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नूहं : गुरुकुल पर हमला करने वाले जेहादियों की पहचान क्यों छिपा रहे राजदीप सरदेसाई?


हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिन्दुओं की ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर इस्लामी भीड़ ने हमला किया था। इस भीड़ ने वहाँ चुन-चुन कर हिन्दुओं, उनके प्रतिष्ठानों और संस्थाओं को निशाना बनाया था। इस दौरान नूहं के भादस में गुरुकुल पर भी हमला था। इसी मामले से शक्ति सैनी की हत्या की कड़ी भी जुड़ती है। इसी गुरुकुल पर हमला करने वालों को अपनी रिपोर्ट में ‘बाहरी’ बताकर राजदीप सरदेसाई मुस्लिमों का बचाव करने की कोशिश कर रहे थे।

ऑपइंडिया को जो जानकारी मिली है कि उसके अनुसार शक्ति सैनी को मुस्लिम भीड़ के हमले की जानकारी मिलने के बाद अपने भाई को बचाने मेवात के भादस स्थित गुरुकुल गए थे। उनके भाई यहाँ शिक्षक हैं। शक्ति गुरुकुल जाने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन कथित तौर पर रास्ते में ही दंगाई मुस्लिम भीड़ ने उन्हें उठा लिया। दोबारा अगले दिन 1 अगस्त की सुबह उनकी मौत की खबर घरवालों को मिली।

ऑपइंडिया को प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि 31 जुलाई को 200-250 की मुस्लिम भीड़ ने दो बार गुरुकुल पर हमला किया था। पहले दोपहर के 2-2.30 के बीच हमला हुआ। यही से हमला कर लौट रही भीड़ ने बाद में कथित तौर पर बड़कली स्थित एक सरसों के तेल की फ़ैक्ट्री जला दी थी। यह फ़ैक्ट्री बीजेपी नेता शिवकुमार बंटी की बताई जा रही है। दंगाइयों ने बंटी के फ़ैक्ट्री में लूटपाट कर आग लगा दी। सैकड़ों कनस्तर तेल या तो लूट लिया गया या जला दिया गया। वहाँ कई टन खली भी मौजूद थी। आग इतनी भीषण थी कि दमकल विभाग इस पर अगली सुबह ही काबू पा सकी।

वहीं भादस के गुरुकुल पर हमले के मामले में बताया जा रहा है कि मुस्लिम भीड़ पेट्रोल बम, लाठी और हथियारों से लैश थी। उन्मादी भीड़ नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगा रही थी। दंगाई भीड़ में छोटे बच्चे भी थे जो दो छोटे समूहों में आकर घटना स्थल पर इकट्ठे हुए थे। दंगाई अपनी गाड़ियों के नंबर प्लेट पर पहले से ही ग्रीस लगा कर आए थे, जिससे उनकी तैयारियों का पता चलता है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गुरुकुल पर जब मुस्लिम भीड़ ने पहली बार हमला किया तो वहाँ 3 टीचर, 35 स्टूडेंट, आसपास के हिन्दुओं के अलावा नल्हड़ मंदिर के कई श्रद्धालुओं सहित करीब 150 लोग मौजूद थे। लोगों ने खुद को गुरुकुल के अंदर बंद कर लिया था, जबकि मुस्लिम भीड़ बाहर नारे लगा रही थी। उस समय कुछ स्थानीय लोगों और गुरुकुल में रहने वाले परिवारों के प्रतिरोध की वजह से मुस्लिम भीड़ पीछे हट गई थी। 

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार, जब गुरुकुल पर हमला हुआ, तब वहाँ कोई पुलिस वाला नहीं था क्योंकि अधिकांश पुलिसकर्मी नल्हड़ मंदिर में श्रद्धालुओं को बचाने गए थे। शाम के करीब 6-6.30 बजे मुस्लिम भीड़ नेफिर से गुरुकुल पर हमला बोल दिया। हालाँकि, तब तक स्थानीय हिन्दू और आश्रम निवासी अपनी रक्षा को लेकर अलर्ट हो गए थे। इसके कारण थोड़े से प्रतिरोध के बाद मुस्लिम भीड़ को वापस लौटना पड़ा।

बताया जाता है कि शाम को हुए दूसरे हमले की जानकारी मिलने के बाद ही शक्ति सैनी घर से गुरुकुल के लिए निकले थे। कथित तौर पर मुस्लिम भीड़ ने उन्हें रास्ते से ही अगवा कर लिया। अगले दिन उनकी लाश मिली। शक्ति के एक भाई के अनुसार, “वे अपने भाई को बचाने गुरुकुल गए थे जो वहाँ टीचर हैं। लेकिन वे खुद ही मुस्लिम भीड़ के शिकार हो गए।” इस मामले में दर्ज FIR में उनके भाई ने बताया है कि पूरी घटना का विवरण दिया है।

गुरुकुल पर हमले के साजिशकर्ता का नाम सामने नहीं आया है। लेकिन स्थानीय विधायक मम्मन खान का घर गुरुकुल से करीब 50 मीटर ही दूर है। दावा है कि गुरुकुल पर हमला होते ही उनका परिवार घर से निकल गया। गौर करने वाली बात यह है कि नूहं हिंसा के बाद से मम्मन खान विवादों में हैं। हरियाणा विधानसभा में मोनू मानेसर को लेकर दिया गया उनका बयान भी मुस्लिमों को भड़काने की एक वजह बताई जा रही है।

गुरुकुल पर हमले का एक सिरा भादस गाँव के ही अख्तर के बेटे आमीन से भी जुड़ा है। उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आमीन के भाई राशिद पर गोकशी के 2 केस पहले से ही दर्ज हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि राशिद को गो रक्षकों ने ही पकड़ कर पुलिस के हवाले किया था। उस समय जब उसके घर पर छापेमारी हुई थी तो गो मांस भी बरामद हुआ था।

राजदीप सरदेसाई ने फैलाया झूठ, गाँव वालों ने बताई हकीकत

गुरुकुल के पुजारी से बात करते हुए राजदीप सरदेसाई बार-बार यही पूछ रहे थे कि हमला करने वाले बाहरी थे। पुजारी ने आस-पास के गाँव वाले जवाब को अनसुना करके वो फिर बचाने वाले मुस्लिम सरपंच की ओर बात ले गए।
हकीकत ये है कि जिस भादस गाँव में गुरुकुल है, उसी गाँव के अख्तर के बेटे अमीन को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आमीन का भाई राशिद गोहत्यारा है। उस पर गोकशी के 2 केस पहले से ही दर्ज हैं।
राजदीप सरदेसाई के अनुसार नूहं में हिंदुओं पर हमले को लेकर केवल दो सिद्धांत हैं: 1. बजरंग दल ने मेवातियों को भड़काया और उन्होंने जवाबी कार्रवाई की। 2. मेवाती मुस्लिम गौरक्षकों द्वारा फैलाई गई नफरत के खिलाफ जवाबी हमला करने का इंतजार कर रहे थे।
हकीकत यह है कि हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पहुँचने से पहले ही दंगाई मुस्लिम भीड़ गुरुकुल पर हमला कर चुकी थी। अगर बजरंग दल की जवाबी कार्रवाई और गौरक्षकों द्वारा फैलाई गई नफरत के खिलाफ ही दंगा किया गया तो बड़कली चौक पर दंगा जलाभिषेक यात्रा पहुँचने से पहले कैसे हो गई? गुरुकुल पर पहला हमला 2 से 2:30 बजे दोपहर के समय क्यों हुई? उस समय तो जलाभिषेक यात्रा आई भी नहीं थी।

‘सभी को मार डालो, जो होगा मैं देख लूँगा’: AAP नेता जावेद अहमद के कहने पर मुस्लिम भीड़ ने की प्रदीप कुमार की हत्या, निकिता तोमर को गोली मारने वाला तौसीफ का चाचा

                                                       मृतक प्रदीप और AAP नेता जावेद अहमद
ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान 31 जुलाई 2023 को कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदुओं पर चौतरफा हमला कर दिया था। सड़क से लेकर मंदिर तक में उन पर फायरिंग की गई। अस्पताल में मरीजों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से उनका धर्म पूछकर मारा-पीटा गया है। इस हिंसा में अब तक 7 लोगों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों घायल हैं।

हिंसा की जाँच कर रही SIT ने भी प्रथम दृष्ट्या इसे एक सुनियोजित षडयंत्र माना है। जाहिर सी बात है कि बिना नेतृत्व के एक समुदाय के हजारों व्यक्ति सड़कों पर रणनीति के तहत उतर कर हमला नहीं कर सकते। उनके पास अत्याधुनिक हथियार थे। ये हथियार भी उन्हें आसानी ने नहीं मिले होंगे। इन सब शंकाओं के तार जुड़ते नजर आ रहे हैं। इसके पीछे एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार का नाम सामने आ रहा है।

इस राजनेता का नाम एक FIR में आया है। यह FIR बजरंग दल के कार्यकर्ता प्रदीप कुमार की हत्या से संबंधित है। प्रदीप कुमार नल्हड मंदिर पर हुए हमले में बच गए थे और पुलिस टीम अन्य हजारों लोगों के साथ उन्हें भी बचाकर नूहं के पुलिस लाइन तक लाई थी। हालाँकि, मंगलवार (1 अगस्त 2023) को नूहं पुलिस लाइन से जब वे अपने घर जा रहे थे, उसी दौरान दंगाई भीड़ ने घेर कर उन्हें मार डाला था।

प्रदीप कुमार के अलावा, उन्मादी भीड़ ने शक्ति सैनी और अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत और होमगार्ड के दो जवानों की भी हत्या कर दी थी। इसमें अभिषेक चौहान अपने साथ आए महिलाओं और बच्चों को बचाते हुए मारे गए थे। दंगाइयों ने पहले उन्हें गोली मारी थी। उसके बाद उनका गला काटकर सिर को पत्थर से कुचल दिया था।

ऑपइंडिया के पास प्रदीप की हत्या के मामले में दर्ज एफआईआर उपलब्ध है। लगभग 200 से अधिक लोगों की हत्यारी भीड़ द्वारा उनकी हत्या के एक दिन बाद यानी, 2 अगस्त 2023 को एफआईआर दर्ज की गई थी। प्राथमिकी बजरंग दल के एक अन्य कार्यकर्ता पवन कुमार ने दर्ज कराई है। पवन मृतक प्रदीप के साथ थे।

                                               ऑपइंडिया द्वारा हासिल की गई एफआईआर की कॉपी

पवन कुमार ने अपनी शिकायत में जावेद अहमद नामक व्यक्ति को मुख्य आरोपित बताया है। उन्होंने कहा कि भीड़ ने जावेद अहमद के आदेश पर प्रदीप कुमार और उनके साथ आए बजरंग दल के अन्य सदस्यों पर जानलेवा हमला किया था। गौरतलब है कि आरोपी जावेद अहमद आम आदमी पार्टी का नेता है।

शिकायतकर्ता पवन कुमार ने एफआईआर में कहा है कि 31 जुलाई की रात लगभग 10.30 बजे प्रदीप कुमार और बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ वह स्विफ्ट डिजायर कार से घर लौट रहे थे। इसी दौरान इस्लामवादियों की भीड़ ने उनकी कार पर जानलेवा हमला कर दिया। उनकी कार के पीछे बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं की दो कारें और एक पुलिस वैन साथ चल रही थी।

उन्होंने आगे कहा कि जब उनकी कार सोहना रोड पर पहुँची तो पुलिस ने बजरंग दल के सदस्यों को खुद ही आगे बढ़ने के लिए कहा। पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि सोहना क्षेत्र में तैनात पुलिस अधिकारियों ने सभी आवश्यक सुरक्षा जाँच कर ली है और रास्ता साफ है।

FIR के अनुसार, उन्होंने पुलिस की सुरक्षा के बिना कुछ ही दूरी तय की थी कि एक अपरिचित स्कॉर्पियो कार ने तेज रफ्तार से उनका पीछा करना शुरू कर दिया। उनकी कार कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे (KMP एक्सप्रेसवे) पर केवल एक या दो किलोमीटर ही चली होगी, तभी अचानक स्कॉर्पियो कार ने उन्हें रोक लिया।

पवन कुमार ने आगे कहा कि कुछ ही सेकंड में लगभग 150 इस्लामवादियों की भीड़ वहाँ आ गई और उनकी कार पर पथराव शुरू कर दिया। इसके कारण कार पर से उनका नियंत्रण हट गया और कार डिवाइडर से टकरा गई। जब कार रुकी तो उन्हें कार से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा। भीड़ का नेतृत्व कर रहा जावेद अहमद चिल्लाया, “उन सभी को मार डालो, जो होगा मैं संभाल लूँगा।”

पवन कुमार ने एफआईआर में कहा, “जावेद अहमद की शह पर लोहे की रॉड, पत्थर, बंदूकों और अन्य हथियारों से लैस 20-25 इस्लामवादी हमारी ओर बढ़े और हमें पीटना शुरू कर दिया। इस दौरान एक व्यक्ति ने प्रदीप के सिर पर रॉड मार दी और वह नीचे गिर गए। वहाँ पर गोलियाँ चलने लगी। तभी पुलिस की गाड़ी वहाँ आ गई।”

शिकायतकर्ता ने एफआईआर में आगे कहा कि पुलिस ने उन्हें भीड़ से बचाया और अस्पताल लेकर जाने लगी तो उन्होंने देखा कि देखा कि इस्लामवादी प्रदीप कुमार को लगातार लोहे की छड़ों और लाठियों से पीट रहे थे। बाद में पुलिस ने प्रदीप कुमार को बचाया और दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले गई, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया।

कौन है जावेद अहमद?

एफआईआर में शिकायतकर्ता ने कई बार उल्लेख किया कि बजरंग दल कार्यकर्ता प्रदीप कुमार पर हमले और हत्या के पीछे मुख्य आरोपित जावेद अहमद नामक व्यक्ति है। चूँकि एफआईआर में केवल आरोपित के नाम का उल्लेख किया गया था, इसलिए ऑपइंडिया ने उसके बारे में कुछ और जानकारी प्राप्त करने के प्रयास में शिकायतकर्ता पवन कुमार से बात की।
पवन कुमार ने ऑपइंडिया को बताया कि जावेद अहमद कोई और नहीं, बल्कि हरियाणा के सोहना निर्वाचन क्षेत्र से आम आदमी पार्टी का नेता है। उन्होंने कहा कि जावेद ने ही भीड़ को जुटाया था और प्रदीप कुमार एवं बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला करने के लिए उकसाया था।
पवन कुमार ने हमें आगे बताया, “इस्लामी भीड़ ने उसके उकसाने पर ‘अल्लाह हू अकबर’ और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए हम पर और वहाँ मौजूद अन्य निहत्थे हिंदुओं पर हमला कर दिया।”
जब हमने पवन कुमार से पूछा कि क्या उन्हें यकीन है कि AAP नेता इस्लामवादियों का नेतृत्व कर रहा था तो उन्होंने हाँ में जवाब दिया। उन्होंने दावा किया कि वह जावेद को अच्छी तरह पहचानते हैं, क्योंकि उन्होंने अक्सर जावेद और उसके परिवार के सदस्यों को हरियाणा के सोहना के इलाके में घूमते देखा है।
पवन कुमार से बात करने के बाद हमने आरोपित जावेद अहमद के बारे में कुछ और जानकारी जुटाने के लिए खोजबीन शुरू की। खोजबीन के दौरान ऑपइंडिया को 2 अगस्त 2022 को आम आदमी पार्टी, हरियाणा इकाई द्वारा जारी एक प्रेस नोट मिला, जिसमें जावेद अहमद को AAP के अल्पसंख्यक सेल के राज्य समन्वयक के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की गई थी।
जावेद अहमद पहले सोहना विधानसभा से बसपा का उम्मीदवार था। हालाँकि, 14 मार्च 2022 को दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में वह AAP में शामिल हुआ था।
                                                                       टोपी में जावेद अहमद
आम आदमी पार्टी द्वारा 2022 में पंजाब विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद हरियाणा के कई पूर्व मंत्री, विधायक और उनके सहयोगी AAP पार्टी में शामिल हुए थे। जावेद अहमद भी इनमें से एक था। वह बहुजन समाज पार्टी छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गया था।

हरियाणा की निकिता तोमर हत्याकांड में भी आरोपित

साल 2020 में हरियाणा के बल्लभगढ़ में निकिता तोमर की दिन दहाड़े हत्या कर दी गई थी। निकिता की दिन-दहाड़े हत्या करने वाला तौसीफ उससे निकाह करना चाहता था। जब निकिता इसके लिए तैयार नहीं हुई तो उसने अपने साथी रेहान के साथ मिलकर निकिता की बीच सड़क पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। तौसीफ इसी जावेद अहमद का भतीजा है।
इस हत्याकांड में जावेद अहमद से भी जाँच एजेंसियों ने पूछताछ की थी। पुलिस ने हत्याकांड के मुख्य आरोपित तौसीफ के अब्बू जाकिर हुसैन, अम्मी असमीना और चाचा जावेद अहमद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कराया था। हालाँकि, कोर्ट ने जावेद को अग्रिम जमानत दे दी थी। 

राजनीतिक रूप से रसूखदार है जावेद का परिवार

जावेद अहमद का परिवार काफी रसूखदार है। जावेद का चाचा कबीर अहमद विधायक रह चुके हैं। वही, उसका चचेरा भतीजा आफताब अहमद मेवात जिले की नूहं सीट से कॉन्ग्रेस विधायक है। इतना ही नहीं, आफताब अहमद के अब्बू और जावेद अहमद का भाई खुर्शीद अहमद हरियाणा के पूर्व मंत्री रह चुके हैं।
जावेद अहमद ने पिछली बार सोहना विधानसभा से मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए गया था। हारने के बाद भी इस परिवार का रूतबा कम नहीं है और अक्सर विवादों में रहता है।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के रहने वाले प्रदीप कुमार गुरुग्राम में बजरंग दल इकाई के पदाधिकारी थे। अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला होने के कारण वह छोटे-मोटे काम करते थे। बजरंग दल की गुरुग्राम इकाई से जुड़े लोगों ने कहा कि पुलिस शव परीक्षण और अन्य कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद मृतक के शव को सीधे उसके पैतृक गाँव बागपत भेजेगी।
31 जुलाई 2023 को जब हरियाणा के नूहं में हिंदु पर हमला हुआ तो ऑपइंडिया और कई अन्य प्लेटफार्मों पर खुलासा किया गया कि छतों से उन पर पथराव किया गया था। कट्टरपंथी मुस्लिम लड़के और पुरुष पहाड़ी इलाके में चले गए थे और वहीं से मंदिर हिंदुओं पर गोलीबारी कर रहे थे। इनमें 14 साल के बच्चे तक शामिल थे।
पहाड़ की चोटियों से उन पर एसिड की बोतलें फेंकी गईं और कई महिलाओं को परेशान किया गया। हिंसा के दौरान, कई महिलाओं और बच्चों (जिनकी संख्या लगभग 3000 थी) ने मंदिर में शरण ली थी और पुलिस ने उन्हें कुछ घंटों बाद ही बचा लिया था। हमले के दौरान मंदिर परिसर के आसपास मौजूद लोगों पर एके-47 से फायरिंग की गई थीं।(साभार)

नूहं हिंसा में शामिल रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की 250 झुग्गियों पर प्रशासन ने चलाया बुलडोजर

नूहं में रोहिंग्याओं की बस्ती पर बुलडोजर 
हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा किए गए हमले के बाद हरियाणा सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने गुरुवार (3 जुलाई 2023) की शाम को इलाके के लगभग 250 झुग्गियों पर बुलडोजर चलाए हैं। ये झुग्गियाँ रोहिंग्या घुसपैठियों के हैं। इस दौरान रैपिड ऐक्शन फोर्स को तैनात किया गया था।

इसके पहले, गुरुवार (3 जुलाई 2023) की रात को सरकार ने नूहं जिले के SP वरुण सिंघला का ट्रांसफर कर दिया। वह हिंसा के दिन छुट्‌टी पर थे। सिंघला को भिवानी जिले का चार्ज दिया गया है। उनकी जगह नरेंद्र बिजारणिया को नूहं का चार्ज दिया गया है। बिजारणिया भिवानी के SP थे।

हरियाणा सरकार ने तावड़ू में जहाँ बुलडोजर चलाकर झुग्गियों को हटाया है, वहाँ म्यांमार से अवैध रूप से आए हुए रोहिंग्या रह रहे थे। रोहिंग्याओं के 250 से अधिक परिवार पिछले 4 सालों से अधिक समय से हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की जमीन पर अवैध कब्जा कर रह रहे थे। ये यहाँ कूड़ा बिनने और कबाड़ बेचने का काम कर रहे थे।

इसके अलावा, इस इलाके के जिन किसानों की जमीन सरकार ने अधिग्रहित की है, वे भी इन रोहिंग्याओं को किराए पर दे रखे थे और इसके बदले में वे इनसे किराया वसूल कर रहे थे। ये लोग नूहं हिंसा में शामिल थे। पुलिस की FIR में दंगा फैलाने में कई रोहिंग्या युवकों के नाम दर्ज हैं। इनमें से कुछ को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है।

अवैध रूप से बसाई गई इस बस्ती में म्यांमार और बांग्लादेश से आए घुसपैठिए अवैध रूप से रह रहे हैं। करीब 4 घंटे चली कार्रवाई में 200 से अधिक झुग्गियों को गिरा दिया गया। इस दौरान कुछ मुस्लिम महिलाओं ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद वे पीछे हट गईं।

कहा जा रहा है कि मेवात के कई इलाकों में ये घुसपैठिए अवैध रूप से रह रहे हैं। तावडू के अलावा नूहं, पुन्हाना, पिनगवां, नगीना और फिरोजपुर झिरका में भी ये घुसपैठिए सैकड़ों की संख्या में झोपड़ी बनाकर रह रहे। उनके उपर भी प्रशासन अब कार्रवाई करने की योजना बना रहा है।

इसके साथ ही, आज शुक्रवार होने के कारण नूहं के मुस्लिमों को जुमे की नमाज अपने घरों में पढ़ने के लिए कहा गया है। नूंह के कलेक्टर प्रशांत पंवार और पुलिस अधीक्षक ने उलेमाओं से कहा कि प्रशासन के इस निर्णय का वे सख्ती से पालन कराएँ। इसके साथ ही गुरुग्राम सहित अन्य इलाकों में जुमे की नमाज खुले में न पढ़ने के लिए कहा गया है।

इलाके में तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। हिंसा के चलते 4 जिलों- नूहं, पलवल, फरीदाबाद और गुरुग्राम में हालात तनावपूर्ण हुए हैं। जुमे को देखते हुए मस्जिदों के पास पुलिस बल तैनात किए गए हैं। इन चार जिलों में पैरामिलिट्री फोर्स की 20 कंपनियाँ तैनात की गई हैं।

इसके साथ ही राज्य के 9 जिलों में धारा 144 लागू किया गया है। नूहं, पलवल, फरीदाबाद और गुरुग्राम के सोहना, मानेसर और पटौदी में 5 अगस्त 2023 तक इंटरनेट और SMS सेवा बंद की गई है। हालाँकि, CET स्क्रीनिंग टेस्ट को देखते हुए गुरुवार को दोपहर 1 से 4 बजे तक बैन हटाया गया था।

नूहं में हुई हिंसा में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में होमगार्ड के गुरसेवक और नीरज शामिल हैं। इसके अलावा, नूहं के शक्ति सैनी, पानीपत के अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत, गुरुग्राम के इमाम साद, बादशाहपुर के प्रदीप शर्मा और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं।

इस हिंसा को लेकर पूरे राज्य में पुलिस ने कुल 93 केस दर्ज किए हैं। इनमें अभी तक 186 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूछताछ के लिए 78 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें ज्यादातर की उम्र 19 से 25 साल के बीच है।

पुलिस द्वारा की जा रही पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि हिंसा के बाद कई आरोपित मेवात की पहाड़ियों में, राजस्थान के जयपुर और उदयपुर तथा उत्तर प्रदेश के मेरठ, आगरा और अलीगढ़ में जाकर छिप गए हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दबिश दे रही है। 

हिंसा की जाँच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की 8 टीमें और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के 3 दल बनाए गए हैं। पुलिस जाँच में अब तक सामने आया है कि यह हिंसा सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी।

पुलिस ने सोशल मीडिया पर 2300 से अधिक वीडियो को चिन्हित किया है, जिनके जरिए अफवाह फैला फैलाया गया और हिंसा भड़काई गई। अब पुलिस इन वीडियो के आधार पर भी कार्रवाई करने में जुटी हुई है।


मेवात हिंदू विरोधी दंगा : कांग्रेस विधायक मम्मन खान ने मोनू मानेसर के बहाने साजिश के तहत कराया दंगा

हरियाणा के मेवात-नूंह इलाके में भड़की हिन्दू विरोधी सांप्रदायिक आग ने गुरुग्राम सहित कई इलाकों को अपनी चेपट में ले लिया है। दो समुदायों के बीच टकराव के बाद शुरू हुई हिंसा में जमकर पत्थर चलाए गए। कई गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। इस हिंसा में दो होमगार्ड सहित पांच लोगों की मौत हो गई। वहीं 10 से ज्यादा पुलिसकर्मियों सहित सैकड़ों लोग घायल हो गए। सोमवार (31 जुलाई, 2023) को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की ब्रजमंडल शोभा यात्रा जैसे ही नूंह के झंडा पार्क पहुंची तो पथराव शुरू हो गया। गाड़ियों को आग के हवाले किया गया। जिस तरह से अचानक भीड़ ने हिंसा शुरू की, वो पूरी तरह से सुनियोजित था। इसके पीछे फिरोजपुर झिरका के कांग्रेस विधायक मम्मन खान का हाथ बताया जा रहा है और इसकी गिरफ्तारी की मांग हो रही है। वहीं हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने भी माना है कि हिंसा की साजिश पहले से रची जा रही थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी गुंडे की बात पर एक धार्मिक यात्रा पर हमला हो सकता है? किसी न किसी ने इसकी साजिश रची है।
ऐसे में यह प्रश्न होता है कि अगर हिंसा का आरोपी मोनू मानेसर है, फिर दंगाइयों पर पुलिस कार्यवाही होने पर हरियाणा छोड़ कर क्यों भागे? आखिर इन भगोड़े दंगाइयों को किसने बुलाया और कितने का लेन-देन किसने किया? इनके पास अवैध हथियार कहाँ से आए और किसने सप्लाई किए? जब तक सरकार इन भगोड़े दंगाइयों को पकड़ इन प्रश्नों का जवाब लेकर इनके सरगना/सरगनाओं पर सख्ती से पेश आना होगा। इतना ही नहीं सदन में कांग्रेस विधायक द्वारा धमकी देने पर सदन अध्यक्ष ने क्यों नहीं संज्ञान लिया?
जब तक केंद्र और राज्य सरकारें आगजनी और परतथरबाज़ों पर टिअर गैस छोड़ने की बजाए shaoot at sight के आदेश नहीं होंगे, उपद्रवी उपद्रव करते रहेंगे। 

 हिंसा के लिए किसी न किसी ने प्लानिंग की है- अनिल विज

राज्य के गृहमंत्री अनिल विज ने कहा कि सारी जांच हो जाएगी। उसके बाद पता लगेगा। यह तो निश्चित तौर पर कही जा सकती है और हर व्यक्ति कह रहा है कि इतना बड़ा बवाल एक दिन में नहीं हो सकता। किसी हादसे से नहीं हो सकता। इसके लिए किसी न किसी ने प्लानिंग की है। किसी न किसी ने लोगों को इकट्ठा किया है। अलग-अलग स्ट्रेटजिक प्वाइंट के ऊपर पत्थर इकट्ठे किए गए हैं। गोलियां चलाई गई हैं। हथियार इकट्ठे किए गए हैं। लोग इकट्ठे किए गए हैं। और किसने की है ? कौन है इसके पीछे ? हम उसकी पूरी जांच करेंगे। हम प्रदेश और देश के सामने उसको बेनकाब करेंगे, जिसने ये साजिश रची है।

कांग्रेस विधायक मम्मन खान पर हिंसा की साजिश का आरोप

कांग्रेस विधायक मम्मन खान का हरियाणा विधानसभा में दी गई एक धमकी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें मम्मन खान हाथ में कुछ कागज और तस्वीरें लेते हुए कहता है, “ये मोनू मानेसर कभी अमित शाह, कभी अरुण जेटली के साथ फोटो दिखाता है। क्या डराना चाहता है मेवातियों को कि मैं इतना बड़ा आदमी हूं। अबकी याद रखना ये मेवात आ गया तो प्याज की तरह ना फोड़ी तो हम मेवाती नहीं। इसने बहुत आतंक उठा लिया मेवात में। इसने हमारे तीन लड़कों की जान ले ली।’ मम्मन खान के इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया। मेवात के मुसलमान खुद को गौरक्षक बताने वाले मोनू मानेसर को लेकर आक्रोशित है। मम्मन खान ने  मोनू मानेसर के वीडियो को आधार बनाकर मुस्लिमों को हिंसा के लिए भड़काया। उन्हें हरसंभव मदद करने की बात भी कही। हिंसा से एक दिन पहले मम्मन खान ट्वीट करते हुए कहा था कि वह मेवात में लड़ाई लड़ेंगे।

21-23 जुलाई के बीच बनाई गई थी हमले की योजना

कांग्रेस विधायक के इस बयान से स्पष्ट है कि ब्रजमंडल शोभा यात्रा पर हमले की योजना पहले से बनाई गई थी। अब तक जांच में पता चला है कि योजना 21-23 जुलाई के बीच बनाई गई थी। इसके लिए व्यापक तैयारियां की गई थी। सड़कों पर गैस सिलेंडर की व्यवस्था की गई थी। यात्रा के दो दिन पहले  फेसबुक, ट्विटर और इन्स्टा पर भड़काने वाले बयान पोस्ट किए जा रहे थे। यूट्यूबर भी इसमें सक्रिय थे। यूट्यूब पर एहसान मेवाती पाकिस्तानी ने हिंदुओं को मारने का आह्वान किया था। यहां तक कि इसमें विदेशों से खासकर पाकिस्तान और अमेरिका के मुस्लिम संगठनों के ट्विटर हैंडल से मोनू मनेसर को लेकर पोस्ट शेयर किए जा रहे थे। सोशल मीडिया में मोनू मानेसर और हिन्दुओं को सबक सीखाने की धमकी दी जा रही थी। अब हिंसा के बाद हिन्दुओं को हुए नुकसान और बदला लेने को लेकर जश्न मनाया जा रहा है और हमला करने वालों का समर्थन किया जा रहा है।

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महिलाओं की मांग : मोदी जी हरियाणा को योगीजी जैसा सख्त मुख्यमंत्री चाहिए : ‘हिंदू महिलाओं की इज्ज


महिलाओं की मांग : मोदी जी हरियाणा को योगीजी जैसा सख्त मुख्यमंत्री चाहिए : ‘हिंदू महिलाओं की इज्जत लूटने के लिए रात का इंतजार कर रही थी कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़’

हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर हमले के बाद हरियाणा के नूहं में हिंसा फैल गई थी। 31 जुलाई 2023 को धार्मिक शोभायात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा हमला किया गया, जिसमें कई मौत हो गई और पुलिस सहित दर्जनों लोग घायल हो गए। नूहं का मुस्लिम बहुल इलाका अशांति का केंद्र था, जो धीरे-धीरे राज्य गुरुग्राम और सोहना जैसे अन्य क्षेत्रों तक फैल गया।

इस हिंसा के दौरान कई लोगों ने अपने कटु अनुभवों को साझा किया है। इसी कड़ी में, एक हिंदू महिला ने अपने एक साक्षात्कार में उस दिन की दिल दहला देने वाली घटना को बयान किया है। महिला ने बताया कि कैसे स्त्रियाँ अपनी इज्जत बचाने में कामयाब रहीं।

महिला ने अपने इंटरव्यू में बताया, “जब आसपास की झाड़ियों से गोलियाँ चलने लगीं तो हिंदू भाई बाहर थे। बिजली विभाग द्वारा बिजली काट दी गई। वे (मुस्लिम) हिंदू महिलाओं की इज्जत लूटने (रेप) के लिए सूरज डूबने और रात होने का इंतजार कर रहे थे। ये हम ही जानते हैं कि कैसे हमने अपनी इज्जत बचाई।”

घटना के बारे में बताते हुए हिंदू महिला कई बार रो पड़ी। उसने बताया, “हमने अपने भाइयों को मरते देखा। हम जानते हैं कि हमारे भाइयों को कैसे गोली मारी गई। हमारे पास उनके घावों को ढँकने के लिए पट्टियाँ भी नहीं थीं। इसलिए हमने उन पर अपनी चुन्नी और दुपट्टा बाँध दिया।” हिंदुओं पर की जाने चौतरफा गोली-बारी को याद करके महिला अब भी सिहर उठती है।

महिला ने सवालिया लहजे में आगे कहा, “क्या हम मरने के लिए वहाँ गए थे? क्या हम वहाँ दर्शन नहीं कर सकते? ये लोग (मुस्लिम) अपना जुलूस निकालते हैं। क्या हम में से किसी को उन पर आपत्ति है? हमारे पास पीने का पानी तक नहीं था। हमने शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले जल से अपना गला तर किया।”

महिला ने कहा, “उस दौरान बिजली काट दी गई थी। हम क्या कर सकते थे? वे हिंसा के लिए हम पर आरोप लगा रहे हैं। यदि हम ऐसा करना चाहते तो क्या हम अपने बच्चों को साथ लाते? क्या हम मरने के लिए अपनी माताओं और बुजुर्गों को अपने साथ वहाँ लाएँगे? क्या महिलाओं और बच्चों का हमारे लिए कोई मूल्य नहीं है?”

जीवित बचने के सवाल पर महिला ने बताया, “उस समय तक वहाँ कोई पुलिस नहीं थी। बाद में प्रशासन के पहुँचने के पर हम वहाँ से किसी तरह बच के निकले। हमें अपनी जान बचाने के लिए गाड़ियों के नीचे और खेतों के बीच से रेंगकर निकलना पड़ा। हमें जानवरों की तरह सरकारी बसों में ठूँस दिया गया था।”

उन्होंने कहा, “हमारे जले हुए गाड़ियों के धुएँ से आसमान काला हो गया था। इतना काला कि मौसम ख़राब होने पर भी आसमान में इतना अंधेरा नहीं होता। मैं सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी से हाथ जोड़कर अनुरोध करना चाहती हूँ कि हम 2024 में तभी वोट करेंगे, जब आप मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बर्खास्त करेंगे।”

महिला ने आगे कहा, “हम भाजपा को तभी वोट देंगे, जब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे योग्य और कुशल किसी व्यक्ति को यहाँ रखेंगे। वर्तमान मुख्यमंत्री 2000-2500 महिलाओं को नहीं बचा सके तो दूसरों को कैसे बचाएँगे? हमने सोमवार का व्रत किया था और पानी भी नहीं पी थी। हम वहाँ बेहोश हो रहे थे।”

कट्टरपंथियों ने पानीपत बजरंग दल के प्रखंड संयोजक अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत की हत्या कर दी। अभिषेक को पहले गोली मारी गई, फिर उनका गला काट दिया गया था। अभिषेक की बहादुरी को लेकर एक अन्य महिला ने कहा था कि वह महिलाओं को बचाने के खातिर अपनी जान गँवा दी।

पानीपत की एक महिला ने मीडिया से बात करते हुए खुद को हिंसा की भुक्तभोगी बताया। महिला ने कहा, “उन्होंने (मुस्लिम भीड़ ने) हमारे बस पर पथराव किया। हमारे बच्चे हमें बचाने के लिए नीचे उतरे। निहत्थे होने के बावजूद भी उन्होंने (अभिषेक चौहान ने) हमें बचाने की पूरी कोशिश की। वो डरे नहीं कि उनके हाथ में हथियार नहीं है।”

महिला ने आगे कहा, “बस में सारी औरतें और बच्चे थे। उन्होंने (अभिषेक राजपूत) ने बहादुरी से मुकाबला किया। हमारा बच्चा बलिदान हो गया। हमें गर्व है कि ये बच्चा हमारे पानीपत का था।” लोगों ने अभिषेक के लिए बलिदानी का दर्जा देने की माँग की।

मीडिया में मुस्लिमों और उनके सेक्युलर सहयोगियों ने हिंसा के लिए बार-बार बजरंग दल के सदस्य मोनू मानेसर उर्फ ​​मोहित यादव को दोषी ठहराया। मोनू मानेसर ने एक वीडियो संदेश जारी करके साफ कहा कि वह जुलूस में मौजूद नहीं थे। उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

वहीं, VHP ने स्थानीय कॉन्ग्रेस विधायक मम्मन खान और आफताब पर हिंसा के उकसाने का आरोप लगाया और इनके द्वारा किए गए कई ट्वीट को साझा किया। विश्व हिंदू परिषद के महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि मामन खाँ ने चार महीने पहले विधानसभा में कहा था कि किसी की हिम्मत है तो मेवात में घुसकर दिखा दे।

वीएचपी महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि एक और कॉन्ग्रेसी नेता हैं आफताब साहब। उन्होंने कहा कि अगर गाँव में पुलिस वाले आएँ तो उनके हाथ-पैर तोड़ दो। उनकी चिंदी-चिंदी कर दो। उन्होंने कहा कि आफताब मेवात में ही रहते हैं।

हरियाणा: नूहं: मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक कांग्रेस हिन्दुओं को बता रही दंगाई

नूहं हिंसा पर पत्रकार पुनीत ने हिन्दुओं के खिलाफ फैलाया झूठा (चित्र साभार- BBC)
हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिन्दुओं के ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। हिंसा से संबंधित ‘मिनी पाकिस्तान’ कहे जाने वाले मेवात के नूहं से कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इस बीच कट्टरपंथी मुस्लिमों के बचाव में कुख्यात गिरोह भी सक्रिय हो चुका है।

यह गैंग हिन्दुओं को ही हमलावर और मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने के लिए साजिशें रचना शुरू कर चुका है। इन्हीं में से एक कथित पत्रकार पुनीत कुमार सिंह भी हैं। पुनीत ‘बोलता हिंदुस्तान’ नाम का प्रोपोगेंडा पोर्टल चलाते हैं। उन्होंने कई फेक न्यूज फैलाने की कोशिश की।

पुनीत ने मंगलवार (1 अगस्त 2023) को एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने बीबीसी की ग्राउंड रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि विकास गर्ग नाम के व्यक्ति की दुकान में तोड़फोड़ हुई थी। पुनीत ने आरोप लगाया कि दुकान को मुस्लिमों की दुकान समझकर हिन्दू संगठनों के सदस्यों इसमें तोड़-फोड़ की।

पुनित ने लिखा, “नूहं में हिंदू ‘विकास गर्ग’ की दुकान को मुस्लिम की दुकान समझकर भगवा गुंडों ने तहस-नहस कर दिया।” इसी के साथ पुनीत ने मृत शायर राहत इंदौरी के एक ‘शेर’ की कुछ पंक्तियाँ – ‘लगेगी आग तो आएँगे घर कई जद में, यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है।’ भी लिखा।

                                         पुनीत कुमार सिंह का वो ट्वीट जो अब डिलीट कर लिया गया है

कुल मिलाकर पुनीत यह कहना चाहते थे कि नूहं के दंगे हिंदुओं की वजह से हुए और हिन्दू ही इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। अब डिलीट हो चुके ट्वीट में इस कथित पत्रकार ने नूहं से बीबीसी की एक वीडियो रिपोर्ट भी संलग्न की थी।

इस वीडियो में क्षतिग्रस्त दुकान के मालिक विकास गर्ग ने बीबीसी को बताया कि उनकी ’24×7 बेकरी एंड कैफे’ नाम की दुकान में सोमवार को तोड़फोड़ की गई थी। विकास ने घटना का समय सोमवार की दोपहर 3:30 बजे से 3:45 बजे बताया।

बीबीसी की रिपोर्ट में विकास ने बताया, “जब यात्रा गुजर रही थी तो यहाँ दंगा भड़क गया। मैं अपनी दुकान में ताला लगाकर चला गया था। इस दौरान मेरी दुकान लूट ली गई। दुकान का काउंटर, शीशे, LED और 7 फ्रिज क्षतिग्रस्त हो गए हैं। दुकान में रखे लगभग 7.5 लाख रुपए नकद रखे हुए थे। सारा सामान चुरा लिया गया है।”

विकास ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने रेस्तरां को बनाने के लिए कई सालों की कड़ी मेहनत की थी। उनके इस नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती है। इसी वीडियो के आधार पर पुनीत ने विकास गर्ग की दुकान को हिन्दू संगठन के सदस्यों द्वारा लूटे जाने का दावा किया।

पुनित ने अपने ट्वीट में हिंदुओं के लिए ‘भगवा गुंडों’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया। हालाँकि, पुनीत का ये दावा फर्जी निकला। विकास की दुकान के बाहर लगे बोर्ड पर दुकान के मालिकों के नाम स्पष्ट रूप से विकास गर्ग और सचिन गर्ग लिखे हुए थे। इसलिए मुस्लिम की दुकान समझकर हिंदुओं को तोड़-फोड़ वाला नैरेटिव फिट नहीं बैठता।

पुनीत ने अपने खास एजेंडे को फैलाने की कोशिश की। पोल खुलने और कई ट्विटर यूजर्स द्वारा आइना दिखाने के बाद फर्जी न्यूज़ विक्रेता ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। एक अन्य पत्रकार आदित्य राज कौल ने पुनीत कुमार सिंह के डिलीट ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए गुरुग्राम में लोगों से फर्जी खबर पर ध्यान न देने की अपील की है।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने लिखा, “गुरुग्राम में लोगों को फर्जी खबरों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। फर्जी सूचनाओं पर आधारित कुछ ट्वीट्स से हरियाणा में दहशत फैल रही है। ट्वीट डिलीट कर दिया गया है, इसके बावजूद इसे फॉरवर्ड किया जा रहा है। आशा है कि पुलिस मेवात हिंसा को गुरुग्राम तक फैलाने की साजिश की जाँच करेगी। सतर्क रहें। घबराएँ नहीं।”

इधर फजीहत होने के बाद पुनीत ने आधी रात को अपनी सफाई में एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने कहा कि जानकारी पता होने के बाद ट्वीट डिलीट कर लिया गया है। पुनीत का कहना है कि उन्हें हिन्दुओं द्वारा हिन्दू की दुकान लूटे जाने की जानकारी एक विश्वसनीय पत्रकार ने दी थी।

फर्जी अफवाह वाला ट्वीट डिलीट करने के बाद भी पुनीत खुद को एक जिम्मेदार नागरिक बता रहे हैं। लोगों के बीच भ्रामक सूचना और समाज में नफरत फैलाने के बावजूद पुनीत ने माफ़ी नहीं माँगी और बेशर्मी पर अड़े रहे।

इसके उलट, वह दूसरे पत्रकारों पर फर्जी न्यूज़ चलाने और पैसे की उगाही के आरोप लगाते रहे। अपने विवादास्पद ट्वीट में लिखी गई राहत इंदौरी की लाइनों को भी पुनीत ने अहिंसक बताया। फिलहाल सोशल मीडिया पर कथित पत्रकार पुनीत की गिरफ्तारी की माँग उठ रही है।

इस पत्रकार को लोग कॉन्ग्रेस के फंड पर पलने वाला पत्रकार कहते हैं।


सोरेस की टूलकिट की आरफा, जुबैर, लल्लनटॉप ऐसे बचा रहे इस्लामी कट्टरपंथियों को: FIR से लिबरल गैंग बेनकाब, पत्थरबाजों पर Shoot at sight के आदेश कब ?

मुस्लिम दंगाइयों को कवर देने में लगे पड़े हैं लिबरल गैंग
हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। करीब 800-900 हथियारबंद इस्लामवादियों ने मंदिर में जल चढ़ाने आए हजारों भक्तों पर हमला किया। इससे मंदिर के कुछ हिस्से छतिग्रस्त हो गए। हालाँकि वामपंथी लिबरल कट्टरपंथियों को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

अब चर्चा यह है कि आखिर मुंह ढककर या खुले मुंह पत्थरबाज़ी करने वालों पर जब तक Shoot at sight के आदेश नहीं होंगे, टूलकिट वाले अशांति फैलाते रहेंगे। इसमें शामिल चाहे बच्चे हो, महिलाएं हो या फिर व्यस्क किसी को नहीं बख्शना चाहिए। जब तक इस तरह के कानून नहीं बनेंगे, दंगाई अशांति फैलाते रहेंगे। दूसरे, यह कि पत्थर सप्लाई करने वाला कौन है और इस काम के लिए कितने पैसे मिले और किसने दिए? 

इस्लामवादियों के काले चेहरे को छिपाने में ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद ज़ुबैर का नाम न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। जुबैर ने ‘लल्लनटॉप’ की मंदिर के पुजारी के बयान वाली रिपोर्ट से 21 सेकंड की क्लिप के जरिए यह बताने की कोशिश की कि दंगाइयों ने मंदिर पर हमला नहीं किया था। हालाँकि इस मामले में ड्यूटी मजिस्ट्रेट मुकुल कथूरिया की शिकायत पर दर्ज FIR कुछ और ही कहती है।

इस्लामी भीड़ द्वारा मंदिर पर पथराव, गोलियाँ: FIR

नूहं हिंसा को लेकर दर्ज की गई कई एफआईआर ऑपइंडिया के पास है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात सिंचाई और जल संसाधन विभाग, हरियाणा के कार्यकारी इंजीनियर मुकुल कथूरिया की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई एफआईआर में से एक में साफ तौर पर कहा गया है कि 800-900 इस्लामवादियों ने मंदिर में मौजूद भक्तों पर पथराव किया और गोलियाँ चलाईं। हमले में मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया।
हमले के समय डीएम कथूरिया, उनके ड्राइवर खुर्शीद, इंस्पेक्टर राजबाला और अन्य लोग जलाभिषेक यात्रा के दौरान ड्यूटी के लिए नल्हड़ मंदिर में तैनात थे। जब भक्त मंदिर में भगवान शिव की पूजा कर रहे थे, तभी स्थानीय मेवाती और राजस्थानी बोलने वाली इस्लामवादियों की भीड़ प्लानिंग के हिसाब से पास के खेतों और पहाड़ों से मंदिर की ओर आई।
(साभार:हरियाणा पुलिस)
कथूरिया ने दर्ज कराया है कि दंगाइयों के हाथों में डंडे, पत्थर और अवैध हथियार थे। वे अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगा रहे थे। भीड़ ने मंदिर में पहुँचकर पूजा में खलल डालने के लिए पथराव और गोलीबारी शुरू कर दी। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर उन्होंने स्थिति को शांत करने की कोशिश की और इस्लामिक भीड़ से पीछे हटने का अनुरोध किया। लेकिन दंगाइयों ने उनकी बात नहीं सुनी। वे अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते हुए मंदिर के करीब जाने लगे। इस दौरान फिर एक बार हिंदुओं को निशाना बनाकर फायरिंग की।
यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 323, 332, 353, 186, 188, 295 ए, 153 ए, 452, 427, 307 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत दर्ज की गई। एफआईआर में आदिल, तामिल, अरसाद, अजहरुद्दीन, कासिर, सकील, जुनैद, सलामुद्दीन, इकबाल, आजाद, इलियास, अकबर, राहुल पुत्र जूना, सलीम, इक्का उर्फ काला, तौहीद, याहाय, जावेद, शाहरुख, हारीस, अहमद, आसिफ, शोएब समेत कई दंगाइयों को नामजद किया गया।

वामपंथियों और लिबरलों का दावा: मंदिर पर हमला हुआ ही नहीं

मंदिर में हमले की खबरों के बीच ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने ‘लल्लनटॉप’ की रिपोर्ट की 21 सेकंड की क्लिप को रीट्वीट किया। इस क्लिप में मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा ने कहा कि हमला मंदिर के करीब नहीं हुआ था।
दिलचस्प बात यह है कि जब ऑपइंडिया ने 4 मिनट से अधिक के वीडियो को देखा तो सामने आया कि पुजारी ने साफ तौर पर कहा था कि हमले के दौरान प्रशासन ने उन्हें बाहर आने से मना किया था। इसलिए वह बाहर नहीं आए। उन्होंने यह भी कहा था कि मंदिर के अंदर तक उन्होंने आवाजें सुनी थी। लेकिन हमला मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर हुआ। पुजारी के ये दावे किसी भी तरह से मेल नहीं खाते।
मंदिर के पुजारी ने जो कहा, उसमें से 3 मूल बातों को पढ़िए:
  1. पुजारी ने यह भी कहा, “मुझे इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है क्योंकि हमें अंदर रहने के लिए कहा गया था। श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता था। मैं बाहर नहीं गया।”
  2. पहाड़ों से हो रही पत्थरबाजी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने फिर कहा, “मैं फिर कहना चाहता हूँ कि मैं बाहर नहीं आया। मैं एक पुजारी हूँ। हम अंदर ही रहते हैं।”
  3. यह पूछे जाने पर कि उन्हें अंदर रहने के लिए क्यों कहा गया था, उन्होंने बताया, “लगभग 4,000 लोग अंदर फँसे हुए थे। इनमें महिलाएँ और लड़कियाँ भी शामिल थीं। अंदर रहना ही बेहतर था। मंदिर के अंदर कुछ नहीं हुआ। मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर जो कुछ भी हुआ हो।”
‘लल्लनटॉप’ के एक अन्य वीडियो में, रिपोर्टर ने मंदिर के पास मचाए गए आतंक को दिखाया है। जब वह जले हुए वाहनों, पथराव और टूटी हुई काँच की बोतलों के निशान दिखाते हुए सड़क पर जा रहे थे, तो यह स्पष्ट था कि दंगे मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर नहीं हुए। यही नहीं, इस वीडियो में ‘लल्लनटॉप’ ने मंदिर में भंडारे के लिए प्रसाद बनाने आए लोगों से भी बात की। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वे घण्टों तक मंदिर में ही फँसे थे। इसके बाद सुरक्षा बलों द्वारा उन्हें बचाया गया।
 
‘द वायर’ की संदिग्ध पत्रकार आरफ़ा ख़ानम शेरवानी भी कहाँ पीछे रहने वाली थीं। आरफा ने कहा कि हरियाणा के गृह मंत्री कह रहे हैं कि मंदिर में भक्तों को बंधक बनाया गया था। लेकिन पुजारी दावों का खंडन कर रहे हैं।
‘द वायर’ ने पुजारी के हवाले से कहा, “लोगों को बंधक क्या बनाएँगे? वे परमात्मा की शरण में थे। अचानक पता चला की माहौल खराब है। इन लोगों को बंधक कैसे बनाया जा सकता है? वे सर्वशक्तिमान की शरण में थे। लेकिन उन्हें अचानक पता चला कि बाहर की स्थिति अच्छी नहीं है। चूँकि बाहर की स्थिति खराब हो गई थी, इसलिए लोग अंदर फँस गए।”
वामपंथी मीडिया रिपोर्टिंग को अगर हम फिर से पढ़ें तो पुजारी ने कहा है कि लोग मंदिर के अंदर फँसे हुए थे क्योंकि बाहर की स्थिति खराब थी। यह तो ठीक ऐसा ही हुआ कि लुटेरों द्वारा हमला किए गए बैंक में लोगों को ‘बंधक’ नहीं बनाया गया था, बल्कि वे सिर्फ ‘अंदर फँस गए’ थे।
दूसरी और महत्वपूर्ण बात – किसी भी 21 सेकंड के वीडियो के जरिए मेवात में हुई हिंदू विरोधी हिंसा को नहीं दिखाया जा सकता। पूरे वीडियो को देखें तो इस्लामिक भीड़ द्वारा मचाए गए आतंक से हुए नुकसान का जिक्र करते हुए रिपोर्टर ने कहा है कि हमला प्री-प्लान्ड लगता है। मतलब साफ है कि इस्लामिक भीड़ ने हमला किया था। लेकिन उन्हें बचाने की जल्दी में ज़ुबैर, आरफा जैसे लोगों ने पूरी बात पर ध्यान नहीं दिया… क्योंकि इन्हें फैलाना है प्रोपेगेंडा, मुस्लिमों को दिखाना है पीड़ित।

हरियाणा : नूंह: ‘6 महीने की साजिश, 14 साल के बच्चे भी चला रहे थे हथियार’: श्रद्धालुओं ने बताया AK-47 से बरसा रहे थे गोलियाँ

                                    6 माह से रची जा रही थी हमले की साजिश (चित्र साभार- ABP न्यूज़)
हरियाणा के मेवात (Mewat, Haryana) में सोमवार (31 जुलाई 2023) को भारी हिंसा हुई। हिंसा में 2 होमगार्ड जवानों और एक नागरिक की हत्या कर दी गई। घायलों की संख्या 60 से अधिक बताई जा रही है, जिनमें दर्जनों पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। पुलिस सहित बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा में शामिल लोगों के 30 से अधिक वाहनों को या तो तोड़ डाला गया है या जला दिया गया।

तनाव को देखते हुए नूहं, गुरुग्राम, रेवाड़ी और फरीदाबाद में धारा 144 लागू कर दी गई है। स्कूल-कॉलेजों के साथ-साथ इंटरनेट को भी बंद कर दिया गया है। दंगाइयों के बीच फँसे लोगों को बचाकर नूहं पुलिस लाइन लाया गया है। बचाये गए लोगों का दावा है कि हिंसा की साजिश कम-से-कम 6 महीना पहले से रची जा रही थी।

ABP न्यूज़ ने हिन्दू संगठन से जुड़े उन लोगों का इंटरव्यू लिया है, जिन्हें नल्हड शिव मंदिर से बचाकर लाया गया है। बचाए गए लोगों में एक साधु के वेश वाले व्यक्ति ने बताया, “हिन्दुओं की पहली बस, जो मंदिर में जल चढ़ाकर गई, उसे 1 किलोमीटर बाद जला दिया गया। इसके बाद 14-15 और गाड़ियों को जलाया गया।”

पीड़ित ने आगे बताया कि मामले की जानकारी होने पर कुछ हिन्दू घटना के बारे में जानने गए तो उनके वाहनों को भी जला दिया गया। पीड़ित ने कहा कि उन पर हमले के लिए आतंकवादियों द्वारा AK 47 का इस्तेमाल किया गया था। एक अन्य पीड़ित ने कहा, “प्राचीन शिव मंदिर 3 तरफ से पहाड़ों से घिरा है। तीनों तरफ से गोलियाँ चलीं।”

आरोप है कि पुलिस ने पहुँचने के बाद जवाबी फायरिंग की, लेकिन पुलिस पर भी लगभग एक घण्टे तक गोलियाँ बरसाईं गईं। लोगों ने बताया कि हमले के दौरान मंदिर में फँसे श्रद्धालुओं की संख्या 6 से 7 हजार के बीच थी। पूरी बृजमंडल यात्रा में अनुमानित लोगों की तादाद 25 हजार बताई गई है। लोगों ने बताया कि वो मंदिर के अंदर लगभग 7 घंटे तक फँसे रहे।

बचाकर लाए गए एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, “14 साल के लड़के भी असलहा चला रहे थे। ये प्लानिंग 6 महीने से की गई थी।” लोगों का आरोप है कि पहाड़ों से चलाई जा रही गोलियाँ किसी के पेट, किसी के जाँघ और किसी के माथे से छूकर निकली है।