Showing posts with label IOC. Show all posts
Showing posts with label IOC. Show all posts

अनुच्छेद 370 ने पाकिस्तान को कंगाली के कगार पर पहुँचाया

आर.बी.एल.निगम 
भारत में मोदी विरोधी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त होने पर पता नहीं किस आधार पर विरोध कर रहे हैं? पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे से ध्यान हटाने 370 का विरोध कर रहा है, लेकिन विश्व में इस मुद्दे पर कोई साथ नहीं, सिवाए भारत में मोदी विरोधियों के। मोदी विरोधियों के ही कारण केवल जम्मू-कश्मीर ही नहीं, आतंकी भारत की धरती को बेगुनाहों के खून से लाल कर रहे थे और ये लोग "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" का नाम देकर पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को बचाकर भारत ही नहीं, बल्कि विश्व में हिन्दू समाज को ही कलंकित करते रहे। परन्तु समय का चक्र ऐसा पलटा, वही आतंकवाद पाकिस्तान और मोदी विरोधियों के लिए मुसीबत बन गया है। 
पाकिस्तान विश्व में अलग-थलग पड़ने के बावजूद अपने देश को निर्दोष सिद्ध करने के प्रयास में कंगाली के द्वार पर जा पहुँचा है, लगभग वही स्थिति भारत में मोदी विरोधियों की होने वाली है। जो नेता देश का नहीं हुआ, किसका होगा? इमरान खान की मजबूरी है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्यवाही करके फौज से बगावत कर अपनी कुर्सी नहीं गंवाना नहीं चाहता, लेकिन मोदी विरोधियों को लगभग हर चुनाव में मुंह तोड़ जवाब मिल रहा है, अगर पाकिस्तान के पक्ष में बोलकर सत्ता में आने का सपना देख रहे हैं, पाकिस्तान से बुरी स्थिति उनकी होने वाली है। क्योकि पाकिस्तान और मोदी विरोधियों की लगभग एक ही बोली है, इन दोनों की बोली में बहुत कम अन्तर है। 
प्रधानमन्त्री इमरान खान अगर वास्तव में देशप्रेमी हैं, उन्हें चाहिए आतंकवाद के विरुद्ध कदम उठाए, जैसाकि उन्होंने अमेरिका में स्वीकार किया है कि "पाकिस्तान में 40 आतंकी संगठन और 40,000 आतंकी सक्रीय हैं।" होने दें अपनी सरकार कुर्बान, लेकिन इतिहास में नाम करने के साथ-साथ आने वाले सत्ताधीशों के लिए एक उदाहरण बन रोशन रहेंगे।   
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद पाकिस्तान बौखला गया है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के साथ लगभग सारे द्विपक्षीय संबंध तोड़ दिए और सारे व्यापारिक रिश्ते खत्म कर लिए हैं। पाक इसकी शिकायत चीन, अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र, रूस, यूएई सहित ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन लेकर गया। लेकिन सभी देशों से उसको मुंह की खानी पड़ी है।
संयुक्त राष्ट्र से मिली ठंडी प्रतिक्रिया
भारत के खिलाफ शिकायत करते हुए पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र को जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को रद करने के संबंध में एक पत्र लिखा था। लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने पत्र पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया।
फिर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर दावा किया कि जम्मू-कश्मीर पर भारत ने 1949 के यूएनएससी प्रस्ताव का उल्लंघन किया है। इसके जवाब में गुटेरेस ने पाकिस्तान को 1972 में हुए शिमला समझौते का हवाला दिया। 1971 भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान की हार के बाद शिमला समझौता हुआ था, जिसमें कहा गया था कि दोनों देश शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से अपने सभी मुद्दों को द्विपक्षीय रूप से सुलझाएंगे।
अमेरिका से कोई समर्थन नहीं
जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा हटाने के भारत के फैसले को पलटने के लिए पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने के लिए अमेरिका से भी अपील की। लेकिन अमेरिका ने मामले पर तटस्थ भूमिका निभाई है। जम्मू और कश्मीर के विकास और पाकिस्तान की शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टागस ने कहा कि कश्मीर पर देश की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अमेरिका ने संयम बरतने का आह्वान किया और भारत और पाकिस्तान दोनों से इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की। कश्मीर को लेकर अमेरिका की हमेशा से यह नीति रही है कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा है।
चीन ने आशाओं को किया धराशायी
जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार के कदम पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उसने कहा कि इस कदम ने चीन की संप्रभुता को कमजोर किया है। लेकिन, उसकी यह प्रतिक्रिया लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने तक सीमित थी। शाह महमूद कुरैशी ने चीनी नेताओं के साथ वार्ता के लिए बीजिंग के लिए उड़ान भरी। कुरैशी और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच एक बैठक के बाद चीन ने एक बयान जारी कर कहा, कश्मीर मुद्दा औपनिवेशिक इतिहास से बचा हुआ विवाद है। इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और द्विपक्षीय समझौते के प्रस्तावों के आधार पर ठीक से और शांति से हल किया जाना चाहिए। चीनी विदेश मंत्री के बयान में द्विपक्षीय समझौते ने कुरैशी की आशाओं को धराशायी कर दिया कि उसके हर मौसम का मित्र चीन उसके साथ अधिक मजबूती से खड़ा होगा।
ओआइसी ने दिया झटका
पाकिस्तान को सबसे तगड़ा झटका ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआइसी) से लगा। 57 इस्लामिक देशों वाले संगठन ओआइसी ने जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन की निंदा की। लेकिन जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा दिए जाने को लेकर भारत के साथ पाकिस्तान की कूटनीतिक लड़ाई में शामिल होने से इन्कार कर दिया। शक्तिशाली ओआइसी सदस्य देश सऊदी अरब और तुर्की ने कश्मीर मुद्दे के निपटारे के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय वार्ता का आह्वान किया है। वहीं यूएई ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताया। ओआइसी के सदस्य देश आर्थिक भागीदारी और रणनीतिक साझेदारी के लिए भारत को अधिक महत्व देते हैं। वहीं भारत ने सभी ओआइसी सदस्यों के साथ अपने आर्थिक और सामरिक संबंधों को मजबूत किया है।
भारत को रूस का मिला खुला समर्थन
मुश्किल की घड़ी में भारत का साथ देने वाले रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कश्मीर को लेकर मोदी सरकार का फैसला संवैधानिक दायरे में लिया गया है। रूस के इस बयान के बाद पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है।
तालिबान की फटकार
अफगानिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन तालिबान ने भी पाकिस्तान को फटकार लगाई है। तालिबान ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि कश्मीर पर ताजा फैसले के बाद भारत एवं पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को अफगानिस्तान के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
अवलोकन करें:-

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आज समाज सेवा के नाम पर जो लूट मची हुई है, उसे देख नेता शब्द एक ग्लानि बनता जा रहा है। जिस....

कंगाली की कगार पर पाक 
पाकिस्तान गहरे आर्थिक संकट में है और उसने इस साल सऊदी अरब और चीन से दो अरब डॉलर का कर्ज लिया है। इसकी अर्थव्यवस्था 3.5 फीसद से कम की दर से बढ़ रही है। मंदी के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था 6.5-7.0 फीसद की दर से बढ़ रही है और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के आकार की लगभग नौ गुना है।

पाकिस्तान के पास कश्मीर के अलावा कोई राष्ट्रीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा ही नहीं

Related image
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
विश्व बिरादरी के बीच अलग-थलग पड़ चुका पाकिस्तान अब भी कश्मीर का राग अलापने से बाज नहीं आ रहा। ये हालत तब है, जब इस्लामी देशों के सम्मेलन आईओसी में पाकिस्तान को इस बार भी बुरी तरह मुंह की खानी पड़ी। सऊदी अरब के मक्का में आईओसी का 14वां सम्मेलन था, जिसके दो सत्र थे। पहले सत्र में इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने आपसी संबंधों के बारे में अपना नज़रिया रखा, जिसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कश्मीर के मुद्दे पर भी प्रमुखता से चर्चा की, मगर इसमें उनके भाषण को खास तवज्जो नहीं दी गई।
अगले सत्र में सम्मेलन को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने संबोधित किया, जिसमें उन्होंने फिलिस्तीन में इज़रायली ज़्यादतियों के साथ-साथ कश्मीर का बेसुरा राग छेड़ दिया, मगर इसका नतीजा भी शून्य ही रहा। इमरान के भाषण को सुना तो गया, लेकिन इसके बाद जो प्रस्ताव पारित हुआ, उसमें कश्मीर का कोई ज़िक्र नहीं था। साफ है कि इस्लामी देशों ने कश्मीर पर इमरान की बात को कोई तवज्जो नहीं दी। इस सम्मेलन के बाद बार-बार अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का राग अलापने वाले पाकिस्तान की घनघोर बेइज्जती हुई है।
Image result for शिमला समझौताशिमला समझौता 
पाकिस्तान नेताओं को इतना भी ज्ञान नहीं कि 1972 में हुए समझौते के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच किसी तीसरे देश की दखलंदाजी स्वीकार नहीं होगी। वर्तमान सरकार को उसे पढ़ने तक का समय नहीं। हकीकत में पाकिस्तान के किसी भी नेता के पास कश्मीर के अलावा कोई और मुद्दा ही नहीं है। न उनको जनता के सुखसाधन, देश का मनोबल और न ही देश में चल रहे आतंकी कारखानों को बंद कर विश्व में पाकिस्तान को सम्मानित करने की चिन्ता है। 
कहते है "किसी की फटी में टाँग फंसाना" पाकिस्तान का भी वही हाल है। सिन्ध, बलोचिस्तान, पख्तून और कब्जाए कश्मीर के हिस्से तक को संभाल नहीं पा रहा, बात पुरे कश्मीर की कर रहा है। ये सब प्रान्त पाकिस्तान फौज के ज़ुल्मों से दुखी होकर, अलग होने को तैयार हैं। लेकिन सत्ता और विपक्ष सभी आतंकवाद के मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, क्योकि जिसने भी आतंकवादी सरगनों पर सख्ती की बात की, उसे फौज के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।  
Image result for शिमला समझौता
पाकिस्तान से ईस्ट पाकिस्तान अलग होकर, बांग्लादेश क्यों बना? किसी भी पाकिस्तान नेता ने इस ओर कभी नहीं सोंचा और न ही कोई जरुरत। पाकिस्तान नेता कभी अपनी फौज के दिशा-निर्देश के विरुद्ध जाने का दुस्साहस नहीं कर सकते। सरकार चुनती जनता है, लेकिन चलती है फौज के दिशा-निर्देश से।  
इमरान के रहते बेइज्जत होता पाकिस्तान 
अंतराष्ट्रीय मंच पर हुई इस बेइज्जती के चलते पाकिस्तान में इमरान की भारी आलोचना हो रही है मीडिया में इस बात की चर्चा गर्म है। पाकिस्तानी मीडिया गहरे सदमे में है कि इस्लामी सहयोग संगठन का हिस्सा होने के बावजूद पाकिस्तान की ऐसी भद्द क्यों पिट रही है? विश्व में इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद से जो जितनी बेइज्जती पाकिस्तान की हो रही है, किसी अन्य प्रधानमंत्री तो क्या फौजी शासक के कार्यकाल में नहीं हुई। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और जियो टीवी के संपादक हामिद मीर ने तो ट्वीट किया, जिसका मज़मून था कि "मक्का में पाकिस्तान की शिकस्त। उन्होंने तो यहां तक लिखा कि इतनी बेइज्जती को देखकर मैं चुपचाप सम्मेलन से निकल गया।"
इस सम्मेलन में भारतीय पत्रकारों को भी कवरेज के लिए बुलाया गया, जिसके चलते भी पाकिस्तान काफी खफा है। लंदन में रह रहीं पाकिस्तान की महिला एक्टिविस्ट शमाँ जुनेजो ने तो इसे इमरान और पाकिस्तान की विदेश नीति की विफलता करार दिया है। असल में इस्लामी देशों के सहयोग संगठन की स्थापना 25 सितंबर 1969 में मोरक्कों में हुई थी। स्मरण हो, कि इस्लामिक सहयोग संगठन का मूल मुद्देश्य फिलिस्तीन की आज़ादी और इस्लामी देशों के बीच परस्पर सहयोग करना था, लेकिन दुनिया में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव और अपने नफे-नुकसान को साधने के चक्कर में ये संगठन अपने मूल उद्देश्य से भटक गया।
अमेरिका के इशारे पर इस्लामिक देश 
आज हालत यह है कि अगर टर्की और ईरान को छोड़ दें तो बाकी इस्लामी देश अमेरिका के पिठ्ठू बने हुए हैं और सऊदी अरब इन पिट्ठुओं में सबसे ऊपर है, मगर पाकिस्तान को असली दिक्कत भारत से इसलिए है कि पिछले 1 और 2 मार्च को जेद्दा में हुए इस्लामी सहयोग संगठन की बैठक में अरब देशों की ओर से भारत को भी शामिल होने का निमंत्रण मिला था। इस सम्मेलन की टाइमिंग ऐसी थी कि पाकिस्तान इससे बौखला गया। क्योंकि 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में पाकिस्तानपरस्त आतंकी तंजीम जैश-ए-मोहम्मद ने आत्मघाती हमले को अंजाम दिया था। इसलिए पाकिस्तान नहीं चाहता था कि भारत को इस सम्मेलन में आमंत्रित किया जाए मगर हुआ एकदम उल्टा।
इस सम्मेलन में भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बहुत ही सारगर्भित भाषण दिया और पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की कड़ी निंदा की,  जिससे पाकिस्तान बुरी तरह चिढ़ गया। हालत यहां तक पहुंच गई थी कि पाकिस्तान ने सुषमा जी को आमंत्रित करने का सख्त विरोध किया और यहां तक कह दिया कि वे सम्मेलन में शामिल नहीं होगा। हालांकि, इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इसमें शिरकत की, लेकिन उन्होंने सुषमा स्वराज के भाषण का बायकॉट किया। सम्मेलन में सुषमा जी की शिरकत को पाकिस्तान ने अपना अपमान माना।
इस्लामी देशों के सम्मेलन में भारत को निमंत्रण मिलना मोदी सरकार की सशक्त विदेश नीति की कामयाबी है। इसी का असर है कि खुद को इस्लामी बिरादरी का ठेकेदार मानने वाला पाकिस्तान भारत से चिढ़ा हुआ है। इस्लामी देशों के संगठन की इस बेरुखी को पाकिस्तान अभी भूल नहीं पाया था कि एक बार फिर उसे करारी शिकस्त मिली है। पाकिस्तान में इमरान की सख्त आलोचना हो रही है, इसके बावजूद इमरान सऊदी अरब को अपना दोस्त सिर्फ इसलिए मानते हैं क्योंकि ये देश पाकिस्तान की जब-तब थोड़ी बहुत मदद करता रहा है।
Image result for इमरान खान
सऊदी अरब में पाकिस्तान की बेइज्जती 
पिछले दिनों सऊदी अरब पहुंचते ही इमरान जब वहां के किंग से मिले तो उन्होंने उनका अपमान भी किया। असल में मक्का में ओआईसी के सम्मेलन में सऊदी अरब के किंग से मुलाक़ात के दौरान इमरान ख़ान का एक विडियो सामने आया, जिसमें वो रेड कार्पेट पर चलते हुए सऊदी अरब के बादशाह सलमान तक पहुंचते हैं और उनसे हाथ मिलाने के बाद कुछ बात करते हैं। हालांकि, जो विडियो फुटेज सामने आया है, उसमें पाकिस्तानी पीएम किंग से सीधे बात न कर ट्रांसलेटर से बात कर रहे हैं। पता चला है कि इसके बाद सऊदी किंग काफी नाराज हैं। इमरान ख़ान हाथ तो किंग सलमान से मिला रहे हैं, लेकिन बात ट्रांसलेटर से कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए विडियो में इमरान ख़ान किंग सलमान की तरफ़ देख भी नहीं रहे हैं। यहां तक कि इमरान ख़ान ने किंग सलमान को प्रतिक्रिया में कुछ कहने का भी वक़्त नहीं दिया और वहां से अचानक निकल गए। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि इमरान ख़ान ने किंग सलमान का सरासर अपमान किया है और उन्हें राजनयिक शिष्टाचार भी नहीं आता। कई लोग तो सलाह दे रहे हैं कि पाकिस्तान के नेताओं को राजनयिक व्यवहार सीखने की ज़रूरत है। इस घटना से ये माना जा रहा है कि अब सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच दूरियां बढ़ सकती हैं।
असल में सऊदी अरब एक कारोबारी देश है। उसने अगले डेढ़ साल तक पाकिस्तान को कच्चा तेल उधार देने का वादा किया है। पाकिस्तान को अपने मित्र देशों से मदद की जरूरत है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था का पूरी तरह जनाजा निकल चुका है। पाकिस्तान को डर है कि इस्लामी देशों से रिश्ते अगर खराब हुए तो उसे भारी नुकसान भुगतना पड़ेगा। वर्तमान में ईरान से उसके रिश्ते बहुत नाज़ुक दौर में हैं और ईरान तो पाकिस्तान का बिरादर मुल्क है। पाकिस्तान से उसकी सीमा सटी हुई है। इमरान घरेलू मोर्चे पर भी बुरी तरह घिरे हुए हैं।
Image result for इमरान खान
बिश्केक में पाकिस्तान का अपमान किया 
किसी भी देश का प्रधानमंत्री विश्व में अपने देश के स्वाभिमान और गौरव का सम्मान करने का कोई अवसर नहीं खोना चाहता, लेकिन पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान पाकिस्तान को बेइज्जत करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। अभी बिश्केक सम्मलेन में आयोजक में सम्मान में सब खड़े हुए, लेकिन बेचारे इमरान खान इतने थके हुए थे कि खड़े होने की चेष्टा तक नहीं की, और जब खड़े भी हुए तो लगता है शायद पैरों को सीधा कर तुरन्त बैठ गए, जबकि समस्त मेहमान खड़े हुए थे। दूसरे अर्थों में यही कहा जा सकता है कि इन्हे शिष्टाचार का लेशमात्र भी ज्ञान नहीं। 
इमरान के खिलाफ मोर्चा 
पाकिस्तान की सियासी जमात मुस्लिम लीग (नून) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी इमरान के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। कराची, बलूचिस्तान और उत्तरी वजीरिस्तान के कबाइली इलाकों में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ आंदोलन हो रहे हैं। पश्तूनों पर पाकिस्तानी फौज जुल्म ढा रही है। पिछले दिनों पाकिस्तानी फौज की फायरिंग में 20 पश्तून आंदोलनकारियों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। भारत की सख्त कूटनीति के कारण कश्मीर पर भी पाकिस्तान को लगातार पटखनी मिल रही है। जल्द ही पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में सालाना बजट पास किया जाएगा, जिसके बाद उम्मीद है कि महंगाई और बढ़ेगी और फिर वहां की अवाम सड़कों पर उतरेगी। पाकिस्तान में सिविल वॉर के हालात बन रहे हैं। ऐसे में क्या इतिहास खुद को दोहराएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई कोई भी सरकार 5 साल पूरे नहीं नहीं कर सकी है।

इमरान खान ने सऊदी शाह सलमान का किया अपमान!

Imran Khan with Saudi Kingमक्‍का: पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पिछले दिनों मक्‍का में थे। वह यहां इस्‍लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक में हिस्‍सा लेने के लिए पहुंचे हुए थे, जब‍ उनकी सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्‍दुल्‍लाजीज से भी मुलाकात हुई। लेकिन वह जिस तरह से सऊदी शाह से मिले, उसे लेकर सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना होने लगी। लोगों ने यह भी कहा कि पाकिस्‍तान के पीएम को कूटनीतिक 'मैनर्स' सिखाने की जरूरत है।
इमरान खान ने आखिर ऐसा क्‍या किया कि वह सोशल मीडिया पर ट्रोल हो गए? आरोप है कि सऊदी शाह इमरान खान के स्‍वागत के लिए खड़े थे। इस दौरान इमरान उनतक पहुंचे और सऊदी शाह से कुछ कहा। लेकिन जब तक सऊदी शाह का दुभाषिया उनकी बात को ट्रांसलेट कर उन्‍हें बताता, इमरान आगे बढ़ गए, जबकि प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी राष्‍ट्र प्रमुख को रुककर इससे सुनना होता है। लोगों ने इसे सऊदी शाह का अपमान करार दिया है।
इस संबंध में एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें इमरान खान, सऊदी शाह सलमान की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। वहां पहुंचकर वह उनसे कुछ कहते हैं। इससे पहले कि दुभाषिया उनकी बात को ट्रांसलेट कर सऊदी शाह को बताता और उनकी ओर से कुछ जवाब आता, इससे पहले ही इमरान वहां से निकल गए, जो कूटनीतिक आचरण के खिलाफ माना गया।
इसके लिए इमरान की आलोचना करते हुए पत्रकार नायला इनायत ने इशारों-इशारों में कहा कि 'चयन समिति' जब किसी प्रधानमंत्री का चयन करती है और उन्‍हें कूटनीतिक मैनर्स भी सिखाया जाना चाहिए। बताया जाता है कि सऊदी प्रशासन को भी इमरान का यह रवैया नागवार गुजरा और इसलिए शाह सलमान ने इमरान खान से मुलाकात और किसी अन्‍य तरह की द्विपक्षीय बैठक को रद्द कर दिया।
यहां यह भी उल्‍लेखनीय है कि नकदी से जूझ रहे पाकिस्‍तान को मदद देने वाले कुछ चुनिंदा देशों में सऊदी अरब भी शामिल है, जिसने पाकिस्‍तान को अरबों डॉलर की मदद दी है। लेकिन यह घटना दोनों देशों के रिश्‍तों को प्रभावित कर सकती है।(साभार)

मोदी सरकार का अरब देशों को बड़ा झटका, अब अमेरिका से खरीदेगा करोड़ों का तेल

narendra modi- indian oilसऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (saudi prince Mohammad Bin Salman Al Saud) पाकिस्तान को अरबों डॉलर की सौगात देने के बाद आज(फरवरी 19) को भारत आ रहे हैं। लेकिन उससे एक दिन पहले ही भारत ने अरब देशों को तगड़ा झटका दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अगुआई वाली सरकार ने क्रूड ऑयल के लिए अरब देशों से निर्भरता कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल (Indian Oil) ने रोजाना 60 हजार बैरल या कुल 30 लाख टन तेल खरीदने के लिए अमेरिका के साथ बड़ा समझौता किया है। 

भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को मिलेगी मजबूती

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश की सबसे बड़ी रिफाइनर आईओसी (IOC) भारत की पहली सरकारी ऑयल कंपनी है, जिसने अमेरिका के साथ सालाना डील की है। इससे भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड रिलेशंस को भी मजबूती मिलेगी। पहले कंपनी स्पॉट मार्केट से अमेरिका ऑयल खरीदती रही है और इससे नवंबर और जनवरी के बीच 60 लाख बैरल तेल खरीदने के लिए एक मिनी-टर्म डील की थी।

अप्रैल से शुरू होगी सप्लाई

आईओसी (IOC) संजीव सिंह ने कहा कि सालाना कॉन्ट्रैक्ट अप्रैल, 2019 से शुरू होगा और मार्च, 2020 में खत्म होगा। हालांकि गोपनीयता का हवाला देते हुए उन्होंने सेलर कंपनी या प्राइसिंग का ब्योरा देने से इनकार कर दिया। एक इंडस्ट्री सोर्स ने कहा कि आईओसी (IOC) ने नॉर्वे की ऑयल कंपनी इक्विनोर के साथ डील की है, जो अमेरिकी क्रूड ग्रेड की कई वैरायटी की सप्लाई करेगी। इक्विनोर ने भी इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

अरब देशों पर निर्भरता होगी कम

इंडियन ऑयल अपनी तेल जरूरतों का अधिकांश तेल लॉन्ग टर्म डील्स के माध्यम से खरीदती है, जो ज्यादातर ओपेक (OPEC) देशों के साथ होती है। ओपेक के सदस्यों में अधिकांश अरब देश शामिल हैं। टर्म डील से आईओसी को ओपेक देशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
अवलोकन करें:-
इस वेबसाइट का परिचय
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
भारत के अनुभवी ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि भारत को पुलवामा आतंकवादी हमले के मद्देनजर आगामी विश्व कप में पा.....

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सरकार की मानसिकता स्पष्ट दिखने लगी है। सऊदी अरब द्वारा पाकिस्तान को दी जा रही मदद के मद्देनज़र मोदी सरकार के इस निर्णय से भारत में मोदी विरोधी स्तब्ध हैं, इन परिस्थितियों में मोदी के इस साहसिक निर्णय का कोई विरोध करने का सोंच भी नहीं सकता। प्रधानमंत्री इस समय केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान का साथ देने वालों के विरुद्ध भी कार्यवाही करने से नहीं चूक रहे। यह काम केवल किसी राजनेता के दृढ़ इच्छाशक्ति पर ही निर्भर करता है। जिसे प्रकट करने में मोदी लेशमात्र भी संकोच नहीं कर रहे।