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बाँध में पानी घटते ही बाहर आया सदियों पुराना पांडवकालीन कांबरेश्वर मंदिर, रहस्यमई जलमग्न शिवलिंग है खास पहचान: जानें पुणे में क्यों उमड़े श्रद्धालु और क्या है इतिहास?

                                 सदियों पुराना पांडवकालीन कांबरेश्वर मंदिर (फोटो साभार: Eskal)
महाराष्ट्र के पुणे जिले के भोर तालुका में इन दिनों एक ऐसा दृश्य देखने को मिल रहा है, जिसने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। भाटघर बाँध का जलस्तर कम होते ही पानी के भीतर छिपा सदियों पुराना कांबरेश्वर मंदिर एक बार फिर दुनिया के सामने आ गया है। साल के अधिकांश महीनों तक पानी में डूबा रहने वाला यह मंदिर हर वर्ष कुछ समय के लिए ही दिखाई देता है।

यही वजह है कि इसे देखने के लिए श्रद्धालुओं, पर्यटकों, फोटोग्राफरों और इतिहास प्रेमियों की भीड़ उमड़ पड़ती है। यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला, इंजीनियरिंग और इतिहास का जीवंत उदाहरण भी माना जाता है।

पानी में वर्षों तक डूबे रहने के बावजूद इसका मजबूत ढाँचा आज भी लोगों को हैरान कर देता है। मंदिर की रहस्यमयी बनावट, पानी में स्थित शिवलिंग और इससे जुड़ी मान्यताएँ इसे और भी खास बना देती हैं।

कुछ महीने पहले News18 पर एंकर किशोर अजवाणी ने अपने शो आधी हकीकत आधा फ़साना में किसी राज्य में समुद्र में दो शिव मन्दिरों को दिखाया था जो 6 घंटे पानी से बाहर आते हैं और जब एक मन्दिर पानी से बाहर आता तो कुछ दूरी पर दूसरा मन्दिर समुद्र में जलमग्न हो जाता। जलमग्न होने पर मन्दिरों को किसी प्रकार की क्षति नहीं होती। सब भोलेनाथ का चमत्कार है।   

भाटघर बाँध का जलस्तर घटते ही सामने आया मंदिर

पुणे के भोर तालुका में स्थित ब्रिटिशकालीन भाटघर बाँध इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। बाँध में पानी का स्तर काफी नीचे पहुँच गया है, जिसके कारण इसके कैचमेंट एरिया में मौजूद कई हिस्से दिखाई देने लगे हैं। इन्हीं में सबसे प्रमुख है कांबरे गाँव का ऐतिहासिक कांबरेश्वर मंदिर।

वेलवंडी नदी पर बने इस मंदिर का अधिकांश हिस्सा हर साल मानसून के बाद पानी में डूब जाता है। जैसे-जैसे बारिश का पानी बढ़ता है, मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो जाता है और कई महीनों तक दिखाई नहीं देता। गर्मियों के मौसम में जब बाँध का जलस्तर घटता है, तब धीरे-धीरे मंदिर का शिखर नजर आने लगता है और फिर पूरा मंदिर सामने आ जाता है।

                                                                                                                                 साभार: NDTV

स्थानीय लोगों के अनुसार, मई के आखिर और जून की शुरुआत में यह मंदिर सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यही समय होता है जब बड़ी संख्या में लोग यहाँ पहुँचते हैं। ग्रामीण हर साल मंदिर की सफाई करते हैं और वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर को खोला जाता है।

अंग्रेजों के बाँध निर्माण के बाद पानी में समा गया मंदिर

कांबरेश्वर मंदिर की कहानी केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक भी है। बताया जाता है कि वर्ष 1928 में अंग्रेजों ने लॉयड डैम यानी आज के भाटघर बाँध का निर्माण कराया था। बाँध बनने के बाद आसपास का बड़ा क्षेत्र जलमग्न हो गया। कांबरे गाँव को दूसरी जगह बसाना पड़ा, लेकिन मंदिर को वहीं छोड़ दिया गया।

तब से हर वर्ष मानसून के दौरान यह मंदिर पानी में डूब जाता है और गर्मियों में फिर बाहर दिखाई देता है। दशकों से यही क्रम जारी है। समय के साथ यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए केवल पूजा का स्थान नहीं रहा, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और विरासत का प्रतीक बन गया है।

इतिहासकारों का मानना है कि यह मंदिर बेहद प्राचीन है। स्थानीय लोग इसे पांडव काल से जोड़ते हैं और मानते हैं कि इसका निर्माण महाभारत काल में हुआ था। हालाँकि कई इतिहास विशेषज्ञ इसे हेमाडपंती शैली का मंदिर मानते हैं।

मंदिर की बनावट, पत्थरों की संरचना और निर्माण शैली इस बात की ओर इशारा करती है कि इसे मध्यकालीन भारतीय स्थापत्य शैली में तैयार किया गया होगा।

मंदिर की बनावट आज भी इंजीनियरों को करती है हैरान

कांबरेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूती है। वर्षों तक पानी में डूबे रहने के बावजूद यह मंदिर आज भी मजबूती से खड़ा है। लगातार पानी की लहरों, गाद और मौसम के प्रभाव के बाद भी इसकी मुख्य संरचना सुरक्षित दिखाई देती है।

मंदिर की दीवारों को बड़े-बड़े तराशे हुए पत्थरों से बनाया गया है। पत्थरों को बिना आधुनिक तकनीक के इतनी मजबूती से जोड़ा गया कि सदियों बाद भी उनका संतुलन बना हुआ है। मंदिर के शिखर और ऊपरी हिस्से में चूना पत्थर, रेत और पकी हुई ईंटों का उपयोग किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उस समय की निर्माण तकनीक बेहद उन्नत थी। यही कारण है कि लगातार पानी में रहने के बावजूद मंदिर पूरी तरह क्षतिग्रस्त नहीं हुआ। हालाँकि समय के साथ कुछ हिस्सों में टूट-फूट जरूर हुई है, लेकिन इसकी नींव और मुख्य ढाँचा अब भी मजबूत दिखाई देता है।

मंदिर को देखने के लिए हर साल आर्किटेक्चर के छात्र, इंजीनियर, शोधकर्ता और इतिहासकार यहाँ पहुँचते हैं। उनके लिए यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग का मास्टरपीस है।

पानी से भरा गर्भगृह और रहस्यमयी शिवलिंग

कांबरेश्वर मंदिर का गर्भगृह इसे और भी रहस्यमयी बना देता है। मंदिर पूरी तरह बाहर आने के बाद भी इसके भीतर घुटनों तक पानी भरा रहता है। इसी पानी के बीच भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है।

श्रद्धालु मंदिर के अंदर जाकर पानी में हाथ डालकर शिवलिंग को स्पर्श करते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं। भक्तों के लिए यह अनुभव बेहद भावुक और आध्यात्मिक माना जाता है। मंदिर में माता पार्वती और नंदी महाराज की प्रतिमाएँ भी मौजूद हैं।

                                                                                                                                 साभार: NDTV

पहले मंदिर तक पहुँचने के लिए पाँच सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती थीं, लेकिन हर साल जमा होने वाली मिट्टी और गाद के कारण अब वे सीढ़ियाँ दब चुकी हैं। गाँव वाले हर वर्ष मंदिर से गाद हटाने और सफाई करने का काम करते हैं ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन में परेशानी न हो।

मंदिर के सामने नंदी की प्रतिमा और एक खुला आँगन है। यहाँ वीरगळ यानी शहीद योद्धाओं की स्मृति में बनाई गई पत्थर की शिलाएँ भी मौजूद हैं, जो इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ाती हैं।

पर्यटन, आस्था और इतिहास का अनोखा संगम बना मंदिर

कांबरेश्वर मंदिर अब केवल स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं रह गया है। हर साल जब यह पानी से बाहर आता है, तब दूर-दूर से लोग इसे देखने पहुँचते हैं। सुबह और शाम के समय मंदिर और वेलवंडी नदी का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के दौरान यहाँ का नजारा पर्यटकों और फोटोग्राफरों के लिए खास आकर्षण बन जाता है।

स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत लोगों से मंदिर की पवित्रता बनाए रखने की अपील भी करते हैं। गाँव वालों का कहना है कि यह केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि उनकी आस्था और परंपरा का केंद्र है। इसलिए यहाँ आने वाले लोगों को धार्मिक मर्यादा और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए।

ग्रामीणों ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर तक पहुँचने वाले रास्ते को भी सुरक्षित बनाया है। हर साल मंदिर खुलने के बाद यहाँ पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हजारों श्रद्धालु पानी में मौजूद शिवलिंग के दर्शन के लिए यहाँ पहुँचते हैं।

सदियों पुरानी विरासत की जीवित मिसाल है कांबरेश्वर मंदिर

कांबरेश्वर मंदिर आज भी इस बात का प्रमाण है कि भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला कितनी उन्नत और टिकाऊ थी। पानी में वर्षों तक डूबे रहने के बावजूद इसका अस्तित्व बना रहना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता। हर साल कुछ दिनों के लिए पानी से बाहर आने वाला यह मंदिर मानो समय के भीतर छिपी एक कहानी को फिर से जीवित कर देता है।

भोर तालुका का यह प्राचीन शिव मंदिर आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है और यह साबित करता है कि भारत की ऐतिहासिक धरोहरें केवल पत्थरों की इमारतें नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सभ्यता और संस्कृति की जीवित पहचान हैं।

TCS नासिक कांड : 25 दिनों से फरार निदा खान को महाराष्ट्र पुलिस ने संभाजी नगर से गिरफ्तार किया; कोर्ट से नहीं मिली जमानत

दंगाई हों, बलात्कारी हों, पत्थरबाज हों या फिर मजहब बदलने वाले/वाली हो भांडा फूटने पर छिपे-छिपे फिरते है, क्यों? अदालतों को चाहिए कि इन उपद्रवियों को तलाशने में जो खर्चा हुआ है उसकी वसूली करनी चाहिए। इन उपद्रवियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं छीन लेनी चाहिए।        
TCS धर्मांतरण मामले में फरार चल रही आरोपित निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नासिक पुलिस की विशेष जाँच टीम (SIT) ने करीब 25 दिनों तक तलाशी अभियान चलाने के बाद उसे गुरुवार (7 मई 2026) को छत्रपति संभाजीनगर से पकड़ा।

पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार, गिरफ्तारी स्थानीय पुलिस की मदद से की गई। मामले में पहले ही कई प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं और अब तक आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गौरतलब है कि TCS से जुड़े BPO यूनिट के भीतर मुस्लिम कर्मचारियों द्वारा संगठित तरीके से हिंदू महिला कर्मचारियों का शोषण किए जाने के आरोप सामने आए थे।

पीड़िताओं ने यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव, धार्मिक भावनाएँ आहत करने और धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं निदा खान महिलाओं को हिजाब और बुर्का पहनने, इस्लामी तौर-तरीके अपनाने और मजहबी सामग्री देखने के लिए प्रेरित करती थी।

जाँच में यह भी सामने आया कि पीड़िता को कुछ मोबाइल एप और मजहबी कंटेंट भेजे गए थे और उसका नाम बदलने की योजना तक बनाई जा रही थी।

कोर्ट से नहीं मिली राहत, SIT ने बताए कई अहम लिंक

गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने नासिक कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। उसने कोर्ट को बताया था कि वह गर्भवती है और मुंबई में रह रही है, इसलिए उसे गिरफ्तारी से राहत दी जाए। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि महाराष्ट्र में अलग से कोई धर्मांतरण विरोधी कानून लागू नहीं है और जबरन धर्मांतरण के आरोप बेबुनियाद हैं।

हालाँकि कोर्ट ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मामले में डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और कई संवेदनशील जानकारियाँ सामने आई हैं, इसलिए आरोपित से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

SIT ने कोर्ट को यह भी बताया कि जाँच का दायरा नासिक से आगे बढ़कर मालेगाँव और यहाँ तक कि मलेशिया तक पहुँच गया है। जाँच एजेंसियों को शक है कि विदेश में नौकरी के अवसरों का इस्तेमाल कथित तौर पर लालच देने के लिए किया गया हो सकता है।

कई धाराओं में केस दर्ज, लगातार बदल रही थी ठिकाने

पुलिस के अनुसार प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही निदा खान फरार चल रही थी और उसके मोबाइल फोन समेत कुछ रिश्तेदारों के फोन भी बंद पाए गए थे। पुलिस ने उसके शौहर से पूछताछ के बाद कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन हर बार पुलिस को बंद मकान ही मिले। इसके बाद राज्यभर में तलाश अभियान तेज किया गया।

मामले में निदा खान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की यौन उत्पीड़न, मानहानि और धार्मिक भावनाएँ आहत करने से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। चूँकि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से है, इसलिए उसके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएँ भी लगाई गई हैं।

कांग्रेस की ‘टुच्ची’ सोच : रेप हो रहा है तो लेटकर मजे लो,… क्यों हर बार पीड़िताओं को ही ‘गुनहगार’ बताते हैं कांग्रेस नेता?

                                    क्यों हर बार पीड़िताओं को ही ‘गुनहगार’ बताते हैं कांग्रेस नेता?
महाराष्ट्र में अमरावती जिले से सामने आया मामला समाज की कई परतों को उजागर करता है। एक तरफ जहाँ मुस्लिम युवक मोहम्मद अयान अहमद तनवीर ने 180 लड़कियों को अपने जाल में फँसाया, उनके साथ 350 से ज्यादा अश्लील वीडियो बनाए और इनमें से 100 वीडियो वायरल भी कर दिए। दूसरी तरफ कांग्रेस है, जो ऐसे गंभीर मामलों में पीड़िताओं को कठघरे में खड़ा करने से बाज नहीं आती।

इस पूरे मामले में कांग्रेस की ‘टुच्ची’ सोच को पूरी तरह उजागर करते कांग्रेस नेत्री यशोमती चंद्रकांत ठाकुर का पीड़िताओं पर सवाल उठाते बयान सामने आया है। उन्होंने उन पीड़िताओं को लेक्चर दिया- “लड़कियों में अक्ल नहीं है क्या? क्या लड़कियों ने अपनी बुद्धि खो दी है?”

दिलचस्प बात यह है कि यशोमती ठाकुर 2019 से 2022 तक कांग्रेस और शिवसेना के गठबंधन वाली सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं। यानी जिस पद पर रहते हुए यशोमती ठाकुर से महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान की आस थी, वही कांग्रेस नेता आज पीड़ित लड़कियों पर सवाल उठा रही है।

सीधी बात है कि ये सिर्फ एक बयान नहीं है, ये कांग्रेस पार्टी की मानसिकता है। ये वही सोच है जो हर बार रेप, छेड़छाड़ या यौन शोषण के मामलों में अपराधी पर सवाल उठाने के बजाए लड़कियों को ही नसीहत देने लगती है। कभी उनके कपड़ों पर, कभी उनकी समझ पर, कभी उनके फैसलों पर। हर बार राजनीतिक बयानबाजी में निशाना पीड़िता ही बनती हैं।

और ये पहली बार नहीं हुआ है। कांग्रेस के नेताओं का ट्रैक रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए, ऐसे बयान बार-बार सामने आते हैं। कर्नाटक विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर केआर रमेश कुमार का वो शर्मनाक बयान कौन भूल सकता है- “जब रेप होना ही है, तो लेटो और मजे लो।” यही नहीं कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया खुलेआम कहते हैं- “खूबसूरत लड़की दिख जाए तो दिमाग विचलित हो जाता है।” केरल कांग्रेस के नेता मुल्लापल्ली रामचंद्रन तो इससे भी आगे निकल जाते हैं और कहते हैं- “जिस लड़की का रेप हो, उसे आत्महत्या कर लेनी चाहिए।” वहीं अमरगौड़ा पाटिल जैसे नेता तो रेप पीड़िता के परिवार को ही झूठा करार देने लगते हैं।

ये कोई एक-दो फिसलती जुबान के उदाहरण नहीं हैं, ये उसी पुरानी, टुच्ची और गैर-जिम्मेदार सोच की झलक है जो अंदर तक बैठी हुई है।

और बात यहीं खत्म नहीं होती। जब राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी हाथरस की पीड़िता से मिलने जाते हैं, तब जो वीडियो सामने आई, उसने भी बहुत कुछ साफ कर दिया। जिस वक्त पूरे देश में गुस्सा और संवेदना का माहौल था, उस समय दोनों भाई-बहन का कार में हँसी-मजाक करते हुए जाना ये दिखाता है कि गंभीरता कितनी है। साफ है, ये सिर्फ अलग-अलग नेताओं की गलती नहीं है।

सबसे खतरनाक बात ये है कि इस तरह के बयान सीधे-सीधे अपराधियों को राहत देते हैं। जब देश की एक पार्टी के नेता ही पीड़ितों को दोष देने लगेंगे, तो अपराधियों का हौसला क्यों नहीं बढ़ेगा? उन्हें तो यही लगेगा कि गलती उनकी नहीं, बल्कि लड़कियों की ही है।

आखिर में साफ शब्दों में कहें तो कांग्रेस की समस्या बयान नहीं, पूरी सोच है। बार-बार वही गिरी हुई बातें, वही पीड़ितों को कठघरे में खड़ा करने की आदत ये दिखाती है कि ये कोई गलती नहीं बल्कि जड़ जमा चुकी मानसिकता है। जिस पार्टी के नेताओं को रेप जैसे गंभीर अपराध में भी संवेदनशीलता नहीं दिखती, वो महिलाओं की सुरक्षा की बात करें, ये खुद एक मजाक लगता है। सच यही है कि कांग्रेस के लिए ऐसे मुद्दे गंभीर नहीं, सिर्फ राजनीति का सामान है। और जब तक ये सोच नहीं बदलेगी, तब तक इनके बयान भी ऐसे ही जहरीले और शर्मनाक आते रहेंगे।

शरीयत लाने वाले क्यों छिपकर संविधान की शरण में आ रहे हैं? नासिक TCS कांड में फरार निदा खान ने कोर्ट में दायर की जमानत याचिका: हिंदू लड़कियों को बुर्का पहनाना सिखाती थी, तौसीफ का हिंदू कर्मी को मजहबी टोपी पहनाने का Video आया सामने

आरोपित और फरार HR मैनेजर निदा खान, हिंदू कर्मचारी को मजहबी टोपी पहनाता तौसीफ (साभार: जनसत्ता, एक्स @IndiaToday)
नासिक के टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट से हिंदू महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले में नया मोड़ सामने आया। इस मामले की मुख्य आरोपित और फरार निदा खान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए नासिक की कोर्ट में अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) याचिका दायर की है। कई खबरों में निदा खान को कंपनी की HR मैनेजर भी बताया जा रहा था।

भारत में शरीयत लाकर गज़वा-ए-हिन्द बनाने वाले भांडा फूटने पर उस भारतीय संविधान से न्याय की गुहार क्यों लगाने छिपे-छिपे फिर रहे हैं? जब ये लोग अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरते फिर किस से डर कर छिप रहे हो? हर मुसलमान को ऐसे भड़काऊ लोगों से इस सवाल का जवाब मांग इनके भड़काऊ मंसूबों को बेनकाब करना होगा। इन्ही भड़काऊ लोगों ने इस्लाम को बदनाम जहर फ़ैलाने का काम कर रहे हैं। फिर अपने-आपको गरीब, मजलूम आदि बताकर victim card खेल जनता और कानून की आँखों में धूल झोंकते हैं।           

मामले के सामने आने के बाद से ही फरार चल रही खान ने अब अपने वकीलों से दोबारा संपर्क किया, जबकि SIT लगातार उसकी तलाश में कर रही है। इस पूरे मामले में अब तक 9 हिंदू पीड़ितों की FIR दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस अब तक सात पुरुषों और एक महिला समेत कुल 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि निदा खान अब भी फरार है।

निदा खान आंतरिक POSH कमेटी का हिस्सा थी और आरोप है कि उसने शिकायतों को दबाया और पीड़िताओं को कार्रवाई से हतोत्साहित किया। निदा खान दफ्तर की हिंदू लड़कियों को बुर्का पहनाना सिखाती थी। SIT की जाँच में यह भी सामने आया है कि HR विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 70 से अधिक शिकायतों को नजरअंदाज किया गया।

डिजिटल साक्ष्य खंगालने में जुटी एजेंसियाँ, बढ़ सकती है जाँच का दायरा

पीड़िताओं का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और निदा खान ने उन्हें शिकायतें वापस लेने के लिए दबाव डाला। अब जाँच एजेंसियाँ ईमेल, कॉल रिकॉर्ड और चैट जैसे डिजिटल साक्ष्यों की गहन जाँच कर रही हैं, ताकि आरोपितों के बीच समन्वय और संभावित वित्तीय लेन-देन का पता लगाया जा सके।

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प्राइवेट पार्ट पर बात, गंदे इशारे और देवी-देवताओं का अपमान: नासिक TCS मामले में मुस्लिम गैंग कैसे
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इस मामले में आरोपित तौसीफ का वो Video मिला, जिसमें वह हिंदू कर्मचारी को मजहबी टोपी पहना रहा है। पीड़ित का कहना है कि 2023 में ईद के मौके पर उसे जबरदस्ती तौसीफ के घर ले जाया गया, जहाँ जबरन उसे मजहबी टोपी पहनाई गई, नमाज और कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए ATS और NIA जैसी एजेंसियों से भी संपर्क किया गया है, जिससे जाँच का दायरा और बढ़ सकता है। 

अजित पवार के विमान हादसे की आँखों देखी, शोक और शंकाओं के बीच जाँच शुरू : भीषण धमाके, आग की लपटें और सब खाक


महाराष्ट्र के लिए बुधवार (28 जनवरी 2026) का दिन एक दर्दनाक और स्तब्ध कर देने वाली घटना लेकर आया। महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार की विमान हादसे में मौत की खबर ने देशभर में लोगों को स्तब्ध कर दिया। मुंबई से बारामती जाते समय जिस विमान में वह सवार थे, वह लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। खेतों में गिरे इस विमान में गिरते ही आग लग गई और कुछ ही पलों में वह पूरी तरह जलकर खाक हो गया। इस हादसे में विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई।

मुंबई से बारामती जा रहे थे अजित पवार

बुधवार को महाराष्ट्र के अजित पवार मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुए थे। बारामती पहुँचकर उन्हें चुनाव प्रचार से जुड़े 4-5 कार्यक्रमों में शामिल होना था और जनसभाओं को संबोधित करना था। इसी सिलसिले में उन्होंने चार्टर विमान से यात्रा की थी। यह विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग की तैयारी में था लेकिन हवाई पट्टी तक पहुँचने से पहले ही हादसे का शिकार हो गया। बताया जा रहा है कि दुर्घटना स्थल रनवे से करीब तीन किलोमीटर पहले का इलाका था, जो खेतों और ग्रामीण क्षेत्र से घिरा हुआ है।

लैंडिंग के दौरान बिगड़ा संतुलन

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान जैसे ही नीचे उतरना शुरू हुआ, उसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ता नजर आया। स्थानीय लोगों ने बताया कि विमान लैंडिंग की कोशिश में लड़खड़ा रहा था और कुछ सेकंड तक ऐसा लग रहा था कि वह सुरक्षित उतर जाएगा लेकिन पल भर में स्थिति बदल गई। देखते ही देखते विमान हवाई पट्टी से भटक गया और पास के खेतों की ओर जा गिरा। गिरते ही तेज आवाज हुई और आग की लपटें उठने लगीं।

लैंडिंग की दूसरी कोशिश में हादसा

लाइव फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Flightradar24 से मिले डेटा के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त लियरजेट 45 (VT-SSK) विमान बारामती एयरपोर्ट पर उतरने की दूसरी कोशिश कर रहा था। जानकारी के अनुसार, पायलट ने पहली बार लैंडिंग का प्रयास किया लेकिन किसी कारणवश वह सफल नहीं हो सका। इसके बाद विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाकर रनवे पर उतारने की कोशिश की गई। एविएशन की भाषा में इस प्रक्रिया को गो-अराउंड कहा जाता है। दुर्भाग्यवश, दूसरी कोशिश के दौरान विमान नियंत्रण खो बैठा और जमीन पर गिर गया, जिससे यह हादसा हो गया।
                                                  Flightradar24 का डेटा

विमान क्रैश के बाद हुए 4-5 धमाके

हादसे के चश्मदीदों का कहना है कि विमान जमीन से टकराते ही उसमें आग लग गई। खेतों में गिरते ही विमान पूरी तरह आग की चपेट में आ गया। चारों ओर धुआँ फैल गया और कुछ ही क्षणों में आग ने विकराल रूप ले लिया। मलबे से उठती लपटें और तेज धमाकों की आवाज सुनकर आसपास के गाँवों से लोग मौके की ओर दौड़ पड़े।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विमान के क्रैश होने के तुरंत बाद 4-5 जोरदार धमाके हुए। हादसे के बाद विमान आग का गोला बन गया और लगातार विस्फोटों की आवाज आती रही। लोगों का कहना है कि धमाकों के कारण कोई भी व्यक्ति विमान के नजदीक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। आग की लपटें इतनी ऊँची थीं कि दूर से ही यह साफ नजर आ रहा था कि विमान पूरी तरह नष्ट हो चुका है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया?

मौके पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने अपनी आँखों से विमान को नीचे आते देखा। उसके अनुसार, विमान जब उतर रहा था तो ऐसा लग रहा था कि वह किसी भी क्षण गिर सकता है। कुछ ही सेकंड में वही हुआ और विमान खेतों की ओर जा गिरा। पहले किसी को अंदाजा नहीं था कि यह किसका विमान है। लोगों को लगा कि पास मौजूद पायलट ट्रेनिंग सेंटर का कोई विमान होगा। बाद में जानकारी मिली कि यह विमान महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता को लेकर आ रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान गिरने से पहले काफी अस्थिर दिखाई दे रहा था और फिर करीब 200 फीट गहरी खाई की ओर जा गिरा। इसके बाद विस्फोट हुए और आग तेजी से फैल गई।

आग के कारण नहीं हो सकी मदद

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग मदद के लिए मौके पर पहुँचे। लोगों ने विमान से यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश भी की लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई भी पास नहीं जा सका। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग और धमाकों के कारण हालात बेहद भयावह थे। कई लोगों की आँखों के सामने यह हादसा हुआ और वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सके। घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ ही देर में वहाँ भीड़ जमा हो गई।

उस विमान की कहानी जिसमें सवार थे अजित पवार

जिस विमान में अजित पवार सवार थे, वह VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित और VT-SSK के रूप में पंजीकृत Learjet 45XR था। यह कंपनी भारत की प्रमुख नॉन-शेड्यूल्ड यानी चार्टर विमान ऑपरेटिंग कंपनियों में से एक है। Learjet 45XR एक हाई-परफॉर्मेंस सुपर-लाइट बिजनेस जेट है, जिसे तेज रफ्तार, बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी और ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता के लिए जाना जाता है। यह विमान आमतौर पर शॉर्ट और मीडियम रूट्स की उड़ानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
Learjet 45XR का विंगस्पैन करीब 47 फीट बताया जाता है और इसका वजन लगभग 9,752 किलोग्राम है। यह विमान 1990 के दशक में डिजाइन किया गया था और इसे सुपर-लाइट बिजनेस जेट कैटेगरी में Cessna Citation Excel के विकल्प के तौर पर पेश किया गया था। इस विमान के केबिन में खड़े होने की जगह नहीं होती लेकिन Learjet सीरीज की पहचान हमेशा हाई-स्पीड परफॉर्मेंस रही है। इसी वजह से इसे बिजनेस और चार्टर फ्लाइट्स के लिए पसंद किया जाता रहा है।
VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना वीके सिंह द्वारा की गई थी और कंपनी का मालिकाना हक भी उनके पास है। यह कंपनी प्राइवेट जेट चार्टर, हेलिकॉप्टर रेंटल, मेडिकल इवैकुएशन यानी एयर एम्बुलेंस और एयरक्राफ्ट लीजिंग जैसी सेवाएँ देती है। कंपनी की फ्लीट में Learjet 45XR के अलावा Beechcraft Super King Air B200 और Agusta 109 हेलिकॉप्टर जैसे विमान भी शामिल हैं। इसका हेड ऑफिस नई दिल्ली के महिपालपुर में स्थित है और कंपनी एंड-टू-एंड एविएशन कंसल्टेंसी और एयरक्राफ्ट मैनेजमेंट सेवाएँ भी देती है।

शोक और शंकाएँ

अजित पवार के निधन पर देश भर में शोक की लहर दौड़ गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लेकर प्रधानमंत्री मोदी और तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों, नेताओं और अन्य हस्तियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। हालाँकि, शोक के बीच इस हादसे को लेकर संदेह भी जताया जा रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई नेताओं ने इस हादसे की जाँच की माँग की है। हादसे की जाँच करने की माँग करने वाले लोगों में अजित पवार के साथी और महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सपा के नेता एसटी हसन भी शामिल हैं।
ममता बनर्जी ने कहा, “यहाँ नेता भी सुरक्षित नहीं हैं। मुझे नहीं पता क्या दिक्कत है। मुझे पता चला था कि वो बीजेपी की सरकार का नेतृत्व करने वाले हैं और आज अचानक उनका निधन हो गया। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सही जाँच होनी चाहिए। क्या यह बेवजह डर फैलाना है या कोई साजिश।”

हादसे के कारणों की होगी जाँच

फिलहाल इस भीषण विमान हादसे के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। शुरुआती तौर पर यह कहा जा रहा है कि लैंडिंग के दौरान विमान का कंट्रोल बिगड़ गया था। वहीं, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया है कि दुर्घटना स्थल का निरीक्षण करने और जाँच शुरू करने के लिए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की टीम बारामती के लिए रवाना हो गई है और इस हादसे की जाँच करेगी।

महाराष्ट्र : यवतमाल में जन्म प्रमाणपत्र घोटाला, 1500 आबादी वाले छोटे से गाँव में बने 27000+ जन्म सर्टिफिकेट

          पूर्व भाजपा सांसद किरीट सोमैया (साभार - द हिंदू/विवेक बेंद्रे और https://zpyavatmal.gov.in/)
महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के ग्रामीण इलाके में जन्म पंजीकरण से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। जिले की अरनी तहसील की शेंदुरसानी ग्राम पंचायत में सिर्फ तीन महीनों (सितंबर से नवंबर) के भीतर सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) में 1,500 की आबादी वाले गाँव में 27,397 जन्म दर्ज किए गए।

यह गंभीर अनियमितता 24 नवंबर 2025 को सामने आई। इसके बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) की शिकायत पर मंगलवार (16 दिसंबर 2025) को यवतमाल सिटी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।

FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 337, 336(3), 304(2) और IT एक्ट की धारा 65 व 66 के तहत दर्ज की गई है। पुलिस निरीक्षक नंदकिशोर काले ने बताया कि शेंदुरसानी गाँव में जन्म पंजीकरण में गड़बड़ी की शिकायत मिली है और मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

पूर्व भाजपा सांसद किरिट सोमैया ने बुधवार (17 दिसंबर 2025) को गाँव का दौरा किया और इस मामले की गहन जाँच की माँग की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने अंदाजा लगाया की ग्राम पंचायत के कंप्यूटर ऑपरेटर की लॉग-इन ID और पासवर्ड का किसी ने गलत इस्तेमाल किया हो सकता है, जिसके जरिए जन्म पंजीकरण में इतनी बड़ी गड़बड़ी की गई।

एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि शक है कि हजारों बांग्लादेशी इसके फायदेमंद हैं। उन्होंने इस मामले में SIT जाँच की माँग की है।

उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड में दर्ज ज्यादातर नाम पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के लोगों के हैं। किरिट सोमैया ने कहा, “मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात की है और इन सभी फर्जी जन्म पंजीकरण प्रविष्टियों को रद्द करने की माँग की है।” उन्होंने यह भी बताया कि शेंदुरसानी ग्राम पंचायत की CRS ID (MH18241RE) मुंबई में मैप पाई गई है, जिससे साइबर धोखाधड़ी की आशंका और भी मजबूत हो गई है।

राज्य सरकार के निर्देश पर मंगलवर (16 दिसंबर 2025) को ग्राम पंचायत में अवैध और देरी से किए गए जन्म-मृत्यु पंजीकरण के जाँच अभियान को शुरू किया गया। इस दौरान अरनी के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पाया कि सितंबर से नवंबर 2025 के बीच CRS सॉफ्टवेयर में 27,397 जन्म और 7 मृत्यु के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं, जो गाँव की वास्तविक आबादी के मुकाबले बिल्कुल असामान्य और संदिग्ध थे।

इसके बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) ने इस गड़बड़ी की जानकारी जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मंदर पाटकी को दी। CEO ने मामले की जाँच के लिए पंचायत विभाग के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में एक जाँच समिति गठित की। समिति ने गाँव में मौके पर जाकर जाँच की, जिसमें सामने आया कि 27,397 जन्म और 7 मृत्यु के रिकॉर्ड ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र से बाहर के हैं और इन्हें बहुत ही संदिग्ध माना गया।

इसके बाद पुणे के उप स्वास्थ्य सेवा संचालक द्वारा तकनीकी जाँच शुरू की गई। राज्य के लॉग-इन सिस्टम के माध्यम से की गई इस जाँच में सामने आया कि शेंदुरसानी ग्राम पंचायत की CRS ID मुंबई से मैप की गई थी। इसके बाद मामला नई दिल्ली स्थित भारत के अतिरिक्त रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) को भेजा गया।

इन दोनों संस्थानों की जाँच में यह निष्कर्ष निकला कि यह मामला साइबर धोखाधड़ी का है। यह जानकारी 11 दिसंबर 2025 को पुणे के उप स्वास्थ्य सेवा संचालक को दी गई, जिन्होंने आगे चलकर इसकी सूचना जिला परिषद (जिला परिषद प्रशासन) को दी।

क्रूज पर्यटन को दिया विस्तार, दुर्गा पूजा को दिलाई UNESCO में पहचान: मोदी सरकार ने बंगाल टूरिज्म को बढ़ाने के लिए क्या-क्या किया, सारा क्रेडिट ले रहीं ममता बनर्जी

                                          बंगाल बना तीसरा पसंदीदा पर्यटन स्थल (साभार-toi, nbt)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टूरिज्म क्रांति ने विदेशी सैलानियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा किया है, जिसने तमाम राज्यों को फायदा पहुँचाया है। इस कड़ी में बंगाल जो 2023-2024 में पर्यटन के मामले में तीसरे नंबर पर था वो 2025 में दूसरे नंबर पर आ गया है। भारत के लिए जाहिर है कि ये गर्व की बात है लेकिन इस ग्रोथ का सारा क्रेडिट अब अकेले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लेती दिख रही हैं।

जिस ममता के राज में हिन्दुओं को अपने त्यौहार(दुर्गा पूजा) मनाने के अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हो, ममता बनर्जी को शर्म आनी चाहिए कि जिस दुर्गा पूजा के बंगाल के हिन्दुओं को तुम्हारे कट्टरपंथी गुंडों से झूझना पड़ता है उसी दुर्गा पूजा को UNESCO में पहचान दिलवाने का काम नरेंद्र मोदी ने किया। 

उन्होंने इस संबंध में ट्वीट कर खुद अपनी पीठ थपथपाई है। जबकि सच्चाई ये है कि 2011 से सत्तासीन ममता बनर्जी का प्रयास कहीं नजर नहीं आता है। वहीं मोदी सरकार आने के बाद शुरू किए गए प्रयास जैसे- इनक्रेडिबल इंडिया, ई वीजा, मेडिकल वीजा के साथ-साथ क्रूज से लेकर सड़क तक किए गए विकास का फायदा बंगाल को मिला है।

बंगाल बना तीसरा पसंदीदा स्पॉर्ट

 विदेशी पर्यटकों के लिए बंगाल पहले तीसरा और अब दूसरा सबसे पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट बन गया है। पूर्व में सबसे आगे महाराष्ट्र और उसके बाद गुजरात था। मगर, अब लिस्ट में बंगाल ने राजस्थान और दिल्ली को पीछे छोड़ते हुए जगह बनाई है।

बंगाल को लेकर इस साल के शुरुआत में ही खबरें आ रही थी कि इस वर्ष बंगाल में आने वाले टूरिस्टों की पहले के मुकाबले ज्यादा हो सकती हैं। अब ये रिपोर्ट देखकर लगता है कि इस वर्ष हुआ भी यही। बता दें कि केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के ‘भारत पर्यटन डेटा संग्रह 2025’ ने राज्य को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या के मामले में देश भर में दूसरे स्थान पर रखा है। देख सकते हैं बंगाल विदेशी टूरिस्टों की लुभाने में नंबर 2 पर आया है। संख्या 3.12 मिलियन रही।

अब ये वृद्धि अचानक से बंगाल में कैसे देखने को मिली। इसके पीछे के कारण मोदी सरकार के अथक प्रयास हैं।

                                             भारत पर्यटन डेटा संग्रह 2025

दुर्गा पूजा को मिली वैश्विक पहचान

सांस्कृतिक समृद्धि और त्यौहारों ने विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया है। कोलकाता में होने वाले दुर्गापूजा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है। दुर्गा पूजा वह समय है जब बंगाल में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। लेकिन, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की मेहनत का नतीजा है कि दिसंबर 2021 में यूनेस्को ने कोलकाता में होने वाले दुर्गा पूजा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया। इसे ‘धर्म और कला के समन्वय का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण’ माना। जाहिर है इससे शिल्पकारों, कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिला, जो सालभर माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाने में मशगूल रहते हैं।

ई वीजा और मेडिकल वीजा

बंगाल के प्राइवेट अस्पतालों में बांग्लादेशी मेडिकल विज़िटर्स बड़ी संख्या में आते हैं। इसकी वजह बंगाल का सीमा से सटा होना और आसानी से मेडिकल वीजा मिलना है। ये लोग ममता के गिरते हुए हेल्थ सिस्टम को भी नजरअंदाज कर यहाँ पहुँचते हैं।
पीएम मोदी की ‘हील इन इंडिया’ पहल निजी क्षेत्र के साथ मिलकर स्वास्थ्य सेवा को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने का कार्यक्रम है। इसका फायदा बंगाल को भी हो रहा है। केन्द्र सरकार ने मेडिकल वीजा मिलना भी आसान कर दिया है। इसलिए बांग्लादेशी मेडिकल विजिटर्स रिकॉर्ड संख्या में बंगाल पहुँचे। ई वीजा की वजह से लोगों को वीजा मिलना भी सुलभ हो गया है। इसलिए पर्यटकों की संख्या में काफी बढोतरी हुई है।

इनक्रेडिबल इंडिया

भारत में रिकॉर्ड तोड़ विदेशी टूरिस्ट आने का कारण इनक्रेडिबल इंडिया है, जिसे अटल बिहारी वाजपेयी ने शुरू किया था और PM नरेंद्र मोदी ने ई-वीज़ा, मेडिकल वीज़ा, ग्लोबल कैंपेन और आसान एंट्री से इसे सुपरचार्ज किया है। अतिथि देवो भव: अवधारणा के साथ शुरू इस योजना को 2017 में नई जान आ गई। ‘इनक्रेडिबल इंडिया 2.0’ को डिजिटल और सोशल मीडिया पर काफी प्रोत्साहित किया गया। सरकार ने तो ‘वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ भी शुरू कर रही है। इसका लक्ष्य 2027 तक हर राज्य को फायदा पहुँचाना है।
अतुल्य भारत डिजिटल पोर्टल शुरू किया गया। इसे भारत में आने वाले पर्यटकों के लिए खास तौर पर बनाया गया। यह यात्रियों को पर्यटन स्थलों को ढूँढने और शोध से लेकर योजना बनाने, बुकिंग करने, यात्रा करने और वापस लौटने तक सभी जरूरी जानकारी और सेवाएँ देता है। ‘बुक योर ट्रैवल’ फीचर उड़ानों, होटलों, कैब की बुकिंग की सुविधा प्रदान करता है, जिससे यात्रियों की पहुँच बेहतर होती है। जाहिर से इसका फायदा भी बंगाल को मिला।

अतुल्य भारत होमस्टे योजना

पर्यटकों की सुविधा के लिए केन्द्र सरकार ने स्वैच्छिक होमस्टे योजना शुरू की, ताकि पर्यटकों को कहीं ठहरने में दिक्कत न हो और स्थानीय जनता को भी आमदनी हो। योजना के तहत 5 से 6 गाँव में 5 से 10 होम स्टे हो सकता है जिसके लिए 5 करोड़ रुपए तक की सहायता की जा रही है।

जनजातीय पर्यटन सर्किट का विकास

स्वदेश दर्शन योजना के तहत थीम आधारित सर्किट विकसित की जा रही है। रामायण सर्किट, बौद्ध सर्किट आदि। इस योजना के तहत जनजातीय होम स्टे परियोजना भी शुरू किया गया है। ताकि पर्यटकों के आने जाने वाली जगहों का विकास किया जा सके। इसके लिए केन्द्र सरकार धन मुहैया कराती है।

तीर्थयात्रा को बढ़ावा देने के लिए प्रशाद योजना

इसके तहत राज्य के अहम तीर्थस्थलों को संरक्षित करना और उन तक पहुँचने के लिए सुविधाएँ बढ़ाया गया है। जैसे त्रिपुरा संदुरी मंदिर, चामुंडेश्वरी देवी मंदिर, पटना साहिब की विकास योजनाएँ।
घरेलू पर्यटकों को अपने देश के पर्यटन स्थलों को देखने के लिए सरकार ने प्रोत्साहित किया। इसके लिए ‘देखो अपना देश’ पहल की गई
विशिष्ट पर्यटन उपक्षेत्रों को विकसित किया गया है जैसे उत्सव पर्यटन, साहसिक पर्यटन, विवाह पर्यटन और क्रूज पर्यटन। इसमें भारत के त्यौहारों, आयोजनों से लेकर पर्वतारोहण को बढ़ावा देने, ‘इंडिया सेज आई डू’ के तहत मैरिज डेस्टिनेशन सेंटर को बढ़ावा देना शामिल है।

क्रूज पर्यटन का विकास

क्रूज पर्यटन का फायदा भी कोलकाता को मिला है। बंगाल में कई तरह की क्रूज सेवाएं शुरू हो गई हैं, जिनमें ‘बंगाल गंगा क्रूज’ अहम है। इसके अतिरिक्त, भारत और आसियान देशों के बीच बंगाल की खाड़ी में एक नए क्रूज पर्यटन कॉरिडोर भी विकसित किया जा रहा है। कोलकाता से शुरू होने वाली एक लग्जरी क्रूज सेवा भी है, जो हुगली नदी के किनारे बंगाल की संस्कृति और वास्तुकला को दर्शाती है।
बीजेपी ने ममता बनर्जी के पर्यटकों की संख्या में इजाफे को लेकर सवाल किया है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ट्वीट कर सीएम ममता बनर्जी से पूछा है कि आखिर किस काम का वे क्रेडिट ले रही हैं, जबकि पर्यटन को मोदी सरकार की प्राथमिकता में एक है।
जाहिर है विधानसभा चुनाव को देखते हुए ममता सरकार हर क्रेडिट लेना चाहेगी। पर्यटन से न सिर्फ राज्य की आय बढ़ती है बल्कि आम नागरिक को काफी फायदा होता है। करीब 15 सालों से ममता बनर्जी ने पर्यटन के विकास के लिए कुछ खास नहीं किया। सांस्कृतिक तौर पर समृद्ध बंगाल को इन सालों में काफी फायदा पहुँचाया जा सकता था।

विजयादशमी पर CJI गवई की माँ ने दिखाई हिंदूघृणा, बताया सामाजिक चेतना को नुकसान पहुँचाने वाला त्योहार

     CJI बीआर गवई की माता ने RSS कार्यक्रम का निमंत्रण ठुकराते हुए पत्र लिखा ( फोटो साभार: NagpurToday)
महाराष्ट्र के अमरावती जिले में 5 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का एक कार्यक्रम होना है। यह कार्यक्रम विजयादशमी और संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाएगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई की माँ कमलताई गवई को भी इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था।

लेकिन कमलताई गवई ने निमंत्रण ठुकरा दिया है। खुद को ‘आंबेडकरवादी’ बताते हुए हिंदू विरोधी भावनाओं का इजहार भी किया है। संघ के कार्यक्रम में शामिल होने का दावा करने वाली मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए कमलताई गवई ने मराठी में एक पत्र लिखा है।

 पत्र में खुद को आंबेडकरवादी विचारधारा में ओत-प्रोत और भारतीय संविधान के प्रति प्रतिबद्ध बताया है। उन्होंने लिखा है कि वह किसी भी परिस्थिति में RSS के कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी। साथ ही कहा है कि किसी हिंदू त्यौहार के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने से ‘सामाजिक चेतना को नुकसान’ होगा।

कमलताई गवई ने पत्र में लिखा है, “महाराष्ट्र के अमरावती स्थित श्रीमती नरसम्मा महाविद्यालय मैदान में 5 अक्टूबर को शाम 6:30 बजे होने वाले RSS के विजयादशमी कार्यक्रम में मेरे शामिल होने के बारे में हाल ही में प्रकाशित खबरें पूरी तरह से झूठी हैं। आंबेडकरवादी विचारधारा से प्रेरित दादा साहेब गवई चैरिटेबल ट्रस्ट की संस्थापक अध्यक्ष और भारतीय संविधान के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के कारण मैं ऐसे किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होऊँगी या उसका समर्थन करूँगी। विश्वास दिलाती हूँ कि मैं किसी भी तरह से सामाजिक चेतना को कोई नुकसान नहीं पहुँचाऊँगी।”

कमलताई गवई ने कहा है कि विजयादशमी का हिंदू संस्कृति में महत्व है। लेकिन उनके जैसे बौद्धों के लिए ‘अशोक विजयादशमी’ या मौर्य सम्राट अशोक द्वारा कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपनाने और हिंसा का त्याग करना स्मरणोत्सव है। हालाँकि, यह उल्लेख करना जरूरी है कि इतिहासकारों का एक वर्ग और यहाँ तक कि पुरातात्विक साक्ष्य भी संकेत देते हैं कि अशोक का बौद्ध धर्म में परिवर्तन कलिंग युद्ध से पहले का है।

कमलताई गवई ने मीडिया में आई उन खबरों की कड़ी निंदा की और उन्हें ‘RSS का प्रोपेगेंडा’ बताया। जबकि ज्यादातर रिपोर्ट्स में सिर्फ इतना कहा गया था कि RSS ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की माता को अपने कार्यक्रम में आमंत्रित किया है, न कि उन्होंने उसमें शामिल होने की सहमति दी है।

उन्होंने कहा, “मैं महाराष्ट्र और पूरे भारत के लोगों से अपील करती हूँ कि इस बात पर ध्यान दें। विजयादशमी हिंदू संस्कृति में महत्वपूर्ण है लेकिन हमारे लिए धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस है, जिसे अशोक विजयादशमी भी कहा जाता है, जो कि सबसे ज्यादा मायने रखता है। मैं हाल ही में प्रकाशित खबरों को गलत जानकारी मानती हूँ और लोगों से आग्रह करती हूँ कि ऐसे सामाजिक दृष्टिकोण से भटकाने वाले प्रोपेगेंडा का शिकार न हों। मैं अपने सभी आंबेडकरवादी साथियों से कहती हूँ कि इस बात को समझें और मुझ पर भरोसा रखें। मेरी अनुमति या लिखित सहमति के बिना इस खबर को फैलाना RSS की साजिश है। मैं इस निमंत्रण को स्वीकार नहीं करती।”

कमलताई के दूसरे बेटे ने RSS कार्यक्रम में जाने का किया दावा

हालाँकि, कमलताई की तीखी प्रतिक्रिया के तुरंत बाद उनके दूसरे बेटे ने दावा किया कि वह RSS के कार्यक्रम में शामिल होंगी। रिपब्लिकन पार्टी के नेता और कमलताई के बेटे डॉ. राजेंद्र गवई ने एक वीडियो जारी कर कहा कि कमलताई RSS के कार्यक्रम में जरूर शामिल होंगी और उन्होंने खुद भी निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

दिवंगत पूर्व राज्यपाल आरएस गवई ने दीक्षाभूमि स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति के अध्यक्ष थे और उन्होंने इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके बेटे डॉ. राजेंद्र गवई वर्तमान में स्मारक समिति के सदस्य हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कमलताई गवई की शुरुआती प्रतिक्रिया कि वह RSS द्वारा आयोजित किसी भी कार्यक्रम या विजयादशमी जैसे हिंदू त्योहार मनाने वाले किसी भी कार्यक्रम में कभी शामिल नहीं होंगी- क्योंकि वह और उनका परिवार ‘आंबेडकरवादी विचारधारा’ और भारतीय संविधान के प्रति प्रतिबद्ध हैं- मानो भारतीय संविधान बौद्धों या ‘आंबेडकरवादियों’ को RSS के कार्यक्रमों में शामिल होने या हिंदू त्योहार मनाने से रोकता हो।

  1981 में RSS कार्यक्रम में शामिल आरएस गवई, साथ में भय्याजी सहस्रबुद्धे, बालासाहेब देवरस और बाबासाहेब पथाडे।

हालाँकि उनके दिवंगत पति रामकृष्ण सूर्यभान गवई, जिन्हें दादासाहेब गवई के नाम से भी जाना जाता है और जो रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के वरिष्ठ नेता थे। वे साल 1981 में नागपुर में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।

आरएस गवई, बाबासाहेब अंबेडकर के करीबी सहयोगी थे और नागपुर स्थित दीक्षाभूमि स्मारक समिति के अध्यक्ष भी रहे। साल 1998 में वे रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर अमरावती लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद 2006 से 2011 तक, जब केंद्र में कॉन्ग्रेस नेतृत्व वाली UPA सरकार थी। उस वक्त वे बिहार, सिक्किम और केरल के राज्यपाल रहे।

साल 2009 में केरल के राज्यपाल रहते हुए आरएस गवई ने मुख्यमंत्री अच्युतानंदन की अगुवाई वाली राज्य कैबिनेट की सिफारिश को दरकिनार कर दिया और CBI को कम्युनिस्ट नेता और वर्तमान में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ SNC-लावालिन भ्रष्टाचार मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी। उस समय केरल में कॉन्ग्रेस-UDF विपक्ष में थी। वहीं केंद्र की कॉन्ग्रेस नेतृत्व वाली UPA सरकार ने राज्यपाल गवई के इस फैसले का स्वागत किया।

CJI भूषण रामकृष्ण गवई ने खुद बताया कि उनके पिता दादासाहेब गवई कॉन्ग्रेस पार्टी से 40 साल से भी ज्यादा समय तक जुड़े रहे। वे कॉन्ग्रेसस के समर्थन से सांसद और विधायक भी रहे। CJI गवई के भाई राजेंद्र गवई, जो रिपब्लिकन पार्टी के नेता हैं, वे भी कॉन्ग्रेस से जुड़े हुए हैं।

इधर कमलताई गवई के पत्र ने विवाद खड़ा कर दिया। कुछ दिन पहले CJI बीआर गवई ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान भगवान विष्णु पर की गई टिप्पणी से देशभर में नाराजगी फैली। यह मामला 16 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ के सामने आया, जिसकी अध्यक्षता CJI गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह कर रहे थे।

याचिकाकर्ता राकेश दलाल, जो भगवान विष्णु के भक्त हैं, ने अदालत में कहा कि मूर्ति की पुनर्स्थापना सिर्फ पुरातत्व का मामला नहीं है बल्कि यह आस्था, सम्मान और हिंदुओं के अपने देवी-देवताओं की संपूर्ण रूप में पूजा करने के मूल अधिकार से जुड़ा है।

लेकिन CJI गवई ने इस याचिका को खारिज करते हुए हिंदू आस्था को लेकर कुछ अनावश्यक और तंज भरी बातें कह दीं। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ पब्लिसिटी के लिए दायर याचिका है। जाओ, अब खुद भगवान से कहो कि कुछ करें। तुम कहते हो कि भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हो तो जाओ और प्रार्थना करो।”

बिहार : तेजस्वी यादव की मुश्किलें और बढ़ीं, आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर महाराष्ट्र-यूपी में हुई FIR, चिराग पासवान का हमला


बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और RJD के नेता तेजस्वी यादव आने वाले विधानसभा चुनावों में संभावित हार के डर से अभी से बौखलाहट में हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पीएम मोदी को लेकर एक्स पर किए गए तेजस्वी के आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर और महाराष्ट्र में मुकदमे दर्ज हुए हैं। महाराष्ट्र में बीजेपी विधायक ने तेजस्वी यादव के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, तेजस्वी यादव के बिगड़े और अपमानजनक बोल के चलते उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में बीजेपी महानगर अध्यक्ष की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई है। इन शिकायतों में तेजस्वी यादव पर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और जनता की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है।

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में बीजेपी विधायक ने कराई एफआईआर
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर अधिकार यात्रा के बीच ही आरजेडी नेता तेजस्वी यादव अपने विवाद में उलझ गए हैं। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। गढ़चिरौली से बीजेपी विधायक मिलिंद रामजी नरोटे ने उनके खिलाफ ये शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया है। तेजस्वी यादव के खिलाफ दर्ज शिकायत में कहा गया है कि उन्होंने 22 अगस्त को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक पोस्ट किया है।

तेजस्वी यादव पर अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से विधायक मिलिंद रामजी नरोटे की शिकायत पर ये मामला दर्ज किया गया है। गढ़चिरौली थाने में धारा 196(1)(ए)(बी), 356(2)(3), 352, 353(2) के तहत ये मामला दर्ज किया गया है। बीजेपी विधायक ने थाने में शिकायत की कि तेजस्वी यादव ने शुक्रवार सुबह एक्स हैंडल से एक पोस्ट किया। आरोप है कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। इस पोस्ट में प्रधानमंत्री का कैरिकेचर भी लगा था। मामले में साक्ष्य के तौर पर पोस्ट की कॉपी संलग्न की गई है।

शाहजहांपुर सदर बाजार थाना में भी तेजस्वी के खिलाफ केस दर्ज
वहीं, उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के सदर बाजार थाने में तेजस्वी यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। बीजेपी महानगर अध्यक्ष शिल्पी गुप्ता ने पुलिस को शिकायत दी। शिकायत में कहा गया है कि आरजेडी के आधिकारिक X (पहले ट्विटर) हैंडल से एक पोस्ट किया गया था। यह पोस्ट शुक्रवार सुबह 6:58 बजे किया गया था। आरोप है कि इस पोस्ट में पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। पोस्ट में प्रधानमंत्री की तस्वीर भी लगाई गई थी। शिकायतकर्ता ने पोस्ट की कॉपी को मुकदमे में सबूत के तौर पर पेश किया है। शिकायतकर्ता शिल्पी ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ तेजस्वी यादव की अभद्र टिप्पणी से पूरा देश गुस्से में है। शिल्पी गुप्ता ने पुलिस से तेजस्वी यादव पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर पीएम का कैरिकैचर बना पोस्ट शेयर किया
दरअसल तेजस्वी यादव ने 22 अगस्त को पीएम के गया जी दौरे से पहले अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पीएम का कैरिकैचर बना एक पोस्ट शेयर किया था। इसमें बेहद अपमानजनक रूप में प्रधानमंत्री मोदी की गया जी की रैली को “बयानबाजी की दुकान” बताया गया था। रैली से पहले एक्स पर शेयर की गई इस पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी को एक दुकानदार के रूप में दिखाया गया था। तेजस्वी यादव ने पीएम मोदी से बिहार में एनडीए के 20 सालों के साथ-साथ अपने 11 सालों के शासन का भी हिसाब मांगा था।

तेजस्वी ने क्षेत्रवाद, जातिवाद, संप्रदायवाद की राजनीति की है- पासवान
प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान कांग्रेस और राजद पर जमकर बरसे। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा “यह सच है कि लंबे समय से कांग्रेस ने फूट डालो और राज करो की राजनीति अपनाई है। राजद की राजनीति में क्षेत्रवाद, जातिवाद, संप्रदायवाद और मुस्लिम-यादव समीकरण की बातें शामिल हैं, जबकि दूसरी ओर हमारी सरकार सभी के लिए समावेशी विकास की बात करती है। विभाजनकारी राजनीति करने वालों ने ही राज्य और देश को सबसे ज्यादा बर्बाद करने का काम किया है।

बांटो और राज करो की राजनीति करने वाले पहले अपने गिरेबां में झांकें
यह बात तो हकीकत है कि किस तरह से बांटो और राज करो की राजनीति लंबे समय तक आरजेडी और कांग्रेस ने अपनाने का काम किया। वहीं दूसरी तरफ हमारी सरकार है जो सबका साथ सबका विकास की बात करती है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को ऐसी ओछी टिप्पणी करने के पहले अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। पासवान ने घुसपैठियों पर भी प्रहार करते हुए कहा कि यह किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता कि कोई विदेशी नागरिक, जो हमारे देश का नागरिक नहीं है, अवैध रूप से भारत में प्रवेश करे और हमारे देश के संसाधनों पर अधिकार जताना शुरू कर दे, जिसपर सबसे पहले भारतीय नागरिकों का हक है। यह बिल्कुल अस्वीकार्य है।

मर्यादित आचरण करने तेजस्वी यादव की जिम्मेदारी – राजीव रंजन
जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन प्रसाद ने पूर्व मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ FIR पर कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोग संवैधानिक पदों पर बैठे राजनेताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं। यह लोकतंत्र है। भारत में न्यायपालिका की गरिमा सर्वोत्तम है, जिनकी भावनाएं आहत हुई हैं उन्हें FIR दर्ज करने का पूरा अधिकार है। तेजस्वी यादव की ज़िम्मेदारी है कि वे अपना जवाब दें और मर्यादित आरचण करें।

तेजस्वी-राहुल की यात्रा भी भाई तेजप्रताप से साधा निशाना
बिहार में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा शायद किसी अशुभ मुहूर्त में शुरू हुई है। इसीलिए उसके साथ कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है। एक तो इसमें उम्मीदों के मुताबिक भीड़ ना जुटने से यह यात्रा फुस्स बम साबित हो रही है, दूसरे वोटर अधिकार यात्रा के दौरान कांग्रेस और आरजेडी नेताओं ने एक पुलिसकर्मी और बॉडीगार्ड को गाड़ी से कुचल दिया। पहले तेजस्वी के भाई तेजप्रताप ने तंज करते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि मुझे समझ नहीं आ रहा है कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव लोकतंत्र बचाने के लिए निकले हैं या फिर लोकतंत्र को तार-तार करने निकले हैं। अब बीजेपी नेताओं ने इस यात्रा को सुपर फ्लॉप शो करार दे दिया है। उन्होंने कहा है कि जनता को अब भी कांग्रेस और राजद के भ्रष्टाचार और जंगलराज के दिन याद हैं, इसलिए अब यात्रा इस नौटंकी के कुछ भी होने वाला नहीं है।

आहत मल्लिकार्जुन खरगे बोले- दस लोगों को भी संबोधित करूंगा
विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और आजेडी को वोटर याद आ रहे हैं। इसीलिए अब वोटर अधिकार यात्रा निकाली है, 16 अगस्त सासाराम से शुरू हुई है और 1 सितंबर को पटना में समाप्त होगी। यात्रा का करीब एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद जिन वोटर्स के लिए यह यात्रा निकाली गई है, वो ही इसमें नहीं जुट पा रहे हैं। जोड़-तोड़ और धनबल के दम पर कुछ भीड़ जुटाई भी जाती है तो वह कार्यक्रम खत्म होने से पहले ही सभा से विदा ले लेती है। हालात यह हैं कि यात्रा की सासाराम की सभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को यहां तक कहना पड़ा कि ‘सुनना है तो सुनो, जिन्हें जाना है तो चले जाएं। नहीं तो 10 लोग रहेंगे तो भी मैं भाषण देता रहूंगा।’

‘भगवा आतंकवाद’ गढ़ने के लिए मालेगाँव ब्लास्ट में मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ को उठाने का दिया गया था आदेश: ATS जाँच से जुड़े अधिकारी मेहबूब मुजावर का खुलासा

          मालेगाँव केस में मोहन भागवत और योगी आदित्यानाथ को फँसाने की थी साजिश (फोटो साभार: आज तक)
मालेगाँव ब्लास्ट मामले की शुरुआती जाँच में शामिल रहे महाराष्ट्र ATS के रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर मेहबूब मुजावर ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उस वक्त उन्हें कुछ खास लोगों को गिरफ्तार करने के गुप्त आदेश दिए गए थे, जिनमें RSS प्रमुख मोहन भागवत का नाम भी शामिल था।

मुजावर के अनुसार, इन निर्देशों का मकसद ‘भगवा आतंकवाद’ की झूठी कहानी गढ़ना था। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि उन्हें राम कालसंगरा, संदीप डांगे, दिलीप पाटीदार और मोहन भागवत को पकड़ने को कहा गया था।

हालाँकि उन्होंने यह आदेश मानने से इंकार कर दिया। उनका कहना है कि मोहन भागवत जैसी बड़ी शख्सियत को बिना किसी ठोस वजह के पकड़ना उनके बस की बात नहीं थी। आदेश न मानने के बाद, उनके ऊपर आईपीएस अधिकारी परमवीर सिंह ने एक झूठा केस डाल दिया जिससे उनकी 40 साल की पुलिस सेवा खत्म हो गई।

मुजावर ने यह भी आरोप लगाया कि पूरी जाँच एक ‘फर्जी अफसर’ के नेतृत्व में हुई थी और जाँच का पूरा ढाँचा ही झूठ पर आधारित था। उन्होंने कोर्ट के हालिया फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इससे यह साबित हो गया है कि उस समय जो कुछ हुआ वह गलत था। अंत में उन्होंने साफ कहा कि कोई ‘भगवा आतंकवाद’ नहीं था, यह सब कुछ फर्जी था।

इससे पहले भी एक ऐसा ही खुलासा हुआ था, जिसमें पता चला था कि महाराष्ट्र ATS  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों को फँसाना चाहती थी। इसके लिए उसने मालेगाँव बम धमाकों के मामले में मुकदमे का सामना करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को भी प्रताड़ित किया था।

कर्नल पुरोहित ने मुंबई के एक कोर्ट को बताया था, “मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया जो किसी जानवर के साथ भी नहीं किया जाता। मेरे साथ युद्ध बंदी से भी बदतर व्यवहार किया गया। हेमंत करकरे, परमबीर सिंह और कर्नल श्रीवास्तव लगातार इस बात पर जोर देते रहे कि मैं मालेगाँव बम धमाके के लिए खुद को जिम्मेदार बता दूँ। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं RSS, VHP के वरिष्ठ नेताओं और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम लूँ। उन्होंने मुझे 3 नवम्बर, 2008 तक यातनाएँ दी।”

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 गौरतलब है कि 2008 के मालेगाँव ब्लास्ट मामले में NIA की विशेष अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी 7 आरोपितों को बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।