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2873 संदिग्ध, 989 का आपराधिक रिकॉर्ड, 101 पर हत्या तो 284 पर डकैती-लूट के केस: CJP प्रदर्शन में शामिल चेहरों पर खुलासा, पुलिस ने हिंसा की जाँच की तेज

भारत के विरोधियों ने भारत की सांस्कृतिक पहचान नैतिकता और गरिमा को भीतर से खंडित किया है,भारत टूट रहा है,ऐसी बेहया और बदतमीज पीढ़ी का नेतृत्व करते हुए नेतृत्व का भी सिर शर्म से झुक गया है,कौन से माँ बाप को गर्व है ऐसी संतान पर ? आज भारत को शिक्षा से अधिक संस्कार और नैतिक मूल्यों को पुर्नजीवित करने की आवश्यकता है।
आहत है भारत माता की आत्मा !
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में 20 जुलाई 2026 को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर चले प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की जाँच में बड़े खुलासे सामने आए हैं।

पुलिस के हवाले से खबरों में बताया जा रहा है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, जिनमें से 989 लोगों पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, लूट, दुष्कर्म, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध, आर्म्स एक्ट, अपहरण, स्नैचिंग और NDPS जैसे गंभीर मामलों में केस दर्ज हैं।

पुलिस का कहना है कि इन लोगों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS), सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों और आम लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो तथा अन्य तकनीकी माध्यमों से की गई है। जाँच में यह भी सामने आया कि कई आरोपित 20 से 25 जुलाई के बीच बार-बार प्रदर्शन स्थल पर लौटे।

पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या इन्हीं लोगों ने जंतर-मंतर और नई दिल्ली के आसपास हुई हिंसा में सक्रिय भूमिका निभाई थी। पुलिस के मुताबिक, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी और जाँच की कार्रवाई जारी रहेगी, जबकि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की तैयारी है।

प्रदर्शन में मिले हत्या, डकैती, दुष्कर्म और पॉक्सो समेत कई गंभीर मामलों के आरोपित

दिल्ली पुलिस की जाँच के अनुसार, हिंसा में शामिल लोगों में 101 ऐसे आरोपित पाए गए जिन पर हत्या के मामले दर्ज हैं, जबकि 62 लोगों पर हत्या के प्रयास, 284 लोगों पर डकैती और लूट, 61 लोगों पर दुष्कर्म, 25 लोगों पर छेड़छाड़, 6 लोगों पर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं।
इसके अलावा 229 लोग आर्म्स एक्ट, 135 स्नैचिंग, 19 अपहरण और 67 लोग नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के मामलों में आरोपित पाए गए। पुलिस के अनुसार, इन आरोपितों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जो आदतन अपराधी हैं। हत्या के मामलों में शामिल 101 आरोपितों में से 42 पर दो या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
वहीं 12 लोगों का आपराधिक इतिहास 10 या उससे अधिक मामलों तक फैला हुआ है। हत्या के प्रयास के 62 आरोपितों में से 25 पर कई मामले दर्ज हैं। वहीं डकैती और लूट के 284 आरोपितों में से 155 पर दो या उससे अधिक केस हैं और 31 लोगों के खिलाफ 10 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दुष्कर्म के मामलों में शामिल 8 आरोपित, छेड़छाड़ के 6 आरोपित और NDPS के 9 आरोपित भी कई मामलों में पहले से आरोपित हैं।

FRS, CCTV और तकनीकी साक्ष्यों से हुई पहचान, पुलिस ने हिंसा में भूमिका की जाँच तेज की

दिल्ली पुलिस का कहना है कि संदिग्धों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों, सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो और आम नागरिकों के वीडियो के आधार पर की गई। जाँच में कई संदिग्ध उन स्थानों पर दिखाई दिए, जहाँ हिंसा हुई थी।
पुलिस के अनुसार, ये लोग पथराव करते, पुलिसकर्मियों पर हमला करते, सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाते और सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ करते नजर आए। जाँच से स्पष्ट हुआ कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों में केवल ऐसे व्यक्ति नहीं थे जिनका एक-दो मामलों से संबंध रहा हो, बल्कि बड़ी संख्या में आदतन और बार-बार अपराध करने वाले लोग भी मौजूद थे।

जंतर-मंतर तक ही थी अनुमति, संसद मार्च पर नहीं: चेतावनी के बाद हुआ बल प्रयोग

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को केवल जंतर-मंतर पर धरना देने की अनुमति दी थी, जबकि संसद तक मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ते हुए संसद के बेहद करीब तक पहुँच गए, जिससे संसद की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव की स्थिति पैदा हो गई।
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 पुलिस वाले भी इंसान हैं, मार खाने के लिए नहीं हैं; पुलिस वालों का भी परिवार होता है जस्टिस साहब; व
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पुलिस वाले भी इंसान हैं, मार खाने के लिए नहीं हैं; पुलिस वालों का भी परिवार होता है जस्टिस साहब; व
सुभाष चन्द्र जुलाई 27 को सुप्रीम कोर्ट में जंतर मंतर पर पुलिस की कथित Exesses पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ....
दिल्ली पुलिस का कहना है कि बल प्रयोग बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद ही किया गया, क्योंकि प्रदर्शनकारी लगातार एक के बाद एक बैरिकेड तोड़ते रहे। पुलिस के मुताबिक, हिंसा के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों सहित अनेक पुलिसकर्मी घायल हुए, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने काफी देर तक संयम बरता।
घटना के बाद पूरे घटनाक्रम की समीक्षा शुरू की गई, जिसमें उन असामाजिक तत्वों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है, जो पुलिस के अनुसार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बीच घुसकर हिंसा में शामिल हुए।

मोदी को जहर देकर मारने की प्लानिंग; व्हाट्सएप्प ग्रुप से बड़ा खुलासा, CJP के प्रदर्शन में मौत की प्लानिंग, प्रदर्शनकारियों को JNU से मिले हिंसा के निर्देश


कॉकरोच जनता पार्टी के 20 जुलाई, 2026 को संसद मार्च के दौरान कई जगहों पर हिंसा हुई। इस हिंसा में 6 आईपीएस अधिकारी और 118 पुलिस के जवान घायल हुए। पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। इस मामले में FIR दर्ज की गई है और कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस व्हाट्सएप्प ग्रुप, मोबाइल वीडियो, CCTV, ड्रोन कैमरे और पुलिस बॉडी कैमरे की फुटेज की जांच कर रही है। इस जांच में जो बातें अब तक खुलकर सामने आ रही हैं, वो काफी हैरान और परेशान करने वाली है। कुछ व्हाट्सएप्प ग्रुप में केंद्र की मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए मौत की प्लानिंग की गई थी। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मारने की बात कही जा रही थी।
जो-जो लोग भी आज के हिंसक आंदोलन में शामिल थे और खूब उपद्रव किए, अब उनकी पिता की सात पीढ़ियाँ याद आ जाएंगी।
जो-जो उछलने गए थे, वहाँ अब तुम उछल लिए। अब तुम्हें एक-एक करके पुलिस और कानून सबक सिखाएगा। अब पूरी उम्र तुम कोर्ट-कचहरी दौड़ोगे। और जो-जो उपद्रवी नेता तुम्हें उकसाए थे, वे तुम्हारा हाल तक नहीं पूछेंगे।
और अब पुलिस ने 70 लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है। जिन-जिन ने हिंसक उपद्रव किया है, अब सबका घर-परिवार बर्बाद हो जाएगा। पुलिस उपद्रवियों की पहचान भी वीडियो के माध्यम से कर रही है।
मीडिया चैनल बता रहे हैं कि इस उपद्रव में पाकिस्तान कनेक्शन की भी जाँच कर रही है पुलिस।
हम लोग इसीलिए सामान्य वर्ग को समझा रहे थे कि यह छात्रों का आंदोलन नहीं, बल्कि उपद्रवियों का आंदोलन है। उपद्रव ये जरूर करेंगे, लेकिन उपद्रव खत्म होते ही पुलिस एक-एक को ढूँढेगी और फिर उसका घर-परिवार तबाह हो जाएगा।
अब पुलिस जिन जिन उपद्रवियों को चिन्हहित करके FIR कर रही है अब आप लोग बताओ इनका मुकदमा पूरी उमर ये और इनका परिवार लड़ेगा या वो वो नेता लड़ेंगे जो इनको उकसाकर उपद्रव करवाये।
और समान्यवर्ग के लोग ये ध्यान देंगे कि यदि कोई समान्यवर्ग का इस उपद्रव में यदि पकड़ा गया या FIR हुआ तो उसकी मदत किसी समान्यवर्ग को नही करना है इनके अकेले ही झेलने दो

चलो संसद व्हाट्सएप्प ग्रुप में मौत की प्लानिंग
छात्रोंं के नाम पर प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारियों को व्हाट्सएप्प ग्रुप के माध्यम से निर्देश दिए जा रहे थे। उन्हें समझाया जा रहा था कि कैसे प्रदर्शन करना है। सोशल मीडिया में चलो संसद व्हाट्सएप्प ग्रुप का चैट वायरल हो रहा है, जिसमें प्रदर्शनकारियों को भड़काने वाले पोस्ट किए गए थे। एक चैट में akak नाम के हैंडल ने कहा, “भाई अगर किसी की मौत होती है तो उसमें तो सरकार पर ज्यादा दबाव आएगा।” 

akak के हैंडल से आगे लिखा गया, ” देखो यार जो जान देने तक को तैयार वो ये सुन लो, कम से कम तुम्हारा एहसान तो रहेगा आने वाली पीढ़ियों पर, आने वाले बच्चों पर, वो सुनेंगे की मेरा भाई उस प्रोटेस्ट में मारा गया, उस लड़ाई में मारा गया। याद किए जाओंगे। बहुत अच्छा लग रहा है ये देखकर वो जान तक देने को तैयार है भाई लोग।” इस चैट से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदर्शनकारियों की कितनी खतरनाक साजिश थी। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार और दिल्ली पुलिस के धैर्य ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। 

JNU से संचालित हो रहा था CJP का प्रदर्शन
एक दूसरे व्हाट्सएप्प ग्रुप का नाम JNU संसद चलो कोआर्डिनेशन है, जिसमें कई आपत्तिजनक पोस्ट किए गए हैं। पुनीत सुलाख के हैंडल से प्रदर्शनकारियों यानी वामपंथी छात्रों यानी कॉमरेड्स को कई निर्देश दिए गए। इसमें जो लिखा गया, आप खुद पढ़ सकते हैं…

मित्रों और कॉमरेड,
पुलिस विरोध प्रदर्शन को रोकने/कमजोर करने की पूरी कोशिश कर रही है। हमें पता चला है कि पुलिस हमें रोकने के लिए सुबह-सुबह जेएनयू (JNU) के सभी गेट बंद कर सकती है। सभी से अनुरोध है कि यदि आप अगले 2-3 घंटों में कैंपस छोड़ दें और रात 2-3 बजे तक जंतर-मंतर पहुंच जाएं, तो बहुत अच्छा होगा। इसके विकल्प के रूप में, जेएनयूएसयू (JNUSU) और हमारे संगठन का नेतृत्व सुबह 4 बजे से गंगा ढाबा पर मौजूद रहेगा, वहां से हम 4-5 लोगों के छोटे समूहों में बाहर निकल सकते हैं।

सामान्य निर्देश:

जूते और आरामदायक कपड़े पहनें।

फोन को अच्छी तरह चार्ज रखें और यदि संभव हो तो पावर बैंक साथ रखें।

इसके बाद भी समूहों में रहें…

कौन हैं पुनीत सुलाख ?
प्रदर्शनकारियों को निर्देश देने वाले पुनीत सुलाख जेएनयू के बी-टेक फाइनल ईयर के छात्र हैं। ये School of Engineering के ‘पर्सपेक्टिव्स – वाद-विवाद क्लब’ [Perspectives – Debating Club] में उपाध्यक्ष भी रहे हैं।

Briar और Bitchat ऐप डाउनलोड करने और जुड़े रहने का निर्देश
JNU संसद चलो कोआर्डिनेशन व्हाट्सएप्प ग्रुप के एक अन्य सदस्य अंजलि ने निर्देश दिया, ” विरोध प्रदर्शन (प्रदर्शन स्थल) वाली जगह पहुँचने के बाद शायद आपके डिवाइस (मोबाइल) में नेटवर्क न मिले। पिछली बार भी पुलिस ने नेटवर्क जैमर का इस्तेमाल किया था और इस बार भी वे ऐसा कर सकते हैं। हालांकि, आप जिस समूह के साथ आए हैं, उसके साथ जुड़े रहना बहुत ज़रूरी है। Briar, bitchat या ऐसी ही कोई अन्य ऐप डाउनलोड कर लें। ये नेटवर्क बंद होने पर भी ब्लूटूथ सिग्नल पर काम करते हैं, ताकि कोई भी आपके कनेक्शन को न देख सके। सुनिश्चित करें कि आपके समूह के सभी लोगों के पास एक ही ऐप इंस्टॉल हो और प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने से पहले ही वे आपस में जुड़ (कनेक्ट हो) चुके हों।”

प्रदर्शनकारियों को मरने के लिए उकसाने की कोशिश
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिसकर्मियों को गाली देते हुए प्रदर्शनकारियों को भड़काने की कोशिश की गई है। वीडियो में एक नकाबपोश व्यक्ति को कहते सुना जा सकता है, “जब पुलिस लाठीचार्ज करे तो तुम लोग भाग क्यों रहे हो…अरे कायर हो क्या तुम…इन हिजड़े पुलिस वालों की लाठियों से तुम मर जाओंगे क्या ? अरे, मर भी जाओंगे तो देश के लिए प्रोटेस्ट करने के लिए गए हो शहीद हो जाओंगे…मेरे भाइयों पीठ दिखाकर मत भागो तुम…इतिहास तुम्हें कायर बोलेगा कायर…तो फिर तुम्हारे बाल बचे देखेंगे तो कायर बोलेंगे। मेरे पापा मेरे भाई पुलिस की लाठी देखकर पीठ दिखाकर भागे थे।”

पीएम मोदी को जहर देकर मारने की प्लानिंग
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारी पीएम मोदी को गाली दे रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी तो प्रधानमंत्री मोदी को मारने की प्लानिंग कर रहा है। उसे कहते सुना जा सकता है, “मोदी या तो इस्तीफा दे दें…उसके खाने में जहर का इंतजाम करो और खत्म करो कहानी।
मोदी का इलाज यही है कि यहां भेज दो एकबार…या कोई जुगाड़ करो खाने का…जहर मिलाओ…जो हार्ट अटैक में भी पोस्टमार्टम में पता नहीं चले कि कैसे मर गया।”

इस प्लानिंग का असर किस तरह सड़कों पर दिखाई दिया…प्रदर्शनकारी  किस तरह मरने और मारने पर उतारू थे…

प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की सड़कों को बनाया युद्ध का मैदान 
सोशल मीडिया में वायरल एक वीडियो में प्रदर्शनकारियों को पुलिस की गाड़ी पर पत्थराव करते हुए देखा जा सकता है…वो जिस तरह गाड़ी पर पत्थरों की बारिश कर रहे हैं…उससे पता चलता है कि उन्हें जो निर्देश दिया गया है, उसे वो बखूबी पालन करते हुए दिख रहे हैं।

 

कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर पर पत्थरबाजी

बाउंड्री और फुटपाथ में लगी ईंटें तोड़ते प्रदर्शनकारी

प्रदर्शन से भागते हुए पकड़ा गया विजेता दहिया
जब प्रदर्शनकारी दिल्ली की सड़कों को युद्ध का मैदान बना रखे थे, तब सीजेपी का प्रवक्ता विजेता दहिया प्रदर्शन से गायब था। कुछ प्रदर्शनकारियों ने विजेता दहिया को भागते हुए पकड़ लिया और पूछा, “आप प्रदर्शन में क्यों नहीं गए…मैं जंतर-मंतर पर गया, आप क्यों नहीं गए। वहां सब लाठी खा रहे हैं और आप घूम रहे हों। ये कौन सा सपोर्ट कर रहे हो। बाबा को गाली दे रहे हो…आप कर क्या रहो हो ? आप गाली दे रहो और यहां क्या कर रहे हो।”

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CJP वालों के तंबू उखाड़ दिए; मौज कर रहे थे, समोसे खा रहे थे, अब पहचान हो रही है और फिर जेल की रोटी तोड़ें
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CJP वालों के तंबू उखाड़ दिए; मौज कर रहे थे, समोसे खा रहे थे, अब पहचान हो रही है और फिर जेल की रोटी तोड़ें
सुभाष चन्द्र सोनिया गांधी ने 2 दिन पहले कांग्रेस को कहा सोनम वांगचुक और CJP का साथ दो और आज CJP के भेड़ियों ने आतंक मचा दिय...

पकड़े जाने के बाद बोला विजेता दहिया- प्रोटेस्ट करना नौकरी है क्या ?
विजेता दहिया का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें उसे कहते हुए सुना जा सकता है कि प्रोटेस्ट करना नौकरी है क्या ? तुमने इसे इलेक्ट किया है, इस पोजिशन के लिए, सरकार अकाउंटेबल ठहराते, तुम्हारी जो नॉनसेंस थिंकिंग है तो उसमें मुझे नहीं फंसना, मुझे कोई पॉलिटिक्स में नहीं आना। तुम्हारे जैसे बेवकूफों को अपिज करूं।

प्रदर्शन में शामिल हुआ ‘हिस्ट्रीशीटर’ हाजी अफजल


हाजी अफजल उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके से संबंधित हैं और पुलिस रिकॉर्ड में उन्हें ‘हिस्ट्रीशीटर’ के रूप में दर्ज किया गया है। उन पर मकोका (MCOCA) और अन्य आपराधिक मामलों के तहत आरोप लगे हैं। हाल ही में, दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में युवकों के साथ उनकी मौजूदगी की खबरों और वीडियो के कारण वे चर्चा में रहे थे।

जब सोनम वांगचुक को उठाकर ले गई दिल्ली पुलिस, तब ‘समलैंगिक’ प्रवक्ता के घर थे अभिजीत दिपके: अनीश गावंडे, शरद पवार की पार्टी से क्या है कनेक्शन?

  अभिजीत दिपके और NCP (SP) नेता सुप्रिया सुले के साथ गवांडे (फोटो साभार: Instagram/@anishgawande)
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक को हटाने की दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा की है। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरना स्थल से हटाया था। वह करीब 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। गावंडे ने लोगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की।

गावंडे ने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल से सोनम वांगचुक को हटाना दरअसल उनकी ‘गिरफ्तारी’ थी। उनका आरोप था कि पुलिस ने बिना कोई कारण बताए और बिना किसी लिखित आदेश के यह कार्रवाई की। हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाकर उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था।

इसके बाद गावंडे ने यह भी दावा किया कि पुलिस की यह कार्रवाई वांगचुक की सेहत की चिंता की वजह से नहीं की गई बल्कि इसका मकसद चल रहे प्रदर्शन को बाधित करना था।

अनीश गावंडे को किसी राजनीतिक दल का पहला खुले तौर पर समलैंगिक (ओपनली गे) प्रवक्ता बनाए जाने के कारण भी पहचान मिली थी। उन्होंने खुलकर CJP के प्रदर्शन का समर्थन किया है और उससे जुड़े रहे हैं। जब पुलिस सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटा रही थी, उसी दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके कपड़े बदलने के लिए गावंडे के घर गए हुए थे। इसी दौरान पुलिस ने दिपके को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था।   

गावंडे ने आरोप लगाया कि जब अभिजीत दिपके उनके घर की सीढ़ियों पर थे, तभी पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस की पिटाई के चलते दिपके जोर-जोर से चिल्ला रहे थे।

कौन है अनीश गावंडे?

मीडिया रिपोर्ट्स में मौजूद जानकारी के अनुसार, अनीश गावंडे स्वतंत्रता सेनानी, वकील और प्रसिद्ध शिक्षाविद टी. के. टोपे के परिवार से आते हैं। उनका पालन-पोषण मुंबई में हुआ। उन्होंने वर्ली के ग्रीनलॉन्स स्कूल और फोर्ट स्थित कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से तुलनात्मक साहित्य (Comparative Literature) की पढ़ाई की। बाद में रोड्स स्कॉलर (Rhodes Scholar) के रूप में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से बौद्धिक इतिहास (Intellectual History) और लोक नीति (Public Policy) में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की।

राजनीति में आने से पहले अनीश गावंडे LGBTQ+ अधिकारों के कार्यकर्ता और लेखक रहे हैं। उन्होंने पिंक लिस्ट इंडिया की भी स्थापना की जो LGBTQ+ अधिकारों का समर्थन करने वाले नेताओं का एक डेटाबेस है।

अपनी समलैंगिक (गे) पहचान सार्वजनिक करने के बाद गावंडे ने फ्रैंकोफोन पश्चिम अफ्रीका और सेनेगल की भाषाई राजनीति पर अध्ययन किया। उनका इरादा अकादमिक क्षेत्र में प्रोफेसर बनने का था। हालाँकि, 2018 में उन्हें भारत में एक चुनावी अभियान से जुड़ने का अवसर मिला, जिसके बाद उन्होंने राजनीति की ओर रुख किया। अगस्त 2024 में उन्हें एनसीपी (शरदचंद्र पवार) का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया।

गावंडे क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) के समर्थक हैं। उनका मानना है कि जाति आधारित आरक्षण के साथ-साथ खेल कोटा, महिलाओं और दिव्यांगों जैसी श्रेणियों के लिए भी क्षैतिज आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। उनका यह भी मानना है कि देश में भेदभाव की समस्या को दूर करने के लिए एक व्यापक भेदभाव-विरोधी कानून बनाया जाना चाहिए।

हाल ही में अनीश गावंडे ने खालिस्तानी प्रोपेगेंडा फिल्म ‘सतलुज’ का समर्थन किया था। यह फिल्म रिलीज के तुरंत बाद Zee5 ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दी गई थी। 

फिल्म के समर्थन में इंस्टाग्राम पर लिखी एक पोस्ट में गावंडे ने कहा था, “दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ जिसमें उन्होंने मानवाधिकार जांचकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाई है, भारतीय स्क्रीन पर केवल 48 घंटे ही रह सकी और फिर उसे ‘अगली सूचना तक’ चुपचाप हटा दिया गया। जिन लोगों को गायब कर दिया गया, उन पर बनी एक फिल्म भी गायब कर दी गई।”

हाई कोर्ट के आदेश के बाद भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को अस्पताल ले गई दिल्ली पुलिस; बड़ा खुलासा : देश, हिन्दुत्व और मोदी विरोधी ताकतों की अराजकता फैलाने की खतरनाक साजिश, हटाए गए दिल्ली के पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा


दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को शनिवार (18 जुलाई 2026) को दिल्ली पुलिस ने जबरन अस्पताल ले गई है। यह कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश और उनकी लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल निगरानी सुनिश्चित करने के लिए की गई। अरविन्द केजरीवाल गैंग के मंसूबों पर पानी फिर गया।  

पुलिस के अस्पताल ले जाने के दौरान प्रदर्शन स्थल पर कुछ समय के लिए तनाव का माहौल भी देखने को मिला। दिल्ली पुलिस का कहना है कि कोर्ट के आदेशों और मेडिकल एक्सपर्ट्स की सलाह के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें जरूरी मेडिकल देखभाल के लिए सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया गया है।

सोनम वांगचुक 28 जून 2026 से नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत विभिन्न माँगों को लेकर धरने और भूख हड़ताल पर बैठे थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में उनकी सेहत को देखते हुए नियमित चिकित्सकीय जाँच और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी नागरिक के जीवन की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। शनिवार (18 जुलाई 2026) की सुबह पुलिस की टीम जंतर-मंतर पहुँची और मेडिकल सहायता के लिए वांगचुक को अस्पताल ले गई। इस दौरान वहाँ मौजूद छात्रों और समर्थकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

हालाँकि पुलिस उन्हें अपने साथ लेकर रवाना हो गई। इसके बाद जंतर-मंतर पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों को भी वहाँ से हटाया जाने लगा। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आरोप लगाया गया कि पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को उनके ठहरने के स्थान पर रोककर हिरासत में लिया गया।

अभिजीत दीपके ने दावा किया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। वहीं पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और कई लोगों को हटाया गया। हालांकि इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

वांगचुक ने शुक्रवार (17 जुलाई 2026) की रात एक वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि उनके शरीर का करीब 20 प्रतिशत वजन कम हो चुका है. उन्होंने बताया कि शरीर की मांसपेशियाँ भी प्रभावित हो चुकी हैं, लेकिन उनका हौसला और मानसिक स्थिति अब भी मजबूत है।

वीडियो संदेश में वांगचुक ने देशवासियों से 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे मशहूर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को 20 दिन पूरे हो चुके हैं। 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। अभिजीत दीपके द्वारा संचालित आंदोलन में वांगचुक जब भूख हड़ताल पर बैठे तो उन्हें लगा कि वो महात्मा गांधी और समाज सेवी अन्ना हजारे की तरह एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर देंगे, लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे भीड़ गायब होती चली गई। इससे ना सिर्फ वांगचुक की हताशा बढ़ने लगी, बल्कि उन्हें मोहरा बनाने वाले देश, हिन्दुत्व और मोदी विरोधी ताकतों की बेचैनी भी बढ़ने लगी। अब ये ताकतें संसद के मानसून सत्र के दौरान अराजकता पैदा कर दिल्ली सहित पूरे देश का माहौल खराब करना चाहती हैं। इसलिए कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ आंदोलन का आह्वान किया है। वहीं खुफिया एजेंसियों से मिली गोपनीय रिपोर्ट के बाद केंद्र की मोदी सरकार भी सतर्क हो गई है।

क्यों हटाए गए दिल्ली के पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा? 
दिल्ली में कानून व्यवस्था के स्तर पर शुक्रवार 17 जुलाई, 2026 को बड़ा बदलाव हुआ। सतीश गोलचा को दिल्ली के पुलिस कमिश्नर के पद से हटा दिया गया। सतीश की जगह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है। उन्होंने चंद घंटों में पदभार संभाल लिया। हैरानी की बात यह है कि सतीश गोलचा का कार्यकाल अभी खत्म नहीं हुआ था। करीब 11 माह पहले गोलचा को पद से क्यों हटाया गया इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, यह नियुक्ति दिल्ली की सुरक्षा स्थिति और आने वाली चुनौतियों को देखते हुए की गई है। साथ ही राजधानी में खुफिया जानकारी पर आधारित पुलिसिंग को मजबूत करने की जरूरत को भी ध्यान में रखा गया है। अनुराग कुमार लंबे समय से इंटेलिजेंस ब्यूरो में काम कर रहे थे और उन्होंने अपने कार्यकाल में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। उनका खुफिया एजेंसी में काम करने का अनुभव इस काम में मदद करेगा।

संसद के मानसून सत्र को बाधित करने की बड़ी साजिश
अभिजीत दीपके द्वारा संचालित आंदोलन की शुरुआत से ही बातें कही जा रही थीं कि सोनम वांगचुक तो सिर्फ मोहरा है। असली खिलाड़ी तो डीप स्टेट से जुड़ी वो ताकतें हैं, जो देश के अंदर और बाहर से इस फर्जी आंदोलन के लिए साजिशें रच रही हैं। आंदोलन की हवा निकलती देख दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी 16 जुलाई,2026 को वांगचुक से मिलने जंतर-मंतर पहुंच गए। इस दौरान सोनम वांगचुक और अरविंद केजरीवाल के बीच जो बातचीत हुई, वो एक बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया में एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें 0.25 सेकंड से लेकर 0.46 सेकंड तक उनकी बातचीत सुनी जा सकती है। 

केजरीवाल और वांगचुक के बीच बातचीत
वांगचुक – 28 को सफल बनाएंगे।
केजरीवाल – 28 को,
वांगचुक – सफल बनाए।
केजरीवाल – हां, सफल बनाएंगे।
वांगचुक – सफल बनाकर छोड़ूंगा नहीं तो भूत बन जाऊंगा।
केजरीवाल – आपको कुछ नहीं होगा। आपको कुछ नहीं होने देंगे।
वांगचुक – 20 को सफल बनाएंगे।
केजरीवाल – आपने पूरे देश को जगा दिया है।

20 तारीख को दिल्ली में अराजकता पैदा करने की होगी कोशिश
अरविंद केजरीवाल ने कॉकरोच जनता पार्टी के मंच से कहा कि हमें सोनम वांगचुक जैसा शिक्षा मंत्री भी चाहिए और उसके क्रांतिकारी कदम भी चाहिए। 20 तारीख को देश के कोने कोने में जो लोग सुन रहे हैं। जो लोग सोशल मीडिया में देखेंगे, जो लोग मीडिया के जरिए देखेंगे, सबको अपील करना चाहता हूं। ज्यादा से ज्याद संख्या में यहां पर आएंगे। 20 तारीख के आंदोलन को, इनके कॉल को, पार्लियामेंट तक की जो यात्रा है उसको सफल बनाना है। ज्यादा से ज्यादा संख्या में आना है। गौरतलब है कि 20 जुलाई, 2026 से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है, जो 13 जुलाई तक चलेगा।

वांगचुक को पंजाब का शिक्षा मंत्री क्यों नहीं बना रहे केजरीवाल ? 
सोनम वांगचुक से मुलाकात के दौरान अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अहंकार में डूबी हुई है। मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि युवाओं की आवाज सुन लीजिए, नहीं तो यही युवा 2029 में आपको सत्ता से बाहर कर देंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर असल में शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाना चाहते तो सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं प्रधानमंत्री ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें डर होगा कि सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव कर देंगे। अगर अरविंद केजरीवाल को सोनम वांगचुक पर इतना भरोसा है तो उनके पास वांगचुक को पंजाब का शिक्षा मंत्री बनाने का सुनहरा मौका है। पंजाब में भगवंत मान सरकार की लोकप्रियता खत्म हो चुकी है। अगले साल 2027 की शुरुआत में वहां चुनाव होने वाला है, ऐसे में केजरीवाल वांगचुक को पंजाब का शिक्षा मंत्री बनाकर अपनी सरकार की साख बचा सकते हैं, लेकिन वो ऐसा नहीं करेंगे।

वांगचुक को अन्ना हजारे की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं केजरीवाल 
दरअसल, अरविंद केजरीवाल का मकसद अन्ना हजारे की तरह वांगचुक को मोदी सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करना है। वांगचुक से मुलाकात के दौरान केजरीवाल के अंदर की बात सामने आ गई। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इतिहास खुद को दोहराता है। इसी जंतर-मंतर पर 4 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे आंदोलन पर बैठे थे और तीन साल बाद उस समय की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। केजरीवाल चाहते हैं कि वांगचुक को मोहरा बनाकर वो फिर से दिल्ली में खिसकी हुई अपनी सियासी जमीन को हासिल कर सकते हैं। केजरीवाल के इस सियासी मकसद को पूरा करने के लिए इससे पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना, मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज भी जंतर-मंतर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके है।

 

अभिजीत दीपके और उसके दोस्त ने खोली केजरीवाल की पोल


अभिजीत दीपके के दोस्त ने खुलासा किया कि हम दोनों एक-दूसरे को करीब सात साल से जानते हैं। हम दोनों अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया टीम से जुड़े हुए थे। 2019-20 में अभिजीत दीपके आम आदमी पार्टी का ट्वीटर हैंडल देखता था। मैं व्हाट्सएप टीम देखता था। तब से हम लोग एक-दूसरे से परिचित थे। अभिजीत दीपके के दोस्त ने आगे कहा कि हैरानी की बात है कि कॉकरोच वाले बयान के एक हफ्ते पहले मेरी और दीपके की बात हुई थी, क्योंकि दीपके जॉब ढूंढ़ रहा था।