Showing posts with label #CJP protest. Show all posts
Showing posts with label #CJP protest. Show all posts

अब CJP की ‘टूलकिट’ वाली ग्रेटा थनबर्ग हुईं मुरीद: SFI UK के मंच से की तारीफ, बोलीं- ‘प्रदर्शन करने पर ही मिलती हैं बड़ी चीजें’

किसान आंदोलन की 'टूलकिट' से चर्चित ग्रेटा थनबर्ग ने SFI UK कार्यक्रम में CJP के नेतृत्व वाले प्रदर्शन के प्रति जताई एकजुटता (फोटो साभार: SFI UK)
लंदन में SFI यूके द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में ग्रेटा थनबर्ग ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन का समर्थन किया है। खुद को जलवायु कार्यकर्ता बताने वाली ग्रेटा थनबर्ग इससे पहले किसान आंदोलन की टूलकिट को लेकर भी चर्चा में रही थीं।

कार्यक्रम में बोलते हुए ग्रेटा थनबर्ग ने कहा कि भारत में छात्रों के प्रदर्शन ने पूरी दुनिया के लोगों को गर्व महसूस कराया है। उन्होंने आगे कहा कि इन प्रदर्शनों ने यह साबित कर दिया है कि जब आम लोग मिलकर विरोध करते हैं, तो बड़ी चीजें हासिल की जा सकती हैं।

उन्होंने कहा, “ये प्रदर्शन लोगों की ताकत का सही अर्थ बताते हैं। न्याय के लिए भारतीय छात्रों का संघर्ष और लोकतंत्र व आजादी के लिए व्यापक लड़ाई हमारी भी लड़ाई है।” इसके साथ ही उन्होंने समर्थकों से ‘भारत के साथ एकजुट होकर खड़े होने’ की अपील की।

सप्ताह के अंत में में आयोजित इस कार्यक्रम को SFI UK ने आंदोलन की ‘जीत का जश्न’ बताया। संगठन ने दावा किया कि इस आंदोलन के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। SFI UK ने यह भी आरोप लगाया कि NEET मामले को संभालने के दौरान 21 छात्रों की जान गई और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने ‘क्रूर दमन’ किया।

हालाँकि कार्यक्रम में उन घटनाओं का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिनमें छात्र प्रदर्शनकारियों के रूप में मौजूद उपद्रवियों पर पथराव करने, पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों के साथ धक्का-मुक्की और हमले करने के आरोप लगे थे।

इससे पहले SFI ने अपने एक बयान में कहा था कि ‘लड़ाई जारी रहेगी’, जिससे भविष्य में भी ऐसे प्रदर्शन होने के संकेत मिले थे।

यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ, जब CJP ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को अपना 36 दिन लंबा आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया था। संगठन ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उसकी बची हुई माँगें भी मान ली हैं। इनमें NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले बताए गए छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने जैसी माँगें शामिल थीं।

लंदन में आयोजित यह कार्यक्रम SFI UK की ओर से इस आंदोलन के समर्थन में किया गया पहला प्रयास नहीं था। इससे पहले Opindia ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि SFI UK की विभिन्न इकाइयों ने लंदन, लीड्स और एडिनबर्ग में पहले से तय कार्यक्रमों के जरिए समर्थकों को जुटाया था।

संगठन ने प्रदर्शन के स्थान और समय पहले ही तय किए, पोस्टर जारी किए और अपने नेटवर्क के माध्यम से इन कार्यक्रमों का समन्वय किया। हालाँकि कुछ मीडिया संस्थानों, जिनमें The Wire भी शामिल है, ने लंदन में हुए इस कार्यक्रम को भारतीय प्रवासी समुदाय की स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया के रूप में पेश करने की कोशिश की।

ग्रेटा थनबर्ग इससे पहले 2021 के किसान आंदोलन के दौरान भी भारत के राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनी थीं। उस समय उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ऑनलाइन ‘टूलकिट’ साझा की थी, जिसका उद्देश्य किसान आंदोलन के समर्थन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान को समन्वित करना बताया गया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उस टूलकिट के तैयार करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, हालाँकि उस FIR में ग्रेटा थनबर्ग का नाम शामिल नहीं था।

2873 संदिग्ध, 989 का आपराधिक रिकॉर्ड, 101 पर हत्या तो 284 पर डकैती-लूट के केस: CJP प्रदर्शन में शामिल चेहरों पर खुलासा, पुलिस ने हिंसा की जाँच की तेज

भारत के विरोधियों ने भारत की सांस्कृतिक पहचान नैतिकता और गरिमा को भीतर से खंडित किया है,भारत टूट रहा है,ऐसी बेहया और बदतमीज पीढ़ी का नेतृत्व करते हुए नेतृत्व का भी सिर शर्म से झुक गया है,कौन से माँ बाप को गर्व है ऐसी संतान पर ? आज भारत को शिक्षा से अधिक संस्कार और नैतिक मूल्यों को पुर्नजीवित करने की आवश्यकता है।
आहत है भारत माता की आत्मा !
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में 20 जुलाई 2026 को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर चले प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की जाँच में बड़े खुलासे सामने आए हैं।

पुलिस के हवाले से खबरों में बताया जा रहा है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, जिनमें से 989 लोगों पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, लूट, दुष्कर्म, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध, आर्म्स एक्ट, अपहरण, स्नैचिंग और NDPS जैसे गंभीर मामलों में केस दर्ज हैं।

पुलिस का कहना है कि इन लोगों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS), सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों और आम लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो तथा अन्य तकनीकी माध्यमों से की गई है। जाँच में यह भी सामने आया कि कई आरोपित 20 से 25 जुलाई के बीच बार-बार प्रदर्शन स्थल पर लौटे।

पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या इन्हीं लोगों ने जंतर-मंतर और नई दिल्ली के आसपास हुई हिंसा में सक्रिय भूमिका निभाई थी। पुलिस के मुताबिक, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी और जाँच की कार्रवाई जारी रहेगी, जबकि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की तैयारी है।

प्रदर्शन में मिले हत्या, डकैती, दुष्कर्म और पॉक्सो समेत कई गंभीर मामलों के आरोपित

दिल्ली पुलिस की जाँच के अनुसार, हिंसा में शामिल लोगों में 101 ऐसे आरोपित पाए गए जिन पर हत्या के मामले दर्ज हैं, जबकि 62 लोगों पर हत्या के प्रयास, 284 लोगों पर डकैती और लूट, 61 लोगों पर दुष्कर्म, 25 लोगों पर छेड़छाड़, 6 लोगों पर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं।
इसके अलावा 229 लोग आर्म्स एक्ट, 135 स्नैचिंग, 19 अपहरण और 67 लोग नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के मामलों में आरोपित पाए गए। पुलिस के अनुसार, इन आरोपितों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जो आदतन अपराधी हैं। हत्या के मामलों में शामिल 101 आरोपितों में से 42 पर दो या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
वहीं 12 लोगों का आपराधिक इतिहास 10 या उससे अधिक मामलों तक फैला हुआ है। हत्या के प्रयास के 62 आरोपितों में से 25 पर कई मामले दर्ज हैं। वहीं डकैती और लूट के 284 आरोपितों में से 155 पर दो या उससे अधिक केस हैं और 31 लोगों के खिलाफ 10 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दुष्कर्म के मामलों में शामिल 8 आरोपित, छेड़छाड़ के 6 आरोपित और NDPS के 9 आरोपित भी कई मामलों में पहले से आरोपित हैं।

FRS, CCTV और तकनीकी साक्ष्यों से हुई पहचान, पुलिस ने हिंसा में भूमिका की जाँच तेज की

दिल्ली पुलिस का कहना है कि संदिग्धों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों, सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो और आम नागरिकों के वीडियो के आधार पर की गई। जाँच में कई संदिग्ध उन स्थानों पर दिखाई दिए, जहाँ हिंसा हुई थी।
पुलिस के अनुसार, ये लोग पथराव करते, पुलिसकर्मियों पर हमला करते, सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाते और सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ करते नजर आए। जाँच से स्पष्ट हुआ कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों में केवल ऐसे व्यक्ति नहीं थे जिनका एक-दो मामलों से संबंध रहा हो, बल्कि बड़ी संख्या में आदतन और बार-बार अपराध करने वाले लोग भी मौजूद थे।

जंतर-मंतर तक ही थी अनुमति, संसद मार्च पर नहीं: चेतावनी के बाद हुआ बल प्रयोग

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को केवल जंतर-मंतर पर धरना देने की अनुमति दी थी, जबकि संसद तक मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ते हुए संसद के बेहद करीब तक पहुँच गए, जिससे संसद की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव की स्थिति पैदा हो गई।
अवलोकन करें:-
 पुलिस वाले भी इंसान हैं, मार खाने के लिए नहीं हैं; पुलिस वालों का भी परिवार होता है जस्टिस साहब; व
nigamrajendra.blogspot.com
पुलिस वाले भी इंसान हैं, मार खाने के लिए नहीं हैं; पुलिस वालों का भी परिवार होता है जस्टिस साहब; व
सुभाष चन्द्र जुलाई 27 को सुप्रीम कोर्ट में जंतर मंतर पर पुलिस की कथित Exesses पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ....
दिल्ली पुलिस का कहना है कि बल प्रयोग बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद ही किया गया, क्योंकि प्रदर्शनकारी लगातार एक के बाद एक बैरिकेड तोड़ते रहे। पुलिस के मुताबिक, हिंसा के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों सहित अनेक पुलिसकर्मी घायल हुए, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने काफी देर तक संयम बरता।
घटना के बाद पूरे घटनाक्रम की समीक्षा शुरू की गई, जिसमें उन असामाजिक तत्वों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है, जो पुलिस के अनुसार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बीच घुसकर हिंसा में शामिल हुए।

गोवा के CJP प्रोटेस्ट में उमर खालिद का पोस्टर, पुलिस ने मोहम्मद दानिश को आजाद मैदान से पकड़ा: BJP कार्यकर्ताओं ने की एक्शन की माँग


गोवा की राजधानी पणजी स्थित आजाद मैदान में शनिवार (25 जुलाई 2026) की शाम को माहौल उस समय अचानक गरमा गया, जब पुलिस ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन के दौरान एक युवक को हिरासत में ले लिया। पुलिस द्वारा पकड़े गए इस युवक की पहचान मोहम्मद दानिश के रूप में हुई है, जो प्रदर्शन के दौरान हाथ में विवादित पोस्टर लेकर जेल में बंद उमर खालिद के समर्थन में नारेबाजी कर रहा था।

दरअसल, आजाद मैदान में लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी आंदोलन के समर्थन में और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए थे। इसी दौरान छात्र आंदोलन की आड़ में देश विरोधी मामलों के आरोपितों का महिमामंडन (Glorification) होते देख पुलिस तुरंत हरकत में आई और युवक को अपनी कस्टडी (Custody) में ले लिया।

यह पूरी घटना शाम लगभग 7 बजे की है, जब आजाद मैदान में प्रदर्शनकारी जमा होकर नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच भीड़ में मौजूद मोहम्मद दानिश नाम का युवक एक पोस्टर हाथ में लहराते हुए दिखाई दिया। इस पोस्टर पर स्पष्ट शब्दों में ‘फ्री उमर खालिद, शरजील इमाम, भीमा कोरेगाँव 16’ लिखा हुआ था। इस तरह के पोस्टर दिखने से वहाँ मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हड़कंप मच गया।

बिना आईडी के घूम रहा था दानिश

मैदान पर तैनात पुलिसकर्मियों ने जब इस पोस्टर को देखा, तो वे तुरंत युवक के पास पहुँचे और उससे उसके संबंध में पूछताछ शुरू कर दी। अधिकारियों ने उससे उसकी पहचान साबित करने के लिए कोई वैध दस्तावेज (identity document) दिखाने को कहा, लेकिन वह नाकाम रहा।

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जब युवक से पहचान पत्र माँगा गया तो उसने साफ मना कर दिया कि उसके पास कोई आईडी (ID) नहीं है।

मामले की जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “प्रदर्शन के दौरान सबसे पहले वहाँ मौजूद कुछ स्थानीय पत्रकारों ने उस युवक को घेरा और पोस्टर के बारे में सवाल-जवाब किए। इसके तुरंत बाद आजाद मैदान में तैनात पुलिस बल के जवानों ने हस्तक्षेप किया और उससे उसका पहचान पत्र दिखाने को कहा। हालाँकि उस व्यक्ति ने अधिकारियों से कहा कि वह उस समय कोई भी पहचान पत्र साथ लेकर नहीं चल रहा है।”

पुलिस अधिकारी ने आगे बताया, “मैदान में किसी भी तरह की अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था (Law & Order) की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए हम उस व्यक्ति को तुरंत पणाजी पुलिस स्टेशन ले आए, जहाँ उससे विस्तार से पूछताछ की जा रही है।” इस पूरी कार्रवाई का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें पुलिस अधिकारी युवक से उसका पहचान पत्र माँगते हुए दिख रहे हैं।

उधर जैसे ही इस घटना की जानकारी फैली, भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ता पणजी पुलिस स्टेशन के बाहर एकत्र हो गए। बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर धरना दिया और माँग की कि ‘फ्री उमर खालिद’ के पोस्टर लहराने वालों और उनके समर्थकों के खिलाफ सख्त धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।

पणजी में हिंसक प्रदर्शनों को लेकर कई FIR दर्ज

पणजी में इस तरह के अनाधिकृत प्रदर्शन को लेकर पहले भी पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। जिसमें गोवा पुलिस ने बिना अनुमति के निकाली गई सीजेपी की एकजुटता रैली को लेकर अज्ञात समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बीते सोमवार की शाम सैकड़ों की संख्या में लोग मिरामार सर्कल पर जमा हुए थे और वहां से मार्च निकालते हुए आजाद मैदान पहुँचे थे। बाद में जाँच में खुलासा हुआ कि आयोजकों ने इस प्रदर्शन के लिए स्थानीय प्रशासन से कोई पूर्व अनुमति (Prior Permission) नहीं ली थी।

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों 2020 में खालिद का अहम रोल

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र और पूर्व सिमी (SIMI) सदस्य के बेटे उमर खालिद को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 14 सितंबर 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार किया था। उस पर गैर-कानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज है। फरवरी 2020 में भड़के इन दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी।

पुलिस जाँच के अनुसार, खालिद इस हिंसा की बड़ी साजिश (Conspiracies) के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था, जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान सड़कों को जाम करने और हिंसा भड़काने की योजना बनाई थी। पुलिस ने यह भी खुलासा किया है कि उसने जरूरी इंतजामों पर चर्चा करने के लिए आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और सह-आरोपी खालिद सैफी से मुलाकात की थी और जाँच के दायरे में शामिल संगठनों से भी उसके संबंध थे।

खालिद ने यह कहकर मुसलमानों को दंगे करने, सड़कें रोकने और लोगों को परेशान करने के लिए इकट्ठा किया था कि नया कानून ‘मुसलमानों के खिलाफ’ है। उसने ‘चक्का जाम’ में महिलाओं और बच्चों को भी शामिल करने की योजना बनाई थी।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, कहा- ’10 दिनों के घटनाक्रम से मन दुखी है, यह मेरे लिए प्रतिष्ठा का विषय नहीं’


पिछले डेढ़ महीने से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शन की मुख्य माँग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। इस माँग को पूरी करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखित में अपना इस्तीफा सौंपा है।

इसकी जानकारी देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया, “जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएँ, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएँ, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है।”

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सुनते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया। कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स हैंडल से जश्न मनाते प्रदर्शनकारियों का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो के कैप्शन में लिखा है, “शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। ये छात्रों की जीत है।”

पिछले डेढ़ महीने से CJP के नेतृत्व में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की माँग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा था। इस प्रदर्शन की प्रमुख माँगों में से एक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था। बाकी माँगों को लेकर सरकार पहले ही आश्वासन दे चुकी थी।

लेकिन CJP को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से नीचे कुछ कबूल नहीं था, वे उसी माँग पर अड़े थे। इसे लेकर पिछले दिन शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और CJP के नेतृत्व की बैठक भी हुई थी, जिसमें सरकार ने इस माँग पर विचार करने के लिए 24 घंटे का समय माँगा था। इसी अंतराल के बीच अब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आ गई है।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर को NSA के तहत मिली हिरासत में लेने की शक्ति, छात्रों के नाम पर हिंसा के बीच केंद्र का बड़ा फैसला : पुलिस ने बताया- रूटीन प्रक्रिया

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत लोगों को हिरासत में लेने की शक्तियाँ दे दी हैं। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब छात्रों के नाम पर शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी‘ (CJP) का प्रदर्शन हिंसक और उग्र हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संबंध में बुधवार (22 जुलाई 2026) को दिल्ली गजट (असाधारण) में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई। हालाँकि, इस अधिसूचना पर 15 जुलाई की तारीख दर्ज है। अनुराग कुमार की हाल ही में दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्ति हुई है।

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना औपचारिक आरोप तय किए 12 दिन से लेकर 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। नई अधिसूचना के अनुसार, 19 जुलाई से 18 अक्टूबर तक तीन महीने की अवधि के लिए यह निवारक हिरासत (Preventive Detention) की शक्ति लागू रहेगी। अधिसूचना में कहा गया है कि दिल्ली के उपराज्यपाल को यह यकीन है कि सार्वजनिक सुरक्षा के हित में हिरासत की यह शक्ति सौंपना आवश्यक है।

अधिसूचना में कहा गया है, “राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की धारा 2(ई) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 3(3) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, दिल्ली के उपराज्यपाल ने निर्देश दिया है कि निर्धारित अवधि के दौरान दिल्ली पुलिस आयुक्त भी कानून की धारा 3(2) के तहत निरोधक प्राधिकारी (Detaining Authority) की शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे।”

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अनुसार, इस अधिकार के तहत दिल्ली पुलिस आयुक्त उन लोगों के खिलाफ निवारक हिरासत का आदेश जारी कर सकते हैं जिनकी गतिविधियाँ सार्वजनिक व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा या आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति एवं रखरखाव के लिए हानिकारक मानी जाएँ। इस कानून के तहत सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित प्राधिकरण जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस प्रमुखों को भी निरोधक प्राधिकारी नियुक्त कर सकता है।

पिछले वर्ष 26 सितंबर को लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने एक आदेश जारी किया था जिसके बाद सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। उनके आंदोलन के दौरान क्षेत्र में हुई घातक हिंसा के बाद यह कार्रवाई की गई थी। उन्हें 170 दिनों तक हिरासत में रखा गया था।

जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग के नाम पर शुरू हुआ प्रदर्शन अब हिंसक हो गया है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ मारपीट की गई है और पत्थर-बोतलें भी फेंकी गईं। इससे पहले मानसून सत्र के पहले दिन CJP के सदस्य संसद तक मार्च करने के लिए बैरिकेड तोड़ने की कोशिश कर चुके थे जिसके बाद दिल्ली में झड़पें और तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी।

सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि पहले ही कह चुके हैं कि केंद्र सरकार ने न तो हुई गलती को कम करके दिखाया है और न ही जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार उनकी ‘राजनीतिक’ माँग मानने का कोई इरादा नहीं रखती। एक अधिकारी ने कहा, “समस्या हुई थी। हमने इसे रिकॉर्ड पर स्वीकार किया है और रिकॉर्ड पर ही इसकी जिम्मेदारी भी ली है। सरकार इससे भाग नहीं रही है।”

एक अन्य अधिकारी ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे कि लोगों को विरोध नहीं करना चाहिए। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को विरोध करने का पूरा अधिकार है। लेकिन मुद्दा कौन उठा रहा है, किस तरीके से उठा रहा है और उसके पीछे कौन लोग हैं, ये अलग सवाल हैं। क्या हमें राजनीतिक दबाव के आगे झुक जाना चाहिए?”

उन्होंने आगे कहा, “जिस व्यवस्था पर हमने भरोसा किया था, उसी के लोगों ने उसे कमजोर कर दिया। हम पेपर माफिया नहीं हैं। व्यवस्था के भीतर के लोगों ने हमें निराश किया, हमने उन पर भरोसा किया था। हमने पेपर लीक की घटना नहीं छिपाई। हमने इसकी जिम्मेदारी स्वीकार की और इसे ठीक करने की कोशिश की।”

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (23 जुलाई 2026) को आधिकारिक बयान जारी कर उन खबरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शनों से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), 1980 के तहत विशेष रूप से निवारक हिरासत (Preventive Detention) की शक्तियाँ दी गई हैं।

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह एक नियमित आदेश है जिसे हर तीन महीने में रीन्यू किया जाता है। पुलिस ने कहा कि इस आदेश का मौजूदा CJP प्रदर्शनों से कोई संबंध नहीं है। मौजूदा आदेश 7 जुलाई 2026 को जारी किया गया था, जो 19 जुलाई 2026 से 18 अक्टूबर 2026 तक की अवधि के लिए प्रभावी है।

(नोट इस खबर को दिल्ली पुलिस के बयान के बाद अपडेट किया गया है)

जब सोनम वांगचुक को उठाकर ले गई दिल्ली पुलिस, तब ‘समलैंगिक’ प्रवक्ता के घर थे अभिजीत दिपके: अनीश गावंडे, शरद पवार की पार्टी से क्या है कनेक्शन?

  अभिजीत दिपके और NCP (SP) नेता सुप्रिया सुले के साथ गवांडे (फोटो साभार: Instagram/@anishgawande)
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक को हटाने की दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा की है। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरना स्थल से हटाया था। वह करीब 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। गावंडे ने लोगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की।

गावंडे ने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल से सोनम वांगचुक को हटाना दरअसल उनकी ‘गिरफ्तारी’ थी। उनका आरोप था कि पुलिस ने बिना कोई कारण बताए और बिना किसी लिखित आदेश के यह कार्रवाई की। हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाकर उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था।

इसके बाद गावंडे ने यह भी दावा किया कि पुलिस की यह कार्रवाई वांगचुक की सेहत की चिंता की वजह से नहीं की गई बल्कि इसका मकसद चल रहे प्रदर्शन को बाधित करना था।

अनीश गावंडे को किसी राजनीतिक दल का पहला खुले तौर पर समलैंगिक (ओपनली गे) प्रवक्ता बनाए जाने के कारण भी पहचान मिली थी। उन्होंने खुलकर CJP के प्रदर्शन का समर्थन किया है और उससे जुड़े रहे हैं। जब पुलिस सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटा रही थी, उसी दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके कपड़े बदलने के लिए गावंडे के घर गए हुए थे। इसी दौरान पुलिस ने दिपके को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था।   

गावंडे ने आरोप लगाया कि जब अभिजीत दिपके उनके घर की सीढ़ियों पर थे, तभी पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस की पिटाई के चलते दिपके जोर-जोर से चिल्ला रहे थे।

कौन है अनीश गावंडे?

मीडिया रिपोर्ट्स में मौजूद जानकारी के अनुसार, अनीश गावंडे स्वतंत्रता सेनानी, वकील और प्रसिद्ध शिक्षाविद टी. के. टोपे के परिवार से आते हैं। उनका पालन-पोषण मुंबई में हुआ। उन्होंने वर्ली के ग्रीनलॉन्स स्कूल और फोर्ट स्थित कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से तुलनात्मक साहित्य (Comparative Literature) की पढ़ाई की। बाद में रोड्स स्कॉलर (Rhodes Scholar) के रूप में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से बौद्धिक इतिहास (Intellectual History) और लोक नीति (Public Policy) में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की।

राजनीति में आने से पहले अनीश गावंडे LGBTQ+ अधिकारों के कार्यकर्ता और लेखक रहे हैं। उन्होंने पिंक लिस्ट इंडिया की भी स्थापना की जो LGBTQ+ अधिकारों का समर्थन करने वाले नेताओं का एक डेटाबेस है।

अपनी समलैंगिक (गे) पहचान सार्वजनिक करने के बाद गावंडे ने फ्रैंकोफोन पश्चिम अफ्रीका और सेनेगल की भाषाई राजनीति पर अध्ययन किया। उनका इरादा अकादमिक क्षेत्र में प्रोफेसर बनने का था। हालाँकि, 2018 में उन्हें भारत में एक चुनावी अभियान से जुड़ने का अवसर मिला, जिसके बाद उन्होंने राजनीति की ओर रुख किया। अगस्त 2024 में उन्हें एनसीपी (शरदचंद्र पवार) का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया।

गावंडे क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) के समर्थक हैं। उनका मानना है कि जाति आधारित आरक्षण के साथ-साथ खेल कोटा, महिलाओं और दिव्यांगों जैसी श्रेणियों के लिए भी क्षैतिज आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। उनका यह भी मानना है कि देश में भेदभाव की समस्या को दूर करने के लिए एक व्यापक भेदभाव-विरोधी कानून बनाया जाना चाहिए।

हाल ही में अनीश गावंडे ने खालिस्तानी प्रोपेगेंडा फिल्म ‘सतलुज’ का समर्थन किया था। यह फिल्म रिलीज के तुरंत बाद Zee5 ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दी गई थी। 

फिल्म के समर्थन में इंस्टाग्राम पर लिखी एक पोस्ट में गावंडे ने कहा था, “दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ जिसमें उन्होंने मानवाधिकार जांचकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाई है, भारतीय स्क्रीन पर केवल 48 घंटे ही रह सकी और फिर उसे ‘अगली सूचना तक’ चुपचाप हटा दिया गया। जिन लोगों को गायब कर दिया गया, उन पर बनी एक फिल्म भी गायब कर दी गई।”