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वारिस पठान का सिर कलम करो, 11 लाख रुपए का ईनाम पाओ: मुस्लिम संगठन हक-ए-हिंदुस्तान मोर्चाकी घोषणा

वारिस पठान
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पार्टी के पूर्व विधायक वारिस पठान द्वारा पिछले दिनों दिए गए एक विवादित बयान का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। पठान के बयान का लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने-अपने तरीके से विरोध कर रहे हैं। हिंदू संगठनो के साथ-साथ अब मुस्लिमों संगठनों ने भी पठान के बयान का खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, बिहार के एक मुस्लिम संगठन ने वारिस पठान का सिर कलम करने पर 11 लाख रुपए का ईनाम घोषित किया है।
बीते दिन शुक्रवार(फरवरी 21) को बिहार के मुजफ्फरपुर में कंपनी बाग रोड स्थित कुछ हिन्दू और मुस्लिम संगठनों ने एक साथ रोड पर आकर वारिस पठान के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान हाथों में बैनर लेकर निकले लोग पठान मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे। बैनर लिए चल रहे लोगों ने पठान के फोटो को जूतों से पीटना शुरू कर दिया और देखते ही देखते लोगों ने बैनर को आग के हवाले कर दिया। मुजफ्फरपुर के एक अल्पसंख्यक सामाजिक संगठन हक-ए-हिंदुस्तान मोर्चा ने वारिस पठान का सिर कलम करने वाले को 11 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा कर दी
इससे पहले गुरुवार(फरवरी 20) को अपने बयान पर सफाई देते हुए वारिस पठान ने कहा था, “मैंने देश और किसी धर्म के खिलाफ कुछ भी गलत नहीं कहा है। सीएए के खिलाफ हर धर्म के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता तो गोली तक मारने की बात कहते हैं। भारतीय जनता पार्टी देश के लोगों को बाँटना चाहती है। मैं अपने बयान पर माफी नहीं माँगूँगा। वहीं इस बयान को लेकर पठान के खिलाफ पुणे में शिकायत दर्ज कराई गई है।
बीते दिनों सीएए के ख़िलाफ गुलबर्ग में रैली आयोजित करते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पूर्व MLA वारिस पठान के भाषण का एक वीडियो सामना आया था। भाषण में वारिस पठान ने सीएए के ख़िलाफ़ बोलते हुए कहा था, “उनकी (मुसलमानों की) संख्या अभी 15 करोड़ है, लेकिन ये 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी है। अगर ये 15 करोड़ साथ में आ गए, तो सोच लो उन 100 करोड़ हिंदुओं का क्या होगा?”


वारिस पठान ने 15 मिनट की अपनी बातचीत में ओवैसी को शेर बताते हुए सीएए के ख़िलाफ़ शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रही महिलाओं को शेरनियाँ बताया था। उन्होंने भीड़ को उकसाते हुए कहा था कि हिंदुओं को हिलाना है और मोदी-अमित शाह के तख्त को गिराना है, तो आवाज ऐसी बनानी है कि वो आवाज यहाँ से निकले और सीधे दिल्ली के अंदर जाकर गिरे।
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एक तरफ मुस्लिम हितों के लिए बनी पार्टियां सेकुलरिज्म की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ, मुसलमानों से सेकुलरिज्म भूल जाने को कहते हैं। कुछ समय पूर्व लिखे शीर्षक "सेकुलरिज्म सिर्फ तब तक, जब तक भारत में इस्लाम की हकूमत नहीं ले आते : अरफ़ा खानुम", शत-प्रतिशत नागरिकता संशोधक कानून के विरोध की इनकी जहरीली मानसिकता सामने आ रही है।

वारिस पठान वही नेता हैं, जिनकी 2016 में महाराष्ट्र विधानसभा से सदस्यता इसलिए खत्म कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने सदन में भारत माता की जय बोलने से इनकार कर दिया था।

अनुच्छेद 370 ने पाकिस्तान को कंगाली के कगार पर पहुँचाया

आर.बी.एल.निगम 
भारत में मोदी विरोधी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त होने पर पता नहीं किस आधार पर विरोध कर रहे हैं? पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे से ध्यान हटाने 370 का विरोध कर रहा है, लेकिन विश्व में इस मुद्दे पर कोई साथ नहीं, सिवाए भारत में मोदी विरोधियों के। मोदी विरोधियों के ही कारण केवल जम्मू-कश्मीर ही नहीं, आतंकी भारत की धरती को बेगुनाहों के खून से लाल कर रहे थे और ये लोग "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" का नाम देकर पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को बचाकर भारत ही नहीं, बल्कि विश्व में हिन्दू समाज को ही कलंकित करते रहे। परन्तु समय का चक्र ऐसा पलटा, वही आतंकवाद पाकिस्तान और मोदी विरोधियों के लिए मुसीबत बन गया है। 
पाकिस्तान विश्व में अलग-थलग पड़ने के बावजूद अपने देश को निर्दोष सिद्ध करने के प्रयास में कंगाली के द्वार पर जा पहुँचा है, लगभग वही स्थिति भारत में मोदी विरोधियों की होने वाली है। जो नेता देश का नहीं हुआ, किसका होगा? इमरान खान की मजबूरी है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्यवाही करके फौज से बगावत कर अपनी कुर्सी नहीं गंवाना नहीं चाहता, लेकिन मोदी विरोधियों को लगभग हर चुनाव में मुंह तोड़ जवाब मिल रहा है, अगर पाकिस्तान के पक्ष में बोलकर सत्ता में आने का सपना देख रहे हैं, पाकिस्तान से बुरी स्थिति उनकी होने वाली है। क्योकि पाकिस्तान और मोदी विरोधियों की लगभग एक ही बोली है, इन दोनों की बोली में बहुत कम अन्तर है। 
प्रधानमन्त्री इमरान खान अगर वास्तव में देशप्रेमी हैं, उन्हें चाहिए आतंकवाद के विरुद्ध कदम उठाए, जैसाकि उन्होंने अमेरिका में स्वीकार किया है कि "पाकिस्तान में 40 आतंकी संगठन और 40,000 आतंकी सक्रीय हैं।" होने दें अपनी सरकार कुर्बान, लेकिन इतिहास में नाम करने के साथ-साथ आने वाले सत्ताधीशों के लिए एक उदाहरण बन रोशन रहेंगे।   
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद पाकिस्तान बौखला गया है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के साथ लगभग सारे द्विपक्षीय संबंध तोड़ दिए और सारे व्यापारिक रिश्ते खत्म कर लिए हैं। पाक इसकी शिकायत चीन, अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र, रूस, यूएई सहित ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन लेकर गया। लेकिन सभी देशों से उसको मुंह की खानी पड़ी है।
संयुक्त राष्ट्र से मिली ठंडी प्रतिक्रिया
भारत के खिलाफ शिकायत करते हुए पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र को जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को रद करने के संबंध में एक पत्र लिखा था। लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने पत्र पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया।
फिर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर दावा किया कि जम्मू-कश्मीर पर भारत ने 1949 के यूएनएससी प्रस्ताव का उल्लंघन किया है। इसके जवाब में गुटेरेस ने पाकिस्तान को 1972 में हुए शिमला समझौते का हवाला दिया। 1971 भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान की हार के बाद शिमला समझौता हुआ था, जिसमें कहा गया था कि दोनों देश शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से अपने सभी मुद्दों को द्विपक्षीय रूप से सुलझाएंगे।
अमेरिका से कोई समर्थन नहीं
जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा हटाने के भारत के फैसले को पलटने के लिए पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने के लिए अमेरिका से भी अपील की। लेकिन अमेरिका ने मामले पर तटस्थ भूमिका निभाई है। जम्मू और कश्मीर के विकास और पाकिस्तान की शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टागस ने कहा कि कश्मीर पर देश की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अमेरिका ने संयम बरतने का आह्वान किया और भारत और पाकिस्तान दोनों से इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की। कश्मीर को लेकर अमेरिका की हमेशा से यह नीति रही है कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा है।
चीन ने आशाओं को किया धराशायी
जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार के कदम पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उसने कहा कि इस कदम ने चीन की संप्रभुता को कमजोर किया है। लेकिन, उसकी यह प्रतिक्रिया लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने तक सीमित थी। शाह महमूद कुरैशी ने चीनी नेताओं के साथ वार्ता के लिए बीजिंग के लिए उड़ान भरी। कुरैशी और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच एक बैठक के बाद चीन ने एक बयान जारी कर कहा, कश्मीर मुद्दा औपनिवेशिक इतिहास से बचा हुआ विवाद है। इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और द्विपक्षीय समझौते के प्रस्तावों के आधार पर ठीक से और शांति से हल किया जाना चाहिए। चीनी विदेश मंत्री के बयान में द्विपक्षीय समझौते ने कुरैशी की आशाओं को धराशायी कर दिया कि उसके हर मौसम का मित्र चीन उसके साथ अधिक मजबूती से खड़ा होगा।
ओआइसी ने दिया झटका
पाकिस्तान को सबसे तगड़ा झटका ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआइसी) से लगा। 57 इस्लामिक देशों वाले संगठन ओआइसी ने जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन की निंदा की। लेकिन जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा दिए जाने को लेकर भारत के साथ पाकिस्तान की कूटनीतिक लड़ाई में शामिल होने से इन्कार कर दिया। शक्तिशाली ओआइसी सदस्य देश सऊदी अरब और तुर्की ने कश्मीर मुद्दे के निपटारे के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय वार्ता का आह्वान किया है। वहीं यूएई ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताया। ओआइसी के सदस्य देश आर्थिक भागीदारी और रणनीतिक साझेदारी के लिए भारत को अधिक महत्व देते हैं। वहीं भारत ने सभी ओआइसी सदस्यों के साथ अपने आर्थिक और सामरिक संबंधों को मजबूत किया है।
भारत को रूस का मिला खुला समर्थन
मुश्किल की घड़ी में भारत का साथ देने वाले रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कश्मीर को लेकर मोदी सरकार का फैसला संवैधानिक दायरे में लिया गया है। रूस के इस बयान के बाद पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है।
तालिबान की फटकार
अफगानिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन तालिबान ने भी पाकिस्तान को फटकार लगाई है। तालिबान ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि कश्मीर पर ताजा फैसले के बाद भारत एवं पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को अफगानिस्तान के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आज समाज सेवा के नाम पर जो लूट मची हुई है, उसे देख नेता शब्द एक ग्लानि बनता जा रहा है। जिस....

कंगाली की कगार पर पाक 
पाकिस्तान गहरे आर्थिक संकट में है और उसने इस साल सऊदी अरब और चीन से दो अरब डॉलर का कर्ज लिया है। इसकी अर्थव्यवस्था 3.5 फीसद से कम की दर से बढ़ रही है। मंदी के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था 6.5-7.0 फीसद की दर से बढ़ रही है और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के आकार की लगभग नौ गुना है।

कांग्रेस के डीएनए में ही है हिन्दू विरोध


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
हिन्दू विरोध की भावना कांग्रेस के डीएनए में है। और इस डीएनए के सूत्रधार हैं महात्मा गाँधी, जो मन्दिर में बैठकर 'ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सम्मति दे भगवान...' कहने की हिम्मत तो कर सकते थे, लेकिन किसी मस्जिद में बैठकर 'ईश्वर अल्लाह तेरो नाम...' कहने का साहस नहीं कर पाए। यदि नाथूराम गोडसे द्वारा कोर्ट में दर्ज 150 बयानों का गंभीरता से अध्ययन किया जाए, तो यह बात प्रमाणित हो जाएगी कि भारत में पाकिस्तान-प्रेम और तुष्टिकरण के जन्मदाता महात्मा गाँधी ही हैं, और यही उनकी मौत का कारण बना। और अब वर्तमान में इसी तुष्टिकरण और पाकिस्तान-प्रेम ने कांग्रेस और समस्त छद्दम धर्म-निर्पेक्षों की दुकानों यानि पार्टियों को पाताललोक की ओर अग्रसर कर दिया है।
पिताश्री एम.बी.एल.निगम 
ज्ञात हो, स्वतन्त्रता पूर्व प्रतिदिन शाम के समय महात्मा गाँधी के प्रवचन का बाल्मीकि मन्दिर, मन्दिर मार्ग के मोड़ पर, से सीधा प्रसारण होता था। उस कालखंड में हर साल बकरा ईद पर सदर बाजार में गऊ हत्या करने पर दंगा होता था। बात 1945 में बकरा ईद के दिन की है। उस दिन सदर बाजार में चर्चित लोटन पहलवान ने गऊ हत्यारों से गाय को बचाने कई हत्यारों की बकरा ईद मनवा दी थी। पुलिस ने लहू-लुहान लोटन को गिरफ्तार कर लिया। बरहाल, शाम को अपने प्रवचन में महात्मा गाँधी ने कहा: "आज दिल्ली में सबकुछ ठीकठाक रहा। बस पुलिस ने सदर बाजार से एक दंगाई को गिरफ्तार किया है....." उस दिन मेरे पिताश्री एम.बी.एल. निगम ने झंडेवालान मन्दिर के बाहर लहू-लुहान लोटन को पुलिस ट्रक पर देखा था। वैसे उस वर्ष के बाद कभी बकरा ईद पर न कोई दंगा हुआ और न ही कोई गाय कटी।  
17 दिसंबर, 2010… विकीलीक्स ने राहुल गांधी की अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर से 20 जुलाई, 2009 को हुई बातचीत का एक ब्योरा दिया। राहुल ने अमेरिकी राजदूत से कहा था, ‘भारत विरोधी मुस्लिम आतंकवादियों और वामपंथी आतंकवादियों से बड़ा खतरा देश के हिन्दू हैं।’ अमेरिकी राजदूत के सामने दिया गया उनका ये बयान कांग्रेस की बुनियादी सोच को ही दर्शाता है। ये कहा जा सकता है कि कांग्रेस हमेशा ही देश की 20 करोड़ की आबादी को खुश करने के लिए 100 करोड़ हिन्दुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करती रही है।
पीछे राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी जनेऊधारी हिन्दू बन मन्दिरों में माथा टेकते नज़र आए थे, वही काम वर्तमान में लोकसभा चुनाव 2019 में कर, हिन्दुओं को भ्रमित कर रहे हैं, वही राहुल मन्दिर जाने वालों पर कितनी आपत्तिजनक बात कहते थे। राहुल अथवा प्रियंका गाँधी जो शायद ही कभी अपने दादा फिरोज गाँधी की कब्र पर माथा टेकने नहीं गए, फिर किस आधार पर मन्दिरों में जाकर माथा टेक पूजा कर रहे हैं? 
राहुल के आदेश से हिन्दुओं को ‘गाली’ दे रहे कांग्रेसी!
पिछले साल 11 जुलाई को कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हिन्दुओं को कट्टरपंथी बताते हुए ‘हिन्दू पाकिस्तान’ की बात कही। इसके बाद 13 जुलाई को दिग्विजय सिंह ने हिन्दुओं को कट्टरपंथी कहा और भारत के पाकिस्तान बन जाने की बात कही। खबर है कि यह सब राहुल गाधी के आदेश से किया जा रहा है। गौरतलब है कि 11 जुलाई को ही राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात की थी और मुलाकात से पहले और बाद वह यही संदेश देना चाहते हैं कि मुस्लिमों की असल हितैषी कांग्रेस है।  

मणिशंकर अय्यर ने भगवान राम के अस्तित्व पर उठाए सवाल
कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की हिन्दू धर्म, हिन्दू देवी-देवताओं में कोई आस्था नहीं है। हिन्दू धर्म में आस्था और जनेऊधारी हिन्दू बनने का ढोंग करने वाले राहुल गांधी के खासमखास वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने हाल ही में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया था। दिल्ली में राष्ट्र विरोधी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित ‘एक शाम बाबरी मस्जिद के नाम’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने भगवान राम, अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि स्थल सभी को कठघरे में खड़ा कर दिया। मस्जिद और मुसलमानों के प्रेम में डूबे अय्यर ने कहा कि राजा दशरथ एक बहुत बड़े राजा थे, उनके महल में 10 हजार कमरे थे, लेकिन भगवान राम किस कमरे में पैदा हुए ये बताना बड़ा ही मुश्किल है। इसलिए ये दावा करना कि राम वहीं पैदा हुए थे, यह ठीक नहीं है।


Embedded video

Mani Shankar Aiyar, Congress, speaks on at 'Ek Shaam Babri Masjid Ke Naam' programme organised by Social Democratic Party of India in Delhi
शरिया अदालत लागू करने का राहुल ने किया वादा
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मांगें भी मान ली। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी ने ये वादा किया कि अगर वे 2019 में देश के प्रधानमंत्री बने तो देश के हर जिले में शरिया अदालत बनाने की मांग पूरी कर देंगे।

इन्दिरा गाँधी ने भी किया था बुखारी से 20-सूत्रीय अनुबन्ध 
ज्ञात हो राहुल गाँधी की दादी इन्दिरा गाँधी ने भी प्रधानमंत्री रहते मुस्लिम समर्थन के लिए दिल्ली जामा मस्जिद के तत्कालीन शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी से भी 20-सूत्रीय अनुबन्ध किया था, जिसे पूरा न होने पर आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनावों में मस्जिद के बाहर "इन्दिरा गाँधी ने मुसलमानों से किया विश्वासघात" शीर्षक के अंतगर्त उन माँगों को एक बोर्ड पर लिखकर मुसलमानों से कांग्रेस विरोध करने को कहा था।  
गुजरात में मंदिर दर्शन के लिए राहुल ने मांगी माफी
12 तुगलक लेन स्थित अपने निवास पर राहुल गांधी ने लगभग 2 घंटे तक मुस्लिमों से बातचीत की। इस दौरान मुस्लिम नेताओं ने राहुल से आपत्त्ति दर्ज कराई और कहा कि आप तो सिर्फ मंदिर जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने तो मुसलमानों को भुला ही दिया है। मुस्लिम नेताओं की बात सुनकर राहुल गांधी ने कहा कि मैं कर्नाटक में कई मस्जिदों में भी गया हूं। अब मस्जिदों में लगातार जा रहा हूं। खबर ये भी है कि उन्होंने कहा कि  गुजरात में मंदिरों में गया था उसके लिए माफी मांगता हूं।

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आर.बी.एल.निगम श्री श्री रविशंकर ने अयोध्‍या विवाद के समाधान की पेशकश के साथ नवम्बर 16 को अयोध्‍या में सभी पक्षकारों से मुलाकात की. श्र..

आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर द्वारा मन्दिर मसला सुलझाने के लिए दर-दर जाना, शायद बाबरी समर्थकों को राहत दे रहा है, क्योकि उन्हें मालूम...
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आखिर हिंदुओं से इतनी नफरत क्यों करती है कांग्रेस? इस सच्चाई को जानने के लिए निम्न लेखों का अवलोकन करें :--
SOMETIME back I used to receive a pamphlet titled “ SHAKTI SANDESH ” published from Calcutta and now another paper from Shri R.V.Bhasin , Ad...
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत के अधिकतर लोगों का सुप्रीम कोर्ट पर से भरोसा ख़त्म होता जा रहा है, सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार के हर फै...
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार औरंगजेब, अन्य मुगलों तथा मुस्लिम हमलावरों ने भारत में हिन्दुओं का नरसंहार किया, हिन्दू महिलाओं के साथ बल...
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अक्टूबर 13 को प्रणब मुखर्जी की किताब का विमोचन हुआ। उस किताब में प्रणब मुखर्जी ने यूपीए सरकार और उसकी कई नीतियों और फैसलों के बारे में जिक...
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अब तक राहुल गांधी के खानदान का इतिहास हिन्दुओं के खिलाफ ही रहा है। चलिए गिनते हैं राहुल गांधी के खानदान की ‘हिन्दू विरोधी’ साजिशों के सबूत।
गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- नंबर 1
आज़ादी के बाद से ही नेहरू गांधी ख़ानदान ने हिंदुओं को नीचा दिखाने और उनका मनोबल तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसकी शुरुआत आज़ादी के बाद से ही हो गई थी। लेकिन जब नेहरू के हिंदू विरोधी काम पर अंकुश लगाने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल नहीं रहे तो नेहरू पूरी बेशर्मी से इस काम में जुट गए।
इंग्लिश अखबार ‘द हिंदू’ के मौजूदा संपादक एन. राम के पिता कस्तूरी ने तब ‘द हिंदू’ का संपादक रहते हुए लेख छापा था। मौजूदा तेलंगाना के सिकंदराबाद के के. सुब्रह्मण्यम के इस लेख में आजाद भारत में हिंदू और उनकी आस्था से हो रहे खिलवाड़ और सरकार की अल्पसंख्यकपरस्त नीतियों का खुलासा किया गया था।
के. सुब्रह्मण्यम हिंदू आस्थाओं का मजाक उड़ते देखकर ही परेशान नहीं हुए। उन्होंने ये भी देखा की नेहरू सरकार बेशर्मी से दूसरे धर्मों को हिंदू धर्म से श्रेष्ठ बताने की कोशिश कर रही है।  के. सुब्रह्मण्यम ने अंबेडकर की तुलना में अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर, बीएन राव जैसे दूसरे हिंदू संविधान निर्माताओं को कम महत्व देने के लिए नेहरू को जिम्मेदार माना था। के. सुब्रह्मण्यम इस बात से भी दुखी थे कि वेद और हिंदू धर्मग्रन्थों का अनुवाद करने वाले अग्रेज़ मैक्सम्यूलर का भी सरकार गुणगान करती है। जबकि वो इनके ज़रिए हिंदुओं को पिछड़ा और ईसाई धर्म की सर्वोच्चता स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सरकार हिंदुओं का अहित और अल्पसंख्यकों को बढ़ावा दे रही है। अग्रेज़ तो चले गए लेकिन हमारी सरकार अब भी उनकी नीतियों पर ही चल रही है। 
नंबर 2
7 फरवरी, 1916 को मोतीलाल नेहरू ने अपने बेटे जवाहर लाल नेहरू और कमला नेहरू की शादी के तीन कार्ड छपवाए गए थे। तीनों कार्ड अंग्रेजी के अलावा सिर्फ अरबी लिपि और फारसी भाषा में छपे थे। तीनों ही कार्ड में किसी भी हिन्दू देवी देवता का नाम नहीं लिखा गया था। न ही उन कार्ड पर हिन्दू धर्म से जुड़ा कोई श्लोक लिखा था। हिन्दू संस्कृति या फिर संस्कृत भाषा का कार्ड में कोई नामोनिशान तक नहीं था।

नंबर 3
आजादी के बाद जब बल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के दोबारा निर्माण की कोशिश शुरू की तो महात्मा गांधी ने इसका स्वागत किया, लेकिन जवाहर लाल नेहरू इसका लगातार विरोध करते रहे। जब तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद सोमनाथ मंदिर गए तो नेहरू ने न केवल उन्हें जाने से मना किया और विरोध भी दर्ज कराया।

नंबर 4
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दू शब्द रखने पर जवाहर लाल नेहरू को घोर आपत्ति थी, उन्होंने इस शब्द को हटाने के लिए कहा था। पंडित मदन मोहन मालवीय पर भी नेहरू ने यूनिवर्सिटी से हिंदू शब्द हटाने के लिये दबाव डाला था। हालांकि उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मुस्लिम शब्द रखने पर कभी आपत्ति नहीं जताई।

नंबर 5
वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाने पर जवाहर लाल नेहरू ने आपत्ति जताई थी। उन्हीं की आपत्ति के बाद मुस्लिमों का मनोबल बढ़ा, जिससे आज तक मुस्लिम वंदे मातरम गाने का विरोध करते हैं।

नंबर 6
7 नवंबर, 1966 को दिल्ली में हजारों नागा साधु इकट्ठा होकर ये मांग कर रहे थे कि – गाय की हत्या बंद होनी चाहिए, इंदिरा गांधी किसी भी कीमत पर गौ हत्या बंद करने के मूड में नहीं थी। फिर क्या था, दिल्ली में ही इंदिरा गांधी ने जालियावाला कांड दोहराया और जनरल डायर की तरह हजारों नागा साधुओं के ऊपर गोलियां चलवा दीं। इस गोलीबारी में 6 साधु की मौत हो गई, यही नहीं उस समय गौभक्त माने जाने वाले गुलजारी लाल नंदा को इंदिरा ने गृहमंत्री पद से हटा दिया। इस घटना के बाद इंदिरा गांधी कई राज्यों में चुनाव हार गई थीं।

नंबर 7
साधु- संतो पर गोली चलाने से चुनाव हार चुकी इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी की शादी में हिन्दी में कार्ड तो छपवाया… लेकिन कार्ड में कहीं भी हिन्दू देवी देवता के नाम से परहेज किया गया। इसमें भगवान गणेश का भी नाम नहीं था।

नंबर 8
नेहरू-गांधी परिवार ने कभी कोई हिन्दू त्योहार पारंपरिक रूप से नहीं मनाया। रमजान में गांधी परिवार हर साल इफ्तार पार्टी का आयोजन करता है, वैसा आयोजन आज तक कभी नवरात्रि में उनके घर पर नहीं हुआ। कभी कन्याओं को भोजन नहीं कराया गया। कभी किसी ने इनको दिपावली में दीये जलाते नहीं देखा।

नंबर 8
नेहरू-गांधी परिवार ने कभी कोई हिन्दू त्योहार पारंपरिक रूप से नहीं मनाया। रमजान में गांधी परिवार हर साल इफ्तार पार्टी का आयोजन करता है, वैसा आयोजन आज तक कभी नवरात्रि में उनके घर पर नहीं हुआ। कभी कन्याओं को भोजन नहीं कराया गया। कभी किसी ने इनको दिपावली में दीये जलाते नहीं देखा।

नंबर 10
राहुल गांधी सिर्फ मोदी को हराने के लिए हिन्दू बने हैं… वर्ना पूरे नेहरू परिवार का कभी भी हिन्दू धर्म से नाता नहीं रहा है। यहां तक कि हिन्दू पर्व- त्योहारों में बधाई देना भी अपमान माना जाता है। उदाहरण के लिए इस साल पहली बार कांग्रेस दफ्तर में होली मनाई गई, इससे पहले अघोषित बैन था। राहुल गांधी ने पहली बार लोगों को 2017 में दिवाली की शुभकामनाएं दी।

नंबर 11
नेहरू गांधी परिवार कभी भी राम मंदिर निर्माण का समर्थन नहीं करता। बल्कि राम मंदिर के निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में भी कांग्रेसियों ने रोड़े अटकाने का काम किया है। कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि राम मंदिर की सुनवाई जुलाई 2019 तक टाल दी जाए, ताकि लोकसभा चुनाव हो सके। कांग्रेस चाहती है कि 2019 तक वो हिन्दुओं को बरगला कर सत्ता में आ जाए और राम मंदिर का निर्माण हमेशा हमेशा के लिए बंद हो जाए। 

नंबर 12
2007 में कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि राम, सीता, हनुमान और वाल्मिकी काल्पनिक किरदार हैं, इसलिए रामसेतु का कोई धार्मिक महत्व नहीं माना जा सकता है।

नंबर 13
कांग्रेस ने ही पहली बार मुस्लिमों को हज में सब्सिडी देने और अमरनाथ यात्रा पर टैक्स लगाने का पाप किया। दुनिया के किसी भी देश में हज में सब्सिडी नहीं दी जाती है, सिर्फ कांग्रेस सरकारों ने भारत में मुसलमानों के वोट के लिए ये खैरात बांटना शुरू किया। लेकिन मोदी सरकार ने इसे खत्म कर दिया।

नंबर 14
कांग्रेस ने ही सबसे पहले दुनिया भर में हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए हिन्दू आतंकवाद नाम का शब्द गढ़ा। एक ऐसा शब्द ताकि मुस्लिम आतंकवाद की तरफ से दुनिया का ध्यान भटकाकर हिन्दुओं को आतंकवादी सिद्ध किया जा सके।

नंबर 15
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बयान के जरिए देश की बहुसंख्यक आबादी को चौंका दिया, जब उन्होंने कहा कि मंदिर जाने वाले लोग लड़कियों को छेड़ते हैं। हिन्दू धर्म में मंदिर जाने वाले लोग लफंगे होते हैं।

नंबर 16
तीन तलाक पर सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के करीबी कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने इस्लामी कुरीति की तुलना राम से कर दी। जाहिर ये कांग्रेस आलाकमान के इशारे के बिना कपिल सिब्बल ये जुर्रत नहीं कर सकते थे।

नंबर 17
राहुल गांधी ने विदेश जाकर ये फैलाने की कोशिश की कि लश्कर से भी ज्यादा कट्टर आतंकी हिन्दू होते हैं। जबकि आज तक कभी ये सामने नहीं आया कि कोई हिन्दू आतंकी बना हो।

नंबर 18
राहुल गांधी ने जर्मनी जाकर फिर से हिन्दू धर्म को बदनाम करने का प्रयास किया। राहुल ने जर्मनी में कहा कि भारत में महिलाओं के खिलाफ जो अत्याचार होते हैं, उसकी वजह भारतीय संस्कृति है।