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ईरान की मस्जिदों में महिलाओं समेत सबको दी जा रही एके-47 चलाने की ट्रेनिंग, मीडिया के जरिए किया जा रहा प्रचार: स्टूडियो में एंकर भी राइफल लिए नजर आए

                                 ईरान में हथियारों की ट्रेनिंग (फोटो साभार-iran news)
ईरान के सरकारी टेलीविजन ने कई शहरों की मस्जिदों में पुरुषों और महिलाओं को हथियारों का प्रशिक्षण देते हुए दिखाया गया। इसे देश की रक्षा के लिए जनता की तैयारी का हिस्सा बताया गया।

शनिवार (16 मई 2026) को प्रसारित रिपोर्ट के मुताबिक, अहवाज, केरमान, बीजार, शिराज और जहेदान की मस्जिदों में लोगों की भीड़ दिखाई दी। इस दौरान कुछ लोगों को हथियार चलाते और एक साथ अभ्यास करते हुए दिखाया गया। न्यूज रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और टीन एज को आत्मरक्षा के लिए इस तरह का प्रशिक्षण दिया गया।

सरकारी टेलीविजन के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान लोगों को अलग अलग हल्के हथियारों से परिचित कराया गया, उन्हें यह सिखाया गया कि वे कैसे काम करते हैं, और उन्हें कैसे जोड़ा और अलग किया जाता है।

इससे पहले ईरान के सरकारी टेलीविजन ने शुक्रवार रात कई कार्यक्रम दिखाए, जिनमें एंकर स्टूडियो में राइफलें लिए नजर आ रहे थे। उन्होंने कहा कि वे हथियारों को इस्तेमाल करने की बुनियादी ट्रेनिंग ले रहे हैं और जरूरत पड़ने पर जंग में शामिल होंगे।

शुक्रवार को ऐसे तीन कार्यक्रम प्रसारित किए गए। इन्हें ईरानी मीडिया आउटलेट्स ने भी दिखाया, जिसके बाद ऑनलाइन इस पर लोगों की प्रतिक्रियाएँ आने लगीं।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इन हिस्सों को जंग की तैयारी के तौर पर देखा।

ईरान के जबरदस्त समर्थक और इजरायल विरोधी माने जाते वाले अमेरिकी राजनीतिक टिप्पणीकार और इन्फ़्लुएंसर जैकसन हिंकल ने X पर लिखा कि ईरानी सरकारी टीवी यह दिखा रहा है कि AK-47 का इस्तेमाल और उसे कैसे चलाया जाए। उन्होंने इसे ‘अमेरिका के जमीनी हमले की तैयारी’ का जवाब बताया।

हथियारों और जंग से जुड़े वीडियो पर फ़ोकस करने वाले एक अन्य अकाउंट ने कहा कि ईरानी टीवी चैनल हथियारों को इस्तेमाल करने के बुनियादी निर्देश दे रहे हैं। उसने यह भी बताया कि जो राइफ़ल दिखाई गई थी, वह शुरुआती दौर की ईस्ट जर्मन MPi-KMS असॉल्ट राइफल लग रही थी।

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जंग फिर से शुरू होने की आशंका के बीच ऐसे वीडियो ईरान की तैयारी को बताता है।

‘तिलक लगाने पर मुस्लिम देते हैं धमकी, बहन-बेटियों के आगे पैंट उतारते हैं’: गुजरात के साणंद में हिंदुओं ने OpIndia को सुनाई आपबीती

                                                                                                     (फोटो साभार: ऑपइंडिया गुजराती)
अहमदाबाद के साणंद तहसील के कलाणा गाँव में हिंदुओं के साथ हो रही घटनाओं को लेकर कई बातें सामने आ रही हैं। यहाँ के पीड़ित हिंदुओं ने ऑपइंडिया के सामने अपना दर्द बयाँ किया है और आरोप लगाया है कि गाँव के ही कुछ मुस्लिम कट्टरपंथी उन्हें बार-बार प्रताड़ित कर रहे हैं। स्थानीय महिलाओं ने बताया कि ये कट्टरपंथी उन्हें न तो त्योहार मनाने देते हैं और न ही मस्जिद के सामने से बारात (वरघोड़ा) निकालने देते हैं।

इस पूरी घटना में जिस पर सबसे पहला हमला हुआ, वह एक हिंदू नाबालिग लड़का है। हमले में उसके पिता भी घायल हो गए थे। अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने ऑपइंडिया को बताया कि उनके बेटे ने बांग्लादेश में हुई दीपू दास की हत्या को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली थी, जिसमें उसने न्याय की माँग की थी। आरोप है कि इस पोस्ट को देखने के बाद स्थानीय मुस्लिम भड़क गए और धमकी देने लगे कि जो बांग्लादेश में हुआ, वही हाल यहाँ भी करेंगे।

बहन-बेटियों से अश्लील हरकतें- पीड़ित महिलाएँ

पीड़ित हिंदू महिलाओं ने रोते-रोते ऑपइंडिया को अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि किस तरह मुस्लिम कट्टरपंथी उन्हें लंबे समय से परेशान कर रहे हैं। महिलाओं का आरोप है कि पिछले 12 महीनों से गाँव के कुछ मुस्लिम युवक उन्हें तंग कर रहे हैं। हिंदू बच्चों को माथे पर तिलक लगाने को लेकर धमकियाँ दी जाती हैं और गाँव में कोई भी हिंदू त्योहार या उत्सव शांति से नहीं मनाने दिया जाता।
एक अन्य महिला ने अपना दर्द बयाँ करते हुए कहा, “जब भी हिंदू महिलाएँ या बेटियाँ वहां से गुजरती हैं, तो मुस्लिम युवक सरेआम उनके सामने अपनी पैंट खोलकर खड़े हो जाते हैं।” महिलाओं ने दावा किया कि पिछले काफी समय से कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम हिंदू बहन-बेटियों के सामने अश्लील हरकतें कर रहे हैं और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।

हिंदू बच्चों को तिलक लगाने पर धमकियाँ

महिलाओं ने आगे बताया कि स्थानीय मुस्लिम युवक छोटे बच्चों को भी निशाना बना रहे हैं और माथे पर तिलक लगाने पर उन्हें धमकियाँ देते हैं। वे हमें हिंदू त्योहार भी नहीं मनाने देते। एक महिला ने आरोप लगाया कि जब उनके पति या घर के अन्य सदस्य नौकरी से वापस लौट रहे होते हैं, तब भी उनके साथ मारपीट की जाती है। साथ ही, जब भी हिंदू बहन-बेटियाँ बाहर निकलती हैं, तो उनके साथ अश्लील इशारे किए जाते हैं।
महिलाओं ने बार-बार न्याय की माँग की है और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी से इस घटना पर ध्यान देने की अपील की है। एक अन्य महिला ने ठाकोर समाज के नेता अल्पेश ठाकोर पर भी सवाल उठाए हैं। महिलाओं का दावा है कि हर बार हिंदुओं को ही प्रताड़ित किया जाता है और बिना किसी वजह के उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

सुनियोजित साजिश: मस्जिद के सामने बारात निकालने पर पाबंदी

ऑपइंडिया से बात करते हुए महिलाओं ने इस पूरी घटना के पीछे किसी गहरी साजिश का शक जताया है। उनका दावा है कि यह हमला अचानक नहीं हुआ, बल्कि एक सोची-समझी प्लानिंग थी। पत्थरबाजी का जिक्र करते हुए एक महिला ने तर्क दिया कि एक ही दिन में इतने सारे पत्थर इकट्ठा होना मुमकिन नहीं है, इसके लिए कम से कम 10 दिन पहले से तैयारी की गई होगी। उन्होंने बताया कि वे सुबह उठकर अपनी रोजाना की दिनचर्या (चाय-पानी) में लगे ही थे कि अचानक चारों तरफ से पत्थर बरसने शुरू हो गए।
इसके अलावा यह आरोप भी लगाया गया है कि गाँव में जब भी किसी हिंदू परिवार में शादी-ब्याह का मौका होता है, तो बार-बार हंगामा खड़ा किया जाता है और मस्जिद के सामने से बारात निकालने के लिए साफ मना कर दिया जाता है। महिलाओं ने अपना दुख जताते हुए कहा कि कट्टरपंथी शादी के समय न तो बारात निकलने देते हैं और ऊपर से धमकियाँ भी देते हैं।
इसके अलावा भी महिलाओं ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं और इंसाफ की गुहार लगाई है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जाँच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरी घटना सोमवार (29 दिसंबर 2025) की रात को हुई थी, जिसके बाद मंगलवार (30 दिसंबर 2025) की सुबह भी जमकर पत्थरबाजी हुई। हालात बिगड़ते देख पुलिस की भारी फौज गाँव में पहुँच गई और पूरे इलाके की तलाशी (कॉम्बिंग) शुरू कर दी। दूसरी तरफ, पुलिस की कार्रवाई के डर से आरोपित अपने घर छोड़कर खेतों में भाग गए, जिन्हें पुलिस ने ड्रोन की मदद से ढूँढ-ढूँढकर गिरफ्तार किया।
एक हिंदू नाबालिग की शिकायत पर पुलिस ने शाहरुख समेत 22 मुस्लिम युवकों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इस शिकायत के आधार पर साणंद GIDC पुलिस स्टेशन में आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तक 42 लोगों को हिरासत में ले लिया है और आगे की जाँच जारी है।

उत्तर प्रदेश : अयोध्या में बाबरी के बदले मस्जिद बनाने के मंसूबों पर NOC भारी: सुप्रीम कोर्ट की कृपा से ‘खैरात’ में मिली जमीन तो चंदा खूब वसूला, लेआउट प्लान नहीं हुआ पास

                                               अयोध्या मस्जिद का प्रस्तावित डिजाइन (फोटो- टीवी9)
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने जमीन दे दी लेकिन 5 साल बाद भी उस पर काम ठप पड़ा है। मस्जिद के लिए बने ट्रस्ट ने चंदा तो जुटाया लेकिन सरकारी विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) नहीं ले सका। अब NOC ना होने के चलते इसके लेआउट प्लान को भी अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने खारिज कर दिया है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय पत्रकार ओम प्रकाश सिंह द्वारा दाखिल RTI में सामने आया कि विभिन्न सरकारी विभागों का अनिवार्य NOC ना होने के चलते ADA ने यह प्लान खारिज किया है।

9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक अयोध्या फैसले में राम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया था। साथ ही, मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया था।

इसके बाद 3 अगस्त 2020 को तत्कालीन जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने अयोध्या के पास धन्नीपुर गाँव में पाँच एकड़ भूमि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित कर दी। इसके बाद मस्जिद निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट ने 23 जून 2021 को ADA में लेआउट प्लान की मंजूरी हेतु आवेदन दायर किया था।

RTI के जवाब में ADA ने स्वीकार किया कि मस्जिद ट्रस्ट ने 4 लाख रुपए आवेदन और जाँच शुल्क के रूप में जमा किए। ADA के मुताबिक, मस्जिद निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नागरिक उड्डयन, सिंचाई एवं राजस्व विभाग, नगर निगम, जिलाधिकारी कार्यालय और अग्निशमन विभाग की NOC माँगी गई थी।

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव ने क्या कहा?

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा कि उन्हें अग्निशमन विभाग की ओर से आपत्तियाँ आई थीं। अग्निशमन विभाग की साइट जाँच में पाया गया कि प्रस्तावित मस्जिद और अस्पताल भवन की ऊँचाई को देखते हुए अप्रोच रोड की चौड़ाई कम से कम 12 मीटर होनी चाहिए। जबकि मौके पर दोनों मार्ग छह मीटर से ज्यादा चौड़े नहीं पाए गए और मुख्य सड़क महज चार मीटर चौड़ी निकली थी।

हुसैन ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन देने का आदेश दिया और उत्तर प्रदेश सरकार ने हमें जमीन दी। इसके बाद भी आवश्यक NOC क्यों नहीं मिलीं और ADA ने प्लान को क्यों खारिज किया, यह समझ से बाहर है।”

उन्होंने आगे कहा कि अग्निशमन विभाग की आपत्ति के बारे में उन्हें जानकारी है लेकिन बाकी किसी भी विभाग की आपत्ति को लेकर उन्हें कुछ जानकारी नहीं है। बकौल हुसैन, RTI के जवाब से स्थिति स्पष्ट हो गई है और अब हम आगे की कार्रवाई करेंगे।

इस बीच अयोध्या में भव्य और दिव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है और यह पूरे होने के चरण में है। तो दूसरी और मस्जिद परियोजना लापरवाहियों के चलते अभी तक अधर में ही अटकी हुई है। जो लोग शताब्दियों तक कथित ढांचे को मस्जिद बताते हुए लड़ रहे थे, उनके लिए मस्जिद की प्राथमिकता कितनी है, यह 5 जमीन आवंटन के 5 वर्ष बाद स्पष्ट हो जाता है।

पुलिस करे मस्जिद का नियंत्रण, कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश: अलग-अलग नमाज टाइमिंग को लेकर मस्जिद में ही लड़ गए थे नमाजी, 1 की मौत + 8 घायल

     कलकत्ता हाई कोर्ट ने चेतावनी दी है कि दोबारा हिंसा हुई तो वह मस्जिद में कोई गतिविधि बंद कर देंगे (फोटो साभार:           Leonardo AI)
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि वह पूर्वी मिदनापुर की एक मस्जिद पर नियंत्रण कर ले। पुलिस को आदेश दिया गया है कि वह मस्जिद में आने-जाने वाले नमाजियों पर नजर रखे और इसे नियमित करे। यह आदेश नमाजियों के दो गुटों के बीच में हुई लड़ाई के बाद दिया गया है। इस लड़ाई में एक की मौत हो गई थी।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार (20 नवम्बर, 2024) को यह आदेश दिया। हाई कोर्ट ने यह आदेश एक याचिका की सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में कहा गया था कि कि उसके पुराने आदेश की अवहेलना की गई है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 7 नवम्बर, 2024 को आदेश दिया था कि पूर्वी मिदनापुर के एगरा में स्थित एक मस्जिद में दो अलग-अलग नमाजियों के गुटों को अलग-अलग समय पर नमाज पढ़वाई जाए। हालाँकि, कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ। इसके बाद 13 नवम्बर, 2024 को दोनों गुटों के बीच भारी हिंसा हुई।

इस हिंसा में एक नमाजी की मौत हो गई जबकि 8 गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हिंसा के बाद पुलिस ने 3 FIR दर्ज की हैं। मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हिंसा के बाद अदालत पहुँचे नमाजियों की सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा पुलिस को मस्जिद में नियंत्रण का आदेश दिया।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा, “मस्जिद को पुलिस नियंत्रण में ले और यहाँ किसी की भी एंट्री एगरा पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक की मंजूरी के बगैर नहीं होगी।” कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि उसने यह निर्णय बड़ा सोच समझ कर लिया है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा, “मस्जिद को पुलिस नियंत्रण में ले और यहाँ किसी की भी एंट्री एगरा पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक की मंजूरी के बगैर नहीं होगी।” कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि उसने यह निर्णय बड़ा सोच समझ कर लिया है।

हाई कोर्ट ने नमाजियों को चेतावनी दी है कि अगर फिर से हिंसा हुई और कोई मरा तो वह मस्जिद में किसी के भी नमाज पढ़ने पर रोक लगा देंगे। कोर्ट ने कहा कि ‘मजहबी मामले’ के कारण किसी की भी मौत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से एक मीटिंग करने को भी कहा है।

‘कट्टरपंथी रच रहे हत्या की साजिश, बताते हैं काफिर’: ज्ञानवापी में सर्वे का आदेश देने वाले जज के लिए NIA ने माँगी सुरक्षा, घर के पास से धराया था PFI एजेंट; सरकार को उपद्रवियों और इनके समर्थकों को भी आजीवन कारावास देनी चाहिए

                                        जिस जज ने दी ज्ञानवापी में सर्वे की अनुमति, उन्हें मिल रही धमकी
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के सर्वे का आदेश देने वाले जज को धमकी मिल रही है, जिसके बाद NIA ने उसके लिए सुरक्षा की माँग की है। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 2022 में ज्ञानवापी के ढाँचे की मूल प्रकृति का पता लगाने के ASI द्वारा इसके वैज्ञानिक सर्वे की अनुमति दी थी। मुस्लिम इसे मस्जिद बताते हैं, जबकि मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने यहाँ मंदिर ध्वस्त कर उसके ऊपर मस्जिद खड़ी कर दी थी। इसके भीतर कलश और त्रिशूल से लेकर कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी मिली हैं।

NIA कोर्ट के स्पेशल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि जज रवि कुमार दिवाकर की सुरक्षा अपर्याप्त है और इसे बढ़ाने की ज़रूरत है। 3 सप्ताह पहले भी अदनान खान नामक शख्स ने उन्हें धमकी दी है, जिसे लेकर FIR भी दर्ज की जा चुकी है। NIA ने कहा है कि इस्लामी कट्टरपंथी उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। इसे एक बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए कहा गया है कि अगर अदनान की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो कोई बड़ी घटना हो सकती है।

रवि कुमार दिवाकर बरेली में एडिशनल सेशन जज हैं। वो उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भी जून 2022 में पत्र लिख कर निवेदन किया था कि उनकी सुरक्षा बढ़ाई जाए। 13 मई, 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें सुरक्षा देने को कहा था, लेकिन इसे अब अपर्याप्त बताया जा रहा है। दिवाकर ने कहा था कि इस्लामी कट्टरपंथी अल्पसंख्यक समाज का ब्रेनवॉश कराने में लगे हैं और उन्हें ‘काफिर’ बताते हैं। वर्तमान में उन्हें 2 पुलिसकर्मी मिले हुए हैं, लेकिन आतंकी हमलों से निपटने के लिए उनके पास उचित हथियार तक नहीं हैं।

उत्तर प्रदेश ATS ने 3 जून, 2024 को अदनान खान के खिलाफ FIR भी दर्ज की थी। वो जस्टिस रवि कुमार दिवाकर को धमकाने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करता है। जून 2022 में उन्हें ‘इस्लामिक आगाज़ मूवमेंट’ की तरफ से धमकी भरा पत्र भेजा गया था। इसके उनके परिवार की हत्या की धमकी के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाना बनाया गया था। अप्रैल 2024 में दिवाकर ने बरेली के SSP को भी पत्र लिख कर कहा था कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन कॉल आ रहे हैं। लखनऊ स्थित उनके आवास से PFI के एक एजेंट की गिरफ़्तारी भी हुई थी।

इस्लाम छोड़ हिंदू बनी 23 साल की लड़की का मामा ने मौलाना के साथ मिलकर किया रेप: ट्रेन में नंगा बिठाया, बोली पीड़िता- व्यभिचार का अड्डा है मस्जिद

रामपुर में हिन्दू बनी मुस्लिम लड़की का उसके मामा ने इमाम के साथ मिल कर किया गैंगरेप,पीड़िता से ही तौबा करने का दबाव बनाता इमाम (दाएँ)
देश की राजधानी दिल्ली में घर वापसी करके हिन्दू बनी एक लड़की ने अपने रिश्तेदारों के खिलाफ गैंगरेप की शिकायत दर्ज करवाई है। पेशे से मेकअप आर्टिस्ट व फैशन डिजाइनर पीड़िता का दावा है कि उसने एक मस्जिद के मौलाना द्वारा लड़कियों का बलात्कार अपनी आँखों से देखने के बाद इस्लाम छोड़ने का निर्णय लिया था। पीड़िता का आरोप है कि उसके साथ गैंगरेप करने वालों में उसके 4 मामा और एक मौलाना शामिल हैं। बाद में हथियार लेकर बुर्का पहने 4 लड़कों ने पीड़िता को नग्न अवस्था में दिल्ली में छोड़ दिया। घटना 13 मार्च 2024 की है। पुलिस ने 17 मार्च को FIR दर्ज की है।

इस घटना की FIR पुरानी दिल्ली थाना क्षेत्र में दर्ज हुई है। शिकायत में 23 वर्षीया पीड़िता ने बताया है कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की रहने वाली है। फ़िलहाल 3 वर्षों से वह मुंबई में रह कर मेकअप आर्टिस्ट और फैशन डिजाइनिंग का काम करती थी। पीड़िता ने बताया कि उसके अब्बा की मौत साल 2012 में हो चुकी है। घर में माँ और एक जुड़वाँ बहन है। अब्बा के मौत के बाद पीड़िता मुरादाबाद जिले के गाँव दीपपुर में पली-बढ़ी। यह उसके मामा का गाँव है। यहाँ पीड़िता को बचपन में मदरसे में पढ़ाया गया।

शिकायत में पीड़िता ने आगे बताया है कि मुरादाबाद में उसके नाना अनवर हुसैन और मामा महबूब अली के नाम पर लगभग 350 बीघा जमीन है। नाना और मामा की मौत के बाद पीड़िता की माँ ही इस जमीन की वारिस है। इस जमीन पर पीड़िता की माँ के चचेरे भाई इम्तियाज, इरफ़ान, अफसर और असरार हुसैन की नजर है। इन चारों ने पीड़िता की माँ को लगभग 14 वर्षों से अपने कब्ज़े में कर रखा था। जब पीड़िता को मुंबई में नौकरी मिली तो वो अपनी अम्मी को चारों के चंगुल से छुड़ाकर लगभग 9 माह पहले अपने साथ ले गई।

पीड़िता 29 फरवरी 2024 को अपनी जमीन के कागजात तैयार करवाने मुंबई से मुरादाबाद आई। वह 13 मार्च 2024 को कचहरी से तमाम कागजात निकलवाकर जा रही। इस दौरान पीड़िता के रिश्ते में मामा लगने वाले इम्तियाज, इरफ़ान, अफसर और असरार हुसैन ने रास्ते से उसका अपहरण कर लिया। ये सब पीड़िता को बंधक बनाकर अपने गाँव ले गए। यहाँ इन्होंने पीड़िता को बेल्ट के अलावा थप्पड़ों और लात-घूंसों से बेरहमी से मारा। बाद में चारों ने बारी-बारी पीड़िता से गैंगरेप किया।

शिकायत में आगे आरोप है कि बंधक बनने के ही दौरान चारों आरोपितों के परिचित लतीफ, मौलाना इरफ़ान, हाजी आसिफ और ज़ाकिर आदि भी वहाँ आए थे। इन सभी ने भी पीड़िता से 2 दिनों तक लगातार गैंगरेप किया। पीड़िता को रेप के दौरान उन स्थानों पर मारा गया, जहाँ उसने हिंदू देवता के टैटू बनवा रखे थे। गैंगरेप के बाद आरोपितों ने पीड़िता के सारे कपड़े उतार दिए और नग्न हालत में उसे दिल्ली जाने वाली ट्रेन में बैठा दिया। इस दौरान बुर्का पहने 4 लड़के भी पीड़िता के साथ बैठाए गए, जिनके पास हथियार होने का दावा किया गया है।

ट्रेन पुरानी दिल्ली में रुकी और पीड़िता जैसे-तैसे उसमें से निकलकर भाग कर अपनी जान बचा पाई। दिल्ली पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर सभी आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 376 डी, 342, 365 और 34 के तहत कार्रवाई की गई है। घटना क्षेत्र उत्तर प्रदेश का रामपुर होने की वजह से आगे की कार्रवाई के लिए केस को उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के थाना शहजाद नगर भेज दिया गया है।

लड़की का आरोप है कि उसे ट्रेन में बिठाने के पीछे पटरी पर फेंक कर मार डालने की साजिश थी। अपनी जान बचाने के लिए पीड़िता ने भगवान कृष्ण का धन्यवाद भी किया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पीड़िता की वकील संगीता तलवार ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। सभी आरोपित फरार हैं।

साल भर पहले की थी घर वापसी

पीड़िता के दावे वाले कई वीडियो ऑपइंडिया के पास मौजूद हैं। एक वीडियो में पीड़िता ने दावा किया है कि वो 1 साल पहले घर वापसी करके हिन्दू बन चुकी है। उसने बताया कि उसने अपनी आँखों से नादरबाग की मड़ैया इलाके में स्थित जामिया मस्जिद के इमाम को लड़कियाँ सप्लाई करते और उनके साथ रेप करते देखा था। पीड़िता ने आगे बताया कि उसने इमाम के यहाँ कई कंडोम भी पड़े देखे थे, जिसका उसने वीडियो भी बनाया है।
पीड़िता का यह भी दावा है कि उस गाँव में हिन्दुओं की मौत के बाद उनको जलाने के बजाय दफनाया जाता है। वीडियो में लड़की ने बताया है कि उसने मस्जिद में होने वाले अवैध कामों के खिलाफ भी शिकायत दी है। एक वीडियो में इमाम को हिन्दू धर्म अपनाने वालों के लिए इस्लाम में कड़ी सजा बताते हुए भी सुना जा सकता है। एक अन्य वीडियो में मौलाना को पीड़िता पर तौबा करने के लिए भी कहते सुना जा सकता है।

भारत में मस्जिदें बनाने के लिए विदेशी फंडिंग, महानगरों में रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने की साजिश: देवबंद से जुड़े आतंकियों के तार

               दारुल उलूम देवबंद से जुड़े हैं UP ATS द्वारा भारत विरोधी साजिश में गिरफ्तार अधिकतर साजिशकर्ता
राहुल पाण्डेय

उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (ATS) ने 11 अक्टूबर, 2023 को 10 संदिग्ध आतंकियों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। इनके नाम आदिल उर रहमान अशरफी, अबू हुरैरा गाज़ी, शेख नज़ीबुल हक, मोहम्मद राशिद, कफीलुद्दीन, अज़ीम, अब्दुल अव्वल, अबु सालेह, अब्दुल गफ्फार और अब्दुल्ला गाजी हैं। इन सभी पर विदेशों से अवैध तौर पर पैसे मँगवा कर भारत में मस्जिदें बनवाने, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में अवैध तौर पर बसाने और देश विरोधी गतिविधियाँ चलाने का आरोप है।

इस पूरे मामले में खास बात ये है कि यूपी ATS द्वारा गिरफ्तार अधिकतर साजिशकर्ता देवबंद के दारुल उलूम से जुड़े पाए गए। इन 10 आरोपितों में दिल्ली निवासी अब्दुल अव्वल अवैध तरीके से उत्तर प्रदेश, दिल्ली और असम के निवासियों के कागजात को हासिल कर के बैंक खाते खुलवाता है। बाद में वो खाते दिल्ली के ही अब्दुल गफ्फार को सौंप देता है। गफ्फार इन खातों में विदेशों से पैसे मँगवाता है। ये पैसे मँगवाने में अबु सालेह भी गफ्फार की मदद करता है।

विदेशों और देश के कई अन्य हिस्सों में मँगवाया गया ये धन हवाला के जरिए नजीबुल शेख तक पहुँचाया जाता था। नजीबुल शेख की सहारनपुर में दारुल उलूम देवबंद के पास टोपी और परफ्यूम की दुकान हैं।

बंगाल का नजीबुल, दारुल उलूम के सामने सेंट-टोपी की दुकान

ATS के मुताबिक, मूल रूप से पश्चिम बंगाल और अस्थाई तौर पर देवबंद में रह रहे नजीबुल ने बांग्लादेशी अतीक उर रहमान को अपने सहयोगी के रूप में रखा हुआ था। अतीक उर रहमान ने फर्जी कागजात से भारत का आधार व पैन कार्ड आदि बनवा रखा था। ये सभी एक गैंग के तौर पर काम कर रहे थे जो बांग्लादेशियों व रोहिंग्या नागरिकों को भारत में घुसपैठ करवाते थे और उनके भारतीय कागजात बनवाया करते थे। इन बांग्लादेशियों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में बसाया जा रहा था।
11 अक्टूबर, 2023 को ATS को मुखबिर से सूचना मिली कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ संदिग्ध लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर मौजूद हैं। ATS ने दबिश दे कर आदिलुर रहमान अशर्फी को दबोच लिया। इधर इसी दिन ATS की सहारनपुर यूनिट ने अबू हुरैरा और नजीबुल शेख को दबोच लिया। इन सभी से ATS मुख्यालय लखनऊ ला कर पूछताछ की गई। नजीबुल ने खुद को पश्चिम बंगाल का निवासी बताया जो फिलहाल देवबंद में दारुल उलूम के सामने परफ्यूम और टोपी की दुकान चला रहा था।
पूछताछ में नजीबुल ने कबूल किया कि उसे हवाला से पैसे मिलते थे। वहीं आदिलुर रहमान ने अपना असल नाम आदिल अहमद अशरफी बताया जो मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला है। फर्जी कागजात से भारतीय बना आदिल अहमद फ़िलहाल देवबंद दारुल उलूम में पढ़ाई कर रहा था। इस नेटवर्क ने हाल में ही एक बांग्लादेशी महिला को अवैध तौर पर बॉर्डर पार करवा कर किसी इब्राहिम नाम के भारतीय पुरुष को 70,000 रुपए में बेच दिया था। महिला को बरामद करने के बाद इब्राहिम सहित गिरफ्तार कर लिया गया है, उसके कागजात फर्जी पाए गए हैं। पश्चिम बंगाल के रहने वाले वाले तीसरे आरोपित अबू हुरैरा ने बताया कि वो फिलहाल दारुल उलूम में देवबंद की छत्ता मस्जिद में रहता था।
UP ATS ने इन सभी से इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल उपकरण, मोबाइल, ATM कार्ड, संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा, भारतीय कैश, सिमकार्ड, आधार कार्ड, मदरसे का कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट बरामद किया। इन सभी आरोपितों पर IPC की धारा 120- बी, 419, 420, 467, 468, 471, 370 और विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 14 के तहत कार्रवाई की है। इसमें से 3 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनके नाम आदिल उर रहमान, नजीबुल शेख और हुरैरा गाज़ी हैं। बाकी सभी फरार चल रहे हैं। फिलहाल इस केस की विवेचना ATS के मेरठ यूनिट प्रभारी इंस्पेक्टर धर्मेंद्र यादव कर रहे हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
ऑपइंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, विदेशी पैसों से मस्जिदों का निर्माण पहले चरण में पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब और बांग्लादेश बॉर्डर के पास पश्चिम बंगाल में होना था। हालाँकि, ATS फिलहाल इस आतंकी नेटवर्क की जड़ और इसके आर्थिक स्रोतों का पता लगाने में जुटी हुई है। साथ ही अभी इन मस्जिदों के निर्माण का मकसद भी सामने आना बाकी है।

दारुल उलूम में लगातार की जा रही थी बांग्लादेशी घुसपैठियों की मदद

उत्तर प्रदेश ATS की जाँच में आदिल उर रहमान अशरफी के पास से दारुल उलूम देवबंद का पहचान पत्र मिला था। वह मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला बताया गया। हालाँकि, बाद में दारुल उलूम ने आदिल उर रहमान को अपना छात्र मानने से इनकार कर दिया था। यद्यपि ऑपइंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आदिल उर रहमान अक्सर देवबंद के अंदर आया-जाया करता था। वह यहाँ कई बार नमाज़ पढ़ते और पढ़ाते हुए भी देखा गया था।
इसी केस में पकड़ा गया एक अन्य आरोपित भी देश विरोधी कृत्यों में शामिल था। वो खुद को गाज़ी बताता था। उसका नाम अबू हुरैरा है जो भले ही पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का रहने वाला था लेकिन फिलहाल वो दारुल उलूम देवबंद की छत्ता मस्जिद में रहता था। बांग्लादेशी घुसपैठियों का पैसा अपने खाते में मँगवाने वाला पश्चिम बंगाल में 24 परगना निवासी शेख नजीबुल दारुल उलूम देवबंद के सामने ही लम्बे समय से परफ्यूम और टोपी बेचने की दुकान चला रहा था।
इस से पहले 19 जुलाई, 2023 को UP ATS ने एक अन्य FIR दर्ज की थी। तब ATS ने हबीबुल्लाह मिस्बाह और अहमदुल्लाह को गिरफ्तार किया था। हबीबुल्लाह मूल रूप से बांग्लादेश के दिनाजपुर का रहने वाला निकला था जिसके पास दारुल उलूम देवबंद का परिचय पत्र बरामद हुआ था। वह दारुल उलूम देवबंद के पास रुखसाना बिल्डिंग में रहता था। हबीबुल्लाह कुछ समय तक आदिल उर रहमान का रूम पार्टनर भी रह चुका है। इन अवैध घुसपैठियों ने भी फर्जी तरीके से भारतीय पहचान पत्र बनवा रखे थे।
इन सभी के अलावा ATS ने 28 अप्रैल 2022 को भी एक FIR दर्ज करवाई थी। तब तलहा तालुकदार बिन फारुख नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया गया था। तलहा मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला था जो फर्जी कागजातों से भारतीय बन कर दारुल उलूम देवबंद की बिल्डिंग दर ए जदीद के कमरा नंबर 61 में रहता था। ATS को तलहा तालुकदार के पास से दारुल उलूम देवबंद के वजीफे की रसीद भी बरामद हुई थी। पूछताछ में तलहा तालुकदार ने कबूल किया था कि उसके साथ सलाउद्दीन सालिम और इफ्तकार नाम के 2 अन्य बांग्लादेशी भी अवैध तौर पर दारुल उलूम में रह कर अरबी पढ़ रहे थे। (साभार)

कनाडा : जस्टिन ट्रुडो गए मस्जिद में अपनापन दिखाने, कट्टर मुस्लिम ने दी गालियाँ, बेइज्जती के बाद मुँह लटका कर बाहर निकले

              मस्जिद में कनाडा के PM के खिलाफ कट्टर मुस्लिमों की नारेबाजी (चित्र साभार- X/@AhmarSKhan)
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो शुक्रवार (20 अक्टूबर 2023) को अपने देश की एक मस्जिद में लोगों से औपचारिक मुलाकात के लिए गए थे। इस दौरान वहाँ मौजूद मुस्लिम समुदाय के लोगों के भारी विरोध का सामना उन्हें करना पड़ा। मस्जिद में मौजूद भीड़ ने इजरायल-हमास युद्ध में ट्रूडो के रुख और बयान की आलोचना की। इस दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री से उनका बयान वापस लेने की माँग भी की गई।

कनाडा की न्यूज़ एजेंसी द टोरंटो सन के मुताबिक शुक्रवार को एक मस्जिद में जाने के दौरान जस्टिन ट्रूडो को ‘शर्म करो-शर्म करो’ जैसी नारेबाजी का सामना करना पड़ा। इस दौरान मस्जिद में मौजूद और विरोध में शामिल एक व्यक्ति को कार्यक्रम के आयोजकों से यह माँग करते भी सुना गया कि जस्टिन ट्रुडो को माइक पर बोलने की अनुमति न दी जाए। हालाँकि जस्टिन ट्रुडो को माइक दिया गया। अपने सम्बोधन में कनाडा के PM ने कहा, “इस कठिन समय में अपने साथ प्रार्थना की अनुमति देने का धन्यवाद।”

इस घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में हिजाब पहनी एक महिला को हाथ में तख्ती लिए देखा जा सकता है। तख्ती में ‘गाजा में नरसंहार रोको’ लिखा हुआ है। साथ ही कई अन्य लोग भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद जस्टिन ट्रुडो को चिढ़ाते भी दिखे।

कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय ने जस्टिन ट्रुडो के दौरे की पुष्टि की है। कनाडा के मुस्लिम संगठनों द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम फिलिस्तीनी मुस्लिमों के प्रति अपनापन दिखाने के मकसद से था।

                                               चित्र साभार- X/@AhmarSKhan

कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक जस्टिन ट्रुडो इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर काफी चिंतित हैं। इसी के साथ ही शांति स्थापना में कनाडा द्वारा अधिकतम सहयोग का भी एलान किया गया है।

 कनाडा ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के दौरान देश में मौजूद इस्लामी कट्टरपंथियों को संतुष्ट करने के लिए तमाम कदम उठाए हैं। इसमें कनाडा की मीडिया को हमास के लड़ाकों को आतंकी न कहने के निर्देश भी शामिल हैं। इसी साल अक्टूबर के महीने में ही यहाँ के ओंटारियो के मिसिसॉगा में सेलिब्रेशन स्क्वायर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान फिलिस्तीनी और तालिबानी आपस में भिड़ गए थे।

दिल्ली की जामा मस्जिद को नोटिस: वक्फ बोर्ड की 123 प्रॉपर्टी वापस लेगी मोदी सरकार, मनमोहन सिंह की सरकार ने किया था ‘दान’

केंद्र की मोदी सरकार ने राजधानी स्थित नई दिल्ली जामा मस्जिद को नोटिस भेजा है। 18 अगस्त 2023 को जारी इस नोटिस में कहा गया है कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार मस्जिद का निरीक्षण किया जाएगा। इसके अलावा, दिल्ली वक्फ बोर्ड (Delhi Waqf Board) की 123 संपत्तियों को कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के आदेश के बाद नई दिल्ली जामा मस्जिद की दीवार पर एक नोटिस चिपकाया गया। नोटिस में कहा गया था कि इस संपत्ति पर अपना दावा करने वाले लोग निरीक्षण के दौरान अपने दावे को साबित करने के लिए तैयार रहें। उन्हें संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और नक्शे जमा करने होंगे।

इस नोटिस को लेकर जामा मस्जिद के इमाम मुहिबुल्लाह नदवी ने कहा है कि मस्जिद को कोई खतरा नहीं है। उनके पास मस्जिद से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज हैं। नदवी ने कहा है कि जामा मस्जिद के निरीक्षण के दौरान मीडिया भी रहेगी तो अच्छा होगा।

जामा मस्जिद और फतेहपुरी मस्जिद का इतिहास जानने के लिए ब्रिटिश काल (1865 के आस-पास) का इतिहास निकालना होगा, कहते हैं कि जब इन दोनों मस्जिदों को नामस्जिद घोषित कर इन मस्जिदों में ब्रिटिश आर्मी और घोड़े रहते थे। तब हिन्दुओं ने इन मस्जिदों के लिए धरने और प्रदर्शन कर ब्रिटिश पुलिस की लाठियां खाई थीं। तब उस समय के चर्चित सेठों छुन्ना मल और सत्यनारायण(गुड़ वाले) ने नीलामी में क्रमशः इन मस्जिदों को ख़रीदा था। 1985/86 में कांग्रेस के उर्दू डेली कौमी आवाज़ में मक्की परिवार के सदस्य का समाचार प्रकाशित हुआ था कि जिस उस सज्जन ने जामा मस्जिद के इमाम द्वारा शाही शब्द इस्तेमाल करने पर आपत्ति करने के साथ-साथ यह प्रश्न भी किया था कि सेठ छुन्ना मल ने हमें मस्जिद का मुतावल्ली बनाया था, लेकिन मस्जिद के प्रबंधक कमेटी में हमें क्यों नहीं शामिल किया जाता?  

वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को कब्जे में लेगी मोदी सरकार

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने दिल्ली वक्फ बोर्ड से जुड़ी 123 संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने का फैसला किया है। इन संपत्तियों में मस्जिद, कब्रिस्तान और दरगाह शामिल हैं। इसको लेकर मंत्रालय ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान को नोटिस भी जारी किया था। यही नहीं मंत्रालय ने सभी 123 संपत्तियों के बाहर नोटिस भी चस्पा कराए थे।
इस पर मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय ने कहा था कि रिटायर्ड जस्टिस एसपी गर्ग की अध्यक्षता में दो सदस्यीय समिति बनाई। समिति ने अपनी रिपोर्ट में गैर-अधिसूचित वक्फ संपत्तियों के मुद्दे पर कहा था कि उसे दिल्ली वक्फ बोर्ड से कोई प्रतिनिधित्व या आपत्ति प्राप्त नहीं हुई है। समिति की सिफारिश पर केंद्र ने इन संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेने का फैसला किया।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ दिल्ली वक्फ बोर्ड ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों के निरीक्षण और तोड़फोड़ पर रोक लगाने की माँग की गई थी, लेकिन मई 2023 में हाईकोर्ट ने यह याचिका खारिज दी थी।
ये सभी संपत्तियाँ कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान दिल्ली वक्फ बोर्ड को दे दी गई थीं। इन संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को देने को लेकर ‘विश्व हिंदू परिषद’ ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अगस्त 2014 में हाईकोर्ट ने आदेश का पालन करते हुए मंत्रालय ने हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस एसपी गर्ग की अध्यक्षता में दो सदस्यीय समिति का गठन किया था।
इस समिति ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के सभी हितधारकों और प्रभावितों का पक्ष को सुनने के बाद केंद्र सरकार से इन संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश पर अमल करते हुए केंद्र सरकार ने इन संपत्तियों को अपने अधिकार में लेने का निर्णय किया है।

दिल्ली : बंगाली मार्केट और ITO की तकिया बब्बर शाह मस्जिद को रेलवे का नोटिस, कहा- 15 दिन में खाली करो जमीन, नहीं तो होगा एक्शन

                                    दो मस्जिदों को रेलवे का नोटिस (फोटो साभार: आज तक)
दिल्ली की दो बड़ी मस्जिदों को रेलवे ने नोटिस भेजा है। इनमें से एक मस्जिद दिल्ली की बंगाली मार्केट में है। दूसरी आईटीओ की तकिया बब्बर शाह मस्जिद है। उत्तर रेलवे ने 15 दिन के भीतर दोनों मस्जिद के प्रशासन से अतिक्रमण हटाने को कहा है। ऐसा नहीं होने पर एक्शन लेने की चेतावनी दी है।

अगर रेलवे गंभीरता से रेलवे जमीन पर हुए अतिक्रमण को सख्ती से हटाए, रेलवे के पास बहुत भूमि होगी, जिसका रेलवे के विकास में प्रयोग हो सकता है।  

22 जुलाई 2023 को उत्तर रेलवे प्रशासन की तरफ जारी नोटिस में कहा गया है, “सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि रेलवे भूमि को अनाधिकृत रूप से अतिक्रमित किया गया है। आप लोग अनाधिकृत रूप से रेलवे की जमीन पर बने अनाधिकृत भवन/मंदिर/ मस्जिद/मजार को इस सूचना के 15 दिन के अंदर स्वेच्छा से हटा दें। अन्यथा रेलवे प्रशासन एक्शन लेगा। रेलवे अधिनियम के प्रावधान के तहत अनाधिकृत कब्जे को हटा दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में होने वाले नुकसान के लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे। रेलवे प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा।”

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार तकिया बब्बर शाह मस्जिद के बगल में स्थित एमसीडी के मलेरिया दफ्तर को भी खाली करने का नोटिस दिया गया है। यहाँ भी रेलवे का नोटिस चिपका दिया गया है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली वक्फ बोर्ड का कहना है कि इन मस्जिदों को जमीन 1945 में कानूनी तौर पर एग्रीमेंट के जरिए ट्रांसफर की गई थी।

इससे पहले इसी साल अप्रैल में भूमि और विकास कार्यालय (L&DO), नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने एक संयुक्त अभियान में बंगाली मार्केट की मस्जिद के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया था। इस कार्रवाई के दौरान एक दीवार हटाई गई थी। अधिकारियों ने बताया था कि कुछ महीने पहले अतिक्रमण कर कंक्रीट की यह दीवार खड़ी की गई थी। वहीं मस्जिद के अधिकारियों का कहना था कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई थी।

वहीं 2 जुलाई 2023 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा में एक सड़क को चौड़ा करने के लिए फुटपाथ पर बने दो धार्मिक स्थलों को हटाया गया था। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस दौरान एक हनुमान मंदिर और एक दरगाह को हटाया था। अभियान के दौरान भारी संख्या में बलों की तैनाती की गई थी। साथ ही ड्रोन से पूरे इलाके की निगरानी हो रही थी।

नंगा नाच के बीच में होगी नमाज, समलैंगिक भी लगाएँगे ठुमके… मस्जिद को लेकर क्यों हो रहा विरोध

लंदन की लोकप्रिय इमारत 'Trocadero' अब बनेगा मस्जिद
जिस इलाके को लंदन के मनोरंजन की दुनिया का का दिल कहा जाता है, अब वहाँ एक बड़ी इमारत मस्जिद में बदलने जा रही है। Trocadero में लंबे समय तक लोग मनोरंजन के लिए जाते रहे हैं, लेकिन अब ये 3 मंजिला इमारत मस्जिद में बदल जाएगी। बड़ी बात ये है कि इस मस्जिद के आसपास क्लब, बार, गे वेन्यू, नाइट क्लब और स्ट्रिप जॉइंट जैसी चीजें होंगी। यानी, चारों तरफ नंगा नाच और समलैंगिकों का डांस होगा और बीच में ये मस्जिद होगी।

मौलाना अक्सर इन चीजों को इस्लाम के हिसाब से हराम बताते रहे हैं। इस 3 मंजिला मस्जिद का अनाम ‘Piccadilly Prayer Space’ रखे जाने की योजना बनाई गई है। ये पिक्कैडिली सर्कस और सोहो के बीच में स्थित है। 56 वर्षीय मुस्लिम अरबपति आसिफ अजीज इसे मस्जिद में परिवर्तित करवा रहे हैं। उन्हें ‘मिस्टर वेस्ट एन्ड’ के रूप में भी जाना जाता है, जो संपत्तियों के खरीद-बेच के अग्रणी कारोबारियों में गिने जाते हैं।

1000 नमाजियों की सुविधा वाली इस मस्जिद के लिए 2020 में ही प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन तब इसे नकार दिया गया था। लेकिन, वेस्टमिंस्टर काउंसिल ने बाद में छोटे मस्जिद के लिए इजाजत दे दी। 2006 में यहाँ एक मेट्रो सिनेमा हुआ करता था, जिसके द्वारा खाली की गई जगह अब मस्जिद बन जाएगी। इसमें 390 नमाजी एक साथ फिट हो सकते हैं। कई मुस्लिमों ने इस इस लोकेशन को ‘अनैतिक’ करार देते हुए यहाँ मस्जिद बनाए जाने पर सवाल खड़ा किया है।

मूल रूप से दक्षिणी-पूर्वी अफ्रीका के मलावी के रहने वाले आसिफ अजीज अपनी कंपनी ‘अजीज फाउंडेशन’ के माध्यम से इस योजना को मूर्त रूप देने पर काम कर रहे हैं। Trocadero का निर्माण सन् 1896 में हुआ था, जहाँ 1997 में यूके का पहला 3D IMAX सिनेमा हॉल खुला। हालाँकि, कई बड़ी कंपनियों के कोशिशों के बावजूद यहाँ आने वाले लोगों की संख्या कम हो गई थी। आसिफ अजीज की कंपनी ‘Criterion Capital’ ने इसे 2011 में खरीद लिया।


अमेरिका : मस्जिद में चल रही थी रमजान की नमाज, चाकू निकाला और इमाम को घोंप दिया

अमेरिका में इमाम को सेरिफ जोरबा (बाएँ) ने चाकू घोंपा (चित्र साभार: NJ.com)
अमेरिका में रमजान की नमाज पढ़ रहे एक इमाम को चाकू घोंप दिया गया। घटना न्यूजर्सी के पेटरसन स्थित उमर मस्जिद की है। हमला रविवार (9 अप्रैल 2023) की सुबह किया गया। 65 साल के इमाम पर जब हमला हुआ, उस वक्त नमाज के लिए मस्जिद में करीब 200 लोग जमा थे। हमलावर की पहचान 32 साल के सेरिफ जोरबा के तौर पर हुई है। वह मूल रूप से तुर्की का रहने वाला है।

हमले में इमाम सैयद एल्नाकिब घायल हो गए। उनका इलाज चल रहा है। मस्जिद में मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। पूछताछ में उसने इमाम पर इस्लाम के नाम पर पैसे वसूलने का आरोप लगाया। यह बात भी सामने आई है कि हमलावर पहले भी इस मस्जिद में कई बार आ चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के उमर मस्जिद जिस इलाके में है, वह अमेरिका में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों में एक है। रविवार को इमाम सैयद एल्नाकिब सुबह के करीब 5:30 बजे पर मस्जिद में 200 लोगों के साथ नमाज पढ़ रहे थे। इसी बीच सेरिफ जोरबा ने उन्हें 2 बार चाकू घोंप दिया। हमले के बाद आसपास के नमाजियों ने उसे पकड़ लिया।

इमाम को नजदीकी अस्पताल सेंट जोसेफ मेडिकल सेंटर में भर्ती करवाया गया है, जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। चाकू लगने से इमाम के फेफड़े में छेद हो गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार हमलावर मूल रूप से तुर्की का है। उसने पूछताछ में हमले की बात कबूली है। बताया है कि वह एक रात पहले ही इमाम को उनके घर में घुस कर मारना चाहता था। उसका कहना है कि इमाम इस्लाम का अपमान कर रहा था।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सेरिफ जोरबा मस्जिद का सदस्य नहीं है। हालाँकि उसके द्वारा इस मस्जिद में पहले भी नमाज़ पढ़े जाने की बात सामने आ रही है। इस घटनाक्रम के 2 वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं। पहले वीडियो में आरोपित नमाज़ के ही दौरान इमाम पर हमला करते दिखाई दे रहा है। हमले के बाद वह भागने का प्रयास करता है। दूसरे वीडियो में नमाज़ी पकड़कर उसकी पिटाई करते दिखाई दे रहे है।

रमज़ान के महीने में मस्जिद में इमाम पर हुए इस हमले पर वहाँ के स्थानीय पार्षद अल अब्देल-अजीज ने चिंता जताते हुए मुस्लिमों से एकजुटता की अपील की है। घटना के बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर आसपास के इबादतगाहों की सुरक्षा बढ़ा दी है।


उत्तर प्रदेश : इलाहाबद हाई कोर्ट के परिसर से 3 महीने में मस्जिद हटाओ, वरना तोड़ा जाएगा : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में बनी मस्जिद को 3 महीने के अंदर हटाने का आदेश दिया है। साथ ही कहा है कि मस्जिद बनाने के लिए वक्फ बोर्ड राज्य सरकार राज्य सरकार से दूसरी जगह जमीन माँग सकता है। इससे पहले साल 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोर्ट परिसर में बनी मस्जिद हटाने का आदेश दिया था।

सोमवार (13 मार्च 2023) को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी कुमार की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मस्जिद हटाने वाले फैसले के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। साथ ही कोर्ट ने मस्जिद हटाने के लिए 3 महीने का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि यदि मस्जिद को 3 महीने के अंदर नहीं हटाया गया तो इलाहाबाद हाई कोर्ट समेत अन्य अधिकारी मस्जिद को तोड़ कर सकते हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता चाहें तो मस्जिद बनाने के लिए राज्य सरकार से दूसरी जगह जमीन माँग सकते हैं।

मस्जिद हटाने का फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि मस्जिद एक सरकारी पट्टे (लीज) वाली जमीन में बनी है। इस लीज को साल 2002 में ही रद्द किया जा चुका है। इसके बाद साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह जमीन सरकारी है। इसलिए कोई भी इस जमीन को लेकर किसी भी प्रकार का दावा नहीं कर सकता।

मस्जिद की ओर से पेश हुए पूर्व कॉन्ग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मस्जिद 1950 के दशक से बनी हुई है। इसलिए ऐसे ही हटाने के लिए नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, “साल 2017 में सरकार बदल गई और सब कुछ बदल गया। नई सरकार के गठन के 10 दिन बाद एक जनहित याचिका दायर की जाती है। दूसरी जमीन मिलने तक हमें मस्जिद कहीं शिफ्ट करने में समस्या होगा।”

वहीं इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि यह पूरी तरह धोखाधड़ी का मामला है। उन्होंने कहा, “नवीनीकरण के लिए दो बार आवेदन किए गए। लेकिन, इस बारे में नहीं बताया गया कि मस्जिद का निर्माण किया गया है और इसका इस्तेमाल जनता के लिए किया जा रहा है। बल्कि यह कहते हुए नवीनीकरण की माँग की गई थी कि आवासीय उद्देश्यों के लिए इसकी आवश्यकता है। सिर्फ यहाँ नमाज पढ़ने से यह जगह मस्जिद नहीं हो जाती। अगर सुप्रीम कोर्ट के बरामदे या हाई कोर्ट के बरामदे में, सुविधा के लिए नमाज की अनुमति दी जाती है, तो यह मस्जिद नहीं बन जाएगा।”

‘इमाम करते थे छेड़छाड़, उनके चेले-चपाटे करते रेप का प्रयास’: देवबंद के मौलाना ने बताया मुस्लिम औरतों ने मस्जिद जाना क्यों किया बंद

                    इमाम शब्बीर (बीच में) के बयान का मौलाना मुशर्रफ और उलेमा इशहाक ने किया विरोध 
अहमदाबाद जामा मस्जिद के शाही इमाम शब्बीर अहमद सिद्दीकी ने मुस्लिम औरतों को चुनावी टिकट मिलने पर एतराज जताते हुए कहा था कि यदि उनका सबके सामने आना जायज होता तो उन्हें मस्जिद में नहीं रोका जाता। उनके इस बयान का विरोध करते हुए देवबंद के मौलाना राव मुशर्रफ ने बताया है कि आखिर औरतें मस्जिद में क्यों नहीं जाती हैं। मौलाना मुशर्रफ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के जिला संयोजक हैं।

मौलाना राव मुशर्रफ के मुताबिक मुस्लिम औरतें मस्जिद में जा सकती हैं। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद न जाने की वजह इमामों द्वारा छेड़खानी और उनके शागिर्दों द्वारा रेप की कोशिश करना बताया है। इस दौरान राव मुशर्रफ ने शेख हसीना और बेनजीर भुट्टो के भी उदाहरण दिए। देवबंद के ही एक अन्य उलेमा कारी इशहाक ने भी जामा मस्जिद के इमाम के बयान को चुनाव के वक्त कही गई बात करार दिया है।

पिछले दिनों शाही इमाम मौलाना शब्बीर अहमद सिद्दीकी ने मस्जिद में औरतों के आने को हराम बताया था। इसके जवाब में मौलाना राव मुशर्रफ ने कहा है कि मस्जिद में मुस्लिम महिलाओं की एंट्री पर कभी रोक नहीं रही है। मुशर्रफ के मुताबिक जब औरतें पुरुषों के साथ हज कर सकती हैं तो वो मस्जिद क्यों नहीं जा सकतीं।

शाही इमाम शब्बीर के बयान की आलोचना करते हुए राव मुशर्रफ ने कहा कि कुरान और हदीस में कहीं भी औरतों को मस्जिद में जाने से मना नहीं किया गया है। दैनिक भास्कर के मुताबिक राव मुशर्रफ ने कहा, “मुस्लिम महिलाओं ने मस्जिद में जाना इसलिए बंद कर दिया था, क्योंकि मस्जिद के इमाम महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करते थे और उनके चेले-चपाटे महिलाओं के साथ बलात्कार करने का प्रयास करते थे।” उन्होंने बेनजीर भुट्टो और शेख हसीना का उदाहरण देते हुए बताया कि अगर इस्लाम में औरतों को बराबर अधिकार न मिले होते तो ये दोनों महिलाएँ प्रधानमंत्री के पद तक कैसे पहुँच पातीं।

राव मुशर्रफ ने इमाम शब्बीर के बयान को भड़काऊ बताते हुए उसे रूढ़िवादी और अलगाववादी करार दिया। उन्होंने कहा कि इमाम शब्बीर जैसे लोगों की बयानबाजी पर रोक लगनी चाहिए। मुशर्रफ के मुताबिक भारत का क़ानून भी औरतों को बराबरी का हक देता है। मुस्लिम महिलाओं को वोट डालने से लेकर चुनाव लड़ने तक का अधिकार है।

वहीं देवबंद से ही जुड़े कारी इश्हाक गोरा ने शाही इमाम शब्बीर के बयान को बेतुका बताया है। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि इमाम शब्बीर कोई भी इस्लामी जानकारी किसी के बयानों के बजाए मुफ्तियों से लिखित तौर पर हासिल करें। कारी इश्हाक के मुताबिक इमाम के ऐसे बयानों ने बेवजह की बहस खड़ी होती है। इश्हाक जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक भी हैं।

जमाती झगड़े पर केरल हाई कोर्ट : मस्जिद में नमाज पढ़ने और कब्रिस्तान में दफनाने से नहीं रोक सकते

फोटो साभार: लॉबिट
हिन्दुओं को जातिवाद के नाम पर विभाजित कर गन्दी सियासत करने वालों को केरल हाई कोर्ट के निर्णय को गंभीरता से देखना चाहिए। यह निर्णय है आंखें खोलने का यानि हिन्दुओं को जातियों में बाँटने वाले यह नहीं देख रहे कि इतनी जातियां होने के बावजूद मुसलमान सिर्फ इस्लाम के नाम पर एक हैं, वरना नफरत इतनी की दूसरे की मस्जिद में नमाज़ पढ़ने और कब्रिस्तान में मुर्दा दफ़नाने के लिए कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, लालू यादव, मायावती, चंद्रशेखर "रावण", राजभर और चिराग पासवान आदि जैसे जाति के नाम पर पार्टियां बनाकर अपना कल्याण करने वालों को शर्म आनी चाहिए कि जिनकी वोटों की खातिर हिन्दुओं को जाति के नाम बांट गन्दी सियासत करते हो, उनमें इतने मन-मुटाव होने के बावजूद इस्लाम के नाम पर एक हैं। 
केरल हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि मुस्लिमों की कोई भी जमात, किसी भी मस्जिद में नमाज पढ़ सकती है और किसी भी कब्रिस्तान में लाशों को दफना सकता है। ऐसा करने से कोई उन्हें रोक नहीं सकता।

न्यायमूर्ति एसवी भट्टी और न्यायमूर्ति बसंत बालाजी की खंडपीठ ने यह फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल के एक मामले में सुनवाई के दौरान दी। अदालत एर्नाकुलम में वक्फ ट्रिब्यूनल द्वारा जारी एक आदेश के खिलाफ जमात द्वारा दायर एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

ट्रिब्यूनल (तत्काल में प्रतिवादी) के समक्ष मूल मुकदमे में वादी उक्त जमात (जमा-आठ) के सदस्य थे, लेकिन केरल नदावुथुल मुजाहिदीन संप्रदाय द्वारा आयोजित एक धार्मिक प्रवचन में भाग लेने के कारण उन्हें बहिष्कृत कर दिया गया था।

इसके बाद ट्रिब्यूनल ने वादी के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि वादी को समान रूप से प्रतिवादी की मस्जिद में नमाज पढ़ने और परिवार के सदस्यों के लाशों को कब्रिस्तान में दफनाने का अधिकार है। इसके बाद इस मामले को हाईकोर्ट में लाया गया।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “मस्जिद इबादत की जगह होती है और हर मुस्लिम मस्जिद में नमाज अता करता है। पहले प्रतिवादी (जामा-आठ) को जमात के सदस्य या किसी अन्य मुस्लिम को नमाज़ पढ़ने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है। लाशों को दफनाना भी एक नागरिक अधिकार है। वादी अनुसूची संपत्ति में स्थित कब्रिस्तान एक सार्वजनिक कब्रिस्तान है। प्रत्येक मुस्लिम नागरिक अधिकारों के अनुसार सभ्य तरीके से दफन होने का हकदार है।”

पुनरीक्षण याचिकाकर्ता की ओर से उच्च न्यायालय के समक्ष पेश हुए अधिवक्ता पी जयराम ने कहा कि जमात और मुजाहिदीन संप्रदाय की धार्मिक मान्यताएँ और प्रथाएँ कई मामलों में भिन्न हैं। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल के आदेश से सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ेगी। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 15 और 25 उल्लंघन भी बताया।

दूसरी ओर, वादी की ओर से पेश अधिवक्ता अब्दुल अज़ीज़ ने तर्क दिया कि वादी को नमाज़ अदा करने या अपने मृतकों को दफनाने से रोकना, केवल इसलिए कि वे मुजाहिदीन संप्रदाय के एक तकरीर में शामिल हुए थे, अवैध था।

जुमे पर नमाज पढ़ने गए अटाला मस्जिद, हिंसा के लिए उकसाया: प्रयागराज हिंसा में गिरफ्तार मोहम्मद सगीर ने बताया

प्रतीकात्मक 
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 10 जून 2022 को जुमे की नमाज़ के बाद हुई हिंसा में फरार आरोपित मोहम्मद सगीर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस पूछताछ में उसने मस्जिद में खुद के भड़काए जाने की जानकारी दी है। 22 जून 2022 को सगीर को जेल भेज दिया गया है। वहीं यूपी पुलिस अभी भी फरार चल रहे 31 अन्य उपद्रवियों की तलाश कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गिरफ्तार आरोपित सगीर का नाम डियर भी है। वह ई रिक्शा चलाता है और साथ में मांस भी सप्लाई करता है। हिंसा के बाद वो करेली में ही छिपा रहा और मौका देख कर अपने एक रिश्तेदार के घर भाग गया था। वो माहौल शांत होने की प्रतीक्षा कर रहा था। हालात सामान्य होते ही वो वापस लौट आया लेकिन खुल्दाबाद थाने की पुलिस ने उसे दबोच लिया।

पुलिस अटाला मस्जिद के मुतवल्ली हाफिज, पार्षद फ़ज़ल खान और AIMIM के जिलाध्यक्ष शाह आलम की भी तलाश कर रही। इन सभी पर मस्जिद में मौजूद लोगों को हिंसा के लिए भड़काने का आरोप है। इन सभी के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रयागराज में हुई हिंसा में कुल 95 नामजद और 5400 अज्ञात उपद्रवियों पर केस दर्ज हुआ है। इन नामजदों में 31 आरोपित अभी भी फरार चल रहे हैं। बता दें कि प्रयागराज हिंसा में शामिल अब तक 103 आरोपित जेल भेजे जा चुके हैं जिसमें कुछ नामजद और कुछ CCTV व अन्य फुटेज से चिन्हित किए गए हैं।

मस्जिद में पढ़ने जाने वाली 8 साल की बच्ची का 52 साल के इमाम ने किया रेप: पीड़िता ने बताया- अल्लाह और कुरान की कसम देकर चुप कराया

                                                 साभार - अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में मस्जिद के एक इमाम पर 8 साल की नाबालिग बच्ची से रेप का आरोप लगा है। आरोपित इमाम का नाम जमाल अहमद है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। बच्ची को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है। घटना 26 जनवरी की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित इमाम की उम्र लगभग 52 साल है। वही किसनी गाँव की मस्जिद में लगभग 10 वर्षों से इमाम है। वह गाँव के बच्चों को इस्लामी शिक्षा दिया करता था। पीड़िता बच्ची भी अपनी बहन के साथ उसी मस्जिद में पढ़ने जाती थी। घटना के दिन बच्ची देर से पहुँची तो उसकी तबियत ठीक नहीं लगी। घर वालों ने उसकी वजह पूछी तो बच्ची रोने लगी। पीड़िता के प्राइवेट पार्ट से खून निकल रहा था।

परिजनों के अनुसार बच्ची ने उन्हें बताया कि जमान अहमद ने सारे बच्चों की छुट्टी कर पीड़िता को पढ़ाई के नाम पर रोक लिया। उसकी छोटी बहन को भी मूँगफली दे कर बाहर भेज दिया। इसके बाद कथित तौर पर आरोपित बच्ची को अलग कमरे में ले गया और उससे कपड़े उतारने को कहे। आरोपित ने अपने कपड़े भी उतार दिए। कथित तौर पर जब खून निकलने लगा और बच्ची रोने लगी तो आरोपित ने उसे अल्लाह और कुरान की कसम देकर चुप कराया। उससे कहा कि यह बात किसी को नहीं बताना है और रोज की तरह पढ़ने आना है।

उसका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। आरोपित उत्तर प्रदेश के ही बाराबंकी जिले के थाना रामनगर के गाँव सुड़िया मऊ का निवासी है। गौरतलब है कि इसी माह 19 जनवरी को UP के ही हरदोई जिले के एक मदरसे में 10 साल के बच्चे के साथ कुकर्म हुआ था। उस घटना में सीनियर छात्र अरबाज़ को गिरफ्तार किया गया था।

पाकिस्तान की मस्जिद में लड़कियों को दी जा रही ‘सिर कलम करने’ की ट्रेनिंग, इस्लाम के अपमान पर ‘बदला लेने’ का तरीका

                                  पाकिस्तान में लड़कियों को दी जा रही सिर कलम करने की ट्रेनिंग
पाकिस्तान की मस्जिदों में लड़कियों को सिर कलम करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहाँ छात्राएँ पढ़ाई-लिखाई नहीं, हिंसा सीख रही हैं। बता दें कि हाल ही में पाकिस्तान में ‘ईशनिंदा’ का आरोप लगा कर एक श्रीलंकाई नागरिक की सैकड़ों की भीड़ ने ज़िंदा जला कर हत्या कर दी थी। इस कारण इमरान खान की सरकार दुनिया भर की आलोचना के निशाने पर है। अब नया वीडियो सामने आया है, जिसमें पाकिस्तान के मस्जिद में लड़कियों को सिर कलम करने की ट्रेनिंग लेते हुए दिखाया गया है। जब मस्जिदों में हिंसा की ट्रेनिंग दी जा रही है, फिर किस आधार पर भारत में छद्दम सेक्युलरिस्ट्स इस्लाम को शांति का पैगाम का नाम देते हैं।  

बताया जा रहा है कि ये वीडियो पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के लाल मस्जिद का है। यहाँ छात्राओं को सिखाया जा रहा है कि अगर कोई व्यक्ति इस्लाम का अपमान करता है तो फिर उसका सिर कैसे कलम किया जाएगा। इस वीडियो के बैकग्राउंड में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) का भड़काऊ नारा लाउडस्पीकर पर बजता हुआ सुनाई दे रहा है। श्रीलंकाई नागरिक प्रियंता कुमारा दियावदाना के हत्यारों की भीड़ भी हिंसा के वक्त यही नारे लगा रही थी।

हाल ही में पाकिस्तान की सरकार ने TLP के साथ समझौता किया है, लेकिन उससे पहले जम कर पूरे मुल्क में उत्पात मचाया गया था। पाकिस्तान की पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गुल बुखारी ने इस वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि पाकिस्तान का ‘कामयाब जवान’ वाला प्रोजेक्ट काफी अच्छे से आगे बढ़ रहा है। इसमें महिलाएँ और छात्राएँ बुर्का और हिजाब में दिख रही हैं। उनके सामने ‘तलवार से सिर कलम करने’ का नमूना दिखाया जा रहा है।

 पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने शिक्षा और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए ‘कामयाब जवान’ योजना शुरू की थी। लगभग तीन महीने पहले भी ‘लाल मस्जिद’ चर्चा में आई थी, जब मौलाना अब्दुल अजीज के सामने घुटने टेकते हुए इमरान खान की सरकार ने उन्हें वहाँ तालिबानी झंडा फहराने की अनुमति दे दी थी। साथ ही मौलवी ने तालिबान का झंडा हटाने पर वहाँ की फ़ौज को भी धमकाया था। उसने कहा था कि पाकिस्तानी तालिबान सबको सबक सिखा देगा।

‘पराई लड़की (हिंदू) लाओ, पैसा और मजा दोनों मिलेगा’: फतेहपुर की मस्जिद का मौलाना फिरोज आलम

मौलाना फिरोज आलम
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर थाना से फतेहपुर पुलिस ने नेपाल के एक मौलवी को गिरफ्तार किया है। मौलवी पिछले 15 साल से भारत में फर्जी पहचान और दस्तावेजों के साथ रह रहा था। यहाँ उस पर मुस्लिम बच्चों को भड़काने और हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण कराने के भी आरोप लगे हैं। मस्जिद सदस्यों ने खुद ही उसके ख़िलाफ़ शिकायत की हुई थी।

अपर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बाताया कि नेपाल देश का एक संदिग्ध नागरिक जो मेवाती मोहल्ला थाना गाजीपुर जनपद फतेहपुर में काफी वर्षों से रह रहा था। यहाँ रहते हुए उसने निर्वाचन कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और 2016 में पासपोर्ट बनवा लिया था। एक संयुक्त टीम ने इसकी जाँच की और बाद में संबंधी धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। अब मामले में पुलिस की ओर से विवेचना की जा रही है। आगे जो कार्रवाई होगी की जाएगी।

पुलिस पड़ताल के दौरान मौलाना ने बताया कि वह नेपाल के महोत्री जिले का रहने वाला है जो 2001 में फतेहपुर आया था और 5 साल तक वहीं रहा। इसके बाद वह गाजीपुर पहुँच गया और वहाँ बड़ी मस्जिद के सदस्यों के संपर्क में आया। सदस्यों ने 2006 में इसे बड़ी मस्जिद की जिम्मेदारी सौंपकर मौलवी बना दिया। यहाँ वह नमाज पढ़ाने के साथ बच्चों को दीनी शिक्षा देता था। लेकिन दो वर्ष से वह झाड़फूंक भी करने लगा था। मस्जिद सदस्यों ने उसकी हरकत देख उसे इमाम पद से हटवा दिया और बीते 24 सितंबर को उसके ख़िलाफ़ शिकायत हुई।

मस्जिद सदस्य ने लगाए गंभीर आरोप

फतेहपुर मस्जिद कमेटी के सदस्य मजीद खान बताते हैं कि मौलाना मुस्लिम युवाओं को गलत शिक्षा देता था। वह कहते हैं कि फिरोज कहीं से घूमते घामते यहाँ आया था। इसके बाद इसे मस्जिद में रखा गया। यहाँ यह मौलवी बन बच्चों को पढ़ाता रहा। 14-15 साल करीब हो गए। लेकिन 2 साल पहले उसे मस्जिद से निकाल दिया गया। क्योंकि वो गलत शिक्षा बच्चों को देता था। कहता था- आप पराई लड़कियों को लाइए, उसमें पैसा भी मिलेगा और मजा भी आएगा। इस तरह से इसने भड़काऊँ बातें की।
मजीद खान बताते हैं कि एक बार कोई ब्राह्मण की लड़की को भगा कर लाया था, तो उसका धर्म परिवर्तन करवा कर उसका निकाह भी फिरोज ने करवा दिया। इस बाबत पुलिस को शिकायत दी गई। लेकिन तब कार्रवाई नहीं हुई। मजीद के मुताबिक, वह बस चाहते हैं कि फिरोज को हटाया जाए ताकि गाँव की एकता खंडित न हो। वह कहते हैं कि ये आदमी अपने आपको नेपाल का बताता है लेकिन होने को ये बांग्लादेश का भी हो सकता है या फिर रोहिंग्या भी हो सकता है।
                                               दैनिक जागरण के फतेहपुर संस्करण में प्रकाशित खबर
इस बीच फिरोज आलम का कहना है कि उस पर लगाए गए धर्मांतरण के आरोप गलत हैं। उसकी बीवी की मौत हो चुकी है और दो बेटियाँ नेपाल में रहती हैं। भारत में जो उसने पासपोर्ट बनवाया वह हज जाने के लिए बनवाया था। लेकिन नहीं जा सका। पुलिस अब इस केस में आलम के दो अन्य साथियों की तलाश कर रही है। पुलिस इस केस में उमर गौतम कनेक्शन को भी तलाश रही है। पुलिस का कहना है कि देश भर में धर्मांतरण का जाल बिछाने वाले उमर का पिछले 10 साल से यहाँ आना जाना रहा है। अब उमर के गाजीपुर मस्जिद आने और मस्जिद से निकाले गए इमाम की उमर से मुलाकात के सबूत जुटाने में पुलिस लगी है। वह शहर नुरुल हुदा इंग्लिश में आता-जाता था। यहाँ की गुप्त बैठकों में धर्मांतरण के लिए रणनीति बनती थीं।

इमाम जलालुद्दीन ने ‘मॉडल’ से किया निकाह, अब कहती है- पहले दाढ़ी कटवाओ, फिर मेरे पास आओ; पान मसाला खाकर मारती भी है

अलीगढ़ के इमाम ने 'मॉडल बीवी' पर लगाया टॉर्चर करने का आरोप
उत्तर प्रदेश के जिला अलीगढ़ में एक मस्जिद के इमाम ने अपनी बीवी पर दाढ़ी कटवाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। इमाम के अनुसार उसकी पत्नी उसे मॉर्डन लड़कों की तरह रहने के लिए कहती है। वह खुद को मॉडल बताती है। पान मसाला खाने से मना करने पर मारपीट करती है। इमाम की शिकायत पर पुलिस जाँच कर रही है। इमाम का वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मामला अलीगढ़ के अकराबाद थानाक्षेत्र का है। इमाम का नाम जलालुद्दीन है। वह मोहल्ला भूखा पिलखना मस्जिद में पेश इमाम है। पेश इमाम के मुताबिक उसका निकाह 1 साल पहले गाँव सत्तारपुर की वीणा के साथ हुआ था। निकाह के बाद से वह उसका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न कर रही है। वह खुद को मॉडल बताते हुए इमाम पर मॉर्डन लड़कों जैसे रहने का दबाव डालती है। बकौल इमाम, “मैं उसे मज़हब का वास्ता दे कर समझाने की कोशिश करता हूँ तो वह मुझे धमकाती है।”

इमाम जलालुद्दीन के अनुसार बीवी उससे अम्मी-अब्बू से अलग रहने को भी कहती है। वह घर का कोई काम नहीं करती। पान मसाला खाती है और मना करने पर गाली-गलौज कर मारपीट करती है। उनका कहना है कि बीवी 17 अक्टूबर 2021 को गहने और नकदी ले कर मायके चली गई। जब उसे लेने वे गए तो बीवी और उसके परिवार ने बदतमीजी की। थाना छर्रा में तीन तलाक और दहेज़ का झूठा केस करने का आरोप भी लगाया है। इमाम का कहना है कि इसके कारन उसका पूरा परिवार सदमे में है।

 इमाम की शिकायत पर अलीगढ़ पुलिस ने संज्ञान लिया है। SP सिटी कुलदीप गुनावत ने मामले की जाँच कर कार्रवाई की बात कही है। थाना अकराबाद SHO को जाँच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।