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पत्नी को खुश करने के लिए जला दिया दूसरे का प्राइवेट पार्ट, कार से फायर किए क्रैकर्स

                    मोहाली में चलती कार से आतिशबाजी का वीडियो वायरल (फोटो साभार: अमर उजाला)
सालगिरह पर अपनी पत्नी को इम्प्रेस करने के चक्कर में एक रईसजादे ने दूसरे व्यक्ति का प्राइवेट पार्ट जला दिया। घटना पंजाब के मोहाली की है। आरोपित रचित कपूर सालगिरह पर कार से पटाखे फोड़ रहा था। इसकी चपेट में पीछे से आ रहा एक स्कूटर सवार युवक आ गया और कथित तौर पर उसके प्राइवेट पार्ट जल गए।

घटना शनिवार (2 दिसंबर 2023) की है। पुलिस ने आरोपित को घटना के बाद गिरफ्तार कर लिया। घायल युवक का अस्पताल में इलाज चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मोहाली के सेक्टर-69 से एयरपोर्ट रोड की है। यहाँ 2 दिसंबर की रात रचित कपूर ढाई करोड़ रुपए की लग्जरी कार मस्टैंग ले कर पहुँचा। कार में रचित की पत्नी भी सवार थी।

वह सड़क पर ही अपनी शादी की सालगिरह मनाने लगा। उसने अपनी कार पर पटाखे रख कर हवाई शॉट चलाया। पीछे से वीडियो बनाने के लिए उसने एक ऑटो ड्राइवर को पैसे दे रखे थे। इस स्टंट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसी आतिशबाजी के बीच एक स्कूटर सवार रचित की कार के बगल से गुजरा। स्कूटर सवार का आरोप है कि कार सवार द्वारा छोड़ा गया हवाई शॉट उसके कपड़ों पर आ गिरा। इस वजह से उसके कपड़ों के साथ प्राइवेट पार्ट भी जल गया।

पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने रचित कपूर के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आगे की जाँच और कार्रवाई के लिए पुलिस ने उसको 2 दिनों के कस्टडी रिमांड पर लिया था। शुरुआती पूछताछ में रचित ने बताया कि वो पटाखों वाला स्टंट कर अपनी बीवी को इम्प्रेस करना चाहता था।

जाँच में सामने आया है कि रचित की मस्टैंग कार का अब तक 14 बार चालान हो चुका है। इसमें 13 चालान चंडीगढ़ और 1 चालान केरल में हुआ है। घटना के बाद आरोपित अपनी कार को दिल्ली में छोड़ आया था। पुलिस कार बरामद करने दिल्ली रवाना हो चुकी है। पीछे से वीडियो बना रहे ऑटो ड्राइवर की भी तलाश की जा रही है। आरोपित रचित कपूर का चंडीगढ़ के सेक्टर-19 में कपड़ों का शोरूम है।

दिवाली, पटाखे, पर्यावरण की रक्षा का प्रश्न और एडमिनिस्ट्रेटिव एक्टिविज्म का मारा हिंदू

एक समय लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम दिवाली में ‘अली’ और रमजान में ‘राम’ को खोजकर आम हिंदू के पास पहुँचा देता था और उसके हाथ में ये अविष्कार देकर अपनी प्रासंगिकता की रक्षा का नैरेटिव गढ़ लेता था। इस आविष्कार के हाथ में आते ही आम हिंदू इस नैरेटिव की निगरानी में लग जाता था और इस प्रक्रिया में जरा सी आँख लग जाने पर वह निज को ही धिक्कारता था।  इस तरह सहिष्णु हिंदू सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेकर न केवल इकोसिस्टम को प्रासंगिक बनाए रखता था, बल्कि जाने-अनजाने उसके बाय प्रोडक्ट अमन की आशा को ऑक्सीजन भी प्रदान करता था।
हिन्दू को इस नैरेटिव ने कितना नुकसान पहुँचाया है, सबके सामने है, अगर आज भी हिन्दू ने आँख नहीं खोली और इस छद्दम नैरेटिव के विरुद्ध सड़क पर नहीं आएगा, कोई उसे अपने त्यौहार मनाने नहीं देगा। होली, दीवाली, करवाचौथ आदि पर पर जो ज्ञान दिया जाता है, वही ज्ञान राखी, गोवर्धन, भाईदूज, बैसाखी, रामनवमी आदि त्यौहारों पर भी मिलने वाला है। कोई हिन्दू संगठन आधी रात को कोर्ट खुलवाने का सोंच भी नहीं सकता। कहाँ हैं सारे हिन्दू संगठन? क्यों नहीं हिन्दू हितों के लिए छद्दम नैरेटिव का विरोध कर पाखंडियों को जेल भेजने का आंदोलन करते? क्यों नहीं हिन्दू संगठन हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान के लॉलीपॉप को त्याग सर्वप्रथम हिन्दू त्यौहारों पर पाखंड करने वालों के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करते?

यह तब की बात है जब जमाना अच्छा था और लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम एक आम हिंदू से जिस बात की अपेक्षा रखता था, आम हिंदू वही करता था। अब जमाना खराब है क्योंकि कई दशकों तक चलने वाला भारतीय छद्म धर्मनिरपेक्षता का यह रोलिंग प्लान अब बंद हो गया है। इंटरनेट के शुरुआती दिनों में नॉलेज के ओपन सोर्स और बाद के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आने के बाद जैसे-जैसे छद्म धर्मनिरपेक्षता का घड़ा फूटता गया, इकोसिस्टम ने नैरेटिव की रक्षा का भार धीरे-धीरे असहिष्णु आम हिंदू के कँधे से उतार कर न्यायपालिका और प्रशासन के कँधों पर रख दिया है।

पिछले कई वर्षों से दिवाली का त्योहार वर्ष में कम से कम एक बार इकोसिस्टम, सरकार, न्यायपालिका, प्रशासन, पर्यावरणविद, पर्यावरण एक्टिविस्ट और आम हिंदू, लगभग सबको अपनी-अपनी असलियत दिखाने का मौका देता रहा है। दिवाली कैसे मनाई जाए, इस प्रश्न को लेकर इकोसिस्टम पिछले कई वर्षों से न्यायपालिका की शरण में जाता है। न्यायपालिका को भी लगता है कि दिवाली कैसे मनाई जाए, यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठाने का सबसे बड़ा अधिकार उसके पास है जो खुद यह त्योहार नहीं मनाता। अपने पास आए इस इकोसिस्टमी योद्धा की इज़्ज़त करते हुए न्यायपालिका बंगाल की खाड़ी में आए तूफ़ान की गति से दिवाली मनाने का तरीका लिख डालता है। उसके बाद प्रशासन उस तरीके को पढ़कर उसे लागू करने निकल पड़ता है।

पहले जुडिशियल एक्टिविज्म से परेशान आम हिंदू अब एडमिनिस्ट्रेटिव एक्टिविज्म से भी परेशान है। पिछले कई वर्षों से प्रशासन दिवाली के मौके पर जो कुछ भी करता रहा है, वह उसे प्रशासनिक सतर्कता का नाम दे सकता है पर प्रशासन के आचरण को एडमिनिस्ट्रेटिव एक्टिविज्म कहना भी एक तरह का अंडरस्टेटमेंट होगा। किसी ने पटाखा फोड़ दिया तो उसे गिरफ्तार कर लिया। कोई पटाखे लिए जा रहा है तो उसे गिरफ्तार कर लिया।

न तो न्यायपालिका और न ही प्रशासन इस बात पर विचार करते कि यदि पर्यावरण को सबसे अधिक क्षति पटाखे से ही होती है तो पटाखे का उत्पादन ही बंद कर दें। उत्पादन और बिक्री न रोककर उसका इस्तेमाल रोकना कितना तार्किक है, यह प्रश्न सबके सामने खड़ा है।

पहले राष्ट्रीय महत्व के त्योहार जैसे पंद्रह अगस्त या छब्बीस जनवरी के आस-पास आतंकवादी पकड़े जाते और उनके पास से हथियार बरामद किए जाते थे। इन घटनाओं के बारे में प्रशासन प्रेस कॉन्फ्रेंस करता था तब जाकर लोगों को पता चलता था कि कितने लोग कहाँ गिरफ्तार किए गए, उनके पास कौन-कौन से हथियार बरामद हुए और उनक प्लान क्या था। इससे मिलती-जुलती घटनाएँ अब दिवाली के आस-पास या दिवाली की रात होने लगी है। अब पुलिस सोशल मीडिया पर रीयल टाइम प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसा करती नज़र आती है जिसमें बताया जाता है कि फलाने थाने के फलाने अफसर ने फलाने जगह फलाने पुत्र फलाने को एक पॉलिथीन के साथ गिरफ्तार किया है जिसमें पटाखे थे।

                                  दिल्ली पुलिस के उस ट्वीट का स्क्रीनशॉट जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया

यह एडमिनिस्ट्रेटिव एक्टिविज्म नहीं तो और क्या है? इस देश में न्यायपालिका के न जाने कितने ऑर्डर अपने ऊपर धूल ओढ़े दशकों से पालन किए जाने का इंतजार कर रहे हैं। पर उनके पालन की तत्परता दिखाई नहीं देती। जब क्रिकेट मैच में पाकिस्तान की जीत पर पटाखे फोड़े गए थे तब भी गिरफ्तारियाँ हुई पर इस तरह रीयल टाइम सोशल मीडियाटिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं दिखाई दी। ऐसे में यदि आम हिंदू यह सोचे कि प्रशासन पटाखे फोड़ने के विरुद्ध नहीं है, बल्कि पटाखे फोड़कर दिवाली मनाने के विरुद्ध है तो इस सोच के लिए क्या उसकी आलोचना की जा सकती है?

अवलोकन करें:-

दिवाली के ‘पटाखों’ से पहले ही दमघोंटू हो गई दिल्ली
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दिवाली के ‘पटाखों’ से पहले ही दमघोंटू हो गई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि पटाखे नहीं पराली है प्रदूषण की बड़ी वजह (साभार: दैनि

पिछले कई वर्षों से केवल दिवाली के मौके पर पर्यावरण की रक्षा का प्रश्न उठता है, पर हर वर्ष उसके बाद बैठ जाता है। पटाखे फोड़े जाएँ या नहीं, यह उतना महत्वपूर्ण प्रश्न नहीं है जितना महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि हर वर्ष दिवाली बीत जाने के पश्चात पर्यावरण की रक्षा की चिंता मर क्यों जाती है? इसे सरकार, न्यायपालिका, प्रशासन और लोकतंत्र के लगभग हर स्तंभ की विफलता ही कहेंगे कि वर्ष दर वर्ष उठने वाले इस प्रश्न पर ये स्तंभ एक बहस तक नहीं करवा सके।

प्रश्न उठता है और फिर खो जाता है, शायद अगले वर्ष फिर से उठने के लिए। इस प्रक्रिया में समाज और प्रशासन के बीच जो अविश्वास पनप रहा है, न तो उसे महसूस करने की कोशिश की जा रही है और न ही उसके आकलन का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में सामाजिक ताने-बाने को होने वाली दीर्घकालीन क्षति की चिंता इन स्तंभों को कितनी है, इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है।

‘सुबह के साढ़े 4 बजे कौन पटाखे फोड़ता है?’: दीपावली से भड़के शाहिद, लोगों ने दिलाई अजान की याद

पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी ने रविवार (नवंबर 15, 2020) की सुबह तड़के 4:53 बजे ट्वीट कर के हिन्दुओं द्वारा दीपावली मनाने को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने पूछा कि सुबह के साढ़े 4 बजे किस किस्म के लोग पटाखे उड़ाते हैं? उन्होंने दावा किया कि उन्हें तब भी तेज़ आवाज़ में पटाखे छोड़ने की गूँज सुनाई दे रही थी। साथ ही उन्होंने पूछा कि जब कोई फैसला लागू ही नहीं किया जा सकता है तो पटाखों को प्रतिबंधित करने का क्या फायदा?
सिद्दीकी साहब अब बात निकली है तो बहुत दूर तक जाएगी। वीणा के तारों को छेड़ने से पूर्व वीणा से निकलने वाले स्वरों को सुनने का साहस करना होगा। 
वर्ष में एक बार आने वाली दीपावली पर आतिशबाज़ी पर अंकुश लगाए जाने के पीछे हिन्दुत्व के विरुद्ध किसी गहरी षड़यंत्र की बू आ रही। उसका कारण भी है। अभी कुछ दिन पूर्व अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्मित हेतु हुए शिलान्यास की ख़ुशी में कहीं हिन्दू अधिक आतिशबाज़ी न छोड़े। सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से पराली की आड़ में कुठाराघात का आभास है। ये मुफ्तखोर दिल्लीवासियों की मेहरबानी से जब से अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री बने हैं, तभी से पराली का इतना सियापा मचा हुआ है। केजरीवाल से पूर्व 15 वर्ष शीला दीक्षित(स्व), 5 वर्ष मदन लाल खुराना, 5 वर्ष राधारमण आदि ने राज किया, केंद्र में विरोधी पार्टी होते हुए भी इनमें से किसी के भी कार्यकाल में प्रदुषण की इतनी समस्या नहीं हुई, जितनी दिल्ली वालों को मुफ्तखोर बनाने वाले केजरीवाल के कार्यकाल में हो रही है, इस कटु सच्चाई को तुष्टिकरण की चादर को फेंक बिना किसी निस्संकोच से गंभीरता से सोंचना होगा। जितनी भी हिन्दू हितैषी पार्टियां हैं, सभी को एकजुट होकर इन तुष्टिकरण करने वालों के विरुद्ध  स्वर मुखरित कर इन्हे बेनकाब करना होगा। 
देश में तुष्टिकरण इस सीमा तक बढ़ गया है, मीडिया भी तुष्टिकरण करता है, यह आरोप नहीं कटु सत्य है। लॉक डाउन में कभी मीडिया ने नहीं दिखाया कि मुस्लिम क्षेत्र में किस तरह कंधे से कंधे रगड़ रहा होता था, लोग बिना मास्क के बाजार में खरीदारी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, शाम के समय 7 बजे के बाद जामा मस्जिद आकर यहाँ की भीड़ दिखाने का किसी में साहस नहीं, क्यों? 
भारत सरकार द्वारा खुले में मांस बेचना दंडनीय है, क्यों मुस्लिम क्षेत्रों में सुबह के समय खुले में किसी सब्ज़ी की भांति मांस बिकता है? कौन है इसका जिम्मेदार? 

शाहिद सिद्दीकी ने दावा किया कि जो दिल्ली पहले से ही एक ‘जहरीला नरक’ बनी हुई थी, वो अब दीपावली की अगली सुबह अपने अधिकतर निवासियों के लिए मौत का एक जाल बन जाएगी। शाहिद सिद्दीकी द्वारा दीपावली और पटाखों को लेकर इस तरह ज्ञान दिए जाने के बाद कई लोगों ने उनकी आलोचना भी की और पूछा कि सुबह-सुबह अजान की जो आवाज़ आती है, क्या उससे किसी की तन्द्रा नहीं भंग होती है?

‘बेचैन बैंकर’ नामक ट्विटर यूजर ने लिखा कि वो शाहिद सिद्दीकी की चिंताओं से सहमत हैं और सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिदों में साउंड सिस्टम को लेकर भी कई नियम-कायदे लगाए हुए हैं, जिनका पालन किया जाना चाहिए। साथ ही पूछा कि जब फैसला लागू ही नहीं हो सकता तो सुनाने का क्या फायदा? आदित्य भारद्वाज ने पूछा कि वो कौन से लोग हैं, जो ‘सेक्युलर राष्ट्र भारत’ में अजान के नाम पर दिन में कई बार लोगों को परेशान करते हैं।

एक व्यक्ति ने अपने निजी अनुभव से समय गिनाते हुए कहा कि सबसे पहले तो तड़के 4 बजे और फिर 8 बजे, फिर दोपहर 1 बजे और फिर 4 बजे, इसके बाद शाम के 6 बजे करोड़ों लोगों को साल के 365 दिन नमाज सुनने के लिए बाध्य किया जाता है, इससे हमारा दिमाग बीमार हो रहा है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि जो शहरों को नहीं जलाते, वो सुबह में पटाखे छोड़ना पसंद करते हैं। वो सार्वजनिक संपत्ति को नहीं जलाते। शाहिद सिद्दीकी ने पीएम मोदी के ‘9 बजे 9 मिनट’ को लेकर भी आपत्ति जताई थी।

जब लोगों ने मस्जिद में नमाज की बात की तो शाहिद सिद्दीकी भड़क गए और एक यूजर से कहा कि तुम अपने भाइयों से कहो कि वो रोज सुबह पटाखे छोड़ें और तुम इसका बचाव करो। उन्होंने सलाह दी कि वो इसे नियमित क्रियाकलाप बना लें। लोगों ने उन्हें कहा कि वो एक दिन के पटाखे से इतने परेशान हैं, लेकिन साल भर 5 वक़्त के नमाज को लेकर उन्हें कोई दिक्कत नहीं है? दीपावली पर पटाखे उड़ाने वालों को भला-बुरा कहने वाले शाहिद सिद्दीकी ने इन तर्कों पर चुप्पी साध ली।

ऐसे ही पत्रकार रूपा सुब्रमण्या ने ऑपइंडिया की ‘मिशन ब्राइट एंड लाउड दीवाली 2021’ का विरोध करते हुए कुछ ऐसा कह दिया, जिससे कॉन्ग्रेस के एक नेता ही उनसे नाराज़ हो गए और जम कर फटकार लगा दी। रूपा ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई अभियान नहीं देखा, जिसमें इससे ज्यादा प्रदूषण को प्रमोट किया गया हो, या फिर ऐसे इंडस्ट्री का समर्थन किया गया हो, जो ‘बाल मजदूरी’ पर आश्रित है। उन्होंने ऑपइंडिया के लिए ‘पूप इंडिया’ शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि ये रोज नई गहराई की ओर जा रहा है।

‘एक भी बाल मजदूर मिला तो लोकसभा से इस्तीफा दे दूँगा’: पटाखों पर झूठ फैला रही पत्रकार को कांग्रेस नेता, मणिकम टैगोर,की चुनौती

कांग्रेस सांसद ने रूपा सुब्रमण्या के झूठ की खोली पोल
पत्रकार रूपा सुब्रमण्या ने ऑपइंडिया की ‘मिशन ब्राइट एंड लाउड दीवाली 2021’ का विरोध करते हुए कुछ ऐसा कह दिया, जिससे कांग्रेस के एक नेता ही उनसे नाराज़ हो गए और जम कर फटकार लगा दी। रूपा ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई अभियान नहीं देखा, जिसमें इससे ज्यादा प्रदूषण को प्रमोट किया गया हो, या फिर ऐसे इंडस्ट्री का समर्थन किया गया हो, जो ‘बाल मजदूरी’ पर आश्रित है। उन्होंने ऑपइंडिया के लिए ‘पूप इंडिया’ शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि ये रोज नई गहराई की ओर जा रहा है। इस पर एक कांग्रेस नेता ने उन्हें लताड़ा।

ऑपइंडिया ने अपनी घोषणा में बताया था कि दीवाली 2021 प्रतिबंधों के चंगुल से निकले, इसके लिए परस्पर सहयोग के साथ एक ऐसा अभियान चलाया जाएगा, जिसमें क़ानूनी लड़ाई, एक्टिविज्म और रिसर्च का सहारा लिया जाएगा। इतनी से बात से भड़की रूपा सुब्रमण्या ने ट्विटर पर जहर उगल दिया। इसका जवाब दिया लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप और और पार्टी की वर्किंग कमिटी के परमानेंट इन्वायटी मणिकम टैगोर बी ने।

दूसरी बार सांसद बने मणिकम तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी के प्रभारी भी हैं। उन्होंने इस दौरान तमिलनाडु के शिवकाशी की बात करते हुए कहा कि ये पटाखों की इंडस्ट्री 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है। उन्होंने कहा कि ये पूरी तरह से वैध इंडस्ट्री है, जिसमें 60,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। उन्होंने अफवाहें न फैलाने की सलाह देते हुए कहा कि क्षेत्र में पटाखों के 1000 फैक्ट्रीज हैं और दिल्ली से मदुरै तक रोज दो फ्लाइट्स चलती हैं।

उन्होंने रूपा से कहा कि वो शिवकाशी आएँ, जो एयरपोर्ट से 70 किलोमीटर है और कैब बुक कर के वहाँ आया जा सकता है। उन्होंने अपना फोन नंबर देते हुए कहा कि रूपा वहाँ की फैक्ट्री में आएँ और वो फैक्ट्रीज के मैनेजर्स से कह देंगे वो उन्हें शिवकाशी की फैक्ट्री में घुमाएँ। उन्होंने चुनौती दी कि अगर पूरी फैक्ट्री या शिवकाशी में एक भी बाल मजदूर मिला तो वो अपनी लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफे दे देंगे।

साथ ही उन्होंने पूछा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो क्या रूपा शिवकाशी में एक भी बाल मजदूर न होने की बात पर लेख लिखेंगी? उन्होंने सलाह दी कि रूपा सुब्रमण्या को अगर कुछ पता नहीं है तो उन्हें पटाखा इंडस्ट्री में काम करने वाले हमारे भाइयों-बहनों के आत्म-सम्मान का अपमान नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक तरफ हम चीन के वैश्विक पटाखा बाजार से सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लोग अफवाह फैला रहे हैं।

उन्होंने ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट भी शेयर की, जिसमें बताया गया था कि किस तरह से पटाखों पर प्रतिबंध लगने से शिवकाशी इंडस्ट्री के कर्मचारियों को परेशानी हो रही है। इस रिपोर्ट में बताया था कि 8 लाख लोगों की आजीविका पर पटाखे बैन होने से प्रभाव पड़ा है। साथ ही हजारों करोड़ की इंडस्ट्री पर नुकसान की बात भी कही गई थी। ऊपर से कोरोना के कारण पहले से ही महीनों तक ये फैक्ट्रीज बंद ही पड़ी हुई थीं।

रूपा के इस लेख पर ट्विटर पर लोग हिन्दू विरोधी रवैये पर अपना गुस्सा भी व्यक्त कर रहे हैं:-

साथ ही उन्होंने वो ग्राफ भी शेयर किया, जिससे पता चलता है कि चीन किस कदर वैश्विक पटाखा बाजार पर कब्ज़ा कर के बैठा हुआ है। अमेरिका में जितने भी पटाखे इम्पोर्ट किए जाते हैं, उनमें से 94% अकेले चीन से आते हैं। इसके बाद क्रमशः स्पेन, हॉन्गकॉन्ग, जर्मनी, थाईलैंड, इटली और यूके का स्थान है। इसके जवाब में रूपा सुब्रमण्या ने ये कह कर इतिश्री कर ली कि काश शिवकाशी के लोगों के पास कोई और काम होता क्योंकि पटाखे बनाना अच्छा नहीं है। रूपा सुब्रमण्या के पास कॉन्ग्रेस नेता के तर्कों का कोई जवाब नहीं सूझा।

बता दें कि विराट कोहली ने भी 18 सेकंड का एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने कहा था, “मेरी तरफ से आपको और आपके परिवार को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। भगवान आपको इस दिवाली शांति, समृद्धि और खुशी प्रदान करें। कृपया याद रखें कि पटाखे न फोड़ें, पर्यावरण की रक्षा करें और इस शुभ अवसर पर एक साधारण दीए और मिठाई के साथ अपने प्रियजनों के साथ घर पर मस्ती करें। भगवान आप सबका भला करे। अपना ख्याल रखिएगा।”