Showing posts with label saudi prince Mohammad Bin Salman Al Saud. Show all posts
Showing posts with label saudi prince Mohammad Bin Salman Al Saud. Show all posts

पाकिस्तान मीडिया ने खोली पोल : इमरान के फ्लाइट में नहीं आई थी तकनीकी ख़राबी, नाराज सऊदी प्रिंस ने वापस बुला लिया था विमान

इमरान ख़ान
सऊदी के कमर्शियल फ्लाइट से पाक लौटते इमरान ख़ान
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
अपनी स्थापना से लेकर आज तक विश्व में जितनी बेइज्जती पाकिस्तान की इमरान खान नियाज़ी के प्रधानमंत्री रहते हो रही है, कभी नहीं हुई, जबकि कश्मीर मुद्दे को हर पाकिस्तानी शासक भुनाता रहा है। ऐसा आभास होता है कि आतंकवाद से अधिक कश्मीर मुद्दा पाकिस्तान के समाप्त होने का कारण बनेगा, आगे भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है, कहना कठिन है। क्योकि लगता है इस समय पाकिस्तान के हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा, नज़र आ रहा है।  
आपको याद होगा कि ‘यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली’ में भाग लेने न्यूयॉर्क गए पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान के फ्लाइट में लौटते वक़्त तकनीकी ख़राबी की ख़बर आई थी, जिसके बाद उन्हें वापस अमेरिका में लैंड कराया गया था। 28 सितम्बर को पाकिस्तान लौट रहे इमरान ख़ान की फ्लाइट की न्यूयॉर्क में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। 1 सप्ताह के दौरे के लिए वहाँ गए इमरान ख़ान को इसके बाद पूरी रात अमेरिका में ही रुकना पड़ा था। कहा गया था कि फ्लाइट में आई ख़राबी को दूर किए जाने के बाद वह फिर से वापस पाकिस्तान के लिए रवाना होंगे।
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के पीएम इमरान खान की दुनिया को बरगलाने की कोशिश नाकाम हो चुकी है। यूएनजीए में जब वो अपनी बात रख रहे थे तो उनके भाषण में शांति के मंच से शांति का शब्द गायब था। वो परमाणु यु्द्ध की धमकी देकर दुनिया को डरा रहे थे। इस बीच पाकिस्तान के एक साप्ताहिक मैगजीन फ्राइडे टाइम्स ने सनसनीखेज खुलासा किया है।
‘फ्राइडे टाइम्स’ के अनुसार, इमरान ख़ान की फ्लाइट को किसी तकनीकी ख़राबी की वजह से नहीं बल्कि सऊदी क्राउन प्रिंस की नाराज़गी के कारण वापस न्यूयॉर्क में लैंड करना पड़ा था। इमरान ख़ान के भाषण में कही गई कुछ बातों से सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इतने ख़फ़ा थे कि उन्होंने तुरंत इमरान सहित पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को अपने प्राइवेट जेट से निकाल बाहर करने का आदेश दे दिया था।

हालाँकि, इमरान ख़ान अमेरिका गए तो थे सऊदी क्राउन प्रिंस के स्पेशल जेट से लेकिन वह वापस एक कमर्शियल फ्लाइट से लौटे। इमरान जिस प्लेन से वापस आए, वो भी सऊदी एयरलाइन्स की ही नियमित कमर्शियल फ्लाइट थी। इमरान के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री भी उनके साथ इसी फ्लाइट से वापस आए। पाकिस्तान ने तब बहाना बनाया था कि इमरान भूकंप से पीड़ित इलाक़ों का जल्द से जल्द दौरा करना चाहते हैं, इसीलिए वह जल्दबाजी में कमर्शियल फ्लाइट से वापस आ रहे हैं।
‘फ्राइडे टाइम्स’ ने लिखा कि संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में इमरान ख़ान के सम्बोधन के समय कई कुर्सियाँ खाली थीं, लेकिन फिर भी वापस लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। मीडिया पोर्टल ने पूछा कि जब पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में जोरदार प्रदर्शन किया, फिर पाकिस्तानी स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोदी को इसके तुरंत बाद वापस बुलाने की नौबत क्यों आन पड़ी? इस बात पर भी सवाल खड़े किए गए कि इमरान ख़ान ने जम्मू कश्मीर मसले को ‘इस्लामिक पाकिस्तान बनाम हिन्दू भारत’ के मुद्दे में बदल दिया है।
यूएनजीए में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने बड़ी-बड़ी बातें की थीं। जहाँ एक तरफ उन्होंने दुनिया को परमाणु युद्ध का डर दिखाया था, वहीं दूसरी तरफ भारत के ख़िलाफ़ इस्लामिक राष्ट्रों का समर्थन लेने के लिए पैगम्बर मुहम्मद और इस्लाम पर लम्बा-चौड़ा भाषण दिया था। उन्होंने जम्मू कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बनाने के लिए पूरा जोर लगाया। हालाँकि, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सम्बोधन में एक बार भी इमरान खान नियाज़ी या पाकिस्तान का नाम नहीं लिया था और विकास के अन्य मुद्दों को केंद्र में रखा था।
अवलोकन करें:-
About this website

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
पाकिस्तान की खैबर पैख्‍तूनख्‍वा प्रांत की सरकार ने पिछले दिनों स्कूली छात्रों के लिए बुर्का या अबाया अनिवार्य कर...

फ्राइडे टाइम्स की रिपोर्ट को पाकिस्तान सरकार ने खारिज किया है। सरकार का कहना है कि इस तरह से इमरान खान की यात्रा को संदेह के घेरे में लाने की कोशिश की गई है। सच बात तो ये है कि इमरान खान की यात्रा पूरी तरह सफल थी। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि प्रोपगैंडा के तहत इमरान खान को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है जबकि यूएस में उनकी यात्रा बेहद सफल थी। 

मोदी सरकार का अरब देशों को बड़ा झटका, अब अमेरिका से खरीदेगा करोड़ों का तेल

narendra modi- indian oilसऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (saudi prince Mohammad Bin Salman Al Saud) पाकिस्तान को अरबों डॉलर की सौगात देने के बाद आज(फरवरी 19) को भारत आ रहे हैं। लेकिन उससे एक दिन पहले ही भारत ने अरब देशों को तगड़ा झटका दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अगुआई वाली सरकार ने क्रूड ऑयल के लिए अरब देशों से निर्भरता कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल (Indian Oil) ने रोजाना 60 हजार बैरल या कुल 30 लाख टन तेल खरीदने के लिए अमेरिका के साथ बड़ा समझौता किया है। 

भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को मिलेगी मजबूती

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश की सबसे बड़ी रिफाइनर आईओसी (IOC) भारत की पहली सरकारी ऑयल कंपनी है, जिसने अमेरिका के साथ सालाना डील की है। इससे भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड रिलेशंस को भी मजबूती मिलेगी। पहले कंपनी स्पॉट मार्केट से अमेरिका ऑयल खरीदती रही है और इससे नवंबर और जनवरी के बीच 60 लाख बैरल तेल खरीदने के लिए एक मिनी-टर्म डील की थी।

अप्रैल से शुरू होगी सप्लाई

आईओसी (IOC) संजीव सिंह ने कहा कि सालाना कॉन्ट्रैक्ट अप्रैल, 2019 से शुरू होगा और मार्च, 2020 में खत्म होगा। हालांकि गोपनीयता का हवाला देते हुए उन्होंने सेलर कंपनी या प्राइसिंग का ब्योरा देने से इनकार कर दिया। एक इंडस्ट्री सोर्स ने कहा कि आईओसी (IOC) ने नॉर्वे की ऑयल कंपनी इक्विनोर के साथ डील की है, जो अमेरिकी क्रूड ग्रेड की कई वैरायटी की सप्लाई करेगी। इक्विनोर ने भी इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

अरब देशों पर निर्भरता होगी कम

इंडियन ऑयल अपनी तेल जरूरतों का अधिकांश तेल लॉन्ग टर्म डील्स के माध्यम से खरीदती है, जो ज्यादातर ओपेक (OPEC) देशों के साथ होती है। ओपेक के सदस्यों में अधिकांश अरब देश शामिल हैं। टर्म डील से आईओसी को ओपेक देशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
अवलोकन करें:-
इस वेबसाइट का परिचय
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
भारत के अनुभवी ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि भारत को पुलवामा आतंकवादी हमले के मद्देनजर आगामी विश्व कप में पा.....

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सरकार की मानसिकता स्पष्ट दिखने लगी है। सऊदी अरब द्वारा पाकिस्तान को दी जा रही मदद के मद्देनज़र मोदी सरकार के इस निर्णय से भारत में मोदी विरोधी स्तब्ध हैं, इन परिस्थितियों में मोदी के इस साहसिक निर्णय का कोई विरोध करने का सोंच भी नहीं सकता। प्रधानमंत्री इस समय केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान का साथ देने वालों के विरुद्ध भी कार्यवाही करने से नहीं चूक रहे। यह काम केवल किसी राजनेता के दृढ़ इच्छाशक्ति पर ही निर्भर करता है। जिसे प्रकट करने में मोदी लेशमात्र भी संकोच नहीं कर रहे।