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सालार मसूद की दरगाह पर 10 साल में आए चढ़ावे का नहीं मिला हिसाब, ‘घोटाले’ से जुड़ा सपा के पूर्व मंत्री का भी नाम

                              बहराइच की सालार मसूद दरगाह (फाइल फोटो साभार: AajTak)
राममन्दिर में आए चढ़ावे की चोरी को लेकर पूरा मीडिया और राम विरोधी चील-कौओं की तरह चीख-चिल्ला रहे हैं लेकिन मस्जिदों, दरगाहों और चर्चों में हो रहे घोटालों पर सबको सांप सुंघा हुआ है। किसी में बोलने की हिम्मत नहीं। 
वक़्फ़ बोर्ड की भी हिम्मत नहीं कि इनसे अवान्तुकों से मिलने वाली राशि का हिसाब ले सके। क्योकि ये सभी जानते हैं कि हिन्दुओं को इनके ही देवी-देवताओं के विरुद्ध भड़काना आसान है, लेकिन जहाँ मस्जिदों, दरगाहों और चर्चों में हो रहे घोटालों पर मुंह खोला बाजा बज जाएगा। इन दरगाहों पर जो चढ़ावा आता है 99% हिन्दुओं का होता है। दरगाह चाहे सालार की हो या अजमेर की दोनों गाज़ियों की हैं। इन गाज़ियों की दरगाहों पर जाने वाले कालनेमि हिन्दू हैं। क्योकि दूसरे धर्म के लोगों को इस्लाम कबूलवाने और उसके कहे मुताबिक इस्लाम नहीं कबूलने पर जान लेने वाले को गाज़ी कहते हैं। इसीलिए ऐसे लोगों की दरगाह पर जाने वाले हिन्दुओं को कालनेमि हिन्दू कहा जाता है।     

उत्तर प्रदेश के बहराइच की सालार मसूद दरगाह एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला दरगाह पर आने वाले चढ़ावे और उसके वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ा है। आरोप है कि दरगाह में पिछले कई वर्षों में आए चढ़ावे और दान का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं है। जिलाधिकारी की ओर से रिकॉर्ड माँगे जाने के बाद भी कई सालों का वित्तीय ब्योरा नहीं मिल पाया।

इसके बाद दरगाह में बड़े वित्तीय घोटाले की आशंका जताई जा रही है। मामले में भाजपा (बीजेपी) नेताओं ने करोड़ों रुपए की हेराफेरी का आरोप लगाया है, जबकि समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री यासर शाह का नाम भी विवाद में सामने आया है। दूसरी तरफ दरगाह इंतजामिया कमेटी सभी आरोपों को बेबुनियाद बता रही है।

दरगाह के चढ़ावे को लेकर बवाल

बहराइच की सालार मसूद दरगाह को देश की प्रसिद्ध दरगाहों में गिना जाता है। यहाँ हर साल लाखों मुस्लिम पहुँचते हैं और नकद दान के अलावा सोना, चाँदी और अन्य कीमती वस्तुएँ चढ़ाते हैं। हाल के दिनों में दरगाह के चढ़ावे और संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे।

विवाद तब और बढ़ गया जब दरगाह से जुड़े कुछ लोगों और भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि दरगाह में आने वाले चढ़ावे का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया। आरोप यह भी है कि वर्षों से जमा हुई धनराशि और अन्य संपत्तियों के उपयोग में गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं। इसी बीच कुछ पुश्तैनी खादिमों ने दावा किया कि दरगाह में चढ़ाई गई सोने-चाँदी की कीमती ज्वेलरी अब दिखाई नहीं दे रही है। उनका कहना है कि अगर आभूषण सुरक्षित हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से दिखाया जाना चाहिए।

भाजपा के आरोप

विवाद को लेकर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुँवर बासिल अली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और पूरे मामले की SIT से जाँच कराने की माँग की है।कुँवर बासिल अली का आरोप है कि दरगाह वक्फ नंबर-19 की बेशकीमती संपत्तियों और चढ़ावे के प्रबंधन में बड़े स्तर पर अनियमितताएँ हुई हैं।

बासित अली ने माँग की है कि पिछले लगभग 20 वर्षों के वित्तीय लेनदेन की निष्पक्ष जाँच कराई जाए। उनका आरोप है कि दरगाह में आने वाले दान, चढ़ावे और चंदे की रकम में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जाँच होने पर करोड़ों रुपए के वित्तीय गड़बड़ी का सच सामने आ सकता है।

मामला बढ़ने के बाद प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भी जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी से विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर देने को कहा गया है। इससे साफ है कि प्रशासन भी आरोपों को गंभीरता से देख रहा है।

डीएम ने माँगा ब्योरा, लेकिन रिकॉर्ड नहीं मिला

बहराइच के जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने दरगाह के वित्तीय रिकॉर्ड की जानकारी माँगी तो कई सवाल खड़े हुए। जाँच के दौरान यह बात सामने आई कि पिछले 10 वर्षों के चढ़ावे और आय-व्यय से जुड़े कई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दरगाह प्रबंधन की ओर से पूरा वित्तीय ब्योरा प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

इसी वजह से बड़े वित्तीय गोलमाल या घोटाले की आशंका जताई जा रही है। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड को पत्र भेजकर जाँच की आवश्यकता बताई है। जाँच में एक कर्मचारी की नियुक्ति पर भी सवाल उठे हैं, जबकि वर्तमान समय में 170 कर्मचारियों के काम करने का दावा कमेटी कर रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर दरगाह में हर साल बड़ी मात्रा में चढ़ावा आता रहा है, तो उसका पूरा लेखा-जोखा कहाँ है और रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं है।

सपा के पूर्व मंत्री की मिलीभगत के आरोप

इस पूरे विवाद में समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री यासर शाह का नाम भी सामने आया है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि दरगाह की इंतजामिया कमेटी में शामिल कुछ लोगों के साथ मिलकर वित्तीय अनियमितताओं को संरक्षण दिया गया।

कुँवर बासित अली ने मुख्यमंत्री से की गई शिकायत में यासर शाह की भूमिका की भी जाँच कराने की माँग की है। उनका आरोप है कि दरगाह से जुड़े आर्थिक मामलों में पूर्व मंत्री की भी भूमिका रही है और इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

दरगाह कमेटी ने क्या सफाई दी?

वहीं दरगाह इंतजामिया कमेटी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कमेटी के वरिष्ठ सदस्य एडवोकेट दिलशाद अहमद का कहना है कि भ्रष्टाचार और गबन के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।

कमेटी का दावा है कि दरगाह का हर वित्तीय लेनदेन नियमों के अनुसार होता है और सभी प्रक्रियाएँ वक्फ बोर्ड के नियमों के तहत संचालित की जाती हैं। कमेटी के अनुसार, चढ़ावे की गिनती सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है और पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड की जाती है। इसलिए हेराफेरी की संभावना नहीं है। कमेटी ने यह भी कहा है कि कर्मचारियों की नियुक्तियाँ और अन्य प्रशासनिक कार्य भी पूरी पारदर्शिता के साथ किए जाते हैं।

कब-कब विवादों में रही सालार मसूद दरगाह?

बहराइच की सालार मसूद दरगाह पिछले कुछ वर्षों में कई बार विवादों में रही है। 2025 में दरगाह में लगने वाले जेठ मेले और उर्स को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हुआ, जब बहराइच प्रशासन ने कानून-व्यवस्था के मद्देनजर मेले की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुँचा और कई दिनों तक राजनीतिक व सामाजिक बहस का विषय बना रहा।
जून 2026 में एक नया विवाद तब सामने आया, जब प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने दरगाह परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वे कराने की माँग की। उनका कहना था कि दरगाह के ऐतिहासिक और पुरातात्विक पहलुओं की जाँच होनी चाहिए।

सीरिया में ISIS से जुड़ने गई थीं 3 जिहादने, ऑस्ट्रेलिया लौटते ही पुलिस ने लिया गिरफ्तार: 8.5 लाख रूपए में औरतें खरीदकर गुलाम बनाने का आरोप, 25 साल सड़ेंगी जेल में

                                                                                              प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: दैनिक जागरण)
सीरिया से लौटते ही ऑस्ट्रेलिया में तीन महिलाओं को आतंकवाद और गुलामी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है। मेलबर्न एयरपोर्ट पर 53 वर्षीय महिला और उसकी 31 वर्षीय बेटी को हिरासत में लिया गया। दोनों पर आरोप है कि वे 2014 में इस्लामिक स्टेट (ISIS) का समर्थन करने के लिए सीरिया गई थीं।

शुरू में तो पैसे के लालच में लड़कियां ISIS में शामिल होने अपना मुल्क छोड़ देती है, लेकिन दुर्गति होने पर ISIS के चुंगल से भाग जाती है। 2019 में भी एक हसीना ब्रिटेन से भाग ISIS में शामिल हो गयी और ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई।      

ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस के मुताबिक, 53 वर्षीय महिला ने करीब 10 हजार अमेरिकी डॉलर (साढ़े 8 लाख से 9 लाख तक) देकर एक महिला को गुलाम के तौर पर खरीदा था, जबकि उसकी बेटी ने उसे अपने घर में गुलाम बनाकर रखा। दोनों पर मानवता के खिलाफ अपराध और गुलामी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, जिनमें 25 साल तक की सजा हो सकती है।

पुलिस के अनुसार, ISIS के पतन के बाद 2019 में कुर्द बलों ने इन महिलाओं को पकड़ लिया था। तब से वे सीरिया के अल-रोज कैंप में रह रही थीं। गुरुवार (7 मई 2026) की रात कतर एयरवेज की फ्लाइट से मेलबर्न पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

वहीं 32 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई महिला जनई सफर को सिडनी एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। उस पर प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने और ISIS में शामिल होने का आरोप है। जाँच एजेंसियों का कहना है कि वह 2015 में अपने शौहर के पास सीरिया गई थी, जो पहले से ISIS का लड़ाका था।

ISIS की ‘जिहादी दुल्हन’ के नवजात बच्चे की मौत, सीरिया से आना चाहती है वापस

2019 में ब्रिटेन ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से दुनिया भर चर्चित हुई शमीमा बेगम के नवजात बेटे की मौत हो गई है। यह जिहाद का जुनून ही था कि आईएसआईएस  में शामिल होने के लिए बेगम महज 15 साल की उम्र में लंदन से भागकर सीरिया पहुँच गई थी। आज उसके उसी जुनून ने उसकी ज़िन्दगी ज़हन्नुम बना दी है।

दुनिया भर में उस समय सुर्खियों में छा गई, जब इस ‘ज़िहादी दुल्हन’ ने उसने सार्वजनिक रूप से ब्रिटिश सरकार से उसे वापस आने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

बांग्लादेशी मूल की ब्रिटिश युवती ने 2015 में सीरिया जाकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल होने का फैसला लिया था। ब्रिटेन से भागकर आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हुई शमीमा बेगम को पिछले दिनों बांग्लादेश और नीदरलैंड्स ने भी झटका दिया था। दोनों ही देशों ने उसे अपने यहाँ शरण देने से मना कर दिया था।

इससे पहले ब्रिटेन ने जिहादी दुल्हन के नाम से पहचान बना चुकी शमीमा की नागरिकता रद्द कर दी थी। तब बांग्लादेश ने अपनी सफाई में कहा था कि शमीमा के पास अब दोहरी नागरिकता नहीं है, इसलिए उसका फिलहाल उनके देश से कोई लेना-देना नहीं है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीरियन डेमोक्रेट के प्रवक्ता ने बताया कि बेगम के नवजात बेटे की मौत खराब स्वास्थ्य के कारण हुई है। दो सप्ताह पहले ही जन्मे बच्चे का नाम जर्राह था और जन्म के समय से ही न्यूमोनिया पीड़ित था।

टेरर फंडिंग का खुलासा : गाजियाबाद के रियाजुद्दीन का बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर बिहार के हुसैन का: 70 लाख रूपए का ट्रांजेक्शन, दोनों फरार

                                                  यूपी एटीएस ने टेरर फंडिंग का किया खुलासा
उत्तर प्रदेश पुलिस की ATS विंग ने भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए पाकिस्तान से की जा रही फंडिंग का खुलासा किया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश गाजियाबाद के रियाजुद्दीन और बिहार के पश्चिम चम्पारण निवासी इजहारुल हुसैन को नामजद किया गया है। दोनों पर भारत सरकार को अस्थिर करने, सेना व अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों की जानकारी पाकिस्तान को भेजने का आरोप है।

ATS ने शुक्रवार (10 नवम्बर 2023) को इजहारुल हुसैन और रियाजुद्दीन पर FIR दर्ज की। FIR के मुताबिक गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र निवासी रियाजुद्दीन और बिहार के पश्चिम चम्पारण में शिकारपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले इजहारुल हुसैन के एक-दूसरे से सम्पर्क में होने की सूचना एजेंसी को मिली थी। रियाजुद्दीन ने गाजियाबाद के फरीदनगर की केनरा बैंक ब्रान्च में एक खाता खुलवा रखा है। इस खाते से इजहारुल का मोबाइल नंबर लिंक है।

इस खाते की जाँच में ATS को पता चला कि मार्च 2022 से अप्रैल 2022 के बीच इस खाते से कुछ अन्य खातों के बीच लगभग 65 से 70 लाख रुपए का संदिग्ध लेन-देन हुआ। ये पैसे रियाजुद्दीन ने इजहारुल हुसैन ने देशी विरोधी साजिश के तहत अलग-अलग खातों में भेजे हैं। इस हरकत में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के कुछ एजेंट भी शामिल बताए जा रहे हैं। जाँच एजेंसी के मुताबिक इस पैसे का प्रयोग भारतीय सेना सहित देश के अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की ख़ुफ़िया जानकारियाँ पाकिस्तान भेजने के लिए होना था।

ATS के अनुसार रियाजुद्दीन, इजहारुल और कुछ अन्य ISI एजेंट भारत सरकार को अस्थिर करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करना चाह रहे थे। ये सभी आरोपित पाकिस्तान में मौजूद अपने आकाओं से बात करने के लिए अलग-अलग एप का प्रयोग किया करते थे। इन सभी पर IPC की धारा 121- A के तहत कार्रवाई की गई है।

इस FIR में आरोपितों पर जिस 121- A के तहत कार्रवाई हुई है वो सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या उसकी साजिश रचने की आशंका के तहत लगाई जाती है। इस धारा के प्रावधान में आजीवन कारावास और मृत्युदंड भी शामिल है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक FIR दर्ज होने के बाद से रियाजुद्दीन और इजहारुल हुसैन फरार हैं। ATS इन दोनों की तलाश में दबिश दे रही है।