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जिस जल से होता था भगवान का अभिषेक, उसमें इस्लामी कट्टरपंथियों ने मीट खाकर फेंकी हड्डियाँ: महंत की शिकायत पर श्रावस्ती पुलिस ने जमाल-इरफान समेत 4 को किया गिरफ्तार

    श्रावस्ती के सोनपथरी आश्रम के पास नाले में इफ्तार पार्टी में परोसा मांस, अवशेष को नाले में फेंका (साभार: एक्स @@Sachingupta)
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ सोनपथरी आश्रम के पास स्थित एक पवित्र पहाड़ी जल के किनारे इफ्तार पार्टी कर गंदगी फैलाने के आरोप में पुलिस ने चार इस्लामी कट्टरपंथियों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान जमाल अहमद, इरफान अहमद, इमरान अहमद उर्फ इम्मी और जहीर खान के रूप में हुई।

आरोप है कि कुछ मुस्लिम युवकों ने नाले के पास मांसाहारी भोजन किया और उसकी हड्डियाँ उसी पानी में फेंक दीं, जिसका उपयोग मंदिर के अनुष्ठानों और श्रद्धालुओं के पीने के लिए किया जाता है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

मंदिर की पवित्रता से खिलवाड़: महंत का आरोप

सोनपथरी आश्रम के महंत हरिशरणानंद महाराज ने इस मामले में कड़ी आपत्ति जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि यह पहाड़ी नाला आश्रम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र है। इसी जल का उपयोग मंदिर में मूर्तियों के अभिषेक, उनकी सफाई और भंडारे का भोजन बनाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, यहाँ आने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसी नाले में स्नान करते हैं और इसका जल पीते भी हैं। पवित्र जल में हड्डियाँ फेंकने से मंदिर की शुचिता भंग हुई है।

साजिश के तहत धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश

महंत ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि यह कृत्य अनजाने में नहीं, बल्कि जानबूझकर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने और क्षेत्र का आपसी सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी, जिसे देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की।

पुलिस की कार्रवाई: चार आरोपित भेजे गए जेल

सिरसिया थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। साक्ष्यों और वीडियो के आधार पर पुलिस ने चार मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि गिरफ्तार किए गए चारों आरोपितों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की बारीकी से जाँच की जा रही है ताकि घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके और उन पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।

योगी के राज में पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी का कलावा काटा गया, वायरल वीडियो पर बोर्ड ने लिया संज्ञान: कहा- पुलिसकर्मी पर करेंगे कठोर कार्रवाई

                                अभ्यर्थी का कलावा काटता पुलिसकर्मी (वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट)
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान एक परीक्षा केंद्र पर एक पुलिसकर्मी द्वारा अभ्यर्थी का कलावा काटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बोर्ड ऐक्शन में आ गया है। वायरल वीडियो पर उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने संज्ञान लिया है और कलावा काटने वाले पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करने की बात कही है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वाराणसी में एक पुलिसकर्मी परीक्षा केंद्र के बाहर एक युवक का कलावा काटता हुआ नजर आ रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों को गुस्सा फूट पड़ा और लोग सवाल उठाने लगे की क्या कलावे की मदद से भी नकल की जा सकती है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस विषय पर कार्रवाई करने की माँग की।

UPPRPB ने एक यूजर द्वारा शेयर की गई इस वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए X पर लिखा, “अभ्यर्थियों के धार्मिक चिन्हों जैसे कलावा, मंगलसूत्र आदि नहीं काटने के निर्देश पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा समस्त अधिकारियों को पूर्व से ही दिए गए हैं।” UPPRPB ने आगे लिखा, “सोशल मीडिया पर वायरल वाराणसी के प्रकरण में एक पुलिसकर्मी द्वारा उसका उल्लंघन किया गया है। इस उल्लंघन के चलते अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए पुलिस आयुक्त वाराणसी को पत्र लिखा गया है।”

इसके अलावा बोर्ड ने X पर परीक्षा नियंत्रक का एक बयान भी जारी किया है। इसमें कहा गया है, “UPPRPB की परीक्षाओ के दौरान अभ्यर्थियों की चेकिंग के संबंध में निरंतर यह निर्देश दिए जाते हैं कि किसी भी अभ्यर्थी द्वारा धारण किए गए धार्मिक सांस्कृतिक चिन्हों जैसे कलावा, मंगलसूत्र आदि को न तो हटवाया जाएगा ना ही उतारने का प्रयास किया जाएगा।”

परीक्षा नियंत्रक ने आगे कहा, “ऐसे प्रकरणों का संज्ञान में आना दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है। इस संदर्भ में दोषी कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटना ना हो।”

हापुड़ में सपा नेता अब्दुल रेहान के घर पुलिस का छापा, 55 भरे गैस सिलेंडर बरामद: 2000 रुपए में कालाबाजारी का आरोप

                                  सपा नेता अब्दुल रेहान के घर मिले 55 गैस सिलेंडर (फोटो साभार : NBT)
उत्तर प्रदेश में गैस सिलेंडरों की किल्लत के बीच कालाबाजारी करने वालों पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। हापुड़ के गाँव असौड़ा में समाजवादी पार्टी के नेता अब्दुल रेहान के घर पर पुलिस और जिला पूर्ति विभाग ने छापेमारी की। इस कार्रवाई में रेहान के घर से 55 भरे हुए और कई खाली गैस सिलेंडर बरामद हुए हैं। छापेमारी की भनक लगते ही आरोपित नेता मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी है।

सरकार और पुलिस को सिलेंडर सप्लाई करने वाली एजेंसी पर सख्त कार्यवाही कर उसका लाइसेंस तुरंत कैंसिल कर उसके बैंक अकाउंट और दुकान को भी सील कर देना चाहिए। 

महँगे दामों पर बेच रहे थे सिलेंडर

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अब्दुल रेहान मजबूरी का फायदा उठाकर जरूरतमंदों को एक सिलेंडर 2000 रुपए तक में बेच रहा था। पुलिस को सूचना मिली थी कि पंचायती घर के पास रहने वाला रेहान अपने घर में अवैध रूप से सिलेंडरों का बड़ा स्टॉक जमा किए हुए है। सूचना मिलते ही टीम ने दबिश दी और सभी सिलेंडरों को जब्त कर लिया।

प्रदेश में सिलेंडरों की कमी के बीच इस तरह की कालाबाजारी को योगी सरकार को बदनाम करने की साजिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध भंडारण के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा। साथ ही जनता से अपील की गई है कि यदि कहीं भी ऐसी कालाबाजारी दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

‘अम्मा का गोश्त मिला तो…’: योगी की माँ पर अभद्र टिप्पणी करने वाले मौलाना अब्दुल्लाह पर UP के 84 थानों में FIR

                                         योगी जी की माँ पर मौलाना अब्दुल्ला सलीम ने किया था कमेंट
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माँ पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ प्रदेश के अलग-अलग जिलों के कुल 84 थानों में एफआईआर दर्ज की गई है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, मौलाना के खिलाफ आईपीसी की धारा 196 (1), 299 और 353 (1) (सी) के तहत केस को दर्ज किया है।

कुछ दिन पहले मौलाना की एक वीडियो सामने आई थी इसमें वो साफ कहता सुनाई पड़ रहा था कि अगर 250 ग्राम तक किसी पर योगी जी की अम्मा का गोश्त/माँस पाया जाता है तो उसके घुटनों से नीचे गोली मारकर छेद करने का आदेश है।

इसी बयान के बाद पूरा विवाद भड़का लोग लगातार उनके बयान के खिलाफ कई जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई कर मौलाना की गिरफ्तारी नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

राजनीतिक तौर पर मौलाना अब्दुल्ला सलीम के तार पहले ओवैसी की पार्टी AIMIM से जुड़े थे। वर्ष 2025 में जोकीहाट विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया था। इसके बाद वह प्रशांत किशोर की जन सुराज में शामिल हो गए, लेकिन चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग ने उनका नामांकन पत्र खारिज कर दिया। 

मंदिर निर्माण पर हो रही थी बात, आरफा खानम ने रखी ‘मस्जिद’ की डिमांड: हिंदू महिलाओं ने लताड़ा तो RSS को देने लगीं गाली

             मंदिर निर्माण की माँग को आरफा ने दिया सामप्रदायिक रंग (फोटो साभार : YT_@TheWireNews)
प्रोपेगेंडा पत्रकार आरफा खानम शेरवानी एक बार फिर अपने ही बुने हुए जाल में बुरी तरह फँस गई हैं। नोएडा की एक पॉश सोसाइटी में मंदिर निर्माण के सीधे-साधे मुद्दे को ‘सांप्रदायिक’ रंग देने और अपना पुराना ‘मुस्लिम विक्टिम कार्ड’ चमकाने पहुँची आरफा को वहाँ की जागरूक हिंदू महिलाओं ने ऐसा करारा जवाब दिया कि उन्हें वहाँ से उल्टे पाँव भागना पड़ा।

आरफा, जो हिंदू महिलाओं को ‘गैसलाइट’ करने और उन्हें अपराधी जैसा महसूस कराने गई थीं, खुद ट्रोल होकर लौटी हैं। इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आरफा खानम की पत्रकारिता का मकसद जमीन की हकीकत दिखाना नहीं, बल्कि हर मुद्दे में बीजेपी, RSS और मुस्लिम एंगल घुसाकर समाज में दरार पैदा करना है।

वीडियो की हकीकत: आरफा के ‘मस्जिद कार्ड’ पर महिलाओं का जवाब

सोशल मीडिया पर आरफा खानम का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे नोएडा के सेक्टर 15ए की महिलाओं से बातचीत कर रही हैं। इस वीडियो में महिलाओं अपनी माँग को बताती है कि उन्हें मंदिर सोसाइटी में चाहिए, जिससे काफी दूर आना-जाना, ट्रैफिक में फँसना बंद हो जाएगा और बुजुर्गों के लिए सुविधा हो जाएगी। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि कोई भी महिला आरफा से ना तो बदतमीजी से बातचीत कर रही है, ना ही तेज आवाज में चिल्ला रही है और ना ही धक्का-मुक्की कर रही हैं।

आरफा ने जितने भी सवाल वहाँ खड़ी हिंदू महिलाओं से पूछे है उनके जवाब उन्हें बेहद शांतिपूर्ण तरीके से मिला है। अपना मुस्लिम और मस्जिद विक्टिम कार्ड घुसाने पर भी महिलाओं ने उन्हें ये ही कहाँ है कि आप अपना एजेंडा यहाँ मत लाओ। मंदिर की बात है, मंदिर तक रहने दो। वीडियो में आप सुन सकते हैं कि जब मंदिर की माँग ज्यादा कर रही लोगों की तादाद ज्यादा थी, तो प्रोपेगेंडाई पत्रकार आरफा ने मस्जिद बनवाने पर भी सवाल कर डाला। आरफा महिलाओं से कहने लगी कि फिर तो मस्जिद भी बनना चाहिए।

इस सवाल का जवाब महिलाओं ने बेहत लहजे से दिया कि जब सोसाइटी में 99.99 प्रतिशत हिंदू लोग है तो मस्जिद बनवाना या ना बनवाना कहाँ से आ जाता है। फिर आरफा ने महिलाओं की तादात को ‘मेजोरिटिज्म’ शब्द से नवाजा, जिसका जवाब भी हिंदू महिलाओं ने बेहद तरीके और करारा दिया। वहाँ खड़ी एक हिंदू महिला ने आरफा को कहा- “हमें ऐसा लग रहा है कि अपने ईश्वर का नाम लेने में क्रिमिनल करार दिया जा रहा है।”

महिला ने आरफा को सीधा मुँह यह भी जवाब दिया कि यह महीने आज से 40 साल पहले नोएडा के मास्टर प्लान में मंदिर के लिए डेजिग्नेटिड यानि नामित थी। 40 साल पहले इतना ट्रैफिक नहीं हुआ करता था और लोग आसानी से दूर मंदिर जा सकते हैं। लेकिन आज ट्रैफिक बढ़ रहा है, समय नहीं है, लोग बुजुर्ग है, कुछ दिव्याँग है, तो कुछ लोगों के पास गाड़ी चलाने के लिए ड्राइवर नहीं है कि वह उन्हें मंदिर तक ले जाए।

वहाँ खड़ी एक महिला ने तो साफ कहा कि इसमें सरकार का कोई रोल नहीं है, ये हम लोगों की माँग है। इसके अलावा भी आरफा को हिंदू महिलाओं ने उनके कट्टरपंथी एजेंडे पर काफी बढ़िया जवाब दिया है, जिसे आप वीडियो में सुन सकते हैं। महिलाओं ने आरफा को ये ही कहा कि आप अपने एजेंडा यहाँ मत थोपिए… महिलाओं ने साफ कहा कि हमें पता है आपका एजेंडा क्या होता है, आप एक Biased साइड के लिए रिपोर्टिंग करती है। सोशल मीडिया पर भी नेटिजन्स ने आरफा के इस वीडियो पर काफी हँसी उड़ाई। कुछ लोगों ने लिखा कि जनता अब नफरत भरे एजेंडे पर यकीन नहीं कर रही है। अब जनता झगड़े के बजाय फैक्ट्स पर यकीन कर रही है।

The Wire का खेल: एडिटिंग का मायाजाल और फर्जी हेडलाइन

जब ग्राउंड पर आरफा का एजेंडा बुरी तरह फेल हो गया, तो उनके संस्थान ‘The Wire’ ने डैमेज कंट्रोल के लिए अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो डाला। इस वीडियो का टाइटल दिया गया- ‘मंदिर का समर्थन पर ‘लोकतंत्र’ से समस्या, उग्र महिलाओं ने आरफ़ा के साथ की धक्का-मुक्की’।

इस टाइटल और वीडियो की एडिटिंग को गौर से देखें तो ‘The Wire’ का प्रोपेगेंडा बेनकाब हो जाता है। वीडियो की शुरुआत में ही आरफा इसे ‘अमीर लोगों की सोसाइटी’ और ‘BJP वोटर्स’ का गढ़ बताकर नफरत फैलाना शुरू कर देती हैं। वे कहती हैं कि उत्तर प्रदेश के चुनाव पास हैं और RSS पूरी हरकत में आ गई है, हमारे समाज का हिंदूकरण कम पड़ गया था जो अब घर तक मंदिर की बात आ गई है।”

आरफा ने जानबूझकर इसे ‘RSS का प्रोजेक्ट’ करार दिया और अपने दर्शकों से कहा कि ‘आप 100 साल के RSS को देख रहे हैं कि वे कैसे घुसपैठ कर रहे हैं।’ ‘The Wire’ ने वीडियो को इस तरह से काट-छाँट कर पेश किया है ताकि हिंदू महिलाएँ ‘उग्र’ दिखें, जबकि असल में आरफा खुद महिलाओं को उकसा रही थीं और उन्हें अपराधी साबित करने पर तुली हुई थीं। वीडियो में कहीं भी वह धक्का-मुक्की नहीं है जिसका दावा हेडलाइन में किया गया है। लेकिन आरफा अपनी आदत के मुताबिक ‘डोंट टच मी’ कहकर खुद को पीड़ित दिखाने का नाटक करती रहीं।

क्या है पूरा मामला? क्यों हो रही है मंदिर की माँग?

नोएडा के सेक्टर 15A का यह पूरा मामला कोई सांप्रदायिक विवाद नहीं, बल्कि वहाँ रहने वाले लोगों की बुनियादी सुविधा और उनके अधिकारों का मामला है। इस सोसाइटी में रहने वाले लगभग 99 प्रतिशत से ज्यादा हिंदू लोग चाहते हैं कि उनकी सोसाइटी के भीतर एक मंदिर बन जाए। इसके पीछे बहुत ही साधारण वजहें हैं।

पहली वजह यह है कि सोसाइटी के पास कोई मंदिर नहीं है, जिसके कारण बुजुर्गों को पूजा-पाठ के लिए काफी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। दूसरी समस्या ट्रैफिक और जाम की है, मुख्य मंदिर दूर होने की वजह से लोगों को घंटों जाम में फँसना पड़ता है, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी होती है। साथ ही, वहाँ की महिलाओं का कहना है कि 40 साल पहले जब इस इलाके का नक्शा बना था, तभी यह जमीन मंदिर के लिए ही तय की गई थी।

लेकिन इस सीधी-सादी माँग को पत्रकार आरफा खानम ने एक अलग ही रंग दे दिया। उन्हें इसमें ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने की साजिश और जमीन हड़पने जैसा गंभीर मामला नजर आने लगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे एक खतरे की घंटी (वेक-अप कॉल) बताया। जबकि हकीकत यह है कि वहां के निवासी सिर्फ अपनी ही जमीन पर अपनी आस्था और सुविधा के लिए मंदिर बनवाना चाहते हैं, जो उनका अधिकार है।

एजेंडा पत्रकारिता की हार

आरफा खानम की पूरी रिपोर्टिंग का मकसद यह था कि सेक्टर 15A को ‘RSS की प्रयोगशाला’ साबित किया जाए। उन्होंने जानबूझकर बातचीत में नरेंद्र मोदी और BJP को घुसाया ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘मैजोरिटी टेररिज्म’ का नैरेटिव सेट कर सकें। वे वहाँ रिपोर्टिंग करने नहीं, बल्कि महिलाओं को डराने और उन्हें ‘अलोकतांत्रिक’ साबित करने गई थीं।

आरफा खानम वही चेहरा हैं जिन्होंने शाहीन बाग के समय मुस्लिमों को सलाह दी थी कि ‘विचारधारा न बदलें, बस रणनीति बदलें।’ नोएडा में भी वे इसी ‘रणनीति’ के साथ आई थीं, पहले निष्पक्ष पत्रकार होने का ढोंग करना और फिर धीरे से ‘मस्जिद’ और ‘मुस्लिम अधिकार’ का रोना रोकर हिंदुओं को दबाना।

लेकिन नोएडा की इन महिलाओं ने उनकी इस चाल को भांप लिया और उन्हें साफ कह दिया ‘अपना एजेंडा यहाँ मत चलाइए।’ जब आरफा का ‘मुस्लिम विक्टिम कार्ड’ नहीं चला, तो वे आक्रामक हो गईं और बाद में सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने लगीं।

उत्तर प्रदेश : PDA को लेकर अखिलेश की सपा में घमासान, हर बार यादव ही क्यों दे कुर्बानी?: क्यों वायरल हो रहा अफजाल अंसारी का बयान

                           पीडीए को लेकर समाजवादी पार्टी में घमासान, प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: ChatGPT)
कभी-कभी एक पुराना बयान भी आग की तरह फैल जाता है। ठीक यही उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों हो रहा है। दरअसल, गाजीपुर के सपा सांसद अफजाल अंसारी का करीब एक साल पुराना भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उसमें उन्होंने साफ कहा था कि “सबसे बड़ी कुर्बानी यादव भाइयों को देनी होगी।” अब इस बयान पर पूर्व एमएलसी काशीनाथ यादव ने 9 फरवरी 2026 को 
जोरदार पलटवार किया है। उन्होंने कहा, “हर बार यादव ही क्यों कुर्बानी दें?” और अफजाल अंसारी को चुनौती दी कि पहले वे अपनी सीट छोड़कर देखें।

यह विवाद सिर्फ दो नेताओं के बीच नहीं है। यह पूरे पीडीए फॉर्मूले की असली परीक्षा है। क्या यादव समाज, जो लंबे समय से समाजवादी पार्टी का सबसे मजबूत स्तंभ रहा है, अब अपनी हिस्सेदारी कम करके अन्य वर्गों को आगे आने देगा? या फिर अंदरूनी खींचतान से पीडीए का सपना चूर-चूर हो जाएगा?

पीडीए फॉर्मूला है क्या और क्यों लाया गया?

समाजवादी पार्टी की जड़ें कथित तौर पर यादव-मुस्लिम वोटबैंट के समीकरण में हैं। मुलायम सिंह यादव ने 1992 में सपा बनाई तो मुख्य आधार यादव और मुस्लिम थे। इसे एमवाई कहा जाता था। यह फॉर्मूला कई बार सरकार भी बना चुका है। लेकिन 2014 से 2022 तक सपा को लगातार झटके लगे। भाजपा ने अपना हिंदुत्व और विकास का नारा देकर यादव-मुस्लिम के अलावा अन्य पिछड़ों और दलितों को अपनी तरफ खींच लिया।

अखिलेश यादव ने 2023 में नया प्लान बनाया- पीडीए यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक। इसमें यादव के अलावा लोध, गुर्जर, राजभर, कुर्मी जैसी पिछड़ी जातियाँ, जाटव-पासी जैसे दलित और मुस्लिम-अल्पसंख्यक सब शामिल हैं। अखिलेश का कहना था कि यह 90 प्रतिशत लोगों का गठजोड़ है जो भाजपा के खिलाफ है।

साल 2024 लोकसभा चुनाव में इस फॉर्मूले ने कमाल दिखाया। सपा ने 33 सीटें जीतीं। उनमें से 86 प्रतिशत सांसद पिछड़े, दलित या मुस्लिम वर्ग से थे। टिकट बंटवारे में गैर-यादव पिछड़ों और दलितों को ज्यादा मौका मिला। कई यादव नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया क्योंकि पार्टी की सीटें बढ़ीं। लेकिन कुछ यादव कार्यकर्ता और नेता महसूस करने लगे कि उनकी पुरानी ताकत अब बंट रही है। यहीं से असंतोष की शुरुआत हुई।

अफजाल अंसारी के बयान से खींचतान आई सामने

अफजाल अंसारी गाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। वे मुस्लिम समुदाय से हैं और सपा में अल्पसंख्यक चेहरा माने जाते हैं। करीब एक साल पहले (2025 में) उन्होंने गाजीपुर में एक बैठक में पीडीए को मजबूत करने की बात करते हुए कहा, “अगर पीडीए को सशक्त बनाना है तो सबसे बड़ी कुर्बानी यादव भाइयों को देनी होगी।”

उनका मतलब साफ था- यादव समाज को पद, टिकट और सत्ता की हिस्सेदारी में पीछे हटना होगा। ताकि अन्य पिछड़े, दलित और मुस्लिम नेताओं को बराबर मौका मिले। उन्होंने कहा कि सिर्फ बैठकें करने से काम नहीं चलेगा, त्याग करना पड़ेगा। यह बयान उस समय भी चर्चा में रहा लेकिन सोशल मीडिया पर अब इतना फैला कि हर कोई इसे देख रहा है।

कई लोग इसे सकारात्मक मानते हैं। वे कहते हैं कि अफजाल अंसारी सही कह रहे हैं। अगर पीडीए को असली मायने में समावेशी बनाना है तो पुराने वर्चस्व वाले वर्ग को त्याग दिखाना होगा। लेकिन यादव समाज के बड़े हिस्से को यह बात नागवार गुजरी। वे पूछते हैं- हमने पार्टी बनाई, संघर्ष किया, जेल गए, तो अब हम ही क्यों पीछे हटें?

काशीनाथ यादव का पलटवार बनी असंतोष की असली आवाज

9 फरवरी 2026 को स्वर्गीय कैलाश यादव की पुण्यतिथि पर गाजीपुर-मऊ क्षेत्र में एक कार्यक्रम था। वहाँ पूर्व एमएलसी काशीनाथ यादव ने मंच से सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “हर बार यादव ही क्यों कुर्बानी दें? अफजाल अंसारी पहले अपनी गाजीपुर सीट छोड़कर देखें कि कोई अन्य जाति का व्यक्ति वहाँ जीत पाता है या नहीं।”

काशीनाथ यादव खुद यादव समाज के बड़े नेता हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नेता समय-समय पर दल बदलते रहते हैं। ऐसे में यादव समाज बार-बार अपना हक क्यों छोड़े? उनका बयान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं था। कई यादव कार्यकर्ता उनके साथ खड़े दिखे। यह बयान बताता है कि सपा के अंदर यादव वर्ग में गुस्सा पनप रहा है। वे महसूस कर रहे हैं कि उनकी मेहनत का फल दूसरे ले जा रहे हैं।

यादव समाज की भूमिका और कुर्बानी की असली माँग

यादव समाज उत्तर प्रदेश में करीब 9 प्रतिशत आबादी का है। वे ओबीसी में सबसे संगठित और प्रभावशाली हैं। सपा के जन्म से लेकर आज तक हर स्तर पर यादव नेता रहे हैं- जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, मंत्री, सांसद। मुलायम सिंह यादव यादव थे, अखिलेश यादव यादव हैं। इसलिए यादवों का भावनात्मक लगाव पार्टी से बहुत गहरा है।

अब पीडीए में जब अन्य पिछड़ों को टिकट दिए जा रहे हैं तो यादवों की संख्या कम हो रही है। साल 2024 में कई यादव उम्मीदवारों को टिकट नहीं मिला। यही ‘कुर्बानी’ की बात है जिसका जिक्र अफजाल अंसारी ने किया। लेकिन यादव नेता पूछ रहे हैं- हम त्याग करें तो क्या बदले में हमें सम्मान और सुरक्षा मिलेगी? या फिर हमारी उपेक्षा होगी?

पीडीए के अंदर तीन बड़े टकराव

यादव बनाम अन्य पिछड़े: यादवों को लगता है कि वे सबसे ज्यादा संगठित हैं इसलिए उनकी हिस्सेदारी सबसे ज्यादा होनी चाहिए। लेकिन अन्य पिछड़े जैसे राजभर, निषाद कहते हैं कि हम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

यादव-मुस्लिम रिश्ता: मुस्लिम 19 प्रतिशत आबादी के हैं। वे 90 प्रतिशत वोट सपा को देते हैं। अफजाल अंसारी मुस्लिम प्रतिनिधि हैं। यादव कहते हैं कि मुस्लिम तो वोट देते हैं लेकिन पद कम लेते हैं। अब जब मुस्लिम नेताओं को ज्यादा जगह दी जा रही है तो टकराव बढ़ रहा है।

दलितों का शामिल होना: दलित 21 प्रतिशत हैं। सपा ने कई दलित नेताओं को जोड़ा है। लेकिन दलितों में अभी भी असंतोष है। वे पूछते हैं कि सपा के शासन में उनके साथ क्या हुआ था? क्या अब वाकई बराबरी मिलेगी?

ये तीनों टकराव पीडीए को कमजोर कर सकते हैं अगर सपा ने इन्हें नहीं संभाला तो। हालाँकि दलितों का बड़ा वोटबैंक अब भी सपा से दूर है। वो परंपरागत तौर पर बीएसपी के लिए वोट करता रहा है और अब गैर-जाटव दलितों का बड़ा वोट बीजेपी को मिलने लगा है।

साल 2027 के चुनावों में क्या असर पड़ेगा?

साल 2027 का विधानसभा चुनाव करीब हैं। सपा पीडीए को अपना सबसे बड़ा हथियार मान रही है। लेकिन अगर यादव कार्यकर्ता नाराज रहे तो वोट ट्रांसफर नहीं होगा। यादव बूथ स्तर पर सबसे ज्यादा काम करते हैं। अगर वे उत्साह नहीं दिखाएँगे तो पूरा समीकरण बिगड़ सकता है।

दूसरी तरफ अगर यादव समाज कुर्बानी दे देता है तो पीडीए और मजबूत हो सकता है। भाजपा इस विवाद को अपना फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। भाजपा नेता कह रहे हैं कि सपा में यादव-मुस्लिम की लड़ाई शुरू हो गई है।

अखिलेश यादव की सबसे बड़ी चुनौती

अखिलेश यादव को तीन काम करने होंगे:

  1. यादव समाज को समझाना कि त्याग से पार्टी मजबूत होगी और सबका भला होगा।
  2. अन्य वर्गों को विश्वास दिलाना कि उनकी भागीदारी सिर्फ कागज पर नहीं, हकीकत में है।
  3. पार्टी के अंदर अनुशासन बनाए रखना ताकि बयानबाजी न बढ़े।
अगर वे यह संतुलन साध लेते हैं तो पीडीए 2027 में भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकता है। वरना यह नारा सिर्फ भाषणों तक सीमित रह जाएगा।

फिलहाल तो लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या यादव समाज वाकई कुर्बानी देने को तैयार है? क्या अफजाल अंसारी जैसे नेता खुद अपनी सीटों पर त्याग दिखाएँगे? क्या अखिलेश यादव इस असंतोष को संभाल पाएंगे?

यह विवाद सिर्फ सपा की अंदरूनी बात नहीं है। यह उत्तर प्रदेश की सामाजिक राजनीति की असली तस्वीर है। जहाँ एक तरफ सामाजिक न्याय का सपना है, दूसरी तरफ वास्तविकता में हिस्सेदारी की लड़ाई है। अभी तो समय बताएगा कि पीडीए एकजुट रहता है या आंतरिक खींचतान में बिखर जाता है। लेकिन एक बात तय है कि अखिलेश यादव का चुनावी पीडीए अब बिखरता दिख रहा है।


    देश जानता है आप(कांग्रेस) पहले से ही नंगे हो, फिर कपड़े उतारने की क्या जरूरत थी?


    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 फरवरी को मेरठ से कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। मौका था मेरठ में ‘नमो भारत’ रैपिड रेल और मेट्रो सेवा के ऐतिहासिक उद्घाटन का, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के निशाने पर रही दिल्ली की वो घटना, जिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। दिल्ली के ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए अर्धनग्न प्रदर्शन पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब वैचारिक रूप से पूरी तरह दिवालिया हो चुकी है और देश के लिए बोझ बन गई है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 फरवरी को मेरठ से कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। मौका था मेरठ में ‘नमो भारत’ रैपिड रेल और मेट्रो सेवा के ऐतिहासिक उद्घाटन का, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के निशाने पर रही दिल्ली की वो घटना, जिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। दिल्ली के ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए अर्धनग्न प्रदर्शन पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब वैचारिक रूप से पूरी तरह दिवालिया हो चुकी है और देश के लिए बोझ बन गई है।

    उन्होंने कहा कि हम उस संस्कृति से आते हैं जहां गांव की शादी में भी पूरा गांव मेहमानों की खातिरदारी में जुट जाता है, लेकिन कांग्रेस अपने ही देश को बदनाम करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि जहां पूरा देश मेहमानों के स्वागत में जुटा था, वहीं कांग्रेस देश को बदनाम करने की साजिश रच रही थी।

    भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष के अन्य दलों और मीडिया को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की इस हरकत से उनके साथी दल भी हैरान हैं और उन्होंने इससे किनारा कर लिया है। पीएम ने मीडिया से आग्रह किया कि ‘मोदी ने विपक्ष को धो डाला’ जैसी हेडलाइन न बनाएं, बल्कि सीधे कांग्रेस का नाम लें। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस ऐसी हरकतें करती है, तो हेडलाइन ‘विपक्ष’ के नाम से नहीं बल्कि ‘कांग्रेस’ के नाम से बननी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘विपक्ष’ शब्द का इस्तेमाल कर मीडिया अनजाने में कांग्रेस के पापों पर पर्दा डाल देता है।

    संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस द्वारा संसद में महिला सांसदों को आगे कर विरोध प्रदर्शन करवाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि क्या आप इतने खोखले हो गए हैं कि माताओं-बहनों को इस तरह आगे करना पड़ रहा है? उन्होंने कटाक्ष किया कि अगर प्रधानमंत्री बनना है, तो जनता का दिल जीतना पड़ता है, इस तरह की ओछी हरकतों से कोई नेता नहीं बनता। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस अब देश के लिए एक ‘बोझ’ बन चुकी है।

    सियासी हमले के बाद तकनीकी उपलब्धि का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि भारत में पहली बार एक ही प्लेटफॉर्म और एक ही ट्रैक पर ‘नमो भारत’ और ‘मेट्रो’ दोनों चलेंगी। इससे दिल्ली और मेरठ के बीच की दूरी कम हो जाएगी। इससे दिल्ली-मेरठ के बीच रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों और छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। अब लोगों को दिल्ली में महंगे किराए के कमरे लेकर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
    उन्होंने बताया कि 2014 से पहले देश के सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो थी, जबकि आज 25 से ज्यादा शहरों में मेट्रो का जाल बिछ चुका है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क बन गया है।
    मेरठ के स्पोर्ट्स गुड्स, कैंची उद्योग और मुरादाबाद के पीतल उद्योग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने MSMEs के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के विशेष फंड की व्यवस्था की है। अब छोटे कारीगर बिना किसी सीमा के अपना सामान विदेशों में कूरियर कर सकेंगे। उन्होंने चौधरी चरण सिंह जी को याद करते हुए कहा कि उनकी सरकार किसानों और छोटे उद्यमियों के विजन को धरातल पर उतार रही है।
    उन्होंने कहा कि 10 साल पहले पश्चिमी यूपी की पहचान दंगों, गुंडों और खराब सड़कों से होती थी। सपा राज में अपराधी बेखौफ थे, लेकिन आज योगी जी के राज में वही अपराधी जेलों में दिन काट रहे हैं। आज मेरठ की पहचान ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल और अत्याधुनिक मेट्रो से हो रही है। पीएम मोदी ने दोहराया कि जब तक उत्तर प्रदेश विकसित नहीं होगा, भारत विकसित नहीं हो सकता। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट और सेमीकंडक्टर फैक्ट्री जैसे प्रोजेक्ट्स यहां के युवाओं के लिए लाखों रोजगार के अवसर पैदा करेंगे।




    उत्तर प्रदेश : 50+ बच्चों से दरिंदगी, 47 देशों में भेजे अश्लील वीडियो-फोटो: बाँदा कोर्ट ने पति-पत्नी को सुनाई फाँसी की सजा, डार्क वेब से चलाते थे नेटवर्क


    उत्तर प्रदेश के बाँदा में पॉक्सो कोर्ट ने पति-पत्नी दोनों को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े एक मामले में फाँसी की सजा सुनाई है। साल 2020 में उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से सामने इस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। सरकारी नौकरी में तैनात एक इंजीनियर और उसकी पत्नी गरीब परिवारों के बच्चों को लालच देकर अपने जाल में फँसाते, उनका यौन शोषण करते और अश्लील वीडियो-फोटो बनाकर डार्क वेब के जरिए विदेशों में बेचा करते थे। 5 साल तक चले मुकदमे के बाद कोर्ट ने फाँसी की सजा सुनाई।

    सरकारी इंजीनियर और उसकी पत्नी की खौफनाक दुनिया

     बाँदा का रहने वाला रामभवन चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात था। वह अपनी पत्नी दुर्गावती के साथ SDM कॉलोनी में रहता था। दोनों गरीब परिवारों के बच्चों को मोबाइल, खिलौने, पैसे और गेम दिखाने का लालच देकर अपने घर बुलाते थे।

    इसके बाद 5 से 16 साल तक के बच्चों के साथ यौन शोषण किया जाता था और लैपटॉप व वेब कैमरे से उनके अश्लील वीडियो व फोटो बनाए जाते थे। विरोध करने पर बच्चों के साथ मारपीट और धमकी दी जाती थी ताकि वे किसी से कुछ न कह सकें।

    डार्क वेब से इंटरपोल तक पहुँची दरिंदगी की परतें

    अक्टूबर 2020 में इंटरपोल के जरिए CBI को सूचना मिली कि भारत से एक व्यक्ति बच्चों के अश्लील वीडियो बनाकर अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क तक पहुँचा रहा है। जाँच में तीन मोबाइल नंबर और एक पेन ड्राइव सामने आई, जिसमें 34 बच्चों के वीडियो और सैकड़ों फोटो मौजूद थीं।

    तकनीकी जाँच के बाद इन नंबरों को ट्रेस किया गया, तो पूरा मामला रामभवन और उसकी पत्नी तक पहुँच गया। इसके बाद 18 नवंबर 2020 को CBI ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। छापेमारी के दौरान उनके घर से नकदी, मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, वेब कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।

    चीन, अमेरिका, अफगानिस्तान समेत 47 देशों में भेजे फोटो-वीडियो

    गिरफ्तारी के बाद CBI ने करीब 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें मेडिकल रिपोर्ट, पीड़ित बच्चों के बयान और डिजिटल सबूत शामिल थे। जाँच में सामने आया कि दोनों ने 50 से अधिक बच्चों का शोषण किया था और उनके वीडियो-फोटो चीन, अमेरिका, ब्राजील, अफगानिस्तान समेत 47 देशों में बेचे गए।

    इस मामले में 74 गवाहों को कोर्ट में पेश किया गया। बच्चों के इलाज की व्यवस्था दिल्ली एम्स में कराई गई। करीब पाँच साल तक चले ट्रायल के दौरान हर सुनवाई ने इस कांड की भयावहता को और उजागर किया। पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में मानते हुए पति-पत्नी दोनों को फाँसी की सजा सुनाई। जज ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि पीड़ित प्रत्येक बच्चे को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए।

    ISI से लिंक, सेना मुख्यालय से लेकर सरकारी दफ्तरों में आना-जाना: मेरठ में अम्मी-बेटी निकली PAK की नागरिक, 30 सालों से फर्जी आधार कार्ड-पासपोर्ट के जरिए भारत में रह रहीं

    पाकिस्तानी नागरिक अम्मी-बेटी के खिलाफ जाली भारतीय दस्तावेज और अवैध निवास के आरोप में FIR दर्ज (साभार: Dall-E/X)
    उत्तर प्रदेश की मेरठ पुलिस ने 14 फरवरी 2026 को एक अम्मी और उसकी बेटी के खिलाफ केस दर्ज किया। आरोप है कि ये दोनों करीब 30 साल से भारत में रह रही थीं, जबकि वे पाकिस्तानी नागरिक हैं। इस मामले की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता रुखसाना ने की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अम्मी-बेटी ने धोखे से भारतीय पहचान पत्र बनवा लिए। रुखसाना ने शिकायत में बताया कि पाकिस्तानी नागरिक होने के बावजूद दोनों ने फर्जी तरीके से आधार कार्ड, वोटर आईडी और भारतीय पासपोर्ट तक हासिल कर लिया।

    मीडिया से बात करते हुए SSP अविनाश पांडेय ने बताया कि उन्हें फरहत मसूद नाम के एक व्यक्ति के बारे में जानकारी मिली। वह दिल्ली गेट इलाके में रहता है। बताया जा रहा है कि फरहत मसूद पाकिस्तान गया था, जहाँ उसने सबा नाम की औरत से निकाह किया। वहीं पाकिस्तान में उनकी एक बेटी पैदा हुई। सबा और उसकी बेटी दोनों ही पाकिस्तानी नागरिक हैं।

    SSP ने बताया कि शुरुआती जाँच में यह साफ हो गया है कि आरोपित बिना वैध भारतीय नागरिकता के यहाँ रह रहे थे। उन्होंने कहा कि इससे पहले SP सिटी द्वारा की गई जाँच में भी आरोपों में सच्चाई पाई गई थी। जाँच में तथ्य सामने आने के बाद अब इस मामले में औपचारिक रूप से FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने बताया कि आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और पूरे मामले की गहराई से जाँच के आदेश दे दिए गए हैं।

    मामले में FIR की पूरी जानकारी

    ऑपइंडिया ने इस मामले में दर्ज की गई FIR की कॉपी देखी है। इस FIR में सबा मसूद उर्फ नाजी उर्फ नाजिया और उशकी बेटी ऐमन फरहत को मुख्य आरोपित बताया गया है। इन दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS)2023 की कई धाराएँ लगाई गई हैं।

    इनमें धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 351(2) और 352 शामिल हैं। ये धाराएँ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने और आपराधिक धमकी देने जैसे आरोपों से जुड़ी हुई हैं।

                                                                           साभार: UP पुलिस

    शिकायतकर्ता ने बताया कि सबा ने पाकिस्तान में फरहत मसूद से निकाह किया था और उनके बेटी ऐमन का जन्म वहीं 25 मई 1993 को हुआ था। उन्होंने आगे कहा कि जब सबा भारत आई, तो ऐमन भी उसके साथ ही आई थी। ऐमन ने भारत में एंट्री सबा के पाकिस्तानी पासपोर्ट के जरिए की थी। उस पासपोर्ट में ऐमन का नाम और उसकी जन्मतिथि साफ-साफ दर्ज थी।

    शिकायतकर्ता रुखसाना ने आगे बताया कि अम्मी और बेटी, दोनों ही पाकिस्तानी नागरिक होने के बावजूद मेरठ में रह रही थीं। उन्होंने कभी भी कानूनी तरीके से भारतीय नागरिकता लेने की प्रक्रिया पूरी नहीं की। रुखसाना ने यह भी कहा कि ऐमन ने मेरठ में ही पढ़ाई की, जबकि वह पाकिस्तानी नागरिक थी।

                                                                  साभार: UP पुलिस

    उन्होंने आगे बताया कि ऐमन के लिए भारतीय पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी और बनावटी दस्तावेज तैयार किए गए। रुखसाना के मुताबिक, सबा ने भी दो अलग-अलग नामों से वोटर कार्ड बनवा लिए थे। इनमें एक सबा मसूद के नाम से और दूसरा नाजिया मसूद के नाम से था। शिकायत में कहा गया है कि ये सब जानबूझकर अपनी असली पहचान छिपाने और भारतीय अधिकारियों को धोखा देने के लिए किया गया।

    रुखसाना ने अपनी शिकायत में सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि आरोपित फर्जी पासपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर कई बार पाकिस्तान और दूसरे देशों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि सबा के अब्बा हनीफ अहमद कथित तौर पर पाकिस्तान नागरिक थे और उनका संबंध ISI से बताया जाता है। रुखसाना के अनुसार, इसी वजह से यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर हो जाता है।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपित अपनी असली पहचान छिपाकर दिल्ली में सेना मुख्यालय और दूसरे सरकारी दफ्तरों में भी अकसर आते-जाते रहे हैं।
    FIR में यह भी दर्ज है कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने पहले इस मामले पर आपत्ति जताई थी तब उन्हें धमकाया और डराया गया था। रुखसाना का कहना है कि आरोपितों ने उन्हें यह कहकर दबाव बनाने की कोशिश की कि उनकी राजनीतिक पहुँच है और पुलिस प्रशासन में भी उनके संबंध हैं।

    तीन तलाक की पैरवी करने वाले मुनव्वर राना की सबसे छोटी बेटी हिबा को शौहर से मिले धक्के, गाली और कुटाई: हिस्से में तीन तलाक आई

                        हिबा राना (बाएँ), मुनव्वर राना (दाएँ), (साभार : Aajtak & naidunia & Grok)
    ‘किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई, मैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई’
    … ये शायर मुनव्वर राना का शेर है। जब मोदी सरकार तीन तलाक के खिलाफ कानून लेकर आई थी, तब मुनव्वर राना और उनका खानदान इस कानून के विरोध में संसद से सड़क तक उतरा था। अब दुर्भाग्य देखिए कि उनकी ही सबसे छोटी बेटी के हिस्से में तीन तलाक आया है।

    दरअसल, लखनऊ में मुनव्वर राना की बेटी हिबा राना ने अपने शौहर सैय्यद मोहम्मद साकिब और ससुराल वालों पर तीन तलाक, दहेज के लिए प्रताड़ना और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं। लखनऊ के सआदतगंज थाने में दर्ज FIR के मुताबिक, हिबा को उनके शौहर ने 20 लाख रुपए और एक फ्लैट की माँग पूरी न होने पर बेरहमी से पीटा और ‘तीन तलाक’ बोलकर घर से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया।

    यह वही मुनव्वर राना का परिवार है, जिसने केंद्र सरकार के तीन तलाक विरोधी कानून का सड़कों पर उतरकर विरोध किया था। आज वक्त का पहिया ऐसा घूमा है कि जिस कानून को उन्होंने ‘इस्लाम में हस्तक्षेप’ बताया था, आज उसी कानून की धाराओं के तहत हिबा राना न्याय की गुहार लगा रही हैं।

    20 लाख की भूख और सुसराल का असली चेहरा

    हिबा राना ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि उनकी निकाह 19 दिसंबर 2013 को हुई थी। निकाह के समय उनके परिवार ने अपनी हैसियत से बढ़कर करीब 10 लाख रुपए नकद और सोने-हीरे के आभूषण दिए थे। लेकिन ससुराल वालों की लालच की भूख कभी शांत नहीं हुई। निकाह के कुछ समय बाद ही शौहर और ससुर ने 20 लाख रुपए नकद और एक अलग फ्लैट की माँग शुरू कर दी।

    हिबा राना का आरोप है कि इस माँग को पूरा न करने पर उन्हें लगातार शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया गया। कई बार उनके साथ जानवरों की तरह मारपीट की गई और जान से मारने की धमकियाँ दी गईं। हिबा के अनुसार, 9 अप्रैल 2025 को विवाद इतना बढ़ गया कि शौहर साकिब ने उनके साथ गाली-गलौज की और मारपीट शुरू कर दी।

    जब हिबा की बहन उन्हें बचाने पहुँची, तो आरोपित और भी भड़क गया। उसने चिल्लाते हुए तीन बार ‘तलाक’ बोला और हिबा को धक्के मारकर घर से बाहर निकाल दिया। इतना ही नहीं, हिबा के दोनों मासूम बच्चों को कमरे में बंद कर दिया गया।

    हिबा किसी तरह अपनी जान बचाकर मायके पहुँची और अब पुलिस के पास अपनी सुरक्षा और न्याय के लिए खड़ी हैं। सआदतगंज पुलिस ने शौहर और ससुर के खिलाफ दहेज प्रतिषेध अधिनियम और मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

    FIR: आरोपों और धाराओं का जाल

    लखनऊ पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (संख्या 31/2026) में हिबा राना ने अपने शौहर सैय्यद मोहम्मद साकिब और ससुर सैय्यद हसीब अहमद को मुख्य आरोपित बनाया है। पुलिस ने इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 (क्रूरता), 115(2) (चोट पहुँचाना), 351(2) (आपराधिक धमकी) और 352 के साथ-साथ मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम की धारा 3 और 4 लगाई है। यह वही धाराएँ हैं जिनके तहत ‘तीन तलाक’ देना एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें तीन साल तक की जेल का प्रावधान है।

                                                                         सोर्स: यूपी पुलिस

    मुनव्वर की बेटी हिबा ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया है कि कैसे उनके ससुर भी इस दहेज की माँग और धमकियों में शामिल थे। आरोपितों ने उन्हें मानसिक और शारीरिक यातनाएँ दीं। शिकायत में यह भी दर्ज है कि आरोपित शौहर और उसका परिवार लगातार हिबा को डरा-धमका रहा है। हिबा ने अपनी तहरीर में लिखा है कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर भय है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सबूत जुटाने शुरू कर दिए हैं और जल्द ही आरोपितों की गिरफ्तारी हो सकती है। यह FIR एक दस्तावेज है जो बताता है कि जब रसूखदार परिवारों में भी बेटियाँ सुरक्षित नहीं होतीं, तब सख्त कानूनों की कितनी जरूरत होती है।

                                                                           सोर्स: यूपी पुलिस

    जब जुबाँ पर था विरोध और हकीकत ने दी पटकनी

    आजतक चैनल पर एंकर अंजना ओम कश्यप के साथ बहस के दौरान मुनव्वर राना की बेटी ने इस कानून को लेकर जहर उगला था। उरूसा राना का तर्क था कि तलाक की प्रक्रिया में वक्त इसलिए दिया जाता है ताकि सुलह हो सके, इसलिए कानूनी दखल की जरूरत नहीं है। आज विडंबना देखिए, जिस ‘तीन तलाक’ को ये बहनें अस्तित्वहीन बता रही थीं, उसी के जरिए हिबा को घर से निकाला गया।

    जब ‘मजहबी रवायत’ के पैरोकारों पर ही गिरी गाज

    यह मामला केवल एक महिला के साथ हुई हिंसा का नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के दोहरे मापदंडों की पोल खोलता है जो प्रगतिशीलता का नकाब ओढ़कर कट्टरपंथी कुरीतियों का समर्थन करते हैं। मुनव्वर राना ने साल 2016-17 में तीन तलाक कानून का खुलकर विरोध किया था।

    मुनव्वर राना ने सार्वजनिक मंचों से उलेमाओं का साथ देते हुए कहा था कि सरकार को मजहबी मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया था कि ‘जब मुसलमान किसी दूसरे मुल्क का चाँद देखकर ईद नहीं मनाते, तो पाकिस्तान या बांग्लादेश जैसे कानून से यहाँ के मामले कैसे हल हो सकते हैं?’

    मुनव्वर राना और उनकी बेटियों- ‘सुमैया और हिबा’ ने इस कानून को मुस्लिम पुरुषों को फँसाने की साजिश करार दिया था। उनका कहना था कि अगर शौहर जेल चला जाएगा, तो औरत और बच्चों का खर्च कौन उठाएगा? लेकिन आज जब हिबा खुद उसी कुप्रथा का शिकार हुईं, तो उन्हें उलेमाओं के फतवों में नहीं, बल्कि भारतीय संविधान और मोदी सरकार के बनाए उसी कानून में सुरक्षा दिखी। यह विडंबना ही है कि जिन रिवाजों को ये लोग अपनी पहचान का हिस्सा मानते हैं, वही रवायतें जब इनके घर की बेटियों को बेघर करती हैं, तब इन्हें ‘सेकुलर’ और ‘आधुनिक’ कानून की याद आती है।

    इस्लामी रवायत बनाम आधुनिक बेड़ियाँ: सोशल मीडिया पर उठे सवाल

    यह अक्सर देखा गया है कि एक विशेष विचारधारा के लोग इस्लामी रवायतों के पक्ष में बड़े-बड़े तर्क देते हैं। वे इसे अपनी धार्मिक स्वायत्तता बताते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या कोई रवायत किसी इंसान की गरिमा से बड़ी हो सकती है? मुनव्वर राना जैसे लोग, जो अपनी शायरी में ‘माँ’ और ‘ममताबोध’ की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वे तीन तलाक जैसी महिला विरोधी प्रथा पर उलेमाओं के साथ खड़े नजर आए थे। इन लोगों के लिए मजहबी पहचान अक्सर मानवाधिकारों से ऊपर हो जाती है। लेकिन हकीकत यह है कि ये रवायतें अक्सर महिलाओं के लिए बेड़ियाँ बन जाती हैं।

    हिबा राना का केस यह साबित करता है कि धार्मिक कट्टरता और रूढ़िवाद का समर्थन करना तब तक अच्छा लगता है जब तक आग पड़ोसी के घर में लगी हो। जब अपनी ही बेटी को सड़क पर खड़ा कर दिया गया, तब समझ आया कि ‘तलाक-ए-बिद्दत’ (एक बार में तीन तलाक) कितनी खतरनाक बीमारी है। इन लोगों ने जिस कानून को ‘बेवजह’ बताया था, आज वही कानून हिबा के लिए आखिरी उम्मीद की किरण है।

    सोशल मीडिया पर नेटिजन्स अब जायज सवाल पूछ रहे हैं कि जब आप इस कानून के खिलाफ थे, तो अब इसका सहारा क्यों ले रहे हैं? एक यूजर ने लिखा कि हिबा और मुनव्वर राना तो तीन तलाक के कट्टर समर्थक थे। जिस कानून का विरोध कर रहे थे, अब उसी की शरण में जाना पड़ रहा है।

    एक यूजर ने तीन तलाक कानून के विरोध करने वालों के लिए लिखा, “कुकर्मों का फल”।

    एक अन्य यूजर ने लिखा, “दर्दनाक सच सामने है। ट्रिपल तलाक सिर्फ बहस का मुद्दा नहीं, महिलाओं की ज़िंदगी का सवाल है। आज फिर साबित हुआ- कड़ा क़ानून क्यों ज़रूरी था।”

    सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत प्रशांत उमराव ने भी लिखा, “जब ट्रिपल तलाक का कानून बन रहा था तब इसका विरोध करने वालों में प्रमुख शायर मुनव्वर राणा और उनकी बेटियाँ थी। अब दिवंगत शायर मुनव्वर राना की बेटी हिबा राना को उनके शौहर ने तीन तलाक दे दिया है। हिबा राना ने अपने शौहर मोहम्मद साकिब और ससुर हसीब अहमद के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है।”

    दोहरेपन की हार और इंसाफ की पुकार

    अंत में, यह मामला मुनव्वर राना के उस पूरे नैरेटिव को ध्वस्त कर देता है जिसमें वे खुद को लोकतंत्र और आजादी का सिपाही बताते थे। साक्षर समाज और प्रभावशाली परिवारों में भी अगर ‘तीन तलाक’ जैसा जहर मौजूद है, तो कल्पना कीजिए कि आम गरीब मुस्लिम महिलाओं का क्या हाल होता होगा। यह कानून किसी मजहब के खिलाफ नहीं, बल्कि उन जालिम मर्दों के खिलाफ है जो अपनी बीवी को एक इस्तेमाल की हुई वस्तु समझकर तीन शब्दों में बाहर फेंक देते हैं।

    हिबा राना के साथ जो हुआ वह निंदनीय है, लेकिन उनके परिवार का जो वैचारिक पतन दिखा, वह शर्मनाक है। जिस कानून को मुनव्वर राना और उनकी बेटियों ने कोसते हुए संसद से सड़क तक विरोध किया, आज उसी कानून के नीचे शरण लेना उनकी सबसे बड़ी नैतिक हार है। यह उन तमाम लोगों के लिए सबक है जो तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के लिए महिला अधिकारों की बलि चढ़ा देते हैं। आज मोदी सरकार का वही ‘कड़ा’ कानून हिबा राना को उनके बच्चों की कस्टडी और गुजारा भत्ता दिलाने का आधार बनेगा।

    हापुड़ : हनुमान चालीसा पाठ पर भड़के SC दबंग, प्रजापति माँ-बेटे को जूतों की माला पहनाकर निकाला जुलूस-अंबेडकर प्रतिमा के सामने रगड़वाई नाक

                          माँ-बेटे के साथ अपराध करने वाले 4 आरोपित गिरफ्तार (साभार X_@hapurpolice)
    उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाली एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ शाहपुर चौधरी गाँव में एक माँ और उसके बेटे को जूतों की माला पहनाकर पूरे गाँव में घुमाया गया और उन्हें अमानवीय तरीके से अपमानित किया गया। इस पूरी घटना से जुड़ी FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की है और अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

    मंदिर में विवाद और जूतों की माला का ‘फरमान’

     जानकारी के अनुसार, घटना की जड़ें अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय से जुड़ी हैं। पीड़ित युवक दीपक चौधरी (प्रजापति समुदाय) के अनुसार, उस दौरान गाँव के मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ हो रहा था, तभी दलित समुदाय के एक युवक ने हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसका दीपक ने विरोध किया था।

    आरोप है कि इसी रंजिश के चलते 26 जनवरी 2026 को कुछ दलित युवकों ने दीपक को रास्ते में रोक लिया और गाली-गलौज की। इसके बाद उसकी माँ को भी मौके पर बुला लिया गया। गाँव की पंचायत ने कथित तौर पर एक ‘तालिबानी’ फरमान सुनाया कि दोनों को जूतों की माला पहनाकर घुमाया जाए ताकि धर्म पर टिप्पणी का बदला लिया जा सके।

    प्रतिमा के सामने नाक रगड़वाई और निकाला जुलूस

    पीड़ित ने FIR में आरोप लगाया कि उसे और माँ को जबरन बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने ले जाया गया और वहाँ उनकी नाक रगड़वाई गई। इसके बाद भीड़ ने दोनों के गले में जूतों और चप्पलों की माला डाल दी और पूरे गाँव में उनका जुलूस निकाला।
    इस दौरान माँ-बेटे के साथ मारपीट भी की गई और उन्हें हाथ जोड़कर माफी माँगने पर मजबूर किया गया। यह पूरी शर्मनाक घटना गाँव में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    पुलिस की कार्रवाई और गाँव में तनाव

    वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। गढ़ कोतवाली पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर तत्काल 10 नामजद युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चार आरोपितों (अनिल, अमित, सागर और विनीत) को गिरफ्तार कर लिया है।

    गढ़ कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर देवेंद्र विष्ट ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि एक आरोपित पुलिस विभाग से जुड़ा है, जिसकी जाँच की जा रही है। फिलहाल गाँव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

    ‘अब उपद्रव नहीं, यहाँ उत्सव होते हैं’: UP दिवस से पहले CM योगी ने जनता के नाम लिखी ‘पाती’, कहा- 6 करोड़ लोगों को निकाला गरीबी से बाहर

                                                                                                                                                                                                                        साभार: Mint
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (22 जनवरी 2025) को प्रदेश की जनता के नाम ‘योगी की पाती’ शीर्षक के साथ भावनात्मक पत्र लिखा। इस पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री ने बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश में आए व्यापक बदलावों, सरकार की नीतियों, विकास की उपलब्धियों और भविष्य के संकल्पों को विस्तार से साझा किया।

    उन्होंने प्रदेश की उस यात्रा का वर्णन किया, जिसमें उत्तर प्रदेश ने एक समय की बीमारू राज्य की छवि को पीछे छोड़ते हुए आज देश के विकास के प्रमुख ग्रोथ इंजन के रूप में अपनी पहचान बनाई है। पत्र में सुशासन, कानून व्यवस्था, आर्थिक प्रगति, सामाजिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे विषय प्रमुख रूप से उभरकर सामने आते हैं।

    सुशासन और कानून व्यवस्था से बदली प्रदेश की तस्वीर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पत्र में सबसे पहले प्रदेश में स्थापित कानून और सुशासन की चर्चा की। उन्होंने लिखा कि दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्पष्ट नीतियों के चलते उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है। पहले जहाँ माफिया और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण मिलता था, वहीं अब उनके अवैध साम्राज्यों पर कठोर कार्रवाई की गई है।

    उन्होंने लिखा कि बेहतर कानून व्यवस्था के कारण प्रदेश में निवेश का माहौल बदला है। जो निवेशक पहले उत्तर प्रदेश से दूरी बनाते थे, वे अब यहाँ निवेश के लिए उत्सुक हैं। सरकार की पारदर्शी नीतियों और सुरक्षा के भरोसे ने प्रदेश को उद्योग और व्यापार के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है।

    आर्थिक विकास, कृषि और रोजगार की नई दिशा

    ‘योगी की पाती’ में सीएम ने आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन को विशेष स्थान दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश की खाद्य और आय सुरक्षा का मजबूत आधार बना है। ‘बीज से बाजार तक’ की व्यवस्था और सीधे बैंक खातों में भुगतान (DBT) से किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
    औद्योगिक विकास के चलते प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। लेबर रिफॉर्म, डी-रेगुलेशन, एमएसएमई को बढ़ावा, कौशल विकास, स्टार्टअप संस्कृति और ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) जैसी योजनाओं ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई है। बेरोजगारी की समस्या के समाधान की दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    सामाजिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण

    मुख्यमंत्री ने पत्र में समाज के हर वर्ग के सशक्तिकरण पर भी जोर दिया। महिलाओं की श्रमबल में भागीदारी बढ़ने, बेटियों के जन्म से विवाह तक आर्थिक सहायता, निराश्रित महिलाओं, वृद्धों और दिव्यांगजनों के लिए पेंशन योजनाओं का उल्लेख किया गया।
    स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और हेल्थ-टेक के जरिए सुविधाएँ आमजन तक पहुँची हैं। जल, थल और नभ कनेक्टिविटी के विकास से व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई गति मिली है। साथ ही अयोध्या, काशी, मथुरा से लेकर संभल तक सांस्कृतिक चेतना और परंपराओं का पुनर्जागरण हो रहा है।
    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि जीरो पॉवर्टी के लक्ष्य के साथ करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। उन्होंने लिखा, “हमने जीरो पॉवटी लक्ष्य के साथ 6 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। डबल इंजन सरकार ने प्रदेश को ‘बॉटलनेक से ब्रेक’, ‘रेवेन्यू डेफिसिट से रेवेन्यू सरप्लस’ एवं ‘उपद्रव से उत्सव की ओर अग्रसर किया है।”
    अंत में उन्होंने 24 जनवरी को मनाए जाने वाले उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को दोहराते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ दीं।
    बता दें कि साल 2026 में उत्तर प्रदेश 77 साल पूरे होने का जश्न मनाएगा। 24 जनवरी 1950 को संयुक्त प्रांत का नाम अधिकारिक तौर पर बदलकर ‘उत्तर प्रदेश’ कर दिया गया था। इस दिन को प्रदेशवासी ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ के रूप में मनाते हैं। पहली बार इसे आधिकारिक रूप से प्रदेश में BJP सरकार आने के बाद जनवरी 2018 में मनाया गया था।

    केरल का पादरी कानपुर में चला रहा था ‘हाउस चर्च’, हिंदुओं को ईसाई बनाने के लिए विदेश से आ रहा था पैसा

                               केरल का पादरी एल्विन और उसकी पत्नी (साभार : FB_Shubham Shaurya)
    उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की घाटमपुर पुलिस ने 13 जनवरी 2026 को केरल के रहने वाले एक पादरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस पादरी पर लालच देकर और डरा-धमकाकर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने का गंभीर आरोप है। यह पूरा खेल घाटमपुर के नौरंगा गाँव में एक ‘हाउस चर्च’ (घर में बने अवैध चर्च) के जरिए चलाया जा रहा था। पादरी यहाँ आर्थिक रूप से कमजोर हिंदुओं को निशाना बनाता था और उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसाता था।

    पुलिस ने यह कार्रवाई फतेहपुर जिले के जहानाबाद निवासी मुकेश कुमार की लिखित शिकायत के बाद की है। मुकेश की शिकायत के आधार पर पादरी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई, जिसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है। गिरफ्तारी के बाद आरोपित पादरी को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

    बीमारी ठीक करने के नाम पर धर्मांतरण का धंधा

     यह घटना 13 जनवरी की है, जब पुलिस को सूचना मिली कि नौरंगा गाँव के एक घर के अंदर प्रार्थना सभा चल रही है। खबर मिलते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता भी वहाँ पहुँच गए। उन्होंने देखा कि प्रार्थना और बीमारी ठीक करने के नाम पर असल में वहाँ लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। कार्यकर्ताओं ने तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी। मौके पर पहुँची पुलिस ने वहाँ मौजूद सभी लोगों को हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए थाने ले आई।

    इस मामले में बजरंग दल के जिला संयोजक शुभम शौर्य अग्निहोत्री ने एसीपी कृष्णकांत यादव को एक लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में बताया गया कि नौरंगा के एक घर से ‘हाउस चर्च’ चलाया जा रहा था, जहाँ केरल का रहने वाला एल्विन और उसकी पत्नी हिंदुओं को लालच देकर उनका धर्म बदलवाने का काम कर रहे थे।

    शुरुआती पूछताछ के बाद पुलिस ने अन्य सभी लोगों को तो छोड़ दिया, लेकिन आरोपित पादरी को हिरासत में ले लिया। इस मामले में मुकेश कुमार की शिकायत पर एफआईआर (FIR) दर्ज की गई, जिसमें पादरी पर लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने और डराने-धमकाने के आरोप लगाए गए हैं।

    पुलिस की जाँच और दर्ज शिकायत के मुताबिक, आरोपित पादरी एल्विन ने अपने घर को ही एक ‘हाउस चर्च’ बना रखा था। यहाँ वह नियमित रूप से प्रार्थना सभाएँ और बीमारी ठीक करने (हीलिंग सेशन) के नाम पर कार्यक्रम आयोजित करता था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इन सभाओं में गरीब और मजबूर हिंदुओं को बुलाया जाता था। उन्हें पैसों का लालच और कई तरह के वादे किए जाते थे ताकि उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए मनाया जा सके।

    मीडिया से बातचीत में स्थानीय लोगों ने बताया कि पादरी खुद के पास चमत्कारी शक्तियाँ होने का दावा करता था। उसका कहना था कि उसके घर पर होने वाली प्रार्थना से बड़ी से बड़ी बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं। कई बार तो लोगों को यह तक डराया जाता था कि उनकी बीमारी बुरी ताकतों (प्रेत बाधा) की वजह से है और अगर वे धर्म परिवर्तन कर लेंगे, तभी उन्हें इन बीमारियों से छुटकारा मिलेगा।

    जाँच के दौरान पुलिस ने इस तथाकथित हाउस चर्च से कई फाइलें, दस्तावेज और भारी मात्रा में ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार की सामग्री बरामद की है। अब पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या इन सामग्रियों का इस्तेमाल योजनाबद्ध तरीके से हिंदुओं को प्रभावित करने और उन्हें ईसाई धर्म अपनाने का लालच देने के लिए किया जा रहा था।

    विदेशी फंडिंग का एंगल

    पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपित मूल रूप से केरल का रहने वाला है और पिछले करीब दस सालों से नौरंगा इलाके में रह रहा था। शुरुआत में वह किराए के मकान में रहता था, लेकिन बाद में उसने खुद की जमीन खरीदी और 2022 में अपना घर बना लिया। इसी घर को उसने बिना किसी अनुमति के एक ‘हाउस चर्च’ में बदल दिया।
    हैरानी की बात यह है कि आरोपित का अपना कोई ज्ञात काम या कारोबार नहीं था, फिर भी वह काफी आराम की जिंदगी जी रहा था। इससे पुलिस को शक है कि उसे विदेश या कहीं और से भारी फंडिंग (पैसे) मिल रही थी। अब पुलिस इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि हाउस चर्च चलाने, प्रार्थना सभाएँ आयोजित करने और अन्य गतिविधियों के लिए पैसा कहाँ से आ रहा था।
    अधिकारी इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि आरोपित अकेला ही यह सब कर रहा था या वह किसी ऐसे बड़े गिरोह का हिस्सा है जो अलग-अलग जिलों में धर्म परिवर्तन कराने के काम में लगा हुआ है।

    एफआईआर में क्या लिखा है?

    ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, यह शिकायत 13 जनवरी को बजरंग दल के कार्यकर्ता मुकेश कुमार ने दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 352 और 351(3) के साथ-साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत मामला दर्ज किया है।
    मुकेश ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि नौरंगा गाँव में एल्विन नाम के व्यक्ति ने अपने घर को चर्च बना लिया है। वह वहाँ गरीब लोगों को बुलाकर उन्हें तरह-तरह के लालच देता था और ईसाई धर्म अपनाने के लिए उनका ब्रेनवॉश कर रहा था।
    शिकायत में आगे कहा गया है कि जब मुकेश अपने दोस्त मनीष सचान के साथ उस चर्च में पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि आरोपित जबरन लोगों को घर के अंदर बिठाकर प्रार्थना करवा रहा था और उन्हें हिंदू धर्म छोड़ ईसाई बनने के लिए उकसा रहा था। जब मुकेश और उनके साथी ने इस पर आपत्ति जताई, तो आरोपित एल्विन ने उन्हें गालियाँ दीं और जान से मारने की धमकी दी, जिसके बाद वहाँ मौजूद लोग घर छोड़कर चले गए।

    बजरंग दल के खिलाफ शिकायत

    बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत पादरी की गिरफ्तारी के बाद उसके परिवार और कुछ स्थानीय लोगों ने पुलिस को एक अलग शिकायत दी है। इसमें आरोप लगाया गया है कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन आरोपों की अलग से जाँच की जा रही है और अगर सबूत मिलते हैं, तो उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    घाटमपुर इलाके में धर्मांतरण के पुराने विवादों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। इससे पहले भी यहाँ इस तरह की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। पुलिस अधिकारी अब इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इस पादरी के तार पहले के मामलों से जुड़े हैं। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि पादरी अकेला काम कर रहा था या वह किसी ऐसे संगठित गिरोह का हिस्सा है जो कई जिलों में सक्रिय है।

    प्रशासन का कहना है कि जाँच के दौरान मिले दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और पैसों के लेनदेन (फंडिंग) के सबूतों के आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।