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इजरायल से बदला लेने की तैयारी कर रहा था तैयारी, तभी आसमान से बरसीं मिसाइलें: यमन पर कब्जा जमाए हूतियों का प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी मंत्रियों समेत ढेर

                    इजरायली हवाई हमले में अहमद अल-रहावी मारा गया। (साभार - एपी और द इकोनॉमिस्ट)
यमन की राजधानी सना में बीते 28 अगस्त को हुए इजरायली हवाई हमले ने मध्य पूर्व की राजनीति में नया मोड़ ला दिया। इस हमले में हूती विद्रोहियों की सरकार के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी की मौत हो गई है, जिसकी पुष्टि खुद हूतियों ने दो दिन बाद की है।

यह सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि इजरायल के लिए एक बड़ी जीत थी, जिसने सबसे वरिष्ठ हूती नेता को निशाना बनाया। अल-रहावी को पिछले साल ही प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था और अल-रहावी की मौत इजरायल-हूती संघर्ष की दिशा को बदल सकती है।

 हमले के वक्त अल-रहावी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सना के बाहरी इलाके में सरकारी सेमिनार में मौजूद थे। उसी दौरान टीवी पर उनके नेता अब्दुल-मलिक अल-हौती का पहले से रिकॉर्ड किया गया भाषण चलाया जा रहा था, जिसमें वे गाजा संघर्ष पर इजरायल से बदला लेने की धमकी दे रहे थे।

हवाई हमले ने हूती नेतृत्व की कमजोरियों को उजागर किया और यह स्पष्ट कर दिया कि इजराइल अब केवल बुनियादी ढाँचे पर नहीं बल्कि नेतृत्व पर सीधे वार करने की रणनीति अपना रहा है। अहमद अल-रहावी कभी यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के करीबी रहे थे और 2014 में हूतियों के साथ जुड़े।

हाल ही में उन्होंने इजराइल पर हमलों का समर्थन करते हुए कहा था कि यमन फिलिस्तीनी संघर्ष के लिए बहुत कुछ सहने को तैयार है। उनकी हत्या के बाद हूती नेतृत्व में गहरा आघात है। सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के प्रमुख महदी अल-मशात ने बदला लेने की घोषणा की और विदेशी कंपनियों को इजरायल छोड़ने की धमकी दी।

इजराइली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इसे हूतियों पर ‘करारा झटका’ बताया और कहा कि यह तो बस शुरुआत है। विश्लेषकों के अनुसार, यह हमला इजरायल की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अब हमास और हिज़्बुल्लाह की तरह हूतियों के नेतृत्व को भी सीधे निशाना बना रहा है।

क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी ने कहा कि यह बदलाव हूतियों के कमांड ढाँचे को भारी खतरे में डालता है। हूती अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से ही सक्रिय हैं। उन्होंने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय शिप्स को निशाना बनाया और इजरायल पर मिसाइलें दागीं, जिससे वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हुआ।

हाल ही में उन्होंने इजरायल की ओर क्लस्टर हथियारों से लैस बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जो 2023 के बाद अपनी तरह का पहला हमला था लेकिन अल-रहावी पर हुआ ताजा हमला दिखाता है कि इजरायल अब केवल हमास या लेबनान के हिज़्बुल्लाह तक सीमित नहीं है।

सीरिया में असद सरकार के ठिकाने, ईरान समर्थक मिलिशिया और अब यमन के हूती सब इजरायली निशाने पर हैं। मानो इजरायल अपने आखिरी बड़े दुश्मनों तक का सफाया करने की ओर बढ़ रहा हो। गाजा से लेकर बेरूत, दमिश्क से लेकर सना तक, इजरायल एक साथ कई मोर्चों पर लड़ रहा है और धीरे-धीरे हर दुश्मन की रीढ़ तोड़ने की कोशिश में है।

जाफर एक्सप्रेस के सभी 214 बंधक मारे गए: BLA का ऐलान, पाकिस्तानी फौज सबको छुड़ाने का कर रही थी दावा; बलूचिस्तान में पुलिस स्टेशन, चेकपोस्ट और कंस्ट्रक्शन कंपनी पर भी अटैक

          बलोच विद्रोहियों ने जाफर एक्सप्रेस को बोलान दर्रे के पास बंधक बना लिया था (फोटो साभार: India TV)
पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस हाइजैक मामला लगातार उलझता चला जा रहा है। पाकिस्तान की फ़ौज और सरकार के दावों के उलट बलोच विद्रोहियों ने 200 से अधिक फौजियों की हत्या की बात कही है। वहीं पाक फ़ौज ने दावा किया है कि मात्र 23 ही फौजी इस ऑपरेशन के दौरान मारे गए हैं। पाक फ़ौज के प्रवक्ता ने भारत को इस घटना का मुख्य साजिशकर्ता बताया है।

जाफर एक्सप्रेस को हाइजैक करने वाली बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने शुक्रवार (14 मार्च, 2025) को एक बयान जारी किया है। BLA ने कहा है कि उसने ट्रेन हाइजैक करने के बाद 48 घंटे पाकिस्तान सरकार को दिए थे, जिसमें उन्हें बलोच बंदियों को छोड़ना था।

BLA के अनुसार, 48 घंटे के बाद भी यह माँग पूरी होने के चलते उन्होंने जाफर एक्सप्रेस से बंधक बनाए गए सभी 214 फौजी मौत के घाट उतार दिए। BLA ने कहा है कि यह पाकिस्तान सरकार और फ़ौज की जिद का नतीजा है जबकि वह हमेशा नियमों से ही लड़ाई लड़ती आई है।

ट्रेन हाइजैक और इसके बाद हुई पाक फ़ौज से लड़ाई में BLA के 12 विद्रोही मारे गए हैं, यह भी बयान में बताया गया है। BLA ने कहा कि उन्होंने पकड़े गए फौजियों को एक बोगी में बंद कर रखा था और जब पाक फ़ौज के दूसरे कमांडो उन्हें छुड़वाने के लिए आए तो BLA के फिदायीन लड़ाकों ने उनकी हत्या कर दी।

वहीं पाकिस्तान की फ़ौज और सरकार के दावे इससे उलट हैं। पाकिस्तान के DG ISPR लेफ्टिनेंट अहमद शरीफ चौधरी ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया है कि पूरी घटना के दौरान 31 लोगों की मौत हुई जिनमें 23 फौजी थे। DG ISPR ने दावा किया है कि ऑपरेशन के दौरान 33 बलोच विद्रोही मारे गए हैं।

पाकिस्तान फ़ौज ने दावा किया है कि उसने 350 से अधिक बंधक हाइजैक की गई ट्रेन से मुक्त करवाए थे। हालाँकि, बलोच विद्रोहियों ने स्पष्ट किया है कि फौजियों को छोड़ कर उन्होंने बाकी सभी यात्रियों को रिहा कर दिया था। पाक फ़ौज ने अपनी इस नाकामी को छुपाने के लिए एक बार फिर भारत पर आरोप भी जड़े हैं।

DG ISPR ने आरोप लगाया है कि इस हमले का मुख्य आयोजक उनका पूर्वी पड़ोसी देश (भारत) है। इस हमले में पाक फ़ौज ने अफगानिस्तान का नाम भी घसीटा है। हालाँकि, भारत और अफगानिस्तान पहले ही पाकिस्तान के इन आरोपों को नकार चुके हैं।

वहीं इस बीच बलूचिस्तान के और भी शहरों में हमले हुए हैं। बलूचिस्तान के क्वेटा, पंज्गूर और खुजदार में हमले गुरुवार रात को हुए हैं। क्वेटा में हमलावरों ने एक पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया जबकि खुजदार में एक निर्माण कम्पनी पर हमला किया गया और उसके साजोसामान में आग लगा दी गई। पंज्गुर में एक चेकपोस्ट पर हमला हुआ और यहाँ से हथियार लूटे गए।

बलूचिस्तान में बीते कुछ दिनों से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। बलोच विद्रोही लगातार फ़ौज पर हमले कर रहे हैं और उन्होंने बड़े इलाके पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। वहीं फ़ौज उनके दावे नकार कर प्रोपेगेंडा करने और इल्जाम भारत तथा अफगानिस्तान पर डालने में जुटी है।