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आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री की हिंदू बहू का आरोप- ईसाई पहचान छिपा कराई शादी, अगरबत्ती की खुशबू को बोलते बदबू: YSRCP नेता जोगी रमेश और परिवार के खिलाफ FIR

                                    आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री जोगी रमेश और उनकी बहु मेघना
आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री और YSRCP के वरिष्ठ नेता जोगी रमेश और उनके परिवार के लिए एक बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। उनकी बहू मेघना ने अपने ससुर, पति जोगी राजीव और परिवार के करीब 10 अन्य सदस्यों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, मारपीट और घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई है।

यह शिकायत शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को NTR जिले के इब्राहिमपटनम पुलिस थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस ने मेघना की करीब 24 पन्नों की विस्तृत शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है और अब इसकी गहराई से जाँच शुरू कर दी गई है।

पुलिस ने इस मामले में जोगी रमेश, उनकी पत्नी शकुंतला और बेटे राजीव समेत कुल 11 लोगों के नाम दर्ज किए हैं। इनमें जोगी रमेश के भाई रामू और उनके बेटे पांडु व राकेश भी शामिल हैं। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85, 318 और 109 के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत दर्ज किया गया है। ये धाराएँ घरेलू क्रूरता, दहेज उत्पीड़न और धोखाधड़ी से जुड़ी हैं।

मेघना ने शिकायत में क्या आरोप लगाए?

मेघना की शादी जोगी रमेश के बेटे राजीव से हुई थी। पुलिस को दी अपनी शिकायत में मेघना ने कहा है कि उनकी शादी बाहर से देखने में जितनी सामान्य लगती थी, असल में हकीकत उतनी सुखद नहीं थी। शादी के कुछ समय बाद से ही ससुराल में उनके साथ बुरा बर्ताव शुरू हो गया।

मेघना का आरोप है कि उन्हें बार-बार अतिरिक्त दहेज की माँग को लेकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनका कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर उन्हें गालियाँ दी जाती थीं और कई बार मारपीट भी हुई। मेघना के अनुसार, घर के बाकी सदस्यों को भी इस प्रताड़ना की जानकारी थी और वे इसमें किसी न किसी रूप में साथ देते थे।

बुजुर्गों की मौजूदगी में सुलह की कई कोशिशों के बावजूद, मेघना के मुताबिक, प्रताड़ना कम होने की बजाय और बढ़ती गई। आखिरकार अपनी जान को खतरा महसूस होने पर उन्होंने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

ईसाई पहचान छिपाने का गंभीर आरोप

शिकायत में मेघना ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, शादी तय होते समय जोगी रमेश के परिवार ने खुद को हिंदू परिवार बताया था और शादी भी हिंदू रीति-रिवाजों से ही हुई थी। लेकिन ससुराल पहुँचने के बाद धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि असल में परिवार ईसाई है। मेघना का कहना है कि यह जानकारी जानबूझकर उनसे छिपाई गई, जो उनके साथ एक बड़ा धोखा था।

शिकायत में मेघना ने एक घटना का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि एक बार जब वह घर में पूजा कर रही थीं और भगवान के सामने अगरबत्ती जलाई तो ससुराल वाले नाराज हो गए और अगरबत्ती की खुशबू का मजाक उड़ाया और उसकी तुलना लाश से आने वाली दुर्गंध से की। मेघना के मुताबिक, इसका विरोध करने पर उन्हें डराया-धमकाया गया औऱ सख्त हिदायत दी गई कि घर की बातें या धर्म से जुड़ा सच वह अपने मायके वालों को न बताएँ। उनका आरोप है कि चुप न रहने पर गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी भी दी गई।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला संवेदनशील है क्योंकि इसमें एक प्रमुख राजनीतिक परिवार शामिल है। जाँच अधिकारियों ने मेघना का बयान दर्ज कर लिया है औऱ अब आरोपित परिवार के सदस्यों को पूछताछ के लिए औपचारिक नोटिस भेजे जाने की उम्मीद है। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जाँच होगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आंध्र प्रदेश : जगन सरकार में हुई तिरुपति मंदिर के प्रसाद से छेड़छाड़, लड्डू में मिलाई जाती थी जानवर की चर्बी: चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री

                 तिरुपति के लड्डुओं में इस्तेमाल होता था गंदा घी (फोटो साभार: इंडिया टुडे और टाइम्स नाऊ)
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विपक्षी पार्टी YSRCP पर निशाना साधते हुए ऐसा खुलासा किया है जिसे सुन सब हैरान हैं। सीएम नायडू ने दावा किया है कि पहले की जगन सरकार में तिरुपति मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए जानवरों की चर्बी वाला घी इस्तेमाल होता था।

उन्होंने ये खुलासा एनडीए विधायक दल की बैठक को संबोधित करने के दौरान किया। उनके दावे को सुन सब हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) और भगवान वेंकटेश्वर को आंध्र प्रदेश के लोगों की सबसे बड़ी धरोहर है। एनडीए सरकार मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए कई कदम उठा रही हैं, लेकिन पिछली सरकार ने भोजन की गुणवत्ता खराब कर दी है। उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर के लड्डू के लिए घटिया सामग्री इस्तेमाल की।

उन्होंने बताया कि YSRCP सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान, एक निजी ठेकेदार को घी की आपूर्ति का ठेका दिया था। बाद में लड्डू की गुणवत्ता को लेकर कई शिकायतें मिलीं। पता चला कि लड्डू बनाने में जो घी इस्तेमाल हो रहा था उसमें जानवर की चर्बी थी। लड्डू की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अब एनडीए सरकार ने 29 अगस्त को कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के नंदिनी ब्रांड को घी देने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। जिसके बाद अब मंदिर में शुद्ध घी प्रयोग होता है।

तिरुपति मंदिर में भगवान के प्रसाद के लिए हर दिन लगभग 10 हजार किलो घी उपयोग होता है जिससे करीबन 3 लाख लड्डू बनते हैं। हर श्रद्धालु के लिए इस प्रसाद के बहुत मायने हैं। ऐसे में उसकी गुणवत्ता से हुए खिलवाड़ में खुलासे के बाद अब इस मुद्दे पर जोर-शोर से चर्चा हो रही हैं। पूर्व की जगन सरकार लगातार सवालों के घेरे में हैं। वहीं सीएम नायडू के बयान को YSRC द्वारा खारिज कर दिया गया है। उन्होंने इस आरोप को दुर्भावनापूर्ण बताया है।

मालूम हो कि जगन मोहन रेड्डी को सरकार पर एक तरफ जहाँ हिंदुओं की भावना आहत करने का आरोप लगा है तो वहीं दूसरी ओर उनपर ईसाई धर्म के प्रचार के आरोप लगते रहे हैं।

आंध्र प्रदेश : ‘जनसेना के मुखिया पवन कल्याण जीते तो बदल लूँगा अपना नाम’: जगन की पार्टी के नेता अब बन गए पद्मनाभ रेड्डी

मुद्रागडा पद्मनाभ (बाएँ) ने पवन कल्याण (दाएँ) के जीतने के बाद अब नाम बदल लिया है (चित्र साभार: Sakshi & Pawan Kalyan/FB)
विधि के विधान कोई नहीं बदल सकता। कई बार इसी ब्लॉग पर फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस द्वारा 1555 में की गयी भविष्यवाणियों के बारे में लिखा जा चूका है। 2014 में एक अधेड़ आयु के सख्त नेता के नेतृत्व में एक नई पार्टी सत्ता में आएगी और उस नेता को हराने वाला कोई नहीं होगा। उसके प्रशंसक भी होंगे तो विरोधी भी कम नहीं होंगे। 
देखिए 2024 लोक सभा चुनाव ने कई लोगों को धूल चटवा दी। नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से रोकने में लगी विदेशी ताकतों की भीख पर पलता विपक्ष, एक मुश्त मोदी के विरोध में वोट देने वाला मुस्लिम समाज और विशेषकर संघ आदि। इतने वर्षों से संघ का इंद्रेश कुमार के संगठन का नाम देखिए, राष्ट्रीय मुस्लिम मंच, चल रहा है। इंद्रेश खुद तो पागल बन रहा है संघ को भी बना रहा है और जनता को भी। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आते ही मुसलमानों में मोदी को हराने वोट न देने की मुहीम चल रही थी। अगर इंद्रेश को इस मुहिम की जानकारी नहीं, क्यों नहीं मंच को किया जाता बंद। मोदी को रोकने में विदेशी ताकतों के करोड़ों रूपए स्वाहा हो गया, लेकिन मोदी बन गया तीसरी बार प्रधानमंत्री।  

कालचक्र घूम रहा है। 2024 से 2029 का समय देश को एक नयी ऊंचाई पर लेकर जाएगा। मोदी विरोधी नए-नए षड़यंत्र रचेंगे, उपद्रव करने का प्रयत्न करेंगे, लेकिन सभी चारों खाने चित होंगे। प्रधानमंत्री के निर्भीक निर्णयों से विश्व भी प्रधानमंत्री का लोहा मानने को विवश हो जाएगा। 

आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जनसेना पार्टी के मुखिया कोनिडेला पवन कल्याण के जीतने के कारण एक नेता को अपना नाम बदलना पड़ गया। YSRCP के नेता ने चुनौती दी थी थी कि यदि पवन कल्याण जीत जाते हैं तो वह नाम बदल लेगा, अब आधिकारिक तौर पर उसने ऐसा कर भी लिया है।

YSRCP के नेता ने तो चुनौती को स्वीकारते नाम बदल लिया। लेकिन देश में एक पलटू पार्टी है, जिसके एक नेता सोम भारती ने नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर सिर मुंडवाने की बात कही थी, परन्तु बाद में पलटी मार गया। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की पार्टी YSRCP के कापू समुदाय से आने वाले नेता मुद्रागडा पद्मनाभम ने अपना नाम बदला है। मुद्रागडा पद्मनाभम ने अपना नाम अब बदल कर पद्मनाभ रेड्डी कर लिया है। उन्होंने इसके लिए बाकायदा अंदर प्रदेश सरकार के सरकारी गजट में अपना नाम बदलवाया है।

मुद्रागडा पद्मनाभ ने आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले ही जगन रेड्डी की पार्टी YSRCP की सदस्यता ली थी। उन्होंने इस चुनाव प्रचार के दौरान ऐलान किया किया था कि जनसेना के मुखिया पवन कल्याण पिठापुरम विधानसभा क्षेत्र से हार जाएँगे। उन्होंने कहा था कि यदि ऐसा नहीं होता, तो वह अपना नाम बदल लेंगे।

पद्मनाभ के ऐलान के उलट पवन कल्याण पिठापुरम से भारी मतों से जीते। उन्होंने YSRCP की उम्मीदवार गीता विश्वनाथ को 70,000 वोटों के अंतर से हराया। पवन कल्याण को यहाँ 34 लाख वोट मिले जबकि गीता को मात्र 64,000 वोट ही मिले। पवन कल्यान की जनसेना से भी राज्य में भारी जीत हासिल की।

पवन कल्याण की इस जीत के बाद कापू समुदाय के नेता पद्मनाभ ने अपना नाम बदल लिया। उन्होंने इसके सरकार को आवेदन दिया था जिसके बाद उनके नाम बदलने को मंजूरी मिल गई। उन्होंने नाम बदलने के फैसले पर अमल करने का ऐलान चुनाव परिणाम आने के अगले ही दिन कर दिया था।

आंध्र प्रदेश में NDA गठबंधन ने YSRCP को बुरी तरह हराया है। राज्य में हुए चुनाव में TDP को 135, जनसेना को 21 जबकि भाजपा को 8 सीटें हासिल हुई हैं। वहीं सत्ताधारी YSRCP 11 सीटों पर सिमट गई और उसका राज्य से सफाया हो गया है।

आंध्र प्रदेश : जगन मोहन रेड्डी की जीत पर 30 करोड़ रूपए का दाँव लगाने वाले पार्टी नेता ने बुरी हार के बाद जहर खाकर दे दी जान

आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी YSRCP के नेता ने आत्महत्या कर ली। YSRCP के नेता जग्गावरपु वेणुगोपालारेड्डी ने जगन मोहन रेड्डी की पार्टी की जीत पर 30 करोड़ रुपए का दाँव लगाया था, लेकिन पार्टी की बुरी तरह से हार की वजह से सारे पैसे चले गए, जिसके बाद जग्गावरपु ने आत्महत्या कर ली। YSRCP नेता जग्गावरपु वेणुगोपालारेड्डी जो पैसे हार गए, उसके लिए उनके घर पर लोगों ने पथराव भी किया था, जिसके बाद उन्होंने ये कदम उठा लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला आंध्र प्रदेश एलुरु जिले के तुरपुदीगावल्ली गाँव की है। जहाँ 52 साल के जग्गावरपु वेणुगोपालारेड्डी ने नुजिवेदु मंडल निर्वाचन क्षेत्र में वाईएसआरसीपी की जीत पर पैसे लगाए थे। उन्होंने कई गाँवों में शर्त लगाई थी, लेकिन जगन मोहन रेड्डी की पार्टी हार गई, जिसकी वजह से उन पर काफी देनदारी बढ़ गई थी।

बताया जा रहा है कि जब 4 जून 2024 को वोटों की गिनती चल रही थी, और YSRCP की हार होने लगी, तो वेणुगोपालारेड्डी अपने गाँव से फरार हो गए थे। इसके बाद 7 जून को वेणुगोपालारेड्डी के घर पर कर्ज देने वालों ने हमला कर दिया और एयर कंडीशनर के साथ ही सोफा और बेड समेत उनकी संपत्तियों को लूट लिया गया। दूसरे दिन जब वो घर लौटा, तो पता चला कि उसके घर पर लोगों ने तोड़फोड़ की है। वो लोग पैसों की माँग कर रहे थे, जिसके बाद उसने कीटनाशक पी लिया। इस मामले में पुलिस के एसआई प्रसाद रेड्डी ने कहा कि पुलिस अभी मामले की जाँच कर रही है।

4 जून 2024 को आए लोकसभा चुनाव के नतीजों में वाईएसआरसीपी नुजिवीडू मंडल निर्वाचन क्षेत्र की सीट तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) से हार गई। ऐसा कहा जाता है कि वेणुगोपालारेड्डी को 30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, कुछ मीडिया रिपोर्टों ने यह राशि 10 करोड़ रुपये बताई।

24 साल बाद नवीन बाबू से ओडिशा सत्ता छीनती दिख रही BJP , 5 साल बाद आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू की आँधी में उड़ गए जगनमोहन

नवीन पटनायक (बाएँ) और जगनमोहन रेड्डी (दाएँ)को मिलती दिख रही हार, चंद्रबाबू नायडू (बीच में) को जबरदस्त जीत
लोकसभा चुनाव 2024 के साथ ही 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव भी कराए गए थे। इनमें से 2 राज्यों सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए ने विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ कर दिया, तो बाकी बचे दो राज्यों, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 जून 2024 को आ रहे हैं। इन दोनों ही राज्यों में मौजूदा सत्ताधारी पार्टियों को झटका लगा है।

आंध्र प्रदेश में एनडीए ने सत्ताधारी पार्टी YSRCP का सूपड़ा साफ कर दिया है। आंध्र प्रदेश में बीजेपी-जनसेना पार्टी और तेलुगू देशम पार्टी क्लीन स्वीप करते हुए सरकार बना रही है। इसके साथ ही ओडिशा में लंबे समय सत्ता में बने बीजेडी को बीजेपी सत्ता से बाहर करती दिख रही है। अभी तक के आँकड़ों में बीजेपी ओडिशा में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार अपने दम पर बनाती दिख रही है। ये आँकड़े दोपहर 12.30 बजे तक के है।

आंध्र प्रदेश में एनडीए का कमाल, YSRCP का सूपड़ा साफ

आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी की सत्ताधारी पार्टी YSRCP का सूपड़ा साफ होते दिख रहा है। यहाँ बीजेपी, तेलुगू देशम पार्टी और जनसेना पार्टी तीन चौथाई से भी अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर रही हैं। आंध्र प्रदेश की कुल 175 विधानसभा सीटों में तेलुगू देशम पार्टी 131 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज कर रही है। जनसेना पार्टी 20 सीटों पर आगे है। बीजेपी को 7 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है, तो YSRCP को महज 17 सीटें मिलती दिख रही हैं। आंध्र प्रदेश में कॉन्ग्रेस पूरी तरह से गायब हो गई है। वो एक भी सीट पाती नहीं दिख रही।

ओडिशा में नवीन पटनायक को झटका, बीजेपी आगे

ओडिशा में साल 2000 से मुख्यमंत्री पद पर टिके नवीन पटनायक को इस चुनाव में सबसे बड़ा झटका लगता दिख रहा है। ओडिशा में बीजेपी अपने दम पर पूर्ण बहुमत पाती दिख रही है। ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों में से 74 पर बीजेपी आगे है, तो बीजेडी सिर्फ 57 सीटों पर आगे है। कॉन्ग्रेस 13 विधानसभा सीटों पर आगे है, तो 2 निर्दलीय और एक सीपीआई(एम) का उम्मीदवार आगे है। यहाँ बहुमत का आँकड़ा भी 74 सीटों का ही है।


कांग्रेस गुट के बायकॉट से कई विपक्षी दलों का किनारा, अकाली दल ने नई संसद को बताया ‘देश के लिए गर्व’

28 मई 2023 को देश की नई संसद भवन का उद्घाटन होना है। लेकिन कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इसे भी सियासी मौका बना दिया है। ‘विपक्षी एका’ के नाम पर 19 दलों ने उद्घाटन समारोह के बहिष्कार का ऐलान किया है। लेकिन कई गैर एनडीए दलों ने इस कार्यक्रम में शामिल होने की घोषणा करते हुए विपक्षी एका के राजनीतिक स्टंट पर पानी फेर दिया है।

रिपोर्टों के मुताबिक चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बीजू जनता दल, मायावती की बहुजन समाज पार्टी, सुखबीर सिंह बादल की शिरोमणि अकाली दल इस कार्यक्रम में शिकरत करेगा। तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी एआईडीएमके भी उद्घाटन में शामिल होगा।

पंजाब की विपक्षी पार्टी और भाजपा की पूर्व सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होने का फैसला किया है। शिअद नेता दलजीत चीमा ने बुधवार (24 मई 2023) को एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि उनकी पार्टी विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों से सहमत नहीं है। नए संसद भवन का उद्घाटन देश के लिए गर्व की बात है। इसलिए पार्टी ने उद्घाटन समारोह में शामिल होने का फैसला किया है।

वाईएसआर कांग्रेस(YSRCP) ने भी नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने का फैसला लिया है। पार्टी नेता और राज्य सभा सांसद विजयसाई रेड्डी ने नए संसद भवन के उद्घाटन का समर्थन किया है। एक ट्वीट में उन्होंने कहा है कि देश का नया संसद भवन आधुनिक, आत्मनिर्भर और गौरवान्वित करने वाला है। आखिरकार देश के पास ऐसी इमारत है, जिसे लोकतांत्रिक देश की संसद के रूप में काम करने के लिए तैयार किया गया है।

चंद्रबाबू नायडू की तेलगु देशम पार्टी ने भी साफ कर दिया है कि पार्टी नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का हिस्सा बनेगी। उसके अलावा एआईडीएमके, बीजेडी और बीएसपी जैसी पार्टियाँ भी कार्यक्रम में शामिल होंगी।

28 मई 2023 को दोपहर 12 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए संसद भवन का उद्घाटन करेंगे। कांग्रेस, शिवसेना (UBT), आम आदमी पार्टी, TMC, राजद, जदयू सहित 19 विपक्षी दलों ने एक संयुक्त बयान जारी कर उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने की बात कही है। AAP के नेता संजय सिंह ने कहा है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से नए संसद भवन का उद्घाटन नहीं कराया जाना भारत के दलित आदिवासी और वंचित समाज का अपमान है। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा है कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति जी को ही करना चाहिए। अपने बयान में विपक्षी दलों ने कहा है, “जब संसद से लोकतंत्र की आत्मा को चूस लिया गया और सरकार डेमोक्रेसी के लिए खतरा बन गई है तो नए भवन का कोई मूल्य नहीं है।” वास्तव में डेमोक्रेसी के लिए खतरा मोदी सरकार नहीं, बल्कि ये सभी हैं। जब संविधान में श्रीराम और श्रीकृष्ण के चित्र है, उसके बावजूद इनके जन्मस्थलों का विरोध करना कौन-सी डेमोक्रेसी है? शंका है, इन्हे डेमोक्रेसी शब्द का अर्थ भी मालूम होगा? इन्होने बस इस शब्द को लिखना और बोलना ही सीखा है, इसका भावार्थ नहीं। अगर भावार्थ मालूम होता कभी तुष्टिकरण करने का साहस नहीं करते। और भारत देश कई वर्षों पूर्व ही शक्तिशाली बन चुका होता, जो तुष्टिकरण के कारण हो नहीं पाया। 

इन सब के बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि संसद भवन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से कराया जाना चाहिए। यदि ओम बिरला से उद्घाटन नहीं कराया गया तो AIMIM इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनेगी।