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शिमला : अवैध मस्जिद को कोर्ट ने दे दिया स्टे? कांग्रेस और वक़्फ़ बोर्ड ने बनवा दी अवैध मस्जिद; मोहम्मद सलीम ने रखी संजौली के अवैध मस्जिद की नींव

                                        संजौली मस्जिद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ( साभार- aajtak)
इतिहास गवाह है कि कांग्रेस अपनी कुर्सी की खातिर मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक विवादों को खड़ा कर "गंगा जमुनी तहजीब" जैसे गुमराह करने वाले नारों से जनता को पागल बनाती रही है। वैसे इन विवादों में अदालतें भी पीछे नहीं। आखिर अयोध्या में राममन्दिर बनने में इतने साल क्यों लगे? कहते हैं एक डॉक्यूमेंट जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुवाद करवाना था योगी सरकार से पहले सारी सरकारें तारीख पे तारीख लेती रही और हमारी अदालतें भी आंखें बंद कर तारीख पे तारीख देती रही। लेकिन 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार को उस डॉक्यूमेंट को अनुवाद करवा कोर्ट में दाखिल कर मुक़दमे में तेजी दिलवाई। अदालत को चाहिए था डॉक्यूमेंट के अनुवाद में देरी होने पर बाबरी के पक्षधर वकीलों और पार्टियों पर हर्ज़ाना क्यों नहीं लगाया? क्यों नहीं खुदाई में मिले मन्दिर के अवशेषों को छुपा के लिए नहीं दण्डित किया? अगर तत्कालीन पुरातत्व विभाग निदेशक के के मौहम्मद ने सेवानिर्वित होने पर लिखी पुस्तक में कांग्रेस और वामपंथियों के महापाप का रहस्योघाटन नहीं किया होता जनता भी बीजेपी, विश्व हिन्दू परिषद् और बजरंग दल को साम्प्रदायिक मान रही थी। मौहम्मद ने अपनी पुस्तक में साफ लिखा कि मन्दिर कभी का बन गया होता अगर कोर्ट में खुदाई में मिले सारे सबूत पेश कर दिए होते।         

शिमला का संजौली सुर्खियों में हैं। वजह है एक पाँच मंजिला मस्जिद। इसका इतिहास करीब 30 साल पुराना है। अपने अस्तित्व में आने के साथ ही ये विवादित हो गया, क्योंकि ये अवैध तरीके से बनाया गया। यहाँ आसपास हिन्दू आबादी है। इनके बीच बहुमंजिला मस्जिद और यहाँ आने वाले बाहरी मुस्लिम, जो नमाज अदा करने के लिए खास तौर पर यहाँ आते हैं।

यहाँ की पूरी आबादी हिन्दू है। राजनीतिक लाभ के लिए कांग्रेस ने मस्जिद निर्माण को नजरअंदाज किया। पहले एक कमरा बनाया गया, फिर दूसरा बना और फिर धीरे-धीरे पाँच मंजिला मस्जिद तैयार हो गया। नगर निगम के कागजों में ये अवैध रहा। सरकारी आदेशों में उसे तोड़ने का फरमान जारी हुआ, लेकिन जैसे ही तोड़ने की बात आती है, आदेश पर स्टे लग जाता है।

शिमला और संजौली की हिन्दू आबादी स्टे और दूसरी कानून प्रक्रिया से परेशान हो चुकी है। हिन्दू संघर्ष समिति अब मस्जिद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा है। समिति ने मस्जिद की बिजली पानी काट कर सील करने की माँग रखी थी। इसमें बिजली-पानी काटने की बात माँगी गई है। नगर निगम की ओर से कहा गया है कि बिजली-पानी काट दिया जाएगा । लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ है।

विरोध प्रदर्शन कर रहे हिन्दू संगठनों का मंच संजौली पुलिस स्टेशन के पास में है। दिन तो धूप के साथ खुशनुमा रहता है, लेकिन रात में तापमान 3 से 4 डिग्री तक पहुँच जाता है। इसके बावजूद लोग टस से मस होने के लिए तैयार नहीं हैं। हिमाचल की कांग्रेस सरकार और लोकल प्रशासन के रवैये से लोग खासे नाराज हैं।

ऑपइंडिया ने विरोध प्रदर्शन कर रहे हिन्दू समाज के लोगों से खास बातचीत की और उनकी समस्याओं को जाना। समिति से जुड़े कमल गौतम के मुताबिक, ये मामला दुनिया के सामने तब आया, जब 30 अगस्त 2024 को एक स्थानीय युवक के साथ 5-6 प्रवासी मुस्लिमों के समूह ने मारपीट की और सिर फोड़ दिया। आरोपित को मस्जिद ने पनाह दिया। इसी मस्जिद से उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था।

हिन्दुओं के सब्र का बाँध टूट गया। हमेशा शांत रहने वाला पहाड़ इन दिनों बाहरी मुस्लिम आबादी के बढ़ते अपराध से त्रस्त हो गया है। अवैध मस्जिद इन अपराधियों के छिपने का ठिकाना बन गयी है।

डेमोग्राफी बदलने की साजिश

ऑपइंडिया ने जब स्थानीय व्यक्ति और विरोध प्रदर्शन में बढ़चढ़ कर भाग लेने वाले विजय शर्मा से बात की। उनका कहना है कि हिमाचल प्रदेश में बाहर से आने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। उनकी गतिविधियाँ संदिग्ध नजर आती है। हर दिन नए नए चेहरे देखने को मिल रहे हैं। हमारी माताओं बहनों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।

विजय शर्मा के मुताबिक, पहले 3 फीसदी स्थानीय मुस्लिम थे, अब तो बढ़ गई है। बाहर से आने वाले घुसपैठिए चाहे वे अवैध बांग्लादेशी, रोहिग्या हों या दूसरे राज्यों से आए मुस्लिम भीड़। इनकी संख्या काफी तेजी से बढ़ी है।

उन्होंने कहा, “डेमोग्राफी बदल रही है पूरा साजिश के तहत। हिन्दुओं को दबाने के लिए सुनियोजित षडयंत्र हो रहा है। शिमला कोई बड़ा शहर नहीं है और संजौली तो छोटा-सा कस्बा है। शिमला से दूर संजौली जैसे छोटे इलाके में जाकर बसना कोई छोटी बात नहीं है। यहाँ पर मुस्लिम आबादी नहीं है इसलिए यहाँ धीरे धीरे भीड़ जमा होने लगी, ताकि डेमोग्राफी बदला जा सके। फल वाला भी सस्ते दाम में फल देने लगता है। अब हालात ये हो गए हैं कि स्थानीय लोगों से मारपीट शुरू हो गयी है। हमें तो भविष्य की चिंता है। आगे आने वाली पीढ़ी नमाज पढ़ने लगेगी, ऐसा मुझे लगता है।

मस्जिद बनाने वाला मोहम्मद सलीम सबसे बड़ा साजिशकर्ता

विजय शर्मा के मुताबिक, स्थानीय युवक का सिर फोड़े जाने के बाद लोगों का गुस्सा फूट गया। 5 सितंबर 2024 और 11 सितंबर 2024 को जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। ये वर्षों से दबी चिंगारी थी।
उनका कहना है कि 1990 में मोहम्मद सलीम संजौली पहुँचा। वह दर्जी था, उसने स्कूल के शिफ्ट होने के बाद सरकारी जमीन पर कब्जा कर एक ढाँचा बना लिया। एक मंजिल का ये ढाँचा धीरे धीरे दूसरी मंजिल तक पहुँच गया। इसे मस्जिद के रूप में विकसित करने लगा। राजनीतिक फायदे के लिए वक्फ बोर्ड से मस्जिद को NOC दिलवाया गया।
मस्जिद को पैसे मिले और धीरे धीरे उसका फ्लो बढ़ने लगा। जैसे जैसे मंजिल बढ़ी, यहाँ आने वाले नमाजियों की जमात भी बढ़ने लगी। 5 मंजिल का ये ढाँचा पूरी तरह मस्जिद की तरह इस्तेमाल होने लगा। यहाँ बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करने के लिए आने लगे। गौरतलब है कि यहाँ आसपास मुस्लिम बस्तियाँ नहीं है। बहुत मुश्किल से एकाध व्यक्ति नजर आता है। ऐसे में भीड़ बाहरी मुस्लिम की है, जो यहाँ पहुँच कर नमाज अदा करते हैं।
सबसे बड़ी बात है कि इतनी बड़ी मस्जिद में ग्राउंड पर सिर्फ दो टॉयलेट है। जब नमाज पढ़ने आते हैं तो बड़ी संख्या में नमाजी होते हैं। नमाज से पहले वजू करने के लिए दो टॉयलेट कम पड़ जाते है। ऐसे में ये लोग खुले में वजू करते हैं।
आसपास हिन्दू आबादी। दोपहर में महिलाएँ अपने बच्चों को लेकर स्कूल से आती हैं या दिनचर्चा के काम के लिए बाहर निकलती हैं। इन महिलाओँ को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं ने शुरुआत में खुले में वजू करने पर एतराज जताया, तो उन्हें गंदे कमेंट सुनने पड़े। हालाँकि महिलाओं ने पुलिस को इसकी शिकायत नहीं की। क्योंकि पहाड़ों पर आम प्रचलन है कि आपसी बातों में जल्दी पुलिस को शामिल नहीं करते हैं।
अमृता चौहान के मुताबिक, हमारी बहनें बच्चों को स्कूल से आती हैं, तो उन्हें नमाज के वक्त रोक दिया जाता है, जब तक कि नमाजी वहाँ से चले नहीं जाते। यहाँ तक कि मुस्लिमों की ठेले और रेडी की दुकानें बड़ी संख्या में लगने लगी है। महिलाओं के सामान खरीदने जाने पर भी गंदे कमेंट सुनने को मिलते हैं।

असिस्टेंट टाउन प्लानर बनते ही महबूब शेख ने मारी पलटी

अवैध मस्जिद की नींव रखने वाला मोहम्मद सलीम का कार्यकलाप संदिग्ध था। 1990 से 2024 के दौर में मुस्लिम भीड़ के जुटने और अवैध मस्जिद निर्माण को लेकर नगर निगम ने भी कहा था कि मोहम्मद सलीम के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उस वक्त जेई महबूब शेख ने मोहम्मद सलीम को जाँच में दोषी ठहराया था लेकिन बाद में पलट गया।
ऑपइंडिया से बात करते हुए स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि असिस्टेंट टाउन प्लानर बनते ही महबूब शेख ने अपनी रिपोर्ट में मोहम्मद सलीम को क्लीनचिट दे दी। उन्होंने कहा कि मोहम्मद सलीम का इससे कोई सरोकार नहीं है। उसने वक्फ बोर्ड को ‘पार्टी’ बनाने की बात कही।
स्थानीय नागरिक का कहना है कि मस्जिद को बड़ा बनाने में पैसों के इंतजाम में असिस्टेंट टाउन प्लानर महबूब शेख का बड़ा हाथ था। विजय शर्मा के मुताबिक, लोग माँग करते रह गए कि महबूब शेख के खिलाफ जाँच की जाए। उसकी संपत्तियों की जाँच की जाए, लेकिन किसी भी सरकार ने लोगों की नहीं सुनी।

हिन्दू विरोधी नैरेटिव सेट करने की कोशिश

कांग्रेस के शासन काल में हिन्दू विरोधी नैरेटिव सेट करने की कोशिश की गई। हाल ही में नामी गिरामी कॉन्वेंट स्कूल में छोटे छोटे बच्चों को मैसेज भेजा गया। ईद के दिन सफेद कुर्ता-पैजामा, जालीदार टोपी पहन कर, लंच में सेवईयाँ लेकर आने के लिए कहा गया।
अधिकांश बच्चों के पैरेंट्स बिफर गए। कमलेश मेहता के मुताबिक, खानपान में सेवइयाँ कोई ट्रेडिंशन नहीं है पहाड़ों की, लेकिन हमने पूछा कि क्या महावीर जयंती मनाई, दुर्गापूजा मनाई, जन्माष्टमी मनाई, अगर नहीं मनाई तो ईद क्यों मनाने के लिए बोल रहे हो। अंत में पैरेंट्स के दबाव में स्कूल ने निर्णय बदल दिया।
कमलेश का कहना है कि सनातन समाज अपने बच्चों और उनके भविष्य की चिंता कर रहा है। आगे आने वाली पीढ़ी की चिंता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक का वीडियो वायरल हो गया है जिसमें उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुस्लिम पक्ष से कह रहे थे कि मुझे धन्यवाद करना। दरअसल जब सीएम ने कहा कि हम 98 फीसदी हिन्दू विचारधारा को हरा कर सत्ता में आए हैं, तो हम क्या इनसे उम्मीद करें।

ठाणे की अवैध मस्जिद गिराने में देरी से उखड़ा हाई कोर्ट, श्री स्वामी समर्थ हाउसिंग की जमीन पर खड़ा कर रखा है ढाँचा: पुणे इमामबाड़ा का वक्फ दर्जा रद्द

                                                 प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI_Bing)
बॉम्बे हाई कोर्ट ने ठाणे नगर निगम को जमकर लताड़ लगाई है। एक अवैध मस्जिद को तोड़ने में देरी पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस एएस गडकरी और कमल खाता की बेंच ने कहा कि कानून का पालन करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले भी इस मामले में साफ निर्देश दिए थे, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। कुछ मुस्लिम समूह लगातार इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा कि विरोध के नाम पर कानून तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

इस केस में न्यू श्री स्वामी समर्थ बोरिवडे हाउसिंग कंपनी ने कोर्ट से गुहार लगाई थी। कंपनी के पास कासरवडवली के बोरिवडे गाँव में 18,000 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन है। कंपनी ने ठाणे नगर निगम (टीएमसी) से कहा कि उनकी जमीन पर बनी एक अवैध इमारत को तोड़ा जाए। ठाणे नगर निगम ने 1 जनवरी 2025 को जाँच की, तो पता चला कि ये 3,600 वर्ग फुट की ग्राउंड-प्लस-वन मस्जिद है, जिसमें नमाज हॉल भी है। इसका संचालन परदेसी बाबा ट्रस्ट करता है।

मस्जिद के पक्ष वालों का कहना था कि ये तब बनी थी, जब इलाका ग्राम पंचायत के अधीन था, लेकिन ठाणे नगर निगम के रिकॉर्ड में इसके लिए कोई ऑर्डर नहीं मिला। इस मामले में नोटिस और सुनवाई के बाद 27 जनवरी को थाणे नगर निगम ने इसे अवैध ठहराया और तोड़ने का ऑर्डर दिया। हालाँकि दूसरा पक्ष कोर्ट पहुँच गया और अब हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ठाणे नगर निगम को जल्द से जल्द ये मस्जिद ढहाना चाहिए।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “लोकतंत्र में कोई व्यक्ति, समूह या संगठन यह नहीं कह सकता कि वह कानून नहीं मानेगा। अगर कोई ऐसा करता है, तो प्रशासन को सख्ती से उसे कानून का पालन करवाना चाहिए। यह भी जरूरी है कि लोगों के मन में यह बात बैठे कि कानून तोड़ने या उसका विरोध करने की इजाजत नहीं मिलेगी।”

पुणे इमामबाड़ा का वक्फ दर्जा रद्द, बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक और बड़ा फैसला सुनाते हुए पुणे के हाजी मोहम्मद जवाद इस्पाहानी इमामबाड़ा ट्रस्ट का वक्फ दर्जा रद्द कर दिया। महाराष्ट्र स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल ने 2023 में इसे वक्फ संगठन माना था, लेकिन अब हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया। जस्टिस संदीप वी. मार्ने ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने 2016 में गलत तरीके से इसे वक्फ एक्ट 1995 की धारा 43 के तहत दर्ज किया था। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 के तहत रजिस्ट्रेशन से कोई ट्रस्ट अपने आप वक्फ नहीं बन जाता।
पुणे का ये इमामबाड़ा 1953 से मुस्लिम पब्लिक ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर्ड था। ट्रस्ट में गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद वक्फ बोर्ड से इसे वक्फ बनाने की माँग उठी। 2016 में वक्फ बोर्ड ने इसे मंजूरी दी, लेकिन ट्रस्ट के ट्रस्टी इसके खिलाफ वक्फ ट्रिब्यूनल गए। ट्रिब्यूनल ने 2023 में उनकी याचिका खारिज कर दी, तो मामला हाई कोर्ट पहुँचा। अब कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को नए सिरे से मामले की सुनवाई करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ट्रिब्यूनल अपना फैसला खुद ले, बिना हाई कोर्ट के प्रभाव के।

जिस जगह पर भगवान राम ने की महादेव की पूजा, वहाँ मंदिर के पास खड़ी कर दी मस्जिद-मजार

                                      बांदा का अवैध मस्जिद (साभार: भारतवर्ष/आजतक)
उत्तर प्रदेश के बाँदा में जिस जगह पर भगवान राम ने भगवान शंकर को जलाभिषेक की थी, वहाँ अवैध रूप से एक मस्जिद बना दी गई है। इसको लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने विरोध प्रदर्शन किया है और उस अवैध मस्जिद को गिराने की माँग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। बाम्बेश्वर पर्वत पर स्थित उस शिवलिंग को बमदेव भोलेनाथ की मंदिर के नाम से जाना जाता है।

विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का आरोप है कि कोरोना काल के जब हर तरफ लॉकडाउन था, उस दौरान इस पर्वत पर मुस्लिमों ने चुपके से एवं अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण कर लिया था। VHP के मंडल अध्यक्ष अशोक ने कहा कि वहाँ पर आधा दर्जन मजारें भी बना ली गई हैं। पहाड़ पर रोज फतिहा और हर शुक्रवार को जुमे की नमाज पढ़ी जाती है।

हिंदू संगठनों का आरोप है कि इस जगह पर कोई मुस्लिम बस्ती नहीं थी, लेकिन अब काफी तादाद में यहाँ मुस्लिम हने लगे हैं। इससे सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में मस्जिद और अवैध ढाँचों को गिराने के लिए विश्व हिंदू परिषद के अधिकारियों ने जिला कलेक्टर और पुलिस कप्तान के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।

पत्र में कहा गया है कि इस्लाम धर्म के लोग भारत का इस्लामीकरण करा रहे हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर सरकार ने इसे नहीं हटाया तो वे इस मस्जिद को गिरा देंगे। हिंदू संगठनों की माँग है कि अवैध मस्जिद एवं मकबरे का बनाने वालों को तत्काल जेल में डाला जाना चाहिए और अवैध ढाँचों एवं उसे बनाने वालों के मकानों पर बुलडोज़र चलना चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद के चंद्रमोहन बेदी ने कहा कि यह पर्वत बहुत पुराना है। यहाँ पर पीछे की तरफ कुछ लोगों ने अवैध रूप से मजार बनाई और फिर उसे धीरे-धीरे मस्जिद में बदल दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को अंधविश्वास में डाल दिया और जगह हथिया ली। उन्होंने पूछा कि जब सतह पर पत्थर ही पत्थर हैं तो मजार कैसे बन सकती है। मजार बनाने के लिए खुदाई होती है, लेकिन पत्थर पर खुदाई कैसे होगी।

VHP के महामंत्री दीपू दीक्षित ने बताया कि शुरू में मुस्लिमों ने पर्वत के एक पत्थर को हरे रंग से पोता फिर धीरे-धीरे इस पर मजार बनाई। फिर इस पर एक बड़ी मस्जिद बना दी। इसके बाद काफी लोग यहाँ टोपी लगाकर आना शुरू हो गए। दीपू ने कहा कि यह एक कैंसर का रूप है। इसे तत्काल जड़ से काटकर फेंक देना चाहिए, वरना यह पूरे शरीर को खराब कर देगा।

बाम्बेश्वर पर्वत पर बने प्राचीन मन्दिर के पुजारी पुत्तन महाराज ने और मंदिर कमिटी के अध्यक्ष ने भी मस्जिद का विरोध किया है। उनका कहना है यह यह स्थिति अयोध्या और काशी मथुरा जैसी बन सकती है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान यहाँ के शिवलिंग पर जलाभिषेक किया था। इस दौरान भगवान शंकर ने उन्हें दर्शन दिया था।

तेलंगाना : भगवान की पवित्र भूमि से खिलवाड़ नहीं करेंगे बर्दाश्त: चिलकूर बालाजी मंदिर के पास बन रही थी अवैध मस्जिद, बजरंग दल के विरोध के बाद निर्माण रुका

                                                                    तेलंगाना में प्रदर्शन
तेलंगाना के चिलकुर बालाजी मंदिर के पास एक जमीन को वक्फ जमीन बताकर वहाँ मस्जिद बनाया जा रहा है। अब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इसी का विरोध करते हुए कॉन्ग्रेस प्रशासन को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि मंदिर की पवित्रता के साथ कोई भी खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने निर्माण हो रहे मस्जिद को गिराने की माँग की है।

चिलकुर बालाजी देवस्थानम के अर्चक सीएस रंगराजन ने कहा, “चिलकुर बालाजी मंदिर के आसपास की जमीन पवित्र है और बहुत लंबे समय से मौजूद है। जिस तरह तिरुपति बालाजी मंदिर के आसपास की जमीन पूजनीय है, उसी तरह चिलकुर बालाजी मंदिर के आसपास का इलाका भी उतना ही पवित्र है और भगवान इसके असली मालिक हैं क्योंकि भगवान वेंकटेश्वर ने खुद को उन्हें सिलकुर में प्रकट किया है। यह अन्य धर्मों के पूजा स्थलों के लिए जगह नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि मंदिर की पवित्रता को सुनिश्चित करना पुलिस, राजस्व और अन्य विभागों की जिम्मेदारी है। वह बोले, “मंदिर के दो किलोमीटर के भीतर एक नई मस्जिद बनाई जा रही है। वे भी हमारे भाई हैं और हम उनसे प्यार करते हैं और उनका सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार और मस्जिद बनाने वालों से यह अनुरोध है कि भूमि की पवित्रता और स्वामित्व को बरकरार रखा जाए। यह प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय से हमारी सम्मानजनक अपील है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यहाँ किसी अन्य धर्म के लिए कोई नया पूजा स्थल न बनाया जाए।”

बजरंग दल के राज्य संयोजक शिवरामुलु ने माँग की कि स्थानीय तहसीलदार जिन्होंने निजी भूमि को वक्फ भूमि बताने वाली रिपोर्ट बनाई, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में मुस्लिम एमएलसी की बात सुनी गई, साइट पर बोरवेल खोदने का काम हुआ। उनके मुताबिक इन सबसे दौरान पुलिस मौके पर थी और निर्माण कार्य करते समय स्थानीय लोगों को आतंकित कर रही थी। इसी के बाद बजरंग दल ने चेतावनी दी कि हिंदू समुदाय अपने खिलाफ साजिश का जवाब देगा।

इस मामले में ताजा अपडेट के अनुसार हिंदू कार्यकर्ताओं और सीएस रंगराजन द्वारा विरोध प्रदर्शन के बाद, जिला कलेक्टर ने तुरंत इस मामले का संज्ञान लिया और मस्जिद के निर्माण को रोक दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर निर्माण जारी रहा तो प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

दिल्ली : बुलडोजर देख मस्जिद के ऊपर चढ़ गई मुस्लिम औरतें भी, MCD ने अवैध निर्माण ढहाया: मंगोलपुरी में कार्रवाई रोकने को पहले बनाई ‘मानव दीवार’, फिर पथराव

                  मस्जिद पर होता एक्शन और विरोध करती भीड़ (चित्र साभार: medineshsharma/X)
दिल्ली के मंगोलपुरी में MCD ने मस्जिद ने अवैध निर्माण पर एक्शन लिया है। यहाँ MCD ने एक मस्जिद के अवैध हिस्से को भी गिरा दिया। मस्जिद के अवैध निर्माण को हटाने के दौरान काफी हंगामा हुआ। हंगामे के बीच मस्जिद के अवैध हिस्से को गिरा दिया गया।

अब सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि किस नेता और अधिकारी रहते अवैध निर्माण हुआ? मंगोलपुरी तो एक झांकी है। MCD बताए कि पूरी दिल्ली में कितने अवैध निर्माण हैं और भवन विभाग क्यों खामोश रहा? क्या MCD निष्पक्ष रूप से दिल्ली से अवैध निर्माण हटाएगा? कोई व्यक्ति अगर  नियमित कार्य के लिए जाता है, इजाजत नहीं मिलती, कई अड़चने लगा दी जाती है, लेकिन जब उसी काम को किसी बिल्डर के माध्यम से करवाता है, तुरंत हो जाता है, क्यों? क्या राज है? 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगोलपुरी के वाई ब्लॉक में में मंगलवार (25 जून, 2024) सुबह पुलिस और केन्द्रीय सुरक्षा बलों के साथ MCD की टीम पहुँची। यहाँ टीम कुछ अवैध निर्माणों को गिराने पहुँची थी। इन अवैध निर्माण की शिकायत की गई थी। इन अवैध निर्माण में एक मस्जिद का हिस्सा भी शामिल था। दूसरे, दिल्ली में अवैध निर्माण ही नहीं, अधिक्रमण भी कम नहीं, जिस कारण चौड़ी सड़कें तंग हो रही है। 

जब MCD और सुरक्षाबल यहाँ पहुँचे तो बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएँ और पुरुष मस्जिद के ऊपर चढ़ गए और इस कार्रवाई का विरोध करने लगे। इसके बाद उन्होंने टीम को घेर भी लिया। इसके बाद हँगामा करने वाली भीड़ ने पुलिस और MCD पर पथराव भी किया, ऐसी सूचना भी सामने आई है।

बताया गया कि मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों ने मस्जिद के अवैध हिस्से को बचाने के लिए एक मानव दीवाल बना दी। यह भी सूचना सामने आई कि कुछ हिस्सा तोड़ने के बाद MCD की टीम ने यहाँ काम रोक दिया। MCD के अधिकारियों ने बताया कि निर्माण ज्यादा मजबूत है और उसको तोड़ने के लिए बड़ी मशीनें लानी पड़ेंगी।

मंगोलपुरी से कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है। गौरतलब है कि दिल्ली में MCD लगातार पिछले कुछ समय से अतिक्रमण पर कार्रवाई कर रहा है। मंगोलपुरी का अतिक्रमण भी एक शिकायत के बाद हटाया जा रहा था।

इससे पहले यह भी सामने आया था कि दिल्ली की जामा मस्जिद ने भी एक सार्वजनिक पार्क पर कब्जा किया हुआ है, इसे लेकर मोहम्मद अर्सलान नाम के व्यक्ति ने याचिका दायर की थी। इस मामले में पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने ये कब्जा वापस न ले पाने के लिए MCD को फटकारा है।