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बंगाल : फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा MLA नौशाद सिद्दीकी ने 'निकाह का झाँसा दे किया सेक्स’

ISF विधायक नौशाद सिद्दीकी
पश्चिम बंगाल के एक विधायक के खिलाफ रेप का मामला दर्ज किया गया है। ये विधायक हैं- नौशाद सिद्दीकी। सिद्दीकी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF MLA Naushad Siddiqui) के राज्य में इकलौते विधायक हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने दक्षिण 24 परगना के भांगड़ सीट से जीत हासिल की थी। वे हुगली जिले के श्रीरामपुर स्थित फुरफुरा शरीफ मजार के पीरजादा भी हैं।

सिद्दीकी पर एक महिला ने निकाह का झाँसा देकर ‘यौन संबंध’ बनाने के आरोप लगाए हैं। कहा है कि डेढ़ साल में विधायक कई बार उसके साथ संबंध बनाए। लेकिन जब उसने शादी की बात की तो वे मुकर गए। इसके बाद विधायक ने अपने लोगों के साथ मिलकर उसे धमकी भी दी। सिद्दीकी पर मामला ऐसे समय में दर्ज कराया गया है, जब पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव होने हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला भांगर विधानसभा के बाउबाजार थाना क्षेत्र का है। पीड़िता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा है कि नौशाद सिद्दकी ने उसे अपने बीबी गांगुली स्ट्रीट इलाके में बने ऑफिस में करीब डेढ़ साल गलत तरीके से रोका। फिर निकाह का वादा करके उसके साथ ‘यौन संबंध’ बनाए। इसके बाद लंबे समय तक उसके साथ शरीरिक संबंध बनाए रखा। लेकिन जब वह शादी करने की बात करने लगी तो नौशाद सिद्दीकी अपनी बात से मुकर गए और उसे दूर करने की कोशिश करने लगे। पीड़िता अपनी जिद्द पर अड़ी रही तो कथित तौर पर सिद्दीकी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उसे डराया-धमकाया।

इसके बाद महिला और उसके भाई ने TMC नेता सब्यसाची दत्ता को पूरे मामले की जानकारी दी। दत्ता ने पीड़िता को लेकर न्यू टाउन पुलिस स्टेशन पहुँचे। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने बयान दर्ज करते हुए आरोपित विधायक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। मामला बाउबाजार थाना क्षेत्र का है। ऐसे में न्यू टाउन पुलिस ने बाउबाजार थाने को महिला द्वारा दर्ज शिकायत की कॉपी भेजी गई। इसके अलावा, डीसी न्यू टाउन से भी बाउ बाजार पुलिस को एक पत्र भेजा गया है।

वहीं, आरोपित विधायक नौशाद सिद्दीकी ने खुद को निर्दोष बताते हुए इस पूरी घटना को अपने खिलाफ साजिश करार दिया है। इस मामले में ऑपइंडिया से बात करते हुए बंगाल BJP के मीडिया पैनलिस्ट आशुतोष झा ने कहा, “नौशाद सिद्दीकी ने गलत किया है तो उसे कड़ी सजा होनी ही चाहिए। लेकिन पीड़िता के साथ TMC नेता के होने से राजनीति की भी बू रही है। ममता बनर्जी ने बंगाल के पुलिस थानों को तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यालय की तरह बना दिया है। यहाँ TMC नेताओं के साथ गए बिना कोई कार्रवाई नहीं होती।”

सेक्स के लिए न करें ‘Quiet Rooms’ का इस्तेमाल : विम्बलडन ने फैंस को चेताया –अंदर से आती अश्लील आवाजें, फिर संतुष्टि और शर्म का भाव लिए निकलते कपल्स…

जंतर मंतर पर बालकृष्ण के विरुद्ध यौन शोषण किए जाने पर हुए टूलकिट के इशारे पर धरने के नाम पर हुए नाटक को सभी ने देखा। लेकिन विम्बलडन टूर्नामेंट के आयोजकों ने फैंस को चेताया है कि वो ‘Quiet Rooms’ का इस्तेमाल सेक्स के लिए न करें। अपने आपमें बहुत कुछ कह अथवा स्पष्ट बात कर रहा है। विम्बलडन ने कहा है कि ‘क्वाइट रूम्स’ को प्रार्थना, ध्यान या फिर ब्रेस्टफीडिंग के लिए बनाया गया है, सेक्स के लिए नहीं। साथ ही कपल्स को चेताया गया है कि ऐसा करने पर कार्रवाई हो सकती है। पिछले साल विम्बलडन टेनिस टूर्नामेंट के दौरान सामने आया था कि कई जोड़ों ने इस जगह का इस्तेमाल रोमांस और सेक्स करने के लिए किया, जिससे अन्य लोगों को खासी परेशानी हुई थी।

‘ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब’ की चीफ एग्जीक्यूटिव सैली बोल्टोन ने कहा कि पवित्र जगहों का इस्तेमाल भी सम्मान के साथ किया जाना चाहिए और कहा कि प्रेयर के लिए जो जगह आरक्षित की गई है वहाँ सेक्स वगैरह न किया जाए। उन्होंने कहा कि ये एक महत्वपूर्ण स्पेस होता है और इस बार ये सुनिश्चित किया जाएगा कि इसका इस्तेमाल सही तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी को अगर प्रार्थना करने की ज़रूरत है तो क्वाइट रूम्स का इस्तेमाल करें।

उन्होंने कहा कि जो माताएँ अपने शिशुओं को स्तन से दूध पिलाना चाहती हैं तो ये जगह उनके लिए भी है। 2022 में लोगों ने कहा था कि उन्होंने क्वाइट रूम्स से अक्सर कपल्स को निकलते देखा था जो संकोच के कारण शर्माए हुए से दीखते थे और उनके चेहरों पर पूर्ण संतुष्टि का भाव रहता था। इन कमरों को बनाए जाने के पीछे कारण ये था कि भीड़ से अलग हट कर लोग इनका सही इस्तेमाल करें, जैसे किसी को धूप से बचना है तो इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

पिछले साल ये भी सामने आया था कि इन कमरों ने रोमांस करते हुए कपल्स की अजीब सी आवाजें आती थीं। इसीलिए, अब अधिकारियों ने चेताया है कि इसका इस्तेमाल रोमांस के लिए न किया जाए। साउथर्न विलेज में इन क्वाइट रूम्स को उपलब्ध कराया गया है। साथ ही विम्बलडन की गाइड में भी बताया गया है कि इनका इस्तेमाल कैसे करना है। किसी को खाली बैठना है, तो भी वो इन कमरों का इस्तेमाल कर सकता है।


‘बच्चों वाले तेल लगा कर सबके सामने सेक्स करते थे Playboy के मालिक, लड़कियाँ बुलाती थी डैडी’

        'Playboy' मैगजीन के संस्थापक ह्यूग हेफनर को लेकर उनकी दो गर्लफ्रेंड्स का बड़ा खुलासा (फाइल फोटो)
मैगजीन ‘Playboy’ के संस्थापक ह्यूग हेफ़नर अमेरिकी मनोरंजन इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम रहे हैं, खासकर फैशन और मॉडलिंग की दुनिया में। उनकी ‘हवेली’ (Mansion) की कहानियाँ 2017 में 91 वर्ष की आयु में उनकी मौत के बाद भी चर्चा का विषय बनी रहती है। उम्र ढलने के बाद भी कई लड़कियों के साथ उनके अफेयर और विलासिता के चर्चा कम नहीं हुए। अपनी मृत्यु से 5 साल पहले उन्होंने तीसरी शादी की थी। अब उनके बारे में नया खुलासा हुआ है।

ह्यूग हेफ़नर के साथ समय व्यतीत करने वाली दो महिलाओं ने बताया है कि वो सेक्स करने के लिए ‘Baby Oil (बच्चों वाले तेल)’ का इस्तेमाल करते थे। 44 वर्षीय होली मैडिसन और 48 वर्षीय ब्रिजेट मरकार्डत ने ये आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इसे Lubricants के रूप में प्रयोग में लाने से संक्रमण का खतरा बना रहता है। 2000 के दशक की शुरुआत में ह्यूग हेफनर की तीन प्रमुख गर्लफ्रेंड्स में ये दोनों शामिल थीं।

उनकी पूर्व गर्लफ्रेंड्स ने कहा कि सेक्स के लिए बच्चों वाले तेल का गुप्तांग पर इस्तेमाल करने को लेकर ह्यूग हेफ़नर की क्या सनक थी, ये समझ से परे है। उन्होंने कहा कि ये काफी घिनौना था। उन्होंने कहा कि उन्हें लुब्रीकेंट के रूप में ये पसंद नहीं था, क्योंकि इससे महिलाओं को इन्फेक्शन हो जाता था। इसके लिए उन्हें डॉक्टर की सलाह भी लेनी पड़ी थी। मैडिसन ने कहा, “मैं उनसे कहती थीं। सिर्फ स्किन तक ही रखो। इसे वहाँ मत डालो।” एक अन्य महिला ने बताया था कि युवतियाँ बेडरूम में ह्यूग हेफ़नर को ‘डैडी’ कहती थीं और कई लोगों के सामने उनसे सेक्स करना पड़ता था।

उन्होंने बताया कि अन्य महिलाओं ने उन्हें बताया था कि ह्यूग हेफ़नर उन्हें पीठ के बल लिटा देते थे और फिर इस तेल का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने कहा कि इसे सोच कर वो आज भी गुस्सा होती हैं और ये उनकी मर्जी के बिना किया जाता था। उन्होंने कहा कि ‘Playboy Mansion’ में रहने वाली लड़कियाँ जल्द से जल्द ह्यूग हेफ़नर के साथ सेक्स की प्रक्रिया को निपटना चाहती थी, जो उनके लिए रूटीन बन गया था। ह्यूग हेफ़नर एक ‘ब्लैक बुक’ में अपने साथ सोई लड़कियों की सूची रखते थे।

‘मुस्लिम महिलाओं के हस्तमैथुन’ से लेकर ‘सेक्स के बाद नहाने’ तक: दारुल उलूम देवबंद के फतवे

इस्लाम में ‘क्या सही है और क्या नहीं’ इसकी जानकारी के लिए दारुल उलूम देवबंद के पास सैंकड़ों मुस्लिम आते हैं। वे अपनी निजी जीवन से संबंधी कुछ सवाल करते हैं और देवबंद से उन्हें जवाब ‘क्या हलाल है क्या हराम’ इसके आधार पर फतवा जारी करके दिया जाता है। इन्हीं सवालों में कई सवाल महिलाओं से जुड़े होते हैं। कुछ प्रश्न हस्तमैथुन पर होते हैं, कुछ सेक्स से जुड़े और कुछ गैर मजहबी औरतों से जुड़े।

ऑपइंडिया दोबारा कुछ चुनिंदा सवालों की सूची आपके लिए देवबंद की साइट दारुलइफ्ता से लेकर आया है। ये सारे सवाल महिलाओं से संबंधी हैं।

गैर-किताबी महिला से निकाह 

दारुलइफ्ता साइट पर जॉर्डन के एक शख्स ने मजहबी सलाह पाने के लिए दारुल उलूम से सवाल किया कि उसने एक जर्मन लड़की से शादी की थी। मगर लड़की न तो इस्लाम और न ईसाइयत और न ही कोई धर्म मानती है। वह मौत के बाद की जिंदगी और हूरों में भी विश्वास नहीं करती। मगर निकाह से पहले उसने ‘ला इला इल्लाह’ बोला है। शौहर ने पूछा कि आखिर उनकी शरिया के अनुसार क्या स्थिति है। वो अपनी बीवी को छोड़ना नहीं चाहता।

एक मजहबी शौहर के सवाल पर दारुल उलूम ने कहा कि अगर उस व्यक्ति की बीवी कोई मजहब नहीं मानती है तो मतलब है कि वो नास्तिक है/काफिर है। उससे साफ पूछा जाना चाहिए कि वो अल्लाह को मानेगी या नहीं और अगर वो मानने से मना करती है तो उससे फौरन दूरी बना ली जानी चाहिए।

वलीमा के कार्ड में दुल्हन का नाम

गैर-मजहबी महिला से जुड़े सवाल के अलावा इस साइट पर कई सवाल मजहबी लड़कियों/महिलाओं को लेकर भी हैं। यहाँ एक व्यक्ति ने सवाल किया हुआ है कि क्या वो अपने वलीमा के कार्ड में अपनी होने वाली बीवी का नाम छपवा सकता है या नहीं। इस सवाल के जवाब में दारुल उलूम देवबंद ने उसे बताया कि होने वाली बीवी का नाम दावत पत्र में नहीं लिखवाना चाहिए।

बैंक में काम करने वाले आदमी के घर निकाह

अगला सवाल है कि क्या उस परिवार से निकाह के ऑफर को स्वीकारा जाना चाहिए जहाँ लड़की के पिता बैंक क्षेत्र में हों। इस प्रश्न के जवाब में दारुल उलूम की ओर से कहा गया कि जो लोग हराम के पैसे कमाते हैं उनमें  नैतिकता की कमी होती है इसलिए ऐसे रिश्तों से बचा जाना चाहिए।

मुस्लिम महिला हस्तमैथुन कर सकती है क्या?

मजहबी शिक्षा से संबंधी साइट पर हस्तमैथुन को लेकर भी सवाल किए गए हैं। पूछा गया है कि क्या शरिया लॉ के अनुसार मुस्लिम लड़की हस्तमैथुन कर सकती है या नहीं। देवबंद ने इस सवाल पर जवाब दिया कि किसी भी मुस्लिम लड़की को ऐसे गुनाह करने से बचना चाहिए।

यौन संबंध के बाद नहाना जरूरी या नहीं?

ये सवाल एक महिला ने किया है। वह पूछती हैं कि अगर कोई शादीशुदा महिला सिर्फ संतुष्टि के लिए उंगली से स्पर्श करवाती है और कोई तरल पदार्थ बाहर नहीं निकलता तो क्या नहाना या खुद को साफ करना जरूरी है या नहीं। इसके जवाब में उसे बताया गया कि अगर खातून बिना किसी वासना के अपनी योनि में उंगली डालती है और उसे कुछ महसूस नहीं होता तो नहाना आवश्यक नहीं है। मगर ये काम अगर शौहर ने किया हो तो नहाना जरूरी है।

बहन की आधुनिक शिक्षा पर सवाल

इस साइट पर एक व्यक्ति ने अपनी 14 साल की बहन के लिए सवाल किया कि उसकी बहन मॉर्डन शिक्षा ले रही है और इस्लाम के निर्देश नहीं मानती। उसे इस्लामी संस्थान भी भेजा गया। दारुल उलूम ने इस सवाल को सुनकर कहा कि उन लोगों की कोशिशें फायदा देंगी और बहन जल्दी इस्लामी मानदंडों को अपनाना शुरू कर देगी।
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अपने विवादित फतवों के कारण आए दिन चर्चा में रहने वा

विवादित फतवों के लिए नामी है दारुल उलूम देवबंद

इस्लामी शिक्षा देने के लिहाज से स्थापित किया गया दारुल उलूम देवंबंद मुस्लिमों में बेहद जाना-माना शिक्षण संस्थान है। ये उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में स्थित है और विवादित फतवों के लिए जाना जाता है। साल 2018 में इनकी ओर से सीसीटीवी लगाने का विरोध किया गया था। इसी प्रकार महिलाओं के फुटबॉल देखने पर भी इन लोगों ने विरोध किया हुआ है। इतना ही नहीं, एक बार इस जगह से फतवा जारी किया गया था कि चूड़ियाँ पहनाते वक्त भी दुकानदार को महिला को छूना नहीं चाहिए। अभी हाल में ‘गोद लिए बच्चे के वारिस बनने या न बनने’ पर फतवा जारी करके ये विवादो में आया था।

‘रेप-सेक्स को लेकर हिन्दू राष्ट्रवादी सबसे ज्यादा जुनूनी’: पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी ने दिखाई हिन्दू घृणा

जब हिन्दू स्वयंसेवी संस्थानों, लेखक एवं पत्रकारों द्वारा मुस्लिम मानसिकता पर प्रश्नचिन्ह लगाने पर तुष्टिकरण एवं छद्दम धर्म-निरपेक्षों को लोकतंत्र, संविधान और गंगा-जमुनी तहजीब पर संकट के बादल मंडराने दिखने पड़ते हैं, लेकिन जब यही हिन्दू विरोधी गिरोह हिन्दुओं की आस्था पर अपनी प्रक्रिया व्यक्त करता है, सबको सांप सूंघ जाता है।यूपीए के समय में इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद के नाम हिन्दू धर्म को बदनाम किया जा रहा था।    

दूसरे, हिन्दुओं को भी अपनी आंखें और दिमाग खोल कर गंगा-जमुनी तहजीब की बात बोलनी चाहिए। हिन्दुओं को क्या इतना भी नहीं मालूम की यमुना का नाम बिगाड़ कर जमुना करने वाले यही हिन्दू विरोधी है? 
खुद को इस्लामोफोबिया के विरुद्ध काम करने वाला एक्टिविस्ट बताने वाले ऑस्ट्रेलियाई लेखक सीजे वर्लमैन ने एक बार फिर से अपनी हिन्दू घृणा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने ट्वीट किया, “दुनिया का कोई भी जाति-मजहब-राष्ट्रवादी समूह सेक्स और रेप को लेकर उतना जुनूनी नहीं है, जितने कि हिन्दू राष्ट्रवादी।” उनके इस ट्ववीट को राज्यसभा के पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी ने आगे बढ़ाया। उन्होंने इसे लाइक और रीट्वीट किया।

                              सीजे वर्लमैन का हिन्दू घृणा वाला ट्वीट, शाहिद सिद्दीकी ने आगे बढ़ाया
पाकिस्तान सहित कई देशों के मुस्लिमों ने सीजे वर्लमैन के इस ट्वीट का समर्थन किया। खुद को मानवाधिकार कार्यकर्ता बताने वाले मीर रसूल ने दावा किया कि हिन्दुओं के पुस्तकों में रेप के बारे में लिखा हुआ है। हालाँकि, कई लोगों ने उन्हें आईना भी दिखाया। लोगों ने उन्हें ऐसी कई घटनाएँ दिखाईं, जहाँ मदरसों में मौलवियों द्वारा रेप किया गया। साथ ही ऑस्ट्रेलिया में रेप की घटनाओं पर भी लोगों ने सवाल दागे।

वैसे, ये पहली बार नहीं है जब सीजे वर्लमैन ने इस तरह की हरकत की हो। कुछ ही हफ़्तों पहले सीजे वर्लमैन ने लिखा था, “मैं ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में न्यूजीलैंड का समर्थन कर रहा हूँ। ऐसा इसीलिए, क्योंकि 50 करोड़ हिंदुत्व कट्टरपंथियों को मैं एक सेकेंड के लिए भी खुश नहीं देख सकता। उनके खुश होने से मैं असहज महसूस करता हूँ।” भारत-न्यूजीलैंड में होने वाले WTC फाइनल से पहले उनका ये ट्वीट आया था।

जहाँ तक शाहिद सिद्दीकी की बात है, हाल ही में वायरल हुए उनके एक वीडियो में वो कहते दिखे थे कि उनके जितने भी फंड्स थे, उनमें से एक-एक पैसा उन्होंने मदरसों, स्कूलों और कॉलेजों को दिया। 90 के दशक के अंत में वो कॉन्ग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हुआ करते थे। पेशे से पत्रकार 71 वर्षीय शाहिद सिद्दीकी अभी भी ‘नई दुनिया’ नाम की साप्ताहिक उर्दू पत्रिका के संपादक हैं। वो सपा-बसपा का भी हिस्सा रहे हैं।

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‘एक-एक पैसा मुजफ्फरनगर व सहारनपुर के मदरसों को दिया’: शाहिद सिद्दीकी, पूर्व सांसद, समाजवादी पार
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‘एक-एक पैसा मुजफ्फरनगर व सहारनपुर के मदरसों को दिया’: शाहिद सिद्दीकी, पूर्व सांसद, समाजवादी पार