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बिहार : किशनगंज से कटिहार में चल रहा घुसपैठियों का खेल, बंगाल से सटे इलाकों में कैसे बढ़ रही मुस्लिम जनसंख्या; जनता को इस ठग(INDI) गठबंधन से सतर्क रहने की जरुरत है

                    मतदाता सूची की जाँच करते चुनाव आयोग के कर्मचारी (फोटो साभार X_@ECISVEEP)
देर आये दुरुस्त आये, चुनाव आयोग ने अगर यही पुण्य काम 8/10 शुरू कर दिया और गृह मंत्रालय ने घुसपैठियों को देश निकाला कर दिया होता, आन्दोलनजीवियों और ठग(INDI) गठबंधन को भीड़ जुटाने के लाले पड़े हैं। CAA के विरोध माँ बने शाहीन बागों से लेकर अभी कुछ समय पहले तक हुए धरने में अधिकतर भीड़ स्थानीय लोगो से ज्यादा तादाद घुसपैठियों की होती है। 

यह इस देश की दुर्भाग्य है जहां नेता और पार्टियां अपनी कुर्सी के चक्कर में घुसपैठियों को अपना माई-बाप मान अपने देश की जनता को मिलने वाली सुविधाओं को घुसपैठियों को दी जा रही थीं। वास्तव में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में आयी गड़बड़ियों ने चुनाव आयोग को ऐसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा।

          

बिहार में हाल ही में जारी किए गए आधार कार्ड सैचुरेशन के आँकड़ों ने एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ राज्य का औसत आधार सैचुरेशन 94% है, वहीं किशनगंज (126%), कटिहार (123%), अररिया (123%), और पूर्णिया (121%) जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में यह आँकड़ा 100% से भी ज्यादा है।

यानी हर 100 लोगों पर 120 से ज्यादा आधार कार्ड। ये आँकड़े डुप्लीकेट आधार कार्ड या गैर-नागरिकों को आधार जारी किए जाने के सवाल खड़े करते हैं। खासकर पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा से सटे सीमांचल क्षेत्र में जहाँ अवैध घुसपैठ सबसे ज्यादा होते है।

वहीं, किशनगंज जिले के जियापोखर से मुस्लिम व्यक्ति अशराफुल को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि वो बांग्लादेशी और नेपाली घुसपैठियों के लिए फर्जी आधार कार्ड बनाता था।

आधार सैचुरेशन और जनसंख्या

बिहार के सीमांचल क्षेत्र में किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया जैसे जिले आते हैं। इन जिलों में मुस्लिम आबादी 38% से 68% तक है। यहाँ आधार कार्ड की संख्या आबादी से ज्यादा है।

आमतौर पर, एक व्यक्ति का एक ही आधार कार्ड होता है। लेकिन यहाँ के आँकड़े बताते हैं कि या तो नकली आधार कार्ड बने हैं या फिर ऐसे लोगों को भी आधार कार्ड मिले हैं जो भारत के नागरिक नहीं हैं।

संवेदनशील सीमांचल क्षेत्र

सीमांचल क्षेत्र पश्चिम बंगाल और नेपाल से सटा हुआ है। बांग्लादेश भी यहाँ से दूर नहीं है। इस इलाके में लंबे समय से अवैध घुसपैठियों के रहने की बात कही जाती रही है। कुछ लोग मानते हैं कि ज्यादा आधार कार्ड बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए बनाए गए हैं।

उनका दावा है कि स्थानीय नेताओं और कट्टरपंथी समूहों ने इसमें मदद की है। हालाँकि, इन दावों के लिए अभी पुख्ता सबूत नहीं हैं। फिर भी, यह एक चिंता का विषय है।

चुनाव और आधार कार्ड

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की जाँच चल रही है। विपक्षी दल सवाल उठा रहा है कि वोटर लिस्ट में नाम के लिए आधार कार्ड और आवासीय प्रमाण पत्र को क्यों नहीं माना जा रहा है।

लेकिन सच्चाई यह भी है कि सीमांचल के चार जिलों में आधार कार्ड की संख्या आबादी से ज्यादा है। यहाँ तक कि नागरिकता का सबूत न होने के बावजूद आधार कार्ड के आधार पर निवास प्रमाण पत्र भी जारी किए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, किशनगंज में आधार कार्ड की संख्या आबादी का 105.16%, अररिया में 102.23%, कटिहार में 101.92% और पूर्णिया में 101% है।

जनसांख्यिकी में बदलाव

पिछले दो दशकों में, इस क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठ बढ़ी है। इससे यहाँ की आबादी में तेजी से बदलाव आया है। 1951 से 2011 तक, इन जिलों में मुस्लिम आबादी में 16% की बढ़ोतरी हुई।

हाल ही में हुई जातिगत जनगणना से पता चला है कि किशनगंज में मुस्लिम आबादी 68%, अररिया में 50%, कटिहार में 45% और पूर्णिया में 39% हो गई है।

कुल मिलाकर, इन चार जिलों में मुस्लिम आबादी 47% हो गई है। केंद्र सरकार सीमांचल में हो रहे इन बदलावों को लेकर चिंतित है। चुनाव आयोग की मतदाता सूची की विशेष जाँच भी इसी वजह से की जा रही है।

मतदाता सूची की जाँच का सबसे ज्यादा विरोध राज्य के मुस्लिम इलाकों में हो रहा है। मुस्लिम समुदाय लंबे समय से विपक्षी महागठबंधन का समर्थन करता रहा है। महागठबंधन इस विरोध के बहाने इस समुदाय को एकजुट करना चाहता है।

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बिहार में पकडे जा रहे 100 लोगों के पास 120 आधार कार्ड; बोगस वोटबैंक पर हथौड़ा पड़ने है ठग(INDI) गठबंधन के रो

आने वाले चुनाव

बिहार में अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में विपक्ष सवाल उठा रहा है कि केवल तीन से चार महीनों में यह जाँच अभियान कैसे पूरा किया जा सकता है। ये काम राज्य में होने वाले चुनाव में करनी चाहिए। 

राम मंदिर में घुस गई मुस्लिम महिला, सिर और चेहरे को नीले कपड़े से ढँक रखा था: परिवार ने बताया ‘मानसिक विक्षिप्त’

                                राम मंदिर में नीले कपड़े से ढँकी महिला (प्रतीकात्मक तस्वीर) 
यूपी पुलिस ने राम मंदिर से एक मुस्लिम महिला को हिरासत में लिया है। उसकी गतिविधियाँ संदिग्ध लग रही थीं। उक्त महिला का नाम इरिम है, जो श्रद्धालुओं के साथ दर्शन के बहाने भीतर जा रही थी। जाँच एजेंसियाँ उसके बारे में खँगाल रही हैं।

उक्त महिला मंदिर के भीतर भी चली गई थी, लेकिन लौटते समय एग्जिट पर पुलिस ने उसे रोक लिया। उसने सिर और चेहरे पर नीले रंग का कपड़ा बाँध रखा था, वो पुलिस को भी पलट कर जवाब दे रही थी। महाराष्ट्र के वर्धा की रहने वाली उस महिला के परिजनों का कहना है कि वो मानसिक बीमार है और इधर-उधर घूमती रहती है। उसे महिला थाने में रखकर परिजनों को सूचित किया गया।

इससे पहले 6 जनवरी को कैमरे वाले चश्मे से तस्वीर खींचकर जासूसी करते हुए एक शख्स को गिरफ्तार किया गया था। गुजरात का व्यापारी जयकुमार ऐसा करते हुए सभी चेकपॉइंट्स को पार कर चुका था। इसी तरह 3 मार्च को अब्दुल नामक एक आतंकी धराया था, जो हैण्ड ग्रेनेड से राम मंदिर पर हमले की साजिश रच रहा था।

वहीं ताज़ा मामले में फ़िलहाल महिला के बारे में कुछ आपत्तिजनक पता नहीं चला है। बता दें कि अयोध्या का राम मंदिर आतंकियों के निशाने पर रहा है, पाकिस्तान तक से इसे लेकर कई बयान आ चुके हैं। जब सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी ढाँचे वाली जगह पर राम मंदिर बनाए जाने का फ़ैसला बनाया था, क्योंकि ये साबित हो गया था कि वहाँ बाबर के सेनापति मीर बाकी ने राम मंदिर को ध्वस्त करके मस्जिद बनवाई थी।

मुस्लिम मुल्कों सऊदी-UAE में क़ैद हैं सबसे अधिक भारतीय: वो 12 देश जहाँ भारत के 10000+ नागरिक जेल

                               सऊदी-UAE में सबसे अधिक भारतीय क़ैदी (फोटो साभार: द सियासत डेली)
दुनिया में सबसे ज्यादा सजायाफ्ता और विचाराधीन भारतीय कैदी सऊदी अरब और UAE में हैं। इन दोनों मुस्लिम देशों में 2000 से ज्यादा भारत के लोग कैद हैं। दूसरे खाड़ी देशों की बात करें तो बहरीन, कुवैत और कतर में बड़ी संख्या में भारतीय कैद हैं। इसके अलावा नेपाल में 1317, मलेशिया में 338 और चीन में 173 भारतीय अलग अलग जेलों में बंद हैं। कुल मिलाकर दुनियाभर में 10,152 भारतीय 86 देशों में कैद हैं। इनमें सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, कतर, नेपाल, चीन जैसे 12 देश अहम हैं जहाँ कुल भारतीय कैदियों में से क़रीब तीन-चौथाई कैद हैं।

2 साल में 10 कैदी आए स्वदेश

इसका खुलासा विदेश मंत्रालय ने संसद की एक समिति के सामने किया है। कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर की अगुवाई वाली संसदीय स्थाई समिति ने अपनी छठी रिपोर्ट में ये जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 12 देशों में से 9 देशों के साथ कैदियों के लिए प्रत्यर्पण संधि है, फिर भी पिछले 2 सालों में यानी 2023 से मार्च 2025 तक सिर्फ 10 कैदियों को ही स्वदेश लाया जा सका है। इनमें ईरान और यूके से 3-3, रूस और कंबोडिया से 2-2 कैदी शामिल हैं।

31 देशों से कैदियों के ट्रांसफर का समझौता

विदेश मंत्रालय ने समिति को बताया है कि 31 देशों के साथ भारत का कैदियों के प्रत्यर्पण को लेकर द्विपक्षीय समझौता है। इनमें सऊदी अरब, यूएई, क़तर, ईरान, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, बांग्लादेश, बोस्निया, ब्राजील, बुलगारिया, कंबोडिया, मालदीव्स, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, सोमालिया, कज़ाकिस्तान, उज़बेकिस्तान, एजिप्ट, हॉगकॉग, यूके वियतनाम, श्रीलंका, थाईलैंड शामिल हैं। लेकिन, प्रक्रिया में वक्त लगता है क्योंकि TSP समझौते के तहत मेजबान देश और मूल देश के बीच सहमति जरूरी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने कहा है, “भारत ने सजायाफ्ता व्यक्तियों के स्थानांतरण पर दो बहुपक्षीय सम्मेलनों पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इसका अर्थ है कि इंटर-अमेरिकन सम्मेलन और सजायाफ्ता व्यक्तियों के स्थानांतरण पर यूरोप परिषद सम्मेलन के आधार पर सदस्य राज्यों और अन्य देशों के सजायाफ्ता व्यक्ति अपनी सजा की शेष अवधि पूरी करने के लिए अपने मूल देशों में स्थानांतरण की माँग कर सकते हैं।”

कैदियों को दी जा रही निःशुल्क कानूनी सहायता

रिपोर्ट में कहा गया है, “भारतीय कैदियों को वापस लाने में मिल रहा ‘कम सक्सेस रेट’ के कारण हमें इन प्रयासों की समीक्षा करनी होगी।” हालाँकि, मंत्रालय ने जानकारी दी है कि कई विचाराधीन कैदियों की मदद भारतीय काउंसलर कर रहे हैं। कैदियों को जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए कैदियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
विदेशी जेलों में बंद कैदियों की बड़ी संख्या को ध्यान में रखते हुए, समिति ने कहा कि वह चाहती है कि सरकार समझौतों और सम्मेलनों को लागू करने में आ रहीं बाधाओं का अध्ययन करे और यदि जरूरी हो, तो कैदियों के सुगम प्रत्यर्पण की सुविधा के लिए मौजूदा समझौतों में संशोधन करे या नए समझौते बनाए। पैनल ने कैदियों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को आसान बनाने और विदेशी जेलों में भारतीय नागरिकों के साथ अच्छा व्यवहार हो इसके लिए उन देशों के साथ ‘कूटनीतिक प्रयास’ करने पर जोर दिया।
रिपोर्ट में अवैध तरीके से रह रहे भारतीय नागरिकों को अमेरिका द्वारा निकाले जाने का भी उल्लेख किया गया है। समिति का कहना है कि अमेरिका से लौटे इन भारतीयों को फिर से बसाने की जिम्मेदारी उन राज्य सरकारों की है जहाँ से ये लोग आते हैं। 

उत्तर प्रदेश : कहाँ है "सिर तन से जुदा' फिरकापरस्त गैंग? कुरान फाड़ने वाला मुसलमान इसलिए चुप है? नजीम ने खुलेआम कुरान फाड़ कर हवा में उड़ाए पन्ने, पुलिस ने उपद्रवी मुस्लिम भीड़ को खदेड़ा: आरोपित हिरासत में

                  शाहजहाँपुर में कुरान फाड़ने की घटना (प्रतीकात्मक फोटो साभार: Islam Online)
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद कस्बे में गुरुवार (3 अप्रैल, 2025) रात कुरान के पन्ने फाड़ने की घटना सामने आई। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित युवक को हिरासत में ले लिया है। घटना जलालाबाद थाना क्षेत्र में तहसील रोड पर हुई, जो थाना परिसर से मात्र 50 मीटर की दूरी पर है।

गुरुवार रात करीब 9 बजे कुछ स्थानीय मुस्लिमों ने कुरान के कुछ पन्ने फटे हुए देखे, जिसके बाद क्षेत्र में हंगामा मच गया। देखते ही देखते घटनास्थल पर हजारों मुस्लिमों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेश द्विवेदी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। इसके बाद उन्होंने आक्रोशित मुस्लिम भीड़ को शांत करने का प्रयास किया। बार-बार चेताने के बाद भी शांत न होने पर पुलिस ने उन्हें लाठियाँ भाँजकर खदेड़ा और हालात को नियंत्रित किया।

अगर यही घिनौनी हरकत किसी हिन्दू ने की होती "सिर तन से जुदा" गैंग और इसके समर्थक सड़क पर उतर चुका होता। जो साबित करता है कि इस गैंग का काम साम्प्रदायिकता और देश का माहौल ख़राब करना है। मजे की बात सारा मीडिया भी नशे में टुल पड़ा है। अगर किसी हिन्दू ने ये घ्रणित काम किया होता तब देखते सारा मीडिया और कोर्ट कितना शोर मचा रहे होते।    

सीसीटीवी फुटेज से आरोपित की पहचान

पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जाँच की, जिसमें एक युवक कुरान के पन्नों को हवा में उड़ाता हुआ नजर आया। फुटेज के आधार पर आरोपित की पहचान नजीम के रूप में हुई, जो जलालाबाद कस्बे का ही निवासी है। पुलिस ने आरोपित को रात में ही हिरासत में ले लिया।

पुलिस का बयान

एसपी राजेश द्विवेदी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, “घटना के तुरंत बाद पुलिस ने मौके पर पहुँचकर भीड़ को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। सीसीटीवी फुटेज की जाँच में आरोपित की पहचान हुई, जिसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।”

आरोपित की मानसिक स्थिति पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपित नजीम मानसिक रूप से अस्वस्थ है। हालाँकि, पुलिस इस दावे की सत्यता की जाँच कर रही है। एसपी द्विवेदी ने बताया कि इलाके में शांति बनी हुई है और पुलिस हर स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है।

माहौल शांत, पुलिस सतर्क

घटना के बाद से इलाके में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन की अपील है कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। पुलिस इस मामले में आगे की जाँच कर रही है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विदेश में भी कुरान के साथ छेड़छाड़ की घटनाएँ होती रही रही है। स्वीडन में कुरान जलाने वाले इराकी व्यक्ति सलवान मोमिका की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

पत्थरों से भरी ट्रॉली, तेज धार हथियार, खास (हिंदुओं के) घर-दुकान निशाना: CM फडणवीस ने नागपुर हिंसा को बताया ‘साजिश’, कहा- पहले से थी तैयारी, DCP पर कुल्हाड़ी से हुआ हमला

भारत में जब कभी कहीं भी हिन्दू-मुस्लिम दंगा होने पर इनके आकाओं द्वारा 'गंगा-जमुनी तहजीब' जैसे ढोंगी फरेबी नारे लगाने वाले दंगाइयों को बाहरी कहकर बचने की कोशिश करते है। लेकिन कभी इनसे यह नहीं पूछा जाता कि आखिर किस के कहने पर बाहरी आए? इनको पत्थर और पेट्रोल बम किसने दिए? इन बाहरी दंगाइयों को कितने रूपए देकर बुलाया गया? अगर दंगाई बाहरी थे फिर स्थानीय लोगों ने उनको क्यों पनाह दी? अपने घरों पर पत्थर और पेट्रोल बम जमा किए? दंगाई बाहरी लोग थे या स्थानीय इसका खुलासा तभी होगा जब सरकार पुलिस को blind firing का आदेश देकर भेजे। blind firing पर जख्मी होने वालों से इस सच्चाई का खुलासा होगा कि दंगाई बाहरी है या स्थानीय। 

दूसरे, जिन घरों से पत्थर और पेट्रोल बम फेंके गए योगी आदित्यनाथ की तरह उन घरों पर बुलडोज़र चलाना चाहिए। और अगर कोई कोर्ट रोक लगाती है तो उसी समय कोर्ट से पूछा जाना चाहिए कि क्या दंगाइयों को ऐसे ही छोड़ दिया जाये? नकाब पहनकर दंगा करना क्या उचित है? अगर पुलिस को blind firing देकर दंगा-ग्रस्त इलाके में भेजा जाता DCP पर कुल्हाड़ी से हमला नहीं होता। पुलिस वालों के भी परिवार होता है। भेज दिया जाता है हाथ में डंडा लेकर जैसे ढोल पीटना हो। बहुत हुआ तो टियर गैस दे दी। जहाँ पेट्रोल बमों का इस्तेमाल हो रहा हो नकाब पहन पत्थरबाज़ी हो रही हो, वहां इस पुरानी सोंच को दरकिनार करना होगा।            
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में हुई हिंसा को एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। महाराष्ट्र की विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि नागुपर की हिंसा सुनियोजित थी और इसे अंजाम देने के लिए पहले से तैयारी की गई थी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि हिंसा में 33 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें तीन डीसीपी शामिल हैं। एक डीसीपी पर तो कुल्हाड़ी से हमला किया गया, जो इसकी गंभीरता दिखाता है। पाँच आम नागरिक भी घायल हुए, जिनमें से तीन को अस्पताल से छुट्टी मिल गई, लेकिन एक अभी भी आईसीयू में है। उन्होंने खुलासा किया कि हिंसा वाली जगह से पत्थरों से भरी एक ट्रॉली मिली और तेज धार वाले हथियारों का इस्तेमाल हुआ। कुछ खास (हिंदुओं) घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया, जिससे साफ है कि यह सब पहले से प्लान था।

सीएम फडणवीस ने सख्त लहजे में कहा कि पुलिस पर हमला बर्दाश्त नहीं होगा और दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। अब तक पाँच एफआईआर दर्ज की गई हैं और 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है। नागपुर के 11 पुलिस थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। उन्होंने हिंसा की वजह औरंगजेब की कब्र को लेकर फैली अफवाह को बताया, जिसमें कहा गया कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने धार्मिक चीजें जलाईं। सीएम ने कहा, “छावा फिल्म ने औरंगजेब के खिलाफ गुस्सा भड़काया, लेकिन शांति बनाए रखना जरूरी है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि कानून हाथ में न लें और पुलिस का साथ दें। जाँच जारी है ताकि इस साजिश का पूरा पर्दाफाश हो सके।

इस मामले में बीजेपी विधायक प्रवीण डटके ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि नागपुर में हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए यह हिंसा प्लान की गई थी। डटके ने हंसापुरी इलाके का जिक्र करते हुए बताया कि वहाँ की एक पार्किंग में हमेशा हिंदू और मुस्लिम अपनी गाड़ियाँ खड़ी करते थे, लेकिन 17 मार्च 2025 को एक भी मुस्लिम की गाड़ी नहीं थी। फिर उस पार्किंग में आग लगा दी गई। उन्होंने कहा, “जिन गाड़ियों, दुकानों और घरों को जलाया गया, वे सभी हिंदुओं के थे। मुस्लिमों का कोई नुकसान नहीं हुआ।” डटके ने इसे सुनियोजित साजिश बताया और कहा कि बाहरी लोग आए थे, जिन्होंने सीसीटीवी तोड़े ताकि सबूत मिट जाएँ। उनका दावा है कि यह हिंदुओं के खिलाफ टारगेटेड हमला था।

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नकाबपोश उपद्रवियों पर blind firing से क्यों डरती है सरकार? 1000+ की भीड़, हाथों में हथियार, चेहरे ढके हुए… क
नकाबपोश उपद्रवियों पर blind firing से क्यों डरती है सरकार? 1000+ की भीड़, हाथों में हथियार, चेहरे ढके हुए… क
 

सोमवार (17 मार्च 2025) को नागपुर के कुछ इलाकों में मुस्लिमों ने हिंदुओं को निशाना बनाकर हमले किए। हिंदुओं के घरों पर पत्थरबाजी हुई। तलवार से हमले हुए, पेट्रोल बम की सहायता से गाड़ियाँ फूँकी गई और गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की गई। इस दौरान पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने पूरे इलाके में कर्फ्यू लागू कर दिया। कुछ समय तक इलाके में इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया गया था, हालाँकि कुछ ही घंटों में इंटरनेट सेवाएँ बहाल कर दी गईँ।

अमेरिका में 15 लोगों की हत्या… कुरान पर वीडियो, ‘मस्जिद बिलाल’ से कनेक्शन: शमसुद-दीन जब्बार ने ‘इंतिफादा(तख्ता पलट) क्रांति’ के 1 घंटे बाद ऐसे किया आतंकी हमला

                                     जब्बार, उसका घर और मस्जिद बिलाल (दाएँ) (साभार: NYP)
अमेरिका के लुइसियाना राज्य के न्यू ऑरलियंस शहर में गाड़ी से रौंद और फायरिंग करके 15 लोगों की हत्या करने वाले शमसुद दीन (शम्सुद्दीन) जब्बार को लेकर कई तथ्य सामने आए हैं। जब्बार ने यह आतंकी हमला टाइम्स स्क्वायर पर इजरायल विरोधी प्रदर्शनकारियों द्वारा ‘इंतिफादा क्रांति’ का आह्वान करने के एक घंटा बाद किया। आतंकी जब्बार का संबंध उसके पड़ोसी ‘मस्जिद बिलाल’ से भी बताया जा रहा है।

 जब्बार ह्यूस्टन के बाहरी इलाके में एक गंदे ट्रेलर पार्क में रहता था, जहाँ ज़्यादातर मुस्लिम अप्रवासी रहते हैं। जब्बार ने अपने घर में बत्तख, मुर्गे-मुर्गियाँ और भेड़ें पाल रखी थीं और हमले के बाद जब मीडिया उसके घर के पास पहुँचे तो ये जीव वहाँ खुलेआम घूम रहे थे। जब्बार का स्थानीय मस्जिद ‘मस्जिद बिलाल’ से कुछ ही दूरी पर रहता था।

आतंकी हमले के बाद मस्जिद बिलाल के लोगों के मीडिया और एजेंसियों ने संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वहाँ किसी ने जवाब नहीं दिया। खुद को आतंकवाद विशेषज्ञ एवं पूर्व मुस्लिम बताने वाले ब्रदर रैचिड (ब्रदर राशिद नाम से X हैंडल) ने अपने सोशल मीडिया पर कहा कि जब्बार ने आतंकी हमले से पहले इस मस्जिद में गया था।

जब्बार ने अपने पोस्ट में कहा, “पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने, अधिकारियों के साथ सहयोग करने या अपनी शिक्षाओं के बारे में मीडिया को पारदर्शिता के साथ संबोधित करने के बजाय, उनका (मस्जिद बिलाल से जुड़े लोगों का) प्राथमिक ध्यान मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा पर था (सभी अमेरिकियों की सुरक्षा पर नहीं)। उन्होंने (मस्जिद के अधिकारियों ने) अपने सदस्यों को सलाह दी कि वे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन CAIR (The Council on American-Islamic Relations) से परामर्श किए बिना मीडिया से बात न करें या एफबीआई के साथ सहयोग न करें।”

ब्रदर राशिद नाम के हैंडल ने अपने पोस्ट के साथ एक नोट साझा किया है। इसमें लिखा है, “अस्सल्लाम वलैकुम भाइयों एवं बहनों। मुझे विश्वास है कि आप लोगों में से बहुत से लोगों ने न्यू ऑरलियंस में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में सुना होगा, जिसे FBI ने आतंकी हमला करार दिया है। हमें अपने आसपास को लेकर चौकन्ना रहना होगा। हमारे समुदाय की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। अगर मीडिया द्वारा किसी को संपर्क किया जाए तो आप लोग उनका जवाब ना दें। अगर FBI द्वारा संपर्क किया जाए और जवाब देना जरूरी हो तो उन्हें CAIR या ISGH भेज दें।”

फिलिस्तानियों के ‘इंतिफादा क्रांति’ वाले प्रदर्शन के घंटे भर बाद आतंकी हमला

यह हमला न्यू ईयर सेलिब्रेशन के दौरान जब्बार नाम के आतंकी द्वारा किया गया है। वह ह्यूस्टन का रहने वाला था और अमेरिकी सेना में भी रह चुका था। हाल फिलहाल में वह कुरान का संदर्भ देते हुए कई वीडियो भी बनाए थे। इन्हें अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों ने हासिल किया है और उसकी पर्याप्त जाँच कर रही है। उसकी गाड़ी से ISIS के झंडे भी मिले हैं।
दरअसल, नए साल के आगमन पर दुनिया के भर लोग पार्टी कर रहे थे। वहीं, टाइम्स स्क्वॉयर पर सैकड़ों फिलिस्तीन एवं आतंकी संगठन हमास समर्थक प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। वे इजरायल के विरोध में फिलिस्तीनी झंडे लहराते हुए ‘इंतिफादा क्रांति’ का आह्वान कर थे। इस घटना के एक घंटे के अंदर न्यू ऑरलियन्स के फ्रेंच क्वार्टर में एक आतंकी हमला कर दिया गया।
सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में दिख रहा है कि बुर्का या हिजाब पहनी एक महिला प्रदर्शनकारी ने बाहर मौजूद प्रदर्शनकारियों पर चिल्लाते हुए कहा, “हम तुम्हें वापस यूरोप भेज रहे हैं, तुम गोरे कमीने। वापस यूरोप जाओ! वापस यूरोप जाओ।” एक अन्य कहता है, “2024 यहूदियों के अपराधों के विरुद्ध संघर्ष का वर्ष था। हम पूर्ण मुक्ति तक यहाँ साल दर साल आएँगे।”
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘इज़राइल को दी जाने वाली सभी अमेरिकी सहायता बंद करो’, ‘यहूदीवाद को खत्म करो’ और ‘ईरान पर कोई युद्ध नहीं’ जैसे संदेशों वाले पोस्टर ले रखे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारी भीड़ ने ‘इंतिफादा क्रांति’ का नारा लगाया। इसके साथ हीयह भी कहा, “हम अपने सभी शहीदों का सम्मान करेंगे।” उसके एक घंटे बाद न्यू ऑरलियंस की यह घटना हो गई।
                                  टाइम स्क्वायर पर फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारी (साभार: NYP)
यह विरोध प्रदर्शन फिलिस्तीनी युवा आंदोलन ‘सोशलिज्म एंड लिबरेशन पार्टी एंड पीपुल्स फोरम’ द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में इंतिफादा क्रांति के नारे लग रहे थे। प्रदर्शनकारी चिल्ला रहे थे, ‘सिर्फ एक ही समाधान है: इंतिफादा क्रांति’। ‘इंतिफादा’ शब्द फिलिस्तीन के आतंकी हमास से नहीं, बल्कि कई मुस्लिमों की गैर-मुस्लिमों के शासन के खिलाफ बगावत से जुड़ा है।
इंतिफादा एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है बगावत या विद्रोह। इंतिफादा शब्द का सबसे ज्यादा इस्तेमाल ‘तख्तापलट’ जैसे कामों में मिडिल-ईस्ट से लेकर उत्तरी-पश्चिमी अफ्रीकन देशों में हुआ है और पिछले कुछ दशकों से इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध में इसे ‘इजरायल’ के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। इजरायल के खिलाफ ‘इंतिफादा’ का ऐलान किया जाता है।
एक तरफ इसे प्रतिरोध  बताया जाता है, तो दूसरी तरफ कायराना हमले भी इजरायल पर किए जाते हैं। इस समय हमास-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध को पाँचवाँ इंतिफादा भी कहा जा रहा है। इजरायल-फिलिस्तीन संकट के संदर्भ में इसे धर्मयुद्ध से भी जोड़ सकते हैं। एक तरफ यहूदी इजरायल का विरोध कर रहे मुस्लिम फिलिस्तीनी और अरबी हैं, तो दूसरी तरफ उन्हें समर्थन दे रहे मुस्लिम देश।

41 दंगाई गिरफ्तार, 450 पत्थरबाजों की हुई पहचान… नकली पत्रकार असीम रज़ा की भी खुली कलई: संभल के उपद्रवियों को ‘नकाब’ भी बचा नहीं पा रहा

    संभल में अब तक 41 दंगाई गिरफ्तार करने के साथ पुलिस ने चिन्हित किए 450 उपद्रवी (चित्र साभार- अमर उजाला)
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 24 नवंबर, 2024 को हुई हिंसा के बाद पुलिस ने दंगाइयों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने इस कार्रवाई में 41 दंगाई गिरफ्तार किए गए है। पुलिस ने लगभग 450 पत्थरबाजों को CCTV फुटेज व अन्य माध्यमों से चिन्हित किया है। इनकी तलाश जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभल पुलिस ने 50 और उपद्रवियों की पहचान कर ली है। अब तक 450 ऐसे ही उपद्रवियों की पहचान हो चुकी है। इनमें से 100 के नाम भी पुलिस को पता चल गए हैं। संभल में हिंसा करने वाले दंगाइयों की पहचान में इसलिए भी समय लग रहा है क्योंकि उन्होंने हमले के वक्त नकाब पहन रखा था। संभल हिंसा मामले में हाल ही में एक पत्रकार को भी गिरफ्तार किया था। उसके बारे में भी कई जानकारियाँ सामने आई हैं।

पहले दी पुलिस को धमकी, फिर माफ़ी

संभल पुलिस ने 6 दिसंबर, 2024 को एक फर्जी पत्रकार असीम रज़ा जैदी को गिरफ्तार किया था। असीम जैदी हिंसा के बाद भड़काऊ वीडियो शेयर कर रहा था। उसने मुस्लिमों को इकट्ठा किया था और उन्हें उकसा रहा था। इस संबंध में सूचना संभल पुलिस को दी गई थी।
उसको रोकने के लिए जब पुलिस पहुँची तो वह धमकाने पर उतर आया। उसने सब इंस्पेक्टर संजीव को तक धमकी दे डाली। असीम जैदी ने सब इंस्पेक्टर जैदी से कहा, “मुझे जानते नहीं हो। मैं पत्रकार हूँ। अपनी एक खबर से तुमको बर्खास्त करवा दूँगा।” असीम ने ऊपर के अधिकारियों से भी दारोगा की शिकायत की धौंस दी। इसके बाद असीम को गिरफ्तार कर लिया गया।
असीम के खिलाफ इसके बाद पुलिस ने ही FIR दर्ज की। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिसकर्मियों ने इसके बाद असीम जैदी के दावों का सत्यापन भी करवाया कि आखिर वह कहाँ का पत्रकार है। जब असीम के बताए संस्थान से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह उनका कर्मचारी नहीं है।
पोल-पट्टी खुल जाने के बाद असीम जैदी पुलिस के आगे गिड़गिड़ा कर माफ़ी माँगने लगा। उसने यह भी माना कि वह पत्रकारिता के नाम पर फर्जीवाड़ा कर धंधा चला रहा था। असीम रजा के ऊपर अब फर्जीवाड़े समेत बाकी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

संवेदनशील इलाकों में हो रही घरों की तलाशी

संभल हिंसा के बाद पुलिस सतर्क को गई है। पुलिस की टीमें संवेदनशील मोहल्ले में चिन्हित किए गए घरों की तलाशी ले रहीं हैं। इसी तलाशी के दौरान सोमवार (10 दिसम्बर, 2024) को कई घरों से नशे की खेप और अवैध हथियार बरामद हुए थे।
तलाशी का यह अभियान नखासा के उस इलाके में चलाया गया था जहाँ सांसद जियाउर्रहमान बर्क का घर है। इसी कार्रवाई में मुल्ला आसिफ, महबर और ताजवर के परिजनों को पूछताछ के लिए थाने में तलब किया गया था। गौरतलब है कि 24 नवंबर को कोर्ट के आदेश पर जामा मस्जिद का सर्वे करने पहुँची टीम पर अल्लाह हू अकबर चिल्लाती मुस्लिम भीड़ ने हमला बोल दिया था। इस हमले में लगभग 2 दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों में डिप्टी कलेक्टर और DSP भी शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश : समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क के मोहल्ले में संभल पुलिस की रेड, महबर और ताजवर के घर से मिले तमंचे: मुल्ला के घर से स्मैक बरामद

संभल में हिंसा के बाद पुलिस की छापेमारी में घरों से बरामद हुए अवैध हथियार और नशीले पदार्थ (साभार- दैनिक भास्कर)
संभल में 24 नवंबर 2024 को मुस्लिमों की भीड़ द्वारा पुलिस पर किए गए हमले के बाद दंगाइयों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई जारी है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने सोमवार (9 दिसंबर) को सांसद जियाउर्रहमान के मोहल्ले में दबिश दी। दबिश के दौरान अवैध हथियारों के साथ नशीले पदार्थों की भी खेप बरामद हुई है। इस दौरान 36 बाइकों का चालान किया गया और 4 को सीज कर दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभल हिंसा में कार्रवाई के तहत पुलिस ने नखासा थाना क्षेत्र के तिमरदास सराय इलाके में सोमवार को करीब 3 बजे छापेमारी की। इस दौरान 13 घरों की सघन तलाशी ली गई। इनमें से मुल्ला आसिफ के घर से स्मैक की 93 पुड़िया बरामद हुईं। वहीं, ताजवर और महबर के घरों से 315 बोर के तमंचे बरामद किए गए। पुलिस ने महबर को हिरासत में लिया, जो 1999 में हत्या के एक मामले में जेल की सजा काट चुका है।

पुलिस का दावा है कि 315 बोर की गोलियाँ हिंसा के दौरान मारे गए उपद्रवियों के शवों से भी बरामद हुई थीं। फ़िलहाल महबर, मुल्ला आसिफ और ताजवर के घरों में मिले लोगों को पुलिस थाने ले कर गई। पूरे मामले की न्यायिक जाँच जारी है, और प्रशासन दंगाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कह रहा है।

सपा सांसद जियाउर्रहमान के घर के आगे भी पुलिस ने दो बार पैदल मार्च किया। जिले भर में वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है। सोमवार को ही कुल 36 बाइकों का चालान किया गया। इसमें से 4 को सीज कर दिया गया है।

संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि तलाशी अभियान जनपद में बाहरी लोगों की मौजूदगी की सूचना पर चलाया जा रहा है। बाहर से कौन लोग किस वजह से आए हैं इसकी तस्दीक करवाई जा रही है। बकौल SP तलाशी अभियान आगे भी जारी रहेगा। बरामद सामान सील कर जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

24 नवंबर को संभल की जामा मस्जिद का सर्वे करने के लिए न्यायालय के आदेश पर एक टीम पहुँची थी। इस टीम को मुस्लिम भीड़ घेरने लगी। पुलिस ने भीड़ को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन उपद्रवियों ने पत्थरबाजी कर दी। हिंसा में डिप्टी कलेक्टर, DSP और लगभग 2 दर्जन अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने बल प्रयोग कर के भीड़ को तितर-बितर किया था। पूरे मामले की न्यायिक जाँच जारी है।

जिस जगह पर भगवान राम ने की महादेव की पूजा, वहाँ मंदिर के पास खड़ी कर दी मस्जिद-मजार

                                      बांदा का अवैध मस्जिद (साभार: भारतवर्ष/आजतक)
उत्तर प्रदेश के बाँदा में जिस जगह पर भगवान राम ने भगवान शंकर को जलाभिषेक की थी, वहाँ अवैध रूप से एक मस्जिद बना दी गई है। इसको लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने विरोध प्रदर्शन किया है और उस अवैध मस्जिद को गिराने की माँग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। बाम्बेश्वर पर्वत पर स्थित उस शिवलिंग को बमदेव भोलेनाथ की मंदिर के नाम से जाना जाता है।

विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का आरोप है कि कोरोना काल के जब हर तरफ लॉकडाउन था, उस दौरान इस पर्वत पर मुस्लिमों ने चुपके से एवं अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण कर लिया था। VHP के मंडल अध्यक्ष अशोक ने कहा कि वहाँ पर आधा दर्जन मजारें भी बना ली गई हैं। पहाड़ पर रोज फतिहा और हर शुक्रवार को जुमे की नमाज पढ़ी जाती है।

हिंदू संगठनों का आरोप है कि इस जगह पर कोई मुस्लिम बस्ती नहीं थी, लेकिन अब काफी तादाद में यहाँ मुस्लिम हने लगे हैं। इससे सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में मस्जिद और अवैध ढाँचों को गिराने के लिए विश्व हिंदू परिषद के अधिकारियों ने जिला कलेक्टर और पुलिस कप्तान के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।

पत्र में कहा गया है कि इस्लाम धर्म के लोग भारत का इस्लामीकरण करा रहे हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर सरकार ने इसे नहीं हटाया तो वे इस मस्जिद को गिरा देंगे। हिंदू संगठनों की माँग है कि अवैध मस्जिद एवं मकबरे का बनाने वालों को तत्काल जेल में डाला जाना चाहिए और अवैध ढाँचों एवं उसे बनाने वालों के मकानों पर बुलडोज़र चलना चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद के चंद्रमोहन बेदी ने कहा कि यह पर्वत बहुत पुराना है। यहाँ पर पीछे की तरफ कुछ लोगों ने अवैध रूप से मजार बनाई और फिर उसे धीरे-धीरे मस्जिद में बदल दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को अंधविश्वास में डाल दिया और जगह हथिया ली। उन्होंने पूछा कि जब सतह पर पत्थर ही पत्थर हैं तो मजार कैसे बन सकती है। मजार बनाने के लिए खुदाई होती है, लेकिन पत्थर पर खुदाई कैसे होगी।

VHP के महामंत्री दीपू दीक्षित ने बताया कि शुरू में मुस्लिमों ने पर्वत के एक पत्थर को हरे रंग से पोता फिर धीरे-धीरे इस पर मजार बनाई। फिर इस पर एक बड़ी मस्जिद बना दी। इसके बाद काफी लोग यहाँ टोपी लगाकर आना शुरू हो गए। दीपू ने कहा कि यह एक कैंसर का रूप है। इसे तत्काल जड़ से काटकर फेंक देना चाहिए, वरना यह पूरे शरीर को खराब कर देगा।

बाम्बेश्वर पर्वत पर बने प्राचीन मन्दिर के पुजारी पुत्तन महाराज ने और मंदिर कमिटी के अध्यक्ष ने भी मस्जिद का विरोध किया है। उनका कहना है यह यह स्थिति अयोध्या और काशी मथुरा जैसी बन सकती है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान यहाँ के शिवलिंग पर जलाभिषेक किया था। इस दौरान भगवान शंकर ने उन्हें दर्शन दिया था।

गुजरात : सूरत में ‘साधु’ बन भीख माँग रहा था सलमान एंड गैंग; पूछे संस्कृत के श्लोक तो देने लगे दुआ, बताया हिन्दुओं के सिर्फ एक भगवान का नाम

        भगवा वस्त्र में साधु वेश बना कर हिन्दुओं से भीख माँग रहा था सलमान (चित्र साभार- वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)
गुजरात के सूरत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कुछ लोग भगवा वस्त्र पहनकर साधु वेश में भीख माँगते दिखाई दे रहे हैं। इन तीनों से वीडियो में कुछ लोग बहस कर रहे हैं। इन लोगों का आरोप है कि वो सभी हिन्दू साधु नहीं, बल्कि मुस्लिम हैं। ये सभी न तो ठीक से हिन्दू देवताओं का नाम बता सके और न ही किसी शास्त्र से कोई श्लोक सुना पाए।

यह वीडियो 43 सेकेंड का है, जो शनिवार (2 नवंबर 2024) को शेयर हुआ। वीडियो में दिख रहे तीनों भगवाधारियों ने लम्बी दाढ़ी रखी है। माथे पर त्रिपुण्ड लगा रखा है। वीडियो बना रहे व्यक्ति ने इन लोगों से श्लोक बोलने के लिए कहा तो जवाब मिला, “दुआ है हमारा दुआ।” जब सामने वाले ने पूछा कि उन्हें कितने भगवान के नाम आते हैं तो उन्होंने सिर्फ भोलेनाथ का नाम बताया।

वीडियो बना रहे व्यक्ति ने कहा कि क्या एक हिन्दू भगवान का नाम जानकर वो साधु बन गए हैं? तभी तीनों में से एक ने अपनी दाढ़ी पर हाथ फेर कर कहा कि वो खेल करने वाले मदारी हैं। पास खड़े एक व्यक्ति ने इन तीनों को रोहिंग्या बताया तो एक अन्य व्यक्ति ने दावा किया कि उन तीनों में से एक का नाम सलमान है। कुछ ही देर में वहाँ भीड़ जमा हो गई।

भीड़ में से एक अन्य व्यक्ति ने तीनों से कोई श्लोक पूछा पर वो नहीं बता पाए। इनमें से एक व्यक्ति साधुओं में से एक का आईडी कार्ड चेक करता है तो उसका नाम सलमान लिखा मिलता है। वीडियो को शेयर करते हुए ज़ी 24 कलक ने कैप्शन में लिखा, “साधु के वेश में पकड़ा गया सलमान नाथ। सूरत में भीख माँग रहे एक साधु का आईडी कार्ड चेक करते हुए भंडा फूट गया।”

1 नवंबर को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में भी पुलिस ने गेरुआ वेश पहन कर साधु वेश में घूम रहे 3 मुस्लिमों को गिरफ्तार किया था। तब इन तीनों ने खुद को गोरखनाथ मठ से जुड़ा योगी बताया था। जब लोगों ने इनसे गंगाजल पीने को कहा तो इन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। इसके बाद लोगों ने इन्हें पुलिस को सौंप दिया।

अभी कुछ ही दिन पूर्व एक मुस्लिम महिला द्वारा मंदिर में पूजा करने पर कट्टरपंथियों ने कहा कि अगर गलती से की है तो तौबा कर ले। लेकिन साधु बन भीख रहे मुसलमानों पर क्यों चुप्पी साधे हुए हैं? क्या ये कट्टरपंथियों के कहने पर हिन्दू क्षेत्रों की रेकिंग कर रहे थे? पुलिस द्वारा इनसे गहन पूछताछ करनी चाहिए। ये कोई षड़यंत्र जान पड़ता है।     

मदरसों के बाद अब मकतब की बारी, UP ATS खँगाल रही रिकॉर्ड-फंडिंग की जुटा रही जानकारी

        मदरसों के बाद अब ATS के रडार पर UP के सैकड़ों मकतब (चित्र साभार- alwahabfoundation.org)
उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने राज्य में मदरसों की जाँच के बाद अब मकतबों पर भी नज़र डालना शुरू कर दिया है। मौजूदा जानकारी के अनुसार, UP ATS ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के 473 मकतबों की जाँच शुरू की है, जिनमें से कई बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इस बाबत अल्पसंख्यक विभाग से संबंधित दस्तावेज़ और रिकॉर्ड मंगवाए गए हैं।

इन मकतबों में से अधिकांश मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर और शामली जिलों में स्थित हैं, और UP ATS इन संस्थानों की फंडिंग और उनके संचालन के स्रोतों की जाँच कर रही है। मकतब एक प्रकार का स्थान है, जहाँ इस्लामी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मुस्लिम बच्चों को दीनी शिक्षा प्रदान की जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ATS की जाँच में अब तक सबसे अधिक 190 मकतब शामली में पाए गए हैं। इसके बाद मुज़फ्फरनगर में 165 और सहारनपुर में 118 मकतब संचालित हो रहे हैं। जाँच में ATS ने कई बिंदु तय किए हैं, जिनमें मकतबों की मान्यता न होने के कारण, फंडिंग के स्रोत, संचालन का समय, बच्चों की संख्या, सुरक्षा प्रबंध, रजिस्ट्रेशन की स्थिति और संबद्धता के स्रोत प्रमुख हैं। मकतबों की जाँच के लिए ATS ने सहारनपुर मंडल के तीन जिलों के अल्पसंख्यक अधिकारियों से रिकॉर्ड मंगवाए हैं।

शुरुआती जाँच में कई मकतबों में खामियाँ पाई गई हैं, साथ ही उनके वित्तीय लेन-देन में भी संदेहजनक गतिविधियाँ देखी गई हैं। ATS ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है। इससे पहले, उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में मदरसों का व्यापक सर्वेक्षण कराया था, जिसके तहत कई गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद कर दिया गया था।

सहारनपुर मंडल के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में आने वाले गोंडा जिले में भी कई मकतब चलते पाए गए हैं। यहाँ के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने अपने जिले में चल रहे 20 मकतबों को बंद करने की सिफारिश शासन को भेजी है। यहाँ कुल 286 मकतब चलते पाए गए हैं जिसमें 19 गैर मान्यता प्राप्त हैं। मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश ATS मुख्यालय से प्रदेश के हर जिले में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों से मकतबों की जाँच में सहयोग करने के लिए कहा गया है।

                                                                      शासनादेश

क्या होता है मकतब

ऑपइंडिया ने मकतब के बारे में गाजियाबाद के मौलवी अब्दुल सलाम से जानकारी ली। उनके अनुसार, मकतब एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है ‘पढ़ाई-लिखाई का स्थान’। उन्होंने बताया कि मकतब और मदरसे में अंतर है। मदरसे में पढ़ाई के बाद एक औपचारिक डिग्री प्राप्त होती है, जबकि मकतब में ऐसी कोई डिग्री नहीं दी जाती। अब्दुल सलाम ने मकतब को एक तरह का ‘कोचिंग सेंटर’ बताया, जहाँ आस-पास के मुस्लिम बच्चों को दीनी तालीम दी जाती है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 95% मस्जिदों में मकतब चलते हैं।
अब्दुल सलाम ने आगे बताया कि मकतब खासतौर से मुस्लिम बच्चों के लिए होते हैं, जहाँ कुरान और हदीस की तालीम दी जाती है। मकतब संचालित करने वाले मौलवी, मौलाना या हाफिज आमतौर पर कोई शुल्क नहीं लेते, लेकिन कहीं-कहीं मेहनताना के लिए धन इकट्ठा किया जाता है। मौलवी के अनुसार, मकतब में पढ़ने वालों की उम्र सीमा नहीं होती, लेकिन सामान्यतः नाबालिग बच्चे ही इनमें पढ़ते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मकतब इस्लामी जानकारों के घरों में भी संचालित होते हैं।

हरियाणा : मनोहर लाल खट्टर साहब नुहुं में रोहिग्यों ने मदरसा कैसे बना लिया? मुख्यमंत्री रहते तुम और तुम्हारा प्रशासन क्या कर रहा था? जवाब दो ! घुसपैठ कर हरियाणा में बसे ही नहीं हैं रोहिंग्या मुस्लिम, चला रहे मदरसे भी: मौलवी बोले- हम ब्लैक में म्यांमार से आए

रोहिंग्या और नूहं का मदरसा (साभार: ऑर्गेनाइजर वीडियो)
हरियाणा के मुस्लिम बहुत मेवात क्षेत्र के नूहं में बाहर से आए हुए रोहिंग्या मुस्लिमों की एक बड़ी आबादी अवैध रूप से रह रही है। ये सभी म्यामांर से अवैध रूप से भारत में आए और यहाँ से नूहं में स्थापित हो गए। इन अवैध घुसपैठियों के रहने वाले अस्थायी आवास बनाया गया है। ये सभी साल 2016 में ही भारत आ गए थे और तभी से यहाँ रह रहे हैं। इनमें रहने के साथ-साथ मदरसा भी संचालित किया जा रहा है।

दरअसल, ऑर्गनाइजर ने हरियाणा विधानसभा चुनावों के दौरान इन अवैध घुसपैठियों से बात की थी। इसका वीडियो अब जारी किया गया है। ऑर्गेनाइजर की ओर से पत्रकार शुभी विश्वकर्मा ने यहाँ मदरसे में पढ़ाने वाले मौलाना और यहाँ पढ़ने वाले बच्चों से बात की। यहाँ पढ़ाने वाले यूनुस ने कहा कि यहाँ 400 रोहिंग्या रहते हैं। हालाँकि, उनकी जुबानी ये संख्या है, लेकिन वास्तविक संख्या कितनी है, ये किसी को नहीं पता।

ये वही क्षेत्र है, जहाँ से हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरन कॉन्ग्रेस नेता मामन खान से रिकॉर्ड जीत हासिल की है। मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में उन्हें एकतरफा मत मिले। चुनाव प्रचार के दौरान मामन यहाँ के हिंदुओं को धमकाते हुए कहा था कि जिन लोगों ने मुस्लिमों के खिलाफ अन्याय किया है, उन्हें कॉन्ग्रेस की सरकार बनते ही मेवात छोड़ना पड़ेगा। मामन का नाम 2023 के मेवात दंगों में आया था।

नूहं के नांगली गाँव में पत्रकार पहुँचे। यहाँ बाँस आदि से छप्पर के रूप में एक अस्थायी ढाँचा बनाया गया है, जिस पर लिखा है ‘मदरसा इस्लामिया दारूल उलूम इल्यासिया’। ये ढाँचा एक बड़े भूभाग पर बनाया गया है। इसमें नमाजी टोपी पहने हुए बहुत सारे बच्चे और किशोर दिखाई देते हैं। इसमें जियाउर रहमान नाम के एक व्यक्ति है, जो खुद को मौलवी बताता है।

रहमान कहता है कि वह नहूँ में रहता है कि मदरसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए वह गाँव में आता है। रहमान खुद भी म्यामांर (बर्मा) का रहने वाला है। रहमान ने बताया कि साल 2016 से यह मदरसा चल रहा है। यहाँ पढ़ने वाले सारे बच्चे म्यामांर के ही है। मदरसे में ही बच्चों को खाना भी मिलता है। रात में रहते भी हैं। उसने बताया कि यहाँ कभी रेड नहीं पड़ी और ना ही किसी ने पूछा कि वे कहाँ के रहने वाले हैं।

 रहमान ने बताया कि उसे भारत में किसी तरह का खतरा नहीं है, क्योंकि वह यहाँ मेहमान के हिसाब से रह रहा है। बर्मा से आया और व्यक्ति मोहम्मद यूनुस नाम का मिला। उसने बताया कि वह बच्चों को अरबी और अंग्रेजी पढ़ाता है। यूनुस ने बताया कि यहाँ रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों की आबादी लगभग 400 है। यूनुस ने बताया कि भारत में आने के लिए उन सबों के पास कुछ भी नहीं है।

यूनुस ने कहा, “ना हमारे पास पासपोर्ट है, ना वीजा है। हम कैसे-कैसे करके यहाँ आ गए, यह बहुत मुश्किल काम है। हम ब्लैक में आ गए।” ब्लैक से संभवत: यहाँ पैसे देकर अवैध तरीके से घुसपैठ करने से संबंधित है। यूनुस ने बताया कि वह बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए भारत में घुसा। उन्होंने कहा कि वहाँ कुछ लोग उसे मिले, जिन्होंने उसे बॉर्डर पार कराया और वहाँ से वह बंगाल में रहने लगा।

यूनुस ने बताया कि बॉर्डर पार कराने वालों ने कुछ लोगों से पैसा भी लिया और कुछ लोगों को बिना पैसे का ही बॉर्डर पार करा दिया। यूनुस ने बताया कि वह उसके साथ अधिकांश लोग म्यामांर में लड़ाई शुरू होने के बाद 2016 में भारत में आए। उसका कहना है कि कुछ लोग तो भारत में साल 2012 में ही आ गए थे और तभी वे यहाँ रह रहे हैं। यूनुस का दावा है कि उसके पास UN का रिफ्यूजी कार्ड है।

हालाँकि, जब पत्रकारों ने उससे रिफ्यूजी कार्ड दिखाने के लिए कहा तो वह बोला कि वह घर पर है और घर कहीं और है। यूनुस ने बताया कि इलाके में कुछ भी होता है तो उसे खबर कर दिया जाता है कि घर से बाहर नहीं निकलना है। यूनुस ने बताया कि म्यामांर से भागे हुए रोहिंग्या हैदाराबाद, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा में रह रहे हैं।

इस मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों से जब पूछा गया कि वे पढ़ाई करके क्या करेंगे तो 99 प्रतिशत ने कहा कि वे हाफिज बनेंगे और अल्लाह की सेवा करेंगे। इन बच्चों को जाकिर नाईक के बारे में अच्छे से पता है। लगभग 12 साल के एक बच्चे ने कहा कि जाकिर नाईक इसलिए अच्छा लगता है, क्योंकि वह लोगों को दीन (इस्लाम) के रास्ते पर लाता है। यानी लोगों का इस्लाम में धर्मांतरण कराता है।

किशोर ने कहा कि जो अल्लाह को नहीं मानता है कि वह दोजख की आग में जलेगा। एक छोटे से बच्चे ने कलमा पढ़ कर सुनाया और कहा कि इसका मतलब है कि अल्लाह के सिवा और कोई भगवान नहीं है। यही बात एक किशोर ने भी कहा है। हालाँकि, बच्चे हर शब्द बोलने से पहले अपने मौलवी या हाफिज की तरफ देख रहे थे। जाहिर है कि वो काफी सोचकर बोल रहे थे।

दरअसल, इस मदरसे में पढ़ाने वाले यूनुस ने दावा किया कि रोहिंग्या मुस्लिम UN के रिफ्यूजी कार्ड पर भारत में आकर रह रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ वह कह रहा है कि बांग्लादेश सीमा के जरिए पैसे देकर कुछ लोगों की सहायता से भारत में घुसा था। इस तरह की विरोधाभासी बातें संदेह पैदा करती है। अगर यूनुस स्वयं स्वीकार करता है कि यहाँ 400 रोहिंग्या रहते हैं तो वास्तविक संख्या कितनी होगी, इसकी सही जानकारी शायद ही किसी को होगी।


मुस्लिमों में इतनी जातियां और भेदभाव पर कांग्रेस का मुँह सिल जाता है: PM मोदी का ‘वोट बैंक’ की राजनीति पर प्रहार, कहा- हिंदू जितना बँटेगा उनका उतना होगा फायदा

चलो देर आए दुरुस्त आए, पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुसलमानों में जातियों पर बात कही। जबसे से कुछ हिन्दू विरोधी कुछ मन्दिरों में महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबन्ध के विरुद्ध प्रवेश कर उस प्रथा को तोड़ने का असफल प्रयास कर रही थी, तभी से बराबर इस बात को इसी बात को लिखता रहा कि ये जो सनातन विरोधी हिन्दुओं को विभाजित कर रहे हैं मुसलमानों और ईसाईओं में चल रहे भेदभाव पर क्यों नहीं बोलते? टीवी चैनल भी मदारियों की तरह रोज जमावड़ा लगाते हैं, लेकिन अपनी TRP के चक्कर में कभी मुंह नहीं खोलते। हिन्दुओं में अगर जातियां है तो मन्दिर और शमशान एक ही हैं, जबकि इन धर्मों में सब जातियों की अलग मस्जिद, कब्रिस्तान और चर्च हैं। क्यों? भेदभाव कहाँ है हिन्दुओं में या मुसलमानों और ईसाईओं में? इस गंभीर मुद्दे को उठाने की किसी चैनल में हिम्मत नहीं। इसे तो जहाँ से चढ़ावा पहुंचा नहीं लग जाएगा दूसरा राग अलापने। इस महान कार्य को सोशल मीडिया को ही करना होगा।  

दूसरे, हिन्दुओं को विभाजित करने के षड़यंत्र को समझने के लिए हमें इतिहास के कुछ पृष्ठों को खोलना होगा। कांग्रेस और इसके समर्थक पार्टियों से पूछो कि आज़ादी मिलने के बाद 10 वर्षों तक लार्ड मॉउन्टबेटन को क्यों रखा गया था? ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस को मूल मन्त्र दिया था कि 'जब तक हिन्दुओं को विभाजित रखोगे, कुर्सी पर बैठे रहोगे, जिस दिन हिन्दू एक हुआ कुर्सी गयी।' हिन्दुओं को मुसलमानो से कुछ सीखने की जरुरत है, बीजेपी को हराने एकजुट वोट करता है, जबकि हिन्दू जातियों में बंटा होता है। वैसे तो संविधान का पालन कोई पार्टी नहीं कर रही। जब संविधान में सबको बराबर देखने की बात कही गयी है फिर जातियों के लिए सुरक्षित सीटें और उम्मीदवार क्या यह संविधान का अपमान नहीं?                 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (9 अक्टूबर 2024) को महाराष्ट्र में 7600 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश को बाँटने की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों में भी जातियाँ होती हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस के नेता उनकी बातें नहीं करते हैं। वहीं, हिंदुओं की बात आते ही कॉन्ग्रेस उनकी चर्चा जाति से शुरू करती है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोगों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस मुस्लिमों के मन में भय पैदा कर रही है। वह लोगों में डर पैदा करती रही है। अपने वोट बैंक की खातिर वह देश का सांप्रदायिककरण कर रही है। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस का फॉर्मूला साफ है कि मुस्लिमों को डराते रहो, उनको भय दिखाओ, उनको वोट बैंक में कन्वर्ट करो और वोट बैंक को मजबूत करो।

कॉन्ग्रेस पर हिंदुओं को जातियों में बाँटने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “कॉन्ग्रेस की नीति हिंदुओं की एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाने की है। वो जानती है हिंदू जितना बँटेगा, उतना ही उसका फायदा होगा। कॉन्ग्रेस किसी भी तरीके से हिंदू समाज में आग लगाए रखना चाहती है, ताकि वो उस पर राजनीतिक रोटियाँ सेंकती रहे। भारत में जहाँ भी चुनाव होता है, वहाँ कॉन्ग्रेस यही फॉर्मूला अपनाती है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस के एक भी नेता ने आज तक नहीं कहा कि हमारे मुस्लिम भाई-बहनों में कितनी जातियाँ होती हैं। मुस्लिम जातियों की बात आते ही कॉन्ग्रेसी नेता मुँह पर ताला लगाकर बैठ जाते हैं, लेकिन जब भी हिंदू समाज की बात आती है तो कॉन्ग्रेस उनकी चर्चा जाति से ही शुरू करती है।” उन्होंने कहा कि हरियाणा में कॉन्ग्रेस ने सारे हथकंडे अपनाए, लेकिन वह असफल रही।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस भारत के ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ की परंपरा का दमन कर रही है। वह सनातन परंपरा का दमन कर रही है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वो एक गैर-जिम्मेदार दल है। वो अभी भी देश को बाँटने के लिए नए-नए नैरेटिव गढ़ रही है। कॉन्ग्रेस समाज को बाँटने का फॉर्मूला लाती रहती है।

नरेंद्र मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस नफरत फैलाने की सबसे बड़ी फैक्ट्री बनने वाली है। यह गाँधीजी ने आजादी के बाद ही समझ लिया था। इसीलिए गाँधीजी ने कहा था कि कॉन्ग्रेस को खत्म कर देना चाहिए। कॉन्ग्रेस खुद खत्म नहीं हुई, लेकिन आज देश को खत्म करने पर तुली हुई है। इसलिए हमें सावधान रहना है, सतर्क रहना है।”

जम्मू-कश्मीर और हरियाणा चुनावों के नतीजों को लेकर पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस का पूरा इकोसिस्टम, अर्बन नक्सल का पूरा गिरोह जनता को गुमराह करने में जुटा था, लेकिन उसकी सारी साजिशें ध्वस्त हो गईं। इन्होंने दलितों के बीच झूठ फैलाने की कोशिश की, लेकिन दलित समाज ने इनके खतरनाक इरादों को भाँप लिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा के दलितों को एहसास हो गया कि कॉन्ग्रेस उनका आरक्षण छीनकर अपने वोट बैंक को बाँटना चाहती है। किसान आंदोलन को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने किसानों को भड़काया, लेकिन किसानों को पता है कि उन्हें फसलों पर MSP किसने दी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा से दलितों एवं किसानों के कल्याण के लिए काम किया है।

महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भी पीएम मोदी ने जनता को आगाह किया। उन्होंने कहा, “मेरा पक्का विश्वास है कि समाज को तोड़ने की आज जो कोशिश हो रही है, ऐसी हर साजिश को महाराष्ट्र के लोग नाकाम करके रहेंगे। महाराष्ट्र के लोगों को देश के विकास को सर्वोपरि रखते हुए एकजुट होकर बीजेपी महायुति के लिए मतदान करना है।”

प्रधानमंत्री इन विकास परियोजनाओं में महाराष्ट्र को 10 मेडिकल कॉलेज, नागपुर एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण और विस्तार का काम, शिर्डी एयरपोर्ट के लिए एक टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण, इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दो अहम प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इससे पहले केंद्र सरकार ने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया था।