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रहस्योघाटन : क्या UPA काल में पाकिस्तान के इशारों पर चलती थी भारत सरकार?

आज जिस तरह कांग्रेस के आतंकवाद, पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों का खुलासा हो रहा है, उसे देख हर देशप्रेमी कांग्रेसी को चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, मजहब अथवा समुदाय से हो, देशहित में कांग्रेस और यूपीए समर्थक हर पार्टी को त्याग देना चाहिए। विशेषकर हर हिन्दू को। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी ने भी अपनी पुस्तक तक में सोनिया के हिन्दू विरोधी होने का जिक्र किया है। 
स्मरण हो, 1962 भारत-चीन युद्ध के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ने जवानों के लिए खून देने से साफ इंकार कर दिया था। फिर किस आधार पर कम्युनिस्ट भारत की जनता से वोट मांगते हैं? और जनता भी इतनी मुर्ख है, चुनावों में इनको वोट दे आती है। 

लेकिन डाटा वैज्ञानिक डॉ गौरव प्रधान द्वारा सोनिया कांग्रेस का आतंकवाद के साथ चोली-दामन का साथ होने के कई प्रमाण दिए हैं। वैसे इन मुद्दों पर यदाकदा चर्चा होती रहती भी थी। लेकिन कांग्रेस को एक बेगुनाह दोषी के रूप में हमारा मीडिया प्रस्तुत करता रहा। हैरानी की बात यह है कि कुर्सी की खातिर यूपीए को समर्थन दे रही पार्टियां भी खामोश रही। चुनावों में ये ही सभी पार्टियां अपने-आपको बहुत बड़ा देश-हितैषी और जनहित की बात करते नज़र आते हैं, जबकि हकीकत में कर इसके विपरीत हैं। 

मेरी अपनी व्यक्तिगत राय यह है कि इन देश विरोधी पार्टियों को बेनकाब करने के लिए व्यापक स्तर पर अजित डोवाल, कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा और स्वामी असीमानंद आदि के कटु अनुभवों को उजागर करना चाहिए। 2019 चुनाव में साध्वी प्रज्ञा द्वारा अपने दर्द भरे अनुभव सार्वजनिक करने पर विपक्ष चुनाव आयोग तक पहुँच जाता है, लेकिन चुनाव आयोग भी सच्चाई को छिपाने के लिए प्रज्ञा पर ही अंकुश लगा देती है। 

जिस कश्मीरी कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद के राज्य सभा से विदाई समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी प्रशंसा में कसीदे तो खूब पढ़े, लेकिन आज़ाद की देश विरोधी हरकतों को क्यों भूल गए? क्या मोदी को आज़ाद की वास्तविकता नहीं मालूम थी?      
कर्नल पुरोहित का पाक में जासूसी नेटवर्क इतना मजबूत था कि आतंकी हाफिज सईद और लख्वी तक उनसे डरते थे। 

कर्नल पुरोहित 9 साल बाद नवी मुंबई की तालोजा जेल से रिहा हो गए है। उनकी रिहाई के बाद कई खुलासे सामने आ रहे है। एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा डाटा वैज्ञानिक गौरव प्रधान ने किया है। 

डॉक्टर गौरव प्रधान ने कई बड़े नेताओं पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं, जिनकी सत्यता की जांच की जानी बेहद जरूरी हो गयी है। 

2010 में होनी थी सोनिया गाँधी और हाफिज सईद की मुलाकात ?

डॉक्टर प्रधान ने खुलासा किया है कि 2010 में सोनिया गाँधी और हाफिज सईद की मुलाकात होनी थी। पाकिस्तानी आतंकी हाफिज सईद इटालियन माता से 2010 में मिलना चाहता था, मगर इटालियन माता ने इंकार कर दिया क्योंकि इसमें काफी रिस्क था। 

वैसे सोनिया गांधी की आतंकियों से हमदर्दी कोई नयी बात नहीं है, इससे पहले पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद भी आजमगढ़ की चुनावी रैली में कबूल कर चुके हैं कि बाटला हाउस एनकाउंटर में आतंकियों के मारे जाने की तस्वीरें देखकर सोनिया गांधी रो पड़ी थी। 

वैसे चर्चा भी है कि डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कई बार सोनिया गाँधी और आतंकवादियों के बीच कुछ साठगाँठ होने की बात करते रहते हैं। 

दाऊद को बचाने के लिए अजित डोवाल को करवाया गिरफ्तार?

डॉक्टर प्रधान ने ये भी खुलासा किया कि 2005 में सोनिया-मनमोहन की सरकार के दौरान आज के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल को मुंबई में गिरफ्तार कर लिया गया था, क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान मे बैठे दाऊद को मारने की पूरी योजना बना ली थी। 

पाकिस्तान के कहने पर कर्नल पुरोहित को किया गिरफ्तार!

डॉक्टर गौरव प्रधान ने ये भी खुलासा किया कि 26/11 के मुंबई आतंकी हमले से ठीक पहले ही कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार किया गया, क्योंकि कर्नल पुरोहित सेना के जासूस थे और 26/11 आतंकी हमले के प्लान के बारे में जानते थे। 

डॉ गौरव ने ये भी बताया कि कर्नल पुरोहित की पत्नी अपर्णा पुरोहित ने कहा था कि पाकिस्तान चाहता था कि कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार कर लिया जाए और सोनिया-मनमोहन सरकार भी इसके बारे में विचार भी कर रही थी।

अपने खुफिया मिशन के दौरान  कर्नल पुरोहित पाकिस्तान के कई संवेदनशील और नापाक राज जान गए थे, कर्नल पुरोहित का बड़ा जासूसी नेटवर्क भी पाकिस्तान में खुफिया जानकारियां जुटा रहा था। इसीलिए पाकिस्तान कर्नल पुरोहित की कस्टडी की मांग कर रहा था..

गौरव प्रधान ने आगे खुलासा किया कि पाकिस्तानी जनरल पाशा के कहने पर ही कर्नल पुरोहित को ठीक 26/11 आतंकी हमले से पहले गिरफ्तार कर लिया गया, क्योंकि पाकिस्तानियों को शक था कि कर्नल पुरोहित को इस आतंकी हमले की भनक लग चुकी थी और वो हमले को विफल कर सकते थे..

कश्मीरी और कोंग्रेसी नेता आतंकियों की मदद करते थे?

इसके बाद डॉक्टर प्रधान ने और भी ज्यादा सनसनीखेज खुलासे करते हुए बताया कि कर्नल पुरोहित को पता चल गया था कि एक कश्मीरी नेता जो जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री भी था, वो और कांग्रेसी नेता “मिया आज़ाद” (गुलाम नबी आज़ाद) एक ही गाड़ी में घुमते थे और उनके साथ उसी गाडी में आतंकी भी घूमते थे। गाड़ी पर लाल बत्ती लगी होने के चलते किसी को कानो-कान खबर तक नहीं होती थी। इसी नेता की गाड़ी का इस्तेमाल करके 2005 से लेकर 2010 तक कश्मीर में पैसों की फंडिंग में भी की गयी। 

हिन्दू आतंकवाद जुमले को साबित करने की साजिश?

डॉक्टर गौरव प्रधान ने खुलासा किया कि 26/11 मुंबई हमले का पूरा षड्यंत्र हिन्दुओ को आतंकी घोषित करने के लिए पाकिस्तान ने रचा था, ताकि इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकियों पर से ध्यान हटाया जा सके। प्लान था कि आतंकी हमला करने के बाद सभी आतंकियों को मार दिया जाएगा और इस हमले को भी हिन्दू आतंकवाद से जोड़ दिया जाएगा..

उन्होंने बताया कि “26/11 आरएसएस की साजिश” नाम की किताब तो पहले से छाप कर रख ली गयी थी, जिसका विमोचन कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने खुद किया था। गौरव प्रधान ने खुलासा किया कि जब आतंकी मुंबई में घुसे, उससे पहले ही देश के कई नेता इसके बारे में जानते थे और उन्होंने हेमंत करकरे को ख़ास निर्देश दिए थे कि एक भी आतंकी ज़िंदा ना बचने पाए..

मगर सिपाही तुकाराम ओम्बले ने कांग्रेस और पाकिस्तान की सारी योजना पर पानी फेर दिया और आतंकी कसाब को जिन्दा पकड़ लिए गया। आतंकियों ने हेमंत करकरे को पहचाना नहीं और धोखे से उन्हें गोली मार दी..

पी चिदंबरम, सुशील कुमार शिंदे, अहमद पटेल और सोनिया गांधी का साजिश में हाथ?

इस पूरी साजिश के पीछे डॉक्टर प्रधान ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और अहमद पटेल का नाम लिया। उन्होंने साजिश के पीछे इटालियन आंटी कहते हुए सोनिया गाँधी की और भी इशारा किया। 

लाल कृष्ण आडवाणी, नरेंद्र मोदी और बाल ठाकरे को मारने की साजिश?

डॉक्टर प्रधान ने खुलासा किया कि मुद्रिक में पाकिस्तानियों और भारत के गद्दारों की एक मीटिंग हुई थी, पाकिस्तान भारत की सैन्य ख़ुफ़िया एजेंसियों के बारे में जानना चाहता था। इसी मीटिंग में योजना रखी गयी कि बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को मार दिया जाये। मगर इटालियन माता ने इंकार कर दिया क्योंकि 2009 के चुनाव आने वाले थे और हिंदूवादी नेताओं के मारे जाने से कांग्रेस को चुनाव में नुक्सान होने का डर था। 

मोदी को फंसाने के लिए असीमानंद पर दबाव?

उन्होंने आगे खुलासा किया कि 26/11 हमले का पूरा का पूरा प्लान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) को आतंकी संगठन बताकर हिन्दू आतंकवाद को सिद्ध करने के मकसद से बनाया गया था। इसी तरह समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में ब्लास्ट के बाद गिरफ्तार किये गए पाकिस्तानी आतंकी को छोड़ दिया गया और स्वामी असीमानंद को इस केस में फंसा दिया गया। 

स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार करके थर्ड डिग्री की यातनाएं दी गयीं और उनसे कहा गया कि यदि इन यातनाओं से बचना है तो गुजरात के एक बड़े बीजेपी नेता (नरेंद्र मोदी) का नाम ले लो।  इंकार करने पर असीमानंद को और यातनाएं दी गयी, ऐसा ही साध्वी प्रज्ञा के साथ भी किया गया। 

योजना थी कि 26/11 के आतंकी हमले में सभी आतंकियों को मार कर सारा इल्जाम आरएसएस पर लगा कर संघ को आतंकी संगठन घोषित किया जायेगा। इसके बाद नरेंद्र मोदी और अमित शाह को भी इसी तरह के केस में फंसा दिया जाएगा क्योंकि इटालियन माता 2004 से ही जानती थी की ये दोनों उसके लिए बड़ा खतरा है। 

10 सालों तक जनरल पाशा का था भारत पर राज?

गौरव प्रधान ने दावा किया कि दरअसल 2004 से 2014 तक देश में मनमोहन-सोनिया नहीं बल्कि पाक आईएसआई का जनरल पाशा राज कर रहा था, जो वो चाहता था वही यहाँ होता था।  डॉक्टर गौरव प्रधान ने बताया कि कर्नल पुरोहित का पाकिस्तान में काफी अच्छा जासूसी नेटवर्क था, जिसके कायल खुद अजित डोभाल भी थे। अजित डोभाल भी ये देखकर हैरान थे कि कर्नल पुरोहित ने अपने इसी जासूसी नेटवर्क के दम पर सात बार पाकिस्तान की साजिशों और हमलों को विफल कर दिया था..

डॉक्टर प्रधान ने ये खुलासा भी किया कि कर्नल पुरोहित का पाकिस्तान में जासूसी नेटवर्क इतना मजबूत था कि आतंकी हाफिज सईद और लख्वी तक उनसे डरते थे। इसी डर से दोनों आतंकी आकाओं की सुरक्षा भी पाकिस्तान ने बढ़ा दी थी। 

कर्नल पुरोहित पाक खुफिया एजेंसी और पाक आतंकियों दोनों के निशाने पर थे। जनरल पाशा के इशारे पर कांग्रेस सरकार ने कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार कर जेल में डलवा दिया और बेपनाह यातनाएं दी। पूरी कोशिश की गयी कि इस देशभक्त सेना के अफसर को आतंकी घोषित कर दिया जाये! 

राहुल गाँधी नया लड़का : गुलाम नबी आज़ाद, कांग्रेस वरिष्ठ नेता

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कांग्रेस ने अपने पतन की पटकथा उसी दिन लिख दी थी जब 2004 में प्रधानमंत्री प्रणब मुख़र्जी की बजाए मनमोहन सिंह को बनाने का निर्णय लिया था। दूसरे, 2014 में मोदी लहर को रोकने के अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी का गठन करवाना। लेकिन मोदी लहर प्रभावहीन नहीं हुई, पहली बार भारतीय जनता पार्टी बहुमत में आयी और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए, और कांग्रेस का ग्राफ नीचे गिर गया। जो आज तक उठ नहीं पाया। 
कहते है, बुढ़ापे में ही सारी बीमारियां उभर कर आती हैं। ठीक वही स्थिति आज कांग्रेस की है। कल तक परिवार के इशारे पर नाचने वाले आज विरोधी स्वर बोल रहे हैं। कल राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा की वकालत करने वाले इन्ही के विरुद्ध आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। उसका कारण है, जो पार्टी में बैठकर कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी बताते हैं, लेकिन चुनावों में जनेऊ पहनते हैं, मंदिरों में माथा टेकते हैं, तो चुनावों उपरांत हिन्दुत्व विरोधी बयानबाज़ी करते हैं। मुसलमानों को "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम से डराने के साथ-साथ हिन्दुत्व को बदनाम किया जा रहा था। इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने बेकसूर हिन्दू साधु,संत और साध्वियों को धमाकों के आरोप में जेलों में बंद कर यातनायें देना, लगता है कांग्रेस को उन बेकसूर साधु, संत और साध्वियों की हाय खा रही हैं। वही हिन्दू विरोध कांग्रेस को धरातल में धकेल रहा है। 
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं भूतपूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी ने तो अपनी पुस्तक में स्पष्ट लिखा है कि 'सोनिया गाँधी हिन्दू विरोधी है...' उन्होंने इतनी बड़ी बात ऐसे ही नहीं लिख दी। उसका कारण भी दिया है।
दूसरे जब राहुल गाँधी को अध्यक्ष को बनाने की चर्चा चल रही थी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूँही नहीं कहा था, अपने अनुभव के आधार पर कहा था कि "बनाइए जितनी जल्दी हो राहुल बाबा को अध्यक्ष बनाई।" राहुल गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद से आज विरोधी स्वर बोलने वाले खुश जरूर हो रहे थे, परन्तु पार्टी उतनी ही नीचे जानी शुरू हो गयी थी। राहुल ने आलू से सोने बनाने की बात तो बोल दी, लेकिन उसे चरितार्थ नहीं किया। अपने निर्वाचन क्षेत्र अमेठी में आलू चिप्पस की अगर फैक्ट्री ही लगवा दी होती, बेरोजगारों को रोजगार मिलता और आलू से सोना भी बन रहा होता। उनकी आवाज़ में भारीपन आ गया होता, लेकिन जिसे अँधेरे में तीर छोड़, जनता का मनोरंजन करना ही उद्देश्य हो, पार्टी धरातल में ही जाएगी।      
सबसे बड़ी समस्या पार्टी में गुलामी मानसिकता की है। आज किस आधार पर विरोध किया जा रहा है? उस समय इनकी बुद्धि कहाँ चली गयी थी, जब सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बनाने के तत्कालीन अध्यक्ष सीताराम केसरी को पार्टी ऑफिस से बाहर फेंक दिया था, उस समय इनकी बुद्धि कहां गयी हुई थी जब अपने ही वरिष्ठ नेता एवं भूतपूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के शव को पार्टी ऑफिस के दरवाजे नहीं खोले गए थे। यदि समय रहते इन्हीं लोगों ने गुलामी मानसिकता को त्याग पार्टी और देशहित में काम किया होता, शायद कांग्रेस की इतनी दुर्गति नहीं होती। खैर, विधि के विधान को कौन बदल सकता है 

होइहि सोइ जो राम रचि राखा। 

को करि तर्क बढ़ावै साखा॥ 

अस कहि लगे जपन हरिनामा। 

गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥   

फिर कई राष्ट्रीय मुद्दे भी तुष्टिकरण के चलते नहीं सुलझाए, विपरीत इसके उन्हें विवादित बना दिया। जैसे : जीएसटी, अयोध्या, काशी, मथुरा, नागरिकता संशोधक कानून, अनुच्छेद 370, पाकिस्तान द्वारा आतंकी गतिविधियों को संरक्षण देना, चीन से गुप्त समझौता करना, वर्तमान मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तानी आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल एवं एयर स्ट्राइक करने पर सबूत मांगकर पाकिस्तान की बोली बोलना, पाकिस्तान जाकर मोदी के विरुद्ध माहौल बनवाना आदि अनेको ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें सुलझाने की बजाए विवादित करने में ही कांग्रेस ने अपना हित उचित समझा, जो आज पार्टी को खा रहे हैं।   
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पुत्रमोह और पार्टी में परिवारवाद के कारण कई वरिष्ठ नेता बगावती रुख अपना रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के बाद अब गुलाम नबी आजाद ने भी अपनी भड़ास निकाली है। उन्होंने सोनिया गांधी के बेटे और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को इशारों में ‘नया लड़का’ कहा है। एबीपी न्यूज के अनुसार आजाद ने कहा है कि कांग्रेस सबसे निचले स्तर पर खड़ी है। पार्टी के बड़े नेताओं का कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क टूट गया है। फाइव स्टार होटलों में बैठकर चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नेता को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का ज्ञान होना चाहिए। केवल दिल्ली से जाना और पांच सितारा होटलों में रहना और दो-तीन दिन बाद दिल्ली लौटना पैसे की बर्बादी के अलावा और कुछ नहीं है।

इससे पहले कांग्रेस के 23 नेताओं ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को लेकर सोनिया गांधी को चिट्‌ठी भी लिखी थी। इनमें गुलाम नबी आजाद के साथ कपिल सिब्बल भी शामिल थे। चिट्ठी में पार्टी में ऊपर से नीचे तक बदलाव करने की मांग की गई थी, जिससे काफी विवाद हो गया था। पिछले 72 साल में कांग्रेस सबसे निचले पायदान पर है। कांग्रेस के पास पिछले दो कार्यकाल के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद भी नहीं है। लेकिन ऐसी स्थिति में भी पार्टी नेतृत्व में सवाल उठाने वाले नेताओं को विरोध का सामना करना पड़ता है। गांधी परिवार के नेतृत्व के तौर-तरीकों पर सवाल करने वालों को पार्टी में किनारे कर दिया जाता है।

कांग्रेस में सच बोलने वालों को किया जाता है परेशान
कांग्रेस में आलाकमान के प्रति निष्ठा रखने वाले नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिलती हैं, जबकि युवा और जमीन से जुड़े नेताओं को दरकिनार किया जाता है। जो भी नेता पार्टी की नकारात्मक राजनीति के खिलाफ कुछ बोलने की हिम्मत करता है, उसकी आवाज दबा दी जाती है। कांग्रेस से एक के बाद एक कई युवा नेताओं के पार्टी छोड़ने या आलाकमान से नाराजगी से यह सवाल उठना जायज है कि क्या वाकई बिना जनाधार वाले नेता तानाशाही कर रहे हैं। आइए डालते हैं एक नजर-

खुशबू सुंदर
अभिनेत्री से राजनेता बनीं खुशबू सुंदर ने हाल ही में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में खुशबू ने आरोप लगाया कि पार्टी में ऊपर बैठे जिन लोगों का जमीनी स्तर पर कोई जुड़ाव नहीं है और वे तानाशाही कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेरी तरह जो लोग काम करना चाहते हैं उन्हें दबाया जा रहा है। अपने पत्र में खुशबू सुंदर ने लिखा कि कांग्रेस के 2014 लोकसभा चुनाव हार जाने के बावजूद उन्होंने पार्टी ज्वाइन की थी, लेकिन यहां काम करने वाले लोगों की अनदेखी की जाती है।

संजय झा
इसके पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय झा ने एक न्यूज वेबसाइट को दिए इंटरव्यू और लेख के जरिए कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया था। पार्टी की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से कांग्रेस प्रवक्ता पद से हटा दिया गया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अपने लेख और द प्रिंट को दिए इंटरव्यू में उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव है। संजय झा ने दावा किया कि पार्टी के पास एक आंतरिक मजबूत तंत्र नहीं है। उन्होंने लिखा है कि पार्टी के अंदर सदस्यों की बात नहीं सुनी जाती है। अपने लेख में झा ने यह भी कहा कि पार्टी सरकार के विफल होने पर लोगों को शासन का कोई वैकल्पिक विवरण प्रस्तुत नहीं कर सकती।

सचिन पायलट
राजस्थान के युवा नेता सचिन पायलट ने पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभाई, लेकिन जब सरकार बनाने की बात आई तो सीएम की कुर्सी अशोक गहलोत को दे दी गई। नाराज सचिन को मनाने के लिए डिप्टी सीएम बना दिया गया। इस बीच गहलोत ने सचिन पायलट को किनारे करना शुरू कर दिया। इससे नाराज होकर सचिन पायलट को बागी रुख अपनाना पड़ा।

ज्योतिरादित्य सिंधिया
मध्य प्रदेश में जनाधार वाले लोकप्रिय युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस की अनदेखी के कारण हाल ही में बीजेपी में शामिल हो गए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ राज्य के कई अन्य विधायक और युवा नेता भी बीजेपी का दामन थाम चुके हैं। इससे राज्य में कांग्रेस काफी कमजोर हो गई है।

हेमंत बिस्वा शर्मा
असम के लोकप्रिय नेता हेमंत बिस्वा शर्मा को भी मजबूर होकर पार्टी से निकलना पड़ा। यहां के बुजुर्ग कांग्रेसी नेता तरुण गोगोई के साथ मतभेदों के कारण उन्हों हाशिए पर डाल दिया गया था। 2001 से 2015 तक कांग्रेस के विधायक हेमंत बिस्वा शर्मा 2016 में बीजेपी में आ गए। राज्य में कांग्रेस को हराने में इनका अहम योगदान रहा है। हेमंत बिस्वा शर्मा अभी असम सरकार में मंत्री हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी
कांग्रेस की एक तेजतर्रार युवा प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी को भी पार्टी नेतृत्व की अनदेखी के कारण बाहर होना पड़ा। उन्हें पार्टी में दुर्व्यवहार का भी सामना करना पड़ा। आखिर में वे शिवसेना में शामिल हो गईं।

ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी एक समय पार्टी नेतृत्व की अनदेखी के कारण कांग्रेस छोड़ने के लिए विवश होना पड़ा था। पार्टी में किनारे किए जाने पर ममता बनर्जी ने 1997 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बना ली थी। ममता बनर्जी के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी का राज्य से एक तरह से सफाया हो गया है।

वाईएस जगन मोहन रेड्डी
वाईएस जगन मोहन रेड्डी वर्तमान में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। इनके पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी दो बार राज्य के सीएम रह चुके हैं। 2009 में वाईएस राजशेखर रेड्डी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु के बाद लोगों ने जगन मोहन रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की लेकिन पार्टी आलाकमान ने इसे ठुकरा दिया। आखिर में पार्टी से नाराज होकर इन्होंने 2010 में अलग पार्टी बना ली और आज राज्य में इनकी सरकार है।

मिलिंद देवड़ा
महाराष्ट्र के युवा नेता मिलिंद देवड़ा ने हाल में ही मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है, लेकिन पार्टी आलाकमान के रवैये से नाराज चल रहे हैं।

बीजेपी चाहे 200 साल राज कर ले, कश्मीर से नहीं हटा पाएंगे धारा 370: गुलाम नबी आजाद

बीजेपी चाहे 200 साल राज कर ले, कश्मीर से नहीं हटा पाएंगे धारा 370: गुलाम नबी आजाद
लोकसभा चुनाव 2019 के संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) में भारतीय जनता पार्टी ने कश्मीर में धारा 370 हटाने की बात कही है। इस पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने पार्टी का पक्ष रखा है धारा 370 के मुद्दे पर कांग्रेस खुलकर सामने आ गई है कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि कांग्रेस के रहते हुए कश्मीर में धारा 370 कोई नहीं हटा सकता आज़ाद ने कहा कि बीजेपी 200 साल भी सरकार में रह ले, तब भी धारा 370 को नहीं हटा पाएगी
370 पर कांग्रेस का हाथ, अलगाववादियों के साथ?
कश्मीर में धारा 370 के सवाल पर नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के पीछे रहकर बैटिंग कर रही कांग्रेस अब खुलकर सामने आ गई है
 कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने अनंतनाग में कहा कि जब तक कांग्रेस है धारा 370 नहीं हटने देगी चाहे बीजेपी 200 साल तक राज कर ले। जो शायद कांग्रेस, अब्दुल्ला परिवार और महबूबा मुफ़्ती के लिए मुंगेरी लाल के हसीन सपने ही रहने वाले हैं। 
मुद्दों को विवादित बनाना कांग्रेस के DNA में
आज़ाद के इस बयान के पीछे की सच्चाई यह है कि कांग्रेस जवाहर लाल नेहरू से लेकर सोनिया गाँधी तक कश्मीर को विवादित बनाए रख रोटियाँ नहीं, बल्कि 56 भोग खाती रही है। जो अखण्ड भारत की आड़ में भारत को खंडित करने की साज़िश करती रही है। कांग्रेस ने कभी पाकिस्तान द्वारा कब्जाए कश्मीर को वापस लेने का प्रयास नहीं किया। विपरीत इसके इस समस्या को UNO ले जाकर भयंकर भूल की थी, जिसे 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी ने शिमला समझौते के माध्यम से समाप्त किया। ऐसा आभास होता है, किसी भी मुद्दे को विवादित बनाना कांग्रेस के DNA में है। उदाहरण : कश्मीर ही नहीं, अयोध्या, काशी, मथुरा, आगरा(ताजमहल) या भारतीय इतिहास ही क्यों न हो।    

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BOARD OF DIRECTORS | EXECUTIVE COMMITTEE | NATIONAL CHAPTERS | SECRETARIAT




ORGANIZATIONAL STRUCTURE



HONORARY SENIOR ADVISORS


  • Aung San Suu Kyi Burmese Democratic Leader, National League for Democracy
  • Desmond Tutu Anglican Archbishop of South Africa
  • Mikhail Gorbachev Former President of the Soviet Union
  • Richard von Weizsaecker Former President of Germany


CO-PRESIDENTS



  • Corazon C. Aquino Former President of the Republic of the Philippines
  • Oscar Arias Sanchez Former President of Costa Rica and Nobel Peace Prize Laureate
  • Kim Dae-Jung Chairman for the KDJ Peace Foundation and President of the National Congress for New Politics
  • Sonia Gandhi Chairperson for the Rajiv Gandhi Foundation
कश्मीर में लोकसभा प्रचार में फ़ारुक़ अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती धारा 370 हटाने पर देश के टूटने तक की धमकी दे चुके हैं बीजेपी शुरू से कह रही है कि धारा 370 पर दोनों पार्टियां के पीछे असली संरक्षण कांग्रेस का है बीजेपी ने घोषणा पत्र में 370 और 35A हटाने की बात दोहराई है
गुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि जब तक कांग्रेस का अस्तित्व है तब तक 370 नहीं हट सकता है
आरएसएस नेता ने धारा 370 हटाने की बात दोहराई
इस बीच आरएसएस ने कश्मीर में धारा 370 और 35A हटाने की मांग दोहराई है
 संघ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा है कि जब तक कश्मीर में अलग झंडा और अलग संविधान है, तब तक कश्मीर जन्नत नहीं हो सकताइंद्रेश कुमार ने कहा कि जब कश्मीरियों के लिये पूरा हिन्दुस्तान खुला हुआ है तो कश्मीर के दरवाज़े भी देश के सभी लोगों के लिये खुले होने चाहिए
उन्होंने कहा कि कश्मीर में पहली जरूरत है आतंकवाद खत्म होना चाहिए कश्मीर, कश्मीरी और कश्मीरियत में केवल मुसलमान को माना जाता है, ये सही बात नहीं है बिना कश्मीरी पंडितों और डोंगरा सिखों के यह पूरा नहीं हो सकता है पाकिस्तान ये राग अलापना बंद करे पाकिस्तान कश्मीर मामले में न पार्टी थी, न है और न बनेगा अगर पाकिस्तान को लगता है की कश्मीर के बगैर वह अधूरा है तो ये भी मानना होगा की लाहौर के बिना पूरा पाकिस्तान अधूरा है 
अवलोकन करें:-
इस वेबसाइट का परिचय
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आज जिस तरह से जम्मू-कश्मीर की अब्दुल्ला और महबूबा की स्थानीय पार्टियाँ अनुच्छेद 370 और 3...

इनके मन में जब तक 370 और 35A है जब तक उनका अलग झंडा, अलग सविधान है तब तक कश्मीर में जन्नत नहीं होगी

'मुझे चुनाव प्रचार के लिए नहीं बुलाते हिन्दू'--गुलाब नबी आजाद

Ghulam Nabi Azad
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज बदलते परिवेश में देश कांग्रेस से पूछना चाहता है कि "हिन्दू मुसलमान की सियासत से कब बाहर आएगी?" कभी हिन्दू को "आतंकवादी", "साम्प्रदायिक"आदि आदि न जाने कितने उपनामो से कलंकित करने वाली पार्टी में हिन्दू किस लालच में बैठे हैं? कांग्रेसी हिन्दू जवाब दें "वो अच्छे हिन्दू हैं या बुरे हिन्दू?" अयोध्या में राममन्दिर का विरोध करने वाले वकील इन्ही की पार्टी से हैं। खुदाई में मिले मन्दिर के सबूतों को कोर्ट से छुपाने वाले ये ही कांग्रेसी और वामपंथी हैं। शाहबानो पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को संसद के माध्यम से बदल सकते हैं, लेकिन सती प्रथा की सच्चाई या यूँ कहे महत्व को समझे बिना प्रतिबन्धित कर दिया जाता है, क्यों? आखिर कब तक हिन्दुओं का अनादर किया जाता रहेगा? कब तक हिन्दुओं पर कुठाराघात होता रहेगा? आखिर कब हिन्दू जागेगा? आखिर कब तक हिन्दू इन छद्दम हिन्दू नेताओं के चुंगल से बाहर आएगा? कल तक मंदिर जाने वालों को "उपनामों" से पुकारा जाता था, आज मंदिर जाने का क्यों पाखंड किया जा रहा है? हिन्दुओं से किस आधार पर वोट माँगा जाता है? हिन्दुओं को आखिर कब तक पागल समझा जाएगा?
पाकिस्तान जाकर मणिशंकर अय्यर आदि दूसरे नेता मोदी के विरोध का समर्थन मांगते हैं। कोई इनसे पूछे भारत में होने वाले चुनावों में वोट देने कौन जाते हैं भारतीय या पाकिस्तानी? यह हाल सिर्फ कांग्रेस का ही नहीं, लगभग सभी पार्टियों का है। कानून का डंडा जब भी चलता है, सबसे पहले हिन्दुओं पर यानि हिन्दू क्षेत्रों पर, अन्य क्षेत्रों में नाममात्र के लिए, क्यों? हज़ारों उदाहरण दे सकता हूँ। जिन्हे अपने बाल्यकाल से लेकर वरिष्ठ होने तक देखता आ रहा हूँ। क्या किसी हिन्दू क्षेत्र में कूड़े के ढलाव की बगल में होटल खुल सकता है? सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण किया जा सकता है, क्या? 
अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के एक बयान पर विवाद हो गया है। आजाद ने अक्टूबर 17 को कहा कि कांग्रेस के 'हिन्दू' उम्मीदवार उन्हें चुनाव प्रचार के लिए नहीं बुलाते। कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव प्रचार के लिए बुलाने से लोग 'डरते' हैं। उन्होंने कहा कि पहले चुनाव प्रचार के लिए उनकी काफी मांग रहती थी लेकिन पिछले चार सालों में इस मांग में भारी कमी आई है। आजाद के इस बयान पर भाजपा ने आलोचना की है और कहा है कि आजाद का यह बयान हिन्दुओं का 'अपमान' करने का प्रयास है।
लखनऊ में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की 201वीं जयंती के मौके पर यहां के पूर्व छात्रों को संबोधित करते हुए आजाद ने कहा, 'युवा कांग्रेस के दिनों से ही मैं अंडमान से लेकर लक्षद्वीप तक चुनाव प्रचार करता आया हूं और चुनाव-प्रचार के लिए मुझे बुलाने वाले 95 प्रतिशत हिन्दू होते थे। मुझे चुनाव प्रचार के लिए बुलाने वाले मुस्लिम नेताओं एवं भाइयों की संख्या महज पांच प्रतिशत हुआ करती थी।'
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर विवाद पर सुनवाई शुरू होने से कुछ दिन पहले कांग्रेस नेता श....

कांग्रेस नेता ने कहा, 'लेकिन पिछले चार सालों में मैंने देखा है कि यह 95 प्रतिशत की संख्या कम होकर 50 प्रतिशत हो गई है। इसका मतलब है कि कहीं न कहीं कुछ गलत है। आज लोग मुझे बुलाने से डरते हैं। लोग सोचते हैं कि इसका वोटर पर क्या असर होगा।' उन्होंने कहा कि एक खास पार्टी के कुछ लोगों की तरफ से विश्वविद्यालय का नाम खराब करने की कोशिश की जा रही है।
आजाद के इस बयान की भाजपा ने आलोचना की है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, 'आजाद ने अपने बयानों से हिन्दुओं को नीचा दिखाने की कोशिश है।' पात्रा ने कहा कि आजाद के इस बयान से कांग्रेस के 'छद्म धर्मनिरपेक्षता' का चेहरा उजागर हुआ है। कांग्रेस पार्टी अपने बयानों से हिन्दुओं को कमजोर आंकने और उनका मनोबल तोड़ने का काम कर रही है। पात्रा ने कहा कि कांग्रेस नेता 'भगवा आतंकवाद, हिन्दू तालिबान औऱ अच्छा हिन्दू' जैसी भाषा बोलते आए हैं।