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MOU के बाद भी सुस्त रहा तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश ने फुर्ती से पकड़े मझगाँव डॉक के 29000 करोड़ रूपए: चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में NDA सरकार ला रही बड़े निवेश

                 मझगांव डॉक ने किया आंध्र प्रदेश में 29000 करोड़ रूपए का निवेश (फोटो साभार: MDL)
कहते हैं गायक का जुबान और नाचने वाले के पैर कभी नहीं रुकते। ठीक उसी तरह दिमाग में विकास वाला नेता विकास का कोई मौका नहीं छोड़ता। आंध्र प्रदेश के दो टुकड़े होने से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जो विकास किया था दुर्भाग्य से विकासशील हिस्सा तेलंगाना में चला गया। देखा जाए तो आज तेलंगाना नायडू की बोई फसल पर जी रहा है। 

आंध्र प्रदेश देश में निवेश के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। तमिलनाडु की द्रमुक सरकार के ढुलमुल रवैए का फायदा उठाते हुए अब मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने एक और बड़ा दाँव मारा है। यह रफ्तार आगे भी जारी रहने वाली है क्योंकि सरकारी जहाज बनाने वाली कंपनी मझगांव डॉक लिमिटेड (MDL) तिरुपति जिले के दुगराजपटनम में आंध्र प्रदेश के प्रस्तावित मेगा शिपबिल्डिंग क्लस्टर में 29,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश कर रही है।

मझगांव डॉक लिमिटेड (MDL) नाम की यह बड़ी डिफेंस पीएसयू (PSU) आंध्र प्रदेश के शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट में मुख्य निवेशक बनने के लिए तैयार है, जिसका लक्ष्य 1.2 मिलियन टन सालाना क्षमता का है। इस मेगा प्रोजेक्ट में राज्य सरकार और विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी जमीन और समुद्री बुनियादी ढाँचे के लिए 5,289 करोड़ रुपए का योगदान देंगे, जबकि मुख्य निवेशक MDL इसमें 23,964 करोड़ रुपए का निवेश करेगा।

मझगांव डॉक लिमिटेड के प्रतिनिधि जल्द ही इस जगह की संभावनाओं का आकलन करने के लिए आंध्र प्रदेश का दौरा कर सकते हैं।

तमिलनाडु की सुस्ती बनी आंध्र प्रदेश के लिए मौका

आंध्र प्रदेश सरकार और MDL के बीच राज्य के प्रस्तावित शिपबिल्डिंग क्लस्टर में भारी निवेश को लेकर बातचीत शुरू होने से पहले इस डिफेंस पीएसयू ने तमिलनाडु की तत्कालीन द्रमुक (DMK) सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।

सितंबर 2025 में MDL ने ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के तहत थूथुकुडी में 15,000-18,000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से एक ग्रीनफील्ड शिपयार्ड बनाने के लिए तमिलनाडु सरकार के साथ समझौता किया था। हालाँकि द्रमुक सरकार ने इसमें ढुलमुल रवैया अपनाया और बाद में MDL के साथ तय प्रक्रिया को छोड़कर दक्षिण कोरिया की एचडी हुंडई हेवी इंडस्ट्रीज (HD Hyundai Heavy Industries) के साथ एक विशेष समझौता कर लिया।

MDL को तमिलनाडु सरकार से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) का इंतजार था, हालाँकि द्रमुक सरकार ने न तो प्रोजेक्ट शुरू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और न ही इस प्रस्ताव को सीधे तौर पर मना किया।

तमिलनाडु सरकार के इस कदम से MDL-थूथुकुडी प्रोजेक्ट अधर में लटक गया और भारत की एक प्रमुख डिफेंस पीएसयू किनारे हो गई। MDL ने आरोप लगाया कि द्रमुक सरकार द्वारा तय चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और भारतीय शिपबिल्डिंग कंपनियों को प्रतिस्पर्धा करने का सही मौका नहीं दिया गया। पीएसयू ने पारदर्शिता और जिस तरह से तमिलनाडु सरकार ने एंकर शिपयार्ड का चयन किया, उस पर भी सवाल उठाए।

अब जब MDL के आंध्र प्रदेश में बड़ा निवेश करने की खबरें आ रही हैं, तो तमिलनाडु के कई लोग द्रमुक सरकार की आलोचना कर रहे हैं कि उनकी वजह से राज्य के हाथ से रक्षा क्षेत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निवेश निकल गया।

आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बीच रक्षा, मैन्युफैक्चरिंग और बंदरगाह से जुड़े निवेश को लेकर लंबे समय से मुकाबला चल रहा है। दोनों राज्य निवेश को आकर्षित करने के लिए अपने तटीय इलाकों, कुशल कामगारों और रियायतों का इस्तेमाल करते हैं। तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन के शासन वाले आंध्र प्रदेश ने ‘बिजनेस करने की रफ्तार’ (speed of doing business) को लेकर बड़े स्तर पर मार्केटिंग की है, जिसमें जमीन की उपलब्धता, नीतिगत स्थिरता और राज्य व केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के कारण केंद्रीय समन्वय को प्रमुखता से दिखाया गया है।

चंद्रबाबू नायडू की NDA सरकार में आंध्र प्रदेश बना उद्योगों के लिए आकर्षक

बीते कुछ महीनों में तमिलनाडु और कॉन्ग्रेस शासित कर्नाटक से एनडीए शासित आंध्र प्रदेश में कई बड़े निवेशकों का ट्रांसफर देखा गया है।

अगस्त 2025 में तमिलनाडु की द्रमुक सरकार ने थूथुकुडी में दक्षिण कोरिया की ह्वासुंग फुटवियर (Hwaseung Footwear) द्वारा 1,720 करोड़ रुपये के नॉन-लेदर फुटवियर प्लांट की घोषणा की थी, जिससे 20,000 से अधिक नौकरियों का वादा किया गया था। हालाँकि तमिलनाडु सरकार की ओर से हुई देरी और लापरवाही के कारण ह्वासुंग को बेहतर विकल्पों की तलाश करनी पड़ी। नवंबर 2025 तक यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के कुप्पम में शिफ्ट हो गया।

दक्षिण कोरियाई कंपनी ह्वासुंग ने एनडीए के नेतृत्व वाले राज्य आंध्र प्रदेश में 150 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ अपना नॉन-लेदर स्पोर्ट्स शू मैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित करने की घोषणा की। राज्य सरकार ने ह्वासुंग को 100 एकड़ जमीन आवंटित की। अब यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की विधानसभा सीट कुप्पम में आकार ले रहा है।

मई 2026 में तमिलनाडु के हाथ से प्रस्तावित एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) फ्लाइट टेस्टिंग और इंटीग्रेशन कॉम्प्लेक्स डिफेंस एयरोस्पेस प्रोजेक्ट भी निकल गया और यह आंध्र प्रदेश के पास चला गया। हालाँकि तमिलनाडु सरकार डीआरडीओ (DRDO) से जुड़े इस 15,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को हासिल करने की कोशिश में थी और उसने बेंगलुरु के एयरोस्पेस क्लस्टर के पास होसुर में जमीन और रनवे की पेशकश की थी। लेकिन आंध्र प्रदेश ने तेजी से मंजूरी देने और एक एकीकृत डिफेंस कॉरिडोर के विजन की पेशकश करके यह बाजी जीत ली।

यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के पुट्टपार्थी में गया, और इस साल मई में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री नायडू ने 600 एकड़ की इस फैसिलिटी का शिलान्यास किया। इस पर केंद्र द्वारा पक्षपात करने के आरोप भी लगे, हालाँकि खबरों में कहा गया कि आंध्र प्रदेश को प्रोजेक्ट सौंपना विभिन्न राज्यों में रक्षा निर्माण क्षमताओं को बाँटने की रणनीति का हिस्सा था।

जहाँ तमिलनाडु ने होसुर में 100 एकड़ जमीन मुफ्त देने की पेशकश की थी, वहीं आंध्र प्रदेश ने पुट्टपार्थी में 650 एकड़ का एक बड़ा डेडिकेटेड हब ऑफर किया।

राज्यों के बीच यह मुकाबला सिर्फ आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार कर्नाटक तक भी है। जुलाई 2025 में कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार को तीन साल से चल रहे किसानों के लगातार विरोध प्रदर्शनों के कारण बेंगलुरु हवाई अड्डे के पास एक प्लान्ड एयरोस्पेस पार्क के लिए देवनहल्ली में कृषि भूमि का अधिग्रहण करने के प्रस्ताव को रद्द करना पड़ा था।

राज्य ने पहले इस एयरोस्पेस प्रोजेक्ट के लिए चन्नरायपटना और देवनहल्ली तालुक के आसपास के गाँवों में 1,777 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन किसानों ने पहले दिन से ही इस कदम का विरोध करते हुए दावा किया था कि यह जमीन उपजाऊ है और उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है।

जब कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया, तो आंध्र प्रदेश ने तुरंत इस मौके का फायदा उठाया। राज्य के मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक खुला निमंत्रण देते हुए लिखा, ‘प्रिय एयरोस्पेस इंडस्ट्री, इसके (विरोध प्रदर्शन) बारे में सुनकर दुख हुआ। मेरे पास आपके लिए एक बेहतर विचार है। आप इसके बजाय आंध्र प्रदेश को क्यों नहीं देखते? हमारे पास आपके लिए एक आकर्षक एयरोस्पेस नीति है, जिसमें बेहतरीन प्रोत्साहन और 8000 एकड़ से अधिक तैयार जमीन (बेंगलुरु के ठीक बाहर) उपलब्ध है! उम्मीद है कि टेबल पर बैठकर बात करने के लिए आपसे जल्द ही मुलाकात होगी।”

साफ है कि आंध्र प्रदेश की एनडीए सरकार न केवल राज्य को मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए एक आदर्श जगह के रूप में पेश कर रही है, बल्कि तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे प्रतिस्पर्धी राज्यों में दिक्कतों का सामना कर रहे निवेशकों को भी आक्रामक रूप से अपने साथ जोड़ रही है।

टेक, डेटा सेंटर, एआई (AI) और एयरोस्पेस से लेकर आंध्र प्रदेश ने दूसरे राज्यों से निवेश हासिल किया है और वह इसका दावा करने से पीछे नहीं हटता।

साल 2025 में गूगल (Google) ने भारत के सबसे बड़े एआई और डेटा सेंटर्स में से एक के लिए विशाखापत्तनम में 15 बिलियन डॉलर या 1.25 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश का ऐलान किया।

बेंगलुरु के पास आईटी की ताकत और बुनियादी ढाँचा होने के बावजूद गूगल द्वारा इस दौड़ में अपने प्रतिस्पर्धी कर्नाटक के बजाय आंध्र प्रदेश को चुनना कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार को रास नहीं आया। कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियांक खड़गे की X पर आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश के साथ तीखी बहस भी हुई थी।

आंध्र प्रदेश सरकार ने 22,000 करोड़ रुपए के बड़े प्रोत्साहन पैकेज की पेशकश करके गूगल का यह निवेश सुरक्षित किया। इस पैकेज में जमीन पर 25% की छूट, पानी के टैरिफ पर 25% की छूट, 100% मुफ्त बिजली ट्रांसमिशन के साथ-साथ स्टेट जीएसटी (SGST) की पूरी प्रतिपूर्ति शामिल थी।

आंध्र प्रदेश ने पिछले साल कर्नाटक की सरला एविएशन के 1,300 करोड़ रुपए के इलेक्ट्रिक एयर-टैक्सी मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट ‘स्काई फैक्ट्री‘ को भी अपने नाम कर लिया। यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के अनंतपुरम जिले में विकसित किया जाएगा। कर्नाटक की एक कंपनी का अपने गृह राज्य को छोड़कर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट के लिए दूसरे राज्य को चुनना कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा गया।

इसके अलावा आंध्र प्रदेश की ‘काम करने की रफ्तार’ का असर कॉन्ग्रेस शासित तेलंगाना पर भी पड़ा है। मार्च 2025 में हैदराबाद की प्रीमियर एनर्जीज (Premier Energies) ने घोषणा की कि वह तेलंगाना के सीतारामपुर से आंध्र प्रदेश के नायडूपेटा में अपना 1,700 करोड़ रुपये का प्रस्तावित 4 GW सोलर फोटोवोल्टिक सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शिफ्ट कर रही है। इस प्रोजेक्ट से करीब 3,500 नौकरियाँ पैदा होंगी।

प्रतिस्पर्धी राज्यों की तुलना में आगे निकलकर एक और प्रोजेक्ट को हासिल करने की जानकारी देते हुए आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने X पर लिखा, “एपी (AP) ने रिकॉर्ड समय में एपीआईआईसी (APIIC) के माध्यम से 269 एकड़ जमीन को तेजी से मंजूरी दी। ये बातचीत अक्टूबर 2024 में शुरू हुई थी और फरवरी 2025 तक जमीन आवंटित कर दी गई। यह जमीन बंदरगाहों के करीब है और सक्रिय प्रोत्साहनों से समर्थित है। यह आंध्र प्रदेश को एक अग्रणी सौर विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करता है, जिससे औद्योगिक विकास और राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, जिसकी क्षमता को 7 GW तक बढ़ाने की योजना है। आंध्र प्रदेश को भारत के दूसरे सबसे बड़े एकीकृत सौर सेल और मॉड्यूल निर्माता का एपी में स्वागत करते हुए गर्व हो रहा है – जो हमारे युवाओं के लिए बैकवर्ड इंटीग्रेशन और ग्रीन जॉब्स को बढ़ावा देगा।”

                                                            नारा लोकेश के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

यहाँ एक दिलचस्प बात यह है कि खबरों के मुताबिक आंध्र प्रदेश ने एनडीए शासन के दो सालों के भीतर लगभग 23 लाख करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है।

मुख्यमंत्री नायडू ने इस बारे में कहा, “कल्याण, विकास और सुशासन प्रदान करने के साथ-साथ एनडीए सरकार विशाखापत्तनम, अमरावती और तिरुपति क्षेत्रों का विकास कर रही है। रायलसीमा में रक्षा, ड्रोन, स्पेस, एयरोस्पेस और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों के उद्योग आ रहे हैं। एनडीए शासन के दौरान राज्य ने अब तक 23 लाख करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है। हम हर घर में सोलर रूफटॉप के जरिए बिजली पैदा करने का अवसर दे रहे हैं। रॉयल एनफील्ड तिरुपति में 18 महीनों में एक मोटरसाइकिल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर रही है।”

हालाँकि आंध्र प्रदेश की आक्रामक निवेश रणनीतियों से अन्य राज्य सरकारों का सतर्क होना स्वाभाविक है, लेकिन एनडीए शासित यह राज्य भारत की विकास गाथा में योगदान देने में जितना हो सके आगे रहना चाहता है। आंध्र प्रदेश सरकार वैश्विक और घरेलू कंपनियों को राज्य में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, लैंड बैंक, सब्सिडी और केंद्रीय सहयोग का पूरा इस्तेमाल कर रही है।

तिरुपति के बीफ वाले लड्डू विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मिलावट के पुख्ता सबूत नहीं; CM से पूछा- चल रही थी SIT जाँच तो प्रेस में क्यों गए? जज साहब बिना चिंगारी के धुआं नहीं उठता


सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (30 सितंबर 2024) को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को तिरुमाला तिरुपति मंदिर में लड्डू बनाने के लिए मिलावटी घी के इस्तेमाल का दावा सार्वजनिक रूप से करने के लिए कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि ‘हम उम्मीद करते हैं कि भगवान को राजनीति में नहीं लाया जाएगा।’ यह मामला तिरुपति के प्रसिद्ध मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के प्रसाद के रूप में दी जाने वाली लड्डूओं में मिलावटी घी के उपयोग से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट में बी.आर. गवई और के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि जब इस मामले की जाँच चल रही थी, तो मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह का सार्वजनिक बयान देना कितना उचित था। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि जब संवेदनशील मुद्दे की जाँच जारी हो, तो जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से उम्मीद की जाती है कि वे सावधानी बरतें और इस प्रकार के बयान देने से बचें, जिससे लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने विशेष तौर पर कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट नहीं है कि जिस घी का उपयोग लड्डू बनाने में किया गया था, वह मिलावटी था। कोर्ट ने यह भी बताया कि लैब रिपोर्ट, जिसमें घी के नमूने जाँच के लिए भेजे गए थे, में दिखाया गया कि रिजेक्ट किए गए घी के सैंपल ही जाँच के लिए दिए गए थे। इस संबंध में कोर्ट ने पूछा कि जब मामले की जाँच चल रही थी, तो मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले को सार्वजनिक रूप से उठाने की क्या जरूरत थी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने की तीखी टिप्पणी

जस्टिस गवई और जस्टिस विश्वनाथन की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यह याचिका धार्मिक विश्वासों से जुड़ी है, जो पूरे विश्व में करोड़ों लोगों को प्रभावित करती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान तिरुपति लड्डू बनाने के लिए पशु वसा का उपयोग किया गया था। हालाँकि, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने इस दावे का खंडन किया और कहा कि ऐसा मिलावटी घी कभी भी लड्डू बनाने में इस्तेमाल नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि मुख्यमंत्री नायडू द्वारा बयान 18 सितंबर को सार्वजनिक किया गया, जबकि इस मामले में प्राथमिकी (FIR) 25 सितंबर को दर्ज की गई और विशेष जाँच टीम (SIT) का गठन किया गया। इसका मतलब यह हुआ कि मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से दिया गया बयान जाँच शुरू होने से पहले का था। कोर्ट ने इस पर सवाल उठाया कि जाँच जारी होने के दौरान उच्च संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति को इस प्रकार का बयान देने की आवश्यकता क्यों थी।

लड्डू बनाने में इस्तेमाल किए गए घी पर उठे सवाल

इस मामले में टीटीडी की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट को बताया कि जून और 4 जुलाई तक जिस घी की आपूर्ति की गई थी, उसे जाँच के लिए नहीं भेजा गया था। बल्कि 6 और 12 जुलाई को प्राप्त घी के टैंकरों से नमूने एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) को भेजे गए थे और इन नमूनों में मिलावट पाई गई। उन्होंने यह भी बताया कि जून और 4 जुलाई तक आपूर्ति किया गया घी तिरुपति लड्डू बनाने के लिए उपयोग किया गया था।
कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि जब आपने जाँच शुरू कर दी थी और एसआईटी का गठन कर लिया था, तो मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले को सार्वजनिक करने की क्या आवश्यकता थी? जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, “लैब रिपोर्ट में कुछ अस्वीकार किए गए तथ्य हैं, जो यह संकेत देते हैं कि अस्वीकार किए गए घी के नमूने ही परीक्षण के लिए भेजे गए थे। जब आपने स्वयं जाँच का आदेश दिया, तो प्रेस में जाने की क्या जरूरत थी?” जस्टिस गवई ने भी यही सवाल उठाया और कहा, “जब आपने एसआईटी द्वारा जाँच का आदेश दिया है, तो प्रेस में जाने की क्या जरूरत थी? जब आप संवैधानिक पद पर होते हैं, तो हम उम्मीद करते हैं कि भगवान को राजनीति से दूर रखा जाएगा।”

वकील की दलीलें और कोर्ट के सवाल

कोर्ट ने टीटीडी के वकील सिद्धार्थ लूथरा से यह स्पष्ट करने के लिए कहा कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के अधिकारियों ने यह बयान क्यों दिया था कि मिलावटी घी का उपयोग कभी नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा लाखों भक्तों की भावनाओं से जुड़ा है, और इस प्रकार की बातें सार्वजनिक रूप से करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि जिस घी का उपयोग लड्डू बनाने में किया गया था, वह मिलावटी था। जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, “लैब टेस्टिंग तो रूटीन प्रक्रिया के तहत होती है, ताकि खराब घी के खेप को लौटाया जा सके। अभी तक यह साफ नहीं है कि जिस घी का नमूना लिया गया था, वह वास्तव में लड्डू बनाने में इस्तेमाल हुआ था या नहीं।”
टीटीडी के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने तर्क दिया कि टीटीडी द्वारा घी के नमूने की जाँच के बाद यह पाया गया कि उसमें मिलावट थी। हालाँकि जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि यह साबित करने के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि यह घी लड्डू बनाने में इस्तेमाल किया गया था।

सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका और अन्य याचिकाएँ

इस विवाद पर सुनवाई के दौरान भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से सीनियर एडवोकेट राजशेखर राव ने दलील दी कि मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया बयान तथ्यात्मक रूप से गलत था और इसका खंडन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के कार्यकारी अधिकारी ने किया था। उन्होंने तर्क दिया कि जब इस प्रकार के बयान बिना उचित प्रमाण के दिए जाते हैं, तो इसका व्यापक प्रभाव होता है और यह सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ सकता है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने बिना किसी ठोस प्रमाण के यह दावा किया कि लड्डू बनाने के लिए मिलावटी घी का उपयोग किया गया था। इस प्रकार का बयान, जब किसी संवैधानिक पदधारी द्वारा दिया जाता है, तो यह न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि यह जाँच प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है।”
सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका में माँग की गई थी कि इस मामले की जाँच के लिए एक स्वतंत्र जाँच समिति गठित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नायडू का बयान टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी के बयान से विरोधाभासी था और इस प्रकार की बयानबाजी से जाँच प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा चार अन्य याचिकाएँ भी दायर की गई थीं, जिनमें से एक टीटीडी के पूर्व चेयरमैन वाई.वी. सुब्बा रेड्डी द्वारा और अन्य याचिकाएँ इतिहासकार विक्रम संपथ, वैदिक प्रवक्ता दुश्यंत श्रीधर और न्यूज एंकर सुरेश चव्हाणके द्वारा दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में भी कोर्ट की निगरानी में जाँच की माँग की गई थी और यह सुनिश्चित करने की माँग की गई थी कि हिंदू धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में राजनीतिक हस्तक्षेप न हो।
सुनवाई के अंत में कोर्ट ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने इस प्रकार का बयान दिया, तो जाँच प्रक्रिया पहले से ही जारी थी और यह उचित नहीं था कि मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि वह यह स्पष्ट करें कि क्या राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी को जाँच जारी रखने दी जानी चाहिए या फिर इस मामले की जाँच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए। अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को निर्धारित की गई है, जिसमें इस मामले पर और विस्तृत चर्चा की जाएगी।
तिरुपति लड्डू विवाद एक संवेदनशील मुद्दा बन चुका है, जो न केवल धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करता है, बल्कि इस पर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप भी लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मुख्यमंत्री नायडू की बयानबाजी की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि इस प्रकार के संवेदनशील मुद्दों पर बयान देते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

आंध्र प्रदेश : तिरुपति प्रसाद की पवित्रता हुई बहाल, TTD ने बयान जारी कर दिया आश्वासन: ‘जानवर की चर्बी’ वाले विवाद पर Amul ने कहा- हमने कभी नहीं की वहाँ घी सप्लाई


तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसिद्ध लड्डू प्रसादम की शुद्धता बहाल होने की पुष्टि की गई है। टीटीडी ने इस विवाद के बाद स्पष्ट किया कि अब लड्डू प्रसादम का घी बिना किसी गड़बड़ी के है और उसकी शुद्धता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह बयान तब आया, जब तिरुमाला मंदिर के लड्डू प्रसादम के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे।

शुद्धता पर टीटीडी का बयान

टीटीडी ने कहा है कि प्रसादम की शुद्धता को फिर से स्थापित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि घी आपूर्ति और उसके इस्तेमाल में पूरी सावधानी बरती जाती है, ताकि प्रसाद की पवित्रता और भक्तों की आस्था बनी रहे। बता दें कि पिछले कई महीनों से यह आरोप लगाया जा रहा था कि लड्डू प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता घट गई है। घी अशुद्ध था और उसमें जानवरों की चर्बियाँ पाई गई थी।
अब तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने कहा है कि अब प्रसाद पूरी तरह से पवित्र और बेदाग है। तिरुमाला की पहाड़ियों पर स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर का प्रबंधन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड (टीटीडी) करता है। शुक्रवार रात को सोशल मीडिया पर साझा किए पोस्ट में टीटीडी ने लिखा कि ‘श्रीवारी लड्डू की दिव्यता और पवित्रता अब बेदाग है। टीटीडी सभी श्रद्धालुओं की संतुष्टि के लिए लड्डू प्रसादम की पवित्रता की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।’

घी आपूर्तिकर्ताओं पर विशेष ध्यान

टीटीडी ने यह भी कहा कि प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक कठोर जाँच प्रक्रिया का पालन किया जाता है। इसमें शामिल आपूर्तिकर्ताओं की छानबीन की जाती है और घी की हर खेप का परीक्षण किया जाता है। टीटीडी ने यह भी कहा कि भक्तों की आस्था और प्रसादम की शुद्धता बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है। इसके लिए किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
प्रसादम की शुद्धता पर टीटीडी के इस आश्वासन के बाद भक्तों में राहत महसूस हुई है। सोशल मीडिया पर भी टीटीडी के प्रयासों की सराहना की जा रही है। कई भक्तों ने कहा कि लड्डू प्रसादम के साथ उनकी आस्था जुड़ी हुई है और टीटीडी द्वारा उठाए गए कदमों ने उनकी आस्था को और मजबूत किया है। अमूल के बयान के बाद भक्तों में फैली गलतफहमी भी दूर हो गई है।

विवाद और अफवाहों के बीच अमूल की सफाई

विवाद के बीच, एक और बड़ा नाम उभरा—अमूल। सोशल मीडिया पर अफवाहों के चलते दावा किया गया कि तिरुमाला मंदिर के लिए घी की आपूर्ति अमूल द्वारा की जाती है। हालाँकि, अमूल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से स्पष्ट किया कि उसने कभी तिरुमाला मंदिर के लिए घी सप्लाई नहीं किया है। अमूल के इस बयान ने उन अफवाहों पर विराम लगा दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि अमूल का घी प्रसादम की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। अमूल ने यह साफ किया कि उनका घी प्रसादम में शामिल नहीं है, और इससे जुड़ी सभी बातें झूठी हैं।
तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू प्रसादम की पवित्रता और महत्ता हर भक्त के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्रसादम न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका आर्थिक महत्त्व भी है। टीटीडी द्वारा प्रति वर्ष लाखों लड्डू तैयार किए जाते हैं, जिन्हें भक्तगण अपने साथ घर ले जाते हैं। इस लड्डू की शुद्धता पर उठे सवाल ने मंदिर प्रशासन और भक्तों के बीच हलचल मचा दी थी।

आंध्र प्रदेश : जगन सरकार में हुई तिरुपति मंदिर के प्रसाद से छेड़छाड़, लड्डू में मिलाई जाती थी जानवर की चर्बी: चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री

                 तिरुपति के लड्डुओं में इस्तेमाल होता था गंदा घी (फोटो साभार: इंडिया टुडे और टाइम्स नाऊ)
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विपक्षी पार्टी YSRCP पर निशाना साधते हुए ऐसा खुलासा किया है जिसे सुन सब हैरान हैं। सीएम नायडू ने दावा किया है कि पहले की जगन सरकार में तिरुपति मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए जानवरों की चर्बी वाला घी इस्तेमाल होता था।

उन्होंने ये खुलासा एनडीए विधायक दल की बैठक को संबोधित करने के दौरान किया। उनके दावे को सुन सब हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) और भगवान वेंकटेश्वर को आंध्र प्रदेश के लोगों की सबसे बड़ी धरोहर है। एनडीए सरकार मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए कई कदम उठा रही हैं, लेकिन पिछली सरकार ने भोजन की गुणवत्ता खराब कर दी है। उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर के लड्डू के लिए घटिया सामग्री इस्तेमाल की।

उन्होंने बताया कि YSRCP सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान, एक निजी ठेकेदार को घी की आपूर्ति का ठेका दिया था। बाद में लड्डू की गुणवत्ता को लेकर कई शिकायतें मिलीं। पता चला कि लड्डू बनाने में जो घी इस्तेमाल हो रहा था उसमें जानवर की चर्बी थी। लड्डू की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अब एनडीए सरकार ने 29 अगस्त को कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के नंदिनी ब्रांड को घी देने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। जिसके बाद अब मंदिर में शुद्ध घी प्रयोग होता है।

तिरुपति मंदिर में भगवान के प्रसाद के लिए हर दिन लगभग 10 हजार किलो घी उपयोग होता है जिससे करीबन 3 लाख लड्डू बनते हैं। हर श्रद्धालु के लिए इस प्रसाद के बहुत मायने हैं। ऐसे में उसकी गुणवत्ता से हुए खिलवाड़ में खुलासे के बाद अब इस मुद्दे पर जोर-शोर से चर्चा हो रही हैं। पूर्व की जगन सरकार लगातार सवालों के घेरे में हैं। वहीं सीएम नायडू के बयान को YSRC द्वारा खारिज कर दिया गया है। उन्होंने इस आरोप को दुर्भावनापूर्ण बताया है।

मालूम हो कि जगन मोहन रेड्डी को सरकार पर एक तरफ जहाँ हिंदुओं की भावना आहत करने का आरोप लगा है तो वहीं दूसरी ओर उनपर ईसाई धर्म के प्रचार के आरोप लगते रहे हैं।

हर मंदिर को 10 लाख रूपए, पुजारियों को हर महीने 15 हजार रूपए : आंध्र प्रदेश में सत्ता बदलते ही ‘तुष्टिकरण’ बंद, बोले CM चंद्रबाबू नायडू- मंदिरों में गैर हिंदुओं को नहीं मिले नौकरी

                                                  चंद्रबाबू नायडू (साभार: टाइम्स नाऊ)
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि राज्य के मंदिरों में केवल हिंदुओं को ही काम पर रखा जाएगा। उन्होंने मंदिरों के पुजारियों के वेतन में 50 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है। इसके साथ ही ‘नाई ब्राह्मणों’ (मंदिरों में काम करने वाले नाई) के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 25,000 रुपए दिया जाएगा। वेद विद्या प्राप्त करने वाले बेरोजगार युवाओं को भी 3,000 रुपए मासिक भत्ता दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राज्य भर के विभिन्न मंदिरों में काम कर रहे 1683 अर्चकों (पुजारियों) का वेतन 10,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए महीना करने की घोषणा की है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने ‘धूप दीप नैवेद्यम योजना’ के तहत छोटे मंदिरों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को 5,000 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रति माह करने का निर्णय लिया है।

बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि मंदिर ट्रस्ट में दो और बोर्ड सदस्य जोड़े जाएँगे। बता दें कि 20 करोड़ रुपए या उससे अधिक राजस्व वाले मंदिरों के ट्रस्ट बोर्ड में 15 सदस्य होते हैं। अब यह संख्या बढ़ाकर 17 की जाएगी। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट किया गया कि ट्रस्ट बोर्ड में एक ब्राह्मण और एक नाई ब्राह्मण सदस्य होंगे। एनडीए ने चुनाव से ये पहले वादा किया था।

बैठक के दौरान सीएम नायडू ने कहा, “हिंदू मंदिरों में गैर-हिंदुओं को कोई नौकरी नहीं दी जानी चाहिए। आंध्र प्रदेश में 1,110 मंदिरों के लिए ट्रस्टी नियुक्त किए जा रहे हैं।” नायडू ने यह भी घोषणा की कि वर्तमान में अवैध रूप से कब्जा की गई 87,000 एकड़ मंदिर भूमि को कानूनी माध्यम से फिर से प्राप्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में जबरन धर्मांतरण नहीं होना चाहिए।

सीएम नायडू ने घोषणा की कि श्रीवाणी ट्रस्ट के तहत प्रत्येक मंदिर को 10 लाख रुपए दिए जाएँगे। यदि आवश्यक हुआ तो उन कार्यों की समीक्षा पूरी होने के बाद और अधिक धनराशि प्रदान की जाएगी। अधिकारियों से कहा गया कि वे उन मंदिरों के लिए प्रस्ताव भेजें, जहाँ 10 लाख रुपए से अधिक की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने श्रीवाणी ट्रस्ट फंड के लिए जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया और अधिकारियों को मंदिरों और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी मंदिरों के लिए एक ऑनलाइन प्रणाली लागू करने को कहा। धर्मस्व विभाग के अधिकारियों को कृष्णा और गोदावरी नदी को पुनर्जीवित करने का भी निर्देश दिया।

हिंदू धार्मिक बंदोबस्ती विभाग के अधिकारियों के साथ मंगलवार (27 अगस्त 2024) को बैठक के दौरान सीएम नायडू ने राज्य के हर मंदिर में आध्यात्मिकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि मंदिरों और उनके आसपास के इलाकों को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखा जाना चाहिए, ताकि वहाँ आध्यात्मिक माहौल बना रहे।

मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग, हिंदू धर्मार्थ विभाग और वन विभाग के अधिकारियों की एक समिति के गठन की भी घोषणा की। यह समिति मंदिरों, विशेष रूप से वन क्षेत्रों में स्थित मंदिरों के विकास की देखरेख करेगी। समिति इन स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व को संरक्षित रखते हुए इसे अधिक से अधिक पर्यटकों के लिए सुलभ बनाएगी।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, “आंध्र प्रदेश के हर मंदिर में आध्यात्मिकता प्रस्फुटित होनी चाहिए। आध्यात्मिक कार्यक्रम इस तरह से आयोजित किए जाने चाहिए कि श्रद्धालु मंदिर में वापस आएँ और उन्हें ये ना लगे कि उनसे पैसे ऐंठे जा रहे हैं। यह भी जरूरी है कि मंदिर और उनके आसपास के इलाकों को बेहद साफ-सुथरा रखा जाए।”

बैठक के दौरान नायडू ने पिछले वाई एस जगन मोहन रेड्डी प्रशासन के दौरान हिंदू मंदिरों पर हमलों की घटनाओं की कड़ी निंदा की, जिसमें मंदिर के रथ को जलाना भी शामिल है। उन्होंने ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आह्वान किया और इस बात पर जोर दिया कि आंध्र प्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जब मोदी विपक्ष में बैठने को तैयार थे, तब नायडू और नीतीश ने देशहित में अनर्थ होने से रोका


जिस तरह सिर्फ 99 आने पर कांग्रेस राष्ट्रवादी पत्रकारों पर प्रहार करने का कुचक्र चला रही है, ये उन सभी के लिए शर्म करने वाली बात है, जिन्होंने लालच और दुष्प्रचार में आकर नरेंद्र मोदी को हराने के वोट दिया। अगर I.N.D.I. गठबंधन के लालच और दुष्प्रचार को दरकिनार कर दिया होता, समस्त गठबंधन 100 से नीचे होता। लालच में वोट देने वाले क्यों नहीं 8500 रूपए मांग रहे। क्यों नहीं कोर्ट जाते, गारंटी कार्ड पर यह नहीं लिखा है कि सरकार बनने पर दिए जायेंगे। मोदी विरोधी जितने मोदी पर प्रहार करेंगे मोदी अब उतना ही सख्त होते जायेंगे। 

दूसरे, जहाँ तक दिमाग जाता है देश में एक ऐसा चुनाव नहीं गया जो बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर न लड़ा गया हो। लेकिन तीनों मुद्दे आज भी मुंह खोले खड़ी हैं। 

तीसरे, दुष्प्रचार किया कि संविधान बदल दिया जायेगा, Uniform Civil Code कानून लाकर मुस्लिमों के अधिकार छीन लिए जायेंगे; विश्व में ऐसा कौन-सा देश अपने यहाँ घुसपैठियों को रहने की इजाजत देता; फिर विश्व में विशेषकर किसी भी मुस्लिम देश में Waqf Board नहीं, फिर भारत में क्यों? जिन लोगों ने खुद सैंकड़ों बदलाव किये वो किस मुंह से संविधान की बात कर रहे हैं। दुष्प्रचारों के दुष्चक्र में वोट देने वालों पूछो कि जवाहर लाल नेहरू से लेकर राजीव गाँधी तक कितने बदलाव किये गए हैं? क्या वह बदलाव देशहित में थे या सिर्फ मुसलमानों को खुश करने? लेकिन हकीकत में मुसलमानों को भी उन बदलावों का लाभ नहीं मिलेगा, वह तो बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना की तरह झूम रहा है। 

खैर, अब करते हैं चुनाव परिणामों के बाद से सोशल मीडिया पर चर्चित निम्न समाचार की। जिसकी मै पुष्टि तो नहीं करता, अगर यह सत्य है, गठबंधन के लिए सुखद समाचार नहीं। लेकिन नीतीश कुमार द्वारा मोदी के पैर छुए जाने का कारण चीख-चीख कर बता रहा है। जो कांग्रेस और I.N.D.I. गठबंधन की बौखलाहट दिखाता है। गठबंधन चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन खाली हाथ रहने पर इनमे बौखलाहट होना स्वाभाविक है। इन्हे मालूम है कि इंदिरा गाँधी से लेकर राजीव गाँधी तक कांग्रेस ने चौधरी चरण सिंह से लेकर चंद्रशेखर तक की सरकारें गिराई हैं। बरहाल, चर्चा है कि देशहित में गठबंधन की कुछ पार्टियां NDA को बाहर से अपना समर्थन देने को तैयार बैठी हैं। अगर ये चर्चा सच साबित हो गयी, विपक्ष 150 या इससे भी नीचे आ सकता है। 

और अगर चुनाव आयोग ने 8500 रूपए मुद्दे पर गंभीरता से निर्णय लिया, पता नहीं गठबंधन की कितनी सीटें बचती है। 

लोकसभा नतीजों के बाद साफ हो गया कि बीजेपी को सिर्फ 240 सीटें मिलेंगी। उस समय  मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह और नड्डा ने सोच-विचार कर निर्णय लिया कि वे विपक्षी दल में बैठेंगे। और घटक दलों से कहा गया कि आप अपना निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं

इंडी एलायंस को शासन करना चाहिए। तब सबसे पहले चिराग पासवान और शिंदे ने कहा कि हम आपके फैसले में शामिल हैं और हम विपक्षी दल में बैठने के लिए भी तैयार हैं यहां आपको बता दें कि मोदी को शाम 4 बजे पार्टी दफ्तर आना था लेकिन यही वजह है कि वह देर शाम आए

दिल्ली में सत्ता के गलियारे में सक्रिय मेरे एक मित्र ने मुझे इस लुभावनी, बेहद नाटकीय और आम आदमी की पहुंच से परे के बारे में 5 जून को ही बताया था

नायडू और नीतीश को मोदी ने इसी वजह से दोपहर में बुलाया था कि तुम्हारा तुम देखो हमें कोई एतराज नहीं है। मोदी का ये फैसला सुनने के बाद दोनों की हालत खराब हो गई. संक्षेप में, उन दोनों के पैर ठंडे पड़ गए क्योंकि वे इंडी बलों की स्थिति जानते थे। ऐसी व्यवस्था भी की गई कि मोदी के फैसले की खबर इंडी दल को मिल जाएगी

खड़गे और जयराम रमेश सदमे में थे क्योंकि वे इस स्थिति का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थे हालाँकि, उन्होंने इस खबर को बाहर नहीं आने दिया और शरद पवार से केवल नीतीश और नायडू से बात कराई। उनके अनुरोध के अनुसार, पवार चाचा ने नीतीश को फोन किया।
तब नीतीश ने शरद पवार से पूछा कि आपको कैसे पता चला कि मोदी विपक्षी पार्टी में शामिल होने के लिए तैयार हैं? शरद पवार ने नीतीश से कहा कि मुझे इस बात का एहसास नहीं है
 मैंने तो बस आपसे संपर्क करने के लिए कहा था तब नीतीश जी ने शरद पवार को सब कुछ बताया, और यह भी पूछा कि सभी के खाते में 8500 रुपये देने होंगे, कांग्रेस ने लोगों से दो बड़े वादे किए हैं कि पिछड़े वर्गों को धन वितरित करना होगा प्रधानमंत्री बनेंगे? यह सुनकर पवार को एहसास हुआ कि उन्हें अंधेरे में रखा जा रहा है और उनका दिमाग खराब हो गया है तो उन्होंने सबसे पहले अखिलेश यादव को फोन किया और कहा कि भाई ऐसा कुछ हो गया है और कांग्रेस उन्हें अंधेरे में रखकर कुछ कर रही है इतना सब होने के बाद पवार ने खड़गे को फोन किया और उनसे पूछा कि आपने मुझे यह क्यों नहीं बताया कि बीजेपी विपक्षी पार्टी के साथ जाने की तैयारी कर चुकी है, तब खडगे ने पवार से कहा कि मैंने आपको इसलिए नहीं बताया क्योंकि ऐसी खबरें खूब चल रही थीं पहले प्रधानमंत्री तय करें फिर हम आगे बढ़ेंगे, इसी बीच अखिलेश यादव ने भी खड़गे को फोन किया और कहा कि मैं उनसे पूछने के अलावा कुछ नहीं करना चाहता, नहीं तो मैं अकेला बैठ जाऊंगा
इंडी दल के लिए सबसे बड़ी समस्या यह थी कि प्रति व्यक्ति 8500 रुपये प्रति माह कैसे लिया जाए और इसे पिछड़े वर्गों में कैसे वितरित किया जाए क्योंकि कांग्रेस ने एक बड़ी राशि देने का वादा किया था।

परदे के पीछे शुरू हो चुकी थी जबरदस्त बगावत, जानें क्या था फैसला नायडू और नीतीश कुमार को भी उम्मीद नहीं थी कि मोदी, शाह ऐसा फैसला लेंगे

नीतीश कुमार और चंद्रबाबू ने बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से फोन पर संपर्क किया और उन्हें आश्वासन दिया कि हम बीजेपी के साथ रहना चाहते हैं और मोदी को तुरंत सरकार बनानी चाहिए

बीजेपी की ताकत 240 थी और पासवान, शिंदे, मिलेन और अन्य छोटे सहयोगियों के पास कुल मिलाकर 264 ताकत थी। इतने मजबूत विपक्ष के साथ हम इंडी एलायंस के साथ गठबंधन नहीं करेंगे सबसे महत्वपूर्ण बात यह तय थी कि मोदी शाह के खिलाफ बैठकर कोई भजन नहीं करने वाले थे
इधर, मोदी और शाह को जयंत चौधरी के जरिए इंडी गठबंधन में चल रही असमंजस की जानकारी थी

उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में बीजेपी ने मुस्लिम समुदाय के बीच यह हवा छोड़ दी कि कांग्रेस की सरकार आ गई है और सभी को बैंक में 8500 रुपये मिलेंगे इसके चलते बेंगलुरु और लखनऊ के बैंकों में मुस्लिम महिलाओं की कतारें लग गईं

इंडी गठबंधन के नेताओं के बीच यह सवाल उठा कि अगर हम सरकार बनाते हैं तो हमें वादे के मुताबिक प्रति वर्ष 100,000 रुपये का भुगतान करना होगा, भले ही हम कह सकते हैं कि हम कुछ समय बाद धन को समान रूप से वितरित करेंगे, लेकिन हम कैसे कर सकते हैं यह 8500/ प्रति माह का भुगतान करें? इसलिए, प्रधान मंत्री बनना एक क्रॉस होगा, भले ही महिलाएं आधी आबादी हों, यह प्रति महिला 60 लाख करोड़ रुपये है और यहां लोग बैंक में आने लगे हैं

तब यह निर्णय लिया गया कि नीतीश और नायडू हमारा यानी इंडी दल का समर्थन करेंगे, कांग्रेस भी बाहर से समर्थन दिखाएगी और सरकार में शामिल नहीं होगी, इसलिए धन देने और धन के समान वितरण का कोई सवाल ही नहीं होगा। कांग्रेस यह कहने के लिए स्वतंत्र होगी कि हमारी सरकार नहीं है. यानी कांग्रेस जनता के बीच अपनी छवि चमका कर फिर से चीत भी मेरी पट भी मेरी का खेल खेल रही थी

नीतीश और नायडू ने तब जोर देकर कहा कि कांग्रेस का बाहर से समर्थन का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा नहीं था, उन्होंने चरण सिंह, चंद्रशेखर, दैवेगोड़ा, गुजराल को बाहर से समर्थन दिया था और फिर अचानक इसे वापस ले लिया और कुछ ही दिनों में उनकी सरकारें गिरा दीं। हम आपके साथ नहीं आ रहे हैं और मोदी जी वहां इतने मजबूत विपक्ष के साथ चुप नहीं बैठेंगे इतना ही नहीं बिहार में बीजेपी अपना समर्थन वापस ले लेगी और तेजस्वी ने पहले ही बिहार में मुख्यमंत्री पद का दावा नीतीश कुमार के सामने कर दिया है ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा था गौर कीजिए कि जब नतीजे घोषित किए जा रहे थे तो पर्दे के पीछे कितनी तेजी से कूटनीतिक गतिविधियां चल रही थीं। तो नीतीश कुमार और नायडू के होश उड़ गए और उन्होंने मोदी और शाह से आग्रहपूर्वक अपील की और आश्वासन दिया कि आप सरकार बनाएं और हम आपके साथ रहेंगे।

गुज्जुभाई मन ही मन हँसे, उसने यह सब नाटक जानबूझ कर किया था। वे या तो इंडी फोर्स और सभी हितधारकों को दिखाना चाहते थे कि 8500 रुपये प्रति माह और धन के समान वितरण का उनका नारा कितना फर्जी था। वह यह भी दिखाना चाहती थी कि आने वाली इंडी गठबंधन सरकार के लिए यह किस तरह गले की फांस है। उसी समय, गुज्जुभाई ने हाथ उठाने का नाटक किया क्योंकि वह एनडीए में दो प्रमुख घटक ताकतों नीतीश और नायडू की सौदेबाजी की शक्ति को कम करना चाहते थे।
महज दो घंटे में नीतीश और नायडू के सिर ठिकाने लगाने का पहला काम सफल हुआ तो अमित शाह ने दूसरा बम यह फोड़ा कि सीसीएस यानी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी पूरी तरह से बीजेपी की होगी यानी गृह, वित्त, रक्षा और विदेश मामले हमारे पास रहेंगे. . दोनों बिना कहे तुरंत राजी हो गए. इसके बाद शाम 7:30 बजे नरेंद्र मोदी बीजेपी दफ्तर आए और ऐलान किया कि हम सरकार बनाएंगे और हम अपना कार्यक्रम करेंगे
 आपको याद है मोदी का भाषण कितना आत्मविश्वास भरा था

पर्दे के पीछे चल रहे ऐसे तमाम तेज राजनीतिक घटनाक्रम के बीच नीतीश कुमार एनडीए की बैठकों में बार-बार कहते रहे कि जल्दी सरकार बनाओ और 9 जून की जगह 8 जून को शपथ लेकर हमारी टेंशन दूर करो बाबा

इधर 5 जून और 6 जून को भी लखनऊ और बेंगलुरु में लोग पैसे निकालने के लिए बैंक और कांग्रेस दफ्तर में आते रहे बीजेपी ने हवा भर दी थी कि जाओ पैसे मिल कर रहेंगे
इसलिए इंडी गठबंधन की शाम की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि हमें कुछ नहीं करना चाहिए, अन्यथा हमें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा और हमारी लड़ाई होगी और कुछ लोग हम पर फिर से भरोसा नहीं करेंगे। राहुल गांधी का नारा 8500/रु

इसलिए खडगे ने पत्रवार्ता में कहा कि हम कोई सरकार नहीं बनाएंगे, सही समय पर भाजपा सरकार को हरा देंगे

इसे एक शब्द में चाणक्य नीति कहा जाता है, I.N.D.I. गठबंधन और एनडीए में अस्तानी से ये दो पक्षी नीतीश और नायडू लेकिन गुज्जुभाई ने इन दोनों को कुचल दिया। आज 10 जून को कैबिनेट के हिसाब-किताब के आवंटन की जो घोषणा की गई है, उससे साबित होता है कि पूरी स्थिति पर मोदी शाह का नियंत्रण है
अगर हम यह ध्यान रखें कि यह अटल और आडवाणी की भाजपा नहीं है तो हमें आश्चर्य नहीं होगा।

इसे ही आक्रामक रक्षा कहा जाता है।
मोदी पूरी ताकत से एक्शन में हैं

आंध्र प्रदेश : पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को 371 करोड़ रूपए के APSSDC घोटाला के आरोप में 14 दिनों की जेल : गिरफ़्तारी से आंध्र की राजनीति में बड़ी हलचल

चुनावों में राजा हरिश्चंद्र का चोला ओढ़ जनता को मुर्ख बनाकर वोट बटोरने वाले किस तरह अपनी तिजोरियों को भरते हैं, क्या ऐसे नेता और उनकी पार्टी वोट की हक़दार है? ऐसे नेताओं की भारत में भरमार है। 

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को विजयवाड़ा की एक अदालत ने 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया। उन्हें आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (APSSDC) में भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में 9 दिसंबर, 2021 को आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में 371 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें नायडू समेत 25 लोगों के नाम थे। इस मामले में नायडू को आरोपित नंबर-1 बनाया गया था।

निजी कंपनी को अनुचित लाभ दिलाने के आरोप

भ्रष्टाचार के इस मामले में उन्हें कोर्ट में पेश किया गया था, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। उन्हें विजयवाड़ा की अदालत में पेश किया गया था। नायडू को गिरफ्तार करने के लिए सीआईडी की स्पेशल टीम ने बीड़ा उठाया था और कई कार्यकर्ताओं के सामने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। अपनी गिरफ्तारी के समय नायडू ने पूछा भी था कि उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
इस मामले में सीआईडी ने आरोप लगाया है कि नायडू ने आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में रिश्वत के बदले में एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ दिलाया। कंपनी को कौशल विकास योजनाओं के लिए काम करने का ठेका मिला था। हालांकि नायडू ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें राजनीतिक बदले का शिकार बनाया जा रहा है।

तीन बार मुख्यमंत्री रहे हैं नायडू

चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर मानी जा रही है। नायडू तीन बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वह एक प्रमुख राजनीतिक नेता हैं। उनकी गिरफ्तारी से आंध्र प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा हो गई है।
जब आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की सरकार थी तो युवाओं के कौशल का विकास करने के लिए एक योजना शुरू की गई थी। इस योजना पर कुल 3300 करोड़ रुपए खर्च होने थे। इसमें राज्य सरकार के बजट के अलावे प्राइवेट कंपनी सीमेंस भी शामिल थी। आरोप है कि घोटाला राज्य सरकार के बजट में किया गया। पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियों को पैसे ट्रांसफर किए और दस्तावेज भी नष्ट कर दिए।