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जंतर-मंतर हिंसा: शांतिपूर्ण आंदोलन के दावों के बीच लहूलुहान वर्दी का सच; आयोजकों को हिरासत में लेकर पूछा जाए "गुंडों को किसने बुलाया?"


देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर, जो लंबे समय से जन-आंदोलनों और असहमति की आवाज़ उठाने का केंद्र रहा है, हाल ही में एक भीषण हिंसात्मक टकराव का गवाह बना। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पेपर लीक को लेकर आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बताया था। हालांकि, ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान उग्र हुई भीड़ और उसके बाद सामने आए तथ्यों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब तक आयोजकों को हिरासत में लेकर सख्ती से यह नहीं पूछा जाए कि छात्रों के प्रदर्शन में गुंडों का क्या काम था? किसके कहने पर गुंडे आए? दिल्ली हिन्दू दंगा के आरोपितों की रिहाई की आवाज़ किसके कहने पर उठी थी? ये प्रदर्शन NEET को लेकर हुआ था या इन आरोपियों की रिहाई के लिए? क्या ये प्रदर्शन सनातन को बदनाम करने के लिए था? क्योकि जिस तरह की हिंसा हुई वह कोई साधारण हिंसा नहीं थी, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में हुए हंगामे की तरह ही था। पुलिस तो अपना काम कर रही है लेकिन निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को इस प्रायोजित हिंसा को हल्के में नहीं लेना चाहिए।     

प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों और जवानों पर जानलेवा हमले हुए, जिनमें 180 से अधिक पुलिसकर्मी और दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हो गए। इस दौरान भारी सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़े गए, पत्थरबाजी हुई और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाया गया। इस पूरी घटना ने उस समय एक नया और संवेदनशील मोड़ ले लिया, जब ड्यूटी पर घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने मीडिया के सामने आकर अपनी आपबीती साझा की।

 घायलों के परिजनों ने आरोप लगाया कि छात्रों के अधिकारों की आड़ में आए उपद्रवियों द्वारा ऑन-ड्यूटी सुरक्षा बलों पर बर्बर हमले किए गए और बाद में सोशल मीडिया पर पुलिस को ही खलनायक बनाकर पेश करने की कोशिश की गई। पीड़ितों के परिवारों का कहना है कि वर्दी पहनने का मतलब मानवाधिकारों का त्याग करना नहीं होता। इस मामले में अब पुलिस कर्मियों के परिवारों ने भी देश की सर्वोच्च अदालत का रुख किया है, जिससे इस मुद्दे ने सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक रूप से एक बड़ा आकार ले लिया है।

घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की आपबीती: “जब खून से लथपथ घर पहुंचे हमारे अपने”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान परिजनों ने अपनी आपबीती साझा की। सेवानिवृत्त सैनिकों के बच्चों, अधिकारियों की पत्नियों और युवा छात्रों ने मीडिया के सामने घटना वाले दिन के जो संस्मरण रखे, वे दिल दहला देने वाले थे।

मरीन कमांडो रहे सब-इंस्पेक्टर की बेटी: “पिता की लिंचिंग की कोशिश की गई”
नेवी में 15 वर्षों तक मरीन कमांडो के रूप में देश सेवा करने के बाद दिल्ली पुलिस में कार्यरत सब-इंस्पेक्टर (SI) की बेटी ने भावुक होकर बताया कि उनके पिता मुख्य बैरिकेड्स पर तैनात थे। उन्होंने कहा: “मेरे पिता अक्सर कहते थे कि यह केवल छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है, इसमें कई असामाजिक तत्व शामिल हो चुके हैं। 25 तारीख को दोपहर लगभग 2 बजे जंतर-मंतर मंच के पास उग्र भीड़ ने मेरे पिता को घसीटा और उनकी लिंचिंग की कोशिश की। वह RML अस्पताल में चार घंटे तक बेहोश रहे और जब देर रात उनके साथी उन्हें घर लाए, तो उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी… जब मैंने सोशल मीडिया खोला, तो देखा कि मेरे ही पिता को क्रिमिनल कहा जा रहा था। जिन लोगों ने उन पर हमला किया, वही सुप्रीम कोर्ट चले गए। इसलिए हमने भी न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है।”

सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने यह भी दोहराया कि उनके पिता अक्सर घर आकर यह चिंता जताते थे कि आंदोलन को उग्र तत्वों द्वारा हायजैक कर लिया गया है। 25 तारीख को हुए लिंचिंग के प्रयास और 4 घंटे तक बेहोश रहने के बाद जब उन्हें घर लाया गया, तो परिवार पूरी तरह सदमे में था।

घायल एसीपी (ACP) की पत्नी: “दो साल की बच्ची और मेरे लिए वह पल दर्दनाक था”
20 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए एक घायल एसीपी की पत्नी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा: 20 जुलाई की देर रात जब मेरे पति घायल अवस्था में घर लौटे, तो वह क्षण मेरे और हमारी दो साल की बेटी के लिए बेहद दर्दनाक था। हम यहां अपने परिवार का दर्द साझा करने आए हैं क्योंकि पुलिसकर्मियों के परिवारों का भी इस देश में न्याय पाने का बराबर अधिकार है।”

युवा पीढ़ी की अपील: “हम भी जेन-जी हैं, हमारी बात भी सुनी जाए”
हिंसा में घायल जवानों के बच्चों, जो स्वयं छात्र और जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी का हिस्सा हैं, ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी आवाज़ उठाई। उन्होंने देश के नागरिकों और मीडिया से अपील की कि वे हिंसा का शिकार हुए पुलिसकर्मियों के बच्चों का दर्द भी समझें।

1971 युद्ध के दिग्गज के पोते व ASI के बेटे का बयान: “अचानक हुआ जानलेवा पथराव”
चार वीरता पुरस्कार प्राप्त कर चुके एक एएसआई (ASI) के बेटे लक्ष्य सिंह बिष्ट ने बताया कि उनके दादाजी BSF में थे और उन्होंने 1971 के युद्ध में भाग लिया था। उन्होंने बताया: “मेरे पिता बैरिकेड्स पर तैनात थे। अचानक उग्र भीड़ ने बिना किसी उकसावे के पत्थरबाजी शुरू कर दी। जब वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे थे, तभी एक भारी पत्थर उनके सिर पर लगा। जब मैंने अस्पताल में उनकी तस्वीर देखी, तो उनके सिर पर चार टांके लगे थे।”

33 साल से सेवारत ASI की पत्नी: “गमले और कांच की बोतलें फेंकी गईं”
33 वर्षों से पुलिस सेवा में कार्यरत एक अन्य एएसआई की पत्नी ने बताया कि उनके पति 20 जुलाई को संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए तैनात थे। “शाम को मुझे खबर मिली कि वे LNJP अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि भीड़ में शामिल उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर गमले, पत्थर, जूते और कांच की बोतलें फेंकी और सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़ डाले।”

राहुल गांधी से पूछा गया सवाल, तो कहा: “आप बीजेपी से हैं”
घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जब मीडियाकर्मियों ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से इस संबंध में प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो एक नया विवाद खड़ा हो गया। परिजनों ने सवाल उठाया था कि जिस संसद की रक्षा करते हुए पुलिसकर्मी घायल हुए, उन्हें ‘गुंडे’ कैसे कहा जा सकता है। हालांकि, जब एक पत्रकार ने इस बाबत राहुल गांधी से सवाल किया, तो उन्होंने सवाल का जवाब देने के बजाय पत्रकार पर ही तंज कसते हुए कह दिया कि “आप बीजेपी से हैं।” आलोचकों और सोशल मीडिया पर यह तर्क दिया जा रहा है कि जब भी कोई सवाल राजनीतिक रूप से असुविधाजनक होता है, तो पत्रकारों पर किसी खास पार्टी का होने का ठप्पा लगा दिया जाता है। इस वाकये के बाद प्रेस की आजादी के बड़े-बड़े दावे करने वाली विपक्षी राजनीति और उनकी कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

CJP का दावा बनाम पुलिस का पक्ष
जंतर-मंतर पर घटित इस घटनाक्रम ने आयोजकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दावों और पुलिस प्रशासन द्वारा प्रस्तुत किए गए जमीनी तथ्यों के बीच एक बड़ा विरोधाभास पैदा कर दिया है।

CJP और आयोजकों का दावा: आयोजकों का तर्क है कि उनका आंदोलन परीक्षा प्रणाली में सुधारों और छात्र हितों को लेकर पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए अत्यधिक बल प्रयोग, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे छात्र घायल हुए।

दिल्ली पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष: पुलिस जांच और डिजिटल सर्विलांस के आंकड़ों के अनुसार, भीड़ की आड़ में कई उग्र तत्व शामिल थे। पुलिस का कहना है कि जब भीड़ ने संसद भवन की ओर जबरन बढ़ने और सुरक्षा घेरा तोड़ने का प्रयास किया, तब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुपातिक बल प्रयोग अनिवार्य हो गया था।

सुरक्षा बलों के मानवाधिकार और सुप्रीम कोर्ट की कानूनी कार्यवाही
जंतर-मंतर हिंसा का मामला अब भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। इस मामले ने सुरक्षा बलों के मानवाधिकारों पर एक राष्ट्रीय कानूनी बहस शुरू कर दी है:

अनुच्छेद 21 और ऑन-ड्यूटी जवानों के अधिकार: याचिका में कहा गया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (जीवन और शारीरिक सुरक्षा का अधिकार) जितना आम नागरिकों पर लागू होता है, उतना ही ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारियों पर भी लागू होता है। भीड़ द्वारा जानलेवा हमला करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: मामले की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, ड्रोन फुटेज और बॉडी-वर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने हिंसा की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच पर जोर दिया है।

आयोजकों की जवाबदेही: कोर्ट इस पहलू पर भी विचार कर रहा है कि यदि अनुमति प्राप्त प्रदर्शन हिंसक रूप लेता है, तो आयोजकों की नागरिक व आपराधिक जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में आंदोलनों की आड़ में कानून-व्यवस्था को नुकसान न पहुंचाया जा सके।

दिल्ली : सीलमपुर में 16 साल के हिंदू लड़के को फैजान और उसके साथियों ने दौड़ा-दौड़कर घोंपा चाकू: जाँच में जुटी दिल्ली पुलिस; कहीं ये जेहादी आतंकियों के sleeper cell तो नहीं?

                    दिल्ली के सीलमपुर में 16 साल के लक्क की चाकू से गोदकर हत्या (फोटो साभार: NDTV)
केजरीवाल सरकार के समय किसी हिन्दू की हत्या होने पर जो बीजेपी शोर मचाती थी, आज उसी बीजेपी के राज में भी वही हो रहा है। जब तक इन जेहादियों के परिवार को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा बंद नहीं होगी ये इस तरह आतंक करते रहेंगे। Victim card खेला जाएगा, कोई भटका हुआ मासूम बताएगा तो कोई दिमाग से पैदल आदि आदि इन जेहादियों के इस 
Victim card को नज़रअंदाज़ कर सरकारी सुविधाओं को बंद करना होगा।  
पहले जगह-जगह बम धमाके से आतंक फैलाया जाता था अब क़त्ल करके आतंक फैलाया जा रहा है। सरकार, पुलिस और अदालतों को इस बात की गंभीरता से जाँच करनी होगी कि कहीं ये जेहादी आतंकियों के sleeper cell तो नहीं?     

दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाके सीलमपुर में 16 साल के नाबालिग लड़के की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। फिलहाल हत्या के पीछे की वजह सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि आरोपितों में से एक लड़के का नाम फैजान है, जिसने अपने साथियों संग मिलकर लक्की की हत्या को अंजाम दिया।

अगर यही काम हिन्दुओं ने किया होता सारे सेक्युलरिस्ट्स सडकों पर आकर चील-कौओं की तरह चिल्ला रहे होते। संविधान की दुहाई दे रहे होते लेकिन अब ये काम उनके शांतिदूतों ने किया है सबको सांप सूंघ गया है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना सीलमपुर थाना क्षेत्र के गौतमपुरी इलाके की है। यहाँ लक्की नाम के लड़के की बुधवार (24 जून 2026) की बेरहमी से हत्या कर दी गई। जानकारी के अनुसार, देर रात फैजान और उसके चार से ज्यादा साथियों ने लक्की को घेर लिया और उस पर ताबड़तोड़ चाकू से वार किए। गंभीर रूप से घायल लक्की सड़क पर गिर गया।

आसपास के लोगों ने बताया कि वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। लक्की को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ ज्यादा खून बहने से उसकी मौत हो गई। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुँची और इलाके का घेराव कर जाँच शुरू कर दी।

पुलिस ने लक्की के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और परिजनों व स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है। बताया गया कि लक्की अक्सर माता की चौकी और जागरण में शामिल हुआ करता था, घटना वाले दिन भी वह माता की चौकी से ही लौट रहा था जब उसकी हत्या को अंजाम दिया गया। पुलिस ने बताया कि फिलहाल हत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं है, हर पहलू से जाँच की जा रही है।

मोदी जी रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ देश में कुकुरमुत्ते के तरह निकल रहे जेहादियों पर ब्रहमोस कब? मीडियाकर्मियों पर इस्लामी कट्टरपंथियों के हमलों के 13 मामले : दिल्ली… कर्नाटक… केरल… झारखंड या हो यूपी-उत्तराखंड, मुस्लिम भीड़ बनाती रही है हिंदू पत्रकारों को निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है बहुत अच्छी बात है। पाकिस्तान में आतंकियों के अड्डों का पता लगाया जा सकता है लेकिन देश कुकुरमुत्ते की तरह उग रहे जेहादियों या कहा जाये कि भारत में ही पल रहे आतंकियों पर क्यों नहीं होती कार्यवाही? देश में ही पल रहे ये जेहादी पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों से ज्यादा खतरनाक है। अगर इन पर कार्यवाही नहीं की गयी पाकिस्तान की बजाये भारत में जगह-जगह बने पाकिस्तान से लड़ना पड़ेगा। इन जेहादियों पर कार्यवाही करने के साथ-साथ इनके समर्थकों और आकाओं पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। Victim Card खेलने वालों-बच्चों से लेकर महिलाओं तक-पर और भी सख्ती से पेश आनी की जरुरत है जो कुछ रुपयों की खातिर हमले कर माहौल ख़राब कर रहे हैं। इन जेहादियों के आगे तो कई बार तो पुलिस भी बेबस हो जाती है। पुलिस वालों का भी अपना परिवार होता है। भारत में जितने भी संवेदनशील इलाके हैं सभी में टियर गैस और blind firing के आर्डर के पुलिस को तैनात करना चाहिए। ताकि कोई जेहादी समर्थक यह न कहने पर कि बाहरी लोग थे।    
दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) को ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और कैमरामैन श्याम पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। बुर्का पहने महिलाओं ने न सिर्फ सुप्रिया को पीटा बल्कि उनके बाल भी खींचे।

मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंदू पत्रकारों पर हमले की ये घटना ना तो पहली बार हुई है, ना ही इसमें कोई बात ऐसी है, जिसके चलते इसे नई घटना का दर्जा दिया जा सकता हो। यूँ तो अनगिनत घटनाएँ ऐसी रही हैं, लेकिन आइए उदाहरण के तौर पर उनमें से 14 घटनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

सीमापुरी में All India News की पत्रकार सुप्रिया और कैमरामैन श्याम पर मुस्लिम भीड़ का हमला

दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) की शाम ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और उनके कैमरामैन श्याम पर मुस्लिमों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। यह हमला उस समय हुआ जब सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण और झुग्गी-झोपड़ी के मुद्दे पर सुप्रिया रिपोर्टिंग करने के लिए तैयार थी और उनके कैमरामैन श्याम बंगाली मार्केट के पास एक मस्जिद के सामने कैमरा लेकर खड़े थे।

मुस्लिम महिलाओं ने सुप्रिया के बाल खींचे, भीड़ ने दोनों को पत्थर और बेल्ट से मारा। इस हमले में सुप्रिया का एक पैर भी टूट गया। हमलावरों ने उनके कैमरा और माइक के साथ-साथ उनका फोन और पर्स भी छीन लिया।

दिल्ली में मुस्लिम भीड़ का हिंदू महिला पत्रकार पर हमला

दिल्ली में बुधवार (2 जुलाई 2025) को एक हिंदू महिला पत्रकार अवैध रुप से रह रहे कुछ मुस्लिमों से बात करने पहुँची थी। इसी बीच मुस्लिमों की भीड़ ने उसे घेर लिया और मारना शुरू कर दिया। कट्टरपंथियों ने महिला पत्रकार पर पत्थरों से हमला किया, जबकि वो केवल रिपोर्टिंग कर रही थी। जब उसने उनके वहाँ अवैध रुप से रहने पर सवाल उठाया तो भीड़ उसे चाकू दिखाकर डराने लगी।

जयपुर में मुस्लिमों के क्षेत्र में रिपोर्टिंग कर रही थी महिला, मुस्लिमों ने सरेआम दी धमकी

राजस्थान के जयपुर में 28 अप्रैल 2025 को एक महिला पत्रकार रिपोर्टिंग करने उस इलाके में पहुँची, जहाँ मुस्लिमों की संख्या हिंदूओं की अपेक्षा अधिक थी। इसी बीच मुस्लिम भीड़ ने महिला पत्रकार को कैमरा बंद करने के लिए कहा, जब उसने ऐसा करने से इंकार किया तो वे उसे धमकी देकर इलाके से भगाने लगे।

दिल्ली में वक्फ प्रदर्शन कर रही भीड़ का सुदर्शन न्यूज के पत्रकारों पर हमला

दिल्ली में 17 मार्च 2025 को मुस्लिम प्रदर्शनकारी वक्फ के विरोध में धरनारत थे। अन्य मीडियाकर्मियों की तरह ही सुदर्शन न्यूज के पत्रकारों ने भी वहाँ इकट्ठा हुए मुस्लिमों से इस बारे में सवाल किया। क्योंकि मुस्लिम जवाब ही नही दे पा रहे थे, इसलिए उन्हें पलट कर पत्रकारों पर ही हमला करना ठीक लगा। और तिलमिलाए कट्टरपंथियों ने सुदर्शन न्यूज के जर्नलिस्ट्स पर हमला कर दिया।

नैनीताल के हल्द्वानी में मुस्लिम भीड़ का अमर उजाला के पत्रकार पर हमला

नैनीताल के हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को बनभूलपुरा में बने अवैध मस्जिद और मदरसों को गिराने के उद्देश्य से प्रशासनिक टीम पहुँची हुई थी। इस दौरान यहाँ मीडियाकर्मी भी मौजूद थे। अवैध होने के बावजूद मस्जिद को ढहाने के फैसले से नाखुश मुस्लिमों ने न सिर्फ प्रशासनिक समूहों से मारपीट की बल्कि पत्रकारों को भी पीटा।

इनमें वे पत्रकार भी शामिल थे, जिन्होंने कभी इन्ही कट्टरपंथियों के समर्थन में खबरें छापी थी। इस हमले में अमर उजाला के पत्रकार राजेंद्र सिंह बिष्ट भी चोटिल हुए थे। यही नहीं मुस्लिमों ने पुलिस स्टेशनों और पेट्रोल पंप को भी जलाने के साथ-साथ एक पुलिसकर्मी को भी जिंदा जलाने की कोशिश की थी।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में चुन-चुन कर हुआ था हिंदू पत्रकारों पर हमला

उत्तराखंड के हल्द्वानी में फरवरी 2024 की हिंसा में दंगा करने वाले मुस्लिमों ने पुलिस प्रशासन और वहाँ रिपोर्टिंग कर रहे हिंदू पत्रकारों की पहचान कर उनपर हमला किया था। समाचारपत्र अमृत विचार के पत्रकार संजय भी इसमें घायल हुए थे। उनकी हालत इतनी नाजुक थी कि कई दिनों तक वे ICU में भर्ती थे।

लखनऊ में मोनिस और एहसान ने काट दी थी पत्रकार की उंगलियाँ

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 29 अप्रैल 2025 को जाने-माने साहसी पत्रकार कवि तिवारी पर मोहम्मद मोनिस, मोहम्मद एहसान और उसके साथियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। इन मुस्लिम हमलावरों ने कवि तिवारी पर उस वक्त हमला किया, जब वे मंदिर जा रहे थे।

अचानक हुए इस हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई। हमलावरों ने उन पर चाकू से कई बार गंभीर वार किए, जिसके चलते उनकी उंगलियाँ ही नहीं मुँह भी बुरी तरह से कट गया।

झारखंड में मुस्लिमों ने घंटों तक रोके रखी महिला पत्रकार की कार

झारखंड के पाकुड़ में 18 अक्टूबर 2024 को महिला पत्रकार अर्चना अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर रिपोर्टिंग करने पहुँची थी। जिस समय उसकी कार पाकुड़ से गुजर रही थी। उसी समय मुस्लिमों ने अर्चना के पास पहुँचकर उन्हें धमकी दी। मुस्लिमों ने उनकी कार को रोककर काफी देर हंगामा किया। और उन्हें जाने से रोके रखा। वहाँ किसी तरह अर्चना ने खुद की जान बचाई और निकल पाई।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में महिला पत्रकार के साथ मारपीट

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में 31 मार्च 2024 को मुख्तार अंसारी के निधन के बाद रिपोर्टिंग करने पहुँची महिला पत्रकार अर्चना तिवारी पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। यहाँ अर्चना को घेरने की कोशिश की गई। रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की भी की गई। इस हमले में अर्चना को चोट भी आई।

दैनिक जागरण के पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ का हमला

उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में 10 जुलाई 2024 को दैनिक जागरण के पत्रकार अमित पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने धारदार हथियार से हमला किया था। इसमें उन्हें गंभीर चोटें आई थी। बड़ी मुश्किल से अमित ने मुस्लिम भीड़ से अपनी जान बचाई थी।

रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ के इशारे के बाद हमला

सुदर्शन न्यूज का एक पत्रकार 31 अगस्त 2023 को रिपोर्टिंग कर रहा था। इसी बीच एक मुस्लिम व्यक्ति ने उन पर हमला कर दिया। इतना ही नहीं पत्रकार के ऊपर अपनी गाड़ी चढ़ाने की भी कोशिश की। जिसकी वजह से पत्रकार जमीन पर गिर गया था।

कर्नाटक में गोहत्या का खुलासा करने वाली महिला पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ का हमला

कर्नाटक में हसन जिले के पेंशन मोहल्ले में 5 दिसंबर 2020 को अवैध रूप से गोहत्या करने वाले गिरोह की सच्चाई सामने लाने वाली एक महिला पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। भीड़ में शामिल बुर्काधारी महिलाओं ने महिला पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार तो किया ही उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।

केरल में रिपब्लिक टीवी की पत्रकार पूजा प्रसन्ना पर मुस्लिम भीड़ का हमला

केरल के पतनमतिट्टा में 17 अक्टूबर 2018 को सबरीमाला मंदिर पर कवरेज के दौरान रिपब्लिक टीवी की पत्रकार पूजा प्रसन्ना पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। इस बीच इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा प्रसन्ना की कार का शीशा तोड़ने की भी कोशिश की।

कर्नाटक में अवैध बूचड़खाने की रिपोर्टिंग करने पर इंडिया टूडे के पत्रकार पर हमला

कर्नाटक के रामनगर जिले के कोडिपल्या गाँव में 10 अगस्त 2018 को अवैध बूचड़खानों के खिलाफ छापेमारी के दौरान इंडिया टुडे के एक पत्रकार रिपोर्टिंग कर रहे थे इसी बीच मुस्लिम भीड़ ने बूचड़खाने के बाहर पत्रकार और पुलिस की टीम कर हमला कर दिया। यहाँ छापेमारी के बाद 71 बछड़ों को छुड़ाया गया था, वहीं 7 आरोपितों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी।
अवलोकन करें:-
OpIndia Exclusive- क्या दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता योगी की तरह इन जेहादियों पर कार्यवाही करेंगी? सी

सोचने वाली बात है कि आखिर इस्लामी कट्टरपंथियों की ऐसी कौन सी योजना है, जिसको छिपाने की कोशिश में ये इस निर्ममता पर उतर आते हैं। जब किसी अवैध निर्माण के लिए पत्रकार इनसे सवाल करते हैं और इन मुस्लिमों के पास जवाब नहीं होता, तो ये जानलेवा हमला कर अपने गलत मंसूबों की सच्चाई सामने आने से बचाने में जुट जाते हैं।

OpIndia Exclusive- क्या दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता योगी की तरह इन जेहादियों पर कार्यवाही करेंगी? सीमापुरी में मीडियाकर्मियों पर हमला, जान बचाने जिस DTC में चढ़े उसमें भी तोड़फोड़ : बुर्काधारी औरतों ने नोचे महिला पत्रकार के बाल, मुस्लिम भीड़ ने पत्थर-बेल्ट से मारा:

          घायल पत्रकारों का दिल्ली के जीटीवी अस्पताल में कराया गया इलाज (फोटो साभार: X_Keshav_Malaan)
काफी समय से दिल्ली में जेहादी शोभायात्राओं पर किसी न बहाने से पत्थरबाज़ी कर हिन्दुओं के त्योहारों पर विध्न डाल रहे हैं। अगर अब दिल्ली में रेखा गुप्ता की सरकार के होते हुए भी योगी आदित्यनाथ की तरह कार्यवाही नहीं होगी इन जेहादियों और आकाओं के होंसले बुलंद होते रहेंगे। 

दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) की शाम एक ऐसी घटना घटी, जिसने पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और उनके कैमरामैन श्याम पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। यह हमला सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण और झुग्गी-झोपड़ी के मुद्दे पर रिपोर्टिंग के दौरान हुआ, जब दोनों पत्रकार बंगाली मार्केट के पास एक मस्जिद के सामने कैमरा लेकर खड़े थे।

पीड़ितों के मुताबिक, बुर्कानशीं महिलाओं और नाबालिग किशोरों की भीड़ने न केवल पत्रकारों को बेरहमी से पीटा, बल्कि उनके उपकरण, नकदी और निजी सामान भी लूट लिए। इस घटना ने दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, क्योंकि अभी तक न तो कोई गिरफ्तारी हुई है और न ही पीड़ितों को एफआईआर की कॉपी उपलब्ध कराई गई है।

दिल्ली की सड़क पर दिखा इस्लामी हिंसा का भयावह मंजर

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार (4 जुलाई 2025) की शाम करीब 6 बजे सुप्रिया पाठक और श्याम सीमापुरी के बंगाली बस्ती क्षेत्र में 200 फुटा रोड के पास पहुँचे। उनका मकसद सरकारी जमीन पर हो रहे अवैध अतिक्रमण की सच्चाई को उजागर करना था, जो स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। इस इलाके में अवैध झुग्गियाँ, निर्माण कार्य और कथित तौर पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों की मौजूदगी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

सुप्रिया और श्याम ने जैसे ही मस्जिद के सामने अपनी रिपोर्टिंग शुरू करने के लिए कैमरा सेट किया, कुछ स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई। शुरुआत में यह आपत्ति मौखिक थी, लेकिन जल्द ही यह हिंसक रूप ले लिया। भीड़ में शामिल बुर्का पहनी मुस्लिम महिलाओं और नाबालिग किशोरों ने पत्रकारों को घेर लिया। शुरुआत में 20-30 लोगों की भीड़ कुछ ही मिनटों में 200 से अधिक लोगों की उग्र भीड़ में बदल गई।

भीड़ ने सुप्रिया और श्याम पर लाठियों, मुक्कों और लातों से हमला शुरू कर दिया। सुप्रिया को सड़क पर घसीटकर पीटा गया, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई और हड्डी टूट गई। उनके शरीर पर कई जगह घाव और चोट के निशान हैं। श्याम के चेहरे और शरीर पर भी गहरे घाव आए और उनके सिर पर मुक्कों की बौछार की गई। हमलावरों ने सुप्रिया का मोबाइल, कैमरा, माइक, बैटरी और जेब में मौजूद नकदी लूट ली, जबकि श्याम की घड़ी और पर्स भी छीन लिया गया।

पत्रकारों ने बचने की कोशिश में एक डीटीसी बस में शरण ली, लेकिन भीड़ ने बस को चारों ओर से घेर लिया। हमलावरों ने बस के शीशे तोड़ दिए और दोनों को जबरन बाहर खींच लिया। इस दौरान बस चालक ने कोई मदद नहीं की और उल्टा उन्हें बस से उतार दिया। भीड़ ने बस को भी नुकसान पहुँचाया, जिससे सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँची। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है।

दिल्ली के सीमापुरी में जिहादियों ने शुक्रवार की शाम को 2 पत्रकारों पर हमला किया। क्योंकि वो अवैध अतिक्रमण पर स्टोरी कर रहे थे। बुर्कानशीं महिलाओं ने महिला पत्रकार की टाँग तक तोड़ दी, तो उनका सामान भी लूट लिया गया। दोनों बचने की कोशिश में DTC की बस में चढ़ें, तो बस भी तोड़ी गई।… pic.twitter.com/dY0uPLx4sa

— Shravan Shukla (@epatrakaar) July 5, 2025

पीड़ित ने ऑपइंडिया से साझा की आपबीती

पीड़ित के मुताबिक, उन्हें अलग भीड़ ने मारा और उनकी साथी पत्रकार सुप्रिया को अलग से पीटा गया। बाद में कुछ बाइक वाले आए, उन्होंने मदद करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें भी बाइक समेत गिरा दिया गया। फिर पुलिसकर्मी आए और उन्होंने बाइक पर उन्हें आगे छोड़ने का प्रयास किया। हालाँकि इस दौरान भी भीड़ बाइक के पीछे रही, किसी ने पत्थर फेंके तो किसी ने बेल्ट मारी।

बचाव की नाकाम कोशिशें और प्रशासन की निष्क्रियता

घटना के दौरान सड़क पर जाम होने के बावजूद कोई भी स्थानीय व्यक्ति पत्रकारों की मदद के लिए आगे नहीं आया। कुछ राहगीरों ने कोशिश की, लेकिन भीड़ के आक्रामक रवैये और कथित कट्टरपंथी नारों के सामने उन्हें पीछे हटना पड़ा। एक राहगीर ने सुप्रिया को अपनी बाइक पर बिठाकर सुरक्षित स्थान तक ले जाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने उसे भी खींचकर मारपीट की। आखिरकार एक पुलिसकर्मी ने हस्तक्षेप किया और दोनों को मौके से कुछ दूरी पर सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया।
पत्रकारों को इसके बाद सीमापुरी थाने ले जाया गया, जहाँ से उन्हें मेडिकल जाँच के लिए जीटीबी अस्पताल भेजा गया। रात 9 बजे अस्पताल पहुँचने के बावजूद, इलाज और मेडिकल प्रक्रिया में इतनी देरी हुई कि सुबह 4 बजे तक उन्हें वहाँ से निकलने का मौका मिला। सुप्रिया के पैर में प्लास्टर चढ़ा है और वह चलने में असमर्थ हैं, जबकि श्याम को भी गंभीर चोटें आई हैं।

कट्टरपंथी इरादों के साथ किया गया हमला

वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने X लिखा कि यह हमला योजनाबद्ध था, क्योंकि पत्रकारों की रिपोर्टिंग से कई अवैध गतिविधियों का भेद खुलने का खतरा था।
इस घटना में मुस्लिम महिलाओं और नाबालिग किशोरों की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से चिंताजनक है। बुर्का पहनी महिलाओं ने न केवल पत्रकारों पर शारीरिक हमला किया, बल्कि उन्हें अपशब्द कहे और धार्मिक आधार पर टिप्पणियाँ कीं। नाबालिग किशोरों ने भी हिंसा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जो यह दर्शाता है कि कट्टरपंथी विचारधारा युवा पीढ़ी में भी गहरे तक पैठ बना चुकी है।
लोगों का दावा है कि हमलावरों ने पत्रकारों को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वे हिंदू थे और हमलावरों को इस बात का भरोसा था कि उनकी मजहबी पहचान के चलते पुलिस कोई सख्त कार्रवाई नहीं करेगी। यह भी आरोप लगाया गया कि ऐसे मामलों में मुस्लिम समुदाय की भीड़ थाने को घेर लेती है, जिससे प्रशासन दबाव में आ जाता है और कार्रवाई करने में असमर्थ रहता है। इस तरह की धारणा हमलावरों को और अधिक बेखौफ बनाती है, जिससे वे कानून को अपने हाथ में लेने से नहीं हिचकते।
लोगों का कहना है कि दिल्ली में अवैध कब्जाधारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने से हिचकता है। यह भी दावा किया गया कि कुछ राजनीतिक दलों ने वोट बैंक की खातिर अवैध प्रवासियों को बसने की अनुमति दी, जिससे इस तरह की हिंसक घटनाएँ बढ़ रही हैं।
हालाँकि इस मामले में हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर हमले के बावजूद दिल्ली पुलिस ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। पीड़ितों को न तो एफआईआर की कॉपी दी गई है और न ही किसी हमलावर की गिरफ्तारी हुई है। लोगों का दावा है कि पुलिस पीड़ित पत्रकारों को ही परेशान कर रही है, जबकि हमलावर खुले में घूम रहे हैं।

‘मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग’ पर याचिका लेकर पहुँचा वकील निजाम पाशा तो सुप्रीम कोर्ट ने दागा सवाल, कहा – सेलेक्टिव मत बनो; ‘कन्हैया लाल तेली का क्या?’

निजाम पाशा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कन्हैया लाल तेली हत्याकांड
आपको जून 2022 की घटना याद होगी, जब राजस्थान के उदयपुर में इस्लामी कट्टरपंथियों ने दर्जी कन्हैया लाल तेली का सिर कलम कर दिया। उनका अपराध सिर्फ इतना था कि उन्होंने नूपुर शर्मा का समर्थन किया था, वही नूपुर शर्मा जिन पर पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगाया गया और क़तर तक ने जिनके बयान पर आपत्ति जताई और भाजपा को अपने प्रवक्ता को निलंबित करना पड़ा। हालाँकि, नूपुर शर्मा शिवलिंग का अपमान किए जाने के बाद वही कह रही थीं जो इस्लामी किताबों में लिखा है।

अब सुप्रीम कोर्ट में उदयपुर के इस हत्याकांड के मामले का जिक्र आया है। असल में देश की सर्वोच्च अदालत मंगलवार (16 अप्रैल, 2024) को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में अल्पसंख्यकों के खिलाफ मॉब लिंचिंग के अपराध बढ़ने का दावा करते हुए गोरक्षकों पर निशाना साधा गया था और तथाकथित पीड़ितों के लिए त्वरित वित्तीय मदद की व्यवस्था की माँग की गई थी। जस्टिस BR गवई, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस संदीप मेहता ने कन्हैया लाल तेली हत्याकांड का जिक्र करते हुए याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वो ऐसे मामलों को लेकर वो सेलेक्टिव न बनें।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “राजस्थान के टेलर का क्या? कन्हैया लाल, जिनकी हत्या कर दी गई।” अधिवक्ता निजाम पाशा ये याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे। गुजरात सरकार की तरफ से पेश हुईं वकील अर्चना पाठक दवे ने कहा कि याचिका में सिर्फ मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग की बात है, जबकि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है सबको सुरक्षा देना। जस्टिस गवई ने पाशा से कहा कि आप कोर्ट में क्या कह रहे हैं इसे लेकर सतर्क रहें। याचिका में मुस्लिमों की भीड़ द्वारा हत्या की वारदातें बढ़ने का दावा किया गया था।

 वकील निजाम पाशा ने इस दौरान मध्य प्रदेश और हरियाणा से भी एकाध मामले उठा-उठा कर कोर्ट का ध्यान खींचने की कोशिश की। ये वही वकील है, जो ‘लव जिहाद’ की कलई खोलने वाली फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ को ऑडियो-विजुअल प्रोपेगंडा बताते हुए इस पर बैन लगाने की माँग लेकर सुप्रीम कोर्ट गया था। इतना ही नहीं, बुर्का-हिजाब के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में उसने कुरान का हवाला देते हुए कहा था कि इसे पहनने वाली महिलाओं से छेड़खानी करने वाले डरते हैं और ये समझते हैं कि ये एक मजबूत महिला है, इसका समुदाय इसके पीछे खड़ा है। निजाम पाशा ज्ञानवापी सर्वे के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट गया था।


पश्चिम बंगाल : Mob lynching :साधुओं को निर्वस्त्र कर पीटा, भगवा वस्त्रों को पैरों से रोंडा: उनसे मिले BJP सांसद, राम मंदिर के पुजारी बोले – ममता बनर्जी है ‘मुमताज खान’

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में साधुओं को निर्वस्त्र कर पीटा (बाएँ), BJP सांसद से मुलाकात के दौरान पीड़ित साधु (दाएँ)
अप्रैल 2020 में महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार की चूलें हिला दी थीं। पुलिस चुपचाप खड़े होकर तमाशा देखती रही और ये घटना हो गई। विषम परिस्थितियों के बावजूद मुस्कुराते हुए साधु की तस्वीर लोगों के जेहन में कैद हो गई। अब पश्चिम बंगाल में एक बार फिर से भीड़ ने कुछ इसी तरह की घटना को अंजाम देने की कोशिश की है। वहाँ साधुओं को नग्न कर के उन्हें मारा-पीटा गया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) शासित पश्चिम बंगाल में साधुओं के साथ पालघर लिचिंग जैसा वाकया सामने आया है। साधुओं के साथ ना सिर्फ अभद्रता की गई, बल्कि उन्हें नंगा किया गया, उनकी जटाएँ खींची गईं, उनके गेरुआ वस्त्र को रौंदा गया और डंडों से उनकी पिटाई की गई। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बीजेपी के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने 30 सेकेंड के इस वीडियो को अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाए हैं। बंगाल बचाने का आह्वान करते हुए मालवीय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू होना अपराध हो गया है।

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में जिन साधुओं के साथ क्रूरता की गई, उनमें से एक मधुर गोस्वामी ने अपना दर्द बयाँ किया है। उन्होंने बताया कि साधुओं का दल गंगासागर के लिए जा रहा है, रास्ते में पुरुलिया में अचानक गाड़ी को रोका गया। मधुर गोस्वामी ने बताया कि उनलोगों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, गाड़ी को भी तोड़-फोड़ दिया गया। इसके बाद पुलिस-प्रशासन वहाँ पहुँचा। साधु ने बताया कि वहाँ 200-300 के करीब लोग थे, बेहोश हो जाने के कारण उन्हें ठीक से याद नहीं।

बता दें कि भीड़ ने साधुओं पर लड़कियों को लेकर भागने का आरोप लगाया था। इस पर पीड़ित मधुर गोस्वामी ने कहा, “बाद में वो भी बेटियाँ आईं और हमसे माफ़ी माँगने लगीं। हमने कहा कि हमसे ही कोई पाप हुआ जो हमें ये दंड भुगतना पड़ा।” ‘आप क्या चाहते हैं?’ वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि वो कुछ नहीं चाहते हैं, कोई सज़ा नहीं चाहते हैं। उन्होंने बताया कि अब वो गंगासागर भी नहीं जाएँगे क्योंकि उनकी गाड़ी टूट गई है। साथ ही बताया कि अब वो अपने आश्रम को लौट रहे हैं।

वहीं पुरुलिया से लोकसभा सांसद और राज्य में भाजपा के जनरल सेक्रेटरी ज्योतिर्मय सिंह महतो ने इन साधुओं से मुलाकात कर के उन्हें सम्मानित किया और उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने पीड़ित साधुओं से बातचीत कर के जाना कि उनके साथ क्या-क्या हुआ। उन्होंने उनकी सुरक्षित वापसी की भी व्यवस्था कराई। भाजपा के IT सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि राज्य की सत्ताधारी TMC का गुंडा अनवर शेख का इस हमले में हाथ है, जो पश्चिम बंगाल पुलिस में ‘सिविक वालंटियर’ भी है।

वहीं अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने भी इस घटना को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वहाँ की CM का नाम ममता बनर्जी नहीं बल्कि ‘मुमताज खान’ है जो भगवा रंग देखते ही भड़क जाती हैं। उन्होंने कहा कि वेस्ट बंगाल में हो रही हिन्दू विरोधी घटनाओं के पीछे वहाँ की मुख्यमंत्री का ही हाथ है। उन्होंने इस दौरान रामनवमी की शोभा यात्रा पर हमला और दुर्गा पूजा के पंडालों पर हमले का मामला भी उठाया।

सत्येंद्र दास ने कहा कि साधुओं के भगवा वस्त्र देख कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को और भी क्रोध आ जाता है, इसीलिए वो उन पर हमले कराती हैं। बता दें कि साधुओं से मारपीट के मामले में अब तक 12 गिरफ्तार किए जा चुके हैं। बता दें कि साधुओं ने रास्ते में लड़कियों से रास्ता पूछा था, जिसके बाद ये घटना हुई। वो मकर संक्रांति स्नान में हिस्सा लेने गंगासागर जा रहे थे। पुलिस ने भी माना है कि साधु रास्ता भटक गए थे और इसीलिए उन्होंने रास्ता पूछा था।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुकांता मजूमदार ने भी कहा कि साधुओं को निर्वस्त्र कर के उन्हें TMC के गुंडों द्वारा पीटा गया, जो पालघर त्रासदी की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के शासन में हिन्दू होना अपराध है, जबकि शाहजहाँ जैसों को सुरक्षा मिलती है। संदेशखाली में तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शाहजहाँ शेख ने अपने गुर्गों के साथ ED अधिकारियों की हत्या का प्रयास किया था। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे ‘पालघर पार्ट 2’ करार दिया है।

इराक : बाइक रेस देखने पहुँची लड़की पर टूटे इस्लामी कट्टरपंथी, घेरकर लात-घूँसों से मारा

इराक में बाइक रेस देखने गई लड़की पर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने किया हमला (साभार: वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट)
इराक में हुए बाइक रेस इवेंट की एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। दावा है कि यहाँ छोटे कपड़े पहनकर पहुँची एक लड़की को देख कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उस पर हमला किया। लड़की की उम्र सिर्फ 17 साल है। भीड़ ने उसे लात-घूँसों से मारा है। यह घटना 30 दिसंबर 2022 की है। इस मामले में पुलिस ने 16 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, लड़की पर यह हमला इराक के कुर्दिस्तान (Iraqi Kurdistan) में सुलेमानियाह (Sulaymaniyah) शहर में हुआ। बताया जा रहा है कि लड़की बाइक रेस देखने गई थी, जहाँ महिलाओं के न आने की माँग गई थी। वीडियो देखने के बाद लोगों में काफी आक्रोश है। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि लड़की ने ब्राउन कलर का एक टॉप, कार्डिगन और एक स्कर्ट पहनी हुई है। वह तेज कदमों से भीड़ से दूर भागती नजर आ रही है। लेकिन बाइक रेस इवेंट में सैकड़ों कट्टरपंथी मुस्लिम इराकी लड़की को देखकर जोर-जोर से चिल्ला रहे हैं। उसका पीछा कर रहे हैं। इस दौरान लड़की काफी डरी हुई लग रही है। वह वहाँ से भागने की कोशिश कर रही है, लेकिन उन लोगों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। एक शख्स उसे पीछे से लात मारते हुए भी दिख रहा है। इस बीच उसे बचाने के लिए बाइक से एक लड़का आता है और अपनी जान पर खेलकर उसे उन दरिंदों से बचा कर ले जाता है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन लोगों ने लड़की का अपमान किया, उसको पीटा, जिससे उसे थोड़ी बहुत चोटें भी आईं। वहीं, उसकी ओर से बीच-बचाव करने वाले एक व्यक्ति को चाकू मार दिया गया।

सुलेमानियाह के पुलिस प्रमुख सरकावत अहमद ने कहा कि हमले में शामिल 16 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार ने एक बयान जारी कर इस हमले की निंदा की और इसे घृणित बताया। उन्होंने कहा कि इस सप्ताह सुलेमानियाह प्रांत में एक और हमला हुआ। वहीं, प्रवक्ता जोतियार आदिल ने कहा, “ये घटनाएँ अस्वीकार्य हैं।”

कुर्दिस्तान के ड्रॉ मीडिया के अनुसार, पुरुषों ने माँग की थी कि बाइक रेस कार्यक्रम से महिलाओं को बाहर रखा जाए। लड़की पर हमला करने वालों का कहना है कि उसके कपड़ों की वजह से उनका और बाइकर्स का ध्यान भटक रहा था। लड़कियों को इस तरह के शो में नहीं आना चाहिए, क्योंकि उनके होने से लोगों का ध्यान शो की बजाए उन पर होता है।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स द्वारा शेयर की गई इस वीडियो पर देश के वरिष्ठ नेताओं ने भी कमेंट किया है। कुर्दिस्तान संसद की स्पीकर रेवाज फाक ने इसे मूर्खतापूर्ण हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला हमारे देश की महिलाओं के खिलाफ हो रहे बर्बर हमलों की कहानी बयाँ कर रहा है।

रेवाज ने ट्वीट किया, “किसी सामान्य व्यक्ति की तरह केवल एक रेस देखने की इच्छा रखने वाली लड़की पर इन पुरुष दरिंदों द्वारा किया गया बेहूदा हमला हमारी महिलाओं के खिलाफ व्यवस्थित रूप से इस्तेमाल किए गए एक बर्बर नरैटिव का परिणाम है। इस बर्बरता से जो समाज या सत्ता नहीं जागी, उसे शीघ्र मृत्यु की प्रतीक्षा करनी होगी।”