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‘किसान उत्पातियों’ पर अंबाला पुलिस ने ठोका NSA, उपद्रवियों की संपत्ति कुर्क करके नुकसान की भरपाई

किसान आंदोलन के नाम पर जिस तरह उग्र प्रदर्शनकारियों द्वारा सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने का काम किया जा रहा है उसे देखते हुए हरियाणा की अंबाला पुलिस ने सख्त खदम उठाए हैं। अंबाला पुलिस ने कहा है कि सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई इन्हीं आंदोलनकारियों की संपत्तियों से की जाएगी। इसके लिए संपत्ति की कुर्की और बैंक खातों को सीज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके अलावा किसान संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ NSA लगाने की बात भी पुलिस ने कही है।

जिस दिन ने इनके बैंक खातों को जब्त करना शुरू कर दिया, बिकाऊ उत्पादी अपने आप भागते नज़र आएंगे। यह आंदोलन वास्तव में पंजाब में होना था, क्योकि 5 मिनट में कानून बनाकर 22 फसलों पर MSP देने का वायदा भगवंत सिंह मान है, जो अब प्रदेश के मुख्यमत्री हैं। क्यों नहीं कानून बनाकर 22 फसलों पर MSP देते? क्यों अपना पाप केंद्र सरकार पर थोपा जा रहा है? 


22 फरवरी 2024 को जारी प्रेस नोट में अंबाला पुलिस ने कहा कि 13 फरवरी 2024 से किसान संगठनों द्वारा किसानों द्वारा दिल्ली कूच को लेकर शंभू बॉर्डर पर लगे बैरिकेड्स को तोड़ने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं व पुलिस प्रशासन पर पत्थरबहाजी व हुड़दंगबाजी करके कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश भी हो रही है। इन सबसे सरकारी और प्राइवेट संपत्तियों को काफी नुकसान हो रहा है।

पुलिस ने कहा कि वो अब आंदोलनकारियों द्वारा सरकारी और प्राइवेट संपत्ति को पहुँचाए गए नुकसान का आँकलन कर रहे हैं। सबकी भरपाई इन्हीं आंदोलनकारियों की संपत्ति और बैंक खातों को सीज करके की जाएगी। पुलिस की मानें तो उन्होंने इस संबंध में पहले ही सूचित किया था कि अगर सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ तो वह यह कार्रवाई करेंगे। हालाँकि पिछले कुछ दिनों में फिर भी ऐसी घटनाएँ आईं, जिसके बाद पुलिस ने यह नोट जारी किया।

इसके अलावा पुलिस ने एक और ट्वीट में यह जानकारी दी है कि उन्होंने NSA के तहत किसान संगठनों के पदाधिकारियों को नजरबंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। अंबाला पुलिस द्वारा दी गई जानकारी में कहा गया है कि आंदोलन में 30 पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं, 1 पुलिसकर्मचारी का ब्रेम हैमरेज हुआ और 2 की मृत्यु हो गई है। ऐसे में आंदोलन के कई किसान नेता जो सक्रिय भूमिका हैं और कानून व्यवस्था बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए भड़काऊ बयानबाजी कर रहे हैं। सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए पोस्टर कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार के विरुद्ध गलत शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं और उत्पात मचा रहे हैं। ऐसे में अपराधिक गतिविधियों को रोकने व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 2(3) राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 तहत किसान संगठनों के पदाधिकारियों को नजरबंद करने की कार्यवाही पुलिस प्रशासन द्वारा अमल में लाई जा रही है।

ये भी जानकारी आई है कि अंबाला पुलिस की तरफ से भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष और किसान मजदूर मोर्चा के सदस्य अमरजीत सिंह मोहड़ी के घर पर पुलिस का नोटिस चस्पा किया गया है। इसमें लिखा गया है कि अमरजीत सिंह उस प्रदर्शन में अहम भूमिका में है, जो अब उग्र हो रहा है। अगर प्रदर्शनकारी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाते हैं तो फिर मोहड़ी की संपत्ति से भी भरपाई की जा सकती है।


क्या INDI गठबंधन में आ चुकी है दरार? कॉन्ग्रेस पर हमलावर अरविंद केजरीवाल, पत्रकारों पर ‘बैन’ से नीतीश कुमार का किनारा

लोकसभा चुनाव में इस बार प्रधानमंत्री मोदी से मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों ने मिलकर INDI गठबंधन बनाया है। इस गठबंधन में कुल 28 दल शामिल हैं लेकिन इनमें अब दरार साफ़ दिखाई दे रही है। गठबंधन में आम आदमी पार्टी और नीतीश कुमार की जदयू भी शामिल है। जहाँ गठबंधन की कई पार्टियाँ आपस में पहले ही सनातन धर्म को ख़त्म करने का ऐलान करते हुए देश की बहुसंख्यक जनता की भावनाओं को आहत कर चुकी हैं तो मौके की नजाकत को समझते हुए कई नेताओं ने इससे किनारा भी किया। कमलनाथ पहले ही पार्टी से अलग जाते हुए देश को सनातन का बता चुके हैं। 

अब तो सीधे-सीधे आम आदमी पार्टी के केजरीवाल और नीतीश कुमार खुलेआम गठबंधन की नीतियों को ठेंगा दिखाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी इन दोनों नेताओं के बयानों के वीडियो वायरल हो रहे हैं। जितेंद्र कुमार नाम के एक एक्स यूजर ने गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए पोस्ट किया, “INDI गैंग में सबकी अपनी ढपली और अपना राग है! जहाँ INDI गैंग के सदस्य केजरीवाल छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस को झूठी और मक्कार पार्टी बता रहे हैं। वहीं नीतीश कुमार INDI गैंग द्वारा पत्रकारों के बहिष्कार को गलत बताकर पत्रकारों के समर्थन में कहा उन्हें इस विषय के बारे में मालूम नहीं है।”

अब पहले बात करते हैं केजरीवाल के आम आदमी पार्टी की फिर आते हैं नीतीश कुमार पर जिन्होंने गठबंधन के सामूहिक निर्णय से किनारा करते हुए कहा, “मैं किसी पत्रकार के खिलाफ नहीं हूँ।”

केजरीवाल ने खड़ी कॉन्ग्रेस मुसीबत

दरअसल, कई राज्यों में आम आदमी पार्टी ने सीधे-सीधे कॉन्ग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलकर गठबंधन के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। जहाँ पहले पंजाब में AAP सरकार में मंत्री अनमोल गगन ने पंजाब की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर गठबंधन को किनारे कर दिया वहीं हरियाणा को लेकर भी पार्टी के संगठन मंत्री संदीप पाठक ने कहा है कि सभी 90 सीटों पर आम आदमी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। ऐसे में गठबंधन में दरार साफ़ दिखाई दे रही है।   
इतना ही नहीं रही-सही कसर अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविन्द केजरीवाल ने छत्तीसगढ़ के एक जनसभा को संबोधित करते हुए पूरी कर दी। उन्होंने शाहरुख़ खान की जवान फिल्म के सहारे शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। साथ ही छत्तीसगढ़ मे आम आदमी पार्टी के प्रभारी संजीव झा ने भी कॉन्ग्रेस को धोने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 
छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए AAP प्रभारी संजीव झा ने कहा कि छत्तीसगढ़ बनने के बाद से ही बस्तर की जनता ने जिस दल पर भरोसा किया प्रदेश में उसी की सरकार बनी, लेकिन कॉन्ग्रेस ने यहाँ के लोगों के उम्मीदों को ध्वस्त करने का काम किया।

पत्रकारों पर क्या कहा नीतीश कुमार ने 

हाल ही में INDI गठबंधन ने एक लिस्ट जारी कर 14 न्यूज़ एंकरों के बहिष्कार की अपील की थी। इसी मुद्दे पर गठबंधन की एक अहम् पार्टी जदयू के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कुछ पत्रकारों व एंकरों पर पाबंदी लगाए जाने के संबंध में शनिवार (16 सितम्बर, 2023) को सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हमें इसकी जानकारी नहीं है। वहीं मुख्यमंत्री ने पत्रकारों पर पाबंदी के संबंध में निर्णय के बारे में पूछे गए प्रश्न पर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यही बता पाएँगे। हम तो शुरू से ही पत्रकारों के पक्ष में रहे हैं।
बख्तियारपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “हम किसी पत्रकार के खिलाफ नहीं। पत्रकारों पर नियंत्रण नहीं किया जा सकता। पत्रकारों को आजादी मिल जाएगी तो जो उन्हें सच दिखेगा व अच्छा लगेगा, उस पर वह अपने-अपने ढंग से लिखेंगे। सभी का अपना अधिकार है।”

नूँह दंगों में AAP नेता जावेद को बचाने में जुटी पार्टी: स्थानीय कह रहे – ‘सोहना में दंगा मतलब जावेद का नाम एक नंबर पर’


हरियाणा के मेवात के नूँह में हुए दंगों में एक नाम जो सामना आया है, वो है AAP नेता जावेद अहमद का। आपको याद होगा कि दिल्ली दंगों के मुख्य अभियुक्तों में भी AAP का ही तत्कालीन पार्षद रहा ताहिर हुसैन शामिल था। उसने अपने घर को हिन्दुओं पर हमले के लिए लॉन्चपैड बना दिया था और सशस्त्र दंगाइयों की भीड़ का नेतृत्व किया था। उस समय भी AAP शुरू में उसके बचाव में थी। ठीक उसी तरह, अब पार्टी अपने नेता जावेद अहमद को बचाने में लग गई है। इसके लिए FIR तक को झुठला रही है।

जावेद अहमद हरियाणा में ‘आम आदमी पार्टी’ का स्टेट कोऑर्डिनेटर है। 31 जुलाई, 2023 को सोहना में ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता प्रदीप कुमार की हत्या के मामले में उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। हालाँकि, जावेद अहमद का दावा है कि वो घटना के वक्त वहाँ से 100 किलोमीटर दूर था, इसीलिए इस वारदात में उसकी संलिप्तता का सवाल ही नहीं उठता है। अगर आप याद करेंगे तो पाएँगे कि एक वीडियो बना कर ताहिर हुसैन ने भी दावा किया था कि वो खुद पीड़ित है और बार-बार पुलिस को कॉल कर रहा था।

कई विश्लेषकों ने उसके इस वीडियो को फर्जी और एडिट किया हुआ भी बताया था। अब आते हैं वापस नूँह दंगे पर, जिसमें नल्हड स्थित प्राचीन शिव मंदिर को चारों तरफ से निशाना बना कर गोलीबारी की गई। ये हमला ‘ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा’ के दौरान किया गया था। स्थिति ये हुई कि भीड़ अस्पताल तक में घुस गई और मरीजों को मारा-पीटा। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने भी इसे सुनियोजित साजिश के तहत हुआ हमला माना। आखिर भीड़ के पास इतने अत्याधुनिक हथियार आए कहाँ से, ये अभी तक चर्चा का विषय है।

जावेद अहमद को लेकर ऑपइंडिया का स्टिंग, जानिए स्थानीय लोगों ने क्या बताया

ऑपइंडिया की टीम नूँह में ग्राउंड पर पहुँची थी, जहाँ उसने ये स्टिंग किया। इस स्टिंग में स्थानीय लोगों ने बताया कि जावेद का यहाँ बहुत दहशत है। इस दौरान एक व्यक्ति ने बताया कि जावेद की उम्र 50 के आसपास है, लेकिन वो खुद को मेंटेन (फिट) रखता है। उन्होंने बताया कि जावेद युवाओं को जिम कराने से लेकर उनका पूरा सर्कल बना रखा है। उन्होंने बताया कि भाजपा से पहले कॉन्ग्रेस की सरकार थी, उस दौरान ‘सोनिया गाँधी के किसी करीबी अहमद’ से उसकी अच्छी-खासी जान-पहचान थी।
इस दौरान इन लोगों ने बताया कि पूरे सोहना में जावेद के खिलाफ कोई नहीं बोलेगा, क्योंकि उसका खौफ है। उन्होंने ये भी बताया कि निकिता तोमर हत्याकांड में भी इसका कुछ न कुछ हाथ था, इसका भतीजा इसमें शामिल था। बता दें कि बता दें कि फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में कॉलेज के सामने निकिता तोमर की तौसीफ और रहमान की हत्या कर दी थी। स्थानीय लोगों ने कुछ साल पहले एक अन्य दंगे में भी जावेद का हाथ होने की बात कही और कहा कि अरावली की पहाड़ियों पर से पत्थर चलता था।
उन्होंने बताया कि कई डम्फर चलते थे। लोगों ने बताया कि कॉन्ग्रेस पार्टी से रिश्ते के कारण जावेद अहमद बचता रहा है। उन्होंने ये भी बताया कि नूँह से कॉन्ग्रेस का विधायक चौधरी आफताब अहमद, जावेद अहमद का चाचा है। उन्होंने बताया कि चाचा-भतीजे की कॉन्ग्रेस आलाकमान से सीधी बातचीत थी। उन्होंने बताया कि 2009-10 में तहसील को विकसित करने के लिए एक मास्टर प्लान आया था। उन्होंने इलाके में अवैध खनन की बात भी स्वीकारी। नूँह में ही जुलाई 2022 में अवैध खनन की जाँच करने गए डीएसपी सुरेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी।
उन्हें ट्रक से कुचल कर मार डाला गया था। उन्होंने ये भी इंगित किया कि अवैध खनन के मामले में भी जावेद अहमद का हाथ है, लेकिन फिर भी वो नहीं पकड़ा जाता। उन्होंने बताया कि जो भी अपराधी चोरी-चकारी वगैरह में पकड़ा जाता है, उन सबको जावेद छुड़वाता है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि किसी को फँसाना हो तो जावेद अहमद सुंदर लड़कियों को भी प्रशिक्षित कर के भेजता है और फिर केस करवा देता है। उन्होंने बताया कि सोहना में हमेशा से बाहर का ही विधायक बनता रहा है।
उन्होंने बताया कि गुज्जर यहाँ से चुनाव लड़ते हैं, लेकिन उन्हें वोट नहीं पड़ते। इस दौरान उन्होंने एक गुज्जर नेता रोहतास की बात करते हुए कहा कि रिठोस गाँव में वो रहते हैं और 350 करोड़ रुपए की उनकी संपत्ति है, वो जीत सकते हैं लेकिन वो खड़े नहीं होते। उन्होंने ये स्वीकार किया कि इलाके में हिन्दुओं में एकता नहीं है। एक व्यक्ति ने बताया कि जावेद उस समय पुन्हाना में होने की बात कह रहा है, लेकिन मुंबई हाइवे से कहा कि 20-25 मिनट में उस टोल तक पहुँचा जा सकता है, जिस टोल का वीडियो सामने आया है।
एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि अगर आम आदमी पर हत्या का आरोप होता तो उन्हें न सिर्फ उठा लिया जाता, बल्कि टॉर्चर भी किया जाता। उन्होंने बताया कि उस दिन कोई आम आदमी दंगों की सुन कर आता ही नहीं, फिर भी जावेद अहमद आया। उन्होंने बताया कि इलाके के लोग खुल कर नहीं कह रहे, लेकिन इसका (जावेद अहमद का) कहीं न कहीं इस दंगे में हाथ है। उन्होंने कहा कि AAP ऐसे लोगों को ही टिकट देती है, जावेद अहमद भी 2024 के विधानसभा चुनाव में ‘आम आदमी पार्टी’ से खड़ा होगा और जीतेगा।
जावेद इससे पहले दूसरे-तीसरे नंबर पर आता रहा है, ऐसे में बिखरे वोटों को इकट्ठा करने के लिए ये साजिश रची गई – ये भी स्थानीय व्यक्ति ने बताया। साथ ही कहा कि डर के कारण कुछ हिन्दू भी जावेद अहमद की पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि AAP के कुछ नेता सोहना आए थे, दिल्ली से। इस दौरान उन्होंने सोहना के ‘चाइल्ड पॉइंट’ में एक गुज्जर समुदाय के लड़के की हत्या का मामला बताया, जो 8-10 साल पहले का है। उन्होंने बड़ा खुलासा किया कि जेल से निकल कर आने के बाद जावेद को कंधे पर उठा कर लाया गया था और उसका स्वागत किया गया था।
लोगों का सवाल है कि इतनी जल्दी छतों पर पत्थर कैसे आ गए, हथियार कैसे जुटा लिए गए? उन्होंने बताया कि ये सामान्य हथियार नहीं थे, 100-200 मीटर की रेंज में लड़कों को गोली लगी है। उन्होंने बताया कि जिधर दंगे हुए, उस तरफ जाने से पहले सोचना पड़ेगा, कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए – इसका डर रहेगा। उन्होंने इसे एक बहुत बड़ी घटना बताते हुए कहा कि जान-माल के साथ कारोबार का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए कहा कि बाहर के लोगों को भी इन्हीं लोगों ने बुलाया।
उन्होंने बताया कि किसी भी टोल तक 35-40 मिनट में पहुँचा जा सकता है, ऐसे में ये दावा सही नहीं है कि ये वहाँ से दूर था। साथ ही कहा कि सोहना में हुए दंगों में अधिकतर जावेद अहमद के लड़के थे, जो इसकी मर्जी के बिना पत्थर चलाना तो दूर, ये सड़क भी पार न करें। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जो हिंसा वगैरह हुई है, उसमें जावेद अहमद का हाथ था। साथ ही इलाके में 5-7000 रोहिंग्या मुस्लिमों के होने की बात भी कही गई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि मम्मन खान, आफताब अहमद और जावेद अहमद का एक गिरोह है, जिसने ये दिखाने के लिए ये सब किया कि अभी भी हमारा दबदबा है और आपलोग खुल कर नहीं जी सकते। ये बात भी सामने आई है कि ‘जावेद कॉलोनी’ इसने खुद के नाम पर बसाई थी। स्थानीय लोगों ने ये भी बताया कि जंगल की जमीनों पर भी अवैध बस्तियाँ बसाई जा रही हैं। साथ ही उनका ये भी दावा है कि इन कॉलनियों में अधिकतर अपराधी किस्म के युवक ही रहते हैं।

सोहने में दंगा मतलब जावेद का नाम एक नंबर पर

इस दौरान ऑटो में यात्रा कर रहे कुछ लोगों से भी ऑपइंडिया की टीम ने बातचीत की। उन्होंने बताया कि दंगा मतलब जावेद का नाम एक नंबर पर। उन्होंने बताया कि जावेद का नाम इन दंगों में पक्का आ रहा है, सोहना में जब भी कोई हिंसा होती है तो जावेद का हाथ होता ही होता है। उन्होंने बताया कि जावेद का नाम भले ही राजनीति के कारण छिपाया जा रहा हो, लेकिन सोहना में कोई भी दंगा होता है तो जावेद का नाम एक नंबर पर आता ही आता है।
स्थानीय व्यक्ति ने ये भी बताया कि बाईपास के उधर उसने ‘जावेद कॉलोनी’ बसा रखी है, जहाँ मकान और कोठियाँ हैं, जहाँ सारी साजिश रची जाती है। उसने बताया कि 2-3 साल पहले एक लड़के की हत्या हुई थी और सड़कों पर पत्थर बिछा दिए गए थे। उसने कहा कि जावेद अहमद उस समय कहीं और जाने की बात कह रहा है। उसने जावेद के खतरनाक व्यक्ति होने की भी पुष्टि की। उसने कहा कि यहाँ दंगा होगा तो वही करवाएगा – ये निश्चित है। उक्त व्यक्ति लखवा गाँव का है।

AAP नेता जावेद अहमद का दावा – हत्याकांड के समय वो घटनास्थल से दूर था

जावेद अहमद ने ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता प्रदीप कुमार हत्याकांड में संलिप्तता से इनकार करते हुए दावा किया कि वो उस समय घटनास्थल से 100 किलोमीटर की दूरी पर था। निरंकारी चौक थाने में उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। कुछ CCTV फुटेज दिखा कर दावा किया कि वो टोल प्लाजा से गुजरा था। उसने कहा कि उसके गुजरने के 3 घंटे बाद ये घटना हुई और वो अगले दिन लौटा। उसने कहा कि उसे और पार्टी को बदनाम करने के लिए ये राजनीतिक प्रोपेगंडा चलाया जा रहा है।
AAP नेता जावेद अहमद के बचाव में पार्टी ने अपने कई नेता उतार दिए। AAP के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनुराग ढांडा ने जावेद अहमद पर दर्ज FIR पर सफाई देते हुए उल्टा बीजेपी पर ही पलटवार किया। उन्होंने कहा, “बीजेपी को हरियाणा के लोग सिरे से खारिज करने लगे हैं। इसलिए बीजेपी अब षड्यंत्र रचना चाहती है और समाज को बाँटने का काम कर रही है। आज पूरा देश जानता है कि कौन दंगे भड़काता है और उसके बाद झूठी FIR कर दूसरे पार्टी के नेताओं को फँसाने का काम करते हैं।”

प्रदीप कुमार की हत्या में जावेद अहमद का हाथ: FIR

शिकायतकर्ता पवन कुमार ने एफआईआर में कहा है कि 31 जुलाई की रात लगभग 10.30 बजे प्रदीप कुमार और बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ वह स्विफ्ट डिजायर कार से घर लौट रहे थे। इसी दौरान इस्लामवादियों की भीड़ ने उनकी कार पर जानलेवा हमला कर दिया। उनकी कार के पीछे बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं की दो कारें और एक पुलिस वैन साथ चल रही थी। उन्होंने आगे कहा कि जब उनकी कार सोहना रोड पर पहुँची तो पुलिस ने बजरंग दल के सदस्यों को खुद ही आगे बढ़ने के लिए कहा।
पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि सोहना क्षेत्र में तैनात पुलिस अधिकारियों ने सभी आवश्यक सुरक्षा जाँच कर ली है और रास्ता साफ है। पवन कुमार ने आगे कहा कि कुछ ही सेकंड में लगभग 150 इस्लामवादियों की भीड़ वहाँ आ गई और उनकी कार पर पथराव शुरू कर दिया। इसके कारण कार पर से उनका नियंत्रण हट गया और कार डिवाइडर से टकरा गई। जब कार रुकी तो उन्हें कार से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा। भीड़ का नेतृत्व कर रहा जावेद अहमद चिल्लाया, “उन सभी को मार डालो, जो होगा मैं संभाल लूँगा।”
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पवन कुमार ने एफआईआर में कहा, “जावेद अहमद की शह पर लोहे की रॉड, पत्थर, बंदूकों और अन्य हथियारों से लैस 20-25 इस्लामवादी हमारी ओर बढ़े और हमें पीटना शुरू कर दिया। इस दौरान एक व्यक्ति ने प्रदीप के सिर पर रॉड मार दी और वह नीचे गिर गए। वहाँ पर गोलियाँ चलने लगी। तभी पुलिस की गाड़ी वहाँ आ गई।” शिकायतकर्ता ने एफआईआर में आगे कहा कि पुलिस ने उन्हें भीड़ से बचाया और अस्पताल लेकर जाने लगी तो उन्होंने देखा कि देखा कि इस्लामवादी प्रदीप कुमार को लगातार लोहे की छड़ों और लाठियों से पीट रहे थे।

नूहं हिंसा में शामिल रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की 250 झुग्गियों पर प्रशासन ने चलाया बुलडोजर

नूहं में रोहिंग्याओं की बस्ती पर बुलडोजर 
हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा किए गए हमले के बाद हरियाणा सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने गुरुवार (3 जुलाई 2023) की शाम को इलाके के लगभग 250 झुग्गियों पर बुलडोजर चलाए हैं। ये झुग्गियाँ रोहिंग्या घुसपैठियों के हैं। इस दौरान रैपिड ऐक्शन फोर्स को तैनात किया गया था।

इसके पहले, गुरुवार (3 जुलाई 2023) की रात को सरकार ने नूहं जिले के SP वरुण सिंघला का ट्रांसफर कर दिया। वह हिंसा के दिन छुट्‌टी पर थे। सिंघला को भिवानी जिले का चार्ज दिया गया है। उनकी जगह नरेंद्र बिजारणिया को नूहं का चार्ज दिया गया है। बिजारणिया भिवानी के SP थे।

हरियाणा सरकार ने तावड़ू में जहाँ बुलडोजर चलाकर झुग्गियों को हटाया है, वहाँ म्यांमार से अवैध रूप से आए हुए रोहिंग्या रह रहे थे। रोहिंग्याओं के 250 से अधिक परिवार पिछले 4 सालों से अधिक समय से हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की जमीन पर अवैध कब्जा कर रह रहे थे। ये यहाँ कूड़ा बिनने और कबाड़ बेचने का काम कर रहे थे।

इसके अलावा, इस इलाके के जिन किसानों की जमीन सरकार ने अधिग्रहित की है, वे भी इन रोहिंग्याओं को किराए पर दे रखे थे और इसके बदले में वे इनसे किराया वसूल कर रहे थे। ये लोग नूहं हिंसा में शामिल थे। पुलिस की FIR में दंगा फैलाने में कई रोहिंग्या युवकों के नाम दर्ज हैं। इनमें से कुछ को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है।

अवैध रूप से बसाई गई इस बस्ती में म्यांमार और बांग्लादेश से आए घुसपैठिए अवैध रूप से रह रहे हैं। करीब 4 घंटे चली कार्रवाई में 200 से अधिक झुग्गियों को गिरा दिया गया। इस दौरान कुछ मुस्लिम महिलाओं ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद वे पीछे हट गईं।

कहा जा रहा है कि मेवात के कई इलाकों में ये घुसपैठिए अवैध रूप से रह रहे हैं। तावडू के अलावा नूहं, पुन्हाना, पिनगवां, नगीना और फिरोजपुर झिरका में भी ये घुसपैठिए सैकड़ों की संख्या में झोपड़ी बनाकर रह रहे। उनके उपर भी प्रशासन अब कार्रवाई करने की योजना बना रहा है।

इसके साथ ही, आज शुक्रवार होने के कारण नूहं के मुस्लिमों को जुमे की नमाज अपने घरों में पढ़ने के लिए कहा गया है। नूंह के कलेक्टर प्रशांत पंवार और पुलिस अधीक्षक ने उलेमाओं से कहा कि प्रशासन के इस निर्णय का वे सख्ती से पालन कराएँ। इसके साथ ही गुरुग्राम सहित अन्य इलाकों में जुमे की नमाज खुले में न पढ़ने के लिए कहा गया है।

इलाके में तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। हिंसा के चलते 4 जिलों- नूहं, पलवल, फरीदाबाद और गुरुग्राम में हालात तनावपूर्ण हुए हैं। जुमे को देखते हुए मस्जिदों के पास पुलिस बल तैनात किए गए हैं। इन चार जिलों में पैरामिलिट्री फोर्स की 20 कंपनियाँ तैनात की गई हैं।

इसके साथ ही राज्य के 9 जिलों में धारा 144 लागू किया गया है। नूहं, पलवल, फरीदाबाद और गुरुग्राम के सोहना, मानेसर और पटौदी में 5 अगस्त 2023 तक इंटरनेट और SMS सेवा बंद की गई है। हालाँकि, CET स्क्रीनिंग टेस्ट को देखते हुए गुरुवार को दोपहर 1 से 4 बजे तक बैन हटाया गया था।

नूहं में हुई हिंसा में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में होमगार्ड के गुरसेवक और नीरज शामिल हैं। इसके अलावा, नूहं के शक्ति सैनी, पानीपत के अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत, गुरुग्राम के इमाम साद, बादशाहपुर के प्रदीप शर्मा और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं।

इस हिंसा को लेकर पूरे राज्य में पुलिस ने कुल 93 केस दर्ज किए हैं। इनमें अभी तक 186 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूछताछ के लिए 78 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें ज्यादातर की उम्र 19 से 25 साल के बीच है।

पुलिस द्वारा की जा रही पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि हिंसा के बाद कई आरोपित मेवात की पहाड़ियों में, राजस्थान के जयपुर और उदयपुर तथा उत्तर प्रदेश के मेरठ, आगरा और अलीगढ़ में जाकर छिप गए हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है। 

हिंसा की जाँच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की 8 टीमें और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के 3 दल बनाए गए हैं। पुलिस जाँच में अब तक सामने आया है कि यह हिंसा सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी।

पुलिस ने सोशल मीडिया पर 2300 से अधिक वीडियो को चिन्हित किया है, जिनके जरिए अफवाह फैला फैलाया गया और हिंसा भड़काई गई। अब पुलिस इन वीडियो के आधार पर भी कार्रवाई करने में जुटी हुई है।


महिलाओं की मांग : मोदी जी हरियाणा को योगीजी जैसा सख्त मुख्यमंत्री चाहिए : ‘हिंदू महिलाओं की इज्जत लूटने के लिए रात का इंतजार कर रही थी कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़’

हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर हमले के बाद हरियाणा के नूहं में हिंसा फैल गई थी। 31 जुलाई 2023 को धार्मिक शोभायात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा हमला किया गया, जिसमें कई मौत हो गई और पुलिस सहित दर्जनों लोग घायल हो गए। नूहं का मुस्लिम बहुल इलाका अशांति का केंद्र था, जो धीरे-धीरे राज्य गुरुग्राम और सोहना जैसे अन्य क्षेत्रों तक फैल गया।

इस हिंसा के दौरान कई लोगों ने अपने कटु अनुभवों को साझा किया है। इसी कड़ी में, एक हिंदू महिला ने अपने एक साक्षात्कार में उस दिन की दिल दहला देने वाली घटना को बयान किया है। महिला ने बताया कि कैसे स्त्रियाँ अपनी इज्जत बचाने में कामयाब रहीं।

महिला ने अपने इंटरव्यू में बताया, “जब आसपास की झाड़ियों से गोलियाँ चलने लगीं तो हिंदू भाई बाहर थे। बिजली विभाग द्वारा बिजली काट दी गई। वे (मुस्लिम) हिंदू महिलाओं की इज्जत लूटने (रेप) के लिए सूरज डूबने और रात होने का इंतजार कर रहे थे। ये हम ही जानते हैं कि कैसे हमने अपनी इज्जत बचाई।”

घटना के बारे में बताते हुए हिंदू महिला कई बार रो पड़ी। उसने बताया, “हमने अपने भाइयों को मरते देखा। हम जानते हैं कि हमारे भाइयों को कैसे गोली मारी गई। हमारे पास उनके घावों को ढँकने के लिए पट्टियाँ भी नहीं थीं। इसलिए हमने उन पर अपनी चुन्नी और दुपट्टा बाँध दिया।” हिंदुओं पर की जाने चौतरफा गोली-बारी को याद करके महिला अब भी सिहर उठती है।

महिला ने सवालिया लहजे में आगे कहा, “क्या हम मरने के लिए वहाँ गए थे? क्या हम वहाँ दर्शन नहीं कर सकते? ये लोग (मुस्लिम) अपना जुलूस निकालते हैं। क्या हम में से किसी को उन पर आपत्ति है? हमारे पास पीने का पानी तक नहीं था। हमने शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले जल से अपना गला तर किया।”

महिला ने कहा, “उस दौरान बिजली काट दी गई थी। हम क्या कर सकते थे? वे हिंसा के लिए हम पर आरोप लगा रहे हैं। यदि हम ऐसा करना चाहते तो क्या हम अपने बच्चों को साथ लाते? क्या हम मरने के लिए अपनी माताओं और बुजुर्गों को अपने साथ वहाँ लाएँगे? क्या महिलाओं और बच्चों का हमारे लिए कोई मूल्य नहीं है?”

जीवित बचने के सवाल पर महिला ने बताया, “उस समय तक वहाँ कोई पुलिस नहीं थी। बाद में प्रशासन के पहुँचने के पर हम वहाँ से किसी तरह बच के निकले। हमें अपनी जान बचाने के लिए गाड़ियों के नीचे और खेतों के बीच से रेंगकर निकलना पड़ा। हमें जानवरों की तरह सरकारी बसों में ठूँस दिया गया था।”

उन्होंने कहा, “हमारे जले हुए गाड़ियों के धुएँ से आसमान काला हो गया था। इतना काला कि मौसम ख़राब होने पर भी आसमान में इतना अंधेरा नहीं होता। मैं सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी से हाथ जोड़कर अनुरोध करना चाहती हूँ कि हम 2024 में तभी वोट करेंगे, जब आप मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बर्खास्त करेंगे।”

महिला ने आगे कहा, “हम भाजपा को तभी वोट देंगे, जब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे योग्य और कुशल किसी व्यक्ति को यहाँ रखेंगे। वर्तमान मुख्यमंत्री 2000-2500 महिलाओं को नहीं बचा सके तो दूसरों को कैसे बचाएँगे? हमने सोमवार का व्रत किया था और पानी भी नहीं पी थी। हम वहाँ बेहोश हो रहे थे।”

कट्टरपंथियों ने पानीपत बजरंग दल के प्रखंड संयोजक अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत की हत्या कर दी। अभिषेक को पहले गोली मारी गई, फिर उनका गला काट दिया गया था। अभिषेक की बहादुरी को लेकर एक अन्य महिला ने कहा था कि वह महिलाओं को बचाने के खातिर अपनी जान गँवा दी।

पानीपत की एक महिला ने मीडिया से बात करते हुए खुद को हिंसा की भुक्तभोगी बताया। महिला ने कहा, “उन्होंने (मुस्लिम भीड़ ने) हमारे बस पर पथराव किया। हमारे बच्चे हमें बचाने के लिए नीचे उतरे। निहत्थे होने के बावजूद भी उन्होंने (अभिषेक चौहान ने) हमें बचाने की पूरी कोशिश की। वो डरे नहीं कि उनके हाथ में हथियार नहीं है।”

महिला ने आगे कहा, “बस में सारी औरतें और बच्चे थे। उन्होंने (अभिषेक राजपूत) ने बहादुरी से मुकाबला किया। हमारा बच्चा बलिदान हो गया। हमें गर्व है कि ये बच्चा हमारे पानीपत का था।” लोगों ने अभिषेक के लिए बलिदानी का दर्जा देने की माँग की।

मीडिया में मुस्लिमों और उनके सेक्युलर सहयोगियों ने हिंसा के लिए बार-बार बजरंग दल के सदस्य मोनू मानेसर उर्फ ​​मोहित यादव को दोषी ठहराया। मोनू मानेसर ने एक वीडियो संदेश जारी करके साफ कहा कि वह जुलूस में मौजूद नहीं थे। उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

वहीं, VHP ने स्थानीय कॉन्ग्रेस विधायक मम्मन खान और आफताब पर हिंसा के उकसाने का आरोप लगाया और इनके द्वारा किए गए कई ट्वीट को साझा किया। विश्व हिंदू परिषद के महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि मामन खाँ ने चार महीने पहले विधानसभा में कहा था कि किसी की हिम्मत है तो मेवात में घुसकर दिखा दे।

वीएचपी महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि एक और कॉन्ग्रेसी नेता हैं आफताब साहब। उन्होंने कहा कि अगर गाँव में पुलिस वाले आएँ तो उनके हाथ-पैर तोड़ दो। उनकी चिंदी-चिंदी कर दो। उन्होंने कहा कि आफताब मेवात में ही रहते हैं।

हरियाणा: नूहं: मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक कांग्रेस हिन्दुओं को बता रही दंगाई

नूहं हिंसा पर पत्रकार पुनीत ने हिन्दुओं के खिलाफ फैलाया झूठा (चित्र साभार- BBC)
हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिन्दुओं के ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। हिंसा से संबंधित ‘मिनी पाकिस्तान’ कहे जाने वाले मेवात के नूहं से कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इस बीच कट्टरपंथी मुस्लिमों के बचाव में कुख्यात गिरोह भी सक्रिय हो चुका है।

यह गैंग हिन्दुओं को ही हमलावर और मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने के लिए साजिशें रचना शुरू कर चुका है। इन्हीं में से एक कथित पत्रकार पुनीत कुमार सिंह भी हैं। पुनीत ‘बोलता हिंदुस्तान’ नाम का प्रोपोगेंडा पोर्टल चलाते हैं। उन्होंने कई फेक न्यूज फैलाने की कोशिश की।

पुनीत ने मंगलवार (1 अगस्त 2023) को एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने बीबीसी की ग्राउंड रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि विकास गर्ग नाम के व्यक्ति की दुकान में तोड़फोड़ हुई थी। पुनीत ने आरोप लगाया कि दुकान को मुस्लिमों की दुकान समझकर हिन्दू संगठनों के सदस्यों इसमें तोड़-फोड़ की।

पुनित ने लिखा, “नूहं में हिंदू ‘विकास गर्ग’ की दुकान को मुस्लिम की दुकान समझकर भगवा गुंडों ने तहस-नहस कर दिया।” इसी के साथ पुनीत ने मृत शायर राहत इंदौरी के एक ‘शेर’ की कुछ पंक्तियाँ – ‘लगेगी आग तो आएँगे घर कई जद में, यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है।’ भी लिखा।

                                         पुनीत कुमार सिंह का वो ट्वीट जो अब डिलीट कर लिया गया है

कुल मिलाकर पुनीत यह कहना चाहते थे कि नूहं के दंगे हिंदुओं की वजह से हुए और हिन्दू ही इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। अब डिलीट हो चुके ट्वीट में इस कथित पत्रकार ने नूहं से बीबीसी की एक वीडियो रिपोर्ट भी संलग्न की थी।

इस वीडियो में क्षतिग्रस्त दुकान के मालिक विकास गर्ग ने बीबीसी को बताया कि उनकी ’24×7 बेकरी एंड कैफे’ नाम की दुकान में सोमवार को तोड़फोड़ की गई थी। विकास ने घटना का समय सोमवार की दोपहर 3:30 बजे से 3:45 बजे बताया।

बीबीसी की रिपोर्ट में विकास ने बताया, “जब यात्रा गुजर रही थी तो यहाँ दंगा भड़क गया। मैं अपनी दुकान में ताला लगाकर चला गया था। इस दौरान मेरी दुकान लूट ली गई। दुकान का काउंटर, शीशे, LED और 7 फ्रिज क्षतिग्रस्त हो गए हैं। दुकान में रखे लगभग 7.5 लाख रुपए नकद रखे हुए थे। सारा सामान चुरा लिया गया है।”

विकास ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने रेस्तरां को बनाने के लिए कई सालों की कड़ी मेहनत की थी। उनके इस नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती है। इसी वीडियो के आधार पर पुनीत ने विकास गर्ग की दुकान को हिन्दू संगठन के सदस्यों द्वारा लूटे जाने का दावा किया।

पुनित ने अपने ट्वीट में हिंदुओं के लिए ‘भगवा गुंडों’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया। हालाँकि, पुनीत का ये दावा फर्जी निकला। विकास की दुकान के बाहर लगे बोर्ड पर दुकान के मालिकों के नाम स्पष्ट रूप से विकास गर्ग और सचिन गर्ग लिखे हुए थे। इसलिए मुस्लिम की दुकान समझकर हिंदुओं को तोड़-फोड़ वाला नैरेटिव फिट नहीं बैठता।

पुनीत ने अपने खास एजेंडे को फैलाने की कोशिश की। पोल खुलने और कई ट्विटर यूजर्स द्वारा आइना दिखाने के बाद फर्जी न्यूज़ विक्रेता ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। एक अन्य पत्रकार आदित्य राज कौल ने पुनीत कुमार सिंह के डिलीट ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए गुरुग्राम में लोगों से फर्जी खबर पर ध्यान न देने की अपील की है।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने लिखा, “गुरुग्राम में लोगों को फर्जी खबरों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। फर्जी सूचनाओं पर आधारित कुछ ट्वीट्स से हरियाणा में दहशत फैल रही है। ट्वीट डिलीट कर दिया गया है, इसके बावजूद इसे फॉरवर्ड किया जा रहा है। आशा है कि पुलिस मेवात हिंसा को गुरुग्राम तक फैलाने की साजिश की जाँच करेगी। सतर्क रहें। घबराएँ नहीं।”

इधर फजीहत होने के बाद पुनीत ने आधी रात को अपनी सफाई में एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने कहा कि जानकारी पता होने के बाद ट्वीट डिलीट कर लिया गया है। पुनीत का कहना है कि उन्हें हिन्दुओं द्वारा हिन्दू की दुकान लूटे जाने की जानकारी एक विश्वसनीय पत्रकार ने दी थी।

फर्जी अफवाह वाला ट्वीट डिलीट करने के बाद भी पुनीत खुद को एक जिम्मेदार नागरिक बता रहे हैं। लोगों के बीच भ्रामक सूचना और समाज में नफरत फैलाने के बावजूद पुनीत ने माफ़ी नहीं माँगी और बेशर्मी पर अड़े रहे।

इसके उलट, वह दूसरे पत्रकारों पर फर्जी न्यूज़ चलाने और पैसे की उगाही के आरोप लगाते रहे। अपने विवादास्पद ट्वीट में लिखी गई राहत इंदौरी की लाइनों को भी पुनीत ने अहिंसक बताया। फिलहाल सोशल मीडिया पर कथित पत्रकार पुनीत की गिरफ्तारी की माँग उठ रही है।

इस पत्रकार को लोग कॉन्ग्रेस के फंड पर पलने वाला पत्रकार कहते हैं।


हिंदुओं की हत्या 83.3% फिर भी नूहं दंगों में मुस्लिमों को पीड़ित बता रहा वामपंथी और विदेशी मीडिया; काशी और मथुरा के लिए डर बैठाने का षड्यंत्र

                                                                                                 साभार   
31 जुलाई को हरियाणा के मेवात के नूहं में इस्लामी भीड़ द्वारा हिंदुओं पर हुए हमले में अब तक 6 लोगों की मौत की खबर है। आतंक का शिकार हुए लोगों में 5 हिंदू व एक मुस्लिम है। घायलों में भी हिंदुओं की संख्या मुस्लिमों की अपेक्षा कहीं अधिक है। यही नहीं, आगजनी और तोड़फोड़ भी हिंदुओं के वाहनों और संपत्तियों में ही हुई। इसके बाद भी देश के वामपंथी मीडिया गिरोह से लेकर विदेशी मीडिया तक मुस्लिमों को ही पीड़ित दिखाने की कोशिश में जुटा हुआ है।

चर्चा यह भी है कि मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा दंगे करने का मुख्य कारण काशी और मथुरा मस्जिदों के विरुद्ध आने वाले कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध हिन्दुओं के दिल में डर बैठाने का षड्यंत्र है। जिसे हर सनातनी प्रेमी को समझना होगा और छद्दम धर्म-निरपेक्षों से सावधान रहना होगा। 

इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा लगाई गई हिंसा की आग में मौत का शिकार बने लोगों में 2 होमगार्ड के जवान, 1 मिठाई की दुकान में काम करने वाला हिंदू, यात्रा में शामिल होने गए 2 हिंदू, 1 गुरुग्राम की मस्जिद का मौलाना शामिल है।

नीरज (होमगार्ड) 

31 जुलाई को नूहं में मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं पर हमले के बाद गुरुग्राम से पुलिस टीम भेजी गई थी। इस टीम में नीरज भी शामिल थे। नूहं के रास्ते में ही इस्लामिक भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव और फायरिंग कर दी। दंगाइयों का सामना करते हुए नीरज ने बलिदान दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में नीरज के शरीर पर गंभीर और बड़े पैमाने पर चोट मिली हैं। इसका मतलब है कि इस्लामवादियों ने उन पर बेरहमी से हमला किया था।
मूल रूप से गुरुग्राम के रहने वाले नीरज के पिता चिरंजीलाल ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। उनका कहना है कि उन्हें गर्व है कि नीरज कर्तव्य निभाते हुए बलिदान हुए। वहीं, नीरज की पत्नी ने इस हिंसा को रोकने की अपील की है। वह नहीं चाहतीं कि कोई और महिला विधवा हो।

गुरुसेवक (होमगार्ड)

नीरज की तरह गुरुसेवक भी हिंसा रोकने नूहं जा रहे थे। वह उसी वाहन में थे, जिसमें नीरज थे। इस्लामी भीड़ के हमले में वह भी बलिदान हो गए। गुरुसेवक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके लीवर पर चोट की बात सामने आई है। इसका मतलब है कि इस्लामी भीड़ ने उन पर इतना भयंकर हमला किया था कि उनके लीवर तक को नुकसान पहुँच गया। गुरुसेवक मूल रूप से फतेहाबाद के टोहाना खंड के फतेहपुरी गाँव में रहते थे। वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे।

शक्ति (मिठाई की दुकान में काम करते थे)

शक्ति सैनी मेवात के मुस्लिम बाहुल्य गाँव भाड़स के रहने वाले थे। वह शोएब मिष्ठान भंडार नामक मिठाई की दुकान में काम करते थे। ऑपइंडिया से बातचीत में शिवसेना शिंदे गुट के नेता रितुराज ने इस बात की आशंका जताई थी कि हमले के दौरान शक्ति दुकान में ही मौजूद थे। भीड़ दुकान से उनका अपहरण कर कहीं और ले गई। इसके बाद हत्या कर बड़कली चौराहे में फेंक दिया।

अभिषेक (जल चढ़ाने गए थे नूहं)

पानीपत के रहने वाले अभिषेक भी उन लोगों में से एक हैं, जो इस्लामी भीड़ के हमले में काल के गाल में समा गए। वह बजरंग दल के प्रखंड संयोजक थे। दंगाइयों ने पहले अभिषेक को गोली मारी। इसके बाद तलवार से गला काटकर उनका सिर पत्थर से कुचल दिया। अभिषेक जिस बस से जा रहे थे, उसी बस में महिलाएँ भी थीं। वह महिलाओं को बचाने आगे आए थे। इसी दौरान हमलावरों ने गोली चला दी, जो अभिषेक को जा लगी। गोली लगते ही अभिषेक जमीन पर गिर पड़े।
वहाँ मौजूद अभिषेक के चचेरे भाई महेश ने मदद के लिए लोगों को पुकारा, लेकिन आसपास कोई नहीं था। महेश अपने घायल भाई अभिषेक को कहीं सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश कर रहे थे। इस बीच भीड़ में से एक हमलावर बाहर आया और उसने तलवार चलाकर अभिषेक की गर्दन काट दी और भाग गया। इसके बाद महेश को भी वहाँ से भागना पड़ा। लगभग 1 घंटे बाद पुलिस आई और अभिषेक को अस्पताल पहुँचाया गया। तब तक अभिषेक की मौत हो चुकी थी।

प्रदीप (जल चढ़ाने गए थे नूहं)

31 जुलाई 2023 को नल्हड़ मंदिर पर हुए हमले में प्रदीप कुमार बच गए थे। पुलिस उन्हें बचाकर पुलिस लाइन ले आई थी। लेकिन घर लौटते समय वह कट्टरपंथियों की भीड़ का निशाना बन गए। 1 अगस्त की रात करीब 2 बजे पुलिस उन्हें थाने की सीमा तक छोड़कर चली गई थी। प्रदीप अपने दोस्त कपिल व हिंदू संगठन की महिलाओं के साथ घर वापस आ रहे थे। इसी दौरान 200-300 लोगों की भीड़ ने घेर कर उन पर पत्थरबाजी शुरू की। इसके बाद प्रदीप को खींचकर कार से बाहर निकाल लिया। इसके बाद पीट-पीटकर मार डाला।
प्रदीप के साथ रहे कपिल त्यागी इस बात को लेकर हैरान हैं कि मुस्लिम भीड़ को उनकी सटीक मुखबिरी कैसे हुई। जबकि वह सीधे पुलिस लाइन से निकले थे। मृतक प्रदीप कुमार गुरुग्राम में बजरंग दल के पदाधिकारी थे। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के रहने वाले बताए जा रहे हैं। गुरुग्राम में वो छोटा-मोटा काम करके अपना और अपने परिवार का गुजारा करते थे।

मौलाना हाफिज साद (एक मात्र मुस्लिम मृतक)

मौलाना हाफिज साद गुरुग्राम की मस्जिद में रहता था। नूहं में भड़की हिंसा की आग गुरुग्राम तक पहुँच गई थी। इसी दौरान 31 जुलाई और 1 अगस्त की दरमियानी रात सेक्टर 57 में स्थित एक निर्माणाधीन और विवादास्पद मस्जिद (जिस पर कोर्ट से रोक भी लगी है) में हमला कर आग लगा दी गई। इस हमले में हाफिज साद की मौत हो गई।
                                 नूहं दंगों के कारण 6 की गई जान: 5 हिंदू, 1 मुसलमान
ऊपर की फोटो याद रखें। वामपंथी मीडिया जो प्रोपेगेंडा फैला रहा है, यह तस्वीर उसकी काट है। नूहं में हिंसा के आँकड़ों को देखें तो मरने वालों में 83.3% हिंदू हैं। इसके बाद भी हिंदुओं को हिंसक, अहिष्णु समेत तमाम तरह की उपमाएँ देने वाला वामपंथी-लिबरल मीडिया गिरोह और भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने का हर वक्त रास्ता ढूँढ़ने वाला विदेशी मीडिया मुस्लिमों को पीड़ित बता रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि हिंदुओं की शांतिपूर्ण धार्मिक यात्रा पर पथराव, आगजनी और गोलीबारी इस्लामवादियों ने ही की। वहीं, हिंदू निहत्थे थे।
गुरुग्राम की मस्जिद में आग लगाने वाले कौन थे, इसकी पुष्टि अब तक नहीं हुई है। चूँकि मस्जिद निर्माणाधीन थी, ऐसे में हो सकता है कि यह कृत्य भी इस्लामवादियों की भीड़ ने ही किया हो। या फिर हिंसा भड़काने के लिए जानबूझकर की गई हरकत भी हो सकती है।

सोरेस की टूलकिट की आरफा, जुबैर, लल्लनटॉप ऐसे बचा रहे इस्लामी कट्टरपंथियों को: FIR से लिबरल गैंग बेनकाब, पत्थरबाजों पर Shoot at sight के आदेश कब ?

मुस्लिम दंगाइयों को कवर देने में लगे पड़े हैं लिबरल गैंग
हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। करीब 800-900 हथियारबंद इस्लामवादियों ने मंदिर में जल चढ़ाने आए हजारों भक्तों पर हमला किया। इससे मंदिर के कुछ हिस्से छतिग्रस्त हो गए। हालाँकि वामपंथी लिबरल कट्टरपंथियों को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

अब चर्चा यह है कि आखिर मुंह ढककर या खुले मुंह पत्थरबाज़ी करने वालों पर जब तक Shoot at sight के आदेश नहीं होंगे, टूलकिट वाले अशांति फैलाते रहेंगे। इसमें शामिल चाहे बच्चे हो, महिलाएं हो या फिर व्यस्क किसी को नहीं बख्शना चाहिए। जब तक इस तरह के कानून नहीं बनेंगे, दंगाई अशांति फैलाते रहेंगे। दूसरे, यह कि पत्थर सप्लाई करने वाला कौन है और इस काम के लिए कितने पैसे मिले और किसने दिए? 

इस्लामवादियों के काले चेहरे को छिपाने में ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद ज़ुबैर का नाम न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। जुबैर ने ‘लल्लनटॉप’ की मंदिर के पुजारी के बयान वाली रिपोर्ट से 21 सेकंड की क्लिप के जरिए यह बताने की कोशिश की कि दंगाइयों ने मंदिर पर हमला नहीं किया था। हालाँकि इस मामले में ड्यूटी मजिस्ट्रेट मुकुल कथूरिया की शिकायत पर दर्ज FIR कुछ और ही कहती है।

इस्लामी भीड़ द्वारा मंदिर पर पथराव, गोलियाँ: FIR

नूहं हिंसा को लेकर दर्ज की गई कई एफआईआर ऑपइंडिया के पास है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात सिंचाई और जल संसाधन विभाग, हरियाणा के कार्यकारी इंजीनियर मुकुल कथूरिया की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई एफआईआर में से एक में साफ तौर पर कहा गया है कि 800-900 इस्लामवादियों ने मंदिर में मौजूद भक्तों पर पथराव किया और गोलियाँ चलाईं। हमले में मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया।
हमले के समय डीएम कथूरिया, उनके ड्राइवर खुर्शीद, इंस्पेक्टर राजबाला और अन्य लोग जलाभिषेक यात्रा के दौरान ड्यूटी के लिए नल्हड़ मंदिर में तैनात थे। जब भक्त मंदिर में भगवान शिव की पूजा कर रहे थे, तभी स्थानीय मेवाती और राजस्थानी बोलने वाली इस्लामवादियों की भीड़ प्लानिंग के हिसाब से पास के खेतों और पहाड़ों से मंदिर की ओर आई।
(साभार:हरियाणा पुलिस)
कथूरिया ने दर्ज कराया है कि दंगाइयों के हाथों में डंडे, पत्थर और अवैध हथियार थे। वे अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगा रहे थे। भीड़ ने मंदिर में पहुँचकर पूजा में खलल डालने के लिए पथराव और गोलीबारी शुरू कर दी। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर उन्होंने स्थिति को शांत करने की कोशिश की और इस्लामिक भीड़ से पीछे हटने का अनुरोध किया। लेकिन दंगाइयों ने उनकी बात नहीं सुनी। वे अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते हुए मंदिर के करीब जाने लगे। इस दौरान फिर एक बार हिंदुओं को निशाना बनाकर फायरिंग की।
यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 323, 332, 353, 186, 188, 295 ए, 153 ए, 452, 427, 307 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत दर्ज की गई। एफआईआर में आदिल, तामिल, अरसाद, अजहरुद्दीन, कासिर, सकील, जुनैद, सलामुद्दीन, इकबाल, आजाद, इलियास, अकबर, राहुल पुत्र जूना, सलीम, इक्का उर्फ काला, तौहीद, याहाय, जावेद, शाहरुख, हारीस, अहमद, आसिफ, शोएब समेत कई दंगाइयों को नामजद किया गया।

वामपंथियों और लिबरलों का दावा: मंदिर पर हमला हुआ ही नहीं

मंदिर में हमले की खबरों के बीच ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने ‘लल्लनटॉप’ की रिपोर्ट की 21 सेकंड की क्लिप को रीट्वीट किया। इस क्लिप में मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा ने कहा कि हमला मंदिर के करीब नहीं हुआ था।
दिलचस्प बात यह है कि जब ऑपइंडिया ने 4 मिनट से अधिक के वीडियो को देखा तो सामने आया कि पुजारी ने साफ तौर पर कहा था कि हमले के दौरान प्रशासन ने उन्हें बाहर आने से मना किया था। इसलिए वह बाहर नहीं आए। उन्होंने यह भी कहा था कि मंदिर के अंदर तक उन्होंने आवाजें सुनी थी। लेकिन हमला मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर हुआ। पुजारी के ये दावे किसी भी तरह से मेल नहीं खाते।
मंदिर के पुजारी ने जो कहा, उसमें से 3 मूल बातों को पढ़िए:
  1. पुजारी ने यह भी कहा, “मुझे इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है क्योंकि हमें अंदर रहने के लिए कहा गया था। श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता था। मैं बाहर नहीं गया।”
  2. पहाड़ों से हो रही पत्थरबाजी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने फिर कहा, “मैं फिर कहना चाहता हूँ कि मैं बाहर नहीं आया। मैं एक पुजारी हूँ। हम अंदर ही रहते हैं।”
  3. यह पूछे जाने पर कि उन्हें अंदर रहने के लिए क्यों कहा गया था, उन्होंने बताया, “लगभग 4,000 लोग अंदर फँसे हुए थे। इनमें महिलाएँ और लड़कियाँ भी शामिल थीं। अंदर रहना ही बेहतर था। मंदिर के अंदर कुछ नहीं हुआ। मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर जो कुछ भी हुआ हो।”
‘लल्लनटॉप’ के एक अन्य वीडियो में, रिपोर्टर ने मंदिर के पास मचाए गए आतंक को दिखाया है। जब वह जले हुए वाहनों, पथराव और टूटी हुई काँच की बोतलों के निशान दिखाते हुए सड़क पर जा रहे थे, तो यह स्पष्ट था कि दंगे मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर नहीं हुए। यही नहीं, इस वीडियो में ‘लल्लनटॉप’ ने मंदिर में भंडारे के लिए प्रसाद बनाने आए लोगों से भी बात की। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वे घण्टों तक मंदिर में ही फँसे थे। इसके बाद सुरक्षा बलों द्वारा उन्हें बचाया गया।
 
‘द वायर’ की संदिग्ध पत्रकार आरफ़ा ख़ानम शेरवानी भी कहाँ पीछे रहने वाली थीं। आरफा ने कहा कि हरियाणा के गृह मंत्री कह रहे हैं कि मंदिर में भक्तों को बंधक बनाया गया था। लेकिन पुजारी दावों का खंडन कर रहे हैं।
‘द वायर’ ने पुजारी के हवाले से कहा, “लोगों को बंधक क्या बनाएँगे? वे परमात्मा की शरण में थे। अचानक पता चला की माहौल खराब है। इन लोगों को बंधक कैसे बनाया जा सकता है? वे सर्वशक्तिमान की शरण में थे। लेकिन उन्हें अचानक पता चला कि बाहर की स्थिति अच्छी नहीं है। चूँकि बाहर की स्थिति खराब हो गई थी, इसलिए लोग अंदर फँस गए।”
वामपंथी मीडिया रिपोर्टिंग को अगर हम फिर से पढ़ें तो पुजारी ने कहा है कि लोग मंदिर के अंदर फँसे हुए थे क्योंकि बाहर की स्थिति खराब थी। यह तो ठीक ऐसा ही हुआ कि लुटेरों द्वारा हमला किए गए बैंक में लोगों को ‘बंधक’ नहीं बनाया गया था, बल्कि वे सिर्फ ‘अंदर फँस गए’ थे।
दूसरी और महत्वपूर्ण बात – किसी भी 21 सेकंड के वीडियो के जरिए मेवात में हुई हिंदू विरोधी हिंसा को नहीं दिखाया जा सकता। पूरे वीडियो को देखें तो इस्लामिक भीड़ द्वारा मचाए गए आतंक से हुए नुकसान का जिक्र करते हुए रिपोर्टर ने कहा है कि हमला प्री-प्लान्ड लगता है। मतलब साफ है कि इस्लामिक भीड़ ने हमला किया था। लेकिन उन्हें बचाने की जल्दी में ज़ुबैर, आरफा जैसे लोगों ने पूरी बात पर ध्यान नहीं दिया… क्योंकि इन्हें फैलाना है प्रोपेगेंडा, मुस्लिमों को दिखाना है पीड़ित।

हरियाणा : नूंह: ‘6 महीने की साजिश, 14 साल के बच्चे भी चला रहे थे हथियार’: श्रद्धालुओं ने बताया AK-47 से बरसा रहे थे गोलियाँ

                                    6 माह से रची जा रही थी हमले की साजिश (चित्र साभार- ABP न्यूज़)
हरियाणा के मेवात (Mewat, Haryana) में सोमवार (31 जुलाई 2023) को भारी हिंसा हुई। हिंसा में 2 होमगार्ड जवानों और एक नागरिक की हत्या कर दी गई। घायलों की संख्या 60 से अधिक बताई जा रही है, जिनमें दर्जनों पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। पुलिस सहित बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा में शामिल लोगों के 30 से अधिक वाहनों को या तो तोड़ डाला गया है या जला दिया गया।

तनाव को देखते हुए नूहं, गुरुग्राम, रेवाड़ी और फरीदाबाद में धारा 144 लागू कर दी गई है। स्कूल-कॉलेजों के साथ-साथ इंटरनेट को भी बंद कर दिया गया है। दंगाइयों के बीच फँसे लोगों को बचाकर नूहं पुलिस लाइन लाया गया है। बचाये गए लोगों का दावा है कि हिंसा की साजिश कम-से-कम 6 महीना पहले से रची जा रही थी।

ABP न्यूज़ ने हिन्दू संगठन से जुड़े उन लोगों का इंटरव्यू लिया है, जिन्हें नल्हड शिव मंदिर से बचाकर लाया गया है। बचाए गए लोगों में एक साधु के वेश वाले व्यक्ति ने बताया, “हिन्दुओं की पहली बस, जो मंदिर में जल चढ़ाकर गई, उसे 1 किलोमीटर बाद जला दिया गया। इसके बाद 14-15 और गाड़ियों को जलाया गया।”

पीड़ित ने आगे बताया कि मामले की जानकारी होने पर कुछ हिन्दू घटना के बारे में जानने गए तो उनके वाहनों को भी जला दिया गया। पीड़ित ने कहा कि उन पर हमले के लिए आतंकवादियों द्वारा AK 47 का इस्तेमाल किया गया था। एक अन्य पीड़ित ने कहा, “प्राचीन शिव मंदिर 3 तरफ से पहाड़ों से घिरा है। तीनों तरफ से गोलियाँ चलीं।”

आरोप है कि पुलिस ने पहुँचने के बाद जवाबी फायरिंग की, लेकिन पुलिस पर भी लगभग एक घण्टे तक गोलियाँ बरसाईं गईं। लोगों ने बताया कि हमले के दौरान मंदिर में फँसे श्रद्धालुओं की संख्या 6 से 7 हजार के बीच थी। पूरी बृजमंडल यात्रा में अनुमानित लोगों की तादाद 25 हजार बताई गई है। लोगों ने बताया कि वो मंदिर के अंदर लगभग 7 घंटे तक फँसे रहे।

बचाकर लाए गए एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, “14 साल के लड़के भी असलहा चला रहे थे। ये प्लानिंग 6 महीने से की गई थी।” लोगों का आरोप है कि पहाड़ों से चलाई जा रही गोलियाँ किसी के पेट, किसी के जाँघ और किसी के माथे से छूकर निकली है।

राजस्थान पुलिस पर हरियाणा में FIR, श्मशान से बाहर निकाला गया था नवजात शिशु का शव

हरियाणा में राजस्थान पुलिस पर मंगलवार (21 फरवरी 2023) को एफआईआर दर्ज की गई। यह मामला गोरक्षक श्रीकांत कौशिक की माँ दुलारी देवी की शिकायत पर दर्ज हुआ है। राजस्थान पुलिस पर श्रीकांत की गर्भवती पत्नी के पेट पर लात मारने का आरोप है। उसका नवजात शिशु मृत पैदा हुआ था।

वैसे नवजात की मौत की वजह की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हरियाणा पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। डॉक्टरों के बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने के लिए ​हरियाणा पुलिस ने नवजात शिशु का शव 19 फरवरी को मरोड़ा गाँव के श्मशान से बाहर निकलवाया था।

17 फरवरी 2023 की सुबह श्रीकांत कौशिक के घर में घुसने और परिजनों को प्रताड़ित करने का आरोप भरतपुर पुलिस पर है। हालाँकि राजस्थान पुलिस इन आरोपों को नकार चुकी है। श्रीकांत को राजस्थान पुलिस गो तस्कर जुनैद और नासिर की हत्या के मामले में तलाश रही है। जुनैद और नासिर की जली हुई लाश हरियाणा के भिवानी में मिली थी।

श्रीकांत की माँ दुलारी ने पुलिस प्रताड़ना को लेकर 18 फरवरी को हरियाणा के नूँह के नगीना थाने में शिकायत दी थी। उस पर अब एफआईआर दर्ज हुई है। श्रीकांत के मृत शिशु का पोस्टमार्टम 20 फरवरी को पुलिस की मौजूदगी में हुआ था। दुलारी देवी ने अपनी शिकायत में कहा था कि 17 फरवरी को उनके घर में 30 से 40 पुलिसकर्मी जबरन घुस गए और मारपीट की। इस दौरान श्रीकांत के बारे में सवाल करते हुए कहते पुलिस ने कहा, “श्रीकांत कहाँ है, वह बहुत बड़ा गोरक्षक बनता है।” जब घर वालों ने श्रीकांत की जानकारी नहीं होने की बात कही तो उन्हें गालियाँ देते हुए पीटा गया। श्रीकांत की गर्भवती पत्नी कमलेश के पेट पर लात मारी गई।

FIR में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि मौत का असल कारण मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा। वहीं अन्य परीक्षण के लिए विसरा को सुरक्षित रख लिया गया है। इस मामले में 30 से 40 अज्ञात पुलिसकर्मियों के विरुद्ध IPC की धारा 148, 149, 452, 312 और 354 के तहत केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है।

भरतपुर पुलिस द्वारा आरोपों को खारिज किए जाने के बाद ऑपइंडिया ने श्रीकांत के चाचा प्रवीण कुमार से बात की थी। उन्होंने कहा था कि पुलिस की हरकत के कारण उनके परिवार के लोग भयभीत हैं। श्रीकांत के चचेरे भाई विष्णु कौशिक ने भी राजस्थान पुलिस पर खुद को 40 घंटे तक अवैध हिरासत में रखने और टॉर्चर करने का आरोप लगाया था।

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विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने हरियाणा में हुई एफआईआर को राजस्थान पुलिस के गाल पर तमाचा बताया है। विहिप शुरुआत से ही इस मामले की सीबीआई जाँच की माँग कर रही है।