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माँ सीता को कहे अपशब्द, ‘हम कश्मीरी तिरंगे पर पेशाब करते हैं’: ‘प्राइड मार्च’ से खफा आकिब ने दी पुलवामा दोहराने की धमकी

भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर राज्य में आतंकवाद और अलगाववादियों के नेटवर्क पर गहरी चोट की। इसके बाद जहाँ पर भारत का झंडा फहराना भी मुश्किल हुआ करता था, तिरंगे का अपमान करना आम बात थी, जिस पर छद्दम धर्म-निरपेक्ष एवं तुष्टिकरण के पुजारी चुपचाप आंख बंद कर लेते थे। आतंकवादियों और पत्थरबाजों को बोलबाला था। लेकिन अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद से छुपे बैठे पाकिस्तानी समर्थकों की बेचैनी का यह आलम है कि वहाँ कुछ लोगों ने ‘प्राइड मार्च’ निकालने की योजना बनाई। हालाँकि, कश्मीर के कई स्थानीय लोगों को ये पसंद नहीं आया। जब से ‘प्राइड कश्मीर’ ने ये ‘प्राइड मार्च’ निकालने की बात की है, इस्लामी कट्टरपंथियों की तरफ से उन्हें केवल गालियाँ ही पड़ रही हैं।
एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें आकिब दार नामक व्यक्ति माँ और बहन की गाली देते हुए कह रहा है कि तू कश्मीर का हो ही नहीं सकता क्योंकि तू हिन्दू नस्ल का है। साथ ही उसने इसे सूअर की नस्ल भी बताया और धमकी दी कि अपनी जबान से वो कश्मीर का नाम न लें। साथ ही उसने ‘प्राइड कश्मीर’ के ‘प्राइड मार्च’ के आयोजक को ‘हिंदुस्तान का कुत्ता’ बताया और कहा कि वो तिरंगे पर रोज पेशाब करता है और भारतीय सेना की कश्मीरियों से ‘फटती’ है।

साथ ही आकिब ने धमकाया कि कश्मीर का नाम लेकर तू क्या उखाड़ लेगा, तेरी बहन %$# देंगे और पेज को रिपोर्ट करवा के बंद कर देंगे। साथ ही उसने अफजल गुरु को आतंकी कहने पर आपत्ति जताई और राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और शहीद भगत सिंह को ‘सूअर का बच्चा’ बताया। उसने हिंदुस्तान की माँ $%२ देने की धमकी दी और कहा कि भारतीय सेना खौफ में ‘कुत्ते की तरह’ जीती है कश्मीर में क्योंकि उन्हें ‘डर’ रहता है कि वो कभी भी मर सकते हैं, बम गिर सकता है।
साथ ही उसने खुद को कश्मीरी बताते हुए पुलवामा हमले का महिमामंडन किया और इस तरह के और हमलों की भी धमकी दी। इसके बाद वो हिन्दू देवी-देवताओं को गाली देने पर उतर आया और उसने सीता माँ को अपशब्द कहे। आकिब ने धमकी दी कि तुम सब मरोगे और सेना के पुलवामा की तरह कभी भी ‘चीथड़े उड़ सकते’ हैं। उसने स्पष्ट बताया कि वो पाकिस्तानी नहीं है, कश्मीरी है। ट्विटर पर कई लोगों ने आकिब की इस भाषा पर आपत्ति जताई।
सबसे ज्यादा कट्टरपंथियों ने इन्स्टाग्राम पर इस मार्च को निशाना बनाया। एक यूजर ने लिखा कि ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा राज्य की डेमोग्राफी में बदलाव करने की साजिश का एक हिस्सा है। उसने लिखा कि उसे LGBT समुदाय से कोई समस्या नहीं है लेकिन साथ ही उसने इसे कश्मीरी पंडितों का प्रोपगंडा करार दिया। साथ ही उसने लिखा कि कश्मीरी इस चीज को बर्दाश्त नहीं करेंगे। कुछ ने तो इसे ‘कैंसर’ तक बता दिया।
एक ने तो माँ की गाली देते हुए इसे ‘टट्टीपना’ बताया। एक ने तो मुफ्त की सलाह दी कि ‘प्राइड कश्मीर’ मार्च निकालने की बजाए कश्मीरी लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करना चाहिए। बता दें कि अगर अनुच्छेद 370 के प्रावधान जब तक राज्य में लागू थे, तब तक वहाँ समलैंगिकता अपराध की श्रेणी में आता था। एक यूजर ने लिखा कि ‘प्राइड मार्च’ एक ऐसी चीज है, जो इजराइल से सीखी गई है। उसने कहा कि ये इजराइल में फेल हो गया था, यहाँ भी हो जाएगा।
एक ने तो लिखा कि भारत भले ही संविधान के नियम बदल दे लेकिन वो पैगम्बर मुहम्मद के नियमों को नहीं बदल पाएगा। उसने दावा किया कि इस्लाम में समलैंगिकता हराम है और ये सब ‘वायरस’ बाहर से आ रहे हैं। अपने डीपी में कम्युनिस्ट झंडा लगाए एक यूजर ने दावा किया कि ये सब गैर-इस्लामिक चीजें हैं और उसे रिप्लाई देते हुए उसके एक फॉलोवर ने कहा कि इससे प्लेग, टिड्डी सहित कई अन्य आपदाएँ आएँगी।

पोखरण परमाणु परिक्षण के समय भारत पर 'हमला' करने वाले शेख रशीद पाकिस्तान से भाग गए थे !

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कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद सबसे अधिक दुखी पाकिस्तान है. इमरान खान तो एक-एक कर के भारत से सारे रिश्ते ही तोड़ने में लगे हैं. अब जब इमरान खान ये सब कर रहे हैं, तो उनके मंत्री पीछे कैसे रहते. इसी बीच रेल मंत्री शेख रशीद अहमद ने मोदी सरकार के इस सख्त कदम पर पिछले दिनों पाकिस्तान की संसद में अपनी प्रतिक्रिया दी. पूरे भाषण में वह सिर्फ मोदी को कोसते रहे और दुनियाभर के मुसलमानों से एकजुट होने की अपील करते रहे. उन्होंने तो भारत को नेस्तनाबूत करने की धमकी तक दे डाली. ये तक कह डाला कि कश्मीर के जरिए मोदी सरकार पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाना चाहती है.
पुलवामा हमले के बाद जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव शुरू हुआ तो भी शेख राशीद अहमद ने भारत को डराने की खूब कोशिश की थी. यहां तक कह दिया था कि उन्होंने चूडियां नहीं पहनी हैं. दरअसल, पुलवामा हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान में पनाह लिए मसूद अजहर के संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी. इसके बाद से ही भारत की ओर से पाकिस्तान पर दबाव बनाया जा रहा था कि या तो वह खुद इन आतंकी संगठनों के खिलाफ एक्शन ले, वरना भारत को ही कोई सख्त कदम उठाना होगा. उस वक्त बात ये होने लगी थी कि भारत की ओर से पाकिस्तान पर हमला किया जा सकता है. उसी दौरान शेख रशीद अहमद ने भारत को चुनौती दी थी. लेकिन हाल ही में पाकिस्तानी पत्रकार नाइला इनायत ने एक ऐसा वीडियो शेयर किया है, जो साफ कर रहा है कि गीदड़ भभकी देने वाले शेख रशीद अहमद तो एक भगौड़े हैं

पोखरण परीक्षण के दौरान देश छोड़कर भाग गए थे रशीद

वैसे तो अगर ये बात कोई कहे कि शेख रशीद अहमद भगौड़े हैं, तो बेशक वह गुस्से में आग बबूला हो जाएंगे. और अगर कहीं ये बात भारत ने कही तो तब तो तुरंत ही वह अपने परमाणु बम, मिसाइलें और तमाम असलहा गिनाना शुरू कर देंगे. लेकिन हकीकत तो ये है कि जब भारत 11 मई 1998 में पोखरण में परमाणु बम का परीक्षण किया था तो शेख रशीद अहमद के पैरों तले डर के मारे जमीन ही खिसक गई थी. आपको बता दें कि भारत ने एक के बाद एक 5 परमाणु टेस्ट किए थे, जिसने भारत को दुनिया के नक्शे पर और भी ताकतवर देश बना दिया.
शेख रशीद अहमद कहते हैं कि जब उन्हें इस परीक्षण के बारे में पता चला था तो वह बेहद खौफज़दा हो गए थे. यहां तक कि वह तुरंत पाकिस्तान को छोड़कर भाग गए थे. उन्हें डर था कि कहीं कुछ ऊंच-नीच हो गई और निशाना गलत हो गया तो पाकिस्तान भी नेस्तनाबूत हो सकता है. खैर, जिस तरह का डर शेख रशीद अहमद को था वह बेहद बचकाना था. वह बोल रहे हैं कोई पटाखा इधर उधर हो गया, कोई लीकेज हो गई तो क्या होगा. मंत्री जी, ये परमाणु बम है, दिवाली में जलाया जाने वाला मुर्गाछाप पटाखा नहीं, जो इधर उधर होने की गुंजाइश हो. खैर, वह किस दर्जे के डरपोक हैं, ये तो उन्होंने अपने ही मुंह से साफ कर दिया है.

फिर भी गीदड़भभकी देने से पीछे नहीं हटते

पुलवामा हमले के बाद जब दोनों देशों में तनाव हुआ और ये बात होने लगी कि भारत की ओर से पाकिस्तान पर हमला हो सकता है तो उन्होंने भारत को धमकाया था. वह बोले थे- 'अगर वक्त आया तो ऐसा काम दिखाऊंगा कि दुनिया मेरी शहादत को याद रखेगी कि मैंने कैसे दुनिया की सेमीपावर का सत्यानाश कर दिया. इंडिया का मीडिया सुन ले कि शेख रशीद की बात हिंदुस्तान के मुसलमान भी सुनते हैं. मैं जंग नहीं करना चाहता, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो फौज तो लड़ेगी ही, लेकिन मैं किस तरह लड़ूंगा ये भी बताऊंगा.' खैर, परमाणु बम के परीक्षण भर से खौफजदा हो जाने वाले शेख रशीद गरजने वाले बादल रखते हैं. इनका वीडियो आपको जरूर देखना चाहिए.

धारा 370 पर भी दिखाया गुस्सा

जब मोदी सरकार ने कश्मीर से धारा 370 हटाने का फैसला किया तो पाकिस्तान से प्रतिक्रियाएं आने लगीं. इसी बीच संसद में एक बार फिर शेख रशीद अहमद ने भारत को धमकी दी. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने इजराइल की तर्ज पर कश्मीर में ये सब किया है और अब इजराइल की तरह ही कश्मीर में कत्लेआम होगा. उन्होंने संसद में कहा कि ये वक्त है जब पाकिस्तान को इस मुद्दे को दुनिया में ले जाना चाहिए और सभी मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की. ये तक कहा कि भारत में मुसलमानों को कीड़े-मकौड़ों की जिंदगी जीने के बजाय शहादत का जज्बा लेकर निकलना चाहिए. उन्होंने भारत को धमकाते हुए कहा- अगर पाकिस्तान की सरजमीं पर हमला हुआ तो भारत में ना चिड़िया चहकेंगी, ना घास उगेगी ना परिंदे फड़फड़ाएंगे, हिंदुस्तान को उसकी सफाहस्ती से मिटा के रख देंगे.
जिस शेख रशीद ने चंद दिनों पहले धारा 370 को लेकर भारत को धमकाया, उसी शेख रशीद ने पुलवामा के बाद भी भारत को धमाकया था. पर ये कैसे भूल जाएं कि यही शेख रशीद परमाणु परीक्षण की खबर सुनकर ही डर से थर-थर कांपने लगे. अब वो धमकी इस बात की दे रहे हैं कि हिंदुस्तान को मिटा देंगे. पाकिस्तान की ये गीदड़भभकियां हमेशा ही आती रही हैं और उम्मीद है कि आती रहेंगी, क्योंकि इसी के दम पर उनकी राजनीति चल रही है. वैसे भी पाकिस्तान ने जब-जब मर्यादा लांघी है तो उसका खामियाजा भी उसे भुगतना ही पड़ा है. कश्मीर भारत का मुद्दा है और अगर इसमें वह अपनी नाक घुसाएगा तो इसका हश्र भी उसे भुगतना ही होगा.

राहुल गांधी ने पाकिस्तान के प्रोपगेंडा का दिया ईंट का जवाब पत्थर से

Image result for राहुल गांधीजम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद पाकिस्तान बौखलाहट में है। इस तरह की खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तान की तरफ से यूएन को एक खत लिखा गया है जिसमें राहुल गांधी के बयानों का जिक्र किया गया है। अब इस विषय पर राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा कि यह सही है कि इस सरकार से वो कई मुद्दों पर इत्तेफाक नहीं रखते हैं।लेकिन वो एक बात स्पष्ट करना चाहते हैं कि कश्मीर, भारत का आंतरिक मामला है। इस विषय पर न तो पाकिस्तान या दूसरे देश को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
राहुल गांधी कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में हिंसा और इसके लिए पाकिस्तान पूरी तरह जिम्मेदार है। आतंकवाद और पाकिस्तान के बीच क्या संबंध है यह पूरी दुनिया जानती है। इसमें दो मत नहीं कि पाकिस्तान का आतंकवाद से सीधा संबंध है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की करतूतों के ऐतिहासिक साक्ष्य हैं। 
पाकिस्तान ने यूएन को लिखे खत में राहुल गांधी के बयानों का जिक्र करने पर कांग्रेस बैकफुट पर आ चुकी है। शशि थरूर ने ट्वीट कर कहा कि जिस तरह से अनुच्छेद 370 को हटाया गया है उस तरीके का विरोध है। पाकिस्तान को राहुल गांधी के बयानों से निष्कर्ष निकालने की जरूरत नहीं है।



राहुल गांधी इस तरह बात अब क्यों कर रहे हैं। राहुल गांधी के पिछले बयानों पर बीजेपी ने निशाना साधा था। बीजेपी का कहना है कि दुख की बात ये है कि राहुल गांधी मोदी सरकार का विरोध करते करते देश की मुखालफत पर उतर चुके हैं। उन्हें यह नहीं पता कि उनके बयानों को पाकिस्तान किस तरह से फायदा उठा रहा है। भारत सरकार का स्पष्ट मत है कि जम्मू-कश्मीर पर सभी राजनीतिक दलों को राय रखने का अधिकार है। लेकिन इसके साथ यह भी देखना होगा कि पड़ोसी मुल्क विरोधी दलों के बयानों का इस्तेमाल कहीं भारत के खिलाफ तो नहीं कर रहा है। 
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सलमान निज़ामी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त होने पर पाकिस्तान की बौखलाहट समझ आती है, क्योकि वहां पाकिस्तान बनन....

कांग्रेस अपने रास्ते से भटक गई है, मैं अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन करता हूं: भूपेंद्र सिंह हुड्डा

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रविवार(अगस्त 18) को अपनी पार्टी निशाना साधते हुए कहा कि जब भी सरकार कुछ भी सही करती है तो मैं उनका समर्थन करता हूं। मेरे कई सहयोगियों ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले का विरोध किया। मेरी पार्टी ने अपना रास्ता खो दिया है। यह वह कांग्रेस नहीं है जो पहले हुआ करती थी। जब भी देशभक्ति और स्वाभिमान की बात आती है, तो मैं किसी के साथ समझौता नहीं करूंगा।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आगे कहा कि मैं अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले का समर्थन करता हूं, लेकिन मैं हरियाणा सरकार से पूछना चाहता हूं कि आपने पांच साल में क्या किया है, इसका हिसाब देना होगा। इस फैसले के पीछे छिपें नहीं। हरियाणा के हमारे भाई कश्मीर में सैनिकों के रूप में तैनात हैं, इसलिए मैंने इसका समर्थन किया।

भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि मेरा जन्म एक देशभक्त परिवार में हुआ, जो लोग अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध करते हैं। मैं उन्हें कहना चाहता हूं। उसूलों पर जहां आंच आए वहां टकराना जरूरी है, जो जिंदा है तो जिंदा दिखना जरूरी है।
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की रविवार को अपने गृह क्षेत्र रोहतक में 'परिवर्तन महा रैली' कर शक्ति प्रदर्शन किया। इस रैली में जहां पार्टी के किसी सीनियर नेताओं को आमंत्रित नहीं किया गया। इससे यह अटकलें लगाई जाने लगी कि हुड्डा एक स्वतंत्र राजनीतिक रास्ता अपनाने के बारे में सोच सकते हैं।
हुड्डा के एक सहयोगी ने नाम ना जाहिर करने की शर्त पर कहा कि 'भव्य रैली' विधानसभा चुनाव में बीजेपी सरकार को बाहर करने के लिए चुनावी बिगुल बजाएगी। उन्होंने संगठनात्मक बदलावों और चुनाव की तैयारियों के लिए समितियों की घोषणा करने से संबंधित कांग्रेस द्वारा निर्णयों में देरी का संकेत दिया, लेकिन हुड्डा की पार्टी छोड़ने की कोई योजना नहीं थी।
उन्होंने कहा, 'चुनाव की तैयारियां बहुत पहले शुरू हो जानी चाहिए थीं। इतना समय नष्ट हो गया है। प्रत्येक व्यक्ति चिंतित है। कार्रवाई की एक रेखा खींची जानी चाहिए। हम भाजपा को कोई रास्ता नहीं दे सकते।' राज्य के एक सीनियर कांग्रेस नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हुड्डा पर उनके कुछ समर्थकों का दबाव हो सकता है लेकिन वह पार्टी नहीं छोड़ेंगे।
अंतरिम पार्टी प्रमुख के रूप में सोनिया गांधी के पदभार संभालने से जाहिर तौर पर मामलों में आसान हुई क्योंकि हुड्डा पहली बार मुख्यमंत्री बने जब वह पार्टी प्रमुख थी। उन्हें उनके प्रतिद्वंद्वी भजनलाल के रहते हुए चुना गया था। हुड्डा 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल हुए थे। लंबे समय से हुड्डा राज्य नेतृत्व में बदलाव की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांग को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने स्वीकार नहीं किया है।
रैली को हुड्डा द्वारा एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि उन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया जाना चाहिए और राज्य के प्रमुख के तौर पर नियुक्त किया जाना चाहिए। टिकटों के वितरण में भी उनकी अहम भूमिका हो। हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा को भी पीसीसी प्रमुख के पद के दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। दोनों नेता इस साल के शुरू में लोकसभा चुनाव हार गए, जिससे उनके राजनीतिक कद में कुछ गिरावट आई। कांग्रेस की हरियाणा यूनिट में राज्य कांग्रेस प्रमुख डॉ. अशोक तंवर सहित हुड्डा और राज्य के कुछ सीनियर नेताओं के बीच मतभेदों के साथ तीव्र गुटबाजी भी चल रही है।

UNSC में कश्‍मीर पर चीन-पाक हारे, भारत ने कहा: वार्ता के लिए आतंकवाद रोके पाकिस्तान

UNSC में कश्‍मीर पर चीन-पाक हारे, भारत ने कहा: वार्ता के लिए आतंकवाद रोके पाकिस्तानसंयुक्त राष्ट्र: जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा हटाए जाने के मामले पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में हुई बैठक के बाद भारत ने पाकिस्तान से शुक्रवार को कहा कि उसे वार्ता आरंभ करने के लिए आतंकवाद रोकना होगा. चीन और पाकिस्तान के अनुरोध पर अनौपचारिक बैठक पूरी होने के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने मीडिया से कहा कि भारत का रुख यही था और है कि संविधान के अनुच्छेद 370 संबंधी मामला पूर्णतय: भारत का आतंरिक मामला है और इसका कोई बाह्य असर नहीं है.
उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि कुछ लोग कश्मीर में स्थिति को ‘भयावह नजरिए’ से दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जो वास्तविकता से बहुत दूर है. उन्होंने कहा कि वार्ता शुरू करने के लिए आतंकवाद रोकिए. अकबरूद्दीन ने कहा कि एक विशेष चिंता यह है कि एक देश और उसके नेतागण भारत में हिंसा को प्रोत्साहित कर रहे हैं और जिहाद की शब्दावली का प्रयोग कर रहे हैं. हिंसा हमारे समक्ष मौजूदा समस्याओं का हल नहीं है. बैठक के बाद चीनी और पाकिस्तानी दूतों के मीडिया को संबोधित करने के बारे में अकबरूद्दीन ने कहा कि सुरक्षा परिषद बैठक समाप्त होने के बाद हमने पहली बार देखा कि दोनों देश (चीन और पाकिस्तान) अपने देश की राय को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की राय बताने की कोशिश कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि भारत कश्मीर में धीरे-धीरे सभी प्रतिबंध हटाने के लिए प्रतिबद्ध है. इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने बैठक के बाद कहा कि बैठक में ‘कश्मीर के लोगों की आवाज सुनी’ गई. लोधी ने कहा कि यह बैठक होना इस बात का सबूत है कि इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना गया है. बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन ने भारत और पाकिस्तान से अपने मतभेद शांतिपूर्वक सुलझाने और ‘एक दूसरे को नुकसान पहुंचा कर फायदा उठाने की सोच त्यागने’ की अपील की.

उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मामले पर चीन का रुख बताते हुए कहा कि भारत के एकतरफा कदम ने उस कश्मीर में यथास्थिति बदल दी है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विवाद समझा जाता है. कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा हटाने और लद्दाख को एक अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाने के भारत के कदम का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के इस कदम ने चीन के संप्रभु हितों को भी चुनौती दी है और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाने को लेकर द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन किया है. चीन काफी चिंतित है.

रूस के उप-स्थायी प्रतिनिधि दिमित्री पोलिंस्की ने बैठक कक्ष में जाने से पहले संवाददाताओं से कहा कि मॉस्को का मानना है कि यह भारत एवं पाकिस्तान का ‘द्विपक्षीय मामला’ है. उन्होंने कहा कि बैठक यह समझने के लिए की गई है कि क्या हो रहा है. उल्लेखनीय है कि बंद कमरे में बैठकों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं होता और इसमें बयानों का शब्दश: रिकॉर्ड नहीं रखा जाता. विचार-विमर्श सुरक्षा परिषद के सदस्यों की अनौपचारिक बैठकें होती हैं. 
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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान से चल रहे तनाव के बीच भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पोख.....

संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के मुताबिक, आखिरी बार सुरक्षा परिषद ने 1965 में ‘भारत-पाकिस्तान प्रश्न’ के एजेंडा के तहत जम्मू कश्मीर के क्षेत्र को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद पर चर्चा की थी. हाल में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि उनके देश ने, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के भारत के फैसले पर चर्चा के लिए सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की औपचारिक मांग की थी.