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आंध्र प्रदेश : तिरुपति प्रसाद की पवित्रता हुई बहाल, TTD ने बयान जारी कर दिया आश्वासन: ‘जानवर की चर्बी’ वाले विवाद पर Amul ने कहा- हमने कभी नहीं की वहाँ घी सप्लाई


तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसिद्ध लड्डू प्रसादम की शुद्धता बहाल होने की पुष्टि की गई है। टीटीडी ने इस विवाद के बाद स्पष्ट किया कि अब लड्डू प्रसादम का घी बिना किसी गड़बड़ी के है और उसकी शुद्धता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह बयान तब आया, जब तिरुमाला मंदिर के लड्डू प्रसादम के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे।

शुद्धता पर टीटीडी का बयान

टीटीडी ने कहा है कि प्रसादम की शुद्धता को फिर से स्थापित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि घी आपूर्ति और उसके इस्तेमाल में पूरी सावधानी बरती जाती है, ताकि प्रसाद की पवित्रता और भक्तों की आस्था बनी रहे। बता दें कि पिछले कई महीनों से यह आरोप लगाया जा रहा था कि लड्डू प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता घट गई है। घी अशुद्ध था और उसमें जानवरों की चर्बियाँ पाई गई थी।
अब तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने कहा है कि अब प्रसाद पूरी तरह से पवित्र और बेदाग है। तिरुमाला की पहाड़ियों पर स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर का प्रबंधन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड (टीटीडी) करता है। शुक्रवार रात को सोशल मीडिया पर साझा किए पोस्ट में टीटीडी ने लिखा कि ‘श्रीवारी लड्डू की दिव्यता और पवित्रता अब बेदाग है। टीटीडी सभी श्रद्धालुओं की संतुष्टि के लिए लड्डू प्रसादम की पवित्रता की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।’

घी आपूर्तिकर्ताओं पर विशेष ध्यान

टीटीडी ने यह भी कहा कि प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक कठोर जाँच प्रक्रिया का पालन किया जाता है। इसमें शामिल आपूर्तिकर्ताओं की छानबीन की जाती है और घी की हर खेप का परीक्षण किया जाता है। टीटीडी ने यह भी कहा कि भक्तों की आस्था और प्रसादम की शुद्धता बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है। इसके लिए किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
प्रसादम की शुद्धता पर टीटीडी के इस आश्वासन के बाद भक्तों में राहत महसूस हुई है। सोशल मीडिया पर भी टीटीडी के प्रयासों की सराहना की जा रही है। कई भक्तों ने कहा कि लड्डू प्रसादम के साथ उनकी आस्था जुड़ी हुई है और टीटीडी द्वारा उठाए गए कदमों ने उनकी आस्था को और मजबूत किया है। अमूल के बयान के बाद भक्तों में फैली गलतफहमी भी दूर हो गई है।

विवाद और अफवाहों के बीच अमूल की सफाई

विवाद के बीच, एक और बड़ा नाम उभरा—अमूल। सोशल मीडिया पर अफवाहों के चलते दावा किया गया कि तिरुमाला मंदिर के लिए घी की आपूर्ति अमूल द्वारा की जाती है। हालाँकि, अमूल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से स्पष्ट किया कि उसने कभी तिरुमाला मंदिर के लिए घी सप्लाई नहीं किया है। अमूल के इस बयान ने उन अफवाहों पर विराम लगा दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि अमूल का घी प्रसादम की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। अमूल ने यह साफ किया कि उनका घी प्रसादम में शामिल नहीं है, और इससे जुड़ी सभी बातें झूठी हैं।
तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू प्रसादम की पवित्रता और महत्ता हर भक्त के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्रसादम न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका आर्थिक महत्त्व भी है। टीटीडी द्वारा प्रति वर्ष लाखों लड्डू तैयार किए जाते हैं, जिन्हें भक्तगण अपने साथ घर ले जाते हैं। इस लड्डू की शुद्धता पर उठे सवाल ने मंदिर प्रशासन और भक्तों के बीच हलचल मचा दी थी।

बेटे की सरकार में तिरुपति की रसोई में ‘बीफ की घुसपैठ’, कॉन्ग्रेस पिता के शासन में इसी मंदिर में क्रॉस वाले स्तंभ पर हुआ विवाद: तब YSR, अब जगनमोहन

तिरुपति मंदिर में जगन मोहन और उनके पिता YSR के राज के दौरान ईसाई दखल को लेकर विवाद हुआ है (चित्र साभार: NDTV & DR.YSRAP/FB)
आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में प्रसाद के लड्डू में पशुओं की चर्बी और मछली का तेल पाए जाने का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। हिन्दुओं की आस्था को चोट पहुँचाने वाली यह मिलावट पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के राज में होने का आरोप लगाया गया है। लड्डू में पशु चर्बी और मछली का तेल मिलाए जाने की बात की पुष्टि लैब रिपोर्ट से भी हो गई है। इसके बाद जगन मोहन रेड्डी और उनके समय में तिरुपति मंदिर का प्रशासन करने वाले तिरुपति देवस्थानम बोर्ड से जुड़े लोग घेरे में हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने इस बीच इन सभी रिपोर्टों को खारिज करते हुए अपना बचाव किया है। उन्होंने ऐसी किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया है। उन्होंने कहा, “लड्डुओं के घी के लिए टेंडर प्रक्रिया हर छह महीने में होती है, और मानदंड कई दशकों से नहीं बदले हैं। टेंडर डालने वालों को NBL प्रमाणपत्र और गुणवत्ता का प्रमाणपत्र देना होता है। TTD घी से नमूने लेकर प्रमाणित होने वालों को ही टेंडर देता है। TDP धार्मिक मामले का राजनीतिकरण कर रही है। हमने अपने शासनकाल में 18 बार कई चीजों को अस्वीकार किया था।”

जगन अब कुछ भी कहें, यह मामला थमता नहीं दिख रहा है। इससे पहले भी तिरुपति मंदिर के बारे में हुए विवादों ने हिन्दुओं को झकझोर कर रख दिया था। तब इस हिन्दू मंदिर में ईसाई परम्परा घुसाने का आरोप लगाया गया था। जब यह आरोप लगा था तब जगन मोहन रेड्डी के पिता YS राजशेखर रेड्डी राज्य के मुखिया थे।

यह विवाद 2007 में हुआ था। तब भाजपा समेत हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया था कि TTD ने मंदिर के एक उत्सव के लिए जिन स्तम्भ का ऑर्डर दिया है, वह ईसाइयों के लिए पवित्र क्रॉस जैसे दिखते हैं। 2007 में होने वाले वार्षिक ब्रम्होत्सव के लिए TTD ने 250 स्तम्भ बनाने का ऑर्डर दिया था।

यह ऑर्डर बेंगलुरु की एक कम्पनी का को दिया गया था। यह स्तम्भ महोत्सव के दौरान सौन्दर्य के काम में लगाए जाने थे। इनका निर्माण प्लास्टर ऑफ़ पेरिस से होना था और इन पर नक्काशी की की जानी थी। हालाँकि, जब इन स्तम्भों का एक नमूना बन कर तिरुपति पहुँचा तो लोगों के कान खड़े हो गए।

भाजपा समेत कई हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया कि इनकी बनावट ईसाई क्रॉस जैसी लगती है। हिन्दुओं ने कथित तौर पर क्रॉस जैसे दिखने वाले स्तम्भ को तोड़ भी दिया था। हालाँकि, TTD में YSR की सरकार द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारी इस डिजाइन का बचाव करते रहे थे।

अधिकारियों ने इस दौरान दावा किया था कि यह स्तम्भ मंदिर की डिजाइन से मिलते हुए बनाए गए हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री YSR के ईसाई होने के कारण यह विरोध और तेज हो गया था। भाजपा के स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया था कि तिरुपति के आसपास लगातार ईसाई दखल बढ़ रहा है।

अवलोकन करें : -

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YSR 2004 से 2009 के बीच राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे और उनकी 2009 में एक विमान हादसे में मौत हो गई थी। उनके बेटे जगन ने इसके बाद उनकी राजनीति को आगे बढाते हुए अपनी पार्टी बनाई और 2019 में मुख्यमंत्री बने थे। उनके कायर्काल में भी तिरुपति में ईसाई को चेयरमैन बनाने का विवाद हुआ था।

आंध्र प्रदेश : ‘जनसेना के मुखिया पवन कल्याण जीते तो बदल लूँगा अपना नाम’: जगन की पार्टी के नेता अब बन गए पद्मनाभ रेड्डी

मुद्रागडा पद्मनाभ (बाएँ) ने पवन कल्याण (दाएँ) के जीतने के बाद अब नाम बदल लिया है (चित्र साभार: Sakshi & Pawan Kalyan/FB)
विधि के विधान कोई नहीं बदल सकता। कई बार इसी ब्लॉग पर फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस द्वारा 1555 में की गयी भविष्यवाणियों के बारे में लिखा जा चूका है। 2014 में एक अधेड़ आयु के सख्त नेता के नेतृत्व में एक नई पार्टी सत्ता में आएगी और उस नेता को हराने वाला कोई नहीं होगा। उसके प्रशंसक भी होंगे तो विरोधी भी कम नहीं होंगे। 
देखिए 2024 लोक सभा चुनाव ने कई लोगों को धूल चटवा दी। नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से रोकने में लगी विदेशी ताकतों की भीख पर पलता विपक्ष, एक मुश्त मोदी के विरोध में वोट देने वाला मुस्लिम समाज और विशेषकर संघ आदि। इतने वर्षों से संघ का इंद्रेश कुमार के संगठन का नाम देखिए, राष्ट्रीय मुस्लिम मंच, चल रहा है। इंद्रेश खुद तो पागल बन रहा है संघ को भी बना रहा है और जनता को भी। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आते ही मुसलमानों में मोदी को हराने वोट न देने की मुहीम चल रही थी। अगर इंद्रेश को इस मुहिम की जानकारी नहीं, क्यों नहीं मंच को किया जाता बंद। मोदी को रोकने में विदेशी ताकतों के करोड़ों रूपए स्वाहा हो गया, लेकिन मोदी बन गया तीसरी बार प्रधानमंत्री।  

कालचक्र घूम रहा है। 2024 से 2029 का समय देश को एक नयी ऊंचाई पर लेकर जाएगा। मोदी विरोधी नए-नए षड़यंत्र रचेंगे, उपद्रव करने का प्रयत्न करेंगे, लेकिन सभी चारों खाने चित होंगे। प्रधानमंत्री के निर्भीक निर्णयों से विश्व भी प्रधानमंत्री का लोहा मानने को विवश हो जाएगा। 

आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जनसेना पार्टी के मुखिया कोनिडेला पवन कल्याण के जीतने के कारण एक नेता को अपना नाम बदलना पड़ गया। YSRCP के नेता ने चुनौती दी थी थी कि यदि पवन कल्याण जीत जाते हैं तो वह नाम बदल लेगा, अब आधिकारिक तौर पर उसने ऐसा कर भी लिया है।

YSRCP के नेता ने तो चुनौती को स्वीकारते नाम बदल लिया। लेकिन देश में एक पलटू पार्टी है, जिसके एक नेता सोम भारती ने नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर सिर मुंडवाने की बात कही थी, परन्तु बाद में पलटी मार गया। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की पार्टी YSRCP के कापू समुदाय से आने वाले नेता मुद्रागडा पद्मनाभम ने अपना नाम बदला है। मुद्रागडा पद्मनाभम ने अपना नाम अब बदल कर पद्मनाभ रेड्डी कर लिया है। उन्होंने इसके लिए बाकायदा अंदर प्रदेश सरकार के सरकारी गजट में अपना नाम बदलवाया है।

मुद्रागडा पद्मनाभ ने आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले ही जगन रेड्डी की पार्टी YSRCP की सदस्यता ली थी। उन्होंने इस चुनाव प्रचार के दौरान ऐलान किया किया था कि जनसेना के मुखिया पवन कल्याण पिठापुरम विधानसभा क्षेत्र से हार जाएँगे। उन्होंने कहा था कि यदि ऐसा नहीं होता, तो वह अपना नाम बदल लेंगे।

पद्मनाभ के ऐलान के उलट पवन कल्याण पिठापुरम से भारी मतों से जीते। उन्होंने YSRCP की उम्मीदवार गीता विश्वनाथ को 70,000 वोटों के अंतर से हराया। पवन कल्याण को यहाँ 34 लाख वोट मिले जबकि गीता को मात्र 64,000 वोट ही मिले। पवन कल्यान की जनसेना से भी राज्य में भारी जीत हासिल की।

पवन कल्याण की इस जीत के बाद कापू समुदाय के नेता पद्मनाभ ने अपना नाम बदल लिया। उन्होंने इसके सरकार को आवेदन दिया था जिसके बाद उनके नाम बदलने को मंजूरी मिल गई। उन्होंने नाम बदलने के फैसले पर अमल करने का ऐलान चुनाव परिणाम आने के अगले ही दिन कर दिया था।

आंध्र प्रदेश में NDA गठबंधन ने YSRCP को बुरी तरह हराया है। राज्य में हुए चुनाव में TDP को 135, जनसेना को 21 जबकि भाजपा को 8 सीटें हासिल हुई हैं। वहीं सत्ताधारी YSRCP 11 सीटों पर सिमट गई और उसका राज्य से सफाया हो गया है।

आंध्र प्रदेश : जगन मोहन रेड्डी की जीत पर 30 करोड़ रूपए का दाँव लगाने वाले पार्टी नेता ने बुरी हार के बाद जहर खाकर दे दी जान

आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी YSRCP के नेता ने आत्महत्या कर ली। YSRCP के नेता जग्गावरपु वेणुगोपालारेड्डी ने जगन मोहन रेड्डी की पार्टी की जीत पर 30 करोड़ रुपए का दाँव लगाया था, लेकिन पार्टी की बुरी तरह से हार की वजह से सारे पैसे चले गए, जिसके बाद जग्गावरपु ने आत्महत्या कर ली। YSRCP नेता जग्गावरपु वेणुगोपालारेड्डी जो पैसे हार गए, उसके लिए उनके घर पर लोगों ने पथराव भी किया था, जिसके बाद उन्होंने ये कदम उठा लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला आंध्र प्रदेश एलुरु जिले के तुरपुदीगावल्ली गाँव की है। जहाँ 52 साल के जग्गावरपु वेणुगोपालारेड्डी ने नुजिवेदु मंडल निर्वाचन क्षेत्र में वाईएसआरसीपी की जीत पर पैसे लगाए थे। उन्होंने कई गाँवों में शर्त लगाई थी, लेकिन जगन मोहन रेड्डी की पार्टी हार गई, जिसकी वजह से उन पर काफी देनदारी बढ़ गई थी।

बताया जा रहा है कि जब 4 जून 2024 को वोटों की गिनती चल रही थी, और YSRCP की हार होने लगी, तो वेणुगोपालारेड्डी अपने गाँव से फरार हो गए थे। इसके बाद 7 जून को वेणुगोपालारेड्डी के घर पर कर्ज देने वालों ने हमला कर दिया और एयर कंडीशनर के साथ ही सोफा और बेड समेत उनकी संपत्तियों को लूट लिया गया। दूसरे दिन जब वो घर लौटा, तो पता चला कि उसके घर पर लोगों ने तोड़फोड़ की है। वो लोग पैसों की माँग कर रहे थे, जिसके बाद उसने कीटनाशक पी लिया। इस मामले में पुलिस के एसआई प्रसाद रेड्डी ने कहा कि पुलिस अभी मामले की जाँच कर रही है।

4 जून 2024 को आए लोकसभा चुनाव के नतीजों में वाईएसआरसीपी नुजिवीडू मंडल निर्वाचन क्षेत्र की सीट तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) से हार गई। ऐसा कहा जाता है कि वेणुगोपालारेड्डी को 30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, कुछ मीडिया रिपोर्टों ने यह राशि 10 करोड़ रुपये बताई।