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‘रेप-सेक्स को लेकर हिन्दू राष्ट्रवादी सबसे ज्यादा जुनूनी’: पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी ने दिखाई हिन्दू घृणा

जब हिन्दू स्वयंसेवी संस्थानों, लेखक एवं पत्रकारों द्वारा मुस्लिम मानसिकता पर प्रश्नचिन्ह लगाने पर तुष्टिकरण एवं छद्दम धर्म-निरपेक्षों को लोकतंत्र, संविधान और गंगा-जमुनी तहजीब पर संकट के बादल मंडराने दिखने पड़ते हैं, लेकिन जब यही हिन्दू विरोधी गिरोह हिन्दुओं की आस्था पर अपनी प्रक्रिया व्यक्त करता है, सबको सांप सूंघ जाता है।यूपीए के समय में इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद के नाम हिन्दू धर्म को बदनाम किया जा रहा था।    

दूसरे, हिन्दुओं को भी अपनी आंखें और दिमाग खोल कर गंगा-जमुनी तहजीब की बात बोलनी चाहिए। हिन्दुओं को क्या इतना भी नहीं मालूम की यमुना का नाम बिगाड़ कर जमुना करने वाले यही हिन्दू विरोधी है? 
खुद को इस्लामोफोबिया के विरुद्ध काम करने वाला एक्टिविस्ट बताने वाले ऑस्ट्रेलियाई लेखक सीजे वर्लमैन ने एक बार फिर से अपनी हिन्दू घृणा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने ट्वीट किया, “दुनिया का कोई भी जाति-मजहब-राष्ट्रवादी समूह सेक्स और रेप को लेकर उतना जुनूनी नहीं है, जितने कि हिन्दू राष्ट्रवादी।” उनके इस ट्ववीट को राज्यसभा के पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी ने आगे बढ़ाया। उन्होंने इसे लाइक और रीट्वीट किया।

                              सीजे वर्लमैन का हिन्दू घृणा वाला ट्वीट, शाहिद सिद्दीकी ने आगे बढ़ाया
पाकिस्तान सहित कई देशों के मुस्लिमों ने सीजे वर्लमैन के इस ट्वीट का समर्थन किया। खुद को मानवाधिकार कार्यकर्ता बताने वाले मीर रसूल ने दावा किया कि हिन्दुओं के पुस्तकों में रेप के बारे में लिखा हुआ है। हालाँकि, कई लोगों ने उन्हें आईना भी दिखाया। लोगों ने उन्हें ऐसी कई घटनाएँ दिखाईं, जहाँ मदरसों में मौलवियों द्वारा रेप किया गया। साथ ही ऑस्ट्रेलिया में रेप की घटनाओं पर भी लोगों ने सवाल दागे।

वैसे, ये पहली बार नहीं है जब सीजे वर्लमैन ने इस तरह की हरकत की हो। कुछ ही हफ़्तों पहले सीजे वर्लमैन ने लिखा था, “मैं ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में न्यूजीलैंड का समर्थन कर रहा हूँ। ऐसा इसीलिए, क्योंकि 50 करोड़ हिंदुत्व कट्टरपंथियों को मैं एक सेकेंड के लिए भी खुश नहीं देख सकता। उनके खुश होने से मैं असहज महसूस करता हूँ।” भारत-न्यूजीलैंड में होने वाले WTC फाइनल से पहले उनका ये ट्वीट आया था।

जहाँ तक शाहिद सिद्दीकी की बात है, हाल ही में वायरल हुए उनके एक वीडियो में वो कहते दिखे थे कि उनके जितने भी फंड्स थे, उनमें से एक-एक पैसा उन्होंने मदरसों, स्कूलों और कॉलेजों को दिया। 90 के दशक के अंत में वो कॉन्ग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हुआ करते थे। पेशे से पत्रकार 71 वर्षीय शाहिद सिद्दीकी अभी भी ‘नई दुनिया’ नाम की साप्ताहिक उर्दू पत्रिका के संपादक हैं। वो सपा-बसपा का भी हिस्सा रहे हैं।

अवलोकन करें:-

‘एक-एक पैसा मुजफ्फरनगर व सहारनपुर के मदरसों को दिया’: शाहिद सिद्दीकी, पूर्व सांसद, समाजवादी पार
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‘सुबह के साढ़े 4 बजे कौन पटाखे फोड़ता है?’: दीपावली से भड़के शाहिद, लोगों ने दिलाई अजान की याद

पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी ने रविवार (नवंबर 15, 2020) की सुबह तड़के 4:53 बजे ट्वीट कर के हिन्दुओं द्वारा दीपावली मनाने को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने पूछा कि सुबह के साढ़े 4 बजे किस किस्म के लोग पटाखे उड़ाते हैं? उन्होंने दावा किया कि उन्हें तब भी तेज़ आवाज़ में पटाखे छोड़ने की गूँज सुनाई दे रही थी। साथ ही उन्होंने पूछा कि जब कोई फैसला लागू ही नहीं किया जा सकता है तो पटाखों को प्रतिबंधित करने का क्या फायदा?
सिद्दीकी साहब अब बात निकली है तो बहुत दूर तक जाएगी। वीणा के तारों को छेड़ने से पूर्व वीणा से निकलने वाले स्वरों को सुनने का साहस करना होगा। 
वर्ष में एक बार आने वाली दीपावली पर आतिशबाज़ी पर अंकुश लगाए जाने के पीछे हिन्दुत्व के विरुद्ध किसी गहरी षड़यंत्र की बू आ रही। उसका कारण भी है। अभी कुछ दिन पूर्व अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्मित हेतु हुए शिलान्यास की ख़ुशी में कहीं हिन्दू अधिक आतिशबाज़ी न छोड़े। सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से पराली की आड़ में कुठाराघात का आभास है। ये मुफ्तखोर दिल्लीवासियों की मेहरबानी से जब से अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री बने हैं, तभी से पराली का इतना सियापा मचा हुआ है। केजरीवाल से पूर्व 15 वर्ष शीला दीक्षित(स्व), 5 वर्ष मदन लाल खुराना, 5 वर्ष राधारमण आदि ने राज किया, केंद्र में विरोधी पार्टी होते हुए भी इनमें से किसी के भी कार्यकाल में प्रदुषण की इतनी समस्या नहीं हुई, जितनी दिल्ली वालों को मुफ्तखोर बनाने वाले केजरीवाल के कार्यकाल में हो रही है, इस कटु सच्चाई को तुष्टिकरण की चादर को फेंक बिना किसी निस्संकोच से गंभीरता से सोंचना होगा। जितनी भी हिन्दू हितैषी पार्टियां हैं, सभी को एकजुट होकर इन तुष्टिकरण करने वालों के विरुद्ध  स्वर मुखरित कर इन्हे बेनकाब करना होगा। 
देश में तुष्टिकरण इस सीमा तक बढ़ गया है, मीडिया भी तुष्टिकरण करता है, यह आरोप नहीं कटु सत्य है। लॉक डाउन में कभी मीडिया ने नहीं दिखाया कि मुस्लिम क्षेत्र में किस तरह कंधे से कंधे रगड़ रहा होता था, लोग बिना मास्क के बाजार में खरीदारी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, शाम के समय 7 बजे के बाद जामा मस्जिद आकर यहाँ की भीड़ दिखाने का किसी में साहस नहीं, क्यों? 
भारत सरकार द्वारा खुले में मांस बेचना दंडनीय है, क्यों मुस्लिम क्षेत्रों में सुबह के समय खुले में किसी सब्ज़ी की भांति मांस बिकता है? कौन है इसका जिम्मेदार? 

शाहिद सिद्दीकी ने दावा किया कि जो दिल्ली पहले से ही एक ‘जहरीला नरक’ बनी हुई थी, वो अब दीपावली की अगली सुबह अपने अधिकतर निवासियों के लिए मौत का एक जाल बन जाएगी। शाहिद सिद्दीकी द्वारा दीपावली और पटाखों को लेकर इस तरह ज्ञान दिए जाने के बाद कई लोगों ने उनकी आलोचना भी की और पूछा कि सुबह-सुबह अजान की जो आवाज़ आती है, क्या उससे किसी की तन्द्रा नहीं भंग होती है?

‘बेचैन बैंकर’ नामक ट्विटर यूजर ने लिखा कि वो शाहिद सिद्दीकी की चिंताओं से सहमत हैं और सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिदों में साउंड सिस्टम को लेकर भी कई नियम-कायदे लगाए हुए हैं, जिनका पालन किया जाना चाहिए। साथ ही पूछा कि जब फैसला लागू ही नहीं हो सकता तो सुनाने का क्या फायदा? आदित्य भारद्वाज ने पूछा कि वो कौन से लोग हैं, जो ‘सेक्युलर राष्ट्र भारत’ में अजान के नाम पर दिन में कई बार लोगों को परेशान करते हैं।

एक व्यक्ति ने अपने निजी अनुभव से समय गिनाते हुए कहा कि सबसे पहले तो तड़के 4 बजे और फिर 8 बजे, फिर दोपहर 1 बजे और फिर 4 बजे, इसके बाद शाम के 6 बजे करोड़ों लोगों को साल के 365 दिन नमाज सुनने के लिए बाध्य किया जाता है, इससे हमारा दिमाग बीमार हो रहा है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि जो शहरों को नहीं जलाते, वो सुबह में पटाखे छोड़ना पसंद करते हैं। वो सार्वजनिक संपत्ति को नहीं जलाते। शाहिद सिद्दीकी ने पीएम मोदी के ‘9 बजे 9 मिनट’ को लेकर भी आपत्ति जताई थी।

जब लोगों ने मस्जिद में नमाज की बात की तो शाहिद सिद्दीकी भड़क गए और एक यूजर से कहा कि तुम अपने भाइयों से कहो कि वो रोज सुबह पटाखे छोड़ें और तुम इसका बचाव करो। उन्होंने सलाह दी कि वो इसे नियमित क्रियाकलाप बना लें। लोगों ने उन्हें कहा कि वो एक दिन के पटाखे से इतने परेशान हैं, लेकिन साल भर 5 वक़्त के नमाज को लेकर उन्हें कोई दिक्कत नहीं है? दीपावली पर पटाखे उड़ाने वालों को भला-बुरा कहने वाले शाहिद सिद्दीकी ने इन तर्कों पर चुप्पी साध ली।

ऐसे ही पत्रकार रूपा सुब्रमण्या ने ऑपइंडिया की ‘मिशन ब्राइट एंड लाउड दीवाली 2021’ का विरोध करते हुए कुछ ऐसा कह दिया, जिससे कॉन्ग्रेस के एक नेता ही उनसे नाराज़ हो गए और जम कर फटकार लगा दी। रूपा ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई अभियान नहीं देखा, जिसमें इससे ज्यादा प्रदूषण को प्रमोट किया गया हो, या फिर ऐसे इंडस्ट्री का समर्थन किया गया हो, जो ‘बाल मजदूरी’ पर आश्रित है। उन्होंने ऑपइंडिया के लिए ‘पूप इंडिया’ शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि ये रोज नई गहराई की ओर जा रहा है।