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उत्तर प्रदेश : अयोध्या में बाबरी के बदले मस्जिद बनाने के मंसूबों पर NOC भारी: सुप्रीम कोर्ट की कृपा से ‘खैरात’ में मिली जमीन तो चंदा खूब वसूला, लेआउट प्लान नहीं हुआ पास

                                               अयोध्या मस्जिद का प्रस्तावित डिजाइन (फोटो- टीवी9)
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने जमीन दे दी लेकिन 5 साल बाद भी उस पर काम ठप पड़ा है। मस्जिद के लिए बने ट्रस्ट ने चंदा तो जुटाया लेकिन सरकारी विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) नहीं ले सका। अब NOC ना होने के चलते इसके लेआउट प्लान को भी अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने खारिज कर दिया है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय पत्रकार ओम प्रकाश सिंह द्वारा दाखिल RTI में सामने आया कि विभिन्न सरकारी विभागों का अनिवार्य NOC ना होने के चलते ADA ने यह प्लान खारिज किया है।

9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक अयोध्या फैसले में राम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया था। साथ ही, मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया था।

इसके बाद 3 अगस्त 2020 को तत्कालीन जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने अयोध्या के पास धन्नीपुर गाँव में पाँच एकड़ भूमि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित कर दी। इसके बाद मस्जिद निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट ने 23 जून 2021 को ADA में लेआउट प्लान की मंजूरी हेतु आवेदन दायर किया था।

RTI के जवाब में ADA ने स्वीकार किया कि मस्जिद ट्रस्ट ने 4 लाख रुपए आवेदन और जाँच शुल्क के रूप में जमा किए। ADA के मुताबिक, मस्जिद निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नागरिक उड्डयन, सिंचाई एवं राजस्व विभाग, नगर निगम, जिलाधिकारी कार्यालय और अग्निशमन विभाग की NOC माँगी गई थी।

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव ने क्या कहा?

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा कि उन्हें अग्निशमन विभाग की ओर से आपत्तियाँ आई थीं। अग्निशमन विभाग की साइट जाँच में पाया गया कि प्रस्तावित मस्जिद और अस्पताल भवन की ऊँचाई को देखते हुए अप्रोच रोड की चौड़ाई कम से कम 12 मीटर होनी चाहिए। जबकि मौके पर दोनों मार्ग छह मीटर से ज्यादा चौड़े नहीं पाए गए और मुख्य सड़क महज चार मीटर चौड़ी निकली थी।

हुसैन ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन देने का आदेश दिया और उत्तर प्रदेश सरकार ने हमें जमीन दी। इसके बाद भी आवश्यक NOC क्यों नहीं मिलीं और ADA ने प्लान को क्यों खारिज किया, यह समझ से बाहर है।”

उन्होंने आगे कहा कि अग्निशमन विभाग की आपत्ति के बारे में उन्हें जानकारी है लेकिन बाकी किसी भी विभाग की आपत्ति को लेकर उन्हें कुछ जानकारी नहीं है। बकौल हुसैन, RTI के जवाब से स्थिति स्पष्ट हो गई है और अब हम आगे की कार्रवाई करेंगे।

इस बीच अयोध्या में भव्य और दिव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है और यह पूरे होने के चरण में है। तो दूसरी और मस्जिद परियोजना लापरवाहियों के चलते अभी तक अधर में ही अटकी हुई है। जो लोग शताब्दियों तक कथित ढांचे को मस्जिद बताते हुए लड़ रहे थे, उनके लिए मस्जिद की प्राथमिकता कितनी है, यह 5 जमीन आवंटन के 5 वर्ष बाद स्पष्ट हो जाता है।

फुस्स लाल सिंह चड्ढा के पाकिस्तान में रिलीज के प्रयास, जहां 3 साल से बैन हैं भारतीय फिल्में

आमिर खान की लाल सिंह चड्ढा (Laal Singh Chaddha) पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं कर पाई। यह बीते 13 साल में आमिर खान की ओपनिंग डे पर सबसे कम कमाई करने वाली फिल्म है। रक्षाबंधन के मौके पर गुरुवार (11 अगस्त 2022) को यह फिल्म रिलीज की गई थी। अब इसे पाकिस्तान में भी रिलीज कराने के प्रयास हो रहे हैं, जिसने बीते 3 साल से भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगा रखा है।

पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों पर प्रतिबन्ध कोई नई बात नहीं। फ़िल्मी इतिहास साक्षी है कि भारत में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी फिल्में पाकिस्तान में ही सफल होती रही हैं। और निर्माता अपने नुकसान की भरपाई कर पाता है। अभिनेता-निर्माता शेख मुख्त्यार फिल्म 'नूरजहां' बनाने में कर्जे में डूब गए थे, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह जा पड़ी, शेख को कर्जा चुकता करने के लाले पड़ गए, उस स्थिति में उन्हें फिल्म को पाकिस्तान में रिलीज़ करने का सुझाव तो दिया, लेकिन पाकिस्तान में भारतीय फिल्में प्रतिबंधित होने के आशा की किरण भी लुप्त ही थी, लेकिन संकटमोचन बने वर्तमान सांसद अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा, जिन्हे तत्कालीन प्रशासक जिया-उल-हक़ अपना बेटा मानते थे, के प्रयास से शेख मुख्त्यार पाकिस्तान में अपनी असफल फिल्म को रिलीज़ करते ही मानों कर्ज में डूबे शेख को ऑक्सीजन मिल गयी, और कर्ज मुक्त होकर अल्लाह को प्यारे हो गए।  

‘लाल सिंह चड्ढा’ ने बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन करीब 10-11 करोड़ की कमाई की है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर गुरुवार की सुबह बेहद धीमी शुरुआत की। इसे देखकर ऐसा लगा कि शायद फिल्म 10 करोड़ तक का भी कलेक्शन नहीं कर पाएगी। लेकिन, दोपहर बाद फिल्म ओपनिंग डे में करीब 10-11 करोड़ का आँकड़ा छूने में कामयाब रही। कहा जा रहा है कि फिल्म दिल्ली और पंजाब में बेहतर प्रदर्शन कर रही है, लेकिन देश के बाकी हिस्सों में यह दर्शकों के लिए तरस रही है।

‘लाल सिंह चड्ढा’ की ओपनिंग डे की कमाई निर्देशक कबीर खान की फ्लॉप फिल्म ’83’ और फरहाद सामजी की फिल्म ‘बच्चन पांडे’ से भी कम रही है। बॉक्स ऑफिस इंडिया के मुताबिक, ’83’ ने अपने ओपनिंग डे में 15 करोड़ रुपए और बच्चन पांडे ने 13.25 करोड़ रुपए कमाए थे। वहीं, यह फिल्म इस साल की सुपरहिट फिल्मों के ओपनिंग डे के करीब भी नहीं पहुँच सकी। ‘लाल सिंह चड्ढा’ ने जहाँ 10-11 करोड़ रुपए की ओपनिंग की, वहीं ‘आरआरआर’ ने पहले दिन 20.7 करोड़ रुपए और ‘केजीएफ चैप्टर 2’ ने पहले दिन 53.95 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था।

बॉलीवुड विशेषज्ञों के अनुसार, आमिर खान की फिल्म को 30 करोड़ रुपए की ओपनिंग मिलनी चाहिए थी। फिल्म का ओपनिंग डे का कलेक्शन 20 करोड़ रुपए से कम नहीं जाना चाहिए था। हालाँकि, दर्शकों ने फिल्म को सिरे से नकार दिया है।

दूसरी तरफ पाकिस्तान में इस फिल्म को को रिलीज करने के प्रयास हो रहे। सिनेपैक्स मीडिया ग्रुप के महाप्रबंधक साद बेग ने द एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया कि उन्होंने सूचना मंत्रालय से पाकिस्तान में लाल सिंह चड्ढा की रिलीज की अनुमति माँगी है। साद ने बताया, “हमने सूचना मंत्रालय को एनओसी के लिए आवेदन किया है। अगर हमें एनओसी मिलती है, तो फिल्म पाकिस्तान में रिलीज होगी।” साल 2019 में पुलवामा अटैक के बाद से पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लिया गया था।

वहीं, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) और सिंध बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने पाकिस्तान में ऐसी किसी भी रिलीज से इनकार किया है। सूचना मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तान में ‘लाल सिंह चड्ढा’ की रिलीज के लिए एक एनओसी जमा किया गया है। साथ ही कहा है कि हमारी नीति एक जैसी है। कोई भी भारतीय फिल्म या भारत में बना कोई भी प्रोजेक्ट पाकिस्तान में रिलीज नहीं होगा।