मोहम्मद जुबैर ने 16 ट्विटर अकॉउंट के खिलाफ की शिकायत ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने बेंगलुरु में 16 ट्विटर अकॉउंट्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। जुबैर का कहना है कि इन ट्विटर अकॉउंट्स के कारण उसे हत्या की धमकियाँ आ रही हैं। इन 16 यूजर्स में से एक अजीत भारती का अकॉउंट भी है।
जुबैर की शिकायत है कि अजीत भारती ने उसे पोटैशियम ऑक्साइड कहा जिसका फॉर्मूला (K2O) होता है। जुबैर के अनुसार ऐसा कहकर उसे मजहब के आधार पर गाली दी गई है। इसका संबंध खतने होता है।
अजीत भारती के अलावा उसने @Cyber_Huntss नाम के ट्विटर यूजर के विरुद्ध शिकायत दी। जुबैर ने कहा कि @Cyber_Huntss ने उसे पेट फूड वेबसाइट (Pet Food Website) के जरिए रमजान के वक्त पोर्क भेजा और उसकी लोकेशन डिस्कलोज की।
दरअसल, 9 अप्रैल को @Cyber_Huntss ने एक ट्वीट किया था जिसमें बताया गया था कि जुबैर के घर पोर्क जाने के लिए डिस्पैच हो गया है। इस ट्वीट से कथिततौर पर जुबैर का अड्रेस रिवील हो रहा था। इसीलिए उस ट्वीट को प्लेटफॉर्ट से बाद में हटा दिया गया। अब जुबैर ट्विटर यूजर पर कार्रवाई चाहता है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जुबैर ने शिकायत कहा, “पोर्क भेजने की हरकत से मेरी पहचान को निशाना बनाना साफ है, ये मुसलमानों के लिए स्वीकार्य नहीं है। विशेष रूप से रमजान के दौरान प्रतिबंधित मीट भेजना मेरी मजहबी पहचान पर हमला और मेरी गरिमा का अपमान है।”
उसने शिकायत में कहा है कि सोशल मीडिया पर उसके बारे में झूठ और फर्जी बातें फैलाकर, उसकी मुस्लिम पहचान पर हमला करके, लोकेशन की जानकारी देकर… केवल भीड़ को उसके खिलाफ उकसाया गया है। उसकी एफआईआर में अजीत भारती समेत कई लोगों के नाम है।
जुबैर ने कहा है कि इन ट्विटर यूजर्स की हरकतें सिर्फ उसका नुकसान नहीं कराएँगी बल्कि दो समुदायों में नफरत भी बढ़ाएँगी। इस केस को डीजे हल्ली पुलिस थाने में 17 अप्रैल को दर्ज कराया गया था। हालाँकि ये मामला प्रकाश में 4 मई को आया है। केस को आईपीसी की धारा 505, 153ए, 506, 504 के तहत दर्ज किया गया है।
जुबैर ने शिकायत में अजीत भारती के 6 मार्च 2023 के एक पोस्ट का उल्लेख किया है। उसने कहा है कि इसमें उसकी मजहबी पहचान को निशाना बनाकर, ‘जिसका कटा हुआ है’ कहा गया। जुबैर के अनुसार वो एक मुस्लिम है और ऐसा कहने से उसकी मजहबी पहचान को ठेस पहुँची है। इतना ही नहीं, उसने यह भी कहा कि उसे जो पोटैशियम ऑक्साइड कहा गया वो भी उसके लिए अपमानजनक है क्योंकि इसका फॉर्मूला K2O होता है जिसका प्रयोग मुस्लिम पुरुषों को गाली देने के लिए प्रयोग किया जाता है।
16 ट्विटर यूजर्स के विरुद्ध शिकायत देने वाला मोहम्मद जुबैर अकसर अपने अकॉउंट पर झूठ बताते और नफरत फैलाते पकड़ा जा चुका है। उसी ने नुपूर शर्मा केस में एक टीवी डिबेट से एक छोटी क्लिप लेकर अपने ट्विटर पर शेयर किया था और उसके बाद देश में कितना बवाल हुआ ये किसी से छिपा नहीं है। कन्हैयालाल से लेकर उमेश कोल्हे को शर्मा का समर्थन करने पर मारा गया। जुबैर एक लोनी के एक मामले पर ट्विटर पर झूठ फैला चुका है।(साभार)
हिन्दू मंदिरों पर हमलों, हिन्दू धार्मिक यात्राओं पर होते पत्थराव और पेट्रोल बम फेंके जाने वाला मोहम्मद जुबेर क्यों चुप रहता है? क्या इसके घर में मातम मन रहा होता है? मोदी सरकार जुबेर और 'सर तन से जुदा' गैंग पर कब सख्त कानून लाएगी? पहले ही जुबेर नूपुर शर्मा के कथन को तोड़-मरोड़ कर पेश कर तिल का ताड बनाकर देश में कितना उपद्रव मचवा चूका है। इसका मुंह तोड़ जवाब 'TimesNow नवभारत' पर एंकर सुशांत सिन्हा ने दिया था। आखिर ऐसी धमकियों से कब तक हिन्दुओं को डराया जाता रहेगा? क्यों नहीं सरकार ऐसे उपद्रवियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं से वंचित करती?
30 मार्च 2023 को गुजरात के गिर-सोमनाथ जिले के उना में रामनवमी के अवसर पर शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के बाद एक धर्म सभा का भी आयोजन हुआ। इस सभा को सामाजिक कार्यकर्ता काजल सिंगला (काजल हिंदुस्तानी) ने संबोधित किया। उनके भाषण को विवादास्पद बताकर स्थानीय मुस्लिमों ने पूरे शहर में हिंसक प्रदर्शन किए। जगह-जगह पथराव और आगजनी की। दो दिनों तक उना में उत्पात जारी रहा।
अब काजल सिंगला पर तथाकथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर समेत कई इस्लामवादी हमलावर हैं। इस्लामवादी गुजरात समेत देश के कई शहरों में रामनवमी शोभा यात्रा पर हमलों के बाद हुई हिंसा का दोष हिंदुओं पर मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में काजल हिंदुस्तानी को भी निशाना बनाया जा रहा है, ताकि उना में हुई हिंसा का दोष उनके सिर पर मढ़ा जा सके। सोशल मीडिया पर हिंदुत्व वॉच और मोहम्मद जुबैर जैसे लोग काजल हिंदुस्तानी का नाम उछाल रहे हैं।
खबरों के मुताबिक उना में हुई रामजी की शोभायात्रा में 30 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए। जुलूस के बाद त्रिकोण बाग के पास रावणवाड़ी में धार्मिक सभा का आयोजन किया गया। इसमें काजल हिंदुस्तानी ने भाषण दिया। काजल हिंदुस्तानी ने अपने भाषण में लव जिहाद और लैंड जिहाद समेत कई मुद्दों पर बात की।
इसके बाद शुक्रवार (31 मार्च, 2023) को बड़ी संख्या में मुस्लिम सड़कों पर उतरे और रामनवमी के अवसर पर दिए गए भाषण को विवादास्पद कहते हुए उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। गौरतलब है कि यह जुमे का दिन था। मुस्लिम भीड़ ने एक पुलिस थाने के आगे ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए। इससे संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
Again, Sar tan se juda slogan raised by jihadi radicals in Una, Gujarat Muslim goons raised slogans in front of the police post, @sanghaviharsh now in what language will you answer them? You used to say that you will forget to look at the stone !#HindusUnderAttackpic.twitter.com/uPwCHJ5era
जुमे के दिन मुस्लिमों द्वारा प्रदर्शन और नारेबाजी के बाद सांप्रदायिक तनाव फैलने लगा। जिसे देखते हुए उना पुलिस ने हिंदू और मुस्लिम पक्ष के नेताओं को बुलाया। अगले दिन बैठक के बीच दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया और स्थिति तनावपूर्ण होने पर मुस्लिम नेता बैठक छोड़कर चले गए। शहर में इसकी भनक लगते ही पूरा बाजार बंद हो गया। गिर-सोमनाथ एसपी ने सर्किट हाउस में दोनों समुदाय के पाँच-पाँच नेताओं को बुलाकर समझौता कराया। इस दौरान शहर में पुलिस ने गश्ती बढ़ा दी।
सुलह के कुछ ही घंटों बाद शाम को फिर से माहौल बिगड़ गया और शहर में पथराव की घटना हो गई। देर शाम उना के कुंभरवाड़ा, कोलीवाड़ और चंद्रकिरण समाज क्षेत्र में असामाजिक तत्वों ने पथराव किया गया और सोडा की बोतलें भी फेंकी गईं। पुलिस ने किसी तरह सड़क पर उतरी भीड़ को नियंत्रित किया। शुक्रवार (31 मार्च, 2023) को मुस्लिम युवकों ने चक्का जाम कर ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए। इसके बाद शनिवार की शाम पथराव हुआ। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 70 पत्थरबाजों को हिरासत में लिया।
उना में पुलिस को पत्थरबाजों व दंगाइयों की धर-पकड़ के दौरान भारी मात्रा में हथियार मिले, जो एक पूर्व नियोजित साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। पुलिस को मिले हथियारों में तलवार, कुल्हाड़ी, चाकू, उस्तरा, लोहे का पाइप, लकड़ी और काँच की बड़ी बोतलें मिली हैं। पुलिस हथियारों को जब्त कर आगे की कार्रवाई कर रही है।
2 अप्रैल को काजल हिंदुस्तानी ने इंडिया टीवी को इंटरव्यू दिया। तब तक जिहादियों ने काजल हिंदुस्तानी को ‘सर तन से जुदा’ की धमकी देनी शुरू कर दी थी। ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि काजल हिंदुस्तानी अपने उना वाले भाषण पर सफाई दे सकती हैं। इंडिया टीवी के शो ‘सवाल तो बनता है’ में काजल सिंगला ने हेट स्पीच पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि आज अगर देश में कोई हिंदू साँस लेता है तो कुछ लोग इसे हेट स्पीच समझते हैं।
काजल ने लगभग 40 मिनट के साक्षात्कार के दौरान कई मुद्दों पर खुलकर अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा कि मैंने आज तक कभी किसी जाति, धर्म या भगवान के बारे में बुरा नहीं बोला। मैंने सच कहा है और अगर इसमें भी किसी को बुरा लगता है तो मैं जिम्मेदार नहीं हूँ। उन्होंने कहा कि पीएफआई की साजिश के तहत देश में लव जिहाद, जमीन जिहाद और धर्मांतरण की घटनाएँ हो रही हैं। पीएफआई भारत के लिए एक खतरनाक संगठन है जो मुस्लिम नौजवानों को कट्टरवाद, आतंकवाद और अलगाववाद सिखाता है।
काजल हिंदुस्तानी ने आगे कहा, “मैं उनकी लव जिहाद, लैंड जिहाद जैसे मंसूबों के खिलाफ बोल रही हूँ, इसलिए मुझे नहीं लगता कि मैं कुछ गलत कह रही हूँ या हेट स्पीच दे रही हूँ।” सोशल एक्टिविस्ट ने कहा कि जब मैं मुस्लिम समाज में महिलाओं के फायदे के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात करती हूँ तो लोगों को बुरा लगता है। बता दें इन दिनों गुजरात में लव जिहाद और लैंड जिहाद के कई मामले सामने आए हैं।
रामनवमी के अवसर पर आयोजित सभा में लव जिहाद और लैंड जिहाद के खिलाफ आवाज उठाने वाले भाषण के बाद कई मुस्लिम नेताओं ने काजल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी। उनपर एफआईआर दर्ज कर लिया गया। उन पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया गया। इस बीच अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस्लामवादी यूजर सक्रिय हुए और काजल हिंदुस्तानी को निशाना बनाना शुरू किया। हमेशा की तरह यह दिखाने की कोशिश हुई कि दंगों के पीछे हिंदुओं का ही हाथ है।
कुख्यात ट्विटर अकाउंट हिंदुत्व वाच(@HindutvaWatchIn) ने काजल हिंदुस्तानी के एक वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा, “एक हिंदू जागृति सम्मेलन में काजल शिंगला उर्फ काजल हिंदुस्तानी ने मुस्लिमों को निशाना बनाते हुए घृणास्पद भाषण दिया। वो बार-बार यह अपराध करती हैं। उन्होंने हिंदुओं से आह्वान किया कि अपनी रक्षा के लिए जाग जाएँ और हथियार उठा लें।”
Location: New Delhi
At Hindu Jagruti Samelan, Kajal Shingla aka Kajal Hindusthani, a repeat offender, delivered hate speech targeting Muslims and called on Hindus to wake up and pick arms to defend themselves. pic.twitter.com/o8P2aTcvwe
इस वीडियो में सुना जा सकता है कि काजल हिंदुओं से खतरे का सामना करने के लिए शस्त्र उठाने की बात कर रही हैं न कि किसी पर हमला करने के लिए। काजल आत्मरक्षा की बात कर रही हैं। हालाँकि इसके तुरंत बाद प्रोपेगेंडा पोर्टल ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक और तथाकथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने हिंदुत्ववाच के वीडियो को शेयर किया। उसने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए लिखा, “काजल सिंगला (काजल हिंदुस्तानी) कहती हैं- उठो हिंदुओं, खड़े हो जाओ, अपनी रक्षा के लिए शस्त्र उठा लो। क्या यह हथियार उठाने के लिए उकसाना नहीं है?”
Kajal Singla (Kajal Hindustani) says, "Utho Hinduon shastra apne aap uthao, apni raksha apne aap karo". Isn't this provocation to pick up arms? @DelhiPolice 👋 https://t.co/EETZzknITe
What would be interesting to see is the source of funding the Zubair gets.. claims to need 11lakhs/month.. gets on average 4lakh as per his posts requesting further money.
How does he make up for the rest?
1)Under reporting donations? (Cash) from where?? Foreign funding?
यहाँ भी यह फ़ैक्टचेकर ज़ुबैर आत्मरक्षा में हथियार उठाने के आह्वान को भड़काऊ बता रहा है। गौरतलब है कि यह वही फैक्ट चेकर है जिसने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को सोशल मीडिया पर इसी तरह निशाना बनाया था और इसके परिणामस्वरूप इस्लामवादियों से उन्हें ‘सर तन से जुदा’ की धमकी मिली थी। जुबैर के भड़काने के बाद ही कट्टरपंथियों ने उदयपुर में कन्हैया लाल नाम के एक व्यक्ति की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी थी, क्योंकि उसने सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट लिखा था।
उसके बाद नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट लिखने पर महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की भी इस्लामवादियों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। इन इस्लामवादियों खासकर मोहम्मद जुबैर जैसे लोगों ने नूपुर शर्मा के जीवन को खतरे में डाल दिया है। उसी तरह का माहौल अब वे काजल हिंदुस्तानी के लिए बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
2 अप्रैल के बाद से काजल हिंदुस्तानी के किसी भी सोशल मीडिया हैंडल पर कोई पोस्ट या स्टेटस नहीं देखा गया है। ऑपइंडिया की टीम ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की है, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। अब यह देखना होगा कि काजल हिंदुस्तानी की आगे की जिंदगी क्या नूपुर शर्मा की तरह ही जिहादियों से डरकर छिपने में गुजरेगी। या इस बार स्थिति बिगड़ने से पहले ही सरकार और सिस्टम द्वारा कुछ कदम उठाए जाएँगे।
हैरी पॉटर की लेखिका जेके रॉलिंग (बाएँ) को मीर आसिफ (दाएँ) से मिली कत्ल की धमकी (चित्र साभार- @jk_rowling) ‘हैरी पॉटर’ की लेखिका और स्कॉटलैंड निवासी जेके रॉलिंग को ट्विटर पर जान से मारने की धमकी मिली है। यह धमकी ईरान समर्थक एक कट्टरपंथी द्वारा दिए जाने का दावा किया जा रहा है। धमकी देने वाले का ट्विटर एकाउंट मीर आसिफ़ अज़ीज़ नाम से है। धमकी देने वाला आसिफ़ सलमान रुश्दी को चाकू मारने वाले आरोपित का समर्थन कर रहा था। रॉलिंग को यह धमकी 13 अगस्त 2022 (शनिवार) को दी गई है।
जेके रॉलिंग ने सलमान रुश्दी पर हुए हमले के बाद शुक्रवार को अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “भयावह खबर, मैं बहुत कमजोर महसूस कर रही हूँ। वो जल्दी ही ठीक हो जाएँ।” इस ट्वीट पर खुद को कार्यकर्ता, छात्र और रिसर्चर लिखने वाले मीर आसिफ़ ने लिखा, “चिंता मत करो। अगला नंबर तुम्हारा है।” आसिफ ने इस से पहले रुश्दी पर हमला करने वाले हाडी मतार को एक ‘शिया क्रांतिकारी’ के तौर पर बताते हुए उसे मृत अयातुल्लाह खुमैनी के फतवा का पालन करने वाला बताया था।
इस धमकी के बाद जेके रॉलिंग ने आरोपित आसिफ के तमाम आपत्तिजनक स्क्रीनशॉट्स को लेकर ट्विटर सपोर्ट (@TwitterSupport) को ट्वीट किया। उन्होंने पूछा कि क्या उनकी तरफ से ऐसे ट्वीट पर कोई सपोर्ट मिल सकता है। उस पर ट्विटर का जवाब था, “हमने आपकी शिकायत की जाँच करके पाया कि उसमें (आसिफ के ट्वीट में) किसी भी प्रकार की कोई भी हिंसक बात नहीं कही गई है।”
ट्विटर के इस फैसले की जेके रॉलिंग के साथ कई अन्य लोगों द्वारा आलोचना की जा रही है। @WilliamGatesKF ने एक स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “ट्विटर ने जिस मीर आसिफ के एकाउंट को नहीं बंद किया, उस कायर ने अपना एकाउंट खुद ही डिलीट कर दिया।”
थोड़ी देर बाद जेके रॉलिंग ने एक और ट्वीट करके जानकारी दी कि मामला पुलिस के संज्ञान में आ गया है और वो दी गई धमकियों पर कार्रवाई कर रही है। रॉलिंग ने आरोपित आसिफ का फोटो भी शेयर किया है।
शुक्रवार (12 अगस्त, 2022) को ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के लेखक उपन्यासकार सलमान रुश्दी को न्यूयॉर्क में भाषण देने से पहले पर चाकू से हमला किया गया था। उन्हें 1980 के दशक में ही ईरान से जान से मारने की धमकी मिली थी। रुश्दी पर चाकू से गर्दन पर हमला किया गया था, जिसमें उनकी आँख और लीवर डैमेज हो गए हैं। उनका गंभीर अवस्था में इलाज करवाया जा रहा है। हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया है। रुश्दी पर हुए हमले का देश और दुनिया भर के कट्टरपंथी जश्न मना रहे हैं।
नवीन जिंदल को कन्हैया लाल की तरह गला काटने की धमकी (फोटो साभार: डेक्कन हेराल्ड) नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर उदयपुर में 28 जून को कन्हैया लाल का सिर तन से अलग कर हत्या कर देने पर मुस्लिम नेताओं और इस्लामिक संस्थानों द्वारा आलोचना जरूर की जा रही है। लेकिन किसी ने नूपुर का सिर तन से अलग करने और उसके पुतले को टांगने वालों पर क्या कार्यवाही की? किसी मुद्दे के विरोध में धरना प्रदर्शन करना सभी का संवैधानिक अधिकार है, परन्तु जब नूपुर के विरोध में हो रहे धरने प्रदर्शनों में नूपुर का सिर तन से जुदा करने के नारे लगाए जाने पर क्यों नहीं सरकार और पुलिस पर ऐसे लोगों पर तुरन्त सख्त कार्यवाही करने के लिए दबाव डाला? क्यों नहीं कमलेश तिवारी की हत्या को गंभीरता से लेकर सिर तन से अलग करने वालों की पहचान कर हत्या की धमकी के आरोप में कार्यवाही की गयी होती, कन्हैया की हत्या नहीं होती? क्यों नूपुर को उकसाने वाले तस्लीम रहमानी पर चुप्पी साधे हुए हैं? कहाँ है अब #award vapsi, #intolerance, #not in my name, #freedom of speech और #mob lynching आदि गैंग?
नवीन जिंदल और उनके पूरे परिवार का गला काटने की धमकी दी गई है। इसकी जानकारी उन्होंने बुधवार (29 जून 2022) सुबह ट्वीट कर दी है। उन्हें धमकी भरे तीन ई मेल मिले हैं। उदयपुर में कन्हैया लाल का गला काटने का वीडियो भी भेजा गया है। जिंदल को पैगंबर मुहम्मद पर कथित विवादित टिप्पणी के बाद बीजेपी से निकाल दिया गया था।
उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “आज सुबह करीब 6:43 बजे मुझको तीन ईमेल आए हैं। उदयपुर में भाई कन्हैया लाल की गर्दन काटने का वीडियो अटैच करते हुए मेरी और मेरे परिवार की भी गर्दन ऐसी ही काटने की धमकी दी गई है। मैंने PCR को सूचना दे दी है।”
जिंदल ने अपने ट्वीट में दोनों ईमेल के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। पहले ईमेल के स्क्रीनशॉट में अकबर आलम का नाम लिखा हुआ है। वह लिखता है, “नवीन कुमार आतंकवादी अब तेरी बारी है। ऐसे ही तेरी गर्दन काटूँगा जल्द ही।” दूसरे ईमेल में अकबर आलम जिंदल को गाली देते हुए कहता है, “नवीन कुमार आतंकवादी @##$$$$ देख ले ऐसे ही कटिंग कर डालूँगा।”
आज सुबह क़रीब 6:43 बजे मुझको तीन ईमेल आयी है, जिसमें #उदयपुर में भाई कन्हैया लाल की गर्दन काटने का विडियो अटैच करते हुए मेरी और मेरे परिवार की भी ऐसी गर्दन काटने की धमकी दी गई है मैंने PCR को सूचना दे दी है।@DCPEastDelhi@CellDelhi@CPDelhi तुरंत संज्ञान ले। pic.twitter.com/rhzyLbbdNg
— Naveen Kumar Jindal 🇮🇳 (@naveenjindalbjp) June 29, 2022
उदयपुर के आतंकवादियों को फाँसी होनी चाहिए, और जहाँ से प्रेरणा लेकर ऐसे निर्मम कुकर्म करते हैं, उन जड़ो को भी काटना चाहिए। #JusticeForKanhaiyaLal
उदयपुर की पैशाचिक घटना कोई सामान्य हत्याकाण्ड नहीं है, ये पूरी तरह से एक आतंकवादी वारदात है, प्रदेश और देश की सरकार को भी उसी कड़ाई से इससे निपटना चाहिये।’कठोर कार्यवाही’ केवल बयानों में ही नहीं धरातल पे भी दिखनी चाहिये। पूरा देश स्तब्ध है… सबको मुखर भी होना पड़ेगा।
अब नूपुर शर्मा के लिए और डर लग रहा है। एक पोस्ट पर कत्ल हो सकता है तो ना जाने कौन कहां किस भेस में खूनी दरिंदे छिपे हो सकते हैं।#KanhaiyaLal#NupurSharma
— Meenakshi Joshi 🇮🇳 (@IMinakshiJoshi) June 28, 2022
पिछले दिनों जिंदल ने बताया था कि उन्हें इस्लामी चरमपंथियों द्वारा लगातार जान से मार डालने की धमकी मिल रही है। इन धमकियों के कारण उन्होंने परिवार सहित दिल्ली छोड़ने के लिए मजबूर होने की भी जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि कुछ लोग उनका पीछा कर रहे थे और उनकी रेकी भी की गई है।
राजस्थान के उदयपुर में 28 जून 2022 को टेलर कन्हैया लाल की नृशंस हत्या कर दी गई थी। दोपहर करीब ढाई बजे बाइक पर सवार रफीक मोहम्मद और अब्दुल जब्बार आए। नाप देने का बहाना बनाकर वे दुकान में गए। इससे पहले कन्हैयालाल कुछ समझ पाते तब तक दोनों इस्लामी हत्यारों ने उनकी गर्दन काटकर हत्या कर दी।
अवलोकन करें:-
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
अजमेर : ‘हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी बंद करो’: सड़क पर निकले आम लोग
यही नहीं इस्लामवादी हत्यारे ने 17 जून को अपना वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। वीडियो में वह कह रहा था, “मैं मोहम्मद रियाज अंसारी राजस्थान के उदयपुर, खांजीपीर से। ये वीडियो में जुम्मे के दिन बना रहा हूँ। माशाल्लाह और 17 तारीख है। मैं इस वीडियो को उस दिन वायरल करूँगा, जिस दिन अल्लाह की शान में गुस्ताखी करने वाला का सिर कलम कर दूँगा। आपको एक मैसेज देता हूँ रियाज ने सिर कलम करने की शुरुआत तो कर दी है। बाकी के जो बचे हैं उन सभी का सिर आपको कलम करना है। इस बात का ध्यान रखना।”
कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब विवाद अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। बात शिक्षा से हटकर मजहब पर इस कद्र आ गई है कि विपक्षी नेता अपनी राजनीति साधने के लिए भी शैक्षणिक संस्थानों में बुर्के का समर्थन कर रहे हैं। वैसे ये पहली बार नहीं है जब शिक्षा के नाम पर कहीं मजहब को प्रमोट किया गया हो और कहीं इसका विरोध हुआ हो। बीते समय में भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं जहाँ बुर्के को शैक्षणिक संस्थान पर हावी करने की कोशिश की गई और ये बात मीडिया सुर्खियों में आईं।
महिला टीचर्स पर बनाया गया बुर्का पहनने का दबाव
साल 2010 की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता के आलिया यूनिवर्सिटी में 8 टीचरों पर बुर्का पहनने के लिए दबाव बनाया गया था। इनमें 7 महिला टीचरें थीं जिन्होंने नौकरी के लिए ये शर्त मान ली थी, लेकिन इनमें एक ने इसका विरोध किया था। उसका कहना था कि अगर बुर्का पहनना होगा तो वो मर्जी से पहनेगी जबरदस्ती से नहीं। लेकिन कट्टरपंथी दबाव के चलते इस 1 महिला टीचर को उस कॉलेज परिसर से ही बाहर कर दिया गया।
रिपोर्ट बताती है कि ये घटना उस समय की है जब कोलकाता की आलिया यूनिवर्सिटी में शिरिन निद्या नाम की टीचर ने बंगाली लिटरेचर पढ़ाना शुरू किया था और स्टूडेंट यूनियन इस जिद्द पर अड़ गया कि हर महिला प्रोफेसर को बुर्का पहनना होगा। शिरिन ने अपने साथ घटित घटना पर बताया था, “अप्रैल के मध्य, छात्र संघ ने हम 8 टीचरों को बुलाया और बुर्का पहनने को कहा। छात्र संघ ने कहा कि इस मामले पर प्रशासन के साथ हमने डिस्कस कर लिया है। बस तुम्हें बुर्का पहनना है और अगर ऐसा नहीं किया तो जॉब छोड़ दो।” शिरिन ने इस मामले पर बाद में सरकार से गुहाई लगाई। जिसके बाद सरकार ने कहा था कि ये मामला गंभीर हैं और अगर मामले में कोई दोषी पाया गया तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
एनडीटीवी में प्रकाशित संबंधित खबर का स्क्रीनशॉट
मुस्लिम सोसायटी ने किया था बुर्का प्रतिबंधित
इसी तरह साल 2019 में एक घटना एक खबर आई थी जब केरल की मुस्लिम एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष पी फजल गफूर ने एक नोटिस जारी किया था। इसके अंतर्गत सभी कॉलेज और स्कूलों में बुर्के पर प्रतिबंध लगाया गया था। यह नोटिस सभी संबंधित संस्था प्रमुख और अधिकारियों को जारी किया गया था। उन्होंने इस निर्णय को शैक्षणिक वर्ष 2019-20 से इस आदेश से लागू करने के निर्देश दिए थे। अपने निर्णय के दौरान उन्होंने कहा था कि विद्यार्थियों, अध्यापकों और कर्मचारियों को भी इस आदेश का पालन करना अनिवार्य था। उन्होंने कहा था कि इस्लाम का अनुसरण करना गलत नहीं है, लेकिन मध्यकाल की इस्लाम पद्धतियों का अनुसरण सही नहीं है। पी फजल के फैसले के बाद कट्टरपंथी इतना बिदके कि उन्होंने केरल में मुस्लिम एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ पीए फजल गफूर को अज्ञात व्यक्ति ने फोन पर जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने जानकारी दी थी कि आरोपितों ने उन्हें जुमे वाले दिन अंतरराष्ट्री नंबर से फोन पर गालियाँ देते हुए जान से मारने की धमकी थी।
केरल में माकपा कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम लीग को दी धमकी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) कैडर को मौत की धमकी जारी करते हुए कन्नूर जिले में एक जुलूस निकाला है। CPM कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम लीग को यह धमकी जनवरी 18, 2021 शाम के समय तब दी। दरअसल, स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान हिंसा के मामले में कुछ CPM कार्यकर्ताओं के एक समूह को गिरफ्तार कर लिया गया था। जेल से रिहाई के समय उनके द्वारा यह नारेबाजी की गई।
मलयालम समाचार पोर्टल ‘मातृभूमि’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल के कन्नूर जिले के तेलीपारंबा विधानसभा (Taliparamba assembly) क्षेत्र में मय्यल कस्बे में एक जुलूस निकाला गया, जिसमें CPM कार्यकर्ताओं ने चिल्लाते हुए कहा कि मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता मारे जाएँगे।
मार्क्सवादी पार्टी के नेताओं ने यह भी कहा कि ‘CPM एक ऐसा संगठन है जिसने उन लोगों को ख़त्म कर दिया, जिनको पार्टी मारना चाहती थी और फिर से उन लोगों की हत्या करेगी, जिसे पार्टी मारने को कहेगी।’
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए धमकी दी और कहा कि मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं को मार दिया जाएगा और उनके शरीर पर हरे झंडे गाड़ दिए जाएँगे।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन समेत वामपंथी पार्टी के कई बड़े नेता कन्नूर जिले से ही हैं। इस जिले में कई हत्याएँ हुई हैं, जिसमें सीपीएम हमेशा एक तरफ ही नजर आई है जबकि, पीड़ित या तो मुस्लिम लीग, आरएसएस या फिर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता थे। इस राजनीतिक रूप से अस्थिर जिले में 300 से अधिक लोग अपनी जान गँवा चुके हैं।
वहीं, CPM द्वारा मुस्लिम लीग को दी गई धमकियों के बाद केरल पुलिस हाई अलर्ट पर है। मुस्लिम लीग के राष्ट्रीय आयोजन सचिव, ईटी मोहम्मद बशीर ने कहा, “कन्नूर जिले में सीपीएम द्वारा जारी किए गए इन मौत के खतरों पर पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। कन्नूर में सीपीएम हमेशा से सभी राजनीतिक हत्याओं में एक पक्ष रही है।”
कर्नाटक के पुजारी विजयेंद्र (इनसेट) को मौत की धमकी!
अयोध्या में राममंदिर विरोधी तारीख मिलने से इतने अधिक विचलित हो गए हैं कि अब मुहुर्त का दिन और समय बताने वाले पुजारी विजयेंद्र को मौत की धमकी देने के मामले को हलके में नहीं लेना चाहिए। इसका मतलब है कि राममंदिर अवरोध उत्पन्न करने वाले किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन से ठीक एक दिन पहले इस पूरे कार्यक्रम की एक तरह से नींव रखने वाले पुजारी को मौत की धमकी मिली है। यह पुजारी हैं कर्नाटक के विजयेंद्र। पुजारी विजयेंद्र को मिली धमकी इसलिए महत्वपूर्ण है और किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है क्योंकि यही वो पुजारी हैं, जिन्होंने राम मंदिर भूमि पूजन का मुहूर्त बताया था। वीडियो में 5 मिनट 20 सेकंड के बाद से पुजारी विजयेंद्र को मिली धमकी का जिक्र।
कर्नाटक के पुजारी विजयेंद्र ने ही राम मंदिर भूमि पूजन के लिए 29 जुलाई, 31 जुलाई, 3 अगस्त और 5 अगस्त का मुहूर्त निकाला था। बाद में सबकी सहमति से 5 अगस्त को इस शुभ कार्य के लिए दिन फाइनल किया गया। अब इन्हीं पुजारी विजयेंद्र को कर्नाटक में फोन पर जान से मारने की धमकी मिल रही है। कर्नाटक के बेलगावी स्थित तिलकवाड़ी पुलिस स्टेशन में इस संबंध में मामला दर्ज किया गया है। वहाँ की पुलिस ने बताया कि 75 वर्ष के पुजारी विजयेंद्र को फोन पर धमकी मिली है। इस पूरे मामले पर पुजारी विजयेंद्र ने कहा: “फोन करने वालों ने नाम नहीं बताया। वो धमकी दे रहे थे। कहा कि मुहूर्त की तारीख क्यों बताई? इसमें शामिल क्यों हो रहे हो? मैंने कहा कि आयोजकों ने मुझसे इसके लिए आग्रह किया था और मैंने धर्म का पालन किया। कई जगहों से, कई बार फोन आ रहे हैं। लेकिन मैं इसे गंभीरता से नहीं ले रहा।” मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक पुलिस ने पुजारी विजयेंद्र के घर पर कुछ पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी है। पुलिस के अनुसार कॉल करने वाले ने पुजारी विजयेंद्र से मुहूर्त के समय को वापस लेने को कहा। पुजारी विजयेंद्र पिछले कई सालों से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। इस साल फरवरी में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर भूमि पूजन के लिए मुहूर्त निकालने के लिए उनसे संपर्क किया था।
भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर राज्य में आतंकवाद और अलगाववादियों के नेटवर्क पर गहरी चोट की। इसके बाद जहाँ पर भारत का झंडा फहराना भी मुश्किल हुआ करता था, तिरंगे का अपमान करना आम बात थी, जिस पर छद्दम धर्म-निरपेक्ष एवं तुष्टिकरण के पुजारी चुपचाप आंख बंद कर लेते थे। आतंकवादियों और पत्थरबाजों को बोलबाला था। लेकिन अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद से छुपे बैठे पाकिस्तानी समर्थकों की बेचैनी का यह आलम है कि वहाँ कुछ लोगों ने ‘प्राइड मार्च’ निकालने की योजना बनाई। हालाँकि, कश्मीर के कई स्थानीय लोगों को ये पसंद नहीं आया। जब से ‘प्राइड कश्मीर’ ने ये ‘प्राइड मार्च’ निकालने की बात की है, इस्लामी कट्टरपंथियों की तरफ से उन्हें केवल गालियाँ ही पड़ रही हैं। एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें आकिब दार नामक व्यक्ति माँ और बहन की गाली देते हुए कह रहा है कि तू कश्मीर का हो ही नहीं सकता क्योंकि तू हिन्दू नस्ल का है। साथ ही उसने इसे सूअर की नस्ल भी बताया और धमकी दी कि अपनी जबान से वो कश्मीर का नाम न लें। साथ ही उसने ‘प्राइड कश्मीर’ के ‘प्राइड मार्च’ के आयोजक को ‘हिंदुस्तान का कुत्ता’ बताया और कहा कि वो तिरंगे पर रोज पेशाब करता है और भारतीय सेना की कश्मीरियों से ‘फटती’ है।
— Kashmiri Youth Movement (@KYMchannel) June 3, 2020
साथ ही आकिब ने धमकाया कि कश्मीर का नाम लेकर तू क्या उखाड़ लेगा, तेरी बहन %$# देंगे और पेज को रिपोर्ट करवा के बंद कर देंगे। साथ ही उसने अफजल गुरु को आतंकी कहने पर आपत्ति जताई और राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और शहीद भगत सिंह को ‘सूअर का बच्चा’ बताया। उसने हिंदुस्तान की माँ $%२ देने की धमकी दी और कहा कि भारतीय सेना खौफ में ‘कुत्ते की तरह’ जीती है कश्मीर में क्योंकि उन्हें ‘डर’ रहता है कि वो कभी भी मर सकते हैं, बम गिर सकता है। साथ ही उसने खुद को कश्मीरी बताते हुए पुलवामा हमले का महिमामंडन किया और इस तरह के और हमलों की भी धमकी दी। इसके बाद वो हिन्दू देवी-देवताओं को गाली देने पर उतर आया और उसने सीता माँ को अपशब्द कहे। आकिब ने धमकी दी कि तुम सब मरोगे और सेना के पुलवामा की तरह कभी भी ‘चीथड़े उड़ सकते’ हैं। उसने स्पष्ट बताया कि वो पाकिस्तानी नहीं है, कश्मीरी है। ट्विटर पर कई लोगों ने आकिब की इस भाषा पर आपत्ति जताई। सबसे ज्यादा कट्टरपंथियों ने इन्स्टाग्राम पर इस मार्च को निशाना बनाया। एक यूजर ने लिखा कि ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा राज्य की डेमोग्राफी में बदलाव करने की साजिश का एक हिस्सा है। उसने लिखा कि उसे LGBT समुदाय से कोई समस्या नहीं है लेकिन साथ ही उसने इसे कश्मीरी पंडितों का प्रोपगंडा करार दिया। साथ ही उसने लिखा कि कश्मीरी इस चीज को बर्दाश्त नहीं करेंगे। कुछ ने तो इसे ‘कैंसर’ तक बता दिया। एक ने तो माँ की गाली देते हुए इसे ‘टट्टीपना’ बताया। एक ने तो मुफ्त की सलाह दी कि ‘प्राइड कश्मीर’ मार्च निकालने की बजाए कश्मीरी लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करना चाहिए। बता दें कि अगर अनुच्छेद 370 के प्रावधान जब तक राज्य में लागू थे, तब तक वहाँ समलैंगिकता अपराध की श्रेणी में आता था। एक यूजर ने लिखा कि ‘प्राइड मार्च’ एक ऐसी चीज है, जो इजराइल से सीखी गई है। उसने कहा कि ये इजराइल में फेल हो गया था, यहाँ भी हो जाएगा। एक ने तो लिखा कि भारत भले ही संविधान के नियम बदल दे लेकिन वो पैगम्बर मुहम्मद के नियमों को नहीं बदल पाएगा। उसने दावा किया कि इस्लाम में समलैंगिकता हराम है और ये सब ‘वायरस’ बाहर से आ रहे हैं। अपने डीपी में कम्युनिस्ट झंडा लगाए एक यूजर ने दावा किया कि ये सब गैर-इस्लामिक चीजें हैं और उसे रिप्लाई देते हुए उसके एक फॉलोवर ने कहा कि इससे प्लेग, टिड्डी सहित कई अन्य आपदाएँ आएँगी।
न्यूयॉर्क। जानलेवा कोरोना वायरस महामारी के मेडिकल एक्सपर्ट और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कोरोनो वायरस टास्क फोर्स के सदस्य डॉ एंथोनी फौसी अपनी सुरक्षा को लेकर खतरे से जूझ रहे हैं। उन्हें खुद और अपने घर के लिए हर समय कानूनी सुरक्षा की जरूरत है। सीएनएन न्यूज ने इस बात की पुष्टि की है। एक कानून प्रवर्तन अधिकारी ने सीएनएन को बताया कि स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के महानिरीक्षक, एजेंसी के कानून प्रवर्तन शाखा, ने अमेरिकी मार्शल सेवा से फौसी के लिए खतरे को समझते हुए सहायता मांगी है। अब मार्शल ने एचएचएस अधिकारियों को डॉक्टर के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा के रूप में कार्य करने के लिए कहा है। वाशिंगटन पोस्ट ने सबसे पहले फौसी को दी गई धमकियों और बढ़ी हुई सुरक्षा की सूचना दी। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प सरकार के शीर्ष इंफेक्शन डिजीज अधिकारी ने Coronavirus से बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की आशंका जताई है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शन डिजीज के निदेशक एंथोनी फौसी ने कहा है कि अभी जो हालात नजर आ रहे हैं, उससे अमेरिका में कोरोना वायरस से एक लाख से ज्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका है। बता दें कि Coronavirus से अमेरिका में मरने वालों की संख्या 2,612 हो गई है। तीन दिन पहले यह आंकड़ा एक हजार से कम था। साभार : OI-HI&utm