Showing posts with label AltNews. Show all posts
Showing posts with label AltNews. Show all posts

प्रकाश राज और RJ सायमा सहित पूरा गिरोह उतरा कानून का उल्लंघन करने वाले मोहम्मद ज़ुबैर के समर्थन में: मासूम बच्चों का वीडियो वायरल कर किया था

                     आरजे सायमा, मोहम्मद जुबैर और प्रकाश राज (दाएँ से बाएँ) (फोटो साभार :                                                                                                                        ट्विटर__sayema/starsunfolded/IMBD)
फेक न्यूज की फैक्ट्री चलाने वाले कथित फैक्ट चेकर जुबैर अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद से उसकी गिरफ्तारी की माँग तेज हो गई है। आम लोग जहां एक पीड़ित बच्चे का वीडियो शेयर कर उसकी पहचान उजागर करने वाले और वीडियो को एडिट कर समाज में जहर घोलने वाले जुबैर की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं, तो पूरा वामपंथी गिरोह उसके बचाव में खुलकर उतर आया है। इस लिस्ट में प्रकाश राज, आरजे सायमा, सीमा चिश्ती जैसे नाम हैं।

सबसे पहले पढ़िए सायमा का ट्वीट, जिसने कौशिक राज के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए यूपी पुलिस को गलत ठहरा दिया। सायमा ने लिखा, “क्या समय आ गया है, तृप्ति त्यागी नाबालिग के साथ अपराध करने के बाद भी खूब सपोर्ट पा रही है, तो इस खबर को सामने लाने वाले पर ही पुलिस ‘अटैक’ कर रही है।” सायमा ने ‘आई स्टैंड विद जुबैर’ का हैशटैग भी आगे बढ़ाया है।

वहीं, वामपंथी मीडिया संस्थान द वायर की संपादक सीमा चिश्ती को जुबैर इसलिए बेचारे लगने लगे, क्योंकि जुबैर ने आग लगाकर पानी डाल दिया था। उसका एडिट किया हुआ वीडियो सारी दुनिया में घूमने के बाद। अब सीमा चिश्ती यूपी पुलिस पर ही सवाल उठा रही हैं, पढ़िए ट्वीट…

हालाँकि प्रकाश राज के ट्वीट करते ही लोगों ने जम कर लताड़ लगाई। प्रकाश राज ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि वो जुबैर का समर्थन करने के लिए इस हैशटैग को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने लोगों से भी आई स्टैंड विद जुबैर हैशटैग के साथ ट्वीट करने की अपील की।

प्रकाश राज कई मामलों में बुरी तरह से एक्सपोज हो चुके हैं, जो एक्स (पूर्व में ट्विटर) की आम जनता भी उन्हें उसी तरह आड़े हाथों लेती है। प्रकाश राज के ट्वीट के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) यूजर्स ने प्रकाश राज को उसकी असल औकात याद दिला ली। देखिए कुछ ट्वीट्स…

दिनेश भट्ट नाम के एक यूजर ने प्रकाश राज पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने प्रकाश राज को रिप्लाई देते हुए लिखा, “एक ऐसा मूर्ख जो अपनी मक्कारी भरी हरकतों से आज तक एक निम्न स्तरीय जंतु की तरह रेंग रहा है, जिसका मन मस्तिष्क घटियापन से भरा हुआ है, वो एक ऐसे बेयर रूपी मक्कार को सहारा देकर खड़े होने की बात कर रहा है, पहले तुम मेरे खड़े हुए कड़क जंतु का सहारा लेकर अपने पृष्ठ भाग को रख कर बैठ जाओ, तुम्हारे पृष्ठ भाग की खुजली के साथ साथ तुम्हारी मानसिक खुजली भी दूर हो जाएगी।।”

अनूप रावत लिखते हैं, “फॉर्म भरते वक्त फादर वाली जगह पर अब्दुल तो नहीं लिखते हो?”

जॉन कबीर एक तस्वीर के माध्यम से बोल रहे हैं कि तुम कुछ भी करो, हमें क्या मतलब है।

योगी आदित्यनाथ नाम से बने एक पेरोडी अकाउंट से अलग ही वीडियो शेयर किया गया है। कैप्शन में उस वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की हालत की तुलना प्रकाश राज और जुबैर से की गई है।

मोहम्मद ज़ुबैर ने वीडियो के जरिए फैलाया था प्रोपेगंडा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर पुलिस थाने में AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर पर FIR दर्ज की है। ये मामला खुब्बापुर गाँव स्थित ‘नेहा पब्लिक स्कूल’ के वायरल वीडियो से जुड़ा है। वीडियो में शिक्षिका तृप्ता त्यागी बैठी हुई दिख रही है। साथ ही एक मुस्लिम बच्चे को दूसरे बच्चों से पिटवाया जाता है। वीडियो उस मुस्लिम बच्चे के चचेरे बड़े भाई ने ही बनाया था। वीडियो में वो हँसता हुआ सुनाई दे रहा है। वही शिक्षा के पास अपने भाई की शिकायत लेकर आया था।

वहीं मोहम्मद ज़ुबैर ने इस मामले में वीडियो वायरल किया था, लेकिन बच्चों के चेहरों को ब्लर नहीं किया था। इस FIR में बताया गया है कि AltNews के पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा ‘किशोर न्याय अधिनियम’ का उल्लंघन करते हुए बच्चे की पहचान उजागर की गई है। इसके लिए उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की माँग की गई है। ये FIR सोमवार (28 अगस्त, 2023) को दर्ज की गई है। मोहम्मद ज़ुबैर ने बाद में इस वीडियो को डिलीट कर लिया था, लेकिन माफ़ी तक नहीं माँगी थी।

सोरेस की टूलकिट की आरफा, जुबैर, लल्लनटॉप ऐसे बचा रहे इस्लामी कट्टरपंथियों को: FIR से लिबरल गैंग बेनकाब, पत्थरबाजों पर Shoot at sight के आदेश कब ?

मुस्लिम दंगाइयों को कवर देने में लगे पड़े हैं लिबरल गैंग
हरियाणा के मेवात के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। करीब 800-900 हथियारबंद इस्लामवादियों ने मंदिर में जल चढ़ाने आए हजारों भक्तों पर हमला किया। इससे मंदिर के कुछ हिस्से छतिग्रस्त हो गए। हालाँकि वामपंथी लिबरल कट्टरपंथियों को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

अब चर्चा यह है कि आखिर मुंह ढककर या खुले मुंह पत्थरबाज़ी करने वालों पर जब तक Shoot at sight के आदेश नहीं होंगे, टूलकिट वाले अशांति फैलाते रहेंगे। इसमें शामिल चाहे बच्चे हो, महिलाएं हो या फिर व्यस्क किसी को नहीं बख्शना चाहिए। जब तक इस तरह के कानून नहीं बनेंगे, दंगाई अशांति फैलाते रहेंगे। दूसरे, यह कि पत्थर सप्लाई करने वाला कौन है और इस काम के लिए कितने पैसे मिले और किसने दिए? 

इस्लामवादियों के काले चेहरे को छिपाने में ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद ज़ुबैर का नाम न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। जुबैर ने ‘लल्लनटॉप’ की मंदिर के पुजारी के बयान वाली रिपोर्ट से 21 सेकंड की क्लिप के जरिए यह बताने की कोशिश की कि दंगाइयों ने मंदिर पर हमला नहीं किया था। हालाँकि इस मामले में ड्यूटी मजिस्ट्रेट मुकुल कथूरिया की शिकायत पर दर्ज FIR कुछ और ही कहती है।

इस्लामी भीड़ द्वारा मंदिर पर पथराव, गोलियाँ: FIR

नूहं हिंसा को लेकर दर्ज की गई कई एफआईआर ऑपइंडिया के पास है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात सिंचाई और जल संसाधन विभाग, हरियाणा के कार्यकारी इंजीनियर मुकुल कथूरिया की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई एफआईआर में से एक में साफ तौर पर कहा गया है कि 800-900 इस्लामवादियों ने मंदिर में मौजूद भक्तों पर पथराव किया और गोलियाँ चलाईं। हमले में मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया।
हमले के समय डीएम कथूरिया, उनके ड्राइवर खुर्शीद, इंस्पेक्टर राजबाला और अन्य लोग जलाभिषेक यात्रा के दौरान ड्यूटी के लिए नल्हड़ मंदिर में तैनात थे। जब भक्त मंदिर में भगवान शिव की पूजा कर रहे थे, तभी स्थानीय मेवाती और राजस्थानी बोलने वाली इस्लामवादियों की भीड़ प्लानिंग के हिसाब से पास के खेतों और पहाड़ों से मंदिर की ओर आई।
(साभार:हरियाणा पुलिस)
कथूरिया ने दर्ज कराया है कि दंगाइयों के हाथों में डंडे, पत्थर और अवैध हथियार थे। वे अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगा रहे थे। भीड़ ने मंदिर में पहुँचकर पूजा में खलल डालने के लिए पथराव और गोलीबारी शुरू कर दी। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर उन्होंने स्थिति को शांत करने की कोशिश की और इस्लामिक भीड़ से पीछे हटने का अनुरोध किया। लेकिन दंगाइयों ने उनकी बात नहीं सुनी। वे अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते हुए मंदिर के करीब जाने लगे। इस दौरान फिर एक बार हिंदुओं को निशाना बनाकर फायरिंग की।
यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 323, 332, 353, 186, 188, 295 ए, 153 ए, 452, 427, 307 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत दर्ज की गई। एफआईआर में आदिल, तामिल, अरसाद, अजहरुद्दीन, कासिर, सकील, जुनैद, सलामुद्दीन, इकबाल, आजाद, इलियास, अकबर, राहुल पुत्र जूना, सलीम, इक्का उर्फ काला, तौहीद, याहाय, जावेद, शाहरुख, हारीस, अहमद, आसिफ, शोएब समेत कई दंगाइयों को नामजद किया गया।

वामपंथियों और लिबरलों का दावा: मंदिर पर हमला हुआ ही नहीं

मंदिर में हमले की खबरों के बीच ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने ‘लल्लनटॉप’ की रिपोर्ट की 21 सेकंड की क्लिप को रीट्वीट किया। इस क्लिप में मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा ने कहा कि हमला मंदिर के करीब नहीं हुआ था।
दिलचस्प बात यह है कि जब ऑपइंडिया ने 4 मिनट से अधिक के वीडियो को देखा तो सामने आया कि पुजारी ने साफ तौर पर कहा था कि हमले के दौरान प्रशासन ने उन्हें बाहर आने से मना किया था। इसलिए वह बाहर नहीं आए। उन्होंने यह भी कहा था कि मंदिर के अंदर तक उन्होंने आवाजें सुनी थी। लेकिन हमला मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर हुआ। पुजारी के ये दावे किसी भी तरह से मेल नहीं खाते।
मंदिर के पुजारी ने जो कहा, उसमें से 3 मूल बातों को पढ़िए:
  1. पुजारी ने यह भी कहा, “मुझे इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है क्योंकि हमें अंदर रहने के लिए कहा गया था। श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता था। मैं बाहर नहीं गया।”
  2. पहाड़ों से हो रही पत्थरबाजी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने फिर कहा, “मैं फिर कहना चाहता हूँ कि मैं बाहर नहीं आया। मैं एक पुजारी हूँ। हम अंदर ही रहते हैं।”
  3. यह पूछे जाने पर कि उन्हें अंदर रहने के लिए क्यों कहा गया था, उन्होंने बताया, “लगभग 4,000 लोग अंदर फँसे हुए थे। इनमें महिलाएँ और लड़कियाँ भी शामिल थीं। अंदर रहना ही बेहतर था। मंदिर के अंदर कुछ नहीं हुआ। मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर जो कुछ भी हुआ हो।”
‘लल्लनटॉप’ के एक अन्य वीडियो में, रिपोर्टर ने मंदिर के पास मचाए गए आतंक को दिखाया है। जब वह जले हुए वाहनों, पथराव और टूटी हुई काँच की बोतलों के निशान दिखाते हुए सड़क पर जा रहे थे, तो यह स्पष्ट था कि दंगे मंदिर से एक-डेढ़ किलोमीटर दूर नहीं हुए। यही नहीं, इस वीडियो में ‘लल्लनटॉप’ ने मंदिर में भंडारे के लिए प्रसाद बनाने आए लोगों से भी बात की। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वे घण्टों तक मंदिर में ही फँसे थे। इसके बाद सुरक्षा बलों द्वारा उन्हें बचाया गया।
 
‘द वायर’ की संदिग्ध पत्रकार आरफ़ा ख़ानम शेरवानी भी कहाँ पीछे रहने वाली थीं। आरफा ने कहा कि हरियाणा के गृह मंत्री कह रहे हैं कि मंदिर में भक्तों को बंधक बनाया गया था। लेकिन पुजारी दावों का खंडन कर रहे हैं।
‘द वायर’ ने पुजारी के हवाले से कहा, “लोगों को बंधक क्या बनाएँगे? वे परमात्मा की शरण में थे। अचानक पता चला की माहौल खराब है। इन लोगों को बंधक कैसे बनाया जा सकता है? वे सर्वशक्तिमान की शरण में थे। लेकिन उन्हें अचानक पता चला कि बाहर की स्थिति अच्छी नहीं है। चूँकि बाहर की स्थिति खराब हो गई थी, इसलिए लोग अंदर फँस गए।”
वामपंथी मीडिया रिपोर्टिंग को अगर हम फिर से पढ़ें तो पुजारी ने कहा है कि लोग मंदिर के अंदर फँसे हुए थे क्योंकि बाहर की स्थिति खराब थी। यह तो ठीक ऐसा ही हुआ कि लुटेरों द्वारा हमला किए गए बैंक में लोगों को ‘बंधक’ नहीं बनाया गया था, बल्कि वे सिर्फ ‘अंदर फँस गए’ थे।
दूसरी और महत्वपूर्ण बात – किसी भी 21 सेकंड के वीडियो के जरिए मेवात में हुई हिंदू विरोधी हिंसा को नहीं दिखाया जा सकता। पूरे वीडियो को देखें तो इस्लामिक भीड़ द्वारा मचाए गए आतंक से हुए नुकसान का जिक्र करते हुए रिपोर्टर ने कहा है कि हमला प्री-प्लान्ड लगता है। मतलब साफ है कि इस्लामिक भीड़ ने हमला किया था। लेकिन उन्हें बचाने की जल्दी में ज़ुबैर, आरफा जैसे लोगों ने पूरी बात पर ध्यान नहीं दिया… क्योंकि इन्हें फैलाना है प्रोपेगेंडा, मुस्लिमों को दिखाना है पीड़ित।

‘मुस्लिम को पीटा, पैर चाटने को मजबूर किया’: एक बार फिर झूठ फैलाता पकड़ाया मोहम्मद जुबैर

मोहम्मद जुबैर (साभार: सोशल मीडिया/एशियानेट)
प्रोपगैंडा वेबसाइट ALTNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) झूठ फैलाकर लोगों को भड़काने के लिए कुख्यात है। नूपुर शर्मा मामले में किस तरह मामले को तूल दिया और उसके कारण कन्हैया लाल जैसे लोगों की गला काट दी गई, इसे पूरी दुनिया में देखी। अब एक आपराधिक मामले को वह सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।

पुलिस द्वारा मामले में बयान देने के बावजूद अपने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर झूठ फैला रहा है और दो समुदायों के बीच आग लगाकर एक बार फिर से अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है। इसको लेकर सोशल मीडिया जुबैर की जमकर आलोचना हो रही है और पुलिस से हस्तक्षेप करने की माँग की जा रही है। क्योकि अगर इसी तरह की हरकत किसी हिन्दू द्वारा की जाने पर क्या पुलिस चुप रहती? 

दरअसल, मोहम्मद जुबैर ने शनिवार (8 जुलाई 2023) को एक वीडियो ट्वीट किया। वीडियो को ट्वीट करते हुए जुबैर ने लिखा, “मध्य प्रदेश के ग्वालियर का वीडियो। इसमें गोलू गुर्जर और उसके दोस्तों को मोहसिन को चप्पलों से पीटते हुए और गाली देते हुए पैरों को चाटने के लिए विवश करते हुए देखा जा सकता है।”

इस वीडियो को मोहम्मद जुबैर ने 8 जुलाई की सुबह 11:42 बजे पोस्ट किया था। इस वीडियो को 13 लाख लोगों ने देखा और 16.5 हजार लोगों ने लाइक किया। इसके बाद ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक ने 2:25 पर प्रतिक्रिया दी। इस प्रतिक्रिया को मोहम्मद जुबैर ने 3:56 बजे शेयर किया।

ग्वालियर एसपी ने पुलिस का जो बयान शेयर किया, उसमें लिखा है कि वायरल वीडियो का पुलिस ने संज्ञान लिया, जिसमें 4 चार लोग 2 लोगों के साथ कार में मारपीट कर रहे हैं। पुलिस ने चारों युवकों के खिलाफ अपहरण और मारपीट का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि इनमें से दो आरोपितों को पकड़ लिया गया है और बाकी दो आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस टीम को लगाया गया है। जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें मुख्य आरोपित भी शामिल है।

इसके बाद पुलिस ने आगे कहा, “वायरल वीडियो में देख रहे पीड़ित व उसके साथियों द्वारा पूर्व में दिनांक 21 मई 2023 को थाना डबरा क्षेत्र में आरोपितों के साथ मारपीट की गई थी, जिसमें थाना डबरा में अपराध पंजीबद्ध कर चालानी कार्यवाही की गई है।”

ग्वालियर एसपी के ट्वीट को शेयर करते हुए मोहम्मद जुबैर ने पुलिस के बयान को तोड़मरोड़ कर परोस दिया और एक बार फिर झूठ फैला दिया। मोहम्मद जुबैर ने लिखा, “अपडेट: 4 में 2 को गिरफ्तार कर लिया गया। वायरल वीडियो में दिख रहे पीड़ित (यानी मोहसिन) को आरोपितों ने पहले भी (21 जुलाई 2023) प्रताड़ित किया था।”

मोहम्मद जुबैर ने पुलिस के बयान से उलट, पूरी तरह से झूठ फैलाया है। पुलिस ने कहा कि वायरल वीडियो में देख रहे पीड़ित व उसके साथियों (यानी मोहसिन और उसके साथियों) ने 21 मई 2023 को थाना डबरा क्षेत्र में आरोपितों (गोलू गुर्जर और उसके साथी) से मारपीट की थी।

पुलिस के बयान से साफ है कि यह मामला पूरी तरह मारपीट का है। पहले मोहसिन ने अपने साथियों के साथ मिलकर गोलू गुर्जर और उसके साथियों को मारा और बाद में गोलू गुर्जर को मौका मिला तो उसने मोहसिन के साथ मारपीट की। मारपीट की साधारण घटना को जुबैर ने सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की और वह भी झूठ बोलकर।

हालाँकि, ये ट्वीट अब जुबैर के हैंडल पर मौजूद नहीं हैं, लेकिन उसके द्वारा फैलाए गए झूठ को 51 हजार से अधिक लोग देख चुके थे और 170 लोग रिट्वीट भी कर चुके थे। इस मामले को विजय पटेल नाम के पत्रकार ने अपने ट्विटर हैंडल पर भी उठाया है।

विजय पटेल ने लिखा, “मोहम्मद जुबैर ने कितनी चतुराई से प्रोपगैंडा फैलाने में जुटा है। जब पुलिस ने स्पष्ट किया कि मामला व्यक्तिगत दुश्मनी का था और पीड़ित मोहसिन ने 21 मई को आरोपित गोलू की पिटाई की थी तो बेशर्म जुबैर ने अपना सांप्रदायिक ट्वीट हटाने के बजाय सिर्फ एक अपडेट पोस्ट किया। उसके पहले के ट्वीट के बाद कई लोग अभी भी उस वीडियो को सांप्रदायिक एंगल देकर शेयर कर रहे हैं।”


‘मुझे बोला पोटैशियम ऑक्साइड… रमजान में घर पर पोर्क भेजा’ : AltNews वाले मोहम्मद जुबैर ने 16 ट्विटर यूजर्स पर कराई FIR, शिकायत में अजीत भारती का भी नाम

                                           मोहम्मद जुबैर ने 16 ट्विटर अकॉउंट के खिलाफ की शिकायत
ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने बेंगलुरु में 16 ट्विटर अकॉउंट्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। जुबैर का कहना है कि इन ट्विटर अकॉउंट्स के कारण उसे हत्या की धमकियाँ आ रही हैं। इन 16 यूजर्स में से एक अजीत भारती का अकॉउंट भी है।

जुबैर की शिकायत है कि अजीत भारती ने उसे पोटैशियम ऑक्साइड कहा जिसका फॉर्मूला (K2O) होता है। जुबैर के अनुसार ऐसा कहकर उसे मजहब के आधार पर गाली दी गई है। इसका संबंध खतने होता है।

अजीत भारती के अलावा उसने @Cyber_Huntss नाम के ट्विटर यूजर के विरुद्ध शिकायत दी। जुबैर ने कहा कि @Cyber_Huntss ने उसे पेट फूड वेबसाइट (Pet Food Website) के जरिए रमजान के वक्त पोर्क भेजा और उसकी लोकेशन डिस्कलोज की।

दरअसल, 9 अप्रैल को @Cyber_Huntss ने एक ट्वीट किया था जिसमें बताया गया था कि जुबैर के घर पोर्क जाने के लिए डिस्पैच हो गया है। इस ट्वीट से कथिततौर पर जुबैर का अड्रेस रिवील हो रहा था। इसीलिए उस ट्वीट को प्लेटफॉर्ट से बाद में हटा दिया गया। अब जुबैर ट्विटर यूजर पर कार्रवाई चाहता है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जुबैर ने शिकायत कहा, “पोर्क भेजने की हरकत से मेरी पहचान को निशाना बनाना साफ है, ये मुसलमानों के लिए स्वीकार्य नहीं है। विशेष रूप से रमजान के दौरान प्रतिबंधित मीट भेजना मेरी मजहबी पहचान पर हमला और मेरी गरिमा का अपमान है।”

उसने शिकायत में कहा है कि सोशल मीडिया पर उसके बारे में झूठ और फर्जी बातें फैलाकर, उसकी मुस्लिम पहचान पर हमला करके, लोकेशन की जानकारी देकर… केवल भीड़ को उसके खिलाफ उकसाया गया है। उसकी एफआईआर में अजीत भारती समेत कई लोगों के नाम है।

जुबैर ने कहा है कि इन ट्विटर यूजर्स की हरकतें सिर्फ उसका नुकसान नहीं कराएँगी बल्कि दो समुदायों में नफरत भी बढ़ाएँगी। इस केस को डीजे हल्ली पुलिस थाने में 17 अप्रैल को दर्ज कराया गया था। हालाँकि ये मामला प्रकाश में 4 मई को आया है। केस को आईपीसी की धारा 505, 153ए, 506, 504 के तहत दर्ज किया गया है।

जुबैर ने शिकायत में अजीत भारती के 6 मार्च 2023 के एक पोस्ट का उल्लेख किया है। उसने कहा है कि इसमें उसकी मजहबी पहचान को निशाना बनाकर, ‘जिसका कटा हुआ है’ कहा गया। जुबैर के अनुसार वो एक मुस्लिम है और ऐसा कहने से उसकी मजहबी पहचान को ठेस पहुँची है। इतना ही नहीं, उसने यह भी कहा कि उसे जो पोटैशियम ऑक्साइड कहा गया वो भी उसके लिए अपमानजनक है क्योंकि इसका फॉर्मूला K2O होता है जिसका प्रयोग मुस्लिम पुरुषों को गाली देने के लिए प्रयोग किया जाता है।

16 ट्विटर यूजर्स के विरुद्ध शिकायत देने वाला मोहम्मद जुबैर अकसर अपने अकॉउंट पर झूठ बताते और नफरत फैलाते पकड़ा जा चुका है। उसी ने नुपूर शर्मा केस में एक टीवी डिबेट से एक छोटी क्लिप लेकर अपने ट्विटर पर शेयर किया था और उसके बाद देश में कितना बवाल हुआ ये किसी से छिपा नहीं है। कन्हैयालाल से लेकर उमेश कोल्हे को शर्मा का समर्थन करने पर मारा गया। जुबैर एक लोनी के एक मामले पर ट्विटर पर झूठ फैला चुका है।(साभार)

एक केस में ‘अहंकार की बू’, दूसरे में निष्पक्ष जाँच की सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ऑल्ट न्यूज (AltNews) के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने जुबैर पर दर्ज सभी मामलों को क्लब करने का आदेश दिया है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने जुबैर के खिलाफ उत्तर प्रदेश में दर्ज सभी 6 मामलों में अंतरिम जमानत दी है। साथ ही उस पर दर्ज सभी मामलों को क्लब कर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जुबैर पर जमानत के लिए शर्तों करने की माँग को भी खारिज कर दिया।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “हम एक पत्रकार को कैसे बता सकते हैं कि वे क्या लिखे?” उधर कोर्ट में UP पुलिस ने कहा कि जुबैर कोई पत्रकार नहीं है, वो एक फैक्ट चेकर है। जुबैर ऐसा ट्वीट पोस्ट करता जो, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो। जो ट्वीट सबसे ज्यादा वायरल होता है, उसका पैसा अधिक मिलता है।

सुप्रीम कोर्ट के इस तमाम दलीलों को इंडिया टुडे के पत्रकार शिव अरूर ने अपने शो में रखा। शिव अरूर ने बताया कि जब नूपुर शर्मा का मामला कोर्ट पहुँचा तो कोर्ट ने क्या और जब जुबैर के मामले में कोर्ट ने क्या कहा। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि उसे जस का तस लोगों तक पहुँचाना है।

शिव अरूर ने अपने शो में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा में मामले कहा था कि शर्मा को टिप्पणी करने की जरूरत क्या थी। वहीं, जुबैर के मामले में उसी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जुबैर को ट्वीट करने से रोका नहीं जा सकता। यहाँ जानना जरूरी है कि नूपुर शर्मा ने जो हदीस में बातें लिखी गई हैं, उसे टीवी में बहस के दौरान बताया था, जिसे ईशनिंदा करार दिया गया था। वहीं, जुबैर पर हिंदू धर्म के लोगों की भावनाएँ आहत करने का आरोप है।

नूपुर शर्मा के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था उनका बयान लोगों (मुस्लिमों) को भड़काने के लिए दिया गया था। नूपुर की कोर्ट में सुनवाई के दौरान उस इस्लामिक किताब या किताबों को मंगवाकर मौलवियों को बुलवाकर उन पृष्ठों एवं आयतों की व्याख्या करने को कहना चाहिए। और नूपुर वाली बात सत्य होने पर उन मौलवियों को फटकार लगानी चाहिए कि जब तुम्हारी ही किताबों में यह लिखा है, फिर नबी का अपमान कैसे? क्यों नहीं 'सर तन से अलग' की आवाज़ लगाने वालों के विरुद्ध आवाज़ बुलंद की? देश का माहौल ख़राब करने में जेहादी ही नहीं, मौलवी जिम्मेदार हैं। वहीं, जुबैर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अप्रत्याशित रूप से रोक नहीं लगाई जा सकती।

अवलोकन करें:-

‘नूपुर शर्मा गलत नहीं थीं’; कोई मौलवी बताए वह कहाँ गलत थीं : इस्लामिक स्कॉलर अतीकुर रहमान की दो ट

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
‘नूपुर शर्मा गलत नहीं थीं’; कोई मौलवी बताए वह कहाँ गलत थीं : इस्लामिक स्कॉलर अतीकुर रहमान की दो ट
इस्लामिक स्कॉलर अतीकुर रहमान ने कहा है कि नूपुर 

उसी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नूपुर शर्मा की याचिका में अहंकार की बू आ रही है, जबकि जुबैर मामले में यह पुलिस द्वारा उचित एवं निष्पक्ष जाँच का विषय है। सुप्रीम कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया था कि देश में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए सिर्फ और सिर्फ नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं। वहीं, जुबैर मामले में उसी कोर्ट ने कहा कि उसे लगातार हिरासत में रखना उचित नहीं है।

शिव अरूर ने अपने शो में आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल की गला काटकर हत्या के लिए नूपुर शर्मा को जिम्मेदार बताया था, जबकि जुबैर के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे स्वतंत्रता से वंचित रहने का कोई कारण नहीं है।

वहीं, नूपुर शर्मा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उनकी टिप्पणी उनके अहंकार को दिखाता है, जबकि जुबैर के मामले में कोर्ट ने कहा कि जुबैर कानून के तहत जवाबदेह है। सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के मामले में कहा था कि उन्हें टीवी पर आकर पूरे देश से माफी माँगनी चाहिए। जुबैर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह यह नहीं कह सकता कि वह आगे ट्वीट नहीं करेगा।

एक ही तरह के दो मामलों ने सुप्रीम कोर्ट ने किस तरह की टिप्पणी ये ऊपर दिए गए बातों से स्पष्ट है।

जो पत्रकार नहीं एडिटर्स गिल्ड को उसकी चाहिए रिहाई, जो एडिटर इन चीफ उस पर खानापूर्ति: जुबैर और अर्नब में ऐसे फर्क करता है इकोसिस्टम

नूपुर शर्मा के मुद्दे पर निष्पक्ष रूप से कहा जा रहा है कि हिन्दू नूपुर को इस्लामिक किताब में लिखी बात को बोलने के लिए उकसाने वाले तस्लीम रहमानी, और उसी बात को पैगम्बर का अपमान बताकर देश में हंगामा करवाने वाले altnews के मोहम्मद जुबेर का कोई नाम नहीं लेता, क्यों? चलो देर आये दुरुस्त आये, हिन्दुओं के विरुद्ध घृणा फ़ैलाने वाले मोहम्मद जुबेर को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर उचित न्याय की ओर सही कदम है। ये वही जुबेर है जो एक ही दिन में हिन्दू घृणा वाले 28 ट्वीट डिलीट करता है।  
हिन्दू देवी-देवताओं का खुलेआम अपमान करने वाले मोहम्मद जुबैर की दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ़्तारी पर ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने लंबा-चौड़ा बयान जारी किया है। इसमें AltNews के सह-संस्थापक की गिरफ़्तारी की निंदा करते हुए कहा गया है कि 2018 के एक ट्वीट को लेकर 27 जून, 2022 को ये कार्रवाई की गई। EGI ने दिल्ली पुलिस से मोहम्मद जुबैर को तुरंत रिहा करने की माँग की है।

गिल्ड ने अपने बयान में कहा, “घटनाओं को विचित्र मोड़ देते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मोहम्मद जुबैर को पूछताछ के लिए बुलाया था। ये 2020 का मामला था, जिसमें उच्च न्यायालय ने उन्हें गिरफ़्तारी से राहत दे रखी है। जब जुबैर ने समन पर प्रतिक्रिया दी तो उन्हें इसी महीने शुरू की गई एक आपराधिक जाँच के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया। एक अज्ञात पहचान वाले ट्विटर हैंडल ने उनके 2018 के एक ट्वीट पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप लगाया था।” मोहम्मद ज़ुबैर ट्विटर पर कह चुका है कि वो पत्रकार नहीं है, फिर उसके लिए EGI सामने क्यों आया?

इस बयान में कहा गया है कि IPC की धाराओं 153 और 295 लगा कर मोहम्मद जुबैर को गिरफ्तार किया जाना काफी आकुल करने वाला है, क्योंकि उसकी वेबसाइट AltNews ने पिछले कुछ समय में फेक न्यूज़ को चिह्नित करने में ‘उदाहरण पेश करने वाले’ कार्य किए हैं और ‘दुष्प्रचार अभियानों को काटा’ है। EGI का कहना है कि मोहम्मद जुबैर ने ये सब तथ्यात्मक और वस्तुनिष्ठ तरीके से किया है। साथ ही संस्था ने कहा कि टीवी पर सत्ताधारी पार्टी के एक प्रवक्ता के ‘ज़हरीले बयान’ का खुलासा था, जिस कारण पार्टी को बदलाव करना पड़ा।

अर्णब गोस्वामी EGI के लिए पत्रकार होते हुए भी पत्रकार नहीं हैं। मोहम्मद जुबैर खुद को पत्रकार न बताते हुए भी इनके लिए पत्रकार है। तभी एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया सेलेक्टिव आउटरेज का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है, जहाँ वो खुद चुनता है कि कब किसकी गिरफ़्तारी को छिपाना है और किसे उठाना है। अब संस्था बताए कि क्या वो जुबैर के हिन्दू देवी-देवताओं वाले ट्वीट्स-पोस्ट्स का समर्थन करता है? वो खुद को खुलेआम हिन्दू विरोधी घोषित कर दे फिर।

वहीं अर्णब गोस्वामी को जब उन्हें और उनके परिवार को प्रताड़ित करते हुए उद्धव ठाकरे सरकार की मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था, तब EGI ने काफी दबाव के बाद दो पैराग्राफ में बयान जारी कर इतना लिख इतिश्री कर ली थी कि पुलिस उनके साथ अच्छा व्यवहार करे। रिहाई की माँग नहीं की गई थी और जिन आरोपों के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया था, उन्हें हाइलाइट किया गया था। जबकि जुबैर के मामले में उसके अपराधों के बारे में कुछ नहीं बताया गया है और सीधा उसे छोड़ने की माँग की गई है।

वहीं मोहम्मद जुबैर के समय EGI खुद ही जज बन बैठा है और कह रहा है कि AltNews की ‘सतर्क चौकसी’ ने उन लोगों को नाराज़ कर दिया था, जो दुष्प्रचार को एक हथियार बना कर समाज का ध्रुवीकरण करते हैं और राष्ट्रवादी भावनाओं को उकसाते हैं। एक तरह से ऐसा लग रहा है जैसे ये किसी विपक्षी पार्टी का बयान हो, पूर्णतः राजनीतिक। लोकतंत्र को लेकर G7 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता की याद दिलाते हुए एडिटर्स गिल्ड ने ऑफलाइन और ऑनलाइन कंटेंट्स की सुरक्षा की सलाह दी है।

अब सवाल उठता है कि जो खुलेआम खुद को पत्रकार ही नहीं मानता, उसकी रिहाई के लिए ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने क्यों दिन-रात एक किया हुआ है? जबकि जो उस समय भारत के सबसे ज्यादा टीआरपी वाले चैनल का मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ है, उसके लिए सिर्फ खानापूर्ति की गई थी। EGI ने जैसे अर्णब गोस्वामी के समय आत्महत्या के लिए उकसाने वाले आरोप का जिक्र किया था, अब उसने मोहम्मद जुबैर के सारे हिन्दूफोबिया वाले ट्वीट्स का जिक्र क्यों नहीं किया?

अगर ये संस्था पत्रकारों के हितों की बात करती है तो फिर इसे राष्ट्रवाद से क्या दिक्कत? हिन्दू एकता को ध्रुवीकरण का नाम देकर इसे क्यों भला-बुरा कह रहे ये? पत्रकारिता की बात करें ना। सत्ताधारी पार्टी से इनकी क्या दुश्मनी? बंगाल में पत्रकारों पर हमले पर हमले होते हैं, तब ये कहाँ चले जाते हैं? तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या TMC का नाम तो छोड़िए, एक बयान तक नहीं आता। छत्तीसगढ़ और आंध्र में पत्रकार गिरफ्तार किए जाते हैं तब इनकी घिग्घी बँधी रहती है, क्योंकि वहाँ इनके आकाओं की सरकार होती है।

अवलोकन करें:-

‘हनीमून होटल’ को ‘हनुमान होटल’ बताने वाला मोहम्मद जुबेर गिरफ्तार ; राहुल गाँधी ने कहा- ऐसी हजार

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
‘हनीमून होटल’ को ‘हनुमान होटल’ बताने वाला मोहम्मद जुबेर गिरफ्तार ; राहुल गाँधी ने कहा- ऐसी हजार

असल में इनका काम पत्रकारिता है ही नहीं। इनका कार्य है कॉन्ग्रेस और TMC जिसे दलों के साथ मिल कर भाजपा विरोधी एजेंडा चलाना और इसी के तहत ये तय करते हैं कि किस पत्रकार को मार भी डाला जाए तो चूँ नहीं करना है और किसे मच्छर भी काट ले तो देश-दुनिया में हंगामा मचाना है। अब इनकी कोशिश होगी कि हर एक घटना के नैरेटिव का उर्दू और अरबी में अनुवाद कर के अपने क़तर के आकाओं को भेजें और उनसे बयान जारी करवाएँ।

‘हनीमून होटल’ को ‘हनुमान होटल’ बताने वाला मोहम्मद जुबेर गिरफ्तार ; राहुल गाँधी ने कहा- ऐसी हजारों आवाज उठेंगी

इस्लामिक किताब में लिखी बात को नूपुर शर्मा द्वारा कहने को मोहम्मद जुबेर ने पैगम्बर का अपमान बता देश में अशांति फैला दी। जुबेर की पत्रकारिता उस समय कहां थी, जब वही बात ज़ाकिर नाइक ने कही थी।और अब नूपुर के समर्थन में उतरे विदेशी मौलाना भी क्या अपने ही पैगम्बर का अपमान कर रहे हैं? अगर जुबेर निष्पक्ष पत्रकार था, फिर एक ही दिन में घृणा वाले 28 ट्वीट क्यों डिलीट किये थे? पुलिस को इसके बैंक खातों की भी जाँच करनी चाहिए। 

जहाँ तक राहुल गाँधी और लिबरल जो जुबेर की गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे हैं, इन्ही लोगों ने अयोध्या, मथुरा और काशी को विवादित बनाया। कोर्ट में राम को काल्पनिक कहने वाली कांग्रेस समर्थित यूपीए सरकार ही थी।

धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के लिए स्पेशल सेल ने मजिस्ट्रेट से 4 दिनों का रिमांड माँगा है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि जाँच के दौरान जुबैर का आचरण संदिग्ध पाया गया था। इसलिए साजिश को उजागर करने के लिए उसे गिरफ्तार किया गया।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ का कहना है कि मोहम्मद जुबैर पुलिस के सवालों से बचता रहा। उसने जाँच के लिए ना ही जरूरी तकनीकी उपकरण मुहैया कराए और न ही जाँच में सहयोग किया। पुलिस का कहना है कि वह पहले भी आपत्तिजनक ट्वीट करके नफरत फैलाने की कोशिश की थी।

पुलिस का कहना है कि पर्याप्त सबूत के आधार पर ही उसे गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, मोहम्मद जुबैर पर मामला ट्विटर पर हनुमान भक्त @balajikijaiin हैंडल के एक पोस्ट के आधार पर दर्ज किया गया है। इस हैंडल ने मोहम्मद जुबैर के एक ट्वीट “2014 से पहले: हनीमून होटल और 2014 के बाद: हनुमान होटल” पोस्ट के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया था।

पुलिस के अनुसार, ट्वीट की एक तस्वीर में होटल का साइनबोर्ड दिख रहा है। इस पर लिखे ‘हनीमून होटल’ को बदलकर ‘हनुमान होटल’ कर दिया गया है। हनुमान भक्त @balajikijaiin ने ट्वीट किया, “हमारे भगवान हनुमान जी को हनीमून से जोड़ना हिंदुओं का सीधा अपमान है, क्योंकि वे ब्रह्मचारी हैं। कृपया इस आदमी के खिलाफ कार्रवाई करें।”

दिल्ली पुलिस ने कहा कि मोहम्मद जुबैर के उस पोस्ट में एक विशेष धार्मिक समुदाय के खिलाफ प्रयोग तस्वीर और शब्द अत्यधिक उत्तेजक है और लोगों के बीच नफरत को भड़काने के लिए पर्याप्त है। यह सार्वजनिक शांति के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।

जुबैर के समर्थन में आए विपक्षी दल

भाजपा विरोध से विपक्षी दल इतने ग्रस्त हो चुके हैं कि उन्हें मोहम्मद जुबैर की गैर-कानूनी गतिविधियाँ दिखाई नहीं दे रही हैं। कॉन्ग्रेस, TMC, वामपंथी दल सहित लगभग सभी दलों ने इस गिरफ्तारी को लेकर जुबैर के समर्थन में खड़े हो गए। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी इस गिरफ्तारी का विरोध किया है।
राहुल गाँधी ने ट्वीट कर कहा, “सच्चाई की एक आवाज को बंद करोगे तो ऐसी हजारों आवाजें और उठेंगी। भाजपा की नफरत, कट्टरता और झूठ को बेनकाब करने वाला हर व्यक्ति उसके लिए खतरा है। सच्चाई की निरंकुशता पर हमेशा विजय होती है।”
तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद मोईना मित्रा ने जुबैर के कारनामे को भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने ट्वीट किया, “जुबैर को एक मनगढ़ंत केस में गिरफ्तार किया गया है, जबकि मिसेज फ्रिंज शर्मा सुरक्षा के साये में जिंदगी का आनंद उठा रही हैं।”
अवलोकन करें:-
पैगंबर मोहम्मद और आयशा के निकाह पर सऊदी अरब के मौलाना ने कहा – 100% सही
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
पैगंबर मोहम्मद और आयशा के निकाह पर सऊदी अरब के मौलाना ने कहा – 100% सही
Alt News वाले मोहम्मद जुबैर ने 1 दिन में डिलीट किए हिंदू घृणा वाले 28 ट्वीट, फेसबुक के बाद ट्विटर पर भी व
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
Alt News वाले मोहम्मद जुबैर ने 1 दिन में डिलीट किए हिंदू घृणा वाले 28 ट्वीट, फेसबुक के बाद ट्विटर पर भी व
प्रोपेगेेंडा फैलाने में माहिर मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी के बाद लिबरल और वामपंथी गिरोह उसके बचाव में उतर आया और अपनी छाती पीट रहा है। इनमें शबनम हाशमी, राना अय्यूब, राजदीप सरदेसाई, शशि थरूर, कविता कृष्णन जैसे लोग शामिल हैं।