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तेल को तरस जाएगी दुनिया, इस्लामी मुल्कों की ही कमाई हो जाएगी बंद: क्या है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’, ईरान-इजरायल युद्ध के बीच चर्चा में क्यों?

                           इजरायल- ईरान युद्ध के बीच चर्चा में होर्मुज जलडमरूमध्य (फोटो- Opindia)
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई समस्या भी मुँह बाए खड़ी है। समस्या की जड़ असल में ईरान से जुड़ी है। दोनों देशों का युद्ध में दुनिया भर के लिए गैस और तेल की कीमतें बढ़ा सकता है।

असल में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) को लेकर कयास लग रहे हैं कि ईरान इस रास्ते को बंद कर सकता है। हालाँकि अब तक तो ऐसा नहीं हुआ है लेकिन भविष्य में अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनियाभर के लिए काफी महत्वपूर्ण रास्ता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित है। ये फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। ये इतना गहरा और चौड़ा है कि दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के टैंकर्स को भी आराम से संभाल सकता है। इसके साथ ही यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट्स में भी शामिल है।

क्यों जरूरी है ये जलडमरूमध्य

इस रास्ते से काफी बड़ी मात्रा में तेल को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाया जाता है। अगर ईरान इस रास्ते को बंद करता है तो दुनियाभर के कई देशों को इसका नुकसान झेलना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस तेल के लिए रास्ते से परे अन्य वैकल्पिक रास्ते काफी कम और लंबे हैं।

अगर किसी एक चोकप्वाइंट से दूसरे तक के बीच कोई भी परेशानी होती है तो सबसे पहले आपूर्ति में देरी होगी। इसके चलते शिपिंग की लाग बढ़ेगी और अतंतः वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में इजाफा होगा।

इस बात को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी नौसेना का पाँचवाँ बेड़ा बहरीन के मनामा में रहकर जलडमरूमध्य की निगरानी करता है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह से रुकावट आती है या इसे अस्थायी रूप से बंद किया जाता है, तो इससे वैश्विक तेल बाजार में झटके लग सकते हैं।

अगर आँकड़ों की बात करें तो इस जलडमरूमध्य से 2024 में प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल तेल का आवागमन हुआ था। ये आँकड़ा वैश्विक पेट्रोलियम खपत का लगभग 20% के बराबर था। वहीं 2025 के शुरुआती तीन महीनों में पेट्रोल का कारोबार 2024 की अपेक्षा स्थिर ही रहा। 2024 और 2025 के आँकड़ों में होर्मुज से होकर जाने वाले तेल वैश्विक तेल व्यापार का एक चौथाई से अधिक और पेट्रोलियम उत्पाद और तेल के खपत का लगभग 5वाँ हिस्सा होगा।

बैरल, पेट्रोल या कच्चे तेल को मापने की इकाई है जिसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार का लिए होता है। एक बैरल 159 लीटर के बराबर होता है।

वोर्टेक्सा द्वारा प्रकाशित टैंकर ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक कच्चा तेल और कंडेनसेट का आवागमन करता है। 2024 में सऊदी अरब से कच्चे तेल और कंडेनसेट का निर्यात पूरे कारोबार का 38% था।

अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कार्रवाई करता है तो सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को नुकसान पहुँचेगा। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए सऊदी और UAE ने इस रास्ते को बायपास करने का एक बुनियादी ढाँचा तैयार कर रखा है।

इसके तहत पाइपलाइनें बिछाई गई हैं जो इस रास्ते में आने वाले अड़ंगों को कुछ हद तक कम कर सकता है। हालाँकि ये पाइपलाइनें पूरी तरह से संचालित नहीं होतीं, फिर भी किसी तरह के व्यवधान होने पर सऊदी अरब और UAE होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास कर प्रतिदिन 260 लाख बैरल प्रतिदिन के आवागमन की क्षमता रखती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में आठ प्रमुख द्वीप हैं। इनमें से सात पर ईरान का नियंत्रण है। अबू मूसा, ग्रेटर टुंब और लेसर टुंब द्वीपों को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच विवाद है। ये तीनों द्वीप रणनीतिक रूप से दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

1970 के दशक से, ईरान ने इन द्वीपों पर अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखी है। इसके अलावा, चाबहार, बंदर अब्बास और बुशहर में स्थित नौसैनिक अड्डों से ईरान की नौसेना सागर पर नियंत्रण करती है। इससे जलडमरूमध्य पर इसका मजबूत प्रभाव देखने को मिलता है।

ईरानी खाड़ी के तट पर जलवायु अत्यधिक गर्म और शुष्क है। जुलाई और अगस्त के महीने इस क्षेत्र के लिए सबसे अधिक गर्म होते हैं। इसके चलते वहाँ रहना मुश्किल है। फिर भी तेल का क्षेत्र होने के कारण थोड़ा बहुत विकास किया गया है। जलडमरूमध्य के आसपास के क्षेत्रों में धूल, सुबह की धुंध और धुंधलापन होता है। इससे भी वहाँ की दृश्यता प्रभावित होती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का भू-राजनीतिक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक स्थिति इसे काफी अहम बना देती है। ओमान और ईरान के बीच होने के कारण ये कुवैत, सऊदी अरब, इराक, कतर, बहरीन और UAE को अरब सागर और उससे आगे जोड़ता है।

जैसे-जैसे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है, होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व भी बढ़ता जा रहा है। भारत के लिए यह संकट देश की रणनीतिक साझेदारी को बेहतर बनाने और नए ऊर्जा स्रोतों पर काम करने की जरूरत बता रहा है।

होर्मुज को बंद करने पर ईरान की क्या है स्थिति

इजरायल की ओर से ईरान पर हमले किए जाने के बाद शिया मुल्क के कई सैन्य ठिकाने और परमाणु कार्यक्रम तबाह हो गए हैं। बौखलाए ईरान ने जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी दी है। हालाँकि इस रास्ते को पूरी तरह से बंद करने की आशंका कुछ कम ही जताई जा रही है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इन कारणों में ईरान के कुछ देशों के साथ बेहतर संबंध और आर्थिक स्थिरता समेत कई पहलू शामिल हैं।

ईरान और चीन के संबंध काफी बेहतर हैं। चीन ईरान के तेल का तीन- चौथाई हिस्से का आयात करता है जो कि सबसे अधिक है। ऐसे में जलडमरूमध्य का रास्ता बंद होने से चीन के लिए भी आपूर्ति बाधित होगी।

इसके अलावा इस रास्ते के बंद होने से ईरान के ओमान के साथ रिश्ते खराब हो सकते हैं। ओमान समुद्री रास्तों के जरिए कारोबार की आजादी का समर्थन करता रहा है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से पर अपना नियंत्रण भी रखता है।

इजरायल के साथ तनाव के चलते ईरान पहले से ही कई संघर्षों का सामना कर रहा है। ऐसे में अगर ये रास्ता बंद होता है तो ईरान को ही भारी कीमतों को ईरान को भी झेलना पड़ेगा। इससे ये मुल्क भी आर्थिक अस्थिरता के संकट से दो चार होगा।

असल में दुनिया के ज्यादातर देश इस बात को जान चुके हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई भी रुकावट वैश्विक संकट को जन्म दे सकता है। ऐसे में ईरान अपनी धमकी को मूर्त रूप में देने से पहले कई देशों के साथ अपने बचे कुचे रिश्तों से भी हाथ धो सकता है।

क्या पाकिस्तान का पानी भी बंद करेगा भारत?

                                                                                                                      साभार: OneIndia
पाकिस्तान की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही। जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद मुद्दे पर घेरा है, आज पाकिस्तान की हालत सबके सामने हैं। बिजली, आटा, दाल और गैस आदि की कीमतें आसमान पर पहुँच चुकी हैं। लेकिन अब पाकिस्तान में पानी की भी किल्लत होने जा रही है।
साल 1960 में हुई सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) में संशोधन के लिए भारत ने पाकिस्तान (Pakistan) को नोटिस जारी किया है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने संधि के प्रावधानों और उनके कार्यान्वयन का उल्लंघन किया है। इसलिए उसे नोटिस जारी करना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंधु जल संधि को लेकर भारत सरकार ने पाकिस्तान को यह नोटिस बुधवार (25 जनवरी 2023) को भेजा है। इस नोटिस को लेकर भारत सरकार का कहना है कि भारत पाकिस्तान के साथ हुई जल संधि को लागू करने का समर्थक और जिम्मेदार सहयोगी रहा है। लेकिन, पाकिस्तान की गतिविधियों ने भारत को यह नोटिस भेजने के लिए मजबूर किया है।

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि साल 2015 में पाकिस्तान ने भारत की किशनगंगा और रातले जलविद्युत परियोजनाओं (HEPs) पर अपनी तकनीकी आपत्तियों की जाँच के लिए एक तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति का अनुरोध किया था। हालाँकि, अगले ही साल यानी साल 2016 में पाकिस्तान ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए इस अनुरोध को वापस ले लिया। साथ ही, कहा कि एक मध्यस्थ अदालत उसकी आपत्तियों पर फैसला सुनाए।

पाकिस्तान के लगातार कहने पर विश्व बैंक ने हाल ही में तटस्थ विशेषज्ञ और मध्यस्थ न्यायालय दोनों पर ही कार्रवाई शुरू की है। हालाँकि, एक ही मुद्दे पर इस तरह की दो प्रक्रियाएँ सिंधु जल संधि के किसी भी प्रावधान में नहीं है। इसके विरोधाभासी परिणाम सामने आ सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत चाहता है कि आपस में बातचीत से मामले का हल निकाला जाए। वहीं, पाकिस्तान इससे बचता रहा है। साल 2017 से 2022 तक स्थायी सिंधु आयोग की 5 बैठकें हुई हैं। सभी बैठकों में पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर चर्चा करने से इनकार किया।

भारत ने पाकिस्तान को यह नोटिस सिंधु जल संधि के भौतिक उल्लंघन को सुधारने के लिए 90 दिनों के अंदर अंतर-सरकारी वार्ता में शामिल होने के लिए मौका देने के लिए किया है। इस प्रक्रिया के जरिए भारत बीते 62 सालों में पाकिस्तान की हरकतों से मिली सीख के साथ सिंधु जल संधि में कुछ अपडेट कराना चाहता है।

सिंधु जल संधि

भारत और पाकिस्तान ने 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इस संधि के अनुसार सतलज, व्यास और रावी का पानी भारत को दिया गया था। वहीं सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया था। बड़ी बात यह है कि इस संधि में भारत और पाकिस्तान के अलावा विश्व बैंक भी एक हस्ताक्षरकर्ता था।

अविवाहित रिपोर्टर गई अफगानिस्तान में हो गई गर्भवती: महिला पत्रकार को एंट्री देने से न्यूजीलैंड का इनकार

रिपोर्टिंग के दौरान गर्भवती हुई पत्रकार अफगानिस्तान में शरण लेने को हुई मजबूर (फोटो साभार: शार्लोट बेलिस का ट्विटर हैंडल )
न्यूजीलैंड (New Zealand) की पत्रकार शार्लोट बेलिस (Charlotte Bellis) अफगानिस्तान में फँस गई हैं। वह गर्भवती हैं, इसके बावजूद न्यूजीलैंड सरकार ने कोरोनो महामारी प्रतिबंधों का हवाला देते हुए उनकी वापसी का आपातकालीन आवेदन खारिज कर दिया है।

गर्भवती पत्रकार ने बताया कि उसके देश ने वापसी का आवेदन ठुकरा दिया है। इसकी वजह से उन्हें तालिबान (Taliban) से मदद माँगने को मजबूर होना पड़ा। बेलिस ने ‘द न्यूजीलैंड हेराल्ड’ (The New Zealand Herald) में एक कॉलम लिखकर सबको अपनी आपबी​ती बताई। शनिवार (29 जनवरी 2022) को प्रकाशित कॉलम में उन्होंने लिखा, “अजीब विडंबना है कि पहले मैंने महिलाओं के प्रति बर्बरता दिखाने को लेकर तालिबान से सवाल पूछा था, लेकिन अब मैं यही सवाल अपनी सरकार से पूछ रही हूँ।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेलिस अल-जज़ीरा में बतौर संवाददाता काम करती थीं, जो कतर में स्थित है। बेलिस पिछले साल अल जजीरा के लिए काम करते हुए उन्हें अफगानिस्तान से तालिबान और अमेरिकी सैनिकों की वापसी से जुड़ी खबरों को दे रही थीं। अपने कॉलम में बेलिस ने कहा कि वह सितंबर में कतर लौटीं तो उन्हें पता चला कि वह अपने साथी और फ्रीलांस फोटोग्राफर जिम ह्यूलेब्रोक के साथ रहते हुए गर्भवती हो गई थीं।

जिम ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के लिए काम कर रहे थे। बेलिस मई में एक बच्ची को जन्म देने वाली हैं। चूँकि, कतर में विवाहेतर यौन संबंध अवैध हैं, इससे बेलिस को लगा कि कतर छोड़ने में ही उनकी भलाई है। इसके बाद उन्होंने नागरिकों की वापसी से जुड़ी लॉटरी-शैली प्रणाली के जरिए बार-बार न्यूजीलैंड वापस जाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

इसके बाद बेलिस ने नवंबर 2021 में अल जजीरा से इस्तीफा दे दिया और युगल ह्यूलेब्रोक के मूल देश बेल्जियम चली गईं, लेकिन वह वहाँ ज्यादा समय तक नहीं रह सकीं, क्योंकि वह वहाँ की निवासी नहीं थी। इस जोड़े के पास रहने के लिए सिर्फ अफगानिस्तान का वीजा था। इसके बाद बेलिस ने तालिबान के वरिष्ठ लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि अगर वह अफगानिस्तान लौटती हैं, तो वह ठीक रहेंगी।

‘हँस कर जाती थी लड़कियाँ, बेसुध होकर निकलती थीं’: Playboy संस्थापक, ड्रग्स देकर करता था सेक्स : पूर्व गर्लफ्रेंड का खुलासा

                   ह्यूग हेफनर पर सेक्स के लिए मजबूर करने और ड्रग्स देने के आरोप लगे (फोटो साभार: डेली मेल)
70/80 के दशक में नामचीन हसीनाएं Play Boy मैगज़ीन में असभ्य चित्र देने को लालायित रहती थीं, अब अपनी मौत के चार साल बाद भी एडल्ट मैगजीन प्लेबॉय (Playboy) के संस्थापक ह्यूग हेफनर (Hugh Hefner) विवादों में हैं। 25 जनवरी 2022 की रात को एक नई डॉक्यूमेंट्री ‘सेक्रेट्स ऑफ प्लेबॉय’ (Secrets of Playboy) में कई महिलाओं ने हेफनर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन महिलाओं का कहा कि हेफनर उन्हें ड्रग्स देने के साथ-साथ सेक्स के लिए मजबूर करता था।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2001 से 2008 तक हेफनर की गर्लफ्रेंड रही 42 वर्षीय मैडिसन ने बताया कि वह महिलाओं की न्यूड फोटो अपने पास रखता था, ताकि उन्हें ब्लैकमेल कर सके। मैडिसन ने बताया कि हेफनर के पास सीक्रेट सेक्स टेप का एक खजाना था। इन सभी टेप्स को उसने अपने प्लेबॉय मैंशन (Playboy Mansion) में रखा था। वह इतना शातिर था कि रिकॉर्डिंग से पहले कभी भी लड़कियों और अपने दोस्तों को इसकी जानकारी तक नहीं होने दी।

पूर्व मॉडल ने कहा कि वह ना चाहकर भी कुछ समय तक प्लेबॉय मैंशन में हेफनर के साथ रही, क्योंकि उसे डर था कि वह उसकी फोटो लीक कर देगा। मैडिसन ने बताया कि हेफनर के दोस्त हमेशा उनके बारे में बोलते थे।

वहीं, सीक्रेट्स ऑफ प्लेबॉय डॉक्यूमेंट्री सीरीज में ह्यूग हेफनर की पूर्व गर्लफ्रेंड सोंद्रा थिओडोर ने भी कई बड़े खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया, “मैं हेफनर को बेहद करीब से जानती हूँ। मैंने कई लड़कियों को उनके प्लेबॉय मेंशन में हँसकर जाते हुए देखा है, लेकिन लौटते समय वे बेसुध और बेजान नजर आती थीं। वह एक शिकारी और पिशाच था, जिसने कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर दी।”

सोंद्रा थिओडोर आगे कहती हैं कि वह सिर्फ 19 साल की उम्र में ह्यूग हेफनर के जाल फँस गई थीं। उन्होंने बताया कि ह्यूग अपने कमरे में महिलाओं को बुलाकर गुप्त रूप से उनकी रिकॉर्डिंग किया करता था। वह महिलाओं को बताता था कि सभी कैमरे बंद हैं, लेकिन ये सभी हर एक घटना को रिकॉर्ड कर रहे होते थे। वह सेक्स के लिए मजबूर करता था और ड्रग्स तक दिया करता था।

उन्होंने बताया कि उसके बंगले पर अय्याशी करने के लिए कई वीआईपी मेहमान भी आते थे, जिनमें बिल कॉस्बी, टोनी कर्टिस, विल्ट चेम्बरलेन और अर्नोल्ड श्वार्जनेगर का नाम शामिल है। बता दें कि प्लेबॉय ने इन महिलाओं का समर्थन किया है, जिन्होंने कंपनी के दिवंगत फाउंडर हेफनर पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

लिंग को बताता ‘मैजिक फ्लूट’ खुद को ‘लिंगों का पादरी’, महिलाओं का ‘सेक्स’ से करता इलाज: अधनंगा पकड़ा गया तो कहा- शोध कर रहा था

बीमार महिलाओं को इलाज के लिए डॉक्टर देता था ‘सेक्स’ का ऑफर (साभार: Dailymail)
इटली में सेक्स के जरिए बीमारी ठीक करने का दावा करने वाले डॉक्टर को एक होटल से अर्द्धनग्न अवस्था में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के वक्त आरोपित डॉक्टर एक ‘बीमार मरीज’ से सेक्स करने के लिए कपड़े खोल रहा था। इटली के इस डॉक्टर का दावा है कि वह सेक्स के माध्यम से बीमारियों को ठीक करने की पद्धति पर रिसर्च कर रहा है।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. मैजिक फ्लूट के नाम से पहचाने जाने वाले इस डॉक्टर का असली नाम डॉ. जियोवानी मिनिएलो है और इसकी उम्र 60 साल है। होटल से पकड़े जाने के बाद डॉ. मैजिक फ्लूट ने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने से पहले जो दावे इस डॉक्टर ने किए हैं, उसे सुनकर बड़े-बड़े डॉक्टर अपना माथा पीट रहे हैं। डॉक्टर ने दावा किया है कि वह होटल के कमरे में महिला के साथ सेक्स कर उसकी गुप्त बीमारी का इलाज कर रहा था। वह अपने लिंग (Penis) को ‘मैजिक फ्लूट’ और ‘पाड्रे पियो ऑफ पेनिसेस’ कहता था। बता दें कि पाड्रे पियो 20वीं सदी का एक पादरी था, जो चमत्कार से ‘इलाज’ के लिए जाना जाता था।

डॉक्टर की हरकत उस वक्त सामने आई, जब एक 33 वर्षीय महिला मरीज अन्ना मारिया ने इतालवी अखबार ‘ला रिपब्लिका’ और इन्वेस्टिगेटिव टीवी शो ‘ले लेने’ से संपर्क किया। महिला ने आरोप लगाया कि गर्भधारण नहीं होने को लेकर उसने डॉक्टर को बताया। इसके बाद डॉक्टर ने मारिया को बुलाया और उसके स्तनों (breast) को अनुचित तरीके से छूते हुए कहा कि उसे छोटे स्तनों वाली महिलाएँ पसंद हैं। महिला के अनुसार, डॉक्टर ने बताया कि उसके गर्भाशय पर ‘सफेद धब्बे’ हैं, जो एचपीवी की उपस्थिति के संकेत हैं। इसके बाद उसने उसके साथ सेक्स करने की पेशकश की। डॉक्टर ने यह भी दावा किया कि उसके साथ यौन संबंध बनाने के बाद उसके शरीर में वायरस ले लड़ने वाले एंटी बॉडी पहुँच जाएँगे, जिससे उसकी बीमारी ठीक हो जाएगी।

इसकी पड़ताल के लिए चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन करने का फैसला किया और एक एक्ट्रेस को हायर कर उसे मरीज के रूप में डॉक्टर के पास भेजा। उसने चैनल द्वारा भेजी गई एक्ट्रेस से कहा कि उसे ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV) है और इससे कैंसर हो सकता है। जबकि अभिनेत्री का टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव था। डॉक्टर ने कहा कि वह उसके साथ यौन संबंध बनाकर उसे वायरस के लिए इम्यूनिटी दे सकता है, क्योंकि उसे टीका लग गया है। लेकिन उसके शरीर में वैक्सीन तभी जा पाएगी, जब वो उसके साथ संबंध बनाएगी। 

डॉक्टर इस बात से बेखबर था कि जिस ‘मरीज’ से वो बात कर रहा है, असल में वह न्यूज चैनल की ओर से भेजी गई एक्ट्रेस है। मरीज बनने का नाटक करने वाली अभिनेत्री डॉक्टर के साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो गई। वह उसे होटल में ले गया और इस बात से अनजान की उसकी सारी हरकतें कैमरे में रिकॉर्ड हो रही हैं, उसने अपने कपड़े उतार दिए। वहीं, अंडरकवर अभिनेत्री ने जब डॉक्टर को कंडोम लगाने के लिए कहा तो डॉक्टर ने कहा कि अगर वो कंडोम पहनकर सेक्स करेगा तो उसके शरीर में वायरस से लड़ने वाले एंटी बॉडी नहीं जाएगा।

इससे पहले कि डॉक्टर अभिनेत्री के साथ कुछ कर पाता, चैनल के पत्रकार वहाँ पहुँच गए। कमरे में रिपोर्टर को देखकर डॉक्टर के पैरों तले जमीन खिसक गई और वो कहने लगा कि वो रिसर्च के लिए सेक्स कर रहा है और वो महिलाओं की जान बचाने की कोशिश कर रहा है। डॉक्टर ने कहा- “मैं यह अपनी स्टडी के लिए कर रहा हूँ। मैंने कई लोगों को बचाया है।” लेकिन अगले ही पल जब उसे पता चला कि वो स्टिंग ऑपरेशन में बेनकाब हो गया है, तो चौंक उठा।

पकड़े जाने के बाद अपने वकील के माध्यम से डॉक्टर ने कहा, ”मैंने पिछले 40 सालों से ज्यादा के करियर में सैकड़ों महिलाओं का सफलतापूर्वक इलाज किया है और इस वैकल्पिक उपचार के अच्छे परिणाम सामने आए हैं।” डॉक्टर ने कहा कि उसने कभी भी महिलाओं को अपने साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर नहीं किया। स्टिंग ऑपरेशन के बाद 15 और महिलाएँ सामने आईं हैं, जिन्होंने डॉक्टर पर बीमारी के इलाज के नाम पर सेक्स करने का आरोप लगाया है। खुलासा होने के बाद कई महिलाएँ ने उसकी शिकायत दर्ज करवाई है और अब सरकार ने आरोपित डॉक्टर के खिलाफ जाँच के आदेश दे दिए हैं।

‘जो पागलपन हम आज देख रहे हैं, उसकी भविष्यवाणी हिंदू धर्म ने हजारों साल पहले की थी’: पॉडकास्टर रोगन ने कहा- हम संघर्षों के युग कलियुग में हैं

मशहूर पॉडकास्टर जो रोगन (साभार: एनपीआर)
विश्व के सबसे लोकप्रिय पॉडकास्टरों में से एक जो रोगन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट किया है, जिसके जरिए उन्होंने ‘कलियुग’ और हिंदू धर्म को लेकर बात की है। इसमें उन्होंने राजनीतिक अस्थिरता और महामारी संकट के वर्तमान दौर का वर्णन किया है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि वर्तमान में हम जो ‘पागलपन’ देख रहे हैं, वह कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है।

जो रोगन 1555 में फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस की भविष्वाणियों का स्मरण करवा रहे हैं, कि हिन्द(हिन्दुस्तान) को असली आज़ादी 2014 में एक अधेड़ उम्र के नेतृत्व में नयी पार्टी के सत्ता में आने पर मिलेगी। वह देश को नयी उंचाईओं पर लेकर जाएगा, उसके प्रशंसकों के साथ-साथ विरोधी भी बहुत होंगे। विश्व में हिन्दुत्व पताका फहराएगा। जो आज भारत ही नहीं विश्व भी देख रहा है। आखिर में जीत इस अधेड़ उम्र के नेता की पार्टी की ही होगी। दूसरे अर्थों में विरोधी केवल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।    

जो रोगन ने एक मशहूर मीम शेयर किया है, जिसमें बताया गया है कि शक्तिशाली लोग अच्छा समय लाते हैं और अच्छा समय लोगों को शक्तिहीन बनाता है। फिर कमजोर इंसान कठिन समय लाता है और फिर कठिन वक्त मजबूत लोगों को लाता है। उनका यह मीम पॉलिटिकल कम्पास के प्रारूप को दर्शाने वाला है।

इस मीम को शेयर करते हुए रोगन ने इंस्टाग्राम पर कहा, “हम कलियुग में हैं। संघर्ष का युग। जिस तरह की अराजकता हम आज देख रहे हैं, हिंदू धर्म में हजारों साल पहले ही उसकी घोषणा कर दी गई थी। सभ्यताएँ पहले से अनुमानित चक्रों में चलती हैं, और हम चार्ट के नीचे बाईं तरफ हैं।”

                                            जो रोगन की इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

रोगन ने कहा, “अपने आसपास की दुनिया में चारों तरफ फैले पागलपन से अपने आपको ऊपर उठाने की पूरी कोशिश करें, लेकिन यह समझें कि यह पागलपन एक अनंत प्रक्रिया का हिस्सा है।”

संयुक्त राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण विनाशकारी स्थिति में पहुँच गया है और पॉडकास्ट होस्ट ने खुद को अनिच्छा से ही सही इसमें सदा उलझा हुआ ही पाया है। गौरतलब है कि जो रोगन Spotify पर एक पॉडकास्ट को होस्ट करते हैं, जो कि अपने प्रत्येक एपिसोड में लाखों लोगों के द्वारा सुना जाता है। पिछले साल अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान रोगन ने राष्ट्रपति के पद के लिए बर्नी सैंडर्स का समर्थन किया था। उन्हें वामपंथियों द्वारा ‘फार राइट ट्रांसफोब’ कहा गया था।

हाल ही में जो रोगन ने खुलासा किया था कि उन्होंने ‘आईवरमेक्टिन’ लिया था, जिसके बाद वहाँ की मेनस्ट्रीम मीडिया ने उन पर ‘हॉर्स डीवर्मर’ दवा का सेवन करने का झूठा आरोप लगाया था। काइल रिटनहाउस मुकदमे के दौरान रोगन ने मेनस्ट्रीम मीडिया पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया था। एलेक्स जोन्स का दोस्त होने के कारण भी वामपंथियों ने उनकी कड़ी आलोचना की थी। 

तालिबान का मजार-ए-शरीफ पर भी कब्जा, कंधार व हेरात में भारतीय वाणिज्य दूतावासों को सुरक्षा का हवाला दे किया बंद

अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा दिन प्रतिदन बढ़ता ही जा रहा है। कंधार पर कब्जे के बाद उसने बल्ख प्रांत की राजधानी मजार-ए-शरीफ पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। विद्रोहियों के चौतरफा हमले के बाद प्रांत की राष्ट्रीय सेना ने सरेंडर कर दिया, जिसके बाद सरकार की समर्थक सेनाओं ने भी आत्म समर्पण कर दिया है।

अफगान सांसद अबास इब्राहिमजादा ने इसकी जानकारी दी। सांसद के मुताबिक, इस्लामिक तालिबानी आतंकियों ने शहर की सभी प्रमुख इमारतों और राजभवन पर कब्जा कर लिया है। मजार-ए-शरीफ अफगानिस्तान का चौथा सबसे बड़ा शहर है। उसने फरयाब प्रांत की राजधानी मैमाना पर भी कब्जा कर लिया है। प्रांत की सांसद फौजिया रऊफी का कहना है कि तालिबानी लड़ाकों ने मैमाना के चारों ओर बीते एक महीने से डेरा डाल रखा था औऱ उसके कुछ लड़ाके शहर में पहले ही घुस गए थे।

जलालाबाद पर कब्ज़ा 

तालिबान ने रविवार (15 अगस्त 2021) को जलालाबाद पर भी कब्जा कर लिया, जिससे काबुल सरकारी नियंत्रण में एकमात्र प्रमुख शहर बचा है। इसी के साथ अफगान सरकार द्वारा नियंत्रित क्षेत्र और सिकुड़ गया, क्योंकि इस पूर्वी शहर पर विद्रोहियों द्वारा लड़ाई के बिना कब्जा कर लिया गया था। एक पश्चिमी अधिकारी ने कहा कि राजधानी के बाहर आखिरी बड़े शहर के गिरने से विद्रोहियों के लिए अफगानिस्तान को पाकिस्तान से जोड़ने वाली सड़कें सुरक्षित हो गईं। वहीं अब काबुल का पूर्व से संपर्क भी कट गया है।

भारतीय वाणिज्य दूतावासों को बंद किया

तालिबान काबुल के काफी करीब पहुँच गया है। इस बीच खबर सामने आई है कि उसने कंधार और हेरात में भारतीय वाणिज्य दूतावासों को बंद कर दिया है। दरअसल, इन शहरों में भारतीय वाणिज्य दूतावासों ने कुछ इमारतों को किराए पर लिया था। तालिबान ने इन सभी को सुरक्षा की दृष्टि से खतरा बताते हुए बंद कर दिया है। बावजूद इसके कि उसने पूरी दुनिया को इस बात का भरोसा दिलाया था के उसके लड़ाके किसी भी देश के दूतावासों औऱ राजदूतों को निशाना नहीं बनाएँगे।

तालिबान ने एक तरफ अफगानिस्तान में भारत सरकार द्वारा किए गए कार्यों की तारीफ की थी तो दूसरी ओर उसने भारत सरकार को सैन्य कार्रवाई के लिए धमकी भी दी थी। तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद सुहैल शाहीन ने कहा था कि अफगानिस्तान में सैनिक गतिविधियों का अंजाम भारत ने भी देखा होगा, इसीलिए अब ये उनके ऊपर है। तालिबानी प्रवक्ता ने ये भी कहा था कि भारतीय प्रतिनिधियों से तालिबान के मिलने की खबर आई है, लेकिन वो इसकी पुष्टि नहीं कर सकता है।

“मैं उसी तरह तुम्हारा बलात्कार करूँगा, जैसा मैं अपनी बेटी के साथ करता हूँ।” :अरबपति रुबिन; ‘सेक्स कालकोठरी’ में कई महिलाओं का यौन शोषण

              जॉर्ज सोरोस (बाएँ), उनके मैनेजर रहे होवार्ड रुबिन (बीच में) और पीड़िताओं में से एक एमा हॉपर (दाएँ)
अन्तरराष्ट्रीय अरबपति कारोबारी जॉर्ज सोरोस को ‘न्यू वर्ल्ड ऑर्डर’ बनाने के उनके पागलपन के लिए जाना जाता है, जिनकी संस्था द्वारा कई देशों में दंगों से लेकर अराजकता तक में फंडिंग की बात सामने आई है। अब जॉर्ज सोरोस के मनी मैनेजर रहे होवार्ड रुबिन पर BDSM सेशन के जरिए कई महिलाओं के यौन शोषण व प्रताड़ना के आरोप लगे हैं। BDSM के तहत अक्सर यौन पार्टनर को प्रताड़ित कर के ‘दर्द से मजे’ लिए जाते हैं।

होवार्ड रुबिन और उनकी पत्नी को ‘सामाजिक कार्यों के लिए बड़ा दान देने वाले’ लोगों में भी गिना जाता है। उनकी अरबों की संपत्ति है। अब मेनहट्टन में उनके एक पेंटहाउस के बारे में पता चला है, जहाँ कई ‘प्लेबॉय मॉडल्स’ के साथ उनकी तस्वीरें सामने आई हैं। कहा जा रहा है कि यहाँ वो अक्सर BDSM सेशन आयोजित किया करते थे। 66 वर्षीय रुबिन पर इसी पेंटहाउस में कई महिलाओं के साथ यौन हिंसा व प्रताड़ना के आरोप हैं।

इसे इनकी ‘सेक्स कालकोठरी’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान एक महिला को तो उन्होंने इतनी बुरी तरह पीटा कि उसका ब्रैस्ट ही डैमेज हो गया। वो इतनी जख्मी हो गई थीं कि प्लास्टिक सर्जनों ने भी उनका ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया था। एक BDSM सेशन के लिए प्रत्येक महिला को $5000 (3.70 लाख रुपए) दिए जाते थे। लेकिन, पीड़ित महिलाओं का कहना है कि जिस तरह की हिंसा उनके साथ हुई और जो अपमान किया गया, उनकी उन्हें आशंका नहीं थी।

इसी तरह की एक पीड़िता ने अपना दर्द बताया है, जिसे रुबिन अपनी कालकोठरी में ले गए थे। उन्होंने उससे कहा था, “मैं उसी तरह तुम्हारा बलात्कार करूँगा, जैसा मैं अपनी बेटी के साथ करता हूँ।” बता दें कि रुबिन के दो बेटे और बेटी हैं। वो फ़िलहाल $41.3 मिलियन (305.97) करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं, लेकिन उनका कारोबार इससे कहीं ज्यादा फैला हुआ है। उनकी पत्नी ने 2017 में तलाक के लिए आवदेन देते हुए भी उन पर कई आरोप लगाए थे।

जॉर्ज सोरोस के साथ काम करने वाले एक अधिकारी का कहना है कि होवार्ड रुबिन उन्हें एक विनम्र यहूदी व्यक्ति लगे थे, लेकिन वो ये जान कर आश्चर्यचकित हो गई थीं कि सेक्स के लिए उन्होंने अलग से एक कालकोठरी बना रखी है। कभी-कभी तो वो दफ्तर में भी नियंत्रण से बाहर हो जाते थे। ऑफिस में घाटा होने पर वो कुर्सियाँ फेंका करते थे। 2017 में फ्लोरिडा की 2 मॉडल्स ने उन पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।

उन पर मानव तस्करी के भी आरोप हैं। लड़कियों को खरीद कर लाने और फिर उनके साथ यौन हिंसा करने के आरोप उन पर लगे थे। एक बार उन्होंने एक महिला को ड्रग का आदी बना दिया था और अपने 6 BDSM पार्टनर्स के साथ यौन हिंसा की थी। इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें बस गेम्स और फोटो सेशन के लिए वहाँ लाया गया था, लेकिन उसके बाद जो हुआ उसकी उम्मीद नहीं थी। महिलाओं के साथ करार तो होते थे लेकिन एग्रीमेंट के पेपर्स पढ़ने के लिए उन्हें वक़्त ही नहीं दिया जाता था।

जॉर्ज सोरोस अपने भारत विरोधी फंडिंग के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने ‘राष्ट्रवाद व हिंदुत्व’ के खिलाफ लड़ाई के लिए बड़ी फंडिंग की है। हंगरी-अमेरिकी अरबपति कारोबारी ने कम से कम 30 देशों में अपना प्रभाव जमा रखा है। उन्होंने अपने NGO ‘ओपन सोसाइटी’ के जरिए एमनेस्टी सहित कई संस्थाओं को फंडिंग की है। बराक ओबामा के काल में उनके OSF ने भारत में पाँव जमाने की कोशिश की थी।

‘बेटों के साथ देखती हूँ पोर्न… पूछती हूँ कैसा लगा’: इंडोनेशियाई सिंगर, यूनी शारा

                                                       बेटों के साथ यूनी शारा (साभार: द सन)
इंडोनेशिया की मशहूर पॉप सिंगर वायू सेतयानिंग ने हाल में दावा किया है कि वो अपने दोनों बेटों के साथ बैठकर पोर्न फिल्म देखती हैं। ऐसा करने के पीछे उनका तर्क है कि वह ऐसा केवल उन्हें सेक्स एजुकेशन के बारे में जागरूक करने के लिए करती हैं। 

49 साल की वायू सेतयानिंग देश में यूनी शारा के नाम से मशहूर हैं। उन्होंने अपने दोनों लड़कों केविन ओब्रिएंट सलोमो सियाहान और सेलो ओबिएंट को सेक्स एजुकेशन देने पर अपने विचार वेन्ना मेलिंदा के सामने रखे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें अजीब कहते हैं, लेकिन ये सब बिलकुल नॉर्मल बात है।

शारा ने कहा कि आज के समय में नामुमकिन है कि बच्चे पोर्न न देखें। वह कहती हैं, “अगर माता-पिता उन्हें ऐसी सामग्री देखते हुए पकड़ते हैं तो उन्हें बताना चाहिए।” उन्होंने साक्षात्कार में कहा, “मेरे बच्चे भी खुले विचारों वाले हैं। आजकल हमारे बच्चों के लिए पोर्न नहीं देखना असंभव है, चाहे वह ‘एनीमे’ हो या कोई अन्य प्रकार जो आजकल उपलब्ध है।”

द सन के मुताबिक शारा ने कहा कि वह अपने जवान लड़कों को स्वतंत्र रूप से पोर्न देखने की अनुमति देती है और यहाँ तक ​​कि उन्हें सेक्स के बारे में शिक्षित करने के लिए उनके साथ भी ऐसी फिल्में देखती है। साथ ही बताती हैं कि सेक्स के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

वह खुद के पुराने ख्यालत वाली होने से इनकार करती हैं और अपने बच्चों को भी खुले दिमाग का होने पर जोर डालती हैं। वह अपने लड़कों से पूछती भी हैं क्या उन्हें ऐसे साथ में पोर्न देखना पसंद है। इंटरव्यू में वह कहती हैं, “मुझे लगता है कि ये अच्छा है कि मैंं उनसे पूछूँ कि उन्हें ऐसे पोर्न देखना कैसा लगता है? लेकिन वह कहते हैं, ‘माँ ऐसे मत पूछो’।”

शारा की अनूठी पेरेंटिंग पर सिंगर की छोटी बहन उन्हें सराहती हैं और कहती हैं कि ये जरूरी है कि बच्चों को सही सेक्स की जानकारी दी जाए। वहीं कुछ अन्य लोग हैं जो इस तरह की पेरेंटिंग की बात सुन कर असहज हो गए और इस पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। एक मनोवैज्ञानिक के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि जब हम बच्चों को अश्लील सामग्री देखते हुए पकड़ते हैं तो चाहे स्थिति कितनी असहज हो हमें गुस्सा नहीं करना चाहिए, क्योंकि अगर ऐसा किया तो वो दोबारा इस काम को चुपके से करेंगे।

इजराइली बेबस बाप की गोद में बेटी और आसमान में फटता रॉकेट

                                                                    वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट
इजराइल और फिलिस्तीन के बीच चल रहे संघर्ष से भारत में मोदी-विरोधियों को कुछ सीखना चाहिए। इजराइल में समस्त विपक्ष सरकार के साथ खड़ा दिख रहा है, जबकि भारत में आतंकवादियों पर एयर एवं सर्जिकल स्ट्राइक पर सरकार से सबूत मांग दुश्मन की बोली बोलते नज़र आये थे। सेना का मनोबल तोड़ने का असफल प्रयास हुआ, क्योकि सेना के प्रयासों के सबूत मांगना सेना के मनोबल को तोड़ने से कम नहीं। 

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच शुरू हुआ विवाद अब जंग में तब्दील हो चुका है। इजराइल की सेना और फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास की ओर से हमले जारी हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर इजराइल का एक वीडियो वायरल हो रहा है।

दरअसल, यह वीडियो फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास द्वारा किए गए हमले का है। आप इस वीडियो में देख सकते हैं कि किस तरह एक बेबस पिता और अपनी नवजात बेटी को रॉकेट के हमले से बचाने के लिए हाथ पैर मारता हुआ नजर आ रहा है। उसके दिमाग में केवल अपने जिगर के टुकड़े की जान कैसे बचाई जाए, यही चल रहा है।

इस खौफनाक मंजर में वह अपनी बेटी को ​सीने से चिपकाए हुए हैं, ताकि उसे कोई खरोंच भी न आए। बच्ची इस दुनिया में नफरत फैलाने वाले इस्लामिक आतंकी संगठन और हमला करने वालों से बिल्कुल अंजान है। उसने तो अभी तक ठीक से आँखें भी नहीं खोली हैं, वो तो इस पल को भी महसूस नहीं कर सकती है कि उसके पिता ​उसे बचाने के लिए कितना छटपटा रहे हैं।

वीडियो के मुताबिक, इजराइल में यह पिता अपनी नवजात बेटी के साथ गाड़ी से कहीं जा रहे थे। तभी पिता ने आसमान में एक रॉकेट को फटते हुए देखा। इससे वह काफी डर जाते हैं और गाड़ी से उतर सड़क के बीचों-बीच एक सेफ जगह पर अपनी बच्ची को सीने से लगाकर बैठ जाते हैं।

बच्ची को गोद में उठाए पिता की नजरें केवल आसमानी आफत की ओर हैं। उनके चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा है। वह एक बार अपनी मासूम बेटी की तरफ देख रहे हैं, दूसरी तरफ आसमान में हो रहे रॉकेट के हमलों को।

कुछ पल के लिए आप अपने आपको इस पिता की जगह रख कर देखिए। मौत को इतने करीब देखकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएँगे। खासकर जब आपके साथ आपकी जान आपका बच्चा भी हो। आप कितने भी सुविधा संपन्न क्यों न, लेकिन ऐसे समय में अपने आपको बेहद बेबस और लाचार महसूस करेंगे।

हालाँकि, इजराइल अपने देश के नागरिकों की रक्षा के लिए हमास के रॉकेट हमलों की जवाबी कार्रवाई में एयर स्ट्राइक कर रहा है। इजराइल आतंकियों को उनके बेवजह किए गए हमलों का कड़ा जवाब दे रहा है, लेकिन अपनों की जिंदगी, प्यार और मौत का खौफ यहाँ के नागरिकों को हर पल सता रहा है। बता दें कि यह वीडियो इजराइल डिफेंस फोर्स ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर शेयर की है।

'69 साल की महिला सेक्स कर सकती है, लेकिन शादी नहीं’ : कोर्ट

डेमेंशिया (dementia) से पीड़ित 69 वर्षीय महिला को ‘केयर होम’ निवासी युवक (कथित बॉयफ्रेंड) के साथ सेक्स करने की अनुमति कोर्ट ने दे दी है। फैसला सुनाते हुए जज ने यह भी कहा कि महिला युवक के साथ सेक्स कर सकती है लेकिन उससे शादी नहीं कर सकती।

‘डेमेंशिया’ बुजुर्गों में बेहद आम बात है, जिसमें भूलना, याददाश्त कमज़ोर होना, सोचने-समझने की क्षमता कम होना जैसे लक्षण नज़र आते हैं। दरअसल बुजुर्ग महिला ने युवक के साथ यौन संबंध बनाने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद काउंसिल सोशल सर्विसेज़ ने इस मामले में न्यायालय के दखल की माँग उठाई।

इस दौरान एक मनोवैज्ञानिक ने महिला का परीक्षण किया था और सेक्स को लेकर उनकी जानकारी परखने के लिए सवाल भी पूछे थे। जिसके बाद जस्टिस पूल ने कहा कि महिला ‘यौन संबंध बनाने को लेकर’ फैसला लेने की स्थिति में है। 

जज ने हालाँकि यह भी स्पष्ट किया कि 69 वर्षीय महिला यह फैसला लेने की स्थिति में नहीं है कि उसे युवक से शादी करनी है या नहीं। न ही महिला को इस बात की समझ है कि शादी के दौरान किस तरह के आर्थिक और न्यायिक समस्याएँ खड़ी हो सकती हैं।

जज के मुताबिक़ इस बात के सबूत मौजूद हैं कि महिला को इसका अंदाज़ा नहीं है कि तलाक के बाद उसके रुपयों और संपत्ति का क्या होगा। लेकिन महिला इस स्थिति में ज़रूर है कि वह ‘यौन संबंध बनाने’ या ‘दूसरों से संपर्क में रहने’ के मुद्दे पर फैसला ले सके। 

इंग्लैंड की एक अदालत में इस मामले पर सुनवाई करते हुए जज ने कहा, “इस मुद्दे पर फैसला सुनाने में देरी अफ़सोसजनक है क्योंकि महिला उस युवक के साथ प्रेम संबंध नहीं बना पा रही।” पिछले कुछ महीनों में 69 वर्षीय महिला की युवक से काफी बातचीत हुई, जिसके बाद दोनों की नजदीकियाँ बढ़ीं।

जस्टिस पूल ने महिला का परीक्षण करने वाले मनोवैज्ञानिक की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया। मनोवैज्ञानिक का इस मुद्दे पर कहना था कि महिला ने ‘यौन संबंधों की प्रकृति और संरचना’ को लेकर औसत समझ दिखाई। महिला को इस बात का भी अंदाजा था कि इसके क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं। 

महिला को STD (sexually transmitted disease) से होने वाले खतरे का अनुमान था। इस पर महिला का कहना था, “मुझे ऐसी बीमारी न तो हुई है और न ही मैं ऐसी बीमारी चाहती हूँ।” इससे बचाव को लेकर पूछे गए सवाल पर महिला ने जवाब दिया, “कॉन्डोम का इस्तेमाल करके STD से बचा जा सकता है।”

अंत में जज ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स में महिला की पहचान नहीं की जा सकती है और मामले से जुड़े काउंसिल की पहचान भी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।  

क़तर ने वॉलीबॉल में बिकनी पर लगाया प्रतिबंध, अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ियों ने टूर्नामेंट का किया बहिष्कार

क़तर में बिकनी पर प्रतिबंध के कारण वहाँ होने वाले वॉलीबॉल टूर्नामेंट का खिलाड़ी बॉयकॉट कर रहे हैं। जर्मनी की स्टार वॉलीबॉल खिलाड़ी कार्ला बोर्गर और जूलिया सुडे ने इस टूर्नामेंट के बहिष्कार की घोषणा कर दी है।

कार्ला बोर्गर और जूलिया सुडे ने कहा कि क़तर अकेला ऐसा देश है, जहाँ वॉलीबॉल कोर्ट में बिकनी पहनने की अनुमति नहीं है। कार्ला ने कहा कि वहाँ जाकर उन्हें अपना ही काम करना है, लेकिन उस काम के लिए जो कपड़े पहनने होते हैं, उस पर ही लगाम लगाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि ये दुनिया की अकेली ऐसी सरकार है, जो खिलाड़ियों पर अपने विचार थोपते हुए बता रही है कि उन्हें उनका कार्य कैसे करना है, जिसकी वो आलोचना करते हैं।

मार्च में होने वाला ये टूर्नामेंट क़तर का पहला बीच वॉलीबॉल इवेंट होने वाला है। 7 साल पहले यहाँ पुरुषों का खेल हुआ था। जबकि इस बार सभी महिला खिलाड़ियों को निर्देश दिया गया है कि वो शर्ट और लंबे ट्रॉउज़र पहनें, जिसका विरोध हो रहा है।

‘वर्ल्ड बीच वॉलीबॉल फेडरेशन (FIVB)’ ने कहा है कि मेजबान देश की संस्कृति और नियम-कायदों को देखते हुए ये चीजें तय की जाती हैं। लेकिन, जर्मनी की दोनों खिलाड़ियों ने इन नियमों के विरोध में क़तर जाने से इनकार कर दिया है।

दोनों खिलाड़ियों ने कहा कि वो हर देश के माहौल के प्रति ढल सकती हैं, लेकिन दोहा में इतनी गर्मी रहती है कि बिकनी के बिना ये खेल नहीं हो पाएगा। सुडे ने कहा कि 2019 वर्ल्ड एथलिट चैंपियनशिप में क़तर ने कुछ रियायतें दी थीं।

मार्च में क़तर में बहुत ज्यादा गर्मी नहीं रहती है, लेकिन फिर भी तापमान 30C (86F) के आसपास घूमता रहता है। बोर्गर ने इस पर भी सवाल उठाए कि क्या इस खेल के आयोजन के लिए क़तर एक योग्य मेजबान देश है भी?

क़तर में मानवाधिकार की समस्या और इसके स्पोर्टिंग इतिहास को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं, जिन्हें हाल के दिनों में ठीक करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन, फिर भी पेंच फँस रहा है।

क़तर में इस्लामी कानून चलता है, जहाँ महिलाओं को हिजाब और बुर्का पहनने को कहा जाता है। लेकिन, हाल के दिनों में कई पर्यटक वहाँ पर पहुँचे हैं, जिन्हें नियमों में ढील की उम्मीद है।

क़तर के स्विमिंग पूल और पाँच सितारा होटलों में महिलाएँ बिकनी पहनती रही हैं। जर्मनी वॉलीबॉल फेडरेशन ने भी अपने खिलाड़ियों का समर्थन किया है। 2006 एशियन गेम्स में इसी खेल में खिलाड़ियों को बिकनी पहनने की अनुमति मिली थी।

इस्लाम Good है, Bad नहीं.. IslamaBAD को किया जाए IslamaGOOD

इस्लामाबाद का नाम बदलने की मुहिम (साभार: News18)
पाकिस्तान में एक ऑनलाइन याचिका दायर की गई है। इस याचिका में माँग उठाई गई है कि ‘Islamabad’ (इस्लामाबाद) का नाम बदल कर ‘Islamagood’ (इस्लामागुड) कर दिया जाए।

इस याचिका को बांग्लादेश के रहने वाले ऐहम अबरार ने Change.org पर साझा किया था। याचिका में कहा गया था, “इस्लामाबाद को इस्लामागुड में तब्दील किया जाना चाहिए। इस्लाम असल में गुड (Good) है, पाकिस्तान को इस्लाम से प्रेम है। तब क्यों IslamaBAD? (इस्लामाबैड) बांग्लादेश से बहुत सारा प्यार।”

याचिका पर अब तक लगभग 335 लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं और यह संख्या बढ़ ही रही है। यानी इतने लोग याचिका पर सहमति जता चुके हैं। याचिका दायर करने वाले अबरार का मानना है इस अभियान के लिए और भी लोग आगे आएँगे। याचिका का मिजाज़ ही कुछ ऐसा है कि कुछ ही देर में इसे लेकर पूरे सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। इंटरनेट की जनता इस याचिका पर तमाम तरह की प्रतिक्रिया देने लगी।

इसके अलावा, पाकिस्तान के लोगों ने भी इस पर खूब प्रतिक्रिया दी।

 

एक यूज़र ने अनुरोध किया कि इस्लामाबाद का नाम इस्लामागुड किया जाना चाहिए, इसके लिए याचिका पर साइन करिए।

 

एक ट्विटर यूज़र ने लिखा कि इस्लामाबाद का बदलने के लिए याचिका दायर की गई है और ये मज़ाक नहीं है।

 

एक यूज़र ने सवाल पूछते हुए कहा कि इस्लामाबाद का नाम क्यों बदला जा रहा है।

 

एक और यूज़र ने लिखा कि बिलकुल इसमें कोई नुकसान नहीं है। सोच कर देखिए हमारे पासपोर्ट में लिखा है कि हम ‘इस्लामागुड’ में पैदा हुए हैं।

एक यूज़र ने हैरानी जताते हुए लिखा, “ये इस्लामागुड क्या है? किसने ये नाम सोचा।”

एक अन्य ट्विटर यूज़र ने पूछा कि वो कौन लोग हैं, जिन्होंने इस पर हस्ताक्षर किया, मुझे सिर्फ उनसे बात करनी है।

यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है जब किसी जगह का नाम बदलने के लिए याचिका दायर की गई है। पिछले साल 2020 में कोलंबस (columbus) का नाम बदलने के लिए भी एक याचिका दायर की गई थी।

जॉर्ज फ्लाइड के नाम पर इरफान पठान उतरे रिहाना के समर्थन में

पॉप स्टार रिहाना द्वारा किसान आंदोलन के पक्ष में किए ट्वीट के बाद सोशल मीडिया दो धड़ों में बँटा नजर आ रहा है। एक धड़े ने जहाँ इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार बताया है तो दूसरे धड़े ने रिहाना का समर्थन किया है। वहीं अब भारतीय पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान भी अब तथाकथित बुद्धिजीवियों के गिरोह में शामिल हो गए है। और उन्होंने इशारों-इशारों में रिहाना की बातों का समर्थन किया है।

हाल ही रिहाना, ग्रेटा थुनबर्ग, अमांडा सेर्नी, लिली सिंह, जे सीन जैसे विदेशी हस्तियों ने किसानों के समर्थन में ट्वीट किया था। उनके विरोध के बाद सोशल मीडिया पर मानो भूचाल आ गया हो। हालाँकि, बाद में यह पता चला कि उनके समर्थन में एक समन्वित अभियान का हिस्सा थे, जिसके बाद भारतीय दिग्गजों ने उन्हें जमकर लताड़ा था।

अक्षय कुमार, अजय देवगन, सुनील शेट्टी, करण जौहर, एकता कपूर, कैलाश खेर जैसे दिग्गज बॉलीवुड हस्तियों से लेकर भारतीय क्रिकेटरों सहित दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने भी अंतरराष्ट्रीय सेलेब्रिटीज़ के ट्वीट के खिलाफ भारतीयों से एकता का आह्वान किया था।

इस जरूरत के समय में जब पूरी क्रिकेट टीम ‘भारत के खिलाफ हो रहे दुष्प्रचार के खिलाफ एकजुट रहने के लिए अपना समर्थन देते हुए भारत की एकता के साथ खड़े होकर और हैशटैग #IndiaAgainstPropegenda के साथ ट्वीट कर रहे थे। तब ऐसे में भारत के पूर्व खिलाड़ी इरफान पठान ने अंतरराष्ट्रीय सेलेब्रिटीज़ का समर्थन करना ज्यादा सही समझा।

इरफान पठान ने कटाक्ष करते हुए फरवरी 4 को एक ट्वीट किया, “जब अमेरिका में एक पुलिसवाले द्वारा जॉर्ज फ्लॉयड (अश्वेत नागरिक) की हत्या की गई थी, तब हमारे देश ने भी इस पर अपना दुख जताया था।” इसके साथ ही उन्होंने हैश टैग #Justsaying का इस्तेमाल किया है।”

इस ट्वीट के जरिए न केवल इरफान पठान ने 26 जनवरी को किसानों की आड़ में दिल्ली में हिंसा फैलाने वाले दंगाइयों का समर्थन किया बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से इस मामले को जॉर्ज फ्लॉयड घटना के साथ जोड़कर लोगों को भी उकसाया और फिरंगियों का मुँहतोड़ जवाब दे रहे सेलेब्रिटीज़ और क्रिकेटर्स की भी आलोचना की।

अमेरिका में पुलिस द्वारा एक अफ्रीकी अमेरिकी, जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या कर दी गई थी। जिसके तुरंत बाद इस मामले को लेकर भारत में तथाकथित बुद्धिजीवियों के गिरोह ने देश के मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने की कोशिश की थी। वे चाहते थे कि मुसलमान इस तथाकथित ‘मुस्लिम लाइव्स मैटर’ के विरोध के लिए सड़कों पर उतरें।

पॉप गायिका रिहाना ने फरवरी 2 को एक खबर को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था, “हम इसके बारे में बात क्यों नहीं कर रहे? इसके साथ उन्होंने Farmer’s Protest हैशटैग भी लिखा।” वहीं इस खबर को साझा करते हुए एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग ने भी प्रदर्शनकारियों के साथ अपनी ‘एकजुटता’ व्यक्त की थी।

ईरान के हिंसक प्रदर्शनों में 700 बैंक तबाह, सेना के भी 50 बेस हुए नष्ट

ईरान के प्रदर्शन में नष्ट हुई ईमारत (फोटो साभार- आयरिश टाइम्स)ईरान में हिंसक प्रदर्शन के चलते पूरे देश की शांति व्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है। इस हिंसक और उपद्रवी प्रदर्शन के दौरान कई बैंकों और सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाया गया। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस सम्बन्ध में ईरान के एक मंत्री अब्दुल रज़ा रहमानी फ़ज़ली ने जानकारी दी कि अभी तक की इस हिंसा में करीब 731 बैंकों और 140 सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि इन्हें जला कर राख कर दिया गया।
फ़ज़ली के मुताबिक प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबालों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 50 से भी ज्यादा बेस नष्ट कर दिए गए। उन्होंने बताया कि यह प्रदर्शन 15 नवम्बर को तब शुरू हुए जब दामों की बढ़ोतरी का ऐलान किया गया। इन प्रदर्शनों में तकरीबन दो-लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। इस भीड़ ने 70 गैस स्टेशनों को भी आग के हवाले कर दिया।
लन्दन के एक मानवाधिकार संगठन – एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 25 नवम्बर को इस सम्बन्ध में कहा कि इस प्रदर्शन की हिंसा में अभी तक करीब 143 लोग मारे जा चुके हैं। संस्था ने दावा किया कि सरकार के खिलाफ यह सबसे भीषण क्रांति है। इससे पहले सन् 2009 में भी ऐसी एक क्रांति हुई थी जब ईरान के प्रशासन ने ‘ग्रीन रेवोल्यूशन’ पर प्रदर्शनों को कुचलने की कोशिश की थी।
हालाँकि, ईरान सरकार ने इस संस्था द्वारा पेश किए मौत के आँकड़े से पूरी तरह इनकार किया है। उनका पक्ष है कि इस दौरान सुरक्षाबलों के लोग भी मारे गए और हज़ार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जबकि न्यूयॉर्क की एक मानवाधिकार एजेंसी सेण्टर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान ने दावा किया है कि गिरफ्त में लिए गए लोगों की तादाद 4000 के करीब है।
प्रदर्शनकारियों द्वारा सभी शीर्ष नेताओं के इस्तीफे की माँग के बाद ये प्रदर्शन सियासी हो गए। जबकि स्थानीय सरकार ने इस उग्र प्रदर्शन को भड़काने के लिए अमेरिका, इजराइल तथा सऊदी अरब पर आरोप लगाए हैं। बता दें कि अमेरिका ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे, उसके बाद से ही ईरान के तेल निर्यात करने में काफी गिरावट आई है। इसके बाद से ही ईरान तथा लिबनान में कई हथियारबंद गुटों ने सरकार के खिलाफ महँगाई को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिए।