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इजरायली मंत्री द्वारा अल-अक्सा मस्जिद परिसर में जाकर की प्रार्थना करने पर इस्लामी मुल्कों को लगी मिर्ची, पाकिस्तान बताने लगा शांति को खतरा: सऊदी अरब-जॉर्डन ने भी की निंदा

                                                     इजरायल के मंत्री के दौरे से भड़का पाकिस्तान
इजरायल के सुरक्षा मंत्री इतेमार बेन-ग्वेर ने यरुशलम में अल-अक्सा मस्जिद परिसर का दौरा कर वहाँ प्रार्थना की है। पूर्वी यरुशलम के जिस परिसर में बेन-ग्वेर ने प्रार्थना की है उसे यहूदी ‘टेंपल माउंट’ कहते हैं।

इस स्थल को लेकर नियम है कि यहूदी वहाँ जा सकते हैं लेकिन उन्हें प्रार्थना करने की अनुमति नहीं है। बेन-ग्वेर के इसका एक वीडियो अपने X अकाउंट पर भी शेयर किया है जिसके बाद बवाल मच गया है और कई इस्लामी देशों ने उनके इस कदम की निंदा की है।

बेन-ग्वेर का यह दौरा ‘तिशा बाव’ के दिन हुआ है। यह दिन यहूदी धर्म में एक उपवास और शोक का दिन होता है। इसे यरुशलम में यहूदियों के पहले और दूसरे पवित्र मंदिरों के विनाश समेत यहूदी इतिहास की त्रासदियों की याद में मनाया जाता है।

परिसर की मौजूदा स्थिति

मान्यता है कि सोलोमन राजा ने 1000 ईसा पूर्व में यहूदियों के लिए इसी जगह पर दो मंदिर बनवाए थे। वहीं, मुसलमानों के लिए तीसरा सबसे पवित्र स्थान है और मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद यहीं से जन्नत की यात्रा पर गए थे। यहूदियों के मंदिर के स्थान पर अब केवल एक दीवार बची है जिसे ‘वेस्ट वॉल’ कहा जाता है।

ईसाइयों में मान्यता है कि इस ‘वेस्ट वॉल’ के पास ही यीशू का जन्म हुआ था और वे भी इसे पवित्र मानते हैं। 1967 के युद्ध में इजरायल ने इसे जॉर्डन से अपने कब्जे में लिया था और दोनों देशों के बीच इसे लेकर समझौता हुआ था।

 मौजूदा व्यवस्था के तहत जॉर्डन को इस जगह का पारंपरिक संरक्षक बने रहने की अनुमति है। वहीं, इजरायल के पास सुरक्षा और यहां किसी के पहुंचने की अनुमति देने की जिम्मेदारी है। यहाँ अक्सर झड़पें होती रहती हैं।

इज़रायल के पीएम और इस्लामिक मुल्कों ने क्या कहा?

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेन-ग्वेर की यात्रा को लेकर एक बयान जारी किया है। नेतन्याहू के बयान में कहा गया कि टेंपल माउंट पर यथास्थिति बनाए रखने की इज़राइल की नीति न तो बदली है और न ही बदलेगी।

हालाँकि, सऊदी अरब, पाकिस्तान और जॉर्डन समेत कई इस्लामिक मुल्कों ने इसकी निंदा की है। इस स्थल के संरक्षक जॉर्डन ने बेन-ग्वेर की इस यात्रा को ‘उकसावे वाली यात्रा’ बताया है। फलस्तीनी अथॉरिटी के राष्ट्रपति महमूद अब्बास के एक प्रवक्ता ने कहा कि इस यात्रा से ‘सभी हदें पार हो गई हैं’। सऊदी अरब ने भी इस कदम की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ क्षेत्र में संघर्ष को बढ़ावा देती हैं।

पाकिस्तान ने क्या कहा?

दुनिया में धार्मिक कट्टरता के लिए कुख्यात पाकिस्तान को भी इससे मिर्ची लग गई है। जो देश अपने यहाँ अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को नष्ट करता है वो भी इजरायल को शांति का पाठ पढ़ा रहा है। खुद सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर पाकिस्तान यहूदियों को नैतिकता का पाठ पढ़ा रहा है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे लेकर X पर एक लंबा पोस्ट लिखा है। शहबाज ने बेन-ग्वेर की यात्रा की निंदा करते हुए लिखा, “यह अपवित्रता न केवल दुनिया भर के मुसलमानों का अपमान है बल्कि अंतर्राष्ट्रीय कानून और मानवता की चेतना पर सीधा हमला है।”
शहबाज ने आगे लिखा, “इस तरह के उकसावे शांति की संभावनाओं को खतरे में डालते हैं। इजरायल की बेशर्म हरकतें जानबूझकर फिलीस्तीन और पूरे इलाके में तनाव को भड़का रही हैं, जिससे मध्य पूर्व संघर्ष की ओर बढ़ रहा है।” पाकिस्तान ने इलाके में शांति की बात कही है।

ट्रंप प्रशासन ने रोकी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की 18000 करोड़+ रूपए की फंडिंग, बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ के चलते रुका पैसा: आतंक समर्थकों पर कार्रवाई को तैयार नहीं था विश्वविद्यालय

                                    हार्वर्ड की फंडिंग राष्ट्रपति ट्रंप ने रोक ( फोटो साभार: जागरण )
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की 2.2 अरब डॉलर (लगभग 18 हजार करोड़ रूपए) की फंडिंग रोक दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ये फैसला यूनिवर्सिटी में लगातार बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ के चलते किया है। यूनिवर्सिटी में लगातार यहूदियों के खिलाफ घृणा फ़ैलाने की शिकायतें सामने आ रहीं थी।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यूनिवर्सिटी में हमास के समर्थन में प्रदर्शन हुए है और यूनिवर्सिटी का प्रशासन इन्हें रोक नहीं पाया है। ट्रम्प प्रशासन ने यूनिवर्सिटी पर यहूदी प्रोफ़ेसर और छात्रों के साथ भेदभाव करने का आरोप भी लगाया है।

ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि यूनिवर्सिटी का यह रवैया अमेरिका के कानूनों का उल्लंघन है। इसी पर कदम उठाते हुए उन्होंने यूनिवर्सिटी की फंडिंग तत्काल प्रभाव से रोक दी है। उसको अलग से दी जाने वाली 9 अरब डॉलर की फंडिंग रोकने पर भी विचार चल रहा है।

यह फैसला लेने से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन से कई बड़े बदलाव करने को कहा था। उन्होंने कहा था प्रशासन को उन छात्रों को पहचानना होगा जो आतंकियों के समर्थक हैं, इसके अलावा यूनिवर्सिटी के भीतर आतंक की वकालत बंद करने को भी ट्रंप ने कहा था।

यूनिवर्सिटी में एडमिशन प्रक्रिया में भी सुधार करने की माँग ट्रंप ने की थी। शुक्रवार (11 अप्रैल, 2025) को हार्वर्ड ने यह माँगे मानने से इनकार कर दिया। आतंक समर्थक छात्रों को ढूँढने को यूनिवर्सिटी ने स्वतंत्रता पर हमला बताया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने यह फैसला लिया।

इस बीच हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के कुछ प्रोफेसरों ने राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया है। प्रोफेसरों का कहना है कि ये यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता पर हमला है और असंवैधानिक है। प्रोफेसरों के दो ग्रुप ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मैसाचुसेट्स की फेडरल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में केस दर्ज कराया है। इसमें कहा गया है कि यूनिवर्सिटी की फंडिंग रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।

गौरतलब है कि इजरायल और हमास के बीच युद्ध के दौरान हार्वर्ड में कई रैलियाँ निकाली गई थीं। इनमें अमेरिका के इजरायल से दोस्ती तोड़ने को कहा गया था। कई जगहों पर यहूदियों को गैस चैम्बर में डाल कर मार देने की बातें भी कही गईं थी। राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में आने के बाद ऐसे तत्वों पर कार्रवाई हो रही है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर हाल के दिनों में यह भी आरोप लगे हैं कि यहाँ गैर यहूदी और गैर माइनॉरिटी को वरीयता दी जा रही है। ट्रंप प्रशासन ने ऐसे रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन वाले कार्यक्रमों को खत्म करने की मांग की है और दाखिले के लिए पूरी तरह मेरिट बेस्ड सिस्टम अपनाने को कहा है।

ट्रंप प्रशासन का मानना है कि हार्वर्ड जैसी जानी-मानी यूनिवर्सिटी को जवाबदेह होना चाहिए और जब ये निष्पक्ष नहीं हैं तो उन्हें सरकारी फंडिंग नहीं दी जानी चाहिए।

राणा सांगा डीप स्टेट का टूलकिट : Akhilesh Yadav के लंदन दौरे के बाद हिंदुओं को जातियों में बांटने के लिए लाया गया; क्या नेता विदेशों में भारत विरोधियों से भीख मांगने जाते हैं?

अप्रैल 2 को लोकसभा में वक़्फ़ बिल पर हो रही चर्चा में एक बात बिलकुल साफ हो गयी कि जितना संसद से बाहर मुसलमानों को भड़काने का काम हो रहा था लेकिन संसद में अगर उनकी बातों को सुन लगा कि अप्रत्यक्ष रूप से बिल का समर्थन कर रहे थे, क्योकि जो दूसरों के कहने पर चल जनहितैषी बन जनता को गुमराह करने का काम करते हैं। सनातन और भारतीय संस्कृति का विरोध कर मुस्लिमों को खुश कर उनके वोट लेकर मालपुए खा रहे हैं।  
यह तो शीशे की तरह साफ है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी अमेरिकी अरबपति जार्ज सोरोस और डीप स्टेट के साथ मिलकर भारत विरोधी षड्यंत्रों को अंजाम देने में लिप्त हैं! समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव के लंदन दौरे के बाद अब इस कड़ी में उनका नाम भी जुड़ गया है। यूं तो राहुल-मुलायम इंडी गठगंधन के भी सहयोगी हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव ने भाजपा और सीएम आदित्यनाथ योगी से पार पाने के लिए हिंदुओं को जातियों में बांटने वाली टूलकिट का खेल खेला है। राहुल गांधी इस काम को पहले ही जातिगत जनगणना का ढोल पीटकर अंजाम दे ही रहे हैं। दरअसल, इन दोनों युवराजों को पता है कि उनके पास पीएम मोदी और भाजपा के हिंदुत्व की कोई काट नहीं है। इसीलिए वे हिंदुओं को जातियों में बांटने का कुचक्र चल रहे हैं। इसीलिए जानबूझकर पहले औरंगजेब का और अब राणा सांगा का मुद्दा उछाला है। रामजी लाल सुमन के बहाने सुनियोजित तरीके के इसे राजपूत वर्सेज दलित मुद्दा बनाया हैं। लेकिन हिंदुओं को जातियों में बांटने की टूलकिट की साजिश खुलकर सामने आ गई है।

इंडी गठबंधन ने मुस्लिम तुष्टिकरण और जातिगत वैमनस्य फैलाने की सारी हदें पार कीं

दरअसल, इंडी गठबंधन में सहयोगी समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम तुष्टिकरण और जातिगत वैमनस्य फैलाने की सारी हदें पार कर दी हैं। पहले तो सपाई सिर्फ मुस्लिम हितैषी बनते थे। औरंगजेब जैसे क्रूर शासकों के हिमायती बनते थे। अब इंडी गठबंधन और सपा हिंदुओं का गौरवशाली इतिहास बिगाड़ने में जुटी हुई है। अब राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन ने मुगलों से लोहा लेने वाले मेवाड़ के वीर योद्धा महाराणा संग्राम सिंह सांगा के खिलाफ बेहद अपमानजनक टिप्पणी कर दी है। उन्होंने राणा सांगा के वंशजों और उन्हें मानने वाले हिंदुओं को गद्दार तक कह डाला है। सपा सांसद की इस अभद्र, अशोभनीय, असभ्य और अनर्गल टिप्पणी को लेकर राजस्थान समेत देशभर की सियासत में उबाल आ गया है। राजस्थान के सीएम भजनलाल ने कहा कि मेवाड़ के महान योद्धा राणा सांगा के बारे में समाजवादी पार्टी के सांसद का निम्नस्तरीय बयान, न केवल राजस्थान की 8 करोड़ जनता को, बल्कि सम्पूर्ण देशवासियों को आहत करने वाला है। समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के राणा सांगा को गद्दार कहने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में गूंजा। कांग्रेस ने आपत्ति की तो भाजपा ने कहा कि इससे साफ तय हो गया कि आप लोग भी रामजीलाल सुमन के साथ हो।
सपा सांसद सुमन ने महाराणा सांगा पर यह विवादित बयान दिया
समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने राज्यसभा में जो बयान दिया उससे पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। सपा सांसद सुमन ने मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते राणा सांगा को लेकर बयान में कहा था कि ‘बीजेपी के लोगों का ये तकियाकलाम बन गया है कि इनमें बाबर का DNA है। मैं जानना चाहूंगा कि बाबर को आखिर लाया कौन? सुमन ने अनर्गल दावा किया कि इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को राणा सांगा लाया था। मुसलमान अगर बाबर की औलाद हैं तो तुम लोग उस गद्दार राणा सांगा की औलाद हो, ये हिन्दुस्तान में तय हो जाना चाहिए कि बाबर की आलोचना करते हो, लेकिन राणा सांगा की आलोचना नहीं करते। बता दें कि देश में पहले से औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। इसके बाद राणा सांगा पर विवादित बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है।
हिंदुओं को बांटने की टूलकिट के पीछे है डीप स्टेट की ‘चौकड़ी’
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के लंदन दौर के बाद अब यह समझ में आने लगा है कि औरंगजेब की हिमायत और राणा सांगा की खिलाफत के बयान सपा नेताओं ने यूं ही नहीं दिए हैं। इसके पीछे डीट स्टेट की सुनियोजित साजिश है और वे मुस्लिमों को एकजुट करने और हिंदुओं को बांटने की अपनी टूलकिट को अंजाम देने में लगे हैं। कड़ी से कड़ी जोड़ने पर स्पष्ट होता है कि कैसे अखिलेश यादव और राहुल गांधी के परिवार के बीच मित्रता है। राजनीतिक गठबंधन है। अब राहुल गांधी से जुड़ा एनजीओ, कांग्रेस के युवराज के खास सलाहकार विदेशों से और जार्ज सोरेस से भारत विरोध के नाम पर करोड़ों की फंडिंग ले रहे हैं। डीप स्टेट के इस गोरखधंधे में राहुल गांधी ने अपने मित्र अखिलेश यादव को मिला लिया है। इसलिए भी समाजवादी पार्टी हिंदुओं को जातियों में बांटने की राजनीति में उतर आई है। इस ‘चौकड़ी’ को लगता है कि वे सिर्फ और सिर्फ हिंदूओं को बांटकर ही भाजपा को सत्ता से दूर कर पाएंगे। यही वजह है कि राहुल गांधी भी आए दिन हिंदुस्तान को जातियों में बांटने के लिए जातिगत जनगणना का राग अलापते रहते हैं।
राहुल एंड कंपनी को हजम नहीं हो रही पीएम मोदी की लगातार सफलता
डीप स्टेट, राहुल गांधी और अखिलेश यादव की करतूतों की कलई तो भाजपा नेताओं ने अपने एक्स अकाउंट पर खोलकर रख दी है। जहां तक सोरोस और राहुल गांधी के संबंधों का सवाल है तो सोशल मीडिया पर इनकी घनिष्ठता के कई प्रमाण बिखरे हैं। इनसे साफ पता चलता है कि लोकसभा से लेकर विधानसभाओं में हार-दर-हार झेल रहे कांग्रेस के ‘कर्ताधर्ता’ राहुल गांधी अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए कितने निचले स्तर तक गिर गए हैं! राहुल अभी तक तो विदेशों में जाकर भारत और मोदी सरकार की बुराई करके देश को नीचा दिखाने के कोशिश किया करते थे। लेकिन अब उनपर साफ-साफ देश के साथ ‘गद्दारी’ करने के आरोप लगे हैं। उधर उनके मित्र अखिलेश यादव के इशारे पर सपा नेता हिंदू राष्ट्र के गौरव राणा सांगा को ‘गद्दार’ बता रहे हैं। दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लगातार तीसरी बार सत्ता में आना राहुल एंड कंपनी को हजम नहीं हो रहा है। उनके यह भी गले नहीं उतर रहा है कि पिछले एक दशक में भारत लगातार दुनिया में तेजी से एक शक्ति के तौर पर स्थापित हो रहा है। देश ने हर क्षेत्र में अपने प्रदर्शन में गुणात्मक सुधार किया है।
सांसद के घर पर हमले को दलित विमर्श से जोड़ रही सपा
राजपूत राजा राणा सांगा पर समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजपूत समाज की नाराजगी, बयान देने वाले नेता का विरोध, सांसद के घर पर हमले के बाद अब इस मामले में सियासी तड़का लगने लगा है। चोरी और सीनाजोरी की तर्ज पर सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से मिलकर सुरक्षा की मांग की। सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा- मैंने कुछ गलत नहीं बोला है, मैं माफी नहीं मांगूंगा और अपने बयान पर कायम हूं। इधर रामजी लाल सुमन के घर पर हुए हमले के बाद सपा नेता राम गोपाल यादव उनके घर आगरा पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए इस मुद्दे को दलित राजनीति से जोड़ने की कोशिश की।  
दलित पर नहीं, राणा सांगा को विद्रोही बताने वाले पर हमलाः भाजपा
दूसरी ओर इस मामले में बीजेपी के नेताओं ने समाजवादी पार्टी को करारा जवाब दिया है। गोरखपुर सांसद भाजपा नेता रवि किशन ने कहा कि उकसाने वाले बयान से बचना चाहिए। आप कहेंगे तो जनता उग्र हो जाती है। भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेई ने कहा- दलित होने के कारण उनके घर पर हमला नहीं हुआ बल्कि राणा सांगा जैसे योद्दा के खिलाफ बोलने वालों के खिलाफ हमला हुआ। उत्तर प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेई ने कहा, “अखिलेश यादव को यह बात ध्यान रखनी चाहिए। उनका या उनके किसी कार्यकर्ता का कोई भी वाक्य भारत माता के विरुद्ध है तो उनको बोलने में संकोच करना चाहिए। राणा सांगा को गद्दार बताएंगे, देश का इतिहास झुठलायेंगे तो वह स्वाभाविक प्रक्रिया होगी। अगर उनके साथ कोई घटना घटती है तो दलित के साथ नहीं, बल्कि राणा सांगा को विद्रोही बताने वाले के साथ घटना घटी है।
अखिलेश यादव ने राजपूत वोटों की चिंता इसलिए छोड़ी 
राजपूत राजा राणा सांगा पर सपा सांसद रामजी लाल सुमन की विवादित टिप्पणी के बाद शुरू हुए सियासी घमासान को अखिलेश यादव 2027 के चुनावों की नजर से देख रहे हैं। इसीलिए समाजवादी पार्टी सपा सांसद रामजी लाल सुमन के घर पर करणी सेना के लोगों द्वारा किए गए घेराव को राजूपत बनाम दलित बनाने की कोशिश हो रही है। करणी सेना के पहुंचने के बाद उन्हें आपदा में अवसर दिखने लगा है। हालांकि हिंदुओं को बांटने की इस रणनीति में अखिलेश यादव कभी कामयाब नहीं हो पाएंगे और उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी। इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि आज समाजवादी पार्टी वोट बैंक के लिए राजपूत आधार नहीं हैं। केवल 2012 के विधानसभा चुनाव तक भी क्षत्रिय वोटों पर सपा की पकड़ थी। अखिलेश मंत्रिमंडल में 11 ठाकुर इस बात के सबूत थे। अखिलेश सरकार में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह, अरविंद सिंह गोप, राधे श्याम सिंह, राजा आनंद सिंह, योगेश प्रताप सिंह, राजा महेंद्र अरिदमन सिंह समेत कुल 11 ठाकुर मंत्री थे। मगर आज स्थितियां पूरी तरह से बदल चुकी हैं। अखिलेश यादव को भी मालूम है कि अब राजपूत समाजवादी पार्टी को वोट नहीं देने वाले हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह हैं उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ। राजपूत कुल से आने वाले योगी पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में असली ‘ठाकुर’  साबित हो रहे हैं। यूपी का अगला चुनाव योगी बनाम अखिलेश होता है तो उत्तर प्रदेश के राजपूत तन मन धन से योगी आदित्यनाथ के साथ होंगे। शायद यही कारण है कि अखिलेश यादव ने राजपूत वोटों की चिंता छोड़कर दलित वोटों पर फोकस करने में लगे हैं। 
दलित सपा के हथकंडे समझ चुके, बहकावे में नहीं आएंगे
उन्होंने दूसरी पोस्ट में कहा कि आगरा घटना की आड़ में अब सपा अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना बंद करे और आगरा की हुई घटना की तरह यहां दलितों का उत्पीड़न और ज्यादा न कराए। उन्होंने लिखा कि समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक लाभ के लिए अपने दलित नेताओं को आगे करके जो घिनौनी राजनीति कर रही है अर्थात उनको नुकसान पहुंचाने में लगी है, यह कतई उचित नहीं है। दलित ना सिर्फ समाजवादी के हथकंडे भलीभांति समझ चुके हैं, बल्कि इनके बहकावे में आने वाले नहीं है। समाजवादी पार्टी हमेशा से दलितों की विरोधी थी और आज भी दलित विरोधी ही है।
राजस्थान के राजपूत राजा राणा सांगा के बारे में सपा सांसद की अपमानजनक टिप्पणी पर राजस्थान के नेताओं ने क्या कहा…
राजस्थान विधानसभा में गूंजा राणा को गद्दार कहने का मुद्दा
समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के राणा सांगा को गद्दार कहने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में उठा। बीजेपी विधायक श्रीचंद कृपलानी ने पॉइंट ऑफ इंफॉर्मेशन के जरिए राणा सांगा को गद्दार कहने का मामला उठाते हुए पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की। इस पर कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने कहा- सदन में इस पर चर्चा नहीं हो सकती। हरिमोहन शर्मा के इतना कहते ही बीजेपी विधायकों ने कड़ी आपत्ति की। इस पर बीजेपी विधायकों ने कहा- राणा सांगा के अपमान पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? कई बीजेपी विधायक जोर-जोर से बोलने लगे, इससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। बीजेपी विधायकों ने कहा कि आप राणा सांगा पर टिप्पणी का समर्थन कर रहे हो क्या? श्रीचंद कृपलानी ने कहा- आपके खड़ा होने से यह तय हो गया कि आप रामजीलाल सुमन के साथ हो? कांग्रेस ने खुद अपनी पोल खोल ली। आप मुगलों का साथ दे रहे हो। सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा- कांग्रेस विधायक दल रामजीलाल सुमन के साथ खड़ा है, राणा सांगा का अपमान करने वाले के साथ खड़ा है, शर्म आनी चाहिए।
अपने सांसद के बयान के लिए अखिलेश देश से माफी मांगें-भजनलाल
सपा सांसद के बयान पर राजस्थान के सीएम भजनलाल ने सोशल मीडिया पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि ‘शूरवीरों की धरती राजस्थान के लाडले सपूतों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए सदा अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। मेवाड़ के महान योद्धा राणा सांगा के बारे में समाजवादी पार्टी के सांसद का निम्नस्तरीय बयान, न केवल राजस्थान की 8 करोड़ जनता को, बल्कि सम्पूर्ण देशवासियों को आहत करता है।’ उन्होंने आगे लिखा कि ‘जिस महान योद्धा ने मुगलों से युद्ध में अपने शरीर पर 80 घाव झेले, उनको गद्दार कहना विपक्षी नेताओं की घटिया मानसिकता को दर्शाता है। वोटो के तुष्टिकरण के लिए ये लोग इतिहास पुरुषों का अपमान करने से भी नहीं चूकते हैं। इसके लिए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को को तुरंत देश से माफी मांगनी चाहिए और अपने सांसद पर अविलम्ब कार्रवाई करनी चाहिए।’

जाफर एक्सप्रेस के सभी 214 बंधक मारे गए: BLA का ऐलान, पाकिस्तानी फौज सबको छुड़ाने का कर रही थी दावा; बलूचिस्तान में पुलिस स्टेशन, चेकपोस्ट और कंस्ट्रक्शन कंपनी पर भी अटैक

          बलोच विद्रोहियों ने जाफर एक्सप्रेस को बोलान दर्रे के पास बंधक बना लिया था (फोटो साभार: India TV)
पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस हाइजैक मामला लगातार उलझता चला जा रहा है। पाकिस्तान की फ़ौज और सरकार के दावों के उलट बलोच विद्रोहियों ने 200 से अधिक फौजियों की हत्या की बात कही है। वहीं पाक फ़ौज ने दावा किया है कि मात्र 23 ही फौजी इस ऑपरेशन के दौरान मारे गए हैं। पाक फ़ौज के प्रवक्ता ने भारत को इस घटना का मुख्य साजिशकर्ता बताया है।

जाफर एक्सप्रेस को हाइजैक करने वाली बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने शुक्रवार (14 मार्च, 2025) को एक बयान जारी किया है। BLA ने कहा है कि उसने ट्रेन हाइजैक करने के बाद 48 घंटे पाकिस्तान सरकार को दिए थे, जिसमें उन्हें बलोच बंदियों को छोड़ना था।

BLA के अनुसार, 48 घंटे के बाद भी यह माँग पूरी होने के चलते उन्होंने जाफर एक्सप्रेस से बंधक बनाए गए सभी 214 फौजी मौत के घाट उतार दिए। BLA ने कहा है कि यह पाकिस्तान सरकार और फ़ौज की जिद का नतीजा है जबकि वह हमेशा नियमों से ही लड़ाई लड़ती आई है।

ट्रेन हाइजैक और इसके बाद हुई पाक फ़ौज से लड़ाई में BLA के 12 विद्रोही मारे गए हैं, यह भी बयान में बताया गया है। BLA ने कहा कि उन्होंने पकड़े गए फौजियों को एक बोगी में बंद कर रखा था और जब पाक फ़ौज के दूसरे कमांडो उन्हें छुड़वाने के लिए आए तो BLA के फिदायीन लड़ाकों ने उनकी हत्या कर दी।

वहीं पाकिस्तान की फ़ौज और सरकार के दावे इससे उलट हैं। पाकिस्तान के DG ISPR लेफ्टिनेंट अहमद शरीफ चौधरी ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया है कि पूरी घटना के दौरान 31 लोगों की मौत हुई जिनमें 23 फौजी थे। DG ISPR ने दावा किया है कि ऑपरेशन के दौरान 33 बलोच विद्रोही मारे गए हैं।

पाकिस्तान फ़ौज ने दावा किया है कि उसने 350 से अधिक बंधक हाइजैक की गई ट्रेन से मुक्त करवाए थे। हालाँकि, बलोच विद्रोहियों ने स्पष्ट किया है कि फौजियों को छोड़ कर उन्होंने बाकी सभी यात्रियों को रिहा कर दिया था। पाक फ़ौज ने अपनी इस नाकामी को छुपाने के लिए एक बार फिर भारत पर आरोप भी जड़े हैं।

DG ISPR ने आरोप लगाया है कि इस हमले का मुख्य आयोजक उनका पूर्वी पड़ोसी देश (भारत) है। इस हमले में पाक फ़ौज ने अफगानिस्तान का नाम भी घसीटा है। हालाँकि, भारत और अफगानिस्तान पहले ही पाकिस्तान के इन आरोपों को नकार चुके हैं।

वहीं इस बीच बलूचिस्तान के और भी शहरों में हमले हुए हैं। बलूचिस्तान के क्वेटा, पंज्गूर और खुजदार में हमले गुरुवार रात को हुए हैं। क्वेटा में हमलावरों ने एक पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया जबकि खुजदार में एक निर्माण कम्पनी पर हमला किया गया और उसके साजोसामान में आग लगा दी गई। पंज्गुर में एक चेकपोस्ट पर हमला हुआ और यहाँ से हथियार लूटे गए।

बलूचिस्तान में बीते कुछ दिनों से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। बलोच विद्रोही लगातार फ़ौज पर हमले कर रहे हैं और उन्होंने बड़े इलाके पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। वहीं फ़ौज उनके दावे नकार कर प्रोपेगेंडा करने और इल्जाम भारत तथा अफगानिस्तान पर डालने में जुटी है।

अहंकार या गुंडागर्दी? : राहुल गाँधी ने सांसद को दिया धक्का, बीजेपी MP के सिर में लगी चोट

सत्ता हाथ न आने पर गाँधी परिवार सबसे ज्यादा आहत है। उस आहत में क्या करना है या क्या बोलना कुछ नहीं पता। परिवार हमेशा इस अहंकार में रहा कि सोने की चम्मच में खाने वाला सत्ता पर काबिज क्यों नहीं हो पा रहा, इस कारण राहुल गाँधी सबसे ज्यादा दुखी है।  
संसद में धक्का-मुक्की के कारण भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रताप सारंगी संसद में चोटिल हो गए। घटना में उनके सिर से खून निकलने लगा। पूछने पर उन्होंने बताया कि उन्हें ये चोट राहुल गाँधी के धक्के के कारण लगी।

उन्होंने बताया, “मैं सीढ़ियों पर खड़ा था। राहुल गाँधी ने एक सांसद को धक्का दिया और वो सांसद मेरे ऊपर गिर गए, जिससे मैं गिर गया और चोट लग गई।”

वीडियो में देख सकते हैं कि प्रताप सारंगी के सिर पर रुमाल रखकर उन्हें आनन-फानन में मेडिकल सुविधा के लिए ले जाया जा रहा है।

भाजपा सांसद के साथ इस घटना पर राहुल गाँधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “कैमरे में सब कैद है। मैं सदन में जाने की कोशिश कर रहा था। भाजपा के सांसदों ने मुझे धकेला और धमकाया। खड़गे जी को भी धक्का दिया। धक्का-मुक्की से हमें कुछ नहीं होता है। संसद में जाना हमारा अधिकार है। हमें कोई नहीं रोक सकता। वो रोक रहे थे तो ये हुआ… हाँ किया है किया है। “

कनाडा : पाखंडी हिंदू सभा ने उस मंदिर के पुजारी राजेंद्र प्रसाद को क्यों हटाया जिसे खालिस्तानियों ने बनाया था निशाना?: हमले के बाद वीडियो हुआ था वायरल, कहा था- बँटोगे तो कटोगे; ऐसे ही पाखंडियों के कारण हिन्दू बंटता भी है और कटता भी है

कनाडा के ब्रैम्पटन में हिंदू सभा मंदिर ने खालिस्तानी हमले के कुछ दिनों बाद पुजारी राजेन्द्र प्रसाद को हटा दिया है। हिन्दू सभा ने कहा है कि राजेन्द्र प्रसाद की एक विरोध में संलिप्तता थी और इस विरोध प्रदर्शन की इजाजत नहीं ली गई थी। हिंदू सभा मंदिर के अध्यक्ष मधुसूदन लामा ने एक पत्र लिखा कर कहा कि राजेन्द्र प्रसाद के खिलाफ तत्काल प्रभाव से यह कार्रवाई की जा रही है।
पाखंडी मंदिर प्रबंधकों यह समय की मांग थी, जिसे साहसिक पुजारी ने अंजाम दिया था। पाखंडियों इसी 'बँटोगे तो कटोगे' की गूंज से विश्व हिल गया। और तुमने राजेंद्र का साथ देने की बजाए उसी पर कार्यवाही अपनी नपुंसकता का उदाहरण प्रस्तुत कर दिया है। तुम्हारे जैसे ढोंगी हिन्दुओं को किसी मन्दिर प्रबंधन से कोसों दूर रखना ही नहीं चाहिए बल्कि तुम्हारे जैसे ढोंगी हिन्दुओं की हर गतिविधि पर हिन्दुओं को नज़र रख, सबको सचेत करना चाहिए। उन सभी पदाधिकारियों को प्रबंधन से बाहर करना चाहिए जो इस निर्णय में शामिल थे। पुजारी राजेंद्र ने कोई गलत काम नहीं किया था, पुजारी ने अपनी पंडताई धर्म का पालन किया। यही हमारे शास्त्र और उपदेश निर्देश देते हैं। तुम्हारे जैसों के कारण हिन्दू एकता में बाधा आती है और दोष सरकार को दिया जाता है। असली दोषी तुम जैसे पाखंडी हिन्दू हैं। मंदिर प्रबंधन कालनेमि है। विभीषण नहीं क्योकि विभीषण ने धर्म के लिए अपने भाई को छोड़ दिया था। लेकिन तुम्हारे जैसे लोग समाज में नाम कमाने मंदिरों के ट्रस्टी बन जाते हैं, चन्दों पर ऐश करते हैं। तुम्हारे जैसे जयचन्दों के कारण मुग़ल भारत में आये थे। हिन्दू सम्राट तो उनको मार रहे थे लेकिन तुम्हारे जैसे जयचन्द अंदरखाने मुगलों की मदद कर रहे थे।   

सोशल मीडिया पर कुछ हैंडल ने पोस्ट किया है कि हिंदू सभा मंदिर ने यह कार्रवाई एक वायरल वीडियो के सामने आने के बाद की है। इस वीडियो कथित तौर पर राजेन्द्र प्रसाद, मंदिर पर हमले का विरोध करने के लिए एकत्र हुए लोगों के एक समूह खालिस्तानियों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान कर रहे हैं।

3 नवंबर, 2024 को खालिस्तानियों ने गोर रोड स्थित ब्रैम्पटन में हिंदू सभा मंदिर पर हमला किया था। यहाँ पर उस दौरान एक काउंसिलर कैम्प चल रहा था। ,इस घटना ने कनाडा में हिंदू भारतीयों के खिलाफ खालिस्तानी हिंसा को उजागर कर दिया था। इस हमले में पील पुलिस का एक अधिकारी हरिंदर सिंह सोढ़ी भी शामिल था।

तेलंगाना : भगवान की पवित्र भूमि से खिलवाड़ नहीं करेंगे बर्दाश्त: चिलकूर बालाजी मंदिर के पास बन रही थी अवैध मस्जिद, बजरंग दल के विरोध के बाद निर्माण रुका

                                                                    तेलंगाना में प्रदर्शन
तेलंगाना के चिलकुर बालाजी मंदिर के पास एक जमीन को वक्फ जमीन बताकर वहाँ मस्जिद बनाया जा रहा है। अब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इसी का विरोध करते हुए कॉन्ग्रेस प्रशासन को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि मंदिर की पवित्रता के साथ कोई भी खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने निर्माण हो रहे मस्जिद को गिराने की माँग की है।

चिलकुर बालाजी देवस्थानम के अर्चक सीएस रंगराजन ने कहा, “चिलकुर बालाजी मंदिर के आसपास की जमीन पवित्र है और बहुत लंबे समय से मौजूद है। जिस तरह तिरुपति बालाजी मंदिर के आसपास की जमीन पूजनीय है, उसी तरह चिलकुर बालाजी मंदिर के आसपास का इलाका भी उतना ही पवित्र है और भगवान इसके असली मालिक हैं क्योंकि भगवान वेंकटेश्वर ने खुद को उन्हें सिलकुर में प्रकट किया है। यह अन्य धर्मों के पूजा स्थलों के लिए जगह नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि मंदिर की पवित्रता को सुनिश्चित करना पुलिस, राजस्व और अन्य विभागों की जिम्मेदारी है। वह बोले, “मंदिर के दो किलोमीटर के भीतर एक नई मस्जिद बनाई जा रही है। वे भी हमारे भाई हैं और हम उनसे प्यार करते हैं और उनका सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार और मस्जिद बनाने वालों से यह अनुरोध है कि भूमि की पवित्रता और स्वामित्व को बरकरार रखा जाए। यह प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय से हमारी सम्मानजनक अपील है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यहाँ किसी अन्य धर्म के लिए कोई नया पूजा स्थल न बनाया जाए।”

बजरंग दल के राज्य संयोजक शिवरामुलु ने माँग की कि स्थानीय तहसीलदार जिन्होंने निजी भूमि को वक्फ भूमि बताने वाली रिपोर्ट बनाई, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में मुस्लिम एमएलसी की बात सुनी गई, साइट पर बोरवेल खोदने का काम हुआ। उनके मुताबिक इन सबसे दौरान पुलिस मौके पर थी और निर्माण कार्य करते समय स्थानीय लोगों को आतंकित कर रही थी। इसी के बाद बजरंग दल ने चेतावनी दी कि हिंदू समुदाय अपने खिलाफ साजिश का जवाब देगा।

इस मामले में ताजा अपडेट के अनुसार हिंदू कार्यकर्ताओं और सीएस रंगराजन द्वारा विरोध प्रदर्शन के बाद, जिला कलेक्टर ने तुरंत इस मामले का संज्ञान लिया और मस्जिद के निर्माण को रोक दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर निर्माण जारी रहा तो प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

आंध्र प्रदेश : ‘जनसेना के मुखिया पवन कल्याण जीते तो बदल लूँगा अपना नाम’: जगन की पार्टी के नेता अब बन गए पद्मनाभ रेड्डी

मुद्रागडा पद्मनाभ (बाएँ) ने पवन कल्याण (दाएँ) के जीतने के बाद अब नाम बदल लिया है (चित्र साभार: Sakshi & Pawan Kalyan/FB)
विधि के विधान कोई नहीं बदल सकता। कई बार इसी ब्लॉग पर फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस द्वारा 1555 में की गयी भविष्यवाणियों के बारे में लिखा जा चूका है। 2014 में एक अधेड़ आयु के सख्त नेता के नेतृत्व में एक नई पार्टी सत्ता में आएगी और उस नेता को हराने वाला कोई नहीं होगा। उसके प्रशंसक भी होंगे तो विरोधी भी कम नहीं होंगे। 
देखिए 2024 लोक सभा चुनाव ने कई लोगों को धूल चटवा दी। नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से रोकने में लगी विदेशी ताकतों की भीख पर पलता विपक्ष, एक मुश्त मोदी के विरोध में वोट देने वाला मुस्लिम समाज और विशेषकर संघ आदि। इतने वर्षों से संघ का इंद्रेश कुमार के संगठन का नाम देखिए, राष्ट्रीय मुस्लिम मंच, चल रहा है। इंद्रेश खुद तो पागल बन रहा है संघ को भी बना रहा है और जनता को भी। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आते ही मुसलमानों में मोदी को हराने वोट न देने की मुहीम चल रही थी। अगर इंद्रेश को इस मुहिम की जानकारी नहीं, क्यों नहीं मंच को किया जाता बंद। मोदी को रोकने में विदेशी ताकतों के करोड़ों रूपए स्वाहा हो गया, लेकिन मोदी बन गया तीसरी बार प्रधानमंत्री।  

कालचक्र घूम रहा है। 2024 से 2029 का समय देश को एक नयी ऊंचाई पर लेकर जाएगा। मोदी विरोधी नए-नए षड़यंत्र रचेंगे, उपद्रव करने का प्रयत्न करेंगे, लेकिन सभी चारों खाने चित होंगे। प्रधानमंत्री के निर्भीक निर्णयों से विश्व भी प्रधानमंत्री का लोहा मानने को विवश हो जाएगा। 

आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जनसेना पार्टी के मुखिया कोनिडेला पवन कल्याण के जीतने के कारण एक नेता को अपना नाम बदलना पड़ गया। YSRCP के नेता ने चुनौती दी थी थी कि यदि पवन कल्याण जीत जाते हैं तो वह नाम बदल लेगा, अब आधिकारिक तौर पर उसने ऐसा कर भी लिया है।

YSRCP के नेता ने तो चुनौती को स्वीकारते नाम बदल लिया। लेकिन देश में एक पलटू पार्टी है, जिसके एक नेता सोम भारती ने नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर सिर मुंडवाने की बात कही थी, परन्तु बाद में पलटी मार गया। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की पार्टी YSRCP के कापू समुदाय से आने वाले नेता मुद्रागडा पद्मनाभम ने अपना नाम बदला है। मुद्रागडा पद्मनाभम ने अपना नाम अब बदल कर पद्मनाभ रेड्डी कर लिया है। उन्होंने इसके लिए बाकायदा अंदर प्रदेश सरकार के सरकारी गजट में अपना नाम बदलवाया है।

मुद्रागडा पद्मनाभ ने आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले ही जगन रेड्डी की पार्टी YSRCP की सदस्यता ली थी। उन्होंने इस चुनाव प्रचार के दौरान ऐलान किया किया था कि जनसेना के मुखिया पवन कल्याण पिठापुरम विधानसभा क्षेत्र से हार जाएँगे। उन्होंने कहा था कि यदि ऐसा नहीं होता, तो वह अपना नाम बदल लेंगे।

पद्मनाभ के ऐलान के उलट पवन कल्याण पिठापुरम से भारी मतों से जीते। उन्होंने YSRCP की उम्मीदवार गीता विश्वनाथ को 70,000 वोटों के अंतर से हराया। पवन कल्याण को यहाँ 34 लाख वोट मिले जबकि गीता को मात्र 64,000 वोट ही मिले। पवन कल्यान की जनसेना से भी राज्य में भारी जीत हासिल की।

पवन कल्याण की इस जीत के बाद कापू समुदाय के नेता पद्मनाभ ने अपना नाम बदल लिया। उन्होंने इसके सरकार को आवेदन दिया था जिसके बाद उनके नाम बदलने को मंजूरी मिल गई। उन्होंने नाम बदलने के फैसले पर अमल करने का ऐलान चुनाव परिणाम आने के अगले ही दिन कर दिया था।

आंध्र प्रदेश में NDA गठबंधन ने YSRCP को बुरी तरह हराया है। राज्य में हुए चुनाव में TDP को 135, जनसेना को 21 जबकि भाजपा को 8 सीटें हासिल हुई हैं। वहीं सत्ताधारी YSRCP 11 सीटों पर सिमट गई और उसका राज्य से सफाया हो गया है।

‘मा$₹चो$ हो तुम स्वाति मालीवाल’: यूट्यूबर ध्रुव राठी की वीडियो के बाद मालीवाल को मिल रही रेप-हत्या की धमकी – दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की माँग

स्वाति मालीवाल ने ध्रुव राठी पर एकतरफा जानकारी देने के आरोप लगाए हैं (साभार: ANI & Opindia english)
आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने बताया है कि यूट्यूबर ध्रुव राठी के वीडियो के बाद उन्हें रेप-हत्या की धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने कहा है कि ध्रुव राठी ने बिना उनका पक्ष लिए एकतरफा वीडियो बना दिया है। उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी की तरफ से उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए धमकाया जा रहा है।

स्वाति मालीवाल ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट लिख बताया है कि उनका पहले ही आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने चरित्र हनन किया और उनके पीड़ित होते हुए भी उन्हीं को दोषी ठहराया। इसके बाद जब यूट्यूबर ध्रुव राठी ने इस पर वीडियो बनाया तो उनको हत्या और रेप की धमकियाँ मिलने लगीं।

स्वाति मालीवाल ने बताया कि उन्होंने ध्रुव राठी को अपना पक्ष बताने के लिए कॉल और मैसेज किए लेकिन राठी ने उनका पक्ष बिना जाने ही वीडियो बना दी। उन्होंने कहा है कि ध्रुव राठी को इस बात पर शर्मिन्दा होना चाहिए कि वह AAP के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं और पीड़ित पर ही प्रश्न उठा रहे हैं।

स्वाति मालीवाल ने ध्रुव राठी से उनके वीडियो में कई जानकारियाँ ना देने को लेकर कई प्रश्न भी पूछे हैं। उन्होंने पूछा है कि आखिर जब AAP ने एक दिन उनके साथ बदसलूकी की बात मान ली थी तो आखिर बाद में उस स्टैंड से यू टर्न क्यों ले लिया। मालीवाल ने ध्रुव राठी से पूछा कि आखिर उन्होंने अपनी वीडियो में उनकी मेडिकल रिपोर्ट का जिक्र क्यों नहीं किया। उन्होंने जानबूझ कर छोटा वीडियो रिलीज किए जाए और विभव कुमार के फोन फॉर्मेट होने को लेकर प्रश्न पूछे।

स्वाति मालीवाल ने कहा कि ध्रुव राठी ने अपनी वीडियो में यह नहीं बताया कि विभव कुमार को मुख्यमंत्री आवास से गिरफ्तार किया गया, उन्हें घटनास्थल पर सबूत मिटाने का मौक़ा क्यों दिया गया। मालीवाल ने भाजपा के लिए काम करने के आरोपों पर कहा कि वह महिलाओं के लिए काम करती रही हैं, आखिर वह भाजपा द्वारा कैसे खरीदी जा सकती हैं।

स्वाति मालीवाल ने उनको भेजी गईं रेप और हत्या की धमकियों के स्क्रीनशॉट भी डाले और कहा कि वह इस मामले को दिल्ली पुलिस के पास लेकर जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कुछ होता है तो जिस व्यक्ति ने इसे चालू किया है, वह इसका जिम्मेदार होगा।

13 मई, 2024 को दिल्ली CM आवास में स्वाति मालीवाल के साथ अरविन्द केजरीवाल के पूर्व PS विभव कुमार ने मारपीट की थी और उनको अभद्र गालियाँ दी थी। इस मामले में स्वाति मालीवाल ने FIR दर्ज करवाई थी जिसके बाद विभव कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया था। वर्तमान में विभव कुमार न्यायिक हिरासत में हैं। मामले की जाँच के लिए दिल्ली पुलिस ने एक SIT बनाई है, जो इसमें आगे कार्रवाई कर रही है।