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‘मोदी मर जा तू’: वामपंथी किसान संगठन की महिला 'प्रदर्शनकारी'


जिस तरह से इस प्रदर्शन में देश विरोधी ताकतों की भूमिका बढ़ती जा रही है। उससे धीरे-धीरे यह प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित लगने से ज्यादा खतरे की घंटी नजर आने लगा है। वही खतरे की घंटी जिसे शाहीन बाग के दौरान नजरअंदाज किया जाता रहा और अंत में उसका भीषण रूप उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के रूप में देखने को मिला। इसी तरह किसानों की आड़ में भी किसी बड़ी घटना को अंजाम दिया जा सकता है। 

दोनों ही प्रदर्शनों की तुलना करने पर अंतर कुछ नहीं दिखाई देता। जिस प्रकार नागरिकता संशोधक कानून विरोध में "मोदी तेरी कब्र खुदेगी", "योगी तेरी कब्र खुदेगी", "हिन्दुत्व तेरी कब्र खुदेगी" और "fuck hindutva"(देखिए चित्र) जैसी नारेबाजी हो रही थी, और बेशर्म हिन्दू इस प्रदर्शन में ऐसे एकजुटता दिखा रहे थे, मानो वह हिन्दू नहीं। किसी बेशर्म हिन्दू ने विरोध तक नहीं किया, परिणाम विरोध हिन्दू विरोधी दंगे में परिवर्तित हो गया। ठीक वही स्थिति इस तथाकथित किसान आंदोलन की है। वैसे भी आंदोलनकारी स्वयं इस बात के प्रमाण दे रहे हैं कि "हम किसान नहीं", अगर ये किसान होते अपने मुद्दे पर रहते, अनुच्छेद 370 बहाल करने, हिन्दू विरोधी भाषण, खालिस्तान, और  हिन्दू विरोधी दंगे के आरोपियों को रिहा करने की आदि की मांग नहीं करते। अपनी कुर्सी की खातिर हिन्दुओं को अपमानित करने वाले अजमेर जाने की बजाए बीकानेर संग्रहालय जाकर औरंगज़ेब का दस्तावेज़ देखें। 
नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल जारी है। किसानों के इस आंदोलन के बीच राजनीतिक दल अपना-अपना झंडा ऊपर रखना चाहते हैं। इसको लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। इस बीच एक नया वीडियो सामने आया है। इसमें ‘प्रदर्शनकारी’ महिलाएँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मरने की दुआ कर रही हैं। 

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक महिला को कहते हुए देखा जा सकता है, “मोदी मर जा तू, शिक्षा बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। रेल बेचकर खा गया रे मोदी, मर जा तू। देश बेच के खा गया रे मोदी, मर जा तू। किसानों को धोखा दे गए रे मोदी, मर जा तू।” वहीं सामने बैठी महिला बार-बार ‘हाय-हाय मोदी मर जा तू’ दोहरा रही थी।

हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कहाँ का है। लेकिन बैकग्राउंड में अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) और कम्युनिस्ट पार्टी का हथौड़ा देखा जा सकता है। एआईकेएस एक वामपंथी मोर्चा संगठन है। इसके दो गुट हैं- एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और दूसरा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)। वीडियो में पीछे लगे बैनर से लग रहा है कि यह राजस्थान के घड़साना क्षेत्र का है।

दिल्ली बीजेपी महासचिव कुलजीत सिंह चहल ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा कि ये मेरे देश के किसान नहीं हो सकते। साथ ही उन्होंने सवाल भी किया कि ऐसा करने के लिए इन्हें स्पॉन्सर कौन कर रहा है? उन्होंने इसे शर्मनाक बताया।

इस शर्मनाक वीडियो के सामने आने के बाद लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही है। कोई कह रहा है कि ये कॉन्ग्रेस के लोग हैं तो वहीं कुछ लोग सच का पता लगाने और उन्हें दंडित करने की बात कह रहे हैं।

‘अन्नदाता’ के इस आंदोलन के बीच कई जानी-मानी हस्तियाँ भी समर्थन में आ रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की बातें सामने आई है। इससे पहले भारत के पूर्व-क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने भी जहर उगला था।

पंजाबी में दिए भाषण में योगराज सिंह ने कहा था, “मैं इन्हें आपलोगों से ज्यादा जानता हूँ। ये माँ-बेटियों की कसमें खा कर भी पलट जाते हैं। मैं आपको बधाई देता हूँ कि जब अमित शाह ने कहा कि निरंकारी ग्राउंड आ जाओ तो आपलोग नहीं गए। इनकी किसी बात का विश्वास नहीं करना। एक बात और कहना चाहता हूँ जब इनकी औरतों को अहमद शाह दुर्रानी ले जाता और वहाँ टके-टके की बिकती थी, तो पंजाबियों ने बचाया।” https://www.facebook.com/skmisra1942/posts/10218086052452146

जब योगराज सिंह से पूछा गया था कि इस ‘किसान आंदोलन’ में इंदिरा गाँधी की हत्या को याद करते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी गई है, तो उन्होंने कहा था कि जिसने जो बोया है, वो वही काटेगा। उन्होंने इसे भावनाओं की लड़ाई बताते हुए कहा था कि सरकार को ऐसा कोई भी बयान नहीं देना चाहिए, जो भारत को विभाजित करे। उन्होंने भारत सरकार पर मुग़ल बादशाहों बाबर, औरंगजेब और अंग्रेजों से भी ज्यादा क्रूरता और अत्याचार करने के आरोप लगाए।

 योगराज सिंह ने कहा था कि उन्होंने पीएम मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं के चेहरे देखे हैं, वो सभी ‘शैतानों की तरह’ दिखते हैं। पंजाबी में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी शायद ये नहीं जानते हैं कि भगवान और शैतान एक साथ नहीं रह सकते। 

इसी तरह का एक और वीडियो सामने आया था जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता था कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे।

वहीं एक वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘जय हिन्द’ बोलने से भी इनकार कर रहा था। जब ये सब चल रहा था, तब ओखला से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान वहीं पर मौजूद थे। वीडियो में एक प्रदर्शनकारी कह रहा था कि वो ‘जय हिन्द’ नहीं बोलेगा और न ही ‘भारत माता की जय’ बोलेगा, सिर्फ ‘जो बोले सो निहाल’ ही बोलेगा। साथ ही उसने कहा था कि वो ‘अस्सलाम वालेकुम’ भी बोलेगा। AAP विधायक अमानतुल्लाह खान की मौजूदगी में प्रदर्शनकारी ने धमकाया कि जैसे इंदिरा गाँधी को ‘सबक सिखाया गया’ था, वैसे ही पीएम मोदी को भी ‘सबक सिखाया जाएगा।’

कांग्रेस की इस हालत का जिम्मेदार कौन ? 😎
राहुल गाँधी का कहना है कि कांग्रेस एक सोच है, कांग्रेस एक विचारधारा है, कांग्रेस ये है, कांग्रेस वो है, कांग्रेस कौन है और कांग्रेस क्या है, कुछ बिंदु आपके समक्ष, ध्यानपूर्वक पढ़िए :
* कांग्रेस वही है जिसने महाराणा प्रताप की जगह अकबर को महान किताबों में पढाया।
* कांग्रेस वही है जिसने शिवाजी महाराज की जगह औरंगजेब को महान बनाया | संभाजी नगर का नाम औरंगाबाद कर दिया, दिल्ली में औरंगजेब के नाम पर मुख्य सड़क बना दी |
* कांग्रेस वही है जिसने भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी देने की सिफारिश की और तो और इनका नाम शहीदों की लिस्ट में नहीं आने दिया ।
* कांग्रेस वही है जिसने भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद को उग्रवादी बताया आतंकी बताया और नेहरू को क्रन्तिकारी बताया |
* कांग्रेस वही है जिसके नेहरू ने मुखबरी करके चंद्रशेखर आज़ाद को मरने पर मजबूर किया।
* कांग्रेस वही है जिसने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिन्द फौज का विरोध किया, आज़ाद हिन्द फ़ौज का धन लूट लिया |
* कांग्रेस वही है जिसके कालखंड में 1990 में कश्मीर घाटी में भयंकर कत्लेआम हुआ | 5 लाख हिन्दुओं को घाटी छोड़नी पड़ी।
* कांग्रेस वही है जिसने 2G घोटाला, आदर्श सोसायटी घोटाला, CWG घोटाला, तेलगी घोटाला, कोयला घोटाला, दूरसंचार घोटाला, हर्षद मेहता घोटाला जैसे कई घोटाले हुए |
* कांग्रेस वही है जिसके राज में चीन 2013 में 19 km अंदर हमारी सीमा में घुस आया | अब मोदी राज में हम 19 km डोकलाम में गये।
* कांग्रेस वही है जिसके कालखण्ड में सैनिकों का अपमान होता था, कर्नल पठानिया समेत 5 सैनिकों को उम्रकैद की सजा दी गयी |
* कांग्रेस वही है जिसके एक परिवार के नेताओं के नाम से 650 योजनाएँ हैं | क्यों भाई और कोई महापुरुष देश में नहीं हुए क्या?
* कौनसा कांग्रेसी फांसी पर चढ़ा ? एक तो नाम बताओ।
* कांग्रेस की वजह से देश का विभाजन हुआ।
* कांग्रेस जिसके नेता JNU में देशविरोधी नारे लगाने वालों का स्पोर्ट करते हैं।
* कांग्रेस वही है जिसने मदरसों में तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान गाने का विरोध किया।
*कांग्रेस वही है जिसके नेता खुल्लेआम केरल में गाय को काटकर खाते हैं*
* कांग्रेस वही है जिसने तुष्टिकरण हेतु हिन्दुओं को बदनाम करने हेतु भगवा आतंकवाद कहा, इसी कांग्रेस ने आतंकियों को "साहब" कहा, हाफिज साहब और ओसामा जी बताया, वहीं हिन्दुओं को आतंकी बताया |

* कांग्रेस वही है जिसने पत्थरबाजों को भाई बताया और सेना प्रमुख को गली का गुंडा बताया |
दिल्ली पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है
*कितनी भी बातचीत कर लो*
कितना भी समझा लो, इनमें नकली किसान नेताओं की जायज़ नाज़ायज़ मांगे भी मान लो।
*फिर भी हिंसा तो हो कर ही रहेगी, सारी तैयारी और फंडिंग हिंसा के लिए हो रही है।*
दिल्ली दंगे की तरह गोली भी खुद ही चलाएंगे और जान भी अपनों की लेंगे, विपक्ष को किसी भी कीमत पर मोदीजी को किसान विरोधी सिद्ध करना है। इसलिए एक बार फिर से ये सारे गिद्ध इकट्ठे हैं, इन्हें लाशें गिरने का इंतज़ार है।
*इनमें कांग्रेस है, आप है, अकाली दल है, वामपंथी है, योगेंद्र यादव है, JNU गैंग है, अमानतुल्ला खान है, खालिस्तानी हैं, रावण है, पप्पू यादव है, शहीनबाग वाली दिहाड़ी की दादी है, इनमें बहुत से सिखों का वेश धरे मुसलमान हैं,* हाथरस वाली नक्सली भाभी है तलवारें है डंडे हैं बंदूकें भी होंगी अभी पता नही है किरपाण है बरछा है
*इनके पास मोटे गद्दे हैं, झक सफ़ेद रजाइयां और ढेरों कम्बल भी हैं, अनवरत चाय की चुस्कियां हैं, चौबीस घंटे तर माल वाले लंगर हैं, डिज़ाइनर कपडे हैं, डिज़ाइनर टोपियां हैं.*
कनाडा का बेवकूफ पप्पू प्रधानमन्त्री है इंग्लैंड के भारत विरोधी सांसद भी हैं
*बहुतों के हाथों में महंगे वाले मोबाइल हैं, fortuner गाडियाँ हैं, 6 महीने का राशन हैं, 1000 से ज्यादा ट्रेक्टर हैं लक्ज़री बसें है कनाडा के खालिस्तानी 10 mn डॉलर की मदद की घोषणा कर दी है*
ये लोग इतनी बड़ी तैयारी करके आये हैं, निहंगों की टोलियां पँजाब से निकल चुकी हैं, और इन्होंने तो दिल्ली को घेर भी लिया है और बिना हिंसा के और बिना लाशें गिराए वापस चले जाएंगे? ये हो नहीं सकता
*ये देशद्रोही इस मुद्दे को पूरा निचोड़ लेंगे तो अचानक ये मुद्दा गधे के सींग की तरह गायब हो जाएगा... नया मुद्दा प्रकट होगा... रंगभूमि बदल जायेगी पर कलाकार वही होंगे फिर अवार्ड वापिसी होगी, वहां सभी फिर इक्कठे होंगे, फिर देश को बंधक बनाएंगे*
देश विरोधी ताकतें अकूत धन और गद्दारों की फौज के साथ देश को उसी पुराने पतन के गढ्ढे में धकेलने को आतुर हैं.
मज़बूत और ईमानदार देश उनके किस काम का.. जहाँ भ्रष्टाचार की संभावना ही न हो?
*यह किसान आंदोलन बिना बड़ी जानमाल के नुक्सान के ख़त्म नहीं होगा

पाकिस्तान में महाराजा रंजीत सिंह की मूर्ति किसने तोड़ी? ; वाशिंगटन में स्थित महात्मा गाँधी की प्रतिमा को अपमानित करते खालिस्तानी


                              हिन्दी दैनिक 'हिन्दुस्तान', दिसंबर 13, 2020 
जैसाकि किसान आंदोलन के प्रारम्भ होते ही कयास लगाए जा रहे थे कि किसानों के नाम पर उपद्रवियों, खालिस्तानियों और पाकिस्तान प्रायोजित अराजक तत्वों ने हाईजेक कर लिया है, और इसकी प्रारम्भ से ही इसकी पुष्टि भी हो रही है। लेकिन इस आंदोलन को समर्थन देने वाली कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, अकाली दल और अब वामपंथी आखिर देश को किस आग में झोंकने जा रहे हैं? क्या ये किसान आंदोलन इन पार्टियों के लिए वॉटरलू सिद्ध होगा? जो सिख जिस पाकिस्तान की जयकार के नारे लगाए जा रहे हैं, वह पाकिस्तान में महाराजा रंजीत सिंह को तोड़े जाने पर क्यों खामोश हैं? कौन है जिसने महाराजा की मूर्ति खंडित की? क्या सिख समाज पाकिस्तान के विरुद्ध आवाज़ उठाएगा? अगर अभी भी ये समर्थन देने वाली पार्टियां अपने कदम पीछे कर, पाकिस्तान के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करें।  
दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ को खालिस्तानियों ने हाईजैक कर लिया है, लगातार ऐसी खबरें आ रही थीं। अब भारत के बाहर भी तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों में ऐसी-ऐसी हरकतें हो रही हैं, जिससे ये संदेह और मजबूत होता जा रहा है। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को महात्मा गाँधी की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ और तोड़फोड़ की गई है, साथ ही खालिस्तानी झंडा लहराया गया।

ये भी प्रदर्शनकारी भारत में मोदी सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने की योजना के क्रम में लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन देने के लिए सड़क पर उतरे थे। कई खालिस्तानी झंडों के साथ पहुँची भीड़ ने स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों के सामने ही राष्ट्रपति महात्मा गाँधी की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ कर के अपमान किया और फिर तोड़फोड़ भी मचाई।

महात्मा गाँधी की ये प्रतिमा वाशिंगटन में भारतीय दूतावास के सामने स्थित है। इससे पहले जून 3, 2020 को भी वहाँ महात्मा गाँधी की प्रतिमा को नुकसान पहुँचाया गया था, जब अश्वेत अमेरिकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉएड की हत्या के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा था। वहीं खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने बापू की प्रतिमा के चेहरे के साथ भी छेड़छाड़ किया। इससे पहले लंदन में भी इस तरह की हरकत की गई थी।

वहाँ भी खालिस्तानी झंडों के साथ पहुँचे प्रदर्शनकारियों ने भारत के कृषि कानूनों के खिलाफ नारेबाजी की थी। अश्वेत नागरिकों के प्रदर्शन के दौरान प्रतिमा के चेहरे को विकृत कर के स्केच बना दिए गए थे और स्प्रे पेंटिंग से प्रतिमा को बिगाड़ दिया गया था। इस प्रतिमा का डिजाइन गौतम पाल ने बनाया था। बाद में इसकी साफ़-सफाई कर के इसे ठीक किया गया था। सितम्बर 16, 2000 को इस प्रतिमा का अनावरण तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था।

हाल ही में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने रेफरेंडम 2020 (सिख फॉर जस्टिस) मामले में 16 विदेशी खालिस्तानियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। एनआईए ने आज कहा कि इन सभी पर ‘रेफरंडम 2020’ के बैनर तले ‘खालिस्तान’ के लिए सोची समझी साजिश के तहत अभियान चलाने का आरोप है। सभी आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता तथा गैर कानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

वामपंथियों-कट्टरपंथियों के कब्जे में किसान आंदोलन, बड़े पैमाने पर हिंसा की प्लानिंग: खुफिया सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स में दावा


                                किसान आंदोलन पर खूफिया एजेंसियों ने उठाए सवाल
जिस तरह से नागरिकता संशोधक कानून अराजक तत्वों और कट्टरपंथियों के हाथ की कठपुतली बना हुआ था और अंजाम हिन्दू विरोधी दंगों में बदल गया, ठीक वही स्थिति इस किसान आंदोलन की है, जिसे इन्हीं तत्वों ने शुरू से ही हाईजैक हो चूका है।  

किसान आंदोलन के पीछे छिपी मंशा को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। अब खुफिया सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में हैरान करने वाले दावे किए गए हैं। इसके मुताबिक किसान आंदोलन को अतिवादी वामपंथी संगठनों और कट्टरपंथियों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है और वे बड़े पैमाने पर हिंसा की योजना बना रहे हैं।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि किसान प्रदर्शनों पर अब वामपंथी अतिवादी अपना कब्जा जमा चुके हैं। इस खबर के आने के बाद कंगना रनौत ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि अतिवादी संगठन किसानों को भड़का कर हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की योजना बना रहे हैं।

इस जानकारी के सामने आने के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है, “जो खूफिया सूत्र आज कह रहे हैं मैंने भी वही कहा था, लेकिन मेरे लिए लोगों ने ‘दिलजीत ने कंगना को @#ल दिया’ ट्रेंड कर दिया, जिसका मतलब होता है दिलजीत ने कंगना का रेप किया। ये ट्रेंड सभी लिबरलों ने एक अकेली महिला के लिए चलाया जिसका भावनात्मक और मानसिक रूप से बलात्कार किया गया और ऐसे चेयरलीडर्स भी थे जो तालियाँ बजा रहे थे… मैंने सबको देखा था।”

पिछले दिनों ट्विटर पर अपने बयानों के कारण कंगना को जिस तरह ट्रोल किया गया उसे याद दिलाते हुए उन्होंने कहा, “उन्होंने कहा था कि मुझे माफी माँगनी चाहिए। अब जिसने ये कहा उन सबको मुझसे माफी माँगनी चाहिए, सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम्हारे पास दूरदर्शिता, स्पष्टता और सबसे जरूरी ईमानदारी नहीं है कि तुम हकीकत देख सको। तुम मुझे ऐसे नामों से नहीं बुला सकते। मेरे लिए अपमानजनक ट्रेंड नहीं चला सकते और न ही मुझ पर भाजपा का ठप्पा लगा सकते। माफी माँगो।”

ट्विटर पर लोगों की प्रक्रियाएं

एक तरफ जहाँ मीडिया खबरों में खूफिया सूत्रों के हवाले से किसान आंदोलन पर वामपंथियों के कब्जे की बात सामने आ गई है। वहीं सोशल मीडिया के जरिए किसानों के प्रदर्शन को खालिस्तानियों के समर्थन की बात भी सामने आई है।

दरअसल, Khalsa Aid India  नाम के फेसबुक पेज ने जानकारी दी है कि वह सिंघु बॉर्डर पर स्टॉल खोल चुके हैं और किसानों को सहायता उपलब्ध करवाएँगे। इसके लिए उनको 1000 कंबल और 500 गद्दे भी भी डोनेट किए गए हैं।

अब यह Khalsa Aid India क्या है? दरअसल, इस संगठन पर संदेह है कि यह बब्बर खालसा इंटरनेशनल का ही संगठन है, जिसके ख़िलाफ़ साल 2012 में एनआईए ने केस दर्ज किया था। आरोप था कि पंजाब का बीकेआई, यूके के बीकेआई संचालको (बलबीर सिंह बैंस और जोगा सिंह) और उनके संगठनों,  जैसे- सिख वेलफेयर फॉर प्रिजनर वेलफेयर, अखंड कीर्ति जत्था ( AKJ) और खालसा एड, से पैसे ले रहा है ताकि भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे सकें। 

इन पर पाकिस्तान के बीकेआई नेताओं (वाधवा सिंग और जगतार सिंह तारा) का समर्थन पाने का भी आरोप था। इतना ही नहीं, जाँच में पता चला था कि संगठन ने पैसे लेने के बाद स्लीपर सेल्स और जेल में बंद आतंकियों व उनके परिवारों में बाँटा था।

साल 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे मामले में जाँच अधूरी रह गई थी, क्योंकि यूके ने संबंधित आरोपितों से जुड़े सबूत भारत के साथ साझा करने से मना कर दिए थे। बता दें कि बब्बर खालसा की मंशा भारत में हिंसा के जरिए एक स्वतंत्र सिख राज्य बनाने की है। यह संगठन कई आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार भी है। ट्रंप शासन में बीकेआई को अमेरिकी हितों के लिए खतरा घोषित किया था। 

गाजियाबाद: ‘भारत बंद’ में हिस्सा लेने पहुँचे भीम आर्मी के नेताओं को किसानों ने खदेड़ा, लाठियाँ भी चटकाई गईं

जहाँ सभी राजनीतिक संगठन ‘किसान आंदोलन’ के बहाने अपना उल्लू सीधा करना चाह रहे हैं, वहीं जातिवाद, मजहबी कट्टरता और खालिस्तानी एजेंडे को बढ़ावा देने वाले लोग भी इससे जुड़ते देखे जा रहे हैं। ऐसा ही एक दल है ‘भीम आर्मी’, जो उत्तर प्रदेश में दलितों की राजनीति करने का दावा करता है। बताया जा रहा है कि चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ की अगुआई वाले इस संगठन के लोगों को गाजियाबाद में किसानों ने मार-मार कर भगा दिया।

‘आज तक’ की खबर के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मंगलवार (दिसंबर 8, 2020) को आयोजित भारत बंद के दौरान भीम आर्मी के नेता-कार्यकर्ता किसानों के आंदोलन में उन्हें समर्थन देने पहुँचे और उनके साथ विरोध प्रदर्शन के इरादे से बाहर निकले। लेकिन, वहाँ उन्हें किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। यूपी गेट पर किसानों के धरने में पहुँचे भीम आर्मी के नेताओं को किसानों ने भगा दिया।

 किसानों ने आरोप लगाया कि भीम आर्मी के लोग इस आंदोलन को भड़काने की कोशिश में लगे हुए थे, इसीलिए उन्हें इसमें शामिल नहीं होने दिया गया। खबर के अनुसार, किसानों की शिकायत के बाद पुलिस ने भी लाठियाँ चटकाईं और भीम आर्मी के लोगों को किसानों ने खदेड़ दिया। उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही कह चुकी है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जोर-जबरदस्ती नहीं चलेगी। दुकानों को जबरन बंद नहीं कराया जा सकता है।

वहीं भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जाते समय उन्हें हिरासत में लेकर नजरबंद कर लिया गया है। उधर दिल्ली में भी सब्जी मंडी के व्यापारियों ने अपनी-अपनी दुकानें खोल रखी थीं, लेकिन यहाँ सुबह तक मंडियों को बंद रखने के लिए AAP नेता द्वारा दबाव बनाया जा रहा था। दिल्ली में  APMC के अध्यक्ष आदिल अहमद खान हैं। ऐसे में AAP पर कई सवाल उठ रहे हैं।

दिल्ली : जबरदस्ती मार्केट बंद करवाना चाहते थे AAP के मंडी चेयरमैन आदिल खान

गिरगिट से तेज रंग बदलने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से पूछा जाए कि जब किसान प्रदर्शन का समर्थन ही करना था, फिर क्यों दिल्ली में कृषि कानून को लागु किया? वास्तव में जो आदमी बच्चों की झूठी कसम खा सकता है, गिरगिट क्या है उसके आगे?
केंद्र सरकार से अपनी माँग मनवाने के लिए किसानों ने आज (दिसंबर 8, 2020) भारत बंद का आह्वान किया है। इस बंद में उन्हें कई अलग-अलग क्षेत्रों (राजनीतिक दलों) से समर्थन मिल रहा है। लेकिन इस बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो किसानों के साथ खड़े हैं, मगर भारी नुकसान उठाने की स्थिति में नहीं हैं। सब्जी और फल मंडियों के व्यापारी इसी सूची में आते हैं।

महाराष्ट्र के पुणे में तो भारत बंद के बावजूद सब्जी मंडियाँ खुली हैं। एक स्थानीय व्यापारी ने इस पर कहा, “हम किसानों के प्रदर्शन को समर्थन देते हैं, लेकिन हमने बाजार खोले हुए हैं ताकि दूसरे प्रदेशों से आने वाली फसल स्टोर की जा सके और वह खराब न हो। इन्हें हम कल ही बेचेंगे।”

                                                                                                                                        साभार दिल्ली में भी सब्जी मंडी के व्यापारियों की यही स्थिति है लेकिन यहाँ सुबह तक मंडियों को बंद रखने के लिए AAP नेता द्वारा दबाव बनाया जा रहा था। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अपने ट्वीट में इसका जिक्र किया। उन्होंने सुबह-सुबह अपने ट्वीट में लिखा, “मेरे पास दिल्ली की फल सब्जी मंडियों के व्यापारियों के फोन आ रहे हैं। व्यापारी मजदूर सब आज मंडियाँ खोलना चाहते हैं। केजरीवाल सरकार के नियुक्त मंडी चैयरमैन जबरदस्ती बंद के निर्देश दे रहे हैं।”

हालाँकि इसके बाद उनका ट्वीट आया, जिसमें उन्होंने फल सब्जी मंडियाँ खुलने की बात कहीं। उन्होंने लिखा, “दिल्ली की फल सब्जी मंडियाँ खुल गई हैं। ओखला, आजादपुर मंडियों में व्यापार जारी है। दिल्ली की सारी मार्केट, बाजार, इंडस्ट्रियल एरिया खुलेंगे- सदर बाजार, चाँदनी चौक, लाजपत नगर, सरोजिनी, गाँधी नगर, नेहरू प्लेस, कनॉट प्लेस, करोलबाग, कमला नगर सब खुलेगा। दिल्ली में बंद फ्लॉप।”

उनके अलावा नीलकांत बक्शी ने भी अपने ट्वीट में आम आदमी पार्टी द्वारा नियुक्त चेयरमैन के दबाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “ओखला मंडी पूर्ण रूप से खुली है। आम आदमी पार्टी नियुक्त चेयरमैन आदिलजी ने बड़ा जोर लगाया कि यहाँ तो उनकी चल जाएगी लेकिन कुछ ना हुआ, मंडी खुली और माल का भरमार है। ओखला मंडी आभार।”

दिल्ली में  APMC के अध्यक्ष आदिल अहमद खान हैं। इसके अलावा राजीव सिंह मेंबर सेक्रेट्री हैं। इनके अतिरिक्त मार्केटिंग कमेटी में 8 अन्य सदस्य भी नियुक्त किए गए हैं। APMC का उद्देश्य फलों और सब्जियों के विपणन की सुविधा देना है। इसके अलावा किसानों, उत्पादकों/विक्रेताओं व उपभोक्ताओं के फायदे व सुरक्षा के लिए नियमन लागू करना है।

भारत बंद को लेकर इससे पहले आदिल खान ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि आजादपुर मंडी समेत दिल्ली की दूसरी मंडियों के व्यापारियों ने भारत बंद का समर्थन करते हुए मंडी में व्यापार न करने का निर्णय लिया है। मंडी के सभी संगठनों ने निर्णय लिया है कि किसानों के समर्थन के लिए मंडी में अपना व्यापार बंद रखेंगे।

केजरीवाल बॉर्डर पर, CM हाउस पर धरना: पार्षदों ने कहा- निगमों का ₹13,000 करोड़ दो, नहीं तो हड़ताल करेंगे सफाईकर्मी

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली को घेरे बैठे ‘किसानों’ के समर्थन और सेवा में आम आदमी पार्टी (AAP) कोई कसर नहीं छोड़ रही है। जबकि दिल्ली में स्वयं इन बिलों को लागु करने की घोषणा कर चुके हैं, फिर किस आधार पर आंदोलनकारियों का साथ देने सिंधु बॉर्डर गए? आखिर कब तक दिल्ली वालों को पागल बनाते रहोगे? कुछ शर्म है या नहीं। अगर आंदोलन का समर्थन करना था, तो फिर क्यों इसे दिल्ली में लागु किया, अब इसे दोगलापन न कहा जाए, तो क्या कहा जाए? ये है दिल्ली के मुख्यमंत्री की कार्यशैली।

अब खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी पूरी कैबिनेट के साथ सिंघु बॉर्डर पर किसानों से मिलने पहुँचे थे। दिलचस्प बात यह है दिल्ली के मुख्यमंत्री के घर के बाहर दिल्ली नगर निगम के पार्षद धरने पर बैठे हैं।

इनकी माँग है कि नगर निगमों के 13000 करोड़ रुपए की बकाया राशि चुकाई जाए। लेकिन, मुख्यमंत्री इनसे मुँह फेर कर किसान आंदोलन में पहुँच गए। अब पार्षदों व धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि जब तक उनकी सुनवाई नहीं होगी, वे कहीं नहीं जाएँगे

भाजपा दिल्ली के ट्विटर अकाउंट पर धरने का वीडियो शेयर करते हुए लिखा गया है, “नगर निगम दिल्ली के 13,000 करोड़ रुपए की बकाया राशि न देने पर, आज, मुख्यमंत्री निवास स्थान पर केजरीवाल सरकार के ख़िलाफ़ तीनों निगम के पार्षदों द्वारा धरना प्रदर्शन जारी है।”

अगले ट्वीट में लिखा गया, “अपनी नाकामियों का ठीकरा दिल्ली सरकार दूसरे राज्यों पर फोड़ती आई है और अब नगर निगम, जो दिल्लीवासियों के लिए वास्तव में काम करती है, उसे भी पंगु बनाने में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री जी शर्म करो, निगम का बकाया पैसा जारी करो।”

इसी क्रम में अगले ट्वीट में कहा गया, “केजरीवाल सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर दिल्ली के विकास और जन सेवा के लिए निगमों का बकाया 13000 करोड़ रुपए तत्काल प्रभाव से दे। निगमों को पंगु बनाना बंद करे केजरीवाल सरकार।”

शेयर किए गए वीडियो में प्रदर्शनकारियों को कहते सुना जा सकता है कि केजरीवाल सरकार ने उनसे वादा किया था कि सारा बकाया चुकाया जाएगा और उनसे यह भी कहा गया था कि वह लोग उनसे आकर कभी भी मिल सकते हैं। प्रदर्शनकारी कहते हैं कि आज सुबह जब वे मुख्यमंत्री से मिलने आए तो कहा गया कि वह उनसे मिलेंगे, लेकिन थोड़ी देर बाद सीएम बिन कुछ कहे और बिना उनसे मिले चले गए।

अब मुख्यमंत्री का रवैया देखकर प्रदर्शन पर बैठे लोगों का कहना है कि वह उनके आवास पर बैठे हैं और जब सीएम वापस आएँगे तब वह पहले उनसे बात करेंगे और तभी उनको अंदर जाने दिया जाएगा। प्रदर्शनकारी कहते हैं, “उन्होंने अगर हमारा पैसा क्लियर किया तो हम यहाँ से जाएँगे, वरना सभी सफाई कर्मचारी हड़ताल पर जाने को तैयार हैं। यदि दिल्ली में कोरोना की चौथी लहर आई तो उसके जिम्मेदार भी मुख्यमंत्री ही होंगे।”

प्रदर्शनकारी बताते हैं, “ये पैसा कोई हमारा नहीं है। ये राज्य वित्त आयोग जिसका गठन राज्य सरकार ने किया है, उसकी सिफारिश के अनुसार तीनों नगर निगम का पैसा 13,500 करोड़ रुपया नगर निगम को दिल्ली सरकार से लेना है।”

उल्लेखनीय है कि अपने आवास पर निगम पार्षदों की सुनवाई करने की बजाय दिल्ली मुख्यमंत्री केजरीवाल ने थोड़ी देर पहले अपने ट्विटर पर किसान प्रदर्शन की वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में वह कहते नजर आ रहे हैं कि किसानों की माँग बिलकुल जायज है और उनकी पार्टी शुरू से इस संघर्ष में साथ हैं। 

दिल्लीवासियों को मुफ्त की रेवड़ियों से फुसलाकर रंग बदलने में गिरगिट को भी मात देने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री को आज तक मुफ्त की रेवड़ियां खाने वाले पहचान नहीं सके। प्रदुषण मद में मिले धन का चुटकी भर खर्च जिस पंजाब के किसानों को पराली जलाने के लिए बदनाम किया जा रहा था, आज उसी पंजाब के किसानों की खातिर उस दिल्ली को परेशान कर रखा है, जहाँ का वह मुख्यमंत्री है। यदि किसी कारण बिल्ली भागों छीका टूट गया, और आप सत्ता में आ गयी, तुरंत दिल्ली छोड़ पंजाब का रास्ता ले लेगा ये मुख्यमंत्री। यही कारण है कि एक विभाग अपने पास नहीं रखने का मुख्य कारण भी यही है। अब देखिए ट्विटर पर कैसी क्लास लग रही है:-

वह कहते हैं कि शुरू-शुरू में जब किसान बॉर्डर पर आए तो केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने उनसे 9 स्टेडियम माँगे। बहुत दबाव बनाया गया ताकि किसान दिल्ली आए और उन्हें पकड़कर स्टेडियम में डाल दिया जाए, लेकिन उनकी सरकार ने परमिशन नहीं दी और इससे आंदोलन को बढ़ने में मदद मिली। इसके बाद से उनकी पार्टी से जुड़े सभी लोग सेवादार की तरह किसानों की सेवा करने में लगे हैं। वह कहते हैं कि वह आज भी प्रोटेस्ट में बतौर सेवादार ही पहुँचे हैं।

योगेंद्र यादव करेंगे पंजाब के किसानों के ‘चक्का जाम’ को लीड, दूध-फल-सब्जी भी नहीं आने देंगे

इस तथाकथित किसान आंदोलन में एक नया किसान पैदा हुआ, जिसका नाम है योगेंद्र यादव। ये आदमी कब से किसान हो गया, इस बहरूपिए की पृष्ठभूमि देखनी होगी। लेकिन 2014 में मोदी लहर को रोकने जब सोनिया गाँधी ने अपनी समिति के अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी का गठन करवाया था, तब मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और योगेंद्र यादव आदि सभी अराजक तत्व सोनिया गाँधी की समिति में थे, और उन दिनों हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते शीर्षक "कांग्रेस के गर्भ से निकली आप" और अगले अंक में शीर्षक "कांग्रेस और आप का DNA Positive" रिपोर्ट प्रकाशित की थी, लेकिन तब भी इनके किसान होने की दूर तक कहीं कोई नामोनिशान नहीं मिला।  
खैर, इस नए बने किसान के सामने सरसों, पालक, गाजर आदि के बीज रख पूछा जाए कि कौन-सा बीज किसका है? नहीं बता पायेगा ये बहरूपिया तथाकथित किसान। दूसरे, जिन कृषि बिलों को लेकर इन अराजक तत्वों ने इतना उधम मचाया हुआ, बताएं कि "यदि पूर्व के बिल किसानों के हित में थे, तब क्यों किसान भूख और कर्ज के कारण आत्महत्या कर रहा था? ये विदेशी चंदे से दिल्ली को बंधक बनाकर दिल्लीवासियों की ज़िंदगी दूबर करके क्या मिल रहा है। यह वही दिल्ली है, जिसने योगेंद्र यादव की स्वराज पार्टी को इतनी शर्मनाक हार दी थी कि कोई उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाया, क्या योगेंद्र उस अपमानजनक हार का बदला ले रहे हैं? चुनाव के दौरान खुद के बचपन में सलीम होने की वोटरों को दुहाई देकर भी करारी शिकस्त को नहीं टाल पाए योगेंद्र यादव सहूलियत के हिसाब से चोला ओढ़ लेते हैं। कभी राजनीतिक विश्लेषक की, कभी राजनैतिक दल के नेता की तो कभी किसान नेता की।

फिलहाल विफल राजनेता और पेशेवर प्रदर्शनकारी योगेंद्र यादव पंजाब के किसानों के विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। पंजाब के किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। दिसंबर 6, 2020 को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, योगेंद्र यादव ने कहा कि बंद के दौरान आवश्यक वस्तुओं के वितरण की भी अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि दोपहर 3 बजे तक चक्का जाम रहेगा। किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान कर रखा है।

जनता में होते रोष का भी इनको सामना करना पड़ेगा। जो तथाकथित नेता दूध, सब्जी आदि को बंद कर दे,उसे नेता कहना नेता की गरिमा का अपमान है, इसलिए इन तथाकथित नेताओं को चुनावों में नकार रही हैं, देखिए ट्विटर पर जनता का गुस्सा:-

हालाँकि योगेंद्र यादव ने कहा कि विवाह और इमरजेंसी सेवाओं की अनुमति होगी। दूध, फल, सब्जियों और अन्य सेवाओं की डिलीवरी बंद रहेगी। सिंघु बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “8 तारीख को सुबह से शाम तक भारत बंद रहेगा। चक्का जाम शाम तीन बजे तक रहेगा।

वैसे योगेंद्र यादव खुद किसान नहीं हैं। उन्हें हाल ही में किसानों और केंद्र सरकार के बीच इस मामले पर चर्चा में शामिल होने से रोका गया, क्योंकि वह एक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। यादव ने दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह ने खुद उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जताई थी।दूध-फल-सब्ज़ी पर रोक रहेगी। शादियों और इमरजेंसी सर्विसेज़ पर किसी तरह की रोक नहीं होगी।”

योगेंद्र यादव ने अपने बहिष्कार को लेकर कहा था, “हालाँकि किसान यूनियन ने फैसला किया कि बैठक का निमंत्रण तभी स्वीकार किया जाएगा जब चार प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाएँगे। मुझे सूचित किया गया कि अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से इसका हिस्सा होने पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने कहा कि मैं राजनीतिक व्यक्ति हूँ। किसान संघ बैठक का बहिष्कार करने के लिए तैयार थे, लेकिन वे मेरी जिद पर आगे बढ़ गए।”

योगेंद्र यादव जैसों के ‘इच्छाधारी’ चोले और विरोध-प्रदर्शनों में कथित तौर पर की गई सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर लोग विरोध-प्रदर्शनों के पीछे की मंशा पर सवाल उठाने लगे हैं।

पिछले दिनों किसान संगठन और केंद्र सरकार के बातचीत में शामिल प्रतिनिधिमंडल में स्वराज पार्टी (Swaraj Party) के नेता योगेंद्र यादव (Yogendra yadav) का भी नाम था। मगर बाद में केंद्र सरकार के कहने के पर उनका नाम हटा दिया गया। सरकार ने कहा था कि वह ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि वह नहीं चाहती कि कोई राजनीतिक व्यक्ति इसमें शामिल हो।