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लंदन, कांग्रेस, किसान प्रदर्शन और जार्ज सोरोस में कनेक्शन! राहुल गांधी की यात्रा रुकी, किसानों का मार्च रुका; राहुल के वापस आते ही किसान आंदोलन फिर शुरू

कांग्रेस पार्टी ने अचानक अपनी न्याय यात्रा 1 मार्च तक रोक दी। फर्जी किसानों ने अपना दिल्ली मार्च अचानक 29 फरवरी तक रोक दिया। इस बीच राहुल गांधी अचानक देश विरोधी लेक्चर देने लंदन पहुंच गए। इससे साफ होता है कि लंदन, कांग्रेस और किसान प्रदर्शन सभी का आपस में कनेक्शन है। राहुल और अन्य विपक्ष किसान को जितना अधिक जीवित रखेगा, उससे अधिक इनके लिए घातक होने जा रहा है, क्योकि जनता इस उपद्रव की सच्चाई जान चुकी है। विदेशी भीख पर चलने वाला आंदोलन। कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि 27 और 28 फरवरी को राहुल गांधी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की यात्रा की योजना 1 साल पहले निर्धारित की गई थी लेकिन 12 फरवरी 2024 को प्रकाशित भारत न्याय यात्रा का जो शेड्यूल था, इसमें 27-28 फरवरी को राहुल गांधी की लंदन यात्रा का कोई जिक्र नहीं था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने भी 27-28 फरवरी के किसी विशेष समारोह की जानकारी सोशल मीडिया पर नहीं दी। लेकिन 20 फरवरी को अचानक कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने राहुल गांधी को वहां आने और छात्रों को व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित कर लिया।

देश ने मोदी को दिल में बसाया, 2024 में विदेशी ताकतों का सपना होगा चकनाचूर
जिस तरह 2014 के बाद से भारत विकास के पथ पर अग्रसर है उसे देखते हुए देशवासियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिल में बसाया है। इसकी झांकी पीएम मोदी के रोड शो में साफ देखने को मिलती है। लोग कह रहे हैं भारतीय मतदाताओं को प्रभावित करने वाले ये विदेशी ताकतें और जार्ज सोरोस कौन होता है। भारतीय मतदाता निश्चित रूप से 2024 में मोदी जी को फिर से वापस लाएगा! 2024 में सोरोस और विदेशी ताकतों का सपना चकनाचूर होगा। देशों में शासन परिवर्तन के उसके मंसूबे का अंत भारत में होगा। भारत में ऐसा कुछ करने की कोशिश करना मुश्किल है। अब देश ने मोदी को दिल में बसा लिया है।

राहुल गांधी लेक्चर देने गए या गुप्त मीटिंग करने?
लंदन जाने के लिए राहुल ने अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा रोक दी, अपनी सभी चुनावी बैठकें छोड़ दीं और वहां जाने के लिए तैयार हो गए। वह चाहते तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी व्याख्यान दे सकते थे। ऐसे में वहां जाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। लेकिन असलियत यह है कि लेक्चर तो बहाना है और इसकी आड़ में गुप्त मीटिंग करनी है। क्या यह संयोग है कि जार्ज सोरोस जो भारत से नफरत करता है, जो भारत को नष्ट करना चाहता है और खुलेआम 2024 में मोदी को हटाने की घोषणा कर चुका है वह भी लंदन में रहता है। 

राहुल गांधी दो दिनों से लंदन में, एक भी पोस्ट नहीं आया 
राहुल गांधी 2 दिनों से लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में हैं। लेकिन कांग्रेस, ओवरसीज़ कांग्रेस या कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से कोई पोस्ट सामने नहीं आया है। किसी भी समाचार में कोई कवरेज नहीं, कोई कार्यक्रम नहीं, कोई वीडियो नहीं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि वह वहां व्याख्यान के लिए गए हैं या जॉर्ज सोरोस के साथ कुछ गुप्त बैठकों के लिए गए हैं? कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने 2022 में राहुल गांधी के कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी थी।

राहुल गांधी का 27-28 फरवरी को कैंब्रिज में लेक्चर
जयराम रमेश ने कहा, ‘‘26 फरवरी से एक मार्च तक यात्रा में विराम होगा, ताकि राहुल गांधी 27 और 28 फरवरी को इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय (जहां से उनकी शिक्षा हुई) में दो विशेष व्याख्यान देने के अपने एक साल पहले के वादे को पूरा कर सकें। और इसके बाद उन्हें नई दिल्ली में होने वाली कुछ अहम बैठकों में शामिल होने का मौका मिल सके।’’

राहुल गांधी लगभग अपने हर विदेश दौरे में देशविरोधी लोगों से मिलते रहे हैं।

पूरे भारत में केरोसिन छिड़का जा चुका है, बस एक चिंगारी की जरूरत है
लंदन में 21 मई 2022 को‘आइडिया फॉर इंडिया’ कॉन्फ्रेंस में पहुंचे राहुल गांधी ने कहा था- ‘देश में धुव्रीकरण बढ़ता जा रहा है, बेरोजगारी अपने चरम पर है, महंगाई बढ़ती जा रही है। बीजेपी ने देश में हर तरफ़ केरोसीन छिड़क दिया है बस एक चिंगारी से हम सब एक बड़ी समस्या के बीच होंगे।’

भारत को बदनाम करने वाले ब्रिटिश सांसद कोरबिन से मिले राहुल गांधी
राहुल गांधी ने अपने लंदन दौरे के दौरान मई 2022 में ब्रिटिश सांसद जेरेमी कोरबिन (Jeremy Corbyn) से भी मुलाकात की थी। कोरबिन वही शख्स हैं जो भारत को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। वह भारत से कश्मीर के अलगाव की पैरवी करते हैं और स्पष्ट रूप से हिंदू विरोधी हैं। आखिर राहुल गांधी जैसे नेता किस हद तक अपने देश के खिलाफ जा सकता है, यह अपने आप में सवाल है।

राहुल गांधी ने लंदन में कहा- भारत में लोकतंत्र खत्म
राहुल ने लंदन में मार्च 2023 में जर्नलिस्ट एसोसिएशन नाम के संगठन की ओर से आयोजित कार्यकम में कहा था, ”यदि यूरोप से तीन या 4 गुना बड़े देश में लोकतंत्र खत्म हो जाता है, तो आप कैसे रिएक्ट करेंगे। असल में भारत में ऐसा हो चुका है, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है। इसकी वजह यह है कि कारोबार और पैसे का मामला है। अमेरिका से आबादी में तीन से 4 गुना बड़े देश में लोकतंत्र समाप्त हो रहा है और इसकी रक्षा करने का दावा करने वाले अमेरिका और यूरोप चुपचाप देख रहे हैं।” राहुल ने कहा था, विपक्ष के तौर पर हम लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन यह अकेले भारत की जंग नहीं है. यह पूरे लोकतंत्र का एक संघर्ष है।

राहुल ने पाकिस्तानी प्रोफेसर कमाल मुनीर के साथ मंच साझा किया
लंदन में भारतीय लोकतंत्र और संस्थानों पर हमला करते हुए राहुल गांधी ने मार्च 2023 में पाकिस्तानी प्रोफेसर कमाल मुनीर के साथ मंच साझा किया। राहुल गांधी का परिचय पाकिस्तान में जन्मे कमाल मुनीर ने एमबीए दर्शकों से कराया। कमाल मुनीर को पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा दिए जाने वाले राजकीय सम्मान तमगा-ए-इम्तियाज से सम्मानित किया गया है। मुनीर का पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ संपर्क है। इससे आप समझ सकते हैं कि डीप स्टेट भारत को तबाह करने के लिए किस स्तर पर काम कर रहा है। एक तरफ राहुल गांधी को खड़ा किया गया, लेफ्ट लिबरल गैंग प्रोपेगेंडा फैलाने में जुट जाती है। आईएसआई नेटवर्क के जरिये खालिस्तान मुद्दे को जिंदा किया गया जिससे देश में उथल-पुथल मचे।

अमेरिका में राहुल का जमात, सुनीता विश्वनाथ कनेक्शन
राहुल गांधी पीएम मोदी के अमेरिका दौरे से पहले 30 मई 2023 को अमेरिका पहुंचे थे। जिस अरबपति कारोबारी जार्ज सोरोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जहर उगला था, जिसने पीएम मोदी को सत्ता से हटाने की बात कही थी, जिसने राष्ट्रवाद से लड़ने के लिए 100 अरब डॉलर का फंड देने की बात कही थी, राहुल गांधी उसी के करीबी सहयोगी सुनीता विश्वनाथ के साथ बैठक करते नजर आए। आखिर राहुल गांधी देश विरोधी लोगों से क्यों मिल रहे थे? क्या भारत को कमजोर करने की जार्ज सोरोस की साजिश में वे भी शामिल हैं? राहुल गांधी का जमात, ISI और जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोगों से मिलना यह साबित करता है कि वे भारत से प्रेम नहीं करते बल्कि सत्ता के लिए देश को कमजोर करने से लेकर किसी भी हथकंडे को अपना सकते हैं।

विदेशों में राहुल के कार्यक्रम से जुड़े रहते हैं मुसलमान
राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी अपने दिमाग से कुछ नहीं करती है। जैसे पड़ोसी देश पाकिस्तान लोन लेकर अपना काम चलाती है उसी तरह गांधी परिवार अब विदेशी ताकतों से सुपारी लेकर देश को बदनाम का ठेका ले लिया। क्या वजह है कि राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं तो मुसलमान उनके आयोजक बन जाते हैं। अमेरिका में इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने उनके कार्यक्रमों का आयोजन किया। राहुल के कार्यक्रम में जाने के लिए मस्जिदों से बसों की व्यवस्था की गई। 

‘मैं मोदी के भाषण में शामिल नहीं होऊँगी’: सगे भाई से निकाह करने वाली इल्हान उमर, पाकिस्तान परस्त अमेरिकी सांसद ने दिखाई हिंदू घृणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी (PM Modi US Visit) दौरे पर हैं। अमेरिका के बड़े कारोबारी और विचारकों ने उनसे मुलाकात की है। उनके नेतृत्व की प्रशंसा कर रहे हैं। दूसरी ओर इल्हान उमर (Ilhan Omar) जैसे कुछ अमेरिकी सांसद भी हैं जो इस मौके पर भी भारत और हिंदुओं को लेकर अपनी घृणा का प्रदर्शन कर रहे हैं। अमेरिकी काॅन्ग्रेस की महिला सदस्य ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में शामिल नहीं होंगी। पीएम मोदी अमेरिकी काॅन्ग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे। दो बार अमेरिकी सदन को संबोधित करने वाले वे पहले भारतीय नेता हैं।

21 जून 2023 को एक ट्वीट में इल्हान उमर ने कहा है, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यकों का दमन किया है। हिंसक हिंदू राष्ट्रवादी समूहों को गले लगाया है। पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया है। मैं मोदी के भाषण में शामिल नहीं होऊँगी।” उन्होंने आगे लिखा है, “मैं पीएम मोदी के दमन और हिंसा के रिकॉर्ड पर चर्चा करने के लिए मानवाधिकार समूहों के साथ एक ब्रीफिंग करूँगी।”

 

अपने भारत विरोधी इस रुख के लिए इल्हान उमर नेटिजंस के भी निशाने पर हैं। @DruzeSaher ने पूछा, “आपने पाकिस्तान का दौरा किया और आप अल्पसंख्यकों के दमन की शिकायत कर रही हैं? वहीं राष्ट्र सर्वोपरि नाम के एक अन्य यूजर ने इल्हान उमर के मोदी के कार्यक्रम में न जाने के एलान पर कहा, “जाने की जरूरत भी नहीं है। वो ऐसे लोगों को पसंद भी नहीं करते जिसने अपने भाई से ही निकाह कर लिया हो।” रिकी नाम के यूजर ने भी इल्हान उमर के भाई से निकाह वाली बात दोहराई है।

                                                       साभार- @IlhanMN के ट्वीट पर आए जवाब

पाकिस्तान परस्त इल्हान उमर

पाकिस्तान परस्त डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद इल्हान उमर अफ्रीकी मूल की हैं। पिछले साल उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) का दौरा किया था। आंतकियों को संरक्षण देने वाले हमारे पड़ोसी मुल्क ने भी उनका जोरदार स्वागत किया था। लेकिन भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करने वाली अमेरिकी सांसद के इस दौरे का ना केवल भारत, बल्कि अमेरिका ने भी विरोध किया था। भारत ने उनकी इस यात्रा को निंदनीय बताया, जबकि अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने उनके पीओके दौरे को व्यक्तिगत गतिविधि बताकर खुद को उनसे अलग कर लिया था।

मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी हैं इल्हान उमर

इल्हान उमर की पैदाइश सोमालिया की है। उन्हें मुस्लिम देशों में सेलिब्रिटी का दर्जा हासिल है। उमर पर इस्लामी एजेंडा इस कदर हावी है कि वह अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की भी परवाह नहीं करती हैं। दुनियाभर में कट्टरपंथी इस्लाम को आगे बढ़ाना ही उनका एकमात्र उद्देश्य है। मुस्लिम देशों से उनकी मोहब्बत और भारत के प्रति उनकी घृणा किसी से भी छिपी नहीं है। कश्मीर, भारतीय मुस्लिमों, बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इल्हान उमर कई विवादित बयान दे चुकी हैं। खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी नफरत सोशल मीडिया पर जगजाहिर है। 
इल्हान उमर के बारे में बताया जाता है कि वो पहली अफ्रीकी शरणार्थी हैं, जो चुनाव जीतकर अमेरिकी संसद में पहुँची हैं। उमर 2019 में मिनिसोटा से सांसद चुनी गई थीं। इस संसदीय सीट से चुनाव जीतने वाली वह पहली अश्वेत महिला हैं। साथ ही, अमेरिकी संसद पहुँचने वाली पहली दो मुस्लिम-अमेरिकी महिलाओं में भी शामिल हैं। उमर के परिवार ने गृहयुद्ध के कारण सोमालिया छोड़ दिया था, उस वक्त उमर महज आठ वर्ष की थीं। उनके परिवार ने केन्या के शरणार्थी शिविर में चार साल बिताए और फिर 1990 के दशक में अमेरिका आए। दादा ने उमर को उनकी किशोरावस्था में ही राजनीति में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। वह 2016 में चुनाव जीतकर मिनिसोटा की प्रतिनिधि सभा पहुँची और तीन साल बाद 2019 में वो अमेरिकी संसद के लिए चुनी गईं।

गैर मुसलमानों के प्रति नफरत

सोमालिया में ही पैदा हुईं मानवाधिकार कार्यकर्ता अयान हिरसी अली (Ayaan Hirsi Ali) ने 12 जुलाई 2019 को वॉल स्ट्रीट जर्नल में Can Ilhan Omar Overcome Her Prejudice? शीर्षक से लिखे लेख में कहा था, “किसी के मन में किसी के प्रति प्रति नफरत घर कर जाए तो उससे उबरना मुश्किल होता है। इल्हान उमर के साथ भी यही बात लागू है।” अयान के मुताबिक, इल्हान उमर उन मुस्लिमों में शामिल हैं, जो दुनिया में जो भी गलत हो रहा है, उसके लिए एकमात्र दोषी यहूदियों को मानती हैं। उनमें गैर-मुसलमानों के प्रति भी नफरत कूट-कूटकर भरी है, क्योंकि उन्हें बचपन से यही सिखाया गया है। वहीं, भारत में काफी चर्चित पाकिस्तानी मूल के लेखक और पत्रकार तारेक फतेह भी इल्हान उमर को भारत विरोधी कट्टर इस्लामवादी करार दे चुके हैं।
इल्हान उमर के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह बातें स्वतंत्रता-समानता की करती हैं, लेकिन कट्टर इस्लाम के प्रति उनका झुकाव साफ-साफ झलकता है। वे बुर्का, हिजाब की जबर्दस्त पैरोकार हैं। उन्होंने ही अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में वैश्विक स्तर पर इस्लामोफोबिया से लड़ने के लिए विशेष प्रतिनिधि का पद सृजित करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन की मंजूरी भी मिल गई। लेकिन, उनके इस कदम की रिपब्लिकन पार्टी के टिकट पर अमेरिकी कॉन्ग्रेस का चुनाव लड़ चुकीं एक और मुस्लिम नेता डालिया अल-अकिदी (Dalia Al-Aqidi) ने जबर्दस्त विरोध किया था। उन्होंने अरब न्यूज में एक लेख लिखकर पूछा है कि क्या इस्लाम के नाम पर आतंकी वारदातों को अंजाम देने वालों को मुस्लिम आतंकी कहना भी इस्लामोफोबिया के दायरे में आएगा?

सगे भाई ही इल्हान उमर के शौहर?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चुनावी रैली में इल्हान उमर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था, “इल्हान उमर को अमेरिका, यहाँ के शासन-प्रशासन और यहाँ के लोगों से नफरत है। वह हमारे देश से घृणा करती हैं। वह ऐसी जगह से आई हैं जहाँ सरकार है ही नहीं और यहाँ आकर हमें ही ज्ञान दे रही हैं कि अपना देश कैसे चलाना चाहिए?” यही नहीं ट्रंप ने कई बार कहा था कि इल्हान के दूसरा पति अहमद इल्मी और कोई नहीं उनका सगा भाई ही है। ट्रंप ने 2020 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एक प्रचार अभियान में जस्टिस डिपार्टमेंट से इसकी जाँच करने की माँग भी की थी। इसकी पुष्टि तब हुई जब ट्रंप की पार्टी के एक रणनीतिकार ने पिछले वर्ष अगस्त में डीएनए टेस्ट रिपोर्ट वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी। डीएनए के कई टेस्ट में उमर इल्हान और अहमद इल्मी के सगे बहन-भाई होने का सौ फीसदी मिलान हुआ था। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमाली समुदाय के नेता ने भी खुलासा किया था कि इल्हान उमर ने अपने भाई से निकाह किया है।

 

क्या है राफेल का कोड चेंज करने का मामला?

आज मोदी विरोधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्यों विरोध करते हैं, इस मामले की जितनी गहराई में जाओगे, उतनी मोदी विरोधियों की जनसेवा के नाम पर देश विरोधी हरकतें ही सामने आएंगी, जिनसे आज तक जनता अनजान है और मोदी विरोधियों के दुष्प्रचार से भ्रमित होकर शिक्षित होते हुए भी अनजान बन रहे हैं। 

किसने मना किया कि प्रधानमंत्री मोदी का विरोध मत करो, लेकिन उस विरोध का आधार होना चाहिए। कोई खोजी पत्रकार भी सच्चाई सामने लाने का प्रयास नहीं करता, क्यों? क्या ब्रह्मोस केवल गणतंत्र दिवस परेड के लिए बना था? 

बात शुरू होती है अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार से! तब अटल जी के विशेष अनुरोध पर, भारतीय वैज्ञानिकों ने ब्रम्होस मिसाइल तैयार की थी!

ब्रम्होस की काट आज तक दुनिया का कोई देश तैयार नहीं कर सका है!

विश्व के किसी देश के पास अब तक ऐसी कोई टेक्नोलॉजी विकसित नहीं हुई जो ब्रम्होस को अपने निशाने पर पहुँचने से पहले रडार पर ले सके!

अपने आप में अद्भुत क्षमताओं को लिये ब्रम्होस ऐसी परमाणु मिसाइल है जो 8000 किलोमीटर के लक्ष्य को मात्र 140 सेकेंड में भेद सकती है।

और चीन के लिये ब्रम्होस की यह लक्ष्य भेदन क्षमता ही सिरदर्द बनी हुई है। न चीन आज तक ब्रम्होस की काट बना सका है, न ऐसा रडार सिस्टम जो ब्रम्होस को पकड़ सके!

अटल जी की सरकार गिरने के बाद, सोनिया के कहने पर, कांग्रेस सरकार ने ब्रम्होस को तहखाने में रखवा कर आगे का प्रोजेक्ट बन्द करवा दिया!

जिसमें ब्रम्होस को लेकर उड़ने वाले फाइटर जेट विमान तैयार करने की योजना थी जो अधूरी रह गयी।

ब्रम्होस का विकास रोकने के लिए चीन ने ना जाने कितने करोड़ रुपये-पैसे सोनिया को दिए होंगे!

दस वर्षों बाद, जब मोदी सरकार आई, तब तहखाने में धूल-गर्द में पड़ी ब्रम्होस को सँभाला गया! वह भी तब, जब मोदी खुद भारतीय सेना से सीधा मिले, तो सेना ने तब व्यथा बताई!

वर्तमान में ब्रम्होस को लेकर उड़ सके ऐसा सिर्फ एक ही विमान है और वह है राफेल!

जी हाँ दुनिया भर में सिर्फ राफेल ही वो खूबियाँ लिये हुए है, जो ब्रम्होस को सफलता पूर्वक निशाने के लिये छोड़ कर वापस लैंड करके मात्र ४ मिनट में फिर अगली ब्रह्मोस को लेकर दूसरे ब्लास्ट को तैयार हो जाये!

मोदी ने फ्रांस से डील करके, राफेल को भारतीय सेना तक पहुँचाने का काम कर दिया, और यहीं से असली मरोड़ चीन और उसके पिट्ठू वामपंथियों को हुई।

इसमें देशद्रोही पीछे कैसे रहते! जो विदेशी टुकड़ों पर पलने वाले गद्दार अपने आका चीन के नमक का हक अदा करने मैदान में उतर आये!

खैर .. शायद भारतीय सेना और मोदी दोनों इस तरह की आशंका को भाँप गये ! तो राफेल के भारत पहुँचते ही उसका ब्लैक बॉक्स सहित पूरा सिस्टम निकाला गया।

राफेल के कोड चेंज कर के उस में भारतीय कम्प्यूटर सिस्टम डाला गया जो राफेल को पूरी तरह बदलने के साथ उसकी गोपनीयता बनाये रखने में सक्षम था।

लेकिन बात यहीं नहीं रुकी ! राफेल को सेना को सुपुर्द करने के बाद सरकार ने सेना को उसे अपने हिसाब से कम्प्यूटर ब्लैक बॉक्स और जो तकनीक सेना की है, उसे अपने हिसाब से चेंज करने की छूट दे दी।

जिससे सेना ने छूट मिलते ही मात्र 48 घण्टों में राफेल को बदलकर रख दिया ! जिससे चीन, जो राफेल के कोड और सिस्टम को हैक करने की फिराक में था, वह हाथ मलते रह गया!

फिर चीन द्वारा अपने पाले वामपंथी कुत्तों को राफेल की जानकारी लीक करके उस तक पहुँचाने काम सौंपा गया।

भारत भर की मीडिया में भरे वामपंथी दलालों ने राफेल सौदे को घोटाले की शक्ल देने की नाकाम कोशिश की, ताकि सरकार या सेना, विवश होकर, सफाई देने के चक्कर मे इस डील को सार्वजनिक करे।

जिससे चीन अपने मतलब की जानकारी जुटा सके पर सरकार और सेना की सजगता के चलते दलाल मीडिया का मुँह काला होकर रह गया!

तब फिर अपने राहुल गांधी मैदान में उतरे ! चीनी दूतावास में गुपचूप राहुल गांधी ने मीटिंग की ! उसके बाद राहुल गांधी ने चीन की यात्रा की और आते ही राफेल  सौदे पर सवाल उठाकर राफेल की जानकारी सार्वजनिक करने की माँग जोरशोर से उठने लगी।

पूरी मीडिया, सारी कोंग्रेस की दिलचस्पी सिर्फ, और सिर्फ, राफेल की जानकारी सार्वजनिक कराने में है, ताकि चीन ब्रम्होस का तोड़ बना सके ! पर ये अबतक सम्भव नहीं हो पाया, जिसका श्रेय सिर्फ कर्तव्यनिष्ठ भारतीय सेना और मोदी जी को जाता है।

चीन ब्रम्होस की जानकारी जुटाने के चक्कर में, सीमा पर तनाव पैदा करके युद्ध के हालात बनाकर देख चुका है ! पर भारतीय सेना की चीन सीमा पर ब्रम्होस की तैनाती देखकर अपने पाँव वापस खींचने को मजबूर हुआ था!

डोकलाम विवाद चीन ने इसीलिये पैदा किया था कि वह ब्रम्होस और राफेल की तैयारी देख सके।

इधर कुछ भटके हुए लोग राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के योग्य समझ रहे हैं, जो खुद भारत की गोपनीयता और सुरक्षा को शत्रु देश के हाथों उचित कीमत पर बेचने को तैयार बैठा है!

नेहरू ने भी लाखों वर्ग किलोमीटर जमीन चीन को बेची थी! और जनता समझती है भारत युद्ध में हार गया!

आज ये राफेल और ब्रम्होस ही भारत के पास वो अस्त्र हैं जिसके आगे चीन बेबस है! 

अमेरिकन संस्था ‘फ्रीडम हाउस’ ने भारत को बताया ‘आंशिक आजाद’ देश, रिपोर्ट 2021 में भारत के नक्शे से जम्मू-कश्मीर को किया गायब

अमेरिकी संस्था ‘फ्रीडम हाउस’ ने Freedom Report 2021 जारी की है। इस रिपोर्ट में संस्था ने जहां ‘पॉलिटिकल फ्रीडम’ और ‘मानवाधिकार’ को लेकर भारत की रेटिंग घटाई है, वहीं भारत की संप्रभुता के साथ भी खिलवाड़ किया है। रिपोर्ट में भारत का गलत नक्शा इस्तेमाल करते हुए जम्मू-कश्मीर को गायब कर दिया गया है। वहीं इस रिपोर्ट में भारत को ‘आजाद’ मुल्क से हटाकर ‘आंशिक आजाद’ मुल्क बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में जबसे मोदी सरकार आई है तबसे यहां अल्पसंख्यकों और दलितों के अधिकार कम हो गए हैं।

भारत की संप्रभुता पर उठाया सवाल 

'फ्रीडम हाउस’ अमेरिका का एक गैर-सरकारी संगठन है। जिस तरह इस संगठन ने भारत के नक्शे से जम्मू-कश्मीर को गायब किया है, उससे पता चलता है कि यह संगठन भारत की संप्रभुता को मान्यता नहीं देता है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रम को आधार बनाकर इसने भारत की रेटिंग गिराने का काम किया है।

 आधारहीन तथ्यों के आधार पर भारत की रेटिंग में गिरावट

फ्रीडम हाउस ने अपनी सालाना रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी की भेदभावकारी नीतियों और मुस्लिम आबादी पर हिंसा को आधार बनाकर फ्रीडम स्कोर को नीचे गिराया है। इससे मोदी विरोधी तथाकथित बुद्धिजीवियों को मोदी सरकार की आलोचना करने का मौका मिल गया है। लेकिन मोदी विरोध में अंधे बुद्धिजीवियों को भारत के गलत नक्शे के इस्तेमाल से कोई परेशानी है। 

‘फ्रीडम हाउस’ जॉर्ज सोरोस द्वारा वित्त पोषित संस्था

‘फ्रीडम हाउस’ अमेरिका के अरबपति समाजसेवी जॉर्ज सोरोस द्वारा वित्त पोषित एक एनजीओ है, जो हमेशा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ प्रोपेगैंडा में लगा रहता है। खुद जॉर्ज सोरोस ने जनवरी 2020 में स्विटजरलैंड के दावोस शहर में आयोजित विश्व आर्थिक मंच के कार्यक्रम में कश्मीर और नागरिकता संशोधन कानून को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर बड़ा हमला बोला था।

जॉर्ज सोरोस प्रधानमंत्री मोदी का धूर विरोधी

जॉर्ज सोरोस ने दावोस में कहा था कि देश में लोकतांत्रिक तरीके से चुनकर आए प्रधानमंत्री कश्मीर में प्रतिबंध लगा वहां लोगों को दंडित कर रहे हैं और लाखों मुसलमानों से नागरिकता छीनने की धमकी दे रहे हैं। सोरोस ने कहा कि राष्ट्रवाद भारत के लिए ‘सबसे बड़ी नाकामी’ बन गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद फिर जोर मार रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ा और भयावह झटका यह है कि प्रधानमंत्री मोदी भारत को एक हिंदू राष्ट्र बना रहे हैं।

निवेशक और समाजसेवी हैं जॉर्ज सोरोस

अब आपको जॉर्ज सोरोस के बारे में बताते हैं। दरअसल सोरोस हंगरी मूल का निवासी है, लेकिन अमेरिकी नागरिकता हासिल कर बड़े निवेशक और समाजसेवी के रूप में काम करते हैं। फरवरी 2018 के आंकड़े के मुताबिक, उनके पास कुल 8 अरब डॉलर की संपत्ति है। उन्होंने अपनी समाजसेवी संस्था ओपन सोसायटी फाउंडेशंस को 32 अरब डॉलर से ज्यादा का दान दिया है।
दान देकर विदेशी सरकारों को प्रभावित करने का आरोप
सोरोस अमेरिका की राजनीतिक पार्टी डेमोक्रैट्स के बड़े दानदाताओं में से एक हैं। दुनिया के विभिन्न देशों में कारोबार और समाजसेवा के नाम पर जॉर्ज सोरोस ने वहां की राजनीति को प्रभावित करने करने की कोशिश की है। इसके लिए अपनी दौलत का इस्तेमाल करने के आरोप में अरब के कुछ देशों ने उनकी संस्थाओं पर पाबंदी लगाई हुई है। मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप के कई देशों ने सोरोस की संस्थाओं पर भारी जुर्माना भी लगाया हुआ है।

‘मोदी मर जा तू’: वामपंथी किसान संगठन की महिला 'प्रदर्शनकारी'


जिस तरह से इस प्रदर्शन में देश विरोधी ताकतों की भूमिका बढ़ती जा रही है। उससे धीरे-धीरे यह प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित लगने से ज्यादा खतरे की घंटी नजर आने लगा है। वही खतरे की घंटी जिसे शाहीन बाग के दौरान नजरअंदाज किया जाता रहा और अंत में उसका भीषण रूप उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के रूप में देखने को मिला। इसी तरह किसानों की आड़ में भी किसी बड़ी घटना को अंजाम दिया जा सकता है। 

दोनों ही प्रदर्शनों की तुलना करने पर अंतर कुछ नहीं दिखाई देता। जिस प्रकार नागरिकता संशोधक कानून विरोध में "मोदी तेरी कब्र खुदेगी", "योगी तेरी कब्र खुदेगी", "हिन्दुत्व तेरी कब्र खुदेगी" और "fuck hindutva"(देखिए चित्र) जैसी नारेबाजी हो रही थी, और बेशर्म हिन्दू इस प्रदर्शन में ऐसे एकजुटता दिखा रहे थे, मानो वह हिन्दू नहीं। किसी बेशर्म हिन्दू ने विरोध तक नहीं किया, परिणाम विरोध हिन्दू विरोधी दंगे में परिवर्तित हो गया। ठीक वही स्थिति इस तथाकथित किसान आंदोलन की है। वैसे भी आंदोलनकारी स्वयं इस बात के प्रमाण दे रहे हैं कि "हम किसान नहीं", अगर ये किसान होते अपने मुद्दे पर रहते, अनुच्छेद 370 बहाल करने, हिन्दू विरोधी भाषण, खालिस्तान, और  हिन्दू विरोधी दंगे के आरोपियों को रिहा करने की आदि की मांग नहीं करते। अपनी कुर्सी की खातिर हिन्दुओं को अपमानित करने वाले अजमेर जाने की बजाए बीकानेर संग्रहालय जाकर औरंगज़ेब का दस्तावेज़ देखें। 
नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल जारी है। किसानों के इस आंदोलन के बीच राजनीतिक दल अपना-अपना झंडा ऊपर रखना चाहते हैं। इसको लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। इस बीच एक नया वीडियो सामने आया है। इसमें ‘प्रदर्शनकारी’ महिलाएँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मरने की दुआ कर रही हैं। 

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक महिला को कहते हुए देखा जा सकता है, “मोदी मर जा तू, शिक्षा बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। रेल बेचकर खा गया रे मोदी, मर जा तू। देश बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। किसानों को धोखा दे गए रे मोदी, मर जा तू।” वहीं सामने बैठी महिला बार-बार ‘हाय-हाय मोदी मर जा तू’ दोहरा रही थी।

हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कहाँ का है। लेकिन बैकग्राउंड में अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) और कम्युनिस्ट पार्टी का हथौड़ा देखा जा सकता है। एआईकेएस एक वामपंथी मोर्चा संगठन है। इसके दो गुट हैं- एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और दूसरा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)। वीडियो में पीछे लगे बैनर से लग रहा है कि यह राजस्थान के घड़साना क्षेत्र का है।

दिल्ली बीजेपी महासचिव कुलजीत सिंह चहल ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा कि ये मेरे देश के किसान नहीं हो सकते। साथ ही उन्होंने सवाल भी किया कि ऐसा करने के लिए इन्हें स्पॉन्सर कौन कर रहा है? उन्होंने इसे शर्मनाक बताया।

इस शर्मनाक वीडियो के सामने आने के बाद लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही है। कोई कह रहा है कि ये कॉन्ग्रेस के लोग हैं तो वहीं कुछ लोग सच का पता लगाने और उन्हें दंडित करने की बात कह रहे हैं।

‘अन्नदाता’ के इस आंदोलन के बीच कई जानी-मानी हस्तियाँ भी समर्थन में आ रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की बातें सामने आई है। इससे पहले भारत के पूर्व-क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने भी जहर उगला था।

पंजाबी में दिए भाषण में योगराज सिंह ने कहा था, “मैं इन्हें आपलोगों से ज्यादा जानता हूँ। ये माँ-बेटियों की कसमें खा कर भी पलट जाते हैं। मैं आपको बधाई देता हूँ कि जब अमित शाह ने कहा कि निरंकारी ग्राउंड आ जाओ तो आपलोग नहीं गए। इनकी किसी बात का विश्वास नहीं करना। एक बात और कहना चाहता हूँ जब इनकी औरतों को अहमद शाह दुर्रानी ले जाता और वहाँ टके-टके की बिकती थी, तो पंजाबियों ने बचाया।” https://www.facebook.com/skmisra1942/posts/10218086052452146

जब योगराज सिंह से पूछा गया था कि इस ‘किसान आंदोलन’ में इंदिरा गाँधी की हत्या को याद करते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी गई है, तो उन्होंने कहा था कि जिसने जो बोया है, वो वही काटेगा। उन्होंने इसे भावनाओं की लड़ाई बताते हुए कहा था कि सरकार को ऐसा कोई भी बयान नहीं देना चाहिए, जो भारत को विभाजित करे। उन्होंने भारत सरकार पर मुग़ल बादशाहों बाबर, औरंगजेब और अंग्रेजों से भी ज्यादा क्रूरता और अत्याचार करने के आरोप लगाए।

 योगराज सिंह ने कहा था कि उन्होंने पीएम मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं के चेहरे देखे हैं, वो सभी ‘शैतानों की तरह’ दिखते हैं। पंजाबी में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी शायद ये नहीं जानते हैं कि भगवान और शैतान एक साथ नहीं रह सकते। 

इसी तरह का एक और वीडियो सामने आया था जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता था कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे।

वहीं एक वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘जय हिन्द’ बोलने से भी इनकार कर रहा था। जब ये सब चल रहा था, तब ओखला से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान वहीं पर मौजूद थे। वीडियो में एक प्रदर्शनकारी कह रहा था कि वो ‘जय हिन्द’ नहीं बोलेगा और न ही ‘भारत माता की जय’ बोलेगा, सिर्फ ‘जो बोले सो निहाल’ ही बोलेगा। साथ ही उसने कहा था कि वो ‘अस्सलाम वालेकुम’ भी बोलेगा। AAP विधायक अमानतुल्लाह खान की मौजूदगी में प्रदर्शनकारी ने धमकाया कि जैसे इंदिरा गाँधी को ‘सबक सिखाया गया’ था, वैसे ही पीएम मोदी को भी ‘सबक सिखाया जाएगा।’

कांग्रेस की इस हालत का जिम्मेदार कौन ? 😎
राहुल गाँधी का कहना है कि कांग्रेस एक सोच है, कांग्रेस एक विचारधारा है, कांग्रेस ये है, कांग्रेस वो है, कांग्रेस कौन है और कांग्रेस क्या है, कुछ बिंदु आपके समक्ष, ध्यानपूर्वक पढ़िए :
* कांग्रेस वही है जिसने महाराणा प्रताप की जगह अकबर को महान किताबों में पढाया।
* कांग्रेस वही है जिसने शिवाजी महाराज की जगह औरंगजेब को महान बनाया | संभाजी नगर का नाम औरंगाबाद कर दिया, दिल्ली में औरंगजेब के नाम पर मुख्य सड़क बना दी |
* कांग्रेस वही है जिसने भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी देने की सिफारिश की और तो और इनका नाम शहीदों की लिस्ट में नहीं आने दिया ।
* कांग्रेस वही है जिसने भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद को उग्रवादी बताया आतंकी बताया और नेहरू को क्रन्तिकारी बताया |
* कांग्रेस वही है जिसके नेहरू ने मुखबरी करके चंद्रशेखर आज़ाद को मरने पर मजबूर किया।
* कांग्रेस वही है जिसने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिन्द फौज का विरोध किया, आज़ाद हिन्द फ़ौज का धन लूट लिया |
* कांग्रेस वही है जिसके कालखंड में 1990 में कश्मीर घाटी में भयंकर कत्लेआम हुआ | 5 लाख हिन्दुओं को घाटी छोड़नी पड़ी।
* कांग्रेस वही है जिसने 2G घोटाला, आदर्श सोसायटी घोटाला, CWG घोटाला, तेलगी घोटाला, कोयला घोटाला, दूरसंचार घोटाला, हर्षद मेहता घोटाला जैसे कई घोटाले हुए |
* कांग्रेस वही है जिसके राज में चीन 2013 में 19 km अंदर हमारी सीमा में घुस आया | अब मोदी राज में हम 19 km डोकलाम में गये।
* कांग्रेस वही है जिसके कालखण्ड में सैनिकों का अपमान होता था, कर्नल पठानिया समेत 5 सैनिकों को उम्रकैद की सजा दी गयी |
* कांग्रेस वही है जिसके एक परिवार के नेताओं के नाम से 650 योजनाएँ हैं | क्यों भाई और कोई महापुरुष देश में नहीं हुए क्या?
* कौनसा कांग्रेसी फांसी पर चढ़ा ? एक तो नाम बताओ।
* कांग्रेस की वजह से देश का विभाजन हुआ।
* कांग्रेस जिसके नेता JNU में देशविरोधी नारे लगाने वालों का स्पोर्ट करते हैं।
* कांग्रेस वही है जिसने मदरसों में तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान गाने का विरोध किया।
*कांग्रेस वही है जिसके नेता खुल्लेआम केरल में गाय को काटकर खाते हैं*
* कांग्रेस वही है जिसने तुष्टिकरण हेतु हिन्दुओं को बदनाम करने हेतु भगवा आतंकवाद कहा, इसी कांग्रेस ने आतंकियों को "साहब" कहा, हाफिज साहब और ओसामा जी बताया, वहीं हिन्दुओं को आतंकी बताया |

* कांग्रेस वही है जिसने पत्थरबाजों को भाई बताया और सेना प्रमुख को गली का गुंडा बताया |
दिल्ली पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है
*कितनी भी बातचीत कर लो*
कितना भी समझा लो, इनमें नकली किसान नेताओं की जायज़ नाज़ायज़ मांगे भी मान लो।
*फिर भी हिंसा तो हो कर ही रहेगी, सारी तैयारी और फंडिंग हिंसा के लिए हो रही है।*
दिल्ली दंगे की तरह गोली भी खुद ही चलाएंगे और जान भी अपनों की लेंगे, विपक्ष को किसी भी कीमत पर मोदीजी को किसान विरोधी सिद्ध करना है। इसलिए एक बार फिर से ये सारे गिद्ध इकट्ठे हैं, इन्हें लाशें गिरने का इंतज़ार है।
*इनमें कांग्रेस है, आप है, अकाली दल है, वामपंथी है, योगेंद्र यादव है, JNU गैंग है, अमानतुल्ला खान है, खालिस्तानी हैं, रावण है, पप्पू यादव है, शहीनबाग वाली दिहाड़ी की दादी है, इनमें बहुत से सिखों का वेश धरे मुसलमान हैं,* हाथरस वाली नक्सली भाभी है तलवारें है डंडे हैं बंदूकें भी होंगी अभी पता नही है किरपाण है बरछा है
*इनके पास मोटे गद्दे हैं, झक सफ़ेद रजाइयां और ढेरों कम्बल भी हैं, अनवरत चाय की चुस्कियां हैं, चौबीस घंटे तर माल वाले लंगर हैं, डिज़ाइनर कपडे हैं, डिज़ाइनर टोपियां हैं.*
कनाडा का बेवकूफ पप्पू प्रधानमन्त्री है इंग्लैंड के भारत विरोधी सांसद भी हैं
*बहुतों के हाथों में महंगे वाले मोबाइल हैं, fortuner गाडियाँ हैं, 6 महीने का राशन हैं, 1000 से ज्यादा ट्रेक्टर हैं लक्ज़री बसें है कनाडा के खालिस्तानी 10 mn डॉलर की मदद की घोषणा कर दी है*
ये लोग इतनी बड़ी तैयारी करके आये हैं, निहंगों की टोलियां पँजाब से निकल चुकी हैं, और इन्होंने तो दिल्ली को घेर भी लिया है और बिना हिंसा के और बिना लाशें गिराए वापस चले जाएंगे? ये हो नहीं सकता
*ये देशद्रोही इस मुद्दे को पूरा निचोड़ लेंगे तो अचानक ये मुद्दा गधे के सींग की तरह गायब हो जाएगा... नया मुद्दा प्रकट होगा... रंगभूमि बदल जायेगी पर कलाकार वही होंगे फिर अवार्ड वापिसी होगी, वहां सभी फिर इक्कठे होंगे, फिर देश को बंधक बनाएंगे*
देश विरोधी ताकतें अकूत धन और गद्दारों की फौज के साथ देश को उसी पुराने पतन के गढ्ढे में धकेलने को आतुर हैं.
मज़बूत और ईमानदार देश उनके किस काम का.. जहाँ भ्रष्टाचार की संभावना ही न हो?
*यह किसान आंदोलन बिना बड़ी जानमाल के नुक्सान के ख़त्म नहीं होगा

‘ISI ने हि‍जबुल सरगना सैयद सलाहुद्दीन पर कराया हमला’ : कश्मीर में भारतीय सेना की ताबड़तोड़ कार्रवाई से पाक में खलबली

सरगना सैयद सलाहुद्दीन
अक्सर पाकिस्तान में बैठकर भारत में आतंकी हमलों की योजना बनाने वाले हि‍जबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन पर हमले की खबर सामने आई है। इस हमले में सलाहुद्दीन गंभीर रुप से घायल हुआ है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि ये हमला 25 मई को इस्लामाबाद में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के ठिकाने के पास हुआ था।
आशंका जताई जा रही है कि आतंकी सरगना पर यह हमला पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने करवाया है, जिसका उद्देश्य सलाहुद्दीन को भयभीत करना था, न कि उसकी हत्या करना। दरअसल, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी दशकों से सलाहुद्दीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए कर रही हैं। सलाहुद्दीन यूनाइटेड जिहाद काउंसिल नामक पाकिस्तान समर्थक आतंकवादी समूहों के गठबंधन का प्रमुख भी है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआई ने सलाहुद्दीन को भारत सरकार के कदम के खिलाफ घाटी में बड़े पैमाने पर हमले का निर्देश दिए थे, लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रहा, जिससे आईएसआई नाराज हो गई। इसके बाद आईएसआई ने उसे अपना समर्थन वापस लेने का संदेश देना शुरू कर दिया है।
सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के नेता राजा फारूक हैदर और अन्य से संपर्क किया और आईएसआई से घाटी में हमले करने का वादा किया। इस बीच आईएसआई ने हिजबुल कैडर को पर्याप्त प्रशिक्षण, हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराना बंद कर दिया।
सलाहुद्दीन और उसके आईएसआई हैंडलर के बीच पिछले साल अगस्त में ही जम्मू एवं कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से फासला होना शुरू हो गया था।
हाल ही में कश्मीर में मारा गया आतंकी रियाज नायकू हिजबुल मुजाहिदीन का ही कमांडर था। कश्मीर में आतंकी वारदातों में कमी आने पर आइएसआइ ने सलाहुद्दीन पर गतिविधियाँ बढ़ाने के लिए दबाव बढ़ा दिया।
नाइकू के मारे जाने के बाद सलाहुद्दीन ने कहा था कि कश्मीर घाटी में भारतीय सुरक्षा बलों की स्थिति मजबूत है। ऐसा कहते हुए उसका एक वीडियो सामने आया था। सलाहुद्दीन को नायकू की मौत पर शोक व्यक्त करने के लिए रावलपिंडी में आयोजित एक सभा में यह कहते हुए सुना गया कि पांच सुरक्षाकर्मियों की हत्या के बाद भी भारतीय सुरक्षा बल की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
जम्‍मू-कश्‍मीर के बड़गाम में जन्मा आतंकी सैयद सलाहुद्दीन वर्ष 1987 में जम्‍मू-कश्‍मीर में चुनाव भी लड़ चुका है, लेकिन वह हार गया था। 71 वर्षीय सलाउद्दीन पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले कश्‍मीर में रहता है, लेकिन उसकी पत्नी हिंदुस्तान में ही रहती है। सैयद सलाहुद्दीन को अमेरिका ने अमेरिका ने वैश्विक आतंकवादी घोषित कर रखा है। सलाहुद्दीन कश्मीर में आतंकियों को ट्रेनिंग देता है।