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जब सोनम वांगचुक को उठाकर ले गई दिल्ली पुलिस, तब ‘समलैंगिक’ प्रवक्ता के घर थे अभिजीत दिपके: अनीश गावंडे, शरद पवार की पार्टी से क्या है कनेक्शन?

  अभिजीत दिपके और NCP (SP) नेता सुप्रिया सुले के साथ गवांडे (फोटो साभार: Instagram/@anishgawande)
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक को हटाने की दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा की है। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरना स्थल से हटाया था। वह करीब 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। गावंडे ने लोगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की।

गावंडे ने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल से सोनम वांगचुक को हटाना दरअसल उनकी ‘गिरफ्तारी’ थी। उनका आरोप था कि पुलिस ने बिना कोई कारण बताए और बिना किसी लिखित आदेश के यह कार्रवाई की। हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाकर उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था।

इसके बाद गावंडे ने यह भी दावा किया कि पुलिस की यह कार्रवाई वांगचुक की सेहत की चिंता की वजह से नहीं की गई बल्कि इसका मकसद चल रहे प्रदर्शन को बाधित करना था।

अनीश गावंडे को किसी राजनीतिक दल का पहला खुले तौर पर समलैंगिक (ओपनली गे) प्रवक्ता बनाए जाने के कारण भी पहचान मिली थी। उन्होंने खुलकर CJP के प्रदर्शन का समर्थन किया है और उससे जुड़े रहे हैं। जब पुलिस सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटा रही थी, उसी दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके कपड़े बदलने के लिए गावंडे के घर गए हुए थे। इसी दौरान पुलिस ने दिपके को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था।   

गावंडे ने आरोप लगाया कि जब अभिजीत दिपके उनके घर की सीढ़ियों पर थे, तभी पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस की पिटाई के चलते दिपके जोर-जोर से चिल्ला रहे थे।

कौन है अनीश गावंडे?

मीडिया रिपोर्ट्स में मौजूद जानकारी के अनुसार, अनीश गावंडे स्वतंत्रता सेनानी, वकील और प्रसिद्ध शिक्षाविद टी. के. टोपे के परिवार से आते हैं। उनका पालन-पोषण मुंबई में हुआ। उन्होंने वर्ली के ग्रीनलॉन्स स्कूल और फोर्ट स्थित कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से तुलनात्मक साहित्य (Comparative Literature) की पढ़ाई की। बाद में रोड्स स्कॉलर (Rhodes Scholar) के रूप में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से बौद्धिक इतिहास (Intellectual History) और लोक नीति (Public Policy) में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की।

राजनीति में आने से पहले अनीश गावंडे LGBTQ+ अधिकारों के कार्यकर्ता और लेखक रहे हैं। उन्होंने पिंक लिस्ट इंडिया की भी स्थापना की जो LGBTQ+ अधिकारों का समर्थन करने वाले नेताओं का एक डेटाबेस है।

अपनी समलैंगिक (गे) पहचान सार्वजनिक करने के बाद गावंडे ने फ्रैंकोफोन पश्चिम अफ्रीका और सेनेगल की भाषाई राजनीति पर अध्ययन किया। उनका इरादा अकादमिक क्षेत्र में प्रोफेसर बनने का था। हालाँकि, 2018 में उन्हें भारत में एक चुनावी अभियान से जुड़ने का अवसर मिला, जिसके बाद उन्होंने राजनीति की ओर रुख किया। अगस्त 2024 में उन्हें एनसीपी (शरदचंद्र पवार) का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया।

गावंडे क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) के समर्थक हैं। उनका मानना है कि जाति आधारित आरक्षण के साथ-साथ खेल कोटा, महिलाओं और दिव्यांगों जैसी श्रेणियों के लिए भी क्षैतिज आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। उनका यह भी मानना है कि देश में भेदभाव की समस्या को दूर करने के लिए एक व्यापक भेदभाव-विरोधी कानून बनाया जाना चाहिए।

हाल ही में अनीश गावंडे ने खालिस्तानी प्रोपेगेंडा फिल्म ‘सतलुज’ का समर्थन किया था। यह फिल्म रिलीज के तुरंत बाद Zee5 ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दी गई थी। 

फिल्म के समर्थन में इंस्टाग्राम पर लिखी एक पोस्ट में गावंडे ने कहा था, “दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ जिसमें उन्होंने मानवाधिकार जांचकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाई है, भारतीय स्क्रीन पर केवल 48 घंटे ही रह सकी और फिर उसे ‘अगली सूचना तक’ चुपचाप हटा दिया गया। जिन लोगों को गायब कर दिया गया, उन पर बनी एक फिल्म भी गायब कर दी गई।”

राष्ट्रवाद का दम भरने वाली बीजेपी और शिवसेना की मौजूदगी में सना मलिक ने महाराष्ट्र विधानसभा में गूंज दिया ‘भारत में शरिया कानून और बहुविवाह…’ और ‘पाकिस्तान प्रेम’

       नवाब मलिक की बेटी सना मलिक ने भारत में शरिया कानून लागू करने की माँग की (फोटो साभार : Loksatta)
ये महाराष्ट्र ही नहीं पूरे देश के लिए डूब मरने की बात है जब अपने आपको राष्ट्रवादी बताने वाली बीजेपी और शिवसेना की मौजूदगी में विधायक सना मलिक ने शरिया, तीन तलाक और बहुविवाह की बात करते पाकिस्तान का उदाहरण दे दिया। सब चुप लेकिन अगर यही बात कांग्रेस या INDI गठबंधन के किसी विधायक ने बोल दी होती विधानसभा से लेकर सड़क तक हंगामा हो रहा होता। लेकिन यह मिसाल दी अजित पवार गुट की NCP की विधायक ने। क्या राष्ट्रवादी मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री में सना के विरुद्ध कार्यवाही करने की हिम्मत है? एक मुस्लिम महिला पत्रकार की बात याद आ जाती कि जब पूछा कि "गैर-मर्द के हमबिस्तर होने पर औरत पाक कैसे हो जाती है?" जवाब मिला "हलाला हमारा होता है और दर्द दूसरों को होता है।"      
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में NCP (अजीत पवार गुट) की विधायक सना मलिक के एक बयान पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने सदन में चर्चा के दौरान भारत में भी कुरान पर आधारित कानून लागू करने की माँग की। सना मलिक ने तीन तलाक और बहुविवाह (पॉलिगेमी) का जिक्र करते हुए पाकिस्तान का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान कुरान के नियमों को अपना कानून बना सकता है, तो भारत को भी ऐसा ही करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद बीजेपी विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया और सोशल मीडिया पर भी इसका विरोध हो रहा है।

कौन हैं सना मलिक? अब्बू का सियासी बैकग्राउंड

सना मलिक महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया और चर्चित चेहरा हैं। वह मुंबई के अणुशक्ति नगर विधानसभा क्षेत्र से साल 2024 में पहली बार विधायक चुनी गई हैं। सना मलिक वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मंत्री नवाब मलिक की बेटी हैं। नवाब मलिक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, जो बाद में मुंबई आकर राजनीति में सक्रिय हुए।

राजनीति में कदम रखने से पहले सना मलिक एक आर्किटेक्ट और वकील के तौर पर काम कर चुकी हैं। साल 2024 के चुनाव में नवाब मलिक ने अपनी सीट से बेटी सना को उम्मीदवार बनाया था। सना अपनी पार्टी में अल्पसंख्यक और मुस्लिम महिलाओं के मुद्दों पर काफी आक्रामक रुख रखती हैं।

विधानसभा में क्यों शुरू हुई बहुविवाह और तीन तलाक पर बहस?

विधानसभा सत्र के दौरान BJP विधायक देवयानी फरांडे ने तीन तलाक कानून को सख्ती से लागू करने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने सदन को बताया कि पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज भी प्रताड़ित किया जा रहा है। देवयानी ने इसके लिए पाकिस्तान का उदाहरण दिया था।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में दूसरे निकाह के लिए पहली बीवी की लिखित अनुमति और एक काउंसिल की मंजूरी जरूरी है। इसी सख्त नियम के कारण पाकिस्तान में बहुविवाह की दर सिर्फ एक प्रतिशत है। उन्होंने महाराष्ट्र में भी ऐसे ही कड़े कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) लाने की माँग की।

सना मलिक का विवादित तर्क और ‘पाकिस्तानी प्रेम’

BJP विधायक के बयान पर पलटवार करते हुए सना मलिक ने आक्रामक रुख अपना लिया। उन्होंने दलील दी कि बहुविवाह सिर्फ मुस्लिम समाज में नहीं होता, बल्कि हर धर्म में है। सना मलिक ने कहा कि पाकिस्तान ने कुछ नया नहीं किया, उसने सिर्फ कुरान में लिखे मुस्लिम पर्सनल लॉ को ही कानून का रूप दिया है।

सना मलिक ने आगे कहा, “हम इस्लाम में कुरान की शिक्षाओं को मानते हैं। अगर पाकिस्तान इसे लागू कर सकता है, तो भारत को भी कुरान पर आधारित कानून लाना चाहिए, हम इसकी माँग करते हैं।” उनके इस बयान को लोगों ने हिंदुओं और भारतीय व्यवस्था के खिलाफ एक कट्टरपंथी सोच माना।

BJP का करारा पलटवार: ‘देश संविधान से चलेगा, शरिया से नहीं’

सना मलिक के इस बयान पर BJP विधायक अतुल भातखलकर ने सदन में तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने दहाड़ते हुए कहा कि यह देश केवल भारत के संविधान से चलता है, किसी मजहबी ग्रंथ या कुरान से नहीं। उन्होंने साफ किया कि सदन में पाकिस्तान और शरिया की वकालत करने की कोई जरूरत नहीं है।

वहीं, महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने भी सना मलिक को सीधे जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी कानून किसी धर्मग्रंथ के आधार पर नहीं बनता। कानून समाज में हो रहे अन्याय को रोकने के लिए बनता है, किसी धर्म को निशाना बनाने के लिए नहीं।

नितेश राणे की दो टूक: ‘शरिया चाहिए तो पाकिस्तान चले जाओ’

इस विवाद के बाद महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और BJP नेता नितेश राणे ने सना मलिक पर बेहद तीखा हमला बोला। नितेश राणे ने कहा कि सना मलिक शायद भूल गई हैं कि वह एक हिंदू बहुसंख्यक देश में बैठी हैं। वह भारत की विधायक हैं, पाकिस्तान की संसद में नहीं बैठी हैं।

नितेश राणे ने साफ कहा कि हमारे देश के संविधान में ही समान नागरिक संहिता (UCC) का जिक्र है। जो लोग संविधान की दुहाई देते हैं, वे ही आज धर्म के नाम पर इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर किसी को भारत का कानून पसंद नहीं है और शरिया कानून ही चाहिए, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर पाकिस्तान चले जाना चाहिए।

चौतरफा घिरने के बाद सना मलिक ने दी सफाई

चारों तरफ से घिरने और सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल होने के बाद सना मलिक ने अपने बयान पर सफाई जारी की है। सना मलिक ने दावा किया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। सना ने कहा कि वह पाकिस्तान को कोई आदर्श नहीं मानती हैं।

उन्होंने सिर्फ देवयानी फरांडे के पाकिस्तान वाले संदर्भ पर जवाब दिया था। सना ने कहा कि भारतीय मुसलमान होने के नाते उनका पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है। भारत का संविधान उन्हें अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है और उन्होंने केवल मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बात रखी थी।

अय्याज ताज-अमीन शेख-हजरत मौलाना ने हिंदू महिला से किया रेप-धर्मांतरण का भी प्रयास, पीड़िता के चीखने-चिल्लाने का वीडियो वायरल


महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर के सोनेगाँव क्षेत्र से एक हिंदू विवाहित महिला के साथ दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण के दबाव का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में कलमेश्वर निवासी अय्याज ताज मदारे और आमीन शेख को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मध्य प्रदेश के तामिया निवासी हजरत मौलाना फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म, जबरन वसूली, धर्मांतरण के प्रयास और महाराष्ट्र अंधश्रद्धा एवं काला जादू प्रतिबंध कानून के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

नशीला पदार्थ देकर बनाया वीडियो

पीड़िता 24 वर्षीय विवाहित महिला है और प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करती है। उसका पति भारतीय वायुसेना में कार्यरत है और घटना के समय दूसरे शहर में तैनात था। शिकायत के मुताबिक, फरवरी 2025 में महिला के सहपाठी रहे अय्याज ने प्लॉट खरीदने के बहाने उससे संपर्क किया।

आरोप है कि वह महिला को वर्धा रोड स्थित एक होटल में ले गया, जहाँ उसे जूस में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया। महिला का कहना है कि बेहोशी की हालत में उसके साथ दुष्कर्म किया गया और इस दौरान उसके वीडियो व फोटो रिकॉर्ड किए गए।

शिकायत में कहा गया है कि बाद में इन्हीं वीडियो और तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देकर आरोपित ने लगातार उसका यौन शोषण किया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उससे 3 लाख 9 हजार रुपए भी वसूले गए।

मौलाना ने कहा- अब तुम्हारा धर्मांतरण हो चुका है

शिकायत के अनुसार, मामला केवल यौन शोषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिला पर धर्म बदलने का भी दबाव बनाया गया। महिला का आरोप है कि उससे विभिन्न मजहबी क्रियाएँ कराई गईं। इसी बीच एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें आरोपित महिला के साथ कलमा पढ़ता और उस पर फूँक मारता दिखाई दिया।
शिकायत के मुताबिक, 31 मई को आरोपित उसे नागपुर के कलमेश्वर इलाके में ले गया, जहाँ उसकी मुलाकात आमीन शेख और हजरत मौलाना से कराई। तीनों उसे एक सुनसान स्थान पर ले गए और कुछ मजहबी क्रियाएँ कर यह दावा किया कि उसका धर्मांतरण हो चुका है। इसके बाद उसके साथ दोबारा दुष्कर्म करने की कोशिश भी की गई।

पति के लौटने पर सामने आया मामला, वीडियो और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जाँच

 महिला का कहना है कि वह लंबे समय तक डर और दबाव में रही और किसी को पूरी घटना नहीं बता सकी। मामला तब सामने आया जब उसका पति तीन दिन पहले नौकरी से घर लौटा। इसके बाद महिला ने पूरी घटना पति को बताई और दोनों सोनेगाँव पुलिस थाने पहुँचे।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने दोनों को पाँच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब पीड़िता के मोबाइल चैट, बैंक लेनदेन, घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जाँच कर रही है।

बाँध में पानी घटते ही बाहर आया सदियों पुराना पांडवकालीन कांबरेश्वर मंदिर, रहस्यमई जलमग्न शिवलिंग है खास पहचान: जानें पुणे में क्यों उमड़े श्रद्धालु और क्या है इतिहास?

                                 सदियों पुराना पांडवकालीन कांबरेश्वर मंदिर (फोटो साभार: Eskal)
महाराष्ट्र के पुणे जिले के भोर तालुका में इन दिनों एक ऐसा दृश्य देखने को मिल रहा है, जिसने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। भाटघर बाँध का जलस्तर कम होते ही पानी के भीतर छिपा सदियों पुराना कांबरेश्वर मंदिर एक बार फिर दुनिया के सामने आ गया है। साल के अधिकांश महीनों तक पानी में डूबा रहने वाला यह मंदिर हर वर्ष कुछ समय के लिए ही दिखाई देता है।

यही वजह है कि इसे देखने के लिए श्रद्धालुओं, पर्यटकों, फोटोग्राफरों और इतिहास प्रेमियों की भीड़ उमड़ पड़ती है। यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला, इंजीनियरिंग और इतिहास का जीवंत उदाहरण भी माना जाता है।

पानी में वर्षों तक डूबे रहने के बावजूद इसका मजबूत ढाँचा आज भी लोगों को हैरान कर देता है। मंदिर की रहस्यमयी बनावट, पानी में स्थित शिवलिंग और इससे जुड़ी मान्यताएँ इसे और भी खास बना देती हैं।

कुछ महीने पहले News18 पर एंकर किशोर अजवाणी ने अपने शो आधी हकीकत आधा फ़साना में किसी राज्य में समुद्र में दो शिव मन्दिरों को दिखाया था जो 6 घंटे पानी से बाहर आते हैं और जब एक मन्दिर पानी से बाहर आता तो कुछ दूरी पर दूसरा मन्दिर समुद्र में जलमग्न हो जाता। जलमग्न होने पर मन्दिरों को किसी प्रकार की क्षति नहीं होती। सब भोलेनाथ का चमत्कार है।   

भाटघर बाँध का जलस्तर घटते ही सामने आया मंदिर

पुणे के भोर तालुका में स्थित ब्रिटिशकालीन भाटघर बाँध इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। बाँध में पानी का स्तर काफी नीचे पहुँच गया है, जिसके कारण इसके कैचमेंट एरिया में मौजूद कई हिस्से दिखाई देने लगे हैं। इन्हीं में सबसे प्रमुख है कांबरे गाँव का ऐतिहासिक कांबरेश्वर मंदिर।

वेलवंडी नदी पर बने इस मंदिर का अधिकांश हिस्सा हर साल मानसून के बाद पानी में डूब जाता है। जैसे-जैसे बारिश का पानी बढ़ता है, मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो जाता है और कई महीनों तक दिखाई नहीं देता। गर्मियों के मौसम में जब बाँध का जलस्तर घटता है, तब धीरे-धीरे मंदिर का शिखर नजर आने लगता है और फिर पूरा मंदिर सामने आ जाता है।

                                                                                                                                 साभार: NDTV

स्थानीय लोगों के अनुसार, मई के आखिर और जून की शुरुआत में यह मंदिर सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यही समय होता है जब बड़ी संख्या में लोग यहाँ पहुँचते हैं। ग्रामीण हर साल मंदिर की सफाई करते हैं और वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर को खोला जाता है।

अंग्रेजों के बाँध निर्माण के बाद पानी में समा गया मंदिर

कांबरेश्वर मंदिर की कहानी केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक भी है। बताया जाता है कि वर्ष 1928 में अंग्रेजों ने लॉयड डैम यानी आज के भाटघर बाँध का निर्माण कराया था। बाँध बनने के बाद आसपास का बड़ा क्षेत्र जलमग्न हो गया। कांबरे गाँव को दूसरी जगह बसाना पड़ा, लेकिन मंदिर को वहीं छोड़ दिया गया।

तब से हर वर्ष मानसून के दौरान यह मंदिर पानी में डूब जाता है और गर्मियों में फिर बाहर दिखाई देता है। दशकों से यही क्रम जारी है। समय के साथ यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए केवल पूजा का स्थान नहीं रहा, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और विरासत का प्रतीक बन गया है।

इतिहासकारों का मानना है कि यह मंदिर बेहद प्राचीन है। स्थानीय लोग इसे पांडव काल से जोड़ते हैं और मानते हैं कि इसका निर्माण महाभारत काल में हुआ था। हालाँकि कई इतिहास विशेषज्ञ इसे हेमाडपंती शैली का मंदिर मानते हैं।

मंदिर की बनावट, पत्थरों की संरचना और निर्माण शैली इस बात की ओर इशारा करती है कि इसे मध्यकालीन भारतीय स्थापत्य शैली में तैयार किया गया होगा।

मंदिर की बनावट आज भी इंजीनियरों को करती है हैरान

कांबरेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूती है। वर्षों तक पानी में डूबे रहने के बावजूद यह मंदिर आज भी मजबूती से खड़ा है। लगातार पानी की लहरों, गाद और मौसम के प्रभाव के बाद भी इसकी मुख्य संरचना सुरक्षित दिखाई देती है।

मंदिर की दीवारों को बड़े-बड़े तराशे हुए पत्थरों से बनाया गया है। पत्थरों को बिना आधुनिक तकनीक के इतनी मजबूती से जोड़ा गया कि सदियों बाद भी उनका संतुलन बना हुआ है। मंदिर के शिखर और ऊपरी हिस्से में चूना पत्थर, रेत और पकी हुई ईंटों का उपयोग किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उस समय की निर्माण तकनीक बेहद उन्नत थी। यही कारण है कि लगातार पानी में रहने के बावजूद मंदिर पूरी तरह क्षतिग्रस्त नहीं हुआ। हालाँकि समय के साथ कुछ हिस्सों में टूट-फूट जरूर हुई है, लेकिन इसकी नींव और मुख्य ढाँचा अब भी मजबूत दिखाई देता है।

मंदिर को देखने के लिए हर साल आर्किटेक्चर के छात्र, इंजीनियर, शोधकर्ता और इतिहासकार यहाँ पहुँचते हैं। उनके लिए यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग का मास्टरपीस है।

पानी से भरा गर्भगृह और रहस्यमयी शिवलिंग

कांबरेश्वर मंदिर का गर्भगृह इसे और भी रहस्यमयी बना देता है। मंदिर पूरी तरह बाहर आने के बाद भी इसके भीतर घुटनों तक पानी भरा रहता है। इसी पानी के बीच भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है।

श्रद्धालु मंदिर के अंदर जाकर पानी में हाथ डालकर शिवलिंग को स्पर्श करते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं। भक्तों के लिए यह अनुभव बेहद भावुक और आध्यात्मिक माना जाता है। मंदिर में माता पार्वती और नंदी महाराज की प्रतिमाएँ भी मौजूद हैं।

                                                                                                                                 साभार: NDTV

पहले मंदिर तक पहुँचने के लिए पाँच सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती थीं, लेकिन हर साल जमा होने वाली मिट्टी और गाद के कारण अब वे सीढ़ियाँ दब चुकी हैं। गाँव वाले हर वर्ष मंदिर से गाद हटाने और सफाई करने का काम करते हैं ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन में परेशानी न हो।

मंदिर के सामने नंदी की प्रतिमा और एक खुला आँगन है। यहाँ वीरगळ यानी शहीद योद्धाओं की स्मृति में बनाई गई पत्थर की शिलाएँ भी मौजूद हैं, जो इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ाती हैं।

पर्यटन, आस्था और इतिहास का अनोखा संगम बना मंदिर

कांबरेश्वर मंदिर अब केवल स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं रह गया है। हर साल जब यह पानी से बाहर आता है, तब दूर-दूर से लोग इसे देखने पहुँचते हैं। सुबह और शाम के समय मंदिर और वेलवंडी नदी का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के दौरान यहाँ का नजारा पर्यटकों और फोटोग्राफरों के लिए खास आकर्षण बन जाता है।

स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत लोगों से मंदिर की पवित्रता बनाए रखने की अपील भी करते हैं। गाँव वालों का कहना है कि यह केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि उनकी आस्था और परंपरा का केंद्र है। इसलिए यहाँ आने वाले लोगों को धार्मिक मर्यादा और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए।

ग्रामीणों ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर तक पहुँचने वाले रास्ते को भी सुरक्षित बनाया है। हर साल मंदिर खुलने के बाद यहाँ पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हजारों श्रद्धालु पानी में मौजूद शिवलिंग के दर्शन के लिए यहाँ पहुँचते हैं।

सदियों पुरानी विरासत की जीवित मिसाल है कांबरेश्वर मंदिर

कांबरेश्वर मंदिर आज भी इस बात का प्रमाण है कि भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला कितनी उन्नत और टिकाऊ थी। पानी में वर्षों तक डूबे रहने के बावजूद इसका अस्तित्व बना रहना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता। हर साल कुछ दिनों के लिए पानी से बाहर आने वाला यह मंदिर मानो समय के भीतर छिपी एक कहानी को फिर से जीवित कर देता है।

भोर तालुका का यह प्राचीन शिव मंदिर आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है और यह साबित करता है कि भारत की ऐतिहासिक धरोहरें केवल पत्थरों की इमारतें नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सभ्यता और संस्कृति की जीवित पहचान हैं।

TCS नासिक कांड : 25 दिनों से फरार निदा खान को महाराष्ट्र पुलिस ने संभाजी नगर से गिरफ्तार किया; कोर्ट से नहीं मिली जमानत

दंगाई हों, बलात्कारी हों, पत्थरबाज हों या फिर मजहब बदलने वाले/वाली हो भांडा फूटने पर छिपे-छिपे फिरते है, क्यों? अदालतों को चाहिए कि इन उपद्रवियों को तलाशने में जो खर्चा हुआ है उसकी वसूली करनी चाहिए। इन उपद्रवियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं छीन लेनी चाहिए।        
TCS धर्मांतरण मामले में फरार चल रही आरोपित निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नासिक पुलिस की विशेष जाँच टीम (SIT) ने करीब 25 दिनों तक तलाशी अभियान चलाने के बाद उसे गुरुवार (7 मई 2026) को छत्रपति संभाजीनगर से पकड़ा।

पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार, गिरफ्तारी स्थानीय पुलिस की मदद से की गई। मामले में पहले ही कई प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं और अब तक आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गौरतलब है कि TCS से जुड़े BPO यूनिट के भीतर मुस्लिम कर्मचारियों द्वारा संगठित तरीके से हिंदू महिला कर्मचारियों का शोषण किए जाने के आरोप सामने आए थे।

पीड़िताओं ने यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव, धार्मिक भावनाएँ आहत करने और धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं निदा खान महिलाओं को हिजाब और बुर्का पहनने, इस्लामी तौर-तरीके अपनाने और मजहबी सामग्री देखने के लिए प्रेरित करती थी।

जाँच में यह भी सामने आया कि पीड़िता को कुछ मोबाइल एप और मजहबी कंटेंट भेजे गए थे और उसका नाम बदलने की योजना तक बनाई जा रही थी।

कोर्ट से नहीं मिली राहत, SIT ने बताए कई अहम लिंक

गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने नासिक कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। उसने कोर्ट को बताया था कि वह गर्भवती है और मुंबई में रह रही है, इसलिए उसे गिरफ्तारी से राहत दी जाए। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि महाराष्ट्र में अलग से कोई धर्मांतरण विरोधी कानून लागू नहीं है और जबरन धर्मांतरण के आरोप बेबुनियाद हैं।

हालाँकि कोर्ट ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मामले में डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और कई संवेदनशील जानकारियाँ सामने आई हैं, इसलिए आरोपित से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

SIT ने कोर्ट को यह भी बताया कि जाँच का दायरा नासिक से आगे बढ़कर मालेगाँव और यहाँ तक कि मलेशिया तक पहुँच गया है। जाँच एजेंसियों को शक है कि विदेश में नौकरी के अवसरों का इस्तेमाल कथित तौर पर लालच देने के लिए किया गया हो सकता है।

कई धाराओं में केस दर्ज, लगातार बदल रही थी ठिकाने

पुलिस के अनुसार प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही निदा खान फरार चल रही थी और उसके मोबाइल फोन समेत कुछ रिश्तेदारों के फोन भी बंद पाए गए थे। पुलिस ने उसके शौहर से पूछताछ के बाद कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन हर बार पुलिस को बंद मकान ही मिले। इसके बाद राज्यभर में तलाश अभियान तेज किया गया।

मामले में निदा खान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की यौन उत्पीड़न, मानहानि और धार्मिक भावनाएँ आहत करने से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। चूँकि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से है, इसलिए उसके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएँ भी लगाई गई हैं।

कांग्रेस की ‘टुच्ची’ सोच : रेप हो रहा है तो लेटकर मजे लो,… क्यों हर बार पीड़िताओं को ही ‘गुनहगार’ बताते हैं कांग्रेस नेता?

                                    क्यों हर बार पीड़िताओं को ही ‘गुनहगार’ बताते हैं कांग्रेस नेता?
महाराष्ट्र में अमरावती जिले से सामने आया मामला समाज की कई परतों को उजागर करता है। एक तरफ जहाँ मुस्लिम युवक मोहम्मद अयान अहमद तनवीर ने 180 लड़कियों को अपने जाल में फँसाया, उनके साथ 350 से ज्यादा अश्लील वीडियो बनाए और इनमें से 100 वीडियो वायरल भी कर दिए। दूसरी तरफ कांग्रेस है, जो ऐसे गंभीर मामलों में पीड़िताओं को कठघरे में खड़ा करने से बाज नहीं आती।

इस पूरे मामले में कांग्रेस की ‘टुच्ची’ सोच को पूरी तरह उजागर करते कांग्रेस नेत्री यशोमती चंद्रकांत ठाकुर का पीड़िताओं पर सवाल उठाते बयान सामने आया है। उन्होंने उन पीड़िताओं को लेक्चर दिया- “लड़कियों में अक्ल नहीं है क्या? क्या लड़कियों ने अपनी बुद्धि खो दी है?”

दिलचस्प बात यह है कि यशोमती ठाकुर 2019 से 2022 तक कांग्रेस और शिवसेना के गठबंधन वाली सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं। यानी जिस पद पर रहते हुए यशोमती ठाकुर से महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान की आस थी, वही कांग्रेस नेता आज पीड़ित लड़कियों पर सवाल उठा रही है।

सीधी बात है कि ये सिर्फ एक बयान नहीं है, ये कांग्रेस पार्टी की मानसिकता है। ये वही सोच है जो हर बार रेप, छेड़छाड़ या यौन शोषण के मामलों में अपराधी पर सवाल उठाने के बजाए लड़कियों को ही नसीहत देने लगती है। कभी उनके कपड़ों पर, कभी उनकी समझ पर, कभी उनके फैसलों पर। हर बार राजनीतिक बयानबाजी में निशाना पीड़िता ही बनती हैं।

और ये पहली बार नहीं हुआ है। कांग्रेस के नेताओं का ट्रैक रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए, ऐसे बयान बार-बार सामने आते हैं। कर्नाटक विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर केआर रमेश कुमार का वो शर्मनाक बयान कौन भूल सकता है- “जब रेप होना ही है, तो लेटो और मजे लो।” यही नहीं कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया खुलेआम कहते हैं- “खूबसूरत लड़की दिख जाए तो दिमाग विचलित हो जाता है।” केरल कांग्रेस के नेता मुल्लापल्ली रामचंद्रन तो इससे भी आगे निकल जाते हैं और कहते हैं- “जिस लड़की का रेप हो, उसे आत्महत्या कर लेनी चाहिए।” वहीं अमरगौड़ा पाटिल जैसे नेता तो रेप पीड़िता के परिवार को ही झूठा करार देने लगते हैं।

ये कोई एक-दो फिसलती जुबान के उदाहरण नहीं हैं, ये उसी पुरानी, टुच्ची और गैर-जिम्मेदार सोच की झलक है जो अंदर तक बैठी हुई है।

और बात यहीं खत्म नहीं होती। जब राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी हाथरस की पीड़िता से मिलने जाते हैं, तब जो वीडियो सामने आई, उसने भी बहुत कुछ साफ कर दिया। जिस वक्त पूरे देश में गुस्सा और संवेदना का माहौल था, उस समय दोनों भाई-बहन का कार में हँसी-मजाक करते हुए जाना ये दिखाता है कि गंभीरता कितनी है। साफ है, ये सिर्फ अलग-अलग नेताओं की गलती नहीं है।

सबसे खतरनाक बात ये है कि इस तरह के बयान सीधे-सीधे अपराधियों को राहत देते हैं। जब देश की एक पार्टी के नेता ही पीड़ितों को दोष देने लगेंगे, तो अपराधियों का हौसला क्यों नहीं बढ़ेगा? उन्हें तो यही लगेगा कि गलती उनकी नहीं, बल्कि लड़कियों की ही है।

आखिर में साफ शब्दों में कहें तो कांग्रेस की समस्या बयान नहीं, पूरी सोच है। बार-बार वही गिरी हुई बातें, वही पीड़ितों को कठघरे में खड़ा करने की आदत ये दिखाती है कि ये कोई गलती नहीं बल्कि जड़ जमा चुकी मानसिकता है। जिस पार्टी के नेताओं को रेप जैसे गंभीर अपराध में भी संवेदनशीलता नहीं दिखती, वो महिलाओं की सुरक्षा की बात करें, ये खुद एक मजाक लगता है। सच यही है कि कांग्रेस के लिए ऐसे मुद्दे गंभीर नहीं, सिर्फ राजनीति का सामान है। और जब तक ये सोच नहीं बदलेगी, तब तक इनके बयान भी ऐसे ही जहरीले और शर्मनाक आते रहेंगे।

शरीयत लाने वाले क्यों छिपकर संविधान की शरण में आ रहे हैं? नासिक TCS कांड में फरार निदा खान ने कोर्ट में दायर की जमानत याचिका: हिंदू लड़कियों को बुर्का पहनाना सिखाती थी, तौसीफ का हिंदू कर्मी को मजहबी टोपी पहनाने का Video आया सामने

आरोपित और फरार HR मैनेजर निदा खान, हिंदू कर्मचारी को मजहबी टोपी पहनाता तौसीफ (साभार: जनसत्ता, एक्स @IndiaToday)
नासिक के टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट से हिंदू महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले में नया मोड़ सामने आया। इस मामले की मुख्य आरोपित और फरार निदा खान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए नासिक की कोर्ट में अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) याचिका दायर की है। कई खबरों में निदा खान को कंपनी की HR मैनेजर भी बताया जा रहा था।

भारत में शरीयत लाकर गज़वा-ए-हिन्द बनाने वाले भांडा फूटने पर उस भारतीय संविधान से न्याय की गुहार क्यों लगाने छिपे-छिपे फिर रहे हैं? जब ये लोग अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरते फिर किस से डर कर छिप रहे हो? हर मुसलमान को ऐसे भड़काऊ लोगों से इस सवाल का जवाब मांग इनके भड़काऊ मंसूबों को बेनकाब करना होगा। इन्ही भड़काऊ लोगों ने इस्लाम को बदनाम जहर फ़ैलाने का काम कर रहे हैं। फिर अपने-आपको गरीब, मजलूम आदि बताकर victim card खेल जनता और कानून की आँखों में धूल झोंकते हैं।           

मामले के सामने आने के बाद से ही फरार चल रही खान ने अब अपने वकीलों से दोबारा संपर्क किया, जबकि SIT लगातार उसकी तलाश में कर रही है। इस पूरे मामले में अब तक 9 हिंदू पीड़ितों की FIR दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस अब तक सात पुरुषों और एक महिला समेत कुल 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि निदा खान अब भी फरार है।

निदा खान आंतरिक POSH कमेटी का हिस्सा थी और आरोप है कि उसने शिकायतों को दबाया और पीड़िताओं को कार्रवाई से हतोत्साहित किया। निदा खान दफ्तर की हिंदू लड़कियों को बुर्का पहनाना सिखाती थी। SIT की जाँच में यह भी सामने आया है कि HR विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 70 से अधिक शिकायतों को नजरअंदाज किया गया।

डिजिटल साक्ष्य खंगालने में जुटी एजेंसियाँ, बढ़ सकती है जाँच का दायरा

पीड़िताओं का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और निदा खान ने उन्हें शिकायतें वापस लेने के लिए दबाव डाला। अब जाँच एजेंसियाँ ईमेल, कॉल रिकॉर्ड और चैट जैसे डिजिटल साक्ष्यों की गहन जाँच कर रही हैं, ताकि आरोपितों के बीच समन्वय और संभावित वित्तीय लेन-देन का पता लगाया जा सके।

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नासिक के अशोका मार्ग पर स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट से हिंदू महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत.....

इस मामले में आरोपित तौसीफ का वो Video मिला, जिसमें वह हिंदू कर्मचारी को मजहबी टोपी पहना रहा है। पीड़ित का कहना है कि 2023 में ईद के मौके पर उसे जबरदस्ती तौसीफ के घर ले जाया गया, जहाँ जबरन उसे मजहबी टोपी पहनाई गई, नमाज और कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए ATS और NIA जैसी एजेंसियों से भी संपर्क किया गया है, जिससे जाँच का दायरा और बढ़ सकता है। 

अजित पवार के विमान हादसे की आँखों देखी, शोक और शंकाओं के बीच जाँच शुरू : भीषण धमाके, आग की लपटें और सब खाक


महाराष्ट्र के लिए बुधवार (28 जनवरी 2026) का दिन एक दर्दनाक और स्तब्ध कर देने वाली घटना लेकर आया। महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार की विमान हादसे में मौत की खबर ने देशभर में लोगों को स्तब्ध कर दिया। मुंबई से बारामती जाते समय जिस विमान में वह सवार थे, वह लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। खेतों में गिरे इस विमान में गिरते ही आग लग गई और कुछ ही पलों में वह पूरी तरह जलकर खाक हो गया। इस हादसे में विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई।

मुंबई से बारामती जा रहे थे अजित पवार

बुधवार को महाराष्ट्र के अजित पवार मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुए थे। बारामती पहुँचकर उन्हें चुनाव प्रचार से जुड़े 4-5 कार्यक्रमों में शामिल होना था और जनसभाओं को संबोधित करना था। इसी सिलसिले में उन्होंने चार्टर विमान से यात्रा की थी। यह विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग की तैयारी में था लेकिन हवाई पट्टी तक पहुँचने से पहले ही हादसे का शिकार हो गया। बताया जा रहा है कि दुर्घटना स्थल रनवे से करीब तीन किलोमीटर पहले का इलाका था, जो खेतों और ग्रामीण क्षेत्र से घिरा हुआ है।

लैंडिंग के दौरान बिगड़ा संतुलन

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान जैसे ही नीचे उतरना शुरू हुआ, उसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ता नजर आया। स्थानीय लोगों ने बताया कि विमान लैंडिंग की कोशिश में लड़खड़ा रहा था और कुछ सेकंड तक ऐसा लग रहा था कि वह सुरक्षित उतर जाएगा लेकिन पल भर में स्थिति बदल गई। देखते ही देखते विमान हवाई पट्टी से भटक गया और पास के खेतों की ओर जा गिरा। गिरते ही तेज आवाज हुई और आग की लपटें उठने लगीं।

लैंडिंग की दूसरी कोशिश में हादसा

लाइव फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Flightradar24 से मिले डेटा के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त लियरजेट 45 (VT-SSK) विमान बारामती एयरपोर्ट पर उतरने की दूसरी कोशिश कर रहा था। जानकारी के अनुसार, पायलट ने पहली बार लैंडिंग का प्रयास किया लेकिन किसी कारणवश वह सफल नहीं हो सका। इसके बाद विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाकर रनवे पर उतारने की कोशिश की गई। एविएशन की भाषा में इस प्रक्रिया को गो-अराउंड कहा जाता है। दुर्भाग्यवश, दूसरी कोशिश के दौरान विमान नियंत्रण खो बैठा और जमीन पर गिर गया, जिससे यह हादसा हो गया।
                                                  Flightradar24 का डेटा

विमान क्रैश के बाद हुए 4-5 धमाके

हादसे के चश्मदीदों का कहना है कि विमान जमीन से टकराते ही उसमें आग लग गई। खेतों में गिरते ही विमान पूरी तरह आग की चपेट में आ गया। चारों ओर धुआँ फैल गया और कुछ ही क्षणों में आग ने विकराल रूप ले लिया। मलबे से उठती लपटें और तेज धमाकों की आवाज सुनकर आसपास के गाँवों से लोग मौके की ओर दौड़ पड़े।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विमान के क्रैश होने के तुरंत बाद 4-5 जोरदार धमाके हुए। हादसे के बाद विमान आग का गोला बन गया और लगातार विस्फोटों की आवाज आती रही। लोगों का कहना है कि धमाकों के कारण कोई भी व्यक्ति विमान के नजदीक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। आग की लपटें इतनी ऊँची थीं कि दूर से ही यह साफ नजर आ रहा था कि विमान पूरी तरह नष्ट हो चुका है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया?

मौके पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने अपनी आँखों से विमान को नीचे आते देखा। उसके अनुसार, विमान जब उतर रहा था तो ऐसा लग रहा था कि वह किसी भी क्षण गिर सकता है। कुछ ही सेकंड में वही हुआ और विमान खेतों की ओर जा गिरा। पहले किसी को अंदाजा नहीं था कि यह किसका विमान है। लोगों को लगा कि पास मौजूद पायलट ट्रेनिंग सेंटर का कोई विमान होगा। बाद में जानकारी मिली कि यह विमान महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता को लेकर आ रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान गिरने से पहले काफी अस्थिर दिखाई दे रहा था और फिर करीब 200 फीट गहरी खाई की ओर जा गिरा। इसके बाद विस्फोट हुए और आग तेजी से फैल गई।

आग के कारण नहीं हो सकी मदद

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग मदद के लिए मौके पर पहुँचे। लोगों ने विमान से यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश भी की लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई भी पास नहीं जा सका। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग और धमाकों के कारण हालात बेहद भयावह थे। कई लोगों की आँखों के सामने यह हादसा हुआ और वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सके। घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ ही देर में वहाँ भीड़ जमा हो गई।

उस विमान की कहानी जिसमें सवार थे अजित पवार

जिस विमान में अजित पवार सवार थे, वह VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित और VT-SSK के रूप में पंजीकृत Learjet 45XR था। यह कंपनी भारत की प्रमुख नॉन-शेड्यूल्ड यानी चार्टर विमान ऑपरेटिंग कंपनियों में से एक है। Learjet 45XR एक हाई-परफॉर्मेंस सुपर-लाइट बिजनेस जेट है, जिसे तेज रफ्तार, बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी और ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता के लिए जाना जाता है। यह विमान आमतौर पर शॉर्ट और मीडियम रूट्स की उड़ानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
Learjet 45XR का विंगस्पैन करीब 47 फीट बताया जाता है और इसका वजन लगभग 9,752 किलोग्राम है। यह विमान 1990 के दशक में डिजाइन किया गया था और इसे सुपर-लाइट बिजनेस जेट कैटेगरी में Cessna Citation Excel के विकल्प के तौर पर पेश किया गया था। इस विमान के केबिन में खड़े होने की जगह नहीं होती लेकिन Learjet सीरीज की पहचान हमेशा हाई-स्पीड परफॉर्मेंस रही है। इसी वजह से इसे बिजनेस और चार्टर फ्लाइट्स के लिए पसंद किया जाता रहा है।
VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना वीके सिंह द्वारा की गई थी और कंपनी का मालिकाना हक भी उनके पास है। यह कंपनी प्राइवेट जेट चार्टर, हेलिकॉप्टर रेंटल, मेडिकल इवैकुएशन यानी एयर एम्बुलेंस और एयरक्राफ्ट लीजिंग जैसी सेवाएँ देती है। कंपनी की फ्लीट में Learjet 45XR के अलावा Beechcraft Super King Air B200 और Agusta 109 हेलिकॉप्टर जैसे विमान भी शामिल हैं। इसका हेड ऑफिस नई दिल्ली के महिपालपुर में स्थित है और कंपनी एंड-टू-एंड एविएशन कंसल्टेंसी और एयरक्राफ्ट मैनेजमेंट सेवाएँ भी देती है।

शोक और शंकाएँ

अजित पवार के निधन पर देश भर में शोक की लहर दौड़ गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लेकर प्रधानमंत्री मोदी और तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों, नेताओं और अन्य हस्तियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। हालाँकि, शोक के बीच इस हादसे को लेकर संदेह भी जताया जा रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई नेताओं ने इस हादसे की जाँच की माँग की है। हादसे की जाँच करने की माँग करने वाले लोगों में अजित पवार के साथी और महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सपा के नेता एसटी हसन भी शामिल हैं।
ममता बनर्जी ने कहा, “यहाँ नेता भी सुरक्षित नहीं हैं। मुझे नहीं पता क्या दिक्कत है। मुझे पता चला था कि वो बीजेपी की सरकार का नेतृत्व करने वाले हैं और आज अचानक उनका निधन हो गया। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सही जाँच होनी चाहिए। क्या यह बेवजह डर फैलाना है या कोई साजिश।”

हादसे के कारणों की होगी जाँच

फिलहाल इस भीषण विमान हादसे के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। शुरुआती तौर पर यह कहा जा रहा है कि लैंडिंग के दौरान विमान का कंट्रोल बिगड़ गया था। वहीं, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया है कि दुर्घटना स्थल का निरीक्षण करने और जाँच शुरू करने के लिए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की टीम बारामती के लिए रवाना हो गई है और इस हादसे की जाँच करेगी।

महाराष्ट्र : यवतमाल में जन्म प्रमाणपत्र घोटाला, 1500 आबादी वाले छोटे से गाँव में बने 27000+ जन्म सर्टिफिकेट

          पूर्व भाजपा सांसद किरीट सोमैया (साभार - द हिंदू/विवेक बेंद्रे और https://zpyavatmal.gov.in/)
महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के ग्रामीण इलाके में जन्म पंजीकरण से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। जिले की अरनी तहसील की शेंदुरसानी ग्राम पंचायत में सिर्फ तीन महीनों (सितंबर से नवंबर) के भीतर सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) में 1,500 की आबादी वाले गाँव में 27,397 जन्म दर्ज किए गए।

यह गंभीर अनियमितता 24 नवंबर 2025 को सामने आई। इसके बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) की शिकायत पर मंगलवार (16 दिसंबर 2025) को यवतमाल सिटी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।

FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 337, 336(3), 304(2) और IT एक्ट की धारा 65 व 66 के तहत दर्ज की गई है। पुलिस निरीक्षक नंदकिशोर काले ने बताया कि शेंदुरसानी गाँव में जन्म पंजीकरण में गड़बड़ी की शिकायत मिली है और मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

पूर्व भाजपा सांसद किरिट सोमैया ने बुधवार (17 दिसंबर 2025) को गाँव का दौरा किया और इस मामले की गहन जाँच की माँग की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने अंदाजा लगाया की ग्राम पंचायत के कंप्यूटर ऑपरेटर की लॉग-इन ID और पासवर्ड का किसी ने गलत इस्तेमाल किया हो सकता है, जिसके जरिए जन्म पंजीकरण में इतनी बड़ी गड़बड़ी की गई।

एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि शक है कि हजारों बांग्लादेशी इसके फायदेमंद हैं। उन्होंने इस मामले में SIT जाँच की माँग की है।

उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड में दर्ज ज्यादातर नाम पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के लोगों के हैं। किरिट सोमैया ने कहा, “मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात की है और इन सभी फर्जी जन्म पंजीकरण प्रविष्टियों को रद्द करने की माँग की है।” उन्होंने यह भी बताया कि शेंदुरसानी ग्राम पंचायत की CRS ID (MH18241RE) मुंबई में मैप पाई गई है, जिससे साइबर धोखाधड़ी की आशंका और भी मजबूत हो गई है।

राज्य सरकार के निर्देश पर मंगलवर (16 दिसंबर 2025) को ग्राम पंचायत में अवैध और देरी से किए गए जन्म-मृत्यु पंजीकरण के जाँच अभियान को शुरू किया गया। इस दौरान अरनी के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पाया कि सितंबर से नवंबर 2025 के बीच CRS सॉफ्टवेयर में 27,397 जन्म और 7 मृत्यु के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं, जो गाँव की वास्तविक आबादी के मुकाबले बिल्कुल असामान्य और संदिग्ध थे।

इसके बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) ने इस गड़बड़ी की जानकारी जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मंदर पाटकी को दी। CEO ने मामले की जाँच के लिए पंचायत विभाग के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में एक जाँच समिति गठित की। समिति ने गाँव में मौके पर जाकर जाँच की, जिसमें सामने आया कि 27,397 जन्म और 7 मृत्यु के रिकॉर्ड ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र से बाहर के हैं और इन्हें बहुत ही संदिग्ध माना गया।

इसके बाद पुणे के उप स्वास्थ्य सेवा संचालक द्वारा तकनीकी जाँच शुरू की गई। राज्य के लॉग-इन सिस्टम के माध्यम से की गई इस जाँच में सामने आया कि शेंदुरसानी ग्राम पंचायत की CRS ID मुंबई से मैप की गई थी। इसके बाद मामला नई दिल्ली स्थित भारत के अतिरिक्त रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) को भेजा गया।

इन दोनों संस्थानों की जाँच में यह निष्कर्ष निकला कि यह मामला साइबर धोखाधड़ी का है। यह जानकारी 11 दिसंबर 2025 को पुणे के उप स्वास्थ्य सेवा संचालक को दी गई, जिन्होंने आगे चलकर इसकी सूचना जिला परिषद (जिला परिषद प्रशासन) को दी।

क्रूज पर्यटन को दिया विस्तार, दुर्गा पूजा को दिलाई UNESCO में पहचान: मोदी सरकार ने बंगाल टूरिज्म को बढ़ाने के लिए क्या-क्या किया, सारा क्रेडिट ले रहीं ममता बनर्जी

                                          बंगाल बना तीसरा पसंदीदा पर्यटन स्थल (साभार-toi, nbt)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टूरिज्म क्रांति ने विदेशी सैलानियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा किया है, जिसने तमाम राज्यों को फायदा पहुँचाया है। इस कड़ी में बंगाल जो 2023-2024 में पर्यटन के मामले में तीसरे नंबर पर था वो 2025 में दूसरे नंबर पर आ गया है। भारत के लिए जाहिर है कि ये गर्व की बात है लेकिन इस ग्रोथ का सारा क्रेडिट अब अकेले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लेती दिख रही हैं।

जिस ममता के राज में हिन्दुओं को अपने त्यौहार(दुर्गा पूजा) मनाने के अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हो, ममता बनर्जी को शर्म आनी चाहिए कि जिस दुर्गा पूजा के बंगाल के हिन्दुओं को तुम्हारे कट्टरपंथी गुंडों से झूझना पड़ता है उसी दुर्गा पूजा को UNESCO में पहचान दिलवाने का काम नरेंद्र मोदी ने किया। 

उन्होंने इस संबंध में ट्वीट कर खुद अपनी पीठ थपथपाई है। जबकि सच्चाई ये है कि 2011 से सत्तासीन ममता बनर्जी का प्रयास कहीं नजर नहीं आता है। वहीं मोदी सरकार आने के बाद शुरू किए गए प्रयास जैसे- इनक्रेडिबल इंडिया, ई वीजा, मेडिकल वीजा के साथ-साथ क्रूज से लेकर सड़क तक किए गए विकास का फायदा बंगाल को मिला है।

बंगाल बना तीसरा पसंदीदा स्पॉर्ट

 विदेशी पर्यटकों के लिए बंगाल पहले तीसरा और अब दूसरा सबसे पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट बन गया है। पूर्व में सबसे आगे महाराष्ट्र और उसके बाद गुजरात था। मगर, अब लिस्ट में बंगाल ने राजस्थान और दिल्ली को पीछे छोड़ते हुए जगह बनाई है।

बंगाल को लेकर इस साल के शुरुआत में ही खबरें आ रही थी कि इस वर्ष बंगाल में आने वाले टूरिस्टों की पहले के मुकाबले ज्यादा हो सकती हैं। अब ये रिपोर्ट देखकर लगता है कि इस वर्ष हुआ भी यही। बता दें कि केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के ‘भारत पर्यटन डेटा संग्रह 2025’ ने राज्य को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या के मामले में देश भर में दूसरे स्थान पर रखा है। देख सकते हैं बंगाल विदेशी टूरिस्टों की लुभाने में नंबर 2 पर आया है। संख्या 3.12 मिलियन रही।

अब ये वृद्धि अचानक से बंगाल में कैसे देखने को मिली। इसके पीछे के कारण मोदी सरकार के अथक प्रयास हैं।

                                             भारत पर्यटन डेटा संग्रह 2025

दुर्गा पूजा को मिली वैश्विक पहचान

सांस्कृतिक समृद्धि और त्यौहारों ने विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया है। कोलकाता में होने वाले दुर्गापूजा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है। दुर्गा पूजा वह समय है जब बंगाल में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। लेकिन, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की मेहनत का नतीजा है कि दिसंबर 2021 में यूनेस्को ने कोलकाता में होने वाले दुर्गा पूजा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया। इसे ‘धर्म और कला के समन्वय का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण’ माना। जाहिर है इससे शिल्पकारों, कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिला, जो सालभर माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाने में मशगूल रहते हैं।

ई वीजा और मेडिकल वीजा

बंगाल के प्राइवेट अस्पतालों में बांग्लादेशी मेडिकल विज़िटर्स बड़ी संख्या में आते हैं। इसकी वजह बंगाल का सीमा से सटा होना और आसानी से मेडिकल वीजा मिलना है। ये लोग ममता के गिरते हुए हेल्थ सिस्टम को भी नजरअंदाज कर यहाँ पहुँचते हैं।
पीएम मोदी की ‘हील इन इंडिया’ पहल निजी क्षेत्र के साथ मिलकर स्वास्थ्य सेवा को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने का कार्यक्रम है। इसका फायदा बंगाल को भी हो रहा है। केन्द्र सरकार ने मेडिकल वीजा मिलना भी आसान कर दिया है। इसलिए बांग्लादेशी मेडिकल विजिटर्स रिकॉर्ड संख्या में बंगाल पहुँचे। ई वीजा की वजह से लोगों को वीजा मिलना भी सुलभ हो गया है। इसलिए पर्यटकों की संख्या में काफी बढोतरी हुई है।

इनक्रेडिबल इंडिया

भारत में रिकॉर्ड तोड़ विदेशी टूरिस्ट आने का कारण इनक्रेडिबल इंडिया है, जिसे अटल बिहारी वाजपेयी ने शुरू किया था और PM नरेंद्र मोदी ने ई-वीज़ा, मेडिकल वीज़ा, ग्लोबल कैंपेन और आसान एंट्री से इसे सुपरचार्ज किया है। अतिथि देवो भव: अवधारणा के साथ शुरू इस योजना को 2017 में नई जान आ गई। ‘इनक्रेडिबल इंडिया 2.0’ को डिजिटल और सोशल मीडिया पर काफी प्रोत्साहित किया गया। सरकार ने तो ‘वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ भी शुरू कर रही है। इसका लक्ष्य 2027 तक हर राज्य को फायदा पहुँचाना है।
अतुल्य भारत डिजिटल पोर्टल शुरू किया गया। इसे भारत में आने वाले पर्यटकों के लिए खास तौर पर बनाया गया। यह यात्रियों को पर्यटन स्थलों को ढूँढने और शोध से लेकर योजना बनाने, बुकिंग करने, यात्रा करने और वापस लौटने तक सभी जरूरी जानकारी और सेवाएँ देता है। ‘बुक योर ट्रैवल’ फीचर उड़ानों, होटलों, कैब की बुकिंग की सुविधा प्रदान करता है, जिससे यात्रियों की पहुँच बेहतर होती है। जाहिर से इसका फायदा भी बंगाल को मिला।

अतुल्य भारत होमस्टे योजना

पर्यटकों की सुविधा के लिए केन्द्र सरकार ने स्वैच्छिक होमस्टे योजना शुरू की, ताकि पर्यटकों को कहीं ठहरने में दिक्कत न हो और स्थानीय जनता को भी आमदनी हो। योजना के तहत 5 से 6 गाँव में 5 से 10 होम स्टे हो सकता है जिसके लिए 5 करोड़ रुपए तक की सहायता की जा रही है।

जनजातीय पर्यटन सर्किट का विकास

स्वदेश दर्शन योजना के तहत थीम आधारित सर्किट विकसित की जा रही है। रामायण सर्किट, बौद्ध सर्किट आदि। इस योजना के तहत जनजातीय होम स्टे परियोजना भी शुरू किया गया है। ताकि पर्यटकों के आने जाने वाली जगहों का विकास किया जा सके। इसके लिए केन्द्र सरकार धन मुहैया कराती है।

तीर्थयात्रा को बढ़ावा देने के लिए प्रशाद योजना

इसके तहत राज्य के अहम तीर्थस्थलों को संरक्षित करना और उन तक पहुँचने के लिए सुविधाएँ बढ़ाया गया है। जैसे त्रिपुरा संदुरी मंदिर, चामुंडेश्वरी देवी मंदिर, पटना साहिब की विकास योजनाएँ।
घरेलू पर्यटकों को अपने देश के पर्यटन स्थलों को देखने के लिए सरकार ने प्रोत्साहित किया। इसके लिए ‘देखो अपना देश’ पहल की गई
विशिष्ट पर्यटन उपक्षेत्रों को विकसित किया गया है जैसे उत्सव पर्यटन, साहसिक पर्यटन, विवाह पर्यटन और क्रूज पर्यटन। इसमें भारत के त्यौहारों, आयोजनों से लेकर पर्वतारोहण को बढ़ावा देने, ‘इंडिया सेज आई डू’ के तहत मैरिज डेस्टिनेशन सेंटर को बढ़ावा देना शामिल है।

क्रूज पर्यटन का विकास

क्रूज पर्यटन का फायदा भी कोलकाता को मिला है। बंगाल में कई तरह की क्रूज सेवाएं शुरू हो गई हैं, जिनमें ‘बंगाल गंगा क्रूज’ अहम है। इसके अतिरिक्त, भारत और आसियान देशों के बीच बंगाल की खाड़ी में एक नए क्रूज पर्यटन कॉरिडोर भी विकसित किया जा रहा है। कोलकाता से शुरू होने वाली एक लग्जरी क्रूज सेवा भी है, जो हुगली नदी के किनारे बंगाल की संस्कृति और वास्तुकला को दर्शाती है।
बीजेपी ने ममता बनर्जी के पर्यटकों की संख्या में इजाफे को लेकर सवाल किया है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ट्वीट कर सीएम ममता बनर्जी से पूछा है कि आखिर किस काम का वे क्रेडिट ले रही हैं, जबकि पर्यटन को मोदी सरकार की प्राथमिकता में एक है।
जाहिर है विधानसभा चुनाव को देखते हुए ममता सरकार हर क्रेडिट लेना चाहेगी। पर्यटन से न सिर्फ राज्य की आय बढ़ती है बल्कि आम नागरिक को काफी फायदा होता है। करीब 15 सालों से ममता बनर्जी ने पर्यटन के विकास के लिए कुछ खास नहीं किया। सांस्कृतिक तौर पर समृद्ध बंगाल को इन सालों में काफी फायदा पहुँचाया जा सकता था।

विजयादशमी पर CJI गवई की माँ ने दिखाई हिंदूघृणा, बताया सामाजिक चेतना को नुकसान पहुँचाने वाला त्योहार

     CJI बीआर गवई की माता ने RSS कार्यक्रम का निमंत्रण ठुकराते हुए पत्र लिखा ( फोटो साभार: NagpurToday)
महाराष्ट्र के अमरावती जिले में 5 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का एक कार्यक्रम होना है। यह कार्यक्रम विजयादशमी और संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाएगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई की माँ कमलताई गवई को भी इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था।

लेकिन कमलताई गवई ने निमंत्रण ठुकरा दिया है। खुद को ‘आंबेडकरवादी’ बताते हुए हिंदू विरोधी भावनाओं का इजहार भी किया है। संघ के कार्यक्रम में शामिल होने का दावा करने वाली मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए कमलताई गवई ने मराठी में एक पत्र लिखा है।

 पत्र में खुद को आंबेडकरवादी विचारधारा में ओत-प्रोत और भारतीय संविधान के प्रति प्रतिबद्ध बताया है। उन्होंने लिखा है कि वह किसी भी परिस्थिति में RSS के कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी। साथ ही कहा है कि किसी हिंदू त्यौहार के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने से ‘सामाजिक चेतना को नुकसान’ होगा।

कमलताई गवई ने पत्र में लिखा है, “महाराष्ट्र के अमरावती स्थित श्रीमती नरसम्मा महाविद्यालय मैदान में 5 अक्टूबर को शाम 6:30 बजे होने वाले RSS के विजयादशमी कार्यक्रम में मेरे शामिल होने के बारे में हाल ही में प्रकाशित खबरें पूरी तरह से झूठी हैं। आंबेडकरवादी विचारधारा से प्रेरित दादा साहेब गवई चैरिटेबल ट्रस्ट की संस्थापक अध्यक्ष और भारतीय संविधान के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के कारण मैं ऐसे किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होऊँगी या उसका समर्थन करूँगी। विश्वास दिलाती हूँ कि मैं किसी भी तरह से सामाजिक चेतना को कोई नुकसान नहीं पहुँचाऊँगी।”

कमलताई गवई ने कहा है कि विजयादशमी का हिंदू संस्कृति में महत्व है। लेकिन उनके जैसे बौद्धों के लिए ‘अशोक विजयादशमी’ या मौर्य सम्राट अशोक द्वारा कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपनाने और हिंसा का त्याग करना स्मरणोत्सव है। हालाँकि, यह उल्लेख करना जरूरी है कि इतिहासकारों का एक वर्ग और यहाँ तक कि पुरातात्विक साक्ष्य भी संकेत देते हैं कि अशोक का बौद्ध धर्म में परिवर्तन कलिंग युद्ध से पहले का है।

कमलताई गवई ने मीडिया में आई उन खबरों की कड़ी निंदा की और उन्हें ‘RSS का प्रोपेगेंडा’ बताया। जबकि ज्यादातर रिपोर्ट्स में सिर्फ इतना कहा गया था कि RSS ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की माता को अपने कार्यक्रम में आमंत्रित किया है, न कि उन्होंने उसमें शामिल होने की सहमति दी है।

उन्होंने कहा, “मैं महाराष्ट्र और पूरे भारत के लोगों से अपील करती हूँ कि इस बात पर ध्यान दें। विजयादशमी हिंदू संस्कृति में महत्वपूर्ण है लेकिन हमारे लिए धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस है, जिसे अशोक विजयादशमी भी कहा जाता है, जो कि सबसे ज्यादा मायने रखता है। मैं हाल ही में प्रकाशित खबरों को गलत जानकारी मानती हूँ और लोगों से आग्रह करती हूँ कि ऐसे सामाजिक दृष्टिकोण से भटकाने वाले प्रोपेगेंडा का शिकार न हों। मैं अपने सभी आंबेडकरवादी साथियों से कहती हूँ कि इस बात को समझें और मुझ पर भरोसा रखें। मेरी अनुमति या लिखित सहमति के बिना इस खबर को फैलाना RSS की साजिश है। मैं इस निमंत्रण को स्वीकार नहीं करती।”

कमलताई के दूसरे बेटे ने RSS कार्यक्रम में जाने का किया दावा

हालाँकि, कमलताई की तीखी प्रतिक्रिया के तुरंत बाद उनके दूसरे बेटे ने दावा किया कि वह RSS के कार्यक्रम में शामिल होंगी। रिपब्लिकन पार्टी के नेता और कमलताई के बेटे डॉ. राजेंद्र गवई ने एक वीडियो जारी कर कहा कि कमलताई RSS के कार्यक्रम में जरूर शामिल होंगी और उन्होंने खुद भी निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

दिवंगत पूर्व राज्यपाल आरएस गवई ने दीक्षाभूमि स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति के अध्यक्ष थे और उन्होंने इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके बेटे डॉ. राजेंद्र गवई वर्तमान में स्मारक समिति के सदस्य हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कमलताई गवई की शुरुआती प्रतिक्रिया कि वह RSS द्वारा आयोजित किसी भी कार्यक्रम या विजयादशमी जैसे हिंदू त्योहार मनाने वाले किसी भी कार्यक्रम में कभी शामिल नहीं होंगी- क्योंकि वह और उनका परिवार ‘आंबेडकरवादी विचारधारा’ और भारतीय संविधान के प्रति प्रतिबद्ध हैं- मानो भारतीय संविधान बौद्धों या ‘आंबेडकरवादियों’ को RSS के कार्यक्रमों में शामिल होने या हिंदू त्योहार मनाने से रोकता हो।

  1981 में RSS कार्यक्रम में शामिल आरएस गवई, साथ में भय्याजी सहस्रबुद्धे, बालासाहेब देवरस और बाबासाहेब पथाडे।

हालाँकि उनके दिवंगत पति रामकृष्ण सूर्यभान गवई, जिन्हें दादासाहेब गवई के नाम से भी जाना जाता है और जो रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के वरिष्ठ नेता थे। वे साल 1981 में नागपुर में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।

आरएस गवई, बाबासाहेब अंबेडकर के करीबी सहयोगी थे और नागपुर स्थित दीक्षाभूमि स्मारक समिति के अध्यक्ष भी रहे। साल 1998 में वे रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर अमरावती लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद 2006 से 2011 तक, जब केंद्र में कॉन्ग्रेस नेतृत्व वाली UPA सरकार थी। उस वक्त वे बिहार, सिक्किम और केरल के राज्यपाल रहे।

साल 2009 में केरल के राज्यपाल रहते हुए आरएस गवई ने मुख्यमंत्री अच्युतानंदन की अगुवाई वाली राज्य कैबिनेट की सिफारिश को दरकिनार कर दिया और CBI को कम्युनिस्ट नेता और वर्तमान में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ SNC-लावालिन भ्रष्टाचार मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी। उस समय केरल में कॉन्ग्रेस-UDF विपक्ष में थी। वहीं केंद्र की कॉन्ग्रेस नेतृत्व वाली UPA सरकार ने राज्यपाल गवई के इस फैसले का स्वागत किया।

CJI भूषण रामकृष्ण गवई ने खुद बताया कि उनके पिता दादासाहेब गवई कॉन्ग्रेस पार्टी से 40 साल से भी ज्यादा समय तक जुड़े रहे। वे कॉन्ग्रेसस के समर्थन से सांसद और विधायक भी रहे। CJI गवई के भाई राजेंद्र गवई, जो रिपब्लिकन पार्टी के नेता हैं, वे भी कॉन्ग्रेस से जुड़े हुए हैं।

इधर कमलताई गवई के पत्र ने विवाद खड़ा कर दिया। कुछ दिन पहले CJI बीआर गवई ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान भगवान विष्णु पर की गई टिप्पणी से देशभर में नाराजगी फैली। यह मामला 16 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ के सामने आया, जिसकी अध्यक्षता CJI गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह कर रहे थे।

याचिकाकर्ता राकेश दलाल, जो भगवान विष्णु के भक्त हैं, ने अदालत में कहा कि मूर्ति की पुनर्स्थापना सिर्फ पुरातत्व का मामला नहीं है बल्कि यह आस्था, सम्मान और हिंदुओं के अपने देवी-देवताओं की संपूर्ण रूप में पूजा करने के मूल अधिकार से जुड़ा है।

लेकिन CJI गवई ने इस याचिका को खारिज करते हुए हिंदू आस्था को लेकर कुछ अनावश्यक और तंज भरी बातें कह दीं। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ पब्लिसिटी के लिए दायर याचिका है। जाओ, अब खुद भगवान से कहो कि कुछ करें। तुम कहते हो कि भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हो तो जाओ और प्रार्थना करो।”