Showing posts with label #education minister. Show all posts
Showing posts with label #education minister. Show all posts

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, कहा- ’10 दिनों के घटनाक्रम से मन दुखी है, यह मेरे लिए प्रतिष्ठा का विषय नहीं’


पिछले डेढ़ महीने से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शन की मुख्य माँग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। इस माँग को पूरी करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखित में अपना इस्तीफा सौंपा है।

इसकी जानकारी देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया, “जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएँ, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएँ, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है।”

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सुनते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया। कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स हैंडल से जश्न मनाते प्रदर्शनकारियों का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो के कैप्शन में लिखा है, “शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। ये छात्रों की जीत है।”

पिछले डेढ़ महीने से CJP के नेतृत्व में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की माँग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा था। इस प्रदर्शन की प्रमुख माँगों में से एक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था। बाकी माँगों को लेकर सरकार पहले ही आश्वासन दे चुकी थी।

लेकिन CJP को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से नीचे कुछ कबूल नहीं था, वे उसी माँग पर अड़े थे। इसे लेकर पिछले दिन शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और CJP के नेतृत्व की बैठक भी हुई थी, जिसमें सरकार ने इस माँग पर विचार करने के लिए 24 घंटे का समय माँगा था। इसी अंतराल के बीच अब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आ गई है।

बिहार : इतिहास की धज्जियाँ उड़ाते शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ; इंडिया गेट पर ‘व्हाट्सएप्प ज्ञान’ बाँटते पकड़े गए

अगर भारत को बिहार के शिक्षा मंत्री जैसे दो/तीन और शिक्षा मंत्री मिल जाएं, पिछली सरकारों ने जो इतिहास का पलीता किया, चंद्रशेखर यादव जैसे अज्ञानी शिक्षा मंत्री और नाश पीट देंगे। सनातन विरोधियों को हिन्दुत्व और गौरवमयी भारतीय इतिहास को कलंकित करने का हथियार थमाया जा रहा है। ऐसे अज्ञानी शिक्षा मंत्री को जनता को ऐसी धूल चटवानी चाहिए कि इसकी पुश्तें याद रखे। इन्हीं अज्ञानी मंत्रियों और नेताओं के ही कारण इतिहास (देखिए वीडियो) वास्तविक से बहुत दूर कर दिया था।
पता नहीं कहाँ से नितीश कुमार ऐसे अज्ञानी को ले आए। 
हाल ही में बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ने तुलसीदास कृत रामचरितमानस को घृणा फैलाने वाला ग्रन्थ करार दिया था। उन्होंने पटना में आयोजित ‘नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह में भाषण देते हुए ये बात कही थी, जिसके बाद उनकी आलोचना करते हुए हिन्दू संगठनों ने आपत्ति जताई थी। वहीं अब बिहार के शिक्षा मंत्री, जो कि प्रोफेसर भी हैं, उनका दिल्ली स्थित इंडिया गेट को लेकर गलत दावा वायरल हो रहा है।

RJD नेता ने 20 अप्रैल, 2020 को ट्विटर पर इंडिया गेट की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था, “संघियों एवं मनुवादियों के देश में योगदान की क्रोनोलॉजी – इंडिया गेट, दिल्ली के शिलापट्ट पर फिरंगियों के खिलाफ जंग में आहूति देने वाले 95,395 अमर बलिदानियों में 61395 मुस्लिम, 8050 सिख, 14480 पिछड़े, 10777 दलित, 598 सवर्ण, 00 (शून्य) संघी। मनुवादी संघियो को ढूँढें।” उन्होंने जो तस्वीर शेयर की, उस पर भी ये आँकड़े लिखे थे।

                                       बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव द्वारा किया गया ट्वीट

साथ ही तस्वीर में ये भी दावा किया गया था कि इंडिया गेट पर स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखे हैं। इस तस्वीर को देखने से ही ऐसा लग रहा है कि किसी ने उन्हें व्हाट्सएप्प पर भेजा था और उन्होंने उसे वैसे ही उठा कर शेयर कर दिया। रामचरितमानस को घृणा फैलाने वाला ग्रन्थ बताने वाले चंद्रशेखर यादव इस्लाम को प्यार का सन्देश देने वाला मजहब बताते रहे हैं, ऐसे में उनकी हिन्दू विरोधी मानसिकता को लेकर कोई शक तो नहीं ही है।

सच्चाई क्या है। असल में इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखे ही नहीं है। इस पर प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) और तीसरे एंग्लो-अफगान युद्ध (1919) में मृत ‘ब्रिटिश इंडिया आर्मी’ के सैनिकों के नाम लिखे हैं। ये एक वॉर मेमोरियल है, जिस पर 13,000 से भी अधिक सैनिकों के नाम लिखे हैं। ये ‘ब्रिटिश इंडियन आर्मी’ के उन सभी 70,000 सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, जो इन युद्धों में मारे गए थे।

अवलोकन करें:-

बि​हार के शिक्षा मंत्री पर भड़के परमहंस आचार्य : जीभ काटने वाले को 10 करोड़ रुपए का पुरस्कार

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
बि​हार के शिक्षा मंत्री पर भड़के परमहंस आचार्य : जीभ काटने वाले को 10 करोड़ रुपए का पुरस्कार
बिहार के शिक्षा मंत्री पर भड़के जगद्गुरु परमहं

दिसंबर 1917 में गठित ‘इम्पीरियल वॉर ग्रेव्स कमीशन’ के अंतर्गत इसे बनाया गया था। 10 फरवरी, 1921 को इसका शिलान्यास हुआ था और 2 फरवरी, 1931 को इसका उद्घाटन किया गया था। जबकि भारत 1947 में आज़ाद हुआ। आज़ादी से 16 वर्ष पहले ही बन कर तैयार हुए इस स्मारक में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम हैं ही नहीं। इसीलिए, इस पर 61,000 मुस्लिम सैनिकों के नाम होने की बात झूठी है। कई बार ये दावा शेयर होता रहा है।

बिहार : 'तुलसीदास रचित रामचरितमानस’ पर विष फ़ैलाने वाले ठोंगी हिन्दू चंद्रशेखर का परिवार सहित सामाजिक बहिष्कार कब?

भारतीय संस्कृति एवं हिन्दू धर्म को जितना अपमानित ठोंगी हिन्दुओं ने किया है, किसी अन्य ने नहीं। इन्हीं ठोंगी हिन्दुओं को ढाल बनाकर हिन्दू विरोधी अति प्राचीन सनातन धर्म को कलंकित करने का दुस्साहस करते हैं। जनता को चाहिए कि ऐसे ठोंगी हिन्दु नेता और इनको संरक्षण देने वाली पार्टियों को चुनावों में औंधे मुंह गिराने के साथ इनके परिवार का भी सामाजिक बहिष्कार करें। जब तक हिन्दू इन कुर्सी के भूखे नेताओं और पार्टियों के विरुद्ध एकजुट नहीं होंगे, सनातन धर्म को अपमानित करने वाले होश में नहीं आएंगे। आखिर कब तक सनातन धर्म को अपमानित किया जाता रहेगा, कोई सीमा होती है? 

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ करार दिया है। ‘नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए RJD नेता रामचरितमानस को समाज को बाँटने वाला ग्रंथ बता दिया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस दलितों-पिछड़ों को शिक्षा ग्रहण करने से रोकता है। संबोधन के बाद मीडिया के सामने भी बिहार के शिक्षा मंत्री अपने बयान पर कायम नजर आए।

पटना ज्ञान भवन में नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में चंद्रशेखर ने छात्र छात्राओं को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने रामचरितमानस के एक दोहे “अधम जाति में विद्या पाए, भयहु यथा अहि दूध पिलाए” का जिक्र करते हुए कहा कि यह समाज में नफरत फैलानेवाला ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि दोहे में अधम का अर्थ नीच होता है जिसे उन्होंने जाति से जोड़ते हुए कहा कि इस दोहे के अनुसार नीच जाति अर्थात दलितों-पिछड़ों और महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नहीं था।

अपने संबोधन की शुरुआत में बिहार के शिक्षा मंत्री ने सभागार में उपस्थित बच्चों से पूछा कि भारत को ताकतवर नफरत से बनाएँगे या मोहब्बत से? सभागार में उपस्थित बच्चों ने ‘मोहब्बत से’ जवाब दिया। शिक्षा मंत्री ने अपने भाषण को जारी रखा। फिर उन्होंने कहा कि देश में कुछ विचार ऐसे चले हैं जो नफरत फैलाना चाहते हैं और यह विचार आज के नहीं हैं बल्कि तीन हजार साल पहले जब मनुस्मृति लिखी गई, यह विचार वहीं से आए हैं।

संबोधन के बाद पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए भी उन्होंने अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा कि किसी जमाने में मनुस्मृति ने समाज में नफरत का बीज बोया, उसके बाद रामचरितमानस ने समाज में नफरत पैदा की। बकौल चंद्रशेखर, आज के समय में गुरु गोलवलकर के विचार समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि समाज में जितनी जातियाँ हैं, उतनी ही नफरत की दीवारें हैं। जब तक यह दीवारें समाज में मौजूद रहेंगी, भारत विश्वगुरु नहीं बन सकता है।