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क्रिकेट पर नासिर हुसैन की भारत से नफरत आई सामने, पाकिस्तान-बांग्लादेश के समर्थन में कर रही बैटिंग: ‘उम्माह’ के लिए BCCI-ICC को कोस रहा पूर्व ‘ब्रिटिश’ कैप्टन

                                            क्रिकेटर नासिर हुसैन (साभार-x@sarkarstix )
पूर्व क्रिकेटर नासिर हुसैन का बयान क्रिकेट को जोड़ने के बजाय उसे और बाँटता हुआ दिख रहा है। ICC और BCCI पर सवाल उठाना एक बात है, लेकिन बहिष्कार और अव्यवस्था को पसंद करना क्रिकेट की भावना के खिलाफ है। नासिर हुसैन ने पाकिस्तान के 15 फरवरी को भारत के खिलाफ T20 वर्ल्ड कप मैच का बॉयकॉट करने के फैसले को सही कहा है, उसे वर्ल्ड क्रिकेट में ‘फेयरनेस’ के तौर पर पेश किया जा रहा है।

स्काई स्पोर्ट्स पॉडकास्ट के दौरान हुसैन ने सवाल किया कि अगर भारत ने सरकारी पाबंदियों या सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर कहीं खेलने से मना कर दिया होता, तो क्या ICC इतना ही सख्त रवैया अपनाता। उन्होंने टॉप बॉडी पर असरदार बोर्ड के आगे झुकने का आरोप लगाया, साथ ही बांग्लादेश और पाकिस्तान की ‘अपनी बात पर अड़े रहने’ की तारीफ की।

यह सब बयान बीसीसीआई और भारत को कटघड़े में खड़े करने के लिए थे, जबकि विवाद की जड़ में बांग्लादेश और पाकिस्तान का फैसला था।

हुसैन ने बांग्लादेश की भारत में नहीं खेलने के फैसले की तुलना चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान भारत के पाकिस्तान जाने से मना करने से कर दी। इससे भी उनकी मंशा समझ में आती है।

सबसे पहले, बात करते हैं बहस की अहम वजह बांग्लादेश की। बांग्लादेश को BCCI की मर्जी से T20 वर्ल्ड कप से बाहर नहीं किया गया था। ICC ने अपने सदस्यों की मीटिंग बुलाई थी। चौदह बोर्ड ने बांग्लादेश को शामिल करने के खिलाफ वोट किया। सिर्फ बांग्लादेश और पाकिस्तान की क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने इसका समर्थन किया।

यह भारत का दबाव नहीं था, बल्कि यह दुनिया के ज़्यादातर क्रिकेट खेलने वाले देशों का बांग्लादेश को यह बताना था कि आप किसी ग्लोबल टूर्नामेंट से एक महीने पहले शेड्यूल और कॉन्ट्रैक्ट इस तरह नहीं तोड़ सकते। यह उम्मीद नहीं कर सकते कि बाकी सब इस गड़बड़ी को झेल लेंगे।

बांग्लादेश को अचानक भारत दौरे के दौरान सुरक्षा सताने लगी

जब KKR ने आम लोगों के विरोध को देखते हुए बांग्लादेशी बॉलर मुस्तफिजुर रहमान को अपनी टीम से बाहर निकाल दिया और उसका IPL कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया गया। इसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को अचानक भारत दौरे को लेकर ‘सिक्योरिटी की चिंता’ होने लगी। पहले ऐसा कोई डर नहीं था। टीम पहले भी भारत दौरे पर आ चुकी थी। कैलेंडर काफी पहले से पता था। घबराहट तभी सामने आई जब एक फ्रेंचाइजी का फैसला उन्हें पसंद नहीं आया।

नासिर हुसैन ने केकेआर के फैसले को बीसीसीआई का फैसला मान लिया। BCCI आईपीएल की KKR जैसी फ्रेंचाइजी नहीं चलाता। लीग ऑर्गनाइजर प्राइवेट मालिकों को खास खिलाड़ियों को साइन करने या बनाए रखने के लिए मजबूर नहीं करते हैं, और न ही कर सकते हैं। फ्रेंचाइजी क्रिकेट का पूरा कमर्शियल लॉजिक यही है। अगर इन्वेस्टर्स को बताया जाए कि उन्हें किसे खरीदना है, तो मॉडल खत्म हो जाएगा। कोई भी सीरियस भारतीय बोली लगाने वाला ऐसी लीग में पैसा नहीं लगाएगा जहाँ खिलाड़ियों की पसंद नेशनैलिटी कोटा या पॉलिटिकल प्रेशर से तय होती हो। इसकी जानकारी तो नासिर हुसैन को होगी ही।

अगर बांग्लादेश को लगता कि उसके साथ गलत बर्ताव हो रहा है, तो उसके पास कई ऑप्शन थे, IPL से बात करना, अपने खिलाड़ियों को हिस्सा लेने से रोकना, या बोर्ड के जरिए बातचीत करना। इसके बजाय उसने टूर्नामेंट से कुछ हफ़्ते पहले ही ‘सिक्योरिटी की चिंताएँ’ खड़ी कर दीं, जिससे बहुत ज़्यादा दिक्कतें पैदा हो गईं।

ICC ने उसी तरह जवाब दिया जैसा कोई भी रेगुलेटर देता, उन नियमों और टाइमलाइन को लागू करके जिन पर सब पहले ही राज़ी हो चुके थे और स्कॉर्टलैंड को बांग्लादेश की जगह मौका देकर ये बता दिया कि सबकुछ ठीक है।

हुसैन ने सबसे बड़ी गलती बांग्लादेश के आखिरी मिनट में हटने की तुलना भारत के 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान जाने से मना करने से करके की हैं। वह लोगों को यह नहीं बताते हैं कि भारत ने ICC और PCB दोनों को महीनों पहले ही बता दी थी। वह अपने पॉडकास्ट के दौरान ये नहीं कहते कि भारत में आतंकवाद फैलाने के पीछे पाकिस्तान का हाथ रहा है। भारत ने इसलिए पाकिस्तान में जाने से इनकार किया था।

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुआ आतंकी हमला इसका जीता जागता सबूत है। पाकिस्तानी आतंकवादियों ने भारतीय टूरिस्ट को गैर-मुस्लिम बताकर उन पर गोलियाँ चलाईं। ये घटना चैंपियंस ट्रॉफी खत्म होने के कुछ हफ़्ते बाद हुआ था। यह कोई पुराना इतिहास या एब्स्ट्रैक्ट जियोपॉलिटिक्स नहीं है।

इसके बावजूद, भारत ने एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ अपने मैच खेले। BCCI आसानी से टूर्नामेंट से हट सकता था, लेकिन उसने पूरी तरह से एसोसिएट देशों के कमर्शियल फायदे के लिए खेला। बदले में उसे क्या मिला? पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का एक सिरफिरा चीफ, जो ट्रॉफी लेकर भाग गया। भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया था और टीम ने पाकिस्तान के किसी सियासी व्यक्ति से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया। भारतीय खिलाड़ी चाहते थे कि उन्हें कोई दूसरा व्यक्ति ट्रॉफी दे, लेकिन पीसीबी चीफ अड़े रहे। नतीजा महीनों तक ट्रॉफी पाकिस्तान में पड़ा रहा।

बांग्लादेश को भारत से बॉर्डर पार से आतंक का सामना नहीं करना पड़ता। पाकिस्तान भारत में आतंकियों को भेजता है, हथियार भेजता है और अब नशे का अवैध कारोबार भी करता है। ऐसे में यह दिखाना कि ये एक जैसे हालात हैं, बेईमानी है।

क्या नासिर हुसैन को कई महीनों पहले सुरक्षा कारणों से भारत द्वारा पाकिस्तान में नहीं खेलने और आखिरी मिनट में पॉलिटिकल गुस्से की वजह से बांग्लादेश का टी20 से बाहर जाने के बीच का फर्क नहीं पता।

फिर भावनाओं और भावुकता के क्षण आते हैं। वे कहते हैं, “किसी समय, किसी को कहना चाहिए, बहुत हो गई यह पॉलिटिक्स, क्या हम वापस क्रिकेट खेलना शुरू कर सकते हैं?”

यह PCB नहीं था, जिसने सबके सामने ऐलान किया था कि पाकिस्तान 15 फरवरी को भारत के साथ नहीं खेलेगा। यह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ थे, जिन्होंने भारत के साथ मैच नहीं खेलने की बात कही। जब कोई सरकार का मुखिया खेल का बॉयकॉट करने का ऐलान करता है, तो राजनीति उन्हें नहीं दिखाई देती है।

बल्कि BCCI को ही खेल का राजनीतिकरण करने का आरोप लगा रहे नासिर हुसैन की सोच एकतरफा नजर आती है।

नासिर हुसैन ने खुलकर कहा, ‘मुझे अच्छा लगता है कि बांग्लादेश अपने खिलाड़ियों के लिए डटा रहा। मुझे यह भी पसंद है कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश का समर्थन किया।’ यह सोच क्रिकेट भावना के विरुद्ध है। कोई क्रिकेटर वैश्विक आयोजन के बहिष्कार की तारीफ कैसे कर सकता है?

पूर्व क्रिकेटर नासिर हुसैन ने कहा, ‘सबको बस एक ही चीज चाहिए, निरंतरता। बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए।’ उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘पावर के साथ जिम्मेदारी आती है।’ लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि अनुबंध तोड़ना, मैच न खेलना और अंतिम समय पर टूर्नामेंट में अमूक मैच नहीं खेलने का ऐलान करना किस तरह जिम्मेदारी है?

ICC पर यह आरोप लगाना कि यह BCCI का ही एक एक्सटेंशन है, पूरी सच्चाई से नजर फेरना है। फाइनेंशियल सच्चाई को नजरअंदाज करना है। दरअसल ICC के सबसे बड़े रेवेन्यू ड्राइवर इंडिया-सेंट्रिक ब्रॉडकास्ट डील हैं, खासकर इंडिया-पाकिस्तान मैच। उस पैसे का एक बड़ा हिस्सा एसोसिएट और छोटे बोर्ड को रीडिस्ट्रिब्यूट किया जाता है।

जब पाकिस्तान मैचों का बॉयकॉट करता है या बांग्लादेश शेड्यूल बिगाड़ देता है, तो यह ‘इंडिया को नुकसान’ नहीं पहुँचा रहा है, यह उसी पूल को छोटा कर रहा है जो ग्लोबल क्रिकेट के कमज़ोर सदस्यों को सपोर्ट करता है। ठीक इसीलिए यह आइडिया कि ICC को लगातार कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने में शामिल होना चाहिए, बेतुका है। नियम किसी वजह से होते हैं। अगर आप हारते हैं, तो आपको पैसे देने पड़ते हैं। अगर आप एग्रीमेंट तोड़ते हैं, तो आपको नतीजे भुगतने पड़ते हैं। यह ‘BCCI कंट्रोल’ नहीं है, यह बेसिक गवर्नेंस है।

अगर पाकिस्तान को लगता है कि उसके पास इस सिस्टम के बाहर जिंदा रहने के लिए आर्थिक ताकत है, तो वह कोशिश करने के लिए आज़ाद है। वह एक पैरेलल बॉडी बना सकता है और दूसरों को भी इसमें शामिल होने के लिए मना सकता है। इसे मौजूदा स्ट्रक्चर को नुकसान पहुँचाने और खुद को पीड़ित दिखाने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए।

वर्ल्ड कप 2023, जब हुसैन की इंग्लिश टीम ने नहीं खेला था मैच

पूर्व क्रिकेटर नासिर हुसैन यह भी भूल गए कि उनके नेतृत्व में इंग्लैंड टीम ने राजनीतिक वजहों से जिम्बाब्वे में खेलने से मना कर दिया था। हालाँकि इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात हुसैन का अपना इतिहास है। 2003 के वर्ल्ड कप में, हुसैन की लीडरशिप वाली इंग्लैंड टीम ने जिम्बाब्वे के साथ खेलने से मना कर दिया था, क्योंकि वहाँ रॉबर्ट मुगाबे के शासन का विरोध हो रहा था। वहाँ इंग्लैंड की टीम को कोई सुरक्षा खतरा नहीं था। हुसैन ने उस फैसले का सपोर्ट किया।

उन्होंने ECB पर एक छोटे बोर्ड को धमकाने का आरोप नहीं लगाया। उन्होंने ICC की निरंतरता पर कुछ नहीं कहा। उन्होंने यह शिकायत नहीं की कि क्रिकेट का राजनीतिकरण किया जा रहा है। इसके विपरीत उन्होंने बाद में कहा कि उन्हें अपने इस रवैये पर ‘गर्व’ है।

2009: हुसैन तब कहाँ थे, जब इंग्लैंड ने ज़िम्बाब्वे को वीजा देने से मना कर दिया

साल 2009 में जिम्बाब्वे को T20 वर्ल्ड कप से आसानी से बाहर कर दिया गया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया गया, जिसे ICC ने “विन-विन” सॉल्यूशन कहा। इंग्लैंड ने जिम्बाब्वे के खिलाड़ियों को वीजा देने से मना कर दिया। फिर से, हुसैन ने ताकतवर बोर्ड्स के छोटी टीमों को कुचलने के बारे में कोई बात नहीं कही। ज़िम्मेदारी के बारे में कोई लेक्चर नहीं दिया। जिम्बाब्वे क्रिकेट को ‘कमजोर’ करने पर कोई आँसू नहीं बहाए। साफ़ है, खेल में पॉलिटिक्स तब ठीक है जब इंग्लैंड ऐसा करता है, लेकिन जब भारत नियमों का पालन करने पर जोर देता है, तो यह बहुत बुरा लगता है।

दरअसल हुसैन ने जो बातें कही वह ‘निरंतरता’ के बारे में नहीं है। यह पावर में बदलाव के बारे में है। वर्ल्ड क्रिकेट में सेंटर ऑफ़ ग्रेविटी अब लॉर्ड्स या ECB नहीं है। यह BCCI है। यह सच्चाई एंग्लो कमेंट्री के एक खास हिस्से को परेशान करती है, जो तब पूरी तरह से सहज था जब ‘सिद्धांत’ इंग्लिश हितों के साथ जुड़े होते थे और जब वे नहीं होते थे तो काफ़ी लचीला था।

क्रिकेट कभी भी पॉलिटिकल वैक्यूम में नहीं रहा। 2003 में भी नहीं था। 2009 में भी नहीं था। आज भी नहीं है। फ़र्क यह है कि अब, भारत से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वह दूसरे बोर्ड के पॉलिटिकल नाटकों का खर्च चुपचाप उठाए। ICC को अपने कॉन्ट्रैक्ट लागू करने चाहिए। BCCI को अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए। और पाकिस्तान और बांग्लादेश को यह तय करना चाहिए कि वे नियमों पर आधारित सिस्टम का हिस्सा बनना चाहते हैं या नहीं।

जहाँ तक ​​नासिर हुसैन की बात है, तो ‘कंसिस्टेंसी’ के लिए उनका अचानक आया जुनून ज़्यादा असरदार होगा अगर वे इसे अपने रिकॉर्ड पर लागू करें। जब इंग्लैंड ने ज़िम्बाब्वे का बॉयकॉट किया, तो पॉलिटिक्स और खेल टकराए थे। जब पाकिस्तान अपनी सरकार के कहने पर भारत के साथ खेलने का बॉयकॉट करता है, तो अचानक उनकी भाषा बदल जाती है और सारा दोष BCCI पर डालते हैं कि है इसने क्रिकेट को खराब कर दिया है। यह सिद्धांत नहीं है, यह क्रिकेट पर कंट्रोल खोने का गुस्सा है।

पाकिस्तान को सबक सिखाने का वक्त, IND-PAK मैच छोड़ने पर बांग्लादेश से कड़ी सजा जरूरी: PCB का निकलना चाहिए दिवाला

                       पाकिस्तान को सबक सिखाने का वक्त, प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI ChatGPT)
T20 विश्वकप 2026 में भारत-पाकिस्तान मैच क्रिकेट का सबसे बड़ा त्योहार होता है। कोलंबो में 15 फरवरी को होने वाला यह मुकाबला अरबों दर्शकों की नजरों में होता, ब्रॉडकास्टर्स के लिए सोने की खान। लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने आधिकारिक घोषणा कर दी कि वह इस मैच को नहीं खेलेगा। तटस्थ स्थल पर खेलने का बाध्यकारी अनुबंध होने के बावजूद पाकिस्तान सरकार और PCB ने राजनीतिक ड्रामा शुरू कर दिया।

पाकिस्तान द्वारा यह सिर्फ एक मैच का बहिष्कार नहीं, बल्कि ICC की पूरी व्यवस्था पर हमला है। बांग्लादेश के साथ जो हुआ- सुरक्षा कारणों का हवाला देकर भारत में मैच न खेलने पर उन्हें पूरे टूर्नामेंट से बाहर कर स्कॉटलैंड को जगह दे दी गई, ठीक वही या उससे कड़ी सजा पाकिस्तान को मिलनी चाहिए। अगर पाकिस्तान आखिरी समय पर यह नाटक करता है, तो उसे न सिर्फ विश्वकप से बाहर करना चाहिए, बल्कि आर्थिक रूप से ऐसा कुचलना चाहिए कि PCB कटोरा लेकर ICC के दरवाजे पर भीख माँगने लायक न रहे।

पहले भी मैच खेलने से मना कर चुकी हैं टीमें, लेकिन इस बार…

क्रिकेट इतिहास में कई बार टीमें सुरक्षा या अन्य गंभीर कारणों से मैच छोड़ चुकी हैं। सामान्य नियम यही रहा कि विरोधी टीम को दो पॉइंट्स दे दिए जाते हैं। जैसे- 1996 विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने श्रीलंका में सुरक्षा कारणों से इनकार किया, श्रीलंका को पॉइंट्स मिले। साल 2003 में न्यूजीलैंड ने केन्या में, इंग्लैंड ने जिम्बाब्वे में राजनीतिक-सुरक्षा कारणों से मना किया। लेकिन यहाँ सिर्फ पॉइंट्स कटे। कुल 6-7 ऐसे बड़े मौके आए, जहाँ वजहें पहले से स्पष्ट थीं और टीमें पहले बता चुकी थीं।

लेकिन पाकिस्तान का मामला अलग है। यहाँ कोई ठोस सुरक्षा खतरा नहीं बल्कि सिर्फ राजनीतिक अडंगेबाजी है। ओलंपिक खेलों में ऐसी अडंगेबाजी में सीधे-सीधे देश को ही ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है। लेकिन आईसीसी ने अभी तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया।

दरअसल, ओलंपिक कमेटी अक्सर ऐसे देशों को ओलंपिक से बाहर कर देती है, जिनके खेल संघों में सरकारी दखल हो और वो निश्चित प्रक्रिया या मापदंडों को पूरा नहीं कर पाते हो। आपको याद न हो तो बता दें कि भारत की हॉकी कमेटी पहले लालफीताशाही के दौर पर ब्लैकलिस्ट हो चुकी है। ऐसे में इस बार पाकिस्तान को लेकर भी आईसीसी को यही कदम उठाना होगा। बता दें कि पीसीबी का चीफ मोहसिन नकवी खुद पाकिस्तान का गृहमंत्री है, तो ऐसे में यहाँ सीधे-सीधे राजनीतिक दखल ही है। आईसीसी इसे एक मुद्दा बनाकर भी कदम उठा सकती है।

चूँकि भारत-पाक मैच ICC का सबसे बड़ा रेवेन्यू जनरेटर है। इसमें विज्ञापन दरें 25-40 लाख रुपये प्रति 10 सेकंड की होती है। सिर्फ इसी मैच से 200 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो सकता है। ऐसे में आईसीसी को न सिर्फ कड़े फैसले लेने होंगे, बल्कि नुकसान की भरपाई भी करानी चाहिए। इसकी वजह ये है कि पहले के मामलों में टीमों के मना करने की वजहें वैध होती थी, इसलिए ढील दी जाती थी। लेकिन यहाँ सिर्फ ड्रामा है, जो क्रिकेट को राजनीति का शिकार बना रहा है।

बहरहाल, इसके लिए आईसीसी अब एक बैठक भी करने वाला है। इसी में तय किया जाएगा कि पाकिस्तान को टूर्नामेंट में खेलने की इजाजत मिलेगी या नहीं। अगर मिलती है तो भी कड़ी सजा होगी। लेकिन सवाल यह है कि पाकिस्तान को टी-20 विश्वकप में खेलने की इजाजत दी ही क्यों जाए?

बांग्लादेश को तो पूरी तरह बाहर कर दिया गया क्योंकि उसने आखिरी समय में भारत से मैच शिफ्ट करने की माँग की और ICC ने मना किया। लेकिन पाकिस्तान तटस्थ स्थल कोलंबो में भी नहीं खेलना चाहता। यह दोहरा मापदंड क्यों? ICC अगर ढील देता है, तो कल कोई और टीम भी यही करेगी। जैसे को तैसे का जवाब ही सही रास्ता है।

आईसीसी के पास पाकिस्तान को सबक सिखाने के कई हथियार

पहला: ICC के पास पाकिस्तान को सबक सिखाने के कई हथियार हैं। पहला और सबसे सख्त है- पाकिस्तान को पूरे टूर्नामेंट से प्रतिबंधित कर देगा। पाकिस्तान को बाहर कर युगांडा को जगह दी जा सकती है, जैसा बोर्ड बैठक के बाद तय होगा।

दूसरा: ICC का सालाना रेवेन्यू शेयर रोकना। चूँकि PCB पहले से आर्थिक संकट में है, यह राशि बंद होने से वे दिवालिया हो जाएँगे।

तीसरा: जियो-स्टार जैसे ब्रॉडकास्टर्स को हुए नुकसान की भरपाई PCB से कराना। जिसमें पाकिस्तान को लाखों डॉलर की रकम भरनी पड़ेगी और वो पूरी तरह से भिखारी बन कर हाथ में कटोरा थामने की नौबत में आ जाएगा।

चौथा: द्विपक्षीय सीरीज पर पूरी रोक, WTC अंकों में कटौती और ICC रैंकिंग गिराना।

पाँचवाँ और सबसे घातक: PSL में विदेशी खिलाड़ियों के लिए एनओसी पर ही रोक। यानी पाकिस्तान की लीग पर बाहरी खिलाड़ियों के लिए सीधे-सीधे बैन, हालाँकि सन्न्यास ले चुके या फ्री एजेंट्स पर ये रोक लागू नहीं होगी, लेकिन ऐसे कितने ही खिलाड़ी हैं? चूँकि ऐसे खिलाड़ियों पर आईसीसी से मान्यताप्राप्त सभी टूर्नामेंट्स से बाहर होने का डर रहेगा, तो वो भी पीएसएल से किनारा कर लेंगे।

PSL पाकिस्तान क्रिकेट की लाइफलाइन है। विदेशी स्टार न आएँ तो लीग फ्लॉप हो जाएगी। चूँकि स्पॉन्सर ही नहीं रहेंगे, तो PCB पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा और वो इसका आयोजन भी नहीं करना पाएगा।

ये सजाएँ सिर्फ दंड नहीं बल्कि भविष्य के लिए चेतावनी भी होगी। क्योंकि भारत-पाकिस्तान मैच न होने से सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि क्रिकेट की गरिमा को भी ठेस पहुँची है। ऐसे में ICC अगर सख्त नहीं हुआ, तो उसकी विश्वसनीयता खतरे में पड़ जाएगी। बांग्लादेश के साथ जो हुआ, पाकिस्तान के साथ उससे कड़ा होना चाहिए। यानी उसे सीधे टूर्नामेंट से बाहर करना और दंडात्मक कार्रवाई करना। अगर तब भी पाकिस्तान अकड़ दिखाए, तो सीधे पीसीबी को आईसीसी से बैन कर देना।

वर्ल्ड कप से बाहर हुए शाकिब अल हसन ; ‘मेरे पास बाकी थे 5 सेकेंड’: ‘टाइम्ड आउट’ होने वाले एंजिलो मैथ्यूज ने वीडियो शेयर कर ICC से माँगा न्याय

एं                       जिलो मैथ्यूज ने साकिब को आउट करके दिखाया बाहर का रास्ता (फोटो साभार : ESPNCRICINFO)
श्रीलंका के वरिष्ठ आल राउंडर एंजिलो मैथ्यूज ने दावा किया है कि वो टाइम आउट नहीं थे, बल्कि उनके पास पूरे 5 सेकंड बाकी थे। उन्होंने बाकायदा टीवी फुटेज भी अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। उन्होंने आईसीसी से ‘न्याय’ की माँग की है। इस बीच, उन्हें आउट करने वाले शाकिब अल हसन विश्वकप से बाहर हो गए हैं। बताया गया है कि वो श्रीलंका के खिलाफ मैच के दौरान ही घायल हो गए थे और अब कम से कम 3-4 सप्ताह के लिए खेल से बाहर हो गए हैं।

मैथ्यूज बोले-मैं तो बेगुनाह था, गलत सजा मिली

श्रीलंका के स्टार ऑल राउंडर एंजेलो मैथ्यूज ने मैच का एक वीडियो शेयर किया। उसमें उन्होंने ये बताने की कोशिश की है कि वो दो मिनट की समय सीमा के अंदर पिच पर पहुँच गए थे और बल्लेबाज़ी के लिए तैयार थे, लेकिन आखिरी वक़्त पर हेलमेट का स्ट्रिप टूट गया था।
अपने दूसरे पोस्ट में मैथ्यूज ने दो तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे वो दो मिनट के अंदर पिच पर पहुँच कर खेलने के लिए तैयार थे, लेकिन इसी बीच उनके हेलमेट का स्ट्रेप टूट गया था। इसमें उन्होंने मैच के फुटेज का टाइम स्टैंप भी दिखाया है।

हर्षा भोगले बोले – मैथ्यूज को आउट दिया जाना सही

इस पूरे विवाद पर जाने-माने क्रिकेट कमेंटेटर और एक्सपर्ट हर्षा भोगले ने विस्तार से चर्चा की है और बताया है कि क्यों मैथ्यूज आउट थे। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “आपको अंपायरों पर विश्वास करना होगा। यदि वे कहते हैं कि दो मिनट बीत गए थे, तो उन्होंने ऐसा किया था क्योंकि ये बहुत अनुभवी और बहुत अच्छे अंपायर हैं और उनसे ऐसी गलतियाँ करने की संभावना नहीं है। दूसरा, नियम न जानने की बात कहने से काम नहीं चलने वाला। अगर कोई नियम है और आपने उसे तोड़ा है, तो आप को एक मिनट भी वहाँ रुकने का अधिकार नहीं।”
उन्होंने आगे लिखा, “शाकिब को अपील करने का अधिकार था और यह तय करना हमारा काम नहीं है कि उसे अपील करनी चाहिए या नहीं। यह उसका निर्णय है, वह इसी तरह खेलना चाहता है। हालाँकि, यहाँ मैथ्यूज कोई फायदा नहीं उठा रहे थे।” उन्होंने उदाहरण देते हुए अपनी बात को समझाया कि मैच के दौरान कोई बल्लेबाज अगर गेदबाज या फील्डर को देने के लिए बॉल उठाता भी है, तो उसके खिलाफ अपील नहीं की जाती।
हालाँकि, बल्लेबाज अक्सर पूछ लेते हैं कि क्या वो ऐसा कर सकते हैं। टीक इसी तरह से अगर मैथ्यूज ने अंपायरों से पूछा होता कि क्या उसका हेलमेट बदलना ठीक है, तो मुझे यकीन है कि कोई अपील नहीं होती। हर्षा भोगले ने अपनी बात में आगे कहा कि इस मामले में हमें खेल भावना को लाने की जरूरत नहीं है। मैथ्यूज़ और श्रीलंकाई प्रशंसक निराश और नाराज़ हो सकते हैं लेकिन खेल के नियमों के अनुसार, वो आउट थे।
हर्षा ने एक वीडियो भी शेयर किया। उन्होंने बताया, “5 जनवरी 2007 को गांगुली को टाइम आउट कर दिया गया लेकिन ग्रीम ने इसका उपयोग नहीं किया जो उस समय दक्षिण अफ्रीकी टीम के कप्तान थे। विपक्षी टीम के कप्तान के पास खेल की भावना का सम्मान करते हुए अंपायर से टाइम आउट नियम को नजरअंदाज करने का अनुरोध करने का विवेकाधिकार है। अगर आपको लगता है कि बल्लेबाज से वाजिब वजह के चलते देरी हुई।”
इस मामले में स्टार स्पोर्ट्स ने विशेषज्ञों की टीम से भी बातचीत की है। इस पैनल में इयान बिशप, रमीज रजा, संजय मांजरेकर और संजय बांगर जैसे दिग्गज शामिल थे। उन्होंने नियमों के मुताबिक मैथ्यूज को आउट माना।
हालाँकि, एंजिलो मैथ्यूज का ये कहना है कि वो देर नहीं कर रहे थे और 5 सेकंड का समय उनके पास बचा था। ऐसे में ये मामला दिलचस्प मोड़ ले चुका है। क्योंकि, कहा जा रहा है कि जिस नियम का हवाला देकर उन्हें आउट करार दिया गया, वो नियम उन्होंने तोड़ा ही नहीं। वहीं, इस बीच साकिब अल हसन, जिन्होंने मैथ्यूज के टाइम आउट के लिए अपील किया था, वो अब विश्वकप से ही बाहर हो गए हैं। उन्हें श्रीलंका के खिलाफ मैच के दौरान चोट लग गई थी, लेकिन वो पेन किलर्स और बैंडेड की सहायता से खेलते रहे और अपनी टीम को 3 विकेट से जीत दिलाई।

आईसीसी को BCCI देता है पैसा, फिर पाकिस्तान में क्रिकेटरों को मिलती है फीस : शोएब अख्तर, पूर्व तेज गेंदबाज़, पाकिस्तान

पाकिस्तान पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने एक इंटरव्यू में कहा है कि पाकिस्तान के खिलाड़ी भारत के पैसे से पलते हैं। अपनी बेबाकी के लिए जाने जाने वाले शोएब अख्तर ने कहा कि इंडिया के पैसे से ही पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेटर्स को फीस मिल पाती है। 

शोएब अख्तर को क्रिकेट से संन्यास लिए लंबा वक्त हो चुका है, लेकिन वो अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। भारतीय खेल पत्रकार बोरिआ मजूमदार को दिए करीब 25 मिनट के इंटरव्यू में उन्होंने यह बात कही। BCCI (क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड ऑफ़ इंडिया) के पैसे से पाकिस्तानी क्रिकेटरों का खर्चा चलता है। इसे इंटरव्यू में 7 मिनट 30 सेकंड पर सुना जा सकता है।

शोएब ने कहा कि बीसीसीआई के जरिए आईसीसी के पास आता और ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट कॉउंसिल) रेवेन्यू शेयरिंग के तहत पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को भेजती है। उसी पैसे के दम पर ही पाकिस्तान में घरेलू क्रिकेटर्स को मैच की फीस मिल पाती है।

शोएब ने कहा, “मैं हमेशा अपने मन की बात कहता आया हूँ और आप इसे जानते हैं। मैं पहले दिन से कह रहा हूँ कि पाकिस्तानी टीम को भारत का दौरा करना चाहिए और जहाँ भी कहा जाए वहाँ खेलना चाहिए। हेडलाइन ये नहीं होना चाहिए कि पाकिस्तानी टीम भारत आई, बल्कि ये कि पाकिस्तान भारत आया।”

उन्होंने कहा, “भारत विश्व क्रिकेट के लिए सबसे अधिक पैसा देता है और आईसीसी वास्तव में उस पैसे का उपयोग करता है, जो भारत से आता है। यह वह पैसा है, जो हमें पाकिस्तान में दिया जाता है। इससे हमारे घरेलू क्रिकेट को फंड करने में मदद मिलती है। तो एक तरह से यह भारतीय पैसा है, जो हमारे क्रिकेट की मदद कर रहा है।”

शोएब अख्तर ने भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर बोलते हुए कहा, “वर्ल्ड कप 2023 सबसे अलग और रोमांचक होगा, क्योंकि मुझे अब 50 ओवर क्रिकेट का भविष्य नजर नहीं आ रहा है। मैं चाहता हूँ कि भारत इस विश्व कप से खूब पैसे बनाए।”

शोएब अख्तर ने एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर कहा, “इस सीरीज में भी एक बार फिर दबाव टीम इंडिया पर ही होगा, क्योंकि भारतीय मीडिया की वजह से टीम इंडिया पर काफी दबाव बनता है। हर बार ऐसा ही होता है। भारत पाकिस्तान से इसलिए नहीं हारता कि टैलेंटेड खिलाड़ी उसके पास नहीं है, बल्कि मीडिया का बहुत दबाव रहता है।”

उन्होंने कहा, “पिछली बार भी एशिया कप के दौरान भारतीय मीडिया ने टीम इंडिया पर काफी दबाव बना दिया था। पूरे स्टेडियम को नीले रंग में रंग दिया गया था। ये कहा जा रहा था कि टीम इंडिया पाकिस्तान को आसानी से हरा देगी। इस वजह से हमारे ऊपर प्रदर्शन का कोई दबाव नहीं था। इसका नतीजा ये हुआ कि भारत दबाव में बिखर गया और हम खुलकर खेले और मैच जीत गए थे।”

वर्ल्ड कप 2023 से खूब पैसा कमाएगी BCCI 

वहीं, 2023 वर्ल्ड कप पर बात करते हुए शोएब अख्तर ने कहा, “यह वर्ल्ड कप सुपरहिट होने वाला है। बीसीसीआई इस वर्ल्ड कप से भी काफी पैसा कमाएगी। इससे बीसीसीआई की आर्थिक स्थिति और ज्यादा मजबूत हो जाएगी।”
इस बार वर्ल्ड कप का आयोजन भारत में होगा। यह आयोजन 5 अक्टूबर 2023 से होने वाला है। इस टूर्नामेंट में भारत-पाकिस्तान की टक्कर 14 अक्टूबर को होगी। दोनों टीमें सेमीफाइनल या फाइनल तक पहुँची तो वहाँ भी भारत-पाकिस्तान की टक्कर देखने को मिल सकती है। 

Pak क्रिकेटर आसिफ अली पर लगेगा आजीवन बैन?; पाकिस्तानियों ने उकसाया, अफगानिस्तानी फैंस ने दम भर मार कर जीत लिया ‘मैच’

                       Pak क्रिकेटर आसिफ अली का पागलपन और भिड़ गए पाकिस्तान-अफगानिस्तान के फैंस
पाकिस्तान (Pakistan) और अफगानिस्तान के बीच 7 सितंबर 2022) को खेले गए एशिया कप 2022 (Asia Cup) मैच में दोनों देशों के खिलाड़ी आपस में भिड़ गए। नौबत यहाँ तक आ गई कि अंपायर्स और अन्य खिलाड़ियों को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा।

यह हंगामा 130 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही पाकिस्तानी टीम की पारी के 19वें ओवर की 5वीं गेंद पर हुआ। इस ओवर की चौथी गेंद पर आसिफ अली ने छक्का जड़ दिया। इसके बाद अगली ही गेंद पर फरीद अहमद ने आसिफ अली को आउट कर दिया। पवेलियन लौटने से पहले फरीद और आसिफ के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

दोनों के बीच मामला इतना बढ़ गया कि पाकिस्तान के आसिफ अफगानिस्तान के फरीद पर हाथ उठाते दिखे। इसके बाद उन्होंने पवेलियन लौटते वक्त उन्हें अपना बल्ला भी दिखाया। ऐसे में फरीद अहमद उनसे सीना जोरी करने लगे तो अफगानिस्तान के अन्य खिलाड़ियों ने बीच बचाव किया और अंपायर को भी लड़ाई के बीच आना पड़ा।

अफगानिस्तान टीम के इंटरनेशनल क्रिकेट खिलाड़ी आफताब आलम ने आईसीसी को लिखा है कि पाकिस्तानी क्रिकेटर आसिफ अली को हमेशा के लिए बैन किया जाए। आफताब आलम के अनुसार बैट उठा कर विरोधी टीम के खिलाड़ी को मारने की धमकी देने जैसा काम आसिफ अली ने एक नहीं बल्कि दो बार किया है, इसलिए उन्हें आजीवन बैन कर दिया जाना चाहिए।

जब खिलाड़ियों की लड़ाई थम गई तो मैच खत्म होने के बाद दोनों देशों के फैंस स्टेडियम में भिड़ गए। इस घटना के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जीत के बाद पाकिस्तान के फैंस स्टेडियम में लगी कुर्सियाँ उखाड़कर फेंक रहे थे, अफगानियों को चिढ़ा रहे थे।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “ऐसी खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तानी फैंस ने बहस के बाद शारजाह में अफगान के प्रशंसकों पर हमला किया। इसके जवाब में अफगानिस्तान के फैंस ने पाकिस्तानी प्रशंसकों को बेरहमी से पीटा।”

ट्विटर पर एक यूजर ने इस घटना पर मजे लेते हुए लिखा, “मैच के बाद अफगानिस्तान जीता।”

एक और यूजर ने लिखा, “यह पाकिस्तान के प्रशंसक थे, जिन्होंने स्टेडियम में लगी कुर्सियाँ उखाड़ कर नुकसान किया।”

क्रिकेट और अफगानी-पाकिस्तानी फैंस की लड़ाई

साल 2019 की बात है। आईसीसी का वर्ल्ड कप चल रहा था। जगह था इंग्लैंड का लीड्स। तभी एक प्लेन स्टेडियम के ऊपर से गुजरा। उस पर एक स्लोगन लिखा हुआ था – ‘जस्टिस फॉर बलूचिस्तान (Justice for Balochistan)’।
इसके बाद स्टेडियम के बाहर अफगानी और पाकिस्तानी फैंस के बीच जम कर लड़ाई हुई थी। दोनों देशों के समर्थकों के बीच लड़ाई न तब चौंकाने वाली बात थी, न अब। पाकिस्तान समर्थक आतंक से अफगानिस्तान जूझता रहा है। इसी कारण से जब लोग आमने-सामने होते हैं तो ऐसे वाकये देखने को मिलते हैं।
एशिया कप के दूसरे राउंड यानी सुपर फोर के चौथे मुकाबले में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को 1 विकेट से हरा दिया है। इस हार के साथ अफगानिस्तान के साथ-साथ भारत की भी फाइनल में पहुँचने की उम्मीदें खत्म हो गई हैं।