हुसैन तब कहाँ थे, जब इंग्लैंड ने ज़िम्बाब्वे को वीजा देने से मना कर दिया

साल 2009 में जिम्बाब्वे को T20 वर्ल्ड कप से आसानी से बाहर कर दिया गया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया गया, जिसे ICC ने “विन-विन” सॉल्यूशन कहा। इंग्लैंड ने जिम्बाब्वे के खिलाड़ियों को वीजा देने से मना कर दिया। फिर से, हुसैन ने ताकतवर बोर्ड्स के छोटी टीमों को कुचलने के बारे में कोई बात नहीं कही। ज़िम्मेदारी के बारे में कोई लेक्चर नहीं दिया। जिम्बाब्वे क्रिकेट को ‘कमजोर’ करने पर कोई आँसू नहीं बहाए। साफ़ है, खेल में पॉलिटिक्स तब ठीक है जब इंग्लैंड ऐसा करता है, लेकिन जब भारत नियमों का पालन करने पर जोर देता है, तो यह बहुत बुरा लगता है।

दरअसल हुसैन ने जो बातें कही वह ‘निरंतरता’ के बारे में नहीं है। यह पावर में बदलाव के बारे में है। वर्ल्ड क्रिकेट में सेंटर ऑफ़ ग्रेविटी अब लॉर्ड्स या ECB नहीं है। यह BCCI है। यह सच्चाई एंग्लो कमेंट्री के एक खास हिस्से को परेशान करती है, जो तब पूरी तरह से सहज था जब ‘सिद्धांत’ इंग्लिश हितों के साथ जुड़े होते थे और जब वे नहीं होते थे तो काफ़ी लचीला था।

क्रिकेट कभी भी पॉलिटिकल वैक्यूम में नहीं रहा। 2003 में भी नहीं था। 2009 में भी नहीं था। आज भी नहीं है। फ़र्क यह है कि अब, भारत से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वह दूसरे बोर्ड के पॉलिटिकल नाटकों का खर्च चुपचाप उठाए। ICC को अपने कॉन्ट्रैक्ट लागू करने चाहिए। BCCI को अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए। और पाकिस्तान और बांग्लादेश को यह तय करना चाहिए कि वे नियमों पर आधारित सिस्टम का हिस्सा बनना चाहते हैं या नहीं।

जहाँ तक ​​नासिर हुसैन की बात है, तो ‘कंसिस्टेंसी’ के लिए उनका अचानक आया जुनून ज़्यादा असरदार होगा अगर वे इसे अपने रिकॉर्ड पर लागू करें। जब इंग्लैंड ने ज़िम्बाब्वे का बॉयकॉट किया, तो पॉलिटिक्स और खेल टकराए थे। जब पाकिस्तान अपनी सरकार के कहने पर भारत के साथ खेलने का बॉयकॉट करता है, तो अचानक उनकी भाषा बदल जाती है और सारा दोष BCCI पर डालते हैं कि है इसने क्रिकेट को खराब कर दिया है। यह सिद्धांत नहीं है, यह क्रिकेट पर कंट्रोल खोने का गुस्सा है।

पाकिस्तान को सबक सिखाने का वक्त, IND-PAK मैच छोड़ने पर बांग्लादेश से कड़ी सजा जरूरी: PCB का निकलना चाहिए दिवाला

                       पाकिस्तान को सबक सिखाने का वक्त, प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI ChatGPT)
T20 विश्वकप 2026 में भारत-पाकिस्तान मैच क्रिकेट का सबसे बड़ा त्योहार होता है। कोलंबो में 15 फरवरी को होने वाला यह मुकाबला अरबों दर्शकों की नजरों में होता, ब्रॉडकास्टर्स के लिए सोने की खान। लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने आधिकारिक घोषणा कर दी कि वह इस मैच को नहीं खेलेगा। तटस्थ स्थल पर खेलने का बाध्यकारी अनुबंध होने के बावजूद पाकिस्तान सरकार और PCB ने राजनीतिक ड्रामा शुरू कर दिया।

पाकिस्तान द्वारा यह सिर्फ एक मैच का बहिष्कार नहीं, बल्कि ICC की पूरी व्यवस्था पर हमला है। बांग्लादेश के साथ जो हुआ- सुरक्षा कारणों का हवाला देकर भारत में मैच न खेलने पर उन्हें पूरे टूर्नामेंट से बाहर कर स्कॉटलैंड को जगह दे दी गई, ठीक वही या उससे कड़ी सजा पाकिस्तान को मिलनी चाहिए। अगर पाकिस्तान आखिरी समय पर यह नाटक करता है, तो उसे न सिर्फ विश्वकप से बाहर करना चाहिए, बल्कि आर्थिक रूप से ऐसा कुचलना चाहिए कि PCB कटोरा लेकर ICC के दरवाजे पर भीख माँगने लायक न रहे।

पहले भी मैच खेलने से मना कर चुकी हैं टीमें, लेकिन इस बार…

क्रिकेट इतिहास में कई बार टीमें सुरक्षा या अन्य गंभीर कारणों से मैच छोड़ चुकी हैं। सामान्य नियम यही रहा कि विरोधी टीम को दो पॉइंट्स दे दिए जाते हैं। जैसे- 1996 विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने श्रीलंका में सुरक्षा कारणों से इनकार किया, श्रीलंका को पॉइंट्स मिले। साल 2003 में न्यूजीलैंड ने केन्या में, इंग्लैंड ने जिम्बाब्वे में राजनीतिक-सुरक्षा कारणों से मना किया। लेकिन यहाँ सिर्फ पॉइंट्स कटे। कुल 6-7 ऐसे बड़े मौके आए, जहाँ वजहें पहले से स्पष्ट थीं और टीमें पहले बता चुकी थीं।

लेकिन पाकिस्तान का मामला अलग है। यहाँ कोई ठोस सुरक्षा खतरा नहीं बल्कि सिर्फ राजनीतिक अडंगेबाजी है। ओलंपिक खेलों में ऐसी अडंगेबाजी में सीधे-सीधे देश को ही ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है। लेकिन आईसीसी ने अभी तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया।

दरअसल, ओलंपिक कमेटी अक्सर ऐसे देशों को ओलंपिक से बाहर कर देती है, जिनके खेल संघों में सरकारी दखल हो और वो निश्चित प्रक्रिया या मापदंडों को पूरा नहीं कर पाते हो। आपको याद न हो तो बता दें कि भारत की हॉकी कमेटी पहले लालफीताशाही के दौर पर ब्लैकलिस्ट हो चुकी है। ऐसे में इस बार पाकिस्तान को लेकर भी आईसीसी को यही कदम उठाना होगा। बता दें कि पीसीबी का चीफ मोहसिन नकवी खुद पाकिस्तान का गृहमंत्री है, तो ऐसे में यहाँ सीधे-सीधे राजनीतिक दखल ही है। आईसीसी इसे एक मुद्दा बनाकर भी कदम उठा सकती है।

चूँकि भारत-पाक मैच ICC का सबसे बड़ा रेवेन्यू जनरेटर है। इसमें विज्ञापन दरें 25-40 लाख रुपये प्रति 10 सेकंड की होती है। सिर्फ इसी मैच से 200 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो सकता है। ऐसे में आईसीसी को न सिर्फ कड़े फैसले लेने होंगे, बल्कि नुकसान की भरपाई भी करानी चाहिए। इसकी वजह ये है कि पहले के मामलों में टीमों के मना करने की वजहें वैध होती थी, इसलिए ढील दी जाती थी। लेकिन यहाँ सिर्फ ड्रामा है, जो क्रिकेट को राजनीति का शिकार बना रहा है।

बहरहाल, इसके लिए आईसीसी अब एक बैठक भी करने वाला है। इसी में तय किया जाएगा कि पाकिस्तान को टूर्नामेंट में खेलने की इजाजत मिलेगी या नहीं। अगर मिलती है तो भी कड़ी सजा होगी। लेकिन सवाल यह है कि पाकिस्तान को टी-20 विश्वकप में खेलने की इजाजत दी ही क्यों जाए?

बांग्लादेश को तो पूरी तरह बाहर कर दिया गया क्योंकि उसने आखिरी समय में भारत से मैच शिफ्ट करने की माँग की और ICC ने मना किया। लेकिन पाकिस्तान तटस्थ स्थल कोलंबो में भी नहीं खेलना चाहता। यह दोहरा मापदंड क्यों? ICC अगर ढील देता है, तो कल कोई और टीम भी यही करेगी। जैसे को तैसे का जवाब ही सही रास्ता है।

आईसीसी के पास पाकिस्तान को सबक सिखाने के कई हथियार

पहला: ICC के पास पाकिस्तान को सबक सिखाने के कई हथियार हैं। पहला और सबसे सख्त है- पाकिस्तान को पूरे टूर्नामेंट से प्रतिबंधित कर देगा। पाकिस्तान को बाहर कर युगांडा को जगह दी जा सकती है, जैसा बोर्ड बैठक के बाद तय होगा।

दूसरा: ICC का सालाना रेवेन्यू शेयर रोकना। चूँकि PCB पहले से आर्थिक संकट में है, यह राशि बंद होने से वे दिवालिया हो जाएँगे।

तीसरा: जियो-स्टार जैसे ब्रॉडकास्टर्स को हुए नुकसान की भरपाई PCB से कराना। जिसमें पाकिस्तान को लाखों डॉलर की रकम भरनी पड़ेगी और वो पूरी तरह से भिखारी बन कर हाथ में कटोरा थामने की नौबत में आ जाएगा।

चौथा: द्विपक्षीय सीरीज पर पूरी रोक, WTC अंकों में कटौती और ICC रैंकिंग गिराना।

पाँचवाँ और सबसे घातक: PSL में विदेशी खिलाड़ियों के लिए एनओसी पर ही रोक। यानी पाकिस्तान की लीग पर बाहरी खिलाड़ियों के लिए सीधे-सीधे बैन, हालाँकि सन्न्यास ले चुके या फ्री एजेंट्स पर ये रोक लागू नहीं होगी, लेकिन ऐसे कितने ही खिलाड़ी हैं? चूँकि ऐसे खिलाड़ियों पर आईसीसी से मान्यताप्राप्त सभी टूर्नामेंट्स से बाहर होने का डर रहेगा, तो वो भी पीएसएल से किनारा कर लेंगे।

PSL पाकिस्तान क्रिकेट की लाइफलाइन है। विदेशी स्टार न आएँ तो लीग फ्लॉप हो जाएगी। चूँकि स्पॉन्सर ही नहीं रहेंगे, तो PCB पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा और वो इसका आयोजन भी नहीं करना पाएगा।

ये सजाएँ सिर्फ दंड नहीं बल्कि भविष्य के लिए चेतावनी भी होगी। क्योंकि भारत-पाकिस्तान मैच न होने से सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि क्रिकेट की गरिमा को भी ठेस पहुँची है। ऐसे में ICC अगर सख्त नहीं हुआ, तो उसकी विश्वसनीयता खतरे में पड़ जाएगी। बांग्लादेश के साथ जो हुआ, पाकिस्तान के साथ उससे कड़ा होना चाहिए। यानी उसे सीधे टूर्नामेंट से बाहर करना और दंडात्मक कार्रवाई करना। अगर तब भी पाकिस्तान अकड़ दिखाए, तो सीधे पीसीबी को आईसीसी से बैन कर देना।

हिंदुओं की मौत पर भी चुप्पी, मुस्तफिजुर रहमान के सिर्फ IPL से जाने पर छलका दर्द


3 जनवरी 2025 को लेफ्ट-विंग लिबरल इकोसिस्टम को मोदी सरकार के खिलाफ बोलने का एक और कारण मिल गया, जब बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI) ने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिज़ुर रहमान को आने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) सीजन से रिलीज करने का निर्देश दिया।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में हिंदुओं को अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाए जाने के बाद से टारगेटेड हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। बांग्लादेशी खिलाड़ी रहमान को शामिल किए जाने पर लोगों में काफी गुस्सा था। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बाद बेकाबू इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं के घरों, मंदिरों पर हमला किया। हिन्दुओं की मॉब लिंचिंग हुई। इसके बाद बांग्लादेशी खिलाड़ियों को आईपीएल की टीम में सेलेक्शन का विरोध हुआ और बैन करने की माँग उठने लगी।

BCCI सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने कन्फ़र्म किया कि बोर्ड ने KKR को अपने फैसले के बारे में ऑफ़िशियली बता दिया था और अगर फ़्रैंचाइज़ी चाहे तो उसे रिप्लेसमेंट खिलाड़ी साइन करने की इजाज़त दे दी थी। KKR ने बाद में साफ़ किया कि उसने मुस्तफ़िज़ुर रहमान को अपनी टीम से रिलीज कर दिया है।

हिन्दुओं पर अत्याचारों की वजह से लोगों का गुस्सा

शेख हसीना को हटाए जाने के बाद लगातार भारत-बांग्लादेश के रिश्ते खराब होते जा रहे हैं, लेकिन हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग और ‘ईशनिंदा’ का आरोप लगा कर लगातार हिंदुओं पर हो रहे हमलों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। ये घटनाएँ धार्मिक ज़ुल्म के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा थीं, जिसे बांग्लादेशी सरकार पूरी तरह से रोकने में नाकाम रही है।

NDTV की गार्गी रावत ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया: “सोचिए कि इससे हमारे पड़ोसी बांग्लादेश को कैसा मैसेज जाएगा। संगीत सोम ने अपने घरेलू दर्शकों के लिए पॉइंट्स बनाए होंगे, लेकिन इससे भारत की डिप्लोमेसी और रिश्तों को नुकसान होगा।”

राम गुहा, जो खुद को इतिहासकार बताते हैं और जिन्हें फैक्ट्स को तोड़-मरोड़कर पेश करने और कहानी गढ़ने का हुनर ​​है, ने बीसीसीआई के फैसले को ‘बहुत ही बेवकूफी भरा’ बताया। उन्होंने कहा कि ढाका के साथ अच्छे रिश्तों के लिए क्रिकेट के रिश्ते बहुत जरूरी हैं। इस तरह का कदम बांग्लादेश को इस्लामाबाद के और करीब ला सकता है।

<blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr">This is a deeply unwise move. It is in India&#39;s national interest to have good relations with Bangladesh, and cricketing ties can vitally help in that. This short-sighted decision may only make Dhaka come closer to Islamabad. <a href="https://t.co/B0hWXT2mQa">https://t.co/B0hWXT2mQa</a></p>&mdash; Ramachandra Guha (@Ram_Guha) <a href="https://twitter.com/Ram_Guha/status/2007363042947019032?ref_src=twsrc%5Etfw">January 3, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

विदेशी मामलों की एडिटर सुहासिनी हैदर ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर बांग्लादेश जा सकते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेशी नेताओं से मिल सकते हैं, लेकिन एक क्रिकेटर को भारत में खेलने का हक नहीं दिया जा रहा है।

<blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr">With neighbour after neighbour, the government allows social media campaigns to overpower its diplomacy and destroy Indian soft power. <br><br>EAM Jaishankar can visit Dhaka, PM Modi can meet Bangladesh leader, but a cricketer cant play in an Indian team. <a href="https://t.co/OGo8DfF5zb">https://t.co/OGo8DfF5zb</a></p>&mdash; Suhasini Haidar (@suhasinih) <a href="https://twitter.com/suhasinih/status/2007349271797084245?ref_src=twsrc%5Etfw">January 3, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

इसी बात में और जोड़ते हुए, ‘कॉलमिस्ट’ सबा नकवी ने भी BCCI के निर्देश के कुछ घंटों बाद कहा कि भारत ने दक्षिण एशिया में अपनी सारी ‘नैतिक प्रतिष्ठा’ खो दी है और एक बांग्लादेशी खिलाड़ी को कमर्शियल लीग में खेलने की इजाजत न देकर ‘मतलबी’ बन गया है।

X पर एक लंबे पोस्ट में, नकवी ने कहा कि बांग्लादेश की आजादी में भारत की ऐतिहासिक भूमिका रही है। बांग्लादेश का राष्ट्रगान रवींद्रनाथ टैगोर का लिखा हुआ है। भारत में अभी भी बांग्लादेशी की पूर्व प्रधानमंत्री की मेजबानी कर रहा है, ऐसे हालात में ये फैसला नहीं होना चाहिए था।

उन्होंने आगे दावा किया कि भारत एक ‘बड़ी ताकत की तरह नहीं, बल्कि घटिया और असभ्य स्क्रिप्ट’ चुन रहा है, जो कथित तौर पर आने वाले राज्यों के चुनावों और ‘हिंदू कट्टरपंथियों’ की वजह से हो रहा है। अंत में उन्होंने दुख जताया कि भारत एक ‘नैतिक ताकत जिसकी दुनिया तारीफ़ करती थी’ को गिरा दिया है।

<blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr">We have the deposed Bangladesh prime minister on Indian soil, the national anthem of that country is a composition by Rabindranath Tagore, we have always claimed a historical role in the liberation of Bangladesh. But today we are so mean spirited that we cannot allow an athlete…</p>&mdash; Saba Naqvi (@_sabanaqvi) <a href="https://twitter.com/_sabanaqvi/status/2007442493479268727?ref_src=twsrc%5Etfw">January 3, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

यह तर्क नैतिकता की चिंता के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को महत्वहीन बनाने के लिए दिया गया है। एक बार फिर हिन्दुओं के साथ हो रही हिंसा को एक छोटी सी परेशानी माना गया, जबकि एक विदेशी एथलीट को प्राइवेट लीग से बाहर करने को सभ्यता का संकट बना दिया गया।

नैतिकता में ‘चुनाव’ और पाखंड

नैतिकता पर ये उपदेश सिर्फ भारत की सरकार के लिए होते हैं। अगर विराट कोहली को राजनीतिक कारणों से किसी विदेशी देश में खेलने से रोक दिया जाता, तो वही वामपंथी विचारक तुरंत इसे भारत की विदेश नीति की नाकामी बता देते। कोई भी बैन लगाने वाले देश पर सवाल नहीं उठाता। इसके बजाय, नई दिल्ली से खुद को समझाने के लिए कहा जाता।

यह तरीका सिर्फ खेलों तक ही सीमित नहीं है। जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ लगाए, तो लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम भारत की विदेश नीति पर सवाल खड़े करने लगा। कुछ लोगों ने पूछा कि अमेरिका भारत को वॉशिंगटन के फायदे वाले ट्रेड डील के लिए मजबूर क्यों कर रहा था। हमेशा की तरह, सबसे पहले भारत पर इल्जाम लगाया गया।

यह तरीका सिर्फ खेलों तक ही सीमित नहीं है। जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ लगाए, तो लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम भारत की विदेश नीति पर सवाल खड़े करने लगा। कुछ लोगों ने पूछा कि अमेरिका भारत को वॉशिंगटन के फायदे वाले ट्रेड डील के लिए मजबूर क्यों कर रहा था। हमेशा की तरह, सबसे पहले भारत पर इल्जाम लगाया गया।

क्या बांग्लादेशी अंपायर ने ऑस्ट्रेलिया को जितवा दिया मेलबर्न टेस्ट? बैट पर नहीं लगी बॉल, स्निको मीटर में हरकत नहीं… यशस्वी जायसवाल को दिया आउट

                            यशस्वी जायसवाल को आउट देने पर विवाद (फोटो साभार: X_7Cricket)
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम ने मेलबर्न में खेले गए चौथे टेस्ट मैच में भारत को 184 रनों से हराकर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 2-1 की बढ़त बना ली। हालाँकि, इस हार के केंद्र में एक बड़ा विवाद रहा-यशस्वी जायसवाल का विवादास्पद तरीके से आउट होना। पाँचवें दिन शानदार तरीके से भारतीय बल्लेबाजी को संभाल रहे जायसवाल को तीसरे अंपायर ने एक संदिग्ध कैच के बाद आउट करार दिया। इस फैसले को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों और फैन्स के बीच बहस लंबी चलने वाली है।
BCCI को तीसरे अंपायर के विरुद्ध कार्यवाही की मांग करनी चाहिए 
क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि इस मसले को सख्ती के साथ BCCI को ICC में उठाकर तीसरे अंपायर पर कार्यवाही करने की मांग करनी चाहिए। ऐसे विवादित अंपायर कभी भी किसी भी मैच का रुख बदल सकते हैं। हालाँकि ऑस्ट्रेलिया जायसवाल के आउट होने से खुश जरूर है लेकिन तीसरे अंपायर के फैसले पर संदेह कर रहे हैं।  

क्या हुआ था यशस्वी जायसवाल के आउट होने पर?

मेलबर्न टेस्ट के पाँचवें दिन 84 रन बनाकर क्रीज पर जमे हुए यशस्वी जायसवाल ने पैट कमिंस की एक गेंद पर हुक शॉट लगाने की कोशिश की। गेंद यशस्वी जायसवाल के बल्ले और ग्लव्स के पास से निकली, लेकिन कोई स्पष्ट सबूत नहीं था कि गेंद ने बल्ले या ग्लव्स को छुआ हो। ऑन-फील्ड अंपायर ने उन्हें नॉट-आउट करार दिया था, लेकिन कमिंस ने तुरंत डीआरएस का सहारा लिया और ऑन फील्ड अंपायर के फैसले को चुनौती दी।
तीसरे अंपायर बांग्लादेश के शरफुद्दौला सैकत ने वीडियो रीप्ले की कई बार जाँच की। स्निको मीटर ने कोई स्पष्ट आवाज रिकॉर्ड नहीं की थी, जिससे यह पता चलता कि गेंद बल्ले या ग्लव्स से टकराई थी। इसके बावजूद बांग्लादेशी अंपायर शरफुद्दौला सैकत ने पैट कमिंस और ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में फैसला सुना दिया।
जायसवाल इस फैसले से हैरान रह गए। उन्होंने ऑन-फील्ड अंपायरों से बातचीत की, लेकिन फैसले को पलट नहीं सके। निराश जायसवाल को मजबूरी में पवेलियन लौटना पड़ा। भारत उस समय 140 पर सात विकेट गँवा चुका था और जायसवाल के आउट होने से टीम की बची-खुची उम्मीदें भी टूट गईं।

क्यों हो रहा है विवाद?

इस मामले में तकनीकी विफलता और तीसरे अंपायर द्वारा बल्लेबाज को संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) न देने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में जब कोई ठोस सबूत नहीं होता, तो बल्लेबाज के पक्ष में फैसला दिया जाता है। ऐसे में स्निको मीटर और हॉटस्पॉट जैसे उपकरणों की मदद के बावजूद अगर अंपायर पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो सकते, तो उन्हें नॉट-आउट का फैसला देना चाहिए था।
हालाँकि पूर्व इंटरनेशनल अंपायर साइमन टफेल ने तीसरे अंपायर के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने इसके पक्ष में तर्क भी रखा। ये अलग बात है कि अगर जायसवाल को इस मामले में संदेह का लाभ दिया जाता, तो मैच के नतीजे पर भी फर्क पड़ सकता था।

यशस्वी जायसवाल के आउट होते ही बुरी तरह सिमटी भारतीय टीम

जायसवाल ने पहली पारी में भी 82 रनों की शानदार पारी खेली थी और दूसरी पारी में उनके 84 रनों ने भारत को हार से बचाने की उम्मीदें जिंदा रखी थीं। उनकी और ऋषभ पंत की 88 रनों की साझेदारी भारत को जीत की तरफ ले जा रही थी। लेकिन पंत के जल्दी आउट होने के बाद, भारत के बल्लेबाजों ने निराश किया। भारत ने अपने आखिरी सात विकेट केवल 34 रन के भीतर खो दिए। ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क, नाथन लायन और स्कॉट बोलैंड ने घातक प्रदर्शन किया और भारत की पारी को 155 रन पर समेट दिया।
मेलबर्न टेस्ट में भारत की हार ने श्रृंखला में वापसी के उनके प्रयासों को बड़ा झटका दिया है। अब भारत को सिडनी में अंतिम टेस्ट जीतने के अलावा ट्रॉफी बचाने का कोई विकल्प नहीं बचा।

आईसीसी को BCCI देता है पैसा, फिर पाकिस्तान में क्रिकेटरों को मिलती है फीस : शोएब अख्तर, पूर्व तेज गेंदबाज़, पाकिस्तान

पाकिस्तान पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने एक इंटरव्यू में कहा है कि पाकिस्तान के खिलाड़ी भारत के पैसे से पलते हैं। अपनी बेबाकी के लिए जाने जाने वाले शोएब अख्तर ने कहा कि इंडिया के पैसे से ही पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेटर्स को फीस मिल पाती है। 

शोएब अख्तर को क्रिकेट से संन्यास लिए लंबा वक्त हो चुका है, लेकिन वो अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। भारतीय खेल पत्रकार बोरिआ मजूमदार को दिए करीब 25 मिनट के इंटरव्यू में उन्होंने यह बात कही। BCCI (क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड ऑफ़ इंडिया) के पैसे से पाकिस्तानी क्रिकेटरों का खर्चा चलता है। इसे इंटरव्यू में 7 मिनट 30 सेकंड पर सुना जा सकता है।

शोएब ने कहा कि बीसीसीआई के जरिए आईसीसी के पास आता और ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट कॉउंसिल) रेवेन्यू शेयरिंग के तहत पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को भेजती है। उसी पैसे के दम पर ही पाकिस्तान में घरेलू क्रिकेटर्स को मैच की फीस मिल पाती है।

शोएब ने कहा, “मैं हमेशा अपने मन की बात कहता आया हूँ और आप इसे जानते हैं। मैं पहले दिन से कह रहा हूँ कि पाकिस्तानी टीम को भारत का दौरा करना चाहिए और जहाँ भी कहा जाए वहाँ खेलना चाहिए। हेडलाइन ये नहीं होना चाहिए कि पाकिस्तानी टीम भारत आई, बल्कि ये कि पाकिस्तान भारत आया।”

उन्होंने कहा, “भारत विश्व क्रिकेट के लिए सबसे अधिक पैसा देता है और आईसीसी वास्तव में उस पैसे का उपयोग करता है, जो भारत से आता है। यह वह पैसा है, जो हमें पाकिस्तान में दिया जाता है। इससे हमारे घरेलू क्रिकेट को फंड करने में मदद मिलती है। तो एक तरह से यह भारतीय पैसा है, जो हमारे क्रिकेट की मदद कर रहा है।”

शोएब अख्तर ने भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर बोलते हुए कहा, “वर्ल्ड कप 2023 सबसे अलग और रोमांचक होगा, क्योंकि मुझे अब 50 ओवर क्रिकेट का भविष्य नजर नहीं आ रहा है। मैं चाहता हूँ कि भारत इस विश्व कप से खूब पैसे बनाए।”

शोएब अख्तर ने एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर कहा, “इस सीरीज में भी एक बार फिर दबाव टीम इंडिया पर ही होगा, क्योंकि भारतीय मीडिया की वजह से टीम इंडिया पर काफी दबाव बनता है। हर बार ऐसा ही होता है। भारत पाकिस्तान से इसलिए नहीं हारता कि टैलेंटेड खिलाड़ी उसके पास नहीं है, बल्कि मीडिया का बहुत दबाव रहता है।”

उन्होंने कहा, “पिछली बार भी एशिया कप के दौरान भारतीय मीडिया ने टीम इंडिया पर काफी दबाव बना दिया था। पूरे स्टेडियम को नीले रंग में रंग दिया गया था। ये कहा जा रहा था कि टीम इंडिया पाकिस्तान को आसानी से हरा देगी। इस वजह से हमारे ऊपर प्रदर्शन का कोई दबाव नहीं था। इसका नतीजा ये हुआ कि भारत दबाव में बिखर गया और हम खुलकर खेले और मैच जीत गए थे।”

वर्ल्ड कप 2023 से खूब पैसा कमाएगी BCCI 

वहीं, 2023 वर्ल्ड कप पर बात करते हुए शोएब अख्तर ने कहा, “यह वर्ल्ड कप सुपरहिट होने वाला है। बीसीसीआई इस वर्ल्ड कप से भी काफी पैसा कमाएगी। इससे बीसीसीआई की आर्थिक स्थिति और ज्यादा मजबूत हो जाएगी।”
इस बार वर्ल्ड कप का आयोजन भारत में होगा। यह आयोजन 5 अक्टूबर 2023 से होने वाला है। इस टूर्नामेंट में भारत-पाकिस्तान की टक्कर 14 अक्टूबर को होगी। दोनों टीमें सेमीफाइनल या फाइनल तक पहुँची तो वहाँ भी भारत-पाकिस्तान की टक्कर देखने को मिल सकती है।