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राहुल गाँधी नया लड़का : गुलाम नबी आज़ाद, कांग्रेस वरिष्ठ नेता

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कांग्रेस ने अपने पतन की पटकथा उसी दिन लिख दी थी जब 2004 में प्रधानमंत्री प्रणब मुख़र्जी की बजाए मनमोहन सिंह को बनाने का निर्णय लिया था। दूसरे, 2014 में मोदी लहर को रोकने के अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी का गठन करवाना। लेकिन मोदी लहर प्रभावहीन नहीं हुई, पहली बार भारतीय जनता पार्टी बहुमत में आयी और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए, और कांग्रेस का ग्राफ नीचे गिर गया। जो आज तक उठ नहीं पाया। 
कहते है, बुढ़ापे में ही सारी बीमारियां उभर कर आती हैं। ठीक वही स्थिति आज कांग्रेस की है। कल तक परिवार के इशारे पर नाचने वाले आज विरोधी स्वर बोल रहे हैं। कल राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा की वकालत करने वाले इन्ही के विरुद्ध आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। उसका कारण है, जो पार्टी में बैठकर कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी बताते हैं, लेकिन चुनावों में जनेऊ पहनते हैं, मंदिरों में माथा टेकते हैं, तो चुनावों उपरांत हिन्दुत्व विरोधी बयानबाज़ी करते हैं। मुसलमानों को "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से डराने के साथ-साथ हिन्दुत्व को बदनाम किया जा रहा था। इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने बेकसूर हिन्दू साधु,संत और साध्वियों को धमाकों के आरोप में जेलों में बंद कर यातनायें देना, लगता है कांग्रेस को उन बेकसूर साधु, संत और साध्वियों की हाय खा रही हैं। वही हिन्दू विरोध कांग्रेस को धरातल में धकेल रहा है। 
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी ने तो अपनी पुस्तक में स्पष्ट लिखा है कि 'सोनिया गाँधी हिन्दू विरोधी है...' उन्होंने इतनी बड़ी बात ऐसे ही नहीं लिख दी। उसका कारण भी दिया है।
दूसरे जब राहुल गाँधी को अध्यक्ष को बनाने की चर्चा चल रही थी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूँही नहीं कहा था, अपने अनुभव के आधार पर कहा था कि "बनाइए जितनी जल्दी हो राहुल बाबा को अध्यक्ष बनाई।" राहुल गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद से आज विरोधी स्वर बोलने वाले खुश जरूर हो रहे थे, परन्तु पार्टी उतनी ही नीचे जानी शुरू हो गयी थी। राहुल ने आलू से सोने बनाने की बात तो बोल दी, लेकिन उसे चरितार्थ नहीं किया। अपने निर्वाचन क्षेत्र अमेठी में आलू चिप्पस की अगर फैक्ट्री ही लगवा दी होती, बेरोजगारों को रोजगार मिलता और आलू से सोना भी बन रहा होता। उनकी आवाज़ में भारीपन आ गया होता, लेकिन जिसे अँधेरे में तीर छोड़, जनता का मनोरंजन करना ही उद्देश्य हो, पार्टी धरातल में ही जाएगी।      
सबसे बड़ी समस्या पार्टी में गुलामी मानसिकता की है। आज किस आधार पर विरोध किया जा रहा है? उस समय इनकी बुद्धि कहाँ चली गयी थी, जब सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बनाने के तत्कालीन अध्यक्ष सीताराम केसरी को पार्टी ऑफिस से बाहर फेंक दिया था, उस समय इनकी बुद्धि कहां गयी हुई थी जब अपने ही वरिष्ठ नेता एवं भूतपूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के शव को पार्टी ऑफिस के दरवाजे नहीं खोले गए थे। यदि समय रहते इन्हीं लोगों ने गुलामी मानसिकता को त्याग पार्टी और देशहित में काम किया होता, शायद कांग्रेस की इतनी दुर्गति नहीं होती। खैर, विधि के विधान को कौन बदल सकता है 

होइहि सोइ जो राम रचि राखा। 

को करि तर्क बढ़ावै साखा॥ 

अस कहि लगे जपन हरिनामा। 

गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥   

फिर कई राष्ट्रीय मुद्दे भी तुष्टिकरण के चलते नहीं सुलझाए, विपरीत इसके उन्हें विवादित बना दिया। जैसे : जीएसटी, अयोध्या, काशी, मथुरा, नागरिकता संशोधक कानून, अनुच्छेद 370, पाकिस्तान द्वारा आतंकी गतिविधियों को संरक्षण देना, चीन से गुप्त समझौता करना, वर्तमान मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तानी आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल एवं एयर स्ट्राइक करने पर सबूत मांगकर पाकिस्तान की बोली बोलना, पाकिस्तान जाकर मोदी के विरुद्ध माहौल बनवाना आदि अनेको ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें सुलझाने की बजाए विवादित करने में ही कांग्रेस ने अपना हित उचित समझा, जो आज पार्टी को खा रहे हैं।   
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पुत्रमोह और पार्टी में परिवारवाद के कारण कई वरिष्ठ नेता बगावती रुख अपना रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के बाद अब गुलाम नबी आजाद ने भी अपनी भड़ास निकाली है। उन्होंने सोनिया गांधी के बेटे और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को इशारों में ‘नया लड़का’ कहा है। एबीपी न्यूज के अनुसार आजाद ने कहा है कि कांग्रेस सबसे निचले स्तर पर खड़ी है। पार्टी के बड़े नेताओं का कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क टूट गया है। फाइव स्टार होटलों में बैठकर चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नेता को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का ज्ञान होना चाहिए। केवल दिल्ली से जाना और पांच सितारा होटलों में रहना और दो-तीन दिन बाद दिल्ली लौटना पैसे की बर्बादी के अलावा और कुछ नहीं है।

इससे पहले कांग्रेस के 23 नेताओं ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को लेकर सोनिया गांधी को चिट्‌ठी भी लिखी थी। इनमें गुलाम नबी आजाद के साथ कपिल सिब्बल भी शामिल थे। चिट्ठी में पार्टी में ऊपर से नीचे तक बदलाव करने की मांग की गई थी, जिससे काफी विवाद हो गया था। पिछले 72 साल में कांग्रेस सबसे निचले पायदान पर है। कांग्रेस के पास पिछले दो कार्यकाल के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद भी नहीं है। लेकिन ऐसी स्थिति में भी पार्टी नेतृत्व में सवाल उठाने वाले नेताओं को विरोध का सामना करना पड़ता है। गांधी परिवार के नेतृत्व के तौर-तरीकों पर सवाल करने वालों को पार्टी में किनारे कर दिया जाता है।

कांग्रेस में सच बोलने वालों को किया जाता है परेशान
कांग्रेस में आलाकमान के प्रति निष्ठा रखने वाले नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिलती हैं, जबकि युवा और जमीन से जुड़े नेताओं को दरकिनार किया जाता है। जो भी नेता पार्टी की नकारात्मक राजनीति के खिलाफ कुछ बोलने की हिम्मत करता है, उसकी आवाज दबा दी जाती है। कांग्रेस से एक के बाद एक कई युवा नेताओं के पार्टी छोड़ने या आलाकमान से नाराजगी से यह सवाल उठना जायज है कि क्या वाकई बिना जनाधार वाले नेता तानाशाही कर रहे हैं। आइए डालते हैं एक नजर-

खुशबू सुंदर
अभिनेत्री से राजनेता बनीं खुशबू सुंदर ने हाल ही में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में खुशबू ने आरोप लगाया कि पार्टी में ऊपर बैठे जिन लोगों का जमीनी स्तर पर कोई जुड़ाव नहीं है और वे तानाशाही कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेरी तरह जो लोग काम करना चाहते हैं उन्हें दबाया जा रहा है। अपने पत्र में खुशबू सुंदर ने लिखा कि कांग्रेस के 2014 लोकसभा चुनाव हार जाने के बावजूद उन्होंने पार्टी ज्वाइन की थी, लेकिन यहां काम करने वाले लोगों की अनदेखी की जाती है।

संजय झा
इसके पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय झा ने एक न्यूज वेबसाइट को दिए इंटरव्यू और लेख के जरिए कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया था। पार्टी की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से कांग्रेस प्रवक्ता पद से हटा दिया गया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अपने लेख और द प्रिंट को दिए इंटरव्यू में उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव है। संजय झा ने दावा किया कि पार्टी के पास एक आंतरिक मजबूत तंत्र नहीं है। उन्होंने लिखा है कि पार्टी के अंदर सदस्यों की बात नहीं सुनी जाती है। अपने लेख में झा ने यह भी कहा कि पार्टी सरकार के विफल होने पर लोगों को शासन का कोई वैकल्पिक विवरण प्रस्तुत नहीं कर सकती।

सचिन पायलट
राजस्थान के युवा नेता सचिन पायलट ने पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभाई, लेकिन जब सरकार बनाने की बात आई तो सीएम की कुर्सी अशोक गहलोत को दे दी गई। नाराज सचिन को मनाने के लिए डिप्टी सीएम बना दिया गया। इस बीच गहलोत ने सचिन पायलट को किनारे करना शुरू कर दिया। इससे नाराज होकर सचिन पायलट को बागी रुख अपनाना पड़ा।

ज्योतिरादित्य सिंधिया
मध्य प्रदेश में जनाधार वाले लोकप्रिय युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस की अनदेखी के कारण हाल ही में बीजेपी में शामिल हो गए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ राज्य के कई अन्य विधायक और युवा नेता भी बीजेपी का दामन थाम चुके हैं। इससे राज्य में कांग्रेस काफी कमजोर हो गई है।

हेमंत बिस्वा शर्मा
असम के लोकप्रिय नेता हेमंत बिस्वा शर्मा को भी मजबूर होकर पार्टी से निकलना पड़ा। यहां के बुजुर्ग कांग्रेसी नेता तरुण गोगोई के साथ मतभेदों के कारण उन्हों हाशिए पर डाल दिया गया था। 2001 से 2015 तक कांग्रेस के विधायक हेमंत बिस्वा शर्मा 2016 में बीजेपी में आ गए। राज्य में कांग्रेस को हराने में इनका अहम योगदान रहा है। हेमंत बिस्वा शर्मा अभी असम सरकार में मंत्री हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी
कांग्रेस की एक तेजतर्रार युवा प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी को भी पार्टी नेतृत्व की अनदेखी के कारण बाहर होना पड़ा। उन्हें पार्टी में दुर्व्यवहार का भी सामना करना पड़ा। आखिर में वे शिवसेना में शामिल हो गईं।

ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी एक समय पार्टी नेतृत्व की अनदेखी के कारण कांग्रेस छोड़ने के लिए विवश होना पड़ा था। पार्टी में किनारे किए जाने पर ममता बनर्जी ने 1997 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बना ली थी। ममता बनर्जी के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी का राज्य से एक तरह से सफाया हो गया है।

वाईएस जगन मोहन रेड्डी
वाईएस जगन मोहन रेड्डी वर्तमान में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। इनके पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी दो बार राज्य के सीएम रह चुके हैं। 2009 में वाईएस राजशेखर रेड्डी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु के बाद लोगों ने जगन मोहन रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की लेकिन पार्टी आलाकमान ने इसे ठुकरा दिया। आखिर में पार्टी से नाराज होकर इन्होंने 2010 में अलग पार्टी बना ली और आज राज्य में इनकी सरकार है।

मिलिंद देवड़ा
महाराष्ट्र के युवा नेता मिलिंद देवड़ा ने हाल में ही मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है, लेकिन पार्टी आलाकमान के रवैये से नाराज चल रहे हैं।

‘हिंदू आतंकी’ कसाब की कहानी : 1.25 लाख रुपए और बहन की शादी… 26/11 हमले के पीछे

कसाबलश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों द्वारा 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर किए गए आतंकी हमले में मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश मारिया ने खुलासा किया है कि जीवित पकड़ा गया आतंकी अजमल आमिर कसाब ऐसी योजना बनाकर आया था कि यह हमला एक हिंदू आतंकी साजिश लगे। कलाई पर लाल कलावा बाँधे और फर्जी पहचान पत्रों के जरिए वह मरने के बाद खुद की पहचान बंगलुरू के समीर चौधरी के रूप में करवाने की तैयारी में था। इससे मीडिया में यह प्रचारित किया जाता कि मुंबई पर हिंदू आतंकियों ने हमला किया है। लेकिन वह जीवित पकड़ा गया और उसके आकाओं की यह चाल विफल हो गई।
मुंबई आतंकी हमले को ‘हिंदू आतंकवाद’ के रूप में पेश करने की लश्कर की योजना का ब्यौरा देते हुए मारिया ने लिखा, “यदि सब कुछ योजना के अनुसार होता, तो कसाब चौधरी के रूप में मर जाता और मीडिया हमले के लिए ‘हिंदू आतंकवादियों’ को दोषी ठहराती।” हालाँकि उसकी यह योजना धरी की धरी रह गई।
इसके साथ ही मारिया ने अपनी किताब में खुलासा किया कि मुंबई पर हमला करने के लिए कसाब को मिशन पर भेजे जाने से पहले एक हफ्ते की छुट्टी और 1.25 लाख रुपए (पाकिस्तानी रुपए) दिए गए थे। कसाब ने वह पैसे अपनी बहन की शादी के लिए अपने परिवार को दे दिया था। इतना ही नहीं कसाब को पाकिस्तान में बैठे उसके आकाओं ने इस तरह ब्रेन वॉश किया था उसे भारत मे हर कोई दुश्मन लगे और जिहाद कर मरने के बाद जन्नत नसीब हो।
इसके बाद उसका मानना था कि हिंदुस्तान में मुसलमान बुरे हालात में हैं। उन्हें नमाज नहीं पढ़ने दी जाती, मस्जिदों में ताले लगे होते हैं। लेकिन, जब उसने लॉकअप में पाँचों वक्त की नमाज सुनी, तो हैरान रह गया। ये उसकी कल्पना के बाहर की चीज थी। एक दिन जाँच अधिकारी कसाब को लेकर मेट्रो जंक्शन के नजदीक वाले मस्जिद में गए, जहाँ सैकड़ों की संख्या में लोग सड़क पर नमाज पढ़ रहे थे। यह देखकर कसाब को विश्वास ही नहीं हुआ।

वहीं इस किताब पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “पहली बात तो ये कि मारिया ने ये सब बात अभी क्यों बोला। जब वो पुलिस कमिश्नर थे, तब उन्हें ये सब बातें बोलनी चाहिए। वास्तव में सर्विस रूल्स के अनुसार, अगर कोई जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के पास है तो उन्हें उसके ऊपर एक्शन लेना चाहिए था। मेरे ख्याल से बहुत गहरी साजिश रची गई थी कॉन्ग्रेस द्वारा, UPA द्वारा। झूठ और फरेब का एक और नमूना उस समय हमने देखा था, जब उन्होंने पूरी तरीके से झूठा हिंदू टेरर… चिदंबरम साहब के कहने पर खड़ा करने की कोशिश की थी।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं निंदा करता हूँ कॉन्ग्रेस का और सभी उन लोगों का, जिन्होंने हिंदू टेरर के झूठे आरोपों से उस समय देश को गुमराह करने की कोशिश की थी। उसका खामियाजा उन्हें 2014 में और 2019 में… देश की जनता ने उन्हें पूरी तरह से हराया। मैं समझता हूँ टेरर का कोई धर्म नहीं होता। टेररिस्ट, टेररिस्ट होता है और झूठे आरोपों पर कुछ लोगों को जो फँसाने की कोशिश कॉन्ग्रेस ने की थी, उसकी हमारी सरकार घोर निंदा करती है।”
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आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार राकेश मारिया ने अपनी किताब में दावा किया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने 26/11...
भाजपा नेता राम माधव ने कहा, “पुस्तक के माध्यम से एक बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें बताया गया है पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा की गई साजिश सफल नहीं हो सकी, लेकिन कुछ कॉन्ग्रेस नेताओं और अन्य लोगों द्वारा इसे सफल बनाने की कोशिश उस समय किए गए थे। कुछ बुद्धिजीवियों ने मुंबई आतंकवादी हमले को आरएसएस से जोड़ने का प्रयास किया था, उन्हें कॉन्ग्रेस नेताओं का समर्थन प्राप्त था।”

कांग्रेस के डीएनए में ही है हिन्दू विरोध


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
हिन्दू विरोध की भावना कांग्रेस के डीएनए में है। और इस डीएनए के सूत्रधार हैं महात्मा गाँधी, जो मन्दिर में बैठकर 'ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सम्मति दे भगवान...' कहने की हिम्मत तो कर सकते थे, लेकिन किसी मस्जिद में बैठकर 'ईश्वर अल्लाह तेरो नाम...' कहने का साहस नहीं कर पाए। यदि नाथूराम गोडसे द्वारा कोर्ट में दर्ज 150 बयानों का गंभीरता से अध्ययन किया जाए, तो यह बात प्रमाणित हो जाएगी कि भारत में पाकिस्तान-प्रेम और तुष्टिकरण के जन्मदाता महात्मा गाँधी ही हैं, और यही उनकी मौत का कारण बना। और अब वर्तमान में इसी तुष्टिकरण और पाकिस्तान-प्रेम ने कांग्रेस और समस्त छद्दम धर्म-निर्पेक्षों की दुकानों यानि पार्टियों को पाताललोक की ओर अग्रसर कर दिया है।
पिताश्री एम.बी.एल.निगम 
ज्ञात हो, स्वतन्त्रता पूर्व प्रतिदिन शाम के समय महात्मा गाँधी के प्रवचन का बाल्मीकि मन्दिर, मन्दिर मार्ग के मोड़ पर, से सीधा प्रसारण होता था। उस कालखंड में हर साल बकरा ईद पर सदर बाजार में गऊ हत्या करने पर दंगा होता था। बात 1945 में बकरा ईद के दिन की है। उस दिन सदर बाजार में चर्चित लोटन पहलवान ने गऊ हत्यारों से गाय को बचाने कई हत्यारों की बकरा ईद मनवा दी थी। पुलिस ने लहू-लुहान लोटन को गिरफ्तार कर लिया। बरहाल, शाम को अपने प्रवचन में महात्मा गाँधी ने कहा: "आज दिल्ली में सबकुछ ठीकठाक रहा। बस पुलिस ने सदर बाजार से एक दंगाई को गिरफ्तार किया है....." उस दिन मेरे पिताश्री एम.बी.एल. निगम ने झंडेवालान मन्दिर के बाहर लहू-लुहान लोटन को पुलिस ट्रक पर देखा था। वैसे उस वर्ष के बाद कभी बकरा ईद पर न कोई दंगा हुआ और न ही कोई गाय कटी।  
17 दिसंबर, 2010… विकीलीक्स ने राहुल गांधी की अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर से 20 जुलाई, 2009 को हुई बातचीत का एक ब्योरा दिया। राहुल ने अमेरिकी राजदूत से कहा था, ‘भारत विरोधी मुस्लिम आतंकवादियों और वामपंथी आतंकवादियों से बड़ा खतरा देश के हिन्दू हैं।’ अमेरिकी राजदूत के सामने दिया गया उनका ये बयान कांग्रेस की बुनियादी सोच को ही दर्शाता है। ये कहा जा सकता है कि कांग्रेस हमेशा ही देश की 20 करोड़ की आबादी को खुश करने के लिए 100 करोड़ हिन्दुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करती रही है।
पीछे राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी जनेऊधारी हिन्दू बन मन्दिरों में माथा टेकते नज़र आए थे, वही काम वर्तमान में लोकसभा चुनाव 2019 में कर, हिन्दुओं को भ्रमित कर रहे हैं, वही राहुल मन्दिर जाने वालों पर कितनी आपत्तिजनक बात कहते थे। राहुल अथवा प्रियंका गाँधी जो शायद ही कभी अपने दादा फिरोज गाँधी की कब्र पर माथा टेकने नहीं गए, फिर किस आधार पर मन्दिरों में जाकर माथा टेक पूजा कर रहे हैं? 
राहुल के आदेश से हिन्दुओं को ‘गाली’ दे रहे कांग्रेसी!
पिछले साल 11 जुलाई को कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हिन्दुओं को कट्टरपंथी बताते हुए ‘हिन्दू पाकिस्तान’ की बात कही। इसके बाद 13 जुलाई को दिग्विजय सिंह ने हिन्दुओं को कट्टरपंथी कहा और भारत के पाकिस्तान बन जाने की बात कही। खबर है कि यह सब राहुल गाधी के आदेश से किया जा रहा है। गौरतलब है कि 11 जुलाई को ही राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात की थी और मुलाकात से पहले और बाद वह यही संदेश देना चाहते हैं कि मुस्लिमों की असल हितैषी कांग्रेस है।  

मणिशंकर अय्यर ने भगवान राम के अस्तित्व पर उठाए सवाल
कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की हिन्दू धर्म, हिन्दू देवी-देवताओं में कोई आस्था नहीं है। हिन्दू धर्म में आस्था और जनेऊधारी हिन्दू बनने का ढोंग करने वाले राहुल गांधी के खासमखास वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने हाल ही में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया था। दिल्ली में राष्ट्र विरोधी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित ‘एक शाम बाबरी मस्जिद के नाम’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने भगवान राम, अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि स्थल सभी को कठघरे में खड़ा कर दिया। मस्जिद और मुसलमानों के प्रेम में डूबे अय्यर ने कहा कि राजा दशरथ एक बहुत बड़े राजा थे, उनके महल में 10 हजार कमरे थे, लेकिन भगवान राम किस कमरे में पैदा हुए ये बताना बड़ा ही मुश्किल है। इसलिए ये दावा करना कि राम वहीं पैदा हुए थे, यह ठीक नहीं है।


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Mani Shankar Aiyar, Congress, speaks on at 'Ek Shaam Babri Masjid Ke Naam' programme organised by Social Democratic Party of India in Delhi
शरिया अदालत लागू करने का राहुल ने किया वादा
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मांगें भी मान ली। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी ने ये वादा किया कि अगर वे 2019 में देश के प्रधानमंत्री बने तो देश के हर जिले में शरिया अदालत बनाने की मांग पूरी कर देंगे।

इन्दिरा गाँधी ने भी किया था बुखारी से 20-सूत्रीय अनुबन्ध 
ज्ञात हो राहुल गाँधी की दादी इन्दिरा गाँधी ने भी प्रधानमंत्री रहते मुस्लिम समर्थन के लिए दिल्ली जामा मस्जिद के तत्कालीन शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी से भी 20-सूत्रीय अनुबन्ध किया था, जिसे पूरा न होने पर आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनावों में मस्जिद के बाहर "इन्दिरा गाँधी ने मुसलमानों से किया विश्वासघात" शीर्षक के अंतगर्त उन माँगों को एक बोर्ड पर लिखकर मुसलमानों से कांग्रेस विरोध करने को कहा था।  
गुजरात में मंदिर दर्शन के लिए राहुल ने मांगी माफी
12 तुगलक लेन स्थित अपने निवास पर राहुल गांधी ने लगभग 2 घंटे तक मुस्लिमों से बातचीत की। इस दौरान मुस्लिम नेताओं ने राहुल से आपत्त्ति दर्ज कराई और कहा कि आप तो सिर्फ मंदिर जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने तो मुसलमानों को भुला ही दिया है। मुस्लिम नेताओं की बात सुनकर राहुल गांधी ने कहा कि मैं कर्नाटक में कई मस्जिदों में भी गया हूं। अब मस्जिदों में लगातार जा रहा हूं। खबर ये भी है कि उन्होंने कहा कि  गुजरात में मंदिरों में गया था उसके लिए माफी मांगता हूं।

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आर.बी.एल.निगम श्री श्री रविशंकर ने अयोध्‍या विवाद के समाधान की पेशकश के साथ नवम्बर 16 को अयोध्‍या में सभी पक्षकारों से मुलाकात की. श्र..

आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर द्वारा मन्दिर मसला सुलझाने के लिए दर-दर जाना, शायद बाबरी समर्थकों को राहत दे रहा है, क्योकि उन्हें मालूम...
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आखिर हिंदुओं से इतनी नफरत क्यों करती है कांग्रेस? इस सच्चाई को जानने के लिए निम्न लेखों का अवलोकन करें :--
SOMETIME back I used to receive a pamphlet titled “ SHAKTI SANDESH ” published from Calcutta and now another paper from Shri R.V.Bhasin , Ad...
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत के अधिकतर लोगों का सुप्रीम कोर्ट पर से भरोसा ख़त्म होता जा रहा है, सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार के हर फै...
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार औरंगजेब, अन्य मुगलों तथा मुस्लिम हमलावरों ने भारत में हिन्दुओं का नरसंहार किया, हिन्दू महिलाओं के साथ बल...
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अक्टूबर 13 को प्रणब मुखर्जी की किताब का विमोचन हुआ। उस किताब में प्रणब मुखर्जी ने यूपीए सरकार और उसकी कई नीतियों और फैसलों के बारे में जिक...
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अब तक राहुल गांधी के खानदान का इतिहास हिन्दुओं के खिलाफ ही रहा है। चलिए गिनते हैं राहुल गांधी के खानदान की ‘हिन्दू विरोधी’ साजिशों के सबूत।
गांधी परिवार की हिंदू विरोधी साजिश- नंबर 1
आज़ादी के बाद से ही नेहरू गांधी ख़ानदान ने हिंदुओं को नीचा दिखाने और उनका मनोबल तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसकी शुरुआत आज़ादी के बाद से ही हो गई थी। लेकिन जब नेहरू के हिंदू विरोधी काम पर अंकुश लगाने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल नहीं रहे तो नेहरू पूरी बेशर्मी से इस काम में जुट गए।
इंग्लिश अखबार ‘द हिंदू’ के मौजूदा संपादक एन. राम के पिता कस्तूरी ने तब ‘द हिंदू’ का संपादक रहते हुए लेख छापा था। मौजूदा तेलंगाना के सिकंदराबाद के के. सुब्रह्मण्यम के इस लेख में आजाद भारत में हिंदू और उनकी आस्था से हो रहे खिलवाड़ और सरकार की अल्पसंख्यकपरस्त नीतियों का खुलासा किया गया था।
के. सुब्रह्मण्यम हिंदू आस्थाओं का मजाक उड़ते देखकर ही परेशान नहीं हुए। उन्होंने ये भी देखा की नेहरू सरकार बेशर्मी से दूसरे धर्मों को हिंदू धर्म से श्रेष्ठ बताने की कोशिश कर रही है।  के. सुब्रह्मण्यम ने अंबेडकर की तुलना में अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर, बीएन राव जैसे दूसरे हिंदू संविधान निर्माताओं को कम महत्व देने के लिए नेहरू को जिम्मेदार माना था। के. सुब्रह्मण्यम इस बात से भी दुखी थे कि वेद और हिंदू धर्मग्रन्थों का अनुवाद करने वाले अग्रेज़ मैक्सम्यूलर का भी सरकार गुणगान करती है। जबकि वो इनके ज़रिए हिंदुओं को पिछड़ा और ईसाई धर्म की सर्वोच्चता स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सरकार हिंदुओं का अहित और अल्पसंख्यकों को बढ़ावा दे रही है। अग्रेज़ तो चले गए लेकिन हमारी सरकार अब भी उनकी नीतियों पर ही चल रही है। 
नंबर 2
7 फरवरी, 1916 को मोतीलाल नेहरू ने अपने बेटे जवाहर लाल नेहरू और कमला नेहरू की शादी के तीन कार्ड छपवाए गए थे। तीनों कार्ड अंग्रेजी के अलावा सिर्फ अरबी लिपि और फारसी भाषा में छपे थे। तीनों ही कार्ड में किसी भी हिन्दू देवी देवता का नाम नहीं लिखा गया था। न ही उन कार्ड पर हिन्दू धर्म से जुड़ा कोई श्लोक लिखा था। हिन्दू संस्कृति या फिर संस्कृत भाषा का कार्ड में कोई नामोनिशान तक नहीं था।

नंबर 3
आजादी के बाद जब बल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के दोबारा निर्माण की कोशिश शुरू की तो महात्मा गांधी ने इसका स्वागत किया, लेकिन जवाहर लाल नेहरू इसका लगातार विरोध करते रहे। जब तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद सोमनाथ मंदिर गए तो नेहरू ने न केवल उन्हें जाने से मना किया और विरोध भी दर्ज कराया।

नंबर 4
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में हिन्दू शब्द रखने पर जवाहर लाल नेहरू को घोर आपत्ति थी, उन्होंने इस शब्द को हटाने के लिए कहा था। पंडित मदन मोहन मालवीय पर भी नेहरू ने यूनिवर्सिटी से हिंदू शब्द हटाने के लिये दबाव डाला था। हालांकि उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मुस्लिम शब्द रखने पर कभी आपत्ति नहीं जताई।

नंबर 5
वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाने पर जवाहर लाल नेहरू ने आपत्ति जताई थी। उन्हीं की आपत्ति के बाद मुस्लिमों का मनोबल बढ़ा, जिससे आज तक मुस्लिम वंदे मातरम गाने का विरोध करते हैं।

नंबर 6
7 नवंबर, 1966 को दिल्ली में हजारों नागा साधु इकट्ठा होकर ये मांग कर रहे थे कि – गाय की हत्या बंद होनी चाहिए, इंदिरा गांधी किसी भी कीमत पर गौ हत्या बंद करने के मूड में नहीं थी। फिर क्या था, दिल्ली में ही इंदिरा गांधी ने जालियावाला कांड दोहराया और जनरल डायर की तरह हजारों नागा साधुओं के ऊपर गोलियां चलवा दीं। इस गोलीबारी में 6 साधु की मौत हो गई, यही नहीं उस समय गौभक्त माने जाने वाले गुलजारी लाल नंदा को इंदिरा ने गृहमंत्री पद से हटा दिया। इस घटना के बाद इंदिरा गांधी कई राज्यों में चुनाव हार गई थीं।

नंबर 7
साधु- संतो पर गोली चलाने से चुनाव हार चुकी इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी की शादी में हिन्दी में कार्ड तो छपवाया… लेकिन कार्ड में कहीं भी हिन्दू देवी देवता के नाम से परहेज किया गया। इसमें भगवान गणेश का भी नाम नहीं था।

नंबर 8
नेहरू-गांधी परिवार ने कभी कोई हिन्दू त्योहार पारंपरिक रूप से नहीं मनाया। रमजान में गांधी परिवार हर साल इफ्तार पार्टी का आयोजन करता है, वैसा आयोजन आज तक कभी नवरात्रि में उनके घर पर नहीं हुआ। कभी कन्याओं को भोजन नहीं कराया गया। कभी किसी ने इनको दिपावली में दीये जलाते नहीं देखा।

नंबर 8
नेहरू-गांधी परिवार ने कभी कोई हिन्दू त्योहार पारंपरिक रूप से नहीं मनाया। रमजान में गांधी परिवार हर साल इफ्तार पार्टी का आयोजन करता है, वैसा आयोजन आज तक कभी नवरात्रि में उनके घर पर नहीं हुआ। कभी कन्याओं को भोजन नहीं कराया गया। कभी किसी ने इनको दिपावली में दीये जलाते नहीं देखा।

नंबर 10
राहुल गांधी सिर्फ मोदी को हराने के लिए हिन्दू बने हैं… वर्ना पूरे नेहरू परिवार का कभी भी हिन्दू धर्म से नाता नहीं रहा है। यहां तक कि हिन्दू पर्व- त्योहारों में बधाई देना भी अपमान माना जाता है। उदाहरण के लिए इस साल पहली बार कांग्रेस दफ्तर में होली मनाई गई, इससे पहले अघोषित बैन था। राहुल गांधी ने पहली बार लोगों को 2017 में दिवाली की शुभकामनाएं दी।

नंबर 11
नेहरू गांधी परिवार कभी भी राम मंदिर निर्माण का समर्थन नहीं करता। बल्कि राम मंदिर के निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में भी कांग्रेसियों ने रोड़े अटकाने का काम किया है। कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि राम मंदिर की सुनवाई जुलाई 2019 तक टाल दी जाए, ताकि लोकसभा चुनाव हो सके। कांग्रेस चाहती है कि 2019 तक वो हिन्दुओं को बरगला कर सत्ता में आ जाए और राम मंदिर का निर्माण हमेशा हमेशा के लिए बंद हो जाए। 

नंबर 12
2007 में कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि राम, सीता, हनुमान और वाल्मिकी काल्पनिक किरदार हैं, इसलिए रामसेतु का कोई धार्मिक महत्व नहीं माना जा सकता है।

नंबर 13
कांग्रेस ने ही पहली बार मुस्लिमों को हज में सब्सिडी देने और अमरनाथ यात्रा पर टैक्स लगाने का पाप किया। दुनिया के किसी भी देश में हज में सब्सिडी नहीं दी जाती है, सिर्फ कांग्रेस सरकारों ने भारत में मुसलमानों के वोट के लिए ये खैरात बांटना शुरू किया। लेकिन मोदी सरकार ने इसे खत्म कर दिया।

नंबर 14
कांग्रेस ने ही सबसे पहले दुनिया भर में हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए हिन्दू आतंकवाद नाम का शब्द गढ़ा। एक ऐसा शब्द ताकि मुस्लिम आतंकवाद की तरफ से दुनिया का ध्यान भटकाकर हिन्दुओं को आतंकवादी सिद्ध किया जा सके।

नंबर 15
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बयान के जरिए देश की बहुसंख्यक आबादी को चौंका दिया, जब उन्होंने कहा कि मंदिर जाने वाले लोग लड़कियों को छेड़ते हैं। हिन्दू धर्म में मंदिर जाने वाले लोग लफंगे होते हैं।

नंबर 16
तीन तलाक पर सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के करीबी कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने इस्लामी कुरीति की तुलना राम से कर दी। जाहिर ये कांग्रेस आलाकमान के इशारे के बिना कपिल सिब्बल ये जुर्रत नहीं कर सकते थे।

नंबर 17
राहुल गांधी ने विदेश जाकर ये फैलाने की कोशिश की कि लश्कर से भी ज्यादा कट्टर आतंकी हिन्दू होते हैं। जबकि आज तक कभी ये सामने नहीं आया कि कोई हिन्दू आतंकी बना हो।

नंबर 18
राहुल गांधी ने जर्मनी जाकर फिर से हिन्दू धर्म को बदनाम करने का प्रयास किया। राहुल ने जर्मनी में कहा कि भारत में महिलाओं के खिलाफ जो अत्याचार होते हैं, उसकी वजह भारतीय संस्कृति है।