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‘जानवर, लाश और बच्ची से सेक्स जायज, नहाना भी ज़रूरी नहीं’: दारुल उलूम में बच्चों को दी जा रही स्तरहीन शिक्षा

NCPCR के संज्ञान के बाद दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट से हटाए गए 'बहिश्ती जेवर' के फतवे (साभार- ABP न्यूज़ और हिंदुस्तान)
प्रमुख इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद एक बार फिर से चर्चा में है। दरअसल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने शरई मसलों पर लिखी गई एक किताब ‘बहिश्ती जेवर’ के फतवों पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए देवबंद के डीएम और एसपी को नोटिस भेजा था। इसमें दारुल उलूम देवबंद में बच्चों को दी जा रही तालीम पर सवाल उठाए गए थे। जिस पर कार्रवाई करते हुए शासन ने देवबंद की वेबसाइट से उन विवादित अंशो को हटवा दिया है। जिसकी जानकरी अधिकारियों ने आयोग को 19 अक्टूबर, 2023 को दी।

शासन द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी देते हुए NCPCR के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने रविवार (22 अक्टूबर, 2023) को पोस्ट किया, “नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण के तौर तरीक़े बताने वाली मौलाना अशरफ़ अली थानवी की किताब बाहिश्ती ज़ेवर,मदरसा दारुल उलूम देवबंद सहारनपुर द्वारा फ़तवे जारी करने व बच्चों को सिखाने के काम में ली जा रही थी। जिस पर NCPCR ने संज्ञान ले कर ज़िला प्रशासन को नोटिस जारी किया था। ज़िला प्रशासन सहारनपुर ने तत्परता पूर्वक कार्यवाही करते हुए अवगत करवाया है कि उक्त किताब का उपयोग बंद करवा दिया गया है व संबंधित फ़तवे भी दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट से हटवा दिए गए हैं। शेष जाँच जारी है।”

दरअसल, दारुल उलूम के मदरसों में ऐसा पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा था, जिसमें कई विवादित संदर्भ व फतवे शामिल थे। जैसे जानवरों से रेप, मृत महिलाओं और नाबालिग बच्चियों से यौन सम्बन्ध के तौर तरीके बताए गए थे एवं उन्हें जायज ठहराया गया था। यहाँ तक कि नहाना भी जरुरी नहीं था। जिस पर दिल्ली की सामाजिक संस्था मानुषी सदन ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत की थी। इसके बाद ही NCPCR की नोटिस के बाद अब इसे वेबसाइट व पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।

मानुषी सदन संस्था ने गत 7 जुलाई, 2023 को शिकायत की थी कि इस्लामिक विद्वान दिवंगत मौलाना अशरफ अली थानवी की 100 साल पुरानी किताब “बहिश्ती जेवर” के जरिए दारुल उलूम छात्रों को नाबालिगों पर आपराधिक हमले, अवैध संबंध, दुष्कर्म और नाबालिगों की शादी की पढ़ाई करा रहा है।

जिसके बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सहारनपुर के डीएम व एसएसपी को जाँच करने व दारुल उलूम की वेबसाइट पर उपलब्ध ऐसी विवादित सामग्री को हटाने के लिए कहा था। साथ ही अधिकारियों को आयोग में तलब भी किया था।

आयोग की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया था कि बच्चों को दारुल उलूम की तरफ से जारी फतवों को पढ़ाया जा रहा है। बच्चों को वो फतवे पढ़ाए जा रहे हैं जो वेबसाइट पर मौजूद हैं। और यह बाल अधिकार के खिलाफ है। 

आयोग ने कहा कि उन्हें दारुल उलूम देवबंद की तरफ से जारी फतवों के खिलाफ एक शिकायत भी मिली है। फतवे में ‘बहिश्ती जेवर’ नामक पुस्तक का जिक्र है, जो बच्चों के लिए आपत्तिजनक, अनुचित और अवैध है। 

इसी मामले में 19 जुलाई, 2023 को बाल संरक्षण आयोग के निर्देश पर एसडीएम संजीव कुमार के नेतृत्व में सीओ रामकरण सिंह, डीआईओएस योगराज सिंह, डीएसओ डॉ. विनिता, बीईओ डॉ. संजय डबराल की टीम दारुल उलूम पहुँची थी। टीम ने संस्था के नायब मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी और सद्र-मुदर्रिस मौलाना अरशद मदनी से मुलाकात की थी और पूरे मामले की जाँच की थी।

इस मामले में दारुल उलूम के जिम्मेदारों ने टीम को बताया था कि पुस्तक से संस्था का कोई वास्ता नहीं है। जिसके बाद उन्हें वेबसाइट से हटवा दिया गया। वहीं अब 19 अक्टूबर, 2023 को आयोग में प्रस्तुत होकर अधिकारियों ने बताया कि चार सदस्यीय टीम की जाँच के बाद विवादित सभी फतवों और पुस्तक को दारुल उलूम समेत अन्य सभी वेबसाइट से हटवा दिया गया है।

भारत में मस्जिदें बनाने के लिए विदेशी फंडिंग, महानगरों में रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने की साजिश: देवबंद से जुड़े आतंकियों के तार

               दारुल उलूम देवबंद से जुड़े हैं UP ATS द्वारा भारत विरोधी साजिश में गिरफ्तार अधिकतर साजिशकर्ता
राहुल पाण्डेय

उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (ATS) ने 11 अक्टूबर, 2023 को 10 संदिग्ध आतंकियों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। इनके नाम आदिल उर रहमान अशरफी, अबू हुरैरा गाज़ी, शेख नज़ीबुल हक, मोहम्मद राशिद, कफीलुद्दीन, अज़ीम, अब्दुल अव्वल, अबु सालेह, अब्दुल गफ्फार और अब्दुल्ला गाजी हैं। इन सभी पर विदेशों से अवैध तौर पर पैसे मँगवा कर भारत में मस्जिदें बनवाने, रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में अवैध तौर पर बसाने और देश विरोधी गतिविधियाँ चलाने का आरोप है।

इस पूरे मामले में खास बात ये है कि यूपी ATS द्वारा गिरफ्तार अधिकतर साजिशकर्ता देवबंद के दारुल उलूम से जुड़े पाए गए। इन 10 आरोपितों में दिल्ली निवासी अब्दुल अव्वल अवैध तरीके से उत्तर प्रदेश, दिल्ली और असम के निवासियों के कागजात को हासिल कर के बैंक खाते खुलवाता है। बाद में वो खाते दिल्ली के ही अब्दुल गफ्फार को सौंप देता है। गफ्फार इन खातों में विदेशों से पैसे मँगवाता है। ये पैसे मँगवाने में अबु सालेह भी गफ्फार की मदद करता है।

विदेशों और देश के कई अन्य हिस्सों में मँगवाया गया ये धन हवाला के जरिए नजीबुल शेख तक पहुँचाया जाता था। नजीबुल शेख की सहारनपुर में दारुल उलूम देवबंद के पास टोपी और परफ्यूम की दुकान हैं।

बंगाल का नजीबुल, दारुल उलूम के सामने सेंट-टोपी की दुकान

ATS के मुताबिक, मूल रूप से पश्चिम बंगाल और अस्थाई तौर पर देवबंद में रह रहे नजीबुल ने बांग्लादेशी अतीक उर रहमान को अपने सहयोगी के रूप में रखा हुआ था। अतीक उर रहमान ने फर्जी कागजात से भारत का आधार व पैन कार्ड आदि बनवा रखा था। ये सभी एक गैंग के तौर पर काम कर रहे थे जो बांग्लादेशियों व रोहिंग्या नागरिकों को भारत में घुसपैठ करवाते थे और उनके भारतीय कागजात बनवाया करते थे। इन बांग्लादेशियों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में बसाया जा रहा था।
11 अक्टूबर, 2023 को ATS को मुखबिर से सूचना मिली कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ संदिग्ध लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर मौजूद हैं। ATS ने दबिश दे कर आदिलुर रहमान अशर्फी को दबोच लिया। इधर इसी दिन ATS की सहारनपुर यूनिट ने अबू हुरैरा और नजीबुल शेख को दबोच लिया। इन सभी से ATS मुख्यालय लखनऊ ला कर पूछताछ की गई। नजीबुल ने खुद को पश्चिम बंगाल का निवासी बताया जो फिलहाल देवबंद में दारुल उलूम के सामने परफ्यूम और टोपी की दुकान चला रहा था।
पूछताछ में नजीबुल ने कबूल किया कि उसे हवाला से पैसे मिलते थे। वहीं आदिलुर रहमान ने अपना असल नाम आदिल अहमद अशरफी बताया जो मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला है। फर्जी कागजात से भारतीय बना आदिल अहमद फ़िलहाल देवबंद दारुल उलूम में पढ़ाई कर रहा था। इस नेटवर्क ने हाल में ही एक बांग्लादेशी महिला को अवैध तौर पर बॉर्डर पार करवा कर किसी इब्राहिम नाम के भारतीय पुरुष को 70,000 रुपए में बेच दिया था। महिला को बरामद करने के बाद इब्राहिम सहित गिरफ्तार कर लिया गया है, उसके कागजात फर्जी पाए गए हैं। पश्चिम बंगाल के रहने वाले वाले तीसरे आरोपित अबू हुरैरा ने बताया कि वो फिलहाल दारुल उलूम में देवबंद की छत्ता मस्जिद में रहता था।
UP ATS ने इन सभी से इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल उपकरण, मोबाइल, ATM कार्ड, संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा, भारतीय कैश, सिमकार्ड, आधार कार्ड, मदरसे का कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट बरामद किया। इन सभी आरोपितों पर IPC की धारा 120- बी, 419, 420, 467, 468, 471, 370 और विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 14 के तहत कार्रवाई की है। इसमें से 3 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनके नाम आदिल उर रहमान, नजीबुल शेख और हुरैरा गाज़ी हैं। बाकी सभी फरार चल रहे हैं। फिलहाल इस केस की विवेचना ATS के मेरठ यूनिट प्रभारी इंस्पेक्टर धर्मेंद्र यादव कर रहे हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
ऑपइंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, विदेशी पैसों से मस्जिदों का निर्माण पहले चरण में पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब और बांग्लादेश बॉर्डर के पास पश्चिम बंगाल में होना था। हालाँकि, ATS फिलहाल इस आतंकी नेटवर्क की जड़ और इसके आर्थिक स्रोतों का पता लगाने में जुटी हुई है। साथ ही अभी इन मस्जिदों के निर्माण का मकसद भी सामने आना बाकी है।

दारुल उलूम में लगातार की जा रही थी बांग्लादेशी घुसपैठियों की मदद

उत्तर प्रदेश ATS की जाँच में आदिल उर रहमान अशरफी के पास से दारुल उलूम देवबंद का पहचान पत्र मिला था। वह मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला बताया गया। हालाँकि, बाद में दारुल उलूम ने आदिल उर रहमान को अपना छात्र मानने से इनकार कर दिया था। यद्यपि ऑपइंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आदिल उर रहमान अक्सर देवबंद के अंदर आया-जाया करता था। वह यहाँ कई बार नमाज़ पढ़ते और पढ़ाते हुए भी देखा गया था।
इसी केस में पकड़ा गया एक अन्य आरोपित भी देश विरोधी कृत्यों में शामिल था। वो खुद को गाज़ी बताता था। उसका नाम अबू हुरैरा है जो भले ही पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का रहने वाला था लेकिन फिलहाल वो दारुल उलूम देवबंद की छत्ता मस्जिद में रहता था। बांग्लादेशी घुसपैठियों का पैसा अपने खाते में मँगवाने वाला पश्चिम बंगाल में 24 परगना निवासी शेख नजीबुल दारुल उलूम देवबंद के सामने ही लम्बे समय से परफ्यूम और टोपी बेचने की दुकान चला रहा था।
इस से पहले 19 जुलाई, 2023 को UP ATS ने एक अन्य FIR दर्ज की थी। तब ATS ने हबीबुल्लाह मिस्बाह और अहमदुल्लाह को गिरफ्तार किया था। हबीबुल्लाह मूल रूप से बांग्लादेश के दिनाजपुर का रहने वाला निकला था जिसके पास दारुल उलूम देवबंद का परिचय पत्र बरामद हुआ था। वह दारुल उलूम देवबंद के पास रुखसाना बिल्डिंग में रहता था। हबीबुल्लाह कुछ समय तक आदिल उर रहमान का रूम पार्टनर भी रह चुका है। इन अवैध घुसपैठियों ने भी फर्जी तरीके से भारतीय पहचान पत्र बनवा रखे थे।
इन सभी के अलावा ATS ने 28 अप्रैल 2022 को भी एक FIR दर्ज करवाई थी। तब तलहा तालुकदार बिन फारुख नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया गया था। तलहा मूलतः बांग्लादेश का रहने वाला था जो फर्जी कागजातों से भारतीय बन कर दारुल उलूम देवबंद की बिल्डिंग दर ए जदीद के कमरा नंबर 61 में रहता था। ATS को तलहा तालुकदार के पास से दारुल उलूम देवबंद के वजीफे की रसीद भी बरामद हुई थी। पूछताछ में तलहा तालुकदार ने कबूल किया था कि उसके साथ सलाउद्दीन सालिम और इफ्तकार नाम के 2 अन्य बांग्लादेशी भी अवैध तौर पर दारुल उलूम में रह कर अरबी पढ़ रहे थे। (साभार)

‘मुस्लिम महिलाओं के हस्तमैथुन’ से लेकर ‘सेक्स के बाद नहाने’ तक: दारुल उलूम देवबंद के फतवे

इस्लाम में ‘क्या सही है और क्या नहीं’ इसकी जानकारी के लिए दारुल उलूम देवबंद के पास सैंकड़ों मुस्लिम आते हैं। वे अपनी निजी जीवन से संबंधी कुछ सवाल करते हैं और देवबंद से उन्हें जवाब ‘क्या हलाल है क्या हराम’ इसके आधार पर फतवा जारी करके दिया जाता है। इन्हीं सवालों में कई सवाल महिलाओं से जुड़े होते हैं। कुछ प्रश्न हस्तमैथुन पर होते हैं, कुछ सेक्स से जुड़े और कुछ गैर मजहबी औरतों से जुड़े।

ऑपइंडिया दोबारा कुछ चुनिंदा सवालों की सूची आपके लिए देवबंद की साइट दारुलइफ्ता से लेकर आया है। ये सारे सवाल महिलाओं से संबंधी हैं।

गैर-किताबी महिला से निकाह 

दारुलइफ्ता साइट पर जॉर्डन के एक शख्स ने मजहबी सलाह पाने के लिए दारुल उलूम से सवाल किया कि उसने एक जर्मन लड़की से शादी की थी। मगर लड़की न तो इस्लाम और न ईसाइयत और न ही कोई धर्म मानती है। वह मौत के बाद की जिंदगी और हूरों में भी विश्वास नहीं करती। मगर निकाह से पहले उसने ‘ला इला इल्लाह’ बोला है। शौहर ने पूछा कि आखिर उनकी शरिया के अनुसार क्या स्थिति है। वो अपनी बीवी को छोड़ना नहीं चाहता।

एक मजहबी शौहर के सवाल पर दारुल उलूम ने कहा कि अगर उस व्यक्ति की बीवी कोई मजहब नहीं मानती है तो मतलब है कि वो नास्तिक है/काफिर है। उससे साफ पूछा जाना चाहिए कि वो अल्लाह को मानेगी या नहीं और अगर वो मानने से मना करती है तो उससे फौरन दूरी बना ली जानी चाहिए।

वलीमा के कार्ड में दुल्हन का नाम

गैर-मजहबी महिला से जुड़े सवाल के अलावा इस साइट पर कई सवाल मजहबी लड़कियों/महिलाओं को लेकर भी हैं। यहाँ एक व्यक्ति ने सवाल किया हुआ है कि क्या वो अपने वलीमा के कार्ड में अपनी होने वाली बीवी का नाम छपवा सकता है या नहीं। इस सवाल के जवाब में दारुल उलूम देवबंद ने उसे बताया कि होने वाली बीवी का नाम दावत पत्र में नहीं लिखवाना चाहिए।

बैंक में काम करने वाले आदमी के घर निकाह

अगला सवाल है कि क्या उस परिवार से निकाह के ऑफर को स्वीकारा जाना चाहिए जहाँ लड़की के पिता बैंक क्षेत्र में हों। इस प्रश्न के जवाब में दारुल उलूम की ओर से कहा गया कि जो लोग हराम के पैसे कमाते हैं उनमें  नैतिकता की कमी होती है इसलिए ऐसे रिश्तों से बचा जाना चाहिए।

मुस्लिम महिला हस्तमैथुन कर सकती है क्या?

मजहबी शिक्षा से संबंधी साइट पर हस्तमैथुन को लेकर भी सवाल किए गए हैं। पूछा गया है कि क्या शरिया लॉ के अनुसार मुस्लिम लड़की हस्तमैथुन कर सकती है या नहीं। देवबंद ने इस सवाल पर जवाब दिया कि किसी भी मुस्लिम लड़की को ऐसे गुनाह करने से बचना चाहिए।

यौन संबंध के बाद नहाना जरूरी या नहीं?

ये सवाल एक महिला ने किया है। वह पूछती हैं कि अगर कोई शादीशुदा महिला सिर्फ संतुष्टि के लिए उंगली से स्पर्श करवाती है और कोई तरल पदार्थ बाहर नहीं निकलता तो क्या नहाना या खुद को साफ करना जरूरी है या नहीं। इसके जवाब में उसे बताया गया कि अगर खातून बिना किसी वासना के अपनी योनि में उंगली डालती है और उसे कुछ महसूस नहीं होता तो नहाना आवश्यक नहीं है। मगर ये काम अगर शौहर ने किया हो तो नहाना जरूरी है।

बहन की आधुनिक शिक्षा पर सवाल

इस साइट पर एक व्यक्ति ने अपनी 14 साल की बहन के लिए सवाल किया कि उसकी बहन मॉर्डन शिक्षा ले रही है और इस्लाम के निर्देश नहीं मानती। उसे इस्लामी संस्थान भी भेजा गया। दारुल उलूम ने इस सवाल को सुनकर कहा कि उन लोगों की कोशिशें फायदा देंगी और बहन जल्दी इस्लामी मानदंडों को अपनाना शुरू कर देगी।
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कंडोम से लेकर पेपर में नकल, स्मार्टफोन के कैमरे और फर्जी अटेंडेस तक… दारुल उलूम देवबंद के 6 अजीब
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कंडोम से लेकर पेपर में नकल, स्मार्टफोन के कैमरे और फर्जी अटेंडेस तक… दारुल उलूम देवबंद के 6 अजीब
अपने विवादित फतवों के कारण आए दिन चर्चा में रहने वा

विवादित फतवों के लिए नामी है दारुल उलूम देवबंद

इस्लामी शिक्षा देने के लिहाज से स्थापित किया गया दारुल उलूम देवंबंद मुस्लिमों में बेहद जाना-माना शिक्षण संस्थान है। ये उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में स्थित है और विवादित फतवों के लिए जाना जाता है। साल 2018 में इनकी ओर से सीसीटीवी लगाने का विरोध किया गया था। इसी प्रकार महिलाओं के फुटबॉल देखने पर भी इन लोगों ने विरोध किया हुआ है। इतना ही नहीं, एक बार इस जगह से फतवा जारी किया गया था कि चूड़ियाँ पहनाते वक्त भी दुकानदार को महिला को छूना नहीं चाहिए। अभी हाल में ‘गोद लिए बच्चे के वारिस बनने या न बनने’ पर फतवा जारी करके ये विवादो में आया था।

कंडोम से लेकर पेपर में नकल, स्मार्टफोन के कैमरे और फर्जी अटेंडेस तक… दारुल उलूम देवबंद के 6 अजीब फतवे

अपने विवादित फतवों के कारण आए दिन चर्चा में रहने वाला दारुल उलूम देवबंद हाल में ‘गोद लिए बच्चे के वारिस बनने या न बनने’ पर अपने फतवा के कारण चर्चा में है। ये पहली बार नहीं है कि देश के मुसलमानों को इस्लामी शिक्षा देने के लिहाज से स्थापित हुआ ये संस्थान विवाद में आया हो, कई बार अपने अजीबोगरीब फतवों की वजह से ये मीडिया सुर्खियों में रहा है और दिलचस्प बात ये है कि संस्थान एक दारुलइफ्ता नाम से साइट चलाता है जहाँ मुसलमानों के सवालों के जवाब दिए जाते हैं और आए दिन नए-नए फतवे जारी होते हैं।

 darulifta-deoband.com साइट पर मुस्लिम आते हैं। अपने अजीबोगरीब सवाल रखते हैं। फिर दारुल उलूम देवबंद की ओर से उन्हें ज्ञान दिया जाता है और फतवा जारी कर बताया जाता है कि जो वो कर रहे हैं वो इस्लाम के लिहाज से हलाल है या हराम। हमने इस साइट से चंद सवाल छाँटे हैं जिनपर जारी फतवे यदि आप पढ़ेंगे तो हो सकता है कि कुछ आपको बेहद हास्यास्पद लगें और कुछ ऐसे लगें जो बताते हैं कि आखिर कैसे पिछड़ी सोच के पीछे मजहबी ठेकेदारों को हाथ होता है।

सवाल-जवाब और फतवे

पहला सवाल देखिए- एक व्यक्ति ने पूछा कि वो Paytm में काम करता है और उसका सवाल है कि उसे जो सैलरी मिलती है अगर वो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से कंपनी को मिले इंटरेस्ट पर मिलती है। तो क्या उसकी सैलरी हराम है या हलाल?

आप सोचेंगे कि ये कैसा सवाल है। लेकिन, दारुल उलूम ने इस पर गंभीर विचार करके जवाब दिया हुआ है। फतवा संख्या 866/864/B=9/1438 के अनुसार कहा गया अगर कंपनी अपने कर्मचारी को आरबीआई से मिले ब्याज में से सैलरी दे रही है तो ये हलाल बिलकुल नहीं है। दारुल उलूम ने सवाल पूछने वाले को कोई अच्छी नौकरी ढूँढकर इस नौकरी को छोड़ने की सलाह दी हुई है।

                                     साभार सभी चित्र दारुलइफ्ता साइट से लिया गया स्क्रीनशॉट

दूसरा सवाल है कि क्या कोई व्यक्ति कैमरे वाला मोबाइल इस्तेमाल करते हुए उसमें तस्वीरें ले सकता है? उसमें वीडियो बना सकता है? देवबंद की ओर से फतवा नंबर 1157/B=1335/B के तहत इस सवाल के जवाब में कहा गया कि मोबाइल फोन का काम संपर्क करने के लिए है। इसलिए सिर्फ इतना ही इस्तेमाल उसका किया जा सकता है। लेकिन किसी जीवित की तस्वीर लेना, फोटोग्राफी करना इस्लाम में नहीं है, इसलिए इससे तस्वीरें लेना और वीडियो फिल्म बनाना दारुल उलूम के हिसाब से बिलकुल ठीक नहीं है।

तीसरा सवाल: क्या अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए इस्लाम में कंडोम के इस्तेमाल को अनुमति दी गई है? देवबंद द्वारा जारी जवाब में फतवा 517/440/B=1431 जारी कर बताया गया कि बिन किसी कारण के कंडोम का इस्तेमाल जायज नहीं है। ये इस्लामी कानून के विरुद्ध है। हाँ! अगर बीवी कमजोर है और गर्भ नहीं धारण कर सकती है या बीमार रहती है तो फिर कंडोम का इस्तेमाल हो सकता है।

चौथा सवाल: क्या नकल करके पास होना जायज है या नाजायज और किसी भी काम से पैसा कमाना हराम है या हलाल? इस सवाल के जवाब में देवबंद की ओर से जारी फतवा नंबर 490/490=M/1429 के मुताबिक बताया गया कि अगर कोई पास हो जाए नकल करके तो वो नाजायज है मगर इससे उसे जॉब मिले, डिग्री मिले और वो अपनी जिम्मेदारी पूरी कर पाए तो ये जायज हो जाएगा। बस उसे नकल के लिए गुनाह लगेगा। इसलिए ऐसा करने से बचना चाहिए।

पाँचवा सवाल एक लड़के ने किया कि क्या वो एक ऐसी शेरवानी पहन सकता है जिसपर ब्रोकेड के फेब्रिक का काम हो। इस सवाल पर देवबंद ने फतवा 244/226/SD=3/1439 जारी करते हुए कहा कि अगर शेरवानी सिल्क की है और उसपे कोई चांदी या सोने के धागे का इस्तेमाल नहीं है तो उसे पहना जा सकता है। उसे निकाह समारोह में पहना जा सकता है। लेकिन इस पर फिजूल खर्जी और इसे घमंड के साथ पहनना जायज नहीं है। शरीया के अनुसार इतने कीमती कपड़े पहनना ठीक नहीं है।  अगर शेरवानी में सोने-चांदी के धागे से कारीगरी है तो सवाल दोबारा पूछा जाए।

छठा सवाल फर्जी अटेंडेंस साइन को लेकर है। किसी ने पूछा कि वो रोज कॉलेज में मौजूद नहीं हो पाता है तो क्या अपने दोस्तों से प्रॉक्सी लगवाना सही है या नहीं। इस पर देवबंद ने फतवा नं 793/671/N=7/1439 के जरिए बताया कि इस तरह फर्जी अटेंडेंस लगाना या लगवाना गलत है। ये बहुत गलत है। जो भी ऐसा करता है वो गुनहगार है।

ये वो चंद सवाल-जवाब हैं जो हमें दारुलइफ्ता-देवबंद की साइट पर पढ़ने को मिलते हैं। इनके अलावा इस साइट पर तमाम ऐसे सवाल किए जाते हैं जो किसी सामान्य जन को बेहद बचकाना लगें। लेकिन, यहाँ पूछने वाले के लिए ये गंभीर विषय होता है और दारुल उलूम भी इसका जवाब बेहद संजीदा ढंग से फतवा जारी करके देता है।