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क्या कुत्ता लेकर संसद पहुँचीं कांग्रेस सासंद रेणुका चौधरी ने साबित कर दिया विपक्ष की मनोस्थिति कुत्ते जैसी हो गयी है?

                      कुत्ते के साथ संसद पहुँची रेणुका चौधरी (फोटो: नवभारत टाइम्स / वन इंडिया)
आज सांसद रेणुका चौधरी ने जनता को यह सोंचने के मजबूर कर दिया है कि वह किसी समझदार उम्मीदवार को वोट देने जा रहे हैं या मनुष्य के रूप में किसी कुत्ते को? आज विपक्ष नरेंद्र मोदी विरोध में इतना नीचे गिर जायेगा, शायद ही किसी ने कल्पना की हो। विपक्ष इतना ज्यादा पगला गया कि सुप्रीम कोर्ट में भी मात खाने के बाद भी SIR के मुद्दे पर संसद रोक जनता के पैसे को बर्बाद कर रहा है। क्या ऐसा विपक्ष एक भी एक भी वोट के काबिल है जो घुसपैठियों और बोगस वोट बचाने जनता के पैसे को बर्बाद करे?    

संसद के शीतकालीन सत्र का पहला दिन बेहद हंगामेदार रहा। SIR समेत अलग-अलग मुद्दों को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष आमने-सामने आते दिखाई दिए। लोकसभा हो या राज्यसभा, दोनों ही सदनों में बहस और हंगामा देखने को मिला। हालांकि, सदन के अंदर ही नहीं बाहर भी घमासान कम नहीं था। इसी बीच सत्र के पहले ही दिन एक नया विवाद सामने आया जब कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी एक डॉगी को साथ लेकर संसद परिसर में पहुंच गईं। इसे लेकर बवाल उस समय बढ़ गया जब बीजेपी के दिग्गज नेता और सांसद जगदंबिका पाल ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर दी।

कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी सोमवार (1 दिसंबर 2025) को शीतकालीन सत्र के पहले दिन कुत्ते को गाड़ी में लेकर संसद भवन पहुँची जिसे लेकर हंगामा हो गया है। बीजेपी ने इसे संसद का अपमान बताते हुए रेणुका के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की माँग की है।

सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में रेणुका की गाड़ी में एक कुत्ता बैठा नजर आ रहा है। इस पर हुए विवाद पर सफाई देते हुए रेणुका ने कहा कि उन्हें यह कुत्ता सड़क पर मिला था। उन्होंने कहा, “मैं रास्ते में आ रही थी। वहाँ पर एक स्कूटर और एक कार की टक्कर हो गई थी और उसके आगे ये पिल्ला सड़क पर घूम रहा था। मुझे लगा कि इसे टक्कर लग जाएगी। तो मैंने इसे उठाया, कार में रखा, संसद आई और वापस भेज दिया।”

जगदंबिका पाल ने कांग्रेस सांसद के रवैये पर उठाए सवाल

डुमरियागंज से बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी का ये कदम, सांसद के तौर पर दिए गए विशेषाधिकार का दुरुपयोग है। ऐसे में कार्रवाई की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि सांसदों के कुछ विशेष अधिकार होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे अमर्यादित आचरण करें।

सांसद के विशेषाधिकार का दुरुपयोग- बीजेपी सांसद

बीजेपी नेता ने जोर देकर कहा कि संसद देश की नीतियों पर चर्चा करने के लिए है। यह जनता की ओर से चुने गए जनप्रतिनिधियों का सदन है। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी को शायद यह एहसास नहीं है कि लोकसभा और राज्यसभा देश की जनता की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
कांग्रेस सांसद का अपने कुत्ते को संसद परिसर में लाना और फिर सवाल उठाए जाने पर सफाई देना देश को शर्मसार करने वाला कृत्य है। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर कुठाराघात और संसद का अपमान करार दिया।

रेणुका ने आगे विवादित बयान देते हुए कहा, “असली काटने वाले तो संसद में बैठे हैं। वे सरकार चलाते हैं। क्या सरकार के पास और कुछ करने को नहीं है? हम उन लोगों के बारे में बात नहीं करते जो संसद में बैठकर हमें रोज काटते हैं।” रेणुका चौधरी ने तंज भरे लहजे में कहा कि अगर कुत्ते के लिए भी कोई पास बनता है तो बना दिया जाए।

कुत्ता विवाद पर रेणुका चौधरी ने क्या कहा

संसद में कुत्ता लाने पर हुए विवाद पर कांग्रेस MP रेणुका चौधरी ने कहा कि 'कोई कानून बना है क्या? मैं रास्ते में आ रही थी। वहां पर एक स्कूटर और एक कार का टकर हुआ। उसके आगे ये पिल्ला सड़क पर घूम रहा था। मुझे लगा कि इसे टक्कर लग जाएगी। तो मैंने इसे उठाया, कार में रखा, संसद आई और वापस भेज दिया। कार चली गई, और कुत्ता भी गया। तो इस पर चर्चा का क्या मतलब है? असली काटने वाले तो संसद में बैठे हैं। वे सरकार चलाते हैं। हम एक बेजुबान जानवर की देखभाल करते हैं, और यह एक बड़ा मुद्दा और चर्चा का विषय बन गया है। क्या सरकार के पास और कुछ करने को नहीं है? मैंने कुत्ते को घर भेज दिया और उनसे कहा कि इसे घर पर ही रखो... हम उन लोगों के बारे में बात नहीं करते जो संसद में बैठकर हमें रोज़ काटते हैं।'

बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने रेणुका चौधरी के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए कहा कि अगर सांसद को कुछ विशेषाधिकार मिलते हैं तो उनका गलत तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

पाल ने कहा, “संसद देश की नीतियों पर चर्चा करने की जगह है। वहाँ पर अपने कुत्ते को लेकर आना और उस पर इस तरह का बयान देना। वह देश को शर्मसार कर रही हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।” 

उत्तर प्रदेश : ‘BJP से जुड़े व्यक्ति के जनाजे में कोई मौलवी नमाज पढ़ाने नहीं जाएगा’: शिकायत के बाद इमाम राशिद सहित सपा से जुड़े लोगों पर भी FIR

भाजपा से जुड़े मुस्लिम व्यक्ति की मौत के बाद जनाजे की नमाज़ पढ़ने से इंकार करने वाले इमाम पर FIR (चित्र साभार- DD न्यूज़)
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक मस्जिद के मौलवी ने एक मुस्लिम की मौत के बाद उसके जनाजे की नमाज़ पढ़वाने से इनकार कर दिया, क्योंकि मृतक भाजपा समर्थक था। मामले की शिकायत DM से की गई तो पुलिस ने शनिवार (3 अगस्त 2024) को 5 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया। उधर, मौलवी ने खुद को बेकसूर बताते हुए इसे अपने खिलाफ एक साजिश बता दिया।
इस गंभीर मसले पर भाजपा को बहुत ही गंभीरता से सोंचना होगा। यानि मुसलमान ने खुद साबित कर रहा है कि जो देना है दो, लेकिन बीजेपी को वोट नहीं देंगे। सरकार को BPL में फ्री का राशन लेने वालों की आर्थिक स्थिति की जाँच करवानी चाहिए। प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान लेने वालों की जाँच बहुत जरुरी है। धर्म-निरपेक्षता एकतरफा क्यों?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मुरादाबाद जिले के कुंदरकी थाना क्षेत्र की है। यहाँ के कायस्थान मोहल्ले के रहने वाले दिलनवाज़ ने मुरादाबाद के जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में दिलनवाज़ ने बताया कि उनके अब्बा अलीदाद खाँ काफी समय से भाजपा समर्थक रहे हैं। 23 जुलाई को हार्ट अटैक से उनका इंतकाल हो गया।

दिलवाज ने कहा कि पास में ही स्थित नवाज़ खान मस्जिद में इमाम मोहम्मद राशिद को जनाजे की नमाज़ पढ़वाने के लिए बुलवाया गया तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया। आरोप है कि इमाम राशिद ने मृतक के बेटे से कहा, “तुम्हारे अब्बू तो बीजेपी को वोट देते थे। बीजेपी हिंदू पार्टी है। हम और हमारे साथ का कोई भी इमाम या मौलवी नमाज़ पढ़ने नहीं जाएगा।”

पीड़ितों ने मौलवी के साथ इस करतूत में समाजवादी पार्टी के नेता असलम, शमीम खान, शराफत और मतीन को भी नामजद किया है। आखिरकार इमाम द्वारा इनकार के बाद गाँव के एक अन्य मौलवी को बुलवाया गया और उनसे जनाज़े की नमाज़ पढ़वाई गई। शनिवार को पुलिस ने इन सभी लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

मुरादाबाद के जिलाधिकारी IAS अनुज सिंह और पुलिस अधीक्षक ग्रामीण IPS संदीप मीणा ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। इन्होंने बताया कि जाँच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, खुद पर लगे आरोपों को मस्जिद के इमाम मोहम्मद राशिद ने निराधार बताया है।

मौलवी ने मस्जिद की CCTV फुटेज में अपनी बेगुनाही का सबूत होने का दावा करते हुए खुद को फँसाने की साजिश करार दिया है। समाजवादी पार्टी के नेता नाज़िम सैफी ने भी मृतक के बेटे के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने आरोपित इमाम को अपने सिर का ताज बताते हुए लगाए गए आरोपों को राजनीति से प्रेरित कहा है।

बिहार : पलटी मार विशेषज्ञ और सिद्धांतहीन नीतीश का गांधी और लालू परिवार पर हमला क्या विश्वास करने योग्य है?

भारतीय राजनीति में अगर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल यू-टर्न में महारथी है तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पलटीमार विशेषज्ञ ने गांधी परिवार और लालू परिवार पर बड़ा हमला बोला है। ऐसे में प्रश्न यह है कि 'क्या यू-टर्न महारथी और पलटीमार विशेषज्ञ पर जनता को भरोसा करना चाहिए?' यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगर कल केजरीवाल भाजपा में शामिल होना चाहते हो तो क्या भाजपा उन पर भ्रष्टाचार आरोपों को भुला कर पार्टी में शामिल कर लेगी? लालू पार्टी से समझौता करने और प्रभु राम प्राण प्रतिष्ठा में न जाने के बाद से जेडीयू हाशिये पर आ गयी थी, जिसे नीतीश अच्छी तरह से अनुमान लगाने के कारण कुर्सी के भूखे और सिद्धांतहीन नीतीश ने भांप पलटी मार ली। दूसरे, अर्थों में यही कहा जा सकता है कि नीतीश और जेडीयू नेताओं का 'जहाँ दिखे तवा परात वहीं बिता सारी रात' वाले लालची और सिद्धांतहीन वाली है। लेकिन भाजपा ने मरती हुई जेडीयू में जान फूंक दी है।    

जननायक कर्पूरी ठाकुर की जन्म जयंती के अवसर पर नीतीश कुमार ने कहा कि कुछ लोग सिर्फ परिवार को आगे बढ़ाने पर लगे रहते हैं। पटना में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने कभी अपने परिवार को आगे नहीं बढ़ाया। लेकिन, आज लोग सिर्फ अपने परिवार को ही बढ़ाते रहते हैं। मैंने भी कभी अपने परिवार को आगे नहीं बढ़ाया। नीतीश कुमार ने कहा, “कर्पूरी ठाकुर जी की राह पर चलते हुए हमने भी कभी अपने परिवार को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया। लेकिन आजकल बहुत लोग अपने परिवार को ही राजनीति में आगे बढ़ाते रहते हैं”

राहुल गांधी और तेजस्वी-तेजप्रताप यादव पर तंज कसने वाले इस बयान को लोग सोशल मीडिया पर जमकर शेयर कर रहे हैं। आप भी देखिए लोग क्या कह रहे हैं।

पश्चिम बंगाल : Mob lynching :साधुओं को निर्वस्त्र कर पीटा, भगवा वस्त्रों को पैरों से रोंडा: उनसे मिले BJP सांसद, राम मंदिर के पुजारी बोले – ममता बनर्जी है ‘मुमताज खान’

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में साधुओं को निर्वस्त्र कर पीटा (बाएँ), BJP सांसद से मुलाकात के दौरान पीड़ित साधु (दाएँ)
अप्रैल 2020 में महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार की चूलें हिला दी थीं। पुलिस चुपचाप खड़े होकर तमाशा देखती रही और ये घटना हो गई। विषम परिस्थितियों के बावजूद मुस्कुराते हुए साधु की तस्वीर लोगों के जेहन में कैद हो गई। अब पश्चिम बंगाल में एक बार फिर से भीड़ ने कुछ इसी तरह की घटना को अंजाम देने की कोशिश की है। वहाँ साधुओं को नग्न कर के उन्हें मारा-पीटा गया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) शासित पश्चिम बंगाल में साधुओं के साथ पालघर लिचिंग जैसा वाकया सामने आया है। साधुओं के साथ ना सिर्फ अभद्रता की गई, बल्कि उन्हें नंगा किया गया, उनकी जटाएँ खींची गईं, उनके गेरुआ वस्त्र को रौंदा गया और डंडों से उनकी पिटाई की गई। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बीजेपी के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने 30 सेकेंड के इस वीडियो को अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाए हैं। बंगाल बचाने का आह्वान करते हुए मालवीय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू होना अपराध हो गया है।

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में जिन साधुओं के साथ क्रूरता की गई, उनमें से एक मधुर गोस्वामी ने अपना दर्द बयाँ किया है। उन्होंने बताया कि साधुओं का दल गंगासागर के लिए जा रहा है, रास्ते में पुरुलिया में अचानक गाड़ी को रोका गया। मधुर गोस्वामी ने बताया कि उनलोगों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, गाड़ी को भी तोड़-फोड़ दिया गया। इसके बाद पुलिस-प्रशासन वहाँ पहुँचा। साधु ने बताया कि वहाँ 200-300 के करीब लोग थे, बेहोश हो जाने के कारण उन्हें ठीक से याद नहीं।

बता दें कि भीड़ ने साधुओं पर लड़कियों को लेकर भागने का आरोप लगाया था। इस पर पीड़ित मधुर गोस्वामी ने कहा, “बाद में वो भी बेटियाँ आईं और हमसे माफ़ी माँगने लगीं। हमने कहा कि हमसे ही कोई पाप हुआ जो हमें ये दंड भुगतना पड़ा।” ‘आप क्या चाहते हैं?’ वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि वो कुछ नहीं चाहते हैं, कोई सज़ा नहीं चाहते हैं। उन्होंने बताया कि अब वो गंगासागर भी नहीं जाएँगे क्योंकि उनकी गाड़ी टूट गई है। साथ ही बताया कि अब वो अपने आश्रम को लौट रहे हैं।

वहीं पुरुलिया से लोकसभा सांसद और राज्य में भाजपा के जनरल सेक्रेटरी ज्योतिर्मय सिंह महतो ने इन साधुओं से मुलाकात कर के उन्हें सम्मानित किया और उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने पीड़ित साधुओं से बातचीत कर के जाना कि उनके साथ क्या-क्या हुआ। उन्होंने उनकी सुरक्षित वापसी की भी व्यवस्था कराई। भाजपा के IT सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि राज्य की सत्ताधारी TMC का गुंडा अनवर शेख का इस हमले में हाथ है, जो पश्चिम बंगाल पुलिस में ‘सिविक वालंटियर’ भी है।

वहीं अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने भी इस घटना को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वहाँ की CM का नाम ममता बनर्जी नहीं बल्कि ‘मुमताज खान’ है जो भगवा रंग देखते ही भड़क जाती हैं। उन्होंने कहा कि वेस्ट बंगाल में हो रही हिन्दू विरोधी घटनाओं के पीछे वहाँ की मुख्यमंत्री का ही हाथ है। उन्होंने इस दौरान रामनवमी की शोभा यात्रा पर हमला और दुर्गा पूजा के पंडालों पर हमले का मामला भी उठाया।

सत्येंद्र दास ने कहा कि साधुओं के भगवा वस्त्र देख कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को और भी क्रोध आ जाता है, इसीलिए वो उन पर हमले कराती हैं। बता दें कि साधुओं से मारपीट के मामले में अब तक 12 गिरफ्तार किए जा चुके हैं। बता दें कि साधुओं ने रास्ते में लड़कियों से रास्ता पूछा था, जिसके बाद ये घटना हुई। वो मकर संक्रांति स्नान में हिस्सा लेने गंगासागर जा रहे थे। पुलिस ने भी माना है कि साधु रास्ता भटक गए थे और इसीलिए उन्होंने रास्ता पूछा था।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुकांता मजूमदार ने भी कहा कि साधुओं को निर्वस्त्र कर के उन्हें TMC के गुंडों द्वारा पीटा गया, जो पालघर त्रासदी की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के शासन में हिन्दू होना अपराध है, जबकि शाहजहाँ जैसों को सुरक्षा मिलती है। संदेशखाली में तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शाहजहाँ शेख ने अपने गुर्गों के साथ ED अधिकारियों की हत्या का प्रयास किया था। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे ‘पालघर पार्ट 2’ करार दिया है।

राजस्थान विधानसभा चुनाव: बदला राज, नहीं बदला रिवाज; लेकिन तेलंगाना में बीजेपी ने झंडा बुलंद किया

राजस्थान में विधानसभा चुनावों के नतीजों से साफ हो गया है कि राज्य में बीजेपी बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। राज्य में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार की हार के के साथ ही राजस्थान में कई वर्षों से हर बार सरकार बदलने का रिवाज कायम रहा है। कांग्रेसी शासन से परेशान मतदाताओं ने राज्य में राज बदलकर पार्टी को सबक सिखाने का भी काम किया है।

राजस्थान में पिछले कई वर्षो से एक बार बीजेपी तो एक बार कांग्रेस का राज आने का रिवाज बना हुआ है। यानी राजस्थान में जनता एक बार कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका देती है तो दूसरी बार बीजेपी को यह अवसर मिल जाता है। कांग्रेसी शासन में महिलाओं के खिलाफ अपराध, पेपर लीक और तुष्टिकरण की राजनीति से त्रस्त राज्य की जनता ने बीजेपी की सबका साथ-सबका विकास वाली राजनीति पर विश्वास करते हुए रिवाज का कायम रखा है। इसलिए बीजेपी को ज्यादा खुश होने की जरुरत भी नहीं। लेकिन इन विधान सभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की झाड़ू कहां उड़ गयी कुछ नहीं पता? सब जगह खूब दिल्ली की तरह मुफ्त की रेवड़ियां भी देने का वायदा किया था, कोई दिल्ली वालों की तरह झांसे में नहीं आया। 

कांग्रेस ने राजस्थान में राज बचाने के लिए अपनी पूरी तात झोंक दी थी। पार्टी के सभी बड़े नेता जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुटे रहे। मतदाताओं को फ्री रेवड़ी से लुभाने की कोशिश की गई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हर चुनावी सभा में कह रहे थे कि फिर से वापस आ रहा हूं। लेकिन पांच साल तक उनके प्रदर्शन को देख लोगों ने उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया और राज बदल दिया।

राजस्थान में 25 नवंबर को राज्य की 200 में से 199 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान के बाद 3 दिसंबर को हुई मतगणना में सुबह से ही रुझान बीजेपी के पक्ष में दिखने लगे। बीजेपी ने जल्दी ही 115 से ज्यादा सीटों पर अपनी बढ़त बना ली। रुझानों में बहुमत मिलते दिख बीजेपी कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। पार्टी कार्यालय के सामने कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों की ताल पर नाचते दिख रहे हैं।

राजस्थान में राज बदलकर सरकार बनाने जा रही बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साथा है। बीजेपी ने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर एक लिखा है कि राजस्थान की जनता के गुस्से की आंधी में उड़ी कांग्रेस सरकार।

बीजेपी नेता जयवीर शेरगिल ने कहा कि बीजेपी इस विधानसभा चुनाव में 3-0 से जीत रही है। बीजेपी का विजय रथ मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जरूर आएगा। इस बार नहीं तो तेलंगाना में, भाजपा अगली बार राज्य में अपना झंडा बुलंद करेगी। 

भाजपा का टी राजा सिंह को निष्कासित करना बहुत बड़ी भूल थी। जिसका नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ा। यदि भाजपा ने राजा को ओवैसी के षड़यंत्र में फंस पार्टी से निकालने की बजाये उसके समर्थन में खड़ी होती, निश्चित रूप अगर सत्ता में नहीं आती तो शक्तिशाली विपक्ष बनकर उभरती। जिसमें ओवैसी सफल हो गया। ओवैसी को उसके गढ़ तक समेटे रखने में राजा की भूमिका को नाकारा नहीं जा सकता।   

मेरे लोगों को टिकट नहीं दिया, कांग्रेस छोड़ रहा हूँ: दिग्विजय सिंह का ‘इस्तीफा’ वायरल

दिग्विजय सिंह का कॉन्ग्रेस से इस्तीफा?
मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए नवरात्र के पहले दिन कांग्रेस ने उम्‍मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इसमें 144 प्रत्‍याशियों के नाम है। हालाँकि, इस लिस्‍ट के आने के कुछ ही देर बाद तब हंगामा मच गया जब पूर्व मुख्‍यमंत्री व राज्‍यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का इस्‍तीफा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

जिसके बाद सोशल पर यह प्रश्न किया जाने लगा कि क्या मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया? ऐसा इसलिए पूछा जा रहा है, क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पत्र जमकर वायरल हो रहा है। जिसमें इस्तीफे की बात थी, हालाँकि, दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफे की बात को सिरे से खारिज कर दिया।

सोशल मीडिया एक्स पर कांग्रेस प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे से जुड़ा हुआ दिग्विजय सिंह का एक पत्र वायरल हुआ।

वायरल हुए लेटर में लिखा हुआ है, “अपने पाँच दशक के राजनीतिक सफर में कई अनुभव मुझे कांग्रेस में रहते हुए मिले। एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक का सफर मैंने कॉन्ग्रेस पार्टी में रहते हुए तय किया। पार्टी ने मुझे राष्‍ट्रीय महासचिव से लेकर राज्‍यसभा सदस्य जैसे महत्‍वपूर्ण पद तक पहुँचाने का काम किया, जिसके लिए मैं आजीवन आभारी रहूँगा, लेकिन गत कुछ महीनों से शीर्ष नेतृत्‍व में उदासीनता देखकर मैं आहत हूँ। मध्‍य प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ता केंद्र‍ित दल न होकर अब विशेष नेता केंद्रित हो गई है। जिसकी वजह से खुद को असहज पा रहा हूँ।

                                                       दिग्विजय सिंह का वायरल हुआ पत्र

मध्‍य प्रदेश चुनाव को लेकर प्रत्‍याशियों के चयन में मेरे द्वारा दिए गए नामों पर विचार नहीं किया गया है। निष्‍ठावान कार्यकर्ताओं को तरजीह नहीं दिए जाने से मेरे स्‍वाभिमान को ठेस पहुँची है। मैं अब ऐसे पड़ाव पर पहुँच गया हूँ जहाँ मुझे लगता है कि मैं अब ऐसे अन्यायपूर्ण माहौल में नही रह सकता।

मैं उन सभी के प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूँ जिन्‍होंने वर्षों से मेरी विभिन्‍न पार्टी भूमिकाओं में मेरा समर्थन किया है। भारी मन से मैं पार्टी के साथ अपना जुड़ाव खत्‍म करने के अपने फैसले की घोषणा करता हूँ। कांग्रेस की प्राथमिक सदस्‍यता समेत सभी पद से इस्‍तीफा देता हूँ। इसे स्‍वीकार करें।”

हालाँकि, इस पत्र के वायरल होने के कुछ ही देर बाद उन्होंने इस पत्र के फेक होने का दावा करते हुए कांग्रेस से इस्तीफे की बात को झूठ करार दिया।

इस्‍तीफे को लेकर क्‍या बोले दिग्विजय सिंह

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपने इस्तीफे की बात को ख़ारिज करते हुए कहा कि भाजपा झूठ बोलने में माहिर है। मैंने 1971 में कांग्रेस की सदस्यता ली थी। पद के लिए नहीं, बल्कि विचारधारा से प्रभावित हो कर जुड़ा था और जीवन की आखिरी साँस तक कांग्रेस में रहूँगा। इस झूठ की मैं पुलिस में शिकायत दर्ज करा रहा हूँ।
कांग्रेस नेता ने इस मामले में डीजीपी मध्य प्रदेश को पत्र लिखकर FIR दर्ज करने को कहा है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर अपनी शिकायत पोस्ट करते हुए लिखा,”महोदय क्या आप इन झूठे लोगों पर FIR दर्ज़ करेंगे?”

‘BJP के पहले PM थे नरसिम्हा राव, केवल आडवाणी की सुनते थे’: मणिशंकर अय्यर ने गिनाई राजीव की ‘भूल’, कहा- राम मंदिर का ताला खोलना गलत किया

मणिशंकर अय्यर अपनी किताब "मेमोयर्स ऑफ ए मेवरिक" में पीवी नरसिम्हा राव, राजीव गाँधी से जुड़ी यादें साझा कीं (फोटो साभार-एबीपी/पीवी नरसिम्हा राव ट्विटर/इंडिया टुडे)
कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मणिशंकर अय्यर ने 21 अगस्त को अपनी किताब ‘मेमोयर्स ऑफ ए मेवरिक- द फर्स्ट फिफ्टी इयर्स (1941-1991)’ लॉन्च की। इस दौरान उन्होंने देश के पूर्व और दिवगंत प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के हिंदुत्व के प्रति झुकाव सहित कई राजनीतिक विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कांग्रेस पार्टी में अरुण नेहरू का प्रभाव, शाह बानो मामला और पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्तों पर अपना नजरिया साझा किया।

अय्यर ने कहा कि वो अटल बिहारी वाजपेयी की जगह कांग्रेस नेता पीवी नरसिम्हा राव को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पहले प्रधानमंत्री मानते हैं। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि नरसिम्हा राव को धर्मनिरपेक्ष होने से हमेशा एतराज रहा। अय्यर का आरोप है कि राव कांग्रेस के सांप्रदायिक नेता थे। इस दौरान उन्होंने सोनिया गाँधी की तारीफ की। उन्होंने कहा राजीव गाँधी की मौत के बाद उनका राजनीति में आना सराहनीय रहा।

अय्यर का कहना था, “मैंने कभी भी खुद संस्मरण लिखने पर विचार नहीं किया था, खासकर क्योंकि यह कल्पना करना बहुत अहंकारपूर्ण है कि आपका जीवन दूसरों के लिए दिलचस्प हो सकता है। मेरे प्रकाशक ने मुझे लिखने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि उसे लगा कि मैं पाठक का मनोरंजन करूँगा। एक बार जब मैं आगे बढ़ा तो मैंने सोचना शुरू कर दिया कि मैं क्या लिखूँगा और कैसे लिखूँगा।”

क्यों कहा नरसिम्हा राव को बीजेपी का पहला पीएम?

गाँधी परिवार के करीबी मणिशंकर अय्यर ने किताब की लॉन्चिंग के मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव से जुड़ा एक किस्सा साझा किया। अय्यर ने उस वक्त अपनी ‘राम-रहीम’ यात्रा निकालने के दौर को याद करते हुए दोनों के बीच हुई बातचीत को साझा किया।
उन्होंने बताया कि पीएम रहते नरसिम्हा राव ने उनसे कहा था, “उन्हें मेरी यात्रा पर कोई एतराज नहीं है, लेकिन वो धर्मनिरपेक्षता की मेरी परिभाषा से इत्तेफाक नहीं रखते थे। उन्होंने मुझसे उस वक्त कहा था, “मणि तुम यह नहीं समझते कि यह एक हिंदू देश है।”
अय्यर ने आगे कहा कि राव की ये बात सुनकर वो अपनी कुर्सी पर बैठ गए और उनसे कहा कि बीजेपी बिल्कुल यही कहती है। तब उन्होंने सोचा कि बीजेपी के पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं, बल्कि पहले प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव थे। वह भाजपा के पहले प्रधानमंत्री थे। वह सिर्फ लालकृष्ण आडवाणी की सुनते थे।

‘सोनिया की वजह से बचा रहा पार्टी में’

इस मौके पर अय्यर ने इस बात का भी जिक्र किया कि किस तरह राजीव गाँधी की मौत के बाद कुछ लोगों ने पार्टी से उन्हें किनारे करने की कोशिश की थी, लेकिन वो केवल सोनिया गाँधी की वजह से पार्टी में बचे रह गए थे।
इस मौके पर उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के साथ अपने संबंधों पर भी बात की। अय्यर ने दिसंबर 1978 से जनवरी 1982 तक कराची में महावाणिज्य दूत के तौर पर काम किया था। इस दौरान उन्होंने इस पर भी चर्चा की।

‘मैं राजीव गाँधी का विश्वासपात्र नहीं था’

रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकार वीर सांघवी के साथ बातचीत के दौरान अय्यर ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के आसपास के उन लोगों की खुलकर आलोचना की, जिन्होंने कथित तौर पर राजनीति में उनके प्रवेश में भूमिका निभाई थी।
जगरनॉट से पब्लिश हुई अपनी किताब में उन्होंने खासतौर पर कांग्रेस में अरुण नेहरू के बढ़ते प्रभाव के बारे में फिक्र जताई थी। उन्होंने इस दौरान ये भी खुलासा किया कि ये पूरी तरह से गलत धारणा में थे कि ‘मैं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी का विश्वासपात्र था’।
अय्यर ने इस दौरान पूर्व पीएम राजीव गाँधी के दौर को याद करते हुए कहा कि उनकी परेशानी थी कि वो राजीव के भरोसेमंद नहीं थे। उन्हें लगता था की कि राजीव उनके बारे में राजनीतिक तौर से अनुभवहीन होने की सोच रखते थे, क्योंकि उनसे कभी भी राजनीतिक मुद्दे पर कोई सलाह नहीं ली गई।
उन्होंने बताया की कि जब अचानक ये ऐलान किया गया की राजीव गाँधी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं तो उन्हें हैरानी हुई थी। उन्होंने सोचा कि इंडियन एयरलाइंस का पायलट रहा शख्स देश कैसे चलाएगा। बाद में राजीव गाँधी को देश चलाते हुए देखकर उनकी तारीफ करने लगे थे।
अय्यर ने ये भी कहा कि राजीव गाँधी सबसे ईमानदार, स्पष्टवादी और सिद्धांतवादी नेता थे। उनमें वीपी सिंह जैसी कुटिलता या चालाकी नहीं थी। अपनी किताब में अय्यर ने भारतीय राजनीति के दो विवादास्पद मुद्दों- बाबरी मस्जिद विध्वंस और शाहबानो केस का भी जिक्र किया है।
अय्यर से जब बाबरी ढाँचे पर राजीव गाँधी के रूख को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ‘शिलान्यास गलत था’। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि राजीव गाँधी ने जो सबसे बड़ी गलती की, वह भयानक आरके धवन को पीएमओ में लाना था। धवन ने PMO का राजनीतिकरण कर दिया, वर्ना पिछले चार साल से यह राजनीति में शामिल बिना पूरी तरह से तकनीकी ऑफिस के रूप से काम कर रहा था।”
लेकिन अय्यर Calcutta High Court में दर्ज कुरान की 124 आयतों के विरुद्ध मुक़दमे में क्या भूमिका थी? दूसरे, दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट द्वारा 24 आयतों के विरुद्ध निर्णय में राजीव गाँधी की भूमिका पर क्यों चुप्पी साध ली? 
Some Articles Of The Quran Are Harmful-Delhi Magistrate Z.s. Lohat
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Some Articles Of The Quran Are Harmful-Delhi Magistrate Z.s. Lohat
SOME ARTICLES OF THE QURAN ARE HARMFUL-DELHI MAGISTRATE Z.S. LOHAT by Sarita Nair on Tuesday, 15 March 2011 at 11:23 SOME ARTICLES OF THE QURAN ARE HARMFUL,TEACH HATRED AND CREATE DIFFERENCES BETWEEN MOHAMMEDANS AND OTHER COMMUNITIES – DELHI MAGISTRATE Z.S. LOHAT I am enclosing herewith a copy of....

शाहबानो मामले में अय्यर ने इसकी जटिलताओं को स्वीकार किया और राजीव गाँधी के करीबी लोगों खासकर आरिफ मोहम्मद खान की जमकर आलोचना की। उन्होने कहा कि उस वक्त के हालातों को गलत तरीके से सँभाला गया।

‘पाकिस्तान नहीं दुश्मन देश’

पाकिस्तान की जमकर तारीफ करने वाले अय्यर ने अपनी किताब पर पीटीआई के साथ इंटरव्यू में कराची में अपने कार्यकाल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि उनके नौकरशाही करियर का सबसे बेहतरीन वक्त पाकिस्तान में तीन साल महावाणिज्य दूत के रूप में कराची का कार्यकाल था।
पाकिस्तान में महावाणिज्य दूत के अपने कार्यकाल को याद करते हुए अय्यर ने कहा, “पोस्टिंग के पहले दो-तीन हफ्तों के भीतर हम एक दिन डिनर से वापस आ रहे थे। उस दौरान मेरी पत्नी सुनीत ने मुझसे एक सवाल पूछा- ‘यह एक दुश्मन देश है। है ना’? यह कराची में रहने के दौरान मेरे दिमाग में गूंजता रहा।”
उन्होंने पीटीआई को बताया, “मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि सेना के किसी भी वर्ग या राजनीति के किसी भी वर्ग का नजरिया कुछ भी हो। जहाँ तक पाकिस्तान के लोगों का सवाल है, वे न तो दुश्मन देश हैं और न ही वे भारत को दुश्मन देश मानते हैं।”
इसके अलावा, अय्यर ने पाकिस्तान के संबंध में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नीति की आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि अपने पड़ोसी की उपेक्षा करना बेतुका है। उन्होंने जुड़ाव, लोगों से लोगों के बीच संपर्क और सद्भावना की वकालत की। अय्यर ने कहा, “जब हम यही नहीं जानते कि अपने पड़ोसी के साथ क्या करना है, तब भारत को ‘विश्वगुरु’ कहना हास्यास्पद है।”
नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी, सलमान खुर्शीद सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद थे। इसके अलावा, इस दौरान कई पत्रकार, लेखक और एवं अन्य हस्तियों ने भाग लिया।

राहुल गांधी की ओछी हरकत: लोकसभा में महिला सांसदों को दिया फ्लाइंग किस

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी ने आज 9 अगस्त को संसद में एक ओछी हरकत कर दी। जिसको लेकर उनकी थू-थू हो रही है। राहुल की इस हरकत से हैरान वाली कोई बात नहीं, इस कटु सच्चाई को जानने के लिए हमें मोती लाल और जवाहर लाल के इतिहास को जानना होगा। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर जारी चर्चा के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी अपना संबोधन पूरा करने के बाद सदन से रवाना हो गए। लेकिन रवाना होने से पहले वो एक छिछोरी हरकत कर गए। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी ने संसद से बाहर जाते समय महिला सांसदों को लक्ष्य करके फ्लाइंग किस के इशारे किए। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने उनपर अभद्र इशारे करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अध्यक्ष जी एक बात पर मैं आपत्ति जाहिर करना चाहती हूं। जिनको आज मुझसे पहले बोलने का अधिकार दिया गया, उन्होंने जाते-जाते एक अभद्र लक्षण के दर्शन दिए। यह कोई अभद्र शख्स ही महिला सांसदों को फ्लाइंग किस दे सकता है। ऐसे गरिमाविहीन आचरण को इस देश के सदन में कभी नहीं देखा गया। यह उस खानदान के लक्षण हैं ये आज देश को पता चल गया।

संसद में राहुल गाँधी अपनी बात कह कर चलते बने, उनके उत्तर में स्मृति ईरानी ने क्या कहा इसे सुनने के लिए वो सदन में मौजूद नहीं थे। जहाँ राहुल गाँधी ने ‘मणिपुर में भारत माता की हत्या’ और ‘हनुमान ने लंका नहीं जलाई थी’ जैसी बातें की, वहीं स्मृति ईरानी ने उन्हें जवाब देते हुए कश्मीर में गिरिजा टिक्कू और बेंगलुरु में स्नेहलता रेड्डी के साथ हुई क्रूरता की याद दिलाई। इस दौरान स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी को महिला विरोधी भी करार दिया।

‘राहुल गाँधी महिला विरोधी हैं’: बिना नाम लिए स्मृति ईरानी ने साधा निशाना

स्मृति ईरानी ने कहा, “जिनको आज मुझसे पहले वक्तव्य देने का अधिकार दिया गया, उन्होंने जाते-जाते एक अभद्र लक्षण के दर्शन कराए। वो एक महिला विरोधी व्यक्ति हैं, जो संसद में फ़्लाइंग किस दे सकते हैं, वो भी जहाँ 6 महिला संसदें बैठी हुई हों। ऐसी गरिमा-विहीन आचरण को इस सदन में कभी नहीं देखा गया। ये उस खानदान के लक्षण हैं, ये आज सदन में देश को पता चल गया। लेकिन वो जहाँ गए हैं, वहाँ पर क्या हालात हैं?”
राहुल गाँधी संसद में अपना भाषण खत्म कर सीधे राजस्थान गए, जहाँ वो एक ट्राइबल रैली में शामिल हो रहे हैं। स्मृति ईरानी ने राजस्थान की मीडिया रिपोर्ट्स के हवाला देते हुए कहा कि वहाँ की कांग्रेस की सरकार देश की तिजोरी से पैसा लूट रही है। स्मृति ईरानी ने कहा कि इनका सरकार महिला-उत्थान से नहीं है, महिलाओं के बारे में वो क्या सोचते हैं इस बारे में उनके नेता ने जाते-जाते बता दिया है।
स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस के नेता का सरोकार चीन से है। केंद्रीय मंत्री ने ये भी कहा कि चीन में कांग्रेस पार्टी के नेता बहुत रुचि लेते हैं। उन्होंने इस दौरान बताया कि चीन में आयोजित ’31st यूनिवर्सिटी गेम्स’ में भारत को इस बार 26 (11 स्वर्ण, 5 रजत पदक) मेडल मिले और ये रिकॉर्ड हिंदुस्तान के बच्चों ने स्थापित किया। 1959 से अब तक मात्र 18 मेडल ही मिल पाए थे। स्मृति ईरानी ने कहा कि भारत माता के टुकड़ों के लिए ताली बजाने वाले भारत की उपलब्धि पर तो ताली बजा दें।

संसद में स्मृति ईरानी का पलटवार

उन्होंने कहा कि भारत माँ की हत्या पर कांग्रेस ने ताली पीट कर बता दिया है कि गद्दारी किसके मन में है। उन्होंने कहा – मणिपुर खंडित नहीं है, देश का अंग है। उन्होंने पूछा कि कांग्रेस अपने गठबंधन साथी डीएमके के हटा द्वारा भारत पर दिए बयान का खंडन करे, कश्मीर पर रेफरेंडम की बात करने वाले कांग्रेस नेता की निंदा करें। उन्होंने कहा कि आप भारत नहीं हैं, क्योंकि आप भ्रष्टाचार और अयोग्यता का प्रतीक हैं। स्मृति ईरानी के अनुसार, यूपीए के नेता ने तमिलनाडु में भारत विरोधी बयान दिया।
उन्होंने याद दिलाया कि कश्मीर में राहुल गाँधी अपने परिजनों के साथ बर्फ खेल रहे थे, ये इसीलिए संभव हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद-370 को निरस्त किया। उन्होंने कहा कि इसी की वजह से कश्मीर की बेटियों को दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया जाता था तो उन्हें कानून का सहारा नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाहर ब्याही जाने पर उन बेटियों को पैतृक संपत्ति पर हक़ नहीं मिलता था। 14 से कम उम्र की बच्चियों का विवाह होता था तो उन्हें कानून का संरक्षण नहीं मिलता था।
स्मृति ईरानी ने इस दौरान कश्मीर में पंडितों पर अत्याचार और गिरिजा टिक्कू के साथ हुई वारदात को भी याद किया। इस दौरान राहुल गाँधी सदन से निकल कर राजस्थान से निकल गए। स्मृति ईरानी ने याद दिलाया कि कैसे कश्मीर में गिरिजा टिक्कू को आड़ी से काट डाला गया था, राजस्थान के भीलवाड़ा में बच्ची के साथ गैंगरेप कर के उसे काटा गया और भट्ठी में डाल दिया गया। उन्होंने पूछा कि आज जो जोर-चोर से चिल्ला रहे हैं, तब उन्होंने न्याय की गुहार नहीं लगाई जब पश्चिम बंगाल में 60 साल की महिला का गैंगरेप हुआ।

‘देश का नाम India हटा कर सिर्फ भारत रखा जाए, गुलामी और दासता से मुक्ति मिले’: अनुच्छेद-1 संशोधित हो: नरेश बंसल, भाजपा के राज्यसभा सांसद

भाजपा के राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने माँग की है कि देश का नाम सिर्फ ‘भारत’ रखा जाए और ‘इंडिया’ को हटा दिया जाए। बता दें कि विपक्षी दलों ने मिल कर एक आया गठबंधन ‘I.N.D.I.A’ बनाया है। उन्होंने कहा कि अभी जब आज़ादी का अमृत काल चल रहा है, संविधान के अनुच्छेद-1 को संशोधित कर के इस पुण्य पावन धरा का नाम केवल ‘भारत’ रखा जाना चाहिए। विपक्षी दल लगातार ‘मोदी बनाम इंडिया’ वाल नैरेटिव चला कर देश के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि विगत स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा था कि देश को दासता के चिह्नों से मुक्ति दिलाए जाने की आवश्यकता है। बता दें कि प्रधानमंत्री ने ‘5 प्रण’ की बात की थी, जिसमें गुलामी की मानसिकता से देश को मुक्ति दिलाने की बात कही गई थी। नरेश बंसल ने कहा कि औपनिवेशिक सोच से मुक्ति दिलाने की ज़रूरत है और परंपरागत भारतीय मूल्यों और सोच को लागू करने की आवश्यकता है।

 नरेश बंसल ने कहा, “आज़ादी के अमृत महोत्सव से देश को एक नई ऊर्जा और प्रेरणा मिली है। गुजरे हुए कल को हम पीछे छोड़ रहे हैं और आने वाले भविष्य में रंग भर रहे हैं। अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे कई कानूनों को बदला गया है। भारतीय बजट की तारीख़ भी बदली गई है, जो अब तक अंग्रेजी नियमों का अनुसरण कर रहा था। नई शिक्षा नीति के तहत युवाओं को विदेशी भाषा से आज़ाद किया जा रहा है। इंडिया गेट पर जॉर्ज पंचम की मूर्ति हटा कर नेताजी बोस की लगाई गई।”

नरेश बंसल ने कहा कि अंग्रेजों ने 250 वर्षों तक भारत पर राज़ किया और देश का नाम बदल कर ‘इंडिया’ रख दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों के कारण राष्ट्र को स्वतंत्रता मिली, और 1950 में भारत का संविधान लिखा तब, तब भी इसे ‘इंडिया दैट इज भारत’ कहा गया। उन्होंने कहा कि अब इसे हटा कर ‘भारत’ करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि महाराज भरत ने संपूर्ण देश को विस्तार किया और उनके नाम पस ये देश भारत कहलाया।


पश्चिम बंगाल : ‘हमलोग भी महिला हैं, हमारी बेटियाँ कहाँ जाएँगी’: फूट-फूटकर रोईं बंगाल की बीजेपी MP, कहा- TMC के गुंडों ने हाथों में बंदूकें, उम्मीदवार को नंगा कर घुमाया

 

                                  BJP सांसद लॉकेट चटर्जी बंगाल की घटना का जिक्र करते हुए रो पड़ीं
हम लोग भी महिला हैं। हम लोग भी देश की बेटी हैं। हम लोग कहाँ जाएँगे।

यह सवाल है पश्चिम बंगाल से बीजेपी की सांसद लॉकेट चटर्जी का। शुक्रवार (21 जुलाई 2023) को मीडिया से बात करते हुए वह फूट-फूटकर रोने लगीं। वे पार्टी के बंगाल अध्यक्ष सुकांत मजूमदार के साथ पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा की घटनाओं पर बात कर रहीं थी। 8 जुलाई को मतदान के दिन एक महिला उम्मीदवार को नंगा कर गाँव में घुमाने का मामला सामने आया है।

चटर्जी ने पत्रकारों से कहा, “आपलोग बताइए हम लोग कहा जाएँगे। हम भी महिलाएँ हैं। हम भी अपनी बेटियों को बचाना चाहते हैं। हम भी देश की बेटियाँ हैं। पश्चिम बंगाल देश का एक हिस्सा है। पीएम मोदी ने कल मणिपुर घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि हर राज्य में महिला सुरक्षा के लिए कानून-व्यवस्था का काम होना चाहिए। हमारे लिए भी आप लोग कुछ बात करें। हमारी बेटियाँ कहाँ जाएँगी।” नीचे वीडियो में आप 10 मिनट 11 सेकेंड से चटर्जी का यह बयान सुन सकते हैं।

बंगाल की हिंसा पर कॉन्ग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए चटर्जी ने कहा कि राज्य में यह सब कुछ तब हो रहा है जब एक महिला मुख्यमंत्री (ममता बनर्जी) हैं। उन्होंने पूछा कि महिला प्रत्याशी को नग्न कर जो अत्याचार किए गए क्या उसकी जाँच होगी? चटर्जी ने कहा कि साउथ पांचला की इस घटना का वीडियो नहीं है, क्योंकि सभी की हाथों में बंदूकें थीं। उन्होंने कहा, “बंगाल में पंचायत के चुनाव नहीं बल्कि खून के चुनाव हुए। इसमें बहुत हिंसा और महिलाओं के साथ अत्याचार हुए। ममता बनर्जी एक महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद भी महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को रोक नहीं रही हैं।”

वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने कहा कि मणिपुर में जो घटना हुई, उसे लेकर उत्तेजना पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे दुःखद घटना बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और कहा कि कहीं भी ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए। इसके बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित साउथ पांचला की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहाँ भाजपा के लिए पंचायत चुनाव लड़ने वाली एक महिला को नग्न कर घुमाया गया।

सुकांता मजूमदार ने पूछा कि क्या ये मणिपुर से कम दुःखद घटना है? उन्होंने कहा कि अंतर सिर्फ इतना है कि इसका वीडियो उपलब्ध नहीं है, क्योंकि ‘ममता बनर्जी के गुंडे’ किसी को वीडियो बनाने नहीं दे सकते। इस दौरान उन्होंने अख़बारों के हवाले से 2 घटनाओं का जिक्र किया, जिनमें से एक उत्तरी बंगाल स्थित अलीपुरद्वार की है और एक दक्षिणी बंगाल के बीरभूम की। उन्होंने बताया कि एक महिला को नग्न कर के और गदहे की पीठ पर बिठा कर घुमाया गया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं का कारण जो भी हो, लेकिन महिलाओं के सम्मान के साथ पश्चिम बंगाल में जिस तरह से खिलवाड़ किया जा रहा है वो चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की रिपोर्ट में भी ये सामने आ चुका है। 

ANI की रिपोर्ट के अनुसार पांचला में महिला उम्मीदवार को पीटा गया। सरेआम छेड़छाड़ की गई। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार एक महिला उम्मीदवार ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं पर छेड़छाड़ और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए नामजद शिकायत की है। कहा है कि आठ जुलाई को उसे नंगा कर पूरे गाँव में घुमाया गया। महिला ने बताया है कि टीएमसी के करीब 40 से 50 गुंडों ने उसके साथ मारपीट की। उसके सीने और सिर पर डंडे से हमला किया। उसे मतदान केंद्र के बाहर फेंक दिया। रिपब्लिक की रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित महिला के अनुसार उसके कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई। उसे नग्न होने के लिए मजबूर किया गया। उसे गलत तरीके से छुआ गया और सरेआम छेड़छाड़ की गई। 

अवलोकन करे:- 

पश्चिम बंगाल : TMC गुंडों ने ‘साड़ी फाड़ी, अंडरवियर उतारा, नंगा घुमाया’

पीड़िता के अनुसार जब टीएमसी के कुछ कार्यकर्ता उसके साथ मारपीट कर रहे थे तो उनके एक नेता ने उन्हें उनके कपड़े फाड़ने के लिए उकसाया। बंगाल भाजपा के सह प्रभारी अमित मालवीय ने ट्वीट कर दावा किया है इस मामले में एफआईआर भी तब दर्ज की गई, जब बीजेपी ने इसके लिए दबाव बनाया।

न NDA-न INDIA, अकेले लोकसभा चुनाव लड़ेगी BSP: मायावती- कांग्रेस के साथी भी उसके जैसे ही जातिवादी और पूँजीवादी

2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए से मुकाबले के लिए कांग्रेस विपक्षी दलों को एक साथ लाने के प्रयास कर रही है। इस क्रम में 18 जुलाई 2023 को बेंगलुरु में 26 दलों की बैठक हुई और गठबंधन का नाम INDIA रखा गया। इसी दिन 39 दलों वाले NDA की बैठक भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई।

लेकिन जनता दल (सेक्युलर) JD(S), शिरोमणि अकाली दल (SAD), बहुजन समाज पार्टी (BSP), बीजू जनता दल (BJD), भारत राष्ट्र समिति (BRS), युवजन श्रमिक रायथु कांग्रेस पार्टी (YSRCP), इंडियन नेशनल लोक दल (INLD), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) जैसे कुछ दल ऐसे भी हैं जो न तो विपक्ष की बैठक में दिखे और न एनडीए की। इनमें से बसपा ने अब अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है। वह न तो एनडीए के साथ जाएगी और न विपक्षी गठबंधन के साथ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने 19 जुलाई 2023 को बताया कि उनकी पार्टी अकेले लोकसभा चुनाव लड़ेगी।

मायावती ने विपक्षी गठबंधन और एनडीए दोनों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने जैसी जातिवादी और पूँजीवादी सोच रखने वाली पार्टियों के साथ गठबंधन कर फिर से केंद्र की सत्ता में आने का सपना देख रही है। वहीं बीजेपी भी फिर से सत्ता में आने के लिए एनडीए को मजबूत बनाने में लगी है। साथ ही सत्ता में वापसी के दावे कर रही है। 300 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रही है। लेकिन उनकी कथनी और करनी में भी विपक्षी गठबंधन की तरह ही अंतर है।

मायावती ने कहा, “हम अकेले चुनाव लड़ेंगे। हम राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना में अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे। हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों में वहाँ की क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं।” विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनने को लेकर बसपा सुप्रीमो ने कहा, “ये पार्टियाँ लोगों के कल्याण के लिए काम नहीं करतीं। उन्होंने दलितों, मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के लिए कुछ नहीं किया है। सभी एक जैसे हैं। सत्ता में आते ही अपने वादे भूल जाते हैं। उन्होंने जनता से किया एक भी वादा पूरा नहीं किया। चाहे वह कांग्रेस हो या बीजेपी। यही सबसे बड़ा कारण है कि बीएसपी ने विपक्ष के साथ हाथ नहीं मिलाया है।”

जैसे 2024 से पहले बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत गठबंधन बनाने की कोशिश हो रही है, ऐसा ही प्रयोग 2019 के आम चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में हुआ था। सपा और बसपा ने पुराने मतभेद भूलाकर हाथ मिलाए थे। लेकिन ये चुनावों में बीजेपी को तगड़ी चुनौती देने में नाकाम रहे थे। इसके बाद दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए थे।

‘बंगाल मतलब बाकी देश से अलग, इसे बचाने के लिए राष्ट्रवादी क्रांति जरूरी’: पंचायत चुनाव में हिंसा, समाज, सिस्टम, अर्थव्यवस्था पर स्वप्न दासगुप्ता

पश्चिम बंगाल में हाल ही में पंचायत चुनाव संपन्न हुए, जिसमें भाजपा ने 22.88% वोट शेयर हासिल किया और 10,000 से भी अधिक सीटें हासिल की। ये सब इसके बावजूद हुआ, जब चुनाव में राज्य भर में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। कहीं से बूथ लूटने की खबरें आईं तो कहीं-कहीं भाजपा प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं पर हमले किए गए। कहीं बैलेट बॉक्स को ही आग के हवाले कर दिया गया तो कहीं मतपेटी पर पानी उड़ेल दिया गया।

इन सबके बीच हमने स्वप्न दासगुप्ता से बात की, 2 बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में काम करने के लिए पद्म भूषण का पुरस्कार पा चुके 67 वर्षीय स्वप्न दासगुप्ता 1990 से ही भाजपा से जुड़े हुए हैं। वो ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी स्थित नफ़ील्ड कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट फेलो भी रहे हैं। उन्होंने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘इंडिया टुडे’ और ‘द स्टेट्समैन’ जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में संपादकीय जिम्मेदारियाँ निभाई हैं।

सवाल: बंगाल में 40 से ज्यादा लोगों की हत्या पंचायत चुनाव में कर दी जाती है। तृणमूल से अलग जिन लोगों ने जीत दर्ज की, उनमें से कुछ डर के कारण असम चले गए। डर के इस माहौल में लोकतंत्र को आप कहाँ देखते हैं? क्या सिर्फ वोटिंग करवाना ही लोकतंत्र है?

जवाब: देखिए, इस बार जो पंचायत चुनाव हुआ है इसमें हिंसा सिर्फ मतदान के दौरान ही नहीं हुई है, बल्कि जिस दिन नामांकन की प्रक्रिया हुई उसी समय से ये शुरू हो गया और अब काउंटिंग के बाद तक भी ये चल रहा है। 50 लोगों की हत्या कर दी गई है। इनमें सभी पार्टियों के लोग हैं – TMC, भाजपा, लेफ्ट और ISF (इंडियन सेक्युलर फ्रंट)।

हिंसा अधिकतर मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाकों में हुई है। इसके पीछे कारण ये है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कॉन्ग्रेस ने मुस्लिमों के सारे वोटों पर कब्ज़ा कर लिया था, 90-95% वोट उन्हें गए थे। तब भाजपा की जो हार हुई, उसका एक प्रधान कारण था – शत-प्रतिशत मुस्लिम ध्रुवीकरण। लेकिन, इस बार मुस्लिम वोटों में एक विभाजन आ गया है, जिस कारण हिंसा की इतनी घटनाएँ हुई हैं।

मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में सबसे ज्यादा हिंसा हुई है। एक साइलेंट इंटिमीडेशन चल रहा है। ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’ और ‘Winner Takes All’ वाला लोकतंत्र विरोधी कल्चर आ गया है, जिसे लेफ्ट ने शुरू किया था और TMC इसकी कार्बन कॉपी है।

मार्क्सवादियों और तृणमूल का संगठन अलग है, लेकिन दोनों समान हैं। बस एक फर्क है – CPM का भ्रष्टाचार सीमित था और ये पार्टी कंट्रोल्ड करप्शन था, लेकिन तृणमूल के मामले में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है। ये राज्य सरकार से लेकर पंचायत स्तर तक, सब मिले हैं और सबका हिस्सा बँटा हुआ है।

असीमित भ्रष्टाटार के कारण केंद्र सरकार की जो योजनाएँ आती हैं और उनके फंड्स आते हैं (मनरेगा, आवास योजना, हर घर जल इत्यादि), इन सबमें चोरी हुई है। इस कारण पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई है और भ्रष्टाचार को ही आय का स्रोत बना दिया गया है। इसी कारण ये जीत के लिए इतने बेचैन रहते हैं, ताकि 5 वर्षों के लिए सब सेट हो जाएँ। इसी कारण, वहाँ भारी सुधार की आवश्यकता है।

सवाल: 2014 में 34 और 2019 में 22 लोकसभा सीट पर तृणमूल की जीत। अब 2024 से पहले पंचायत स्तर पर ऐसी हिंसा भाजपा या किसी भी विपक्ष को बंगाल से साफ करने की रणनीति तो नहीं?

जवाब: इस पंचायत चुनाव का जो परिणाम है, उसके साथ पब्लिक ओपिनियन का क्या संपर्क है – ये चिंतन का विषय है। इतनी लूट हुई है, इतना फ्रॉड हुआ है। ये चुनाव बैलेट बॉक्स से कराया गया था राज्य चुनाव आयोग के जरिए, इतने फर्जी वोट पड़े, हमले हुए हैं और लोग तनाव में थे। इसीलिए, अनुमान लगाना मुश्किल है। फिर भी, लोकसभा के चुनाव में इसका असर जरूर देखने को मिलने वाला है।

उस समय (लोकसभा के चुनाव में) TMC के भ्रष्टाचार का असर नहीं पड़ता, क्योंकि राज्य में सांसद की उतनी शक्ति नहीं होती और दिल्ली के लिए वोट दिए जाते हैं। ये फ्लेक्सिबल होता है, इसीलिए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कॉन्ग्रेस वोट देने वाले भी लोकसभा चुनाव में भाजपा को देते हैं।

राज्य स्तर पर भाजपा की एक कमजोरी ये है कि अब तक संगठन मजबूत नहीं है। संगठन में बहुत कमजोरियाँ हैं। 3 महीने पहले अगर कॉन्फिडेंस बनाने के लिए केंद्रीय बलों को लाया जा सकता है और चुनाव आयोग 8-10 से लेकर जितने भी चरण में चुनाव कराए, हर पोलिंग बूथ पर सुरक्षाबल सुनिश्चित हो, तब आप देखेंगे कि पंचायत चुनाव से लोकसभा का चुनाव एकदम अलग होगा।

सवाल: ममता बनर्जी की राजनीति से अलग बंगाल के समाज पर आपकी राय क्या है? लंबे समय तक वामपंथी सत्ता के कारण हिंसा की राजनीति या “सत्ता बंदूक की नाल से निकलती है” जैसी बात आम समाज में भी घर कर गई है?

जवाब: 2 चीजें हैं। पहला, राजनीतिक प्रभाव। वामपंथियों के संघर्ष में हिंसा की संस्कृति रही है। ये समाज में भी घुस जाता है। वामपंथी तकनीक से ही TMC ने वामपंथियों को हराया। ये प्रभाव समाज में रह गया।

पश्चिम बंगाल स्वाधीनता के समय नंबर एक या दो राज्य था, अब समय बीतते-बीतते 17-18 नंबर पर पहुँच गया और ओडिशा भी आगे निकल गया। असम भी कुछ दिनों में आगे निकल जाएगा। यहाँ कोई विकास नहीं हो रहा है, कोई रोजगार नहीं पैदा हो रहा। व्यवसायी लोग टोलबाजी से परेशान हैं, जिसे ‘Illegal Extraction’ कह लीजिए। पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार का जो आलम है, नेताओं के बिस्तर से रुपए निकलने की घटनाएँ सामने आईं।

कहने का मतलब है कि अर्थव्यवस्था के बर्बाद हो जाने के कारण भ्रष्टाचार हावी है और जिसे जहाँ से मिल रहा है, वो लूट रहा है। इसके साथ हिंसा भी जुड़ गई है, इसका हिस्सा बन गई है। सामाजिक व्यवस्था ऐसी हो गई है कि जो पढ़े-लिखे और प्रतिभावान लोग हैं, वो वन-वे टिकट लेकर देश के महानगरों या विदेश में चले जाते हैं, यहाँ नहीं रुकते।

पलायन की समस्या के कारण कोलकाता में औसत उम्र बाकी नगरों से ज्यादा है। इसका कारण है कि जिनकी रियायरमेंट की उम्र हो गई है या जो रिटायर हो गए हैं, वहीं बंगाल में बचे हैं। जो प्रोडक्टिव जनरेशन है, युवा है, वो यहाँ नहीं ठहरते हैं। इसीलिए, पश्चिम बंगाल माइग्रेंट लेबर में आजकल नंबर वन हो गया है।

सवाल: बिहार ने कभी चुनावी हिंसा झेला, बहुत भयावह और बड़े स्तर पर। वहाँ जाति का समीकरण था, अगड़ा-पिछड़ा था, जमींदार-मजदूर था। फिर सब खत्म हो गया। बंगाल में चुनावी हिंसा के सामाजिक कारण क्या हैं? और यह खत्म क्यों नहीं हो रहे?

जवाब: पहले हिंसा होती थी तो लोग कहते थे कि बिहार की तरफ हो रहा है। बिहार देश की हर सड़ी हुई समस्या का प्रतीक बन गया था। यह हाल लगभग 15 साल पहले तक था। लेकिन आजकल बिहार में थोड़ी-बहुत हिंसा होती है, बड़े स्तर पर वैसा कुछ नहीं होता। पहले MCC और रणवीर सेना जैसे संगठनों की हिंसा की खबरें आती थीं।

बिहार में बदलाव हुआ है। बिहार आर्थिक रिकवरी की ओर बढ़ रहा है। बहुत बाकी है वहाँ करना-होना लेकिन थोड़ा-थोड़ा कर रहा है, जबकि पश्चिम बंगाल पीछे जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था बर्बाद हो गई है, जिसकी शुरुआत लेफ्ट ने ही की थी।

बंगाल के सामाजिक पतन के लिए एक और बड़ी वजह है। यहाँ प्रादेशिकता की मानसिकता आ गई है, जो बंगाल को बाकी देश से अलग समझते हैं। यानी, एक इमोशनल अलगाववाद की भावना घर कर गई है। इसी कारण अन्य राज्यों से आने वालों को ‘बाहरी’ कहा जाता है। पहले तो कई जगहों से लोग बंगाल में आते थे, यूपी-बिहार के लोग यहाँ जीवन का हिस्सा बन गए और इनमें से कई बंगाली बोलते हैं तो कई नहीं भी बोलते हैं।

बिहार से यहाँ हजारों मजदूर, काम करने वाले, छोटे-बड़े व्यवसायी आए थे। अब सब खत्म हो रहा है। पुराने संपर्क हैं, लेकिन बंगाल का एक प्रभाव जो झारखंड वगैरह में पूरा था, मधुपुर, देवघर या भागलपुर तक उसका असर था। अब कुछ है ही नहीं।

पश्चिम बंगाल के लोगों को इस वास्तविकता को स्वीकार करना पड़ेगा, जो पूरी तरह नीचे जा रहे हैं – सांस्कृतिक रूप से, राजनीतिक रूप से और आर्थिक रूप से। राजनातिक प्रभाव पश्चिम बंगाल का कुछ है ही नहीं। प्रणब मुखर्जी थे लेकिन उनकी बंगाल से ज्यादा दिल्ली में चलती थी। पश्चिम बंगाल ने खुद को लंबे समय से मुख्यधारा से अलग कर रखा है, जिसका अब असर दिख रहा है।

सवाल: समाज से अलग अब बात सिस्टम की, सरकारी तंत्र की, पुलिस की। बंगाल से लगभग हर हफ्ते, 2 हफ्ते पर – बम बनाते समय विस्फोट, झोले में मिला क्रूड बम – जैसी खबरें हम देखते हैं। अगर यह इतना आम हो गया है तो क्या वहाँ पुलिस रिफॉर्म्स की जरूरत नहीं?

जवाब: पुलिस रिफॉर्म्स से पहले पुलिस रिक्रूटमेंट को सुधारना होगा। असली पुलिस से ज्यादा वहाँ सिविक पुलिस की भर्ती कर ली गई है। जिस तरह के प्रोफेशनल पुलिस की भर्ती की जानी थी, वो नहीं की गई। वो फंड्स की कमी को इसकी वजह बता रहे। हकीकत में पुलिस व्यवस्था का पूरा का पूरा राजनीतिकरण कर दिया गया है।

इस बार पंचायत चुनाव में जो बूथ लूटे गए हैं, इसमें पुलिस ने मदद की है। अदालतों में अधिकतर शिकायतें पुलिस के खिलाफ हैं। पुलिस ने हिंसा में हिस्सा लिया है। पुलिस रिफॉर्म से ज्यादा पश्चिम बंगाल में इन्हें (पूरे पुलिस विभाग को) रीकंस्ट्रक्ट करने की जरूरत है।

पहले अच्छी पुलिस फ़ोर्स थी, लेकिन पूरा बर्बाद कर दिया गया। आज भी कोलकाता की पुलिस बाकी बंगाल की पुलिस से अच्छी है। पश्चिम बंगाल की शासन व्यवस्था ध्वस्त हो गई है, शासन प्रणाली की संस्कृति बर्बाद हो गई है।

मुझे लगता है कि बंगाल को बचाने के लिए एक अलग प्रकार की क्रांति की ज़रूरत है – रेड रेवोलुशन या तृणमूल रेवोलुशन नहीं, राष्ट्रवादी क्रांति की जरूरत है। बंगाली संस्कृति का सभी सम्मान करते हैं, लेकिन वो भारत से अलग नहीं है बल्कि भारत को समृद्ध करता है। आप हर जगह जाकर ‘हमारा है, हमारा है’ कहेंगे तो कुछ नहीं होगा।

सवाल: आखिरी सवाल पार्टी के कार्यकर्ताओं को लेकर, चाहे वो किसी भी पार्टी के हों। क्योंकि चुनावी हिंसा का सबसे पहला और मारक असर इन्हीं पर पड़ता है। लंबे समय तक वामपंथी सत्ता और विचार का यह प्रभाव कि – “पार्टी ही सब कुछ, पार्टी के लिए मारना या मरना” – क्या यह दूसरी राजनीतिक पार्टियों में भी घर कर गई है? क्योंकि सत्ता परिवर्तन से बंगाल में चुनावी हिंसा के पैटर्न में कोई बदलाव नहीं दिख रहा।

जवाब: आप हिंदी बेल्ट में जाएँगे तो किसी पॉलिटिकल वर्कर के बारे में कहा जाता है कि वो ‘राजनीति’ करता है। जबकि, पश्चिम बंगाल में कहा जाता है कि ‘पार्टी कोर छी (वो पार्टी करता है)।’ पार्टी कौन सी? कोई सी भी लेकिन वहाँ महत्व पार्टी का ही है।

‘राजनीति’ से अलग ‘पार्टी’ वाले ट्रेंड को CPM ने शुरू किया था और TMC ने भी यही किया। हालत यह है कि आप जो भी करो, आपको पार्टी में आना पड़ेगा। हाल के दिनों में तृणमूल ने इस पार्टी कल्चर को भी बढ़ा दिया है।

पहले तृणमूल में सेंट्रलाइज्ड सिस्टम था, सिंगल विंडो क्लियरेंस था, लेकिन अब अलग-अलग स्तरों पर तृणमूल के भीतर कई समूह बन गए हैं। सब कुछ पार्टी ही बन गई है, पार्टी ही माई-बाप है। ये जो मानसिकता है, ये सभी पार्टियों में घर कर गई है।

स्वप्न दासगुप्ता के बारे में बता दें कि उन्होंने सन् 1975 में दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। लंदन स्थित SOAS यूनिवर्सिटी से उन्होंने Ph.D की। उस जमाने में उन्होंने पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में विभाजन और भेदभाव वाली राजनीति पर गहरा अध्ययन कर के थीसिस लिखी थी। वो JNU में विजिटिंग ऑनररी प्रोफेसर भी रहे हैं। उन्होंने ‘Awakening Bharat Mata: The Political Beliefs of the Indian Right’ नामक पुस्तक भी लिखी है।(साभार: चंदन कुमार https://hindi.opindia.com/परफेक्शन को कैसे इम्प्रूव करें :)