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पटना में भी राहुल गाँधी को होगी ऐसी ही सजा: राँची में भी राहुल गाँधी पर चल रहा केस

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को मोदी सरनेम पर दिए गए विवादित बयान के मामले में दोषी ठहराते हुए गुजरात के सूरत सेशन कोर्ट ने 23 मार्च 2023 को 2 साल की सजा सुनाई। हालाँकि, सजा मिलते ही राहुल गाँधी को तुरंत जमानत भी मिल गई। उनकी सजा पर 30 दिनों तक के लिए रोक लगा दी गई है। इसको लेकर उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कोर्ट के फैसले को लेकर सीधे तौर पर सरकार पर निशाना साधा है।

प्रियंका ने ट्वीट किया, “डरी हुई सत्ता की पूरी मशीनरी साम, दाम, दंड, भेद लगाकर राहुल गाँधी जी की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। मेरे भाई न कभी डरे हैं, न कभी डरेंगे। सच बोलते हुए जिए हैं, सच बोलते रहेंगे। देश के लोगों की आवाज उठाते रहेंगे। सच्चाई की ताकत व करोड़ों देशवासियों का प्यार उनके साथ है।”

वहीं, मानहानि के केस में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज ट्वीट किया, “पटना के CJM कोर्ट में मैंने भी राहुल गाँधी पर ‘सारे मोदी सरनेम वाले चोर हैं’ के मुद्दे पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कर रखा है। जमानत पर हैं। सूरत कोर्ट के समान पटना में भी सजा की पूरी संभावना है।” इसके अलावा झारखंड के राँची में भी राहुल गाँधी पर तीन मामले दर्ज हैं। इनमें एक मोदी सरनेम को लेकर है। इस केस को प्रदीप मोदी ने दर्ज करवाया था। कांग्रेस नेता ने इसे रद्द करवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका डाली थी। हालाँकि वहाँ ये याचिका खारिज हो गई।

कोर्ट से सजा मिलने के बाद राहुल गाँधी ने भी ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन है- महात्मा गाँधी।”

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “उन्हें जमानत मिल गई है। हम शुरू से ही जानते थे, क्योंकि वे जज बदलते रहे। हम कानून, न्यायपालिका में विश्वास रखने वाले लोग हैं और कानून के तहत ही लड़ेंगे।”

इस मामले में पूर्णेश मोदी के वकील केतन रेशमवाला ने ANI को बताया कि राहुल गाँधी को आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत दोषी ठहराया गया है। उन्हें 2 साल की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने उन्हें 30 दिनों के लिए जमानत दे दी है। उनकी अगली अपील तक कोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी है।

अवलोकन करें:-

‘सभी चोरों का सरनेम मोदी’

राहुल गाँधी ने 13 अप्रैल 2019 को कर्नाटक में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था, “नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी इन सभी के नाम में मोदी लगा हुआ है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों लगा होता है।” इस बयान के बाद भाजपा नेता पूर्णेश मोदी ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ सूरत में मामला दर्ज कराया था। राहुल गाँधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज करवाया था, जो आपराधिक मानहानि से संबंधित है। 4 साल के बाद अदालत ने इस केस में राहुल गाँधी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।”

उत्तर प्रदेश : पोस्टर गर्ल ने ही खोल दिए ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ की पोल - प्रियंका गाँधी के सचिव ने टिकट के बदले माँगे पैसे

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारी में जुटीं प्रियंका गाँधी के कैम्पेन ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’ की पोस्टर गर्ल ने ही कॉन्ग्रेस के अंदर धाँधली का आरोप लगा दिया है। पोस्टर गर्ल का नाम डॉ प्रियंका मौर्या है जो कॉन्ग्रेस की सक्रिय कार्यकर्ता हैं। उनके अनुसार प्रियंका गाँधी के सचिव संदीप सिंह ने टिकट के बदले उनसे घूस की डिमांड की थी। प्रियंका मौर्या ने कॉन्ग्रेस पार्टी को महिला विरोधी भी कह डाला। यह आरोप उन्होंने 13 जनवरी, 2022 (बुधवार) को लगाया है।

कांग्रेस पार्टी महिला विरोधी है- प्रियंका मौर्या
@upadhyayabhii | #UPElection2022 | #UttarPradeshElections2022 | #BJP | #Congress pic.twitter.com/BJP1YKONHY

— TV9 Bharatvarsh (@TV9Bharatvarsh) January 14, 2022

प्रियंका गाँधी के इस कैम्पन का नाम ‘शक्ति विधान महिला घोषणा पत्र’ है। TV 9 को दिए गए अपने इंटरव्यू पर प्रियंका मौर्या ने कहा, “बात की गई कि लड़की हूँ लड़ सकती हूँ। हमें मेहनत करने और आगे बढ़ने के लिए कहा गया। हमने बहुत मेहनत भी की। जब टिकट देने की बारी आई तो ये पार्टी (कॉन्ग्रेस) महिला और OBC विरोधी पार्टी निकली। सरोजनीनगर से टिकट रूद्रदमन सिंह को देना तय कर लिया गया तब हमें लगा कि ये गलत हुआ है। कैम्पेन के पोस्टर में मेरा चेहरा आगे करना सिर्फ एक लॉलीपॉप जैसा है। मेरे चेहरे का इस्तेमाल कॉन्ग्रेस ने OBC समाज और महिलाओं को लुभाने के लिए किया। जब पहले से ही टिकट किसी और को देना तय था तब स्क्रीनिंग का ड्रामा क्यों किया गया? 35 लोगों की कमेटी, आब्जर्वर और सर्वे की बातें क्यों कही गई? सर्वे की टीम ने भी सबसे ऊपर मेरा नाम रखा था। फिर मुझ से बूथ की लिस्ट मँगवाई गई।”

 प्रियंका मौर्या ने आगे बताया, “मैराथन के लिए भी ऊपर से हर घंटे सवाल हो रहा था कि कितनी लड़कियाँ ले कर आ रहे हों अगर टिकट चाहिए तो। हमें बार-बार ज्यादा से ज्यादा लड़कियों को लाने और रजिस्ट्रेशन के टारगेट दिए जाते रहे। हमने वही किया जो पार्टी कह रही थी। मैं 10 बसें ले कर गई थी। मेरे पास वीडियो भी है जब लड़कियों से 5 किलोमीटर की रेश करवाई गई। रास्ते में कोई रिफ्रेशमेंट भी नहीं रखा गया था। लड़कियाँ दौड़ते हुए रास्ते में गिर जा रहीं थीं। उनकी हालत बहुत खराब थी। जिन लोगों को स्कूटी, स्मार्ट फोन या सर्टिफिकेट मिला है उसके दामों में भी धाँधली की गई है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार (13 जनवरी) को कॉन्ग्रेस ने 125 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इस लिस्ट में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है। प्रियंका मौर्या को भी खुद के सरोजनीनगर से टिकट की आशा थी। लेकिन वहाँ से रुद्र दमन सिंह का नाम फाइनल कर दिया गया। इसी के बाद डॉ. प्रियंका मौर्या ने ट्वीट करके प्रियंका गाँधी के सचिव संदीप सिंह पर टिकट के बदले पैसे माँगने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि वो पैसे नहीं दे पाईं इसलिए उनके बदले किसी और को टिकट दे दिया गया है।

उत्तर प्रदेश : 2019 से किराया नहीं देने पर प्रियंका वाड्रा की रैली के बाद कांग्रेस कार्यालय पर ताला

कॉन्ग्रेस कार्यालय पर लगा ताला: 2019 से नहीं दिया किराया
जिस पार्टी की अध्यक्षा सोनिया गाँधी विश्व की धनी महिलाओं में से एक हो, उसकी पार्टी का कार्यालय केवल इसलिए बंद हो जाये कि 2019 से उसका किराया नहीं दिया गया, बहुत शर्मनाक है। साथ ही यह भी साबित हो गया कि परिवार केवल वर्चस्व बनाये रखना चाहता, इसे पार्टी से कोई मतलब नहीं। 
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा की रैली के बाद गोरखपुर जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय पर फिर से ताला जड़ दिया गया है। बताया जा रहा है कि तीन साल से किराया नहीं देने पर मकान मालिक ने कांग्रेस कार्यालय पर ताला लगा दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मनी त्रिपाठी ने ‘गोरखपुर के बुजुर्ग राजमन राय जी का किराया मत मारिए, दे दीजिए, नैतिकता नाम की कोई चीज़ बची है?’ लिखते हुए ट्विटर अकाउंट पर इसका वीडियो पर भी शेयर किया है।

उन्होंने राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी को टैग करते हुए लिखा, ”राहुल गाँधी जी गोरखपुर के राजमन राय जी की रातों की नींद उड़ी हुई है कांग्रेस की ‘प्रापर्टी हड़पो नीति’ के चलते। आपसे अनुरोध है कि इन बुजुर्ग को बख्श दीजिए, आदत के अनुसार इनकी संपत्ति पर कब्जा मत करिए, इनका किराया दे दीजिए।”

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी साल 2019 में लोकसभा चुनाव के पहले पुरदिलपुर स्थित कांग्रेस के कार्यालय पर ताला लगा दिया गया था, जिसके बाद कांग्रेसियों ने ट्रांसपोर्ट नगर में किराए पर कमरा लेकर कार्यालय खोला था। इस मामले में पीड़ित मकान मालिक का कहना है कि मैंने कांग्रेस कार्यालय पर ताला इसलिए मारा है, क्योंकि मुझे आज तक किराया नहीं मिला है। मैं बार-बार किराया माँगता हूँ, तो कहते हैं बस प्रियंका जी से बात हो गई है, अध्यक्ष जी से बात हो गई है, लेकिन ऐसा कहकर मुझे लॉलीपॉप देते रहे।

उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा चुनाव 2019 से लेकर अब तक का किराया बाकी है। अभी तक एक भी पैसा नहीं मिला है। ताला मारने के बाद मेरी उनसे कोई बात नहीं हुूई है, क्योंकि उन्हें संपर्क करने में शर्म आ रही है। किराया नहीं मिला तो कानूनी कार्रवाई भी करूँगा। बता दें कि 31 अक्टूबर को प्रियंका गाँधी वाड्रा की चंपा देवी पार्क में हुई रैली के तत्काल बाद मकान मालिक ने ट्रांसपोर्ट नगर स्थित जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय पर ताला लगा दिया था।

उत्तर प्रदेश चुनाव : प्रियंका वाड्रा के चुनावी वादे को यूजर्स ने लगा दी वाट

देश में जब भी चुनाव आते हैं, मतदाता को पागल बनाने का धंधा भी शुरू हो जाता है। स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में कांग्रेस द्वारा स्वतंत्र भारत में दूध की नदियां बहाने का प्रलोभन दिया जाता था, ब्रिटिश युग में एक पैसे सेर बिकने वाला दूध आज 60 रूपए लीटर बिक रहा है। सेर लीटर/किलो  से अधिक होता है। अधिकतर शहरों से गौशाला ख़त्म कर दी गयीं हैं। 15/18 रूपए तोला बिकने वाला सोना आज किस भाव है, सभी परिचित हैं। इंदिरा गाँधी ने सत्ता से हाथ से निकलती देख "गरीबी हटाओ" का नारा दिया था, सत्ता तो मिल गयी, लेकिन गरीबी दूर नहीं हुई और न ही बेरोजगारी।  
सत्ता से बाहर रहने पर कांग्रेस बौखला गई है। सत्ता में वापसी के लिए पार्टी तरह-तरह के जतन करने की कोशिश कर रही है। उत्तर प्रदेश में मतदाताओं को लुभाने के लिए कांग्रेस लुभावने वादे कर रही है। पार्टी कभी 40 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देने का वादा करती है, तो कभी फ्री का चुनावी लॉलीपॉप थमाने की कोशिश करती है। ताजा मामले में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की बेटियों को फ्री स्कूटर और स्मार्ट फोन देने का वादा किया, लेकिन आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि लोगों ने कांग्रेस के इस चुनावी वादे पर सोशल मीडिया पर वाट लगा दी। लोग कांग्रेस को निशाना बना रहे हैं। यूजर्स पूछ रहे हैं कि क्या यह वादा भी किसानों की लोन माफी की तरह ही पूरा किया जाएगा जो अभी तक नहीं हो पाया है। 

उत्तर प्रदेश में खिसक चुकी सियासी जमीन को फिर से हासिल करने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने चुनावी वादों का पिटारा खोल दिया है। सत्ता में आने की बेसब्री और ललक की वजह से लोक लुभावन वादों की झड़ी लगा दी है। कभी 40 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देने का वादा करती है, तो कभी फ्री स्कूटर, स्मार्ट फोन देने और 10 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज का वादा करती है। लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र और पंजाब जैसे कांग्रेस शासित राज्यों में ये प्रतिज्ञाएं लागू हैं? क्या इन राज्यों में बेटियों को स्कूटी और स्मार्ट फोन दिए गए हैं ? क्या ये वादे भी राजस्थान के किसानों की कर्जमाफी की तरह है, जो अभी तक पूरा नहीं हो पायी है?

इसी तरह कांग्रेस शासित राज्यों में चुनाव से पहले कई वादे किए गए, लेकिन वो आज तक पूरे नहीं हो पाये हैं। जनता अब खुद को छला हुआ महसूस कर रही है। 6 महीने पहले कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे, जिनमें कांग्रेस के टिकट बंटवारे और उसमें महिलाओं की हिस्सेदारी की पोल चुनाव के आंकड़े खोल रहे हैं। कम भागीदारी की वजह से कई राज्यों में कांग्रेस की महिला नेताओं ने विरोध दर्ज कराया था। केरल महिला कांग्रेस की प्रमुख रहीं लतिका सुभाष ने पद से इस्तीफा दे दिया था। टिकट नहीं मिलने के चलते उन्होंने राजधानी तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस कार्यालय के सामने अपना सिर मुंडवा लिया था। दरअसल कांग्रेस सत्ता में आने के लिए चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन सत्ता मिलते ही उन वादों को भूल जाती है।

जानिए कांग्रेस ने कैसे दिया जनता को धोखा

  • राजस्थान में 10 दिन में कर्जमाफी का वादा किया, लेकिन 1,20,979 करोड़ रुपये में से सिर्फ 8,676 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया।
  • राजस्थान में बैंकों ने कर्जमाफी के इंतजार में बैठे किसानों से वसूली में सख्ती दिखाना और जमीनें कुर्क करना शुरू कर दिया है।
  • राजस्थान में 3,500 रुपये बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया, लेकिन 2021 तक 15 लाख बेरोजगारों में से 2.5 लाख को ही भत्ता दिया।
  • पंजाब में किसानों पर कुल 77,753.12 करोड़ रुपये कर्ज थे, लेकिन अब तक मात्र 4,624 करोड़ रुपये ही माफ किए गए हैं।
  • छत्तीसगढ़ में बेटियों को स्मार्ट फोन देने के लिए बीजेपी ने स्काई योजना बनाई थी, जिसे कांग्रेस ने बंद कर लाखों स्मार्टफोन कबाड़ में फेंक दिए।
  • 6 महीने पहले बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में हुए चुनाव में कांग्रेस ने 10% से भी कम महिलाओं को टिकट दिया था।
  • 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सभी बीपीएल परिवारों को स्वास्थ्य बीमा का वादा किया था, जो पूरा नहीं कर पायी।
  • 2009 के लोकसभा चुनाव में तीन सालों के अंदर सभी बीपीएल परिवारों को स्वास्थ्य बीमा देने का वादा किया, लेकिन पूरा नहीं कर पायी।

उत्तर प्रदेश चुनाव : प्रियंका वाड्रा ने किया छात्राओं को स्मार्टफोन और स्कूटी देने का वादा

उत्तर प्रदेश में चुनाव आने वाले हैं, प्रदेश में चुनावी गर्मी अभी से ही देखने को मिल रही है। ऐसे में हर पार्टी ने चुनाव के लिए अपनी ताकतें झोंकनी शुरू कर दी है। एक ओर जहाँ चुनाव के मद्देनज़र विपक्ष में एकजुटता देखने को मिल रही है तो वहीं दूसरी ओर पार्टियों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए वादे करने भी शुरू कर दिए है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने चुनाव से पहले यह ऐलान किया कि अगर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो छात्राओं को मुफ्त में स्मार्टफोन और स्कूटी दी जाएगी। 

जनता को किसी भी पार्टी द्वारा फ्री में मिल रहे प्रलोभनों पर गहन चिंतन करना चाहिए। इसके दुष्परिणामों पर चिंतन करना चाहिए। कोई पार्टी अपने खजाने से जनता से वोट लेने के लिए नकद और शराब आदि के अलावा कुछ नहीं देती, सबकुछ सरकारी खजाने से देते हैं, जिसका प्रभाव कीमतों पर पड़ता है। जनता को इन प्रलोभनों से सचेत रहने की जरुरत है। कोरोना के कारण आज तक मिल रहे फ्री में राशन और वैक्सीन आदि का परिणाम है महंगाई आसमान छू रही है। निगम पार्षद से लेकर सांसद तक को फ्री में मिल रही सुविधाओं और पेंशन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर जो प्रभाव पड़ रहा है, उस ओर किसी का ध्यान नहीं। जिस दिन जनता से लेकर सांसद तक को मिल रही फ्री की रेवड़ियां बंद हो गयीं, सरकारी खजाने में हर महीने करोड़ों की बचत होने से महंगाई नाम की कोई चीज नहीं होगी।   

प्रियंका वाड्रा ने ट्वीट कर किया ऐलान

उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, इसी क्रम में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रदेश में छात्राओं को फ्री स्मार्टफोन और स्कूटी देने का वादा किया है। प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा कि कल वो कुछ छात्राओं से मिली थी, उन्हें पता चला की छात्राओं को सुरक्षा और पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन की ज़रूरत है, जिसके बाद पार्टी ने छात्राओं में स्मार्टफोन और स्कूटी के वितरण का फैसला लिया है। कांग्रेस के इस फैसले पर छात्राओं ने अपनी ख़ुशी सोशल मीडिया के माध्यम से ज़ाहिर की है। 
कुछ दिन पहले प्रियंका गांधी ने आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव में 40 फीसदी टिकट महिला उम्मीदवारों को देने का ऐलान किया था। कांग्रेस के इन बड़े ऐलान के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं की आगामी चुनाव में महिला मतदाताओं के ज़्यादा से ज़्यादा वोट पाने की पार्टी की रणनीति है। 
सुभासपा और समाजपार्टी का गठबंधन, दिया “अबकी बार, भाजपा साफ़” का नारा
हर पार्टी ने यूपी चुनाव के लिए अपनी ताकत झोंक दी है। अभी से ही उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी ज़ोरों पर है। चुनावी माहौल में विपक्ष की एकजुटता भी दिखाई दे रही है। मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को हराना ही विपक्ष के लिए चुनौती बन गई है।  इसी क्रम में आज सुभासपा और समाजवादी पार्टी का गठबंधन हुआ है। गठबंधन के बाद पार्टियों ने “अबकी बार, बीजेपी साफ़” का नारा दिया है। 

सपा और सुभासपा आए साथ

आगामी वर्ष में उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं, जिसका असर अभी से ही देखने को मिल रहा है। पार्टियों ने अभी से लुभावने वादे करने शुरू कर दिए है। इसी क्रम में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से शिष्टाचार मुलाकात के बाद गठबंधन को लेकर स्थिति को साफ कर दिया। 

अखिलेश यादव से बातचीत के दौरान ओपी राजभर ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ‘दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के साथ सभी वर्गों को धोखा देने वाली भाजपा सरकार के केवल चार दिन बचे है। अबकी बार उत्तर प्रदेश से भाजपा साफ़ होक रहेगी।’

सुभासपा व सपा के वादे

समाजवादी पार्टी और सुभासपा के गठबंधन के दौरान, दोनों पार्टियों ने कुछ वादें भी किए है।  उनका कहना है कि “सुभासपा ने हमेशा सामाजिक न्याय की बात कही है, चाहे फिर वह आबादी व आर्थिक आधार पर आरक्षण, सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू करना, प्राथमिक विद्यालय में तकनीकी शिक्षा, घरेलू बिजली बिल माफ, महिलाओं को 50 फ़ीसदी आरक्षण, गरीबों को मुफ्त इलाज, कुटीर एवं लघु उद्योग से बेरोजगारों को रोजगार, प्राथमिक वद्यिालय से स्नातकोत्तर तक निशुल्क शिक्षा, बिना भेदभाव के नौकरी, सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू कराना, निशुल्क स्वास्थ्य-शिक्षा और बिजली आदि, उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार बनने के बाद हम यह सारे काम करेंगे।”

क्यों यूथ कांग्रेस से जुड़ी रेप पीड़िता को इंसाफ दिलाने के सवाल पर कन्नी काट गई प्रियंका?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने हर हथकंडा अपनाना शुरू कर दिया है। जहां किसानों को भड़काने के लिए फर्जी आंदोलन की शुरुआत की, वहीं दलितों पर अत्याचार के मामले में सेलेक्टिव राजनीति कर अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में कांग्रेस ने एक और दांव चला है। लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रियंका गांधी ने आगामी विधानसभा चुनावों में 40 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देने का ऐलान कर दिया। लेकिन इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक ऐसी घटना घटी जिसने कांग्रेस और प्रियंका वाड्रा के महिला हितैषी होने के पाखंड से पर्दा हटा दिया।

दरअसल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने प्रियंका वाड्रा से सवाल किया कि आप राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और सशक्तीकरण की बात कर रही है, लेकिन मध्य प्रदेश में उज्जैन के बड़नगर से कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल का बेटा करण मोरवाल रेप मामले में आरोपी है और अभी छह महीने से फरार चल रहा है। पत्रकार ने सवाल किया कि क्या यही कांग्रेस का महिला सशक्तीकरण है ? लेकिन प्रियंका गांधी पत्रकार के सवाल से कन्नी काटती नजर आई। सवाल ने प्रियंका को असहज कर दिया था। इस लिए वो कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत की ओर मुखातिब हुई। इस दौरान सुप्रिया पत्रकार के सवालों को टालते हुए उन्हें बैठने पर मजबूर कर दिया।

विधायक मुरली मोरवाल के बेटे पर एक युवती ने रेप का केस दर्ज करवाया है। युवती यूथ कांग्रेस से जुड़ी रही है। आरोप है कि विधायक के बेटे ने युवती को शादी का झांसा देकर रेप किया। इसके बाद वह शादी से मुकर गया। पीड़िता इंदौर की रहने वाली है। लेकिन विधायक के बेटे की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि वह नेपाल भाग गया है। अब इंदौर पुलिस ने इनाम की राशि बढ़ा दी है। करण मोरवाल पर पहले पांच हजार रुपये का इनाम घोषित था। अब उसे 15 हजार रुपये कर दिया है। वहीं रेप पीड़िता इंसाफ की मांग कर रही है।

कांग्रेस पार्टी में महिलाओं के साथ किस तरह बर्ताव किया जाता है। इसका एक और उदाहरण मथुरा में सामने आया, जहां महिला नेता ने कांग्रेस नेताओं पर ही बदसलूकी का आरोप लगाया।। मथुरा के वृंदावन में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर में एक महिला पदाधिकारी के साथ अभद्रता होने से बखेड़ा खड़ा हो गया। कांग्रेस महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष प्रीति तिवारी ने प्रदेश उपाध्यक्ष योगेश दीक्षित पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए शिविर छोड़ दिया। उन्हें मनाने के लिए पार्टी के बड़े नेता तक जुट गए।

प्रियंका वाड्रा पार्टी में महिलाओं की भागीदारी पर पर जोर दे रही है। लेकिन पार्टी में ही महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ रेप की घटनाएं हो रही हैं। पार्टी नेता ही महिला कार्यकर्ताओं को अपने हवस का शिकार बना रहे हैं। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष के साथ बदसलूकी हो रही है। ऐसे में कांग्रस और प्रियंका वाड्रा द्वारा महिलाओं की सुरक्षा, भागीदारी और सशक्तीकरण की बात पूरी तरह से छलावा है। इसका मकसद सिर्फ महिलाओं को गुमराह कर उनका वोट हासिल करना है।  

लखीमपुर खेरी की हकीकत जो मीडिया कभी नही बताएगा

मोदी-योगी विरोधी अक्सर यह आरोप लगाते नज़र आते हैं कि मोदी ने मीडिया को खरीद लिया है। यदि मोदी ने मीडिया को खरीद लिया होता तो मीडिया तथाकथित किसान प्रदर्शन से 26 जनवरी लाल किला कांड, आंदोलन स्थलों पर बंट रही शराब, हो रहे बलात्कार से लेकर लखीमपुर खेरी कांड की सच्चाई कभी नहीं छुपाती। आखिर क्या कारण है कि मीडिया तथाकथित किसानों द्वारा किये जा रहे उपद्रवों की सच्चाई छुपा रही है? क्या मीडिया भी सच्चाई को छुपाकर योगी-मोदी को बदनाम कर सत्ता से हटाने में काम कर रही है? यह वह कटु सच्चाई है, जिसे हर देशप्रेमी को समझना पड़ेगा।  
लखीमपुर काण्ड का मुख्य उद्देश्य 
केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को उनके पद से हटाना, क्योंकि अजय मिश्रा ने ऐसा बयान दिया था कि तराई में अवैध कब्जेधारी भूमाफिया भयग्रस्त हो गये थे। ऐसे में राकेश टिकैत से विचार विमर्श के बाद लखीमपुर काण्ड की पटकथा लिखी गई।

लखीमपुर कांड : ये किसान नहीं,दुधवा नेशनल पार्क की सैकड़ों-हजारों एकड़ जमीन कब्जा कर बैठे भूमाफिया थे। लखीमपुर की हकीकत को मीडिया कभी नही बताएगी। सच्चाई कुछ और ही है जिसे छुपाया जा रहा है। 

लखीमपुर घटना को लेकर वही नैरेटिव सेट किया जा रहा है जो दिल्ली दंगो को लेकर कपिल मिश्रा के बयान को लेकर किया गया था। आगे बढ़ने से पहले अजय मिश्रा का तथाकथित विवादित बयान भी जान लीजिए। कुछ दिन पूर्व जब मिश्र इस क्षेत्र में पहुंचे तो उन्हें अवैध कब्जाधारी भूमाफियाओं द्वारा काले झंडे दिखाए गए। इस पर मिश्रा ने चेतावनी देते हुए कहा कि ये सब बन्द करो। हमें आपकी हरकतें पता है शीघ्र ही कड़ी कार्रवाई होगी। इसी बयान को मीडिया विवादित बयान कहकर घटना का जिम्मेदार बता रहा है।

किन्तु प्रश्न ये उठता है आखिर क्या है वो हरकत जिस पर केंद्रीय मंत्री ने इशारा किया था? क्या ये आन्दोलनजीवियों की कमजोर नस है जो दब गई? इसके लिये आपको घटनास्थल के आसपास के क्षेत्र की भौगोलिक और डेमोग्राफिक स्थिति समझना होगी। आप देखेंगे तो ये पूरा क्षेत्र दुधवा फौरेस्ट के नजदीक है। यहां पर शारदा, घाघरा जैसी नदियां है जिससे ये क्षेत्र सिंचित क्षेत्र कहलाता है जो कि खेती के लिए आदर्श स्थिति है। डेमोग्राफी देखें तो पूरे लखीमपुर जिले की लगभग आधी भूमि पर भूमाफियाओं का अधिकार है और लखीमपुर खीरी जिला ही क्यों आप निरीक्षण करेंगे तो पता लग जाएगा कि पंजाब से आकर सिखों ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, लखीमपुर खीरी,बहराइच,गोंडा सहित तमाम जिलों में कृषि योग्य हजारों लाखों बीघा जमीन पर बड़े बड़े फॉर्म हाउस बना रखे हैं ।लखीमपुर खीरी के तिकुनिया क्षेत्र मे जहां पर ये घटना घटी १५ प्रतिशत पंजाबी हैं जिनके अधिकार मे अधिकांश भूमि अवैध है। यहां के तथाकथित किसान कोई गरीब मजबूर किसान नहीं हैं। अधिकतर के सैकड़ों एकड़ में फैले फार्महाउस है जो उन्होंने अतिक्रमण कर बनाए हैं। यहां साढ़े बारह एकड़ भूमि सीलिंग नियम के अंतर्गत आती है, इसलिए किस तरह से यहां सैकड़ों एकड़ में फार्महाउस बनाए गए बताने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए कृषि बिल का विरोध है क्योंकि बिल गरीब किसानों के लिए ही है जिससे धन्ना किसानों को अपनी जमीदारी खिसकती दिख रही है।

इसलिए जब कुछ दिन पूर्व मंत्री अजय मिश्रा ने कहा कि हम आपकी हरकतें जानते हैं और बड़ी कार्रवाई होगी तब यहां के बाहुबली किसानो में खलबली मच गई। ध्यान रहे अजय मिश्रा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री है और योगी सरकार भी माफियाओं के ऊपर शिकंजा कसने के लिए जानी जाती है। अतः मंत्री की चेतावनी से घबराए आन्दोलनजीवियों ने अपने आकाओं को खबर दी, जिन्होंने मौका देख कर चौका मारने का इशारा दे दिया ताकि किसी भी कीमत पर अजय मिश्रा को मंत्री पद से हटवाया जाए।

क्या थी पूरी घटना? 

शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि इस क्षेत्र में श्राद्ध के दौरान दंगल का आयोजन होता है जो वर्षो से चला आ रहा है। अजय मिश्रा का लखीमपुर जिले में गृहक्षेत्र है। वे स्वयं पहलवान रहे हैं और क्षेत्र के सम्मानित व्यक्ति हैं। वे अक्सर इस आयोजन में जाते रहें हैं,अतः आयोजकों ने इसमें शामिल होने के लिए उपमुख्यमंत्री मौर्य और अजय मिश्रा को आमंत्रित किया। भनक लगते ही हजारों की संख्या में भूमाफियाओं ने हेलिपेड को घेर लिया। तब मौर्य सड़क के रास्ते से निकल गए क्योंकि अराजकतावादियों का निशाना तो अजय मिश्र थे। 

जैसे ही मिश्र का काफिला संवेदनशील (पालघर जैसी) जगह से निकला, सैंकड़ो की संख्या में पंजाब से आए गुंडों ने आगे चल रही चार गाड़ियों को रोककर ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिसमें एक गाड़ी पलटने से दो आंदोलनकारियों की गाड़ी से दबकर और दो की धक्का लगने से मौत हो गई। गुस्साई अराजक आन्दोलनजीवी भीड़ ने गाड़ी से खींच कर 5 लोगों को डंडों से पीट पीटकर बेरहमी से तड़पा तड़पा कर हत्या कर दी। कहने की जरूरत नहीं कि ये पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित देशद्रोही तत्व थे, जिन्हें कांग्रेस, सपा तथा तृणमूल कांग्रेस जैसी भारतीय राजनीतिक दलों का आशीर्वाद और खुला समर्थन प्राप्त है।

जैसे 1761 में देश विरोधी तत्वों ने अहमद शाह अब्दाली को निमंत्रण देकर पानीपत के मैदान में मराठों का विनाश कराया था, उसी तरह इस बार उन्हीं अराजक तत्वों को आमंत्रित करके भाजपा की केंद्र तथा राज्य सरकार को मिटाने का षड्यंत्र रचा गया है।

इस दर्दनाक घटना के बाद अराजकजीवियो ने प्लान B के तहत मृतक परिवारो को आगे कर टिकैत को बुलाने की मांग की। योगी सरकार ने मामला समझते हुए तुरंत राजनीति करने आए विपक्षी गिद्धों को नजरबंद कर, टिकैत को जाने दिया, और समझौता करवाकर बड़े षड्यंत्र को असफल कर दिया।

अब शायद आपको घटना की सच्चाई समझ आ गई होगी। षडयंत्र का मुख्य हिस्सा कैसे भी करके अजय मिश्र को मंत्रिपद से हटवाना है। यदि ऐसा हुआ तो षडयन्त्रकारियों की जीत होगी और उनके हौसले और भी बुलंद होंगे। आगे जाकर इसकी आंच गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे तक भी पहुंच सकती है।

योगी सरकार के लिए भी ये परीक्षा की घड़ी है। योगी जी को अब इस क्षेत्र में बने फार्म हाउसों पर जांच बैठा देनी चाहिए। जांच होने दीजिए, शीघ्र ही सच सामने आ जाएगा।

अक्टूबर 5 को कश्मीर में इस्लामिक आतंकवादियों ने पंडित मखन लाल बिंदरु और ठेला चलाने वाले विरेंद्र पासवान की हत्या कर दी। पंडित नेहरू के ख़ानदान वाले एक शब्द नहीं बोलेंगे इन हिंदुओं की हत्याओं और इस्लामिक आतंकवाद पर,ना ही वहाँ जाएंगे। आतंकवादियों की मौत पर ज़रूर रो लेते हैं। जब पंजाब और राजस्थान में किसानों पर लाठीचार्ज हुआ, न मीडिया ने शोर मचाया और न ही किसी भाजपा विरोधी ने, क्योकि वहां भाजपा की सरकार नहीं थी। इन्हें हंगामा तो भाजपा शासित राज्य में करना है। वहां जरा-सी घटना का ढोल पीट अराजकता जो फैलानी है। परन्तु किसी गैर-भाजपाई राज्य में गंभीर घटना पर मीडिया से लेकर भाजपा विरोधी तनाव फ़ैलाने में व्यस्त हो जाते हैं, वरना जल्दी इतनी कि प्रियंका रात में ही लखीमपुर के लिए निकल गई !

अखिलेश बहुत सवेरे निकल पड़े !

ओबैसी हैदराबाद से चल पडे !

कोलकाता से लेकर मुम्बई तक बयानबाजी शुरू हो गई !

राकेश टिकैत बॉर्डर से चल पड़े !

जाना आप वालों को भी था , वे चूक गए !

तेजस्वी जाएंगे , संजय राउत ने सामना में भड़ास निकाल ली !

हुआ क्या, यह जानने की कोशिश किसी ने नहीं की। भाजपा नेताओं का घेराव करने निकले " किसानों " में भिंडरावाले के चित्र वाले टी शर्ट पहने वाले सिक्ख कौन थे, किसी को मालूम नहीं । हाँ इतना पता जरूर था कि केशवदेव मौर्य का चॉपर उतरने नहीं देना है। यह पता था कि केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की कार ड्राइवर सहित फूंक डालनी है। जो नौ लोग मरे थे, उसमें कितने किसान थे, कितने कार्यकर्ता, कोई नहीं जानता, न किसी ने जानना चाहा। बस एक ही रट चलो लखीमपुर चलो लखीमपुर। हमसे पहले कोई और दल न पहुंच जाए, जल्दी चलो लखीमपुर।

लखीमपुर के किसानों का यह सच बहुत कड़वा है लेकिन यही सच उस खतरनाक सच को बता रहा है, जिसकी चर्चा कोई नहीं कर रहा...

उत्तरप्रदेश के लखीमपुर जनपद की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 40.6 लाख थी। अब लगभग 45 लाख है। इसमें लगभग 2 से ढाई लाख जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में रहती है। शेष 42-43 लाख लोगों का संबंध ग्रामीण क्षेत्रों से ही है। 2011  की जनगणना के अनुसार लखीमपुर में सिक्खों की जनसंख्या 1.06 लाख थी। आज यह अधिकतम लगभग डेढ़ लाख होगी। आप बड़ी सरलता से स्वंय ही यह अनुमान लगा लीजिए कि उत्तरप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में सर्वाधिक योगदान करनेवाले लखीमपुर में कितने किसान सिक्ख हैं। और कितने किसान गैर सिक्ख हैं.?

अब जरा एक तथ्य पर ध्यान दीजिए....

लखीमपुर में हुए बर्बर हत्याकांड के जो दर्जनों वीडियो अब तक सामने आए हैं। उन सभी वीडियो में हाथ में झंडे डंडे लाठी तलवार पत्थर लेकर हमला कर रहे तथाकथित किसानों में लगभग 80-90 प्रतिशत सिख ही नजर आ रहे हैं? उस भीड़ में लखीमपुर की शेष 43 लाख जनसंख्या का हिस्सा, गैर सिक्ख किसान क्यों नहीं दिखाई दे रहे? यह सवाल लखीमपुर में हुए हत्याकांड की जड़ का खतरनाक शर्मनाक सच उजागर कर रहा है। उत्तरप्रदेश की पुलिस और केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों के दस्तावेजों में भी दशकों से यह सच्चाई दर्ज है कि लखीमपुर और पीलीभीत के सिख  बहुलता वाले ग्रामीण इलाकों में कुख्यात खालिस्तानी आतंकियों के अड्डे रहे हैं। यह सिलसिला लगभग डेढ़ दशक तक बहुत तेजी से  चला था। आज भी खालिस्तानी आतंकियों और पंजाब से फरार अपराधियों की इन इलाकों में गतिविधियों के समाचार यदाकदा सामने आते रहते हैं। डंडों तलवारों से पीट रहे हत्यारों के बदन पर दिख रही खालिस्तान की टीशर्ट और उनके अगल बगल लहरा रहे खालिस्तानी झंडे  बता रहे हैं कि लखीमपुर में हुआ हत्याकांड किसानों के आक्रोश का नहीं बल्कि खालिस्तानी गुंडों हत्यारों द्वारा किए गए देशविरोधी तांडव का परिणाम है।

सत्ता के लिए लार टपकाते घूम रहे राजनीतिक भेड़िए लखीमपुर हत्याकांड के दोषी अपराधी खालिस्तानी हत्यारों को किसान बताकर उन्हें बचाने का दबाव सरकार पर बना रहे हैं। इसलिए उस दबाव के खिलाफ आवाज़ उठाना, लोगों तक सच पहुंचाना हमारा आपका भी दायित्व है।

उफ ! सत्ता की हवस भी क्या चीज है? कुर्सी का दर्द भी क्या दर्द है? राजनीतिक ग्लैमर खो देने की पीड़ा कितनी असह्य है। सत्ता पाने का जब कोई रास्ता नहीं बचा तो डेरा डालो घेरा डालो। हुआ क्या, क्यों सोचें, भड़का दो, वायरल कर दो, आग लगा दो, फैला दो।  हकीकत कुछ दूसरी हुई तो क्या हुआ, कुछ और वोट तो पक्के। अब उत्तर प्रदेश है तो खेला भी पक्का। मुकाबला योगी से है तो मानों मोदी और अमित शाह से है। अब 2024 तक  कौन बाट जोहे, तो चल पड़े रातों रात। कर दो बवाल पर बवाल, जब तक असलियत सामने आए, धूम मचा दो आग लगा दो, आसमान सर पर उठा दो। जब सुबह होगी, देखा जाएगा। हकीक़त क्या है, जब पता चलेगा तब चलेगा। अभी तो गर्मी है, होश जला दो।

लखीमपुर में किसान भी मरे, भाजपाई भी, मजदूर भी, पत्रकार भी और इंसानियत भी। यदि मंत्री और उसके बेटे ने किसानों को कुचला है, तब बेशक भीड़ के डर से उपजी भगदड़ हो, मंत्री, उनका बेटा और नेता  जिम्मेदार हैं। बहुत सारे वीडियो वायरल हैं। कुछ में साफ है कि किसानों को मारा जा रहा था और कुछ में भीड़ लाठी डंडे बरसा रही थी। लाठियां फटकार कर भीड़ से लोगों को बचाती पुलिस भी नजर आई। खैर, अब पूर्व न्यायाधीश उच्चस्तरीय जांच करेंगे, तो खुलासा हो जाएगा।

एक आश्चर्यजनक घटना भी हुई। वह थी टिकैत का समझौतावादी रुख। जहां प्रियंका और अखिलेश दियासलाई लेकर आग लगाने आए थे, टिकैत ने उनके मंसूबों पर पानी की बौछार कर दी। टिकैत ने डीजीपी , पीड़ित परिवारों और मध्यस्थों के साथ बैठकर बहुत जल्द समझौता करा दिया। शायद ही किसी घटना में पहले कभी 45-45 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी दी गई हो। टिकैत के समझौतावादी रवैये से जहाँ सभी खुश हैं, प्रियंका, राहुल और योगेंद्र यादव खफा हैं। भिंडरावाले के छापे वाले खालिस्तानी गुस्से में हैं। उनके हाथों से आग भड़काकर सत्ता पाने का मौका यूँ ही निकल गया। 

लकीमपुर की हकीकत जो मीडिया कभी नही बताएगा.

आखिर लखीमपुर में ऐसा क्या हुआ जो इतनी विकराल घटना घटित हुई। क्या वही सच है जो मीडिया द्वारा बताया जा रहा है। क्या अजय मिश्रा का पूर्व बयान घटना का कारक है जैसा मीडिया, विपक्ष और आन्दोलनजीवी बता रहे है या सच्चाई कुछ और ही है जिसे छुपाया जा रहा है। 

लखीमपुर घटना को लेकर वही नरेटिव सेट किया जा रहा है जो दिल्ली दंगो को लेकर कपिल मिश्रा के बयान को लेकर किया गया था। आगे बढ़ने से पहले अजय मिश्रा का तथाकथित विवादित बयान भी जान लीजिए। 

कुछ दिन पूर्व जब मिश्र इस क्षेत्र में पहुंचे तो उन्हें पगड़ी किसानों द्वारा काले झंडे दिखाए गए इस पर मिश्रा ने चेतावनी देते हुए कहा कि ये सब बन्द करो हमे आपकी हरकतें पता है शीघ्र ही कड़ी कार्रवाई होगी। इसी बयान को मीडिया विवादित बयान कहकर घटना का जिम्मेदार बता रहा है। 

किन्तु प्रश्न ये उठता है आखिर क्या है वो हरकत जिस पर केंद्रीय मंत्री ने इशारा किया था? क्या ये आन्दोलनजीवीयो की कमजोर नस है जो दब गई। इसके लिये आपको घटनास्थल के आसपास के क्षेत्र की भौगोलिक और डेमोग्राफिक स्थिति समझना होगी। 

आप देखेंगे तो ये पूरा क्षेत्र दुधवा फारेस्ट के नजदीक है। यहां पर शारदा, घाघरा जैसी नदिया है जिससे ये क्षेत्र सिंचित क्षेत्र कहलाता है जो कि खेती के लिए आदर्श है।  

डेमोग्राफी देखे तो पूरे लखीमपुर जिले में कुल 2.35% लगभग सिख आबादी और 20.7% के लगभग टिड्डा आबादी है। 2001 में इस जिले को अल्पसंख्यक बाहुल्य जिला घोषित किया गया था। शब्दावली पर ध्यान दे "अल्पसंख्यक बाहुल्य"

समस्या कहां है ?

लखीमपुर जिले में भले ही 2.35% सिख है लेकिन जहाँ ये घटना घटी वहां आसपास का क्षेत्र मिलाकर कुल 15% सिख है साथ ही टिड्डे भी ये ठीक उसी प्रकार है जैसे पालघर। यहां अधिकतर सिख नवसिक(मिशनरीज प्रेरित) बन चुके है जिनका झुकाव खाली स्थान की तरफ है

यहां के तथाकथित किसान कोई गरीब मजबूर किसान नही है। अधिकतर के सैकड़ों एकड़ में फैले फार्महाउस है। जो उन्होंने अतिक्रमण कर बनाए है। यहां साढ़े बारह एकड़ भूमि सीलिंग नियम के अंतर्गत आती है। इसलिए किस तरह से यहां सेकड़ो एकड़ में फार्म हाउस बनाए गए ये बताने की आवश्यकता नही है। इसलिए कृषि बिल का विरोध है क्योंकि बिल गरीब किसानों के लिए ही है जिससे धन्ना किसानों को अपनी "जमीन" खिसकती दिख रही है

इसलिए जब कुछ दिन पूर्व मंत्री अजय मिश्रा ने कहा कि हम आपकी हरकतें जानते है और बड़ी कार्रवाई होगी तब यहां के बाहुबली किसानों में खलबली मच गई। ध्यान रहे, अजय मिश्रा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री है और योगी सरकार भी माफियाओं के ऊपर शिकंजा कसने के रूप में जानी जाती है। अतः मंत्री की चेतावनी से घबराए आन्दोलनजीवीयो ने अपने आकाओं को खबर दी। जिन्होंने मौका देखकर चौका मारने का इशारा दे दिया, ताकि किसी भी कीमत पर अजय मिश्रा को मंत्री पद से हटवाया जाए

क्या थी पूरी घटना?

शायद बहुत कम लोग जानते है कि इस क्षेत्र में श्राद्ध के दौरान दंगल का आयोजन होता है जो वर्षो से चला आ रहा है। अजय मिश्रा का लखीमपुर जिले में गृहक्षेत्र है। वे स्वयं पहलवान रहे है और क्षेत्र के सम्मानित व्यक्ति है। अक्सर इस आयोजन में जाते रहे है। अतः आयोजको ने इसमें शामिल होने के लिए उपमुख्यमंत्री मौर्य और अजय मिश्रा को आमंत्रित किया। भनक लगते ही हजारों की संख्या में नवपगड़ी और टिड्डों ने हेलीपैड को घेर लिया। तब मौर्य सड़क रास्ते से निकल गए क्योंकि अराजकवादियो का निशाना तो अजय मिश्र थे

जैसे ही मिश्र का काफिला संवेदनशील(पालघर जैसी) जगह से निकला सैंकड़ो की संख्या में नव सिखों ने आगे चल रही चार गाड़ियों को रोक कर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जिसमें एक गाड़ी पलटने से दो आंदोलनकारियों की गाड़ी में दबकर और दो की धक्का लगने से मौत हो गई। गुस्साई अराजक आन्दोलनजीवी भीड़ ने गाड़ी से खींचकर 5 लोगों की डंडों से पीट पीटकर लिंचिंग कर दी

दर्दनाक घटना के बाद अराजकजीवियो ने प्लान B के तहत आंदोलनकारी मृतक परिवारो को आगे कर बकैत को बुलाने की मांग की। योगी सरकार ने मामला समझते हुए तुरंत राजनीति करने आए विपक्षी गिद्धों को नजरबंद कर बकैत को लखीमपुर जाने दिया और अपनी शर्तों पर समझौता करवाकर बड़े षड्यंत्र को असफल कर दिया

अब शायद आपको घटना की सच्चाई समझ आ गई हो गई जो टूलकिट मीडिया नही बता रही और ना ही कोई विपक्ष और ना ही कोई विश्लेषनकर्ता

लेकिन षड्यंत्र का मुख्य हिस्सा कैसे भी करके अजय मिश्र को मंत्रिपद से हटवाना है। यदि ऐसा हुआ तो षड्यन्त्रकारियों की जीत होगी और उनके हौसले और भी बुलंद होंगे क्योंकि ये घटना एक तरह से लिटमस टेस्ट की तरह थी

योगी सरकार के लिए भी परीक्षा की घड़ी है फिलहाल वो लिटमस टेस्ट पास कर चुकी है। लेकिन अराजकवादियो पर कार्रवाई के लिए मशहूर योगी जी को अब इस क्षेत्र में बने फार्म हाउस पर जांच बैठा देनी चाहिए

फिरोज की पोती प्रियंका वाड्रा रखेंगी नवरात्रि का व्रत, कांग्रेस ने मीडिया को बताया: लोगों ने ‘केरल कांग्रेस गौहत्या’ की याद दिलाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश को सबसे बड़ी उपलब्धि कि जो कभी अपने दादा फिरोज जहांगीर की कब्र पर न जाने वाले कोट पर जनेऊ पहन रहे हैं, अपना गोत्र हिन्दू बता रहे हैं और अब हिन्दू नवरात्रों पर व्रत।  
कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा इस बार नवरात्रि के व्रत रखेंगी। ये जानकारी गुरुवार (अक्टूबर 7, 2021) को कांग्रेस  पार्टी के हवाले से मीडिया में आई है। एबीपी न्यूज के एडिटर पंकज झा ने बताया कि कांग्रेस  पार्टी की तरफ से इस बार जानकारी दी गई है कि प्रियंका गाँधी नवरात्रि का व्रत कर रही है।

इसके अलावा प्रियंका गाँधी वाड्रा ने खुद भी शारदीय नवरात्रि की सभी को शुभकामनाएँ दी हैं। इसके साथ उन्होंने देवी माता का महा मंत्र भी लिखा है, “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।”

कांग्रेस द्वारा मीडिया में इस बात की जानकारी देने पर और मीडिया द्वारा इसका प्रचार किए जाने पर यूजर मीडिया और कांग्रेस दोनों की खिल्ली उड़ा रहे हैं। आशुतोष झा लिखते हैं, “इस व्रत के दौरान वो निर्जला रहेंगी या फलाहार पर? अगर फलाहार करेंगी तो कौन सा फल खाएँगी, कब-कब खाएँगी, कितना खाएँगी, कटा हुआ खाएँगी या पूरा खाएँगी, कितनी बार चबाएँगी, श्रीमान आपसे निवेदन है कि ये भी जरूर बताइएगा, क्योंकि यही तो न्यूज़ है जो UPSC में पूछा जाएगा।”

एक यूजर ने कहा, “वो दिन जब कांग्रेस ने बेसहाय गाय को केरल में सिर्फ इसलिए काटा था क्योंकि उन्हें भाजपा का विरोध करना था उस दिन मेरा आखिरी दिन था कि मैंने कांग्रेस को समर्थन दिया।”

रौशन नारायण लिखते हैं, “कोई नवरात्रि का व्रत करे तो इसकी भी जानकारी ट्वीट किया जाता है और हमारे आदरणीय पत्रकार इसका भी उल्लेख करते है।”

देवेश उपाध्याय ये जानकारी पढ़कर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहते हैं, “तो क्या हम लोग नाचें पंकज झा। यही न्यूज है आपकी रिपोर्टर के तौर पर कि कौन व्रत रखता है कौन शौच जाता है कौन कब सोता है। शर्म आनी चाहिए तुम्हें अपने पर और तुम्हारी जैसी पत्रकारिता पर।”

आलोक लिखते हैं, “ये तो अजूबा हो गया! इस देश में पहली बार किसी ने नवरात्रि का व्रत रखा है। घर पहुँचते में मुर्गी की टांग चबाई जाएगी या पोर्क धांसा जाएगा पास्ता के साथ। गजब लीक, ग़ज़ब की ब्रेकिंग!”

एक तरह से देखा जाए तो यूजर की प्रतिक्रिया गलत नहीं हैं क्योंकि ये वाकई हैरान करने वाला है कि कोई व्रत रखता है तो उसे मीडिया में प्रसारित कर दिया जाता है।

चुनावों से पहले हिंदू बन रहे राहुल-प्रियंका, बाकी राज्यों में कैसा हाल?

उत्तर प्रदेश चुनाव नजदीक आते-आते राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी में सनातन संस्कृति के प्रति आस्था बढ़ती देखी गई है। पिछले दिनों राहुल गाँधी वैष्णो देवी चले गए थे। इसी तरह राजनीति में सक्रिय होने के बाद से प्रियंका गाँधी भी कभी गंगा तट की सैर तो कभी पूजा अर्चना करते दिखती हैं। जबकि केरल जैसे राज्य में उनकी सत्ता के बावजूद हिंदुओं की भावनाओं की कद्र नहीं होती और खुलेआम सड़कों पर गाय के मीट से जश्न मनाया जाता है।
इसी प्रकार असम में देखें तो हिंदू विरोधी व कट्टर बयानबाजी के लिए पहचाने जाने वाले बदरुद्दीन अजमल से भी पिछले चुनावों में पार्टी ने गठबंधन किया था। बंगाल में उन्हें मौलवी अब्बास सिद्दीकी की इंडियन सेकुलर फ्रंट के साथ हाथ मिलाया था। लेकिन, इस समय बात चाहे सनातन परिधान धारण करने की हो या फिर माथे पर तिलक लगाने, जनेऊ पहनने और आरती-पूजा करने की…राहुल-प्रियंका सब करते दिखते हैं और साथ ही साथ उनकी पार्टी समुदाय विशेष के बंधुओं को रिझाने के लिए मस्जिद के सामने मेनिफेस्टो भी देने लगी है। इस दोहरे चरित्र पर कई बार सवाल भी उठा है कि आखिर मस्जिद-मजार जाने वाले कैसे अलग रूप धारण कर बैठे हैं। इसके अतिरिक्त गाँधी परिवार के नकली ‘हिंदू’ होने को लेकर भी जगह-जगह बातें होती रहती हैं।