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24 साल बाद नवीन बाबू से ओडिशा सत्ता छीनती दिख रही BJP , 5 साल बाद आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू की आँधी में उड़ गए जगनमोहन

नवीन पटनायक (बाएँ) और जगनमोहन रेड्डी (दाएँ)को मिलती दिख रही हार, चंद्रबाबू नायडू (बीच में) को जबरदस्त जीत
लोकसभा चुनाव 2024 के साथ ही 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव भी कराए गए थे। इनमें से 2 राज्यों सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए ने विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ कर दिया, तो बाकी बचे दो राज्यों, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 जून 2024 को आ रहे हैं। इन दोनों ही राज्यों में मौजूदा सत्ताधारी पार्टियों को झटका लगा है।

आंध्र प्रदेश में एनडीए ने सत्ताधारी पार्टी YSRCP का सूपड़ा साफ कर दिया है। आंध्र प्रदेश में बीजेपी-जनसेना पार्टी और तेलुगू देशम पार्टी क्लीन स्वीप करते हुए सरकार बना रही है। इसके साथ ही ओडिशा में लंबे समय सत्ता में बने बीजेडी को बीजेपी सत्ता से बाहर करती दिख रही है। अभी तक के आँकड़ों में बीजेपी ओडिशा में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार अपने दम पर बनाती दिख रही है। ये आँकड़े दोपहर 12.30 बजे तक के है।

आंध्र प्रदेश में एनडीए का कमाल, YSRCP का सूपड़ा साफ

आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी की सत्ताधारी पार्टी YSRCP का सूपड़ा साफ होते दिख रहा है। यहाँ बीजेपी, तेलुगू देशम पार्टी और जनसेना पार्टी तीन चौथाई से भी अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर रही हैं। आंध्र प्रदेश की कुल 175 विधानसभा सीटों में तेलुगू देशम पार्टी 131 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज कर रही है। जनसेना पार्टी 20 सीटों पर आगे है। बीजेपी को 7 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है, तो YSRCP को महज 17 सीटें मिलती दिख रही हैं। आंध्र प्रदेश में कॉन्ग्रेस पूरी तरह से गायब हो गई है। वो एक भी सीट पाती नहीं दिख रही।

ओडिशा में नवीन पटनायक को झटका, बीजेपी आगे

ओडिशा में साल 2000 से मुख्यमंत्री पद पर टिके नवीन पटनायक को इस चुनाव में सबसे बड़ा झटका लगता दिख रहा है। ओडिशा में बीजेपी अपने दम पर पूर्ण बहुमत पाती दिख रही है। ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों में से 74 पर बीजेपी आगे है, तो बीजेडी सिर्फ 57 सीटों पर आगे है। कॉन्ग्रेस 13 विधानसभा सीटों पर आगे है, तो 2 निर्दलीय और एक सीपीआई(एम) का उम्मीदवार आगे है। यहाँ बहुमत का आँकड़ा भी 74 सीटों का ही है।


कांग्रेस को छोड़ NOTA से भी पिछड़ गईं I.N.D.I. गठबंधन की पार्टियाँ

मोदी-योगी को हटाने जो विपक्ष ने I.N.D.I.alliance का गठन कर एकजुट होने का प्रयास हुआ, उतनी ही तेजी से इसके निष्फल  होने की अटकलें चल रही है, जो अभी संपन्न हुए 5 राज्यों में हुए चुनावों में नज़र आ गया है। विपक्ष(गैर-कांग्रेस) इस बात से शायद से अज्ञान या अज्ञान होने का ड्रामा कर रहे हैं कि कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक को वापस अपनी झोली में रखने में व्यस्त है। कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस का यह प्रयोग सफल रहा, जो गठबंधन में शामिल अन्य पार्टियों के लिए बहुत नुकसानदायक सिद्ध होने वाला है, क्योकि सभी तुष्टिकरण अपनाते हुए मुस्लिमों को रिझाने में दिन-रात लगी रहती हैं, लेकिन उसी वोटबैंक को कांग्रेस अपने पाले में रख इन सबके नीचे से चादर खींच रही है।   
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं को एक तरफ अदालत से जमानत नहीं मिल रही है। वहीं जनता की अदालत में भी उसकी जमानत जब्त हो रही है। घोटालों और भ्रष्टाचार में AAP नेता सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जेल में बंद हैं और उन्हें अदालत से जमानत नहीं मिल रही है। वहीं पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में AAP ने 200 से ज्यादा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और जनता की अदालत में भी उसके नेताओं की जमानत जब्त हो गई। यहां तक कि NOTA से भी कम वोट मिले हैं। राष्ट्रीय पार्टी होने का दंभ भरने वाली आम आदमी पार्टी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों में अपनी किस्मत आजमाया, लेकिन वह एक भी सीट जीत नहीं पाई बल्कि उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। इससे पहले 2022 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में उसने 67 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और सभी की जमानत जब्त हो गई थी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कई रैलियां और रोड शो किए और चुनाव प्रचार में मुफ्त बिजली, शिक्षा देने जैसे कई प्रलोभन दिए। लेकिन इन रेवड़ी के झांसे को जनता ने नकार दिया। 

केजरीवाल की रैलियां और रोड शो काम नहीं आई, मुंह की खानी पड़ी
इसी साल राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त करने वाली आम आदमी पार्टी ने मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पूरे दमखम से चुनाव लड़ा। पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के सीएम भगवंत मान के साथ में कई रैलियां और रोड शो किए थे। बावजूद इसके आप को इन चुनावों में मुंह की खानी पड़ी है।

चुनावों में केजरीवाल की रेवड़ी काम नहीं आई
केजरीवाल ने दिल्ली-पंजाब की तरह इन राज्यों में भी मुफ्त बिजली-पानी और शिक्षा का वादा किया था। लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं मिला। एक तरह से जनता ने रेवड़ी कल्चर को नकार दिया। तीनों राज्यों में चुनावी दांव खेलते हुए पार्टी के संयोजक एवं दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने रैलियों में फ्री बिजली देने की बात कही थी। राजस्थान में एक रैली में उन्होंने कहा था कि एक मौका दें 300 यूनिट बिजली मुफ्त देंगे। सभी कच्चे टीचर्स को पक्का करेंगे। पूरा इलाज फ्री करने की व्यवस्था करेंगे। शहीद सम्मान राशि एक करोड़ की जाएगी। सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाएगा। सभी बच्चों के लिए रोजगार की व्यवस्था की जाएगी। लेकिन केजरीवाल की ये रेवड़ियां काम नहीं आई।

मुफ्त बिजली, शिक्षा समेत अन्य प्रलोभन का फायदा नहीं मिला
आम आदमी पार्टी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ तीनों राज्यों में जमकर चुनाव प्रचार किया था। पार्टी संरक्षक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव प्रचार में मुफ्त बिजली, शिक्षा देने समेत कई प्रलोभन दिए। इन प्रलोभन का लाभ जैसे उसको पंजाब, गोवा में मिला, उसके उलट राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में खाता तक नहीं खुला। पिछले साल हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी आप को सिर्फ 1.1 प्रतिशत वोट मिला था।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में वोट शेयर 1 प्रतिशत से कम रहा
केजरीवाल गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में भी पार्टी की वोट शेयर बढ़ाने पर काम कर रहे थे, लेकिन इस बार AAP की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। 2022 में हुए गुजरात चुनाव में जहां AAP का वोट शेयर करीब 13 प्रतिशत रहा था वहीं 2023 में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के चुनावों में उसे 1 प्रतिशत से भी कम वोट मिला है। मध्य प्रदेश में उसे 0.44 प्रतिशत,राजस्थान में 0.37 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 0.93 प्रतिशत वोट मिला। इससे साफ जाहिर है कि आम आदमी पार्टी से जनता का मोहभंग हो चुका है और अब लोग रेवड़ी के लालच में फंसने वाले नहीं हैं।

मध्य प्रदेश में AAP के सभी 70 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
मध्य प्रदेश की 70 सीटों पर प्रत्याशियों को उतारने वाली आम आदमी पार्टी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। यहां पार्टी की जमानत जब्त हो गई है। मध्य प्रदेश की दमोह सीट से आम आदमी पार्टी ने चाहत पांडेय को चुनावी मैदान में उतारा था। चाहत पांडेय एक टीवी एक्ट्रेस हैं और एमपी के दमोह की ही रहने वाली हैं। इन्होंने इसी साल जून में आम आदमी पार्टी ज्वॉइन की थी। चाहत पांडेय का जादू भी नहीं चल पाया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वह 2292 वोट पाकर पांचवे नंबर पर रही। दमोह से बीजेपी प्रत्याशी जयंत मलैया ने जीत हासिल की है।

राजस्थान में 88 सीटों पर जमानत जब्त
राजस्थान में आम आदमी पार्टी पहली बार 88 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी। सभी सीटों पर उसका बुरा हाल रहा है। सीकर में केजरीवाल ने चुनाव से ठीक पहले रोड शो किया था और AAP ने दावा किया था कि 50,000 लोग इकट्ठा हुए थे, AAP को वहां कुल 2.25 लाख वोटों में से केवल 555 वोट मिले। सीकर में नोटा को 695 वोट मिला। सीकर में आम आदमी पार्टी नोटा से भी कम रही। आम आदमी पार्टी ने राजस्थान की उन सभी 88 सीटों पर जमानत खो दी, जहां उन्होंने चुनाव लड़ा था।

अवलोकन करें:-

AAP ने उतारे 215 उम्मीदवार, मिली 0 सीट, 1% वोट भी नहीं मिला

छत्तीसगढ़ में 57 सीटों पर जमानत जब्त
छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी ने 57 उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था। लेकिन यहां भी जमानत नहीं बचा सके। छत्तीसगढ़ में AAP को 0.93 प्रतिशत वोट मिला।