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‘J&K को वापस आतंक के काल में ले जाना चाहता है गुपकार गैंग, सोनिया-राहुल साफ करें स्टैंड’: अमित शाह

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के रहते वहां किस स्तर पर महिला अधिकारों का हनन किया जा रहा था, किसी से छुपा नहीं, यानि वहां की महिला का राज्य से बाहर किसी पुरुष से विवाह होने पर पिता की संपत्ति आदि से बेदखल हो जाती थी, लेकिन अनुच्छेद 370 समाप्त होने से राज्य से बाहर विवाहित महिलाओं को खोया अधिकार मिलने से वहां जनहित के नाम से गुमराह कर रही स्थानीय पार्टियां पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और नेशनल कांफ्रेंस की नींद होने से इतने हताश हो गए हैं कि आज जनहित की बजाए अपने हित की खातिर एकजुट हो रहे हैं। 

सोशल मीडिया पर यूजर्स पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) को फटकार लगा रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में पिछली बार बीडीओ चुनावों में अलगाव और शर्मिंदगी का सामना करने बाद पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस को डीडीसी चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वे अपने समर्थन आधार और विशेषाधिकार को खोना नहीं चाहते हैं इसलिए हताशा में बहिष्कार ना कर चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

इसके पहले पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती की अगुवाई में बने जम्मू-कश्मीर के गुपकार गुट को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को बड़ा हमला बोला। अमित शाह ने गुपकार गुट को ‘गुपकार गैंग’ करार देते हुए ट्वीट कर कहा कि गुपकार गैंग ग्लोबल हो रहा है। वे चाहते हैं कि विदेशी ताकतें जम्मू-कश्मीर में दखल करें। गुपकार गैंग भारत के तिरंगे का अपमान करता है। क्या सोनिया जी और राहुल जी गुपकार गैंग के ऐसे कदमों का समर्थन करते हैं? उन्हें देश की जनता के सामने अपना स्‍टैंड साफ करना चाहिए। अमित शाह के ट्वीट पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे इस बार चुनाव का बहिष्कार करने नहीं जा रहे हैं। फिर क्या था सोशल मीडिया पर यूजर्स उन्हें निशाना बनाने लगे।

जम्मू कश्मीर में स्थानीय पार्टियों ने साथ मिल कर ‘गुपकार गठबंधन’ बनाया है और कॉन्ग्रेस भी उसके साथ जुड़ी है। अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस गठबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, जो अभी भी है और भविष्य में भी रहेगा। अमित शाह ने इसे गैंग बताते हुए कहा कि जनता इस ‘अपवित्र गठबंधन’ को बर्दाश्त नहीं करेगी, जो देश के हितों के खिलाफ काम करने में लगा हुआ है।

अमित शाह ने ट्विटर पर 3 ट्वीट्स कर के इस गठबंधन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि या तो ‘गुपकार गैंग’ देश के मूड के हिसाब से चले, या फिर जनता इसकी नैया डुबो देगी। उन्होंने कॉन्ग्रेस और गुपकार गठबंधन पर आरोप लगाया कि वो जम्मू कश्मीर को उस काल में वापस लेकर जाना चाहते हैं, जब वहाँ सिर्फ आतंक और उथल-पुथल का साम्राज्य हुआ करता था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त कर दलितों, महिलाओं और आदिवासियों को अधिकार दिए हैं, उन्हें ये वापस छीनना चाहते हैं।

अमित शाह ने कहा कि यही कारण है, जिससे गुपकार गठबंधन और कॉन्ग्रेस को देश में हर जगह जनता द्वारा नकारा जा रहा है। उन्होंने लिखा कि अब ‘गुपकार गैंग’ वैश्विक हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग चाहते हैं कि विदेशी ताकतें भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करें। उन्होंने ‘गुपकार गैंग’ पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के अपमान का भी आरोप लगाया। शाह ने कॉन्ग्रेस की सोनिया गाँधी और उनके बेटे राहुल गाँधी से पूछा कि क्या वो इन चीजों का समर्थन करते हैं?

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को अब इस मामले में अपना स्टैंड साफ़ कर देना चाहिए। एक अन्य केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सोनिया-राहुल से पूछा था कि वो अनुच्छेद-370 पर फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के साथ हैं या विरोध में? जम्मू कश्मीर में होने वाले पंचायती चुनाव में कॉन्ग्रेस द्वारा गुपकार के साथ हाथ मिलाने पर उन्होंने कहा कि ये लोग चीन से समर्थन माँग रहे हैं, क्या कॉन्ग्रेस इसके पक्ष में है?

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जो लोग ये चाहते हैं कि अनुच्छेद-370 वापस आ जाए, वो यहाँ भ्रष्टाचार को जारी रहते देखना चाहते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पहले जम्मू कश्मीर की कोई ‘मुस्लिम बेटी’ राज्य से बाहर शादी करती थी तो उसे संपत्ति के अधिकार से बाहर कर दिया जाता था, जिसे मोदी सरकार ने बदला। उन्होंने आरोप लगाया कि अब फिर से जम्मू कश्मीर को संकीर्ण मानसिकता की तरफ ढकेलने का प्रयास हो रहा है।

इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के फैसले के बारे में पूछा था कि ये निर्णय किसका है? साथ ही जवाब देते हुए कहा था कि ये पूरे देश का निर्णय है, क्योंकि भारत का कोई भी कानून लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर संसद भवन में विचार-विमर्श के बाद ही बनता है। उन्होंने कहा था, ‘मै राहुल गाँधी और सोनिया जी से पूछता हूँ कि इस गठबंधन की एक पार्टी चीन के साथ अनुच्छेद 370 को वापस लाने की बात कहती है, वहीं महबूबा मुफ्ती तिरंगा नहीं उठाना चाहतीं।

जम्मू काश्मीर में "रोशनी विधेयक" रद्द!


खेल देखिये, हिन्दुओं, कैसे अब्दुल  ने पड़ोसी हिन्दू को मार-भगाकर उसकी जमीन, मकान पर कब्जा जमा लिया १९९० में!


फिर कब्जाई जमीन उस कथित शांतिदूतों के नाम करने का षड्यंत्र रचा गया!


बिजली कनेक्शन देने की आड़ लेकर, एक "रोशनी एक्ट" बनाया फारुख अब्दुल्ला सरकार ने!


कब्जाई हिन्दूभूमि को मुस्लिम के नाम करने की फीस रखी गई मात्र १०१ रुपए!


१०१ रुपये जमा करने मात्र से राशि जमा करने वाले के नाम वो जमीन का मालिकाना हक "रोशनी एक्ट" के अंतरगत पट्टा जारी कर दिया जाता, और फिर उस पर बिजली कनेक्शन देकर उस हिन्दूभूमि को सदा के लिए मुसलमान के नाम कर दिया गया!


खेल बहुत गहरा खेला गया फारुख अब्दुल्ला द्वारा!


१९९० की कत्ल वाली रात के पस्चात, जो जमीन जिसके कब्जे में थी, उसे "रोशनी एक्ट" द्वारा उसका मालिक बनाने का कानून फारुख अब्दुल्ला ने बनाया!


१९९० के बाद से मुसलमानों के नाम की गई हिन्दूभूमि के कागजात, जो कि "रोशनी एक्ट" द्वारा जारी किए गए थे, उन्हें रद्द किया जाएगा, और उसके असली स्वामी हिन्दू को ढूंढा जाएगा!


जम्मू-काश्मीर में हिन्दुओ के अच्छे दिनों को आरंभ करता हिन्दू प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी!


इंच इंच हिन्दूभूमि पुनः काश्मीरी हिन्दुओं को दिलाने के लिए संघर्ष करता हिन्दूराज


हिन्दू पंडितों को मार-भगाकर काश्मीर में मुस्लिमों द्वारा कब्जा की गई हिन्दूभूमि को मात्र ₹१०१ में मुसलमानों के नाम करने के लिए फारुख अब्दुल्ला के द्वारा बनाये गए "रोशनी एक्ट" को हिन्दू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रद्द कर दिया है!


साथ ही २००१ में काश्मीर में मुस्लिम नेताओं व उनके रिश्तेदारों के नाम बंदरबांट द्वारा "रोशनी एक्ट" द्वारा कब्जाई हिन्दूभूमि के सारे रिकॉर्ड को भी खंगालने के आदेश जारी किए गए हैं!


भागते हिन्दुओं के बंगले, कोठियां, कारखाने, उद्योग, बाग बगीचे, केशर के बागान मुसलमानों ने कब्जा कर लिए थे!


उन हिन्दूभूमि को आतंकी मुस्लिमों व उनके रिश्तेदारों के नाम करने के लिए "रोशनी एक्ट", जो कि क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति के लिए तैयार किया गया था, उसकी आड़ में बिजली कनेक्शन देने के लिए केवल ₹१०१ में कब्जा जमीनों व बागानों, बंगलों, अन्य हिन्दूभूमि को मुस्लिमों के नाम पर पट्टा जारी कर दिया गया!


काश्मीर को हिन्दुविहीन करने के षड्यंत्र में फारुख अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती दोनों के पिता की मुख्य भूमिकायें थी!


इन्होंने भी अकूत हिन्दूभूमि अपने व अपने रिश्तेदारों के नाम "रोशनी एक्ट" द्वारा पट्टा जारी करते हुए कब्जाई!


अब हिन्दू  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आदेशों से "रोशनी एक्ट" रद्द कर दिया गया है, और १९९० के बाद में जो भी सम्पति मुसलमानों के नाम की गई थी, सब की जांच आऱभ करने का मार्ग खोल दिया है!


हिन्दू   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसालमिक आतंकवाद की असली जड़ पर चोट कर दिए हैं!


इसी काश्मीर से "संविधान" की आड़ लेकर, हिन्दुओं के विरुद्ध आधुनिक "गजवा-ए-हिन्द" का षड्यंत्र फारुख अब्दुल्ला और मुफ्ती मोहम्मद सैयद के द्वारा आरंभ किया गया था! जिसको "रोशनी एक्ट" बनाकर, काश्मीर में से हिन्दुविहीन करने का सफल षड्यंत्र रचा! राजनीतिक आतंकवादियों के बूरे दिन आरंभ हुए हैं!


हिन्दुओं, शीघ्रपतन के शिकार हो कर, नरेन्द्र मोदी को मत कोसो!


वो अखण्ड भारत के लक्ष्य को लेकर, चाणक्य नीति के आधार पर, राजधर्म निभा रहे हैं!


मगर कुछ मूर्खों को तो स्वयं के जागरूक नागरिक होने का सार्वजनिक प्रमाण पत्र लेने की इतनी हड़बड़ाहट लगी रहती है, कि देश में कहीं पर भी किसी सेकुलर हिन्दू के साथ कुछ घटना घटित हुई नहीं, कि लग गए मोदी को गालियां देने!


तरह तरह के सुझावों की झड़ी लगा देते हैं, कि मोदी तो विश्वास जीतने में लग गया है, मोदी ने तो हिन्दुओं के लिए क्या किया है?


ऐसे शीघ्रपतन के शिकार अत्यंत बुद्धिजीवी वर्ग के तथाकथित जागरूक हिन्दुओं को कहना चाहता हूँ कि ७२ वर्षों में जितना षड्यंत्र हिन्दुओं के विरुद्ध कांग्रेस के ईसाई व मुस्लिम नेतृत्व ने किया है, उसकी सटीक जानकारी आपको नहीं है!


आप केवल बरसाती मेंढकों की तरह टर्र टर्र करके मोदी-विरोधी गद्दारों के लिए वातावरण बनाने का अनसमझा पाप ही कर रहे हो!


अगर आपको ये लगता है कि मोदी के अच्छे निर्णयों पर कुछ लिखने मात्र से आपके पाप क्षीण हो गए हैं, तो  ये आपकी मूर्खता ही है!


बुद्धिमान व्यक्ति के तमगे लगाए आप लोग असल में जागते हिन्दुओं को पथभ्रष्ट करने का अनदेखा पाप कर रहे हो!


राजनीतिक धर्म युद्ध में कोई निष्पक्ष नहीं होता!


करोड़ों ग़द्दार मोदी के विरोध में हैं, और करोड़ों हिन्दू मोदी के पक्ष में!


अब आप ही तय करिए कि आप किस पक्ष के साथ हो!


आपके व्यवहार से किसे अधिक लाभ होता है? मोदी को या विपक्ष को?


स्वयं आंकलन करिए व अपनी कलम की दिशा धर्मरक्षार्थ गुप्त व दृश्यतामक निर्णय लेने वाले नरेंद्र मोदी के पक्ष में शाब्दिक करे मोदी-विरोधी पृष्ठभूमि के भंवरजाल में फंसे हिन्दुओं को बाहर निकल आने में साक्षी बनें

महबूबा मुफ्ती की हिरासत 3 महीने और बढ़ी, सज्जाद लोन बोले- मैं आजाद हूँ

महबूबा मुफ्ती और सज्जाद गनी लोन
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की हिरासत शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) को 3 महीने के लिए बढ़ा दी गई। पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने से पहले मुफ्ती समेत कई नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया था। इसके बाद धीरे-धीरे कई नेताओं के हाउस अरेस्ट की अवधि खत्म की गई।
मई में भी पूर्व मुख्यमंत्री की हिरासत को तीन महीने बढ़ाया गया था जो 5 अगस्त को खत्म होने वाली थी। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक मुफ्ती अपने आधिकारिक आवास फेयरव्यू बंगले में अगले 3 महीने और हिरासत में ही रहेंगी। इस बंगले को जेल घोषित किया गया है और उन्हें कोरोना महामारी के मद्देनजर यहाँ शिफ्ट किया गया है।
आदेश में कहा गया, “कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने हिरासत की अवधि आगे विस्तारित करने की सिफारिश की है और इस पर गौर करने के बाद इसे जरूरी समझा गया।”


वहीं, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद गनी लोन को जुलाई 31 को हिरासत से रिहा कर दिया गया। इसकी जानकारी लोन ने ट्वीट पर दी है। लोन को भी अनुच्छेद 370 हटने के बाद हिरासत में लिया गया था।
उन्होंने लिखा, ”आखिरकार एक साल पूरे होने से 5 दिन पहले मुझे बताया गया है कि मैं आजाद हूँ। कितना कुछ बदल गया है, मैं भी बदला हूँ। जेल का यह नया अनुभव नहीं था। लेकिन पहले वाले शारीरिक प्रताड़ना वाले थे, लेकिन ये वाला मानसिक तौर पर थका देने वाला था। उम्मीद कर रहा हूँ जल्दी बहुत कुछ साझा करूँगा।”
लोन की रिहाई के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा कि सुनकर अच्छा लगा कि सज्जाद लोन को अवैध नजरबंद से रिहा कर दिया गया है। उम्मीद है कि इसी तरह अवैध नजरबंदी में बंद दूसरे लोगों को भी रिहा किया जाएगा।
अब कोई उमर से पूछे कि "तुम्हारे दादा शेख अब्दुल्ला ने डॉ श्यामा प्रसाद मुख़र्जी को किस जुल्म में जेल बंद किया था कि उनका मृतक शरीर ही जेल से बाहर आया। उनकी माताश्री पूछती रही 'मेरा बेटा कहाँ है? जवाहर लाल नेहरू से लेकर शेख अब्दुल्ला ने कुछ नहीं बताया कि उनका बेटा जेल में उनके कब्जे में हैं।" तुम लोग विरोधियों के साथ चाहे कुछ कर लो, वही काम जब तुम लोगों के साथ हुआ तो अवैध नज़र आ रहा है, यह कौन-सी सियासत है? 
महबूबा मुफ्ती के साथ हिरासत में जाने वाले कई नेता थे। इसमें फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, सज्जाद लोन जैसे कई नेताओं का नाम शामिल था। लेकिन मार्च में हिरासत के आठ महीने बाद उमर अब्दुल्ला को रिहा किया गया। वहीं, सज्जाद लोन और पीडीपी नेता वाहीन को भी एमएलए हॉस्टल से मुक्त करके हाउस अरेस्ट में शिफ्ट किया गया था।

5 अगस्त ब्लैक डे: सलमान निजामी, कांग्रेस नेता

सलमान निज़ामी के साथ राहुल गाँधी 
आगामी 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के एक साल पूरे होंगे। कांग्रेस नेता सलमान निजामी इससे संबंधित एक ट्वीट किया है। ट्वीट में उसने 5 अगस्त की तारीख़ को काला दिन बताया है। 
पिछले साल 5 अगस्त के दिन जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म किया गया था। अगस्त महीने की 5 तारीख़ को इस ऐतिहासिक कदम के एक साल पूरे हो जाएँगे। जिसके विरोध में सलमान निज़ामी ने ट्वीट किया है। सलमान जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के नेता हैं।
उसने ट्वीट कर कहा है, “5 अगस्त जम्मू-कश्मीर के लिए एक काला दिन है। अनुच्छेद 370 बहाल कर फिर से राज्य का दर्जा दिया जाए।”
टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक़ सलमान खुद को राहुल गाँधी का क़रीबी सहयोगी बताता है। सलमान निजामी भारत विरोधी बातों के लिए जाना जाता है। वह आजाद कश्मीर का समर्थक है। वह अलगाववादियों और आतंकी गतिविधियों का समर्थन करता है।

सलमान का यह भी मानना रहा है कि अफजल गुरु आतंकवादी न होकर शहीद था। एक बार उसने ट्वीट किया था, “तुम कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा।”

कांग्रेस नेता सलमान ने यह ट्वीट ऐसे वक्त में किया है जब पाकिस्तान भी दुष्प्रचार में लगा है। वह दुनिया के सामने 5 अगस्त को एक बेहद बुरे दिन के तौर पर दिखाना चाह रहा है। पाकिस्तान दुष्प्रचार करने में लगा हुआ है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद राज्य के लोग बहुत दुखी हैं, जबकि जम्मू-कश्मीर के तमाम नेताओं और अलगाववादियों की गिरफ़्तारी के बावजूद राज्य में इसका कोई विरोध नज़र नहीं आया था।  
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद वहाँ के लोगों को यह समझ आया कि इसका फ़ायदा केवल उन नेताओं को ही मिल रहा था। इसके पहले तक राज्य के लोगों की बात नहीं हो रही थी पर अब हो रही है। इसलिए जम्मू-कश्मीर के लोग भी इस फैसले का पूरा समर्थन कर रहे हैं। ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने भी 5 अगस्त को काला दिन कहा था और इस दिन विरोध-प्रदर्शन करने के लिए भी कहा था। 

कोरोना वायरस : मोदी सरकार पिता के साए जैसी: इटली से लौटी युवती के पिता

नरेंद्र मोदी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए भारत की तैयारियों और प्रभावित देशों से अपने नागरिकों को लाने की केंद्र सरकार की कोशिशों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है। जबकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी भले इस वैश्विक महामारी को मोदी सरकार पर हमले के मौके की तरह तलाश कर रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया में सरकार की तारीफ करते हुए कुछ लोगों ने जो आपबीती शेयर की है वह बेहद मार्मिक है। इटली से लाई गई एक युवती के पिता ने अपनी भावना साझा करते हुए कहा है कि वो सालों से सरकार की आलोचना कर रहे थे। लेकिन, अब उन्हें एहसास हो रहा है कि मोदी सरकार पिता के साए (fatherly figure) जैसी है। विदेश से लाए गए एक युवक ने कहा है कि ऐसी व्यवस्था तो उसने जर्मनी जैसे यूरोपीय मुल्कों में भी नहीं देखी है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार रोहन दुआ ने इटली से लौटी युवती के पिता का पत्र शेयर किया है। इस पत्र में उन्होंने इंडियन एंबेसी, भारत सरकार और विशेषत: नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है। पिता के मुताबिक उनकी बेटी मास्टर की पढ़ाई करने इटली के मिलान गई थी। वहॉं हालात बिगड़ने पर उसे वापस लौटने को कहा। जब वह लौटने लगी तो उससे भारत वापस जाने का सर्टिफिकेट माँगा गया। उन्होंने खुद इंडियन एंबेसी को संपर्क करने की कोशिश की। मगर मिलान में एंबेसी का कार्यालय बंद होने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। उन्होंने इंडियन एंबेसी के अन्य लोगों को मेल के जरिए संपर्क किया और रात के 10:30 बजे उनकी बेटी ने फोन पर बताया कि उसकी बात दूतावास में हो गई है और वह अगली फ्लाइट से भारत लौट रही है।
पिता के मुताबिक, वे सालों से भारतीय सरकार को कोस रहे थे। लेकिन मोदी सरकार में पिता का चेहरा है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी 15 मार्च को भारत आई और आईटीबीपी अस्पताल में उसकी स्वास्थ्य संबंधी, खान-पान संबंधी सभी जरूरतों का ख्याल रखा गया। गौरतलब है कि इटली उन देशों में शामिल है जो कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित हैं।


भारत सरकार इन दिनों लगातार विदेशों से लौटने वाले अपने नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाने में प्रयासरत है। सोशल मीडिया में वायरल हुए एक विडियो में विदेश से लौटा शख्स मिली सुविधाओं के बारे में बता रहा है। इस विडियो को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी शेयर किया था। इसमें व्यक्ति बता रहा है कि सरकार ने करीब 70 किलोमीटर दूर सभी पैसेंजर को कोरोन्टाइन किया है। बिल्डिंग को लगातार सैनेटाइज किया जा रहा है। बड़े-बड़े अधिकारी मौक़े पर तैनात हैं। उन्हें 24 घंटे की देखरेख में रखा है। साथ ही जहाँ उन्हें रखा गया है वहाँ सरकार ने बहुत अच्छी व्यवस्था की है। सबको अलग से रूम मिले हैं। इसमें उन्हें पानी, चप्पल, बेड, खाना, नई तौलिया सब मुहैया कराया जा रहा है। इसलिए वे नरेंद्र मोदी, स्वास्थ्य मंत्री समेत पुलिस प्रशासन और डॉक्टरों का धन्यवाद करते हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण से निबटने के लिए सरकार ने 400 बेड का कोरोन्टाइन वार्ड तैयार करवाया है। यहाँ विदेश से लौटने वालों को सीधे दिल्ली एयरपोर्ट से लेकर जाया जाएगा। यहाँ इन सभी लोगों की 14 तक की निगरानी होगी और अगर इनमें कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो इन्हें आइसोलेट कर छोड़ा जाएगा। ये कोरोन्टाइन वार्ड नोयडा के सेक्टर 39 में स्थित जिला अस्पताल की नई बिल्डिंग में बना है। यहाँ पर्याप्त संख्या में पैरामेडिकल स्टॉफ तैनात हैं।
नरेंद्र मोदी, जम्मू कश्मीर, कोरोना वायरसमोदी ने वो कर दिखाया, जो हमारे लिए किसी ने नहीं किया : वुहान से लौटी कश्मीरी छात्रा  जम्मू-कश्मीर के कई छात्र चीन में फँसे हुए थे। इन्हें मोदी सरकार सकुशल देश वापस लाने में सफल रही। कोरोना वायरस से प्रभावित इलाक़ों से वापस लौटने के बाद कश्मीरी छात्रों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है। वे सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को धन्यवाद देते नहीं थक रहे। ऐसी ही एक छात्र ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने मन की बात साझा की। कश्मीरी छात्रा ने कहा कि बचपन से लेकर अब तक वो हिंसा की कई वारदातों को देख चुकी थीं, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है जब भारत सरकार ने उनके लिए इतना बड़ा क़दम उठाया।
चैनल ‘सीएनएन न्यूज़ 18’ से बातचीत करते हुए कश्मीरी छात्रा ने कहा कि चीन में फँसे भारतीय छात्रों को वापस लेकर आना कोई साधारण बात नहीं थी। ये बहुत बड़ी बात है। उसने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है जब बाहर फँसे कश्मीरियों के लिए भारत सरकार ने इतना बड़ा काम किया है। उसने कहा कि मोदी ने वो कर दिखाया है, जो आज तक किसी ने नहीं किया। जम्मू कश्मीर के कुछ अन्य छात्रों ने भी मोदी सरकार की तारीफ़ की, जिन्हें वहाँ से बचा कर लाया गया।

चीन के हुबेई प्रान्त की राजधानी वुहान में कोरोना वायरस का संक्रमण सबसे ज्यादा है। वहाँ कई भारतीय छात्र फँसे हुए थे, जिनमें से कई कश्मीरी भी थे। जनवरी के अंतिम हफ्ते में जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री अल्ताफ बुखारी ने पीएम मोदी से गुहार लगाई थी कि कश्मीरी छात्रों को वहाँ से वापस लाया जाए। इसके बाद मोदी सरकार ने उन्हें वापस लाने में सफलता प्राप्त की। जम्मू-कश्मीर से वापस लाए गए छात्र-छात्रों का दिल्ली एयरपोर्ट पर और फिर कश्मीर में चेक-अप किया गया। उनमें कोई संक्रमण नहीं दिखा।
अवलोकन करें:-
अब तक ईरान से 389 भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा चुका है। सोमवार (मार्च 16, 2020) को 53 भारतीय नागरिकों का चौथा जत्था ईरान से भारत पहुँचा। केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर के इस सम्बन्ध में जानकारी दी। यह समाचार उन सभी नागरिक संशोधन बिल के विरोधियों पर इतने जोर का थप्पड़ है, जिसकी गूंज तक विरोधी सुन नहीं पा रहे कि जिस मोदी सरकार पर मुसलमानों को भारत से निकालने का दुष्प्रचार किया जा रहा है, वही मोदी सरकार अपने भारतीय मुस्लिम नागरिकों को वापस भारत ला रही है। क्या जरुरत है उन्हें वापस लाने की, लेकिन मोदी सरकार आसानी से किसी भी भारतीय को मरने नहीं देना चाहती।

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भारतीय मुसलमानों को विशेष विमान से ईरान से लाया जा रहा है आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत में कुछ कट्टरपंथी कोरो....
जहाँ तक कोरोना वायरस की बात है, अब तक इससे चीन में 1868 लोगों की जान जा चुकी है। यूरोप के फ्रांस में भी कोरोना से पहली मौत की पुष्टि हुई है। स्थिति इतनी भयंकर है कि वुहान में एक हॉस्पिटल के डायरेक्टर की ही इस वायरस से मौत हो गई, जिसके अस्पताल में बड़े पैमाने पर कोरोना से पीड़ित मरीज भर्ती थे। अब तक इस खतरनाक वायरस से 72,436 लोगों के संक्रमित होने की ख़बर है। इस वायरस से प्रभावित हो चुके 12,522 मरीज ठीक भी हो चुके हैं। अब तक 25 देशों में इसके फैलने की रिपोर्ट आई है।

जम्मू-कश्मीर के इतिहास में पहली बार बदला कैलेंडर

Jammu Kashmir calendar changed official celebrations of birthday of Sheikh Mohammad Abdullah cancelled
जम्मू कश्मीर के इतिहास में पहली बार राज्य का कैलेंडर बदला है। प्रदेश प्रशासन ने वर्ष 2020 के लिए सरकारी छुट्टियों का ऐलान किया है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारुक अब्दुल्ला के पिता स्वर्गीय शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती (पांच दिंसबर) को होने वाले अवकाश को रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा प्रशासन ने पहली बार 26 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विलय दिवस पर भी राजकीय अवकाश की घोषणा की है।

विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले महाराजा हरि सिंह के पोते और कांग्रेस नेता विक्रमादित्य सिंह ने ट्वीट कर विलय दिवस पर घोषित किए अवकाश पर खुशी जताई और कहा, 'जम्मू-कश्मीर के लोगों को बधाई! अगले साल, 26 अक्टूबर से, जिस दिन मेरे दादा, महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, उस तारीख को अब राजकीय अवकाश के रूप में मनाया जाएगा। यह जम्मू-कश्मीर राज्य बलों और भारतीय सेना के बलिदान का सम्मान है।' 
विलय दिवस पर अवकाश की मांग काफी पुरानी है और बीजेपी, पैंथर्स पार्टी सहित कई राजनीतिक संगठन बरसों से विलय दिवस पर अवकाश की माग कर रहे थे। शुक्रवार को जो कैलेंडर जारी हुआ है उसमें शहीद दिवस (13 जुलाई) का अवकाश शामिल नहीं है जो महाराजा हरि सिंह के खिलाफ हुए विद्रोह में मारे गए लोगों की याद में मनाया जाता था।

सरकार ने जारी किया जम्मू कश्मीर- लद्दाख का नया मानचित्र, POK को दिखाया भारत का हिस्सा

New Mape of India
पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के विभाजन के बाद सरकार द्वारा जारी नए नक्शों में पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) नवगठित जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और गिलगित बल्तिस्तान लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा है। गृह मंत्रालय ने भी एक अधिसूचना में भारत का नया नक्शा जारी किया है जिसमें दोनों केंद्रशासित प्रदेशों को दर्शाया गया है। इसमें पीओके की ‘राजधानी’ मुजफ्फराबाद को देश की भौगोलिक सीमा में दिखाया गया है।
नक्शों के अनुसार नए मानचित्र में पीओके जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश का हिस्सा है और गिलगित बल्तिस्तान लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश का हिस्सा है। गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में करगिल तथा लेह दो जिले हैं और पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य का शेष हिस्सा नए जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में है।
इससे पहले पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य में 1947 में कठुआ, जम्मू, ऊधमपुर, रियासी, अनंतनाग, बारामूला, पुंछ, मीरपुर, मुजफ्फराबाद, लेह और लद्दाख, गिलगित, गिलगित वजारत, चिल्हास और ट्राइबल टेरिटरी 14 जिले थे। 2019 तक पूर्ववर्ती जम्मू - कश्मीर राज्य की सरकार ने इन 14 जिलों के क्षेत्रों को पुनर्गठित करके 28 जिले बना दिए थे।
नए जिलों के नाम थे - कुपवाड़ा, बांदीपुर, गांदेरबल, श्रीनगर, बड़गाम, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, राजौरी, रामबन, डोडा, किश्‍तवाड़, साम्बा और करगिल। इनमें से करगिल जिले को लेह और लद्दाख जिले के क्षेत्र से अलग करके बनाया गया था। विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने 1947 के लेह और लद्दाख जिलों के बाकी क्षेत्रों के अलावा 1947 के गिलगित, गिलगित वजारत, चिल्हास और ट्राइबल टेरिटरी जिलों के क्षेत्रों को समावेशित करते हुए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (कठिनाइयों को हटाना) दूसरे आदेश, 2019 द्वारा नए लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के लेह जिले को परिभाषित किया है।
इसमें कहा गया है कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा तैयार नक्शों को जारी किया गया है जिनमें 31 अक्टूबर 2019 को सृजित नए जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश और नए लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश को दर्शाया गया हैं। इसके अलावा भारत का नया नक्शा जारी किया गया है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि संसद की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को प्रभावी तौर से निरस्त कर दिया और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 को मंजूरी दी। इसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में और गृह मंत्री अमित शाह की देख रेख में पूर्ववर्ती जम्मू - कश्मीर राज्य का 31 अक्टूबर 2019 को नए जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और नए लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पुनर्गठन किया गया।

आज से J&K और लद्दाख बने केंद्र शासित राज्य: R K माथुर ने लद्दाख के पहले उपराज्यपाल के रूप में ली शपथ

आरके माथुर, गिरिश चंद्र मुर्मू
लद्दाख के उपराज्यपाल आरके माथुर (दाएँ) और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल गिरिश चंद्र मुर्मू (बाएँ)
जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बुधवार (30 अक्टूबर) मध्यरात्रि को ख़त्म हो गया। इसके साथ ही दो नए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख आस्तित्व में आ गए। अनुच्छेद-370 के तहत मिले विशेष दर्जे को संसद द्वारा निरस्त किए जाने के बाद आज से यह निर्णय प्रभावी हो गया है। गृह मंत्रालय ने बुधवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी थी।
रिटायर्ड IAS राधाकृष्ण माथुर ने गुरुवार को लद्दाख के पहले उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ़ से IAS उमंग नरुला को लद्दाख के उपराज्यपाल के सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, IPS अधिकारी एसएस खंडारे को लद्दाख पुलिस का प्रमुख बनाया गया है। लद्दाख के अलावा जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल गिरिश चंद्र मुर्मू होंगे।

6 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को पारित कर दिया था। इसके तहत तय हुआ था कि दो अलग-अलग केंद्र शासित राज्यों जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के रूप में 31 अक्टूबर 2019 से अस्तित्व में आएगा। ऐसा पहली बार है जब किसी राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील कर दिया गया है। इस सिससिले में श्रीनगर और लेह में दो अलग-अलग शपथग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। पहला समरोह लेह में हुआ जहाँ आरे माथुर ने लद्दाख के उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली। दूसरा शपथग्रहण समारोह श्रीनगर में आयोजित होगा, जहाँ मुर्मू उपराज्यपाल का पद भार सँभालेंगे।
इसके साथ ही भारत में राज्यों की संख्या अब 28 हो गई है और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या सात से बढ़कर नौ हो गई है। अब जम्मू-कश्मीर के संविधान और रणबीर दंड संहिता का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा। केंद्र शासित प्रदेश बनने के साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की क़ानून व्यवस्था और पुलिस पर केंद्र का सीधा नियंत्रण होगा, जबकि भूमि वहाँ की निर्वाचित सरकार के अधीन होगी।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों ही अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बने हैं। केवल अंतर इतना है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश बना है और लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश है। लद्दाख की ओर से पिछले कई वर्षों से इस माँग को रखा जा रहा था।
शुरुआत में दोनों राज्यों का एक ही हाईकोर्ट होगा लेकिन दोनों राज्यों के एडवोकेट जनरल अलग होंगे। सरकारी कर्मचारियों के सामने दोनों केंद्र शासित राज्यों में से किसी एक को चुनने का विकल्प होगा।

मलेशिया और तुर्की को इस तरह से सबक सिखाने की तैयारी में है भारत!

Narendra Modi and Mahathir Mohamad
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  
मोदी सरकार से पूर्व भारत की सरकारें पाकिस्तान और उसके समर्थकों के विरुद्ध कोई कार्यवाही करने की बजाए डरती थी, कहीं उनका मुस्लिम वोटबैंक नाराज़ न हो जाए। पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित इस्लामिक आतंकवाद को "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" का नाम देकर उसे संरक्षण देते रहे, बेगुनाहों के खून से धरती लाल होती रही, लेकिन तुष्टिकरण पुजारी अपने वोटबैंक की सेवा में तल्लीन रहे। लेकिन सत्ता परिवर्तन की इच्छाशक्ति ने तुष्टिकरण पुजारियों को दरकिनार कर, देश की जनता को चैन से जीने का मार्ग सुगम किया। कल तक जो पाकिस्तान शेर बन भारतीय जनता को डरा रहा था, आज विश्व में अलग-थलग हो गया और भारत की सरकार ने पाकिस्तान का समर्थन कर रहे देशों के विरुद्ध अपनी कमर कस ली है।  
कश्मीर को लेकर नई दिल्ली की आलोचना करने वाले मलेशिया को भारत अब दूसरे तरीके से जवाब देने की तैयारी कर रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर के मुताबिक,भारत मलेशिया से पाम ऑयल (ताड़ के तेल) समेत कई उत्पादों के आयात पर रोक लगाने का फैसला कर सकता है।  भारत ताड़ के तेल के आयात को सीमित करने के उपायों की तलाश कर रहा है। एक उद्योग जगत के सूत्रों पाम ऑयल के अलाव कई अन्य उत्पादों के आयात पर भी रोक लग सकती है। सूत्रों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि इस प्रस्ताव पर अभी चर्चा चल रही है।
भारत ने इसी साल पांच अगस्त में कश्मीर के विशेष राज्य के प्रावधान वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था। मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि भारत ने कश्मीर पर 'आक्रमण और कब्जा' किया है। उन्होंने नई दिल्ली को इस मुद्दे को हल करने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करने को कहा था। मलेशिया के बयान पर भारत ने नाराजगी जताई थी।
भारत दुनिया में ताड़ के तेल का सबसे बड़ा आयातक देश है। ऐसे में यदि भारत मलेशिया से ताड़ के तेल (पाम ऑयल) का आयात  बंद करता है तो इससे मलेशिया के कारोबार पर बड़ा असर पड़ेगा। भारत इसके अलावा तुर्की से होने वाले आयातों पर भी रोक का फैसला हो सकता है
भारत अब इंडोनेशिया, अर्जेंटीना और यूक्रेन जैसे देशों से खाद्य तेलों की आपूर्ति के साथ मलेशियाई पाम तेल का विकल्प तैयार करने की योजना बना रहा है। भारत में एडिबल ऑइल के कुल आयात में करीब दो तिहाई हिस्सा पाम ऑइल का है। इतना ही नहीं भारत सालाना 9 मिलियन टन से अधिक पाम ऑइल खरीदता है और इसका अधिकांश आयाता इंडोनेशिया और मलेशिया से होता है।
मलेशियाई पाम ऑयल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 2019 के पहले नौ महीनों में भारत मलेशियाई पाम ऑयल का सबसे बड़ा खरीदार था और उसने कुल 3.9 मिलियन टन पाम ऑयल का आयात किया था। वाणिज्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि मंत्रालय उन बातों पर टिप्पणी नहीं कर सकता है जो विचाराधीन हैं। वहीं मलेशिया के प्रधानमंत्री ने कहा है कि उन्हें अभी तक भारत से इस मामले पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

पाकिस्तान मीडिया ने खोली पोल : इमरान के फ्लाइट में नहीं आई थी तकनीकी ख़राबी, नाराज सऊदी प्रिंस ने वापस बुला लिया था विमान

इमरान ख़ान
सऊदी के कमर्शियल फ्लाइट से पाक लौटते इमरान ख़ान
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अपनी स्थापना से लेकर आज तक विश्व में जितनी बेइज्जती पाकिस्तान की इमरान खान नियाज़ी के प्रधानमंत्री रहते हो रही है, कभी नहीं हुई, जबकि कश्मीर मुद्दे को हर पाकिस्तानी शासक भुनाता रहा है। ऐसा आभास होता है कि आतंकवाद से अधिक कश्मीर मुद्दा पाकिस्तान के समाप्त होने का कारण बनेगा, आगे भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है, कहना कठिन है। क्योकि लगता है इस समय पाकिस्तान के हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा, नज़र आ रहा है।  
आपको याद होगा कि ‘यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली’ में भाग लेने न्यूयॉर्क गए पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान के फ्लाइट में लौटते वक़्त तकनीकी ख़राबी की ख़बर आई थी, जिसके बाद उन्हें वापस अमेरिका में लैंड कराया गया था। 28 सितम्बर को पाकिस्तान लौट रहे इमरान ख़ान की फ्लाइट की न्यूयॉर्क में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। 1 सप्ताह के दौरे के लिए वहाँ गए इमरान ख़ान को इसके बाद पूरी रात अमेरिका में ही रुकना पड़ा था। कहा गया था कि फ्लाइट में आई ख़राबी को दूर किए जाने के बाद वह फिर से वापस पाकिस्तान के लिए रवाना होंगे।
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के पीएम इमरान खान की दुनिया को बरगलाने की कोशिश नाकाम हो चुकी है। यूएनजीए में जब वो अपनी बात रख रहे थे तो उनके भाषण में शांति के मंच से शांति का शब्द गायब था। वो परमाणु यु्द्ध की धमकी देकर दुनिया को डरा रहे थे। इस बीच पाकिस्तान के एक साप्ताहिक मैगजीन फ्राइडे टाइम्स ने सनसनीखेज खुलासा किया है।
‘फ्राइडे टाइम्स’ के अनुसार, इमरान ख़ान की फ्लाइट को किसी तकनीकी ख़राबी की वजह से नहीं बल्कि सऊदी क्राउन प्रिंस की नाराज़गी के कारण वापस न्यूयॉर्क में लैंड करना पड़ा था। इमरान ख़ान के भाषण में कही गई कुछ बातों से सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इतने ख़फ़ा थे कि उन्होंने तुरंत इमरान सहित पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को अपने प्राइवेट जेट से निकाल बाहर करने का आदेश दे दिया था।

हालाँकि, इमरान ख़ान अमेरिका गए तो थे सऊदी क्राउन प्रिंस के स्पेशल जेट से लेकिन वह वापस एक कमर्शियल फ्लाइट से लौटे। इमरान जिस प्लेन से वापस आए, वो भी सऊदी एयरलाइन्स की ही नियमित कमर्शियल फ्लाइट थी। इमरान के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री भी उनके साथ इसी फ्लाइट से वापस आए। पाकिस्तान ने तब बहाना बनाया था कि इमरान भूकंप से पीड़ित इलाक़ों का जल्द से जल्द दौरा करना चाहते हैं, इसीलिए वह जल्दबाजी में कमर्शियल फ्लाइट से वापस आ रहे हैं।
‘फ्राइडे टाइम्स’ ने लिखा कि संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में इमरान ख़ान के सम्बोधन के समय कई कुर्सियाँ खाली थीं, लेकिन फिर भी वापस लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। मीडिया पोर्टल ने पूछा कि जब पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में जोरदार प्रदर्शन किया, फिर पाकिस्तानी स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोदी को इसके तुरंत बाद वापस बुलाने की नौबत क्यों आन पड़ी? इस बात पर भी सवाल खड़े किए गए कि इमरान ख़ान ने जम्मू कश्मीर मसले को ‘इस्लामिक पाकिस्तान बनाम हिन्दू भारत’ के मुद्दे में बदल दिया है।
यूएनजीए में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने बड़ी-बड़ी बातें की थीं। जहाँ एक तरफ उन्होंने दुनिया को परमाणु युद्ध का डर दिखाया था, वहीं दूसरी तरफ भारत के ख़िलाफ़ इस्लामिक राष्ट्रों का समर्थन लेने के लिए पैगम्बर मुहम्मद और इस्लाम पर लम्बा-चौड़ा भाषण दिया था। उन्होंने जम्मू कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बनाने के लिए पूरा जोर लगाया। हालाँकि, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सम्बोधन में एक बार भी इमरान खान नियाज़ी या पाकिस्तान का नाम नहीं लिया था और विकास के अन्य मुद्दों को केंद्र में रखा था।
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पाकिस्तान की खैबर पैख्‍तूनख्‍वा प्रांत की सरकार ने पिछले दिनों स्कूली छात्रों के लिए बुर्का या अबाया अनिवार्य कर...

फ्राइडे टाइम्स की रिपोर्ट को पाकिस्तान सरकार ने खारिज किया है। सरकार का कहना है कि इस तरह से इमरान खान की यात्रा को संदेह के घेरे में लाने की कोशिश की गई है। सच बात तो ये है कि इमरान खान की यात्रा पूरी तरह सफल थी। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि प्रोपगैंडा के तहत इमरान खान को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है जबकि यूएस में उनकी यात्रा बेहद सफल थी। 

फिर फिसली इमरान खान की जुबान

Imran Khanपाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की जुबान एक बार फिर फिसल गई, जब वह सितम्बर 27 को संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इस दौरान भारत के खिलाफ खूब बोले। उन्‍होंने कश्‍मीर का मसला उठाया तो राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी अपनी भड़ास निकाली। इसी दौरान उनकी जुबान फिसल गई, जब उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री की बजाय 'राष्‍ट्रपति' कह दिया।
प्रधानमंत्री के तौर पर यह इमरान खान का संयुक्‍त राष्‍ट्र में पहला संबोधन था। उन्‍होंने जिस तरह से इस दौरान वैश्विक मंच पर अपनी बात रखी, उससे उनके भीतर की खीझ और भड़ास साफ नजर आ रही थी। क्रिकेटर से सियासी मैदान में पारी शुरू करने वाले इमरान खान ने बीते साल अगस्‍त में प्रधानमंत्री का पद संभाला था। कश्‍मीर पर दुनिया का साथ नहीं मिलने से पहले से ही बौखलाए इमरान खान अपने संबोधन के दौरान भारत और अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के खिलाफ भड़ास निकालते दिखे।

इमरान खान संयुक्‍त राष्‍ट्र में करीब 50 मिनट बोले, जबकि यहां नेताओं के संबोधन के लिए 15 मिनट का समय ही निर्धारित था। अपने संबोधन में कश्‍मीर मुद्दा उठाते हुए इमरान खान ने भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्‍तों का जिक्र किया और कहा कि अगर भारत के साथ पाकिस्‍तान को युद्ध के हालात से गुजरना पड़ता है तो इसका असर केवल भारत-पाकिस्‍तान तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर इसका असर होगा।
पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 9/11 के बाद दुनियाभर में 'इस्लामोफोबिया' (इस्लाम को लेकर पैदा किया जा रहा डर) तेजी से बढ़ा है और इसके चलते लोगों के बीच विभाजन भी हो रहा है। मुस्लिम महिलाओं के 'हिजाब' पहनने पर उन्‍होंने कहा कि इसे भी कुछ देशों में एक समुदाय विशेष के खिलाफ हथियार की तरह इस्‍तेमाल किया जा रहा है और यह सब 9/11 के बाद हो रहा है।
यह पहला मौका नहीं है, जब इमरान खान की जुबान फिसली हो। इससे पहले ईरान दौरे के दौरान इमरान खान ने ऐतिहासिक तथ्‍यों को लेकर ऐसी गलतबयानी की थी, जिसे लेकर वह सोशल मीडिया पर घिर गए। इमरान खान दो पड़ोसी मुल्‍कों बीच व्‍यापारिक संबंधों की बात कर रहे थे, जब उन्‍होंने गलती से एशियाई देश जापान और यूरोपीय देश जर्मनी को पड़ोसी मुल्‍क बता दिया, जबकि उन्‍हें यूरोपीय देशों जर्मनी और फ्रांस का जिक्र करना था। इसे लेकर सोशल मीडिया पर उनकी खूब फजीहत हुई थी।

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धमकी भरा रहा इमरान का सम्बोधन 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के मंच से भारत के विकास की कहानी बयां की। उन्होंने भारत के विकास व इसकी उपलब्धियों को दुनिया के लिए प्रेरणा के रूप में पेश किया। इस दौरान मोदी ने कहा कि भारत की विकास गाथा पूरी दुनिया के गरीबों में विश्वास पैदा करने और दुनिया को एक नई आशा देने का काम करती है। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री मोदी का भाषण विकास और शांति पर पर केंद्रित रहा वहीं इमरान खान का भाषण इस्लाम, युद्ध और कश्मीर पर केंद्रित रहा
पीएम मोदी ने कहा, 'विकास के प्रयास हमारे हैं, लेकिन इसका फल सभी के लिए है, संपूर्ण विश्व के लिए है।' मोदी ने कहा, 'हमारा प्रयास सारे संसार के लिए है। जब मैं उन देशों के बारे में सोचता हूं कि जो भारत की तरह ही प्रयास कर रहे हैं, तो हमारा विश्वास और दृढ़ हो जाता है' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंक के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जिसने दुनिया को 'बुद्ध' दिया है न कि 'युद्ध'। मोदी ने कहा कि हमारी आवाज में आतंक के खिलाफ दुनिया को सतर्क करने की गंभीरता भी है और आक्रोश भी।
जबकि संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले संबोधन के दौरान इमरान खान ने कश्मीर मुद्दा उठाया और मांग की कि भारत को कश्मीर में ‘अमानवीय कर्फ्यू’ हटाना चाहिए एवं सभी बंदियों को रिहा करना चाहिए। इमरान का भाषण मुख्य रूप से इस्लामोफोबिया, कश्मीर, और आरएसएस पर केंद्रित रहा। यहीं नहीं इमरान ने एक अतंराष्ट्रीय मंच से सीधे-सीधे भारत को युद्ध ही नहीं बल्कि परमाणु युद्ध की भी धमकी दे डाली। अपने लंबे भाषण में इमरान खान ने एक बार फिर युद्ध की धमकी देते हुए कहा कि यदि दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों में युद्ध होता है तो उसके नतीजे उनकी सीमाओं से परे जाएंगे।
इमरान ने अपने भाषण में भारत विरोधी बयानबाजी करने के साथ-साथ कांग्रेस का भी नाम लिया। इमरान ने कहा, 'पिछली सरकार में कांग्रेस के गृह मंत्री ने बयान दिया था कि आरएसएस के शिविरों में आतंकवादियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ' जहां प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में शांति और सद्भावना की बात की वहीं इमरान का भाषण ठीक इसके उलट युद्ध की धमकी पर आधारित रहा। 
इमरान को शायद ज्ञान नहीं कि कांग्रेस ने जब भी आरएसएस के विरुद्ध जो भी कदम उठाये, परेशानी का सामना करना पड़ा। इसको अपना वोटबैंक बना ब्रह्मास्त्र की तरह इस्तेमाल कर हिन्दू और मुसलमानों के बीच दरार डालने का प्रयास करती रही थी, वैसे आज भी कर रही है। 
भारत के आतंरिक मामलों में दखल देते हुए इमरान खान ने एक बार फिर से आर्टिकल 370 को निरस्त करने के केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना की। इमरान ने धमकी देते हुए कहा कि यदि कश्मीर से कर्फ्यू हटता है तो वहां खून की नदियां बहेंगी। इमरान ने कहा, 'यहां तक की कांग्रेस पार्टी ने भी लोगों को घरों के अंदर कैद रखे जाने की आलोचना की है।'
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने कांग्रेस का नाम अपने संबोधन में लिया हो। इस महीने की शुरुआत में जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को लेकर जो डोजियर सौंपे थे उनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के नेता उमर अब्दुल्ला के उन बयानों को शामिल किया था जो अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद दिए गए थे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज संयुक्त राष्ट्र की 74वीं सभा को संबोधित करने जा रहे हैं. दुनियाभर के नेताओं की नजर पीए....

पिछले महीने ही पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने कश्मीर मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र को विशेष प्रक्रिया के लिए एक पत्र लिखा था। अपने पत्र में, माजरी ने दावा किया था कि राहुल गांधी ने कहा है कि जम्मू और कश्मीर में लोग मर रहे हैं। बाद में राहुल गांधी ने अपने रुख को स्पष्ट किया और कहा कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में हिंसा भड़का रहा है। राहुल ने कहा था कि यह भारत का आंतरिक मसला है जिसमें इस्लामाबाद के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है। कांग्रेस ने भी दोहराया था कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है और हमेशा रहेगा। 

30 साल बाद यासीन मलिक के ख़िलाफ़ ट्रायल शुरू

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Image may contain: 3 people, meme and textजम्मू स्थित टाडा कोर्ट ने अलगाववादी यासीन मलिक के ख़िलाफ़ ट्रायल शुरू कर दिया है। मामला 1990 का है, जब भारतीय वायुसेना के 4 निहत्थे जवानों की हत्या कर दी गई थी। इनमें स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना भी शामिल थे।इस घटना के 30 साल बाद ट्रायल शुरू किया गया है, जिससे वीरगति को प्राप्त जवानों के परिजनों की न्याय की आस फिर से जगी है। टाडा कोर्ट ने तिहाड़ जेल में बंद यासीन मलिक को पेश करने का भी आदेश दिया है।
Terrorist and Disruptive Activities (Prevention) Act (TADA) कोर्ट इस मामले में 1 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। आरोप है कि जिन आतंकियों ने जवानों की हत्या की थी, वे यासीन मलिक द्वारा संचालित आतंकी संगठन के सदस्य थे। यह घटना जनवरी 25, 1990 को हुई थी। गोलीबारी की इस घटना में टाडा कोर्ट ने यासीन मालिक सहित 4 आरोपितों को पेश होने का आदेश दिया है।
1990 में इस मामले में सीबीआई ने टाडा कोर्ट के समक्ष 2 चार्जशीट दायर की थी। 1995 में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने ट्रायल पर रोक लगा दी थी। यासीन मलिक टेरर फंडिंग के मामले में भी आरोपित है और फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। उसे पुलवामा हमले के बाद गिरफ़्तार किया गया था।

भारतीय वायुसेना के जवानों की हत्या तब की गई जब उनके पास कोई भी हथियार नहीं था और वे एयरपोर्ट जाने के लिए बस का इन्तजार कर रहे थे। वहाँ भारतीय वायुसेना के 14 जवान थे। तभी अचानक से एक मारुति जिप्सी और एक बाइक से 5 आतंकी वहाँ पहुँचे और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उन्होंने एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवानों के अलावा 2 कश्मीरी महिलाओं की भी हत्या कर दी गई, जो बस का इंतजार कर रही थीं। आतंकियों ने ख़ून से लथपथ जवानों के सामने डांस करते हुए जिहादी नारे भी लगाए थे।