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बिहार : बांग्लादेशी साज़िश, लीक हुआ ‘टूलकिट’: ‘बैक साइड’ में चोटिल पप्पू यादव और रवीश कुमार ने किया चुनाव के बहिष्कार का ऐलान

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद और कांग्रेस के नेता पप्पू यादव विपक्ष से कह रहे हैं कि वो बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करे। पप्पू यादव का ख़ुद कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बहिष्कार कर दिया था, जिस कारण उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा था। अभी कुछ दिनों पहले हमें फिर से ये नज़ारा देखने को मिला जब बिहार में महागठबंधन के विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने पप्पू यादव का बहिष्कार कर दिया। उन्हें मंच तक पर नहीं चढ़ने दिया गया, राहुल गाँधी के सुरक्षाकर्मियों ने धक्का देकर भगाया सो अलग।

जो कांग्रेस को बहुत भारी पड़ने वाला है। पहले टिकट नहीं देना और मंच पर नहीं चढ़ने देना। जिस दिन पप्पू का आत्मसम्मान जाग गया वह कांग्रेस ही नहीं लालू यादव की पार्टी को भी भारी पड़ जाएगा। 

पप्पू यादव से लेकर रवीश कुमार तक, चुनाव बहिष्कार वाला ‘टूलकिट’

लगता है पप्पू यादव की ‘बैक साइड’ में लगी चोट का कुछ असर उनके दिमाग पर भी हुआ है, इसीलिए उन्हें हर तरफ बहिष्कार-बहिष्कार ही दिखाई दे रहा है। बोल पप्पू यादव रहे हैं, लेकिन यह भाषा वही टूलकिट वाली है जो अराजकता को जन्म देती है। उस अराजकता से अराजक तत्व सत्ता हथियाने में कामयाब हो जाते हैं। जब लोकतान्त्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को चुनाव में हराने में ये कामयाब नहीं होते हैं, तब यही तरीका अपनाया जाता है।

अगर विपक्ष चुनाव का बहिष्कार करता है तो जनता को विपक्ष से सतर्क हो जाना चाहिए कि कोई उपद्रव कर भारतीय लोकतंत्र और संविधान की उसी तरह धज्जियाँ उड़ाने जा रहे हैं जिस तरह इंदिरा गाँधी ने इमरजेंसी में उड़ाई थी। इनके भड़काऊ बयानों को दरकिनार करना होगा। 

रवीश कुमार का भी कहना है – “चुनाव क्यों करा रहे हैं, प्रिंट कमांड दीजिए और रिज़ल्ट छाप दीजिए।” नेताओं और उनका एजेंडा चलाने वाले युट्यूबरों की भाषा एक सी दिख रही है, ये मात्र संयोग नहीं हो सकता। अंदरखाने जो साज़िश चल रही है, ये उसको अमल में लाने के लिए लगाए गए प्यादे हैं।

मामला कुछ यूँ है कि बिहार में मतदाता सूची में सुधार का अभियान चल रहा है। ये काम भाजपा या जदयू नहीं, बल्कि चुनाव आयोग द्वारा किया जा रहा है। 1 लाख BLO घर-घर जाकर मतदाता सूची को अपडेट कर रहे हैं। ख़ास बात यह है कि राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त डेढ़ लाख BLA इस कार्य में उनकी सहायता कर रहे हैं। ज़ाहिर है, इनमें विपक्षी दलों के भी एजेंट्स हैं। क्या पप्पू यादव ये कहना चाह रहे हैं कि कांग्रेस द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट्स ठीक से अपना कार्य नहीं कर रहे हैं? जब प्रक्रिया में ख़ुद कांग्रेस पार्टी शामिल है, फिर भी अगर उसे दोष दिख रहा है – तो उसका ठीकरा कांग्रेस पर भी फूटना चाहिए न?

भारत में लागू करना चाहते हैं बांग्लादेश वाला ‘अराजक’ मॉडल

चुनाव का बहिष्कार करने वाला टूलकिट इनका आजमाया हुआ है। पिछले वर्ष बांग्लादेश में खालिदा जिया की पार्टी BNP ने आम चुनाव का बहिष्कार किया। इस टूलकिट पर चलते हुए विदेशी ताक़तों की मदद से चुनाव विरोधी माहौल बनाया जाता है। जैसे, बांग्लादेश में यूरोपियन यूनियन के एम्बेस्डर चार्ल्स व्हाइटली ने एक पत्र लिखकर चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। इसी तरह, जनवरी 2019 में लंदन में सैयद शुजा नामक शख्स ने कथित EVM हैकिंग का लाइव डेमो दिखाया। ये ऐसा डेमो था कि वामपंथी मीडिया पोर्टलों तक को कहना पड़ा – इतना ग़लत कैसे हो सकता है भाई?

पप्पू यादव भी इसी भाषा में बोल रहे हैं। वो कह रहे हैं कि दुनिया को पता तो चले कि भारत कितना लोकतान्त्रिक है। विडम्बना देखिए, एक ऐसा नेता ये सब कह रहा है जो ख़ुद 2 प्रतिशत से भी कम अंतर से जीतकर लोकसभा पहुँचा है। ये खेल अभी शुरू नहीं हुआ है। पिछले वर्ष जब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन की जीत हुई, तब भी ऐसी साज़िश रची गई थी। इसी महाराष्ट्र में जब लोकसभा चुनाव में MVA की जीत हुई थी, तब EVM और चुनाव में छेड़छाड़ की चर्चाएँ थम गई थीं। एक निलंबित पुलिस अधिकारी के बयान के सहारे प्रपंच रचने का प्रयास किया गया। महाराष्ट्र चुनाव पर चर्चाओं को अब तक खींचा जा रहा है, पिछले ही महीने राहुल गाँधी ने दर्जनभर अख़बारों में लेख लिखकर महाराष्ट्र में कथित मैच फिक्सिंग का रोना रोया।

महाराष्ट्र में दाल नहीं गली, महाराष्ट्र चुनाव पर प्रपंच को नेशनल इशू बनाने की कोशिश भी नहीं चल पाई – तो अब बिहार के सहारे इस फैंटेसी को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि चुनाव आयोग को ये तय करने का अधिकार है कि जो भारत के नागरिक नहीं हैं वो मतदाता सूची में न रहें। बिहार म 2003 में भी SIR, यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन हुआ था। नब्बे के दशक में भी देश में तीन-तीन बार ये किया जा चुका है, फिर हंगामा सिर्फ़ अभी क्यों? 1957 और 1961 में जब SIR हुआ था, तब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे। नेहरू के समय हुआ तो सही, मोदी के समय ग़लत कैसे?

अब तो पहले जैसी दिक्कत भी नहीं है। सबकुछ ऑनलाइन भी उपलब्ध है। voters.eci.gov.in पर जाकर फॉर्म भरकर कोई भी व्यक्ति गणना प्रपत्र भर सकता है। जो कामकाज या पढ़ाई के सिलसिले में बिहार से बाहर रह रहे हैं, उनके लिए भी ये विकल्प खुला है। मैंने भी ऐसे ही अपना नाम दर्ज कराया है।

असल में इनकी पूरी योजना वो करने की है, जो ये किसान आंदोलन के दौरान नहीं कर पाए, जो ये शाहीन बाग़ उपद्रव के दौरान नहीं कर पाए। किसान आंदोलन के दौरान भी इंटरनेशनल टूलकिट चला था, जिसमें गायिका रिहाना और पॉर्नस्टार मिया खलीफा तक के पोस्ट्स आए थे। अब पप्पू यादव ने शुरुआत की है, देखते हैं किन-किन के पोस्ट आते हैं। जबसे इन्होंने बांग्लादेश की चुनी हुई प्रधानमंत्री शेख हसीना को दूसरे देश में शरण लेते हुए देखा है, तब से इनकी बाँछें खिली हुई हैं। जब अराजकता के कारण शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था, तब इन्होंने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश से बाहर शरण लेने को मजबूर करने के सपने देखे थे। तभी ये अराजकता को ‘युवा क्रांति’ बताकर उसका समर्थन कर रहे थे, हिन्दुओं के नरसंहार पर चुप थे।

बिहार में बुरी तरह विफल होगी ‘टूलकिट’ वाली साजिश

पप्पू यादव को सबसे पहले अपने पूर्णिया संसदीय क्षेत्र में जाना चाहिए, वहाँ के कांग्रेस के BLOs से पूछना चाहिए कि SIR कैसे होता है। वैसे पप्पू यादव के आसपास रहने वाले लोग बताते हैं कि जब तक वो दिन में एक इंटरव्यू नहीं देते हैं, तब तक उनके पेट में मरोड़ें उठती रहती हैं। जब वो लोगों के साथ होते हैं तब इतना बोलते हैं कि बाकियों को बोलने का मौक़ा भी नहीं मिलता।

अवलोकन करें:- 

इनके सामने समस्या ये आ रही है कि न बिहार में कांग्रेस का कोई अस्तित्व बचा है, न वहाँ भाजपा का मुख्यमंत्री हैं। सारी आलोचनाओं के बावजूद नीतीश कुमार का चेहरा क्लीन है, जिसके सामने चारा चोरी का ठप्पा वाला परिवार भी कहीं नहीं टिकता। जीतन राम माँझी और चिराग पासवान जैसे महादलित नेता NDA में हैं, इसीलिए यहाँ इनका जाति कार्ड भी नहीं चल पा रहा। अतः, जो साजिश महाराष्ट्र में विफल हुई उसका बिहार में भी फेल होना तय है। लेकिन हाँ, पप्पू यादव जैसे नेताओं के लगातार बोलते रहने से टूलकिट एक्सपोज होता रहेगा।

‘मैं मोदी के भाषण में शामिल नहीं होऊँगी’: सगे भाई से निकाह करने वाली इल्हान उमर, पाकिस्तान परस्त अमेरिकी सांसद ने दिखाई हिंदू घृणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी (PM Modi US Visit) दौरे पर हैं। अमेरिका के बड़े कारोबारी और विचारकों ने उनसे मुलाकात की है। उनके नेतृत्व की प्रशंसा कर रहे हैं। दूसरी ओर इल्हान उमर (Ilhan Omar) जैसे कुछ अमेरिकी सांसद भी हैं जो इस मौके पर भी भारत और हिंदुओं को लेकर अपनी घृणा का प्रदर्शन कर रहे हैं। अमेरिकी काॅन्ग्रेस की महिला सदस्य ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में शामिल नहीं होंगी। पीएम मोदी अमेरिकी काॅन्ग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे। दो बार अमेरिकी सदन को संबोधित करने वाले वे पहले भारतीय नेता हैं।

21 जून 2023 को एक ट्वीट में इल्हान उमर ने कहा है, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यकों का दमन किया है। हिंसक हिंदू राष्ट्रवादी समूहों को गले लगाया है। पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया है। मैं मोदी के भाषण में शामिल नहीं होऊँगी।” उन्होंने आगे लिखा है, “मैं पीएम मोदी के दमन और हिंसा के रिकॉर्ड पर चर्चा करने के लिए मानवाधिकार समूहों के साथ एक ब्रीफिंग करूँगी।”

 

अपने भारत विरोधी इस रुख के लिए इल्हान उमर नेटिजंस के भी निशाने पर हैं। @DruzeSaher ने पूछा, “आपने पाकिस्तान का दौरा किया और आप अल्पसंख्यकों के दमन की शिकायत कर रही हैं? वहीं राष्ट्र सर्वोपरि नाम के एक अन्य यूजर ने इल्हान उमर के मोदी के कार्यक्रम में न जाने के एलान पर कहा, “जाने की जरूरत भी नहीं है। वो ऐसे लोगों को पसंद भी नहीं करते जिसने अपने भाई से ही निकाह कर लिया हो।” रिकी नाम के यूजर ने भी इल्हान उमर के भाई से निकाह वाली बात दोहराई है।

                                                       साभार- @IlhanMN के ट्वीट पर आए जवाब

पाकिस्तान परस्त इल्हान उमर

पाकिस्तान परस्त डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद इल्हान उमर अफ्रीकी मूल की हैं। पिछले साल उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) का दौरा किया था। आंतकियों को संरक्षण देने वाले हमारे पड़ोसी मुल्क ने भी उनका जोरदार स्वागत किया था। लेकिन भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करने वाली अमेरिकी सांसद के इस दौरे का ना केवल भारत, बल्कि अमेरिका ने भी विरोध किया था। भारत ने उनकी इस यात्रा को निंदनीय बताया, जबकि अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने उनके पीओके दौरे को व्यक्तिगत गतिविधि बताकर खुद को उनसे अलग कर लिया था।

मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी हैं इल्हान उमर

इल्हान उमर की पैदाइश सोमालिया की है। उन्हें मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी का दर्जा हासिल है। उमर पर इस्लामी एजेंडा इस कदर हावी है कि वह अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की भी परवाह नहीं करती हैं। दुनियाभर में कट्टरपंथी इस्लाम को आगे बढ़ाना ही उनका एकमात्र उद्देश्य है। मुस्लिम देशों से उनकी मोहब्बत और भारत के प्रति उनकी घृणा किसी से भी छिपी नहीं है। कश्मीर, भारतीय मुस्लिमों, बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इल्हान उमर कई विवादित बयान दे चुकी हैं। खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी नफरत सोशल मीडिया पर जगजाहिर है। 
इल्हान उमर के बारे में बताया जाता है कि वो पहली अफ्रीकी शरणार्थी हैं, जो चुनाव जीतकर अमेरिकी संसद में पहुँची हैं। उमर 2019 में मिनिसोटा से सांसद चुनी गई थीं। इस संसदीय सीट से चुनाव जीतने वाली वह पहली अश्वेत महिला हैं। साथ ही, अमेरिकी संसद पहुँचने वाली पहली दो मुस्लिम-अमेरिकी महिलाओं में भी शामिल हैं। उमर के परिवार ने गृहयुद्ध के कारण सोमालिया छोड़ दिया था, उस वक्त उमर महज आठ वर्ष की थीं। उनके परिवार ने केन्या के शरणार्थी शिविर में चार साल बिताए और फिर 1990 के दशक में अमेरिका आए। दादा ने उमर को उनकी किशोरावस्था में ही राजनीति में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। वह 2016 में चुनाव जीतकर मिनिसोटा की प्रतिनिधि सभा पहुँची और तीन साल बाद 2019 में वो अमेरिकी संसद के लिए चुनी गईं।

गैर मुसलमानों के प्रति नफरत

सोमालिया में ही पैदा हुईं मानवाधिकार कार्यकर्ता अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) ने 12 जुलाई 2019 को वॉल स्ट्रीट जर्नल में Can Ilhan Omar Overcome Her Prejudice? शीर्षक से लिखे लेख में कहा था, “किसी के मन में किसी के प्रति प्रति नफरत घर कर जाए तो उससे उबरना मुश्किल होता है। इल्हान उमर के साथ भी यही बात लागू है।” अयान के मुताबिक, इल्हान उमर उन मुस्लिमों में शामिल हैं, जो दुनिया में जो भी गलत हो रहा है, उसके लिए एकमात्र दोषी यहूदियों को मानती हैं। उनमें गैर-मुसलमानों के प्रति भी नफरत कूट-कूटकर भरी है, क्योंकि उन्हें बचपन से यही सिखाया गया है। वहीं, भारत में काफी चर्चित पाकिस्तानी मूल के लेखक और पत्रकार तारेक फतेह भी इल्हान उमर को भारत विरोधी कट्टर इस्लामवादी करार दे चुके हैं।
इल्हान उमर के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह बातें स्वतंत्रता-समानता की करती हैं, लेकिन कट्टर इस्लाम के प्रति उनका झुकाव साफ-साफ झलकता है। वे बुर्का, हिजाब की जबर्दस्त पैरोकार हैं। उन्होंने ही अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में वैश्विक स्तर पर इस्लामोफोबिया से लड़ने के लिए विशेष प्रतिनिधि का पद सृजित करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन की मंजूरी भी मिल गई। लेकिन, उनके इस कदम की रिपब्लिकन पार्टी के टिकट पर अमेरिकी कॉन्ग्रेस का चुनाव लड़ चुकीं एक और मुस्लिम नेता डालिया अल-अकिदी (Dalia Al-Aqidi) ने जबर्दस्त विरोध किया था। उन्होंने अरब न्यूज में एक लेख लिखकर पूछा है कि क्या इस्लाम के नाम पर आतंकी वारदातों को अंजाम देने वालों को मुस्लिम आतंकी कहना भी इस्लामोफोबिया के दायरे में आएगा?

सगे भाई ही इल्हान उमर के शौहर?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चुनावी रैली में इल्हान उमर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था, “इल्हान उमर को अमेरिका, यहाँ के शासन-प्रशासन और यहाँ के लोगों से नफरत है। वह हमारे देश से घृणा करती हैं। वह ऐसी जगह से आई हैं जहाँ सरकार है ही नहीं और यहाँ आकर हमें ही ज्ञान दे रही हैं कि अपना देश कैसे चलाना चाहिए?” यही नहीं ट्रंप ने कई बार कहा था कि इल्हान के दूसरा पति अहमद इल्मी और कोई नहीं उनका सगा भाई ही है। ट्रंप ने 2020 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एक प्रचार अभियान में जस्टिस डिपार्टमेंट से इसकी जाँच करने की माँग भी की थी। इसकी पुष्टि तब हुई जब ट्रंप की पार्टी के एक रणनीतिकार ने पिछले वर्ष अगस्त में डीएनए टेस्ट रिपोर्ट वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी। डीएनए के कई टेस्ट में उमर इल्हान और अहमद इल्मी के सगे बहन-भाई होने का सौ फीसदी मिलान हुआ था। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमाली समुदाय के नेता ने भी खुलासा किया था कि इल्हान उमर ने अपने भाई से निकाह किया है।

 

शेखर गुप्ता के ‘द प्रिंट’ के स्तंभकार ने ‘मुस्लिमों को बचाने’ के नाम पर भारतीय उत्पादों के बहिष्कार की अपील की

भारत के प्रति नफरत और फेक न्यूज फैलाने के लिए मशहूर शेखर गुप्ता के ‘द प्रिंट’ के स्तंभकार सीजे वेरलेमैन (CJ Werleman) अपने विवादास्पद बयान के कारण सुर्खियों में हैं। स्वघोषित ‘इस्लामोफोबिया क्रूसेडर’ वेरलेमैन ने 23 नवंबर 2021 को ट्विटर पर अपने फॉलोअर्स से मुस्लिमों को बचाने के लिए भारतीय उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “भारत और कश्मीर में मुस्लिमों को बचाओ: भारतीय उत्पादों का बहिष्कार करो।” वेरलेमैन ने एक पुराना वीडियो भी शेयर किया है, जो इस साल 13 अक्टूबर का है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि भारतीय मुसलमानों की सुरक्षा का रोना-रोने वाले चीन द्वारा उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार, नमाज और रोजा पर पाबंदी, सुरक्षा कर्मियों द्वारा उइगर मुस्लिम महिलाओं का यौन शोषण करने पर, इनकी मस्जिदों को जमीदोज करने, तालिबान द्वारा अफ़ग़ानिस्तान में अत्याचार करने, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक -हिन्दू और सिखों - पर हो रहे अत्याचारों पर चुप्पी लगाना स्पष्ट प्रमाण है कि इन भारत विरोधियों का असली मकसद भारत में अराजकता फैलाना है। किसी में चीन और पाकिस्तान से आने वाले किसी भी सामान का बहिष्कार करने की मांग करने की हिम्मत नहीं। जब कश्मीर में कश्मीरी महिलाओं का बलात्कार करने का मस्जिदों से ऐलान तब क्यों चुप थे? 1986 में मलियाना में ईद के मौके पर हुए मुस्लिमों के नरसंहार पर क्यों मुंह में दही जमाए बैठे रहे?इन्हें किसी हिन्दू, मुस्लिम या सिख से कोई मतलब नहीं।  

                                                  CJ Werleman के ट्वीट का स्क्रीनग्रैब

इससे पहले उन्होंने कहा था कि भारत और जम्मू-कश्मीर में रहने वाले मुस्लिमों पर कथित ‘दुर्व्यवहार’ के लिए बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव और बहिष्कार भारत में अब कैंपेन का रूप ले चुका है। सीजे ने खेद व्यक्त किया था कि पश्चिमी लोकतंत्र और मुस्लिम बहुल देश भारतीय मुस्लिमों को बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में ले जाने की मोदी सरकार की कथित पहल के लिए मूकदर्शक बने हुए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि असम के दरांग जिले में बेदखली अभियान के दौरान विजय शंकर बनिया नाम के एक फोटो जर्नलिस्ट द्वारा एक अवैध अतिक्रमणकारी के शव पर कूदने के बाद भारत दुनिया भर की सुर्खियों में छा गया। द सियासत डेली के एक लेख का हवाला देते हुए, स्तंभकार ने कहा कि कुवैत ने ‘भारतीय अधिकारियों और हिंदू चरमपंथियों’ द्वारा मुस्लिमों के खिलाफ किए गए कथित अत्याचारों की निंदा की थी। उन्होंने दोहराया कि भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का वैश्विक अभियान चल रहा है।

हिंदू कार्यकर्ता समूह पर आरोप लगाया गया

इससे पहले 21 अक्टूबर को फेक न्यूज पेडलर ने हिंदू कार्यकर्ता समूह श्री रमा सेने के प्रमुख प्रमोद मुतालिक का एक वीडियो ट्वीट किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा और कर्नाटक में एक मस्जिद को गिराने का आह्वान किया था। उन्होंने लिखा था, “हिंदुत्व समूह श्री राम सेना के नेता ने मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा और कर्नाटक में जामा मस्जिद को गिराने का आह्वान किया।”

टेनिस दिग्गज भी CJ Werleman द्वारा फैलाई गई फर्जी खबरों की शिकार हुईं

टेनिस की दिग्गज खिलाड़ी मार्टिना नवरातिलोवा भी उनकी फर्जी खबरों की शिकार हो चुकी हैं। ऑपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे लेफ्ट-लिबरल न्यूज वेबसाइटों ने झूठा दावा किया था कि प्रमोद मुतालिक ने कर्नाटक के गडग में जामा मस्जिद का हाल ‘बाबरी मस्जिद‘ जैसा करने का आह्वान किया था। हालाँकि, हकीकत में उन्होंने ऐसा कोई दावा नहीं किया था।
वेरलेमैन एक आदतन फेक न्यूज पेडलर हैं, जो भारत के प्रति नफरत फैलाकर अपना टाईम पास करते हैं। इससे पहले सितंबर में, उन्होंने भारत के खिलाफ ‘regime decapitation‘ हड़ताल का आह्वान किया था।

क़तर ने वॉलीबॉल में बिकनी पर लगाया प्रतिबंध, अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ियों ने टूर्नामेंट का किया बहिष्कार

क़तर में बिकनी पर प्रतिबंध के कारण वहाँ होने वाले वॉलीबॉल टूर्नामेंट का खिलाड़ी बॉयकॉट कर रहे हैं। जर्मनी की स्टार वॉलीबॉल खिलाड़ी कार्ला बोर्गर और जूलिया सुडे ने इस टूर्नामेंट के बहिष्कार की घोषणा कर दी है।

कार्ला बोर्गर और जूलिया सुडे ने कहा कि क़तर अकेला ऐसा देश है, जहाँ वॉलीबॉल कोर्ट में बिकनी पहनने की अनुमति नहीं है। कार्ला ने कहा कि वहाँ जाकर उन्हें अपना ही काम करना है, लेकिन उस काम के लिए जो कपड़े पहनने होते हैं, उस पर ही लगाम लगाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि ये दुनिया की अकेली ऐसी सरकार है, जो खिलाड़ियों पर अपने विचार थोपते हुए बता रही है कि उन्हें उनका कार्य कैसे करना है, जिसकी वो आलोचना करते हैं।

मार्च में होने वाला ये टूर्नामेंट क़तर का पहला बीच वॉलीबॉल इवेंट होने वाला है। 7 साल पहले यहाँ पुरुषों का खेल हुआ था। जबकि इस बार सभी महिला खिलाड़ियों को निर्देश दिया गया है कि वो शर्ट और लंबे ट्रॉउज़र पहनें, जिसका विरोध हो रहा है।

‘वर्ल्ड बीच वॉलीबॉल फेडरेशन (FIVB)’ ने कहा है कि मेजबान देश की संस्कृति और नियम-कायदों को देखते हुए ये चीजें तय की जाती हैं। लेकिन, जर्मनी की दोनों खिलाड़ियों ने इन नियमों के विरोध में क़तर जाने से इनकार कर दिया है।

दोनों खिलाड़ियों ने कहा कि वो हर देश के माहौल के प्रति ढल सकती हैं, लेकिन दोहा में इतनी गर्मी रहती है कि बिकनी के बिना ये खेल नहीं हो पाएगा। सुडे ने कहा कि 2019 वर्ल्ड एथलिट चैंपियनशिप में क़तर ने कुछ रियायतें दी थीं।

मार्च में क़तर में बहुत ज्यादा गर्मी नहीं रहती है, लेकिन फिर भी तापमान 30C (86F) के आसपास घूमता रहता है। बोर्गर ने इस पर भी सवाल उठाए कि क्या इस खेल के आयोजन के लिए क़तर एक योग्य मेजबान देश है भी?

क़तर में मानवाधिकार की समस्या और इसके स्पोर्टिंग इतिहास को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं, जिन्हें हाल के दिनों में ठीक करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन, फिर भी पेंच फँस रहा है।

क़तर में इस्लामी कानून चलता है, जहाँ महिलाओं को हिजाब और बुर्का पहनने को कहा जाता है। लेकिन, हाल के दिनों में कई पर्यटक वहाँ पर पहुँचे हैं, जिन्हें नियमों में ढील की उम्मीद है।

क़तर के स्विमिंग पूल और पाँच सितारा होटलों में महिलाएँ बिकनी पहनती रही हैं। जर्मनी वॉलीबॉल फेडरेशन ने भी अपने खिलाड़ियों का समर्थन किया है। 2006 एशियन गेम्स में इसी खेल में खिलाड़ियों को बिकनी पहनने की अनुमति मिली थी।

Bigg Boss 13: लड़का- लड़की एक ही बेड कर रहे हैं शेयर, नाराज हुए लोगों ने कहा- सलमान बंद करो शो

Bigg Boss 13: लड़का- लड़की एक ही बेड कर रहे हैं शेयर, नाराज हुए लोगों ने कहा- सलमान बंद करो शो
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जबसे colours टीवी पर Bigg Boss शुरू हुआ है, अश्लीलता को लेकर हमेशा से विवादों में रहा है। फिर पता नहीं किस कारण इसे प्रसारित किया जाता है। ये भी संभव है कि भारतीय संस्कृति के विरोधी इस कार्यक्रम को प्रोत्साहित कर रहे हों। अक्सर अपने इसी ब्लॉग पर हर बार इसमें होने वाली अश्लीलता के विरुद्ध लिखता रहा हूँ।
#metoo पर सियापा करने वाले/वाली खुलेआम हो रही अश्लीलता पर खामोश है, क्यों? क्या #metoo पर सियापा प्रायोजित होता है? 
बिग बॉस को लेकर कंट्रोवर्सी होना कोई नई बात नहीं है. शो में अश्लीलता को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। इसी वजह से इसका टाइम भी बदल दिया गया था।इस बार भी शो अपने रंग में रंगा ही था कि फिर से विवाद हो गया है। सोशल मीडिया पर इसे अश्लीलता फैलाना वाला शो कहा जा रहा है और इसे बंद करने की मांग की जा रही है। ट्विटर पर #UnsubscribeColoursTV, #Boycott_BigBoss, #JehadFelataBigBoss जैसे हैश टैग ट्रेंड कर रहे हैं। यही नहीं कुछ यूजर्स ब्लैक स्क्रीन शॉट के साथ अपना विरोध जता रहे हैं
बीजेपी के नेता सत्यदेव पचौरी ने भी बिग बॉस को लेकर नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि ये शो नहीं, अय्याशी का अड्डा बना रहे हैं। इससे समाज में गंदगी फैल रही है. इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए


Confederation Of All India Traders (CAIT) नाम का एक संगठन है। इसने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिख कर कलर्स टीवी के शो ‘बोग बॉस’ पर बैन लगाने की माँग की है। कॉन्फ़ेडरेशन ने केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र में इस ‘बेहूदा’ शो के माध्यम से फैलाई जा रही ‘अश्लीलता’ की तरफ़ ध्यान आकृष्ट कराया है। पत्र में कहा गया है कि इस शो के कारण कलर्स चैनल को पारिवारिक माहौल में घर में देखना मुश्किल हो गया है। आरोप लगाया गया है कि सलमान ख़ान द्वारा होस्ट किया जाने वाला ‘बिग बॉस’ का 13वाँ सीजन देश की पारम्परिक और सांस्कृतिक मूल्यों को कलंकित कर रहा है।
कॉन्फ़ेडरेशन ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न सिर्फ़ भारत बल्कि पूरी दुनिया में देश के सांस्कृतिक मूल्यों की बात करते हैं, इसीलिए इस शो को तुरंत बैन किया जाना चाहिए क्योंकि इससे भारत की ग़लत छवि पेश हो रही है। इस पत्र में लिखा गया है कि ‘बिग बॉस’ बिना शक हमेशा से विवादित कार्यक्रम रहा है और हमारे देश के नैतिक मूल्यों को नुकसान पहुँचाता रहा है। कॉन्फ़ेडरेशन को मुख्य आपत्ति शो के नए कॉन्सेप्ट ‘बेड फ्रेंड फॉरएवर’ से है। इसके तहत दो लोगों को एक बेड पर सोने का टास्क दिया जाता है।
ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने इसे टीवी की दुनिया के लिए निंदनीय बताया है। उसने इस बात पर आपत्ति जताई है कि इसे ‘प्राइम टाइम’ में प्रसारित किया जाता है और यह रात का वो समय होता है जब परिवार के सभी लोग, यहाँ तक कि बच्चे भी टीवी देख रहे होते हैं। ‘कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स’ ने केंद्रीय मंत्री को भेजे गए पत्र में लिखा है:
“कलर्स पर आने वाले ‘बिग बॉस’ के 13वें सीजन ने नैतिकता के सभी मूल्यों को ताक पर रखते हुए हद पार कर दी है। न सिर्फ़ शो बल्कि शो में दिए जा रहे अलग-अलग टास्क भी मानवीय और सांस्कृतिक मूल्यों के ख़िलाफ़ हैं। इस शो के कंटेंट्स काफ़ी ओछे हैं और इसे एक ऐसे नेशनल टीवी चैनल पर प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए, जिसे घर-घर में देखा जाता हो। जब फ़िल्मों को सेंसर बोर्ड से पास कराना अनिवार्य होता है तो फिर टीवी कार्यक्रमों को प्रसारण से पहले सेंसर बोर्ड की अनुमति क्यों नहीं लेनी होती? अगर सेंसर बोर्ड से अनुमति ली जाती है तो फिर ऐसे अश्लील और ओछे कंटेंट को पास कैसे किया गया?”
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बिग बॉस जो कलर tv में सलमान होस्ट कर रहा है उस में कुवारी लड़कियो को बेड पाटर्नर के रूप में लड़के दिए है ताकि पूरी तरह से ...

कॉन्फ़ेडरेशन ने आरोप लगाया कि आज़ादी की आड़ में उन सिद्धांतों से समझौता किया जा रहा है, जो हमारे देश में निहित है। पत्र में माँग की गई है कि इस शो को या तो तुरंत बंद किया जाए या फिर इसे तभी प्रसारण की अनुमति दी जाए, जब इसमें से अश्लील कंटेंट्स हटा लिए जाएँ।
Related imageहर सीजन रहा विवादों में 
बिग बॉस का कोई भी सीजन बिना कॉन्ट्रोवर्सी के निकला हो ऐसा नहीं हुआ। सीजन 1 से लेकर सीजन 12 तक ऐसे कई विवाद रहे जिसके कारण बिग बॉस सुर्खियों में रहा, TRP बटोरी और टीवी का सबसे पॉपुलर शो बनने की राह में आगे बढ़ता रहा। शो को सलमान खान होस्ट कर रहे हैं और हर वीकेंड में बिग बॉस के घर में हुई कॉन्ट्रोवर्सीज पर चर्चा करते हैं। यहां अब तक के सारे सीजन की कॉन्ट्रोवर्सीज की लिस्ट यहां दी गई है:
Bigg Boss Season 1
इस सीजन में Rakhi Sawant जैसी ड्रामा क्वीन घर में थी तो समझ लीजिए कि कुछ तो हंगामा होना तय था। राखी सावंत के साथ इस सीजन की कंटेस्टेंट Kashmira Shah से भिड़ गई। राखी ने कश्मीरा के जीवन पर व्यक्तिगत टिप्पणी की जो कि उन्हें पसंद नहीं आई और वह बुरी तरह लड़ पड़ीं। इसके बाद पूरा घर राखी के खिलाफ हो गया था।
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Season 2
Rahul Mahajan ने उस समय सुर्खियां बटोरीं जब उन्होंने शो के नियमों को तोड़ा और दीवार पर कूदकर घर से भाग गए थे।
इसी सीजन में श्वेता तिवारी के पूर्व पति Raja Chaudhary भी थे। राजा चौधरी और Sambhavna Seth ने इन्टिमेट होने से पहले एक-दूसरे के साथ बदतमीजी की। हालांकि बाद में शो के दौरान उन्हें किस लेते हुए भी पकड़ा गया।
सम्भाना सेठ की कॉन्ट्रोवर्सी केवल यहीं तक सीमित नहीं थी लेकिन वह Payal Rohatgi के साथ भी बहस भी पड़ गई। एक नॉमिनेशन के दौरान दोनों के बीच बुरी तरह लड़ाई हुई। इस में पायल ने अपने प्रेमी राहुल महाजन को भी लड़ाई में उतारा।
Season 3
तीसरे सीजन में, कंटेस्टेंट Kamal Rashid Khan ने घर के अंदर हंगामा मचाया था, जिसके बाद रोहित वर्मा पर बोतल फेंकने के बाद मेकर्स ने कॉन्ट्रोवर्शियल एग्जिट कर दिया। यह बोतल शिल्पा शेट्टी की बहन शमिता शेट्टी को लग गई थी।
Season 4
टीवी कलाकार Sara Khan और Ali Merchant को शो में शादी करने के लिए 50 लाख रुपए का भुगतान किया गया था। शादी को इस्लाम में वर्जित माना जाता है, क्योंकि सारा खान और अली मर्चेंट पहले से शादीशुदा थे। हालांकि, अली मर्चेंट की मां, सलमा ने कहा कि मुस्लिम कानून ने एक ही जोड़े को कई बार पुनर्विवाह करने की अनुमति दी।
चौथे सीजन के दौरान, Sara ने बिग बॉस कंटेस्टेंट Dolly Bindra के व्यवहार को लेकर आपत्ति जताई थी। जब से डॉली बिंद्रा ने घर में दोबारा प्रवेश किया, घरवालों के प्रति उनके रुख और रवैये में काफी बदलाव आया। डॉली काफी विनम्र हो गई और उसे कुछ फायदे हुए जैसे उसे दोबारा प्रवेश करने के तुरंत बाद रानी बना दिया गया था। इस तरह, लगभग सभी लोग बुरी तरह से भड़क उठे, सारा ने डॉली को लेकर पक्षपात का विरोध किया। सारा शिकायत करती रही कि 'बिग बॉस' निष्पक्ष नहीं था, जिस पर फिर से एंट्री करने वाले समीर सोनी ने भी सारा से सहमति जताई। सारा को बाद में बिग बॉस और सलमान खान द्वारा इन अस्पष्ट आरोपों के बारे में सख्त चेतावनी दी गई थी।
Dolly Bindra की Shweta Tiwari और Sameer Soni से बुरी तरह लड़ाई हुई जब डॉली ने श्वेता के हाथ पकड़ लिए और इससे निशान हो गए। डॉली और समीर की लगभग हाथाापाई हो गई। इसके बाद दोनों को ही घर से बाहर निकाल दिया गया।
इस सीजन में पाकिस्तानी अभिनेत्री Veena Malik के भी खूब चर्चे थे। Ashmit Patel से उनके रिश्ते ने काफी विवाद भी पैदा किए।
 Season 5
Pooja Misrra को शो में लगातार धमकाया गया था। पूजा ने प्रतियोगी सिद्दार्थ भारद्वाज पर हाथ भी उठाया जिसके कारण निर्माताओं ने उसे बेदखल करने का फैसला किया। हालांकि, टीआरपी वास्तव में कम हो गई, क्योंकि शो ने अपनी दर्शकों की संख्या खोनी शुरू कर दी।
इसी सीजन में Akashdeep Saigal की महक चहल से बुरी तरह लड़ाई हुई और सलमान ने आकाशदीप को फटकारा भी। उसके बाद आकाशदीप ने सलमान पर पीटने का आरोप भी लगाया। शो खत्म होने के बाद भी उसने सलमान पर करियर खत्म करने का आरोप लगाया था।
Season 6
कंटेस्टेंट Imam Siddiqui ने होस्ट सलमान खान के बारे में बयान दिया कि सलमान ने उनसे पैसे लिए। उन्होंने अपने को-पार्टिसिपेंट Aashka Goradia के साथ आधी रात की लड़ाई के बाद अपने कपड़े भी उतार दिए थे। इमाम सिद्दीकी यहीं नहीं रूके। उसने Urvashi Dholakia और पेरेंटिक स्किल्स पर भद्दी टिप्पणी की, जिसके कारण उर्वशी खूब रोई थी।
Sapna Bhavnani ने तो सलमान खान को भी नहीं छोड़ा और खूब बदतमीजी की। सपना ने सलमान को सीरीयल वुमन-बीटर का खिताब तक दे दिया जिससे कॉन्ट्रोवर्सी खड़ी हो गई।
Season 7
Armaan Kohli को शो के सेट से तब गिरफ्तार किया गया था जब ब्रिटिश गायिका-अभिनेत्री Sofia Hayat द्वारा उनके शो में रहने के दौरान उनके साथ मारपीट करने की शिकायत दर्ज की गई थी। Kushal Tandon और Tanisha Mukherjee के बीच एक टास्क के दौरान नोकझोंक हो गई जिसके बाद तनीषा ने कुशाल को धक्का दे दिया और कुशाल ने उसे बॉडी शेमिंग कमेंट्स कर दिए और उसने तनीषा को काफी बुरा भला कहा। कुशाल भी छत पर चढ़ गया और इस घटना के बाद घर से भाग गया। सप्ताहांत में सलमान ने कुशाल के बदले तनीषा के पक्ष में खड़े हुए।
Gauhar Khan पर VJ Andy द्वारा भद्दे कमेंट करने के बाद वीजे एंडी के साथ कुशाल टंडन फिजिकल हो गए। इसके कारण बिग बॉस ने कुशाल को घर से बाहर निकाल दिया।
Season 8
Karishma Tanna की Gautam Gulati से खूब लड़ाई हुई जब दूसरे सप्ताह में हाईजैक टास्क के दौरान गौतम ने भलाबुरा कहा। इससे पूरा घर गौतम के खिलाफ हुआ।
नवंबर 2014 में, गौतम गुलाटी के जन्मदिन पर, Diandra Soares उन्हें बाथरूम में ले गई, जिससे घर में एक और विवाद छिड़ गया। डायंड्रा के घर से बाहर होने के बाद, एक और विवादास्पद मुद्दा खड़ा हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार वह गर्भवती थी जब वह अस्पताल गई थी लेकिन बाद में उसने सभी अफवाहों का खंडन किया।
Ali Quli Mirza ने गलत टिप्पणी की तो Sonali Raut ने थप्पड़ मार दिया फिर क्या था अली छत पर चढ़कर घर से भागने की कोशिश करने लगे।
Puneet Issar को एक टास्क के दौरान बेहद हिंसक होने और यहां तक ​​कि को-कंटेस्टेंट आर्य बब्बर के साथ हाथापाई की जिसके घर से बाहर निकाल दिया गया था।
Season 9
Rishabh Sinha के कप में Kishwar Merchant ने थूक दिया जिसके ऋषभ ने तीन घंटे तक किश्वर को दौड़ाया। इसके बाद Prince Narula की ऋषभ से लड़ाई हुई और वह काफी बढ़ गई।
हाईवे टास्क के दौरान Mandana Karimi ने किश्वर मर्चेंट को पेट में लात मारी। इसके बाद किश्वर अपना आपा खो देती है और टास्क जारी रखने से मना कर देती है।
Season 10
Lopamudra Raut को बहुत बुरा-बुरा बोलने के बाद Priyanka Jagga को सलमान ने शो से बाहर कर दिया था।
कंटेस्टेंट Swami Om ने Bani और Rohan के ऊपर पेशाब फेंक दी थी। बाद में निर्माताओं ने उन्हें शो से निकाल दिया। वह कई बार शो से बाहर हुए लेकिन वापस लौट आए।
Season 11
Zubair Khan ने शो से बाहर निकलने के लिए आत्महत्या करने का प्रयास किया। जब उन्हें होस्ट सलमान खान द्वारा घर की महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के कारण खूब फटकारा था।
उनका दावा है कि सलमान खान ने उन्हें धमकी दी थी कि वह एक बार घर छोड़ने के बाद इंडस्ट्री में काम नहीं कर पाएंगे।
Hina Khan मे घर में काफी कॉन्ट्रोवर्सी पैदा की थी। उन्होंने साउथ इंडियन एक्ट्रेसेस और अन्य टीवी एक्ट्रेसेस के लिए खराब बातें बोली थी। उन्होंने Shilpa Shinde को बॉडी शेम भी किया।
Vikas Gupta तीन बार बिग बॉस की जेल से भागे औप उन्होंने Shilpa shinde के भड़काने और हैरेस करने पर छत पर चढ़कर भागने की कोशिश की।
Season 12
Saba Khan और Srishty Rode एक टास्क के दौरान हाथापाई करने लगीं। बिग बास ने दोनों को इसके बाद कप्तानी से बैन कर दिया।